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भारत-अमेरिका FTA वार्ता के बीच CEA का बयान, US टैरिफ का मामला जल्द हो जाएगा सही: रेसिप्रोकल ड्यूटी के भी 10-15% कम होने से बढ़ेगा ट्रेड

भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक संबंधों को लेकर सकारात्मक संकेत सामने आए हैं। मुख्य आर्थिक सलाहकार (CEA) वी अनंथा नागेश्वरन ने गुरुवार (18 सितम्बर 2025) को कहा कि अमेरिका भारत के आयात पर लगाए गए 25 फीसदी पीनल टैरिफ को 30 नवंबर के बाद वापस ले सकता है।

उन्होंने भरोसा जताया कि आने वाले महीनों में न सिर्फ यह दंडात्मक टैरिफ खत्म होगा बल्कि अमेरिका की ओर से लगाई गई रेसिप्रोकल ड्यूटी भी मौजूदा 25 फीसदी से घटाकर 10-15 फीसदी तक लाई जा सकती है।

मामला क्या है?

दरअसल, पिछले महीने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस से भारत के बढ़ते तेल व्यापार को लेकर नाराजगी जताते हुए भारतीय आयात पर 25 फीसदी का अतिरिक्त पेनल टैरिफ लगा दिया था।

यह पहले से लागू 25 फीसदी रेसिप्रोकल टैरिफ के ऊपर था, जिससे भारत पर कुल टैरिफ 50 फीसदी तक पहुँच गया। इस डबल-लेयर्ड टैरिफ व्यवस्था ने भारतीय निर्यातकों की मुश्किलें बढ़ा दीं। टेक्सटाइल्स, इंजीनियरिंग गुड्स और फूड प्रोडक्ट्स जैसे श्रम-प्रधान क्षेत्रों पर इसका सबसे ज्यादा असर पड़ा, जिससे मार्जिन और प्रॉफिटेबिलिटी पर दबाव आ गया।

कोलकाता में मर्चेंट्स चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के कार्यक्रम में नागेश्वरन ने कहा कि हाल के हफ्तों में भारत-अमेरिका संबंधों में सकारात्मक बदलाव आया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप के बीच सोशल मीडिया और फोन कॉल पर हुई बातचीत से भी माहौल सुधरा है।

नागेश्वरन का मानना है कि जियोपॉलिटिकल परिस्थितियों के कारण लगाया गया यह पेनल टैरिफ ज्यादा दिन टिकेगा नहीं और 30 नवंबर के बाद इसे हटा लिया जाएगा।

भारत के चीफ ट्रेड नेगोशिएटर और वाणिज्य मंत्रालय के स्पेशल सेक्रेटरी राजेश अग्रवाल ने हाल ही में नई दिल्ली में अमेरिका के ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव ब्रेंडन लिंच से मुलाकात की। यह दोनों देशों के बीच टैरिफ विवाद पर पहली आमने-सामने की बातचीत थी। सूत्रों के मुताबिक इस चर्चा के बाद संभावना है कि अमेरिका न सिर्फ पेनल टैरिफ हटाए बल्कि रेसिप्रोकल ड्यूटी भी कम करे।

भारत की निर्यात स्थिति

भारत का निर्यात वर्तमान में 850 अरब अमेरिकी डॉलर(70.55 लाख करोड़ रुपए) के स्तर पर है और यह 1 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुँचने की राह पर है, जो GDP का लगभग 25 फीसदी है। नागेश्वरन ने कहा कि यह एक स्वस्थ और खुली अर्थव्यवस्था का संकेत है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि टैरिफ घटने से भारतीय स्टील, एल्युमिनियम और अन्य इंडस्ट्रियल प्रोडक्ट्स को अमेरिका के बाजार में आसानी से जगह मिलेगी।

भारत-यूरोपीय संघ (EU) के बीच FTA समझौते के अंतिम दौर में पहुँचने के बाद अमेरिका भी व्यापार मोर्चे पर नरमी दिखा रहा है। यदि अमेरिका दंडात्मक टैरिफ वापस लेता है और रेसिप्रोकल ड्यूटी घटती है तो यह भारतीय निर्यातकों के लिए बड़ी राहत होगी और दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंध स्थिरता की ओर बढ़ेंगे।

BJP सरकार बनने के बाद से तरक्की की राह पर बढ़ा उत्तर प्रदेश, CM योगी ने गिनाए काम: 6 शहरों में मेट्रो-16 हवाई अड्डे, UP सबसे बड़े एक्सप्रेसवे नेटवर्क वाला राज्य

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गुरुवार (18 सितंबर 2025) को लखनऊ में प्रेस कॉन्फ्रेंस की। इस दौरान मुख्यमंत्री ने बताया कि साल 2017 में उनकी सरकार बनने के बाद से यूपी में कितना विकास हुआ है। उन्होंने मेट्रो, हवाई अड्डों और एक्सप्रेसवे नेटवर्क के विस्तार जैसे बड़े बदलावों के बारे में बात की।

मेट्रो प्रोजेक्ट्स का तेजी विस्तार

सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा कि 2017 से पहले यूपी में एक भी शहर में मेट्रो नहीं चलती थी। लेकिन अब छह शहरों में मेट्रो चल रही है। यूपी में मेट्रो नेटवर्क 147.446 किलोमीटर का है। लखनऊ मेट्रो का दूसरा चरण (फेज-1बी) चारबाग से वसंतकुंज तक 11.165 किलोमीटर का होगा, जिसकी लागत 5,801.05 करोड़ रुपये है। इसे पूरा होने में पाँच साल लगेंगे।

लखनऊ मेट्रो 2017 में शुरू हुई थी। 2018 में लखनऊ मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन का नाम बदलकर उत्तर प्रदेश मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन किया गया, ताकि ये पूरे यूपी के मेट्रो प्रोजेक्ट्स को देख सके। कानपुर मेट्रो 2021 में शुरू हुई और सिर्फ 24 महीनों में बनकर तैयार हो गई, जो दुनिया में सबसे तेजी से बना मेट्रो प्रोजेक्ट है।

आगरा मेट्रो को प्राथमिकता कॉरिडोर में मार्च 2024 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुरू किया। नोएडा मेट्रो भी दिल्ली एनसीआर के बड़े नेटवर्क का हिस्सा है, जिसे एक्वा लाइन कहते हैं। आगरा, गोरखपुर, वाराणसी और मेरठ में मेट्रो प्रोजेक्ट्स बन रहे हैं या प्लानिंग के आखिरी चरण में हैं। बरेली, झाँसी और प्रयागराज जैसे शहरों में भी मेट्रो का विस्तार होगा।

हवाई अड्डों की संख्या बढ़कर हुई 16

मुख्यमंत्री ने बताया कि 2017 से पहले यूपी में सिर्फ दो हवाई अड्डे थे लखनऊ और वाराणसी। अब यूपी में 16 हवाई अड्डे हैं। गौतम बुद्ध नगर में देश का सबसे बड़ा हवाई अड्डा बन रहा है, जो इस साल के अंत तक शुरू हो जाएगा। योगी ने कहा कि यूपी में अब देश का सबसे अच्छा नेशनल हाईवे नेटवर्क भी है।

