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नोएडा की एक कोठी में 400+ लड़कियों को किया नंगा, Video बना पोर्न साइट डाला: मियाँ-बीवी चला रहे थे रैकेट, ED छापेमारी से सामने आया इंटरनेशनल लिंक

नोएडा में उज्जवल किशोर और नीलू श्रीवास्तव नाम की पति-पत्नी की जोड़ी पिछले पाँच साल से एक कोठी में गंदा धंधा चला रहे थे। इनका काम था सोशल मीडिया से लड़कियों को मॉडलिंग का लालच देकर पोर्न वीडियो बनाना और उसे साइप्रस की कंपनी टेक्नियस लिमिटेड को बेचना। ये कंपनी XHamster और Stripchat जैसी मशहूर पोर्न वेबसाइट्स चलाती है।

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने जब नोएडा के सेक्टर-105 की इस कोठी में छापा मारा, तो सारा खेल खुल गया। इस रैकेट से इन्होंने 15.66 करोड़ रुपये कमाए और नीदरलैंड के एक गुप्त खाते में 7 करोड़ रुपये जमा किए। कुल मिलाकर 22 करोड़ से ज्यादा की कमाई का पता चला है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईडी की टीम जब कोठी में पहुँची, तो वहाँ 8 लाख रुपये नकद मिले और तीन मॉडल्स भी मौजूद थीं, जो शूटिंग कर रही थीं। इन मॉडल्स के बयान लिए गए हैं। दंपत्ति ने अपनी कंपनी ‘सबडिजी वेंचर्स प्राइवेट लिमिटेड’ के जरिए ये धंधा चलाया।

बाहर से देखने में लगता था कि ये विज्ञापन, मार्केट रिसर्च और जनमत सर्वेक्षण का काम करते हैं, लेकिन असल में ये विदेशी पोर्न साइट्स के लिए अश्लील कंटेंट बना रहे थे। सोशल मीडिया पर फेसबुक, इंस्टाग्राम और व्हाट्सएप के जरिए ये लोग मॉडल्स को ढूँढते थे। विज्ञापन में मॉडलिंग का झाँसा देकर लड़कियों को बुलाया जाता था। ज्यादातर मॉडल्स दिल्ली-एनसीआर से थीं।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, नोएडा में पाँच साल में 400 से ज्यादा लड़कियों को इस धंधे में झोंका गया। वीडियो शूटिंग में हाफ फेस शो, फुल फेस शो और न्यूड जैसी कैटेगरी थीं। काम के हिसाब से मॉडल्स को पैसे मिलते थे, लेकिन कुल कमाई का सिर्फ 25% ही उन्हें दिया जाता। बाकी 75% ये दंपत्ति खुद रखते थे।

इनके खातों में विदेश से पैसे क्रिप्टो और अंतरराष्ट्रीय डेबिट कार्ड के जरिए आते थे। नीदरलैंड के खाते से भी इन्होंने भारत में नकदी निकाली। ईडी का कहना है कि ये FEMA कानून का उल्लंघन है, क्योंकि पोर्न से कमाई को सर्विस फीस बताकर छिपाया गया। इस रैकेट का नेटवर्क साइप्रस, यूरोप और अफ्रीका तक फैला था।

जाँच में पता चला कि उज्जवल पहले रूस के सेक्स सिंडिकेट से जुड़ा था। उसका तजुर्बा इस धंधे में काम आया। कोठी को दिल्ली के एक डॉक्टर से किराए पर लिया गया था और वहाँ स्टूडियो बनाया गया। शूटिंग के लिए कैमरे, लाइट्स और बाकी साजो-सामान तैयार रखे जाते थे। जब धंधा बढ़ा, तो इन्होंने सोशल मीडिया पर ऑडिशन की खबरें फैलाकर और लड़कियों को फँसाया।

इन मॉडल्स को मोटी कमाई का लालच दिया जाता, लेकिन हकीकत में उनका शोषण होता था। ईडी ने बैंक लेनदेन की जाँच शुरू की है और सूत्रों का कहना है कि जल्द ही और गिरफ्तारियाँ हो सकती हैं।

अगर वो CD चल जाती… अब साथी पत्रकार ने खोली राजदीप सरदेसाई की पोल, कहा- उन्होंने ही ‘कैश फॉर वोट स्कैम’ का स्टिंग दबाया, तब वे TV में मेरे बॉस थे

अपने आपको ‘निष्पक्ष’ कहकर कॉन्ग्रेस के लिए रोना रोने वाले राजदीप सरदेसाई का एक बार फिर काला सच सामने आया है। उनके पूर्व साथी और वरिष्ठ पत्रकार मनोज रंजन त्रिपाठी ने कहा है कि कॉन्ग्रेस के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार के समय में राजदीप ने ‘कैश फॉर वोट स्कैम’ का स्टिंग दबा दिया था। त्रिपाठी ने यह बात शुभांकर मिश्रा के पॉडकॉस्ट के दौरान की। बातचीत आप 1 घंटे 22 मिनट से लेकर 1 घंटे 26 मिनट के बीच सुन सकते हैं।

मनोज रंजन त्रिपाठी ने मीडिया इंडस्ट्री के ‘दिग्गज’ पत्रकार को लेकर बताया कि कैसे संसद में जब ये स्कैम उजागर हुआ, उससे पहले 2008 में इस पर स्टिंग हो चुका था। लेकिन, तब राजदीप सरदेसाई उनके बॉस थे और उन्होंने इस स्टिंग ऑपरेशन को दबा दिया।

