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क्या ग्रे लिस्ट में पाकिस्तान को शामिल करेगा FATF? पहलगाम में इस्लामी आतंकियों के हमले पर 55 दिन बाद तोड़ी चुप्पी, कहा- बिना फंडिंग के नहीं हो सकता है ऐसा अटैक

फाइनेंसियल एक्शन टास्क फ़ोर्स (FATF) ने पहलगाम में 22 अप्रैल, 2025 को हुए आतंकी हमले की निंदा की है। FATF ने कहा है कि पहलगाम जैसा हमला बिना किसी फंडिंग के नहीं हो सकता। FATF ने इस संबंध में एक बयान जारी किया है।

FATF ने सोमवार (16 जून, 2025) को यह आधिकारिक बयान जारी किया है। FATF ने कहा, “आतंकवादी हमले दुनिया भर में लोगों की जान लेते हैं, उन्हें अपंग बनाते हैं और भय पैदा करते हैं। FATF ने 22 अप्रैल 2025 को पहलगाम में हुए क्रूर आतंकवादी हमले पर गहरी चिंता जताई है और इसकी निंदा की है।”

FATF ने कहा, “यह और हाल ही में हुए अन्य हमले, बिना पैसे और आतंकवादी समर्थकों के बीच पैसे के लेन-देन के साधनों के बिना नहीं हो सकते थे।” FATF ने कहा है कि आतंक की फंडिंग रोकने के लिए वह 200 से अधिक जगह नेटवर्क का इस्तेमाल कर रहा है।

आधिकारिक बयान में FATF ने कहा है कि वह मामले में एक्शन लेते हुए जल्द ही आतंकी फंडिंग पर एक विश्लेषण भी जारी करेगा। FATF ने कहा कि आतंकवादियों को अपना मकसद पूरा करने में केवल एक बार सफल होने की आवश्यकता होती है, जबकि इसे रोकने के लिए हर बार सफल होना होगा।

पहलगाम आतंकी हमले के लगभग 2 महीने बाद यह बयान जारी करने पर FATF पर प्रश्न भी उठ रहे हैं। पहलगाम हमले के बाद पाकिस्तान को ग्रे लिस्ट में डालने के लिए FATF से माँग भी की थी। पाकिस्तान का दावा है कि FATF ने यह माँग नहीं मानी। हालाँकि, FATF का इस पर क्या रुख है, यह स्पष्ट नहीं हुआ है।

FATF के पहलगाम हमले के बयान के बाद उसके पाकिस्तान के खिलाफ एक्शन का आधार और मजबूत हो गया है। आतंकी फंडिंग के चलते पाकिस्तान इससे पहले तीन बार FATF की ग्रे लिस्ट में डाला जा चुका है। आखिरी बार उसे 2018 में ग्रे लिस्ट में डाला गया था। इससे वह 2022 में निकला था।

FATF की ग्रे अथवा ब्लैक लिस्ट में जाने वाले देशों को विदेशी व्यापार और कर्ज जुटाना मुश्किल हो जाता है। उन पर कई प्रकार के प्रतिबन्ध भी लग जाते हैं। FATF को वर्ष 1989 में मनी लांड्रिंग पर नजर रखने के लिए बनाया गया था, बाद में इसके अंतर्गत आतंकी फंडिंग देने वाले देशों पर एक्शन का काम भी आ गया।

मंदिर के सामने तुलसी लगाने से भड़के मुस्लिम, ‘जय श्रीराम’ बुलवाने की अफवाह जुनैद की बीवी ने फैलाई; उपद्रव करने लगी 2000 की भीड़: रिपोर्ट, बोले पीड़ित- हिंदुओं की दुकानें चुन-चुनकर जलाई

कोलकाता के महेशतला में 11 जून, 2025 को मुस्लिम भीड़ ने हिन्दुओं को निशाना बनाया था। मुस्लिम एक मंदिर के बाहर तुलसी का पेड़ लगाने को भड़के हुए थे। उन्होंने इस दौरान मंदिर पर भी हमला किया था और तोड़फोड़ की थी। उन्होंने हिन्दुओं की दुकानों और घरों को चुन चुन कर निशाना बनाया था। पुलिस इस मामले में 7 FIR कर चुकी है।

हिन्दुओं ने दैनिक भास्कर को बताया है कि शिव मंदिर के सामने मुस्लिम लगातार तुलसी मंच नहीं बनाने दे रहे थे। रुबाई घोष ने बताया कि कि जुनैद नाम का एक फल वाला यहाँ मंदिर के सामने कब्जा करके बैठा हुआ है। उन्होंने आरोप लगाया कि 11 जून को एक भी मुस्लिम ने दुकान नहीं खोली और वो हजारों की संख्या में इकट्ठा हो गए।

विजेंद्र गोस्वामी ने बताया कि इस भीड़ ने पथराव और हिंसा चालू कर दी, उन्होंने हिन्दू लोगों के साथ ही पुलिस को निशाना बनाया। मुस्लिम भीड़ ने शिव मंदिर अन्दर से तोड़ने की कोशिश की और दुकानों में रखा सारा सामान लूट लिया। हिन्दुओं का आरोप है कि उनकी गाड़ियाँ भी तोड़ दी।

मुस्लिम भीड़ की इस हिंसा में घायल हुए एक अरबिंदो बालो ने बताया कि मुस्लिम भीड़ का नेतृत्व फल वाला जुनैद कर रहा था जबकि उसकी बीवी रानी भीड़ को भड़का रही थी। आसपास रहने वाले हिन्दुओं ने स्पष्ट किया कि मामले को बातचीत से निपटाने की बजाय मुस्लिम भीड़ हिंसा पर उतारू रही और उनकी दुकानों को निशाना बनाती गई।

अरबिंदों बालों ने बताया कि जुनैद की बीवी ने जय श्री राम जबरदस्ती बुलवाने की अफवाह फैलाई। उन्होंने कहा कि उस वक्त 2-3 हजार लोग इकट्ठा हो गए थे और पुलिस उनकी हिंसा के दौरान कुछ नहीं कर पाई। मुस्लिमों ने इस बीच दावा किया है कि जुनैद से जय श्री राम बोलने को कहा गया और तुलसी लगाने के चलते हिंसा हुई।

पुलिस ने इस मामले में 7 FIR दर्ज की हैं। पुलिस 41 लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है। जुनैद भी गिरफ्तार हो चुका है। पुलिस मुस्लिमों की भूमिका की जाँच भी कर रही है। पुलिस ने कुछ हिन्दुओं को भी गिरफ्तार किया है।

गौरतलब है कि कि कोलकाता के महेशतला में 11 जून, 2025 को मुस्लिम भीड़ ने हिंसा की थी। इस हिंसा का टार्गेट एक शिव मंदिर था, इसमें तोड़फोड़ की गई थी। हिंसा में 60 से अधिक लोग घायल हुए थे, जिनमे पुलिसवाले भी थे। इसकी वीडियो भी सामने आई थी, जिसमें दंगा होते दिखा था। मामले में भाजपा ने दोषियों के खिलाफ एक्शन की माँग की थी।

‘यह 140 करोड़ भारतीयों का सम्मान’: PM मोदी को साइप्रस ने सर्वोच्च नागरिक सम्मान से नवाजा, 11 साल में भारतीय प्रधानमंत्री को 20+ देश कर चुके हैं सम्मानित; जानिए सबके बारे में

पीएम मोदी को साइप्रस ने अपने सर्वोच्च नागरिक सम्मान गैंड ‘क्रॉस ऑफ द ऑर्डर ऑफ मकारियोस 3’ से सम्मानित किया है। उम्मीद की जा रही है कि ये सम्मान भारत और साइप्रस के संबंधों को नई ऊँचाईयाँ देगा। साइप्रस के राष्ट्रपति निकोस क्रिस्टोडौलिडेस ने पीएम मोदी के साथ मिलकर मीडिया से बात की और आतंकवाद के खिलाफ जंग में पूरा समर्थन का भरोसा दिया।

वहीं पीएम मोदी ने कहा कि ये सम्मान सिर्फ उनका नहीं बल्कि भारत के 140 करोड़ जनता का सम्मान है, इसलिए वो ह्रदय से आभार जताते हैं। पीएम मोदी ने कहा, ” मैं यह सम्मान भारत और साइप्रस के बीच दोस्ताना संबंधों और साझा मूल्यों को समर्पित करता हूँ।”

