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ड्रग तस्करों ने समुद्र में फेंका ₹1800 करोड़ का माल, गुजरात कोस्ट गार्ड और ATS ने सब पकड़ा: गृह मंत्री अमित शाह बोले- ये बहुत बड़ी उपलब्धि

गुजरात के समुद्र तट के पास भारतीय तटरक्षक बल (ICG) को बड़ी सफलता हाथ लगी है। रविवार (13 अप्रैल, 2025) को तटरक्षक बल ने ₹1800 करोड़ कीमत की ड्रग्स को समुद्र से बरामद किया है, जिसे अंतरराष्ट्रीय ड्रग तस्करों ने तस्करी के दौरान पकड़े जाने के डर से समुद्र में फेंक दिया था।

विशेष ऑपरेशन से मिली सफलता

तटरक्षक बल के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, खुफिया जानकारी के आधार पर विशेष ऑपरेशन चलाया गया था। इस दौरान समुद्र में संदिग्ध गतिविधियों की निगरानी के लिए एयरक्राफ्ट और शिप्स की मदद ली गई। ऑपरेशन के दौरान एक संदिग्ध नाव को पकड़ा गया, लेकिन तस्करों ने बचने के लिए नाव से ड्रग्स में फेंक दिए।

इसके बाद विशेष अभियान के तहत समुद्र की तलाशी ली गई और ड्रग्स से भरे कई पैकेट बरामद किए गए। बरामद की गई ड्रग्स में मुख्य रूप से मेथामफेटामाइन जैसे खतरनाक पदार्थ शामिल हैं। इसका अनुमानित बाजार मूल्य अंतरराष्ट्रीय बाजार में करीब ₹1800 करोड़ बताई गई है।

भारतीय तटरक्षक बल ने एक्स पर दी जानकारी

इस ऑपरेशन के विषय में भारतीय तटरक्षक बल ने एक्स (पहले ट्विटर) पर भी जानकारी दी है। उन्होंने बताया, “12-13 अप्रैल 2025 की रात को भारतीय तटरक्षक बल (ICG) और गुजरात एटीएस (ATS) ने संयुक्त अभियान में गुजरात तट के पास अंतरराष्ट्रीय समुद्री सीमा रेखा (IMBL) के पास से 300 किलो ड्रग्स जब्त किए।”

उन्होंने आगे बताया, “जिसकी अनुमानित कीमत ₹1800 करोड़ है। तटरक्षक जहाज को देखकर तस्करों ने ड्रग्स समुद्र में फेंक दिए और भाग निकले। बाद में बरामद माल एटीएस को जाँच के लिए सौंपा गया। यह कार्रवाई ड्रग तस्करी के खिलाफ एजेंसियों के आपसी सहयोग को दिखाती है।”

गृह मंत्रालय ने की कार्रवाई की सराहना

तटरक्षक बल और अन्य एजेंसियां अब मामले की गहराई से जाँच कर रही हैं। पता चला है कि यह खेप अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क का हिस्सा थी, जो पाकिस्तान या ईरान से समुद्र के रास्ते भारत लाई जा रही थी। इस कार्रवाई को देश में नशीले पदार्थों की तस्करी के खिलाफ एक बड़ी कामयाबी माना जा रहा है। गृह मंत्री अमित शाह ने इस कार्रवाई की प्रशंसा की है।

गृह मंत्री अमित शाह ने लिखा, “मोदी सरकार ड्रग्स नेटवर्क को बेरहमी से खत्म कर रही है। नशा मुक्त भारत बनाने के निरंतर प्रयास में, अंतरराष्ट्रीय समुद्री सीमा के पास ₹1800 करोड़ मूल्य के 300 KG ड्रग्स जब्त करके एक बड़ी उपलब्धि हासिल की गई है। समुद्र में यह ऑपरेशन, ड्रग्स को जड़ से खत्म करने पर मोदी सरकार की सफलता का उदाहरण है।”

इससे पहले फरवरी, 2024 में भी भारतीय नौसेना ने गुजरात तट के पास एक नाव में लाई जा रही लगभग 3300 किलोग्राम ड्रग्स पकड़ी थी। इसकी अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत ₹2 हजार करोड़ बताई गई थी। इस कार्रवाई में कई पाकिस्तानी भी पकड़े गए थे।

हजारीबाग में हिन्दुओं पर मस्जिद के पास हमला, शोभायात्रा पर इस्लामी कट्टरपंथियों ने बरसाए पत्थर: कई महिलाएँ घायल, रामनवमी पर भी हुआ था बवाल

झारखंड के हजारीबाग में हिन्दू शोभायात्रा पर मस्जिद के पास पथराव हुआ। यात्रा निकलने के दौरान एकाएक हमला किया। इस पथराव के चलते जुलूस में शामिल कई लोग घायल हो गए। हमले के बाद आगजनी भी हुई। घायल होने वालों में बड़ी संख्या में महिलाएँ हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, यह पथराव बरकट्ठा थानाक्षेत्र के झुरझुरी गाँव में रविवार (13 अप्रैल 2025) को हुआ। यहाँ रात करीब नौ दिवसीय श्री श्री शतचंदी महायज्ञ के तहत शोभायात्रा निकाली जा रही थी। जब यह शोभायात्रा इलाके की मस्जिद के पास पहुँची तो इस्लामी कट्टरपंथियों ने इस पर पथराव कर दिया।

