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Hinduphobia

मंदिर में छेड़खानी, मस्जिद मतलब शांति: सलीम-जावेद का रामगढ़, जहाँ ‘रहीम चाचा’ ही एकलौते बेदाग मानुष

1975 में आई रमेश सिप्पी की बॉलीवुड फिल्म 'शोले', जिसकी कहानी सलीम-जावेद ने लिखी थी। यहाँ हम इसी फिल्म का पोस्टमॉर्टम करेंगे।

पालघर, राजस्थान, या दिल्ली.. हिन्दुओं की हत्या पर खबरों से ‘हिन्दू’ क्यों गायब कर देता है पत्रकारिता का समुदाय विशेष

मीडिया को भीड़ का धर्म नज़र आता है लेकिन भीड़ का मज़हब नज़र नहीं आता है। धर्म निरपेक्षता की कीमत कितनी महँगी होती है।

राजस्थान: मंदिर पर अवैध कब्जे का विरोध करने वाले पुजारी को 6 लोगों ने पेट्रोल से आग लगा कर मार डाला

अवैध कब्जे का विरोध करने पर राजस्थान में राधा गोविन्द मंदिर के एक 50 वर्षीय पुजारी बाबूलाल वैष्णव को एक भू-माफिया और उसके साथियों ने जिन्दा जला दिया।

मिर्जापुर: हिन्दू-घृणा से भरा पैकेज लेकर आया है 53 लाशों का जश्न मनाने वाला विषैला गैंग

जिहाद-परस्त व जिहाद-समर्थ इसी तर्ज पर नए दौर में तलवार, पेट्रोल बम के साथ साथ मनोरंजन के नाम पर सांस्कृतिक जिहाद पर बढ़-चढ़कर भागीदारी कर रहे हैं।

बिग बॉस और राधे माँ: स्वयंभू हिन्दुवादी चेहरों को पेश कर धर्म का उपहास करने की एक और स्क्रिप्ट क्यों?

बिग बॉस में हिन्दू धर्म का मजाक उड़ाने वाले स्वयंभू चेहरे ही क्यों पेश किए जाते है? मजहब विशेष के ऐसे चेहरे क्यों नजर नहीं आते?

लड़ाई अन्याय से या हिन्दू राष्ट्र से? विरोध करने वाले बुद्धिजीवी ढपलीबाज गैंग… पहले तय कर लो, करना क्या है

क्या इस धर्म (हिंदू) को नष्ट करना आसान है? सदियों से प्रयास हो रहे हैं, 1-2 हथौड़ा आप भी चला कर देख लीजिए और हो जाए तो अवश्य सूचित करिए।

जब बलात्कार से ज्यादा जरूरी हिन्दू प्रतीकों पर कार्टून बना कर नीचा दिखाना हो जाता है: अपना इतिहास स्वयं लिखो

अपने पक्ष की कहानियाँ खुद लिखना सीखिए, लेकिन उससे भी जरुरी है कि वो जिस मुद्दे पर उकसाएँ, उस पर चुप रहना सीखिए।

आंध्र प्रदेश के चित्तूर में शिव मंदिर पर हमला, नंदी की प्रतिमा को दो टुकड़े कर दिया: राज्य में 7वीं ऐसी घटना

अज्ञात बदमाशों ने नंदी की प्रतिमा के 2 टुकड़े कर दिए। चित्तूर जिले के गंगाधर नेल्लोर मंडल में अगारा मंगलम गाँव में स्थित शिव मंदिर में...

‘गाँधी-नेहरू मातम मनाओ, हिंदू की मैया मर गई’: निम्रा अली ने लाइव टीवी पर उगला जहर

हिंदुओं के खिलाफ जहर उगलते हुए निम्रा ने उन्हें ‘बकरी’ कह कर संबोधित किया और विभाजन के दौरान हुई हिंदुओं की मौत का मज़ाक भी बनाया।

छद्म नारीवाद और हिंदू घृणा का जोड़: भारतीय संस्कृति पर हमला बोल कर कहा जाएगा- ‘ब्रेक द स्टिरियोटाइप्स’

यह स्टिरियोटाइप हर पोशाक की कतरनों के साथ क्यों नहीं ब्रेक किए जाते? हिंदुओं के पहनावे पर ही ऐसा प्रहार क्यों? क्यों नन की ड्रेस में मॉडल आदर्श होती है? क्यों बुर्के को स्टिरियोटाइप का हिस्सा नहीं माना जाता? क्यों केवल रूढ़िवाद की परिभाषा साड़ी और घूँघट तक सीमित हो जाती है?

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