मोदी सरकार को सवालों को घेरे में लेने के लिए विपक्षी नेता हमेशा इंतजार में रहते हैं इस क्रम में कई बार वो झूठी और पुरानी खबरें भी साझा करने से नहीं चूकते। इस बार ऐसा ही कुछ ऐसा ही हुआ। अखिलेश यादव ने अपने सोशल मीडिया पर एक स्क्रीनशॉट शेयर करके गुजरात के शिक्षा मॉडल पर सवाल खड़े किए और फिर अरविंद केजरीवाल भी उसी के आधार पर गुजरात की शिक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़ा करने लगे। हालाँकि, बाद में दोनो नेताओं की किरकिरी तब हुई जब सोशल मीडिया पर लोग इसे फेक न्यूज कहने लगे।
अखिलेश यादव ने अपने ट्वीट में लिखा था- गुजरात मॉडल ही फ़ेल हो गया… गुजरात में 157 स्कूलों में 10वीं की बोर्ड परीक्षा में एक भी छात्र पास नहीं हुआ। भाजपा हटाएॉँगे, भविष्य बचाएँगे!
गुजरात मॉडल ही फ़ेल हो गया… गुजरात में 157 स्कूलों में 10वीं की बोर्ड परीक्षा में एक भी छात्र पास नहीं हुआ।
इस ट्वीट को अरविंद केजरीवाल ने भी आगे बढ़ाया। उन्होंने ट्वीट किया कि भाजपा पूरे देश को अनपढ़ रखना चाहती है। उन्होंने ट्वीट में लिखा- ये गुजरात मॉडल है। ये बीजेपी मॉडल है जो ये पूरे देश में लागू करना चाहते हैं। ये डबल इंजन मॉडल है। पूरे देश को ये अनपढ़ रखना चाहते हैं। आप मुझे एक राज्य बता दीजिए जहाँ इनकी सरकार हो और इन्होंने वहाँ शिक्षा का कबाड़ा ना किया हो। इसी मॉडल के तहत अब ये दिल्ली की शिक्षा व्यवस्था को भी ध्वस्त करने में लगे हैं।
ये गुजरात मॉडल है। ये बीजेपी मॉडल है जो ये पूरे देश में लागू करना चाहते हैं। ये डबल इंजन मॉडल है।
पूरे देश को ये अनपढ़ रखना चाहते हैं। आप मुझे एक राज्य बता दीजिए जहाँ इनकी सरकार हो और इन्होंने वहाँ शिक्षा का कबाड़ा ना किया हो।
दोनों नेताओं के ट्वीट को पढ़कर लग रहा है कि जैसे ये नतीजे इस बार के हैं जबकि जब खबर को सर्च किया गया तो पता चला गुजरात बोर्ड ने तो 10वीं परीक्षा के इस वर्ष नतीजे ही अभी नहीं घोषित किए। इसे लेकर कई नेटिजन्स ने दोनों नेताओं को लताड़ा भी। वो लिंक खोजकर दिए जिसमें कहा गया है कि बोर्ड परीक्षा का रिजल्ट 11 मई तक आएगा।
अब रही बात इसकी कि अगर इस बात नतीजे नहीं आए तो दोनों नेताओं ने झूठ कैसे फैलाया, तो बता दें कि ये खबर 2 साल पुरानी यानी 2023 के नतीजों की है। दो साल बाद इस खबर को विवाद की तरह दिखाना साफ दिखाता है कि इनका उद्देश्य राजनीति के अतिरिक कुछ नहीं है।
अखिलेश यादव जी, गुजरात मॉडल को कोसने से पहले ज़रा उत्तर प्रदेश की अपनी विरासत भी याद कर लेते—जहां आपकी सरकार में नकल माफिया का राज था और परीक्षा से ज़्यादा धंधा चलता था।
गुजरात बोर्ड का ये परिणाम सिस्टम में पारदर्शिता और नकल मुक्त परीक्षा की पहचान है, न कि विफलता। यहाँ फर्जी…
लोग इस तरह के हथकंडे आजमाने पर अखिलेश यादव को उनका समय याद दिला रहे हैं जब नकल कराकर परीक्षा लिए जाने के मामले चर्चा में होते थे। लोग पूछ रहे हैं कि उन खबरों को क्यों नहीं शेयर करते जिसमें सीढ़ी लगाकर बच्चों को नकल कराई जाती थी।
जब पूरे देश में जलियाँवाला बाग़ नरसंहार के विरोध में ग़म का माहौल था, उस समय कुछ सिख नेता डायर की चापलूसी में लगे थे। अप्रैल 1919 के अंत में कर्नल रेजिनाल्ड एडवर्ड डायर और लेफ्टिनेंट जनरल सर हेरोल्ड रॉडन ब्रिग्स को न केवल स्वर्ण मंदिर में आमंत्रित किया गया था, बल्कि उन्हें सम्मानित भी किया गया था। गोलीबारी के दौरान स्वर्ण मंदिर को ‘बख़्श’ देने के लिए उन्हें धन्यवाद भी दिया गया। इतना ही नहीं, उन्हें मानद सिख भी बना दिया गया। डायर की पत्नी फ़्रांसिस ऐनी ट्रेवर ओम्मेनी के अनुसार, उनके पति ने उन्हें इस समारोह के बारे में बताया था।
उनके अनुसार, अमृतसर स्थित सिखों की सर्वोच्च संस्था ‘अकाल तख़्त’ के लोग आए और उन्होंने डायर से कहा कि उसे जॉन निकोल्सन की तरह सिख बनना चाहिए। बता दें कि ब्रिगेडियर जनरल जॉन निकोल्सन को सिख एक ‘संत’ की तरह देखते थे। उसे सनकी और हिंसक बताया जाता रहा है, लेकिन पंजाब में उसके बारे में तरह-तरह की कहानियाँ प्रचारित थीं और लोग उसे पूजने लगे थे। जब डायर के सामने सिख बनने का प्रस्ताव रखा गया तो उसने कहा कि वो अपने बाल लंबे नहीं रख सकता, क्योंकि वो एक ब्रिटिश अधिकारी है।
जब ‘अकाल तख़्त’ ने ‘साहिब’ को स्वर्ण मंदिर में किया सम्मानित
उस समय ज्ञानी अरूर सिंह ‘अकाल तख़्त’ का जत्थेदार हुआ करता था, वो कर्नल डायर को ‘साहिब’ कहकर बुलाया करता था। उसने कहा कि आपको लंबे बाल रखने की ज़रूरत नहीं है। इसके बाद डायर ने ये भी शर्त रखी कि वो धूम्रपान नहीं छोड़ेगा। जत्थेदार ने चापलूसी में और आगे बढ़ते हुए उन्हें सलाह दी कि वो धीरे-धीरे करके इसे छोड़ दे। हालाँकि, डायर ने एक तरह से खिल्ली उड़ाते हुए हर साल एक सिगरेट कम करने का वादा किया। इसके बाद स्वर्ण मंदिर में डायर और ब्रिग्स को बुलाकर पगड़ी, कृपण और सिरोपा दिया गया।
‘सिरोपा’ का अर्थ है सिर से पाँव तक का सम्मान। ‘मंदिर की सुरक्षा’ के लिए उसे धन्यवाद ज्ञापित किया गया। कई दिनों बाद जब डायर अफगान युद्ध के लिए अमृतसर छोड़कर जाने लगा तो शहर के कुछ प्रमुख सिख नेताओं ने उसकी सहायता के लिए 10,000 सिखों को भेजने की पेशकश की। डायर ने इस पेशकश को आगे भेजा, लेकिन ब्रिटिश सरकार ने इसे अस्वीकार कर दिया था। यहाँ तक कि ‘गुरु सत सुल्तानी’ नाम से उसके सम्मान में एक गुरुद्वारा भी स्थापित किया गया। आज इन तथ्यों पर कोई बात नहीं करना चाहता। बड़ी बात ये कि ‘अकाल तख़्त’ के जत्थेदारों की नियुक्ति भी तब अंग्रेज ही करते थे।
स्वर्ण मंदिर में पगड़ी पहनाकर डायर को किया गया सम्मानित