शोभायात्रा में बड़ी संख्या में महिलाएँ भी शामिल थीं। पथराव के चलते यह घायल हो गईं। पथराव के साथ ही आगजनी भी की गई। शोभायात्रा में शामिल लोग इस दौरान बचने के लिए इधर उधर भागे। पथराव के बाद पीड़ित हिन्दुओं ने पुलिस को सूचना दी।

रिपोर्ट्स में बताया गया है कि कुछ दंगाइयों ने एक गुमटी में आग भी लगा दी। पथराव के चलते घुस्से हिन्दुओं ने जीटी रोड पर प्रदर्शन किया। उन्होंने सड़क जाम करके दंगाइयों पर कार्रवाई की माँग की। घटना के बाद पहुँची पुलिस ने किसी तरह प्रदर्शनकारियों को समझाया। उन्होंने काफी देर बाद जाम खुलवाया।

पुलिस ने बढ़ाई सुरक्षा

स्थिति अब नियंत्रण में है। घटनास्थल पर पुलिस प्रशासन अलर्ट मोड पर है। इलाके की सुरक्षा बढ़ा दी गई है। मौके पर बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी तैनात किए गए हैं। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि किसी भी अफवाह पर ध्यान न दें और शांति बनाए रखें।

एसपी अरविंद कुमार सिंह ने बताया, “यज्ञ हो रहा था और जुलूस निकाला जा रहा था। इस दौरान मस्जिद के पास दो समुदायों के बीच झड़प हुई, पत्थरबाजी हुई और फिर कुछ लोगों ने पुआल के ढेर में आग लगा दी। अभी स्थिति नियंत्रण में है। एफआईआर दर्ज की जाएगी।”

घटना में लगी आग बुझाने पहुँचे कोडरमा फायर स्टेशन के हेड कांस्टेबल एसके सिंह ने कहा, “हमने देखा कि 4-5 कमरों में आग लग गई। हमने आग बुझा दी है। अब स्थिति नियंत्रण में है।”

हजारीबाग में लगातार हिंसा

झारखंड के हजारीबाग जिला लगातार हिन्दू विरोधी हिंसा की चपेट में है। पिछले एक सप्ताह में यह पथराव की दूसरी घटना है। इससे पहले 26 मार्च 2025 को हजारीबाग के झंडा चौक पर रामनवमी उत्सव पर मंगला जुलूस पर इस्लामी कट्टरपंथियों ने पथराव किया था।

डिप्टी कमिश्नर नैन्सी सहाय ने बताया था कि जुलूस में कुछ गाने बजाए जा रहे थे, जिससे अन्य समुदाय के लोगों को आपत्ति हुई। इसी बहस में हाथापाई हुई और पथराव शुरू हो गया। इससे पहले 26 फरवरी 2025 को महाशिवरात्रि के अवसर पर भी पथराव हुआ था।

भगोड़ा कारोबारी मेहुल चौकसी बेल्जियम में गिरफ्तार, भारत लाने की हो रही तैयारी: PNB में किया था ₹13000 करोड़+ का घोटाला, भतीजा नीरव मोदी भी है फरार

पीएनबी घोटाले का आरोपित 64 साल के मेहुल चौकसी को बेल्जियम में गिरफ्तार कर लिया गया है। भगौड़ा हीरा व्यापारी मेहुल चौकसी को शनिवार (12 अप्रैल 2025) को सीबीआई के अनुरोध पर बेल्जियम में गिरफ्तार कर लिया गया। चौकसी अभी जेल में बंद है। हीरा व्यापारी मेहुल चोकसी और उनके भांजे नीरव मोदी पर सरकारी बैंक पंजाब नेशनल बैंक से करीब 13,500 करोड़ रुपए के धोखाधड़ी का आरोप है।

मेहुल चौकसी को भारत लाने की तैयारी

सीबीआई ने बेल्जियम के अधिकारियों को एक औपचारिक पत्र लिखा था जिसमें चौकसी की गिरफ्तारी की माँग की गई थी। चौकसी के खिलाफ 23 मई 2028 और 15 जून 2021 को मुंबई कोर्ट से वारंट जारी किया गया था। इसके आधार पर बेल्जियम पुलिस ने गिरफ्तार किया है।

भारत अब मेहुल चौकसी को देश में लाने के लिए बेल्जियम से प्रत्यर्पण की मांग करेगा। चौकसी अपनी पत्नी प्रीति चौकसी के साथ बेल्जियम में रह रहा था। उसकी पत्नी बेल्जियम की नागरिक है। जानकारी के मुताबिक चौकसी ने बेल्जियम में रहने के लिए नकली सर्टिफिकेट का इस्तेमाल किया था ताकि भारत लाने से बचा जा सके। उसने भारत के अलावा एंटिगुआ, बारबूडा की नागरिकता की बात भी नहीं बताई थी।

हजारों करोड़ के पीएनबी घोटाले का आरोप

इससे पहले भारत ने एंटीगुआ और बारबूडा से मेहुल चौकसी को भारत लाने की कोशिश की थी लेकिन इलाज के नाम पर वो यहाँ से भाग गया था। नीरव मोदी और मेहुल चौकसी जनवरी 2018 में भारत से विदेश भाग गए थे। इसके कुछ दिन बाद पंजाब नेशनल बैंक में बड़े घोटाले का पता चला था।

