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मुस्लिम महिला से बात कर रहा था देवेंद्र, चाकुओं से गोद डाला-सिर में मारी गोली: एनकाउंटर के बाद नदीम गिरफ्तार, हिंदुओं के पलायन के लिए कुख्यात कैराना की घटना

उत्तर प्रदेश के कैराना के मामौर गाँव में सोमवार (16 जून 2025) सुबह देवेंद्र देशवाल (45) नाम के एक किसान की चाकू और सिर में गोली मारकर हत्या कर दी गई। यह किसान हरियाणा के पानीपत जिले के कुराड़ गाँव का रहने वाला था। हमले में देवेंद्र का दोस्त इस्लाम, उसका बेटा शहजाद और एक आरोपित नदीम भी घायल हुआ है।

पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए 4 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। इसमें 2 आरोपित नदीम और सोबान को गिरफ्तार कर लिया है। आरोपित नदीम के पास से तमंचा, जिंदा कारतूस, खोखा कारतूस बरामद हुए है। पुलिस मुठभेड़ में नदीम को पैर में गोली लगी।

गिरफ्तार किए गए आरोपितों ने अवैध संबंधों के शक में देवेंद्र की हत्या करने की बात कबूली है। पुलिस अन्य फरार आरोपितों की तलाश में जुटी हुई है। कुछ मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक किसान की हत्या जमीनी विवाद को लेकर हुई है।

क्या है पूरा मामला?

इस मामले में मृतक किसान देवेंद्र देशवाल के बेटे रोहित ने कैराना थाने में रिपोर्ट दर्ज करवाई है। रोहित ने बताया कि सोमवार (16 जून 2025) सुबह करीब 9 बजे देवेंद्र अपने दोस्त इस्लाम के साथ बाइक से खेत के पास जा रहे थे।

रास्ते में मामौर के दो सगे भाई फरमान और सोबान, और दो अन्य लोगों ने उन्हें रोक लिया। उन्होंने देवेंद्र के साथ मारपीट की और फिर चाकू से हमला किया। इसके बाद तमंचे से गोलियाँ भी चलाई गईं।

देवेंद्र को बचाने आए उनके दोस्त इस्लाम और इस्लाम के बेटे शहजाद पर भी हमला हुआ और वे घायल हो गए। आरोपितों ने देवेंद्र को सिर और पैर समेत तीन गोलियाँ मारीं, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई। इस हमले में आरोपित पक्ष का सोबान भी घायल हुआ था।

सूचना मिलते ही SP रामसेवक गौतम, ASP संतोष कुमार और CO अमरदीप मौर्य मौके पर पहुँचे। घायल देवेंद्र, इस्लाम और शहजाद को अस्पताल ले जाया गया, जहाँ डॉक्टरों ने देवेंद्र देशवाल को मृत घोषित कर दिया। आपको बता दें, कि कैराना हिंदूओं के पलायन के लिए काफी चर्चित रहा है। योगी सरकार के आने के बाद से स्थिति में सुधार हुआ है।

लड़कियों से गंदी बातें करता था खालिस्तान समर्थक अमृतपाल सिंह, पंजाब पुलिस ने टिंडर से माँगा डाटा: रिपोर्ट, शक- अश्लील चैट के कारण ही हुई सिख एक्टिविस्ट गुरप्रीत की हत्या

खालिस्तान समर्थक सांसद अमृतपाल सिंह टिंडर ऐप पर लड़कियों से अश्लील बातें करता था। वह एक से अधिक लड़कियों से सम्पर्क में था। यह जानकारी पंजाब पुलिस को मिली है। पुलिस ने इस मामले में टिंडर से जानकारी जुटाई है। सिख एक्टिविस्ट गुरप्रीत सिंह की हत्या के मामले में यह सारी बातें पता की जा रही हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, फरीदकोट पुलिस ने अमृतपाल सिंह के एक अकाउंट ‘अमृत संधू’ की जानकारी टिंडर से बीते दिनों में माँगी थी। टिंडर से मिली शुरुआती जानकारी के अनुसार, अमृतपाल इस अकाउंट के ज़रिए 6 लड़कियों से अश्लील चैट्स करता था। रिपोर्ट्स में बताया गया है कि अमृतपाल रिश्तेदारों और दोस्तों से सबंध बनाने की बात करता था।

फरीदकोट की SSP डॉ प्रज्ञा जैन ने बताया है कि टिंडर से हासिल इन चैट्स और वीडियो में कुछ ऐसे सबूत हो सकते हैं, जो गुरप्रीत सिंह की हत्या से जुड़े हों। पुलिस का मानना है कि गुरप्रीत सिंह के पास अमृतपाल की इन अश्लील चैट्स या वीडियो से जुड़े कुछ ऐसे राज थे जो अमृतपाल की प्रतिष्ठा को धूमिल कर सकते थे और यही गुरप्रीत की मौत का कारण बने।

पुलिस अब उन 6 लड़कियों से भी पूछताछ करने की तैयारी में है जिनके साथ अमृतपाल की अश्लील चैट्स सामने आई हैं। फरीदकोट पुलिस ने टिंडर ऐप से उन लड़कियों के खातों की पूरी जानकारी, उनकी लोकेशन समेत बाकी जानकारी माँगी है।

इसके साथ ही पुलिस वीडियो कंटेंट और साझा की गई इमेजेज का पूरा डाटा बैकअप भी माँग रही है ताकि जाँच को आगे बढ़ाया जा सके। गुरप्रीत सिंह हत्याकांड में अमृतपाल सिंह के शामिल होने के सबूत में पंजाब पुलिस अब अमृतपाल सिंह से पूछताछ भी कर सकती है। पुलिस ने गुरप्रीत सिंह की हत्या करने वाले शूटरों की पहचान कर ली है।

अमृतपाल सिंह पर फिलहाल राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA) के तहत मामला दर्ज है और वह असम की डिब्रूगढ़ जेल में बंद है। पंजाब पुलिस ने फरीदकोट में अक्टूबर 2024 में हुई सिख एक्टिविस्ट गुरप्रीत सिंह की हत्या के मामले में अमृतपाल सिंह और 11 अन्य लोगों पर गैरकानूनी गतिविधियाँ (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) लगा दिया है।

क्या है पूरा मामला?

