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बंकर में परिवार लेकर छुपा अयातुल्ला खामेनेई, जान बचाने बीच में आया अमेरिका: इजरायल ने कहा- उससे मत करो बात, वहाँ आतंक को बढ़ाने वाली सरकार; तेहरान में फँसे 1500 भारतीय छात्र

ईरान-इजरायल के बीच जारी भयानक युद्ध के बीच ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई परिवार समेत बचने के लिए बंकर में चले गए हैं। इजरायल लगातार ईरान के परमाणु और मिसाइल के ठिकानों को निशाना बना रहा है। वहीं ईरान ने भी मिसाइल से तेलअवीव पर हमले किए हैं।

अमेरिका ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई को मारने की इजरायली कोशिश पर वीटो लगा दिया है। अमेरिका अधिकारी ने इसका दावा किया है। इजरायल ने अमेरिका को अपने प्लान के बारे में बताया था जिसके तहत वह खामेनेई को मारना चाहता था। इस पर व्हाइट हाउस ने रोक लगा दिया है। अमेरिका का मानना है कि खामेनेई की हत्या से ईरान का रूप ज्यादा विकराल हो जाएगा और इस संघर्ष को रोकना काफी मुश्किल हो जाएगा।

इजरायल और ईरान के बीच जारी भयानक जंग के बीच भारतीय छात्रों को ईरान से सुरक्षित स्थानों पर भेजा जा रहा है। ईरानी विदेश मंत्रालय ने तेहरान में भारत के दूतावास से भारतीय छात्रों को आर्मेनिया की नॉर्डुज़ सीमा तक पहुँचाने की अनुमति दे दी है। भारतीय दूतावास कश्मीर के कई छात्रों सहित भारतीय छात्रों को उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए आर्मेनिया भेज रहा है।

इस बीच तेहरान स्थित भारतीय दूतावास लगातार भारतीयों की सुरक्षित वापसी के लिए सभी लोगों के संपर्क में है। यहाँ तक कि कई छात्रों को ईरान के भीतर सुरक्षित स्थानों पर भेजा जा रहा है।

इजरायल की सेना ने दावा किया है कि उसने तेहरान में कुद्स फोर्स, इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) और ईरानी सेना के कई हथियार उत्पादन करने वाले ठिकानों को ध्वस्त कर दिया है। इजराइल और ईरान के बीच रविवार रात से लेकर सोमवार सुबह (16 जून 2025) तक मिसाइल हमलों में तेजी आई है। युद्ध विराम के लिए अंतरराष्ट्रीय अपीलों को नजरअंदाज करते हुए दोनों एक-दूसरे पर बम बरसा रहे हैं।

कतर-ओमान की मध्यस्थता की कोशिश को लगा झटका

रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, कतर और ओमान की मध्यस्थता को झटका लगा है। ईरान ने इन देशों को बता दिया है कि जब तक इजरायल के हमले जारी रहेंगे, वह सीजफायर समझौता नहीं कर सकता। एजेंसी के मुताबिक ईरान ने कहा है कि वो पहले इजरायल को जवाब देगा फिर समझौते पर बात करेगा।

तेहरान ने इजराइल पर अपनी तेल रिफाइनरियों को निशाना बनाने और इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स के खुफिया प्रमुख और दो अन्य वरिष्ठ जनरलों की हत्या करने का आरोप लगाया। ईरान ने यह भी कहा कि हवाई हमलों में रिहायशी इलाकों को भी निशाना बनाया गया।

वहीं ईरान ने भी इजरायल पर ताबड़तोड़ हमले किए हैं। सोमवार (16 जून 2025) सुबह तेलअवीव पर मिसाइलों से हमले में 3 लोगों की मौत की खबर है जबकि 30 लोग घायल हुए हैं। इससे इमारतों को काफी नुकसान पहुँचा है।

ईरानी स्वास्थ्य अधिकारियों के मुताबिक पिछले 3 दिनों में इजरायली हमले में मरने वालों की संख्या 224 हो गई है, जबकि 1,277 लोग घायल हुए हैं। हालाँकि अधिकारियों ने यह साफ नहीं किया है कि मरने वालों में कितने नागरिक हैं और कितने सुरक्षाकर्मी।

वहीं इजरायल ने कहा कि तेहरान ने शुक्रवार से 270 से अधिक मिसाइलें लॉन्च की हैं। समाचार एजेंसी एसोसिएटेड प्रेस के अनुसार, अधिकांश को इजरायल की बहुस्तरीय वायु रक्षा प्रणाली द्वारा रोक दिया गया था, लेकिन 22 मिसाइल आवासीय क्षेत्रों में गिरा जिससे 14 लोग मारे गए और 390 अन्य घायल हो गए।

असम में काली मंदिर के पास फिर फेंका गया गाय का कटा सिर, भड़क उठे हिंदू: पुलिस ने बोदिर अली, हजरत अली, तारा मिया, शजामल मियाँ और जहाँगीर आलम को किया गिरफ्तार

असम के लखीपुर में शनिवार (14 जून 2025) को काली मंदिर के पास फिर से गौमांस फेंके जाने की घटना हुई, जिससे इलाके में साम्प्रदायिक तनाव बढ़ गया। इस्लामिक कट्टरपंथियों ने गाय का कटा सिर मंदिर परिसर में फेंक दिया।

ये दूसरा ऐसा मामला है, क्योंकि इससे पहले धुबरी में भी ऐसा ही कुछ हुआ था। लखीपुर के काली मंदिर के पास गाय का कटा हुआ सिर मिलने से स्थानीय लोग बहुत गुस्से में हैं।

पुलिस को जैसे ही इसकी खबर मिली, वो तुरंत घटनास्थल पर पहुँची और गाय का कटा हुआ सिर अपने कब्जे में ले लिया। साथ ही पुलिस ने पूरे इलाके की घेराबंदी कर दी ताकि तनाव और न बढ़े।

इस मामले में पुलिस ने 5 इस्लामी कट्टरपंथियों को गिरफ्तार भी कर लिया है। पुलिस की गिरफ्त में आए इस्लामी कट्टरपंथियों के नाम हैं- बोदिर अली, हजरत अली, तारा मिया, शजामल मिया और जहाँगीर आलम।

असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने खुद अपने ट्विटर (एक्स) पर इन गिरफ्तारियों की जानकारी दी।

स्थानीय हिंदुओं का कहना है कि ये कोई नई बात नहीं है। पहले भी मुस्लिम चरमपंथियों ने वार्ड नंबर 10 के मंदिर परिसर में गौमांस फेंका था। उस वक्त भी लोगों ने खूब विरोध किया, तब जाकर पुलिस ने मामला दर्ज किया और जाँच शुरू की।

