मध्य प्रदेश के उज्जैन शहर में एक ऐसा मंदिर है, जहाँ भगवान को शराब चढ़ाई जाती है। फिर उसी मदिरा को भक्तों को प्रसाद के रूप में बाँटा जाता है। ये सच्चाई है काल भैरव मंदिर की। जो उज्जैन का न सिर्फ धार्मिक बल्कि रहस्यमयी चमत्कार भी है। काल भैरव को शिव के रौद्र रूप के तौर पर पूजा जाता है। यहाँ हर दिन सैकड़ों श्रद्धालु शराब की बोतल लेकर आते हैं और काल भैरव को अर्पित करते हैं।
माना जाता है कि पिलाते वक्त शराब मूर्ति के मुँह से गायब हो जाती है। कोई नली, कोई ट्रिक, यहाँ तक की अब तक कोई वैज्ञानिक भी इसका ठोस जवाब नहीं दे सका है। ये मंदिर सिर्फ आस्था का नहीं बल्कि जिज्ञासा का भी केंद्र है। यहाँ साधारण भक्तों से लेकर तांत्रिक तक सभी बाबा काल भैरव के दर्शन के लिए पहुँचते हैं।
काल भैरव की मूर्ति को शराब का प्रसाद चढ़ाते महंत ( साभार : TripAdvisor)
मंदिर का इतिहास
काल भैरव मंदिर का इतिहास लगभग छह हजार वर्ष पुराना है। मंदिर का उल्लेख स्कंद पुराण और कालिका पुराण जैसे ग्रंथों में भी मिलता है। काल भैरव की पूजा कपालिका और अघोरा संप्रदाय का हिस्सा रही है। इतिहासकार की मानें तो मंदिर का निर्माण शिप्रा नदी के ऊपर राजा भद्रसेन ने करवाया था।
काल भैरव मंदिर के भीतर का दृश्य (साभार : MP Tourism)
हालाँकि वर्तमान मंदिर 18वीं शताब्दी में बनकर तैयार हुआ था। यह मंदिर मराठा काल में बनवाया गया था। सन् 1788 में मराठा शासक महादजी शिंदे ने इस मंदिर को फिर से बनवाया और सजाया। उज्जैन प्राचीन अवंतिका नगरी रही है और यहाँ शैव परंपरा का गहरा असर है
मंदिर की संरचना
मंदिर की बनावट बहुत ही साधारण पर प्रभावशाली है। मालवा शैली के अद्भुत चित्र मंदिर की दीवारों को सजाते हैं। मुख्य द्वार पर दो विशाल सिंहों की मूर्तियाँ हैं जो मंदिर की रक्षा का प्रतीक मानी जाती हैं। अंदर प्रवेश करते ही मुख्य गर्भगृह है। जहाँ काले पत्थर से बनी काल भैरव की मूर्ति विराजमान है। इस मूर्ति की खास बात है इसका मुंँह, जिसके जरिए शराब ‘पी’ जाती है।
काल भैरव मंदिर का बाहरी दृश्य ( साभार : MP Tourism)
मूर्ति के दाएँ हाथ में त्रिशूल और बाएँ हाथ में खप्पर (खोपड़ी का पात्र) है। मंदिर में दीवारों पर भैरव से जुड़े चित्र और तांत्रिक प्रतीक भी देखे जा सकते हैं। आसपास छोटे-छोटे मंदिर भी हैं जो अन्य भैरव रूपों को समर्पित हैं। मंदिर में एक अलग जगह पर शराब अर्पण की व्यवस्था की गई है। श्रद्धालु अपनी बोतल वहीं पुजारी को देते हैं और वो मूर्ति के मुँह से चढ़ाते हैं।
काल भैरव की मूर्ति ( साभार : timeofindia)
मंदिर तक कैसे पहुँचे ?
काल भैरव मंदिर उज्जैन शहर से करीब आठ किलोमीटर दूर स्थित है। उज्जैन रेलवे स्टेशन से ऑटो, टैक्सी या लोकल बस के ज़रिए आसानी से पहुँचा जा सकता है। हवाई यात्रा कर आने वाले भक्तों के लिए नजदीकी एयरपोर्ट इंदौर है। जो मंदिर से लगभग 60 किलोमीटर दूर है। वहाँ से टैक्सी या बस से उज्जैन पहुँचना बहुत आसान है। शहर में होटल और धर्मशालाओं की भी अच्छी सुविधा है।
‘ठोंक देंगे कट्टा कपार में, आइए ना हमरा बिहार में’… ये द खाकी चैप्टर: बिहार फाइल्स नाम की एक वेब सीरिज के टाइटल सॉंग की पहली लाइन है। यह वेब सीरीज बिहार में अपराध के दौर और उसके खिलाफ एक IPS अधिकारी की लड़ाई की कहानी है। लेकिन जो लाइन मैंने लिखी है वो दिखाती है कि तब के दौर में बिहार और अवैध कट्टा एक दूसरे के पर्यायवाची हो गए थे। लेकिन अब ये स्थिति बदलने वाली है।
बिहार में अब आर्डिनेंस फैक्ट्री कॉरिडोर बनने जा रहा है। इससे पाँच जिलों में उन बंदूकों का निर्माण होगा जो सेना और पुलिस के काम आएँगी। यहाँ बनने वाले हथियार विदेशों तक जाएँगे और भारत के निर्यातों में सहायता करेंगे। यहाँ बनने वाला गोला बारूद बिहार की सड़कों पर नहीं चलेगा बल्कि दुश्मन का सफाया करने के काम आएगा। केन्द्र की मोदी सरकार और बिहार की नीतीश सरकार मिल कर यह कॉरिडोर बनाने वाली है।
क्या है पूरा प्लान?