मनोज रंजन ने कहा कि अगर वो सीडी चल जाती तो अमर सिंह से लेकर कई बड़े नेता इसमें फँसते… लेकिन राजदीप बॉस थे। मनोज रंजन ने बातचीत में साफ तौर पर कहा कि अगर ये पॉडकॉस्ट राजदीप देख लें तो भी उन्हें कोई दिक्कत नहीं, क्योंकि जो वो बोल रहे वो सच हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि राजदीप ने स्टिंग को दबाया और वो ऐसे सौ लोग को जानते हैं जिन्हें पता है राजदीप ने स्टिंग को दबाया।

इस खुलासे के बाद अब लोग राजदीप सरदेसाई से जवाब माँग रहे हैं।

बता दें कि ये पहली बार नहीं है कि राजदीप के ऊपर यूपीए काल में इस स्टिंग को दबाने का आरोप लगा हो। इससे पूर्व दूरदर्शन न्यूज़ के एंकर अशोक श्रीवास्तव ने ‘इंडिया टुडे’ के कंसल्टिंग एडिटर राजदीप सरदेसाई को लेकर खुलासा किया था।

उन्होंने कहा था, जब कैश फॉर वोट कांड हुआ था, राजदीप सरदेसाई जिस चैनल के हेड थे अगर वो उस स्टिंग ऑपरेशन को प्रसारित कर देता तो शायद तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली UPA सरकार गिर जाती।

अशोक श्रीवास्तव ने आगे बताया, “मनमोहन सिंह की सरकार को बचाने के लिए पैसों का जो लेनदेन हुआ था, उस पर एक स्टिंग ऑपरेशन हो गया था। राजदीप सरदेसाई उस स्टिंग ऑपरेशन को देखने के बाद एक संपादक के रूप में निर्णय लिया कि इसे टेलीकास्ट करने से पहले वो इसकी जाँच करेंगे। आपने जाँच के नाम पर कई महीनों तक उसे रोक कर रखा। मनमोहन सिंह की सरकार बन गई, उसके बाद राजदीप सरदेसाई को पद्मश्री सम्मान दिया जाता है।”

अशोक श्रीवास्तव के बाद ये खुलासा मनोज रंजन त्रिपाठी ने किया है जो बड़े-बड़े मीडिया संस्थानों में बतौर पत्रकार सेवा दे चुके हैं और राजदीप के साथ काम करने का अनुभव रखते हैं। इस पॉडकॉस्ट में उन्होंने मीडिया इंडस्ट्री पर भी बात की। बताया कि उनके सामने ऐसा हुआ है कि वो लाशों के बीच खड़े रहे और उन्हें कैमरे पर आने से पहले TIE पहनने को कहा गया है कि कितने भी वीभत्स विजुअल हों, पहले टाई पहनकर ही सामने आएँगे।

कंबल-तिरपाल से लेकर भोजन तक, अस्पताल से लेकर NDRF का अभियान तक… म्यांमार की मदद के लिए सबसे पहले पहुँचा भारत: भूकंप में 1600+ मौतें

म्यांमार में आए विनाशकारी भूकंप में अब तक 1,644 लोग मारे जा चुके हैं, 3408 घायल हैं और सैकड़ों लापता हैं। अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण ने चेतावनी दी कि मृतकों की संख्या 10,000 से ज्यादा हो सकती है। इमारतें मलबे में बदल गईं, पुल टूट गए, मस्जिदें और मठ तबाह हो गए। इस भयानक आपदा के बीच भारत ने सबसे पहले मदद का हाथ बढ़ाया और ‘ऑपरेशन ब्रह्मा’ शुरू किया। भारत की राहत सामग्री और बचाव टीम ने म्यांमार के लोगों के लिए उम्मीद की किरण जगाई है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारत ने 80 सदस्यों वाली एनडीआरएफ (नेशनल डिजास्टर रिस्पॉन्स फोर्स) टीम को म्यांमार भेजा, जो शहरी खोज और बचाव कार्यों में माहिर है। शनिवार (29 मार्च 2025) को भारतीय वायुसेना का C-130J विमान हिंडन एयर फोर्स स्टेशन से राहत सामग्री लेकर नेपीडा पहुँचा। इस विमान में कंबल, तिरपाल, स्वच्छता किट, स्लीपिंग बैग, सोलर लैंप, खाद्य पैकेट और रसोई सेट जैसी जरूरी चीजें शामिल थीं।

नेपीडा में भारतीय राजदूत अभय ठाकुर और म्यांमार के विदेश मंत्रालय के अधिकारी मॉन्ग मॉन्ग लिन ने टीम का गर्मजोशी से स्वागत किया। इसके बाद एनडीआरएफ टीम रविवार सुबह मांडले पहुँची, जहाँ वह सबसे पहले बचाव कार्य में जुट गई। म्यांमार का हवाई अड्डा आंशिक रूप से बंद है, फिर भी भारत ने तेजी दिखाई।

एनडीआरएफ के डीआईजी मोहसिन शाहेदी ने बताया कि अगले 24-48 घंटे बेहद अहम हैं। भारत ने राहत कार्य को दो चरणों में बाँटा। कई सी-130 विमान म्यांमार पहुँच चुके हैं। पहली टीम में एनडीआरएफ के जवान गए, तो दूसरी टीम में फील्ड हॉस्पिटल, आर्मी रेक्यूअर की टीम और मेडिकल हेल्प के साथ राहत सामग्री भेजी गई है। इसके अलावा कोलकाता में एक रिजर्व टीम भी तैयार रखी गई है, जो जरूरत पड़ने पर तुरंत रवाना होगी।

