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5 करोड़ गन्ना किसानों को मोदी सरकार का तोहफा: 60 लाख टन चीनी निर्यात करने का फैसला, सीधे खाते में मिलेगी सब्सिडी

प्रधानमंत्री मोदी की अध्यक्षता में बुधवार (दिसंबर 16, 2020) को कैबिनेट की बैठक आयोजित हुई। इस बैठक में कई फैसले लिए गए। कैबिनेट बैठक के बाद केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर, रविशंकर प्रसाद ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर फैसलों की जानकारी दी। जावड़ेकर ने बताया कि कैबिनेट ने गन्ना किसानों की सीधी मदद के लिए उनके खातों में सब्सिडी की राशि जमा कराने का फैसला लिया है। यह सब्सिडी 6,000 रुपए प्रति टन के हिसाब से 60 लाख टन चीनी निर्यात पर दी जाएगी।

जावड़ेकर ने बताया कि 18 हजार करोड़ रुपए निर्यात से होने वाली आय किसानों के खातों में सब्सिडी के रूप में जमा होगी। इसके साथ ही पहले घोषित हुई 5361 करोड़ की सब्सिडी एक हफ्ते में किसानों के खातों में जमा होगा। इसके अलावा 3500 करोड़ की आज घोषित हुई सब्सिडी भी किसानों के खातों में जमा होगी। उन्होंने कहा कि 5 करोड़ किसान और उनके परिजन इससे लाभान्वित होंगे। साथ ही पाँच लाख मजदूरों को भी इससे फायदा होगा।

जावड़ेकर ने बताया कि आर्थिक मामलों की कैबिनेट कमेटी ने अंतर्राज्यीय ट्रांसमिशन और वितरण तंत्र को मजबूत करने के लिए 6 राज्यों के लिए उत्तर-पूर्वी क्षेत्र विद्युत प्रणाली सुधार परियोजना के संशोधित लागत अनुमान को मंजूरी दे दी है। साथ ही जावड़ेकर ने बताया कि बुधवार को पावर रेगुलेटरी मैकेनिज्म इन इंडिया और पावर रेगूलेटर्स ऑफ अमेरिका के बीच एक एमओयू पर हस्ताक्षर भी हुए हैं।

स्पेक्ट्रम नीलामी का हुआ फैसला

जावड़ेकर के बाद केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कैबिनेट के फैसलों के बारे में बताते हुए कहा कि कैबिनेट की बैठक में स्पेक्ट्रम की नीलामी का फैसला हुआ है। उन्होंने बताया कि कुल 2251.25 मेगाहर्ट्ज के स्पेक्ट्रम की नीलामी होगी। इसका कुल मूल्य 3,92,332.70 करोड़ रुपए है।

उन्होंने बताया कि कैबिनेट ने 700, 800, 900 ,1800, 2100, 2300, 2500 मेगाहर्ट्ज फ्रिक्वेंसी बैंड्स में स्पेक्ट्रम की नीलामी का फैसला लिया है। इसकी वैधता अवधि 20 साल की होगी। प्रसाद ने बताया कि पिछली नीलामी 2016 में हुई थी। स्पेक्ट्रम नीलामी की शर्ते साल 2016 की नीलामी के समान ही होंगी।

‘किसानो’ के शाहीन बाग में Zee न्यूज – R. भारत की महिला पत्रकारों पर हमले की कोशिश, ‘गोदी मीडिया’ चिल्लाते हुए पीछे पड़ी भीड़

शाहीन बाग के सीएए/एनआरसी प्रोटेस्ट के बाद अब कृषि कानून के ख़िलाफ चल रहे किसान आंदोलन से भी मीडिया पर हमले की तस्वीर सामने आई है। इस बार हमला रिपब्लिक भारत की पत्रकार शाजिया निसार और जी न्यूज की एक महिला पत्रकार पर हुआ है।

प्रदर्शनस्थल से सामने आई वीडियोज में देख सकते हैं कि रिपब्लिक भारत की पत्रकार भीड़ से बचकर आगे भाग रही हैं और प्रदर्शनकारी पीछे से गोदी मीडिया मुर्दाबाद के नारे लगा रहे हैं। वहीं जी न्यूज की पत्रकार से भी गोदी मीडिया मुर्दाबाद कहकर वापस जाने को कहा जा रहा है।

रोजी नाम की वकील ने शाजिया पर और जी न्यूज की महिला रिपोर्टर पर हुए हमले की वीडियो को शेयर करते हुए घटना को शर्मनाक बताया। उन्होंने कहा कि जैसे शाहीन बाग में किया गया था वैसा ही किसान आंदोलन में हुआ। 2 महिला रिपोर्टर एक जी न्यूज और दूसरी रिपब्लिक भारत की शाजिया को आदमियों की भीड़ ने घेरा और जाने पर मजबूर किया क्योंकि वह अपना काम कर रही थीं।

रोजी के इस ट्वीट पर प्रतिक्रिया देते हुए शाजिया निसार ने आपबीती बताई। रिपब्लिक भारत की शाजिया लिखती हैं –