बिहार के उद्योग मंत्री नीतीश मिश्रा ने केन्द्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को बिहार में ऑर्डिनेंस फैक्ट्री कॉरिडोर बनाने प्रस्ताव भेजा है। यह कॉरिडोर बिहार के 5 जिलों में बनाए जाने की योजना है। इसके तहत हर जिले में गोला-बारूद और हथियार बनाने की फैक्ट्रियाँ स्थापित की जाएँगी। इस प्रस्ताव को रक्षा मंत्रालय से स्वीकृति मिलना अभी बाकी है।
मंत्री नीतीश मिश्रा ने प्रस्ताव भेजने के साथ ही कहा है कि बिहार में यदि यह ऑर्डिनेंस कॉरिडोर जमीन पर उतर आता है तो इससे समय पर हथियारों की आपूर्ति देश भर में की जा सकेगी। इसके अलावा बिहार में इससे लगभग 1 लाख लोगों को रोजगार मिलने की भी बात कही गई है।
किन-किन जिलों में बनेगा कॉरिडोर
बिहार में यह ऑर्डिनेंस फैक्ट्री कॉरिडोर 5 जिलों में बनेगा। यह जिले मुंगेर, कैमूर, बांका, जमुई और अरवल जिलों में बनाया जाएगा। यहाँ कई तरह की बंदूकें और गोला-बारूद बनाने की फैक्ट्रियाँ लगेंगी। रिपोर्ट्स में बताया गया है कि एक फैक्ट्री पर लगभग ₹1500 करोड़ का खर्च आएगा।
यह फैक्ट्री जिस तरह का हथियार बनाएगी, उसी के अनुसार इसकी लागत होगी। कुछ फैक्ट्रियों की लागत ₹4000 करोड़ तक बताई जा रही है। सरकार का लक्ष्य है कि बीते कई वर्षों से अवैध हथियारों के पर्याय के रूप में प्रचारित हो गए मुंगेर जैसे जिलों को अब नई पहचान दी जाए।
इससे पहले मुंगेर में लगातार अवैध हथियारों के निर्माण और उनकी बिक्री के मामले सामने आते रहे हैं। मुंगेर में बीते 3-4 वर्षों में दर्जनों अवैध बन्दूक फैक्ट्री पकड़े जाने के मामले में सामने आते रहे हैं। इसके पीछे यहाँ बंद होती हथियार फैक्ट्रियां एक बड़ा कारण रहीं हैं।
रिपोर्ट्स में बताया गया है कि कभी मुंगेर के भीतर कई वैध फैक्ट्रियां थी जिनमें हजारों कारीगर काम करते थे। हालाँकि, जंगलराज और उसके बाद बन्दूक को लेकर कानूनों में आई सख्ती के चलते धीमे -धीमे यह फैक्ट्रियाँ बंद हो गईं। इसके चलते कारीगर बेरोजगार हो गए और कुछ अवैध हथियार बनाने में लग गए।
कौन-कौन से हथियार बनेंगे?
योजना है कि इन जिलों में लगने वाली फैक्ट्रियों में छोटी पिस्टल से लेकर तोप तक बनें। एक बार फैक्ट्रियाँ लगने पर यहाँ राइफल, मशीनगन, FN-मिनिमी, नेगेव NG-5 तथा ब्राउनिंग मशीनगन बनाने का प्लान है। इसके अलावा तोप, ग्रेनेड और ग्रेनेड लॉन्चर बनाने की भी योजना है।
सिर्फ हथियार ही नहीं बल्कि सेना के लिए उपयोग होने वाले हेलमेट और सुरक्षात्मक क्लोथिंग भी बनाई जाएगी। यह फैक्ट्रियाँ अपना कच्चा माल पड़ोसी झारखंड से लेंगी। हथियार बनाने के चलते यहाँ आसपास विकास भी तेजी से होगा। इन जिलों को फैक्ट्री के साथ ही हवाई सेवाओं से जोड़ने का भी प्लान बनाया जा रहा है।
बिहार को क्या फायदे?
बीते लगभग 3-4 दशकों से पलायन का दंश झेल रहे बिहार के लिए यह नई पहल बड़े स्तर पर कारगर सिद्ध हो सकती है। अंदाजा है कि यहाँ 1 लाख लोगों को रोजगार मिलेगा। इसके साथ ही बड़े उद्योग लगने के चलते यहाँ का बाकी इन्फ्रा भी सुधरेगा। फैक्ट्रियों में काम करने के अलावा उन लोगों को भी फायदा होगा जो इससे दूसरे तरीकों से जुड़ेंगे।
बिहार में यह फैक्ट्रियाँ सरकारी निवेश से लगेंगी। लेकिन यहाँ से बाद में कुशल कारीगर भी मिलेंगे, जिससे निजी निवेश भी आ सकता है। बिहार में अभी निजी कम्पनियाँ निवेश करने में पीछे हटती हैं। यह क्रम बिहार को पुनः आर्थिक तरक्की के क्रम पर ला सकता है।
बिहार में औद्योगीकरण का यह कोई पहला बड़ा प्रयास नहीं है। इससे पहले 1970 के दशक में भी ललित नारायण मिश्रा के जमाने में ऐसा प्रयास हो चुका है। हालाँकि, उसके बाद लालू प्रसाद यादव के जंगलराज का दौर चला, जिसके चलते बिहार में चलने वाले उद्योग धंधे भी बंद हो गए।
UP-तमिलनाडु में बन चुका है डिफेन्स कॉरिडोर
बिहार में आर्डिनेंस कॉरिडोर का यह प्रयास उत्तर प्रदेश और तमिलनाडु में पहले ही सफल हो चुका है। उत्तर प्रदेश में 6 जिलों में डिफेन्स कॉरिडोर बनाया गया है। रिपोर्ट्स बताती हैं कि यहाँ अब तक ₹47 हजार करोड़ से अधिक का निवेश हो चुका है। यहाँ 7 कम्पनियाँ अब निर्माण चालू कर चुका है।
तमिलनाडु के डिफेन्स कॉरिडोर में कई बड़ी टेस्टिंग फैसिलिटी बन रही हैं। बिहार में भी इस तरह का विकास मोदी सरकार के राष्ट्रीय सुरक्षा पर एजेंडे को ही बढ़ाएगा। मोदी सरकार आने के बाद से रक्षा क्षेत्र में निर्माण और रक्षा उत्पादों के निर्यात में तेज बढ़ोतरी हुई है।
वर्ष 2014 में जहाँ देश में मात्र ₹46 हजार करोड़ का रक्षा उत्पादों का निर्माण होता था, तो वहीं यह अब बढ़ कर ₹1.27 लाख करोड़ हो चुका है। इसी के साथ भारत का रक्षा उत्पादों का निर्यात 2014 के मुकाबले 34 गुना बढ़ कर ₹23,622 करोड़ हो चुका है। बिहार का आर्डिनेंस कॉरिडोर इसमें और सहायक हो सकता है।