भूवैज्ञानिक जेस फीनिक्स ने कहा कि इस भूकंप की ताकत 334 परमाणु बमों के बराबर थी और आफ्टरशॉक महीनों तक आ सकते हैं। म्यांमार में चल रहा गृहयुद्ध और कम्यूनिकेशन ब्लॉकेज राहत कार्यों को मुश्किल बना रहा है।

इस बीच, म्यांमार की शैडो सरकार एनयूजी ने दो हफ्ते का संघर्षविराम घोषित किया ताकि राहत पहुँच सके। चीन ने 37 सदस्यों वाली टीम और रूस ने 120 बचावकर्मियों के साथ आपात सामग्री भेजी है। वहीं, म्यांमार की सैन्य सरकार ने नेपीडा और मांडले समेत छह क्षेत्रों में आपातकाल लगाया है। हालाँकि उसकी खुद की क्षमता सीमित है।

बता दें कि भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सैन्य प्रमुख जनरल मिन आंग ह्लाइंग एक दिन पहले ही बातचीत भी की है। उन्होंने फोन पर बातचीत में म्यांमार को हरसंभव मदद का भरोसा दिया है।

वक्फ बिल के विरोध में काली पट्टी बाँध पहुँचे नमाज पढ़ने, हो गई चाकूबाजी: जानिए मध्य प्रदेश की मस्जिद में मुस्लिमों के बीच ही क्यों बची मारकाट

मध्य प्रदेश के रायसेन जिले में रमजान के आखिरी जुमे की नमाज के दौरान बड़ा हंगामा हो गया। बेगमगंज की मकबरा मस्जिद में वक्फ संशोधन बिल 2024 के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान दो मुस्लिम पक्षों में झड़प हो गई। प्रदर्शनकारी पीएम नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह को निशाना बना रहे थे, लेकिन काली पट्टी बाँधने को लेकर 2 पक्षों में भिडंत हो गई। इस झड़प में चाकूबाजी हुई, जिसमें चार लोग घायल हो गए। पुलिस ने तीन हमलावरों – शकील अहमद पठान, लईक पठान और नवेद पठान को गिरफ्तार कर लिया है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, शुक्रवार (28 मार्च 2025) को दोपहर करीब 1 बजे जोहर की नमाज के लिए लोग मस्जिद में जमा थे। ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) ने एक दिन पहले वक्फ बिल के खिलाफ काली पट्टी बाँधकर विरोध करने की अपील की थी।

सैयद सावेश अली और उनके साथियों ने इस अपील पर काली पट्टी बाँधी, जिसका मुस्लिम त्योहार कमेटी के अध्यक्ष शकील अहमद पठान ने विरोध किया। उन्होंने सावेश से कहा कि मस्जिद में पीएम मोदी और अमित शाह के खिलाफ राजनीतिक विरोध के लिए काली पट्टी बाँधने से पहले कमेटी से इजाजत लेनी चाहिए थी।

सावेश ने उनकी बातों का विरोध किया, जिसके बाद बहस शुरू हो गई। देखते ही देखते बहस हाथापाई में बदल गई। शकील अहमद पठान और उनके भाइयों लईक पठान और नवेद पठान ने सावेश और उनके साथियों पर चाकुओं से हमला कर दिया। इस हमले में सैयद सावेश अली, सैयद नवेद अली, सैयद अहद अली और सैयद शारिक अली घायल हो गए। सैयद नवेद अली को गंभीर हालत में रायसेन जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया, जबकि बाकी तीन का इलाज बेगमगंज के सिविल अस्पताल में चल रहा है।

चाकूबाजी की वजह से मस्जिद में भगदड़ मच गई। खून से फर्श लाल हो गया, जिसके चलते अलविदा की नमाज एक घंटे देर से पढ़ी गई। सावेश अली की शिकायत पर पुलिस ने तुरंत एक्शन लिया।

बेगमगंज थाना प्रभारी राजीव उइके ने बताया कि शकील अहमद पठान, लईक पठान और नवेद पठान को गिरफ्तार कर लिया गया है। उनके खिलाफ धारा 296, 115(2), 118(1), 351(2) और 3(5) बीएनएस के तहत केस दर्ज किया गया है। पुलिस का कहना है कि मामले की जाँच चल रही है।

प्रधानमंत्री के रूप में पहली बार संघ मुख्यालय पहुँचे PM मोदी, संस्थापक हेडगेवार और गोलवलकर को दी श्रद्धांजलि: दीक्षा भूमि जाकर अंबेडकर को भी किया नमन

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज रविवार (30 मार्च 2025) को नागपुर के रेशम बाग स्थित राष्ट्रीय स्वयंसवेक संघ के मुख्यालय का दौरा किया। उन्होंने शताब्दी वर्ष मना रहे संघ के मुख्यालय में स्मृति मंदिर जाकर RSS के संस्थापक डॉक्टर केशव बलिराम हेडगेवार और द्वितीय सरसंघचालक माधव सदाशिव गोलवलकर को श्रद्धांजलि अर्पित की। इसके बाद वे भीमराव अंबेडकर से जुड़ी दीक्षा जाकर उन्हें श्रद्धांजलि दी।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की RSS हेडक्वाटर की यात्रा ऐतिहासिक है। संघ मुख्यालय जाने वाले वे दूसरे प्रधानमंत्री हैं। इससे पहले अटल बिहारी वाजपेयी ने 27 अगस्त 2000 को संघ कार्यालय की यात्रा की थी। पीएम मोदी के साथ राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉक्टर मोहनराव भागवत भी मौजूद थे। इस दौरान उन्होंने भागवत एवं संघ के अन्य वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाकात की।

