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सेशेल्स ने PM मोदी के लिए नहीं, बल्कि अपनी घरेलू राजनीति के चलते ‘बनाया’ नया अवॉर्ड: जानिए भारत में इस पर मचा बवाल क्यों है बेतुका

सेशेल्स में पहले से मौजूद नागरिक सम्मानों का सिस्टम पहले ही राजनीतिक विवाद का विषय बन गया था और बाद में कानून के जरिए उसे खत्म कर दिया गया। मौजूदा सरकार देश के सम्मान सिस्टम में बदलाव कर रही है। पीएम मोदी को मिला सम्मान भी दुनिया में पहली बार किसी को दिया गया है।

प्रधानमंत्री मोदी के सेशेल्स दौरे के दौरान उन्हें सर्वोच्च पर्यावरण सम्मान ‘Guardian of the Blue Horizon’ से नवाजा गया। इसको लेकर जबरदस्ती विवाद खड़े किए जा रहे हैं। दरअसल ये अवॉर्ड पहली बार सेशेल्स ने किसी राष्ट्राध्यक्ष को दिया है, लेकिन इसके पीछे की वजह उनकी घरेलू राजनीति है, न की पीएम मोदी।

ऑपइंडिया की पड़ताल में सामने आया है कि सेशल्स की राष्ट्रीय सम्मान देने के सिस्टम में बड़े बदलाव किए गए और वर्तमान सरकार ने पुरानी प्रणाली को निरस्त कर दिया। वहाँ की संसद में नया कानून पास हुआ। नए कानून के तहत पहली बार पर्यावरण से जुड़ा सबसे बड़ा सम्मान पीएम मोदी को दिया गया। भारत में लिबरल गैंग सोशल मीडिया पर प्रोपेगेंडा फैलाने में लगे हुए हैं।

पीएम मोदी को क्यों दिया सम्मान, सेशेल्स ने बताया

प्रधानमंत्री मोदी के सेशेल्स दौरे के दौरान उन्हें सर्वोच्च पर्यावरण सम्मान दिया गया। ये सम्मान प्राप्त करने वाले वे दुनिया के पहले व्यक्ति हैं, साथ ही यह भारतीय प्रधानमंत्री को दिया गया 34वाँ अंतरराष्ट्रीय सम्मान है।

सेशेल्स सरकार ने इस मौके पर कहा कि यह उपाधि पर्यावरण संरक्षण, जलवायु परिवर्तन से निपटने की क्षमता, सतत विकास, नीली अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने और छोटे द्वीप वाले देशों (एसआईडीएस) की आकांक्षाओं के लिए प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व को मान्यता देती है।

पीएम मोदी ने सेशेल्स के लोगों और सरकार को इसके लिए आभार जताया और जलवायु परिवर्तन की चुनौती से जूझ रहे सभी देशों को यह सम्मान समर्पित किया।

प्रधानमंत्री ने पर्यावरण संरक्षण के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को दोहराते हुए कहा कि देश पृथ्वी को अधिक हरित और टिकाऊ बनाने के लिए हर संभव प्रयास करने को तैयार है। उन्होंने मिशन लाइफ, एक पेड़ माँ के नाम, अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन, आपदा प्रतिरोधी अवसंरचना गठबंधन और अंतर्राष्ट्रीय बिग कैट गठबंधन जैसी पहलों को भारत के वैश्विक पर्यावरण प्रयासों का उदाहरण बताया।

भारत में पुरस्कार को ‘विवादित’ बनाने की कोशिश हुई

पीएम मोदी को मिले इस इंटरनेशनल सम्मान को लेकर भी भारत में जश्न मनाने के बजाए राजनीति की जा रही है। कई आलोचकों ने दावा किया कि प्रधानमंत्री मोदी की यात्रा के दौरान उन्हें सम्मानित करने के लिए यह सम्मान ‘विशेष तौर पर बनाया गया’ था, जिसका अर्थ है कि सेशेल्स सरकार ने भारतीय प्रधानमंत्री के लिए जल्दबाजी में एक नया पुरस्कार घोषित कर दिया।

खुद को ‘खोजी पत्रकार’ कहने वाले और प्रचार आउटलेट ऑल्ट न्यूज के संस्थापक मोहम्मद जुबैर ने X पर अपने ही देश के प्रधानमंत्री को मिले सम्मान की आलोचना की। उन्होंने एक पोस्ट को दोबारा शेयर किया, जिसमें कहा गया था कि ‘नया पुरस्कार’ एक घुमंतू अहंकारी व्यक्ति के अहंकार को संतुष्ट करने के लिए जल्दबाजी में बनाया गया था।

जुबैर ने कई पोस्ट साझा किए हैं जिनमें कथित प्रशस्ति पत्र दस्तावेज का उपयोग करते हुए प्रधानमंत्री मोदी को दिए गए राष्ट्रीय सम्मान की प्रामाणिकता पर सवाल उठाया गया है।

द हिंदू की राजनयिक मामलों की संपादक ने भी इस आलोचना का समर्थन करते हुए सवाल उठाया कि गलतियों वाले कथित प्रशस्ति पत्र को किसने तैयार किया था। उन्होंने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट भी साझा किया, जिसमें दावा किया गया था कि सेशेल्स ने प्रधानमंत्री मोदी के लिए राजकीय सम्मान बनाने के लिए चैटजीपीटी का इस्तेमाल किया था।

सोशल मीडिया पर ये प्रोपेगेंडा जल्दी ही फैल गया। कई लोगों ने कहा कि ये पुरस्कार पीएम मोदी की यात्रा को देखते हुए सेशेल्स ने शुरू किया है।

यह पुरस्कार हाल ही में क्यों शुरू किया गया?