इससे पहले भी शुक्रवार 13 जून 2025 के अगले दिन मुस्लिम बहुल धुबरी इलाके में एक स्थानीय हनुमान मंदिर में एक गाय का कटा हुआ सिर पाया गया। इसके बाद वहाँ भी विरोध प्रदर्शन शुरु हो गए। तनाव इतना अधिक बढ़ गया कि खुद असम के मुख्यमंत्री को वहाँ का दौरा करना पड़ा।

मुख्यमंत्री ने लोगों को आश्वासन देते हुए आरोपितों पर सख्त कार्रवाई की बात कही और सीधा गोली मारने का आदेश जारी कर दिया। हालाँकि धुबरी की घटना पर पुलिस की रातभर चली जाँच में कुल 38 लोगों को गिरफ्तार किया गया।

असम में बीते कई दिनों से मुस्लिम चरमपंथियों द्वारा हिन्दू मंदिरों को टारगेट करके बार-बार गौमांस फेंकने का प्रयास किया जा रहा है और हिन्दूओं की आस्था का मज़ाक उड़ाया जा रहा है।

ब्रिटिश काल में ऑक्सफोर्ड संग्रहालय ले जाए गए 200 से अधिक पूर्वजों के अवशेषों की वापसी के लिए नागा पहुँचे ब्रिटेन, म्यूजियम की निदेशक ने अतीत की गलतियों को किया स्वीकार

नागा जनजाति समुदाय के वरिष्ठ नेताओं का एक प्रतिनिधिमंडल इन दिनों यूनाइटेड किंगडम (UK) की यात्रा पर है। यह प्रतिनिधिमंडल ब्रिटिश औपनिवेशिक काल में ले जाए गए नागा पूर्वजों के मानव अवशेषों की वापसी की माँग कर रहा है।

प्रतिनिधिमंडल में नागा जनजातीय निकायों, फोरम फॉर नागा रिकॉन्सिलिएशन (FNR) और रिकवर, रिस्टोर एंड डीकोलोनाइज (RRaD) टीम के सदस्य शामिल हैं। बताया गया है कि ब्रिटिश शासन के दौरान नागा जनजातियों के 200 से अधिक मानव अवशेषों को ईक्ठा कर के यूनाइटेड किंगडम ले जाया गया।

इन अवशेषों में से काफी सारे अवशेषों को 2020 तक ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय के पिट रिवर म्यूजियम (PRM) में प्रदर्शित किया गया था। ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी म्यूजियम ऑफ नेचुरल हिस्ट्री में शनिवार (14 जून 2025) को नागा प्रतिनिधिमंडल ने एक घोषणा की।

इसमें कहा गया कि यह वापसी प्रक्रिया नागा लोगों के लिए उपचार और आत्म-सम्मान की दिशा में एक जरूरी कदम है। उन्होंने कहा, “हमें खेद है कि इसमें कई दशक लग गए, लेकिन अब हम अपने पूर्वजों को उनकी मातृभूमि में सम्मानपूर्वक लाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।”

प्रतिनिधिमंडल ने संग्रहालय से अपील की कि वे इस प्रक्रिया में सहयोग करें और इन अवशेषों को सम्मानजनक विश्राम स्थल तक पहुँचाया जाए। उन्होंने यह भी कहा कि यह कदम नागा जनजातियों की एकता और सभी पीढ़ियों के लिए शांति का प्रतीक बनेगा।

नागालैंड ट्रिब्यून

पिट रिवर म्यूजियम की निदेशक प्रोफेसर डॉ. लॉरा वैन ब्रोकहोवेन ने नागा प्रतिनिधिमंडल का स्वागत किया और कहा कि यह प्रक्रिया अतीत की गलतियों को स्वीकार करने और भविष्य में सुलह की दिशा का एक अवसर है।

RRaD के समन्वयक और FNR के सदस्य रेवरेंड डॉ. एलेन कन्याक जमीर ने कहा, “यह यात्रा हमारे पूर्वजों की वापसी की एक पवित्र शुरुआत है। हमें PRM के नैतिक रुख की सराहना है और हमें आशा है कि यह प्रक्रिया हमारे समुदायों को संतोष देगी।”

पिट रिवर म्यूजियम, जो विश्व के प्रमुख नृवंशविज्ञान संग्रहालयों में से एक है, उन्होंने हाल ही  के वर्षों में औपनिवेशिक काल के मानव अवशेषों को हटाना शुरू कर दिया है। 2020 में मिस्र की ममियों और सिकुड़े हुए मानव सिर को प्रदर्शनी से हटाया गया था। नागा प्रतिनिधिमंडल की यह पहल वैश्विक स्वदेशी अधिकार आंदोलन का हिस्सा है, जिसमें जनजाति समुदाय अपने पूर्वजों और सांस्कृतिक विरासत की वापसी की माँग कर रहे हैं।

साइप्रस दौरे पर पीएम मोदी, इस्लामी दुनिया के खलीफा बन रहे तुर्की को कड़ा संदेश: जानें – भारत ही नहीं, दुनिया के लिए क्यों खास है ये दौरा, दुश्मन को चारों तरफ से घेरने की तैयारी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी साइप्रस पहुँचे हैं। ये 20 साल बाद किसी भारतीय प्रधानमंत्री का साइप्रस दौरा है। इससे पहले 1983 में इंदिरा गाँधी और 2002 में अटल बिहारी वाजपेयी वहाँ गए थे। साइप्रस में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जोरदार स्वागत हुआ। वहाँ उन्होंने भारतीय मूल के लोगों से भी मुलाकात की। यहाँ पीएम मोदी की राष्ट्रपति निकोस क्रिस्टोडुलाइड्स से भी मुलाकात होगी।

तुर्की को हैरान करने वाला है पीएम मोदी का दौरा

पीएम मोदी का साइप्रस दौरा सिर्फ दो देशों के बीच दोस्ती बढ़ाने के लिए नहीं है, बल्कि तुर्की को एक सख्त संदेश भी देता है। दरअसल, तुर्की पिछले कुछ समय से भारत के खिलाफ खुलकर बोल रहा है, खासकर कश्मीर के मुद्दे पर और पाकिस्तान को सैन्य और कूटनीतिक समर्थन दे रहा है।