पीएम मोदी दीक्षा भूमि जाकर भगवान गौतम बुद्ध और डॉक्टर भीमराव अंबेडकर को भी श्रद्धांजलि दी। इसी जगह पर डॉक्टर अंबेडकर ने सन 1956 में अपने हजारों अनुयायियों के साथ बौद्ध धर्म अपना लिया था। दीक्षा भूमि के बाद वे कई अन्य कार्यक्रमों में हिस्सा लेंगे। वे नागपुर में माधव नेत्रालय प्रीमियम सेंटर की आधारशिला रखेंगे। वे सोलर डिफेंस एंड एयरोस्पेस लिमिटेड की गोला-बारूद केंद्र का दौरा करेंगे।

विभिन्न कार्यक्रमों में पीएम मोदी के साथ संघ प्रमुख मोहन भागवत के साथ मंच भी साझा करेंगे। पीएम मोदी के इस दौरे को यादगार बनाने के लिए भाजपा ने पूरी तैयारी की है। महाराष्ट्र भाजपा के अध्यक्ष चंद्रशेखर बावनकुले ने बताया कि प्रधानमंत्री मोदी के नागपुर आगमन पर पूरे विदर्भ में उत्साह है। प्रधानमंत्री मोदी के भव्य स्वागत के लिए 47 स्थानों पर तैयारी की गई है।

बता दें कि गुजरात के मुख्यमंत्री रहते हुए नरेंद्र मोदी साल 2012 में संघ मुख्यालय जा चुके हैं। इसके बाद साल 2013 में एक बैठक में हिस्सा लेने के लिए आरएसएस हेडक्वार्टर गए थे। हालाँकि, प्रधानमंत्री के रूप में नरेंद्र मोदी की संघ प्रमुख मोहन भागवत की मुलाकात कई मौकों पर हो चुकी है। इनमें राम मंदिर उद्घाटन का कार्यक्रम भी एक प्रमुख मौका था।

पीएम मोदी की नागपुर यात्रा को देखते हुए उनकी सुरक्षा की महत्वपूर्ण तैयारी की गई है। वहाँ 4,000 से अधिक पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई है। इसके अलावा, केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) की 5 कंपनियों और 1500 होमगार्ड को भी तैनात किया गया है। इसके अलावा, दूसरे जिलों से करीब 150 अधिकारियों को बुलाया गया है।

‘सब अल्लाह की देन’: हापुड़ की 42 साल की गुड़िया ने 12वें बच्चे को दिया जन्म, बच्चों ने बताया- अब्बू काम-धंधा नहीं करते, बस शराब पीते हैं और अम्मी को गालियाँ देते हैं

उत्तर प्रदेश के हापुड़ में रहने वाले इमामुद्दीन और गुड़िया के घर 12वीं बार किलकारी गूँजी। पिलखुवा कस्बे के बजरंगपुरी मोहल्ले में रहने वाली 42 साल की गुड़िया ने गुरुवार (28 मार्च 2025) को मेरठ ले जाते वक्त एंबुलेंस में अपनी बेटी को जन्म दिया। उनका कहना है, “सब अल्लाह की देन है।” इमामुद्दीन और गुड़िया 12 बच्चे पैदा कर चुके हैं, जिनमें से 2 जुड़वाँ बच्चों की मौत हो गई थी, और एक बच्ची अपने जेठ को दे दिया। अब 9 बच्चे उनके पास हैं।

हालाँकि अस्पताल की सीएमएस का बयान सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें वो बताती हैं कि इमामुद्दीन और गुड़िया के घर ये 14वाँ बच्चा पैदा हुआ है। जच्चा-बच्चा पूरी तरह से स्वस्थ हैं। उन्होंने बताया कि अस्पताल के बाहर ही बच्चा पैदा हो चुका था, बाद में अस्पताल में लाकर अन्य इलाज दिए गए। बच्चे का वजन 1800 ग्राम से ज्यादा है और उसे किसी तरह का खतरा नहीं है।

बड़े बेटे साहिल (24 साल) ने बताया कि अम्मी और नई बहन दोनों ठीक हैं। लेकिन हालात आसान नहीं हैं। गुड़िया का शौहर इमामुद्दीन शराबी है। जो कमाता है, सब शराब में उड़ा देता है। घर का खर्चा साहिल और उसका भाई मजदूरी करके चलाते हैं। साहिल कहता है, “अब्बू को बच्चों की परवाह नहीं, बस शराब पीते हैं और अम्मी को गालियाँ देते हैं।”

गुड़िया के सारे बच्चे अनपढ़ हैं, सिर्फ साहिल 8वीं तक पढ़ा है। वो अपने भाई-बहनों को घर पर थोड़ा-बहुत पढ़ाने की कोशिश करता है। परिवार 800 रुपये किराए के एक कमरे में रहता है।

दैनिक भास्कर ने अपनी ग्राउंड में रिपोर्ट में बताया है कि उनकी टीम गुड़िया के घर पहुँची। उनका घर सिर्फ 14×12 का एक कमरा है। अंदर ही किचन, चूल्हा, और चार बर्तन। खाने के डिब्बे खाली, कपड़े अलमारी में ठूँसे हुए। सोने के लिए तीन बिस्तर, बेड तक नहीं। गर्मी में साहिल और पिता बाहर सोते हैं। इस घर का किराया सिर्फ 800 रुपया महीने का है।

