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बंगाल में एक और बीजेपी वर्कर की मौत: पार्टी ने कहा- पुलिस ने फेंके बम, तेजस्वी सूर्या बोले- वर्दी उतार TMC के गुंडों को कर लो ज्वाइन

अगले साल होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले पश्चिम बंगाल जंगी मैदान की तरह नजर आने लगा है। राज्य से एक और बीजेपी कार्यकर्ता के मारे जाने की खबर है। आरोप है कि सत्ताधारी टीएमसी के संरक्षण में पुलिस ने इस बर्बरता को अंजाम दिया है।

घटना सिलीगुड़ी के तीनबत्ती की है। सोमवार (दिसंबर 7, 2020) को बीजेपी कार्यकर्ता राज्य सचिवालय की शाखा ‘उत्तरकन्या’ की ओर बढ़ने का प्रयास कर रहे थे। इस दौरान दो जगहों पर उनकी पुलिस से झड़प हुई। बीजेपी का आरोप है कि हमले में उसके कार्यकर्ता उलेन रॉय की मौत हो गई।

बता दें कि भारतीय जनता युवा मोर्चा (BJYM) ने बंगाल सरकार के खिलाफ ‘उत्तरकन्या अभिजन’ के तहत दो स्थानों पर विरोध प्रदर्शन आयोजित किए थे। भाजयुमो के राष्ट्रीय अध्यक्ष और सांसद तेजस्वी सूर्या ने बंगाल पुलिस की बर्बरता की ओर ध्यान दिलाते हुए कहा है, शांतिपूर्ण प्रदर्शन के दौरान कई बीजेपी कार्यकर्ता जख्मी हो गए। बंगाल में लोकतंत्र की हत्या हो रही है।

भाजयुमो ने आरोप लगाया कि उत्तर बंगाल के लोगों से किए गए वादों को सरकार ने पूरा नहीं किया और सरकार द्वारा शुरू की गई कल्याणकारी योजनाओं का लाभ आम आदमी तक नहीं पहुँचा। भाजपा की युवा शाखा उत्तर बंगाल में ममता बनर्जी सरकार के कथित कुशासन, बेरोजगारी और उपेक्षा के खिलाफ मार्च निकाल रही थी। पश्चिम बंगाल के भाजपा अध्यक्ष और सांसद दिलीप घोष और सयंतन बसु सिलीगुड़ी के फूलबाड़ी जंक्शन में एक मार्च का नेतृत्व कर रहे थे। वहीं अन्य मार्च का नेतृत्व भाजपा के बंगाल प्रभारी कैलाश विजयवर्गीय और पार्टी नेता मुकुल रॉय कर रहे थे।

प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने कार्यकर्ताओं को आगे बढ़ने से रोकने के लिए पानी की बौछारों का इस्तेमाल किया और आँसू गैस के गोले छोड़े। फुलबारी बाजार में एक रैली का नेतृत्व करने वाले बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष दिलीप घोष ने कहा कि पश्चिम बंगाल में ‘बीजेपी के उभार’ से डरकर सरकार दमनकारी नीति अपना रही है।

मार्च के दौरान दोपहर करीब दो बजे सिलीगुड़ी के तीनबत्ती पर भाजपा युवा मोर्चा के कार्यकर्ताओं ने मोर्चाबंदी करने की कोशिश की। इसके बाद पुलिस और भाजपा कार्यकर्ताओं में झड़प हो गई। स्थिति को नियंत्रण में करने के लिए भारी पुलिस बल को बुलाया गया। इस झड़प में कई पत्रकार, भाजपा कार्यकर्ता और पुलिस के जवान घायल हो गए हैं। वहीं एक बीजेपी नेता की मौत भी हो गई है। पुलिस ने क्षेत्र में धारा 144 लागू करने की घोषणा कर दी।