बेल्जियम में गिरफ्तारी के बाद चौकसी के वकील ने उसके स्वास्थ्य कारणों का हवाला दिया है। उसका कहना है कि मेहुल चौकसी की सेहत बहुत खराब है इसलिए उसे कही नहीं ले जाया जा सकता बल्कि उसे जमानत पर रिहा कर देना चाहिए।

पीएनबी के हजारों करोड़ के घोटाले में मुख्य आरोपी के तौर पर नीरव मोदी और मेहुल चौकसी का नाम है। मेहुल चौकसी का भतीजा नीरव मोदी है। नीरव मोदी इस वक्त लंदन की जेल में बंद है और भारत में प्रत्यर्पण के खिलाफ अपनी पूरी ताकत लगा रहा है।

आतंकवादी तहव्वुर राणा के भारत प्रत्यर्पण की सफलता के बाद मेहुल चौकसी की गिरफ्तारी को केन्द्र की बड़ी सफलता के तौर पर देखा जा रहा है। अगर चौकसी को भारत लाने में एजेंसियां सफल रहती हैं तो ये पीएनबी घोटाले की जाँच में एक अहम कदम होगा।

मुर्शिदाबाद में इस्लामी भीड़ ने BSF पर पेट्रोल बम-पत्थर से किया था हमला, सिर्फ हिन्दुओं की दुकानों को बनाया निशाना: मुस्लिमों की सम्पत्तियाँ सुरक्षित, TMC ने कहा- घुसपैठियों ने की हिंसा

पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद में हुई इस्लामी हिंसा के दौरान सिर्फ हिन्दुओं की दुकानें निशाना बनाई गईं थी। मुस्लिमों की दुकानों पर खरोंच तक नहीं आई। हिंसा के बाद पहुँची BSF को भी इस्लामी कट्टरपंथियों ने पेट्रोल बम से निशाना बनाया। बड़ी संख्या में हिन्दू अब मुर्शिदाबाद से भागने को मजबूर हैं। वहीं हिंसा रोकने में फेल हुई TMC सरकार अब BSF को ही दोषी बता रही है।

मीडिया से बात करते हुए एक हिन्दू पीड़ित ने बताया कि इस्लामी भीड़ अचानक से आई और उनकी दुकान पर हमला कर दिया। पीड़ित ने बताया कि भीड़ में शामिल मुस्लिम चिल्ला रहे थे वह किसी भी हिन्दू को इस इलाके में नहीं रहने देंगे। इस्लामी भीड़ ने इसके बाद उनकी दुकान का सामान लूट लिया और फर्नीचर में आग लगा दी।

पीड़ित ने बताया कि बाजार के भीतर मौजूद किसी भी मुस्लिम की दुकान को नुकसान नहीं पहुँचाया गया और सिर्फ हिन्दुओं की दुकानें और सम्पत्तियाँ ही इस्लामी भीड़ ने निशाने पर ली। एक पीड़ित ने बताया कि इस दौरान इस्लामी भीड़ ने देशी बम भी चलाए। BSF के आने के बाद हिन्दू अब अपने नुकसान का आकलन कर रहे हैं।

बड़ी संख्या में हिन्दू गंगा नदी पार करके मुर्शिदाबाद से मालदा चले गए हैं। पलायन कर चुके एक पीड़ित ने बताया कि इस्लामी भीड़ ने हिंसा के दौरान हिन्दू घरों को आग लगाई और महिलाओं के साथ छेड़खानी की। एक पीड़ित ने बताया कि उनके घर में इस्लामी भीड़ हथियार लहराती हुई घुसी और पुरुषों को पीटने लगी, वह किसी तरह भाग सके।

मुर्शिदाबाद से मालदा की तरफ बचने के लिए भागने वाले हिन्दुओं की संख्या लगभग 500 बताई जा रही है। वह मालदा के बैष्णबनगर में ठहरे हैं। यहाँ उन्होंने एक स्कूल में शरण ली है। मालदा पहुँचे हिन्दुओं को दूसरे हिन्दू मदद पहुँचा रहे हैं।

मुर्शिदाबाद में हुई हिंसा के बाद पहुँची BSF पर भी इस्लामी कट्टरपंथियों ने जानलेवा हमले किए हैं। मुर्शिदाबाद में तैनात BSF के DIG ने बताया कि भीड़ ने उनके ऊपर पेट्रोल बम और पत्थर चलाए। उन्होंने बताया कि कोई सुरक्षाकर्मी इस हमले में गंभीर रूप से घायल नहीं हुआ लेकिन कट लगना और छोटी चोट तो सामान्य बात हैं।

DIG ने बताया है कि BSF पर उन्हीं लोगों ने हमला किया, जिन्होंने यहाँ पहले हिंसा की शुरुआत की थी। इस बीच पश्चिम बंगाल में हिंसा रोकने में विफल रही TMC अब BSF को ही दोषी ठहरा रही है। हालाँकि, इसी के साथ उसने मान लिया है कि हिंसा में घुसपैठियों का हाथ था।

TMC नेता कुणाल घोष ने दावा किया है कि BSF ने घुसपैठियों को इस इलाके में घुसाया ताकि वह हिंसा करें और इससे राज्य सरकार के लिए समस्याएँ खड़ी हों। उन्होंने दावा किया कि बाहर से आए लोगों ने ही इस हिंसा का नेतृत्व किया है और अब वह गायब हो गए हैं।

