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इलाज के लिए अनिल देशमुख और नवाब मलिक को कोर्ट ने दी अलग-अलग छूट, मनी लॉन्ड्रिंग में हैं आरोपित: वरवरा राव को भी मिली थी राहत

इसी तरह से पुणे के एल्गार परिषद के मामले गिरफ्तार किए गए अर्बन नक्सल वरवरा राव को भी कोर्ट ने इलाज के लिए नानावती अस्पताल में ट्रांसफर करने की इजाजत दी थी।

मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में जेल की सजा काट रहे महाराष्ट्र के पूर्व गृह मंत्री और एनसीपी के नेता अनिल देशमुख (Anil Deshmukh) को शुक्रवार को बाएँ कंधे की जाँच के लिए पहले सरकारी केईएम अस्पताल में भर्ती करने और फिर वहाँ से उन्हें आगे के इलाज के लिए जेजे अस्पताल में ट्रांसफर करने का आदेश दिया। इसी के साथ कोर्ट ने देशमुख की प्राइवेट अस्पताल में इलाज कराने की माँग वाली याचिका को खारिज कर दिया।

वहीं दूसरी तरफ उसी अदालत ने महाराष्ट्र के अल्पसंख्यक विकास मंत्री और एनसीपी नेता नवाब मलिक की मेडिकल बेल की एप्लीकेशन को भले ही कोर्ट ने खारिज कर दिया, लेकिन उन्हें प्राइवेट हॉस्पिटल में अपनी ट्रीटमेंट कराने की इजाजत दे दी। इसके साथ ही इसके लिए उन्हें भुगतान करने की भी इजाजत मिल गई।

गौरतलब है कि महाराष्ट्र के पूर्व गृह मंत्री अनिल देशमुख और नवाब मलिक पर मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) कार्रवाई कर रहा है। केंद्रीय जाँच एजेंसी ने मलिक को इसी साल फरवरी में गिरफ्तार किया था, जबकि देशमुख को नवंबर 2021 में गिरफ्तार किया गया था। दोनों ही नेताओं ने मेडिकल बेल माँगी थी।

उल्लेखनीय है कि एनसीपी नेता नवाब मलिक को 9 से 11 मई तक उनके फेमिली डॉक्टरों, डॉ सईदा खान और डॉ शरद कोलके की उपस्थिति में कम्प्लीट हेल्च चेकअप के लिए एक नेफ्रोलॉजिस्ट से मिलने की इजाजत दी गई थी। कोर्ट के आदेश के मुताबिक, इस दौरान फैमिली डॉक्टर को लेकर जो भी खर्च होगा, उसका वहन नवाब मलिक को ही करना होगा। ये व्यवस्था कोर्ट ने अस्थायी तौर पर की है। वहीं उनकी अंतरिम जमानत अर्जी पर भी अदालत में सुनवाई हुई थी। मलिक ने अदालत में याचिका दायर कर कहा था कि उन्हें किडनी की बीमारी है और इसके लिए उन्हें प्राइवेट हॉस्पिटल में इलाज के लिए जाने की इजाजत दी जाए। उन्होंने 6 सप्ताह की अंतरिम जमानत माँगी थी।

इसी तरह से पुणे के एल्गार परिषद के मामले गिरफ्तार किए गए अर्बन नक्सल वरवरा राव को भी कोर्ट ने इलाज के लिए नानावती अस्पताल में ट्रांसफर करने की इजाजत दी थी। दरअसल, राव ने 2020 में मेडिकल बेल और एक रिट पिटिशन फाइल की थी, जिसमें उसने अपनी बिगड़ती न्यूरोलॉजिकल स्थिति और शारीरिक हालत का हवाला देते हुए नानावती अस्पताल में इलाज की इजाजत माँगी थी।

इसके बाद बॉम्बे हाई कोर्ट के जस्टिस एसएस शिंदे और जस्टिस माधव जामदार की बेंच ने इस मामले में हस्तक्षेप किया, जिसके बाद राज्य ने कहा कि वो राव को नवी मुंबई में तलोजा जेल से माहाराष्ट्र सरकार के विशेष मामले के तौर पर नानावती अस्पताल में इलाज के लिए भेजेगी।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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