Home Blog Page 193

‘वोटर लिस्ट से नाम ऑनलाइन नहीं होते डिलीट’: राहुल गाँधी के ‘हाइड्रोजन बम’ वाले खुलासे को EC ने किया खारिज, लगाया था वोट चोरी का आरोप

कॉन्ग्रेस सांसद राहुल गाँधी ने अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस को ‘हाइड्रोजन बम’ बताया था, जिसमें राहुल ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर ‘वोट चोरों’ की रक्षा करने का गंभीर आरोप लगाया था। लेकिन प्रेस कॉन्फ्रेंस खत्म होते ही चुनाव आयोग ने इन आरोपों का खंडन करते हुए राहुल गाँधी के दावों को बेबुनियाद बताया है।

चुनाव आयोग ने बताया कि किसी आदमी के जरिए ऑनलाइन वोट हटाना संभव नहीं है और किसी भी वोटर का नाम बिना उसे सुनवाई का मौका दिए हटाया नहीं जा सकता। आयोग ने यह भी बताया कि कर्नाटक के आलंद विधानसभा क्षेत्र में 2023 में वोटों को हटाने की कोशिशों के बाद खुद चुनाव आयोग ने इस मामले में FIR दर्ज कराई थी।

चुनाव आयोग का तथ्यों के साथ जवाब

राहुल गाँधी ने कर्नाटक के आलंद विधानसभा क्षेत्र में 6018 वोटरों के नाम हटाए जाने का जिक्र किया था। इस पर चुनाव आयोग ने बताया कि 2023 में आलंद में वोटरों के नाम हटाने की कुछ असफल कोशिशें हुई थीं, जिसके बाद खुद चुनाव आयोग ने इस मामले की जाँच के लिए FIR दर्ज कराई थी।

आयोग के रिकॉर्ड के अनुसार, आलंद विधानसभा सीट 2018 में भाजपा ने जीती थी और 2023 में कॉन्ग्रेस ने। यह राहुल गाँधी के आरोपों को कमजोर करता है, क्योंकि अगर ‘वोट चोरी’ हुई होती, तो कॉन्ग्रेस वहाँ जीत नहीं पाती।

कॉन्ग्रेस पर ही लगे थे गंभीर आरोप

चुनाव आयोग ने राहुल गाँधी पर सीधा पलटवार करते हुए बताया कि बिहार में चल रहे ‘विशेष गहन पुनरीक्षण’ अभियान (SIR) के दौरान कॉन्ग्रेस ने ही 89 लाख वोटरों के नाम हटाने के लिए आवेदन दिया था। यह राहुल गाँधी के उन आरोपों के विपरीत है, जिसमें वह चुनाव आयोग पर कॉन्ग्रेस के वोटरों को हटाने का आरोप लगा रहे थे।

आयोग ने कहा कि यह अभियान फर्जी वोटरों को हटाकर असली वोटरों के अधिकार सुरक्षित करने के लिए चलाया गया है। इस अभियान के दौरान कई विदेशी नागरिकों का भी पता चला है, जो फर्जी आधार कार्ड और अन्य भारतीय दस्तावेजों के सहारे वोटर बने हुए थे।

पुराने आरोपों पर भी जवाब

राहुल गाँधी लगातार चुनाव आयोग पर आरोप लगाते रहे हैं और इसी को देखते हुए आयोग ने 17 अगस्त 2025 को राहुल गाँधी से एक हफ्ते के भीतर अपने दावों के सबूत पेश करने या फिर पूरे देश से माफी माँगने को कहा था। लेकिन राहुल गांधी ने न तो कोई सबूत पेश किए और न ही माफी माँगी।

इस पर चुनाव आयोग ने कहा कि उनके आरोपों को अब अमान्य माना जाता है। आयोग ने यह भी कहा कि अगर किसी को चुनाव परिणाम पर आपत्ति है, तो वह 45 दिनों के भीतर हाई कोर्ट में याचिका दायर कर सकता है, लेकिन किसी विपक्षी नेता ने ऐसा नहीं किया।

चुनाव आयोग ने हर बार तथ्यों और रिकॉर्ड के साथ राहुल गाँधी के आरोपों का जवाब दिया है, जबकि कॉन्ग्रेस ने ज्यादातर मामलों में कोई औपचारिक शिकायत तक नहीं की। इससे यह स्पष्ट होता है कि ये आरोप ज्यादातर राजनीतिक रणनीति का हिस्सा हैं, जिसका उद्देश्य लोगों को भड़काना है, न कि किसी सच्ची समस्या का समाधान खोजना।

सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज नरीमन ने फिर उगला हिंदुओं के खिलाफ जहर, ‘डिवाइन-बोवाइन’ कहकर पूर्व CJI चंद्रचूड़ पर भी उठाई उँगली: कहा- ये संविधान का उल्लंघन

न्यायपालिका के हिंदू विरोधी रुख को और पुख्ता करने वाली विवादित टिप्पणी सामने आई है। सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश रोहिंटन नरीमन ने राम मंदिर मामले को लेकर विवादित बातें कही हैं। उन्होंने हिंदुओं के पवित्र गोवंश का अनावश्यक उल्लेख किया है, साथ ही राम मंदिर मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले की आलोचना की है। नरीमन ने कहा कि निर्णयों को प्रभावित करने के लिए दैवीय या किसी अन्य प्रकार के हस्तक्षेप की अनुमति देना न्यायाधीश द्वारा संविधान के प्रति शपथ का उल्लंघन होगा।

जस्टिस नरीमन ने यह टिप्पणी 1 सितंबर 2025 को तिरुवनंतपुरम के प्रेस क्लब द्वारा आयोजित केएम बशीर स्मृति व्याख्यान के दौरान एक सवाल का जवाब देते हुए कही थी। एक व्यक्ति ने भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीशों द्वारा निर्णय सुनाते समय दैवीय हस्तक्षेप के बारे में बोलने पर उनके विचार पूछे थे। यह टिप्पणी पूर्व मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ के उस बयान के संदर्भ में थी, जिसमें उन्होंने कहा था कि उन्होंने 2019 में राम मंदिर-बाबरी मस्जिद मामले में फैसले के दौरान मार्गदर्शन के लिए प्रार्थना की थी।

न्यायमूर्ति नरीमन ने कहा, “चाहे दैवीय हस्तक्षेप हो या गोवंश हस्तक्षेप या किसी भी दूसरी तरह का हस्तक्षेप। यदि कोई न्यायाधीश इसको लेकर कोई फैसला सुनाता है, तो वह संविधान के प्रति अपनी शपथ का उल्लंघन कर रहा होता है। आपको (न्यायाधीशों को) केवल संविधान और कानूनों के प्रति अपनी शपथ पर ही चलना होता है। और जब आप संविधान और कानूनों के प्रति अपनी शपथ पर चलते हैं, तो आप निश्चित रूप से अपनी नैतिकता को भी साथ लाते हैं।”

पूर्व मुख्य न्यायाधीश चंद्रचूड़ द्वारा एक महत्वपूर्ण निर्णय पर पहुँचने के लिए आस्था का सहारा लेने पर की गई उनकी टिप्पणी और हिंदुओं द्वारा पवित्र माने जाने वाले गोवंश का उल्लेख, सुप्रीम कोर्ट में गहरी जड़ें जमा चुके हिंदू विरोधी पूर्वाग्रह को रेखांकित करते हैं।