गौरतलब है कि शुक्रवार (11 अप्रैल, 2025) को मुर्शिदाबाद में इस्लामी भीड़ ने वक्फ क़ानून के विरोध के नाम पर हिंसा चालू की थी। इस्लामी भीड़ की हिंसा में 3 लोगों की मौत हो चुकी है। कोलकाता हाई कोर्ट ने इसके बाद केंद्रीय बलों की तैनाती का आदेश दिया था।

पति-बेटा दोनों को इस्लामी भीड़ ने मार डाला, थम नहीं रहे बुजुर्ग महिला के आँसू: गोदी में बच्चा लेकर सड़क पर महिलाएँ, BSF को ‘हत्यारा’ बता रहे ममता के मंत्री

पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले में नए वक्फ कानून के खिलाफ इस्लामी कट्टरपंथियों की हिंसा में हिंदू समुदाय बुरी तरह प्रभावित है। समसेरगंज के धुलियान इलाके में सांप्रदायिक हिंसा के बाद हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं। इस हिंसा में इस्लामी भीड़ ने हिंदुओं पर हमला किया, जिसमें एक पिता-पुत्र हरगोबिंद दास और चंदन दास को बेरहमी से मार डाला गया।

पश्चिम बंगाल हिंसा में अब तक तीन लोगों की जान जा चुकी है और 150 से ज्यादा लोग गिरफ्तार किए गए हैं। इस बीच, कलकत्ता हाई कोर्ट के आदेश के बाद हिंसा प्रभावित इलाकों में पहुँची बीएसएफ पर भी हमला हुआ है। तो वहीं, ममता सरकार के मंत्री सिद्दीकुल्लाह चौधरी ने दावा कर दिया है कि लोग बीएसएफ की गोली से मारे गए हैं। वहीं, लोग पलायन के लिए मजबूर हो गए हैं।

बुजुर्ग महिला अपने पति और बेटे की मौत के बाद टूट चुकी है। उसका कहना है कि भीड़ ने उसके परिवार को बेरहमी से मार डाला। बीजेपी का दावा है कि इस हिंसा की वजह से 400 से ज्यादा हिंदू परिवारों को अपना घर छोड़कर भागना पड़ा। धुलियान से सैकड़ों हिंदू नावों के जरिए गंगा पार करके मालदा जिले के पार लालपुर में शरण ले रहे हैं।

हिंसा का शिकार हुई हिंदू महिलाएँ सड़कों पर अपने बच्चों को गोद में लिए रो रही हैं। बीजेपी नेता अर्जुन सिंह ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो शेयर किया, जिसमें हिंदू परिवारों को भागते हुए देखा जा सकता है।

बीजेपी ने इसे हिंदुओं पर अत्याचार करार दिया और ममता बनर्जी की सरकार पर तीखा हमला बोला। बीजेपी के सुवेंदु अधिकारी ने कहा कि ममता की तुष्टिकरण नीतियों की वजह से हिंदू सुरक्षित नहीं हैं। उन्होंने इसे ‘लोकतंत्र पर हमला’ बताया और जाँच के लिए NIA की माँग की। बीजेपी सांसद ज्योतिर्मय सिंह महतो ने गृह मंत्री अमित शाह को चिट्ठी लिखकर मुर्शिदाबाद समेत चार जिलों में AFSPA लगाने की माँग की है। उन्होंने कहा कि ये कदम उठाए जाने के बाद ही हिंदू बच पाएँगे।

ममता बनर्जी की सरकार में मंत्री सिद्दीकुल्लाह चौधरी ने इस हिंसा में BSF को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि मौतें BSF की गोली से हुईं, न कि राज्य पुलिस की। चौधरी ने यह भी दावा किया कि हिंसा में बाहरी लोग और बीजेपी कार्यकर्ता शामिल हो सकते हैं, जो ममता सरकार को बदनाम करना चाहते हैं।

बता दें कि हिंसा में पश्चिम बंगाल पुलिस पूरी तरह से नाकाम साबित हुई। इसके चलते सुवेंदु अधिकारी ने कलकत्ता हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। कोर्ट ने हिंसा प्रभावित इलाकों में केंद्रीय बलों की तैनाती का आदेश दिया। केंद्र ने 5 कंपनियों के साथ 300 BSF जवानों को तैनात किया। पुलिस ने हिंसा के बाद धारा 163 लागू की और इंटरनेट सेवाएँ बंद कर दीं। डीजीपी राजीव कुमार ने अफवाह फैलाने वालों को चेतावनी दी। हिंसा में 18 पुलिसकर्मी भी घायल हुए।

इस बीच, बीजेपी ने हिंसा में मारे गए लोगों की यादव में शहीद दिवस मनाने और काले बैज पहनकर मृतकों को श्रद्धांजलि देने का ऐलान किया।

NIA मुख्यालय में ही पाँच वक़्त की नमाज़ पढ़ता है तहव्वुर राणा, क़ुरान की डिमांड भी की गई पूरी: अधिकारी बोले – मजहबी व्यक्ति है

मुबई 26/11 आतंकी हमलों के साजिशकर्ता तहव्वुर हुसैन राणा को गुरुवार (10 अप्रैल, 2025) को अमेरिका से प्रत्यर्पित कर भारत लाया गया। फिलहाल राणा राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) की हिरासत में हैं। इस दौरान तहव्वुर राणा मजहबी गतिविधियों में विशेष रुचि रख रहा है। कैद में होते हुए भी वे दिन में पाँच बार नमाज़ अदा करता है।