एक्सप्रेसवे में यूपी सबसे आगे

सीएम योगी ने बताया कि पहले यूपी एक्सप्रेसवे के मामले में बहुत पीछे था, लेकिन अब गंगा एक्सप्रेसवे बनने के बाद यूपी के पास देश के कुल एक्सप्रेसवे नेटवर्क का सात फीसदी हिस्सा होगा। ये देश में सबसे बड़ा एक्सप्रेसवे नेटवर्क होगा।

वित्तीय अनुशासन और कल्याण योजनाएँ

सीएम योगी ने अपनी सरकार के वित्तीय प्रबंधन की तारीफ की। उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार की कल्याण योजनाओं से गरीबों को फायदा हो रहा है। पिछले आठ सालों में यूपी ने वित्तीय अनुशासन बनाए रखा है। भारत सरकार के FRBM नियमों के बावजूद, यूपी जैसे सबसे ज्यादा आबादी वाले राज्य ने तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था बनने का रिकॉर्ड बनाया है।

यूपी बना देश के विकास का इंजन

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि यूपी अब देश की ग्रोथ का इंजन बन गया है। राज्य के लोग केंद्र सरकार की कल्याण योजनाओं का फायदा उठा रहे हैं और यूपी विकास की राह पर तेजी से आगे बढ़ रहा है।

‘मैं सभी धर्मों का सम्मान करता हूँ’: भगवान विष्णु को लेकर विवादित टिप्पणी पर CJI गवई ने दी सफाई, सोशल मीडिया को ठहराया जिम्मेदार

खजुराहो के भगवान विष्णु की खंडित मूर्ति मामले पर टिप्पणी को लेकर विवाद में आए मुख्य न्यायाधीश (CJI) बीआर गवई ने अब सफाई दी है। उन्होंने कहा कि वे हर धर्म का सम्मान करते हैं। उन्होंने कहा कि उनका इरादा किसी की भावनाओं को ठेस पहुँचाना नहीं था। मामले में CJI के ‘भगवान से खुद कुछ करने को कहो’ वाली टिप्पणी पर सोशल मीडिया पर खूब आलोचना हुई।

सोशल मीडिया की आलोचना पर CJI गवई ने कहा, “मेरे बयान को सोशल मीडिया पर गलत ढंग से पेश किया गया। किसी ने मुझे अगले दिन बताया कि मेरी टिप्पणी को सोशल मीडिया पर शेयर किया जा रहा है। मैं सभी धर्म का सम्मान करता हूँ।”

इस पर सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि आज के समय में हर काम की सोशल मीडिया पर बहुत ज्यादा प्रतिक्रिया देखने को मिलती है। उन्होंने सोशल मीडिया पर टिप्पणियों की निंदा करते हुए कहा, “हम न्यूटन के इस नियम से तो परिचित थे कि प्रत्येक क्रिया की समान प्रतिक्रिया होती है लेकिन अब प्रत्येक क्रिया की सोशल मीडिया पर कहीं ज्यादा प्रतिक्रिया होती है। गंभीर है।”

भगवान विष्णु की खंडित मूर्ति मामले में CJI गवई का विवादित बयान

CJI बीआर गवई का यह विवादित बयान सुप्रीम कोर्ट में भगवान विष्णु की खंडित मूर्ति मामले से जुड़ी याचिका पर सुनवाई का है। सुनवाई के दौरान CJI ने टिप्पणी की थी, “ये बस पब्लिसिटी के लिए है… जाओ, भगवान विष्णु से खुद कहो कि कुछ करें। अगर तुम उनके इतने बड़े भक्त हो, तो प्रार्थना करो, ध्यान लगाओ।”

इस टिप्पणी पर सोशल मीडिया पर बड़ा बवाल मच गया। कई लोगों ने इसे हिंदू आस्था का मजाक बताया। मामले में विश्व हिंदू परिषद ने CJI की नसीहत देते हुए कहा था, “हम सब का कर्तव्य है कि अपनी वाणी में संयम रखें। विशेष तौर पर न्यायालय के भीतर। यह जिम्मेदारी जितनी मुकदमा लड़ने वालों की है, वकीलों की है और उतनी ही न्यायाधीशों की भी है।”

उल्लेखनीय है कि सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दाखिल की गई थी, जिसमें मध्य प्रदेश के खजुराहो स्थित जावरी मंदिर की भगवान विष्णु की सात फुट लंबी मूर्ति को ठीक करने या नई मूर्ति लगाने की माँग की गई थी। याचिकाकर्ता राकेश दालाल का कहना था कि मुगल हमलों के दौरान मूर्ति का सिर टूट गया था और भक्तों को पूजा का हक मिलना चाहिए। लेकिन CJI गवई और जस्टिस के विनोद चंद्रन की बेंच ने याचिका खारिज कर दी।

केरल के कॉलेज में गाजा पर डिबेट, नजारा अफगानिस्तान जैसा: पर्दे के पीछे बैठाई गईं हिजाब पहनी मुस्लिम छात्राएँ, इस्लामी कट्टरपंथी डॉ. अब्दुल्ला मंच पर चढ़ा

भारत में जहाँ हम विश्वगुरु बनने और विकसित भारत 2047 के सपने बुन रहे हैं, वहीं केरल में हाल ही में ऐसा नजारा सामने आया जो सीधे अफगानिस्तान की याद दिलाता है। यहाँ कासरगोड कॉलेज में गाजा पर चल रही डिबेट में छात्र और छात्राओं के बीच पर्दा लगा दिया गया। हिजाब पहनी मुस्लिम छात्राओं को पर्दे के पीछे बिठाया गया है।

चर्चा का विषय था- ‘गाजा से लेकर विज्ञान और मजहब तक।’ इस डिबेट प्रतियोगिता का एक फोटो सामने आया है। इसमें इस्लामी कट्टरपंथी विचारधारा वाले डॉ. अब्दुल्ला बेसिल सीपी बोलता दिखाई दे रहा है। इस फोटो में साफ देखा जा सकता है की लड़के और लड़कियों के बीच पर्दा लगाया गया है।

डॉ. अब्दुल्ला बेसिल वही इस्लामी कट्टरपंथी है जो अक्सर हिजाब का प्रचार करता है। इससे पहले भी बेसिल का एक वीडियो भी सामने आया था, जिसमें एक छात्रा उससे हिजाब के खिलाफ बोलती है तो बेतुके तर्क देकर बेसिल उसे चुप करा देता है।

पाँच दिन पहले के इस वीडियो में छात्रा तर्क देती है- “लड़कियाँ अच्छे कपड़े और मेकअप किसी आदमी को रिझाने के लिए नहीं करती हैं बल्कि इससे आत्मविश्वास बूस्ट होता है।”

इस पर बेसिल हिजाब के समर्थन में बहस शुरू कर देता है और सादगी जैसे थ्योरी देकर छात्रा को चुप करवा देता है। बेसिल बेतुके तर्क देता है कि बिना मेकअप और अच्छे कपड़े पहनना चाहिए, इससे सादगी झलकती है और सादगी ही असली आत्मविश्वास को जगाती है।