भारत इसका जवाब तुर्की के विरोधी देशों – जैसे ग्रीस, आर्मेनिया, मिस्र और अब साइप्रस के साथ अपनी दोस्ती मजबूत करके दे रहा है। भारत इन देशों के साथ न सिर्फ व्यापारिक बल्कि सामरिक संबंध भी मजबूत कर रहा है। ये एक तरह से तुर्की को चारों तरफ से घेरने की रणनीति है। साइप्रस के बाद मोदी जी7 शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने जाएँगे, जिससे भारत की वैश्विक ताकत और बढ़ेगी।

साइप्रस और भारत की दोस्ती बेहद खास

भारत और साइप्रस की दोस्ती पुरानी और गहरी है। साइप्रस ने हमेशा भारत का साथ दिया है। 1998 में भारत के परमाणु परीक्षण के समय, 2008 में भारत-अमेरिका परमाणु समझौते में और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत की स्थायी सदस्यता के लिए साइप्रस ने खुलकर समर्थन किया। आतंकवाद और कश्मीर जैसे मुद्दों पर साइप्रस ने कभी पाकिस्तान या तुर्की का साथ नहीं दिया।

दूसरी तरफ भारत भी साइप्रस की एकता और अखंडता का समर्थन करता है। भारत चाहता है कि साइप्रस का मसला संयुक्त राष्ट्र के नियमों और अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत हल हो। पीएम मोदी का ये दौरा इस दोस्ती को और मजबूत करेगा। दोनों देशों के बीच व्यापार, संस्कृति, और शायद रक्षा सहयोग को भी बढ़ावा मिलेगा।

साइप्रस-तुर्की विवाद क्या है?

साइप्रस और तुर्की का झगड़ा 1974 से चला आ रहा है। उस साल ग्रीस के समर्थन से साइप्रस में तख्तापलट हुआ, जिसका मकसद साइप्रस को ग्रीस के साथ मिलाना था। जवाब में तुर्की ने साइप्रस के उत्तरी हिस्से पर हमला कर उसे अपने कब्जे में ले लिया। तब से साइप्रस दो हिस्सों में बँटा हुआ है।

  1. दक्षिणी हिस्सा: ये ग्रीक साइप्रियट्स है। इसे पूरी दुनिया मान्यता देती है। इसे ही रिपब्लिक ऑफ साइप्रस कहते हैं।
  2. उत्तरी हिस्सा: ये तुर्की साइप्रियट्स है। इसे तुर्की ने तुर्की रिपब्लिक ऑफ नॉर्दर्न साइप्रस घोषित किया, लेकिन इसे सिर्फ तुर्की ही मान्यता देता है। इसे अंतर्राष्ट्रीय मान्यता नहीं है।

तुर्की ने उत्तरी साइप्रस में अपनी सेना तैनात कर रखी है और वहाँ की समुद्री सीमाओं पर भी विवाद करता रहता है। साइप्रस के पास समुद्र में प्राकृतिक गैस के बड़े भंडार हैं, जिन्हें तुर्की अपने नियंत्रण में लेना चाहता है।

तुर्की का कहना है कि साइप्रस जैसे छोटे द्वीप को इतना बड़ा समुद्री क्षेत्र (EEZ) नहीं मिलना चाहिए, जबकि अंतरराष्ट्रीय कानून इसके खिलाफ है। तुर्की ने साइप्रस के समुद्री क्षेत्र में अपने जहाज भेजकर गैस खोजने की कोशिश की, जिससे साइप्रस, ग्रीस और यूरोपीय संघ के साथ उसका तनाव बढ़ गया। भारत का साइप्रस के साथ खड़ा होना तुर्की के लिए साफ संदेश है कि भारत उसके खिलाफ उन देशों का समर्थन करेगा, जो तुर्की की आक्रामकता से परेशान हैं।

IMEC को लेकर साइप्रस का महत्वपूर्ण स्थान

साइप्रस की भौगोलिक स्थिति इसे बहुत खास बनाती है। ये भूमध्य सागर में तुर्की के दक्षिण में, लेवांत (सीरिया-लेबनान-फिलिस्तीन-इजरायल) के पश्चिम में और स्वेज नहर के पास है। यानी ये यूरोप, एशिया और अफ्रीका के बीच एक अहम पड़ाव है।

भारत-मध्य पूर्व-यूरोप कॉरिडोर (IMEC) में साइप्रस की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण हो सकती है। IMEC एक ऐसा व्यापारिक रास्ता है, जो भारत को मध्य पूर्व के रास्ते यूरोप से जोड़ेगा। साइप्रस इस कॉरिडोर का एक अहम हिस्सा बन सकता है, क्योंकि ये व्यापार, ऊर्जा और रणनीतिक प्रभाव के लिए एक शानदार जगह है।

साइप्रस के पास 12-15 ट्रिलियन क्यूबिक फीट प्राकृतिक गैस के भंडार हैं। ये भंडार भले ही वैश्विक स्तर पर बहुत बड़े न हों, लेकिन साइप्रस जैसे छोटे देश के लिए बहुत मायने रखते हैं। यूरोप रूस से गैस कम लेना चाहता है और साइप्रस इसमें मदद कर सकता है। लेकिन तुर्की की दखलंदाजी की वजह से साइप्रस को अपनी गैस निर्यात करने में दिक्कत होती है।

साइप्रस अब ग्रीस या मिस्र के रास्ते गैस निर्यात करने की योजना बना रहा है, ताकि तुर्की को बाइपास किया जा सके। भारत अगर साइप्रस के साथ ऊर्जा, व्यापार या बुनियादी ढाँचे के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाता है, तो ये तुर्की के लिए बड़ा झटका होगा।

तुर्की को घेरना अब भारत की रणनीति

तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तईप एर्दोआन ने कई बार कश्मीर जैसे मुद्दों पर भारत के खिलाफ बयान दिए हैं। वो खुद को इस्लामिक दुनिया का नेता दिखाने की कोशिश करते हैं और संयुक्त राष्ट्र जैसे मंचों पर भारत की आलोचना करते हैं।

तुर्की ने पाकिस्तान के साथ अपनी सैन्य और कूटनीतिक साझेदारी भी बढ़ाई है। भारत इसका जवाब तुर्की के विरोधी देशों के साथ दोस्ती बढ़ाकर दे रहा है। साइप्रस के अलावा, भारत ग्रीस, आर्मेनिया और मिस्र के साथ अपने रिश्ते मजबूत कर रहा है। ये सभी देश तुर्की के साथ किसी न किसी तरह के विवाद में हैं।