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में एक थाना है- मलिहाबाद। इस थाने से करीब 100 मीटर दूर ही 68 साल की हकीम सलाऊद्दीन उर्फ लाला का घर है। 27 जून 2025 को इस घर पर पड़े छापे से पहले तक इस घर की पहचान एक हकीम के निवास के तौर पर थी। लेकिन वहाँ जिस तरह हथियारों का जखीरा मिला। वह किसी गंभीर खतरे के संकेत देता है।
यूपी पुलिस ने ट्विटर/एक्स पर एक पोस्ट में बताया है, “अवैध शस्त्र बनाने वाले 01 अभियुक्त को लखनऊ पुलिस द्वारा गिरफ्तार करते हुए उसके कब्जे से 14 निर्मित अवैध शस्त्र, अर्धनिर्मित शस्त्र, शस्त्र बनाने के उपकरण व प्रतिबंधित पशु (हिरन) की खाल बरामद की गई है।”
Enforcing an ‘arm's-length’ from illegal arms –
अवैध शस्त्र बनाने वाले 01 अभियुक्त को @lkopolice द्वारा गिरफ्तार करते हुए उसके कब्जे से 14 निर्मित अवैध शस्त्र, अर्धनिर्मित शस्त्र, शस्त्र बनाने के उपकरण व प्रतिबंधित पशु (हिरन) की खाल बरामद की गई है। #WellDoneCops… pic.twitter.com/lkOcs956JA
पुलिस के इस पोस्ट से भी ऐसा प्रतीत होता है कि यह एक सामान्य सा मामला है। लेकिन जब आप इस्लामी कट्टरपंथियों की गजवा-ए-हिंद की साजिशों और हकीम सलाउद्दीन के घर पर छापेमारी के बाद सामने आए तथ्यों को जोड़ते हैं तो यह देश के खिलाफ एक बड़ी साजिश का इशारा करती है।
कहा जा रहा है कि छापेमारी में पुलिस को हकीम के घर से 1 राइफल, 3 पिस्टल, 3 तमंचे, 9 एयर गन और 140 कारतूस सहित कई अन्य औजार मिले। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, पुलिस के हाथ एक लाल पर्ची लगी है, जिसमें उर्दू और फारसी में कुछ नंबर लिखे हुए हैं। हकीम सलाऊद्दीन की पाकिस्तान में रिश्तेदारी है और वहाँ कई लोगों से उसकी बातचीत होती रहती है।
हकीम सलाऊद्दीन के लैपटॉप में एक दुबई का नंबर मिला है। इस नंबर पर वह रोज बात करता था। कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया है कि वह कश्मीर तक हथियारों की सप्लाई करता था।
दिलचस्प है कि कुछ साल पहले सलाऊद्दीन का एक्सीडेंट में पैर टूट गया था, जिसे एक हकीम ने सही किया। इसके बाद वह खुद ‘हकीम’ बन गया और इसी पहचान के साथ जिंदगी गुजारने लगा। जाँच से यह बात सामने आई है कि सलाऊद्दीन सिर्फ पहचान ओढ़ने में ही शामिल नहीं है। उसने हथियार बनाने के लिए कारीगर ‘किराएदार’ बनाकर अपने मकान में बसा रखे थे।
‘केवल अवैध हथियार फैक्ट्री’ नहीं चला रहा था सलाऊद्दीन ?
जिस तरीके से पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों को भनक लगे दिए बिना सलाऊद्दीन हथियारों का निर्माण कर रहा था, उससे साफ है कि यह केवल अवैध हथियार फैक्ट्री चलाने का ही मामला नहीं है। इस फैक्ट्री का खुलासा ऐसे समय में हुआ है जब देश के अलग-अलग हिस्सों से पाकिस्तान के लिए काम करने वाले कई इस्लामी कट्टरपंथियों की गिरफ्तारी हुई है।
लखनऊ के मलिहाबाद के हकीम के घर से मिला असलहे और कारतूस का ढेर, पुलिस ने किया गिरफ्तार (फोटो साभार: दैनिक जागरण)
इनमें से एक वाराणसी से पकड़ा गया मोहम्मद तुफैल भी है। गिरफ्तारी के बाद उसके फोन में 600 पाकिस्तानी नंबर मिले थे। वह बाबरी मस्जिद का बदला लेने के लिए मुस्लिमों को उकसा रहा था। वह भारत में सरिया लागू के एजेंडे पर काम कर रहा था। इसी तरह मुरादाबाद से पकड़ा गया शहजाद पाकिस्तान के इशारे पर भारत में बड़े इस्लामी आतंकी हमले की साजिश रच रहा था।
2047 तक भारत को इस्लामी मुल्क बनाने की साजिश
गजवा-ए-हिंद यानी भारत को इस्लामी मुल्क बनाने को लेकर इस्लामी कट्टरपंथी लंबे समय से साजिश कर रहे हैं। ऐसी ही एक गंभीर साजिश का खुलासा साल 2022 में उस समय हुआ जब प्रतिबंधित संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) के ट्रेनिंग सेंटर पर बिहार के फुलवाड़ी शरीफ में छापेमारी हुई थी। इस दौरान 8 पन्नों का एक दस्तावेज बरामद किया गया। इसका नाम ‘इंडिया विजन 2047’ था। इसमें भारत को इस्लामी मुल्क बनाने के पूरे रोडमैप का जिक्र किया गया।
इस दस्तावेज में भारतीय सेना से लेकर कोर्ट तक में इस्लामी घुसपैठ का खाका खींचा गया था। ‘कायर हिंदुओं’ की हत्या के लिए मुस्लिम युवाओं को हथियारों का प्रशिक्षण देना भी शामिल था। क्या हकीम सलाऊद्दीन जैसे मुस्लिम PFI की उसी साजिश के तहत हथियारों की आपूर्ति बनाए रखने को लेकर ही तो नहीं अपने घरों को हथियारों की फैक्ट्री के रूप में बदल चुके हैं?
कितने ‘हकीम’ घरों में चला रहे हथियार फैक्ट्री?