NIA के मुताबिक, तहव्वुर राणा एक मजहबी व्यक्ति हैं। उसने कैद में रहते हुए कुरान की एक प्रति और कागज-कलम की माँग की थी। अधिकारियों ने सुरक्षा के दायरों को ध्यान में रखते हुए उसकी माँग को पूरा किया। एक अधिकारी कहते हैं, “उसने कुरान माँगी थी जो दे दी गई है। उसे दिन में पाँच बार नमाज़ पढ़ते हुए देखा गया है।” इसके अलावा अभी तक राणा ने कोई और विशेष माँग नहीं की है।

तहव्वुर राणा को अभी दिल्ली के सीजीओ कॉम्पलेक्स स्थित मुख्यालय में हाई सिक्योरिटी सेल में रखा गया है। यहाँ 24 घंटे उसकी निगरानी की जा रही है। राणा को किसी तरह ही विशेष सुविधा नहीं दी जा रही है। कानून के तहत सामान्य आरोपितों की तरह ही ट्रीटमेंट दिया जा रहा है।

बता दें कि दिल्ली की एक अदालत ने ही तहव्वुर राणा के मामले सुनवाई के दौरान 18 दिनों की हिरासत के तहत NIA मुख्यालय भेजा था। अदालत ने आदेश दिया था कि राणा को हर दूसरे दिन दिल्ली विधिक सेवा प्राधिकरण (DLSA) द्वारा नियुक्त वकील से मिलने की अनुमति दी जाएगी।

DLSA ने अधिवक्ता पीयूष सचदेवा को अदालत में राणा की तरफ से बोलने के लिए नियुक्त किया है। इसके अलावा हर 48 घंटे में उनका मेडिकल जाँच भी होगी।

रिपोर्ट्स के अनुसार, NIA की टीम अब राणा से गहन पूछताछ कर रही है जाँच के मुख्य बिंदु डेविड कोलमैन हेडली से उसके संबंध और हमलों की साजिश में उसकी भूमिका को समझने पर केंद्रित हैं। एजेंसी वो सारे सूत्रों और संपर्कों की पड़ताल में जुटी हुई है जो हमलों की बड़ी साजिश का हिस्सा हो सकते हैं।

गौरतलब है कि अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में तहव्वुर राणा की प्रत्यर्पण रोकने की याचिका खारिज कर दी थी, जिसके बाद उसे भारत लाने का रास्ता साफ हो गया। भारत सरकार ने अमेरिकी अधिकारियों को राणा की सुरक्षा और जरूरी सुविधाओं का पूरा भरोसा दिलाया है।

‘राष्ट्रपति का पक्ष जाने बिना सुना दिया फैसला, मामले में उनका कोई रोल ही नहीं’: सुप्रीम कोर्ट के डेडलाइन वाले आदेश पर बोले अटॉर्नी जनरल

राज्यपाल के भेजे विधेयक पर फैसला करने के लिए समयसीमा तय करते समय राष्ट्रपति की राय नहीं ली गई और ना ही उनका पक्ष सुप्रीम कोर्ट द्वारा जाना गया। यह बात देश के अटॉर्नी जनरल (महान्यायवादी) आर वेंकटरमणी ने कही है। उन्होंने कहा है कि इस मामले में सुप्रीम कोर्ट को राष्ट्रपति का पक्ष जानना चाहिए था।

इंडियन एक्सप्रेस से देश के सबसे बड़े सरकारी वकील ने यह बातें सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद कही हैं। उन्होंने कहा, “राष्ट्रपति की बात नहीं सुनी गई। कोर्ट को संविधान के तहत उनकी शक्तियों पर कोई फैसला लेने से पहले राष्ट्रपति का पक्ष जानना था।”

अटॉर्नी जनरल वेंकटरमणी ने कहा है कि तमिलनाडु और राज्यपाल के बीच विधेयक रोकने वाले विवाद पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान राष्ट्रपति का कोई रोल नहीं था। हालाँकि, उन्होंने अभी इस फैसले पर पुनर्विचार को लेकर कुछ स्पष्ट नहीं किया है। उन्होंने कहा है कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर पुनर्विचार के लिए याचिका दायर करने पर अभी फैसला नहीं हुआ है।

क्या है मामला?

सुप्रीम कोर्ट ने 8 अप्रैल, 2025 को तमिलनाडु डीएमके सरकार द्वारा दायर एक याचिका पर सुनवाई की। डीएमके सरकार ने यह याचिका राज्य के राज्यपाल RN रवि के विधेयकों को रोकने के खिलाफ लगाया था। तमिलनाडु की सरकार ने कहा कि उसके द्वारा पास किए गए विधेयकों को राज्यपाल मंजूरी नहीं दे रहे हैं।

तमिलनाडु की सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में दलील दी कि राज्यपाल RN रवि ने विधानसभा द्वारा पारित किए गए 10 विधेयकों को लटका रखा है। तमिलनाडु ने बताया था कि विधानसभा में 2 बार पारित किए जाने के बावजूद राज्यपाल ने इन विधेयकों को राष्ट्रपति की मंजूरी के लिए रोक रखा है।