गुड़िया के हवाले से बताया गया है कि उसका निकाह करीब 18 साल की उम्र में हुआ था। वो मेरठ के स्थाई निवासी हैं। पहला बच्चा 1999 में ही हुआ, इस हिसाब से पहले बच्चे की उम्र करीब 26 साल की होगी। कई रिपोर्ट्स में गुड़िया की उम्र 50 साल बताई जा रही है। तो कई में 42 साल। ऐसे में पहले बच्चे की उम्र को ही देख लें तो गुड़िया की औसत उम्र 45 साल हो सकती है।

गुड़िया कहती है, “पहले शौहर अच्छा था, लेकिन शराब की लत ने सब बर्बाद कर दिया। अब वो अपनी कमाई सिर्फ शराब में उड़ाया है। घर चलाने के लिए मैं भी मजदूरी करती थी, लेकिन अब दोनों बेटे कमाते हैं।”

ये पूछा गया कि क्या वो आगे भी बच्चे पैदा करेगी, इस सवाल के जवाब में वो कहती है, “ये अल्लाह की मर्जी है।” घर में खाने का ठिकाना नहीं। सुबह खाएँ तो शाम की चिंता, शाम खाएँ तो सुबह की फिक्र। फिर भी गुड़िया सबकुछ अल्लाह पर छोड़ देती है।

गुड़िया की एक बेटी की शादी हो चुकी है, वो अपनी बेटी के साथ अम्मी से मिलने आई थी। बताया जा रहा है कि उस लड़की की उम्र सिर्फ 18-19 साल है, और उसकी शादी 2017 में ही हो गई थी, मतलब 13-14 साल की उम्र में ही… और अब वो खुद एक बच्ची की अम्मी है।

गुड़िया का सबसे बड़ा बेटा 24 साल का साहिल बताता है, “मैं वेल्डिंग करता हूँ, और छोटा भाई मजदूरी। उसी से घर चलता है। अब्बू तो अम्मी को घर न आने तक कहते हैं।” गुड़िया के पास उम्मीद बस अल्लाह है।

गुड़िया के बच्चों में साहिल (24), राहिल (23), समीर (20), रिहाना (19) शादीशुदा, इमराना (17), रमजानि (15), फैजान (13), अलीशा (6) और आरम (4) हैं। आरम को उसने अपने जेठ को दे दिया है। अभी नई बच्ची का नाम नहीं रखा गया है।

हिंदुओं का धार्मिक जुलूस जाता देख भड़के नमाजी, बवाल में घरों-दुकानों में तोड़-फोड़: बंगाल के मालदा में हिंसा के बाद सुरक्षाबल तैनात, 34 उपद्रवी गिरफ्तार

पश्चिम बंगाल के मालदा जिले के मोथाबाड़ी में 27 मार्च को हुई सांप्रदायिक हिंसा में पुलिस ने 34 उपद्रवियों को गिरफ्तार किया है। एहतियात के तौर पर प्रशासन ने इलाके में इंटरनेट सेवा बंद कर दी है। इसके साथ रैपिड एक्शन फोर्स की तीन कंपनियों को तैनात किया गया है। दरअसल, 28 मार्च को भाजपा ने आरोप लगाया था कि मोथाबाड़ी में हिंदुओं के घरों एवं दुकानों को चुन-चुनकर निशाना बनाया जा रहा है।

इसको लेकर भाजपा नेता सुवेंदु अधिकारी ने राज्यपाल सीवी आनंद बोस को पत्र लिखा था। इस पत्र में उन्होंने राज्य सरकार को निर्देश देने की माँग की थी कि मोथाबारी क्षेत्र में हिंदुओं की सुरक्षा के लिए CAPF (केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल) की तैनाती की जाए। सुवेंदु अधिकारी ने कहा था कि इलाके में हिंदुओं को खतरा बढ़ता जा रहा है और उनकी सुरक्षा के लिए तत्काल कदम उठाने की जरूरत है।

ईद की नमाज और त्योहार को देखते हुए प्रशासन ने इलाके में धारा 144 नहीं लागू की है। उधर, कलकत्ता हाई कोर्ट ने शुक्रवार (28 मार्च) को जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक (SP) से इस मामले में 3 अप्रैल तक एक्शन रिपोर्ट माँगी है। कोर्ट ने कहा कि मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए यह अपेक्षा की जाती है कि सरकार को हिंसा से प्रभावित लोगों की सुरक्षा के लिए उचित कदम उठाने चाहिए।

मीडिया रिपोर्ट में कहा जा रहा है कि 26 मार्च को मोथाबाड़ी मस्जिद में नमाज हो रही थी। इस दौरान वहाँ से हिंदुओं का एक धार्मिक जुलूस गुजर रहा था। जुलूस में लोग जयकारे लगाते जा रहे थे। इससे मुस्लिम नाराज हो गए और उन्होंने वहाँ से गुजरने एवं जयकारे लगाने का विरोध किया। बाद में भीड़ उग्र हो गई और कई हिंदुओं के घरों, दुकानों और गाड़ियों को लूटकर उनमें तोड़फोड़ एवं आगजनी की।

इसके बाद अगले दिन शुक्रवार को हिंदू पक्ष ने हिंसा के विरोध में प्रदर्शन किया। जिले के इंग्लिश बाजार थाना इलाके के बाँधापुकुर मोड़ पर काफी संख्या में लोग पहुँचे और सड़क जाम कर दिया। पुलिस ने भीड़ को जबरन हटाने की कोशिश की तो भीड़ उग्र हो गई। इस दौरान पुलिस ने भीड़ पर लाठी चार्ज किया और आँसू गैस के गोले दागे। इसके बाद भीड़ नियंत्रित हुई।