मोदी का साइप्रस दौरा तुर्की को साफ बताता है कि भारत उसकी हरकतों का जवाब देना जानता है। साइप्रस यूरोपीय संघ का सदस्य है और भारत का पुराना दोस्त है। इस दौरे से दोनों देशों के बीच व्यापार, संस्कृति और रक्षा सहयोग को नया बढ़ावा मिलेगा। साथ ही साइप्रस IMEC में भारत के लिए एक अहम साझेदार बन सकता है।

साइप्रस के बाद जी7 शिखर सम्मेलन के लिए जाएँगे पीएम मोदी

साइप्रस के बाद मोदी जी7 शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने जाएँगे। ये भारत के लिए अपनी वैश्विक ताकत दिखाने का एक और मौका होगा। साइप्रस दौरा और जी7 में हिस्सा लेना दोनों ही भारत की उस रणनीति का हिस्सा हैं, जिसमें वो वैश्विक मंचों पर अपनी स्थिति मजबूत कर रहा है। तुर्की जैसे देशों को घेरने के साथ-साथ भारत उन देशों के साथ दोस्ती बढ़ा रहा है, जो उसके हितों का समर्थन करते हैं। साइप्रस के साथ भारत का ये रिश्ता न सिर्फ तुर्की को जवाब है, बल्कि भारत की बढ़ती वैश्विक ताकत का भी प्रतीक है।

इजरायल ने ईरान के फौजी ठिकानों को बनाया निशाना तो कॉन्ग्रेस के भीतर का ‘उम्माह’ जागा, पर उन इजरायली नागरिकों की अर्थी पर हुई रतौंधी जो मुस्लिम मुल्क के मिसाइल हमलों में मारे गए

कॉन्ग्रेस ने रविवार (15 जून 2025) को इजरायल की ईरान में सैन्य कार्रवाई की कड़ी निंदा की है। इजरायल ने ये हमले ईरान की परमाणु सुविधाओं को नुकसान पहुँचाने और वहाँ काम करने वाले लोगों को निशाना बनाने के लिए किए थे। कॉन्ग्रेस के संचार प्रभारी जयराम रमेश ने इसे ‘खतरनाक कदम’ बताया, जिसके क्षेत्रीय और वैश्विक परिणाम हो सकते हैं।

लेकिन कॉन्ग्रेस ने इस बात को पूरी तरह अनदेखा कर दिया कि ईरान लगातार इजरायल पर बैलिस्टिक मिसाइलें दाग रहा है। इन हमलों से इजरायल में न सिर्फ संपत्ति को नुकसान हो रहा है, बल्कि आम नागरिकों की जान भी जा रही है। जयराम रमेश ने ट्वीट करके कहा, “भारतीय राष्ट्रीय कॉन्ग्रेस ईरानी जमीन पर इजरायल की हालिया बमबारी और टारगेटेड हत्याओं की स्पष्ट निंदा करती है। ये कदम तनाव को खतरनाक ढंग से बढ़ाने वाला है।”

जयराम रमेश ने आगे कहा कि कॉन्ग्रेस हिंसा में नहीं, बल्कि कूटनीति, बातचीत और अंतरराष्ट्रीय सहयोग में विश्वास रखती है। उनके मुताबिक, भारत को ईरान और इजरायल के बीच तनाव कम करने की जिम्मेदारी लेनी चाहिए, क्योंकि भारत दोनों देशों के साथ अच्छे रिश्ते रखता है। साथ ही पश्चिम एशिया में लाखों भारतीय काम करते हैं, इसलिए वहाँ शांति भारत के हित में है।

जयराम ने ये भी कहा कि भारत को हर कूटनीतिक तरीके से तनाव कम करने की कोशिश करनी चाहिए। लेकिन उन्होंने इस बात पर बिल्कुल ध्यान नहीं दिया कि इजरायल का हमला ईरान के परमाणु हथियार बनाने के खतरे के जवाब में था।

इसके अलावा ईरान ने भी इजरायल पर हमले किए, जिनमें कई आम नागरिक मारे गए और सार्वजनिक व निजी संपत्तियों को नुकसान पहुँचा। खास तौर पर ईरानी मिसाइलों ने रिशोन लेजियन में आम लोगों के घरों को निशाना बनाया, जिसमें दो नागरिकों की मौत हो गई।

दूसरी तरफ, इजरायल अपने हमलों में सैन्य ठिकानों और नेताओं को निशाना बनाता है और कोशिश करता है कि आम नागरिकों को कम से कम नुकसान हो। इजरायल ने सैन्य ठिकानों के पास रहने वाले लोगों को पहले ही चेतावनी दी थी कि वे वहाँ से चले जाएँ। वहीं ईरान बिना किसी चेतावनी के सीधे रिहायशी इलाकों पर मिसाइलें दाग रहा है।

यही नहीं, एक दिन पहले ही प्रियंका गाँधी वाड्रा ने भारत को यूएन में गाजा पर वोटिंग से दूर रहने पर घेरने की कोशिश की थी। शायद उन्हें अब भी लगता है कि इजरायल को लेकर रूख उनके पिता-परनाना-दादी वाली ही होगी। हालाँकि भारत ने साफ कर दिया था कि वो द्विराष्ट्र सिद्धांत का समर्थक है और अपने पुराने रूख पर कायम है।

कॉन्ग्रेस पार्टी कूटनीति और बातचीत की वकालत तो करती है, लेकिन इजरायल के सटीक हमलों की निंदा करके और ईरान के मिसाइल हमलों पर चुप रहकर ये अपनी विश्वसनीयता खो रही है। इससे भारत का वैश्विक मामलों में संतुलित रुख भी कमजोर पड़ रहा है।

जब खालिस्तानी आतंकियों ने 110 हिंदुओं की ली जान, 2 ट्रेनों पर बरसाई ताबड़तोड़ गोलियाँ: 34 साल पहले का लुधियाना नरसंहार, गृह मंत्री की गाड़ी के पास भी हुआ था विस्फोट

पंजाब में  34 साल पहले 15 जून 1991 एक बड़ा आतंकी हमला हुआ था। रात 9:35 के करीब फिरोजपुर से लुधियाना जा रही एक ट्रेन जब लुधियाना जिले के बद्दोवाल स्टेशन के पास धीरे हुई, तो खालिस्तानी आतंकवादियों ने उस पर हमला कर दिया।

आतंकियों ने पहले सिग्नल बॉक्स को हॉट-वायर करके ट्रेन को रोका और फिर ऑटोमैटिक हथियारों से अंधाधुंध गोलीबारी शुरू कर दी। इस हमले में 62 लोग मारे गए, जिनमें से ज्यादातर हिंदू यात्री थे और करीब 40 लोग घायल हो गए। इस हमले ने सैकड़ों परिवारों की जिंदगी तबाह कर दी और यह घटना उस दौर के सबसे खतरनाक आतंकी हमलों में से एक मानी जाती है।