“सिंघू बॉर्डर का मंजर ख़ौफ़ज़दा करने वाला था। ये वीडियो के शुरुआती अंश हैं। बाद में जो यहाँ हुआ उसे देखकर शायद किसान आंदोलन को लेकर आपका नज़रिया बदल जाए। मेरे कैमरापर्सन को क़ैदी की तरह पकड़कर साथ ले गए। हज़ारों की भीड़ मेरे पीछे दौड़ रही थी मेरा मोबाइल छीन लिया गया और बहुत कुछ हुआ।”

याद दिला दें कि कुछ महीने पहले ऐसी तस्वीरें शाहीन बाग से सामने आई थीं। उस समय इंडिया टीवी की महिला पत्रकार मीनाक्षी जोशी ने प्रदर्शन की पोल खोलते हुए जब दिखाया था कि कैसे धीरे-धीरे प्रदर्शन खत्म हो रहा है, उस समय मीनाक्षी जोशी के साथ धक्का-मुक्की की गई थी और उनका कैमरे को भी तोड़ने की भी कोशिश हुई थी।

इसके अलावा शाहीन बाग में न्यूज नेशन के कंसल्टिंग एडिटर दीपक चौरसिया पर भी अल्लाह-हू-अकबर के नारों के साथ हमला हुआ था। प्रदर्शनकारियों ने न केवल उनके साथ हाथापाई की ती बल्कि उनका भी कैमरा तोड़ा गया था। दोनों प्रदर्शनों में बैठे लोगों की शिकायत यही थी कि कुछ चैनल उन्हें नकारात्मक दिखाने की कोशिश कर रहे हैं, इसलिए वह उन्हें रिपोर्टिंग नहीं करने देंगे।

अब Google से क्यों नाराज हुए दुनिया भर के मुस्लिम? मिर्जा मसरूर इस्लाम का नया खलीफा या गुस्ताख़-ए-रसूल?

सोशल मीडिया पर मुस्लिम ये सर्च करने में लगे हुए हैं कि इस्लाम का वर्तमान खलीफा कौन है। जब आप गूगल (Google) करेंगे ‘Present Caliph Of Islam’, तो मिर्जा मसरूर अहमद (Mirza Masroor Ahmad) का नाम दिखाता है। बताया जाता है कि वो मसीहा आमिर-उल-मूमिनीन के खलीफा हैं और अप्रैल 22, 2003 से वो इस पद पर हैं। लेकिन, यहाँ ट्विस्ट ये है कि वो अहमदिया समुदाय से ताल्लुक रखते हैं और इसीलिए दुनिया भर के कई मुस्लिमों ने नाराजगी जताई।

Present Caliph Of Islam (इस्लाम का वर्तमान खलीफा): मुस्लिमों ने क्यों जताई Google से नाराजगी?

वो सोशल मीडिया पर ये भी शेयर कर रहे हैं कि गूगल सर्च (Google Search) का बॉयकॉट किया जाए, क्योंकि अहमदिया समुदाय से कोई व्यक्ति पूरे मुस्लिम समाज का खलीफा नहीं हो सकता। गूगल सर्च बता रहा है कि गुलाम अहमद के मौत के बाद मिर्जा मसरूर अहमद को 5वाँ खलीफा बनाया गया। गूगल इस सर्च रिजल्ट को विकिपीडिया से लेकर दिखाता है। खिलाफत के नेता को ही खलीफा कहते हैं, जिसकी बात पूरा मुस्लिम समाज मानता है, लेकिन अभी इस्लाम के खलीफाओं को लेकर विवाद है।

1889 में प्रमुखता से उभरने वाले अहमदिया समुदाय के साथ शुरू से भेदभाव होता रहा है और मुस्लिम लोग कभी-कभी इस समुदाय को मुस्लिम भी मानने से इनकार कर देते हैं। ऑर्थोडॉक्स मुस्लिम मानते हैं कि पैगम्बर मुहम्मद और कुरान शरीफ के अलावा उसके बाद आने वाले किसी अन्य को अल्लाह का पैगम्बर नहीं माना जा सकता है। सुन्नी और शिया, ये दोनों ही अहमदिया समुदाय के लोगों से इत्तिफाक नहीं रखते हैं।

सोशल मीडिया पर मुस्लिम लिख रहे हैं कि मिर्जा मसरूर अहमद इस्लाम के खलीफा नहीं हैं। साथ ही मौलवी लोग भी मुस्लिमों को इस ‘भ्रामक तथ्य’ से बचने की सलाह दे रहे हैं। कई मुस्लिम तो मिर्जा मसूर अहमद को ‘गुस्ताख-ए-रसूल’ और ‘काफिर’ भी बता रहे हैं। मुस्लिमों ने कहा कि मिर्जा का इस्लाम से कोई लेना देना ही नहीं है, इसीलिए गूगल जल्दी से ये सर्च रिजल्ट्स हटाए। वहीं अहमदिया समुदाय के लोग इसे सही मान रहे हैं।