यह पूरा मामला 9 अक्टूबर 2024 को फरीदकोट में सिख एक्टिविस्ट गुरप्रीत सिंह हरि नौ उर्फ ​​भोडी की गोली मारकर हत्या से जुड़ा है। गुरप्रीत की हत्या उस समय हुई जब वह अपने मोटरसाइकिल से गाँव के गुरूद्वारे से घर की तरफ लौट रहा था। गुरप्रीत, उसी वारिस पंजाब दे का हिस्सा था जिसका अमृतपाल प्रमुख बनाया गया था।

गुरप्रीत सिंह बेहबलकलाँ इन्साफ मोर्चा का सदस्य था और बेअदबी के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे दो युवकों के पुलिस फायरिंग में मारे जाने पर कार्रवाई की माँग करता आया था। पंजाब पुलिस के DGP गौरव यादव ने इससे पहले बताया था कि गुरप्रीत की हत्या अमृतपाल सिंह के कहने पर की गई थी।

इस हत्या का साजिशकर्ता गैंगस्टर से आतंकवादी बना अर्शदीप सिंह उर्फ अर्श डल्ला बताया गया है, जो कनाडा में रहता है। यह भी सामने आया था है कि जिन शूटरों ने यह हत्या की उनके हैंडलर भी विदेशों में ही रहते हैं। इस जाँच के दौरान पंजाब पुलिस को सांसद अमृतपाल सिंह के इस हत्या में शामिल होने के भी सबूत मिले थे।

पत्नी ने बेटी से पति पर लगवाया यौन शोषण का आरोप, POCSO का मामला भी दर्ज करवाया: कर्नाटक हाई कोर्ट ने किया शख्स को बरी, कहा- फँसाने के लिए हुआ लड़की का इस्तेमाल

कर्नाटक उच्च न्यायालय ने नाबालिग बच्चे के साथ यौन उत्पीड़न के आरोपी पिता को बरी करने के निचली अदालत के आदेश को बरकरार रखा है। कोर्ट का कहना है कि पत्नी ने पति को फँसाने के लिए बेटी का इस्तेमाल किया। पति पर पॉक्सो एक्ट के तहत केस दर्ज था

न्यायमूर्ति श्रीनिवास हरीश कुमार और न्यायमूर्ति के एस हेमलेखा की खंडपीठ ने मामले में शिकायतकर्ता सुजा जोन्स मजूरियर की अपील को खारिज करते हुए कहा, ” शिकायतकर्ता ने 13.06.2012 को कथित घटना से पहले विभिन्न एनजीओ, डॉक्टरों और कानूनी पेशेवरों से मुलाकात की थी, अगले दिन यानी 14.06.2012 को उसने शिकायत दर्ज करवाई। इससे रिपोर्ट की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल उठाता है। यह समय बताता है कि वह उस दिन सिर्फ मामला बनाने की तैयारी कर रही थी।”

शिकायत में कहा गया है कि आरोपित पिता पास्कल माजुरियर ने अप्रैल, 2010 में अपने नाबालिग बेटी का यौन उत्पीड़न किया। इसके बाद फिर मई, 2012 के आखिरी सप्ताह और 13 जून, 2012 को यौन उत्पीड़न किया। उस समय बच्चे की उम्र 3 साल 10 महीने थी। लेकिन शिकायतकर्ता अपने आरोप को साबित करने के लिए सबूत नहीं दे पाया। इसके आधार पर ट्रायल कोर्ट ने आरोपित पिता को बरी कर दिया।

कोर्ट का मानना है कि ये मामला पति और पत्नी के बीच गलतफहमी की वजह से पैदा हुआ है। इसके अलावा पत्नी ने पति को देश छोड़ने से रोकने के लिए बेटी का इस्तेमाल किया था।

ट्रायल कोर्ट ने माना कि उसने शिकायत दर्ज करने से पहले ही सबूत जमा करना शुरू कर दिया था। पूरे मौखिक और दस्तावेजी साक्ष्य के मूल्यांकन के आधार पर अदालत ने माना कि अभियोजन पक्ष अपने आरोप साबित करने में विफल रहा। इसके बाद आरोपी को बरी कर दिया गया।

बरी करने के आदेश को चुनौती देते हुए पत्नी ने कर्नाटक हाईकोर्ट का रुख किया। शिकायतकर्ता ने तर्क दिया कि चूँकि संदिग्ध उसका पति था यानी पीड़िता का पिता, इसलिए शिकायतकर्ता के लिए सावधानी से काम करना जरूरी था। पुलिस से तुरंत संपर्क करने से पहले उसका आवश्यक कदम उठाना जरूरी था। शिकायतकर्ता के मुताबिक मेडिकल सबूत का मूल्यांकन सही से नहीं किया गया।

इसके जवाब में आरोपित पति के वकील ने कहा कि पति और पत्नी के बीच संबंध अच्छे नहीं थे। शादी टूटने के कगार पर थी, इसलिए दूसरे सबूतों और गवाहों पर भी गौर किया जाना चाहिए।
वकील ने कहा कि पहली सूचना रिपोर्ट झूठी थी । नौकरानी गीता के बयान की जाँच नहीं की गई, ये एक बहुत बड़ी भूल थी।