अब्दुल्ला की इस्लामी कट्टरपंथ की विचारधारा को इस्लाम के प्रचार में लगा Umasking Anomalies नाम के संगठन ने भी खूब सराहा। ये संगठन बेसिल के तर्क को आज के युवाओं को समझाने के लिए प्रोपेगेंडा चलाना शुरू कर देता है। बेसिल की यह वीडियो शेयर करते हुए संगठन कहता है- खासकर मलयालम बोलने वाले लोगों को हिजाब पर हुई इस वार्ता को सुनना चाहिए।

Umasking Anomalies जैसे संगठन और डॉ. अब्दुल्ला बेसिल जैसे लोग कॉलेज में छात्र-छात्राओं को इस्लाम की दीन देने में लगे हुए हैं। एक इस्लामी कट्टरपंथी की सोच की तरह जब बात लड़कियों की आजादी और आत्मविश्वास की आती है तो पर्दा कर देते हैं और हिजाब पर लंबा-चौड़ा ज्ञान देने लगते हैं।

‘अब ये तुम्हारी बेटी नहीं, रुखसार है’: सुल्तानपुर में 13 साल की हिंदू लड़की को यासीन खान ने फाँसा, विरोध करने पर पिता को पीटा-गिरफ्तार

उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर शहर से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहाँ यासीन खान नाम के युवक ने 13 साल की हिंदू किशोरी पर धर्म परिवर्तन का दबाव डालने और निकाह की जबरन कोशिश की। उसके चंगुल से बेटी को छुड़ाने गए पिता पर यासीन और उसके दोस्तों ने मिलकर हमला भी किया। पुलिस ने इस मामले में मुख्य आरोपित को गिरफ्तार कर लिया है और अन्य की तलाश कर रही है।

क्या है मामला?

पीड़िता के पिता के मुताबिक, वह सुल्तानपुर जिले के गाँव गोडवा में अपने परिवार के साथ रहते हैं। उनकी छोटी बेटी नौंवी कक्षा की छात्रा है। मंगलवार (16 सितंबर 2025) को दोपहर बाद जब बेटी घर नहीं लौटी, तो परिवार को चिंता हुई। तलाश करते हुए पिता पर्यावरण पार्क के पास पहुँचे, जहाँ उनकी बेटी पड़ोस में रहने वाले युवक यासीन खान और उसके कुछ दोस्तों के साथ खड़ी थी।

जब पिता ने बेटी से घर चलने को कहा, तो यासीन ने विरोध करते हुए कहा कि अब वह उनकी बेटी नहीं है, उसने इस्लाम स्वीकार कर लिया है और अब उसका नाम ‘रुखसार’ है। यासीन ने यह भी कहा कि वह किशोरी से निकाह करेगा।

पिता जब बेटी को साथ ले जाने लगे, तो यासीन ने अपने दोस्तों के साथ मिलकर उन पर हमला कर दिया। शोर मचाने पर आसपास के लोग जुटे, तब आरोपित और साथी वहाँ से भाग निकले। किसी तरह पिता ने यासीन को पकड़कर पुलिस को सौंप दिया।

पीड़िता के पिता का बयान

पीड़ित किशोरी के पिता ने बताया, “मेरे पड़ोस में ही रहने वाला यासीन खान पिछले एक साल से मेरी बेटी को बहला फुसलाकर और धमका कर उसका ब्रेनवाश कर इस्लाम स्वीकार करने के लिए दबाव बना रहा है।”

FIR में उन्होंने आरोप लगाया, “जब मैंने अपनी बेटी से वापस चलने कहा तो बगल में खड़े लड़के ने कहा- ये कही नहीं जायेगी अब तुम्हारी बेटी नहीं है। इसने इस्लाम स्वीकार कर लिया है। तुम इसे नहीं ले जा सकते और मेरे साथ अपने साथियों समेत मारपीट करने लगा, जिससे मेरे हाथ में चोट आई है और चेहरे में आँख के पास भी गंभीर चोटे आई है।”

उसने कहा कि उसने उसका नाम बदलकर रुखसार रख दिया है। अब वह उसकी बीवी है और वह उससे निकाह भी करेगा।

पुलिस की कार्रवाई

कोतवाली नगर के प्रभारी निरीक्षक धीरज कुमार ने बताया कि पीड़िता के पिता की शिकायत पर यासीन और उसके साथियों के खिलाफ केस दर्ज कर लिया गया है। मामला उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम (UP Prohibition of Unlawful Conversion of Religion Act), बीएनएस की धारा 137 (2), 87, 351 (2), 351 (3) के तहत दर्ज किया गया है।

इस मामले की FIR कॉपी ऑपइंडिया के पास मौजूद है। पुलिस आरोपित से पूछताछ कर रही है और फरार आरोपितों की तलाश जारी है। किशोरी की काउंसलिंग भी कराई जा रही है।

35 साल की मरियम ने 18 साल के ‘उज्जवल’ को फाँसा, धर्मांतरित कर बनाया ‘रूहान’-निकाह कर रहने लगी साथ: गाजियाबाद में FIR दर्ज

उत्तर प्रदेश के बागपत जिले में एक 18 वर्षीय हिंदू युवक का जबरन धर्मांतरण कराकर एक तलाकशुदा मुस्लिम महिला मरियम से निकाह करने का मामला सामने आया है। युवक का नाम उज्ज्वल था, जिसे अब ‘रूहान’ बना दिया गया है। परिवार का आरोप है कि 35 वर्षीय मुस्लिम महिला मरियम ने युवक को प्रेमजाल में फँसाया और धर्मांतरण के लिए मजबूर किया। इस मामले में एक मौलवी और धर्मांतरण गिरोह की भूमिका होने का भी शक जताया जा रहा है।

उज्ज्वल ने छोड़ा घर, परिवार को हुआ शक

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, लोनी के रहने वाला उज्ज्वल पिछले 6-7 महीनों से अपने घर से दूर रह रहा था। उसने परिवार को बताया कि वह गुरुग्राम में नौकरी कर रहा है, लेकिन उसका घर आना-जाना बहुत कम हो गया था।

जब परिवार को शक हुआ, तो उन्होंने उसकी तलाश शुरू की। एक हफ्ते पहले उन्हें पता चला कि उज्ज्वल बागपत के हसनपुर मसूरी में एक महिला के साथ रह रहा है और उसने निकाह कर लिया है।

मौलवी और धर्मांतरण गिरोह पर आरोप

उज्ज्वल के परिवार ने ट्रोनिका सिटी कोतवाली में शिकायत दर्ज कराई है। उन्होंने आरोप लगाया कि 35 साल तलाकशुदा मुस्लिम महिला मरियम ने उज्ज्वल को पहले प्रेमजाल में फँसाया और फिर उसे धर्मांतरण के लिए मजबूर किया। परिजनों का दावा है कि हसनपुर मसूरी के एक मौलवी ने उज्ज्वल को हैदराबाद ले जाकर उसका धर्म बदलवाया।

इसके बाद उसका नाम ‘रूहान’ रख दिया गया और उसी मुस्लिम महिला मरियम से निकाह करा दिया गया। परिवार का कहना है कि यह सब एक सोची-समझी साजिश है और इसमें एक बड़ा धर्मांतरण गिरोह शामिल हो सकता है।

