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मुर्शिदाबाद में अब BSF पर इस्लामी भीड़ का हमला, फायरिंग-पत्थरबाजी: बच्चे भी घायल, BJP ने बताया- तुलसी माला पहने हिन्दू को किया अधमरा

पश्चिम बंगाल में वक्फ कानून के विरोध के नाम पर इस्लामी भीड़ की हिंसा लगातार जारी है। इस्लामी भीड़ सुरक्षाबलों को भी निशाना बना रही है। पुलिस के बाद उसने अब कलकत्ता हाई कोर्ट के आदेश पर मुर्शिदाबाद पहुँची सीमा सुरक्षा बल (BSF) को निशाना बनाया है। BSF जवानों पर फायरिंग की गई है। हिंसा के बीच हिन्दू मुर्शिदाबाद से पलायन को मजबूर हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, शनिवार (12 अप्रैल, 2025) को BSF की टीम पर इस्लामी भीड़ ने हमला किया गया। यह हमला मुर्शिदाबाद के शमशेरगंज इलाके में हुआ। यहाँ तैनात जवानों को निशाना बनाया गया। वक्फ के नाम पर प्रदर्शन कर रहे इस्लामी कट्टरपंथियों ने BSF जवानों पर पत्थर बरसाए और उनकी गाड़ियाँ तोड़ दीं।

BSF को निशाना बनाए जाने की घटनाएँ रविवार (13 अप्रैल, 2024) को भी जारी हैं। रविवार को धुलियान इलाके में BSF के ऊपर कट्टरपंथियों ने फायरिंग की। इस फायरिंग में 2 बालक घायल हो गए। BSF के किसी सुरक्षाकर्मी के घायल होने की अभी सूचना नहीं है।

मुर्शिदाबाद में इस्लामी भीड़ की हिंसा रोकने में पश्चिम बंगाल पुलिस के नाकाम होने के बाद कलकत्ता हाई कोर्ट ने शनिवार को केन्द्रीय सुरक्षाबलों की तैनाती के आदेश दिए थे। इसके बाद मुर्शिदाबाद में BSF तैनात की गई थी। हिंसा में पहले पुलिसकर्मी भी घायल हुए थे। BSF के पहुँचने के बाद इस्लामी भीड़ ने उन्हें भी निशाने पर लिया।

BSF पहले के अलावा धुलियान में 2 हिन्दू मंदिरों पर भी इस्लामी भीड़ के हमले की बात सामने आई है। भाजपा ने आरोप लगाया है कि राज्य की TMC सरकार इस्लामी भीड़ पर कार्रवाई नहीं कर रही है और उन्हें लगातार प्रदेश भर में हिंसा फैलाने की खुली छूट दी जा रही है।

भाजपा ने बताया है कि इसी के चलते दक्षिण 24 परगना के बरुईपुर में तुलसी की माला पहने एक हिंदू व्यक्ति को मुस्लिम भीड़ ने बुरी तरह पीटा और अधमरा कर दिया है। उसकी एक वीडियो भी भाजपा ने साझा की है। इसमें वह अस्पताल में भर्ती है और अपनी पीड़ा बता रहा है।

भाजपा नेता सुवेंदु अधिकारी ने बताया है कि मुर्शिदाबाद के शमशेरपुर में इस्लामी भीड़ के हमलों से बचने के लिए सैकड़ों लोग भाग कर दूसरी जगह जा रहे हैं। अपना घर-बार छोड़ने वालों में अधिकांश महिलाएँ हैं। बड़ी संख्या में बच्चे और पुरुष भी इलाका छोड़ रहे हैं।

इससे पहले मुर्शिदाबाद में इस्लामी भीड़ ने एक हिन्दू पिता-पुत्र की हत्या कर दी थी। वह लोग मूर्तिकार थे। इस्लामी भीड़ के हमले में 15 से अधिक पुलिसकर्मी भी घायल हैं। वहीं इस दौरान भी राज्य में लगातार वक्फ के खिलाफ प्रदर्शन की अनुमति ममता सरकार दिए जा रही है।

‘ड्रम में राजा’… मुस्कान-साहिल ने केवल सौरभ को ही काटकर सील नहीं किया, इस संवेदनहीन समाज को भी कर दिया है बेपर्दा: कुछ तो शर्म करो रील-मीमबाजों

देश में पहले जब भी कोई जघन्य अपराध होता था तो कुछ समय के लिए वह मामला खबरों की सुर्खियाँ बनता था। लोग प्रदर्शन करते थे। न्याय माँगते थे। आगे उस घटना से सबक लेते थे या फिर उसे भूल जाते थे। लेकिन, अब सोशल मीडिया के जमाने में चीजें ऐसी नहीं है। यहाँ कोई भी मामला ज्यादा उछलता है तो पहले उससे वायरल होने वाला कंटेंट तैयार होता है बाकी चरण बाद के हैं। इस कंटेंट बनाने की होड़ में क्रिएटर्स भूल जाते हैं कि जो वो परोस रहे हैं उसका समाज पर क्या असर पड़ेगा।

बात को समझने का सबसे ताजा उदाहरण मेरठ हत्याकांड का है। एक महिला मुस्कान ने प्रेमी साहिल संग मिलकर अपने पति सौरभ की निर्मम हत्या की और उसके बाद शव को नीले ड्रम में छिपा दिया। मामले का खुलासा हुआ तो लोग पत्नी की हैवानियत सुन सिहर गए। मगर, कुछ ही दिन बाद देखा गया कि इस संवेदनशील घटना पर मीम और रील बनने लगी। बीमार मानसिकता का लोग इसका मजाक बनाने लगे। हद्द तो तब हुई जब इस घटना पर गाना तक तैयार हो गया।

यह संवेदना की मौत नहीं तो और क्या है ? सोशल मीडिया की ताकत तो किसी से छिपी नहीं है। लेकिन जब किसी गंभीर अपराध को भी लोग सिर्फ मज़े लेने के नजरिए से देखने लगें तो सवाल उठते हैं।

सोशल मीडिया पर निर्भर हमारी ‘सोच’

अब हमारी सोच सोशल मीडिया पर निर्भर हो गई है। हत्या होने के बाद संवेदनाएँ जताने के बजाए मीम्स बना रहे हैं। पहले अपराध होने पर ‘जागो’ कहा जाता था। अब ‘हँस लो और भूल जाओ’ वाला ट्रेंड है।

इस अपराधिक मामले में खास बात यह थी कि महिला ने पति को मार डाला। लेकिन इससे भी चौंकाने वाली बात सामने आई थी कि हत्या के बाद जिस ड्रम में शव को सीमेंट डालकर रखा गया। वही ड्रम अब सोशल मीडिया पर मीम्स और कॉमेडी वीडियो का विषय बन गया। इंस्टाग्राम रील्स, यूट्यूब शॉर्ट्स, फेसबुक पोस्ट्स जैसे प्लैटफॉर्म पर लोग इस ड्रम का मज़ाक बनाने लगे।