कोर्ट ने दोनों तरफ की दलीलों को सुनने के बाद कहा कि अभियोजन पक्ष ने स्वतंत्र गवाह गीता से पूछताछ नहीं की और कोर्ट में उसे पेश भी नहीं किया गया। मेडिकल रिपोर्ट भी आरोप का समर्थन नहीं करते हैं और साक्ष्य में कई विसंगतियाँ मौजूद हैं। इसलिए आरोपित को बरी किया जाता है।

ईरान-इजरायल की लड़ाई ने बढ़ाई कच्चे तेल सप्लाई पर चिंता, लेकिन भारत ने पहले ही कर लिया इंतजाम: 50 लाख टन+ का बनाया रिजर्व, जानिए कैसे एथेनॉल से ‘आत्मनिर्भरता’ की तरफ बढ़ रहा देश

इजरायल ने 12 जून 2025 की रात को ईरान पर हमला किया। इस सैन्य हमले ने विश्व के कई देशों की चिंता बढ़ा दी। दोनों देशों के बीच चल रहे टकराव से भारत के साथ-साथ वैश्विक बाजार में गिरावट होने की भी आशंका है।

भारत में शुक्रवार (13 जून,2025) को सेंसेक्स के 573 अंक गिरकर बंद हुआ। इसके बाद बाजार पर संघर्ष के बादल मंडराते दिखे। भारत के दोनों देशों के साथ अच्छे संबंध हैं, ऐसे में भारत पर इसका प्रभाव पड़ना भी लाजमी है। 

दरअसल, वैश्विक बाजारों को इसलिए भी चिंता होने लगी कि दोनों देशों का संघर्ष कच्चे तेल की आपूर्ति को बाधित कर सकता है। भारत सहित कई ऐसे देश हैं जो कच्चे तेल के आयात के लिए दूसरे देशों पर निर्भर हैं। हालाँकि, भारत इससे निपटने के लिए पहले से तैयार है।

विवाद से भारत का व्यापार भी हो सकता है प्रभावित 

दोनों देशों के बीच संघर्ष पैदा होने से कच्चे तेल की कीमतें बढ़ेंगी। इससे भारतीय रुपए के कमजोर होने का खतरा भी बना हुआ है। इससे भारत की मुद्रास्फीति में भी इजाफा हो सकता है। इजरायल के ईरान पर हवाई हमले शुरू करने के बाद ईरानी हवाई क्षेत्र में यूरोप और एशिया के बीच उड़ान भरने वाले यात्री विमानों का भी बड़े पैमाने पर डायवर्जन करना पड़ा।

इन सब के साथ पश्चिमी एशियाई देशों के बीच संघर्ष का समुद्री मार्ग से होने वाले व्यापार पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। इस वजह से माल ढुलाई शुल्क में वृद्धि होगी क्योंकि यात्रा का समय 10-14 दिन बढ़ जाएगा। जहाजों की उपलब्धता कम हो जाने से माल ढुलाई के दरों में वृद्धि होने की संभावना है।

इसके अलावा इजरायल और ईरान दोनों के साथ भारत का कुल व्यापार करीब 500 करोड़ रुपए (5 बिलियन डॉलर) का है। ऐसे में दोनों देशों के साथ होने वाले आयात-निर्यात पर भी बुरा असर पड़ेगा।

कच्चे तेल को लेकर पैदा हुए संकट से लड़ने के लिए भारत है तैयार 

पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के अंतर्गत आने वाले Indian Strategic Petroleum Reserve Limited (आईएसपीआरएल) की कुल क्षमता 5.33 मिलियन मीट्रिक टन (एमएमटी) कच्चे तेल की है। इनका भंडारण विशाखापत्तनम, मंगलुरु और पादुर में स्थित हैं।

कच्चे तेल के अधिकतम भंडार के मामले में पादुर 2.5 मिलियन मीट्रिक टन, मंगलुरू 1.5 और विशाखापत्तनम 1.3 मिलियन मीट्रिक टन का भंडारण करता है। 

इन भंडारों के निर्माण का मुख्य उद्देश्य वैश्विक स्तर पर होने वाले राजनीतिक उथल-पुथल के समय ऊर्जा सुरक्षा को सुनिश्चित करना है। इनका प्रयोग आपूर्ति में व्यवधान या बाजार में कीमतों के उछाल की स्थिति में कच्चे तेल की माँग को पूरा करने के लिए किया जा सकता है।

ये भंडार-गृह आमतौर पर जमीन के अन्दर गुफाओं में बनाए जाते हैं। इन्हें हाइड्रोकार्बन के भंडारण के लिए सबसे सुरक्षित तरीकों में से एक माना जाता है। इसके माध्यम से भारत में कच्चे तेल की आपूर्ति को लेकर गहराए संकट से निजात दिलाने में काफी मदद मिलेगी।

SPR के विस्तार ने भारत को बनाया आत्मनिर्भर 

मोदी सरकार के आने के बाद Strategic Petroleum Reserves (SPR) के विस्तार पर जोर दिया गया।  केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा जुलाई 2021 में दो और एसपीआर के निर्माण को मंजूरी दी गई थी ताकि भंडार में 6.5 एमएमटी की वृद्धि हो सके।

इसका उद्देश्य बाहरी झटकों का सामना करने के लिए भारत की क्षमता को बढ़ाना है। इतना ही नहीं सरकार भविष्य के भंडारों के लिए नई जगहों की पहचान करने में लगी है। मोदी सरकार ने आयात स्रोतों को बढ़ाने का भी कार्य किया है।