लखनऊ की अवैध हथियार फैक्ट्री और उसे चलाने वाला हकीम सलाऊद्दीन देश विरोधी/हिंदू विरोधी कितनी बड़ी साजिश का हिस्सा है यह जैसे-जैसे जाँच आगे बढ़ेगी सामने आता जाएगा। लेकिन न तो फुलवाड़ी शरीफ में छापे से पहले हमें यह पता था कि देश के विरुद्ध PFI कितनी बड़ी साजिश पर काम कर रहा है और न ही 27 जून 2025 से पहले यह पता था कि उत्तर प्रदेश की राजधानी में थाने से कुछ कदम की दूरी पर ही इतने बड़े पैमाने पर अवैध हथियारों का निर्माण हो रहा है।
ऐसे में यह जरूरी हो जाता है कि जाँच का यह दायरा केवल एक हकीम सलाऊद्दीन या एक अवैध हथियार फैक्ट्री के उद्भेदन तक ही सीमित न रह जाए। यदि ऐसा नहीं हुआ तो हमें ये नहीं पता चलेगा कि हकीम सलाऊद्दीन केवल एक अवैध हथियार फैक्ट्री ही नहीं चला रहा था। वह उस इस्लामी साजिश का हिस्सा है जो भारत की सरकारों और हिंदुओं के विरुद्ध एक समानांतर तंत्र खड़ा करने में जुटा है। जो यह सुनिश्चित करने में लगा हुआ है कि सशस्त्र बगावत की स्थिति में उसे हथियारों की कोई कमी न हो। ध्यान रहे कि इस तंत्र के लिए हर हिंदू ‘काफिर’ है। गजवा-ए-हिंद वो ख्वाब है जिसका हदीस में जिक्र है। जिसके लिए दारुल उलूम देवबंद ने फतवा जारी कर कहा था कि इस जंग में जो भी शहीद होगा वो ‘गाजी’ कहलाएगा।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने ओडिशा के पुरी में आयोजित रथयात्रा में भी अपनी सेवाएँ दी हैं। RSS ने इस कार्यक्रम में 1500 स्वयंसेवक लगाए हैं। इन कार्यकर्ताओं ने यात्रा प्रबंधित करने से लेकर भगदड़ के दौरान सहायता पहुँचाने का काम किया। भगदड़ के दौरान उनकी सहायता से बड़ी संख्या में लोगों की जान बच सकी।
रथयात्रा मेले की व्यवस्था सुचारु ढंग से चलाने और संभालने के लिए RSS ने निर्धारित जगह पर कार्यकर्ताओं को जिम्मेदारी के हिसाब से नियुक्त किया था। उदाहरण के लिए लगभग 200 स्वयंसेवक दो चिकित्सा केंद्रों पर तैनात थे, अन्य 200 बड़ा डंडा साफ करने में लगे हुए थे।
वहीं प्राथमिक चिकित्सा सेवा पाँच डॉक्टरों, दो फार्मासिस्टों और चार सहायकों वाली एक टीम द्वारा प्रदान की गई थीं। इसके अतिरिक्त, 100 स्वयंसेवकों को यातायात प्रबंधन के लिए तैनात किया गया था और 884 स्वयंसेवकों ने रथ स्थल से मेडिकल चौक तक फैले एम्बुलेंस कॉरिडोर का निर्माण और रखरखाव किया।
जहाँ एक तरफ ABVP की चिकित्सा शाखा ‘मेडीविजन’ ने एम्बुलेंस सेवाएँ और अस्थायी स्वास्थ्य शिविर संचालित कर श्रद्धालुओं को प्राथमिक उपचार प्रदान किया और श्रद्वालुओं को आवश्यक दवाएँ वितरित कीं। वहीं विश्व हिंदू परिषद और हिंदू जागरण मंच जैसे संगठनों ने श्रद्धालुओं के लिए भंडारा लगाकर पुण्य अर्जित किया।
समिति के रथ यात्रा सेवा संयोजक रुद्रनारायण महापात्रा ने सेवा योजना का विस्तृत विवरण देते हुए बताया कि कहा कि ऐसे शुभ अवसरों पर अक्सर भारी भीड़ और गर्मी के कारण श्रद्वालुओं के बेहोश होने या घायल होने की घटनाएँ होती हैं, जिसके कारण इस तरह की व्यापक आपातकालीन प्रतिक्रिया योजना लागू करने की आवश्यकता महसूस हुई।
RSS और उत्कल बिपन्न सहायता समिति के अलावा संघ से जुड़े कई अन्य संगठनों में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP), विश्व हिंदू परिषद (VHP), हिंदू जागरण मंच और भारतीय मजदूर संघ भी रथयात्रा के अवसर पर सक्रिय रूप से सेवा में लगे हुए हैं। RSS के स्वयंसेवकों ने 29 जून, 2025 को सुबह हुई भगदड़ में काफी सहायता पहुँचाई।
निज स्वार्थ से परे, लोककल्याण की भावना ही सनातन धर्म की आत्मा है और यही भावना आज पुरी की पवित्र रथयात्रा में फिर प्रकट हुई।
रथयात्रा के दौरान @RSSorg के स्वयंसेवकों ने एम्बुलेंस के लिए एक विशेष ‘सेवा-पथ’ बनाया है। यह अद्वितीय पहल सुनिश्चित करती है कि किसी भी अस्वस्थ श्रद्धालु को… pic.twitter.com/R6YOshTTKP
RSS के स्वयंसेवकों कार्यकर्ताओं ने स्ट्रेचर और एंबुलेंस का उपयोग करके मेले में घायल और बेहोश भक्तों को अस्पताल पहुँचाया। जिस समय श्रद्धालु भीड़ और गर्मी से बेहोश हो रहे थे उस समय भी संघ ने बेहतरीन कदम उठाते हुए आपातकालीन गलियारे बनाने के लिए मानव श्रृंखला बनाई, जिससे एंबुलेंस को बड़ा डंडा (ग्रैंड रोड) के किनारे भीड़ से मरीजों को निकालने और अस्पतालों में पहुँचाने मे बड़ी सहायता मिली।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार (29 जून 2025) को अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ के 123वे एपिसोड में देशवासियों को संबोधित किया। इस बार के कार्यक्रम में प्रधानमंत्री ने आपातकाल के दौर, योग दिवस की सफलता, धार्मिक यात्राओं, स्वास्थ्य और सामाजिक सुरक्षा की उपलब्धियों, महिलाओं की सफलता की कहानियाँ, पर्यावरण के प्रति लोगों के योगदान और भारत की सांस्कृतिक उपलब्धियों जैसे कई विषयों पर चर्चा की।
प्रधानमंत्री मोदी ने 1975 में लगे आपातकाल को लोकतंत्र पर सबसे बड़ा हमला बताया। उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई, बाबू जगजीवन राम और अटल बिहारी वाजपेयी के ऑडियो क्लिप्स के जरिए उस समय के हालात से जनता को अवगत कराया।