फ़िलहाल मलेशिया, तुर्की और पाकिस्तान जैसे इस्लामी मुल्क हैं जो कट्टरपंथ और आतंकवाद को बढ़ावा देते हुए खुद के खलीफा बनने का ख्वाब देख रहे हैं। इस वर्ष की शुरुआत में ही पाकिस्तानी सीनेट के पूर्व चेयरमैन मियॉं राजा रब्बानी ने तो यहॉं तक कह दिया था कि ‘इस्लामिक उम्माह का बुलबुला फट गया है’ और पाकिस्तान को उम्माह के साथ रिश्तों पर फिर से विचार करना चाहिए। फ़िलहाल पाकिस्तान इस मामले में तुर्की का पिट्ठू बना हुआ है।

सैकड़ों स्कूली छात्रों का अपहरण, पश्चिमी शिक्षा को बताया इस्लाम विरोधी: नाइजीरिया में बोको हरम ने ली जिम्मेदारी

जिहादी समूह बोको हरम ने उत्तर पश्चिमी नाइजीरिया में हुए सैकड़ों स्कूली छात्रों के अपहरण की जिम्मेदारी ली है। 2014 के सैकड़ों छात्राओं के अपहरण के पीछे रहे समूह के नेता ने एक ऑडियो मैसेज में कहा, “मैं अबूबकर शेकू हूँ और केटसीना में हुए अपहरण के लिए हमारे ही लोग जिम्मेदार हैं।” 

‘डेली नाइजीरियन’ ने जानकारी दी है कि उसे बोको हराम के नेता अबूबकर शेकू का एक ऑडियो संदेश मिला है, जिसमें कहा गया है कि इसी संगठन ने स्कूली बच्चों का अपहरण किया है क्योंकि उनके अनुसार पश्चिमी शिक्षा इस्लाम के सिद्धांतों के खिलाफ है।

अखबार ने शेकू के हवाले से कहा, “केटसीना में जो कुछ भी हुआ वह इस्लाम को बढ़ावा देने और गैर-इस्लामी प्रथाओं को हतोत्साहित करने के लिए किया गया, क्योंकि पश्चिमी शिक्षा अल्लाह और उनके पवित्र पैगंबर द्वारा बताई गई शिक्षा के अनुरुप नहीं है।”

मैसेज में आगे कहा गया, “वे यह भी नहीं सिखा रहे हैं कि अल्लाह और उनके पवित्र पैगंबर ने क्या आदेश दिया था। वे इस्लाम को खत्म करने की कोशिश कर रहे हैं। ऊपर आसमान और नीचे धरती का भगवान अल्लाह है। वो उन चीजों को भी जानता है, जिसे कोई नहीं जानता है। अल्लाह इस्लाम को बरक्कत दे।”

उसने कहा, “संक्षेप में, केटसीना में जो हुआ उसके पीछे हम हैं।” आतंकी सरगना ने मैसेज के अंत में कहा कि वह अबूबकर शेकू है, जो जमात अहलूस्सना लिद-दवती वाल जिहाद का नेता है।

बता दें कि बंदूकधारियों ने राष्ट्रपति मुहम्मद बुहारी के गृह राज्य केटसीना में छात्रों के हॉस्टल पर हमला किया था और उसके बाद वहाँ से 400 छात्रों को अगवा कर लिया था। संयुक्त राष्ट्र की एजेंसी यूनिसेफ ने इस हमले की निंदा की। कांकरा में शुक्रवार 11 दिसंबर 2020 की रात सरकारी साइंस माध्यमिक स्कूल पर हथियारबंद हमलावरों ने हमला किया और उनकी सुरक्षाकर्मियों से भिड़ंत हुई। संघर्ष के दौरान सैकड़ों बच्चे जान बचाने के लिए पास के जंगलों में भाग गए थे।

हमले को अंजाम देने वाले बंदूकधारी AK 47 से लैस थे। केटसीना प्रांत की पुलिस के प्रवक्ता गेंबो ईसा ने इसकी जानकारी देते हुए बताया था कि 400 छात्र लापता हैं, जबकि 200 का पता लगाया जा चुका है। बताया जा रहा है कि स्कूल में 600 से अधिक छात्र पढ़ते हैं। कुछ मीडिया रिपोर्टों में स्कूल में पढ़ने वाले छात्रों की संख्या 800 बताई गई।

हालाँकि, राज्य के गवर्नर अमीनू मसारी ने दावा किया कि केवल 333 छात्र लापता हैं, लेकिन डेली ट्रस्ट रिपोर्टर के अनुसार स्कूल रजिस्टर रजिस्टर में 668 कर्मचारी गायब हैं। अमीनू मसारी ने शनिवार (दिसंबर 12, 2020) को स्कूल का दौरा किया और कहा कि सुरक्षाबल अगवा हुए छात्रों को छुड़ाने की कोशिश में जुटे हुए हैं। 