सुप्रीम कोर्ट में हिन्दू विरोधी धारणा का एक और विवादित मामले इस घटना के अगले दिन आया। भारत के मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई ने मुगल आक्रमणकारियों द्वारा अपवित्र की गई खजुराहो में भगवान कृष्ण की खंडित मूर्ति की पुनर्स्थापना के लिए दायर याचिका को खारिज करते हुए याचिकाकर्ता का उपहास उड़ाया। उन्होंने इस दौरान तंज किया, “इसके बजाय जाओ और भगवान से प्रार्थना करो।”

धर्मनिरपेक्ष राज्य के लिए बंधुत्व जरूरी- जस्टिस नरीमन

‘सांस्कृतिक अधिकारों और कर्तव्यों का संरक्षण’ विषय पर अपना व्याख्यान देते हुए न्यायमूर्ति नरीमन ने इस बात पर जोर दिया कि संविधान के मूल में निहित बंधुत्व को प्राप्त करने के लिए धर्मनिरपेक्षता आवश्यक है।

उन्होंने आगे कहा कि 42वें संशोधन के जरिए प्रस्तावना में धर्मनिरपेक्षता शब्द जोड़े जाने से पहले ही यह संविधान में मौजूद था। उन्होंने कहा, “यह कहना गलत होगा कि धर्मनिरपेक्षता सिर्फ 42वें संशोधन द्वारा ही लागू की गई। इसका कुछ हिस्सा पहले से संविधान में मौजूद था… अब मेरे हिसाब से भाईचारा हासिल करने की दिशा में धर्मनिरपेक्षता एक ज़रूरी कदम है। एक धर्मशासित राज्य में भाईचारा नहीं हो सकता।”

न्यायमूर्ति नरीमन ने अपने नए पुस्तक ‘एन ओड टू फ्रेटरनिटी’ के बारे में भी बात की। इसमें दुनिया के अलग-अलग धर्मों के बारे में बताया गया है। जस्टिस नरीमन ने कहा कि इस पुस्तक को लिखने से पहले उन्होंने कई धार्मिक ग्रंथों का अध्ययन किया था।

सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश रोहिंटन नरीमन ने मंदिर की माँग कर रहे हिंदुओं को ‘तानाशाह-अत्याचारी’ करार दिया। उन्होंने 2019 में अयोध्या में राम जन्मभूमि पर फैसला सुनाने वाली 5 न्यायाधीशों की खंडपीठ की आलोचना की और कहा कि यह फैसला ‘न्याय का मजाक’ है। इसने धर्मनिरपेक्षता के मूल सिद्धांतों का उल्लंघन किया है।

जस्टिस नरीमन ने कहा, “आज हम देख रहे हैं कि जैसे पूरे देश में हाइड्रा हेड्स (राक्षस) उभर रहे हैं, हर जगह मुकदमें दर्ज हो रहे हैं। अब सिर्फ मस्जिदों से ही नहीं, दरगाहों से भी। यह सब सांप्रदायिक तनाव और वैमनस्य पैदा कर सकता है, जो हमारे संविधान और पूजा स्थल अधिनियम, दोनों में निहित प्रावधानों के बिल्कुल विपरीत है। संविधान पीठ धर्मनिरपेक्षता पर पाँच पन्ने खर्च करती है और कहती है कि इसमें आप पीछे मुडकर नहीं देख सकते। धर्मनिरपेक्षता संविधान के मूल ढाँचे का हिस्सा है… हर धार्मिक पूजा स्थल 15 अगस्त 1947 के हिसाब से रहेगाह। अब, जो कोई भी इसे बदलने की कोशिश करेगा, उसके मुकदमे खारिज हो जाएँगे।”

पूर्व न्यायाधीश ने अपने अतिक्रमित और नष्ट किए गए मंदिरों को पुनः प्राप्त करने के लिए कानूनी उपाय की माँग कर रहे हिंदुओं को ‘हाइड्रा हेड्स’ घोषित किया। एक पूर्व न्यायाधीश ने कानूनी उपाय की माँग कर कानून का पालन करने वाले हिंदुओं को खलनायक बना दिया। सबूतों और योग्यता के आधार पर हिंदूओं के पक्ष में फैसला सुनाने वाले कोर्ट को उसी न्यायाधीश ने मुसलमानों के साथ ‘न्याय का मजाक’ करार दिया।

नरीमन ने विवादास्पद पूजा स्थल अधिनियम को सख्ती से लागू करने की वकालत की, ताकि मंदिरों पर फिर से अधिकार पाने के लिए कोई और मुकदमा दायर न किया जा सके। उनके भाषणों से यह संकेत मिलता था कि ‘धर्मनिरपेक्षता’ को बनाए रखने के लिए हिंदुओं को अपना दावा छोड़ देना चाहिए और चुप रहना चाहिए।

(ये लेख मूल रूप से अंग्रेजी में लिखी गई है। इसे पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।)

राहुल गाँधी ने ‘हाइड्रोजन बम’ कहकर बनाई जिस प्रेस कॉन्फ्रेंस की हवा, PC शुरू होने पर उसे खुद किया फुस्स: CEC ज्ञानेश कुमार पर लगाए ‘वोट चोरी’ करवाने के इल्जाम

कॉन्ग्रेस सांसद राहुल गाँधी ने ‘हाइड्रोजन बम’ बताते हुए अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस शुरू की थी, लेकिन वो फुस्स हो गया। प्रेस कॉन्फ्रेंस शुरू होते ही राहुल गाँधी ने बता दिया कि ये सीधे तौर पर ‘हाइड्रोजन बम’ नहीं है। राहुल गाँधी ने अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस में चुनाव आयोग पर ‘वोट चोरी’ करवाने का आरोप लगाया है। राहुल गाँधी ने कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ‘वोट चोरों’ की रक्षा कर रहे हैं।

राहुल गाँधी ने यह भी आरोप लगाया कि ये सब काम एक संगठित तरीके से, एक सॉफ्टवेयर और कॉल सेंटर का उपयोग करके कॉन्ग्रेस के वोटरों को निशाना बनाया जा रहा है और उनके नाम वोटर लिस्ट से हटाए जा रहे हैं।

ज्ञानेश कुमार पर आरोप

राहुल गाँधी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर सबूत छिपाने और ‘वोट चोरों’ का साथ देने का आरोप लगाया। राहुल गाँधी ने कहा कि कर्नाटक की CID ने चुनाव आयोग को 18 महीने में 18 पत्र लिखकर सबूत माँगे थे, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला।

राहुल गाँधी ने कहा कि ये सब केंद्रीय स्तर पर एक सुनियोजित ऑपरेशन के तहत हो रहा है। इसके अलावा, आरोप लगाया कि वोटर लिस्ट से नाम हटाने के लिए दूसरे राज्यों के मोबाइल नंबरों का इस्तेमाल किया जा रहा है। कर्नाटक में कर्नाटक के नंबर इस्तेमाल ना होकर, दूसरे राज्यों के मोबाइल नंबर इस्तेमाल किए जा रहे हैं।

राहुल गाँधी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को एक हफ्ते का समय देते हुए कर्नाटक CID को सारे सबूत देने की बात कहीं है। राहुल गाँधी ने यह भी कहा कि अगर सबूत नहीं मिले, तो यह माना जाएगा कि ज्ञानेश कुमार संविधान की नहीं, बल्कि ‘वोट चोरों’ की रक्षा कर रहे हैं। हालाँकि, राहुल गाँधी के इस ‘हाइड्रोजन बम’ से कोई नया खुलासा नहीं हुआ और उनके ऐसे आरोप पहले भी सुने जा चुके हैं।

