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‘मैं चाहती हूँ लोग मुझे देखें और मेरी खूबसूरती में…’: आरिफ मोहम्मद खान ने सुनाई एक कहानी, कहा- कुरान में 7 बार हिजाब, पर इस्लाम से लेना नहीं

"पर्दा और मैं? खुदा ने मुझे खूबसूरत बनाया है। मैं चाहती हूँ कि लोग मुझे देखें और मेरी खूबसूरती में अल्लाह की शान का एहसास करें और अल्लाह का शुक्र अदा करें।”

हिजाब पर जारी विवाद के बीच केरल के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान (Arif Mohammad Khan) ने एक दिलचस्प किस्सा सुनाया है। एक टीवी चैनल से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि कुरान में हिजाब का सात बार जिक्र होता है, लेकिन इसका इस्लाम से लेना-देना नहीं है। उन्होंने कहा कि कुरान में हिजाब का प्रयोग कहीं भी महिलाओं के पहनावे के तौर पर नहीं हुआ है। इसके लिए खिमार का प्रयोग हुआ है। यह छोटा भी हो सकता है और बड़ा भी।

उन्होंने कहा कि यह पसंद का मसला नहीं है। यह​ किसी संस्थान के नियम कानूनों को पालन करने की बात है। उन्होंने कहा कि जिन लोगों को शैक्षिक संस्थानों में यूनिफॉर्म पहन कर आना पसंद नहीं है वे बाहर जा सकते हैं, क्योंकि स्कूल और कॉलेज में अनुशासन बेहद जरूरी है।

मौजूदा विवाद और हिजाब को इस्लाम से जोड़े जाने पर उन्होंने कहा, “ये लोग उन बातों पर लड़ेंगे, जिनका कुरान में कोई जिक्र नहीं है। उदाहरण के लिए- तीन तलाक। जो असल गुनाह है- जो बताया गया है, उसे छोड़ कर अपनी ख्वाहिशों को पूरा करना। ये वो लोग हैं जो मानते सब कुछ हैं, लेकिन कहते हैं कि हम इनके मुताबिक आचरण नहीं करेंगे। हम तो अपनी मर्जी करेंगे।”

अपनी बात को समझाने के लिए केरल के राज्यपाल ने एक कहानी भी सुनाई। आरिफ मोहम्मद खान ने कहा, “हजरत आयशा की औलाद नहीं थी। लिहाजा वह अपने सगे भाई की बेटी को एक तरह से गोद ले लेती है और खुद पालती हैं सारी जिंदगी। वह बच्ची बहुुत खूबसूरत होती है। उसकी शादी गवर्नर से होती है। उसका शौहर उससे कहता है कि तुम अपना चेहरा ढँको, पर्दा करो। वह अपने शौहर को जवाब देती है- पर्दा और मैं? खुदा ने मुझे खूबसूरत बनाया है। मैं चाहती हूँ कि लोग मुझे देखें और मेरी खूबसूरती में अल्लाह की शान का एहसास करें और अल्लाह का शुक्र अदा करें।” इसे आप नीचे लगे वीडियो में 25:00 से 27:32 मिनट के बीच सुन सकते हैं।

खिमार का जिक्र करते हुए राज्यपाल ने कहा कि उस समय समाज में दो वर्ग होते थे- आजाद और गुलाम। जो औरतें गुलाम थीं उनके साथ बदतमीजी की जाती थी। उन पर अपना हक समझा जाता था। जब इस तरह की घटना आजाद महिला के साथ हुई तो खिमार चलन में आया। उनसे कहा गया कि खिमार अपनी कमीज पर डाल लो, ताकि तुम्हारी पहचान हो सके।

नोट: भले ही इस विरोध प्रदर्शन को ‘हिजाब’ के नाम पर किया जा रहा हो, लेकिन मुस्लिम छात्राओं को बुर्का में शैक्षणिक संस्थानों में घुसते हुए और प्रदर्शन करते हुए देखा जा सकता है। इससे साफ़ है कि ये सिर्फ गले और सिर को ढँकने वाले हिजाब नहीं, बल्कि पूरे शरीर में पहने जाने वाले बुर्का को लेकर है। हिजाब सिर ढँकने के लिए होता है, जबकि बुर्का सर से लेकर पाँव तक। कई इस्लामी मुल्कों में शरिया के हिसाब से बुर्का अनिवार्य है। कर्नाटक में चल रहे प्रदर्शन को मीडिया/एक्टिविस्ट्स भले इसे हिजाब से जोड़ें, लेकिन ये बुर्का के लिए हो रहा है।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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