बता दें कि नाइजीरिया में 2014 में इसी तरह बोको हरम के आतंकियों ने एक हॉस्टल से 276 लड़कियों को उठा लिया था। जिसमें से 100 लड़कियों का अब तक कोई सुराग नहीं है। वहीं नवंबर 2020 के अंत में बोको हरम ने कम से कम 110 किसानों को मौत के घाट उतार दिया था। इनमें से तकरीबन 30 की तो गला रेतकर हत्या कर दी गई थी। आतंकियों ने यहाँ एक गाँव पर हमला बोला। यहाँ खेतों में काम कर रहे किसानों और मजदूरों को आंतकियों ने निशाना बनाया। उन्हें पकड़कर पहले उनके हाथ-पाँव बाँध दिए और फिर सबका गला रेत दिया। 

अपहरण, यौन उत्पीड़न कर मुंबई से बंगाल भागा मोहम्मद शेख, भेष बदल-बदल कर कुछ इस तरह दबोचा गया

मुंबई पुलिस अधिकारियों ने पिछले शुक्रवार को एक 24 वर्षीय सीरियल मॉलेस्टर को पश्चिम बंगाल के हुगली जिले में दबोचा, जो पिछले फरवरी से ही फरार था। अभियुक्त मोहम्मद बादशाह मोहम्मद सलीम शेख को 2018 में एंटॉप हिल और डीएन नगर पुलिस स्टेशनों में दो नाबालिग लड़कियों के अपहरण और यौन उत्पीड़न के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। हालाँकि, वह सत्र अदालत परिसर से भाग निकला, जब उसे फरवरी 02, 2019 को पेश किया जा रहा था।

समाचार पत्र ‘इन्डियन एक्सप्रेस’ की एक खबर के अनुसार, कोलाबा पुलिस थाने के एक अधिकारी ने कहा, “हम तभी से उनकी तलाश में थे। हम जानते थे कि वह हुगली के बोन्ची क्षेत्र में अपने इलाके भाग गया होगा। लेकिन जब भी हम उसे गिरफ्तार करने के लिए वहाँ जाते, ग्रामीण उसे बता देते और वह बच जाता और हमारे जाते ही वापस लौट आता।”

दिसंबर के पहले सप्ताह ही पुलिस को सूचना दी गई थी कि शेख अपने मूल इलाके पर लौट आया है और अपने रिश्तेदार के साथ रह रहा है। एक टीम को वहाँ भेजा गया, लेकिन हर बार की तरह शेख बच निकला।

बाद में पुलिस को पता चला कि सलीम शेख के बांग्लादेश की सीमा पार करने की संभावना है, टीम ने उसके रिश्तेदारों से सम्पर्क करने के बजाए, एक ऐसे व्यक्ति से संपर्क साधा जिसके साथ आरोपित का एक बार झगड़ा हुआ था।

एक अधिकारी के अनुसार, “एक स्थानीय निवासी था, जिसका बादशाह शेख के साथ झगड़ा हुआ था और वह आरोपित के निवास से बस 20 फीट की दूरी पर रहता था। उन्होंने हमारे एक कॉन्सटेबल को अपने घर में रहने की अनुमति दी।”

उन्होंने बताया कि पुलिस की वर्दी से उन्हें पहले ही संकेत मिल जाता था कि हम शहर से आ रहे हैं। इसीलिए तीन पुलिसकर्मी, जो शेख को गिरफ्तार करने गए थे, ने लुंगी, मफलर, टोपी और चेक वाली कमीजें पहनी। एक पुलिसकर्मी स्थानीय निवासी के रिश्तेदार के रूप में उसके पड़ोस में रहने लगा।”

गत शुक्रवार (दिसंबर11, 2020) को जैसे ही शेख अपने रिश्तेदार के घर पहुँचा, पुलिसकर्मी निकुम ने, सब-इंस्पेक्टर सचिन मंडोले और डी भोसले के साथ, स्थानीय पुलिस की मदद से उसे गिरफ्तार कर लिया। जिसके बाद उसे मुंबई ले जाया गया और अब वह तलोजा सेंट्रल जेल में बंद है।

हैदराबाद: 5 मासूम बच्चियों का रेप करने वाले हेडमास्टर पर केस, चाकू के बल पर अश्लील फिल्म दिखाकर करता था शोषण

हैदराबाद के एक सरकारी स्कूल के हेडमास्टर के ख़िलाफ़ 5 बच्चियों का बलात्कार करने के आरोप में मुकदमा दर्ज हुआ है। भद्राद्री कोठागुडेम जिला के प्राथमिक विद्यालय के हेडमासटर ने अगस्त से लेकर अब तक 7 से 11 उम्र की 5 बच्चियों का रेप किया था। एक पीड़ित बच्ची ने बताया है कि हेडमास्टर उनका शोषण करने से पहले उन्हें अश्लील फिल्म दिखाता था बाद में उन्हें नुकसान पहुँचाने की धमकी भी देता था।