सवालों के घेरे में ‘सबूत’

अपनी ‘हाइड्रोजन बम’ वाली प्रेस कॉन्फ्रेंस में राहुल गाँधी ने आरोपों को साबित करने के लिए कर्नाटक के आलंद में 6018 वोटरों के नाम हटाए जाने का उदाहरण दिया। राहुल गाँधी ने ना सिर्फ कर्नाटक का उदाहरण बताया, बल्कि महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, हरियाणा और बिहार जैसे कई राज्यों में भी इसी तरह से ‘वोट चोरी’ का आरोप लगाया है।

इसके अलावा, राहुल गाँधी ने एक स्क्रीन पर ‘Who’s Someone’ नाम से एक तस्वीर दिखाई, जिसमें दो धुंधली छवियाँ थीं। इन छवियों को पीएम मोदी और अमित शाह के रूप में दर्शाया गया। लेकिन, राहुल गाँधी ने सीधे तौर पर नाम नहीं लिया। आखिरी में राहुल गाँधी ने कहा कि ये ‘हाइड्रोजन बम’ नहीं था, वो तो थोड़ी देर बाद टीम से बात करके सामने आएगा। इसका मतलब जिस बम को लेकर इतने दिनों से हवा बना रहे थे राहुल गाँधी, वो साफतौर पर फुस्स निकला।

जिस कट्टर वामपंथी गुट का चार्ली किर्क की हत्या में आया नाम, उसे राष्ट्रपति ट्रंप ने ‘आतंकी संगठन’ घोषित किया: जानिए Antifa के बारे में सब कुछ

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एंटीफा (Antifa) को आतंकी संगठन घोषित कर दिया है। ट्रंप ने इसे खतरनाक और अति वामपंथी, एंटी-फासिस्ट आंदोलन बताया। कुछ दिनों पहले यूटा वैली यूनिवर्सिटी परिसर के एक कार्यक्रम में ट्रंप के समर्थक और करीबी चार्ली किर्क की हत्या कर दी गई थी। उसकी हत्या का आरोपित टायलर रॉबिन्सन का संबंध एंटीफा से माना जा रहा है।

बुधवार (17 सितंबर 2025) को राष्ट्रपति ट्रंप ने ट्रुथ सोशल प्लेटफॉर्म पर इस कदम की घोषणा की। उन्होंने लिखा, ” मुझे अमेरिका के लोगों को ये बताते हुए खुशी हो रही है कि मैं एंटीफा को आतंकी संगठन घोषित कर रहा हूँ। यह एक बीमार, खतरनाक, कट्टर अति वामपंथी और एक बड़ा आतंकी संगठन है।”

ट्रंप ने आगे लिखा, “मैं यह भी दृढ़ता से अनुशंसा करता हूँ कि एंटीफा को आर्थिक मदद करने वालों की कानूनी रूप से गहनता से जाँच की जाए। इस मामले पर ध्यान देने के लिए धन्यवाद!”

अभी ये साफ नहीं है कि राष्ट्रपति ट्रंप एंटीफा पर रोक किस तरह लगाएँगे, क्योंकि इस संगठन का न ही कोई नेतृत्वकर्ता है और न ही संरचना है। ऐसे में किसे टारगेट किया जाएगा, इसके बारे में साफ नहीं किया गया है।

क्या है एंटीफा

एंटीफा शब्द एंटी-फ़ासीस्ट से बना है। अमेरिका में फासीवाद विरोधी, उग्रवादी, अति वामपंथी लोगों को एंटीफा कहा जाता है। इनका कोई आधिकारिक नेता नहीं होता है और संगठन भी काफी ढीला-ढाला होता है। ये अमेरिका में रंगभेद, नव-नाजी, नव-फासीवाद और श्वेत वर्चस्व के खिलाफ हैं। संगठन के लोग दक्षिणपंथी नेताओं और विचारधारा के कट्टर आलोचक होते हैं।

एंटीफा के समर्थक इसे एक आंदोलन मानते हैं। ये लोग अपनी रणनीति और सिद्धांत आपस में शेयर करते हैं। इसका कोई ऑफिस और आधिकारिक लीडर नहीं होता है, इसलिए ये पता लगाना बेहद मुश्किल है कि ये लोग कहाँ रहते हैं और क्या करते हैं। हालाँकि ये शांतिपूर्ण प्रदर्शन करते हैं।

एंटीफा से जुड़े लोग जिस झंडे का इस्तेमाल करते हैं वह 1917 की रूसी क्रांति के लाल झंडे और 19वीं शताब्दी के अराजकतावादियों के काले झंडे को मिलाकर बनाया गया है। संगठन के लोग दक्षिणपंथी सभाओं और रैलियों का विरोध करते हैं और अक्सर ऐसी सभाओं को रोकने की कोशिश करते हैं। ये लोग एक-दूसरे से सोशल मीडिया, मैसेजिंग सेवाओं, एन्क्रिप्टेड पीयर टू पीयर नेटवर्क और सिग्नल से जुड़े रहते हैं। अमेरिका के कुछ राज्यों में हालाँकि ऐसे लोग मिलकर नियमित बैठकें करते हैं।

एंटीफा को अमेरिका का आतंकी संगठन घोषित किया गया है। अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने इसे इस्लामिक स्टेट और अलकायदा जैसे विदेशी आतंकी संगठनों की सूची में शामिल नहीं करेगा।

चार्ली किर्क की हत्या

10 सितंबर 2025 को राष्ट्रपति ट्रंप के समर्थक चार्ली किर्क की हत्या यूटा वैली यूनिवर्सिटी में एक कार्यक्रम के दौरान कर दी गई थी। उनके गर्दन में एक गोली मारी गई थी। राष्ट्रपति ट्रंप ने किर्क की हत्या पर दुख जताते हुए हत्यारों को किसी भी हाल में नहीं छोड़ने की बात कही थी।

व्हाइट हाउस के एक अधिकारी ने सीएनएन को बताया, “यह उन कई कदमों में से एक है जो राष्ट्रपति राजनीतिक हिंसा को बढ़ावा देने वाले वामपंथी संगठनों से निपटने के लिए उठा रहे हैं।”

हालाँकि राष्ट्रपति ट्रंप औपचारिक राजकीय यात्रा पर विदेश में हैं। उन्होंने सोशल मीडिया पर एंटीफा को आतंकी संगठन घोषित करने की जानकारी दी। ट्रंप ने रूढ़िवादी कार्यकर्ता चार्ली किर्क की हत्या के बाद ओवल ऑफिस से सोमवार (15 सितंबर 2025) को इस कदम के संकेत दे दिए थे।

ट्रंप ने ओवल ऑफिस में कहा, “एंटीफा बहुत बुरा है।” उन्होंने बिना कोई सबूत या विवरण दिए कहा, “हमारे पास कुछ बहुत ही कट्टरपंथी समूह हैं, और वे हत्या करके बच निकलते हैं।” उन्होंने आगे कहा, “उन्हें जेल में डाल दिया जाना चाहिए, वे इस देश के साथ जो कर रहे हैं वह वास्तव में विध्वंसकारी है।”