मृत व्यक्ति के बारे में न सोचकर ड्रम को बड़ा मुद्दा बना दिया गया है। कुछ मीडिया संस्थान भी इसे ‘ड्रम मर्डर केस’ बताकर रिपोर्ट कर रहे हैं। जहाँ अपराध खबर नहीं बल्कि मनोरंजन बन जाता है। हमें अपराध के मुख्य कारणों पर बात करनी चाहिए। न कि इसे मजाक बनाना चाहिए।

मेरठ मर्डर केस पर जो प्रतिक्रिया सोशल मीडिया पर दिखीं। वह हमारे समाज के एक वर्ग की मानसिकता को उजागर करती हैं। कैसे हम दूसरों का दुख हमारे लिए मज़े का साधन बन गई हैं। घर में झगड़ा हो, हत्या हो या कोई सड़क हादसा। लोग पहले मोबाइल निकालते हैं, वीडियो बनाते हैं, अपलोड करते हैं और फिर वायरल होने की खुशी मनाते हैं।

भोजपुरी में ‘ड्रम में राजा’ हुआ रिलीज

भोजपुरी सिनेमा ने तो ड्रम पर गाना ही निकाल दिया। Born Music Bhojpuri नाम के प्रोडक्शन हाउस ने यूट्यूब पर ‘ड्रम में राजा’ गाने को रिलीज किया। गाने के बोल में प्रेमिका अपने प्रेमी को उसकी बात न मानने पर ड्रम में डालने की धमकी दे रही है। जिसके बाद से विरोध तेज़ हो गया। वीडियो का कमेंट सेक्शन अभद्र टिप्पणियों से भर गया। गाने के मेकर्स पर हिंसा को बढ़ावा देने के आरोप लगे। जिसके बाद गाने के ऑडियो को हटा दिया गया।

मनीषा रानी ने आवाज़ उठाई

बिग बॉस ओटीटी फेम एक्ट्रेस मनीषा रानी ने मेरठ मर्डर केस पर मजाकिया कंटेन्ट बनाने वाले पर नाराजगी जताई। हाल ही में एक वीडियो शेयर कर लिखा, “इतने सेंसिटिव टॉपिक को ऐसे डील करते हैं?” वीडियो में उन्होंने कहा, “आपको सीरियस विषय पर ऐसा वीडियो बनाने पर शर्म आनी चाहिए। कोई इसके कारण मर गया है और आप उसका मजाक उड़ा रहे हैं। यहाँ तक कि कंटेंट क्रिएटर ऐसे पोस्ट भी बना रहे हैं।”

रिश्तो की टूटती डोर में ‘ड्रम की धमकी’

मेरठ में सौरभ की हत्या के बाद पति को प्रताड़ित करने के मामले लगातार सामने आने लगे। जो कि आज के दौर में टूटते रिश्तों को दर्शाता है। कैसे अब पति-पत्नी का पवित्र रिश्ता ड्रम की धमकी के बाद खबरें बन जाता है। गोंडा में इंजीनियर की पत्नी ने मारपीट के बाद पति को हत्या कर ड्रम में भरने की धमकी दे डाली। गुरुग्राम में पति ने पत्नी को प्रेमी संग पकड़ा। फिर विरोध जताया तो टुकड़े कर ड्रम में भरने की धमकी मिल गई। ‘नीले ड्रम’ ने समाज में अपराध करने के तरीके का ट्रेन्ड चला दिया है।

अपराधी का कोई जेंडर नहीं

सोशल मीडिया पर लोगों की ऐसी असंवेदनशीलता पहली बार उजागर नहीं हुई है। बस ये है कि इस बार टारगेट पर महिलाएँ हैं। लगातार महिलाओं का मजाक इस तरह उड़ाया जा रहा है जैसे समाज में होते अपराधों की असली दोषी वही हैं। लेकिन, हकीकत तो ये है कि एक तरफ अगर मुस्कान जैसी लड़कियाँ हैं तो दूसरी तरफ श्रद्धा वॉकर- प्रिया-अलका जैसी भी लड़कियाँ भी हैं जिनके साथ जो हुआ वो सोचा भी नहीं जा सकता।

सोशल मीडिया का क्या है वो दोनों मामलों में मजाक उड़ाएगा, अपना कंटेंट निकालेगा। मगर, हमें आभासी दुनिया से निकलकर वास्तविकता में ये नहीं भूलना है कि अपराधियों का कोई जेंडर नहीं होता।

इन मामलों में महिलाएँ भले अपराधी हैं लेकिन इसका ये अर्थ नहीं इससे हर महिला को संदेह की दृष्टि से देखा जाए। ऐसा करके हम सिर्फ उस सच से आँख मूंद रहे हैं जहाँ महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अपराध अब भी चिंता का विषय होने चाहिए। महिलाओं के खिलाफ दुष्प्रचार करने से पहले ये याद रखने की जरूरत है कि आज भी महिलाओं के साथ रोजाना बलात्कार, यौन शोषण और मारपीट की खबरें आती हैं।

हाल ही में उत्तर प्रदेश के वाराणसी में ग्रेजुएशन की छात्रा के साथ लगातार सात दिन तक 23 लोगों ने सामूहिक दुष्कर्म का मामला झकझोरने वाला है। तो क्या अब ये कहा जाए कि अपराध सिर्फ महिला के साथ होता है। नहीं बल्कि अपराधी की मानसिकता एक समान होती है। सौरभ की हत्या का मुद्दा मज़ाक बना लेकिन पुरुष है इसीलिए मज़ाक बनाया जाए। ये भी गलत है।

अगर हम सोशल मीडिया पर ऐसा माहौल बनाएँगे तो जाहिर हैं लोगों की संवेदनाएँ अस मुद्दों को लेकर खत्म होती जाएँगी। लोग अपराध को एक मजाक समझेंगे और पीड़ित को सिर्फ तमाशा।

जल रहा बंगाल और चाय की चुस्की लेते हुए फोटो शेयर कर रहे TMC सांसद यूसुफ पठान: मुर्शिदाबाद में इस्लामी भीड़ की हिंसा को लेकर नेटिजन्स ने घेरा, कहा- इन्हें हिंदुओं पर अत्याचार से मतलब नहीं

पश्चिम बंगाल का मुर्शिदाबाद वक्फ कानून के विरोध में हो रहे हिंसक प्रदर्शन का केंद्र बिंदु है। मुस्लिम भीड़ की हिंसा, आगजनी, लूट के बाद कोलकाता हाई कोर्ट ने केंद्रीय बलों की तैनाती के आदेश दिए हैं। अब तक 3 लोगों की मौत की खबर आ चुकी है। दूसरी तरफ इसी जिले की बहरामपुर सीट से तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) के सांसद यूसुफ पठान (Yusuf Pathan) इंस्टाग्राम पर चाय की चुस्की लेते हुए फोटो शेयर कर रहे हैं।

उन्होंने ये तस्वीर एक दिन पहले ही अपने इंस्टा पर अपलोड की है। कैप्शन में लिखा- आरामदायक दोपहर, बढ़िया चाय और शांत माहौल। बस इस पल को खुद में समा रहा हूँ।

उनके इस पोस्ट को देखने के बाद आमजन भड़क गए। उन्होंने कहा, “बंगाल आग में जल रहा है और तुम चाय पी रहे हो।”

एक ने उनसे पूछा, “तुम्हें मालूम है तुम्हारे संसदीय क्षेत्र में चल क्या रहा है।”

एक यूजर ने कहा, “मुर्शिदाबाद में आग लगी हुई है, फिर भी तुमने ये तस्वीर पोस्ट करने के लिए चुनी। कितने असंवेदनशील हो तुम?”

