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बुलेटप्रूफ, हथियारों से लैस गुर्गे और सैटेलाइट फोन: मुख्तार अंसारी का एंबुलेंस कैसा, UP के पूर्व डीजीपी ने उठा दिया पर्दा

पूर्व डीजीपी के मुताबिक इस एंबुलेंस में हथियार से लैस मुख्तार के गुंडे सवार रहते हैं। वह खुद सैटेलाइट फोन रखता है। सपा राज में जब मुख्तार जेल में होता तो यह एंबुलेंस बाहर खड़ी रहती थी।

उत्तर प्रदेश का माफिया डॉन पिछले दिनों मोहाली की कोर्ट में व्हीलचेयर पर पेशी के लिए आया था। वह जिस एंबुलेंस से अदालत पहुँचा था, उसको लेकर विवाद है। इस बीच उत्तर प्रदेश के पूर्व पुलिस महानिदेशक और राज्यसभा सांसद बृजलाल ने मुख्तार के एंबुलेंस को लेकर चौंकाने वाला खुलासा किया है। उनके अनुसार यह साधारण गाड़ी न होकर, एक चलते-फिरते किले जैसा है।

दैनिक जागरण की रिपोर्ट के अनुसार, पूर्व डीजीपी ने बताया कि मुख्तार की एंबुलेंस बुलेटप्रूफ है और इसे चंडीगढ़ में बनवाया गया था। इसका ड्राइवर मुख्तार का खास गुर्गा सलीम है। सलीम मुहमदाबाद का रहने वाला है। उसका बड़ा भाई प्रिंस एक कुख्यात अपराधी था, जिसे कुछ समय पहले मुठभेड़ में मारा गिराया गया था।

पूर्व डीजीपी के मुताबिक इस एंबुलेंस में हथियार से लैस मुख्तार के गुंडे सवार रहते हैं। वह खुद सैटेलाइट फोन रखता है। पूर्व डीजीपी बृजलाल के अनुसार किसी अपराधी के पास बुलेटप्रूफ एंबुलेंस होने का यह पहला मामला है। उनके अनुसार यूपी में सपा शासनकाल में मुख्तार अंसारी जब जेल में बंद था, तब भी यह एंबुलेंस जेल के बाहर खड़ी रहती थी। इसके अलावा वह विधान भवन भी अपनी इसी एंबुलेंस में जाता था और उसके गुर्गे बड़ी-बड़ी गाड़ियों में काफिले की तरह साथ होते थे।

बता दें कि इससे पहले पूर्व डीजीपी ने मुख्तार अंसारी के मामले में पंजाब सरकार और पंजाब पुलिस पर निशाना साधा था। उन्होंने बताया था कि ये सब सिर्फ़ और सिर्फ़ पैंतरेबाजी है। मुख्तार ये सब शुरू से करता रहा है और अंत तक करेगा। 

मुख्तार अंसारी की फर्जी एंबुलेंस

उल्लेखनीय है कि मुख्तार अंसारी इस समय पंजाब जेल में बंद है। पिछले दिनों वह मोहाली की कोर्ट में पेश हुआ था। लेकिन वहाँ उसे लेकर आई एंबुलेंस पर विवाद हो गया। दरअसल जिस एम्बुलेंस से पुलिस ने उसे मोहाली कोर्ट में पेश किया, उसका रजिस्ट्रेशन तो बाराबंकी जिले का है, लेकिन अब यह एंबुलेंस किसी अस्पताल से पंजीकृत ही नहीं है।

न्यूज 18 के अनुसार, जिस अस्पताल के नाम से एंबुलेंस नंबर UP41 AT 7171 का रजिस्ट्रेशन बताया जा रहा है, वह असल में है ही नहीं। इसकी मियाद साल 2015 में खत्म हो चुकी है। एंबुलेंस की फिटनेस भी साल 2017 में एक्सपायर हो चुकी है। बाराबंकी स्वास्थ्य विभाग के पास भी इसकी कोई जानकारी नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने पिछले दिनों पंजाब सरकार को दो सप्ताह के भ्ज्ञीतर मुख्तार की कस्टडी यूपी पुलिस को सौंपने के निर्देश दिए थे।

वैसे मुख्तार पर सपा सरकार की मेहरबानी को बयाँ करने वाले बृजलाल पहले पुलिस अधिकारी नहीं है। हाल ही में योगी सरकार ने पूर्व डीएसपी शैलेंद्र सिंह पर दर्ज मुकदमा उठाया था। सिंह ने एक लाइटगन बरामद करने के बाद मुख्तार के खिलाफ पोटा के तहत कार्रवाई की थी। उन्होंने बताया था कि इसके बाद उन पर तत्कालीन सरकार ने इतना दबाव बनाया कि उन्हें इस्तीफा देना पड़ा। इसके कुछ महीने बाद उन पर केस दर्ज कर उन्हें जेल भेज दिया गया था।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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