इस मामले राज्यपाल पर ‘जेबी वीटो’ का इस्तेमाल करने की बात तमिलनाडु ने कही थी। तमिलनाडु ने बताया था कि यदि ऐसा होता रहा तो कानून लटक जाएँगे और शासन चलाना मुश्किल हो जाएगा। तमिलनाडु ने इस मामले में सुप्रीम कोर्ट से माँग की थी कि वह इन विधेयकों को पारित करने सम्बन्धी कोई स्पष्ट नियम दे।

सुप्रीम कोर्ट में इस मामले अंतिम सुनवाई 8 अप्रैल, 2025 को जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस आर महादेवन की बेंच ने की। सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु सरकार की दलीलों को मानते हुए राज्यपाल द्वारा रोक रखे गए विधेयकों को मंजूरी दे दी। सुप्रीम कोर्ट ने इसी के साथ राज्यपालों को भेजे गए विधेयकों को लेकर समय सीमा भी तय कर दी।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा, “राज्यपाल द्वारा 10 विधेयकों के संबंध में की गई सभी कार्रवाइयों को रद्द किया जाता है। राज्यपाल के समक्ष पुनः प्रस्तुत किए जाने की तिथि से ही 10 विधेयकों को मंजूरी दे दी गई मानी जाएगी।” कोर्ट ने इसी के साथ कहा कि राज्यपाल को विधानमंडल द्वारा भेजे गए विधेयक पर तीन महीने के भीतर फैसला लेना होगा।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि राज्यपाल को भेजे जाने के एक महीने के भीतर उसे राष्ट्रपति के पास भेजना होगा। इसके अलावा अगर वह विधेयक वापस लौटाना चाहता है, तो यह काम तीन महीने के भीतर करना होगा और दोबारा भेजे गए विधेयक को एक माह के भीतर मंजूरी देनी होगी।

राष्ट्रपति पर क्या कह दिया?

तमिलनाडु मामले में फैसला सुनाते हुए जहाँ सुप्रीम कोर्ट ने राज्यपाल की शक्तियों पर कैंची चलाई ही, उसने राष्ट्रपति की शक्तियों पर भी टिप्पणियाँ की। सुप्रीम कोर्ट ने कहा राज्यपाल द्वारा किसी विधेयक को राष्ट्रपति को भेजे जाने के तीन महीने के भीतर उस पर एक्शन लेना होगा। कोर्ट ने कहा कि इसके बाद भी विधेयक रोके जाने पर कारण बताने होगे।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा, “राष्ट्रपति को राज्यपाल द्वारा विचार के लिए आरक्षित विधेयकों पर उस तारीख से तीन महीने की अवधि के भीतर निर्णय लेना आवश्यक है, जिस दिन उसे यह भेजे जाएँगे। इस समय से अधिक किसी भी देरी के मामले में उचित कारणों को दर्ज किया जाना होगा और इस मामले में सम्बन्धित राज्य को भी जानकारी देनी होगी।”

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि राष्ट्रपति के किसी विधेयक को मंजूरी ना देने की स्थिति में राज्य अदालत का रुख कर सकते हैं। कोर्ट ने यह भी कहा कि अगर राष्ट्रपति किसी कानूनी आधार पर विधेयक को रोकते हैं, तो इस संबंध में भी विधेयक की संवैधानिकता का फैसला वह स्वयं करेगा, ना कि राष्ट्रपति।

राष्ट्रपति के किसी विधेयक पर दिए गए फैसले को भी सुप्रीम कोर्ट सुन सकता है, यह भी निर्णय में कहा गया। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जैसे राज्यपाल के पास किसी विधेयक को लम्बे समय तक लटका कर रखने के लिए शक्ति नहीं है, यही बात राष्ट्रपति पर भी लागू होती है। कोर्ट ने कहा कि राज्यपाल और राष्ट्रपति, दोनों के पास ‘जेबी वीटो’ की शक्तियाँ नहीं है।

क्यों हो रहा बवाल?

सुप्रीम कोर्ट के राष्ट्रपति को लेकर आदेश देने और समयसीमा तय करने पर संवैधानिक प्रश्न खड़ा हो गया है। गौरतलब है कि संविधान के अनुच्छेद 361 में स्पष्ट तौर पर लिखा है कि राष्ट्रपति और राज्यपाल अपने कार्यकाल के दौरान लिए गए किसी फैसले के प्रति देश के किसी भी न्यायालय में उत्तरदायी नहीं होंगे।

राष्ट्रपति के साथ ही राज्यपालों को भी यही शक्ति संविधान ने दी है। उन्हें किसी भी मामले में पक्ष भी नहीं बनाया जाता। यदि उनसे जुड़े कोई मामले होते भी हैं तो कोर्ट उनके सचिव के नाम से यह मामले चलाते हैं। हालाँकि, तमिलनाडु के मुकदमे में स्पष्ट तौर पर कोर्ट ने राष्ट्रपति के लिए समयसीमा तय कर दी है।

supreme court did not take president view while deciding deadline for him says attorney general venkatramani

दानिश सैफी ने पोस्ट की हिन्दू लड़की की अश्लील वीडियो-तस्वीरें, धोखे से फोन लेकर बना दिया फेक FB-इंस्टा हैंडल: अलीगढ़ पुलिस ने दर्ज की FIR, निकाह का बना रहा था दबाव