इस पर प्रतिक्रिया देते हुए सांसद और भाजपा युवा मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष तेजस्वी सूर्या ने कहा, “पुलिस ने भाजपा युवा मोर्चा के कार्यकर्ताओं पर आँसू गैस के गोले और वाटर कैनन का इस्तेमाल किया। उन्हें यूनिफॉर्म उतार कर टीएमसी गुंडों को ज्वाइन कर लेना चाहिए। भाजपा के कई कार्यकर्ता उनके शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन के दौरान घायल हो गए। पश्चिम बंगाल में लोकतंत्र की हत्या हो रही है।” उन्होंने एक अन्य ट्वीट में बताया कि ममता पुलिस द्वारा फेंके गए बमों के कारण भाजपा के वरिष्ठ कार्यकर्ता उलन रॉय की मृत्यु हो गई।

वहीं बीजेपी नेता कैलाश विजयवर्गीय ने कहा पश्चिम बंगाल सरकार के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे बीजेपी युवा मोर्चा कार्यकर्ताओं पर तीनबत्ती में पुलिस ने आँसू गैस और वॉटर कैनन का इस्तेमाल किया। यहाँ जिस प्रकार की अराजकता है, राष्ट्रपति शासन लगाना जरूरी है। यहाँ प्रजातंत्र नहीं, गुंडों का राज है।

उन्होंने ट्विटर पर लिखा, “उत्तरी बंगाल के विकास की माँग कर रहे भाजपा कार्यकर्ता उलेन रॉय की पुलिस लाठीचार्ज में मौत हो गई। ममता सरकार के इशारों पर पश्चिम बंगाल में भाजपा कार्यकर्ताओं पर ऐसे जुल्म लगातार हो रहे हैं। अब ऐसी घटनाओं को रोका जाना जरूरी है।”

इस घटना पर बंगाल पुलिस की ओर से भी बयान जारी किया गया है। पुलिस ने अपने बयान में कहा, “आज सिलीगुड़ी में एक राजनीतिक दल के समर्थकों द्वारा विरोध-प्रदर्शन के दौरान हिंसा की गई। हिंसक भीड़ को तितर-बितर करने के लिए पुलिस ने केवल वाटर कैनन और आँसू गैस का इस्तेमाल किया। पुलिस को एक व्यक्ति की मौत की सूचना मिली है। मौत का वास्तविक कारण पोस्टमॉर्टम के बाद ही पता चलेगा।”

ऑपइंडिया ने रैली और पुलिस की बर्बरता के बारे में पश्चिम बंगाल के बीजेपी मीडिया विभाग के सदस्य कालीचरण शॉ से बात की। उन्होंने कहा कि ममता सरकार के खिलाफ विरोध-प्रदर्शन किया गया क्योंकि वह उत्तर बंगाल के विकास के अपने वादे को पूरा करने में विफल रही है। उन्होंने कहा कि 2014 में उन्होंने सुनिश्चित किया कि उत्तर पश्चिम बंगाल में विकास कार्य उनकी प्राथमिकता सूची में होगी, लेकिन ऐसा करने में वो असफल रही।

इससे पहले भाजपा नेता कबीर बोस को हाउस अरेस्ट करने और उनके घर को टीएमसी के 100 से ज्यादा कार्यकर्ताओं को घेरने की खबर आई थी। इसको लेकर टीएमसी सांसद कल्याण बनर्जी ने कहा है, “भाजपा का एक गुंडा CISF के संरक्षण में यहाँ रह रहा है। वह जगदीप धनखड़ के साथ नियमित संपर्क में है। CISF ने हमारे कार्यकर्ताओं पर लाठीचार्ज किया।”

गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल में शनिवार को हिंसक वारदात की खबर सामने आई थी। राज्य के आसनसोल में बीजेपी की बाइक रैली पर हमला हुआ था। इसमें बीजेपी के 5 से 7 कार्यकर्ता घायल हुए थे। बीजेपी कार्यकर्ताओं पर फायरिंग की गई और पत्थरबाजी भी की गई। इस दौरान बम भी फेंके गए।

पढ़ाई MBA की, काम रेप की धमकी देना: हैदराबाद की 23 साल की नूरा सरवर का इंस्टाग्राम प्रोफाइल भी फर्जी