आयात स्रोतों को बढ़ाने से भी कम हुई निर्भरता

किसी एक देश पर अत्यधिक निर्भरता के जोखिम के खतरे को कम करने के लिए सरकार ने आयात स्रोतों को भी बढ़ाया है। भारत ने ऑस्ट्रेलिया, अमेरिका और यूएई में Liquefied Natural Gas (एलएनजी) के आयात पर हस्ताक्षर किए हैं।

कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता को कम करने के लिए भारत ने जैव ईंधन और गैस आधारित ऊर्जा के विकास पर भी काफी जोर दिया है। इससे इथेनॉल उत्पादन में काफी वृद्धि हुई।

इथेनॉल उद्योग के निर्माण से कार्बन उत्सर्जन में 1 करोड़ (10 मिलियन) टन की कमी आएगी और कच्चे तेल के आयात पर सालाना 40,000 करोड़ रुपयए तक की बचत होगी। सरकार बायो गैस, बायोडीजल, ग्रीन हाइड्रोजन और इलेक्ट्रिक वाहनों को भी बढ़ावा दे रही है।

यह कहना गलत नहीं होगा कि संकट की स्थिति में भी भारत के पास अपने Strategic Petroleum Reserves (एसपीआर) को हफ्तों या महीनों तक इस्तेमाल करने की क्षमता है।

मोदी सरकार के नेतृत्व में भारत ने ऊर्जा और खनिज के क्षेत्र में इतना सशक्त बना लिया है कि उसे वैश्विक संकट के इस दौर में भी किसी की तरफ देखने की कोई जरूरत नहीं है।

हमारा घर बिकाऊ है- आजमगढ़ के मुस्लिम बहुल गाँव में 40 दलित परिवारों ने घरों पर लगाए पोस्टर, पीड़ित हिंदू बोले- ‘जय श्रीराम’ का नारा नहीं लगाने देते, पूजा-पाठ नहीं करने देते हैं

यूपी के आजमगढ़ के मुस्लिम बहुल छोटा पुरा में करीब 40 दलित परिवारों ने अपने मकानों पर ‘घर बिकाऊ है’ के बोर्ड लगा दिए हैं। इन लोगों ने खुद को असुरक्षित बताया है। बार-बार हो रहे उत्पीड़न, रेप की धमकी से ये लोग परेशान हैं और पुलिस पर उदासीनता का आरोप लगा रहे हैं। 3 जून को स्थानीय मुस्लिम युवकों ने एक शादी समारोह के दौरान महिलाओं को परेशान किया था। इस दौरान मुस्लिम और दलित समुदाय के बीच मारपीट हुई है। इससे गाँव का माहौल तनावपूर्ण हो गया है।

दरअसल 3 जून 2025 को बम्हौर गाँव के युवक राकेश कन्नौजिया की शादी थी। इस मौके पर दलित समुदाय की महिलाएँ और लड़कियाँ पारंपरिक विवाह-पूर्व की रस्में निभा रही थीं। उत्सव का माहौल तब तनावपूर्ण हो गया जब मुस्लिम समुदाय के कई युवक वहाँ पहुँच गये और महिलाओं की सहमति के बिना उनका वीडियो बनाने लगे। इस पर आपत्ति जताने पर मुस्लिम युवकों ने अभद्र भाषा का इस्तेमाल करते हुए महिलाओं से छेड़छाड़ किया। घबराकर महिलाओं ने मदद के लिए शोर मचाया, जिससे पुरुष रिश्तेदारों को बीच-बचाव करना पड़ा। इस दौरान दोनों पक्षों के बीच मारपीट शुरू हो गई, जिसमें करीब 20 लोग घायल हो गए।

पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और 10 आरोपितों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने घायलों को स्थानीय अस्पताल में भर्ती कराया है और मामले की जाँच शुरू कर दी है।

गाँव के राकेश कन्नौजिया, बृजेश गोंड और रामअवध समेत कई दलित परिवारों का आरोप है कि मुस्लिम समुदाय के लोग घूम-घूमकर धमकी दे रहे हैं। उन्होने दावा है कि 3 जून की झड़प कोई अकेली घटना नहीं थी, बल्कि उत्पीड़न का सिलसिला बहुत दिनों से जारी है। दलित परिवारों का आरोप है कि महीनों से उन्हें भक्ति गीत बजाने, शादियों में डीजे बजाने या सांस्कृतिक उत्सवों में भाग लेने पर दुर्व्यवहार का सामना करना पड़ता है। यहाँ तक कि ‘जय श्रीराम’ के नारे लगाने और त्यौहार मनाने में भी इन्हें दिक्कतों ता सामना करना पड़ता है।

दलित परिवारों का कहना है कि महिलाएँ और लड़कियाँ घर से बाहर नहीं निकल पाती हैं। उनके साथ छेड़छाड़ की जाती है और धमकियाँ दी जाती है। उन्होने चेतावनी दी है कि अगर सुरक्षा की पर्याप्त व्यवस्था नहीं की गई तो वे लोग पलायन कर जाएँगे। एक दलित व्यक्ति ने कहा, “हमारी बेटियाँ और पत्नियाँ घर से बाहर नहीं निकल पाती हैं। त्यौहार खुशियों के बजाय तनावपूर्ण हो गए हैं। और जब हम शिकायत करते हैं, तो कुछ नहीं होता।”

एक दूसरे दलित व्यक्ति ने कहा, “हम कई बार पुलिस के पास गए। हमने बेहतर सुरक्षा और सख्त कार्रवाई का अनुरोध किया, लेकिन कुछ नहीं बदला। इसलिए हमने अपने घर बेचने का फैसला किया है। कम से कम हम कहीं और शांति से रह सकते हैं।”