साध्वी प्राची ने अपने एक्स पर लिखा- “मुर्शिदाबाद, सांसद यूसुफ पठान के निर्वाचन क्षेत्र बेहरामपुर से सिर्फ 10 किलोमीटर दूर एक इलाका जल रहा है और हिंदुओं पर अत्याचार हो रहा हैं, लेकिन वह शांत वातावरण में गुच्ची चप्पल में अपनी चाय का आनंद लेते दिख रहे हैं।”

भाजपा नेता शहजाद पूनावाला ने युसूफ पठान की तस्वीर देखकर लिखा- “बंगाल जल रहा है। हाईकोर्ट ने कहा है कि वो आँख बंद नहीं रख सकते और केंद्रीय बल तैनात करते हैं। ममता बनर्जी ऐसी राज्य संरक्षित हिंसा को बढ़ावा दे रही हैं जबकि पुलिस चुप है। वहीं युसूफ खान चाय पीकर उस पल को अपने में समा रहे हैं क्योंकि हिंदू मारे जा रहे हैं।”

भाजपा प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने इस तस्वीर पर कहा कि बंगाल में एक तरफ हिंदुओं को निशाना बनाया जा रहा है और दूसरी तरफ सांसद हिंदू पीड़ितों को चिढ़ाने के लिए पोस्ट कर रहे हैं। ममता बनर्जी एक हिंदू विरोधी प्रशासन चला रही हैं।

मुर्शिदाबाद में हिंसा

बता दें कि मुर्शिदाबाद जिले के सुती, धुलिया, समसेरगंज और अन्य इलाकों में नए वक्फ कानून के नाम पर हिंसा भड़की हुई। इस्लामी कट्टरपंथियों ने हिंदुओं को निशाना बनाया, वाहनों को जलाया और हिंदुओं की दुकानों को लूटा। हालात देख अदालत ने भी कहा कि जब लोगों की सुरक्षा खतरे में हो तो जनता मूकदर्शक नहीं बनी रहती, मगर युसूफ पठान पर इन सबका कोई असर नहीं दिख रहा। इसी कारण सोशल मीडिया पर उनकी आलोचना हो रही है। उन्हें गैर जिम्मेदाराना कहा जा रहा है। लोगों का साफ कहना है कि ये तस्वीर इसलिए डाली गई है ताकि सांसद दिखा सकें कि जो हो रहा है उन्हें उसमें आनंद आ रहा है।

हनुमान जयंती पर भी ‘शांतिदूतों’ का उपद्रव, नेपाल से लेकर MP की गुना तक शोभायात्रा पर पत्थरबाजी: कहीं मदरसे की छत से हमला तो कहीं मस्जिद के पास बनाया निशाना, Video

हनुमान जयंती पर निकलने वाली शोभायात्राएँ पिछले कुछ सालों से इस्लामी कट्टरपंथियों को खटकती रही हैं। यही वजह है कि ये लोग कहीं न कहीं ऐसे धार्मिक जुलूसों को निशाना बनाने की ताक में रहते हैं। इस बार भी ऐसा कई जगहों पर हुआ। इनमें एक मामला बिहार के पूर्वी चंपारण से लगे नेपाल के बीरगंज का है और दूसरा मध्य प्रदेश के गुना का है। दोनों जगह 12 अप्रैल 2025, हनुमान जन्मोत्सव की शोभायात्रा पर पथराव करके माहौल बिगाड़ा गया।

बीरगंज में आगजनी, पथराव

नेपाल के बीरगंज में स्थिति इतनी भयावह कर दी गई कि तोड़फोड़ से लेकर आगजनी तक हुई। इस हमले में करीबन 1 दर्जन पुलिसवाले घायल हो गए। वहीं शोभाय़ात्रा में शामिल एक व्यक्ति भी घायल हुआ

रिपोर्ट्स में बताया जा रहा है कि इलाके में हालात तब बिगड़े जब (पूर्वी चंपारण जिले के रक्सौल शहर से सटे बीरगंज के छपकैया क्षेत्र के समीप) शोभायात्रा ईदगाह के पास पहुँची और अचानक मदरसे की छत से पथराव होने लगा।

पुलिसकर्मियों ने स्थिति नियंत्रित करने के लिए खूब मशक्कत की, लेकिन तनाव बढ़ चुका था। भीड़ ने कई प्रतिष्ठानों में तोड़फोड़ और बाइक गैराज वाहनों में आग भी लगा दी थी। अब हालात नियंत्रित रखने के लिए क्षेत्र में शनिवार शाम से रविवार सुबह तक के लिए कर्फ्यू लगाया गया है।

गुना में शोभायात्रा पर पथराव

इसी तरह मध्य प्रदेश के गुना में हुए पथराव की घटना में भी लोग घायल हुए हैं। खबरें बताती हैं कि यहाँ हालात तब बिगड़े जब शोभायात्रा कर्नलगंज स्थित मस्जिद के पास पहुँची और डीजे के गानों और नारेबाजियों के बाद शोभायात्रा पर पथराव हुए।

गुना में यह जुलूस बीजेपी पार्षद ओमप्रकाश कुशवाह उर्फ गब्बर कुशवाह के नेतृत्व में निकाला जा रहा था। पथराव में उनके 11 साल के बेटे अकुल कुशवाहा समेत कई लोग घायल हो गए। भाजपा पार्षद ने इस संबंध में एफआईआर दी है। उन्होंने बताया कि इस पथराव के पीछे ताजिया कमेटी का अध्य यूसुफ खान और अन्य लोग हैं। पुलिस ने मामले की जाँच शुरू कर दी है।

पुलिस ने बताया कि उन्होंने तनाव का पता चलने के 15-20 मिनट बाद स्थिति को संभाल लिया था व सुरक्षा लिहाज से इलाके में भारी पुलिस बल भी तैनात किया गया है। शोभायात्रा में शामिल लोग आक्रोशित थे। वह इकट्ठा होकर पत्थरबाजों के खिलाफ कार्रवाई करने को कह रहे थे, जिनकी माँग सुन प्रशासन ने उन्हें कोतवाली जाकर शिकायत दर्ज कराने को कहा।