स्रोत: हिंदूपोस्ट

पंजाब के लुधियाना जिले में 15 जून 1991 को एक और खौफनाक आतंकी हमला हुआ। जहाँ किला राजन के पास धुरी-हिसार पैसेंजर ट्रेन को खालिस्तानी आतंकवादियों ने निशाना बनाया। उन्होंने पहले हिंदू और सिख यात्रियों को अलग-अलग किया और फिर कई यात्रियों को जबरन ट्रेन से नीचे उतार लिया।

इसके बाद यात्रियों को रेलवे ट्रैक पर एक लाइन में खड़ा किया गया और गोलियों से मार दिया गया। इस हमले में 48 लोग मारे गए और 30 घायल हुए। आतंकियों का संबंध कथित तौर पर खालिस्तान कमांडो फोर्स से था। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, आतंकियों ने ट्रेन के गार्ड और ड्राइवर का अपहरण कर लिया और फिर मौके से फरार हो गए।

यह हमला उसी दिन हुआ था, जिस दिन बद्दोवाल स्टेशन पर दूसरी ट्रेन पर भी हमला हुआ था। एक ही दिन में हुई इन दोनों घटनाओं को उस समय की सबसे बड़ी सामूहिक हत्याओं में गिना जाता है। दिल दहला देने वाली इन घटनाओं से ठीक एक दिन पहले पंजाब को ‘अशांत क्षेत्र’ घोषित किया गया था और कानून-व्यवस्था संभालने के लिए वहाँ सेना तैनात कर दी गई थी।

जतिंदर सिंह की हत्या

पंजाब के इतिहास में 15 जून 1991 का दिन सबसे भयावह दिनों में से एक था। इस दिन खालिस्तानी आतंकवादियों ने न केवल ट्रेनों पर हमला किया, बल्कि कई अन्य स्थानों पर भी हमले किए।

रोपड़ जिले के चमकौर साहिब विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ रहे ऑल इंडिया सिख स्टूडेंट्स फेडरेशन (AISSF) के उम्मीदवार जतिंदर सिंह की रतलाँगड़ी गाँव के एक गुरुद्वारे में गोली मारकर हत्या कर दी गई। हमले में उनका गनमैन भी घायल हो गया।

कहा जाता है कि जतिंदर सिंह बिना सुरक्षा गार्डों को बताए लोगों से मिलने गए थे, जिससे उन पर हमला करना आसान हो गया। वह AISSF के दूसरे उम्मीदवार थे जिनकी हत्या हुई और खालिस्तानी आतंकियों द्वारा मारे गए कुल 21वें चुनाव उम्मीदवार थे।

इसी दिन अन्य हिस्सों में भी हिंसा फैली रही। तरनतारन जिले के धोतियाँ गाँव में एक ही परिवार के पाँच सदस्यों और एक महिला की बेरहमी से हत्या कर दी गई। एक अलग हमले में दो पुलिसकर्मी भी मारे गए।

वहीं, कोटला माझा सिंह गाँव के पास हुई मुठभेड़ में खालिस्तान कमांडो फोर्स के एरिया कमांडर सुखदेव सिंह उर्फ लाली समेत पाँच आतंकवादियों को मार गिराया गया। ये सभी हमले उस दिन हुए जब देशभर में लोकसभा चुनाव के लिए मतदान समाप्त हुए केवल पाँच घंटे ही हुए थे।

पंजाब में उस दिन वोटिंग नहीं हुई थी, क्योंकि वहाँ की स्थिति बेहद अस्थिर थी। वहाँ 22 जून को सेना की सुरक्षा में मतदान कराने की योजना बनाई गई थी। उस समय पंजाब 1987 से केंद्र सरकार के सीधे नियंत्रण (यानि President’s Rule) में था और अप्रैल 1991 में राज्य विधानसभा चुनावों की घोषणा की गई थी। 15 जून तक, पंजाब में हुए लगातार हमलों में 700 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी थी।

गृह मंत्री की हत्या का प्रयास

उस समय पंजाब में हालात इतने खराब थे कि आतंकवादी हमलों की आशंका के चलते रात के समय यात्रा पर पाबंदी लगा दी गई थी। आए दिन हो रहे हमलों की वजह से कॉन्ग्रेस समेत कई राजनीतिक दलों ने चुनाव रद्द करने की माँग की थी।

स्थिति इतनी गंभीर थी कि देश के उस समय के गृह मंत्री सुबोध कांत सहाय पर भी हमला होने की कोशिश हुई। जब वह लुधियाना के पास से गुजर रहे थे, तो उनकी कार के पास बजरी के ढेर में विस्फोट हो गया, लेकिन वे सुरक्षित बच गए। हालात को देखते हुए मतदान से ठीक एक दिन पहले चुनाव रद्द कर दिए गए।

दिसंबर 1991 में खालिस्तानी आतंकवादियों ने ट्रेन पर हमला कर 49 हिंदुओं की हत्या कर दी थी

पंजाब में खालिस्तानी आतंकवादियों ने 26 दिसंबर 1991 को एक यात्री ट्रेन को हाईजैक कर लिया और उसमें सवार हिंदू यात्रियों को चुन-चुन कर गोली मार दी। इस भीषण हमले में 49 लोगों की मौत हो गई और 20 लोग घायल हुए। यह हमला पंजाब में विधानसभा चुनाव से ठीक दो महीने पहले हुआ था।

बताया गया कि जब ट्रेन लुधियाना से रवाना हुई, तभी आतंकवादी उसमें सवार थे। शाम करीब 7:30 बजे, जब ट्रेन  सोहेन गाँव के पास पहुँची, तो आतंकियों ने आपातकालीन कॉर्ड खींचकर ट्रेन को रोक दिया। जैसे ही ट्रेन रुकी, चार आतंकियों ने अपनी AK-47 राइफलें निकाली और डिब्बों की तलाशी शुरू की। उन्होंने हिंदू प्रतीत होने वाले यात्रियों को सीधे गोली मार दी। कुछ देर बाद छह और आतंकी ट्रेन में सवार हो गए और उन्होंने भी गोलीबारी शुरू कर दी। कुल मिलाकर 49 यात्रियों की हत्या और 20 को घायल करने के बाद सभी आतंकी रात के अंधेरे में फरार हो गए।

