"मेरे गृह राज्य के लिए हमने एक सपना पिरोया था। 2018 में वहॉं सरकार बनी, लेकिन 18 महीनों में वे सपने बिखर गए। किसानों से 10 दिन में कर्ज माफी की बात कही गई थी। लेकिन 18 महीनों में नहीं हो पाया। रोजगार की जगह भ्रष्टाचार के अवसर पैदा हुए।"
"कॉन्ग्रेस और कमलनाथ की सरकार बनी रहेगी। 16 मार्च को पता चल जाएगा कि नंबर किसके साथ है। उनके (ज्योतिरादित्य सिंधिया) के जाने से कोई फर्क नहीं पड़ेगा। राजा-महाराजाओं के दिन लद चुके हैं।"
विधायकों ने पत्र में लिखा है कि बेंगलुरु और आस पास के इलाकों में सुरक्षा को बढ़ाया जाए। साथ ही नेताओं ने माँग की है कि स्थानीय पुलिस उन्हें सुरक्षा और एस्कॉर्ट उपलब्ध कराए।
सिंधिया के लिए 'भारतीय कॉमेडियन' और 'सत्ता का भूखा सिंधिया' जैसे शब्दों का भी इस्तेमाल किया गया। विकिपीडिया पेज पर ढूँढने पर पता चलता है कि कुछ और भी जानकारियों से छेड़छाड़ की गई है।
ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कॉन्ग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी को अपना इस्तीफ सौंपा है। उनका बीजेपी में जाने की बस औपचारिकता भर बाकी है। बहरहाल, जवाब में कॉन्ग्रेस ने भी ज्योतिरादित्य सिंधिया को पार्टी से बेदखल कर दिया है।
कॉन्ग्रेस पार्टी ने दावा किया था कि उसका व उसके सहयोगियों के कुल 9 विधायकों को भाजपा ने होटल में बंद कर के रखा हुआ है। वहीं भाजपा का दावा है कि दिग्विजय सिंह ये सब कमलनाथ पर दबाव बनाने के लिए कर रहे हैं। कुछ विधायक गुरुग्राम में हैं तो कुछ बेंगलुरु में।
उस पेंटिंग में ऐसा क्या था कि मिलिंद देवड़ा चाहते थे कि 'यस बैंक' के तत्कालीन सीईओ राणा कपूर उसे प्रियंका गाँधी से 2 करोड़ रुपए में ख़रीदें? उस दौरान मिलिंद, राणा और प्रियंका में क्या-क्या बातचीत हुई, उसकी पूरी डिटेल्स यहाँ देखें। बदले में राणा ने भी एक बड़ी माँग रखी थी।
अमित मालवीय ने भगोड़ा कारोबारी विजय माल्या के सोनिया गाँधी और राहुल गाँधी के संबधों का भी जिक्र किया। उन्होंने याद दिलाया कि एक अन्य भगोड़ा कारोबारी नीरव मोदी की ब्राइडल ज्वेलरी कलेक्शन का उद्घाटन राहुल गाँधी ने किया था और अब राणा कपूर से प्रियंका गाँधी के तार जुड़ते नज़र आ रहे हैं।
“जब जूनियर्स को मंत्री बनाया जाता है और कई बार विधायक होने के बावजूद आपको मंत्री नहीं बनाया जाता है, तो गुस्सा आना स्वाभाविक है। अगर आपके हितों की रक्षा नहीं की जाती है, तो इसमें गुस्सा होने में कुछ भी गलत नहीं है।”
"जम्मू कश्मीर की पिछली राज्य सरकारों ने जनगणना के तहत कश्मीर संभाग की आबादी और जमीन ज्यादा बताई। जबकि जम्मू की आबादी और जमीन कश्मीर से ज्यादा है। ऐसे में अगर 2011 की मतगणना के तहत ही परिसीमन आयोग का गठन किया गया तो फिर जम्मू संभाग को कोई फायदा नहीं होगा और जैसा चल रहा है, वैसा ही चलता रहेगा।"