विधायक ने की सख्त कार्रवाई की माँग

बुधवार (17 सितंबर 2025) को लोनी के विधायक नंद किशोर गुर्जर खुद पीड़ित परिवार के साथ खेकड़ा कोतवाली पहुँचे। उन्होंने भी इस घटना को धर्मांतरण गिरोह की साजिश बताया। विधायक ने पुलिस से इस मामले में सख्त कार्रवाई की माँग की है और चेतावनी दी है कि अगर दो दिनों में सच्चाई सामने नहीं आई तो वे आंदोलन करेंगे।

इस बीच, परिवार ने अपने घर के आसपास कुछ अनजान लोगों को देखने का दावा करते हुए पुलिस से सुरक्षा की माँग की है। खेकड़ा कोतवाली के प्रभारी प्रभाकर केतुरा ने बताया कि मामला दर्ज कर लिया गया है और धर्मांतरण गिरोह की भी जाँच की जा रही है।

UP में महिला सुरक्षा और सम्मान पर फोकस, नवरात्रि में ‘मिशन शक्ति’ चलाएगी पुलिस: CM योगी ने दिए सख्त निर्देश

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुधवार (17 सितंबर 2025) को मिशन शक्ति के पाँचवें चरण की शुभारंभ की घोषणा की। यह मिशन महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान और सशक्तिकरण के लिए चलाया जा रहा है। 22 सितंबर को शारदीय नवरात्रि को पाँचवाँ चरण शुरू होगा और अगले 30 दिनों तक चलेगा।

मिशन शक्ति की शुरुआत 2020 में हुई थी। 4 चरणों की सफलता को देखते हुए योगी सरकार अब इस कार्यक्रम को गाँवों और कस्बों तक ले जाना चाहती है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के अनुसार, यह मिशन केवल एक सरकारी योजना नहीं है, बल्कि हर महिला सुरक्षित और सम्मानित महसूस करे, इसके लिए यह एक सामाजिक आंदोलन है।

सुरक्षित महसूस करें लोग: सीएम योगी

मुख्यमंत्री ने वरिष्ठ अधिकारियों के साथ एक उच्च-स्तरीय बैठक की। इस दौरान अधिकारियों को निर्देश दिया कि नवरात्रि के साथ शुरू हो रहे अभियान के लिए विभागों के बीच अच्छा तालमेल दिखना चाहिए, ताकि कार्यक्रम पूरी तरह सफल रहे।

जोनल एडीजी, आईजी से लेकर डीआईजी तक के शीर्ष पुलिस अधिकारियों को आदेश दिया गया है कि वे नियमित रूप से क्षेत्र का दौरा करें, लोगों से बातचीत करें और पुलिस गश्त में व्यक्तिगत रूप से शामिल हों।

मुख्यमंत्री ने कहा, “लोगों को पूरी तरह सुरक्षित होने का एहसास होना चाहिए, जबकि अपराधियों को कानून का खौफ होना चाहिए।”

अभियान के केंद्र में महिला पुलिसकर्मी

मिशन शक्ति की सबसे बड़ी ताकत राज्य का महिला पुलिस बल है। राज्य में अभी 44,000 से ज्यादा महिला पुलिसकर्मी हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि अभियान के दौरान महिला पुलिस अधिकारियों को और अधिक सक्रिय भूमिका दी जानी चाहिए।

मिशन शक्ति की शुरुआत होने पर अगले 30 दिनों तक महिला पुलिस अधिकारी सभी 57,000 ग्राम पंचायतों और 14,000 शहरी वार्डों का दौरा करेंगी। उनके साथ ग्राम प्रधान, पार्षद, आशा कार्यकर्ता, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और स्वास्थ्य कर्मी भी होंगे। वे महिलाओं और लड़कियों से सीधे बातचीत करेंगी, उनकी समस्याएँ सुनेंगी और सुरक्षा, अधिकारों और सरकारी कल्याणकारी कार्यक्रमों के बारे में जागरूकता बढ़ाएँगी।

नवरात्रि और आगे आने वाले त्योहारों पर विशेष व्यवस्था की जाएगी। मंदिरों, धार्मिक स्थलों, मेलों और भीड़-भाड़ वाले आयोजनों में महिला पुलिस तैनात की जाएगी। योगी आदित्यनाथ ने महिला उत्पीड़न से निपटने वाले एंटी-रोमियो स्क्वॉड को भी मजबूत करने का निर्देश दिया है।

स्कूलों, कॉलेजों और सार्वजनिक स्थानों पर जागरूकता अभियान

अभियान में जिला स्तर पर जागरूकता अभियान चलाने पर भी जोर दिया जाएगा। स्कूलों, कॉलेजों, विश्वविद्यालयों, अस्पतालों और उद्योगों में सेमिनार, चर्चाएँ और संवाद कार्यक्रम आयोजित किए जाएँगे। छात्रों को समानता और महिला सुरक्षा के महत्व को खास कर बताया जाएगा। इसके लिए लघु फ़िल्में भी दिखाई जाएँगी।

मुख्यमंत्री ने महिला कैदियों को कानूनी सहायता प्रदान करने, पीड़ितों की तुरंत मदद करने और महिलाओं के खिलाफ अपराधों का शीघ्र समाधान सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर भी बल दिया। उन्होंने कहा कि महिला हेल्पलाइन 1090 पर आने वाली हर कॉल को गंभीरता से लेकर उसका समाधान किया जाना चाहिए।

नगर निगमों में पिंक बूथ बनाए जाने की योजना है। प्रशिक्षित महिला पुलिसकर्मी इसे चलाएँगी और ये बूथ चौबीसों घंटे काम करेंगे। मिशन शक्ति केंद्रों को वन-स्टॉप समाधान के रूप में तैयार किया जाएगा, जहाँ महिलाएँ शिकायत दर्ज करा सकेंगी। इन केन्द्रों पर परामर्श, कानूनी सहायता और कार्रवाई करने की भी व्यवस्था होगी।

बूथ कर्मचारियों को डिजिटल साक्ष्य जमा करने और आर्थिक मदद के लिए चल रही योजनाओं के संचालन का प्रशिक्षण भी दिया जाएगा।

पिछले 4 मिशन शक्ति अभियान की उपलब्धियाँ

मिशन शक्ति ने पिछले चार चरणों में सफलता के झंडे गाड़ दिए हैं। सिर्फ चौथे चरण के दौरान 3.44 लाख से ज्यादा कार्यक्रम आयोजित किए गए। 2.03 करोड़ से ज़्यादा महिलाओं और लड़कियों तक पहुँच बनाई गई। इसके लिए 18,344 महिला पुलिसकर्मी और 9,172 महिला पुलिस अधिकारी तैनात की गईं।

कई विशेष अभियान भी चलाए गए। इनमें साइबर अपराधियों के खिलाफ चलाया गया ‘ऑपरेशन गरुड़’, 2,800 से ज्यादा बच्चों को बचाने वाला ‘ऑपरेशन बचपन’, लड़कियों को परेशान करने वाले 74,000 से ज्यादा युवकों के खिलाफ ‘ऑपरेशन मजनू’, नशे से निजात दिलाने के लिए ‘ऑपरेशन नशा मुक्ति’, होटलों और पबों की निगरानी के लिए ‘ऑपरेशन रक्षा’ और 7,000 से ज्यादा अपराधियों को गिरफ्तार करने वाला ‘ऑपरेशन ईगल’ शामिल है।