उन्होंने बताया कि किस तरह उस वक्त नागरिकों के अधिकार छीने गए, अखबारों पर प्रतिबंध लगाया गया और लाखों लोगों को जेल में डाल दिया गया। उन्होंने यह भी कहा कि भारत की जनता ने लोकतंत्र की रक्षा के लिए बड़ी कुर्बानी दी और अंत में लोकतंत्र की जीत हुई।
Paid homage to those who devoted themselves to protecting democracy during the Emergency. Don’t miss the words spoken by Morarjibhai Desai, Babu Jagjivan Ram Ji and Atal Ji… #MannKiBaatpic.twitter.com/9u9frDMlDp
आगे उन्होंने 21 जून को हुए ‘अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस’ पर चर्चा करते हुए कहा कि इस बार का यह कार्यक्रम और भी भव्य रहा। विशाखापत्तनम, तेलंगाना, दिल्ली, जम्मू-कश्मीर और गुजरात समेत देशभर में लाखों लोगों ने योग किया।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि बताया कि योग केवल व्यायाम नहीं, बल्कि आत्मिक और शारीरिक बल का माध्यम है। गौरतलब है कि इस बार अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस का थीम ‘योगा फॉर वन अर्थ, वन हेल्थ’ रखा गया था, जो ‘वसुधैव कुटुंबकम्’ की भावना को दिखाता है।
प्रधानमंत्री ने धार्मिक यात्राओं जैसे अमरनाथ यात्रा, कैलाश मानसरोवर यात्रा और जगन्नाथ रथ यात्रा का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि ये यात्राएँ न केवल श्रद्धा का प्रतीक होती हैं, बल्कि सेवा का भी अवसर देती है।
पीएम मोदी ने गर्व के साथ बताया कि भारत को WHO ने ट्रेकोमा मुक्त देश घोषित किया है। उन्होंने ILO की एक हालिया रिपोर्ट का जिक्र भी किया, जिसमे बताया गया था कि भारत की 64% आबादी को अब सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का लाभ मिल रहा है, जो पहले केवल 19% लोगों तक सीमित था।
प्रधानमंत्री मोदी ने तेलंगाना, कर्नाटक और मध्यप्रदेश की महिलाओं के आत्मनिर्भर बनने की कहानियों पर भी बात की। उन्होंने बताया कि कैसे महिलाएँ मिलेट्स से बिस्किट बनाकर विदेश तक बेच रही हैं, सैनिटरी पैड बना रही हैं और मशरूम की खेती और रोटियों का ब्रांड बना रही हैं।
मोदी जी ने असम के बोडोलैंड क्षेत्र में हो रहे CEM कप की सराहना भी की जिसमें 70 हजार से ज्यादा खिलाड़ी भाग ले रहे हैं। उन्होंने कहा कि आज बोडोलैंड शांति, खेल और ऊर्जा का प्रतीक बन गया है।
प्रधानमंत्री ने पुणे के रमेश खरमाले और अहमदाबाद के ‘मिशन फॉर मिलियन ट्रीज’ जैसी पहलों की सराहना की। उन्होंने महाराष्ट्र के ‘पाटोदा’ गाँव की भी तारीफ की, जिसे कार्बन न्यूट्रल ग्राम पंचायत बनाया गया है।
पीएम मोदी ने बताया कि अहमदाबाद नगर निगम ने पर्यावरण संरक्षण के लिए ‘मिशन फॉर मिलियन ट्रीज’ अभियान शुरू किया है, जिसमें लाखों पेड़ लगाए जा रहे हैं। इस पहल की खास बात है ‘सिंदूर वन’, जो ऑपरेशन सिंदूर के शहीदों को समर्पित है। यहाँ सिंदूर के पौधे उन वीरों की याद में लगाए जा रहे हैं जिन्होंने देश के लिए बलिदान दिया।
इसके साथ-साथ ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान को भी बढ़ावा दिया जा रहा है, जिसके तहत अब तक देशभर में करोड़ों पेड़ लगाए जा चुके हैं। यह अभियान लोगों को पर्यावरण के प्रति जागरूक करता है और भावनात्मक रूप से जोड़ता है।
‘मन की बात’ कार्यक्रम अक्टूबर 2014 में शुरू किया गया था, जिसका उद्देश्य देश के हर कोने से जनता की उपलब्धियों, प्रयासों और कार्यों को देशवासियों के सामने लाना है। यह कार्यक्रम हर महीने के अंतिम रविवार को सुबह 11 बजे प्रसारित होता है।
कोलकाता लॉ कॉलेज में महिला छात्रा के साथ हुए गैंगरेप मामले में तृणमूल कॉन्ग्रेस के नेताओं की ओर की गई संवेदनहीन बयानबाजी के बाद पार्टी का एक आधिकारिक बयान सामने आया। बयान में पार्टी ने टीएमसी के विधायक मदन मित्रा और सांसद कल्याण बनर्जी के विवादित बयानों पर उनसे दूरी बना ली है और नेताओं की निंदा भी की है।
टीएमसी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट किए गए बयान में कहा कि सांसद कल्याण बनर्जी और विधायक मदन मित्रा की टिप्पणियाँ पूरी तरह से उनकी निजी राय हैं और पार्टी के विचारों का प्रतिनिधित्व नहीं करतीं।
बलात्कार की यह घटना बुधवार (25 जून 2025) को कोलकाता के कस्बा इलाके में स्थित दक्षिण कोलकाता लॉ कॉलेज में घटी थी, जिसमें कॉलेज की 24 वर्षीय महिला लॉ छात्रा को निशाना बनाया गया। इस मामले में तृणमूल कॉन्ग्रेस छात्र परिषद (TMCP) के नेता मनोजीत मिश्रा समेत तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया है।
यह मामला सामने आने के बाद लोगों में भारी रोष है। इस साल की शुरुआत में आरजी कर मेडिकल कॉलेज की घटना के बाद से शैक्षणिक संस्थानों में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर फिर से गंभीर बहस शुरू हो गई है। इसी बीच, टीएमसी के दो नेताओं सांसद कल्याण बनर्जी और विधायक मदन मित्रा ने इस मामले पर बेहद आपत्तिजनक बयान दिए, जिन पर जमकर आलोचना हो रही है।
टीएमसी सांसद कल्याण बनर्जी ने घटना पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुआ कहा था, “अगर कोई दोस्त अपने दोस्त के साथ बलात्कार करता है तो क्या किया जा सकता है? क्या अब स्कूलों में भी पुलिस तैनात होगी? यह छात्रों ने एक अन्य छात्रा के साथ किया। उसकी सुरक्षा कौन करेगा?”