पीएम ने कहा कि आने वाले दिनों में दोनों देशों के बीच साझेदारी नई ऊँचाईयाँ छूएगी। उन्होंने कहा, ” हम न सिर्फ अपने देशों की प्रगति को मजबूत करेंगे बल्कि शांतिपूर्ण, सुरक्षित वैश्विक माहौल को बनाने के लिए मिलकर काम करेंगे।”

सीमा पार आतंकवाद पर बोले पीएम मोदी

सीमा पार आतंकवाद के निपटने में भारत के रुख का साइप्रस ने समर्थन किया है। पीएम ने इसके लिए साइप्रस का आभार जताया। आतंकवाद, ड्रग्स और हथियारों की तस्करी की रोकथाम के लिए रियल टाइम इंफोर्मेशन एक्सचेंज का मैकेनिज्म तैयार किया जाएगा।

पीएम मोदी ने कहा, “हम अगले 5 सालों में एक ठोस रोड मैप तैयार करेंगे और इसको हकीकत में तब्दील करने के लिए द्विपक्षीय प्रोग्राम बनाएँगे। साइबर सिक्योरिटी पर अलग से बातचीत होगी।”

पीएम ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र में रिफॉर्म्स को लेकर दोनों देश सहमत हैं और साइप्रस भारत की स्थायी सदस्यता का समर्थन करता है। साइप्रस में योग और आयुर्वेद को काफी प्रोत्साहित किया गया है। साइप्रस भारतीय टूरिस्टों का अब पसंदीदा जगहों में एक हो गया है।

पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध पर जताई चिंता

पीएम ने कहा कि पश्चिम एशिया और यूरोप में चल रहे संघर्ष को लेकर दोनों देश चिंतित हैं। इसका असर न सिर्फ उन देशों पर पड़ रहा है जो इसमें शामिल हैं, बल्कि दुनिया के बाकी देश भी इससे प्रभावित हैं। उन्होंने कहा, ” ये युग अब युद्ध का नहीं बल्कि संवाद और समाधान के साथ मानवता का है।”

पीएम मोदी को 20 से ज्यादा देश कर चुके हैं सम्मानित

इतिहास में सबसे अधिक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित भारतीय नेता पीएम मोदी हैं जिन्हें 21 देशों ने सम्मानित किया है।

  • सऊदी अरब ने 2016 में ‘ऑर्डर ऑफ किंग अब्दुलअजीज’ से सम्मानित किया।
  • अफगानिस्तान ने 2016 में ‘स्टेट आर्डर ऑफ़ ग़ाज़ी आमिर अमानुल्लाह खान’ से सम्मानित किया।
  • फिलिस्तीन ने 2018 में ‘ग्रैंड कॉलर’ से सम्मानित किया।
  • मालदीव ने 2019 में ‘निशान इज्जुद्दीन’ से नवाजा।
  • संयुक्त अरब अमीरात ने 2019 में ‘ऑर्डर ऑफ जायद’ से सम्मानित किया।
  • बहरीन ने 2019 में ‘किंग हमाद ऑर्डर ऑफ द रेनेसां’ से नवाजा।
  • अमेरिका ने 2020 में ‘लीजन ऑफ मेरिट’ की सर्वोच्च डिग्री से सम्मानित किया।
  • फिजी ने 2023 में सर्वोच्च सम्मान ‘ऑर्डर ऑफ फिजी’ से सम्मानित किया।
  • पापुआ न्यू गिनी ने 2023 में ‘ऑर्डर ऑफ लोगोहू ‘ से नवाजा।
  • मिस्र ने 2023 में ‘ऑर्डर ऑफ द नाइल’ से सम्मानित किया।
  • फ्रांस ने 2023 में ‘लीजन ऑफ ऑनर’ से सम्मानित किया ।
  • ग्रीस ने 2023 में ‘ऑर्डर ऑफ द ड्रुक ग्यालपो’ से नवाजा गया।
  • भूटान ने 2024 में ‘ऑर्डर ऑफ द ड्रुक ग्यालपो’ से सम्मानित किया।
  • रूस ने 2024 में ‘ऑर्डर ऑफ सेंट एंड्रयू द ए पोस्टल’ से नवाजा।
  • नाइजीरिया ने 2024 में ‘ग्रैंड कमांडर ऑफ द ऑर्डर ऑफ द नाइजर’ से सम्मानित किया।
  • डोमिनिका ने 2024 में ‘ डोमिनिका अवार्ड ऑफ ऑनर ‘ से सम्मानित किया।
  • गुयाना ने 2024 में ‘ऑर्डर ऑफ एक्सीलेंस’ से सम्मानित किया।
  • कुवैत ने 2024 में ‘ऑर्डर ऑफ मुबारक अल-कबीर’ से नवाजा।
  • रूस ने 2024 में ‘ग्रैंड क्रॉस विद कॉलर’ से सम्मानित किया।
  • बारबाडोस ने 2025 में ‘ऑर्डर ऑफ एक्सीलेंस’ से नवाजा।
  • मॉरीशस ने 2025 में ‘ऑर्डर ऑफ द स्टार और की ऑफ द इंडियन ओशन’ से नवाजा।
  • श्रीलंका ने 2025 में ‘मित्र विभूषण’ अवॉर्ड से नवाजा।
  • साइप्रस ने 2025 में ‘क्रॉस ऑफ द ऑर्डर ऑफ मकारियोस 3’ से नवाजा।

अवैध दरगाह को समतल करने पहुँचा बुलडोजर, भीतर मिले स्पेशल रूम से लेकर ऐशोआराम के सामान: बाथटब-संगमरमर के कमरे, लिखा था- याद रखोगे तो बरकत पाओगे

गुजरात के जामनगर में अवैध निर्माण पर बड़ी कार्रवाई की गई है। यहाँ लाखों स्क्वायर किलोमीटर में बनाए गए अवैध निर्माण पर बुलडोजर चला है। मेगा डिमोलिशन के तहत 300 से अधिक मकान भी ध्वस्त कर दिए गए हैं। कुछ मजहबी ढाँचे भी ध्वस्त किए गए हैं। यहाँ एक दरगाह में ऐशोआराम की तमाम चीजें पाई गई हैं। यह कार्रवाई लगातार चालू है।

ऑपइंडिया ने जामनगर के एसपी प्रेमसुख डेलू से इस मामले मे बातचीत की है। एसपी प्रेमसुख डेलू ने बताया कि जामनगर सिटी A डिवीजन पुलिस स्टेशन क्षेत्र में 7 लाख वर्ग फीट जमीन पर अवैध मजहबी ढाँचे बनाए गए थे।

उन्होंने बताया कि इस जमीन की कीमत ₹193.57 करोड़ है। एसपी डेलू ने कहा कि पिछले 25-30 वर्षों से धार्मिक ढाँचों ने सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा कर रखा था। पुलिस अधिकारी ने बताया कि वाघेर वाडो और बच्चूनगर इलाके में सरकारी जमीन पर अवैध रूप से दरगाहों और मस्जिदों का निर्माण किया गया है।

उन्होंने बताया हिया जामनगर नगर निगमऔर जामनगर पुलिस ने इन पर संयुक्त अभियान चलाकर ध्वस्तीकरण की कार्यवाही की है। पुलिस अधिकारी ने यह भी बताया कि रंगमती नदी के किनारे 300 से अधिक अवैध मकान और 7 से 8 धार्मिक संरचनाओं को ध्वस्त कर दिया गया है।

दरगाह में मिला ऐशोआराम का सामान

ध्वस्तीकरण के दौरान सरकारी जमीन पर बनाए मजहबी ढांचों पर भी जाँच जारी है। एक मजहबी स्थल पर संदेह गहरा गया है। यह दरगाह बहुत विशाल क्षेत्र में फैली हुई थी और भव्य थी। इसके अंदर कई शानदार वस्तुएँ भी मिली हैं। पुलिस प्रशासन ने इसका वीडियो भी रिकॉर्ड किया है।

वीडियो में देखा जा सकता है कि दरगाह में आलीशान बाथटब लगे हुए हैं और शानदार कमरे भी बने हुए हैं। दरगाह को विदेशी फंडिंग का शक भी गहरा रहा है। दरगाह काफी भव्य तरीके से बनाई हुई है। यहाँ महलों जैसे बाथटब मिले हैं। एसपी डेलू ने बताया है कि इसकी जाँच चालू हो गई है।