अलीगढ़ में एक हिंदू लड़की को धोखे से फँसाने का मामला सामने आया है। लड़की ने बताया कि दानिश सैफी ने उससे दोस्ती की और धोखे से उसका मोबाइल फोन ले लिया। फिर उसने फोन में मौजूद तस्वीरों और वीडियो को अपने पास रख लिया। इसके बाद उसने लड़की पर शादी करने का दबाव बनाना शुरू कर दिया। यही नहीं, वो लड़की को शादी के लिए दबाव डाल रहा है और ऐसा न करने पर जान ले ले और जान दे देने की धमकी दे रहा है। इस मामले की एफआईआर की कॉपी ऑपइंडिया के पास मौजूद है।

एफआईआर के मुताबिक, अलीगढ़ के लॉर्ड कॉष्ण हॉस्पिटल के पास अरमान नाम के लड़के ने 22 फरवरी 2025 को लड़की का फोन ले लिया, जिससे दानिश सैफी ने फोन ले लिया। इसके बाद उसने लड़की के नंबर को अपने नाम से पोर्ट करा लिया। और रिश्तेदारों के पास फोन करने लगा।

चूँकि लड़की का फोन और उसका नंबर दानिश के पास था और उसका ऐक्सेस भी, ऐसे में उसके पास लड़की के सारे कॉन्टैक्ट पहुँच गए। दानिश सैफी ने इसके बाद लड़की को धमकाना शुरू कर दिया। यही नहीं, उसने लड़की की भांजी के नाम से फेसबुक पर आईडी बना ली और तस्वीरें पोस्ट करने लगा।

दानिश सैफी ने इसके बाद फोन और सिम देने के बहाने पीड़ित हिंदू लड़की को क्वॉसी चौराहे के पास बुलाया। उसने लड़की से बदतमीदी की और फोन भी नहीं लौटाया। दानिश सैफी की ब्लैकमेलिंग से तंग आकर युवती ने पुलिस से संपर्क किया और एफआईआर दर्ज कराई है। हालाँकि पुलिस ने मामले में क्या कार्रवाई की है, ये पता नहीं चल पाया है।

FIR में भी इस बात का जिक्र है कि दानिश ने लड़की का मोबाइल नंबर इस्तेमाल कर सकी तस्वीरें सोशल मीडिया पर डालीं। उसकी करतूतों की वजह से लड़की मानसिक तौर पर परेशान है। इस पूरे मामले में अब विश्व हिंदू परिषद से जुड़े लोग सोमवार (14 अप्रैल 2025) को पुलिस अधीक्षक से भी मुलाकात करेंगे। विहिप पदाधिकारी ने कहा कि स्थानीय पुलिस और शिकायतकर्ता पर समझौता करने का दबाव बनाया जा रहा है।

कोरोना पीड़िता को अस्पताल ले जाने की जिम्मेदारी मिली, लेकिन एंबुलेंस ड्राइवर नौफल ने गाड़ी रोक किया बलात्कार: केरल की अदालत ने सुनाई उम्रकैद की सज़ा

केरल में रेप का एक मामला फिर से चर्चा में है। केरल में कोरोना पीड़ित 20 वर्षीय महिला को एंबुलेंस चालक नौफल कोविड स्वास्थ्य केंद्र ले जा रहा था। रास्ते में गाड़ी रोक कर उसने पीड़ित के साथ दुष्कर्म किया। जब पीड़ित अस्पताल पहुँची और स्वास्थ कर्मियों को इसकी जानकारी दी तो नौफल को पकड़ा गया। अब केरल की अदालत ने नौफल को उम्रकैद की सजा सुनाई है।

घटना 6 सितंबर, 2020 की है। केरल के पतनमतिट्टा जिले में कोरोना संक्रमित लड़की को देर रात एक बजे 108 एंबुलेंस सर्विस से कोजेनचेरी स्थित कोविड स्वास्थ्य केंद्र ले जाया जा रहा था। रिपोर्ट्स के अनुसार, एंबुलेंस में दो मरीज थे। स्वास्थ्य अधिकारियों ने एक मरीज को कोजेनचेरी जिला अस्पताल और दूसरे को कोविड स्वास्थ्य केंद्र में ले जाने की हिदायत एंबुलेंस चालक नौफल को दी थी।

नौफल ने एक मरीज को जिला अस्पताल पहुँचाया और महिला मरीज को कोविड स्वास्थ्य केंद्र के तरफ ले गया, लेकिन केंद्र पहुँचने से पहले ही एर्नामुला हवाई अड्डे के पास एंबुलेंस रोककर गाड़ी के पिछले हिस्से में पहुँचा और दरवाजा अंदर से बंद कर लड़की के साथ बलात्कार किया। महिला ने जब विरोध किया तो उसके साथ मारपीट भी की। इस दौरान महिला को चोट भी लगी और वह बेहोश हो गई।

बेहोशी की हालत में वह पीड़ित को अस्पताल के सामने छोड़कर फरार हो गया। महिला ने अस्पताल के कर्मचारियों को इस बारे में बताया तो उन्होंने पुलिस को सूचना दी। पुलिस ने त्वरित कार्यवाही करते हुए नौफल को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस जाँच में यह भी सामने आया कि नौफल पर एक हत्या का मामला भी दर्ज है। इसके बाद अब केरल के पतनमतिट्टा के प्रिंसिपल सेशन कोर्ट ने आरोपित को सजा सुनाई है। नौफल अलप्पुझा का रहने वाला है। जस्टिस एन हरिकुमार ने दोषी को दो लाख 12 हजार के जुर्माने के साथ उम्रकैद की सजा सुनाई है।