आधिकारिक आँकड़ों के अनुसार, यौन अपराध के मामलों को सुलझाने में उत्तर प्रदेश पहले स्थान पर है। यहाँ 98.80% मामले का निपटारा किया गया है। महिला हेल्पलाइन 1090 और पिंक स्कूटी गश्त, पिंक एसयूवी, सीसीटीवी निगरानी और आशा ज्योति केंद्र जैसी अन्य पहलों ने भी इस सफलता में बड़ी भूमिका निभाई है।

राहुल गाँधी के ‘हाइड्रोजन बम’ से समझिए उनकी मानसिकता, आखिर क्यों बार-बार फुस्स हो रहे ‘युवराज’

राहुल गाँधी का ताजा आरोप है कि ऑनलाइन आवेदन पत्र भरने के लिए किसी सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल किया जा रहा है। यह सब एक टारगेट अभियान के तहत हो रहा है, जिसमें कॉन्ग्रेस मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाए जा रहे हैं। उन्होंने आगे कहा कि चुनाव आयोग ऐसी कोई जानकारी नहीं दे रहा है, जिससे इस सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल करने वालों को ट्रैक किया जा सके।

इसके साथ राहुल गाँधी ने एक ‘संदिग्ध’ की ओर इशारा करने के लिए अपनी PPT में अमित शाह के छायाचित्र का भी इस्तेमाल किया। इसमें मीम्स दिखाए गए, जिनमें शाह किसी कंप्यूटर को देखकर इंस्टाग्राम से लेकर EVM तक को हैक कर रहे हैं।

अब चलिए सबसे पहले फॉर्म 7 पर नजर डालते हैं। इस फॉर्म को निर्वाचन क्षेत्र में पंजीकृत कोई भी वोटर भर सकता है और चुनाव आयोग से किसी का भी नाम हटाने का अनुरोध कर सकता है। इसे लिए केवल नाम हटाने की ठोस वजह देनी होगी, जैसे उस व्यक्ति का घर बदल गया है या उसकी मृत्यु हो गई या चाहे किसी अन्य मतदाता सूची में पहले से पंजीकृत होने का दावा ही क्यों ना हो।

राहुल गाँधी ने एक ऐसे व्यक्ति को लपेटे में लिया जिसने कहा कि उसने कभी किसी और का नाम मतदाता सूची से हटाने का आवेदन नहीं दिया लेकिन डेटा में दिखाया गया है कि उसने आवेदन किया था। इतना ही नहीं, उस आवेदन में इस्तेमाल मोबाइल नंबर भी उसका नहीं है जिसने आवेदन दिया है।

यह जरूर व्यवस्था में कोई कमी हो सकती है लेकिन धोखाधड़ी नहीं जिसे जाँच की जरूरत हो। राहुल गाँधी ने दावा किया कि इस गड़बड़ी का पर्दाफाश कॉन्ग्रेस पार्टी ने किया है, जिसने एक FIR दर्ज कराई है और अब कर्नाटक सरकार के अधीन काम करने वाली CID का इस्तेमाल करके बाकी की जानकारी भी जुटाई जा रही है।

हालाँकि, चुनाव आयोग ने साफ कर दिया है कि FIR चुनाव आयोग के ही एक अधिकारी ने दर्ज कराई थी। यानि चुनाव आयोग खुद इस मामले की जाँच कर रहा है न कि इसे छिपाने की कोशिश कर रहा है। जैसा कि राहुल गाँधी ने दिखाने की कोशिश की।

तो चलिए मान लेते हैं कि कोई ‘हैकर’ वाकई कुछ सॉफ्टवेयर और डमी मोबाइल नंबरों का इस्तेमाल करके कुछ मतदाताओं के नाम हटाने के लिए आवेदन कर रहा है। सच तो यह है कि अगर कोई ‘हैकर’ ऐसा कर रहा है तो ऐसे कई आवेदन (फॉर्म 7) बनाकर जमा कर सकता है लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि नाम ‘सफलतापूर्वक’ हटा दिए गए।

एक सफल आवेदन से केवल एक प्रक्रिया शुरू होती है, जिसमें चुनाव आयोग के अधिकारियों को व्यक्तिगत रूप से जाँच करनी होती है कि क्या फॉर्म 7 पर दी गई जानकारी वास्तविक है और क्या ऐसे व्यक्ति का नाम वास्तव में मतदाता सूची से हटाया जाना चाहिए।

कम शब्दों में समझें तो यह एक मैनुअल सिस्टम है। ऐसा नहीं है कि आप एक नकली फोन नंबर इस्तेमाल करके OTP सबमिट करें और दूसरे व्यक्ति का नाम मतदाता सूची से गायब हो जाए।

जबकि राहुल गाँधी ने इस बात का कोई सबूत नहीं दिया कि किसी का नाम सूची से गलत तरीके से क्यों हटाया गया। चुनाव आयोग का कहना है कि फॉर्म 7 के संदिग्ध लेकिन सफलतापूर्वक जमा होने के कारण कोई नाम नहीं हटाया गया है।

लेकिन ऐसा भी हो सकता है कि भले ही किसी सॉफ्टवेयर द्वारा किसी की नकल करके जानकारी जमा की गई हो (जो अपराध है और सजा के योग्य है) लेकिन जमा की गई जानकारी सही निकली हो और मामले में व्यक्ति का नाम वास्तव में ही हटाने योग्य हो।

यह भी हो सकता है कि BJP का IT सेल (जो CIA और मोसाद से भी बड़ा और शक्तिशाली है) ज्यादा सतर्क हो और पता लगा लेता है कि जिस भी कॉन्ग्रेसी मतदाता ने घर बदला है, उसका नाम हटाने की कोशिश की हो। पन्ना प्रमुख जैसे लोगों की यही जिम्मेदारी होती है। मैंने इस वीडियो में पहले भी समझाया था:

लेकिन पूरी संभावना है कि राहुल गाँधी ने जिस मामले में आरोप लगाए हैं, उसमें BJP IT सेल या पन्ना प्रमुख का कोई हाथ नहीं है। क्योंकि जिस निर्वाचन क्षेत्र (कर्नाटक के अलंद) में कॉन्ग्रेस के मतदाताओं के नाम हटाए जाने की बात कही गई, उस क्षेत्र में विधानसभा चुनाव कॉन्ग्रेस ने जीता था। इतना ही नहीं पिछले चुनाव में भी BJP ने वो सीट जीती थी। अगर ‘हैकर’ BJP का ही था तो BJP IT सेल से अपने ही समर्थकों के नाम मतदाता सूची से नहीं हटवाएगी।

मजाक से हटते हुए, इस ‘हाइड्रोजन बम’ में आग नहीं थी बल्कि धुएँ का वहीं रंग था जो हमने पहले देखा- असल में राहुल गाँधी मतदान प्रणाली की जानी-पहचानी खामियों और कमियों का इस्तेमाल करके चुनावों में धोखाधड़ी करने की किसी बड़ी साजिश को गढ़ रहे हैं।