आजमगढ़ के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (एएसपी) मधुवन कुमार सिंह ने कहा कि पुलिस ऐसे परिवारों से संपर्क कर उन्हें सुरक्षा का आश्वासन दे रही है। उन्होंने कहा, “हमने ऐसी रिपोर्ट देखी है कि कुछ परिवार पलायन करने की योजना बना रहे हैं। हम उनसे संपर्क कर रहे हैं और उन्हें सुरक्षा सुनिश्चित करने का आश्वासन भी दे रहे हैं।”

मुबारकपुर पुलिस स्टेशन के प्रभारी निहान नंदन ने भी कहा कि शांति बहाल करने के लिए 3 जून की घटना के बाद इलाके में गश्त बढ़ा दी गई है। हालाँकि पुलिस के आश्वासन के बावजूद अधिकांश परिवार आश्वस्त नहीं दिखते। दलित परिवारों का कहना है कि “पहले यह सुरक्षा कहाँ थी? प्रशासन को जागने के लिए सुर्खियों और विरोध प्रदर्शनों की क्या जरूरत है?”

सोशल मीडिया पर इस घटना पर लोग गुस्से में दिख रहे हैं। अल्पसंख्यक-बहुसंख्यक का मुद्दा, महिलाओं की सुरक्षा का मुद्दा उठाया जा रहा है। फिलहाल लोग अपने घरों की दीवारों पर “घर बिकाऊ है” के बोर्ड लगाए हैं। विरोध की आवाजें छोटापुरा की संकरी गलियों में गूँज रही हैं। दलित परिवार जल्द से जल्द फरार आरोपियों को गिरफ्तार करने और उन्हें न्याय देने की माँग कर रहे हैं।

G7 शिखर सम्मेलन में भाग लेंगे पीएम मोदी, कैलगरी में हुआ स्वागत: रिश्ते सुधारने की कोशिश में कनाडा के नए प्रधानमंत्री, कई मुद्दो पर होगी चर्चा

कनानास्किस में 16-17 जून को होने वाले G-7 शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्थानीय समयानुसार सोमवार (16 जून 2025) की शाम कनाडा के कैलगरी पहुँचे।

यह लगातार छठवाँ साल है जब प्रधानमंत्री मोदी G7 शिखर सम्मेलन में प्रतिभाग कर रहे हैं। भारत G-7 देशों का हिस्सा नहीं है, लेकिन कनाडा के पीएम मार्क कार्नी के निमंत्रण पर वह सम्मेलन में आउटरीच पार्टनर के तौर पर हिस्सा ले रहे हैं। भारत के साथ मेक्सिको और यूक्रेन भी इस फेरहिस्त में शामिल है। इस दौरान पीएम मोदी सम्मेलन में आने वाले देशों के नेताओं से मुलाकात और कुछ द्विपक्षीय बैठकों का हिस्सा बनेंगे।

भारत विश्व की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने जा रहा है। इसके अलावा वैश्विक सप्लाई चेन में भी देश अहम भूमिका निभा रहा है। ऐसे में इस सम्मेलन में भारत प्रौद्योगिकी, वैश्विक आर्थिक स्थिरता और जलवायु परिवर्तन पर बात कर सकता है।

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इस बैठक को छोड़कर बीच में ही वापस चले गए हैं। इसे पीछे उन्होंने इजरायल और ईरान के युद्ध का कारण दिया है।

बता दें कि ऑपरेशन सिंदूर के बाद पीएम मोदी पहली बार तीन देशों के दौरे पर हैं। इसके तहत पहले वह साइप्रस पहुँचे थे। इसके बाद कनाडा और पिर क्रोएशिया का दौरा शामिल है।

G-7 दुनिया की 7 उन्नत अर्थव्यवस्थाओं और यूरोपीय संघ का एक अनौपचारिक समूह है। इसमें संयुक्त राज्य अमेरिका, कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, इटली, जापान और यूनाइटेड किंगडम शामिल हैं। रूस भी पहले इस समूह का हिस्सा था, लेकिन क्रीमिया देश पर कब्जा करने के बाद समूह से उसे निष्कासित कर दिया गया।

गौरतलब है कि ईरान और इजरायल के बीच लगातार युद्ध की स्थिति बदतर होती जा रही है तो वहीं पश्चिम एशिया के देशों में भी तनाव बढ़ रहा है। वहीं पश्चिम एशिया के देशों में भी तनाव बढ़ रहा है। इसके अलावा G7 के इस समय होने के पीछे एक कारण अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ नीतियाँ भी हैं।

रिश्ते सुधारने का मौका

भारत और कनाडा के रिश्तों में पिछले साल तब तल्खी आई थी, जब खालिस्तानी समर्थक अलगाववादी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या में अक्टूबरल 2024 में ओटावा ने भारत के पाँच डिप्लोमेट को जोड़ने का प्रयास किया था। इस कड़ी में भारत ने देश से कनाडा के राजनयिकों को निष्कासित कर कनाडा से भी अपने उच्चायुक्त और अन्य डिप्लोमेट को वापस बुला लिया था।

मार्च में कनाडा के नए प्रधानमंत्री बने कार्नी ने एक बार फिर भारत के साथ संबंधों को बेहतर बनाने के लिहाज से पीएम मोदी को इस सम्मेलन के लिए निमंत्रित किया है।

भारत के लिए कनाडा पोटाश, लकड़ी, कागज और अन्य खनन उत्पादों को आयात करता है। इसी तरह भारत की ओर से कनाडा को कपड़े, मशीनरी, फार्मास्यूटिकल्स और रत्न निर्यात किया जाता है। इसके अलावा कनाडा में भारतीय छात्रों की भी एक बड़ी संख्या रहती है।

