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Rahul Gandhi

‘मेड इन xxx’ से फँसी कैसेट, ‘अमेरिका के सिनेमा हॉल में लोग बिहार का मखाना खाएँगे’ पर पहुँची है

इससे पहले भी राहुल गाँधी ऐसे हवाई वादे कर चुके हैं। इधर से आलू डालिये उधर सोना निकलेगा टाइप। पता नहीं राहुल गाँधी खुद नहीं समझ पा रहे या जानबूझकर ऐसे हवाई वादे कर रहे हैं, जिसके पूरा होने की संभावना शुरू से ही नहीं दिख रही।

इज्जत बचाने के लिए ‘सर, साउथ से चुनाव लड़िए ना’ वाला माहौल बना रहे हैं राहुल गाँधी

रचनात्मकता की सभी हदें पार करते हुए राहुल गाँधी की इस पारिवारिक पार्टी के सदस्यों को उनसे ये रिक्वेस्ट करते हुए भी दिखाया गया है कि राहुल गाँधी को इस बार अमेठी नहीं, बल्कि केरल की किसी सीट से चुनाव लड़ना चाहिए।

राहुल की रैली में चली कुर्सियाँ; अध्यक्ष जी ने कहा, हमारी सरकार आने दो तब चलेगा पता

रैली से पहले कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं ने जमकर बवाल काटा और भारी उत्पात मचाया। इस बवाल के दौरान रैली स्थल पर जमकर कुर्सियां फेंकी गईं और नेताओं के लिए लगी VIP बैरिकेडिंग भी तोड़ दी गई।

Video: 10 सालों में राहुल गाँधी की आय 1600% कैसे बढ़ी? FTIL और Unitech से क्या है सम्बन्ध?

क्या प्रियंका गाँधी वाड्रा 2019 में चुनाव इसलिए नहीं लड़ रही हैं, क्योंकि चुनाव शपथ पत्र में ये सारी बातें बाहर आ जाएँगी?

अमेठी के समीकरणों से परेशान कॉन्ग्रेस, राहुल को केरल से भी लड़ाने की अटकलें

साल 2008 में केरल की वायनाड सीट अस्तित्व में आई थी। यह सीट कन्नूर, मलाप्पुरम और वायनाड संसदीय क्षेत्र को मिलाकर बनी है। इससे पहले कॉन्ग्रेस के एमएल शाहनवाज़ इस सीट पर दो बार अपनी जीत दर्ज कर चुके हैं।

राहुल गाँधी की आय के चमत्कारिक साधन और घोटालों में आरोपित FTIL और Unitech से सम्बन्ध

2004 के चुनावी हलफनामे में, राहुल गाँधी ने अपनी कुल संपत्ति 55,38,123 घोषित की थी। उनकी देनदारियाँ शून्य थीं। 2009 में, राहुल गाँधी ने दिल्ली के मेट्रोपॉलिटन मॉल साकेत में 2 दुकानें खरीदीं। 1,63,95,111 रुपए में यह पैसा कहाँ से आया? इस आय का स्रोत क्या था?

कॉन्ग्रेस पार्टी को पाकिस्तान से राष्ट्रवाद के मायने सीखने चाहिए

क्या तुमको सोनिया गाँधी से लगाव है, क्या तुमको राहुल गाँधी से प्रेम है, या फिर प्रियंका वाड्रा से मोहब्बत है? अगर ऐसा है भी तो उसका एक सपाट कारण बता दो कि इन लोगों का देश, समाज और अर्थव्यवस्था में क्या योगदान है जो तुम इन पर अपनी जान न्यौछावर करते हो?

नीरव मोदी की गिरफ़्तारी से दुःखी और अवसादग्रस्त कॉन्ग्रेस पेट पर मूसल न मार ले

कॉन्ग्रेस की यही समस्या है कि वो इतना नकारा तो चौवालीस सीट पाने के बाद भी नहीं महसूस कर पाया जितना विपक्ष में कि इतने नेताओं के महागठबंधन के बाद भी मोदी को घेरने के लिए उसके पास सिवाय अहंकार और अभिजात्य घमंड के और कुछ भी नहीं है।

भाजपा कार्यकर्ता बनाम गुण्डे, गुर्गे, गुलाम और वंशदास

आप सोच कर भी नहीं सोच पाएँगे कि अमित शाह के बाद भाजपा का अध्यक्ष कौन बनेगा, मोदी के बाद भाजपा का पीएम कौन होगा या फिर यही देख लीजिये कि अटल जी और आडवानी जी की विरासत को कौन आगे बढ़ा रहा है?

कॉन्ग्रेस का RSS ज्ञान ‘किसी ने कहा है’ से शुरू होकर लड़कियों के निकर पर ख़त्म होता है

आज के समय में कॉन्ग्रेस पार्टी की सबसे बड़ी त्रासदी ये है कि उनके सबसे वरिष्ठ और 'कद्दावर पार्टी अध्यक्ष' का NDA सरकार को घेरने के लिए सबसे बड़े सबूत फोटोशॉप्ड तस्वीरें और ''किसी ने कहा है" होते हैं।

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