अब थोड़ा पीछे चलते हैं। जलियाँवाला बाग़ नरसंहार के अगले दिन मृतकों के परिजनों को अंतिम संस्कार के लिए भी अंग्रेजों की अनुमति लेनी पड़ी। अंग्रेज अधिकारियों ने प्रति मृतक मात्र 8 परिजनों के जुटने की अनुमति दी। जनरल डायर ने एक आदेश जारी करके सबको जल्द से जल्द अंतिम क्रिया-कर्म निपटाने और घर जाने के लिए कहा। डायर को अन्य अंग्रेज अधिकारियों ने आगाह किया कि स्वर्ण मंदिर के पास भारतीयों की एक और बैठक होनी है। तब खालसा कॉलेज के प्रिंसिपल रहे जेरार्ड एन्स्ट्रुथर वाथेन ने अपनी पत्नी को बताया था कि गोल्डन टेम्पल पर बमबारी न हो इसके लिए उसे डायर से बहस करनी पड़ी थी।
इसके बाद डायर ने ‘अकाल तख़्त’ के जत्थेदार को बुलावा भेजा। उसके साथ अमृतसर का एक अन्य अंग्रेजों का वफादार सिख नेता सरदार सुंदर सिंह मजीठिया भी पहुँचा। डायर ने उन्हें आदेश दिया कि वो शहर में ये फैलाएँ कि गोल्डन टेम्पल को नुकसान नहीं पहुँचाया गया है। इसके बाद शहर के 150 प्रमुख लोगों को पब्लिक लाइब्रेरी में एक बैठक के लिए बुलाया गया, जहाँ डायर ने पूरे भाषण के दौरान उन्हें खड़े रखा और धमकाया कि अगर अगर वो युद्ध चाहते हैं तो सरकार इसके लिए भी तैयार है।
डायर ने धमकाया कि उसके लिए फ्रांस और अमृतसर का युद्ध मैदान समान ही है। उसने ये भी कहा कि वो अपनी दुकानें खोलकर चुपचाप अपना काम शुरू करें। बाद में डायर ने ख़ुद को ‘पंजाब का रक्षक’ के रूप में पेश किया। असल में डायर सिख सैनिकों को वफादार बनाकर रखना चाहता था और इसीलिए अंग्रेजों के खिलाफ सिखों में फैली खबरों को काटना चाहता था। उसे सूचना मिली थी कि अंग्रेज सैनिकों द्वारा सिख लड़कियों के बलात्कार की ख़बरें भी फैली हुई हैं। उसने इसीलिए कूटनीति का सहारा लिया और स्वर्ण मंदिर में किसी भी प्रकार की बैठक न होने का आश्वासन जत्थेदार व सिख नेताओं से ले लिया।
अमृतसर की गली, डायर का भारतीयों को सड़क पर रेंगने का आदेश
उसी दौरान डायर को सूचना मिली थी कि मार्सेला शेरवुड नामक एक अंग्रेज महिला जब साइकिल से जा रही थी तब कुचा कुरिचन नामक गली में उसके साथ मारपीट हुई। डायर ने उस जगह पर एक त्रिभुज बनाकर 150 यार्ड की गली के दोनों तरफ खड़े के दिए। उसने आदेश दिया कि जो भी व्यक्ति इस गली से गुजरेगा उसे रेंग कर जाना होगा। जलियाँवाला बाग़ नरसंहार के एक सप्ताह बाद 19 अप्रैल, 1919 को ये आदेश जारी किया गया। ये बताता है कि डायर को अपने किए का बिलकुल भी पछतावा नहीं था। कुछ लोगों को शेरवुड को पीटने के शक में पकड़ा गया और उसी जगह पर ले जाकर कोड़े बरसाए गए।
सुबह 6 बजे से लेकर शाम 8 बजे तक वहाँ गोरे तैनात रहते थे। एक पीड़ित ने बताया था कि अपने पेट को जमीन में सटाकर रेंगना पड़ता था, और नितम्ब जरा सा भी ऊपर उठने पर कोड़े बरसाए जाते थे। एक 16 साल के लड़के को शेरवुड को पीटने के आरोप में गिरफ़्तार करके उसपर भी कोड़े बरसाए गए थे। डायर का कहना था कि जूते से पीटा जाना भारत में सबसे बड़ा अपमान है, इसीलिए एक ब्रिटिश महिला के बारे में ऐसा सुनकर उसे बहुत दुःख हुआ था। इसीलिए, उसने ये आदेश जारी किया।
अरूर सिंह के पोते आज भी करते हैं बचाव
आज भी ज्ञानी अरूर सिंह के वंशज उसके द्वारा एक क्रूर अंग्रेज अधिकारी को सम्मानित किए जाने के फ़ैसले को जायज ठहराते हैं। तरनतारन व संगरूर से सांसद रहे सिमरनजीत सिंह मान उसके पोते हैं। सिमरनजीत सिंह मान ने 2007 में बलिदानी भगत सिंह को ‘छोटा आतंकवादी’ कहा था। जबकि ये व्यक्ति पंजाब में DIG के पद पर रहा है। पिछले 31 वर्षों से वो अमृतसर में ‘शिरोमणि अकाली दल’ (SAD) के अध्यक्ष हैं। अमृतसर सिखों के लिए सबसे पवित्र व प्रभावशाली स्थल है।
उनका तर्क है कि उनके दादा ने जनरल डायर को इसीलिए सम्मानित किया, क्योंकि वो स्वर्ण मंदिर पर हवाई बमबारी का निर्णय ले चुके अंग्रेजों को शांत करना चाहते थे और अमृतसर को बचाना चाहते थे। उनका कहना था कि खालसा कॉलेज के तत्कालीन प्राधायाध्यापक GA वाथेन के कहने पर उन्होंने ऐसा किया था। सोचिए, जो व्यक्ति भगत सिंह को ‘हत्यारा’ और ‘आतंकवादी’ बताता हो उसकी मानसिकता और कैसी होगी। ऐसे ही लोग खालिस्तानी अलगाववादी तत्वों को बढ़ावा देते हैं।
जलियाँवाला बाग़ नरसंहार: जहाँ की मिट्टी है चंदन, अंग्रेजी क्रूरता की निशानी
जलियाँवाला बाग़ नरसंहार – 13 अप्रैल, 1919 को यहाँ भारतीय नागरिकों ने ख़ून का एक ऐसा खेल देखा था जिसने पूरे देश के दिल में में अंग्रेजी आक्रांताओं के विरुद्ध चिंगारी को प्रज्वलित कर दिया था। सरकार ने मृतकों का सरकारी आँकड़ा 379 दिया, लेकिन सच ये है कि इस नरसंहार में 1500 से भी अधिक लोग मारे गए थे और लगभग इतने ही घायल हुए थे। ये निर्दोष आम लोग थे, कोई सैनिक नहीं थे। इनमें बच्चे, महिलाएँ, बुजुर्ग सब शामिल थे। कई ने जान बचाने के लिए कुएँ में छलाँग लगा दी थी। आज जलियाँवाला बाग़ एक स्मारक है।
जलियाँवाला बाग़ की मिट्टी हर देशभक्त के लिए चंदन है। यही वो जगह है जहाँ नरसंहार के बाद 11 साल के एक बच्चे ने रक्तरंजित मिट्टी को अपने माथे से लगाकर भारत के दुश्मनों से बदला लेने की क़सम खाई थी। ये हमेशा उसकी स्मृति में रहे, इसके लिए उसने इस मिट्टी को अपने घर में भी रखा हुआ था। आगे चलकर यही बच्चा भगत सिंह कहलाया, जो भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में बलिदान का पर्यायवाची बन गए। जलियाँवाला बाग़ की यही वो मिट्टी थी जिसने उधम सिंह को क्रांतिकारी बनने के लिए प्रेरित किया। आज तक ब्रिटेन ने इस नरसंहार के लिए माफ़ी नहीं माँगी है।
1997 में और फिर सितंबर 2022 में क्वीन एलिजाबेथ भारत आई थीं तब लोगों को लगा था कि वो जलियाँवाला बाग़ नरसंहार के लिए माफ़ी माँगेंगी, लेकिन दोनों बार वो जलियाँवाला बाग़ तो गईं, स्वर्ण मंदिर का भी दौरा किया, लेकिन मृतकों को श्रद्धांजलि देकर इतिश्री कर ली। 1997 में राजघाट पर स्वतंत्रता सेनानियों के परिवारों ने धरना भी दिया था, लेकिन क्वीन ने माफ़ी नहीं माँगी। अमृतसर के गोल्डन टेम्पल रोड में स्थित जलियाँवाला बाग़ हर बैशाखी के दिन भारतीयों को उस क्रूरता की याद दिलाता है, स्वतंत्रता की क़ीमत बताता है।
