राहुल गाँधी संजय भंडारी के साथ संदेहास्पद ज़मीन सौदों में बुरी तरह घिरते नज़र आ रहे हैं। भाजपा ने OpIndia के ख़ुलासे के बाद राजनीतिक हमले तेज़ कर दिए हैं। तीन तरफ से अटैक करते हुए कॉन्ग्रेस अध्यक्ष को राफेल तक घेरा जा रहा है।
रॉबर्ट वाड्रा की तरह राहुल गाँधी भी संजय भंडारी से सीधे तौर पर जुड़े हुए हैं। गाँधी परिवार का क़रीबी भंडारी एक हथियार डीलर है। राफेल सौदे के दौरान दसौं द्वारा उसे फटकार लगाई जा चुकी है।
एके एंटोनी ने कहा है कि उन्होंने राष्ट्रहित में राफेल सौदे में देरी की। राहुल गाँधी कहते रहे हैं कि मोदी ने डील बदल दी। जब डील में देरी हो गई और डील अधूरी ही थी तो हंगामा कैसा? इन्ही एंटोनी ने 2014 में राफेल की देरी के पीछे वित्त की कमी का हवाला दिया था।
CJI ने अपने वक्तव्य में कहा, "संजय सिंह ने राफेल मामले में कोर्ट के फैसले को लेकर सुप्रीम कोर्ट के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी की है। हम बाद में संजय सिंह के खिलाफ कार्रवाई पर भी विचार कर सकते हैं।"
उन्होंने कहा कि इस तरह की स्क्रूटनी भविष्य में होने वाले सौदों पर भी प्रभाव डालेगी। बाहरी देशों को ऐसा लगेगा कि भारत को इस प्रकार के सौदों को पूरा करने के लिए टीवी चैनल्स, संसद और फिर अदालत से होकर गुजरना ज़रूरी है।
दसॉ (राफेल की कंपनी) और मनमोहन सरकार में अचानक से कुछ मुद्दों पर मतभेद काफी बढ़ गया था। ED की नज़र राफेल डील में हुई देरी को लेकर मिशेल पर इसलिए भी टिक गई है क्योंकि उसने अचानक से यूरोफाइटर में अपनी दिलचस्पी बढ़ा ली थी।
भारत ने पहले प्रस्तावित 126 विमान सौदे की तुलना में 36 राफेल विमान अनुबंध में 'इंडिया स्पेसिफिक एनहांसमेंट (India Specific Enhancement)' के मामले में 17.08% बचाने में कामयाबी हासिल की।