इस मामले में कोतवाली पुलिस ने ओमप्रकाश कुशवाह की शिकायत पर रात 5 नामजद और 15-20 अन्य लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। आरोपितों में विक्की खान, आमीन खान, विक्की के लड़के, गुड्डू खान और तौफीक खान का नाम शामिल हैं।

पुलिस ने यह भी जानकारी दी कि उन्होंने वीडियो फुटेज के आधार पर उपद्रवियों की पहचान कर ली गई है। जाँच के बाद आगे एक्शन लिया जाएगा।

देवी-देवताओं की मूर्तियाँ गढ़ते थे हरगोविंद दास और उनके बेटे चंदन, काट डाला: BJP ने शेयर किया Video, मुर्शिदाबाद में मुस्लिम भीड़ का खून-खराबा

पश्चिम बंगाल का मुर्शिदाबाद जिला इस्लामी कट्टरपंथियों द्वारा फैलाई गई हिंसा की चपेट में है। कलकत्ता हाई कोर्ट ने केंद्रीय बलों की तैनाती का आदेश दिया है। यह सब वक्फ संशोधन कानून के विरोध के नाम पर शुरू हुआ, लेकिन जल्द ही इसका असली चेहरा सामने आ गया। मुर्शिदाबाद हिंसा में हिंदुओं को खास तौर पर निशाना बनाया गया। उनके घर, दुकानें, गाड़ियाँ और यहाँ तक कि मंदिर भी नहीं बख्शे गए। इन घटनाक्रमों के बीच, बीजेपी नेता अमित मालवीय ने मुर्शिदाबाद हिंसा का दिल दहलाने वाला वीडियो शेयर किया है, जिसमें पिता-पुत्र की हत्या कर दी गई।

अमित मालवीय द्वारा जारी वीडियो में हरगोविंद दास (पिता) और चंदन दास (बेटे) के शव दिख रहे हैं, जो मूर्तिकार थे और देवी-देवताओं की मूर्तियाँ बनाते थे। उनके घर में इस्लामी कट्टरपंथियों ने लूटपाट की और उसके बाद धारदात हथियारों से उनकी हत्या कर दी। तस्वीरों में दिख रहा है कि उनकी आँख पर भी हमला किया है, यानी जिन आँखों से देखकर वो देवी-देवताओं की मूर्तियाँ गढ़ा करते थे, नफरत की आग में इस्लामी कट्टरपंथियों ने उनकी आँखों को भी फोड़ दिया।

अमित मालवीय ने इसे जनसांख्यिकीय आक्रमण करार दिया। उन्होंने इस वीडियो को शेयर करते हुए पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को जोगेंद्र नाथ मंडल की याद दिलाई। उन्होंने कहा कि ममता बनर्जी पश्चिम बंगाल को एक और बांग्लादेश बनाना चाहती हैं, हम उन्हें ऐसा करने नहीं देंगे।

बता दें कि जोगेंद्र नाथ मंडल अविभाजित भारत के बड़े दलित नेता थे। वो देश के बँटवारे के बाद पाकिस्तान चले गए थे, लेकिन बाद में दलितों के दमन को देखते हुए खुद वहाँ से भाग खड़े हुए और भारत में ही वापस आकर उन्हें शरण मिली। जोगेंद्र नाथ मंडल ने हिंदुस्तान में ही दम तोड़ा था।

हिंदुओं को खास तौर पर बनाया गया निशाना

रिपोर्ट्स के मुताबिक, शुक्रवार (11 अप्रैल 2025) को जुमे की नमाज के बाद मुर्शिदाबाद के सुती और समशेरगंज में हालात बिगड़ गए। इस्लामी हमलावर सड़कों पर उतर चुके हैं। विरोध के नाम पर रेल सेवा रोकी गई, ब्लॉक डेवलपमेंट ऑफिसर (बीडीओ) के दफ्तर पर पत्थर और लाठियों से हमला हुआ। सारा इलाका ठप हो गया। लेकिन जो सबसे खतरनाक है, वो है हिंदुओं को चुन-चुनकर निशाना बनाना। ये कोई आम विरोध नहीं था, बल्कि इस्लामी भीड़ ने हिंदुओं की दुकानों, घरों और गाड़ियों को टारगेट किया।

खबरों के मुताबिक, हिंदुओं की दुकानों और मंदिरों पर हमला सबसे ज्यादा परेशान करने वाला था। सुती में एक हिंदू दंपति की मिठाई की दुकान ‘सुभा स्मृति होटल’ को पूरी तरह बर्बाद कर दिया गया। दुकान के मालिक ने रोते हुए कहा, “यहाँ मेरी मिठाई की दुकान थी।” उन्होंने अपनी तबाह दुकान की तरफ इशारा करते हुए बताया, “सब कुछ लूट लिया। दुकान में रखा नकद पैसा, सामान, कुछ भी नहीं छोड़ा। अब हम क्या खाएँगे?” उन्होंने कहा, “कुछ नहीं बचा। हमारा सब खत्म हो गया।”

उसी इलाके में ‘श्री हरि हिंदू होटल एंड लॉज’ को भी तोड़ दिया गया। न्यूज एजेंसी एएनआई ने इसका वीडियो भी जारी किया है।

स्थानीय लोगों ने बताया कि कुछ मंदिरों पर भी हमला हुआ और मूर्तियों को तोड़ा गया, हालाँकि ऑपइंडिया इसकी स्वतंत्र तौर पर पुष्टि नहीं करता है।

हिंसा की तस्वीरें, स्क्रीनशॉट : X_HinduVoice

हिंदुओं के घरों, दुकानों, गाड़ियों को पहुँचाया नुकसान

इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, मुर्शिदाबाद में हिंदू परिवारों के कई घरों को निशाना बनाया गया। भीड़ ने पत्थरबाजी की, सामान लूटा और घरों को तहस-नहस कर दिया।

एक हिंदू व्यापारी अमर भगत की पत्नी मंजू भगत ने आज तक को बताया, “भीड़ ने पहले हमारे घर का सामने का गेट तोड़ने की कोशिश की। जब वो नहीं तोड़ पाए, तो पीछे के रास्ते से घुसने लगे।” उन्होंने आगे कहा, “उन्होंने हमारी बाइक तोड़ दी, घर में घुसकर कुर्सियाँ, गद्दे, टीवी, महँगे सामान – सब लूट लिया। हमारा पूरा परिवार भगवान का नाम ले रहा था। हम जान बचाने के लिए छत पर छिपे थे। मैं सोच रही थी, अगर मेरी बेटी को कुछ हो गया तो क्या होगा?” मंजू की आवाज में डर और गुस्सा साफ सुनाई दे रहा था।

हिंसा का आलम ये था कि भीड़ ने एक एंबुलेंस तक को नहीं छोड़ा। इंडिया टुडे से बात करने वाले एक चश्मदीद ने बताया, “मुसलमानों ने एंबुलेंस में आग लगा दी। ड्राइवर को बहुत मारा। हम डर के मारे घर में बंद थे। मैंने अपने माँ-बाप, पत्नी और बच्चों को घर में रखा था।” उसने ये भी कहा कि हमलावर कोई बाहरी नहीं, बल्कि स्थानीय लोग थे। एक सीसीटीवी फुटेज में साफ दिखा कि हमलावरों ने एक हिंदू परिवार की गाड़ी को तोड़ा।