पाकिस्तान में जन्मीं ब्रिटिश मूल की अभिनेत्री सलमा आगा की बेटी जारा खान को कई दिनों से सोशल मीडिया पर रेप और मौत की धमकियाँ मिल रही थीं। जारा ने इसकी शिकायत ओशिवारा पुलिस स्टेशन में की। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए आरोपित को गिरफ्तार कर लिया है।

जारा खान ने मुंबई के ओशिवारा पुलिस थाने में शिकायत दर्ज करवाते हुए बताया कि उन्हें 28 अक्टूबर से 3 नवंबर के बीच सोशल नेटवर्किंग साइट इंस्टाग्राम के जरिए रेप की धमकियाँ मिली। जारा की शिकायत के बाद पुलिस भी हरकत में आई और तुरंत ही आरोपित का पता लगा लिया।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक जाँच में पुलिस को पता चला कि धमकी देने वाली हैदराबाद की एक 23 वर्षीय एमबीए स्टूडेंट है। ओशिवारा थाने के सीनियर इंस्पेक्टर ने कहा कि शिकायत के बाद साइबर सेल को सूचना दी गई थी जिससे लोकल आईपी अड्रेस का पता चला। पुलिस ने बताया कि आरोपित का नाम नूरा सरवर है, जिसने इंस्टाग्राम पर अपनी फर्जी प्रोफाइल बना रखी है।

ओशिवारा पुलिस स्टेशन के वरिष्ठ निरीक्षक दयानंद बांगर ने मीडिया को बताया, “आरोपित लड़की ने इंस्टाग्राम पर अश्लील मैसेज भेजे और जान से मारने की भी धमकी दी। उसने इंस्टाग्राम पर अपनी एक फर्जी प्रोफाइल बना रखी है। हमने इंस्टाग्राम को इसके बारे में सूचित किया, जिसके बाद उन्होंने हमारी मदद की।”

पुलिस जाँच में ये भी सामने आया है कि आरोपित नूरा और उसका को-वर्कर एक पॉलिटिकल पार्टी के लिए काम करते हैं। हालाँकि मामले को लेकर पुलिस अब भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि आखिर जारा को ये धमकियाँ क्यों दी जा रही थीं। इसके पीछे की वजह अभी तक पता नहीं चल पाई है। धारा 354 (A), (B), 509, 506 और इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी एक्ट के तहत धारा 67 (A) में आरोपितों के खिलाफ मामला दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया है।

गौरतलब है कि जारा आगा ‘निकाह’ फेम अभिनेत्री सलमा आगा की बेटी हैं। जारा भी फिल्मों में अपनी किस्मत आजमा चुकी हैं। उन्होंने अभिनेता अर्जुन कपूर के साथ फिल्म ‘औरंगजेब’ से फिल्मों में डेब्यू किया था। हालाँकि ये फिल्म ज्यादा चल नहीं पाई थी। इसके बाद वो फिल्म ‘देसी कट्टे’ में भी नजर आईं।

LOC पार कर भारत आ गईं जुबैर बहनें: सेना ने गिफ्ट देकर लौटाया, जाते-जाते कहा- यहाँ के लोग वाकई बहुत अच्छे हैं

भारतीय सेना ने पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) से आई दो नाबालिग बहनों को उनके घर वापस भेज दिया है। दोनों बहनें गलती से नियंत्रण रेखा (LOC) पार कर जम्मू-कश्मीर के पुंछ जिले में दाखिल हुई थीं। प्रशासन और सेना ने दोनों बहनों को उपहार के साथ उनके घर वापस रवाना किया। इसके लिए सेना का आभार प्रकट करते हुए कहा कि कि उन्हें इस बात की आशा नहीं थी कि वे अपने घर लौट पाएँगी। 

दोनों बहनों की पहचान लाएबा जुबैर (17) और सना जुबैर (13) के रूप में हुई है। दोनों कहुटा तहसील अब्बासपुर गाँव की रहने वाली हैं। वे रविवार (6 दिसंबर 2020) की सुबह नियंत्रण रेखा से जम्मू-कश्मीर के पुंछ में दाखिल हुई थीं। तभी इन पर सेना के जवानों की नज़र पड़ी और उन्होंने दोनों को हिरासत में लिया। हिरासत में लेने के बाद सेना ने दोनों नाबालिग बहनों से पूछताछ की और पूछताछ के बाद पुलिस के हवाले कर दिया। इस घटना के बाद पूरे एलओसी क्षेत्र को एलर्ट कर दिया गया था। 