टाइम्स ऑफ इंडिया के अनुसार, 40 वर्षीय हेडमास्टर की काली करतूत का खुलासा उस समय हुआ जब शोषण किए जाने से कक्षा 2 में पढ़ने वाली छात्रा बीमार पड़ गई और उसे अस्पताल में भर्ती करवाया गया। अपने इलाज के दौरान बच्ची ने बताया कि उसे उसके शिक्षक द्वारा प्रताड़ित किया जाता है। 

पुलिस ने यह जानकारी पाने के बाद हेडमास्टर के खिलाफ़ अपनी जाँच शुरू की। इस दौरान उन्हें पता चला कि केवल एक बच्ची ही नहीं बल्कि उसी स्कूल की 4 अन्य लड़कियों के साथ भी हेडमास्टर कुकर्म कर चुका है। उसके ख़िलाफ़ पुलिस ने धारा 376 और पॉक्सो एक्ट के तहत मुकदमा दायर किया है।

पुलिस ने कहा, “लॉकडाउन के बाद छूट मिलते ही दो टीचरों ने स्कूल जाना शुरू किया था। इसमें टीचर के रोल में हेडमास्टर भी था। चूँकि रेगुलर क्लास नहीं चल रहीं थी तो जब भी हेडमास्टर ड्यूटी पर जाता तो वो उनमें से किसी एक लड़की को उनके घर से अपने साथ ले जाता और पढ़ाने के बहाने उनके साथ दुष्कर्म करता।”

सोमवार (दिसंबर 14, 2020) को इस संबंध में पीड़ित बच्ची की माँ ने स्थानीय पुलिस के पास शिकायत लिखवाई थी। उन्होंने बताया कि जब भी हेडमास्टर बुलाने आता था तो उनकी बेटी अक्सर स्कूल जाने से मना किया करती थी। माँ ने कहा:

“मैं उसे पूछती रहती थी कि आखिर क्या हुआ, लेकिन उसने कभी कुछ नहीं बताया कि वो क्लास क्यों नहीं जाना चाहती। एक दिन जब वो अचानक बीमार पड़ी और सीधे चल भी नहीं पाई, तब मुझे संदेह हुआ कि ऐसा कुछ हो सकता है। मैं उससे लगातार पूछती रही, तब उसने मुझे अपने यौन शोषण की बात बताई। मैंने सुना है कि वो चाकू दिखा कर लड़कियों को डराता था कि वो किसी के सामने अपना मुँह न खोलें।”

बता दें कि पुलिस ने ICDS (Integrated Child Development Services ) अधिकारियों के साथ मिल कर पीड़िता को मेडिकल चेक अप के लिए भेज दिया है और बाकी पीड़ितों के परिवारों का बयान रिकॉर्ड करने की भी बात कही है। पुलिस का कहना है कि उनकी टीम आरोपित टीचर की तलाश कर रही हैं। उन्होंने ICDS से संपर्क इसीलिए किया है क्योंकि पीड़िता अभी बहुत छोटी है।

‘हेमंत सोरेन ने जानवर की तरह मेरा रेप किया’ – सोशल मीडिया पर पीड़िता ‘नताशा खान’ का पत्र वायरल

सोशल मीडिया पर एक पत्र वायरल हो रहा है, जिसके बारे में कहा जा रहा है कि ये एक रेप पीड़िता ने बांद्रा पुलिस को लिखा है। इस पत्र में झारखण्ड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पर बलात्कार के आरोप लगाए गए हैं। साथ ही ‘Justice For Natasha (बदला हुआ नाम)’ भी ट्रेंड हो रहा है। शेयर किए गए पत्र में पीड़िता ने लिखा है कि वो 2013 में अभिनेत्री बनने का ख्वाब लिए बॉलीवुड में एंट्री करना चाहती थी, तभी उसकी दोस्ती सुरेश नागरे नामक व्यक्ति से हुई।

पत्र के अनुसार, “बातचीत और व्यवहार के हिसाब से सुरेश नागरे एक अच्छा व्यक्ति प्रतीत होता था। एक कॉमन दोस्त के जरिए हमारी मुलाकात हुई थी। उसके बाद कुछ अन्य कार्यक्रमों और पार्टियों में हम मिले। उसने मुझे फिल्म क्षेत्र में करियर बनाने के लिए मेरा समर्थन किया और मुझे ऐसे ही कई युवाओं से मिलवाया, जो बॉलीवुड में नाम कमाना चाहते थे। वो ऐसा दिखाता था, जैसे उसके बड़े लोगों से अच्छे संपर्क हों।”

वायरल हो रहे पत्र का वो पेज, जिसमें रेप का उल्लेख

इस पत्र में, जिसे पीड़िता का बताया जा रहा है, आगे दावा किया गया है कि सितम्बर 5, 2013 को सुरेश ने उसे बांद्रा वेस्ट स्थित होटल ताज लैंड्स में ये कह कर बुलाया कि वो कुछ प्रभावशाली लोगों से मिलवाएगा, लेकिन जब वो वहाँ पहुँचीं तो 3 ही लोग थे। दावा किया गया है कि इनमें से एक झारखण्ड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन थे और वहीं पीड़िता के साथ बलात्कार हुआ। बता दें कि जुलाई 2013 से दिसंबर 2014 के बीच भी हेमंत मुख्यमंत्री थे, जिसके बाद वो राज्य में नेता प्रतिपक्ष बने।