राहुल गाँधी का सीधा एजेंडा है- Gen Z को बेवकूफ समझना, जो उनकी साजिशों पर यकीन करके सड़कों पर उतरकर हिंसा करेंगे। उन्होंने देखा है कि ऐसे लगभग 100 युवाओं की मौत सरकारों को हराने में मदद कर सकती है। शायद उन्हें यही रास्ता आसान लगता है, जो उन्हें 2029 तक 100 और संसदीय सीटें जीता सके।

मूल रूप से यह रिपोर्ट अंग्रेजी में राहुल रौशन ने लिखी है। इस लिंक पर क्लिक कर विस्तार से पढ़ सकते है।

रियाल पर ‘फौज’ भेजेगा कंगाल पाकिस्तान, सऊदी अरब ने डिफेंस पैक्ट की आड़ में बनाया ‘सिक्योरिटी’ गार्ड: जानें- इस्लामी भाई ‘चारे’ वाली डील से भारत पर क्यों नहीं पड़ेगा असर

सऊदी अरब और पाकिस्तान ने बुधवार (17 सितंबर 2025) को एक ऐसा समझौता साइन कर लिया, जिसे सुनकर लगता है जैसे दोनों देश अब एक-दूसरे के लिए जान देने को तैयार हैं। नाम है इसका ‘स्ट्रैटेजिक म्यूचुअल डिफेंस एग्रीमेंट’। सुनने में तो बड़ा शानदार लगता है कि अगर एक देश पर हमला हो गया, तो इसे दोनों पर हमला माना जाएगा। मतलब सऊदी पर कोई संकट आया, तो पाकिस्तान की फौज दौड़ेगी। और पाकिस्तान पर कुछ हुआ, तो सऊदी भी कूद पड़ेगा।

अब सोचिए, पाकिस्तान जैसा देश, जो खुद भारत से चार दिन की जंग लड़कर थक गया, वो सऊदी की रक्षा कैसे करेगा? सऊदी तो तेल के धन कुबेर है, उसकी आर्मी मॉडर्न हथियारों से लैस, लेकिन लड़ाई के नाम पर बेचारी काँपने लगती है। इसलिए पाकिस्तान को बुलाया जाता है – सस्ते में फौजी मिल जाते हैं। और अगर कभी पाकिस्तान मुसीबत में फँसता है, जैसे इकोनॉमी डूब रही हो, तो सऊदी बैलआउट पैकेज भेज देता है।

ये रिश्ता इस्लामिक भाईचारे का नाम तो लेता है, लेकिन अंदर से ये बिजनेस डील है। भारत को इससे कोई फिक्र नहीं, क्योंकि सऊदी हमेशा भारत-पाक तनाव में न्यूट्रल रहता है या फिर भारत का साथ देता है। आइए, आपको बताते हैं इस डील से जुड़ी हर एक बात, जो आपको जानना चाहिए।

पाकिस्तान-सऊदी का ये नया समझौता: दिखावा या सच्ची दोस्ती?

रियाद में हुई इस मीटिंग में शरीफ को सऊदी ने खूब तवज्जो दी। एमबीएस ने कहा, “हमारे दोस्त पाकिस्तान के साथ ये समझौता हमारी सुरक्षा को मजबूत करेगा।” समझौते में साफ लिखा है कि बाहरी हमले पर दोनों देश एक साथ जवाब देंगे। इसमें ट्रेनिंग, हथियार शेयरिंग और यहाँ तक कि न्यूक्लियर मदद का जिक्र भी है।

लेकिन सवाल ये है – क्या पाकिस्तान सऊदी की इतनी मजबूत ढाल बन पाएगा? सऊदी की फौज तो दुनिया की सबसे महँगी है, टैंक-असली हथियारों से लैस। पाकिस्तान की फौज? वो तो ज्यादातर बॉर्डर पर भारत को घूरती रहती है और आर्थिक तंगी में डूबी हुई।

असल में ये समझौता इजरायल के हाल के कतर हमले के बाद आया है। कुछ दिन पहले इजरायल ने दोहा में हवाई हमला किया, जिसमें हमास के लीडर्स मारे गए। कतर ने इसे ‘राज्य प्रायोजित आतंकवाद’ कहा। अमेरिका ने भी इजरायल का साथ नहीं दिया।

सऊदी को लगा कि अमेरिका पर भरोसा मत करो, अपने इस्लामी भाइयों की तरफ देखो। बस, पाकिस्तान को बुला लिया। पाकिस्तान ने कहा, “हम आपके साथ हैं।” लेकिन ये साथ कागजों पर ज्यादा है। सऊदी के पास 2 लाख सैनिक हैं, लेकिन लड़ाई में उनकी ट्रेनिंग कमजोर। पाकिस्तान के फौजी सस्ते और तैयार-बस भाड़ा मिले और काम पर लग जाएँ।

पश्चिम एशिया के एक्सपर्ट जहाक तनवीर कहते हैं, “ये कोई नई बात नहीं। सऊदी हमेशा पाकिस्तान को ‘इस्लामिक न्यूक्लियर बम’ मानता रहा है। बदले में पाकिस्तान सैन्य ट्रेनिंग देता है। लेकिन अगर सऊदी पर असली खतरा आया, तो पाकिस्तान की औकात क्या?”

पाकिस्तान क्यों इतना खुश? पैसे की आस में तो नाच रहा है!

शहबाज शरीफ रियाद से लौटे तो चेहरे पर मुस्कान थी। क्यों न हो? पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था तो आईएमएफ के चक्कर काट रही है। महँगाई आसमान छू रही, बिजली-पानी की किल्लत। ऐसे में सऊदी से मदद मिलेगी – निवेश, कर्ज, डिपॉजिट।

इस समझौते से पाकिस्तान को $38 बिलियन का रक्षा निवेश मिलने का वादा है। मतलब, सऊदी पाकिस्तान में हथियार फैक्टरियाँ लगाएगा, जॉब्स आएँगी। लेकिन असल फायदा? पाकिस्तानी सैनिकों को सऊदी में भाड़े पर भेजना। एक फौजी को $500-1000 महीना मिलता है – ये रकम पाकिस्तान सरकार को जाती है, फौजी को थोड़ा-सा।

पाकिस्तान खुश इसलिए भी है क्योंकि सऊदी उसे ‘इस्लामी दुनिया का बड़ा भाई’ मानता है। लेकिन हकीकत में, पाकिस्तान सऊदी का सस्ता सिक्योरिटी गार्ड है। जब भी सऊदी को जरूरत पड़ी, पाकिस्तान ने फौज भेजी। बदले में पैसे।

तनवीर कहते हैं, “पाकिस्तान को लगता है कि न्यूक्लियर बम दिखाकर वो सऊदी को लुभा लेगा। लेकिन सऊदी तो जानता है, पाकिस्तान की बम की औकात क्या? फिर भी भाड़े के फौजी सस्ते पड़ते हैं।” इस डील से पाकिस्तान को तुरंत $1-2 बिलियन का पैकेज मिल सकता है। शरीफ सरकार इसे ‘बड़ी जीत’ बता रही है। लेकिन ये जीत कितनी टिकाऊ होगी, इस पर सवाल हमेशा खड़े होते रहेंगे। हाँ, ये जरूर होगा कि जब सऊदी बोलेगा ‘आओ लड़ो’ तो पाकिस्तान के फौजी मरेंगे और पाकिस्तान की सरकार-फौजी आका पैसे गिनते रहेंगे।