‘तेहरान खाली करो’- ट्रंप का फरमान, नेतन्याहू ने किया खामेनेई के अंत का ऐलान: इजरायल-ईरान के बीच युद्ध चरम पर, लोगों को भागने के लिए नहीं मिल रहा रास्ता

इजरायल और ईरान के बीच चल रहा भीषण युद्ध अब अपने पाँचवें दिन में प्रवेश कर चुका है और हर गुजरते दिन के साथ ईरान की आक्रामकता मिडिल ईस्ट में अशांति बढ़ा रही है। इस संघर्ष के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान की राजधानी तेहरान को तुरंत खाली करने का आदेश जारी कर दिया है, जिससे दुनिया भर में इस क्षेत्र में ईरान के बढ़ते खतरे की गंभीरता समझ में आ रही है।

वहीं, इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने ईरान के सर्वोच्च नेता खामेनेई को जान से मारने की धमकी देकर साफ कर दिया है कि इजरायल अपनी सुरक्षा के लिए किसी भी हद तक जाएगा। दोनों नेताओं की यह दृढ़ता साफ तौर पर ईरान की आतंकी गतिविधियों और परमाणु महत्वकांक्षा पर लगाम लगाने की ओर इशारा कर रही है, जिससे मिडिल ईस्ट में स्थिरता की उम्मीद जगी है।

तेहरान खाली करो- ट्रंप

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर परमाणु समझौते पर हस्ताक्षर न करने को लेकर तीखा हमला बोला है। ट्रंप ने साफ शब्दों में कहा है कि ईरान का यह रवैया मूर्खतापूर्ण है और इसका खामियाजा उसे भुगतना पड़ेगा। ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा, “ईरान को उस ‘समझौते’ पर हस्ताक्षर करने चाहिए थे, जिस पर साइन करने के लिए मैंने उनसे कहा था। लोगों का मारा जाना कितने शर्म की बात है। साफ शब्दों में कहूँ तो, ईरान न्यूक्लियर हथियार नहीं रख सकता है। मैंने यह बार-बार कहा है। सभी को तुरंत तेहरान खाली कर देना चाहिए।”

हालाँकि, अमेरिकी प्रवक्ता एलेक्स फिफर और पेंटागन के प्रवक्ता सीन पार्नेल ने साफ किया है कि अमेरिका अभी तक किसी भी सैन्य कार्रवाई में शामिल नहीं है और उसकी सेनाएँ सिर्फ आत्मरक्षा के लिए तैयार हैं।

लेकिन ट्रंप का राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद (NSC) को सिचुएशन रूम तैयार रखने का आदेश यह बताता है कि अमेरिका इस स्थिति को कितनी गंभीरता से ले रहा है और ईरान के खतरे को रोकने के लिए बड़े फैसलों की जरूरत पड़ सकती है।

‘खामेनेई को मार डालो’-नेतन्याहू

इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने ईरान के सर्वोच्च नेता खामेनेई को सीधे तौर पर निशाना बनाने की बात कहकर सबको चौंका दिया है। एबीसी न्यूज को दिए एक इंटरव्यू में नेतन्याहू ने कहा कि खामेनेई को निशाना बनाना संघर्ष को बढ़ाएगा नहीं, बल्कि खत्म करेगा।

नेतन्याहू ने दावा किया कि इजरायल ने पहले भी ईरान के शीर्ष परमाणु वैज्ञानिकों को निशाना बनाया है, जो हिटलर की न्यूक्लियर टीम की तरह काम कर रहे थे। नेतन्याहू का मानना है कि खामेनेई की हत्या से यह युद्ध खत्म हो जाएगा और ईरान के परमाणु व बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम को हमेशा के लिए खत्म किया जा सकेगा, चाहे ईरान खुद ऐसा करे या इजरायल को ऐसा करना पड़े।

नेतन्याहु ने यह भी कहा कि ईरान का शासन बहुत कमजोर है और इस लड़ाई का परिणाम ईरान में तख्तापलट का कारण बन सकता है, जिससे मिडिल ईस्ट का चेहरा हमेशा के लिए बदल जाएगा और क्षेत्र में स्थिरता आएगी।

नेतन्याहु ने यह भी दावा किया है कि ईरान की राजधानी तेहरान का हवाई क्षेत्र अब इजरायली वायुसेना के कब्जे में हैं।

युद्ध की आग में झुलसता मिडिल ईस्ट

इजरायल और ईरान के बीच चल रहे इस संघर्ष में अब तक भारी नुकसान हो चुका है। इजरायली हमलों में 224 ईरानी मारे जा चुके हैं और 1,481 लोग घायल हुए हैं, जबकि इजरायल में 24 लोगों की मौत हुई है और 600 से ज्यादा घायल हुए हैं।

इजरायल ने तेहरान पर कई बार एयरस्ट्राइक की है, जो ईरान की आक्रामकता का जवाब है। वहीं, ईरान ने इजरायल की राजधानी तेल अवीव और हाइफा पर बमबारी की है, जिससे साफ है कि ईरान की मंशा सिर्फ नुकसान पहुँचाना है।

इस युद्ध के कारण ईरान की राजधानी तेहरान से भागने की कोशिश कर रहे हजारों लोग फँस गए हैं। न्यूज एजेंसी एपी के मुताबिक ईरानी हवाई क्षेत्र बंद होने और टैक्सी न मिलने के कारण लोग सीमा तक नहीं पहुँच पा रहे हैं, जो ईरान की बदइंतजामी को दर्शाता है।