जामनगर पुलिस ने आगे बताया कि बच्चूनगर इलाके में लगभग 11,000 वर्ग फीट के क्षेत्र में एक दरगाह का निर्माण किया गया है, जिसके अंदर एसपी प्रेमसुख डेलू और उनकी टीम निरीक्षण करने गई थी। इस बीच पुलिस अंदर की आलीशान सुविधाएं आदि देखकर हैरान रह गई।

इस दरगाह में लिखित घोषणा की गई है जिसमें कहा गया है कि इस स्थान पर किसी भी प्रकार का पैसा स्वीकार नहीं किया जाएगा। पुलिस अब इस बात की जाँच कर रही है कि जब पैसा नहीं लिया गया तो इतना आलीशान निर्माण कैसे किया गया।

इस दरगाह में किसी भी प्रकार का बक्सा या डिब्बा नहीं रखा जाता है तथा यहां धन रखना भी वर्जित है। इसके अलावा दरगाह में यह भी लिखा है कि, “बादशाह के दरबार में कोई भीख माँगने ही आता है, दान देने नहीं।”

इसके अतिरिक्त यह भी लिखा था कि यहाँ किसी भी प्रकार की धनराशि स्वीकार नहीं की जाएगी। जिला पुलिस प्रमुख प्रेमसुख डेलू और एक अन्य पुलिस टीम ने इसका जब निरीक्षण किया, इस दौरान दरगाह में कई आलीशान सुविधाएँ भी देखने को मिलीं। रंग-बिरंगे और आकर्षक टाइलों और संगमरमर जड़े हुए कई कमरे भी देखे गए।

दरगाह से अलग एक विशेष कमरा बनाया गया था, जिसमें बाथटब भी देखने को मिला। इस बाथटब रूम के दरवाजे पर एक अलग नोटिस भी चिपकाया गया था। इसमें कहा गया कि उस कमरे में बाहरी लोगों का प्रवेश वर्जित है।

दरगाह में एक विशेष सूचना भी लिख दी गई कि किसी को भी इस कमरे में प्रवेश की अनुमति नहीं है। इसके अलावा एक नारा भी लिखा था, जिसमें कहा गया था, ”याद रखोगे तो बरकत पाओगे, भूल करोगे तो बर्बाद हो जाओगे।” फिलहाल दरगाह का चौकीदार फरार है, पुलिस उसकी तलाश कर रही है।

ऑपइंडिया से बातचीत में हिंदू कार्यकर्ता युवराज सोलंकी ने कहा कि दरगाह में कई आलीशान चीजों की मौजूदगी संदेह पैदा करती है। उन्होंने यह भी कहा कि दरगाह में बर्गलर बार और बाथटब आदि जैसे कमरों की कोई जरूरत नहीं है लेकिन फिर भी, यह सब एक आलीशान ढाँचे में था। उन्होंने इस बात पर संदेह जताया कि क्या दरगाह को कोई बाहरी फंडिंग मिलती है और इसकी उचित जाँच की माँग की।

PM मोदी पर खालिस्तानी ख़तरा, आतंकियों की शरणस्थली है कनाडा: उन संगठनों का कच्चा चिट्ठा, जो G7 में डाल सकते हैं रंग में भंग

विश्व के सात महत्वपूर्ण देशों के समूह G7 की बैठक कनाडा में आयोजित हो रही है। इस वार्षिक शिखर सम्मलेन में भारतीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भी कनाडा जा रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को इस बैठक के लिए न्योता नए कनाडाई प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने दिया है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की कनाडा यात्रा ऐसे समय हो रही है, जब दोनों देशों के संबंध कुछ खास अच्छे हैं। कनाडा बीते कुछ वर्षों में खालिस्तानी और इस्लामी आतंकियों की शरणस्थली बन चुका है।

कनाडा में G7 की यह बैठक अल्बर्टा में हो रही है। 16-17 जून, 2025 को होने वाले इस शिखर सम्मलेन के लिए प्रधानमंत्री मोदी सोमवार (16 जून, 2025) को कनाडा पहुँच रहे हैं। इस बीच खालिस्तानी आतंकियों ने प्रधानमंत्री मोदी के अल्बर्टा दौरे पर बड़े विरोध प्रदर्शनों और यहाँ तक कि हमले तक की तैयारी कर ली है, ऐसी सूचना है। इस काम को कनाडा में वर्तमान में मौजूद कई खालिस्तानी आतंकी संगठन अंजाम दे सकते हैं। इनमें से कई लम्बे समय से सक्रिय हैं।

बब्बर खालसा इंटरनेशनल (BKI)

बब्बर खालसा सबसे पुराने और सबसे संगठित खालिस्तानी आतंकवादी समूहों में से एक है। इसकी जड़ें 1920 के बब्बर अकाली आंदोलन से जुड़ी हैं, लेकिन औपचारिक रूप से इसने 1978 में बैसाखी के दिन अखंड कीर्तनी जत्थे और निरंकारियों के बीच हुई झड़पों के बाद आकार लिया था।

बब्बर खालसा को UAPA कानून के तहत भारत में प्रतिबंधित किया गया है। 24 अप्रैल, 1980 को निरंकारी प्रमुख गुरबचन सिंह की हत्या के बाद, बीबी अमरजीत कौर के अनुयायियों ने खुद को बब्बर खालसा घोषित किया था। इसने 1981 में कनाडा की धरती से काम करना चालू किया था।

इसकी गतिविधियों के लिए पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी ISI पैसा देती है। इसी संगठन ने 1985 में एअर इंडिया के विमान कनिष्क को बम विस्फोट से उड़ाया था, जिसमें 300 से अधिक लोगों की मौत हो गई थी। इसके अलावा इसी संगठन ने पंजाब के मुख्यमंत्री रहे बेअंत सिंह की हत्या करवाई थी। इसका सरगना वाधवा सिंह बब्बर वर्तमान में पकिस्तान में रहता है।

बब्बर खालसा इंटरनेशनल में वर्तमान में वाधवा सिंह के अलावा लखबीर लांडा, हरविंदर रिंदा और गोल्डी बराड़ जैसे आतंकी काम करते हैं। यह सभी भारत से बाहर बैठ कर पंजाब समेत बाकी देश में अशांति फैलाना चाहते हैं।

इंटरनेशनल सिख यूथ फेडरेशन (ISYF)

इंटरनेशनल सिख यूथ फेडरेशन को भी भारत ने UAPA के तहत बैन किया हुआ है। यह यूनाइटेड किंगडम, जर्मनी, कनाडा और अमेरिका में अपनी ब्रांच के माध्यम से काम करता है। ISYF का मुख्य उद्देश्य भी खालिस्तान बनाना है। इस संगठन को पहले जरनैल सिंह भिंडरावाले का भतीजा लखबीर सिंह रोडे चलाता था।

उसकी पाकिस्तान में 2023 में मौत हो गई थी। वर्तमान में उसका बेटा भगत बराड़ इसमें शामिल है। वह कनाडा में एक व्यापारी है लेकिन लगातार खालिस्तानी गतिविधियों के लिए पाकिस्तान जाया करता है। उसे कनाडा ने भी नो फ्लाई लिस्ट में रखा हुआ है।

इसके अलावा एक और आंतकी मनवीर सिंह दुह्डा भी कनाडा में रह कर वर्तमान में ISYF को पैसा देता है और इसकी आतंकी गतिविधि बढ़ाता है। इसके अलावा सुलिंदर सिंह विर्क और मलकीत सिंह फौजी जैसे आतंकी भी इस संगठन में शामिल हैं।

सिख लिबरेशन फ्रंट (SLF)

विदेश में बसने वाले खालिस्तानियों का समूह माने जाने वाले सिख लिबरेशन फ्रंट में कनाडा, ब्रिटेन और अमेरिका के खालिस्तानी शामिल हैं। यह अन्य खालिस्तानी समूहों से अलग है क्योंकि इसका कोई औपचारिक ऑनलाइन या सार्वजनिक अस्तित्व नहीं है। यह एक संगठन की तरह कम और एक समूह की तरह ज्यादा काम करता है।

इसमें अमेरिका और कनाडा के तीन समूह शामिल हैं। इसकी गतिविधियों पर भारतीय सुरक्षा एजेंसियाँ लगातार नजर बनाए रखती हैं। इसका कामधाम अभी मोहिंदर सिंह बुअल देखता है। वह कनाडा के वैंकूवर का रहने वाला है और कनाडाई खालिस्तानी नेता जगमीत सिंह का ख़ास है। उसके लिंक एक आतंकी परिवार से ही हैं।