इस नरसंहार से पहले नवंबर 1991 में केंद्र सरकार ने चुनावों को शांतिपूर्वक कराने के लिए पंजाब में 1,40,000 सुरक्षा बलों को तैनात किया था। लेकिन उस समय ट्रेनों पर इस तरह के हमले आम हो गए थे, खासकर चुनावों से पहले, जिनमें आतंकवादी हिंदू यात्रियों को निशाना बनाते थे।

इसके अलावा जून 1991 से लेकर उत्तर भारत, खासकर पंजाब और उत्तरी उत्तर प्रदेश में कई बम धमाके और आम नागरिकों पर हमले हुए। उत्तर प्रदेश के कुछ इलाकों में खालिस्तानी समर्थकों को पनाह मिलती थी। हाल ही में पीलीभीत में सुरक्षा बलों ने एक मुठभेड़ में खालिस्तान जिंदाबाद फोर्स के आतंकवादियों को मार गिराया, जिन्हें पाकिस्तान की ISI द्वारा ट्रेनिंग दी गई थी।

1991 में हुआ यह ट्रेन नरसंहार भारत के इतिहास में सबसे भयानक आतंकी घटनाओं में से एक माना जाता है। इसमें न सिर्फ निर्दोष हिंदू यात्रियों को मारा गया, बल्कि यह हमला लोकतंत्र और चुनाव प्रक्रिया को अस्थिर करने की सोची-समझी साजिश भी था।

जितने तेल ने 4 गुना कर दी गुयाना के लोगों की कमाई, वैसा ही भंडार अब भारत के अंडमान में मिलने की उम्मीद : पेट्रोलियम मंत्री पुरी ने बताया- 6 गुना बढ़ जाएगी अर्थव्यवस्था

जल्द ही भारत की कच्चे तेल के लिए निर्भरता विदेशों पर खत्म हो सकती है। भारत के खुद के पास भविष्य में इतना तेल हो सकता है कि वह अपनी जरूर पूरी करने के साथ ही विदेशों को भी बेचे। यह संभावनाएँ पेट्रोलियम मामलों के केन्द्रीय मंत्री के एक बयान से पैदा हुई हैं।

द न्यू इंडियन से बात करते हुए केन्द्रीय पेट्रोलियम मामलों के मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा है कि अंडमान निकोबार में चल रही तेल की खोज जल्द ही पूरी हो सकती है। उन्होंने कहा है कि अंडमान में मिलने वाला तेल भण्डार गुयाना जितना हो सकता है। उनके इस बयान के बाद कयास तेज हो गए हैं।

हरदीप सिंह पुरी ने इस इंटरव्यू में कहा, “जब मैंने कृष्णा गोदावरी बेसिन के बारे में यह बयान दिया, तो उस समय, यह एक जगह थी। अब हमें ग्रीन शूट, तेल और कई अन्य स्थान मिले हैं। और मुझे लगता है कि यह केवल समय की बात है इससे पहले कि हम अंडमान सागर में एक बड़ा गुयाना जैसा तेल का भण्डार पाएँगे। इस पर अभी काम चल रहा है।”

अंडमान में क्यों हो रही खोज?

अंडमान निकोबार में सरकारी तेल कम्पनियाँ ONGC और OIL तेल की खोज में लगे हुए हैं। ONGC ने मई , 2024 अंडमान के इलाकों में कुँए खोदने चालू किए थे। अंडमान में 500 से अधिक तेल के कुँए अब तक ONGC खोद चुकी है। मंत्री हरदीप सिंह पुरी का मानना है कि यहाँ जल्द ही तेल मिलेगा।

उन्होंने यह भी बताया है कि यदि यहाँ तेल का भण्डार मिला तो भारत की अर्थव्यवस्था को 5 से 6 गुना का लाभ मिलने वाला है। अंडमान का इलाका भारत के साथ ही म्यांमार और इंडोनेशिया में भी फैला हुआ है। रिपोर्ट्स बताती हैं कि यह दोनों देश यहाँ से तेल पा चुके हैं और इसका लाभ भी उठा रहे हैं।

भारत को यहाँ पहले कुछ जगहों पर गैस मिल भी चुकी है। इंडोनेशिया को भी बड़े गैस भण्डार मिले हैं। अंडमान में गैस के 610 मिलियन टन भण्डार होने की बात लगातार चलती आई है। ऐसे में भारत को यहाँ सफलता मिल सकती है। अंडमान में खोज का सबसे बड़ा कारण लगातार छोटे-छोटे भण्डार मिलने रहना है, जिससे लगातार आशा बनी हुई है।

गुयाना से क्यों की गई तुलना?

दक्षिण अमेरिका में स्थित देश गुयाना की भी इस तरह से किस्मत बदली है। पहले काफी गरीब माने जाने वाले देश में गुयाना में 2015 में तेल की खोज हुई थी। इसके बाद से लगातार यहाँ तेल के कुँए मिल रहे हैं। यहाँ 11 बिलियन बैरल कच्चा तेल मिल चुका है।

गुयाना की सरकार को इससे आगे 15 वर्षों तक 100 बिलियन डॉलर (₹8.5 लाख करोड़) की कमाई होने की संभावना है। यह कमाई तब होगी जब यहाँ मिले तेल से होने वाली कमाई का बड़ा हिस्सा विदेशी कम्पनियाँ ले जाती हैं।

गुयाना में तेल की खोज के चलते लोगों का भाग्य बदल गया है। गुयाना बीते लगभग 2 वर्षों से 33% की GDP वृद्धि दर से आगे बढ़ रहा है। यहाँ प्रति व्यक्ति आय भी तेजी से बढ़ी है। यह 2020 में $7000 से 2020 में $28000 पहुँच गई है। तेल का इसमें बड़ा योगदान है। गुयाना को नए क़तर की संज्ञा दी जा रही है।

भारत को अगर गुयाना जितना ही तेल अंडमान में मिल जाए तो उसे लगभग एक दशक तक बाहर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा।

कितनी होगी बचत?

