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डेमोग्राफी ही नहीं बदल रहे बांग्लादेशी, मजबूर-मजदूर बनकर बन गए हैं क्राइम मास्टर भी: देशभर में फैलकर कर रहे शिकार

जो बांग्लादेशी पिछले कई दशक से केवल डेमोग्राफी असंतुलन के लिहाज से देश के कुछ हिस्सों में खतरे के तौर पर देखे जा रहे थे, उनसे जुड़े खतरे का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है। वे देश के हर हिस्से में फैलकर शिकार की ताक में बैठे हुए हैं।

दिल्ली पुलिस ने बांग्लादेशी नागरिक शहादत खान को पकड़ा है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार उसकी बीवी नौकरानी बनकर घरों में काम करने जाती फिर शहादत अपने साथियों के साथ उन्हीं घरों में वारदात को अंजाम देता। इससे पहले अक्टूबर की एक रात लखनऊ के चिनहट में मुठभेड़ हुई। तीन बांग्लादेशी पकड़े गए। पूछताछ से यह बात सामने आई थी कि बांग्लादेशियों का यह गिरोह कबाड़ी बनकर दिन में रेकी करता और रात को अपराध करने निकल जाता। इतना ही नहीं वारदात के दौरान विरोध किए जाने पर ये हत्या और रेप को अंजाम देने से भी नहीं हिचकते थे। इसी साल मई में बेंगलुरू पुलिस ने ऐसे बांग्लादेशियों को दबोचा था, जिन्होंने गैंगरेप के बाद पीड़िता का वीडियो वायरल कर दिया। उसके प्राइवेट पार्ट में शराब की बोतल घुसा दी थी।

ऐसी घटनाओं की फेहरिस्त लंबी है जो बताती हैं कि बांग्लादेशी कैसे देश भर में फैल रहे हैं। हर तरह के अपराध को अंजाम दे रहे हैं। कभी नौकरानी बन, कभी मजदूर तो कभी कबाड़ी बन। ये घटनाएँ बताती हैं कि जिस वक्त आपने उन्हें मजबूर मान लिया, उसी वक्त आप उनके टारगेट पर आ गए। अवैध तरीके से भारत में घुसे ये घुसपैठिए हमारी अर्थव्यवस्था से लेकर सामाजिक संतुलन तक को बिगाड़ रहे हैं।

अब इनसे जुड़ी चिंताएँ केवल असम, पश्चिम बंगाल या बिहार के सीमांचल के इलाकों तक सीमित नहीं हैं। ये केवल डेमोग्राफी ही नहीं बदल रहे। ये हमारे मठ, मंदिर, जंगल हर जगह जमीन पर कब्जा कर रहे। असम में तो भारत के सबसे छोटे राज्य गोवा के क्षेत्रफल का दोगुना इलाका तो अतिक्रमण की जद में है। कुल मिला कर 49 लाख बीघा, अर्थात 6652 स्क्वायर किलोमीटर की भूमि पर कब्जा है। असम सरकार ने 2017 में यह जानकारी दी थी। बताया गया था कि सबसे ज्यादा अतिक्रमण वैष्णव मठों का हुआ है, जिसे असम में ‘सत्र’ भी कहा जाता है।

आतंकवाद की घटनाएँ हो या फिर दिल्ली में हुआ हिंदू विरोधी दंगा हर जगह इन बांग्लादेशियों की संलिप्तता सामने आई है। ये न केवल खुद के लिए दस्तावेज जुटा लेते हैं बल्कि रोहिंग्या लोगों को भी लाकर भारत में बसाने के लिए नेटवर्क के तौर पर काम कर रहे हैं। नवम्बर 2021 में महाराष्ट्र के ठाणे जिले की भिवंडी पुलिस ने 40 अवैध बंगलादेशी घुसपैठियों को गिरफ्तार किया था। उन सभी पर फर्जी दस्तावेज बनवाने का आरोप है। इसमें से एक के पास फर्जी पासपोर्ट भी बरामद किया गया था। जुलाई 2021 में UP ATS ने नूर मोहम्मद, रहमत उल्लाह और शफी उल्लाह को गिरफ्तार किया था। तस्करी के लिए ये बांग्लादेश और म्यांमार से लोगों को लाते थे। उनके फर्जी कागज़ात भी बनाए जाते थे। इसी तरह मार्च 2021 में UP ATS ने सहारनपुर जिले से उमर मुहम्मद उस्मानी और उसके बेटे तनवीर को गिरफ्तार किया था। बाप-बेटे रोहिंग्या और बांग्लादेशियों की घुसपैठ कराकर उन्हें यूपी में बसाने में संलिप्त थे।

जाहिर है कि जो बांग्लादेशी पिछले कई दशक से केवल डेमोग्राफी असंतुलन के लिहाज से देश के कुछ हिस्सों में खतरे के तौर पर देखे जा रहे थे, उनसे जुड़े खतरे का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है। वे देश के हर हिस्से में फैलकर शिकार की ताक में बैठे हुए हैं। इस लड़ाई में हम जितनी देर करेंगे हमारी सभ्यता, संस्कृति, जानमाल का खतरा उतना ही बढ़ता जाएगा।

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राहुल पाण्डेय
राहुल पाण्डेयhttp://www.opindia.com
धर्म और राष्ट्र की रक्षा को जीवन की प्राथमिकता मानते हुए पत्रकारिता के पथ पर अग्रसर एक प्रशिक्षु। सैनिक व किसान परिवार से संबंधित।

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