जब नागरिक ऐसे मामलों से उब जाते हैं तो फिर ऐसी मौतों का जश्न मनाते हैं। इसलिए ऐसे मामलों में जब किसी की हत्या ही न्यायोचित थी, भले ही उस पर केस न चला हो, आम नागरिक के लिए यह एक छोटी-सी जीत है, जिस पर खुश होने का उन्हें हक है।
सुबह 5.45 से 6.15 के बीच क्या-क्या हुआ, पुलिस ने दी हर डिटेल की जानकारी। आरोपितों ने पुलिस पर चलाई गोली। डंडे और पत्थर से भी किया हमला। कहा- मानवाधिकार आयोग को जवाब देने के लिए हैं तैयार।
आँकड़ों के मुताबिक़, यूपी में पिछले दो साल में 5,178 मुठभेड़ों में पुलिस ने 103 अपराधियों को मार गिराया है। 1,859 अपराधी पुलिस कार्रवाई में जख्मी हुए। इसके अलावा, 17,745 अपराधियों ने डर से आत्मसमर्पण किया या खुद ही जमानत रद्द करा जेल पहुँच गए।
हैदराबाद इनकाउंटर को लेकर सोशल मीडिया से लेकर सड़कों तक पुलिस का आभार व्यक्त किया जा रहा है। घटनास्थल पर पहुँचे हजारों लोगों ने पुलिस पर फूल बरसाए हैं और महिलाओं ने पुलिस की कार्रवाई पर अपनी खुशी प्रकट करते हुए उन्हें राखी बाँधी है। एसीपी और डीसीपी जिंदाबाद के नारे भी...
साल 2008, दो लड़कियाँ इंजिनियरिंग की पढ़ाई करती थीं - स्वपनिका और प्रनिथा। स्वपनिका को श्रीनिवास ने प्रोपोज किया। स्वपनिका ने ठुकरा दिया। लेकिन 'मर्द' श्रीनिवास ने इसे अपना अपमान समझा। अपने 2 दोस्तों के साथ मिलकर उसने स्वपनिका के साथ-साथ प्रनिथा पर भी एसिड फेंक दिया।
कानून मंत्री रेड्डी ने कहा कि आरोपितों को भगवान ने उनके किए की सजा दी है। जिससे हैदराबाद समेत पूरे देश में खुशी है। उन्होंने दावा भी किया कि वह चारों पुलिस के हथियार लेकर भागने की कोशिश कर रहे थे, तभी पुलिस ने उन पर फायरिंग की।
इससे पहले पीड़िता के पिताजी ने मंगलवार को कहा था, "दोषियों को जितना जल्दी संभव हो उतनी जल्दी सजा मिलनी चाहिए। कई कानून बनाए गए लेकिन उनका पालन नहीं हो रहा है। निर्भया केस को ही देख लीजिए। दोषियों को फाँसी पर लटकाना चाहिए।"
क्राइम सीन को रिक्रिएट करने के लिहाज से पुलिस चारों आरोपित दरिंदों को उसी हाइवे के पास लेकर पहुँची थी, जहाँ यह जघन्य अपराध किया गया था। लेकिन वहाँ से ये सभी भागने की कोशिश करने लगे। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए चारों को मार गिराया।
राम जन्मभूमि पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले का विरोध करने वालों में हैदराबाद के लोकसभा सांसद प्रमुख हैं। उन्होंने फैसले पर नाखुशी जाहिर करते हुए कहा था कि खैरात में पाँच एकड़ जमीन नहीं चाहिए।