पहले भी हुए समझौते, लेकिन फायदा तो सऊदी का ही निकला

ये रिश्ता नया नहीं। 1960 के दशक से चला आ रहा है। 1969 में ही देख लो – सऊदी के साउथ बॉर्डर पर साउथ यमन ने हमला किया। सऊदी की एयर फोर्स कमजोर थी, तो पाकिस्तानी पायलट्स को बुलाया। उन्होंने सऊदी के लाइटनिंग जेट्स उड़ाए और हमलावरों को भगाया। ये पहला मौका था जब पाकिस्तान ने सऊदी की हवाई रक्षा की।

फिर 1979 में मक्का की ग्रैंड मस्जिद पर कट्टरपंथियों ने कब्जा कर लिया। सऊदी की फौज अकेले नहीं संभाल पाई। पाकिस्तानी कमांडो भेजे गए। दर्जनों पाकिस्तानी सैनिक मारे गए। सऊदी ने चुपचाप पैसे दे दिए।

साल 1980 में ईरान-इराक वॉर चला। सऊदी डर गया कि ईरान उस पर भी टूट पड़े। 20 हजार पाकिस्तानी सैनिक भेजे गए सऊदी में। नाम था ‘सिक्योरिटी फोर्स’, लेकिन असल में भी मजदूरी। सऊदी ने कहा, “हम पर हमला मत समझो, पाकिस्तान पर।” लेकिन ये बाध्यकारी नहीं था, बस वादा।

1980-88 के ईरान-इराक वॉर में पाकिस्तान ने सऊदी को लिखित आश्वासन दिया – “तुम पर हमला, हमारे पर।” लेकिन कभी टेस्ट नहीं हुआ। 2014-15 में सऊदी ने यमन पर बमबारी की (ऑपरेशन असिफत अल-हज्म)। पाकिस्तान के तत्कालीन आर्मी चीफ राहील शरीफ को इस्लामिक कोलिशन का लीडर बनाया। पाकिस्तानी सैनिक फिर भेजे गए। लेकिन फायदा? सऊदी ने यमन को कुचला, पाकिस्तान को पैसे मिले। तनवीर कहते हैं, “हर समझौता सऊदी-सेंट्रिक रहा। पाकिस्तान की सुरक्षा का क्या? कभी सऊदी ने भारत के खिलाफ पाकिस्तान की मदद की?”

साल 2020 से देखिए- कोविड में सऊदी ने $3 बिलियन का तेल कर्ज दिया। बदले में पाकिस्तानी फौज ने सऊदी नेशनल गार्ड को ट्रेनिंग दी। 2022 में रूस-यूक्रेन वॉर पर सऊदी ने जेएफ-17 जेट्स माँगे। एमबीएस की पाकिस्तान यात्रा पर एमओयू साइन हुए। 2023 में इजरायल-हमास वॉर के बाद $2 बिलियन पैकेज। अल-सम्साम एक्सरसाइज में 5,000 पाकिस्तानी सैनिक। 2024 में $3 बिलियन डिपॉजिट रिन्यू। आसिम मुनीर की यात्रा पर हॉक मिसाइल डील। हर बार वही – पाकिस्तान ट्रेनिंग दे, सऊदी पैसे। अब ये नया समझौता? वही पुरानी कहानी का नया चैप्टर।

पाकिस्तान को कब-कब मिली ‘भीख’?

पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था तो सऊदी पर टिकी है। 1960 से अब तक $5 बिलियन से ज्यादा सैन्य-संबंधी मदद मिल चुकी। लेकिन ‘भीख’ कहें तो गलत नहीं। 1990 के दशक में सोवियत-अफगान वॉर के बाद पाकिस्तान कंगाल हो गया। सऊदी ने $1 बिलियन का डिपॉजिट दिया। 2008 के फाइनेंशियल क्राइसिस में फिर $500 मिलियन। 2019 में इमरान खान की सरकार गिरने की कगार पर सऊदी ने $1 बिलियन का तेल पैकेज दिया।

2020 में कोविड – $3 बिलियन। 2021 में बाढ़ – $500 मिलियन। 2022 में इकोनॉमिक क्राइसिस – $2 बिलियन। 2023 में इमरान के बाद शरीफ सरकार – $2 बिलियन। 2024 में चुनावों से पहले $3 बिलियन। हर बार बहाना? सैन्य मदद। सऊदी जानता है, पाकिस्तान बिना पैसे के डूब जाएगा। बदले में पाकिस्तान फौज भेजता है। तनवीर कहते हैं, “ये रिश्ता इस्लामी एकता का नहीं, आर्थिक निर्भरता का है। सऊदी पाकिस्तान को ‘रेंटल आर्मी’ की तरह यूज करता है।”

पाकिस्तान के सैनिक सऊदी में सिक्योरिटी जॉब्स करते हैं। हजारों रिटायर्ड अफसर ट्रेनर बने हैं। ये पैसे पाकिस्तान की आर्मी को मजबूत करते हैं, लेकिन देश की जनता का क्या? महँगाई, बेरोजगारी। फिर भी सरकार खुश – क्योंकि खजाना भरेगा।

भारत को कोई खतरा नहीं, सऊदी की अपनी चालाकी

भारत ने इस समझौते पर कहा, “हम अध्ययन करेंगे।” विदेश मंत्रालय के रणधीर जायसवाल ने बताया, “हमें पहले से जानकारी थी। प्रभाव देखेंगे।” लेकिन चिंता की कोई बात नहीं। क्यों? क्योंकि सऊदी कभी पाकिस्तान के लिए भारत के खिलाफ नहीं खड़ा हुआ। 1965, 1971, कारगिल… हर वॉर में सऊदी ने पाकिस्तान को पैसे दिए, लेकिन फौज नहीं। उल्टा भारत से ट्रेड बढ़ाया। आज सऊदी-भारत का टर्नओवर $50 बिलियन है। पाकिस्तान से? मुश्किल से $3 बिलियन।

बता दें कि 1980 के दशक से ये डील्स हैं, लेकिन भारत-पाक तनाव में सऊदी न्यूट्रल रहा। कभी पाक के आतंकी प्लान्स का साथ नहीं दिया। अभी हाल ही में अप्रैल 2025 में पहलगाम अटैक के बाद भारत की ऑपरेशन सिंदूर चली। चार दिन की झड़प। सऊदी ने पाक को सपोर्ट किया? नहीं। उल्टा खामोश रहा। सऊदी को भारत से सामान चाहिए होता है, बदले में वो तेल बेचता है। वहीं, पाकिस्तान को तो वो ‘भाई’ कहकर पुचकार लेता है, लेकिन बिजनेस भारत से करता है।

अगर सऊदी पर खतरा आया ईरान या इजरायल से तो पाकिस्तान भेजेगा फौज। लेकिन भारत-पाक वॉर में? सऊदी बोलेगा, “हमारे पास सैनिक नहीं।” पाकिस्तान मजबूर होगा उसकी तरफ से लड़ने के लिए, क्योंकि पैसे बंद हो जाएँगे, लेकिन सऊदी कभी अपने नागरिकों को लड़ने नहीं भेजेगा।

पुरानी बोतल में नया शराब?