इजरायल ने अपने नागरिकों से जॉर्डन और मिस्र के जरिए देश छोड़ने को कहा है। चीनी दूतावास ने भी इजरायल में रह रहे अपने नागरिकों से जल्द से जल्द देश छोड़ने की अपील की है और उन्हें जमीन के रास्ते जॉर्डन जाने की सलाह दी है।

भीम आर्मी वाले चन्द्रशेखर को बृजभूषण शरण सिंह ने याद दिलाया ‘घसीटकर ले जाऊँगा’ वाला बयान, पूछा- दलित बेटी पर चुप्पी क्यों: रोहिणी घावरी ने सांसद पर लगाए हैं शोषण के आरोप

भाजपा नेता बृजभूषण शरण सिंह ने सांसद चन्द्रशेखर रावण पर केस दर्ज किए जाने की माँग की है। उन्होंने चंद्रशेखर रावण पर लगे शोषण के आरोपों को लेकर जवाब माँगा है। चंद्रशेखर रावण के खिलाफ रोहिणी घावरी लगातार सोशल मीडिया पर लिख रही हैं।

मीडिया से बातचीत करते हुए पूर्व सांसद बृजभूषण ने कहा, “जब मेरे ऊपर इस तरह के आरोप लगे, तब इन्हीं सांसद महोदय ने कहा था कि अगर समाज मुझे यह अनुमति दे तो मैं इसे घसीटकर ले जाऊँ। आज मैं उनसे पूछना चाहता हूँ कि मेरे ऊपर तो FIR हो गई। मैं न्यायपालिका का सामना कर रहा हूँ। सब दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा। आरोप लगते ही मैंने कहा था कि जिस दिन आरोप सिद्ध हो जाएँगे उस दिन फाँसी पर लटक जाऊँगा।”

आगे उन्होंने कहा, “अगर यह लड़की दूसरे समुदाय से होती, तो अब तक सोशल मीडिया और तमाम मंचों पर तूफान मच चुका होता। मगर आज सब इसलिए चुप हैं क्योंकि वह दबे-कुचले समाज से आती है। आज एक दलित बेटी का सवाल है। उस वक्त जाट बेटी का सवाल था। क्या वो मीडिया के सामने मुँह खोलेंगे। जो लड़की आरोप लगा रही है उसका जवाब देना चाहिए।”

बृजभूषण शरण सिंह ने खुद को न्याय का ठेकेदार बताने वालों की चुप्पी पर भी प्रश्न उठाए। उन्होंने पूछा कि कॉन्ग्रेस, आम आदमी पार्टी, ममता बनर्जी और किसान संगठन क्यों मौन हैं।

चंद्रशेखर पर रोहिणी ने लगाए शोषण के आरोप

आजाद समाज पार्टी के सांसद चंद्रशेखर रावण पर रोहिणी घावरी ने कई आरोप लगाए हैं। रोहिणी घावरी पहले ही खुलासा कर चुकी हैं वो कि वो चंद्रशेखर आज़ाद ‘रावण’ के साथ रिलेशनशिप में थीं और वहाँ उन्हें धोखा मिला।

रोहिणी घावरी ने बड़ा आरोप लगाया था कि चंद्रशेखर आज़ाद ‘रावण’ अपनी शादी के बारे में छिपा कर कई बहन-बेटियों की इज्जत के साथ खेल चुके हैं। रोहिणी ने हाल ही में बताया था कि कैसे चन्द्रशेखर (तब वो सांसद नहीं, एक्टिविस्ट हुआ करते थे) ने अपनी शादी की बात छिपाकर कई लड़कियों की इज्जत के साथ खेला

ऑपइंडिया से बात करते हुए डॉ रोहिणी घावरी ने बताया था कि कैसे उन्हें दलित समाज के सामने झूठा साबित करने के लिए उन्हें बदनाम करने की तमाम तरह की कोशिशें हुईं और दबाव डलवाकर उनसे वो पोस्ट्स X से डिलीट करवाए गए। रोहिणी कुछ अन्य लड़कियों की आपबीती भी सोशल मीडिया पर साझा कर रही हैं, ताकि अपने आरोपों की पुष्टि कर सकें।

रोहिणी ने सांसद के कई वीडियो भी जारी किए हैं, जिनमें किसी में वो जमीन पर लेटकर माफ़ी माँगते हुए दिख रहे हैं तो किसी में रोते हुए दिखाई दे रहे हैं।

क्या ग्रे लिस्ट में पाकिस्तान को शामिल करेगा FATF? पहलगाम में इस्लामी आतंकियों के हमले पर 55 दिन बाद तोड़ी चुप्पी, कहा- बिना फंडिंग के नहीं हो सकता है ऐसा अटैक

फाइनेंसियल एक्शन टास्क फ़ोर्स (FATF) ने पहलगाम में 22 अप्रैल, 2025 को हुए आतंकी हमले की निंदा की है। FATF ने कहा है कि पहलगाम जैसा हमला बिना किसी फंडिंग के नहीं हो सकता। FATF ने इस संबंध में एक बयान जारी किया है।

FATF ने सोमवार (16 जून, 2025) को यह आधिकारिक बयान जारी किया है। FATF ने कहा, “आतंकवादी हमले दुनिया भर में लोगों की जान लेते हैं, उन्हें अपंग बनाते हैं और भय पैदा करते हैं। FATF ने 22 अप्रैल 2025 को पहलगाम में हुए क्रूर आतंकवादी हमले पर गहरी चिंता जताई है और इसकी निंदा की है।”

FATF ने कहा, “यह और हाल ही में हुए अन्य हमले, बिना पैसे और आतंकवादी समर्थकों के बीच पैसे के लेन-देन के साधनों के बिना नहीं हो सकते थे।” FATF ने कहा है कि आतंक की फंडिंग रोकने के लिए वह 200 से अधिक जगह नेटवर्क का इस्तेमाल कर रहा है।