एक और पीड़ित ने एएनआई से अपनी आपबीती सुनाई। उन्होंने कहा, “उन्होंने बाइक तोड़ीं, दुकानों में आग लगाई, हमारा सामान लूट लिया। रातभर हम डर से जागते रहे। पुलिस कहीं नहीं थी। वो खुद अपनी जान बचाने के लिए भाग रहे थे।” उन्होंने गुस्से में पूछा, “अब देखते हैं सरकार हमें कुछ मुआवजा देती है या नहीं।”

इस हिंसा ने मुर्शिदाबाद के हिंदुओं को गहरे जख्म दिए हैं। उनके घर, दुकानें और आजीविका सब तबाह हो गए। मंजू भगत और सुभा स्मृति होटल के मालिक जैसों की कहानी सुनकर लगता है कि ये सिर्फ विरोध नहीं था, बल्कि हिंदुओं को जानबूझकर डराने और नुकसान पहुँचाने की साजिश है।

शेख आसिफ ने हिन्दू नाबालिग का किया बलात्कार, पुलिस ने पकड़ा तो रिवाल्वर छीनकर किया हमला: ओडिशा पुलिस के एनकाउंटर में साथी सहित घायल

ओडिशा के झारसुगुड़ा में मुस्लिम युवक ने एक हिन्दू नाबालिग का अपहरण किया। इसके बाद उसके साथ रेप किया। विरोध करने पर पीड़िता के परिजनों को भी धमकाया। ओडिशा पुलिस ने जब उसे गिरफ्तार किया तो उसने भागने की भी कोशिश की। पुलिस ने उसका एनकाउंटर किया है। उसे साथी के साथ गिरफ्तार कर लिया गया है।

यह घटना झारसुगुडा के बेलापहाड़ थाना क्षेत्र में हुई। शेख आसिफ नाम के एक मुस्लिम युवक ने बीते दिनों एक हिन्दू नाबालिग का अपहरण कर लिया। आसिफ ने हिन्दू बच्ची को डरा धमका कर उसका रेप किया। इस काम में उसका साथ अभिषेक बारीक नाम के एक लड़के ने दिया।

पीड़िता ने यह बात अपने परिवार को बताई। इसके बाद जब पीड़िता के परिजनों ने कार्रवाई के लिए पुलिस के पास जाने की बात कही तो शेख आसिफ के परिवार ने पीड़िता के परिवार को भी धमकाया। उन्होंने दबाव डाला कि यह बात वह किसी को भी ना बताएँ और पुलिस में FIR ना करवाएँ।

पीड़िता के परिजन दबाव के बावजूद पुलिस के पास पहुँचे और FIR लिखवाई। इसके बाद झारसुगुड़ा पुलिस ने दोनों को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस उन्हें शनिवार (12 अप्रैल, 2025) को कोर्ट में पेश करने के लिए एक वैन में ले जा रही थी। इसी बीच शेख आसिफ ने एक पुलिसकर्मी का रिवॉल्वर छीन लिया।

उसने इसके बाद भागने का प्रयास किया और रिवॉल्वर से 3-4 फायर भी किए। पुलिस ने उसे और उसके साथी को पकड़ने के लिए वापसी फायरिंग की, इसमें दोनों घायल हो गए। पुलिस ने इसके बाद दोनों को गिरफ्तार कर लिया है। दोनों का इलाज चल रहा है।

इस मामले में ओडिशा के उत्तर रेंज के आईजी हिमांशु कुमार लाल ने ऑपइंडिया से बताया, “आसिफ शेख और उसके परिवार के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया है। एनकाउंटर में आसिफ शेख ज्यादा घायल हुआ है, उसका इलाज जारी है। हम मामले में दोनों आरोपित पर कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित करवाएँगे।”

क्या पश्चिम बंगाल में नहीं लागू होगा वक्फ कानून, जानिए क्या कहता है संविधान: ममता बनर्जी को भाजपा क्यों बता रही ‘झूठा’

पश्चिम बंगाल में नए वक्फ कानून को लेकर मुस्लिम दंगाई सड़कों पर उतर गए हैं। राजधानी कोलकाता समेत कई जगह मुस्लिम भीड़ हिंसा कर रही है। मुर्शिदाबाद में मुस्लिम भीड़ ने 2 लोगों की हत्या भी कर दी है। उन्होंने पुलिस पर भी हमले किए हैं। इस बीच राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा है कि वह पश्चिम बंगाल में नए वक्फ कानून को लागू नहीं करेंगी।

राज्य में जारी मुस्लिम हिंसा के बीच ममता बनर्जी के इस बयान ने एक बार फिर उनकी मंशा पर प्रश्न उठा दिए हैं। उनके क़ानून लागू ना करने वाले बयान के बाद एक बार फिर केंद्र सरकार के साथ सीधी लड़ाई की नौबत आ गई है। इससे पहले भी कई राज्य केंद्र सरकार के पास किए गए कानून को रोकने की बात कह चुके हैं।

CM ममता बनर्जी ने क्या कहा?

पश्चिम बंगाल में वक्फ पर जारी हिंसा के बीच CM ममता बनर्जी ने एक्स (पहले ट्विटर) पर इसके राज्य में लागू ना किए जाने को लेकर ऐलान किया। उन्होंने लिखा, “हमने यह कानून नहीं बनाया जिसके खिलाफ बहुत से लोग आंदोलन कर रहे हैं। यह कानून केंद्र सरकार ने बनाया है। इसलिए जो जवाब आप चाहते हैं, वह केंद्र सरकार से माँगिए।”

CM ममता बनर्जी ने आगे लिखा, “हमने इस मामले में अपनी स्थिति स्पष्ट कर दी है – हम इस कानून का कतई समर्थन नहीं करते हैं। यह कानून हमारे राज्य में लागू नहीं होगा। तो फिर दंगा किस बात के लिए हो रहा है?” CM ममता ने दंगा करने वालों एक्शन लेने की बात कही।

क्या सही में वक्फ कानून पश्चिम बंगाल में लागू नहीं होगा?