घर वापस भेजे जाने के बाद लाएबा जुबैर ने भारतीय सेना का आभार प्रकट करते हुए कहा, “हम अपना रास्ता भटक गए थे और भूलवश भारतीय सीमा में चले गए थे। हमें इस बात का डर लग रहा था कि सेना के जवान हमारी पिटाई करेंगे। लेकिन वह सभी हमारे साथ बहुत ही अच्छे से पेश आए। उन्होंने हमें खाना दिया और ठहरने के लिए जगह भी दी। सभी लोग हमारी वापसी के लिए लगातार प्रयास कर रहे थे। उनका व्यवहार बहुत ही अच्छा था। हमें ऐसा लग रहा था कि यह लोग हमें वापस अपने घर नहीं जाने देंगे, लेकिन आज हम अपने घर जा रहे हैं। यहाँ के लोग वाकई बहुत अच्छे हैं।”            

इस घटनाक्रम पर सेना अधिकारियों ने भी जानकारी दी थी। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़ पुंछ में नियंत्रण रेखा पर तैनात भारतीय सेना की सरला बटालियन ने दोनों नाबालिग लड़कियों को चकना दा बाग़ क्षेत्र में पाकिस्तान की तरफ से दाखिल होते हुए देखा। तुरंत सेना के जवानों ने उनको हिरासत में लिया और पूछताछ की। पूछताछ के दौरान दोनों नाबालिग बहनों ने स्वीकार किया था कि वे गलती से यहाँ आई थीं।

छत्तीसगढ़ी लड़की, केरल की बहू… जिसने अपना हाथ गँवा बचाया CISF जवान की जान, BJP ने बनाया उसे उम्मीदवार

ज्योति एक आम नारी हैं। शक्ल-सूरत से केरल में उनकी पहचान भी मुश्किल है, क्योंकि वो यहाँ की मूल नहीं हैं, उनका ससुराल यहाँ है। लेकिन वो पलक्कड़ स्थित पलथुल्ली क्षेत्र के अंतर्गत कोल्लेनगोडे ब्लॉक पंचायत की भाजपा उम्मीदवार हैं। ज्योति की मलयाली भाषा पर शानदार पकड़ है और उनका पहनावा भी परंपरागत मलयाली युवती जैसा ही होता है। वह मूल रूप से छत्तीसगढ़ स्थित दंतेवाड़ा जिले के बछेली क्षेत्र की रहने वाली हैं। 

ज्योति ने शायद ही कभी सोचा होगा कि वह केरल की बहू बनेंगी लेकिन फिर उनकी पलथुल्ली के रहने वाले पीवी विकास से शादी हुई। पीवी विकास केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल के जवान हैं। ज्योति ने एक अजनबी सुरक्षाबल (विकास, जो कि अब उनके पति हैं) की जान बचाते हुए अपना दाहिना गँवा दिया था। मीडिया रिपोर्ट्स में ज्योति ने इस मुद्दे पर कई बातें कहीं: 

“तारीख़ थी 3 जनवरी 2010 और मैं बस में विकास के ठीक पीछे बैठी थी। विकास अपनी दंतेवाड़ा स्थित बैलाडीला सीआईएसएफ़ यूनिट के लिए लौट रहे थे। वह खिड़की की रेलिंग पर अपना सिर रख कर आराम कर रहे थे। अचानक मुझे एक ट्रक नज़र आया, जो उसी दिशा से आ रहा था जिधर विकास रेलिंग पर अपना सिर रख कर आराम कर रहे थे। तभी ड्राइवर का बस पर नियंत्रण ख़त्म हो गया। मैंने तुरंत अपना हाथ निकाल कर विकास का सिर अंदर किया। इसके पहले कि मेरा हाथ पूरी तरह अंदर आ पाता, उसके पहले ही ट्रक ने मेरे हाथ में टक्कर मार दी।” 