इसके अलावा उन्होंने कहा, “यह सब अपराध और छेड़छाड़ कौन करता है? कुछ पुरुष करते हैं। तो महिलाओं को किसके खिलाफ लड़ना चाहिए? महिलाओं को इन विकृत पुरुषों के खिलाफ लड़ना चाहिए।” इन बातों को पीड़िता को दोष देने और अपराध को हल्का बताने की कोशिश के रूप में देखा गया है।
The remarks made by MP Kalyan Banerjee and MLA Madan Mitra concerning the heinous crime at South Calcutta Law College were made in their personal capacities. The party unequivocally disassociates itself from their statements and strongly condemns the same. These views do not…
— All India Trinamool Congress (@AITCofficial) June 28, 2025
टीएमसी विधायक मदन मित्रा ने भी चौंकाने वाला बयान देते हुए कहा कि पीड़िता को कॉलेज नहीं जाना चाहिए था। उन्होंने कहा, “अगर वह लड़की वहाँ नहीं गई होती, तो ऐसा नहीं होता। अगर वह जाने से पहले किसी को सूचित करती या अपने साथ कुछ दोस्तों को ले जाती, तो ऐसा नहीं होता।” उन्होंने आगे कहा, “जिसने यह गंदा काम किया, उसने मौके का फायदा उठाया।”
इन दोनों नेताओं की बातों पर चारों तरफ से निंदा होने लगी, जिसके बाद पार्टी को सफाई देना पड़ी। टीएमसी ने स्पष्ट किया, “सांसद कल्याण बनर्जी और विधायक मदन मित्रा द्वारा दक्षिण कलकत्ता लॉ कॉलेज में हुए जघन्य अपराध के बारे में जो टिप्पणियाँ की गईं, वे पूरी तरह से उनकी व्यक्तिगत राय हैं। पार्टी न केवल इन बयानों से खुद को अलग करती है, बल्कि इनकी कड़ी निंदा भी करती है। ये विचार किसी भी रूप में पार्टी के रुख को नहीं दर्शाते हैं।
बता दें कि इस मामले पर महुआ मोइत्रा ने भी पार्टी नेताओं के बयान का विरोध किया था और उन्हें घृणित करार दिया था। हालाँकि कल्याण बनर्जी ने उसपर भी प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “महुआ हनीमून मनाकर वापस भारत आई और मुझसे झगड़ने लगी हैं! वह मुझ पर महिला विरोधी होने का आरोप लगाती हैं, वह क्या हैं?” महुआ मोइत्रा पर हमला जारी रखते हुए उन्होंने कहा, “उन्होंने (महुआ) 40 साल की शादी तोड़कर 65 साल के आदमी (पिनाकी मिश्रा) से शादी कर ली है, क्या उसने महिला को चोट नहीं पहुँचाई?
मध्य प्रदेश के जबलपुर के एक अतिथि शिक्षक की गोरखपुर बुला कर हत्या कर दी गई। हत्यारों ने उसे कथावाचक अनिरुद्धाचार्य की वीडियो के माध्यम से उससे सम्पर्क किया था। मृतक 45 वर्ष का था और गोरखपुर शादी करने आया था। उसकी हत्या शाहिदा उर्फ़ ख़ुशी नाम की एक महिला और उसके पति ने की। अब दोनों पुलिस की गिरफ्त में हैं।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मृतक का नाम इंद्र कुमार तिवारी था। वह 3-10 मई, 2025 के बीच पॉपुलर कथावाचक अनिरुद्धाचार्य के कार्यक्रम में शामिल हुए थे। अनिरुद्धाचार्य का यह आयोजन जबलपुर के ही एक गाँव में हुआ था। यहाँ इंद्र कुमार तिवारी ने अनिरुद्धाचार्य से प्रश्न पूछे थे।
अनिरुद्धाचार्य से इंद्र कुमार तिवारी ने विवाह नहीं होने की बात कही थी। इंद्र कुमार तिवारी ने कहा था कि उनकी उम्र 45 वर्ष है और 18 बीघे जमीन के मालिक हैं लेकिन विवाह नहीं हो रहा है। यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुई थी। यह अब भी यूट्यूब समेत कई जगह पड़ी हुई है।
इस वीडियो को देख कर कौशल और उसकी पत्नी शाहिदा उर्फ़ ख़ुशी ने इंद्र कुमार तिवारी को ठगने का प्लान बनाया। कौशल ने ख़ुशी का भाई बन कर इंद्र कुमार तिवारी से अपनी बहन का विवाह करवाने की बात इंद्र कुमार तिवारी से कही। इसके बाद ख़ुशी भी इंद्र तिवारी से बात करने लगी।
कौशल ने इंद्र तिवारी के गाँव पहुँच कर शादी की बात भी पक्की कर दी और साथ ही यह स्पष्ट कर दिया कि 5 जून को शादी गोरखपुर में होगी। इंद्र तिवारी ने इसके लिए गहने बनवाए और शादी करने अकेले गोरखपुर चले गए। यहाँ उनकी शादी भी ख़ुशी से करवा दी गई और इसकी तस्वीरें उनके गाँव पहुँच गईं।
ख़ुशी ने हालाँकि इसके बाद इंद्र तिवारी के साथ उनके मध्य प्रदेश में स्थित गाँव जाने से मना कर दिया। ख़ुशी और कौशल ने इसके बाद इंद्र तिवारी से अपना गाँव दिखाने की बात कही और हत्या कर दी। इंद्र तिवारी का शव दोनों ने मिलकर झाड़ियों में फेंक दिया।
इंद्र तिवारी के शव की सूचना एक राहगीर ने दी। उनके परिवार ने इसी बीच पुलिस से सम्पर्क किया। पुलिस ने जाँच की तो पता चला ख़ुशी और कौशल ने लाखों के गहने और पैसे इंद्र कुमार तिवारी से लूट लिए हैं और उनको मार कर फेंक दिया है। दोनों को अब पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस ने बताया है कि मामला ठगी और हत्या का है।
तख्तापलट के बाद बांग्लादेश की सत्ता में आई मोहम्मद यूनुस के पेंच मोदी सरकार ने कसने चालू कर दिए हैं। भारत विरोधी रवैया अपनाने वाले बांग्लादेश को भारत ने आर्थिक फ्रंट पर एक और झटका दिया है। भारत ने बांग्लादेश से जूट के आयात पर पर प्रतिबन्ध लगा दिया है। इससे बांग्लादेश के निर्यात बड़े स्तर पर प्रभावित होने की आशंका है। भारत इससे पहले भी भी बांग्लादेश से आने वाले कई उत्पादों के आयात पर प्रतिबन्ध लगा चुका है।
क्या है फैसला?