ममता बनर्जी के ऐलान के बाद प्रश्न उठ रहे हैं कि क्या वह वक्फ कानून को पश्चिम बंगाल में लागू नहीं होने देंगी। उन्हें भाजपा प्रवक्ता अमित मालवीय ने झूठा करार दिया है। उन्होंने कहा कि देश की संसद से पारित क़ानून को वह नहीं रोक सकती हैं। उन्होंने कहा कि लागू ना करने की यह बात सरासर झूठ है।

गौरतलब है कि वक्फ संशोधन विधेयक को संसद में अप्रैल माह की शुरुआत में पास किया था। लोकसभा और राज्यसभा में यह साधारण बहुमत से पारित हुआ था। सत्ताधारी भाजपा समेत कई पार्टियों ने इसका समर्थन किया था, जबकि कॉन्ग्रेस समेत कई विपक्षी दल इसके विरोध में थे। इसके पारित होने से पहले कई घंटे की चर्चा लोकसभा-राज्यसभा में हुई थी।

इस विधेयक को 5 अप्रैल, 2025 को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने मंजूरी दे दी थी। इसी के साथ ही यह देश का कानून बन गया था। केंद्र सरकार अब इस कानून के आधार पर नियम बनाएगी और वह लागू किए जाएँगे। यह नियम बनने के बाद नया वक्फ कानून प्रभावी हो जाएगा।

वक्फ कानून में संशोधन एक साधारण विधेयक था। यह कोई संविधान में संशोधन करने वाला अधिनियम नहीं था। ऐसे में संसद में इसे दो तिहाई बहुमत या फिर देश के कम से कम आधे राज्यों की मंजूरी की आवश्यकता नहीं थी। यह संशोधन 1995 के वक्फ कानून में हुए थे।

वक्फ कानून के नए स्वरूप को केंद्र सरकार ही लागू करेगी और इसी के आधार पर राज्यों को इसके लिए गाइडलाइंस भेजे जाते हैं। ऐसे में राज्यों के पास इसे ना लागू करने का विकल्प नहीं बचता है। हालाँकि, इसके विरुद्ध राज्य सुप्रीम कोर्ट जा सकते हैं। इसके बाद उन्हें कानून लागू ही करना पड़ेगा।

क्या कहता है संविधान?

देश के संविधान ने कानून बनाने सम्बन्धी शक्तियों का बँटवारा स्पष्ट तौर पर कर रखा है। संविधान के अंतर्गत कानून बनाने सम्बन्धी तीन सूचियाँ हैं। इनमें एक सूची केंद्र सरकार के विषयों की है, इन पर केवल संसद ही कानून बना सकती है। दूसरी सूची राज्य के विषयों की है, जिस पर राज्य कानून बनाते हैं। कुछ विशेष परिस्थितियों में संसद भी इन विषयों पर कानून बनाती है।

वहीं तीसरी सूची को ‘समवर्ती सूची’ कहा जाता है। इसमें आने वाले विषयों पर राज्य और केंद्र दोनों कानून बना सकते हैं। हालाँकि, जिस मामले पर केंद्र सरकार कानून बना देगी, उस पर राज्य कानून नहीं बनाएगा। संसद में दिए गए बयान के अनुसार, भाजपा सरकार ने यह कानून धार्मिक स्वतंत्रता को लेकर संविधान में दिए गए अनुच्छेद 25-28 के तहत बनाया है।

ऐसे में इसके पश्चिम बंगाल में लागू ना होने को लेकर प्रश्न नहीं उठते हैं। यदि ममता सरकार इसे नहीं लागू करती तो केंद्र सरकार इसके विरुद्ध कानूनी रास्ता तलाश सकती है। इसमें कोर्ट जाने से लेकर बाकी संवैधानिक कदम शामिल हैं।

पहले भी कानूनों को लेकर राज्यों ने किया है विरोध

वक्फ कोई पहला ऐसा कानून नहीं है, जिसका विरोध किसी राज्य सरकार ने किया है। तीन कृषि कानूनों से लेकर नागरिकता संशोधन अधिनियम जैसे कानूनों का भी विरोध केरल, तमिलनाडु और पंजाब आदि कर चुके हैं। मार्च, 2024 में लागू किए गए CAA को तमिलनाडु और केरल ने अपने यहाँ ना लागू किए जाने की बात कही थी।

इसके बाद विशेषज्ञों ने स्पष्ट किया था कि यह राज्य CAA लागू करने को बाध्य हैं क्योंकि नागरिकता केंद्र सरकार के अंतर्गत आने वाला मामला है और इसमें राज्यों का कोई दखल नहीं हो सकता। राज्य सरकारें सिर्फ इसके विरुद्ध कोर्ट का ही रास्ता अपना सकती हैं, उनके पास क़ानून को लागू करने से रोकने सम्बन्धित कोई शक्ति नहीं होती।

कुछ राज्यों ने कृषि कानूनों की आलोचना करते हुए प्रस्ताव भी पारित किए थे। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले पर लगाई गई याचिका में स्पष्ट किया था कि ऐसे प्रस्ताव सिर्फ विधानसभा के विचार माने जाएँगे और उनका कोई कानूनी रोल नहीं होगा।

BJP नेता के घर ग्रेनेड अटैक करने वाला सैदुन अमीन दिल्ली से गिरफ्तार: बाबा सिद्दीकी के हत्यारे जीशान अख्तर ने दी थी ट्रेनिंग और नकदी, इस्लामी कट्टरपंथी वेल्डर के आतंकी संगठन से जुड़े होने का संदेह

पंजाब के जालंधर में बीजेपी नेता और पूर्व कैबिनेट मंत्री मनोरंजन कालिया के घर पर हुए ग्रेनेड हमले के मामले में सैदुल अमीन नाम के इस्लामी कट्टरपंथी को गिरफ्तार किया गया है। केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियों और पंजाब पुलिस ने सैदुल अमीन को दिल्ली से गिरफ्तार किया।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, पंजाब पुलिस ने केंद्रीय जाँच एजेंसियों और दिल्ली पुलिस के साथ मिलकर एक जटिल और तेज ऑपरेशन चलाया, जिसके बाद सैदुल अमीन को दिल्ली के जसोला इलाके से गिरफ्तार किया गया।

पंजाब पुलिस के महानिदेशक (डीजीपी) गौरव यादव ने इस कामयाबी की जानकारी देते हुए अपने आधिकारिक बयान में कहा, “जालंधर ग्रेनेड हमले के मामले में बड़ी सफलता हासिल हुई है। जालंधर कमिश्नरेट पुलिस ने केंद्रीय एजेंसियों और दिल्ली पुलिस के सहयोग से उत्तर प्रदेश के अमरोहा निवासी सैदुल अमीन को दिल्ली से सफलतापूर्वक गिरफ्तार कर लिया है। सैदुल अमीन बीजेपी नेता मनोरंजन कालिया के आवास पर 7-8 अप्रैल 2025 की मध्यरात्रि को हुए ग्रेनेड हमले का मुख्य आरोपित है।”

उन्होंने आगे बताया, “इस हमले के महज 12 घंटों के भीतर दो स्थानीय सहयोगियों को गिरफ्तार किया गया था, जिन्होंने मुख्य आरोपित की मदद की थी। इस हमले से जुड़े हैंडलर्स, वित्तीय समर्थकों और संभावित विदेशी कनेक्शनों का पता लगाने के लिए जाँच तेजी से आगे बढ़ रही है। पंजाब पुलिस संगठित अपराध को खत्म करने और पूरे राज्य में शांति व सद्भाव सुनिश्चित करने की अपनी प्रतिबद्धता में दृढ़ है।”