किर्क की हत्या के बाद प्रशासनिक अधिकारियों ने भी कहा था कि वे हिंसा भड़काने के एक समन्वित वामपंथी प्रयास के खिलाफ कार्रवाई करेंगे। हालाँकि कुछ डेमोक्रेट्स ने इस कदम का विरोध किया है। इनका आरोप है कि ट्रंप असहमति या विरोधी विचारों पर नकेल कसने का बहाना बना रहे हैं।

ट्रंप ने अपने पहले कार्यकाल में एंटीफा पर लगाम कसने की कोशिश की थी। ट्रंप समर्थक जॉज फ्लॉयड की हत्या के बाद वे एंटीफा को एक आतंकवादी संगठन घोषित करना चाहते थे। उन्होंने तत्कालीन अटॉर्नी जनरल विलियम बार ने कहा था कि इसकी गतिविधियाँ ‘घरेलू आतंकवाद’ को बढ़ाती हैं। उस वक्त एफबीआई के डायरेक्टर क्रिस्टोफर ने अपनी गवाही के दौरान कहा था कि एंटीफा एक संगठन नहीं, बल्कि एक विचारधारा है। इसकी कोई संरचना नहीं है। जबकि किसी संगठन को आतंकी घोषित करने के लिए संरचना का होना जरूरी है।

बुर्ज खलीफा पर चमचमाया PM मोदी का नाम, कोलंबो में बोहरा मुस्लिमों ने खास दुआ पढ़ी: 75वें जन्मदिन पर प्रधानमंत्री को दुनियाभार से आई बधाई

भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 75वें जन्मदिन के मौके पर बुधवार (17 सितंबर 2025) को दुबई में स्थित दुनिया की सबसे ऊँची इमारत बुर्ज खलीफा को उनकी तस्वीरों और शुभकामनाओं से रोशन किया गया।

इस खास मौके पर बुर्ज खलीफा पर ‘Happy Birthday’, ‘75 Years’, ‘सेवा ही संकल्प और ‘India First – The Inspiration’ जैसे संदेश दिखाई दिए। ये नजारा दुबई के आसमान में दूर-दूर तक दिखा और बहुत से लोगों ने इसे अपने कैमरों में कैद किया।

पीएम मोदी को उनके जन्मदिन पर दुनिया भर से बधाइयाँ मिलीं, जिससे भारत की बढ़ती अंतरराष्ट्रीय छवि भी झलकती है। यूएई के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद ने हिंदी, अरबी और अंग्रेजी में बधाई देते हुए लिखा, “नरेंद्र मोदी को जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएँ। आपके अच्छे स्वास्थ्य, खुशी और भारत की तरक्की में निरंतर सफलता की कामना करता हूँ।”

अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फोन कर पीएम मोदी को जन्मदिन की बधाई दी और यूक्रेन युद्ध को खत्म करने की कोशिशों में समर्थन के लिए धन्यवाद दिया। वहीं रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने भी व्यक्तिगत रूप से फोन कर जन्मदिन की शुभकामनाएँ दीं।

इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने सोशल मीडिया पर लिखा, “उनकी ताकत, संकल्प और नेतृत्व क्षमता लाखों लोगों के लिए प्रेरणा है। उनके अच्छे स्वास्थ्य और ऊर्जा की कामना करती हूँ।” यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डर लेयन ने भी पीएम मोदी को बधाई दी और भारत-यूरोप साझेदारी को और मजबूत करने की बात कही।

इस खास मौके पर साउथ अफ्रिका के राष्ट्रपति सिरिल रामफोसा, पापुआ न्यू गिनी के प्रधानमंत्री जेम्स मारापे, मॉरीशस के प्रधानमंत्री नवीनचंद्र रामगुलाम, यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा और ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री ऋषि सुनक सहित तमाम वैश्विक हस्तियों ने पीएम को जन्मदिन की शुभकामनाएँ दी।

इसके अलावा साइप्रस के राष्ट्रपति निकोस क्रिस्टोडौलिडेस, केन्या के पूर्व प्रधानमंत्री रैलाओडिंगा, त्रिनिदाद और टोबैगो की प्रधानमंत्री कमला प्रसाद बिसेसर, इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने भी पीएम मोदी के अच्छे स्वास्थ्य की कामना करते हुए उन्हें जन्मदिन की बधाई दी।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का 75वाँ जन्मदिन देश और दुनिया में श्रद्धा, उत्सव और शुभकामनाओं के साथ मनाया गया। भारत ही नहीं, विदेशों में भी उनके लिए प्रार्थनाएँ की गईं और शुभकामनाएँ भेजी गईं।

कोलंबो में बोहरा मुस्लिम समुदाय की विशेष प्रार्थना

श्रीलंका की राजधानी कोलंबो में बोहरा मुस्लिम समुदाय ने अपने मस्जिद में पीएम मोदी के लिए विशेष दुआ की। एक वीडियो में दिखा कि लोग एक साथ उनके अच्छे स्वास्थ्य, लंबी उम्र और देश सेवा के लिए प्रार्थना कर रहे थे।

वाराणसी में धार्मिक अनुष्ठान

पीएम मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में दिनभर धार्मिक और सामाजिक गतिविधियाँ होती रहीं। दशाश्वमेध घाट पर सिटी साउथ विधायक डॉ नीलकंठ तिवारी ने 108 वैदिक आचार्यों के साथ मिलकर दुग्धाभिषेक किया। वैदिक मंत्रों के साथ यह प्रार्थना प्रधानमंत्री की लंबी उम्र और देश की समृद्धि के लिए की गई।

वहीं शाम को नमो घाट पर विशेष गंगा आरती का आयोजन किया गया, जिससे आध्यात्मिक वातावरण और भी भव्य हो गया। जयापुर गाँव, जिसे पीएम मोदी ने 2014 में सांसद आदर्श ग्राम योजना के तहत अपनाया था, वहाँ ग्रामीणों ने पंचायत भवन में उनकी तस्वीर पर माला चढ़ाई और केक काटकर जन्मदिन मनाया।

इस अवसर पर काशी विश्वनाथ मंदिर में साधु-संतों ने सहस्रार्चन (1,100 कमल पुष्पों से पूजा) और महरुद्राभिषेक किया। इस पूजा में पीएम मोदी के स्वास्थ्य, देश की एकता और वैश्विक शांति के लिए प्रार्थनाएँ की गईं। इसके अलावा अस्पतालों, अनाथालयों और वृद्धाश्रमों में फलों का वितरण कर जरूरतमंदों के बीच खुशियाँ बाँटी गईं।

पेंटिंग्स से लेकर मूर्तियों तक, ऑनलाइन खरीदें प्रधानमंत्री को मिले अनमोल उपहार

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को मिले उपहारों की ई-नीलामी भी शुरू हो गई है। यह ई-नीलामी 2 अक्टूबर 2025 तक चलेगी, जिसमें लोग PMMementos नाम की वेबसाइट पर जाकर इन उपहारों के लिए बोली लगा सकते हैं। इस बार इस ई-नीलामी का सातवाँ संस्करण है, जिसमें 1300 से अधिक उपहार नीलामी के लिए रखे गए हैं।

इनमें पेंटिंग्स, कलाकृतियाँ, मूर्तियाँ, देवी-देवताओं की मूर्तियाँ और खेल से जुड़ी चीजें शामिल हैं। इस नीलामी से जो भी पैसा मिलेगा, वह नमामि गंगे परियोजना को दिया जाएगा, जो गंगा नदी की सफाई और संरक्षण के लिए चलाई जा रही है।

केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत ने राष्ट्रीय आधुनिक कला संग्रहालय (NGMA) में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यह पहल पहली बार जनवरी 2019 में शुरू हुई थी। तब से अब तक हजारों उपहारों की नीलामी हो चुकी है और 50 करोड़ रुपये से अधिक की राशि नमामि गंगे परियोजना के लिए जुटाई गई है।

गजेन्द्र सिंह शेखावत ने यह भी बताया कि नरेन्द्र मोदी देश के पहले प्रधानमंत्री हैं, जिन्होंने अपने सभी उपहार इस सामाजिक कार्य के लिए समर्पित कर दिए हैं।

कर्नाटक में कॉन्ग्रेस पर ही लगा ‘वोट चोरी’ का इल्जाम, MLA की जाएगी विधायकी?: जानें HC ने सुनाया क्या फैसला, राहुल गाँधी का ‘हाइड्रोजन बम’ गिरने से पहले होगा फुस्स

कॉन्ग्रेस सांसद राहुल गाँधी लगातार बीजेपी और चुनाव आयोग पर ‘वोट चोरी’ का आरोप लगाते आ रहे थे, लेकिन अब उन्हीं की पार्टी के विधायक वाई नंजेगौड़ा पर ‘वोट चोरी’ का आरोप खुद कर्नाटक की हाई कोर्ट ने लगाया है। कर्नाटक विधानसभा चुनाव 2023 में मालूर सीट पर कॉन्ग्रेस विधायक के वाई नंजेगौड़ा की जीत को कर्नाटक हाई कोर्ट ने अमान्य कर दिया है।

हाईकोर्ट ने वोटों की गिनती में गड़बड़ियों का हवाला देते हुए फिर से वोटों की गिनती का आदेश दिया है। इस फैसले के बाद बीजेपी ने कॉन्ग्रेस पर ‘वोट चोरी’ का आरोप लगाया है। इसी बीच, कॉन्ग्रेस के नेता राहुल गाँधी गुरुवार (18 सितंबर 2025) को प्रेस कॉन्फ्रेंस करेंगे। इसमें राहुल गाँधी ने बीजेपी पर ‘वोट चोरी’ का ‘हाइड्रोजन बम’ गिराने की बात कही है। इससे पहले राहुल गाँधी ‘एटम बम’ गिराने की बात कर चुके हैं।

हाई कोर्ट का फैसला और नंजेगौड़ा पर असर

कर्नाटक हाई कोर्ट ने मंगलवार (16 सितंबर 2025) को 2023 के विधानसभा चुनाव में नंजेगौड़ा की जीत को रद्द कर दिया। कोर्ट ने कहा कि वोटों की गिनती में गड़बड़ी हुई थी और इसकी जाँच होनी चाहिए। जिला चुनाव अधिकारी ने कोर्ट में गिनती की वीडियो रिकॉर्डिंग भी पेश नहीं की।

कर्नाटक HC ने कॉन्ग्रेस विधायक के वाई नंजेगौड़ा की विधायकी रद्द कर दोबारा वोटो की गिनती का आदेश दिया

कोर्ट ने 4 हफ्तों के भीतर फिर से वोटों की गिनती करने का आदेश दिया है। हालाँकि, कॉन्ग्रेस विधायक नंजेगौड़ा को सुप्रीम कोर्ट में अपील करने के लिए 30 दिनों का समय दिया गया है। नंजेगौड़ा के लिए यह फैसला बड़ा झटका है क्योंकि उनकी गिनती कर्नाटक मिल्क फेडरेशन के अगले अध्यक्ष के तौर पर हो रही थी।

बीजेपी का कॉन्ग्रेस पर पलटवार

इस फैसले के बाद बीजेपी विधायक दल के नेता आर अशोक ने कॉन्ग्रेस पर ‘वोट चोरी’ का आरोप लगाया है। बीजेपी विधायक ने सवाल उठाया कि क्या राहुल गाँधी नंजेगौड़ा के खिलाफ ‘वोट चोरी यात्रा’ निकालेंगे। यह आरोप तब लग रहे हैं जब राहुल गाँधी लगातार केंद्र सरकार और चुनाव आयोग पर ‘वोट चोरी’ का आरोप लगा रहे हैं।

मालूर सीट का चुनावी गणित

मालूर विधानसभा सीट कर्नाटक की कोलार लोकसभा क्षेत्र में आती है, जो अनुसूचित जाति (SC) के लिए आरक्षित है। 2023 के चुनाव में कॉन्ग्रेस विधायक नंजेगौड़ा ने 29.4% वोट हासिल किए थे, जबकि भाजपा के मंजीनाथ गौड़ा को 29.26% वोट मिले थे। तीसरे नंबर पर निर्दलीय उम्मीदवार हुड्डी विजयकुमार थे, जिन्हें 28.48% वोट मिले। जेडीएस उम्मीदवार को सिर्फ 10.17% वोट मिले।

इस सीट पर तीन प्रमुख दावेदार थे और वोट प्रतिशत में बहुत मामूली अंतर था। चुनावी इतिहास में मालूर में कभी भी ऐसे करीबी मुकाबले नहीं देखे गए थे। यहाँ हमेशा जीतने वाले उम्मीदवार को 40% से ज्यादा वोट मिलते थे।

राहुल गाँधी की प्रेस कॉन्फ्रेंस

राहुल गाँधी की प्रेस कॉन्फ्रेंस की चर्चा तेज हो गई है। कॉन्ग्रेस के मीडिया प्रमुख पवन खेड़ा ने बताया कि राहुल गाँधी गुरुवार (18 सितंबर 2025) सुबह 10 बजे इंदिरा भवन में एक विशेष प्रेस ब्रीफिंग करेंगे।

हालाँकि, राहुल गाँधी ने यह नहीं बताया कि वे किस मुद्दे पर बोलेंगे। पहले राहुल ने अपनी ‘वोटर अधिकार यात्रा’ के समापन कार्यक्रम में कहा था कि कॉन्ग्रेस जल्द ही ‘वोट चोरी’ के खिलाफ एक ‘हाइड्रोजन बम‘ फोड़ेगी, जिसके बाद प्रधानमंत्री मोदी देश का सामना नहीं कर पाएँगे। इससे पहले राहुल गाँधी ‘वोट चोरी’ पर ‘एटम बम’ गिराने की बात कर चुके हैं।

कर्नाटक चुनाव में हुई गड़बड़ियों और ‘वोट चोरी’ के आरोपों ने राज्य की राजनीति में हलचल मचा दी है। कर्नाटक हाई कोर्ट के फैसले ने कॉन्ग्रेस विधायक नंजेगौड़ा को झटका दिया है। अब कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी की प्रेस कॉन्फ्रेंस पर सबकी नजरें टिकी हैं, जहाँ वह इस मुद्दे पर या तो अपने विधायक के आरोपों पर पर्दा ढक सकते हैं या फिर कुछ नया खुलासा कर सकते हैं।

‘अब लोगों के हाथों में होगा पैसा’: वित्त मंत्री ने कहा- GST की नई कीमतों के अनुसार लेबलिंग करें कंपनियाँ, सरकार ने जारी किया नोटिफिकेशन