ज्योति की ज़िंदगी पर इस घटना का बेहद नकारात्मक प्रभाव पड़ा था। पहले तो घर वालों का क्रोध झेलना पड़ा और इसके अलावा बीएससी नर्सिंग का कोर्स भी बीच में ही छोड़ना पड़ा। 

घटना के लगभग एक साल बाद पीवी विकास और ज्योति की शादी हुई और 2011 में वह केरल आ गईं। अब वो केरल की बहू हैं और वहाँ की परंपराओं को न सिर्फ बखूबी निभा रही हैं बल्कि समाज में सक्रिय भी हैं।

कोल्लेनगोडे ब्लॉक पंचायत की भाजपा उम्मीदवार ज्योति सिर्फ दो मुद्दों पर वोट की माँग कर रही हैं – पहला विकास और दूसरा राष्ट्रवाद। ज्योति द्वारा दी गई जानकारी के मुताबिक़ भारतीय जनता पार्टी की स्थानीय कमेटी ने उनसे चुनाव लड़ने के लिए संपर्क किया था। इस पर ज्योति के पति और ससुराल वालों ने सहमति जताई थी। राजनीति के मुद्दे पर ज्योति का कहना था कि भाजपा के प्रति उनका लगाव तब से है, जब वह छत्तीसगढ़ में थीं। उनका यह भी कहना है कि अब पूरे केरल में भी भाजपा की स्थिति मज़बूत हो रही है। 

ज्योति के मुताबिक़, “केरल के लोग उस पर बहुत स्नेह लुटा रहे हैं। चुनाव में वोट देना बाद की बात है लेकिन अभी के लिए लोगों की तरफ से जो स्नेह मिला, वो शानदार अनुभव है। मैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की राजनीति से भी प्रभावित हूँ, मेरा प्रयास यही होगा कि भाजपा वहाँ बेहतर प्रदर्शन करे।”

पलक्कड़ के भाजपा जिलाध्यक्ष कृष्णा दास ने भी ज्योति की सराहना की थी। उनके मुताबिक़, “ज्योति अब केरल की बेटी हैं, उन्होंने एक जवान की जान बचाते हुए अपना हाथ गँवाया है। वह हमारे लिए किसी प्रेरणा से कमतर नहीं हैं।”         

भारत को अस्थिर करने के लिए खालिस्तानियों और जिहादियों का गठजोड़ तैयार कर रहा ISI: दिल्ली पुलिस का खुलासा

भारत में ISI अब खालिस्तानी कट्टरपंथियों और जम्मू-कश्मीर के इस्लामी आतंकियों का गठजोड़ बनाकर भारत को अस्थिर करने की साजिश पर काम कर रहा है। दिल्ली पुलिस ने शकरपुर से 5 खालिस्तानी-कश्मीरी आतंकियों की गिरफ़्तारी के बाद ये खुलासा किया है। आतंकियों के पास से बड़ी मात्रा में खतरनाक हथियार और ड्रग्स बरामद किए गए हैं।

दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल के डिप्टी कमिश्नर (DCP) प्रमोद कुशवाहा ने कहा कि गुप्त सूचनाओं के आधार पर इन 5 आतंकियों को गिरफ्तार किया गया। इनमें से 2 खालिस्तानी और 3 कश्मीरी हैं। इनके पास से 3 पिस्टल, 2 किलो हेरोइन और 1 लाख रुपए जब्त किए गए हैं। कुशवाहा ने बताया कि ISI अब खालिस्तानी अभियान को कश्मीरी जिहाद से जोड़ रहा है, ये स्पष्ट हो गया है। ये भारत को अस्थिर करने की साजिश है।

जिन 2 पंजाबी आतंकियों को गिरफ्तार किया गया है, वो शौर्य चक्र अवॉर्ड विजेता बलविंदर सिंह की हत्या में शामिल थे। उनके आका का नाम सुख बिहारीवाल है, जो गल्फ मुल्कों में रहता है और वहीं से भारत के खालिस्तानी आतंकियों को निर्देशित करता है। बलविंदर सिंह आतंक के खिलाफ एक प्रमुख आवाज़ थे। उन पर न जाने कितने ही हमले किए गए थे। अक्टूबर 2020 में पंजाब के तरनतारन जिले में उनकी हत्या कर दी गई थी।