जानकारी के मुताबिक, इस गिरफ्तारी के लिए पुलिस ने कई राज्यों में छापेमारी की थी। हरियाणा, उत्तर प्रदेश और दिल्ली में टीमें भेजी गईं। जालंधर पुलिस कमिश्नर धनप्रीत कौर ने बताया कि यह ऑपरेशन बेहद गोपनीय और सटीक था। सैदुल अमीन को पकड़ने के लिए पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज, तकनीकी सबूतों और खुफिया जानकारी का सहारा लिया। इससे पहले, पुलिस ने इस मामले में दो अन्य आरोपितों सतीश कुमार उर्फ काका और हैरी को गिरफ्तार किया था। दोनों को जालंधर की एक अदालत ने छह दिन की पुलिस रिमांड पर भेज दिया था। इन दोनों ने सैदुल को हमले में लॉजिस्टिक मदद दी थी, जैसे कि ई-रिक्शा और अन्य संसाधन देना।

अमरोहा का रहने वाला है सैदुल अमीन

रिपोर्ट्स के मुताबिक, सैदुल अमीन 19 साल का युवक है और उत्तर प्रदेश के अमरोहा का रहने वाला है। वह पेशे से वेल्डर है। पुलिस के मुताबिक, सैदुल का व्यवहार रेडिकलाइज्ड है, यानी वह कट्टर विचारों से प्रभावित हो सकता है। उसका आतंकवादी गतिविधियों से कनेक्शन होने की आशंका है, जिसकी जाँच चल रही है। सैदुल ने खुद मनोरंजन कालिया के घर पर ग्रेनेड फेंका था।

पुलिस को पता चला कि वह करीब चार महीने पहले सोशल मीडिया खासकर इंस्टाग्राम के जरिए इस हमले के मास्टरमाइंड्स से जुड़ा था। उसे पहले पैसे का लालच दिया गया। फिर उसे ग्रेनेड फेंकने का काम सौंपा गया। सैदुल को ग्रेनेड पंजाब में ही उपलब्ध कराया गया था। उसने हमले से पहले दो-तीन दिन पंजाब में रुककर साजिश को अंजाम दिया और फिर अमरोहा लौट गया। पुलिस ने बताया कि सैदुल ने हमले के बाद अपने कपड़े बदले और जालंधर रेलवे स्टेशन पर करीब दो घंटे तक घूमता रहा, ताकि किसी को शक न हो। उसने एक चोरी का फोन भी इस्तेमाल किया था।

बता दें कि मनोरंजन कालिया के आवास पर यह हमला 7-8 अप्रैल 2025 की आधी रात को हुआ था, जब जालंधर के सेंट्रल टाउन इलाके में स्थित उनके घर पर ग्रेनेड फेंका गया। इस हमले में उनके घर की खिड़कियां टूट गईं, एक एल्यूमिनियम का दरवाजा क्षतिग्रस्त हो गया और बाहर खड़ी उनकी एसयूवी और मोटरबाइक को भी नुकसान पहुँचा। मनोरंजन कालिया ने बताया कि पहले उन्हें लगा कि यह बिजली के ट्रांसफॉर्मर में धमाका है। लेकिन जब बाहर धूल और धुआँ दिखा, तो उन्हें असलियत पता चली। उन्होंने तुरंत अपने गनमैन को पुलिस स्टेशन भेजा, जो उनके घर से महज 300 मीटर दूर था।

पुलिस ने घटनास्थल से एक ई-रिक्शा बरामद किया, जिसका इस्तेमाल हमले में किया गया था। सीसीटीवी फुटेज में दिखा कि दो लोग ई-रिक्शा में आए थे। एक शख्स बैग लिए सामने की सीट पर बैठा था। रिक्शा कालिया के घर के पास से गुजरा, फिर वापस आया। इसके बाद एक व्यक्ति उतरा और ग्रेनेड फेंककर भाग गया। विशेष पुलिस महानिदेशक (कानून-व्यवस्था) अर्पित शुक्ला ने बताया कि यह हमला पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई और लॉरेंस बिश्नोई गैंग की साजिश थी। इसका मकसद पंजाब में सांप्रदायिक तनाव फैलाना था।

बाबा सिद्दीकी हत्याकांड से भी कनेक्शन

पंजाब पुलिस की गिरफ्त में आए सैदुल अमीन का कनेक्शन बाबा सिद्दीकी हत्याकांड से भी सामने आया है। दरअसल, बाबा सिद्दीकी हत्याकांड में शामिल मुख्य आरोपित जीशान अख्तर, जो इस हमले का मास्टरमाइंड भी है, वो फिलहाल यूरोप में छिपा हुआ है। जीशान अख्तर ने ही इंस्टाग्राम के जरिए सैदुल को ग्रेनेड फेंकने की ट्रेनिंग दी थी। उसने वीडियो भेजकर सैदुल को तैयार किया और पंजाब में उसे 50 हजार रुपये भी दिलवाए। जीशान अख्तर बाबा सिद्दीकी की हत्या में हथियार मुहैया कराने का भी आरोपित है। वह पहले अजरबैजान में छिपा था। पुलिस के मुताबिक, जीशान और सैदुल के बीच सोशल मीडिया पर लंबे समय से बातचीत चल रही थी।

सैदुल की गिरफ्तारी के बाद अब पुलिस इस साजिश के हर पहलू को खंगाल रही है। डीजीपी गौरव यादव ने कहा कि पंजाब पुलिस का लक्ष्य संगठित अपराध को जड़ से खत्म करना है। इसके लिए केंद्रीय एजेंसियों के साथ मिलकर काम किया जा रहा है। जालंधर में सुरक्षा बढ़ा दी गई है।

राणा सांगा को ‘गद्दार’ कहने पर आगरा में करणी सेना का जमावड़ा: ‘रक्त स्वाभिमान सम्मेलन’ में सपा सांसद से माफी की माँग, भड़काने से बाज नहीं आ रहे अखिलेश

उत्तर प्रदेश में आगरा के एतमादपुर में शनिवार (12 अप्रैल 2025) को महाराणा संग्राम सिंह उर्फ राणा सांगा की 543वीं जयंती पर करणी सेना सहित हर वर्ग के कार्यकर्ता एकत्र हुए। इस दौरान लोगों ने समाजवादी पार्टी के सांसद रामजी लाल सुमन द्वारा राणा सांगा और हिंदू समाज पर की गई अपमानजनक टिप्पणी पर आक्रोश प्रदर्शित किया। इसको देखते हुए सुमन के घर की सुरक्षा बढ़ा दी गई है।

दरअसल, रामजी लाल सुमन ने 21 मार्च 2025 को राज्यसभा में राणा सांगा को गद्दार कह कर संबोधित किया था। इस इसके बाद करणी सेना सहित तमाम क्षत्रिय संगठनों ने रोष व्यक्त करते हुए सुमन से माफी की माँग की थी। सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव का सपोर्ट मिलने के बाद सुमन ने माफी से इनकार कर दिया। इसके बाद 26 मार्च को करणी सेना ने सुमन के घर के सामने पहुँचकर प्रदर्शन किया।