ये समझौता सऊदी अरब और पाकिस्तान के बीच पुराने रिश्ते का एक नया अध्याय है। सऊदी को अपनी सुरक्षा के लिए भाड़े की फौज और न्यूक्लियर छतरी चाहिए, जबकि पाकिस्तान को पैसे चाहिए। लेकिन भारत के लिए ये समझौता कोई बड़ा खतरा नहीं है। सऊदी अरब भारत के साथ अपने रिश्ते खराब नहीं करेगा, और पाकिस्तान की औकात इतनी नहीं कि वो भारत के खिलाफ सऊदी की मदद से कोई बड़ा खेल खेले।

हाँ अगर सऊदी पर कोई बड़ा हमला होता है, तो पाकिस्तान को अपने वादे के मुताबिक सैनिक भेजने पड़ेंगे। सऊदी कह सकता है कि उसके पास लड़ने के लिए सैनिक नहीं हैं, लेकिन पाकिस्तान को जाना ही होगा, क्योंकि उसे पैसे चाहिए। ये रिश्ता सऊदी के लिए फायदे का सौदा है, और पाकिस्तान के लिए मजबूरी। भारत को बस सतर्क रहने की जरूरत है, लेकिन घबराने की नहीं।

अडानी मानहानि मामले पर कोर्ट से गिरी गाज तो एडिटर्स गिल्ड को आई ‘प्रेस की आजादी’ की याद: PCI ने भी HC के आदेश पर रोया रोना, लोकतंत्र पर उठाए सवाल

पत्रकारों के संगठन प्रेस क्लब ऑफ इंडिया (PCI) का एक बार फिर प्रेस की आजादी को लेकर ‘रोना’ शुरू हो गया है। इस बार ये ‘रोना’ अडानी एंटरप्राइजेज के मानहानि मामले में सुनाए गए कोर्ट के एक आदेश को लेकर है। इस ex-parte (एकतरफा आदेश) आदेश को ‘बेहद चिंताजनक’ बताते हुए PCI ने कहा कि इससे कॉरपोरेट घरानों के हाथों में ही पूरी सेंसरशिप होगी।

दिल्ली की रोहिणी जिला अदालत का यह आदेश अडानी एंटरप्राइजेज लिमिटेड बनाम परंजॉय गुहा ठाकुरता (Adani Enterprises Ltd. Vs Paranjoy Guha Thakurta) मामले में 06 सितंबर 2025 को दिया। इसमें साफ कहा गया है कि गौतम अडानी और अडानी एंटरप्राइजेज लिमिटेड के खिलाफ बिना सबूत वाले निराधार कंटेन्ट और आर्टिकल को तमाम प्लेटफॉर्म्स से हटाए जाए।

इस आदेश को लेकर प्रेस क्लब ऑफ इंडिया ने कहा है कि इससे कॉरपोरेट घरानों के हाथों बिना रोक-टोक सेंसरशिप का हथियार मिल जाएगा। प्रेस क्लब कहता है कि यह शायद अब तक का सबसे बड़ा उदाहरण है कि कैसे SLAPP (Strategic Litigation Against Public Participation) केस का इस्तेमाल पत्रकारिता को चुप कराने के लिए हो रहा है।

प्रेस क्लब ऑफ इंडिया ने आरोप लगाया कि ex-parte आदेश में पत्रकारों को अपनी बात रखने का मौका नहीं मिला, जो कि प्राकृतिक न्याय (Natural Justice) के खिलाफ है। PCI ने कहा कि सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय (I&B Ministry) ने सिर्फ कोर्ट के आदेश पर कार्रवाई करते हुए 138 यूट्यूबर लिंक और 83 इंस्टाग्राम पोस्ट हटाने का आदेश दे दिया। आरोप लगाया कि आदेश कानूनी चुनौती के दायरे में था, बावजूद सरकार ने इतनी जल्दी कार्रवाई की, जो और भी ‘चिंताजनक’ है।

एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया ने भी प्रेस क्लब की तरह ही अदालत के ex-parte आदेश पर रोना चालू रखा। संगठन ने भी आदेश को मीडिया संस्थान और पत्रकारों पर खतरा बताया है। सरकार की निराधार कंटेन्ट से जुड़ी सोशल मीडिया सामग्री हटाने की कार्रवाई को ‘अभिव्यक्ति के अधिकार’ (Freedom of Expression) और लोकतंत्र के खिलाफ बताते हुए सवाल उठाए हैं।

क्या सच में प्रेस की आजादी को खतरा ?

प्रेस क्लब ऑफ इंडिया और एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया का बयान इस ex parte (एकतरफा आदेश) को बताता है कि इससे पत्रकारों की आवाज दबाई जा रही है। पहले बता दें कि ex-parte आदेश, वो आदेश जो अदालत तब पारित करती है जब कोर्ट में केवल एक पक्ष मौजूद है और दूसरा पक्ष (जिसे नोटिस भेजा गया हो या हाजिर न हुआ हो) अदालत में मौजूद नहीं होता। यह अंतरिम रूप से पारित किया जाता है।

इस मामले में भी यही हुआ। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, कोर्ट में दूसरे पक्ष के सभी पत्रकार मौजूद नहीं हुए, जिसके कारण मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए उपलब्ध तथ्यों के आधार पर कोर्ट ने अंतरिम आदेश पारित किया। लेकिन बाद में कोर्ट में पत्रकारों ने अपनी दलीलें पेश की और सुनवाई भी हुई। सच सामने है कि पत्रकारों की आवाज नहीं दबाई गई।

उधर, संगठन का दूसरा दावा कि अदालत के आदेश पर सरकार ने सोशल मीडिया से तत्काल प्रभाव से अडानी एंटरप्राइजेज से जुड़ी सामग्री हटाने से कॉरपोरेट मनमानी का खतरा है और सेंसरशिप उनके हाथों में चली जाएगी। तो हकीकत यह है कि आदेश में साफ कहा है कि सिर्फ झूठी, अप्रमाणित और मानहानिकारक सामग्री पर रोक है, सही और सबूत-आधारित रिपोर्टिंग पर कोई रोक नहीं है। यानी प्रेस की स्वतंत्रता को खत्म नहीं किया गया बल्कि सिर्फ मानहानि और अफवाह जैसी सामग्री को हटाने का निर्देश दिया गया।

इसीलिए अब प्रेस क्लब ऑफ इंडिया और एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया का ‘रोना’ बंद हो जाना चाहिए और तथ्यों पर ज्यादा ध्यान देना चाहिए। क्योंकि कोर्ट का आदेश प्रेस की स्वतंत्रता पर हमला नहीं है। असल में एक अंतरिम आदेश है ताकि केस की पूरी सुनवाई तक गलत और अप्रमाणति बातें सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों पर फैलकर किसी की प्रतिष्ठा को नुकसान न पहुँचा सकें।