पुलिस महानिरीक्षक राजेश यादव का कहना है कि राज्य सशस्त्र पुलिस और RAF की तीन कंपनियों को कालियाचक ब्लॉक के संवेदनशील इलाकों में तैनात किया गया है। मालदा पुलिस का कहना है कि इस हिंसा को लेकर अब तक छह मामले दर्ज किए गए हैं और कुल 34 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। अन्य लोगों की पहचान और उनकी गिरफ्तारी के प्रयास किए जा रहे हैं।

इस मामले को भाजपा नेता सुवेंदु अधिकारी ने 28 मार्च को उठाया था। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर कुछ वीडियो शेयर करते हुए उन्होंने आरोप लगाया था कि मोथाबाड़ी में हिंदू व्यापारियों की दुकानों को निशाना बनाया जा रहा है। वहीं, केंद्रीय शिक्षा एवं उत्तर-पूर्वी क्षेत्र विकास राज्यमंत्री डॉक्टर सुकांत मजूमदार ने भी हिंसा से संबंधित कई वीडियो सोशल मीडिया पर साझा किया थ।

सुकांत मजूमदार ने वीडियो शेयर करते हुए सोशल मीडिया पर लिखा था, “दक्षिण मालदा के मोथाबाड़ी से भयावह दृश्य– हिंदू घरों और दुकानों को हिंसक भीड़ द्वारा तोड़ा गया। ममता बनर्जी और उनकी मूकदर्शक बंगाल पुलिस क्या कर रहे हैं? चुप्पी। यह उनकी बेशर्म तुष्टीकरण राजनीति की कीमत है- कानूनहीनता, भय और हिंदुओं के साथ अन्याय!”

म्यांमार में 334 परमाणु बमों जितनी उर्जा वाला था भूकंप, मृतकों की संख्या 1000 के पार : भारत ने शुरू किया ‘ऑपरेशन ब्रह्मा’, PM मोदी ने मिलिटरी जुंटा चीफ से की बात

म्यांमार में शुक्रवार (28 मार्च 2025) को आए 7.7 तीव्रता के भूकंप ने भयानक तबाही मचाई है। मृतकों की संख्या 1000 को पार कर चुकी है। रॉयटर्स के मुताबिक, सैन्य सरकार ने बताया कि 1,002 लोग मर चुके हैं, 2400 से ज्यादा घायल हैं।

इस बीच, शनिवार (29 मार्च 2025) दोपहर 3:30 बजे फिर 5.1 तीव्रता का झटका आया, जिससे लोग दहशत में घरों से भागे। दो दिन में तीन बड़े झटके सहम गए हैं। वहीं, भारी तबाही के चलते म्यांमार के 6 राज्यों और पूरे थाईलैंड में इमरजेंसी लगा दी गई है।

म्यांमार में मची तबाही के बीच, भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सैन्य प्रमुख जनरल मिन आंग ह्लाइंग से भी बात कर मदद की बात कही है। पीएम मोदी ने कहा कि करीबी दोस्त और पड़ोसी के रूप में, भारत इस कठिन समय में म्यांमार के लोगों के साथ मजबूती से खड़ा है।

म्यांमार की मदद के लिए भारत ने ‘ऑपरेशन ब्रह्मा’ शुरू कर दिया है। इसके तहत पहली खेप में 15 टन राहत सामग्री शामिल है, जिसमें टेंट, कंबल, स्लीपिंग बैग, खाने के पैकेट, स्वच्छता किट, जनरेटर और आवश्यक दवाएँ शामिल हैं। भारत अपनी तरफ से मदद बढ़ा रहा है। भारत ने राहत कार्यों में तेजी लाने के लिए NDRF के 80 बचाव कर्मियों का एक दल भी भेजा है।

अमेरिकी एजेंसी यूनाइटेड स्टेट जियोलॉजिकल सर्वे USGS का कहना है कि मृतकों की संख्या 10,000 तक जा सकती है। यूएसजीएस ने कहा कि शोधकर्ताओं ने बताया कि म्यांमार दो भूगर्भीय प्लेटों के बीच में स्थित है, इस कारण वहाँ भूकंप की स्थिति ज्यादा खराब होती है। इस भूकंप के विनाशकारी होने के पीछे की सबसे बड़ी वजह ये है कि इसका केंद्र धरती में बहुत गहराई में नहीं था। आम तौर पर भूकंप के केंद्र जमीन में 25 किमी तक नीचे होते हैं, लेकिन इस भूकंप का केंद्र महज 10 किमी ही नीचे था।

थाईलैंड के बैंकॉक में 30 मंजिला इमारत ढह गई, 10 लोगों की जान चली गई। वहाँ 2,000 से ज्यादा इमारतों को नुकसान हुआ। थाईलैंड में एक मस्जिद गिरने से 20 लोगों की भी मौत की खबर आई है। वहीं, कई बौद्ध पगोडा भी तबाह हो चुके हैं।

जियोलॉजिस्ट जेस फीनिक्स ने CNN से कहा म्यांमार से थाईलैंक तक आए इस भूकंप ने 334 परमाणु विस्फोट जितनी ऊर्जा पैदा की, ऐसे झटके महीनों तक आ सकते हैं। इस भूकंप की वजह से पैदा हुई उर्जा ने सबकुछ तबाह कर दिया है और पलक झपकते ही बड़ी से बड़ी बिल्डिंगें जमींदोज हो गई। बिल्डिंगों के गिरने के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं। इसका असर दूसरे दिन 5.1 तीव्रता के भूकंप के झटके से दिख भी चुका है।