आइए, सबसे पहले जानते हैं कि हुआ क्या था। जिस शख्स ने गोलीबारी का आदेश दिया था, उसका नाम था – कर्नल रेजिनाल्ड एडवर्ड डायर (तब ब्रिगेडियर जनरल)। गोलियों के निशान आज भी वहाँ देखे जा सकते हैं। ये वो समय था जब रॉलेट एक्ट के विरुद्ध देशभर में प्रदर्शन चल रहा था। ये क़ानून बनाकर ब्रिटिश सरकार ने ऐसा प्रावधान कर दिया था, जहाँ वो बिना सुनवाई किसी भी भारतीय को सज़ा सुनाकर जेल में डाल सकती थी। इसीलिए, भारतीयों द्वारा इसे काला क़ानून नाम दिया गया था। कई नेता गिरफ़्तार कर लिया गया था।
जलियाँवाला बाग़ नरसंहार के बाद गाँधी का ‘असहयोग आंदोलन’
सोचिए, भगदड़ की स्थिति में लोग कितने ख़ौफ़ में रहे होंगे। 10 मिनट तक गोलीबारी चलती रही थी, ये तभी ख़त्म हुई जब सैनिकों की गोलियाँ ख़त्म हो गईं। ये प्रथम विश्व युद्ध के बाद का समय जब तक अंग्रेज एक के बाद एक काले क़ानून लेकर आ रहे थे। विरोध प्रदर्शन तक पर प्रतिबंध लगा दिया गया था। जलियाँवाला बाग़ में उस दिन अधिकतर लोग बैशाखी बनाने के लिए जुटे थे, उनमें एकाध ऐसा समूह भी था जो अंग्रेजों के विरुद्ध शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन कर रहा था। बाग़ का रास्ता काफी संकरा था, जिसे अंग्रेजी सैनिकों ने ढँक दिया था ताकि लोग भाग भी न पाएँ। अचानक से बिना किसी चेतावनी के कर्नल रेजिनाल्ड एडवर्ड डायर 50 सैनिकों के साथ आ पहुँचा।
बताया जाता है कि 10 मिनट के भीतर 1650 गलियाँ चली थीं। बाद में ख़ुद डायर ने कहा था कि उसका उद्देश्य भीड़ को तितर-बितर करना नहीं था बल्कि वो पूरे पंजाब का मनोबल गिराना चाहता था ताकि कोई विद्रोह के लिए आवाज़ न उठा सके। इस नरसंहार के बाद महात्मा गाँधी ने असहयोग आंदोलन शुरू किया। डायर ने भारतीयों को जमीन पर रेंग कर चलने का आदेश दे रखा था। किसी ब्रिटिश अधिकारी को देखते ही गाड़ी से निकल कर सलाम ठोकना होता था। नग्न करके कोड़े बरसाए जाते थे। बच्चों को ब्रिटिश झंडा यूनियन जैक को सलाम करवाने के लिए मीलों चलवाया जाता था।
डायर ने पंजाब में मार्शल लॉ लगा रखा था। भारतीय परिवारों की बिजली काट दी जाती थी। अक्टूबर 1919 में महात्मा गाँधी लाहौर पहुँचे और उन्होंने इस घटना की जाँच की। अंग्रेज सरकार के विरोध में उन्होंने कैसर-ए-हिन्द की उपाधि लौटा दी। अंग्रेजों ने 1915 में उन्हें इस उपाधि से नवाज़ा था। उन्होंने ब्रिटिश संचालित सभी संस्थाओं, खासकर स्कूल-कॉलेजों और नौकरियों का। उसी दौरान प्रिंस ऑफ वेल्स के भारत दौरे का ऐलान हुआ, गाँधी ने उसके बहिष्कार का भी ऐलान किया।
कर्नाटक में अन्य पिछड़ा वर्ग का आरक्षण बढ़ाया जा सकता है। इसकी सिफारिश कर्नाटक में की गई जाति जनगणना नई रिपोर्ट में की गई है। OBC आरक्षण में बढ़ोतरी का सीधा फायदा मुस्लिमों को होने वाला है, वह राज्य में सबसे बड़ा OBC समूह हैं। जाति जनगणना की यह रिपोर्ट हाल ही में कर्नाटक कैबिनेट के सामने पेश की गई है।
कर्नाटक की कॉन्ग्रेस सरकार इस जातिगत जनगणना के नए सर्वे पर 17 अप्रैल को बैठक करने वाली है। मीडिया रिपोर्ट्स में बताया गया है कि इस सर्वे OBC आरक्षण 32% से बढ़ाकर 51% करने की सिफारिश की गई है। इसी रिपोर्ट में मुस्लिम आरक्षण को भी 4% से बढ़ाकर 8% करने की सिफारिश की गई है।
85% हो जाएगा आरक्षण
17 अप्रैल को होने वाली कैबिनेट बैठक में इस आरक्षण को लेकर फैसला लिया जा सकता है। इसी बैठक में यह रिपोर्ट सार्वजनिक करने सम्बन्धित फैसला भी हो सकता है। कर्नाटक की जाति जनगणना रिपोर्ट में की गई सिफारिश अगर मानी जाती हैं, तो राज्य में कुल आरक्षण 85% हो जाएगा।
इस 85% में 51% OBC आरक्षण होगा जबकि 24% आरक्षण अनुसूचित जातियों और जनजातियों के लिए रहेगा। इसके अलावा 10% आरक्षण आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग यानी EWS को पहले की तरह मिलता रहेगा। इस रिपोर्ट को लेकर राज्य में बहस चालू हो गई है।
यह जातिगत जनगणना कर्नाटक पिछड़ा वर्ग आयोग ने करवाई थी। यह 2015 में एच. कांथराज के नेतृत्व में शुरू हुई थी। इसके बाद 2020 में के. जयप्रकाश हेगड़े के नेतृत्व में कर्नाटक राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग ने इसे पूरा किया। रिपोर्ट में कहा गया है कि पिछड़ी जातियों को उनकी जनसंख्या के अनुपात में आरक्षण मिलना चाहिए।
ध्यान देने योग्य बात यह है कि पिछड़ा वर्ग आयोग ने OBC और मुस्लिम आरक्षण को बढ़ाने की सिफारिश तो की है लेकिन SC-ST तथा EWS आरक्षण को पहले की तरह ही रखने की बात कही है। अभी इस पर अंतिम फैसला बाक़ी है।
OBC में सबसे बड़ा समूह मुस्लिमों का
कर्नाटक में मुस्लिम OBC में सबसे बड़ा समूह हैं। राज्य में उनकी आबादी 75.25 लाख है। मुस्लिम OBC कर्नाटक के ओबीसी वर्गीकरण की श्रेणी 2B के अंतर्गत आते हैं। इसी के आधार पर रिपोर्ट में उनका आरक्षण 4% से दोगुना करके 8% करने की सिफारिश की गई है।
राज्य की कुल आबादी में मुसलमानों की हिस्सेदारी 18.08% है, जो 2011 की जनगणना में 12.92% बताई गई थी। सर्वे का यह आँकड़ा 2015 का है। ऐसे में 4 साल में मुस्लिम आबादी कर्नाटक में 5.16% बढ़ गई।
रिपोर्ट में इस आरक्षण बढ़ाने के पीछे राज्य में OBC की हिस्सेदारी सबसे अधिक होना कारण बताया है। रिपोर्ट में बताया गया है कि राज्य में कुल आबादी में ओबीसी की हिस्सेदारी 69.60% है, ऐसे में उन्हें जनसंख्या के आधार पर आरक्षण मिलना चाहिए
क्या 50% की सीमा पार करेगी कॉन्ग्रेस?