पत्र में पीड़िता ने कहा कि जब वो पुलिस के पास शिकायत दर्ज कराने गई तो वहाँ भी उसे प्रताड़ित किया गया क्योंकि तब हेमंत सोरेन एक बड़े पद पर काबिज थे। उसने लिखा है कि सुरेश नागरे उसे फिर से हेमंत सोरेन के पास भेजने के लिए मैसेज कर रहा था, लेकिन वो नजरअंदाज करती रहीं। उसने बताया है कि इस मामले में बांद्रा पुलिस थाने में अक्टूबर 20, 2013 को आधा दर्जन से भी अधिक धाराओं के तहत शिकायत दर्ज कराई गई।

वायरल पत्र का हिस्सा

इसके बाद पत्र में पीड़िता द्वारा दावा किया गया है कि शिकायत दर्ज कराते ही उसे और उसके परिवार को जान से मार डालने की धमकियाँ मिलने लगीं और आरोपितों की तरफ से फोन कॉल करवाए जाने लगे। उसने लिखा है कि दबाव बना कर उससे हस्ताक्षर कराया गया और उसे बाद में पता चला कि केस वापस लेने के लिए ऐसा किया गया है। साथ ही खुद के डरे होने की बात कहते हुए FIR दर्ज कराने की माँग की गई है।

पत्र में पीड़िता ने अपना नाम ‘नताशा खान’ (बदला हुआ नाम) बताया है। बांद्रा पुलिस स्टेशन के सीनियर इंस्पेक्टर को लिखे गए इस पत्र में उसने लिखा है कि इससे पहले वो शिकायत दर्ज कराने की स्थिति में नहीं थी, क्योंकि उसे पता था कि एक प्रभावशाली व्यक्ति के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं होगी और उसे ही प्रताड़ित किया जाएगा। अब लोग इस पत्र की कॉपी ट्विटर पर वायरल करते हुए हेमंत सोरेन के खिलाफ कार्रवाई की माँग कर रहे हैं।

वायरल पत्र का एक और हिस्सा

इससे पहले जुलाई 2020 में गोड्डा के सांसद निशिकांत दुबे ने माँग की थी कि हेमंत सोरेन के खिलाफ जो 2013 में बलात्कार व अपहरण का मामला दर्ज किया गया और बाद में कॉम्प्रमाइज करते हुए इसे वापस ले लिया गया था, उस मामले को फिर से खोला जाए। उन्होंने आरोप लगाया कि जब इसे लेकर दुमका में उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी, तब उनके खिलाफ शैक्षिक योग्यता और संपत्ति से जुड़े केस कर दिए गए, जो कोर्ट में नहीं ठहरे।

भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने कहा था, “डीजीपी एमवी राव के साथ मिल कर झारखण्ड के मुख्यमंत्री स्थानीय माफिया के माध्यम से पीड़िता की हत्या कराना चाहते हैं। उसकी जान खतरे में है, इसीलिए मैं केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से माँग करता हूँ कि उसे सुरक्षा दी जाए। बलात्कार, घूसखोरी, धमकी, अपहरण हत्या की साजिश और पुलिस व सत्ता के दुरूपयोग के इस मामले की सीबीआई जाँच कराई जाए। सुप्रीम कोर्ट का भी कहना है कि ऐसे मामलों में इस तरह से केस वापस लेने पर मामला रद्द नहीं किया जा सकता।”

केरल सोना तस्करी मामले में कई राज खोलने वाले पत्रकार की संदिग्ध मौत: तेज गति से जा रही ट्रक ने मारी टक्कर, CCTV फुटेज वायरल

केरल में पत्रकार एसवी प्रदीप (SV Pradeep) की एक सड़क दुर्घटना के कारण मौत हो गई। केरल सोना तस्करी मामले को लेकर वो खासे मुखर थे और इस पर लगातार रिपोर्टिंग भी कर रहे थे। तिरुवनंतपुरम में पत्रकारिता करने वाले एसवी प्रदीप (SV Pradeep) सोमवार (दिसंबर 14, 2020) को शाम 4 बजे एक ट्रैफिक सिग्नल के पास काराक्कमण्डप्पम में सड़क दुर्घटना के शिकार हुए और उनकी मौत हो गई। बाइक से जा रहे पत्रकार को उसी दिशा में जा रही एक गाड़ी ने टक्कर मारी।

उनकी रहस्यमयी तरीके से हुई मौत को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं। वो न सिर्फ केरल की सत्ताधारी LDF (लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट) सरकार, बल्कि लगातार अपना प्रभाव बढ़ा रहे इस्लामी कट्टरपंथियों के खिलाफ भी खासे मुखर थे। केरल में सोना तस्करी की आँच मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन के दफ्तर तक जा पहुँची है। केरल के इस ताज़ा ‘हिट एंड रन’ मामले की बात करें तो पीछे से तेज गति से आ रही एक ट्रक ने पत्रकार की बाइक को ठोकर मार दी।