बलविंदर सिंह ने कई दशकों तक आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई लड़ी थी। दिल्ली पुलिस ने बताया है कि गुरजीत सिंह और सुखदीप सिंह इससे पहले भी कई आपराधिक मामलों में शामिल रहे हैं। पुलिस ने बताया है कि पाकिस्तान से ऑपरेट किए जा रहे कई गैंगस्टर्स के साथ उनके सम्बन्ध हैं। शब्बी अहमद, अयूब पठान और रियाज़ का आतंकी संगठन हिज़्बुल मुजाहिद्दीन से स्पष्ट जुड़ाव सामने आया है।

ये तीनों हिज्बुल मुजाहिद्दीन के ‘ओवर ग्राउंड वर्कर्स (OGW)’ हैं, जिसका पूरा सेटअप पाक अधिकृत कश्मीर (POK) में है। यानी, पुलिस का कहना है कि इस पूरे मामले के दो कंपोनेंट्स हैं- पंजाबी गैंगस्टर्स और कश्मीरी आतंकी। पंजाबी गैंगस्टर कॉम्पोनेन्ट को टारगेट को मारने में और कश्मीरी कॉम्पोनेन्ट को आतंकी फंडिंग और ड्रग्स के नेटवर्क में इस्तेमाल किया जाता है। इन दोनों के बीच सेतु का काम कर रही है पाकिस्तान की ISI।

पंजाब पुलिस बलविंदर सिंह की हत्या की जाँच कर रही है। उसने इस बात की पुष्टि की है कि आज दिल्ली पुलिस द्वारा जब्त किए गए हथियारों का इस्तेमाल ही उस हत्याकांड में किया गया था। हालाँकि, इस प्वाइंट पर अभी और जाँच होगी। पुलिस ने बताया कि इस गठजोड़ के दो उद्देश्य थे – पहला, समाज में सांप्रदायिक अशांति पैदा करना और दूसरा, आतंकवाद के खिलाफ खड़े होने वाले लोगों को हतोत्साहित करना।

दिल्ली में ‘किसान आंदोलन’ चल रहा है और इसकी आड़ में खालिस्तानी ताकतें फिर से सिर उठा रही हैं। इन 5 आतंकियों को गिरफ्तार किए जाने से पहले दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल के साथ इनकी मुठभेड़ भी हुई। दोनों तरफ से गोलीबारी के बाद इन्हें धर-दबोचा गया। पाकिस्तान समर्थित आतंकवादी संगठन और इसके इंटर सर्विसेज इंटेलिजेंस (ISI) की नई साजिश है कि अब जम्मू कश्मीर के साथ-साथ पंजाब के रास्ते चीन के ड्रोन्स के माध्यम से खतरनाक हथियार व अन्य दहशत का साजो-सामान भेजा जाए।

पाकिस्तानी PM इमरान खान को धरती पर जो जगह सबसे ज्यादा पसंद, वह भारत में है: जानिए कैसे

भारत से संबंधित मुद्दों पर पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान का आम तौर पर विलाप जारी रहता है लेकिन मन की गहराइयों में, वह भारत के अलंकृत दृश्यों और यहाँ की सुंदरता से प्रभावित ही रहते हैं। भारत के अद्भुत नजारों के प्रति उनकी भावनाएँ एक ट्वीट के ज़रिये सामने आई। पाकिस्तानी प्रधानमंत्री ने गिलगित-बाल्टिस्तान की एक विलक्षण तस्वीर साझा की और उन्होंने दावा किया कि यह धरती पर उनकी सबसे पसंदीदा जगहों में से एक है। 

कैलेडॉसोपिक (गतिशील) तस्वीरों का परिदृश्य साझा करते हुए इमरान खान ने अपने ट्वीट में लिखा, “सर्दियों से ठीक पहले गिलगित-बाल्टिस्तान के रंग। इस धरती पर मेरी सबसे पसंदीदा जगहों में से एक।”