देश में 22 सितंबर 2025 से वस्तु और सेवा कर (GST) में नए बदलाव होने जा रहे हैं। इसको लेकर बुधवार (17 सितंबर 2025) को सरकार ने नए रेट्स का नोटिफिकेशन जारी कर दिया है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि नए बदलावों से अर्थव्यवस्था में ₹2 लाख करोड़ का निवेश होगा।

वित्त मंत्री ने कहा, “इस नई पीढ़ी की टैक्स व्यवस्था में केवल दो स्लैब (5 प्रतिशत और 18 प्रतिशत) हैं। इससे अर्थव्यवस्था में ₹2 लाख का निवेश होगा। अब पैसा लोगों के हाथों में होगा।” उन्होंने इस पर भी प्रकाश डाला कि नए GST बदलावों से लगभग 99 प्रतिशत वस्तुओं पर 12 प्रतिशत से घटकर अब 5 प्रतिशत GST लगेगी।

इसी बदलाव में 90 प्रतिशत वस्तुएँ, जिन पर 28 प्रतिशत GST था, उन वस्तुओं पर अब सिर्फ 18 प्रतिशत GST ही लगेगा। वित्त मंत्री ने यह भी कहा कि नए GST व्यवस्था को FMCG संस्थानों ने अपनाया है और 22 सितंबर 2025 से लोगों को लाभ पहुँचाने का भी वादा किया है।

निर्मला सीतारमण ने बताया कि NDA सरकार ने दरों में बदलाव करने से पहले पाँच महत्वपूर्ण बातों पर ध्यान दिया। इनमें गरीब और मध्यम वर्ग को राहत देना, मध्यम वर्ग की जरूरतों को पूरा करना, किसानों का समर्थन करना, छोटे और मध्यम व्यवसायों की मदद करना और रोजगार और निर्यात बढ़ाने वाले क्षेत्रों पर ध्यान देना शामिल है।

GST में बदलाव के नोटिफिकेशन के मुताबिक, 22 सितंबर 2025 से कुछ वस्तुएँ अब नई कीमत से बाजार में उपलब्ध होंगी। अगले कुछ दिनों में हर राज्य में GST की नई दरों को लागू करने के लिए अलग-अलग नोटिफिकेशन भी जारी किए जाएँगे।

उधर, केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBIC) भी उद्योग और हितधारकों के साथ मिलकर बदलाव संबंधित मुद्दों को आसान बनाने और तमाम मुद्दों पर स्पष्टीकरण देने के लिए काम कर रहा है। जबकि सरकार ने फिलहाल केवर नई कीमतों के फिर से लेबलिंग के लिए आवश्यक नोटिफिकेशन जारी किया है।

सरकार ने GST में बदलाव कर आम आदमी को पहुँचाया फायदा

उल्लेखनीय है कि हाल ही में हुई GST (वस्तु एवं सेवा कर) काउंसिल की 56वीं बैठक में कई बड़े और अहम फैसले लिए गए, जिनका सीधा फायदा आम लोगों को मिलेगा। पहले जीएसटी में चार प्रमुख स्लैब थे– 5%, 12%, 18% और 28%। अब इसे घटाकर दो मुख्य स्लैब कर दिए गए हैं– 5% और 18%। सिर्फ कुछ खास और महँगे सामानों पर ही 40% टैक्स लगेगा।

ये वो चीजें हैं जिन्हें ‘सिन गुड्स’ या ‘डेमेरिट गुड्स’ कहा जाता है, जैसे तंबाकू, पान मसाला, सिगरेट और बहुत महँगी गाड़ियाँ। सरकार का मकसद था कि आम आदमी पर टैक्स का बोझ कम हो और कारोबार करना आसान हो जाए।

भारत-EU के बीच अंतिम चरण में व्यापार वार्ता, साल के आखिर तक हो जाएगी FTA डील: PM मोदी के जन्मदिन पर यूरोपीय कमीशन की प्रेसिडेंट ने खुद की घोषणा

भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच लंबे समय से चल रहा FTA समझौते पर बातचीत अब अंतिम दौर की ओर बढ़ चुकी है। दोनों पक्षों की 14वीं वार्ता 6 से 10 अक्टूबर तक ब्रसेल्स में होगी। इस समझौते को दोनों देश संतुलित और परस्पर लाभकारी बताकर आगे बढ़ा रहे हैं। यूरोपीय कमीशन की प्रेसीडेंट उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने पीएम मोदी के जन्मदिन पर न सिर्फ उन्हें बधाई दी, साथ ही उन्होंने ये भी बताया कि इस साल के आखिर तक दोनों पक्षों में FTA समझौता पूरा हो जाएगा।

पीएम मोदी ने भी उर्सुला वॉन डेर लेयेन की शुभकामनाओं को लिए शुक्रिया कहा। साथ ही कहा कि भारत और यूरोपीय यूनियन मिलकर आगे का रास्ता तय करेंगे।

कॉमर्स मिनिस्टर पीयूष गोयल ने भरोसा जताया है कि भले ही हर मुद्दे पर सहमति न बने, लेकिन नतीजा एक बेहतरीन समझौता होगा। इससे पहले 13वाँ दौर भारत में हुआ था, जिसमें यूरोपीय संघ के वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया था। यूरोप की माँग मुख्य रूप से ऑटोमोबाइल क्षेत्र में शुल्क रियायतों की है। भारत इस समय आयातित गाड़ियों पर 100 प्रतिशत से अधिक टैक्स लगाता है।

ब्रिटेन के साथ हुए हालिया समझौते में भारत ने ऑटो कंपनियों को कुछ रियायतें दी थीं, अब EU भी वैसा ही चाहता है। फॉक्सवैगन और मर्सिडीज-बेंज जैसी कंपनियाँ पहले से भारत में मौजूद हैं और रियायतों के बाद उन्हें और बड़ा अवसर मिलेगा। यूरोपीय संघ का मानना है कि यह साझेदारी केवल व्यापार तक सीमित नहीं है।

बड़े पैमाने पर निवेश आएगा और भारत में हजारों नई नौकरियाँ पैदा होंगी। इसके लिए EU ने हाल ही में नया रणनीतिक एजेंडा भी पेश किया है। इसमें पाँच बड़े लक्ष्य तय किए गए हैं, व्यापार और निवेश को बढ़ाना, प्रतिभा व कौशल विकास, सप्लाई चेन की सुरक्षा, स्वच्छ ऊर्जा और रक्षा सहयोग।

खास बात यह है कि इस साल के अंत तक FTA को अंतिम रूप देने की घोषणा भी की गई है। रणनीति में सुरक्षा और रक्षा को विशेष जगह मिली है। हिंद महासागर और इंडो-पैसिफिक में समुद्री सुरक्षा, साइबर डिफेंस, आतंकवाद-रोधी सहयोग और रक्षा उद्योग में तकनीकी साझेदारी इसके अहम हिस्से हैं।

सूचना सुरक्षा पर भी नई बातचीत शुरू होगी। बदलते वैश्विक हालात में EU चीन जैसी अर्थव्यवस्थाओं पर निर्भरता कम करना चाहता है और भारत इसमें भरोसेमंद साथी माना जा रहा है।

इसी बीच अमेरिका का रवैया भी बदला है। पहले जहाँ वह भारत के साथ व्यापार और रणनीतिक मुद्दों पर सख्ती दिखा रहा था, वहीं अब वह भी नरमी बरत रहा है। इंडो-पैसिफिक में चीन का दबदबा और बदलते भू-राजनीतिक हालात ने अमेरिका को मजबूर किया है कि वह भारत को मजबूत सहयोगी माने।