खालिस्तान जिंदाबाद फ़ोर्स (KZF)

आतंकी रंजीत सिंह नीता की अगुवाई में 1993 में बना खालिस्तान जिंदाबाद फ़ोर्स वर्तमान में भारत में UAPA के तहत बैन है। KZF के तीन आतंकी हाल ही में उत्तर प्रदेश के पीलीभीत में मार गिराए गए थे। KZF मुख्य तौर पर सिख युवाओं को ऑनलाइन भड़का कर उनसे हमला करवाता है।

पंजाब के SBS नगर में चौकी पर हमला भी इसने ही करवाया था। इसके तार अमेरिका, कनाडा, मलेशिया से लेकर जर्मनी और नेपाल तक फैले हुए हैं। 1996 में झेलम एक्सप्रेस में धमाका करवाने से लेकर दिल्ली के पहाड़गंज में 2000 में बम ब्लास्ट करवाने तक की जिम्मेदारी इसी संगठन ने ली है।

इसका मुखिया नीता भी UAPA के तहत बैन है। वह NIA और पंजाब पुलिस का वांटेड है। इस संगठन में भूपिंदर सिंह भिंदा नाम का आतंकी भी शामिल है। उसने डेरा राधास्वामी सत्संग व्यास के मुखिया को मारने की योजना बनाई थी, इस मामले में उसे सजा भी हुई थी। इसके अलावा इस संगठन में गुरमीत सिंह बग्गा नाम का आतंकी भी शामिल है।

सिख फॉर जस्टिस (SFJ)

सिख फॉर जस्टिस (SFJ) अमेरिका से काम करने वाला खालिस्तानी संगठन है। इसको 2009 में वकील गुरपतवंत सिंह पन्नू ने बनाया था। यह भी आजाद खालिस्तान बनाना चाहता है। SFJ ने दुनिया भर में खालिस्तान के नाम पर खालिस्तान रेफरेंडम का लगातार आयोजन किया है। इसके अलावा यह संगठन लगातार सोशल मीडिया पर आतंक को बढ़ावा देता रहा है।

इसे 2019 में मोदी सरकार ने UAPA के तहत बैन कर दिया था। यह समूह कभी भारत के नक़्शे से छेड़छाड़ करता है तो भारतीय नेताओं और अफसरों को मारने की धमकियाँ देता है। इस काम के लिए SFJ ने इनामों की घोषणा भी की है।

इस संगठन का चेहरा गुरपतवंत सिंह पन्नू है। पन्नू लगातार सोशल मीडिया का इस्तेमाल खालिस्तानी एजेंडा को आगे बढ़ाने के लिए करता है। उसके पहले भी कई आतंकियों से लिंक रहे हैं।

खालिस्तान कमांडो फ़ोर्स (KCF)

खालिस्तान कमांडो फोर्स 1986 में बना था। इसका उद्देश्य हिंसा के जरिए खालिस्तान बनाना था। ये लोग सशस्त्र संघर्ष, फिरौती के लिए अपहरण और बैंकों को लूटना, हथियार खरीदने और लोगों को प्रशिक्षित करने के लिए धन जुटाने जैसे काम करते आए थे। इसका सरगना परमजीत सिंह पंजवार था।

पंजवार के नेतृत्व में, KCF ने 80 और 90 के दशक के अंत में कई आतंकी हमले अंजाम दिए। इनमे राजनीतिक हत्याओं से लेकर कॉलेजों में मर्डर तक शामिल थे। KCF नेने फिरोजपुर में 10 राय सिखों की भी हत्या की थी। इसका उद्देश्य डर पैदा करना था।

इसके बाद उन्होंने भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड के प्रमुख मेजर जनरल बी.एन. कुमार की हत्या और पटियाला के थापर इंजीनियरिंग कॉलेज में 18 छात्रों की हत्या को अंजाम दिया। KCF का पंजवार ही कर्ता धर्ता है। वह लगातार भारत विरोधी साजिशें रचता रहता है।

खालिस्तान टाइगर फ़ोर्स (KTF)

खालिस्तान टाइगर फोर्स या KTF की स्थापना जगतार सिंह तारा ने की थी। वह पहले बब्बर खालसा इंटरनेशनल का सदस्य था। तारा 31 अगस्त, 1995 को पंजाब के मुख्यमंत्री बेअंत सिंह की हत्या में शामिल था। भारत ने वर्तमान में खालिस्तान टाइगर फ़ोर्स को बैन किया हुआ है।

जगतार सिंह तारा भी 2015 में गिरफ्तार हो चुका है। उसकी गिरफ्तारी थाईलैंड में हुई थी। इस संगठन के तार ब्रिटेन, कनाडा, अमेरिका, फ्रांस और यहाँ तक कि स्पेन में भी जुड़े हैं। KTF में अर्शदीप डल्ला और मनदीप सिंह धालीवाल जैसे आतंकी शामिल हैं। यह लगातार भारत विरोधी साजिशें रच रहे हैं।

पीएम के दौरे पर आतंकी साया

जब कोई राष्ट्राध्यक्ष किसी वैश्विक शिखर सम्मेलन में जाता है, तो आम तौर पर सहयोग, विकास और नीति पर ध्यान केंद्रित किया जाता है। लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जी-7 के लिए अल्बर्टा की यात्रा के मामले में, कनाडा के सरकार की शह पर काम करने वाले खालिस्तानी आतंकियों ने दूसरी तरफ मोड़ दिया है।

खालिस्तानी कोई छिपे हुए कोनों में अलग-थलग आवाज़ें नहीं हैं। उनको मोटी फंडिंग मिलती है और वो भारत से लेकर यूरोप और अमेरिका तक फैले हुए हैं। कुछ मामलों में उन्हें तमाम सरकारें तक मदद कर रही हैं।

इस कहानी में पाकिस्तान की ISI एक जाना-पहचाना नाम है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय को वास्तव में इस बात की चिंता होनी चाहिए कि इनमें से कितने ऑपरेटिव कनाडा, यूके, यूएस और मुख्य भूमि यूरोप में स्वतंत्र रूप से घूमते हैं। वे देश जो अक्सर मानवाधिकारों और कानून के शासन को बढ़ावा देते हैं, वही इन आतंकियों को पनाह देते हैं।

खालिस्तानी आतंकी भारतीय राजनयिकों पर हमले करके यह दिखा भी चुके हैं कि वह किसी भी भारतीय को निशाना बनाने से चूकेंगे नहीं। ऐसे में पीएम मोदी की इस यात्रा और इसमें खालिस्तानियों के कारनामों पर सबकी नजर रहने वाली है।

जो पूछ रहे थे सिंधु का पानी पाकिस्तान जाने से रोकोगे कैसे, उनको 113 किमी लंबी नहर से जवाब देगी मोदी सरकार: चिनाब से जुड़ेगी रावी-सतलुज-व्यास, राजस्थान में भी आएगी हरियाली

पहलगाम में आतंकी हमले के बाद भारत सरकार ने सिंधु जल संधि को निलंबित कर दिया था। हालाँकि पाकिस्तानी सरकार भारत को पत्र लिखकर लगातार संधि को फिर से शुरू करने की गुहार लगा रही है। पाकिस्तान जहाँ भारत को संधि को फिर से शुरू करने के लिए पत्र भेज रहा है, वहीं उसके राजनेता भी ‘खून बहेगा’ और ‘हम तुम्हारी सांस रोक देंगे’ जैसी धमकियाँ दे रहे हैं। हालाँकि भारत परियोजना को स्थगित रखने के रुख पर कायम है ।

सिन्धु नदी के पानी का बेहतर इस्तेमाल के लिए भारत ने बड़ी योजना बना ली है। इसके तहत 113 किलोमीटर लंबी नहर बनाई जाएगी। ये नहर चिनाब नदी को रावी, सतलुज, व्यास नदियों के सिस्टम को जोड़ेगी। इस परियोजना का फायदा न सिर्फ जम्मू कश्मीर, बल्कि पंजाब, हरियाणा और राजस्थान को भी मिलेगा। योजना का मकसद चिनाब के जल का बेहतर इस्तेमाल है, साथ ही पाकिस्तान जाने वाले पानी को रोक कर उन जगहों तक पहुँचाना है जहाँ पानी कम है।लग