नेटिज़न्स ने दिलाया याद, गिलगित-बाल्टिस्तान है भारत का हिस्सा

जैसे ही इमरान खान ने उस जगह को अपनी सबसे पसंदीदा जगहों में से एक बताया वैसे ही नेटिज़न्स ने तत्परता दिखाते हुए उन्हें याद दिलाया गिलगित-बाल्टिस्तान वैधानिक रूप से भारत का हिस्सा है, जिस पर पाकिस्तान ने गैरक़ानूनी रूप से कब्ज़ा किया है।  

एक यूजर ने तो इन तस्वीरों को खींचने का दावा करते हुए निराशा जताई है कि काँट-छाँट कर तस्वीरों से वाटरमार्क और उसका क्रेडिट गायब कर दिया गया है।

सोशल मीडिया यूज़रर्स ने बताया, गिलगित-बाल्टिस्तान की नहीं कैलिफ़ोर्निया की तस्वीरें  

यह ट्वीट करने से ठीक पहले इमरान खान ने एक ट्वीट में चार तस्वीरें इसी कैप्शन के साथ साझा की थी। जिसके बाद तमाम सोशल मीडिया यूज़र ने इस बात की और इशारा किया कि यह तस्वीर गिलगित-बाल्टिस्तान की नहीं, बल्कि अमेरिका की है। इसके बाद पाकिस्तानी प्रधानमंत्री ने ट्वीट डिलीट कर दिया और दोबारा किए गए ट्वीट में कुछ तस्वीरें साझा की जो कथित तौर पर गिलगित-बाल्टिस्तान की थीं। 

गिलगित-बाल्टिस्तान: अतीत में जम्मू कश्मीर का हिस्सा 

गिलगित-बाल्टिस्तान अतीत में जम्मू-कश्मीर रियासत (प्रिंसली स्टेट) का हिस्सा था जिस पर महाराजा हरि सिंह का शासन था। आज़ादी के कुछ समय बाद पश्तून लड़ाकों ने पाकिस्तानी सेना का समर्थन किया, जिसके बाद उन्होंने जम्मू-कश्मीर पर हमला करके लूट और बलात्कार की। 

पाकिस्तान के इस समुदाय ने गिलगित-बाल्टिस्तान और मुज़फ्फराबाद समेत कश्मीर के अन्य क्षेत्रों पर कब्ज़ा किया। हमले के 4 दिन बाद 26 अक्टूबर 1947 को महाराजा हरि सिंह ने समझौते पर हस्ताक्षर किए और फिर जम्मू-कश्मीर का भारत में विलय हुआ। इसके बाद भारतीय सेना एयरलिफ्ट कर श्रीनगर भेजी गई और राजधानी को आज़ाद कराया जा सका।  

इसके बाद भारतीय सेना पश्तून समुदाय के लोगों को वहाँ से हटाने में पूरी तरह कामयाब रही और वहाँ युद्धविराम हुआ। भारतीय सेना ने सफलतापूर्वक जम्मू हासिल किया, लेह लद्दाख के साथ साथ कश्मीर का एक बड़ा हिस्सा भी हासिल किया। तब तक पाकिस्तानी सेना गिलगित-बाल्टिस्तान पर कब्ज़ा कर चुकी थी इसमें शक्सगाम घाटी और कश्मीर के कई क्षेत्र शामिल थे। 

समझौते की वजह से जम्मू-कश्मीर पर भारत का संप्रभुता के लिहाज़ से अधिकार है। इसमें पीओके के कुछ हिस्से जैसे गिलगित-बाल्टिस्तान और कश्मीर के भी कुछ इलाके जिस पर पाकिस्तान का ग़ैर कानूनी कब्ज़ा है शामिल हैं। नवंबर 2020 में पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान ने गिलगित-बाल्टिस्तान को ‘प्रोविंशियल स्टेटस’ का ऐलान किया था। उनका दावा था कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के संकल्प को मद्देनज़र रखते हुए यह निर्णय लिया गया है। 