थाईलैंड के जियोलॉजिस्ट्स के मुताबिक यह देश में 200 साल में आया सबसे बड़ा भूकंप है। भूकंप के झटके इतने शक्तिशाली थे कि केंद्र से सैंकड़ों किमी दूर बैंकॉक के कई इमारतें नष्ट हो गईं।

बता दें कि 1930 से 1956 तक 6 बड़े भूकंप आए थे। इस बार भी मांडले में इरावदी नदी का पुराना अवा ब्रिज ढह गया। लोग डरे हुए हैं, घरों में जाने की हिम्मत नहीं। म्यांमार की खराब मेडिकल सुविधाएँ मुसीबत बढ़ा रही हैं। हर तरफ अफरा-तफरी है, लोग अपनों को ढूँढ रहे हैं।

जयपुर में वीर तेजाजी की मूर्ति तोड़ने पर भड़के लोग, टोंक रोड किया जाम : MP हनुमान बेनीवाल बोले – ‘ये धार्मिक भावनाओं को भड़काने की साजिश’

जयपुर के साँगानेर इलाके में शुक्रवार (28 मार्च 2025) को वीर तेजाजी महाराज के मंदिर में उनकी मूर्ति को अज्ञात लोगों ने तोड़ दिया। जिसके बाद लोग भड़क गए और सड़क पर उतर कर प्रदर्शन करने लगे। ये मामला प्रताप नगर सेक्टर-3 का है, जहाँ शनिवार (29 मार्च 2025) की सुबह जब श्रद्धालुओं ने यह देखा, तो वो भड़क गए। तेजाजी महाराज की मूर्ति को क्षतिग्रस्त देखकर स्थानीय लोग सड़कों पर उतर आए। जयपुर-टोंक रोड पर टायर जलाए गए, नारेबाजी हुई और करीब तीन घंटे तक जाम लगा रहा।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, सुबह 10 बजे से मंदिर के बाहर भीड़ जमा होने लगी थी। विश्व हिंदू परिषद (VHP) और बजरंग दल के कार्यकर्ता भी पहुँच गए। गुस्साए लोगों ने दोषियों की तुरंत गिरफ्तारी की माँग की। पुलिस ने समझाने की कोशिश की, लेकिन जब बात नहीं बनी तो हल्की ताकत का इस्तेमाल कर जाम खुलवाया। अब स्थिति कंट्रोल में है, लेकिन लोगों का गुस्सा अभी ठंडा नहीं हुआ। साँगानेर के बाजार बंद रहे, दुकानें सूनी पड़ी थीं।

नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल मौके पर पहुँचे और इसे धार्मिक भावनाओं को भड़काने की साजिश बताया। उन्होंने जयपुर पुलिस कमिश्नर से फोन पर बात कर दोषियों पर सख्त कार्रवाई की माँग की। वहीं, नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने कहा, “यह सिर्फ मूर्ति नहीं, हमारी विरासत और आस्था पर हमला है। सरकार तुरंत कदम उठाए।” विधायक विकास चौधरी और रामनिवास गावाड़िया भी वहाँ पहुँचे, लोगों को शांत करने की कोशिश की।

इस बीच, पुलिस ने भारी फोर्स तैनात कर दी है। मंदिर के सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं, और कुछ संदिग्धों के सुराग मिले हैं। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जल्द ही आरोपितों को पकड़ लिया जाएगा। लोगों का कहना है कि सिर्फ गिरफ्तारी से काम नहीं चलेगा, धार्मिक स्थलों की सुरक्षा भी सुनिश्चित होनी चाहिए। यह घटना जयपुर के लिए एक काला धब्बा बन गई है, जिसने हर किसी को सोचने पर मजबूर कर दिया।

बता दें कि राजस्थान सरकार ने साल 2023 में वीर तेजाजी कल्याण बोर्ड बनाया था, ताकि समाज की बेहतरी के लिए काम हो सके। लेकिन आज लोग पूछ रहे हैं- जब आस्था की रक्षा ही न हो सके, तो ऐसे बोर्ड का क्या फायदा? फिलहाल, पुलिस और प्रशासन हालात पर नजर रखे हुए हैं। उम्मीद है कि दोषियों को सजा मिलेगी और लोग फिर से शांति से अपने आराध्य की पूजा कर सकेंगे।

इस्लाम को नीचा दिखाता है हिंदुत्व… US की ह्यूस्टन विश्वविद्यालय में पढ़ाया जा रहा ऐसा ‘हिंदूफोबिक’ कंटेंट: भारतीय छात्र भड़के, विरोध देख यूनिवर्सिटी ने जारी की सफाई

अमेरिका के ह्यूस्टन यूनिवर्सिटी में चल रहा एक कोर्स ‘लिव्ड हिंदू रिलिजन’ इन दिनों सुर्खियों में है। भारतीय-अमेरिकी छात्र ने इस कोर्स पर हिंदूफोबिया यानी हिंदू विरोधी होने का गंभीर आरोप लगाया है। उनका कहना है कि ये कोर्स हिंदू धर्म को गलत तरीके से पेश करता है और भारत के राजनीतिक हालात को तोड़-मरोड़ कर दिखाता है।

