Wednesday, April 15, 2026
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17 जवान वीरगति को प्राप्त: छत्तीसगढ़ में 2 वर्षों का सबसे बड़ा नक्सली हमला, CM बघेल ने साधी चुप्पी

पुलिस कल से ही इनकी खोज में लगी हुई थी। इसके लिए एक बड़ी सर्च टीम भी तैयार की गई थी। छत्तीसगढ़ में एक बार फिर से नक्सलियों का कहर शुरू हो गया है।

छत्तीसगढ़ से बड़ी ख़बर आ रही है। अधिकारियों ने जानकारी दी है कि शनिवार (मार्च 21, 2020) को नक्सलियों से हुई मुठभेड़ में 17 जवान वीरगति को प्राप्त हुए हैं। अब तक कहा जा रहा था कि ये सभी जवान लापता हैं लेकिन अब उनके वीरगति को प्राप्त होने की पुष्टि हो गई है। इनमें से 12 डीआरजी के हैं जबकि 5 एसटीएफ के हैं। पुलिस कल से ही इनकी खोज में लगी हुई थी। इसके लिए एक बड़ी सर्च टीम भी तैयार की गई थी। छत्तीसगढ़ में एक बार फिर से नक्सलियों का कहर शुरू हो गया है।

चितागुफा के पास वाले जंगल में 150 लोगों की टीम को सर्च अभियान में लगाया गया था ताकि गायब जवानों का कोई सुराग मिल सके। ये मुठभेड़ शनिवार (मार्च 21, 2020) को हुई थी। सुकमा के एसपी शलभ सिन्हा का कहना था कि अभी तक सर्च पार्टी को सफलता हाथ नहीं लगी है। 14 घायल जवानों को एयरलिफ्ट कर के रायपुर ले जाया गया है, जहाँ उनका इलाज चल रहा है। ये मुठभेड़ दोपहर ढाई बजे कोरजागुड़ा पहाड़ी के पास हुई। एसपी ने बताया कि वो लोग उस समय ‘एरिया डोमिनेशन एक्सरसाइज’ को अंजाम दे रहे थे। इसके बाद डीआरजी, कोबरा और एसटीएफ के जवानों ने संयुक्त ऑपरेशन के जरिए बुरकापाल और तिमेलिएदा क्षेत्र में नक्सलियों के छिपे होने की सूचना मिलते ही तलाशी अभियान चलाया।

नक्सलियों ने डीआरजी की टीम पर फायरिंग भी की। 600 सुरक्षा बलों की टीम पर नक्सलियों ने फायरिंग की, जिसका ताबड़तोड़ जवाब दिया गया। सूचना मिली थी कि तेलंगाना के कई बड़े नक्सली यहाँ के नक्सली नेताओं के साथ बैठक करने आए हुए थे। अधिकारियों का मानना है कि इस मुठभेड़ में कई बड़े नक्सली हताहत हुए हैं और उन्हें ख़ासा नुकसान पहुँचा है। एनकाउंटर की ख़बर मिलते ही सीआरपीएफ ने घटनास्थल पर मोर्चा संभाल लिया है। अप्रैल 2017 में यहाँ से कुछ ही दूरी पर नक्सलियों के हमले में सीआरपीएफ के 25 जवान वीरगति को प्राप्त हो गए थे। एसटीएफ का मानना है कि नक्सली अब नई रणनीति पर काम कर रहे हैं।

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने रायपुर अस्पताल में जाकर घायल जवानों से मुलाक़ात की हैं। हालाँकि, वीरगति को प्राप्त जवानों को लेकर अभी उनका कोई बयान नहीं आया है। नक्सल समस्या के फिर से सिर उठाने से कॉन्ग्रेस सरकार का घिरना तय है।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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