केन्द्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने मध्य प्रदेश के पंचमढ़ी में बीजेपी के प्रशिक्षण शिविर में इस योजना की जानकारी दी। उन्होने कहा, ” सिंधु का पानी तीन साल के भीतर नहरों के माध्यम से श्री गंगानगर तक पहुँचाया जाएगा।” उन्होंने आगे कहा, “पाकिस्तान पानी की हर बूँद के लिए तरस जाएगा”

प्रस्तावित नहर नेटवर्क के तहत 11 नहरों को जोड़ने की योजना है और अंत में इंदिरा गाँधी नहर सिस्टम में ये मिलेगा। इससे पंजाब, हरियाणा, राजस्थान को फायदा होगा और दूर-दराज के क्षेत्रों तक पानी पहुँचाया जा सकेगा। पानी के इस वितरण का असर जलवायु परिवर्तन और बारिश के पैटर्न में हो रहे बदलाव पर भी दिखेगा।

रणबीर नहर की बढ़ाई गई लंबाई

इस काम को आगे बढ़ाने के लिए केन्द्र सरकार ने रणबीर नहर की लंबाई दोगुना करने की योजना बनाई है। अब ये 60 किलोमीटर से बढ़ाकर 120 किलोमीटर कर दिया गया है। प्रताप नहर को लेकर भी सरकार की ऐसी ही योजना है।

रणवीर नहर (फोटो साभार- जम्मू कश्मीर विरासत)

उझ परियोजना को दी जा रही गति

रावी की सहायक नदी उझ पर बहुउद्देशीय परियोजना बनाने का काम कई सालों से रुका हुआ है। मोदी सरकार जम्मू-कश्मीर के कठुआ में उझ बहुउद्देश्यीय परियोजना को पुनर्जीवित करने की तैयारी कर ली है। इस परियोजना का उपयोग पनबिजली, सिंचाई और पीने के उद्देश्यों के लिए किया जाएगा। उझ के नीचे एक दूसरा रावी-ब्यास लिंक अब बड़ी नहर परियोजना का हिस्सा होगा। इसे पहले रावी के अतिरिक्त पानी को पाकिस्तान में जाने से रोकने के लिए बनाई गई थी। परियोजना में अब ब्यास बेसिन में पानी स्थानांतरित करने के लिए एक बैराज और सुरंग भी बनाया जा रहा है।।

पनबिजली परियोजनाओं पर काम तेज

चिनाब नदी पर बने बागलीहार और सलाल हाइड्रो परियोजनाओं के जलाशयों में गाद निकालने का काम जोरों से चल रहा है। सिंधु जल परियोजना के तहत आने वाली पनबिजली परियोजनाओं जैसे- पाकल दुल (1000 मेगावाट), किरु (624 मेगावाट) क्वार (540 मेगावाट) और रतले (850 मेगावाट) पर काम चल रहा है।

मोदी सरकार चाहती है कि इन योजनाओं का फायदा जल्दी से जल्दी लोगों को मिले इसलिए परियोजनाओं का काम तेजी हो रहा है।

1960 में हुआ था भारत-पाकिस्तान के बीच सिंधु जल समझौता

19 सितंबर 1960 को कराची में सिंधु जल संधि पर भारत और पाकिस्तान के बीच विश्व बैंक की मध्यस्थता से समझौता हुआ था। यह समझौता भारत और पाकिस्तान द्वारा सिंधु नदी प्रणाली के जल के उपयोग को नियंत्रित करता है। प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू और पाकिस्तान के फील्ड मार्शल अय्यूब खान द्वारा हस्ताक्षरित, यह संधि हिमालय से निकलने वाली छह नदियों के पानी को आवंटित करती है, जिन्हें मोटे तौर पर दो श्रेणियों में विभाजित किया गया है: पूर्वी नदियाँ और पश्चिमी नदियाँ।

पूर्वी नदियाँ रावी (हिमाचल प्रदेश में उद्गम), ब्यास (हिमाचल प्रदेश और पंजाब से होकर बहती है), और सतलुज (तिब्बत से निकलती है, भारत से होकर पाकिस्तान में बहती है) भारत को दिया गया। जबकि सिंधु, चिनाब और झेलम का पानी पाकिस्तान को आवंटित की गईं।

भारत पूर्वी नदियों के पानी का प्रभावी ढंग से जलविद्युत, सिंचाई और अन्य उद्देश्यों के लिए उपयोग करता है। इस बीच, सिंधु, झेलम और चिनाब नदियाँ पाकिस्तान की पनबिजली, सिंचाई और अन्य जरूरतों के लिए आवश्यक हैं। सिंधु नदी पाकिस्तान की जीवन रेखा से कम नहीं है।

सिंधु जल संधि समझौते को आपसी सहयोग और शांति की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम बताया गया था। हालाँकि यह संधि निश्चित रूप से संतुलित नहीं थी। इससे पाकिस्तान को अधिक लाभ हुआ क्योंकि इसके अंतर्गत आनेवाली नदियाँ का जल प्रवाह पश्चिमी दिशा में ज्यादा है।

इसकी वजह से भारत इन नदियों में बहने वाली कुल जल प्रवाह का लगभग 20 फीसदी ही नियंत्रित करता है, जो सालाना करीब 33 मिलियन एकड़ फीट या 41 बिलियन क्यूबिक मीटर होता है। जबकि पाकिस्तान को 80 प्रतिशत मिलता है, जो लगभग 135 मिलियन एकड़ फीट या 99 बिलियन क्यूबिक मीटर होता है। इस समझौते में पश्चिमी नदियों में बड़े बहुउद्देशीय परियोजनाओं के बनाने पर रोक लगी थी साथ ही इसमें पाकिस्तान में जल प्रवाह को अवरुद्ध करने या नाटकीय रूप से बदलने पर प्रतिबंध लगा दिया।

हालाँकि संधि के स्थगित होने के बाद भारत को अब पाकिस्तान की ‘चिंताओं’ या ‘आपत्तियों’ (भारतीय परियोजनाओं के डिजाइनों पर जानबूझकर अवरोधों को पढ़ें) पर ध्यान देने की आवश्यकता नहीं है।

पिछले कुछ वर्षों में, भारत ने सिंधु जल संधि के तहत अपने पूर्ण आवंटन का उपयोग करने के लिए लगातार काम किया है। खासकर 2016 के उरी हमले के बाद भारत ने योजना को गति दी है। भारत ने हाल के वर्षों में पूर्वी नदियों से पानी को पकड़ने और पश्चिमी नदियों के सीमित उपयोग के लिए बुनियादी ढाँचे को मजबूत करने पर अधिक ध्यान केंद्रित किया है।

पीएम मोदी ने किया किशनगंगा परियोजना का उद्घाटन

इसको देखते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने मई 2018 में जम्मू और कश्मीर में झेलम की पश्चिमी नदी पर किशनगंगा परियोजना का उद्घाटन किया। किशनगंगा परियोजना में उझ नदी से संग्रहित लगभग 0.65 मिलियन एकड़ फीट (MAF) पानी का उपयोग करके 300 मेगावाट से अधिक बिजली पैदा की जा सकती है और कम से कम 30,000 हेक्टेयर भूमि की सिंचाई की जा सकती है। पाकिस्तान के विरोध के बावजूद प्रधानमंत्री मोदी ने ये साहसिक कदम उठाया।

सिंधु की सहायक नदियों पर स्थित किशनगंगा जलविद्युत संयंत्र का निर्माण 2007 में शुरू हुआ था और चिनाब पर बने रतले जलविद्युत संयंत्र की आधारशिला 2013 में रखी गई थी।

लंबे समय तक, भारत ने रावी नदी के कुछ पानी को बिना इस्तेमाल किए पाकिस्तान में बहने दिया। हालांकि, 2024 में शाहपुरकंडी बैराज के पूरा होने के साथ ही इस प्रवाह को रोक दिया गया और करीब 1,150 क्यूसेक पानी को सिंचाई के लिए जम्मू-कश्मीर और पंजाब की ओर मोड़ दिया गया। इसके साथ ही भारत ने न केवल घरेलू उपयोग के लिए आवंटित पूर्वी नदी का अधिकतम उपयोग किया, बल्कि पाकिस्तान तक पहुँचने वाले पानी को भी कम किया। इस बीच, रावी नदी पर उझ बहुउद्देशीय परियोजना और मकौरा पट्टन बैराज और चिनाब और झेलम पर बन रहे रतले और कीरू सहित रन-ऑफ-रिवर (आरओआर) परियोजनाओं के निर्माण कार्य में भी तेजी लाई गई है।