भारत की 80% तेल की जरूरतें विदेशों से आने वाले कच्चे तेल से पूरी होती हैं। वित्त वर्ष 2025 में ही भारत को 137 बिलियन डॉलर (₹10 लाख करोड़ से अधिक) का खर्च तेल आयात के लिए करना पड़ा था। यदि अंडमान में गुयाना जितना भी तेल मिले तो भारत को यह पैसा खर्च नहीं करना पड़ेगा।

ऐसे में भारत को पाँच वर्षों में ₹50 लाख करोड़ से अधिक की बचत होगी। यह पैसा देश में रहने से अर्थव्यवस्था को मजबूती देगा और साथ ही हमारा व्यापार घाटा भी कम करेगा। ऐसे में केन्द्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी के बयान से उम्मीदें और भी बढ़ गई हैं।

हिंदू होने के कारण ब्रिटेन में पीटे गए 3 युवक, बहन बोली- कलावा देखकर मुस्लिमों ने किया भाई पर हमला: संसद तक में उठा मामला, पर गिरफ्तारी एक भी नहीं

लंदन में तीन हिंदू लड़कों के साथ मारपीट का एक गंभीर मामला सामने आया है, जिसे नस्लीय और धार्मिक घृणा से जोड़ा जा रहा है। यह घटना 30 मई 2025 को हुई, जब मुस्लिमों के ग्रुप ने एक सार्वजनिक पार्क में धार्मिक पहचान करने के बाद तीन हिंदू लड़कों की बेरहमी से पिटाई कर दी।

पीड़ितों में एक ब्रिटिश-भारतीय गुजराती और दो श्रीलंकाई मूल के लड़के थे। इस मामले को यूनाइटेड किंगडम के सांसद बॉब ब्लैकमैन ने गुरुवार (12 जून, 2025) को हाउस ऑफ कॉमन्स में उठाया और इसे नस्लीय-धार्मिक घृणा से प्रेरित हिंसा बताया।

बॉब ब्लैकमैन ने अपने भाषण में कहा, “तीन युवा हिंदू लड़के हेडस्टोन पार्क में क्रिकेट खेल रहे थे। तभी कुछ बड़े लोग उनके पास आए। झगड़ा हुआ और मारपीट में तीनों लड़कों को अस्पताल में भर्ती करना पड़ा। एक की आँख की हड्डी टूटी है। पुलिस इसे गंभीर नस्लीय हमले के रूप में देख रही है, लेकिन यह साफ तौर पर हिंदू लड़कों और मुस्लिम पुरुषों के बीच धार्मिक घृणा का मामला है।”

दरअसल, यह घटना तब शुरू हुई जब तीनों हिंदू लड़के क्रिकेट खेलने के लिए पार्क गए थे। शाम करीब 6 बजे वे एक कैफे के पास से गुजर रहे थे, जहाँ लगभग 8 लोग बैठे थे। ये सभी एक मुस्लिम परिवार के थे, क्योंकि उनकी कुछ महिलाओं ने हिजाब पहना था।

मुस्लिम परिवार को गलतफहमी हो गई कि हिंदू लड़के उनकी ओर देख रहे हैं। परिवार का एक पुरुष गुस्से में उनके पास गया और पूछा, “तुम लोग हमारे परिवार को क्यों घूर रहे हो?” एक हिंदू लड़के ने शांति से जवाब दिया कि वे अपने दोस्तों को देख रहे थे, जो पार्क में क्रिकेट खेल रहे थे। इस जवाब के बाद मामला शांत हो गया और तीनों हिंदू लड़के पार्क में जाकर एक बेंच पर बैठ गए।

लेकिन करीब 30 मिनट बाद उसी मुस्लिम परिवार के कुछ पुरुष उस जगह पहुँचे, जहाँ तीनों लड़के बैठे थे। उन्होंने फिर से सवाल किया, “तुम लोग कहाँ से हो?” जब लड़कों ने बताया कि वे भारतीय और श्रीलंकाई मूल के हैं, तो उन पर लात-घूँसे बरसाने शुरू कर दिए।

मारपीट इतनी हिंसक थी कि दो लड़के बेहोश हो गए और उनके सिर पर गंभीर चोटें आईं। तीनों को तुरंत नॉर्थविक पार्क अस्पताल ले जाया गया। उनके शरीर पर कट और खरोंच के निशान थे, और दो के चेहरों पर गंभीर फ्रैक्चर पाए गए।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, एक पीड़ित की बहन ने बताया कि उसके भाई ने अपने हाथ पर मंदिर का पवित्र धागा बाँधा था, जिसके कारण संभवतः उन्हें धार्मिक आधार पर निशाना बनाया गया। यह इस बात का संकेत है कि हमला न केवल नस्लीय, बल्कि धार्मिक घृणा से भी प्रेरित था।

हैरानी की बात है कि पुलिस ने अभी तक इस मामले में किसी को गिरफ्तार नहीं किया है और न ही इसे स्पष्ट रूप से धार्मिक घृणा से प्रेरित हिंसा माना है। यह पहली बार नहीं है जब हिंदुओं को उनके धर्म के आधार पर निशाना बनाया गया हो। ऐसी घटनाएँ बार-बार सामने आती रहती हैं, जहाँ हिंदुओं के साथ उनके धर्म पूछकर दुर्व्यवहार किया जाता है। ब्रिटेन की सरकार ‘ग्रूमिंग जिहाद‘ के मामलों की तरह इसे भी स्वीकार करने को तैयार नहीं है।

हिन्दू लड़की को ले गया मोहसिन, घर तलाशने पहुँचे लोग तो हुई पत्थरबाजी: पुलिस ने हिन्दू कार्यकर्ताओं पर FIR की, HJM के लोग बोले- प्रशासन कर रहा पक्षपात

हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले में एक मुस्लिम युवक एक हिन्दू लड़की को साथ ले गया। लड़की के परिवार वाले हिन्दू संगठन के लोगों के साथ जब मुस्लिम युवक के घर पहुँचे जहाँ पत्थरबाजी हो गई। इस मामले में पुलिस के कुछ जवान भी घायल हुए। अब हिन्दू कार्यकर्ताओं पर ही पुलिस ने FIR दर्ज कर दी है। वहीं लड़की को वापस बरामद कर दिया गया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, यह पूरा मामला 4 जून, 2025 से चालू हुआ। पांवटा साहिब के कीरतपुर माजरा गाँव में एक हिन्दू लड़की को एक मुस्लिम युवक भगा ले गया। मुस्लिम युवक का नाम मोहसिन खान है। लड़की कई दिनों तक गायब रही। हिन्दू बच्ची के परिवार ने इसके बाद पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई। यह मामला हिन्दू संगठनों के पास भी पहुँचा।

इस मामले में हिन्दू संगठनों ने पुलिस के पास पहुँच कर कार्रवाई की माँग की। मामले में 10 दिनों तक लड़की का कोई पता नहीं लगने पर हिन्दू संगठन 13 जून, 2025 को शाम को फिर इकट्ठा हुए प्रदर्शन करने लगे। उन्होंने मोहसिन के गाँव जाकर भी लड़की का पता लगाने की कोशिश की।