आधिकारिक बयान में FATF ने कहा है कि वह मामले में एक्शन लेते हुए जल्द ही आतंकी फंडिंग पर एक विश्लेषण भी जारी करेगा। FATF ने कहा कि आतंकवादियों को अपना मकसद पूरा करने में केवल एक बार सफल होने की आवश्यकता होती है, जबकि इसे रोकने के लिए हर बार सफल होना होगा।

पहलगाम आतंकी हमले के लगभग 2 महीने बाद यह बयान जारी करने पर FATF पर प्रश्न भी उठ रहे हैं। पहलगाम हमले के बाद पाकिस्तान को ग्रे लिस्ट में डालने के लिए FATF से माँग भी की थी। पाकिस्तान का दावा है कि FATF ने यह माँग नहीं मानी। हालाँकि, FATF का इस पर क्या रुख है, यह स्पष्ट नहीं हुआ है।

FATF के पहलगाम हमले के बयान के बाद उसके पाकिस्तान के खिलाफ एक्शन का आधार और मजबूत हो गया है। आतंकी फंडिंग के चलते पाकिस्तान इससे पहले तीन बार FATF की ग्रे लिस्ट में डाला जा चुका है। आखिरी बार उसे 2018 में ग्रे लिस्ट में डाला गया था। इससे वह 2022 में निकला था।

FATF की ग्रे अथवा ब्लैक लिस्ट में जाने वाले देशों को विदेशी व्यापार और कर्ज जुटाना मुश्किल हो जाता है। उन पर कई प्रकार के प्रतिबन्ध भी लग जाते हैं। FATF को वर्ष 1989 में मनी लांड्रिंग पर नजर रखने के लिए बनाया गया था, बाद में इसके अंतर्गत आतंकी फंडिंग देने वाले देशों पर एक्शन का काम भी आ गया।

मंदिर के सामने तुलसी लगाने से भड़के मुस्लिम, ‘जय श्रीराम’ बुलवाने की अफवाह जुनैद की बीवी ने फैलाई; उपद्रव करने लगी 2000 की भीड़: रिपोर्ट, बोले पीड़ित- हिंदुओं की दुकानें चुन-चुनकर जलाई

कोलकाता के महेशतला में 11 जून, 2025 को मुस्लिम भीड़ ने हिन्दुओं को निशाना बनाया था। मुस्लिम एक मंदिर के बाहर तुलसी का पेड़ लगाने को भड़के हुए थे। उन्होंने इस दौरान मंदिर पर भी हमला किया था और तोड़फोड़ की थी। उन्होंने हिन्दुओं की दुकानों और घरों को चुन चुन कर निशाना बनाया था। पुलिस इस मामले में 7 FIR कर चुकी है।

हिन्दुओं ने दैनिक भास्कर को बताया है कि शिव मंदिर के सामने मुस्लिम लगातार तुलसी मंच नहीं बनाने दे रहे थे। रुबाई घोष ने बताया कि कि जुनैद नाम का एक फल वाला यहाँ मंदिर के सामने कब्जा करके बैठा हुआ है। उन्होंने आरोप लगाया कि 11 जून को एक भी मुस्लिम ने दुकान नहीं खोली और वो हजारों की संख्या में इकट्ठा हो गए।

विजेंद्र गोस्वामी ने बताया कि इस भीड़ ने पथराव और हिंसा चालू कर दी, उन्होंने हिन्दू लोगों के साथ ही पुलिस को निशाना बनाया। मुस्लिम भीड़ ने शिव मंदिर अन्दर से तोड़ने की कोशिश की और दुकानों में रखा सारा सामान लूट लिया। हिन्दुओं का आरोप है कि उनकी गाड़ियाँ भी तोड़ दी।

मुस्लिम भीड़ की इस हिंसा में घायल हुए एक अरबिंदो बालो ने बताया कि मुस्लिम भीड़ का नेतृत्व फल वाला जुनैद कर रहा था जबकि उसकी बीवी रानी भीड़ को भड़का रही थी। आसपास रहने वाले हिन्दुओं ने स्पष्ट किया कि मामले को बातचीत से निपटाने की बजाय मुस्लिम भीड़ हिंसा पर उतारू रही और उनकी दुकानों को निशाना बनाती गई।

अरबिंदों बालों ने बताया कि जुनैद की बीवी ने जय श्री राम जबरदस्ती बुलवाने की अफवाह फैलाई। उन्होंने कहा कि उस वक्त 2-3 हजार लोग इकट्ठा हो गए थे और पुलिस उनकी हिंसा के दौरान कुछ नहीं कर पाई। मुस्लिमों ने इस बीच दावा किया है कि जुनैद से जय श्री राम बोलने को कहा गया और तुलसी लगाने के चलते हिंसा हुई।

पुलिस ने इस मामले में 7 FIR दर्ज की हैं। पुलिस 41 लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है। जुनैद भी गिरफ्तार हो चुका है। पुलिस मुस्लिमों की भूमिका की जाँच भी कर रही है। पुलिस ने कुछ हिन्दुओं को भी गिरफ्तार किया है।

गौरतलब है कि कि कोलकाता के महेशतला में 11 जून, 2025 को मुस्लिम भीड़ ने हिंसा की थी। इस हिंसा का टार्गेट एक शिव मंदिर था, इसमें तोड़फोड़ की गई थी। हिंसा में 60 से अधिक लोग घायल हुए थे, जिनमे पुलिसवाले भी थे। इसकी वीडियो भी सामने आई थी, जिसमें दंगा होते दिखा था। मामले में भाजपा ने दोषियों के खिलाफ एक्शन की माँग की थी।