हिंदू लड़कियों को फँसाओ, उनसे निकाह करके धंधा करवाओ: इंदौर में लव जिहाद केस के लिए मुस्लिम लड़कों को पैसे दे रहा था कॉन्ग्रेस पार्षद अनवर कादरी, खुलासा होते ही हुआ फरार

मध्य प्रदेश के इंदौर लव जिहाद मामले में कॉन्ग्रेस पार्षद अनवर कादरी उर्फ अनवर डकैत का नाम उजागर हुआ है। आरोप है कि उसने हिंदू लड़कियों को फँसवाने के लिए अपने दो गुर्गे साहिल शेख और अल्ताफ खान को लाख-लाख रुपए दिए थे। उसने इन दोनों को पैसे देकर कहा था कि हिंदू लड़कियों को शादी करके फँसाओ और फिर देह व्यापार में धकेल दो। अब पुलिस मामले की जाँच कर रही है। पार्षद फरार है। उसकी तलाश में दबिश दी जा रही है।

पुलिस ने शुक्रवार को आरोपित साहिल और अल्ताफ को गिरफ्तार कर लिया है। दोनों ने कॉन्ग्रेस पार्षद से पैसे लेने की बात स्वीकारी है। साहिल ने बताया कि उसे हिंदू लड़की से शादी करने के 2 लाख रुपए दिए गए थे। वहीं, अल्ताफ ने भी माना कि उसे भी 1 लाख रुपए ही मिले थे। पार्षद ने काम पूरा होने के बाद बाकी पैसे देने का वादा किया था। दोनों के बयान का एक वीडियो भी वायरल हो रहा है।

इस वीडियो में लव जिहादी साहिल और अल्ताफ अपने फोन में कुछ हिंदू लड़कियों की तस्वीरें भी दिखाते हैं। इन लड़कियों को उन्होंने सोशल मीडिया पर हिंदू आईडी बनाकर फँसाया था। फिर मिलने के लिए बुलाकर दुष्कर्म किया। इसके बाद शादी कर धर्म परिवर्तन करवाने की योजना थी। लव जिहादियों ने बताया कि कॉन्ग्रेस पार्षद ने उन्हें इन लड़कियों से ‘धंधा’ करवाने के लिए भी कहा था।

पुलिस ने लव जिहादियों के बयान के आधार पर कॉन्ग्रेस पार्षद अनवर कादरी के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया। इसके बाद उसकी गिरफ्तारी के लिए घर पहुँचे, तो वह फरार हो चुका था। अब पुलिस उसकी तलाश में लगातार दबिश दे रही है। पुलिस ने बताया कि साहिल और अल्ताफ को सोमवार (16 जून 2025) तक रिमांड में रखकर पूछताछ की जा रही है।

बजरंग दल ने लव जिहादियों को रंगे हाथों पकड़ा

साहिल शेख और अल्ताफ खान को बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने रंगे हाथों पकड़ा था। जब वह हिंदू लड़की के साथ सार्वजनिक जगह पर मिलने गए थे। बजरंगल दल ने साहिल को सुपर कॉरिडोर इलाके में दबोचा। इसके बाद लड़की को घर के लिए रवाना कर दोनों जिहादियों को खूब पीटा।

साहिल और अल्ताफ ने कॉन्ग्रेस पार्षद अनवर कादरी के कहने पर हिंदू लड़कियों को फँसाने की बात कही। इसका वीडियो अब सोशल मीडिया पर वायरल है। कार्यकर्ताओं ने दोनों को पकड़कर बाणगंगा पुलिस के हवाले कर दिया। इनमे साहिल कार शोरूम में काम करता है और अल्ताफ पेंटर है।

बजरंग दल के कार्यकर्ता ने बताया कि एक लव जिहादी के मोबाइल फोन में चैट खुली मिली थी। इसमें वो किसी हिंदू युवक से बात करते हुए धमकी दे रहा है। जिहादी कहता है, “मैं लड़की का बॉयफ्रेंड हूँ और नरवल में रहता हूँ। तुझसे जो बने कर लेना। इसे इस्लाम धर्म कबूल करवाऊँगा और तू मेरा कुछ नहीं कर पाएगा।” युवक ने जब कारण पूछा तो कहने लगा, “हमारे धर्म में ऐसा ही लिखा है।”

जिहादी की इंस्टाग्राम पर धमकी देते हुए चैट्स (साभार: R.Bharat)

जिहादी ने आगे कहा, “तू इतना सब क्यों पूछ रहा है। तू संगठन का आदमी है, मुझे सब पता चल जाता है। तुम्हारे संगठन के आदमी मुझसे भी जुड़े हैं।” इसके बाद बजरंग दल ने जब उसका फोन खंगाला तो हिंदू युवतियों के साथ महाकाल दर्शन के फोटो भी मिले। ये जिहादी इंस्टाग्राम पर हिंदू नाम से आईडी बनाकर लड़कियों को फँसाते थे।

बताया गया कि साहिल ने अर्जुन और अल्ताफ ने राज नाम से फेक आईडी बनाई हैं। इन आईडी का इस्तेमाल कर वे हिंदू लड़कियों से दोस्ती करते थे। बजरंग दल ने इन दोनों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया। पुलिस ने दोनों आरोपतों को गिरफ्तार कर लिया। वहीं, इस साजिश में फंडिंग करने वाला कॉन्ग्रेस पार्षद अनवर कादरी की जल्द गिरफ्तारी की माँग भी उठाई जा रही है।

दो हिंदू युवतियों की शिकायत पर मुकदमा दर्ज

पुलिस ने बताया कि दो पीड़िताओं ने साहिल और अल्ताफ के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई हैं। इसके आधार पर मौनी बाबा आश्रम के पीछे सांवेर रोड बाणगंगा के रहने वाले 20 वर्षीय अल्ताफ खान और नरवल निवासी साहिल शेख पर दुष्कर्म और अन्य धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया है।

पार्लर में काम करने वाली युवती से बनाए अवैध संबंध

19 वर्षीय पीड़िता ने माँ के साथ पहुँचकर बाणगंगा पुलिस में अल्ताफ के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई। युवती ने बताया कि वह पार्लर में काम करती है। अल्ताफ उसका पड़ोसी है। साल 2020 में अल्ताफ से मकान खरीदा था। पड़ोने होने के चलते दोनों के बीच आम बातचीत शुरू हुई।

फिर अल्ताफ ने युवती को प्रपोज कर दिया। कहा कि वह युवती से शादी करना चाहता है। साथ ही बात करने के लिए कीपैड मोबाइल भी दिलाया। लेकिन अल्ताफ की हरकतों के चलते युवती ने उससे दूरी बना ली। ये देख अल्ताफ ने उसके घर में घुसकर जान से मारने की धमकी दी और दुष्कर्म किया।

बुर्का पहनने को कहा- कैफे में ले जाकर किया दुष्कर्म

वहीं, एक अन्य हिंदू युवती केयरटेकर का काम करती है। पीड़िता ने साहिल शेख के खिलाफ शिकायत की है। पीड़ित युवती ने बताया कि पाँच महीने पहले इंस्टाग्राम पर साहिल से बातचीत शुरू हुई थी। उसने खुद को हिंदू बताकर दोस्ती की थी। इस बीच 12 मई 2025 को पीड़िता को मिलने बुलाया और सांवेर रोड स्थित दोस्त के कमरे पर ले गया।

यहाँ साहिल ने युवती से कहा कि वो उससे बहुत प्यार करता है। शादी का झाँसा देकर शारीरिक संबंध भी बनाए। पीड़िता ने बदनामी के डर के यह बात किसी से नहीं कही थी। फिर सच सामने आने पर साहिल से दूरी बना ली। लेकिन 30 मई 2025 को साहिल ने विजय नगर स्थित कैफे में मिलने बुलाकर दुष्कर्म किया।

युवती ने कहा कि उसके विरोध करने पर साहिल ने उसे पैसे का लालच दिया। साहिल ने कहा, “तू सिर्फ एक बार धर्म परिवर्तन कर ले, तुझे जितना बोलेगी उतना पैसा दूँगा।” युवती ने बताया कि साहिल ने उस पर जबरन बुर्का पहनने का दबाव भी बनाया।