इस रिपोर्ट में आरक्षण को 50% से ऊपर ले जाने के क्रम में बाधा को भी पार करने की बात की गई है। गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट के इन्द्रा साहनी मामले में दिए गए फैसले के अनुसार, कोई भी राज्य 50% से अधिक आरक्षण नहीं दे सकता है। EWS आरक्षण इससे अलग है।
यदि कर्नाटक के पिछड़ा आयोग की रिपोर्ट की सिफारिश मानी गई तो यह आरक्षण 50% से कहीं अधिक 85% हो जाएगा। रिपोर्ट में इसके लिए झारखंड और तमिलनाडु का उदाहरण दिया गया है, जहाँ पहले ही 77% और 69% आरक्षण दिया जा चुका है। रिपोर्ट में सुप्रीम कोर्ट के इन्द्रा साहनी फैसले को आज के समय में प्रांसगिक ना होना बताया गया है।
राहुल गाँधी कर चुके दीवाल तोड़ने की सिफारिश
कर्नाटक में आरक्षण पर से सीमा हटाने की बात ऐसे समय हो रही है जब राहुल गाँधी हाल ही में इसकी वकालत कर चुके हैं। राहुल गाँधी ने हाल ही में कहा था कि उनकी पार्टी भारत के सर्वोच्च न्यायालय द्वारा निर्धारित 50% आरक्षण की ‘दीवार’ को तोड़ने के पक्ष में है। कर्नाटक में OBC आरक्षण बढ़ाने की सिफारिश और मुस्लिमों को अपने पाले में करने की कोशिश कॉन्ग्रेस की चुनावी तैयारी के तौर पर देखी जा रही है।
क्या आरक्षण से सधेगी ‘अहिन्दा वोट’ की नैया?
कर्नाटक में OBC आरक्षण पर हो रही यह पूरी कवायद ‘अहिन्दा वोट’ साधने की तरकीब मानी जा रही है। राज्य में OBC, मुस्लिम और SC-ST वोट को मिला कर ‘अहिन्दा वोटबैंक’ का नाम दिया जाता है। अहिन्दा शब्द कॉन्ग्रेस के बड़े नेता देवराज उर्स ने दिया था। वर्तमान मुख्यमंत्री सिद्दारमैया इस फ़ॉर्मूला पर काम करते आए हैं।
कॉन्ग्रेस चाहती है कि वह OBC, मुस्लिम और दलित वोटरों में इन सब कदम से वह और मजबूत हो जाए, जिससे आगामी चुनावों में उसे आसानी हो। जातिगत जनगणना में आरक्षण की सिफारिश के अलावा हाल ही में मुस्लिमों को राज्य में ठेकों में आरक्षण दिया गया था। यह भी इसी दिशा में एक कदम माना गया था।
राज्य यह अहिन्दा वोट लिंगायत और वोक्कालिगा समुदाय से इतर है। लिंगायत परंपरागत रूप से भाजपा जबकि वोक्कालिगा JD(S) के वोटर रहे हैं। वर्तमान में यह दोनों पार्टियां साथ में हैं, ऐसे में कॉन्ग्रेस की चिंताएँ और भी बढ़ गई हैं। ऐसे में वह इन दोनों समुदाय से इतर अपना अहिन्दा वोटबैंक बचाए रखना चाहती है।
वाराणसी में छात्रा से गैंगरेप के मामले ने अब एक बड़े सेक्स रैकेट का रूप ले लिया है। पुलिस ने इस केस में अब तक 12 आरोपितों को गिरफ्तार किया है, जिनके 14 मोबाइल फोन से 546 लड़कियों के न्यूड और आपत्तिजनक वीडियो बरामद हुए हैं। ये वीडियो व्हाट्सएप के जरिए उत्तर प्रदेश समेत महाराष्ट्र, दिल्ली, बिहार, पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में शेयर किए गए थे। वहीं, पीड़िता की हालत खराब बताई जा रही है। लगातार नशे की वजह से वो पीलिया की शिकार हो गई है।
रिपोर्ट के मुताबिक, इस रैकेट के सरगना अनमोल गुप्ता (कांटिनेंटल कैफे का मालिक) के कब्जे से दो आईफोन बरामद हुए हैं, जिनमें कैफे के अंदर तैयार किए गए अश्लील वीडियो, आपत्तिजनक तस्वीरें और ग्राहकों का पूरा डेटा मौजूद है। ऐसा माना जा रहा है कि अनमोल इन वीडियो का इस्तेमाल नए ग्राहकों को जोड़ने और पुराने ग्राहकों को बनाए रखने के लिए करता था।
पुलिस ने बताया कि अब तक गिरफ्तार 12 में से अधिकांश आरोपित ड्रग एडिक्ट हैं। पूछताछ में पता चला कि इन युवकों को नशे की लत अनमोल की संगत में लगी। छात्रा ने जिन लड़कों की पहचान की, पुलिस उन्हें हिरासत में लेकर पूछताछ कर रही है। मोबाइल से मिले कंटेंट की फोरेंसिक जाँच आगरा की विधि विज्ञान प्रयोगशाला में की जा रही है।
छात्रा की हालत अभी भी मानसिक रूप से अस्थिर है। उसे बार-बार ड्रग्स दिया गया था, जिससे उसका मानसिक संतुलन बिगड़ गया है। डॉक्टर की देखरेख में उसका इलाज चल रहा है और पुलिस सुरक्षा में उसे घर भेजा गया है। इस बीच, उसे हेपेटाइटिस-बी की शिकायत हो चुकी है, जिसकी वजह से उसकी हालत बेहद खराब हो गई है।
इस मामले में तीन और आरोपित रेहान, जाहिर और मोहम्मद रजा भी पकड़े गए हैं, जो सीधे अनमोल के कैफे से जुड़े थे। पूछताछ में उन्होंने कबूल किया कि नशे में धुत होकर उन्होंने भी छात्रा के साथ ज्यादती की। जाँच में यह भी सामने आया है कि अनमोल का पिता शरद गुप्ता भी पुराना सेक्स रैकेट संचालक है और दोनों पहले भी गिरफ्तार हो चुके हैं।
तीन थानों की पुलिस ने बीते 72 घंटों में 41 से अधिक ठिकानों पर आरोपितों की गिरफ्तारी के लिए छापेमारी की है। चेतगंज एसीपी गौरव कुमार के नेतृत्व में स्पा सेंटर, कैफे होटल, ड्रिंक हाउस, और हुक्का बार पर छापे मार रही हैं। पुलिस अब तक 100 से ज्यादा सीसीटीवी फुटेज खंगाल चुकी है और जाँच लगातार जारी है।
पश्चिम बंगाल में वक्फ कानून के विरोध के नाम पर इस्लामी भीड़ की हिंसा लगातार जारी है। इस्लामी भीड़ सुरक्षाबलों को भी निशाना बना रही है। पुलिस के बाद उसने अब कलकत्ता हाई कोर्ट के आदेश पर मुर्शिदाबाद पहुँची सीमा सुरक्षा बल (BSF) को निशाना बनाया है। BSF जवानों पर फायरिंग की गई है। हिंसा के बीच हिन्दू मुर्शिदाबाद से पलायन को मजबूर हैं।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, शनिवार (12 अप्रैल, 2025) को BSF की टीम पर इस्लामी भीड़ ने हमला किया गया। यह हमला मुर्शिदाबाद के शमशेरगंज इलाके में हुआ। यहाँ तैनात जवानों को निशाना बनाया गया। वक्फ के नाम पर प्रदर्शन कर रहे इस्लामी कट्टरपंथियों ने BSF जवानों पर पत्थर बरसाए और उनकी गाड़ियाँ तोड़ दीं।
