संघ की छात्र ईकाई की तरफ से इसकी जानकारी शिवसेना के प्रभुत्व वाली बीएमसी को कई दिन पहले दी गई थी। बावजूद इसके न तो बीएमसी ने पूरी तरह सहयोग किया और न ही साफ-सफाई के लिए आवश्यक साजोसामान पूरी तरह मुहैया कराए।
इतनी दुर्भावना ले कर ज़िंदा ही क्यों हैं ऐसे लोग? इतनी घृणा ले कर हर दिन कैसे बिता रहे हैं लोग? क्या ये आश्चर्य की बात नहीं है कि आपको समुद्र तट साफ भी चाहिए, और कोई इसे एक जन-अभियान बनाना चाहता है तो आपको दर्द होने लगता है?
पीएम मोदी ने कहा कि ‘प्लॉगिंग’ का इस्तेमाल विदेशों में होता था, जबकि भारत में रिपुदमन बेल्वी ने इसको काफी हद तक बढ़ावा दिया है। उन्होंने सिस्टर थ्रेसिया की बात करते हुए कहा कि उन्हें 13 अक्टूबर को वेटिकन सिटी में पोल फ्रांसिस द्वारा संत घोषित किया जाएगा।
गेट्स फाउंडेशन ने कहा कि वह विरोध करने वालों की भावनाओं का सम्मान करती है लेकिन पीएम मोदी ने 50 करोड़ लोगों तक स्वच्छता सम्बंधित सुविधाएँ पहुँचाई हैं और इसीलिए उन्हें अवॉर्ड दिया जाएगा।
तमसुतुला इमसॉन्ग, नागालैंड की एक युवती हैं। इनका समूह, Sakaar Sewa Samiti तब सुर्खियों में आया था, जब वाराणसी में गंगा घाटों को स्वच्छ रखने में उनके योगदान ने पीएम मोदी के प्रोत्साहन के साथ देशव्यापी पहचान हासिल की थी।
मोदी के ऐसे प्रतीकात्मक कार्य आपको नौटंकी ही लगेंगे क्योंकि आप न तो लोयथम रिचर्ड को जानते हैं, न ही नाइदो तनियम को। आप उन हजारों उत्तर-पूर्व के लोगों को नहीं समझ पाते, और उनकी वेशभूषा पर टिप्पणियाँ करते हुए, उसके बालों के कारण उसकी जान ले लेते हैं।
ट्रेलर में एक तंज भी है, जब कन्हैया नोट को ध्यान से अपने दोस्तों को दिखाते हुए कहता है, "माँगने से कुछ नहीं होता, करने से होता है और वह सिर्फ़ एक ही आदमी कर सकता है- गाँधी जी।"