जिन तनुतश्री को टिकट देने के लिए कॉन्ग्रेस ने इतनी आतुरता दिखाई है, उनके माता-पिता (अमरमणि त्रिपाठी और उनकी पत्नी मधुमणि) कवियत्री मधुमिता हत्याकांड में जेल में हैं।
स्टार्टअप इंडिया प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा की गई एक बड़ी पहल थी और राहुल गाँधी के किए गए वादे पहले से ही इसके दायरे में आते हैं। स्टार्टअप इंडिया में पहले से ही एक व्यवसाय शुरू करने के लिए सिंगल विंडो क्लीयरेंस का प्रावधान है।
कॉन्ग्रेस ने पार्टी फ़ंड से इसरो नहीं बनवाया था, न ही डीआरडीओ के कर्मचारियों और वैज्ञानिकों को सोनिया गाँधी के हस्ताक्षर वाले चेक जारी हुआ करते थे। कॉन्ग्रेस के नाम ये संस्थान महज़ संयोग के कारण हैं क्योंकि सबसे पहले सत्ता में वही आई।
इंतजार कीजिए, कोई मूर्ख नेता और धूर्त पत्रकार जल्द ही यह पूछेगा कि जो सेटैलाइट मार गिराया गया, उसका धुआँ तो आकाश में दिखा ही नहीं, उसके पुर्ज़े तो कहीं गिरे होंगे, उसका विडियो कहाँ है।
राजस्थान के सूरतगढ़ में एक चुनावी रैली को संबोधित करते हुए कॉन्ग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी अपनी ही रौ में बह गए। और बहे भी ऐसे कि एक-के-बाद-एक करते-करते 10 झूठ एक ही रैली में बोल आए।
राहुल ने जब यह बोल दिया, और फिर कैलकुलेटर लेकर चिदम्बरम सरीखे जानकार लोग बैठे तो पता चला कि आलू से सोना भी बनने लगे, हर खेत में फ़ूड प्रोसेसिंग यूनिट लगाकर, उसकी छतों पर भी खेती की जाए, फिर भी इतना पैसा पैदा करना नामुमकिन हो जाएगा।
पीढ़ियों से कॉन्ग्रेस के वफादार रहे हाजी मोहम्मद हारून राशीद ने पार्टी नेतृत्व को ये घोषणा करते हुए चौंका दिया कि वह अमेठी से राहुल गाँधी के खिलाफ चुनाव लड़ेंगे। राशीद के पिता हाजी सुल्तान खान जिले में कॉन्ग्रेस के बड़े नेता माने जाते हैं।
रणदीप सुरजेवाला ने कहा, “हम साफ करना चाहते हैं कि ये टॉप स्कीम नहीं है, हर परिवार को 72,000 रुपया प्रतिवर्ष मिलेगा। लेकिन ये महिला केंद्रित स्कीम है। ये 72,000 रुपए कॉन्ग्रेस पार्टी घर की गृहणी के खाते में जमा करवाएगी।
जिन परिवारों की आय 12,000 रुपए से कम है, उन्हें हर महीने 12,000 रुपए तक की आमदनी पर ले जाना है - शर्त यही है कि अगर उनकी पार्टी मतलब कॉन्ग्रेस लोकसभा चुनाव में जीतेगी, मतलब राहुल गाँधी पीएम बनेंगे, तभी यह वादा पूरा होगा।
अमेठी में राहुल गाँधी के द्वारा पिछले 10 वर्षों में किए गए कार्य और स्मृति ईरानी के पिछले 4 वर्षों में किए गए कार्यों की तुलना कीजिए - सब स्पष्ट हो जाएगा। स्पष्ट यह भी हो जाएगा कि 2019 लोकसभा चुनाव में राहुल गाँधी पीछे चल रहे हैं जबकि स्मृति ईरानी लीड ले रही हैं।