BSF को निशाना बनाए जाने की घटनाएँ रविवार (13 अप्रैल, 2024) को भी जारी हैं। रविवार को धुलियान इलाके में BSF के ऊपर कट्टरपंथियों ने फायरिंग की। इस फायरिंग में 2 बालक घायल हो गए। BSF के किसी सुरक्षाकर्मी के घायल होने की अभी सूचना नहीं है।
मुर्शिदाबाद में इस्लामी भीड़ की हिंसा रोकने में पश्चिम बंगाल पुलिस के नाकाम होने के बाद कलकत्ता हाई कोर्ट ने शनिवार को केन्द्रीय सुरक्षाबलों की तैनाती के आदेश दिए थे। इसके बाद मुर्शिदाबाद में BSF तैनात की गई थी। हिंसा में पहले पुलिसकर्मी भी घायल हुए थे। BSF के पहुँचने के बाद इस्लामी भीड़ ने उन्हें भी निशाने पर लिया।
BSF पहले के अलावा धुलियान में 2 हिन्दू मंदिरों पर भी इस्लामी भीड़ के हमले की बात सामने आई है। भाजपा ने आरोप लगाया है कि राज्य की TMC सरकार इस्लामी भीड़ पर कार्रवाई नहीं कर रही है और उन्हें लगातार प्रदेश भर में हिंसा फैलाने की खुली छूट दी जा रही है।
भाजपा ने बताया है कि इसी के चलते दक्षिण 24 परगना के बरुईपुर में तुलसी की माला पहने एक हिंदू व्यक्ति को मुस्लिम भीड़ ने बुरी तरह पीटा और अधमरा कर दिया है। उसकी एक वीडियो भी भाजपा ने साझा की है। इसमें वह अस्पताल में भर्ती है और अपनी पीड़ा बता रहा है।
Despite recent incidents of large-scale violence in West Bengal, which have resulted in loss of life and property, the state police under Mamata Banerjee’s leadership is allowing continued mass gatherings across the state under the banner of anti-Waqf protests. In a disturbing… pic.twitter.com/4nEEb72PnB
भाजपा नेता सुवेंदु अधिकारी ने बताया है कि मुर्शिदाबाद के शमशेरपुर में इस्लामी भीड़ के हमलों से बचने के लिए सैकड़ों लोग भाग कर दूसरी जगह जा रहे हैं। अपना घर-बार छोड़ने वालों में अधिकांश महिलाएँ हैं। बड़ी संख्या में बच्चे और पुरुष भी इलाका छोड़ रहे हैं।
इससे पहले मुर्शिदाबाद में इस्लामी भीड़ ने एक हिन्दू पिता-पुत्र की हत्या कर दी थी। वह लोग मूर्तिकार थे। इस्लामी भीड़ के हमले में 15 से अधिक पुलिसकर्मी भी घायल हैं। वहीं इस दौरान भी राज्य में लगातार वक्फ के खिलाफ प्रदर्शन की अनुमति ममता सरकार दिए जा रही है।
देश में पहले जब भी कोई जघन्य अपराध होता था तो कुछ समय के लिए वह मामला खबरों की सुर्खियाँ बनता था। लोग प्रदर्शन करते थे। न्याय माँगते थे। आगे उस घटना से सबक लेते थे या फिर उसे भूल जाते थे। लेकिन, अब सोशल मीडिया के जमाने में चीजें ऐसी नहीं है। यहाँ कोई भी मामला ज्यादा उछलता है तो पहले उससे वायरल होने वाला कंटेंट तैयार होता है बाकी चरण बाद के हैं। इस कंटेंट बनाने की होड़ में क्रिएटर्स भूल जाते हैं कि जो वो परोस रहे हैं उसका समाज पर क्या असर पड़ेगा।
बात को समझने का सबसे ताजा उदाहरण मेरठ हत्याकांड का है। एक महिला मुस्कान ने प्रेमी साहिल संग मिलकर अपने पति सौरभ की निर्मम हत्या की और उसके बाद शव को नीले ड्रम में छिपा दिया। मामले का खुलासा हुआ तो लोग पत्नी की हैवानियत सुन सिहर गए। मगर, कुछ ही दिन बाद देखा गया कि इस संवेदनशील घटना पर मीम और रील बनने लगी। बीमार मानसिकता का लोग इसका मजाक बनाने लगे। हद्द तो तब हुई जब इस घटना पर गाना तक तैयार हो गया।
यह संवेदना की मौत नहीं तो और क्या है ? सोशल मीडिया की ताकत तो किसी से छिपी नहीं है। लेकिन जब किसी गंभीर अपराध को भी लोग सिर्फ मज़े लेने के नजरिए से देखने लगें तो सवाल उठते हैं।
सोशल मीडिया पर निर्भर हमारी ‘सोच’
अब हमारी सोच सोशल मीडिया पर निर्भर हो गई है। हत्या होने के बाद संवेदनाएँ जताने के बजाए मीम्स बना रहे हैं। पहले अपराध होने पर ‘जागो’ कहा जाता था। अब ‘हँस लो और भूल जाओ’ वाला ट्रेंड है।
इस अपराधिक मामले में खास बात यह थी कि महिला ने पति को मार डाला। लेकिन इससे भी चौंकाने वाली बात सामने आई थी कि हत्या के बाद जिस ड्रम में शव को सीमेंट डालकर रखा गया। वही ड्रम अब सोशल मीडिया पर मीम्स और कॉमेडी वीडियो का विषय बन गया। इंस्टाग्राम रील्स, यूट्यूब शॉर्ट्स, फेसबुक पोस्ट्स जैसे प्लैटफॉर्म पर लोग इस ड्रम का मज़ाक बनाने लगे।
मृत व्यक्ति के बारे में न सोचकर ड्रम को बड़ा मुद्दा बना दिया गया है। कुछ मीडिया संस्थान भी इसे ‘ड्रम मर्डर केस’ बताकर रिपोर्ट कर रहे हैं। जहाँ अपराध खबर नहीं बल्कि मनोरंजन बन जाता है। हमें अपराध के मुख्य कारणों पर बात करनी चाहिए। न कि इसे मजाक बनाना चाहिए।
मेरठ मर्डर केस पर जो प्रतिक्रिया सोशल मीडिया पर दिखीं। वह हमारे समाज के एक वर्ग की मानसिकता को उजागर करती हैं। कैसे हम दूसरों का दुख हमारे लिए मज़े का साधन बन गई हैं। घर में झगड़ा हो, हत्या हो या कोई सड़क हादसा। लोग पहले मोबाइल निकालते हैं, वीडियो बनाते हैं, अपलोड करते हैं और फिर वायरल होने की खुशी मनाते हैं।
भोजपुरी में ‘ड्रम में राजा’ हुआ रिलीज
भोजपुरी सिनेमा ने तो ड्रम पर गाना ही निकाल दिया। Born Music Bhojpuri नाम के प्रोडक्शन हाउस ने यूट्यूब पर ‘ड्रम में राजा’ गाने को रिलीज किया। गाने के बोल में प्रेमिका अपने प्रेमी को उसकी बात न मानने पर ड्रम में डालने की धमकी दे रही है। जिसके बाद से विरोध तेज़ हो गया। वीडियो का कमेंट सेक्शन अभद्र टिप्पणियों से भर गया। गाने के मेकर्स पर हिंसा को बढ़ावा देने के आरोप लगे। जिसके बाद गाने के ऑडियो को हटा दिया गया।