पुलिस ने इस घटना का सीसीटीवी फुटेज भी निकाला है, जिसमें देखा जा सकता है कि पत्रकार एसवी प्रदीप (SV Pradeep) को एक SML ट्रक ने टक्कर मारी। इस फुटेज में पत्रकार टक्कर लगने के साथ सड़क पर पड़े हुए दिखते हैं और तेज गति से ट्रक भाग निकलता है। असिस्टैंट कमिश्नर के नेतृत्व में इस मामले की जाँच के लिए टीम गठित कर दी गई है। पुलिस ने ड्राइवर को हिरासत में ले लिया है।

पत्रकार SV Pradeep की दुर्घटना का CCTV फुटेज

एसवी प्रदीप को इससे पहले कई बार धमकियाँ मिल चुकी थीं। उन्होंने हाल ही में पिनाराई विजयन सरकार की तरफ उँगली उठाते कई इनवेस्टिगेटिव रिपोर्ट्स मीडिया में लाई थी, जो केरल के सोना तस्करी मामले से जुड़ा हुआ था। कहा जा रहा है कि वो इस मामले में एक बड़ा खुलासा करने वाले थे। हाल ही में केरल के इस्लामी कट्टरपंथियों ने भी उनकी आलोचना की थी। वो न्यूज़ 18, जय हिन्द, मीडिया वन, मंगलम और कैराली जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों के साथ काम कर चुके थे।

निमोरा पुलिस थाने में पीड़ित परिजनों ने शिकायत दर्ज करा कर उन्हें मिली धमकियों के आधार पर हत्या की आशंका जताई है। केंद्रीय मंत्री वी मुरलीधरन, केरल भाजपा के अध्यक्ष के सुरेंद्रन, और नेता प्रतिपक्ष रमेश चेन्निथला ने इस मामले में जाँच की माँग की है। केरल पुलिस ने एक जॉय नामक व्यक्ति को गिरफ्तार कर के ट्रक को जब्त कर लिया है। सुरेंद्रन ने कहा है कि मृत पत्रकार कई राज खोलने वाले थे।

सितम्बर 2020 में यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (UDF) के संयोजक बेनी बेहानन ने सीपीएम महासचिव सीताराम येचुरी को पत्र लिखकर मुख्यमंत्री पिनराई विजयन को पद से हटाने का आग्रह किया था। उन्होंने कहा था कि जब से मुख्यमंत्री कार्यालय पर सवाल उठने शुरू हुए हैं, पिनराई का पद पर बने रहना अनुचित है। उनका दावा था कि सीएमओ के खिलाफ आरोप गंभीर हैं और पिनराई को जाँच में सहयोग करना चाहिए।

किसान संगठनों को पार्टी बना कर उन पर कल अदालती प्रक्रिया शुरू की जाए: सुप्रीम कोर्ट

दिल्ली-हरियाणा सीमा पर किसानों के आंदोलन को लेकर सुप्रीम कोर्ट में आज सुनवाई हुई। याचिकाकर्ता की ओर से सुप्रीम कोर्ट में गत वर्ष के शाहीनबाग मामले का हवाला दिया गया। कोर्ट ने कहा कि हम चाहते हैं कि हम एक कमिटी गठित करेंगे ताकि विषयों पर चर्चा की जाए। कोर्ट ने कहा कि हम किसान और सरकार, दोनों का पक्ष सुनकर कल सुनवाई करेंगे।

सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि यह एक महत्वपूर्ण विषय है और इसे आपसी सहमति से सुलझाया जाना चाहिए। सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस ने पूछा कि आप चाहते हैं बॉर्डर खोल दिए जाएँ? जिस पर वकील ने कहा कि अदालत ने शाहीनबाग केस के वक्त कहा था कि सड़कें जाम नहीं होनी चाहिए। गौरतलब है कि किसान संगठनों ने सरकार को लिखित में जवाब देते हुए संशोधनों को ठुकरा दिया है। इस मसले पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हो रही है।

सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा है कि वो किसान संगठनों का पक्ष सुनेंगे, साथ ही, सरकार से पूछा कि अब तक इस विषय पर समझौता क्यों नहीं हो पाया? अदालत की ओर से अब किसान संगठनों को नोटिस दिया गया है, अदालत का कहना है कि ऐसे मुद्दों पर जल्द से जल्द समझौता होना चाहिए। अदालत ने सरकार और किसानों के प्रतिनिधियों की एक कमेटी बनाने को कहा है, ताकि दोनों आपस में मुद्दे पर चर्चा कर सकें।

अदालत ने कहा कि राष्ट्रीय मुद्दे सहमति से सुलझाए जाएँ। केंद्र, पंजाब, हरियाणा को सुप्रीम कोर्ट ने नोटिस देकर किसानों से जुड़ी याचिका पर तीनों से कल तक जवाब माँगा है। कल भी सुप्रीम कोर्ट करेगा सुनवाई।