दूसरी तरफ, यूनिवर्सिटी ने इसका बचाव करते हुए कहा कि ये कोर्स एकेडमिक फ्रीडम का हिस्सा है और इसमें किसी धर्म के खिलाफ कोई भेदभाव नहीं है। इस विवाद ने सोशल मीडिया से लेकर अखबारों तक हंगामा मचा दिया है।

भारतीय-अमेरिकी छात्र वसंत भट्ट का आरोप है कि कोर्स को पढ़ाने वाले प्रोफेसर आरोन माइकल उलरे हिंदू धर्म को एक ‘औपनिवेशिक ढाँचा’ बताते हैं, न कि प्राचीन और जीवंत परंपरा। भट्ट के मुताबिक, प्रोफेसर कहते हैं कि ‘हिंदू’ शब्द हाल का है और इसे पुराने ग्रंथों में नहीं देखा जाता। कोर्स में ये भी दावा किया गया कि हिंदुत्व यानी ‘हिंदू-नेस’ को हिंदू राष्ट्रवादी इस्तेमाल करते हैं ताकि दूसरे मजहबों, खासकर इस्लाम को नीचा दिखा सकें।

भट्ट ने कोर्स का एक हिस्सा शेयर किया, जिसमें कहा गया, “हिंदू शब्द नया है, ग्रंथों में नहीं मिलता। हिंदुत्व वो शब्द है, जिसे हिंदू राष्ट्रवादी अपनी पहचान के लिए इस्तेमाल करते हैं।” ये सुनकर भट्ट और कई हिंदू छात्रों का गुस्सा भड़क उठा। उनका मानना है कि ये उनकी आस्था पर हमला है।

इतना ही नहीं, कोर्स में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ‘हिंदू कट्टरपंथी’ कहा गया और भारत को हिंदू राष्ट्रवादी देश बताते हुए अल्पसंख्यकों पर अत्याचार का आरोप लगाया गया। भट्ट ने इसे ‘बौद्धिक रूप से खोखला’ और ‘हिंदूफोबिक’ करार दिया।

सोशल मीडिया पर भी लोगों ने गुस्सा जाहिर किया। एक यूजर ने लिखा, “मोदी को हिंदू कट्टरपंथी कहना और हमारी परंपरा को राजनीतिक हथियार बताना हिंदूफोबिया है।”

हिंदू ऑन कैंपस नाम के एक स्टूडेंट ग्रुप ने कहा, “इन दावों के पीछे कोई सबूत नहीं है। राजनीतिक मतभेद ठीक हैं, लेकिन हिंदू पहचान को बदनाम करना गलत है।” भट्ट ने इसकी शिकायत कॉलेज ऑफ लिबरल आर्ट्स एंड सोशल साइंसेज के डीन से की, जिसके बाद यूनिवर्सिटी ने जाँच शुरू की।

सोशल मीडिया पर विवाद बढ़ता देख हिंदू ऑन कैंपस ने ट्वीट किया, “मोदी पर कोर्स का हमला नस्लीय और धार्मिक भेदभाव है।” कई लोगों ने इसे उदारवादी शिक्षा में हिंदू विरोधी रवैये का सबूत बताया। एक यूजर ने लिखा, “हिंदू धर्म को सदियों से गलत दिखाया गया, और अब ह्यूस्टन यूनिवर्सिटी भी यही कर रही है।” भट्ट का कहना है कि कोर्स हिंदू धर्म की जटिलता और समृद्धि को नजरअंदाज करता है और इसे सिर्फ एक राजनीतिक साजिश के तौर पर पेश करता है।

यूनिवर्सिटी ने दी सफाई

इस मुद्दे पर यूनिवर्सिटी की तरफ से सफाई जारी की गई है। ह्यूस्टन यूनिवर्सिटी ने बयान जारी कर कहा कि वो एकेडमिक फ्रीडम को महत्व देती है। यूनिवर्सिटी के मुताबिक, ‘लिव्ड हिंदू रिलिजन’ कोर्स धार्मिक अध्ययन के अकादमिक ढाँचे पर आधारित है। यूनिवर्सिटी का कहना है कि ‘फंडामेंटलिज्म’ जैसे शब्द इसमें विश्लेषण के लिए इस्तेमाल होते हैं, न कि किसी धर्म को नीचा दिखाने के लिए।

बयान में कहा गया, “धार्मिक अध्ययन में फंडामेंटलिज्म का मतलब एक ऐसी विचारधारा से है जो धर्म के ‘सच्चे’ रूप को बनाए रखने का दावा करती है। ये कोई आलोचना नहीं, बल्कि धर्म के विकास को समझने का तरीका है।” यूनिवर्सिटी ने ये भी साफ किया कि कोर्स में भारत में हिंदू राष्ट्रवाद के उभार को मौजूदा घटनाओं से जोड़ा गया है, लेकिन ये हिंदू धर्म की आलोचना नहीं है।

इस कोर्ट को तैयार करने वाले प्रोफेसर उलरे ने भी सफाई दी है। उनका कहना है कि कोर्स में हिंदू धर्म को एकरूप नहीं दिखाया गया। उन्होंने कहा, “मैंने कभी हिंदू धर्म को औपनिवेशिक ढाँचा या अल्पसंख्यकों पर अत्याचार का जरिया नहीं कहा। कोर्स में हिंदू धर्म की ऐतिहासिक जटिलता और समृद्धि को दिखाया जाता है।” उलरे ने ये भी कहा कि उनके बयानों को तोड़-मरोड़ कर पेश किया गया। यूनिवर्सिटी ने कहा कि वो छात्रों की शिकायतों को गंभीरता से लेती है और आरोपों की जाँच की जा रही है।