मनीषा रानी ने आवाज़ उठाई
बिग बॉस ओटीटी फेम एक्ट्रेस मनीषा रानी ने मेरठ मर्डर केस पर मजाकिया कंटेन्ट बनाने वाले पर नाराजगी जताई। हाल ही में एक वीडियो शेयर कर लिखा, “इतने सेंसिटिव टॉपिक को ऐसे डील करते हैं?” वीडियो में उन्होंने कहा, “आपको सीरियस विषय पर ऐसा वीडियो बनाने पर शर्म आनी चाहिए। कोई इसके कारण मर गया है और आप उसका मजाक उड़ा रहे हैं। यहाँ तक कि कंटेंट क्रिएटर ऐसे पोस्ट भी बना रहे हैं।”
मेरठ में सौरभ की हत्या के बाद पति को प्रताड़ित करने के मामले लगातार सामने आने लगे। जो कि आज के दौर में टूटते रिश्तों को दर्शाता है। कैसे अब पति-पत्नी का पवित्र रिश्ता ड्रम की धमकी के बाद खबरें बन जाता है। गोंडा में इंजीनियर की पत्नी ने मारपीट के बाद पति को हत्या कर ड्रम में भरने की धमकी दे डाली। गुरुग्राम में पति ने पत्नी को प्रेमी संग पकड़ा। फिर विरोध जताया तो टुकड़े कर ड्रम में भरने की धमकी मिल गई। ‘नीले ड्रम’ ने समाज में अपराध करने के तरीके का ट्रेन्ड चला दिया है।
अपराधी का कोई जेंडर नहीं
सोशल मीडिया पर लोगों की ऐसी असंवेदनशीलता पहली बार उजागर नहीं हुई है। बस ये है कि इस बार टारगेट पर महिलाएँ हैं। लगातार महिलाओं का मजाक इस तरह उड़ाया जा रहा है जैसे समाज में होते अपराधों की असली दोषी वही हैं। लेकिन, हकीकत तो ये है कि एक तरफ अगर मुस्कान जैसी लड़कियाँ हैं तो दूसरी तरफ श्रद्धा वॉकर- प्रिया-अलका जैसी भी लड़कियाँ भी हैं जिनके साथ जो हुआ वो सोचा भी नहीं जा सकता।
सोशल मीडिया का क्या है वो दोनों मामलों में मजाक उड़ाएगा, अपना कंटेंट निकालेगा। मगर, हमें आभासी दुनिया से निकलकर वास्तविकता में ये नहीं भूलना है कि अपराधियों का कोई जेंडर नहीं होता।
इन मामलों में महिलाएँ भले अपराधी हैं लेकिन इसका ये अर्थ नहीं इससे हर महिला को संदेह की दृष्टि से देखा जाए। ऐसा करके हम सिर्फ उस सच से आँख मूंद रहे हैं जहाँ महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अपराध अब भी चिंता का विषय होने चाहिए। महिलाओं के खिलाफ दुष्प्रचार करने से पहले ये याद रखने की जरूरत है कि आज भी महिलाओं के साथ रोजाना बलात्कार, यौन शोषण और मारपीट की खबरें आती हैं।
हाल ही में उत्तर प्रदेश के वाराणसी में ग्रेजुएशन की छात्रा के साथ लगातार सात दिन तक 23 लोगों ने सामूहिक दुष्कर्म का मामला झकझोरने वाला है। तो क्या अब ये कहा जाए कि अपराध सिर्फ महिला के साथ होता है। नहीं बल्कि अपराधी की मानसिकता एक समान होती है। सौरभ की हत्या का मुद्दा मज़ाक बना लेकिन पुरुष है इसीलिए मज़ाक बनाया जाए। ये भी गलत है।
अगर हम सोशल मीडिया पर ऐसा माहौल बनाएँगे तो जाहिर हैं लोगों की संवेदनाएँ अस मुद्दों को लेकर खत्म होती जाएँगी। लोग अपराध को एक मजाक समझेंगे और पीड़ित को सिर्फ तमाशा।
पश्चिम बंगाल का मुर्शिदाबाद वक्फ कानून के विरोध में हो रहे हिंसक प्रदर्शन का केंद्र बिंदु है। मुस्लिम भीड़ की हिंसा, आगजनी, लूट के बाद कोलकाता हाई कोर्ट ने केंद्रीय बलों की तैनाती के आदेश दिए हैं। अब तक 3 लोगों की मौत की खबर आ चुकी है। दूसरी तरफ इसी जिले की बहरामपुर सीट से तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) के सांसद यूसुफ पठान (Yusuf Pathan) इंस्टाग्राम पर चाय की चुस्की लेते हुए फोटो शेयर कर रहे हैं।
उन्होंने ये तस्वीर एक दिन पहले ही अपने इंस्टा पर अपलोड की है। कैप्शन में लिखा- आरामदायक दोपहर, बढ़िया चाय और शांत माहौल। बस इस पल को खुद में समा रहा हूँ।
उनके इस पोस्ट को देखने के बाद आमजन भड़क गए। उन्होंने कहा, “बंगाल आग में जल रहा है और तुम चाय पी रहे हो।”
एक ने उनसे पूछा, “तुम्हें मालूम है तुम्हारे संसदीय क्षेत्र में चल क्या रहा है।”
एक यूजर ने कहा, “मुर्शिदाबाद में आग लगी हुई है, फिर भी तुमने ये तस्वीर पोस्ट करने के लिए चुनी। कितने असंवेदनशील हो तुम?”
मुर्शिदाबाद, सांसद यूसुफ पठान के निर्वाचन क्षेत्र बेहरामपुर से सिर्फ 10 किलोमीटर दूर एक इलाका जल रहा है और हिंदुओं पर अत्याचार हो रहा हैं, लेकिन वह शांत वातावरण में गुच्ची चप्पल में अपनी चाय का आनंद लेते दिख रहे हैं… pic.twitter.com/twNPwcDAlU
साध्वी प्राची ने अपने एक्स पर लिखा- “मुर्शिदाबाद, सांसद यूसुफ पठान के निर्वाचन क्षेत्र बेहरामपुर से सिर्फ 10 किलोमीटर दूर एक इलाका जल रहा है और हिंदुओं पर अत्याचार हो रहा हैं, लेकिन वह शांत वातावरण में गुच्ची चप्पल में अपनी चाय का आनंद लेते दिख रहे हैं।”
Bengal is burning HC has said it can’t keep eyes closed and deployed centra forces
Mamata Banerjee is encouraging such state protected violence as Police stays silent!
Meanwhile Yusuf Pathan – MP sips tea and soaks in the moment as Hindus get slaughtered…
— Shehzad Jai Hind (Modi Ka Parivar) (@Shehzad_Ind) April 13, 2025
भाजपा नेता शहजाद पूनावाला ने युसूफ पठान की तस्वीर देखकर लिखा- “बंगाल जल रहा है। हाईकोर्ट ने कहा है कि वो आँख बंद नहीं रख सकते और केंद्रीय बल तैनात करते हैं। ममता बनर्जी ऐसी राज्य संरक्षित हिंसा को बढ़ावा दे रही हैं जबकि पुलिस चुप है। वहीं युसूफ खान चाय पीकर उस पल को अपने में समा रहे हैं क्योंकि हिंदू मारे जा रहे हैं।”
On one hand There is Targeted violence against Hindus in Bengal, on other hand TMC MP is enjoying and posting pictures on Social Media and teasing the Hindu victims.