यह सच है कि ‘गार्जियन ऑफ द ब्लू होराइजन’ का सम्मान हाल ही में स्थापित किया गया है, लेकिन इसके ‘सृजन’ का कारण पीएम मोदी नहीं हैं। दरअसल सेशल्स के राष्ट्रीय सम्मान की प्रक्रिया में बदलाव किया गया है।

सेशेल्स ने देश में असाधारण योगदान देने वाले लोगों को सम्मानित करने के लिए 2022 में राष्ट्रीय पुरस्कार अधिनियम लागू किया। इस कानून के तहत तीन राष्ट्रीय सम्मान शुरू किए गए। गणतंत्र पदक, सम्मान पदक और योग्यता पदक।

कानून लागू होने के बाद 2023 में पहला राष्ट्रीय पुरस्कार समारोह आयोजित किया गया, जिसमें सार्वजनिक सेवा, पर्यावरण कार्य, स्वास्थ्य सेवा, संस्कृति, शासन और वीरता के कार्यों के लिए जीवन के विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े व्यक्तियों को सम्मानित किया गया ।

पुरस्कार प्राप्त करने वालों में राष्ट्रपति वेवेल रामकलवान शामिल थे, जिन्हें अधिनियम के प्रावधानों के तहत गणतंत्र पदक प्राप्त हुआ, पूर्व राष्ट्रपति सर जेम्स मैनचम, सेंट्रल बैंक की गवर्नर कैरोलिन एबेल, पर्यावरणविद् एंटोनियो कॉन्स्टेंस, गायक जो सैमी और कई अन्य लोग शामिल थे, जिन्होंने सेशेल्स में महत्वपूर्ण योगदान दिया था।

उस समय राष्ट्रपति रामकलवान ने कहा था कि देश विदेशों में सम्मानित सेशेल्स वासियों को तो मान्यता देता रहा है, लेकिन अपने नागरिकों को सम्मानित करने के लिए कोई व्यवस्था नहीं थी। इसलिए, इस कमी को पूरा करने और राष्ट्रीय उपलब्धियों को औपचारिक रूप से मनाने के लिए राष्ट्रीय पुरस्कारों की शुरुआत की गई।

राजनीतिक परिवर्तन के कारण पुरानी सम्मान प्रणाली को निरस्त कर दिया गया

दरअसल नई सम्मान प्रणाली घरेलू राजनीति में उलझ गई।
सरकार में बदलाव के बाद, राष्ट्रपति पैट्रिक हर्मिनी मंत्रिमंडल ने फरवरी में राष्ट्रीय पुरस्कार (निरसन) विधेयक, 2026 को मंजूरी दी । इसमें पहले से प्रदान किए गए सभी सम्मानों की वैधता को बरकरार रखते हुए राष्ट्रीय पुरस्कार अधिनियम को समाप्त करने का प्रस्ताव है।

सेशेल्स की राष्ट्रीय सभा ने गरमागरम बहस के बाद निरसन विधेयक पारित कर दिया। इस विधेयक को यूनाइटेड सेशेल्स (यूएस) पार्टी का समर्थन मिला, जबकि लिन्योन डेमोक्रेटिक सेशेल्वा (एलडीएस) ने इसका विरोध किया। इसके साथ ही राष्ट्रीय पुरस्कार समिति को भी भंग कर दिया गया, हालाँकि पहले से दिए गए सम्मान कानूनी रूप से वैध बने रहे। हालाँकि पूर्ववर्ती पुरस्कार व्यवस्था समाप्त हो गई और एक नई सम्मान प्रणाली का मार्ग प्रशस्त हुआ।

इसी के तहत ‘गार्जियन ऑफ द ब्लू होराइजन’ की शुरुआत की गई और प्रधानमंत्री मोदी को पर्यावरण संरक्षण में उनके योगदान और जलवायु परिवर्तन के प्रति संवेदनशील द्वीपीय देशों के समर्थन के लिए यह सम्मान प्रदान किया गया।

पुरस्कार से कहीं बढ़कर, एक नई शुरुआत

इसलिए ये नहीं कहा जा सकता कि प्रधानमंत्री मोदी की यात्रा को देखते हुए, उन्हें खुश करने के लिए सेशेल्स सरकार ने यह सम्मान अचानक ‘सृजित’ किया।

सेशेल्स में पहले से मौजूद नागरिक सम्मान प्रणाली राजनीतिक विवाद का विषय बन चुकी थी और बाद में इसे कानून के माध्यम से निरस्त कर दिया गया था। वर्तमान सरकार पुराने कानून के तहत दिए गए पुरस्कारों की वैधता को बरकरार रखते हुए देश की सम्मान प्रणाली का पुनर्गठन कर रही है।

‘गार्जियन ऑफ द ब्लू होराइजन’ सम्मान भी सेशेल्स के नए सम्मान प्रणाली का हिस्सा है।

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Shriti Sagar
Shriti Sagar
Journalist

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