बिहार की हर सीट पर तेजस्वी का चेहरा चुनाव लड़ रहा है… गईल भैंस पानी में

बिहार चुनावी साल में है। राजनीतिक यात्राओं/सभाओं का मौसम है। बयानों की बाढ़ है। इसी में बहकर आया है तेजस्वी यादव का एक बयान है। उनका कहना है कि बिहार की सभी 243 सीटों पर उनका चेहरा चुनाव लड़ रहा है।

एक जनसभा को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा,

इस बार तेजस्वी 243 सीटों पर चुनाव लड़ेगा। चाहे बोचहां हो या मुजफ्फरपुर। तेजस्वी लड़ेगा। मैं आप सभी से अपील करता हूँ कि मेरे नाम पर वोट दें।

लालू प्रसाद यादव की पारिवारिक पार्टी राजद चाहती है कि इस बार चुनाव में INDI गठबंधन तेजस्वी यादव को मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित कर उतरे। कॉन्ग्रेस, लेफ्ट सहित राजद के अन्य छोटे सहयोगी इससे कन्नी काट रहे हैं।

तेजस्वी यादव के नाम से क्यों डर रहा INDI गठबंधन

इसका एक कारण यह बताया जाता है कि कॉन्ग्रेस को लगता है कि तेजस्वी यादव के चेहरे के साथ चुनावी मैदान में जाने पर उसे अगड़ों का जो छिटपुट वोट बिहार में मिल रहा है, वह भी उसके हाथ से निकल जाएगी। साथ ही यह भी बताया जाता है कि सहयोगी दल तेजस्वी यादव के नाम पर मु​हर नहीं लगाकर, ज्यादा से ज्यादा सीट देने के लिए राजद पर दबाव बढ़ाना चाहते हैं।

इसी बौखलाहट में तेजस्वी यादव ने ‘तेजस्वी बिहार के सभी 243 सीटों पर चुनाव लड़ेगा’ का दंभ भरा है। पर इस फेर में वे भूल गए नाम या चेहरा, केवल कुछ शब्द भर नहीं होते हैं। केवल तस्वीर ही नहीं होती है। नाम और चेहरा, इतिहास और जनता की स्मृतियों का प्रतीक भी होते हैं।

जिस नाम और चेहरा से तेजस्वी यादव को राजद की बागडोर मिली है, उसका इतिहास कुछ ऐसा है, उसकी स्मृतियाँ बिहार के लोगों के मस्तिष्क में कुछ इस तरह अंकित है, कि वह नाम और चेहरा को तेजस्वी यादव के लिए बोझ बना देती है। ऐसे में यह बयान न केवल INDI गठबंधन के भीतर चल रहे द्वंद्व को उजागर करता है, बल्कि बिहार के लोगों के भीतर उस डर को भी पैदा करता है, जिससे पीछा छुड़ाकर वे यहाँ तक पहुँचे हैं।

बिहार को डराता है तेजस्वी यादव का नाम और चेहरा

बिहार से ही आने वाले वरिष्ठ पत्रकार संतोष कुमार ने अपनी पुस्तक ‘भारत कैसे हुआ मोदीमय’ में 2019 के आम चुनावों से पहले एक प्रजेंटेशन का हवाला देते हुए लिखा है, “इस प्रजेंटेशन में सवाल हुआ- अगर आप (दो बड़े उद्योपतियों का नाम लिया गया, जिसमें एक भगोड़ा है तो दूसरा लंबे समय तक जेल में रहा, जिनके नाम का खुलासा करना उचित नहीं होगा) इनका नाम लेते हैं तो आपके जेहन में क्या छवि आती है? जवाब था- फ्रॉड की। लेकिन जब नरेंद्र मोदी का नाम लेते हैं तो क्या जवाब होता है? एक ऐसा नेता जो कोई भी बड़ा निर्णय ले सकता है, चाहे विकास के एजेंडे पर हो या फिर राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा।”

ऐसे ही यदि आपसे यह पूछा जाए कि तेजस्वी यादव का नाम सुनते ही या फोटो देखते ही आपके जेहन में क्या छवि आती है? जाहिर है आपको लालू-राबड़ी का जंगलराज याद आ जाएगा।

राजद के सालों तक सत्ता से बाहर रहने के बाद भी, तेजस्वी को नए दौर का युवा नेता बताए जाने के बाद भी, उस जंगलराज उसका डर ऐसा है कि लोगों को लगता है कि उनके सत्ता में आने से अपराध का तंत्र फिर से मजबूत होगा।

  • तेजस्वी यादव का चेहरा बिहार के लोगों को उस दौर की याद दिलाता है, जब अपहरण उद्योग में बदल गया था। जब लोग देश के अलग-अलग हिस्सों में पलायन करने को मजबूर कर दिए गए। जब देश के अन्य राज्य विकास की दौड़ में शामिल हो रहे थे तो जातिवाद और भ्रष्टाचार ने बिहार को कैद कर रखा था।
  • तेजस्वी यादव की राजनीति ‘MY समीकरण’ पर ही टिकी है। यह न केवल उनकी राजनीतिक जमीन को सीमित करता है, बल्कि यह समीकरण बहुसंख्यक जनता के लिए असुरक्षा की भावना भी पैदा करता है।
  • तेजस्वी यादव राजनीतिक तौर पर आज जहाँ हैं, वहाँ राजनीति में घिस-घिस कर नहीं पहुँचे हैं। वे वंशवाद की देन हैं। बिहार के लोगों पर राजद की ओर से थोपे गए हैं। क्रिकेटर से नेता बनने की अपनी यात्रा में उनके पास गिनाने/दिखाने के लिए ऐसा कुछ भी ठोस नहीं है जो उनके नाम और चेहरा से उभरने वाली छवि को बदल दे।

इसके उलट नीतीश कुमार ने भले समय-समय पर साझेदार बदले हैं, लेकिन मोटे तौर पर उनकी छवि ऐसे नेता की है जिसने बिहार के लोगों को अपराध और भय से छुटकारा दिलाया है। बिजली, सड़क, शिक्षा के क्षेत्र में सुधार किए हैं।

वहीं तेजस्वी यादव का नाम और चेहरा, जिस विरासत और परिवार से जुड़ा है, उसकी राजनीति को लोग अपराध और भ्रष्टाचार से अलग कर नहीं देख पाते हैं। यही कारण है कि यदाकदा तेजस्वी यादव अपने भाषणों में भले रोजगार-विकास जैसी बातें कर लें, लेकिन जनता उन्हें उसी पुरानी राजनीति का उत्तराधिकारी मानती है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की जोड़ी ने बिहार में विकास की नई आकांक्षाओं को पैदा किया है। ऐसे तेजस्वी यादव का नाम और चेहरा इन आकांक्षाओं के दफन हो जाने का भय पैदा करता है।

बिहार में एक कहावत है- एक बेर साँप काटलक, दोसर बेर रस्सी देखिते कँपलौं। यानी भयावह अनुभव झेल चुके लोग उस तरह की किसी भी स्थिति की आहट से ही काँप उठते हैं। असल में तेजस्वी यादव वह ‘रस्सी’ हैं, जो जनता को ‘साँप’ की याद दिलाती है। ऐसे में सभी 243 सीट पर अपना नाम और चेहरा होने का उनका दंभ भरना, उस भयावह अतीत की याद दिलाता है जिसकी कल्पना मात्र से ही बिहार सिहरने लगता है।