— Pradeep Bhandari(प्रदीप भंडारी)?? (@pradip103) April 13, 2025
भाजपा प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने इस तस्वीर पर कहा कि बंगाल में एक तरफ हिंदुओं को निशाना बनाया जा रहा है और दूसरी तरफ सांसद हिंदू पीड़ितों को चिढ़ाने के लिए पोस्ट कर रहे हैं। ममता बनर्जी एक हिंदू विरोधी प्रशासन चला रही हैं।
मुर्शिदाबाद में हिंसा
बता दें कि मुर्शिदाबाद जिले के सुती, धुलिया, समसेरगंज और अन्य इलाकों में नए वक्फ कानून के नाम पर हिंसा भड़की हुई। इस्लामी कट्टरपंथियों ने हिंदुओं को निशाना बनाया, वाहनों को जलाया और हिंदुओं की दुकानों को लूटा। हालात देख अदालत ने भी कहा कि जब लोगों की सुरक्षा खतरे में हो तो जनता मूकदर्शक नहीं बनी रहती, मगर युसूफ पठान पर इन सबका कोई असर नहीं दिख रहा। इसी कारण सोशल मीडिया पर उनकी आलोचना हो रही है। उन्हें गैर जिम्मेदाराना कहा जा रहा है। लोगों का साफ कहना है कि ये तस्वीर इसलिए डाली गई है ताकि सांसद दिखा सकें कि जो हो रहा है उन्हें उसमें आनंद आ रहा है।
हनुमान जयंती पर निकलने वाली शोभायात्राएँ पिछले कुछ सालों से इस्लामी कट्टरपंथियों को खटकती रही हैं। यही वजह है कि ये लोग कहीं न कहीं ऐसे धार्मिक जुलूसों को निशाना बनाने की ताक में रहते हैं। इस बार भी ऐसा कई जगहों पर हुआ। इनमें एक मामला बिहार के पूर्वी चंपारण से लगे नेपाल के बीरगंज का है और दूसरा मध्य प्रदेश के गुना का है। दोनों जगह 12 अप्रैल 2025, हनुमान जन्मोत्सव की शोभायात्रा पर पथराव करके माहौल बिगाड़ा गया।
बीरगंज में आगजनी, पथराव
नेपाल के बीरगंज में स्थिति इतनी भयावह कर दी गई कि तोड़फोड़ से लेकर आगजनी तक हुई। इस हमले में करीबन 1 दर्जन पुलिसवाले घायल हो गए। वहीं शोभाय़ात्रा में शामिल एक व्यक्ति भी घायल हुआ।
रिपोर्ट्स में बताया जा रहा है कि इलाके में हालात तब बिगड़े जब (पूर्वी चंपारण जिले के रक्सौल शहर से सटे बीरगंज के छपकैया क्षेत्र के समीप) शोभायात्रा ईदगाह के पास पहुँची और अचानक मदरसे की छत से पथराव होने लगा।
Curfew imposed in Birgunj
The move follows tensions during a religious procession, with police using tear gas to disperse the crowd.https://t.co/02GVFQfItf
पुलिसकर्मियों ने स्थिति नियंत्रित करने के लिए खूब मशक्कत की, लेकिन तनाव बढ़ चुका था। भीड़ ने कई प्रतिष्ठानों में तोड़फोड़ और बाइक गैराज वाहनों में आग भी लगा दी थी। अब हालात नियंत्रित रखने के लिए क्षेत्र में शनिवार शाम से रविवार सुबह तक के लिए कर्फ्यू लगाया गया है।
गुना में शोभायात्रा पर पथराव
इसी तरह मध्य प्रदेश के गुना में हुए पथराव की घटना में भी लोग घायल हुए हैं। खबरें बताती हैं कि यहाँ हालात तब बिगड़े जब शोभायात्रा कर्नलगंज स्थित मस्जिद के पास पहुँची और डीजे के गानों और नारेबाजियों के बाद शोभायात्रा पर पथराव हुए।
गुना में यह जुलूस बीजेपी पार्षद ओमप्रकाश कुशवाह उर्फ गब्बर कुशवाह के नेतृत्व में निकाला जा रहा था। पथराव में उनके 11 साल के बेटे अकुल कुशवाहा समेत कई लोग घायल हो गए। भाजपा पार्षद ने इस संबंध में एफआईआर दी है। उन्होंने बताया कि इस पथराव के पीछे ताजिया कमेटी का अध्य यूसुफ खान और अन्य लोग हैं। पुलिस ने मामले की जाँच शुरू कर दी है।
#WATCH | Guna, Madhya Pradesh | On the incident that happened during the procession of Hanuman Jayanti, Guna SP Sanjeev Kumar Sinha says, "The procession was passing near Colonelganj Mosque during which slogans were raised among the two communities. We got to know that stone… pic.twitter.com/1CdYJaCFuL
पुलिस ने बताया कि उन्होंने तनाव का पता चलने के 15-20 मिनट बाद स्थिति को संभाल लिया था व सुरक्षा लिहाज से इलाके में भारी पुलिस बल भी तैनात किया गया है। शोभायात्रा में शामिल लोग आक्रोशित थे। वह इकट्ठा होकर पत्थरबाजों के खिलाफ कार्रवाई करने को कह रहे थे, जिनकी माँग सुन प्रशासन ने उन्हें कोतवाली जाकर शिकायत दर्ज कराने को कहा।
इस मामले में कोतवाली पुलिस ने ओमप्रकाश कुशवाह की शिकायत पर रात 5 नामजद और 15-20 अन्य लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। आरोपितों में विक्की खान, आमीन खान, विक्की के लड़के, गुड्डू खान और तौफीक खान का नाम शामिल हैं।
पुलिस ने यह भी जानकारी दी कि उन्होंने वीडियो फुटेज के आधार पर उपद्रवियों की पहचान कर ली गई है। जाँच के बाद आगे एक्शन लिया जाएगा।
पश्चिम बंगाल का मुर्शिदाबाद जिला इस्लामी कट्टरपंथियों द्वारा फैलाई गई हिंसा की चपेट में है। कलकत्ता हाई कोर्ट ने केंद्रीय बलों की तैनाती का आदेश दिया है। यह सब वक्फ संशोधन कानून के विरोध के नाम पर शुरू हुआ, लेकिन जल्द ही इसका असली चेहरा सामने आ गया। मुर्शिदाबाद हिंसा में हिंदुओं को खास तौर पर निशाना बनाया गया। उनके घर, दुकानें, गाड़ियाँ और यहाँ तक कि मंदिर भी नहीं बख्शे गए। इन घटनाक्रमों के बीच, बीजेपी नेता अमित मालवीय ने मुर्शिदाबाद हिंसा का दिल दहलाने वाला वीडियो शेयर किया है, जिसमें पिता-पुत्र की हत्या कर दी गई।
अमित मालवीय द्वारा जारी वीडियो में हरगोविंद दास (पिता) और चंदन दास (बेटे) के शव दिख रहे हैं, जो मूर्तिकार थे और देवी-देवताओं की मूर्तियाँ बनाते थे। उनके घर में इस्लामी कट्टरपंथियों ने लूटपाट की और उसके बाद धारदात हथियारों से उनकी हत्या कर दी। तस्वीरों में दिख रहा है कि उनकी आँख पर भी हमला किया है, यानी जिन आँखों से देखकर वो देवी-देवताओं की मूर्तियाँ गढ़ा करते थे, नफरत की आग में इस्लामी कट्टरपंथियों ने उनकी आँखों को भी फोड़ दिया।
This is demographic invasion. Mamata Banerjee should learn from Jogendra Nath Mandal, who appeased the Islamists, moved to East Pakistan for political power, but was ultimately disowned and died an obscure death.