‘पेचकसबाजी’ पर तंज कसने वालों को ‘मेक इन इंडिया’ का करारा जवाब, अब भारत में बने स्मार्टफोन के पार्ट भी देसी: रिपोर्ट में बताया- 20% से ऊपर पहुँचा वैल्यू एडिशन

भारत में बीते कुछ वर्षों में इलेक्ट्रॉनिक निर्माण क्षेत्र में अभूतपूर्व तेजी आई है। भारत विश्व का दूसरा सबसे बड़ा स्मार्टफोन निर्माता बन कर उभरा है। एप्पल, सैमसंग समेत तमाम विदेशी कम्पनियाँ भारत में अपने फोन बना रही हैं। इनके निर्यात से भारत को अरबों डॉलर का फायदा भी हो रहा है।

इस सफलता के पीछे बड़ा हाथ मोदी सरकार के ‘मेक इन इंडिया’ और PLI (प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव) स्कीम का है। हालाँकि, इसे भी कुछ अर्थशास्त्री ‘पेचकसबाजी’ यानी सिर्फ पार्ट जोड़ने का नाम देकर चिढ़ाते थे। हाल ही में आई एक रिपोर्ट ने ऐसे आलोचकों को भी करारा जवाब दे दिया है।

20% से अधिक पार्ट भारत में ही बन रहे

बिजनेस स्टैण्डर्ड की एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत में बनने वाले एप्पल के फोन और बाकी उत्पादों में लगने वाले 20% से अधिक पार्ट देश में ही बन रहे हैं। यानी भारत में बनने वाले किसी आईफोन के लगभग 20% पार्ट स्थानीय स्तर पर ही निर्मित होते हैं।

यह उपलब्धि एप्पल को अलग-अलग पार्ट सप्लाई करने वाले वेंडर्स ने हासिल की है। एप्पल के भारत भर में पार्ट सप्लायर्स मौजूद हैं। इनमें TDK कॉर्पोरेशन, होन हाई प्रिसिजन, टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स, फॉक्सलिंक समेत तमाम कम्पनियाँ हैं। यह उत्तर प्रदेश, हरियाणा, तमिलनाडु समेत अलग-अलग राज्यों में पार्ट बनाती हैं।

लम्बे समय से एप्पल की सबसे बड़ी फैक्ट्री चलाने वाले चीन भी अभी तक 35%-40% के स्तर पर पहुँच पाया है। भारत ने 20% की उपलब्धि 5 ही वर्षों में हासिल कर ली है। स्थानीय स्तर पर पार्ट बनाने के मामले में सिर्फ एप्पल ही नहीं बल्कि सैमसंग ने भी बड़ी भूमिका निभाई है।

रिपोर्ट के अनुसार, सैमसंग और डिक्सन भी 20%-25% तक भारत में बने पार्ट ही उपयोग कर रही है। सरकार का लक्ष्य है कि इसे आने वाले वर्षों में 35%-40% के स्तर पर ले जाया जाए। इससे भारतीय उद्योग भी मजबूत होंगे और जरूरी पार्ट्स के लिए विदेशों पर निर्भरता भी कम होगी।

स्थानीय स्तर पर पार्ट बनने से तकनीकी क्षमताएँ भी बढ़ती है और लागत में भी लगातार कमी आती है। भारत ने इससे पहले वाहन निर्माण क्षेत्र में ऐसी सफलता हासिल की है। 1980 के दशक में सुजुकी ने भारत में गाड़ियों को केवल एक साथ जोड़ना (असेम्बली) चालू किया थी लेकिन अब भारत में बनने वाली सुजुकी की हर गाड़ी में 95% पार्ट भारतीय होते हैं।

भारत ने ₹2 लाख करोड़+ के स्मार्टफोन किए निर्यात

भारत अब चीन के बाद विश्व का दूसरा सबसे बड़ा स्मार्टफोन निर्माता है। जहाँ एक ओर देश में बिकने वाले अधिकांश स्मार्टफोन अब यहीं बने हुए हैं तो इससे भारत को निर्यात में भी बड़ा फायदा हो रहा है। वित्त वर्ष 2024-25 में भारत ने 24 बिलियन डॉलर ( लगभग ₹2 लाख करोड़) के स्मार्टफोन निर्यात किए थे।

यह पिछले वर्ष के मुकाबले 55% अधिक था। इनमें बड़ा हिस्सा एप्पल द्वारा निर्मित आईफोन का था। एप्पल ने वित्त वर्ष 2024-25 में 17 बिलियन डॉलर (₹1.46 लाख करोड़) से अधिक के आईफोन भारत में बनाकर निर्यात किए थे। एप्पल की हालिया दिनों में भारत पर निर्भरता और भी बढ़ गई है।

अमेरिकी राष्ट्रपति के चीन समेत बाकी देशों पर टैरिफ लगाने के बाद अब भारत में बने आईफोन ही अमेरिका को निर्यात किए जा रहे हैं। भारत पर जहाँ अमेरिका ने 25% टैरिफ लगाया है तो वहीं चीन पर यह टैरिफ कहीं अधिक है।

हाल ही में आई एक और रिपोर्ट बताती है कि भारत में बने 97% आईफोन को एप्पल अमेरिका निर्यात कर रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति एप्पल पर यह भी दबाव बना चुके हैं कि वह भारत नहीं बल्कि अमेरिका में आईफोन का निर्माण करे। हालाँकि, एप्पल ने स्पष्ट कर दिया है कि भारत में आगामी दिनों में वह अपनी निर्माण क्षमता बढ़ाएगा।

वर्तमान में भारत में ताइवानी कम्पनी फॉक्सकॉन और भारतीय कम्पनी टाटा आईफोन का निर्माण करती है। इसके अलावा विस्ट्रन भी इस क्षेत्र में उतर रही है। यह कम्पनियाँ वर्तमान में तमिलनाडु और कर्नाटक में बड़े स्तर पर आईफोन का निर्माण कर रही हैं।

बांग्लादेश में 24 घंटे में 6 मंदिरों में लूट, देवी-देवताओं के आभूषण-बर्तन लूटे: घर खाली करवा लगाया मदरसे का साइन बोर्ड, पीड़ितों ने सुनाई इस्लामी कट्टरपंथियों के अत्याचार की कहानी

बांग्लादेश में हिंदू विरोधी हमले और तेज हो गए हैं। शुक्रवार (13 जून) को चरमपंथियों ने 24 घंटे में 6 हिंदू मंदिरों को लूट लिया। यह घटना बांग्लादेश के गोपालगंज जिले के कोटालीपारा इलाके में हुई। एनटीवी न्यूज़ की एक रिपोर्ट में एक हिंदू महिला के हवाले से बताया गया, “कल (12 जून) को दुआरीपारा में एक मंदिर को लूट लिया गया। आज हमारे 4 मंदिरों को लूट लिया गया। पूजा करने के लिए रखे गए सभी सामान को लूट लिया गया।”

हिन्दू महिला के मुताबिक, “अगर ऐसा होता रहा, तो हम हर बार चोरी की गई पूजा सामग्री को वापस नहीं कर पाएंगे। पीतल और कांसे से बने पूजा के बर्तन खरीदने में काफी पैसे लगते हैं। हमारे पास हर बार इन्हें खरीदने के लिए पैसे नहीं हैं,”

महिला ने कहा, “हमारे कीमती सामान की लूट को रोकने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाने चाहिए। मैं सरकार से दिल से अनुरोध कर रही हूँ। हिंदू समुदाय अपने खिलाफ हो रहे अत्याचारों को बर्दाश्त नहीं कर पा रहा है।” उन्होंने आगे कहा, “अब हम कैसे जीवित रहेंगे? हम सरकार का ध्यान आकर्षित कर रहे हैं। अपराधियों को पकड़ना सरकार का काम है। हम असहाय हैं और हम इसके बारे में कुछ नहीं कर सकते।”

एक बुजुर्ग महिला ने लूट के बारे में बताया, “जब मैं शुक्रवार (13 जून) को सुबह-सुबह पूजा करने के लिए मंदिर आई, तो मैंने पाया कि भगवान की बालियाँ गायब थीं।” उन्होंने देखा तो गोपाल, राधा कृष्ण, मनसा माता की मूर्तियों को सोने के आभूषण से सजाया गया था, जो कहीं नहीं मिले।


