ग्वालियर ज़ोन के IPS IG/ राजा बाबू सिंह ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में मीडिया को संबोधित करते हुए कहा कि पुलिस अधिकारियों के साथ किसी भी तरह का दुर्व्यवहार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने आश्वासन दिया कि अपराधियों को दंडित किया जाएगा।
पुलिस को शक है कि कहीं खुशबू ने ही तो अपने किसी परिचित को नहीं बुलाया था? पुलिस की थ्योरी के अनुसार, हो सकता है कि दोनों में विवाद हुआ हो और हत्यारे ने खुशबू की हत्या करने के बाद ख़ुद के बचने के लिए बुजुर्ग दम्पति की भी हत्या कर दी हो!
बलिराम की छोटी बेटी गीता (बदला हुआ नाम) का अपहरण होजई के जमुनामुख से जाबेद अहमद ने कर लिया था। काफ़ी खोजबीन के बाद असम पुलिस ने लड़की को नासिक के एक होटल से सुरक्षित बचा लिया।
...इसके बाद सईदुल ने अलग तरीका निकाला। उसके पास उसकी पत्नी के साथ कुछ अंतरंग तस्वीरें थीं, जिसे उसने वायरल करने की धमकी अपने ससुराल वालों को दी। उसने अपनी बीवी के मायके के तरफ़ के रिश्तेदारों को धमकी दी कि उसे दहेज़ में रुपए दिए जाएँ और केस वापस लिया जाए वरना...
गंगाराम ने पुलिस में शिकायत की थी कि दानिश, उनके पड़ोसी सफ़ायत हुसैन के बेटे ने उनकी बेटी का अपहरण कर लिया था। शिक़ायत के बारे में सुनकर दानिश के कई रिश्तेदार गंगाराम के घर गए। वहाँ कथित तौर पर गंगाराम और उसके परिवार पर उन्होंने लाठियाँ बरसाई।
"मैं हीरानंदानी में जॉगिंग कर रही थी। फिर पास के एक बैंक एटीएम की सीढ़ियों पर बैठ गई। अपना फोन देखने में बिजी हो गई। जैसे ही मेरी नजर फोन से हटकर ऊपर को हुई तो सामने एक ऑटो में एक आदमी बैठा मुझे घूर रहा था। फिर जल्द ही यह भी समझ आ गया कि वह सिर्फ मुझे घूर ही नहीं रहा था बल्कि वो हस्तमैथुन भी कर रहा था।"
उन्नाव एसपी एमपी वर्मा ने टीमें गठित कर मामले के जल्द खुलासे की बात कही है। वही आईजी जोन ने घटना स्थल का निरीक्षण कर आरोपितों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का निर्देश दिया है। हालाँकि, बच्ची के साथ दुष्कर्म हुआ है कि नहीं के सवाल पर आईजी ने पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के बाद ही कुछ भी बताने की बात कही है।
सच्चाई बताने के बाद भी डॉक्टरों ने फैसला किया कि आगे की जाँच के लिए उसे तीन दिन तक अस्पताल में रखा जाएगा। जाँच पूरी होने के बाद 18 जून को उसे कोर्ट में हाजिर किया गया जहाँ ससून के डॉक्टर ने फ़िरोज़ को मानसिक रूप से स्वस्थ करार दिया। इसके बाद उसे दो दिन की पुलिस कस्टडी में रखा गया।
"एक दिन दाऊद पोरबंदर से मुंबई लौट रहा था, तो उसकी कार में पीछे की सीट पर बैठे उसके साथी ने गोली चलाई, यह गोली ग़लती से दाऊद को लग गई थी, जबकि निशाना विरोधी करीम लाला के क़रीबी आलमजेब पर था। यह गोली दाऊद की गर्दन में लगी थी। तभी उसे बड़ौदा के सयाजी हॉस्पिटल ले जाया गया था।"