हिन्दू लोग हैं, मारो-पीटो जो भी करो… बंगाल के ‘शरणार्थी’ हिन्दुओं की आपबीती, बताया – पानी में जहर मिलाया, हर शुक्रवार मचाते हैं आतंक

पश्चिम बंगाल के हिन्दुओं ने माँग की है कि मुर्शिदाबाद में राष्ट्रपति शासन लगा दिया जाए। मुस्लिमों की हिंसा के चलते भागे हिन्दुओं ने बताया है कि इस्लामी भीड़ पानी तक में जहर मिला रही है। मुर्शिदाबाद में इस्लामी भीड़ की हिंसा के चलते 3 हिन्दुओं की मौतों के बाद पश्चिम बंगाल के DGP राजीव कुमार ने दावा किया है कि स्थिति नियंत्रण में है।

ANI से बात करते हुए इस्लामी हिंसा के पीड़ित एक हिन्दू ने बताया, “सारे घर जलाए गए, सारी दुकानें जलाई गई हैं। सब लूट लिया है। इनका इरादा ही ऐसा है कि हिन्दू लोग हैं, मारो-पीटो जो मन हो करो। हमलोग यहाँ चाहते हैं कि स्थायी रूप से BSF रहे। तोड़फोड़ के बाद 4 घंटे तक पुलिस का कोई नामोनिशान नहीं होता।”

पीड़ित ने बताया कि पुलिस थाना हिंसा वाली जगह से कुछ ही दूर है लेकिन इस्लामी भीड़ की हिंसा के दौरान कोई उन्हें बचाने नहीं आया। एक पीड़ित हिन्दू ने बताया कि हर शुक्रवार (जुमे) को यहाँ बवाल होता है। उन्होंने माँग की कि राज्य में ममता बनर्जी की सरकार हटा कर राष्ट्रपति शासन लगाया जाए।

रोते हुए पीड़ित महिला ने बताया, “हमको सुरक्षा चाहिए और कुछ नहीं। हमलोग का दुकान तोड़ दिया, आदमी को मारकाट दिया, दुकान लूटपाट कर ले गए। चुरा के सब ले गए। हमारे यहाँ छोटे-छोटे बच्चे हैं। घर में महिलाएँ हैं, हम कहाँ जाएँगे। चाकू-छुरी लेकर ये लोग घर में घुसते हैं।”

मुर्शिदाबाद में मुस्लिमों की हिंसा के चलते बड़ी संख्या में हिन्दू इलाके छोड़ कर भी भागे हैं। आजतक की एक रिपोर्ट में बताया गया है कि मुर्शिदाबाद से बड़ी संख्या में हिन्दू परिवार इस्लामी कट्टरपंथियों के डर से मालदा जिले में भाग आए हैं। यहाँ इन लोगों ने स्कूलों और सार्वजनिक जगहों पर शरण ली है।

रिपोर्ट में बताया गया है कि मालदा पहुँचे यह हिन्दू शरणार्थी मुर्शिदाबाद के धुलियान इलाके से भागे हैं। धुलियान में ही मंदिरों पर भी हमला हुआ था। यहाँ हिन्दुओं ने बताया है कि धुलियान में पानी की टंकियों में जहर मिला दिया गया है और घर लूट लिए गए हैं। हिन्दुओं ने बताया है कि उनका राशन तक लूट कर इस्लामी भीड़ ले गई है।

मुर्शिदाबाद से भागने वालों में महिलाओं और बच्चों की भी बड़ी तादाद है। कई बुजुर्ग और गर्भवती महिलाएँ भी हिंसाग्रस्त इलाकों से भागी हैं। वहीं इस सब के बीच पश्चिम बंगाल के डीजीपी राजीव कुमार ने दावा किया है कि स्थिति नियंत्रण में है और अब कोई अशांति का माहौल नहीं है।

उनका यह बयान तब आया है जब कलकत्ता हाई कोर्ट ने मुर्शिदाबाद में बिगड़ते हालात देखकर शनिवार (12 अप्रैल, 2025) को केन्द्रीय बल तैनात करने का आदेश दिया था। केन्द्रीय बलों की तैनाती के बाद मुर्शिदाबाद में कुछ शान्ति आई है। हालाँकि, इस्लामी भीड़ ने BSF पर भी हमले किए हैं।

मुर्शिदाबाद में इस्लामी हिंसा में 3 लोगों की मौत हो चुकी है। 15 से अधिक पुल्सिकर्मी घायल हुए हैं। बड़ी संख्या में दुकानें लूटी, जलाई और तोड़ी गई हैं। पुलिस ने बताया है कि उसने हिंसा के बाद 150 लोगों को गिरफ्तार किया है और बाकियों की गिरफ्तारी के लिए प्रयास कर रही है मुर्शिदाबाद में इन्टरनेट भी बंद है।

इस बीच भाजपा ने आरोप लगाया है कि राज्य की ममता बनर्जी की सरकार हिंसा को रोकने के बजाय अब भी मुस्लिमों को बढ़ावा दे रही है। भाजपा ने पुलिस पर भी एक्शन ना लेने का आरोप जड़ा है।