बुजुर्ग महिला ने बताया कि उनके मंदिर में ज्यादातर मूर्तियाँ पीतल की बनी हुई हैं, जबकि राधा कृष्ण की मूर्ति चाँदी की बनी है। उन्होंने कहा, “मेरे सबसे छोटे बेटे ने मुझे यह मूर्ति उपहार में दी थी। मैं पिछले 3-4 सालों से रोजाना पूजा-अर्चना कर रही हूँ।”

एक अन्य हिंदू महिला ने बताया, “मंदिर से सारे आभूषण लूट लिए गए हैं। पहले वे घर में घुसे और फिर मंदिर में घुस गए, जो हमेशा खुला रहता है।” उन्होंने कहा, “हमें रात में पता ही नहीं चला कि क्या हुआ? हमें सुबह ही डकैती के बारे में पता चला।”

एक युवक ने बताया कि ₹40-50 हजार की कीमत की काँसे की थाली, घड़ा और पूजा का सामान लूट लिया गया। उसने दुख जताते हुए कहा, “हम सभी डरे हुए हैं।”

नेत्रोकोना में मुस्लिम भीड़ ने हिंदुओं के घरों को नष्ट कर दिया

बांग्लादेश के नेत्रोकोना जिले के पुरबाधला इलाके में हिन्दुओं को लूटने का सिलसिला जारी है। हरिदास समुदाय के कई हिंदू परिवार यहाँ बेघर हो गए हैं। यहाँ मुस्लिम भीड़ ने हाल ही में इनके घरों को नष्ट कर दिया और उनका सामान लूट लिया।

सोमॉय नेशनल की शुक्रवार (13 जून) को प्रकाशित एक खबर के अनुसार, पिछले कई महीनों से इस इलाके में 50 साल से रह रहे हिंदू परिवारों को उजाड़ने की कोशिश की जा रही थी और पलायन के लिए मजबूर किया जा रहा था। अब मुस्लिम चरमपंथियों ने इस क्षेत्र को ‘जनाब अली मरकजुन नूर अल इस्लामिया मदरसा’ की संपत्ति घोषित करते हुए साइनबोर्ड लगा दिए हैं।

जब हिंदू परिवारों ने स्थानीय पुलिस से शिकायत की, तो मुस्लिम चरमपंथी भीड़ के रूप में आए और हिन्दू घरों को टारगेट करते हुए हमला किया। इस हमले में कम से कम 5 घरों को जमींदोज कर दिया गया और नकदी के अलावा सोना-चांदी सहित सभी कीमती सामान लूट लिए गए।

बेघर हुए हिन्दू अब परिस्थितियों के हाथों मजबूर हैं और अब बिना छत के खुले आसमान के नीचे सो रहे हैं।

एक हिंदू व्यक्ति ने बताया, “हमने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी। वे (मुस्लिम भीड़) रविवार (8 जून) को आए और हमारे 3 अन्य घरों को नष्ट कर दिया।” एक अन्य हिंदू महिला ने बताया कि कैसे चरमपंथियों ने उसके और उसके पति के साथ मारपीट की।

एक हिंदू पीड़ित ने बताया, “वे यहां एक मदरसा खोलना चाहते हैं।” पीड़ित हिंदू परिवारों ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है। स्थानीय प्रशासन ने दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करने का आश्वासन दिया है, लेकिन अभी तक कोई गिरफ्तारी नहीं हुई है।

कभी मुहम्मद गौरी, कभी सुल्तान महमूद और कभी औरंगजेब… मुगल आक्रांताओं ने कई बार गिराना चाहा विश्वनाथ धाम, हिंदू शासक कराते रहे जीर्णोद्धार: आज सोने से चमकता है शिखर, चांदी शिवलिंग पर

उत्तर प्रदेश के वाराणसी जिले में स्थित काशी विश्वनाथ मंदिर आस्था, इतिहास और संस्कृति का अद्भुत संगम है। ये मंदिर भगवान शिव को समर्पित है, जिन्हें ‘विश्वनाथ’ या ‘विश्वेश्वर’ यानी संपूर्ण ब्रह्मांड के स्वामी के रूप में पूजा जाता है। काशी विश्वनाथ मंदिर वाराणसी में स्थित एक प्रमुख धार्मिक स्थल है, जो भगवान शिव को समर्पित है। गंगा नदी के पावन तट पर बसे इस मंदिर को हिंदू धर्म के 12 ज्योतिर्लिंग में से एक माना जाता है। मान्यता है कि मंदिर के दर्शन से मोक्ष की प्राप्ति होती है।

मंदिर का इतिहास

काशी विश्वनाथ मंदिर का इतिहास अनेक कहानियों से भरा पड़ा है। इतिहासकार के अनुसार, मंदिर को 11वीं से 15वीं शताब्दी तक कई बार नष्ट करने की कोशिश की गई। हर बार मंदिर का जीर्णोद्धार भारत के शासकों ने कराया। मुगलों और विदेशी आक्रमणकारियों ने मंदिर पर कई बार हमला करवाया।

1194 में मुहम्मद गौरी ने मंदिर को ध्वस्त कर दिया था जिसके बाद राजा हरीशचंद्र ने मंदिर का जीर्णोद्धार करवाया, लेकिन वर्ष 1447 में जौनपुर के सुल्तान महमूद शाह ने मंदिर को दोबारा गिरा दिया। इसके बाद 16वीं शताब्दी में अकबर के वित्तमंत्री राजा टोडरमल ने इसका पुनर्निर्माण कराया। इसके बाद 1669 ईस्वी में मुगल आक्रांता औरंगज़ेब ने इसे फिर से गिरा दिया और उस जगह ज्ञानवापी मस्जिद बनवाई।

वर्तमान मंदिर का निर्माण 1780 में मराठा रानी अहिल्याबाई होल्कर ने करवाया। आगे चलकर पंजाब के शासक महाराजा रणजीत सिंह ने मंदिर के शिखर को शुद्ध सोने से मढ़वाया, जिससे इसकी भव्यता और भी अधिक बढ़ गई। हाल ही में साल 2021 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा काशी विश्वनाथ धाम कॉरिडोर की शुरुआत की, जिससे यह मंदिर आधुनिक सुविधाओं के साथ और भी सुलभ और सुव्यवस्थित हो गया।

मंदिर की संरचना

काशी विश्वनाथ मंदिर की वास्तुकला बेहद आकर्षक और विशिष्ट है। मंदिर के गर्भगृह में एक प्राचीन शिवलिंग स्थापित है जो चांदी के आधार पर टिका हुआ है। यह शिवलिंग लगभग 60 सेंटीमीटर ऊँचा और 90 सेंटीमीटर परिधि वाला है। मंदिर का मुख्य शिखर करीब 15.5 मीटर ऊँचा है, जिसे महाराजा रणजीत सिंह द्वारा सोने से मढ़वाया गया है।

मंदिर के आसपास कई छोटे मंदिर भी हैं जो देवी पार्वती, भगवान गणेश, भगवान कार्तिकेय, काल भैरव और अन्य देवताओं को समर्पित हैं। गर्भगृह से पहले एक सभा मंडप है। जहाँ भक्तजन एकत्र होकर पूजा करते हैं।

मंदिर परिसर में ही मौजूदी ज्ञानवापी कुआँ ऐतिहासिक रूप से काफी महत्वपूर्ण है। विद्वानों के अनुसार, औरंगज़ेब के आक्रमण के दौरान इसी कुएँ में शिवलिंग को छिपा दिया गया था। वर्तमान में काशी विश्वनाथ धाम कॉरिडोर के माध्यम से गंगा नदी से मंदिर तक सीधा मार्ग बन चुका है, जिससे श्रद्धालुओं को सुविधाजनक दर्शन का अवसर मिलता है।

कैसे पहुँचे ?

वाराणसी रेलवे स्टेशन से काशी विश्वनाथ मंदिर तक पहुँचने का सबसे सुगम मार्ग है। स्टेशन से मंदिर की दूरी सिर्फ पाँच मिनट है। इसके अलावा दिल्ली से सीधी बस सेवाएँ वाराणसी के लिए उपलब्ध हैं। जबकि वाराणसी के लाल बहादुर शास्त्री हवाई अड्डे से काशी विश्वनाथ मंदिर की दूरी लगभाग 20 किलोमीटर है। एयरपोर्ट से सीधे टैक्सी या निजी वाहन से मंदिर तक पहुँचा जा सकता है।