आज की सुनवाई की कुछ अहम बातें –

  • आप सभी लोग एक साथ बैठें। सदस्यों की एक अस्थायी सूची तैयार करें। किसानों के साथ सरकार का जुड़ाव ऐसा नहीं होगा कि ऐसा लगता है।
  • खंडपीठ ने एसजीआई को निर्देश दिया कि वह एक समिति बनाए, जिसमें सरकार के सदस्यों और भारतीय किसान संघ के सभी सदस्य शामिल हों जो वार्ता में शामिल हों और एक सौहार्दपूर्ण समाधान पर पहुँचें।SGI ने कहा- सरकार तैयार थी और तैयार है। लेकिन कठिनाई यह है कि उनका कहना बस यह है कि या तो आप कानूनों को निरस्त करते हैं या नहीं। इनकी या तो हाँ है या नहीं। वो बस ‘हाँ या ना’ की तख्तियां लेकर आते हैं। मंत्री बात करने गए थे, उन्होंने मंत्रियों को भी अपनी पीठ दिखाई।

सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस ने पूछा कि आप चाहते हैं बॉर्डर खोल दिए जाएँ। जिस पर वकील ने कहा कि अदालत ने शाहीन बाग केस के वक्त कहा था कि सड़कें जाम नहीं होनी चाहिए। चीफ जस्टिस ने वकील को टोकते हुए कहा कि वहाँ पर कितने लोगों ने रास्ता रोका था? कानून व्यवस्था के मामलों में मिसाल नहीं दी जा सकती है। चीफ जस्टिस ने सुनवाई के दौरान पूछा कि क्या किसान संगठनों को केस में पार्टी बनाया गया?

CM योगी को हराने के लिए अभी से घेराबंदी: ओवैसी कर रहे गठबंधन, AAP भी है मैदान में

उत्तर प्रदेश के अगले विधानसभा चुनावों में योगी सरकार को हराने के लिए रणनीति बननी अभी से शुरू हो गई है। हैदराबाद के नगर निगम चुनावों में भाजपा से करारी शिकस्त पाने के बाद AIMIM ने तय किया है कि वह यूपी की ओर कूच करेंगे। पार्टी के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने मीडिया से बात करते हुए यह घोषणा की। 

उन्होंने यूपी चुनावों के लिए बताया कि उनकी पार्टी सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी से गठबंधन कर रही है। उन्होंने बुधवार को पार्टी प्रमुख ओम प्रकाश राजभर से मिलकर मीडिया से भी बात की। गठबंधन के लिए आम आदमी पार्टी से बातचीत का सवाल पूछे जाने पर ओवैसी ने कहा, “हम दोनों (वह और ओम प्रकाश राजभर) आपके सामने बैठें हैं। हम साथ में खड़े हैं और हम उनके नेतृत्व में काम करेंगे।”

यहाँ उल्लेखनीय है कि आम आदमी पार्टी ने भी साल 2022 में होने वाले यूपी विधानसभा चुनावों में लड़ने का फैसला किया है। दिल्ली के मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी प्रमुख अरविंद केजरीवाल ने हाल में ऐलान करते हुए बताया था कि उनकी पार्टी उत्तर प्रदेश में साल 2022 में होने वाला विधानसभा चुनाव लड़ेगी।

ओवैसी की नजर भी यूपी विधानसभा चुनावों में इसीलिए बनी हुई है क्योंकि यहाँ काफी मुस्लिम बाहुल्य सीटें है। यही कारण है कि उन्हें अपने विस्तार की संभावनाएँ नजर आ रही हैं। इससे पहले ओवैसी अपनी किस्मत बिहार चुनाव में आजमा चुके हैं। वहाँ पहली बार में AIMIM ने 5 सीटें जीती थी। इसके अलावा मुस्लिम बहुल क्षेत्रों में ओवैसी की पार्टी का वोट शेयर भी बढ़ा हुआ देखा गया था।

इसी तरह हाल में हुए गोवा के जिला पंचायत चुनावों में आम आदमी पार्टी ने भी अपनी किस्मत आजमाई थी। हालाँकि, AAP का केवल 1 सीट से खाता खुल पाया था, बाकी बहुमत भाजपा को मिला था।

बात करें सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के प्रमुख ओम प्रकाश राजभर की तो उन्होंने पिछले चुनावों में भाजपा के साथ मिल कर चुनाव लड़ा था। लेकिन अब पार्टी से अलग होने के बाद वह अपनी राजनीति की जमीन बचाने के लिए ओवैसी से गठबंधन कर चुके हैं। उन्होंने जनभागीदारी संकल्प मोर्चा का गठन किया है। इसमें बाब सिंह कुशवाहा की जन अधिकार पार्टी, राष्ट्रीय उदय पार्टी, राष्ट्रीय उपेक्षित समाज पार्टी और जनक्रांति पार्टी शामिल है।