विदेशी व्यापार महानिदेशक (DGFT) के 27 जून, 2025 के एक आदेश के अनुसार, बांग्लादेश से आने वाले जूट और कई तरह के यार्न के भारत में निर्यात पर प्रतिबन्ध लगा दिया गया है। आदेश में कहा गया है कि बांग्लादेश और भारत की सीमा पर कहीं से भी यह उत्पाद भारत में नहीं आने दिए जाएँगे।
बांग्लादेश इन उत्पादों को किसी दूसरे रास्ते से भी भारतीय बाजारों में नहीं उतार सकता है, यह भी इस आदेश में स्पष्ट कर दिया गया है। इसमें लिखा गया है कि बांग्लादेश के जूट और यार्न को भूटान और नेपाल के रास्ते भारत में आने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
बांग्लादेश से जूट निर्यात को रोकने वाला आदेश
DGFT के आदेश हालाँकि यह छूट दी गई है कि बांग्लादेश मुंबई स्थित न्हावा शेवा बंदरगाह से यह उत्पाद भारत में भेज सके। इसके अलावा भारत ने यह छूट भी बांग्लादेश को दी है कि वह भारत के रास्ते अपने यह उत्पाद भूटान और नेपाल में भेज सके।
अगस्त, 2025 में प्रधानमंत्री शेख हसीना के तख्तापलट के बाद भारत और बांग्लादेश के रिश्तों में खटास आई है। बांग्लादेश के लापरवाह क़दमों की वजह से भारत ने भी उनका जवाब देना चालू कर दिया है। भारत व्यापार के रास्ते बांग्लादेश के लिए अब बंद कर रहा है।
भारतीय जूट उद्योग हो रहा था प्रभावित
इकॉनोमिक टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत ने वर्ष 2023-24 में बांग्लादेश से 144 मिलियन डॉलर (लगभग ₹1230 करोड़) का जूट आयात किया था। भारत ने इससे पहले यह आयात कम करने को कई बार प्रयास भी किए, पर बांग्लादेशी व्यापारियों की बेईमानी के चलते यह काम नहीं आया।
मीडिया रिपोर्ट्स में बताया गया है कि बांग्लादेश का जूट भारत में ना आने देने के पीछे और भी कई कारण हैं। इस मामले से जुड़े लोगों ने बताया है कि बांग्लादेश जूट को भारत में डंप करने के लिए अपने यहाँ सब्सिडी देता है और भारत-बांग्लादेश के बीच मुक्त व्यापार समझौते का गलत लाभ उठाता है।
यह भी बताया गया है कि बांग्लादेश के व्यापारी कई कानूनी लूपहोल्स का फायदा उठाते हैं और भारतीय बाजार को प्रभावित करते हैं। इसके चलते भारत में जूट का बाजार और उसका उत्पादन प्रभावित होता है आया है। इसका सीधा असर भारत और विशेष कर पश्चिम बंगाल और त्रिपुरा के ग्रामीण इलाकों में पड़ा है, जहाँ जूट बड़ी आबादी की आय का स्रोत है।
रिपोर्ट्स बताती हैं कि बांग्लादेश के भारत में अनियंत्रित तरीके से जूट भेजने के चलते यहाँ जूट मिल्स भी ढंग से नहीं चल पा रही हैं। जूट उद्योग का प्रतिनिधित्व करने वाले भारतीय जूट मिल्स एसोसिएशन ने वर्ष 2024 में इस मामले में केन्द्र सरकार से सहायता भी माँगी थी।
जूट मिल्स एसोसिएशन ने कहा था कि 2024 में जूट की बम्पर फसल के बावजूद बांग्लादेश से बड़ी मात्रा में जूट का आयात किया गया क्योंकि उसके दामों में अंतर था। जूट मिल्स एसोसिएशन ने कहा था कि भारतीय मिलें इसके चलते भुगतान नहीं कर पर रहीं हैं। अब इस फैसले से भारतीय उत्पादकों और मिलों को कुछ राहत मिलने की संभावना है।
पहले ही लग चुके कई प्रतिबन्ध
यह कोई पहला मौक़ा नहीं है जब भारत ने बांग्लादेश पर व्यापारिक प्रतिबन्ध लगाए हों। बांग्लादेश ने इसकी शुरुआत की थी। बांग्लादेश ने अप्रैल, 2025 में भारत मछली, कपड़े समेत कई उत्पादों के आयात पर रोक लगा दी थी। उसने अपने रास्ते का इस्तेमाल करने देने के लिए भी भारत से 1.8 टका प्रति टन का शुल्क लेना चालू कर दिया था।
बांग्लादेश ने यहाँ तक कि दूध के पाउडर तक के भारत से आयात पर रोक लगा दी थी। इसके जवाब में भारत ने मई, 2025 में बांग्लादेश से आने वाले रेडिमेड कपड़ों, प्रोसेस्ड फ़ूड और फ्रूट ड्रिंक्स आदि पर प्रतिबन्ध लगा दिया था। भारत ने बांग्लादेश से आने वाले प्लास्टिक और लकड़ी के सामान पर भी कई तरह के प्रतिबन्ध लगाए थे।
भारत ने कहा था कि वह अब बांग्लादेश से आने वाले कार्बोनेटेड ड्रिंक्स, बेक्ड सामान, स्नैक्स, चिप्स और कन्फेक्शनरी, कपास और कॉटन याम अपशिष्ट, प्लास्टिक और पीवीसी से तैयार सामान और लकड़ी के फर्नीचर के सामान को असम, मेघालय, त्रिपुरा और मिजोरम और पश्चिम बंगाल में किसी भी जमीनी पोर्ट के माध्यम से घुसने नहीं देगा।
भारत द्वारा लगाए इन प्रतिबन्धों के चलते बांग्लादेश को वार्षिक तौर 770 मिलियन डॉलर (₹6500 करोड़+) का नुकसान होने का अनुमान लगाया गया था। यह बांग्लादेश के भारत को कुल निर्यातों का लगभग 42% बनता है। भारत व्यापार के मामले में बांग्लादेश का दूसरा सबसे बड़ा पार्टनर है।
मोहम्मद यूनुस की सरकार ने बनाया है द्वेष का माहौल
अगस्त, 2024 में शेख हसीना की सरकार को इस्लामी कट्टरपंथियों ने सत्ता से हटा दिया था। इसके कुछ दिनों बाद मोहम्मद यूनुस को अंतरिम सरकार के मुख्य सलाहकार के तौर पर देश का मुखिया बनाया गया था। मोहम्मद यूनुस की सरकार लगातार भारत विरोधी कदम उठा रही है।
उसने भारत की अपेक्षा पाकिस्तान से रिश्ते मजबूत किए और यहाँ तक कि पाकिस्तान के फौजी जनरलों को भी बुलाया। मोहम्मद यूनुस ने चीन में जाकर भी भारत के उत्तरपूर्वी हिस्से को लेकर एक विवादित बयान दिया था। इसके अलावा मोहम्मद यूनुस की सरकार आने के बाद बांग्लादेश में लगातार हिन्दुओं पर हमले हो रहे हैं।