टेक्सटाइल सेक्टर में ₹15431 करोड़ का निवेश लाई योगी सरकार, कर्मचारियों के अधिकारों की भी करेगी रक्षा: विकसित उत्तर प्रदेश की दिशा में तेजी से बढ़े कदम

उत्तर प्रदेश में अस्थायी और संविदा कर्मचारियों के लिए राज्य सरकार ने हाल ही में उत्तर प्रदेश आउटसोर्स सेवा निगम लिमिटेड का गठन किया है। यह एक गैर-लाभकारी सार्वजनिक लिमिटेड कंपनी होगी, जिसका उद्देश्य सरकारी विभागों में आउटसोर्सिंग एजेंसियों के चयन में पारदर्शिता लाना और अस्थायी कर्मचारियों से जुड़े वेतन, नौकरी सुरक्षा और सामाजिक सुरक्षा संबंधी मुद्दों का समाधान करना है।

इस पहल के तहत अब यूपी के 93 सरकारी विभागों में काम करने वाली आउटसोर्स एजेंसियों का चयन सीधे विभागों द्वारा नहीं बल्कि नए पोर्टल GEM (Government e-Marketplace) के माध्यम से निष्पक्ष प्रक्रिया से किया जाएगा। सरकार का दावा है कि इससे लाखों कर्मचारियों को एजेंसियों के जरिए मिलने वाले कम वेतन और शोषण से राहत मिलेगी।

अकेले यूपी में ही लगभग 11 लाख ऐसे कर्मचारी हैं, जिन्हें अस्थायी रूप से एजेंसियों के माध्यम से नियुक्त किया गया है और जो वेतन और नौकरी की अनिश्चितता का सामना कर रहे हैं।

राष्ट्रीय स्तर पर देखें तो केंद्र और राज्य दोनों में करीब 30 से 43 प्रतिशत कार्यबल अस्थायी, संविदा या आउटसोर्स व्यवस्था के तहत काम कर रहा है। इसमें डाटा एंट्री, क्लर्की, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी सेवाएँ शामिल हैं।

साल 2014 के एक अध्ययन के अनुसार, कुल सरकारी कार्यबल का लगभग 43 प्रतिशत यानि (लगभग 1.23 करोड़) कर्मचारी अस्थायी थे। हाल के रुझानों के अनुसार वित्त वर्ष 2024-25 तक यह संख्या डेढ़ से दो करोड़ तक पहुँच सकती है, खासकर स्वास्थ्य, शिक्षा और इन्फ्रास्ट्रक्चर क्षेत्रों में।

संयुक्त राष्ट्र के अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) की इंडिया एंप्लॉयमेंट रिपोर्ट 2024 के मुताबिक, संगठित क्षेत्र में संविदा कर्मचारियों की संख्या लगातार बढ़ रही है। आउटसोर्सिंग की व्यवस्था में कर्मचारी सीधे विभाग के नहीं बल्कि बाहरी एजेंसी के कर्मचारी होते हैं।

एजेंसियाँ कम लागत पर कर्मचारियों को अनुबंध के तहत नियुक्त करती हैं और अनुबंध खत्म होने पर उन्हें हटा देती हैं या रिन्यू कर देती हैं। सरकारी विभागों में इसका उद्देश्य भर्ती प्रक्रिया में तेजी लाना, प्रशासनिक बोझ कम करना और लागत में कटौती करना है।

हालाँकि, इस व्यवस्था में कर्मचारियों को सीमित वेतन, कम सामाजिक सुरक्षा और नौकरी की अनिश्चितता का सामना करना पड़ता है। कई बार एजेंसियों पर कर्मचारियों की सैलरी रोकने और शोषण करने के आरोप भी लगते रहे हैं। यही कारण था कि लंबे समय से सरकारी स्तर पर ऐसे प्रबंधों की जरूरत महसूस की जा रही थी, जो अस्थायी कर्मचारियों के हित सुरक्षित कर सकें।

उत्तर प्रदेश आउटसोर्स सेवा निगम इन्हीं जरूरतों को पूरा करने के लिए बनाया गया है। निगम के माध्यम से कर्मचारियों को नियमित मानदेय, सीधे वेतन हस्तांतरण, गारंटीकृत EPF और ESI योगदान के साथ-साथ मातृत्व अवकाश और अंतिम संस्कार सहायता जैसी सामाजिक सुरक्षा सुविधाएँ मिलेंगी।

इसके अलावा, आउटसोर्स कर्मचारियों की नियुक्ति कम से कम तीन साल के लिए सुनिश्चित की जाएगी। वेतन हर महीने एक से पाँच तारीख के बीच सीधे बैंक खाते में जमा होगा। अगर यह प्रबंध सफल रहा तो यूपी रोजगार क्षेत्र में एक नया मॉडल तैयार कर सकता है।

टेक्सटाइल पार्क बनेगा रोजगार सृजन का आधार

सिर्फ अस्थायी कर्मचारियों की सुरक्षा ही नहीं बल्कि रोजगार सृजन को बढ़ावा देने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने टेक्सटाइल सेक्टर पर विशेष फोकस किया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हाल ही में एक उच्चस्तरीय बैठक में प्रदेश में टेक्सटाइल पार्क बनाने का निर्णय लिया। इसके तहत हथकरघा और वस्त्र उद्योग में निजी निवेशकों को आकर्षित किया जाएगा।

सरकार के निवेश सारथी पोर्टल के अनुसार, अब तक वस्त्र एवं परिधान क्षेत्र से जुड़े 659 प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं, जिनके लिए लगभग 1642 एकड़ भूमि की आवश्यकता है। अनुमानित निवेश मूल्य 15,431 करोड़ रुपए है और इसके फलस्वरूप 1,01,768 रोजगार अवसर सृजित होने की संभावना है।

सीएम योगी ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि निवेश प्रस्तावों के लिए जमीन की पहचान जल्द से जल्द की जाए। योजना का क्रियान्वयन पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल या नोडल एजेंसी के माध्यम से होगा। योजना के तहत टेक्सटाइल पार्क कम से कम 50 एकड़ भूमि पर विकसित किए जाएँगे।

इनमें प्रसंस्करण उद्योगों के लिए कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट की स्थापना अनिवार्य होगी। इसके अलावा बाटन, जिप, लेबल, पैकेजिंग और वेयरहाउस जैसी सहायक इकाइयों का भी विकास किया जाएगा।

मुख्यमंत्री ने योजना को महान संत कबीर के नाम पर समर्पित किया और कहा कि संत कबीर के जीवन दर्शन श्रम, सदगी और आत्मनिर्भरता को योजना का आधार बनाया जाएगा। वर्तमान में प्रदेश का वस्त्र एवं परिधान निर्यात 3.5 अरब अमेरिकी डॉलर है, जो देश के कुल निर्यात का लगभग 9.6 प्रतिशत है।

इस क्षेत्र का यूपी की GDP में योगदान 1.5 प्रतिशत है और लगभग 22 लाख लोग इस उद्योग से सीधे जुड़े हैं। विशेषज्ञों का अनुमान है कि वैश्विक वस्त्र बाजार 2030 तक 23 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुँच जाएगा और भारत इसमें सबसे तेजी से बढ़ने वाले देशों में शामिल होगा। ऐसे में यूपी की भागीदारी निर्णायक साबित हो सकती है।