अमित मालवीय ने इसे जनसांख्यिकीय आक्रमण करार दिया। उन्होंने इस वीडियो को शेयर करते हुए पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को जोगेंद्र नाथ मंडल की याद दिलाई। उन्होंने कहा कि ममता बनर्जी पश्चिम बंगाल को एक और बांग्लादेश बनाना चाहती हैं, हम उन्हें ऐसा करने नहीं देंगे।
बता दें कि जोगेंद्र नाथ मंडल अविभाजित भारत के बड़े दलित नेता थे। वो देश के बँटवारे के बाद पाकिस्तान चले गए थे, लेकिन बाद में दलितों के दमन को देखते हुए खुद वहाँ से भाग खड़े हुए और भारत में ही वापस आकर उन्हें शरण मिली। जोगेंद्र नाथ मंडल ने हिंदुस्तान में ही दम तोड़ा था।
हिंदुओं को खास तौर पर बनाया गया निशाना
रिपोर्ट्स के मुताबिक, शुक्रवार (11 अप्रैल 2025) को जुमे की नमाज के बाद मुर्शिदाबाद के सुती और समशेरगंज में हालात बिगड़ गए। इस्लामी हमलावर सड़कों पर उतर चुके हैं। विरोध के नाम पर रेल सेवा रोकी गई, ब्लॉक डेवलपमेंट ऑफिसर (बीडीओ) के दफ्तर पर पत्थर और लाठियों से हमला हुआ। सारा इलाका ठप हो गया। लेकिन जो सबसे खतरनाक है, वो है हिंदुओं को चुन-चुनकर निशाना बनाना। ये कोई आम विरोध नहीं था, बल्कि इस्लामी भीड़ ने हिंदुओं की दुकानों, घरों और गाड़ियों को टारगेट किया।
खबरों के मुताबिक, हिंदुओं की दुकानों और मंदिरों पर हमला सबसे ज्यादा परेशान करने वाला था। सुती में एक हिंदू दंपति की मिठाई की दुकान ‘सुभा स्मृति होटल’ को पूरी तरह बर्बाद कर दिया गया। दुकान के मालिक ने रोते हुए कहा, “यहाँ मेरी मिठाई की दुकान थी।” उन्होंने अपनी तबाह दुकान की तरफ इशारा करते हुए बताया, “सब कुछ लूट लिया। दुकान में रखा नकद पैसा, सामान, कुछ भी नहीं छोड़ा। अब हम क्या खाएँगे?” उन्होंने कहा, “कुछ नहीं बचा। हमारा सब खत्म हो गया।”
उसी इलाके में ‘श्री हरि हिंदू होटल एंड लॉज’ को भी तोड़ दिया गया। न्यूज एजेंसी एएनआई ने इसका वीडियो भी जारी किया है।
Murshidabad: Muslim Mob vandalised Shri Hari Hindu Hotel.@sardesairajdeep this story wont catch your eye because your wife is a TMC Member of Parliament. pic.twitter.com/DbDBPkNDSL
स्थानीय लोगों ने बताया कि कुछ मंदिरों पर भी हमला हुआ और मूर्तियों को तोड़ा गया, हालाँकि ऑपइंडिया इसकी स्वतंत्र तौर पर पुष्टि नहीं करता है।
हिंसा की तस्वीरें, स्क्रीनशॉट : X_HinduVoice
हिंदुओं के घरों, दुकानों, गाड़ियों को पहुँचाया नुकसान
इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, मुर्शिदाबाद में हिंदू परिवारों के कई घरों को निशाना बनाया गया। भीड़ ने पत्थरबाजी की, सामान लूटा और घरों को तहस-नहस कर दिया।
एक हिंदू व्यापारी अमर भगत की पत्नी मंजू भगत ने आज तक को बताया, “भीड़ ने पहले हमारे घर का सामने का गेट तोड़ने की कोशिश की। जब वो नहीं तोड़ पाए, तो पीछे के रास्ते से घुसने लगे।” उन्होंने आगे कहा, “उन्होंने हमारी बाइक तोड़ दी, घर में घुसकर कुर्सियाँ, गद्दे, टीवी, महँगे सामान – सब लूट लिया। हमारा पूरा परिवार भगवान का नाम ले रहा था। हम जान बचाने के लिए छत पर छिपे थे। मैं सोच रही थी, अगर मेरी बेटी को कुछ हो गया तो क्या होगा?” मंजू की आवाज में डर और गुस्सा साफ सुनाई दे रहा था।
Muslim mob with petrol bombs burned down Ambulances in Murshidabad, so that injured Police and Hindus can't be rescued. pic.twitter.com/oMZfvsvAiY
हिंसा का आलम ये था कि भीड़ ने एक एंबुलेंस तक को नहीं छोड़ा। इंडिया टुडे से बात करने वाले एक चश्मदीद ने बताया, “मुसलमानों ने एंबुलेंस में आग लगा दी। ड्राइवर को बहुत मारा। हम डर के मारे घर में बंद थे। मैंने अपने माँ-बाप, पत्नी और बच्चों को घर में रखा था।” उसने ये भी कहा कि हमलावर कोई बाहरी नहीं, बल्कि स्थानीय लोग थे। एक सीसीटीवी फुटेज में साफ दिखा कि हमलावरों ने एक हिंदू परिवार की गाड़ी को तोड़ा।
? #EXCLUSIVE | Murshidabad violence caught on camera.
On Cam: Miscreants seen damaging vehicles [India Today]
एक और पीड़ित ने एएनआई से अपनी आपबीती सुनाई। उन्होंने कहा, “उन्होंने बाइक तोड़ीं, दुकानों में आग लगाई, हमारा सामान लूट लिया। रातभर हम डर से जागते रहे। पुलिस कहीं नहीं थी। वो खुद अपनी जान बचाने के लिए भाग रहे थे।” उन्होंने गुस्से में पूछा, “अब देखते हैं सरकार हमें कुछ मुआवजा देती है या नहीं।”
#WATCH | Murshidabad | A local vendor says, "They vandalised and torched so many things, including bikes. My uncle's shops were vandalised, and they also took away things that were in the shops. We couldn't sleep the entire night due to fear. The police weren't here when it all… https://t.co/AUlVgWqHVepic.twitter.com/PfSpSZlXwE
इस हिंसा ने मुर्शिदाबाद के हिंदुओं को गहरे जख्म दिए हैं। उनके घर, दुकानें और आजीविका सब तबाह हो गए। मंजू भगत और सुभा स्मृति होटल के मालिक जैसों की कहानी सुनकर लगता है कि ये सिर्फ विरोध नहीं था, बल्कि हिंदुओं को जानबूझकर डराने और नुकसान पहुँचाने की साजिश है।
ओडिशा के झारसुगुड़ा में मुस्लिम युवक ने एक हिन्दू नाबालिग का अपहरण किया। इसके बाद उसके साथ रेप किया। विरोध करने पर पीड़िता के परिजनों को भी धमकाया। ओडिशा पुलिस ने जब उसे गिरफ्तार किया तो उसने भागने की भी कोशिश की। पुलिस ने उसका एनकाउंटर किया है। उसे साथी के साथ गिरफ्तार कर लिया गया है।
यह घटना झारसुगुडा के बेलापहाड़ थाना क्षेत्र में हुई। शेख आसिफ नाम के एक मुस्लिम युवक ने बीते दिनों एक हिन्दू नाबालिग का अपहरण कर लिया। आसिफ ने हिन्दू बच्ची को डरा धमका कर उसका रेप किया। इस काम में उसका साथ अभिषेक बारीक नाम के एक लड़के ने दिया।
पीड़िता ने यह बात अपने परिवार को बताई। इसके बाद जब पीड़िता के परिजनों ने कार्रवाई के लिए पुलिस के पास जाने की बात कही तो शेख आसिफ के परिवार ने पीड़िता के परिवार को भी धमकाया। उन्होंने दबाव डाला कि यह बात वह किसी को भी ना बताएँ और पुलिस में FIR ना करवाएँ।
पीड़िता के परिजन दबाव के बावजूद पुलिस के पास पहुँचे और FIR लिखवाई। इसके बाद झारसुगुड़ा पुलिस ने दोनों को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस उन्हें शनिवार (12 अप्रैल, 2025) को कोर्ट में पेश करने के लिए एक वैन में ले जा रही थी। इसी बीच शेख आसिफ ने एक पुलिसकर्मी का रिवॉल्वर छीन लिया।
उसने इसके बाद भागने का प्रयास किया और रिवॉल्वर से 3-4 फायर भी किए। पुलिस ने उसे और उसके साथी को पकड़ने के लिए वापसी फायरिंग की, इसमें दोनों घायल हो गए। पुलिस ने इसके बाद दोनों को गिरफ्तार कर लिया है। दोनों का इलाज चल रहा है।
इस मामले में ओडिशा के उत्तर रेंज के आईजी हिमांशु कुमार लाल ने ऑपइंडिया से बताया, “आसिफ शेख और उसके परिवार के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया है। एनकाउंटर में आसिफ शेख ज्यादा घायल हुआ है, उसका इलाज जारी है। हम मामले में दोनों आरोपित पर कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित करवाएँगे।”