बांग्लादेश की मोहम्मद यूनुस की सरकार हिन्दुओं पर हमले रोकने के बजाय उन्हें मानने तक से इनकार करती आई है। इसके चलते भी दोनों देशों के रिश्तों में खटास है। हाल ही में बांग्लादेश में अवैध बता कर एक हिन्दू मंदिर को फौजी बुलाकर गिरा दिया गया था। भारतीय विदेश मंत्रालय ने इसकी कड़ी आलोचना की थी।
बांग्लादेश भारत ने शेख हसीना को शरण दिए जाने को लेकर भी प्रलाप करता आया है। हालाँकि, भारत ने अब तक बांग्लादेश के क़दमों पर नरमी ही बरती है।
बांग्लादेश में हिंदू महिला से रेप का मामला प्रकाश में आया है। बलात्कारी कोई और नहीं बल्कि बांग्लादेशी नेशनलिस्ट पार्टी का नेता फजोर अली है। उसने अपनी साथियों संग मिलकर महिला का चाकू की नोंक पर रेप किया और इसका वीडियो भी बनाई। अब ये वीडियो सोशल मीडिया पर जगह-जगह वायरल है। पुलिस ने आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया है।
रिपोर्ट्स के अनुसार, पीड़िता 21 साल की है और उसके दो बच्चे भी हैं। पीड़िता का पति दुबई में नौकरी करता और वहीं रहता है। वह 15 दिन पहले ही मुरादनगर अपने पिता के घर रहने आई थी। तब से ही 38 वर्षीय फजोर अली उसके पीछे पढ़ा था।
गुरुवार (26 जून 2025) रात को पीड़िता घर में अकेली थी। इसका फायदा उठाते हुए रात 10 बजे फजोर अली घर ने घर का दरवाजा खटखटाया। पीड़िता ने दरवाजा खोलने से इनकार किया तो जबरदस्ती भीतर घुसा। यहाँ बंदूक की नोंक से डराकर महिला से रेप किया। उसके साथियों ने रेप का वीडियो भी बनाया। पीड़िता मदद की गुहार लगाते हुए चिल्लाई। आवाज सुनकर पड़ोसी आए और फजोर अली को जमकर पीटा।
इसके बावजूद फजोर अली बचकर निकल गया। इसके बाद पीड़िता को कुमिल्ला मेडकल कॉलेज अस्पताल ले जाया गया, जहाँ रेप की पुष्टि हुई। अगले दिन शुक्रवार (27 जून 2025) को पीड़िता ने मुरादगनगर पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराई। इस रेप की घटना का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।
बीएनपी नेता फजोर अली समेत 5 गिरफ्तार
पीड़िता की शिकायत पर मुरादगनर पुलिस ने महिला एवं बाल उत्पीड़न निवारण अधिनियम, 2000 के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया। इसके आधार पर पुलिस ने घटना का वीडियो वायरल करने वाले 4 लोगों को गिरफ्तार किया। वहीं, मुख्य आरोपित फजोर अली को भी पकड़ लिया गया है।
कुमिल्ला एसपी नाजिर अहमद खान ने बताया कि रविवार (29 जून 2025) सुबह 5 बजे ढाका के सईदाबाद क्षेत्र से फजोर को गिरफ्तार किया गया। इसके अलावा 4 आरोपितों को भी गिरफ्तार किया गया है, जिन्होंने घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल किया है।
इनकी पहचान अनिक, सुमन, रमजान और बाबू के रूप में हुई है। सभी आरोपित एक ही गाँव के रहने वाले हैं। वहीं, मुख्य आरोपित फजोर अली बीएनपी का लोकल नेता है और मुरादगनर के बहेचर (पुरबो पारा) गाँव का रहने वाला है।
हरियाणा के अंबाला छावनी के हिम्मतपुरा की एक चर्च में बच्चों का धर्मांतरण कराने का मामला सामने आया है। बजरंग दल का आरोप है कि यहाँ समर कैंप के नाम पर बच्चों का धर्म परिवर्तन कराया जाता था।
अंबाला छावनी वार्ड 7 के हिम्मतपुरा स्थित एक चर्च में बजरंग दल ने शनिवार (28 जून 2025) को जमकर हंगामा किया। कार्यकर्ताओं का कहना था कि चर्च में समर कैंप का आयोजन किया गया है, लेकिन यहाँ बच्चों को गलत शिक्षा दी जाती है।
उन्होंने आरोप लगाया कि चर्च में समर कैंप की गतिविधियों के नाम पर बच्चों को क्रिश्चियन बनाने के लिए उन्हें इससे जुड़ी बातें बताकर लुभाने की कोशिश की जाती है। मौके पर पहुँची पुलिस ने चर्च में आए बच्चों से बात कि तो उन्होंने कहा कि वे समर कैंप के लिए आए थे, लेकिन उन्हें यहाँ यीशु मसीह के बारे में जानकारियाँ दी जाती थी।
New Missionary Conversion Tactic:
A so-called summer camp was organised in a Church for students in Ambala, Haryana. In the name of the camp the children were given religious teachings. The following video contains an altercation between Bajrang Dal activists and the… pic.twitter.com/iZuzau5Dus
वहीं चर्च के पास्टर ने इन सभी आरोपों को खारिज करते हुए बजरंग दल पर ही निराधार हंगामे का इल्जाम लगा दिया। पास्टर ने कहा, “हम हर साल समर कैंप जैसी गतिविधियाँ कराते हैं। उनका कहना है कि बजरंग दल ने जबरदस्ती चर्च में घुसकर हंगामा शुरू कर दिया, जबकि धर्म परिवर्तन की बात सच नही है।”
बजरंग दल के जिला प्रधान देवी लाल का कहना है कि उन्हें सूचना मिली थी कि चर्च में बच्चों का धर्म परिवर्तन करवाया जा रहा है। इसे रोकने के लिए जब वे चर्च में पहुँचे तो दूसरे पक्ष ने बात को नकारने की कोशिश की और बहस करने लगे।
पुलिस करीब तीन घंटे तक दोनों पक्षों को शांत कराने में लगी रही। चर्च में ही नही दोनों पक्षों के बीच पड़ाव थाने में भी जमकर बहस हुई। मामले में पड़ाव थाना प्रभारी धर्मवीर का कहना है कि उन्हें चर्च में बच्चों का धर्मामतरण कराने की सूचना मिली थी। दोनों पक्ष की शिकायत के आधार पर जाँच की जा रही है।