इसके बाद राणा सांगा की जयंती पर आगरा में एकजुट होकर प्रदर्शन की बात कही थी। प्रदर्शन के लिए शुक्रवार (11 अप्रैल 2025) की रात से ही अलग-अलग शहरों और जिलों से लोग आगरा पहुँचने शुरू हो गए थे। रैली में युवा राष्ट्रीय अध्यक्ष ओकेंद्र राणा समेत करणी सेना के अध्यक्ष राज शेखावत एवं अलग-अलग राजनीतिक दलों एवं वर्गों के पदाधिकारी पहुँचे और सपा के विरोध में एकजुटता दिखाई।

‘रक्त स्वाभिमान सम्मेलन’ नाम के इस आयोजन में करणी सेना, क्षत्रिय महासभा से लेकर हिंदू सनातन सभा सहित विभिन्न संगठनों एवं राजनीतिक दलों के लोग भी आगरा पहुँचे हैं। राणा सांगा की जयंती के अवसर पर आगरा में करीब 2 लाख लोग जुटे हैं। सबके हाथ में केसरिया ध्वज और कुछ लोगों के हाथों में तलवारें हैं। संख्या को देखते हुए प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड पर है।

रिपोर्ट्स के अनुसार, करणी सेना के इस प्रदर्शन पर सुमन ने कहा कि लोकतंत्र में सभी को विरोध का अधिकार है। अभिव्यक्ति की आजादी है। इस तरह का प्रदर्शन अराजकता है। वहीं, सपा के मुखिया अखिलेश यादव ने भी कहा, “करणी सेना-वेना नकली है। ये सभी भाजपाई हैं। अगर कोई हमारे कार्यकर्ता या रामजी लाल सुमन का अपमानन करेगा तो हम समाजवादी लोग भी उनके साथ खड़े रहेंगे।”

वहीं, दूसरी ओर आगरा पहुँचे करणी सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष सूरज पाल अम्मू ने कहा, “हम राणा सांगा की जयंती मना रहे हैं। हर काम शांतिपूर्वक करेंगे। मैं इस बात का आश्वासन देता हूँ कि करणी सेना का कोई भी कार्यकर्ता रामजी लाल सुमन के घर की तरफ नहीं जाएगा।” हालाँकि, राज शेखावत ने कहा कि अगर सुमन माफी नहीं माँगेंगे तो उनके आवास का घेराव किया जाएगा।

वहीं, किसी भी तरह की अप्रिय घटना या अराजकता को लेकर पुलिस प्रशासन मुस्तैद है। प्रशासन ने सम्मेलन स्थल को छावनी में बदल दिया है। शहर में ट्रैफिक को डायवर्ट कर दिया गया है। वहीं, रामजी लाल सुमन की सुरक्षा को भी कड़ी कर दी गई है। उनके घर 1000 पुलिस जवान तैनात किए गए हैं। रास्ते में 500 जगह बैरिकेडिंग की गई है।

अब्दुल मजीद ने हिंदुओं की आराध्य देवी पर की आपत्तिजनक टिप्पणी, आक्रोशित लोग सड़कों पर उतरे: जबलपुर पुलिस ने NSA के तहत गिरफ्तार कर भेजा जेल, ऐसे ही एक अन्य केस में बेल पर है आरोपित

मध्य प्रदेश के जबलपुर में धार्मिक तनाव फैल गया, क्य़ोंकि अब्दुल मजीद S/o अब्दुल हफीज ने हिंदुओं की आराध्य देवी के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी की। अब्दुल मजीद ने हिंदू समुदाय की आस्था की केंद्र माता बूढ़ी खेरमाई को लेकर व्हाट्सऐप ग्रुपल में अमर्यादित और अभद्र टिप्पणी की। इसकी वजह से तनाव फैल गया। देखते ही देखते हिंदू समुदाय में गुस्सा भड़क उठा और सराफा चौक पर लोग इकट्ठा होकर विरोध करने लगे।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, जबलपुर में 2-3 दिनों से इसी वजह से तनाव फैल रहा था। जिसमें गोहलपुर के पुराने पुल के पास सिरसातले का रहने वाला अब्दुल मजीद की हरकतों के खिलाफ लोग प्रदर्शन कर रहे थे। इस मामले में हनुमानताल थाना पुलिस और सीएसपी सुनील नेमा ने कार्रवाई करते हुए आरोपित अब्दुल मजीद (36 साल) को गिरफ्तार कर लिया।

पुलिस ने लगाया NSA, भेजा जेल

हिंदू संगठनों की शिकायत पर हनुमानताल पुलिस ने मामला दर्ज कर जाँच की थी। इसमें पुलिस ने पाया कि उसकी पोस्ट से न सिर्फ धार्मिक भावनाएँ आहत हुईं, बल्कि सांप्रदायिक तनाव की आशंका भी बढ़ गई थी। हिंदू संगठनों और धार्मिक गुरुओं ने इस घटना की कड़ी निंदा की। उनकी शिकायत पर पुलिस ने राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA) के तहत अब्दुल मजीद को गिरफ्तार कर केंद्रीय जेल भेज दिया।

पहले भी धार्मिक भावनाओं को चोट पहुँचा चुका है अब्दुल माजिद

यह पहली बार नहीं है जब अब्दुल मजीद ने ऐसा घिनौना काम किया हो। पहले भी वह माढ़ोताल थाने में दर्ज एक मामले में धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाने का आरोपी रह चुका है। उस वक्त भी उसकी हरकतों ने इलाके में तनाव पैदा किया था।

इसी वजह से जबलपुर एसपी सम्पत उपाध्याय ने इसे गंभीरता से लिया और कलेक्टर दीपक सक्सेना को रिपोर्ट भेजी। जबलपुर के कलेक्टर ने तुरंत NSA के तहत वारंट जारी किया, जिसके बाद अब्दुल मजीद को जेल की सलाखों के पीछे पहुँचा दिया गया।

बूढ़ी खेरमाई मंदिर जबलपुर के हिंदू समुदाय का आस्था का प्रतीक है। अब्दुल मजीद की हरकतों के खिलाफ लोगों ने सराफा चौक पर प्रदर्शन भी किया था। जिसके बाद मौके पर पहुँची पुलिस ने लोगों को भरोसा दिलाया कि दोषी को सजा मिलेगी। इस आश्वासन के बाद प्रदर्शन शांत हुआ।

एसपी सम्पत उपाध्याय ने साफ कहा कि सोशल मीडिया पर ऐसी हरकतें बर्दाश्त नहीं की जाएँगी। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे जिम्मेदारी से सोशल मीडिया का इस्तेमाल करें और किसी भी आपत्तिजनक पोस्ट की जानकारी पुलिस को दें।