मौके पर मौजूद एक हिन्दू कार्यकर्ता के अनुसार, यहाँ जैसे ही पुलिस के साथ हिन्दू संगठन के लोग पहुँचे तो दूसरी तरफ से पत्थरबाजी चालू हो गई। इसका जवाब भीड़ में मौजूद लोगों ने दिया। इस पूरे बवाल में कुछ पुलिसकर्मी भी चोटिल हो गए। इसके बाद पूरे इलाके में धारा 163 लगा दी गई।

पांवटा के ही हिन्दू जागरण मंच (HJM) से जुड़े एक कार्यकर्ता ने ऑपइंडिया को बताया कि मामला शांत होने के बाद 14 जून, 2025 को पुलिस ने हिन्दुओं पर ही कार्रवाई चालू कर दी। उन्होंने बताया कि पुलिस ने 4 हिन्दू कार्यकर्ताओं को थाने पर बिठाया और बाद में मामला भी दर्ज कर लिया।

हिन्दू कार्यकर्ता ने यह भी बताया कि इस दौरान ना मुस्लिम पक्ष पर पत्थरबाजी की FIR लिखी गई और ना ही अभी लड़के पर कार्रवाई की जानकारी है। इस बीच पुलिस ने हिन्दू लड़की को हरियाणा के अम्बाला से बरामद कर लिया है। लड़की ने इस बीच मोहसिन के पक्ष में ही बयान दिया है।

हिन्दू कार्यकर्ताओं ने इस बीच पुलिस पर पक्षपात करने का आरोप लगाया है। हिन्दू कार्यकर्ताओं ने कहा है कि पुलिस एकतरफा कार्रवाई की है। उन्होंने आरोप लगाए कि मुस्लिमों पर ना ही कोई FIR की गई और ना ही आरोपित युवक को लेकर कोई कार्रवाई की गई।

पांवटा साहिब में इस घटना के बाद से तनाव बना हुआ है।

कर्नाटक के स्कूलों में बच्चे पढ़ेंगे ‘सेक्स एजुकेशन’, कॉन्ग्रेस सरकार ने विवाद से बचने के लिए नाम दिया ‘किशोर शिक्षा’: रिपोर्ट में दावा- राज्य के बच्चे हो रहे वर्चुअल यौन शोषण का शिकार, अभिभावक चिंतित

कर्नाटक सरकार स्कूलों में किशोरों को सेक्स एजुकेशन पढ़ाएगी। विवाद से बचने को इस किशोर शिक्षा का नाम दिया गया है। यह पढ़ाई मुख्य तौर पर कक्षा 8 से 12 वर्षीय बच्चों को दी जाएगी। यह फैसला उन्हें यौन जागरूकता दिलाने के संबंध में लिया गया है।

सेक्स एजुकेशन को लेकर यह पढ़ाई एक रिपोर्ट के आधार पर करवाई जाने वाली है। इस रिपोर्ट में पता चला है कि कर्नाटक में अधिकतर बच्चे वर्चुअली यौन शोषण और अपमानजनक शब्दों यानी गाली का शिकार हो रहें हैं।

यह भी पता चला है कि इससे बच्चों को बचाने में सरकार के साथ-साथ परिवार भी असमर्थ साबित हो रहा है। कर्नाटक के स्कूल शिक्षा और साक्षरता मंत्री मधु बंगारप्पा ने कक्षा 8 से 12 कक्षा तक के छात्रों के लिए स्कूल में सेक्स एजुकेशन की पढ़ाई लागू करने का आदेश दिया है।

इसको लेकर क्या पढ़ाई करवाई जाएगी, इसकी जानकारी नहीं है। यह भी सामने या है आया है कि कर्नाटक में शिक्षक भी सेक्स एजुकेशन देने से बच रहे हैं। विवादों से बचने कि लिए इसे ‘सेक्स एजुकेशन’ की जगह ‘किशोर शिक्षा’ का नाम दिया गया है।

इसके तहत बच्चों को गुड टच और बैड टच की भी जानकारी दी जाएगी। कर्नाटक राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग (KSCPCR) और चाइल्डफंड इंडिया के संयुक्त तत्वाधान में जारी किए गए रिपोर्ट में बच्चों के ऑनलाइन यौन शोषण और दुर्व्यवहार को प्रमुखता से उठाया गया था

यह रिपोर्ट शुक्रवार (13 जून 2025) को कर्नाटक विधान परिषद के अध्यक्ष बसवराज होरत्ती द्वारा जारी की गई थी। अध्ययन में कर्नाटक के पाँच जिलों बेंगलुरु, चामराजनगर, रायचूर, चिकमगलुरु और बेलगावी के आठ से अट्ठारह साल 903 स्कूली बच्चों को शामिल किया गया था। । 

इस रिपोर्ट से प्राप्त निष्कर्ष हैरान करने वाला था। रिपोर्ट में पता चला कि डिजिटलाइजेशन के इस दौर में कर्नाटक में पिछले एक साल में छह में से एक बच्चे ने सोशल मीडिया पर अंजान लोगों से ऑनलाइन जुड़ने की बात को स्वीकार किया।

इतना ही नहीं दस में से एक किशोर (17% लड़के और 4% लड़कियाँ) उनसे मिलने भी गया। इसके अलावा कई ने इन ऑनलाइन दोस्तों के साथ फोटोज और वीडियो साझा करने की बात भी मानी। स्कूल शिक्षा विभाग के आयुक्त डॉ त्रिलोकचंद्र केवी के अनुसार इसके लिए पाठ्यक्रम स्कूल शिक्षा अनुसंधान एवं प्रशिक्षण विभाग (DSERT) में तैयार किया जा रहा है।

उन्होंने बताया कि सिलेबस तैयार होने के बाद जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थानों (DITT) को भेजा जाएगा और यहीं शिक्षकों को पाठ्यक्रम पढ़ाने का प्रशिक्षण भी दिया जाएगा। वहीं कर्नाटक राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग के अध्यक्ष नागन्ना गौड़ा ने विभाग को सिलेबस में POCSO एक्ट को शामिल करने की भी सलाह दी है।

कर्नाटक में प्राथमिक एवं माध्यमिक विद्यालयों के एसोसिएटेड मैनेजमेंट के महासचिव डी. शशि कुमार का कहना है कि आजकल बच्चों में कम उम्र में ही हार्मोनल उत्तेजना शुरू हो जाती है। इसलिए जरुरी है कि हमें उन्हें एक उम्र के बाद शरीर में होने वाले बदलावों के बारे में बताएँ।