इसके बाद विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा था, “भारत सरकार पाकिस्तान के ऐसे किसी भी प्रयास को सिरे से खारिज करती है, जिसमें वह भारत की सीमा में किसी भी तरह का बदलाव करना चाहता है। मैं इस बात उल्लेख करना चाहता हूँ कि जम्मू-कश्मीर, लद्दाख और गिलगित-बाल्टिस्तान का क्षेत्र क़ानूनी तौर पर भारतीय गणतंत्र का हिस्सा हैं।” पाकिस्तान का उन क्षेत्रों पर कोई अधिकार नहीं है। उसने गैर कानूनी रूप से कब्ज़ा कर रखा है। 

पूरे बयान में कहा गया था, “पाकिस्तान का अनाधिकारिक कब्ज़ा वहाँ पर रहने वाले लोगों के साथ होने वाला अत्याचार, मानवाधिकार उल्लंघन, उत्पीड़न और 7 दशकों से छिनी हुई उनकी आज़ादी को छुपा नहीं सकता है। पाकिस्तान को भारतीय क्षेत्रों में बदलाव करने की बजाय वह इलाके खाली करने चाहिए जिस पर उसका अनाधिकारिक कब्ज़ा है।” सितंबर के दौरान सामने आई रिपोर्ट्स के मुताबिक़ पाकिस्तान का राजनीतिक फैलाव जो पूरी तरह वहाँ की सेना के हाथ में था, उसने पूरे क्षेत्र की तथाकथित स्वायत्तता को बदलने की आज़ादी दी थी। इस फैसले से सीधे तौर पर चीन और चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर को फायदा होगा।   

Mannchali की हिरोइन जैनब जमील ने इस्लाम, अल्लाह और कुरान के लिए छोड़ दी एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री

पाकिस्तानी अभिनेत्री जैनब जमील ने एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री को छोड़ने का फैसला किया है। उन्होंने सोशल नेटवर्किंग प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम के जरिए इसकी जानकारी दी। उन्होंने इस्लाम की शिक्षाओं के बारे में अधिक जानने के लिए इंडस्ट्री को अलविदा कहा।

31 वर्षीय अभिनेत्री ने अपने इंस्टाग्राम पेज पर एक घोषणा की, “मुझे यह घोषणा करते हुए गर्व हो रहा है कि मैंने अभिनय और मॉडलिंग छोड़ दी है। अल्हमदोलिल्लाह अल्लाह ने मुझे कुरान और हदीस का छात्र बनने और हमारे मजहब इस्लाम के बारे में अधिक जानने के लिए चुना है।”

जैनब की इंस्टाग्राम स्टोरी

आगे जैनब ने इंस्टाग्राम स्टोरी में विस्तार से बताया कि उन्होंने एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री छोड़ने का फैसला क्यों किया। जैनब ने लिखा, “वो लोग जो वास्तव में चिंतित हैं और मुझसे पूछ रहे हैं कि मैंने यह निर्णय क्यों लिया, उनकी चिंता का मैं सम्मान करती हूँ। मुझे देर हो गई है। मुझे यह घोषणा बहुत पहले करनी चाहिए थी लेकिन शायद मैं तैयार नहीं थी या मैं कुछ जवाबों की तलाश में थी। वास्तव में अब मुझे तफसीर के साथ कुरान पढ़ते हुए 3 साल हो गए हैं और मैं सरल छात्र नहीं हूँ।”

जैनब ने अपने पोस्ट में इस बात भी जोर डाला कि वह अपने करियर के चुनाव से संतुष्ट नहीं थीं। इसका जिक्र करते हुए उन्होंने लिखा, “मेरे सभी मूर्खतापूर्ण सवालों और शंकाओं का समाधान करने के लिए मेरे शिक्षकों का धन्यवाद। उनकी वजह से आज मैं इस मुकाम पर पहुँच पाई कि मैं इतना बड़ा कदम उठाने के लिए तैयार हूँ। मैं उस कैरियर को छोड़ रही हूँ, जिसके बारे में मैंने सोचा था कि मैं पसंद करुँगी। लेकिन किया नहीं, क्योंकि जब भी मैं सेट पर काम कर रही होती थी तो उससे पूरी तरह संतुष्ट नहीं थी।”

उन्होंने यह भी लिखा कि वो इस क्षेत्र में काम करने वाले किसी भी एक्टर की भावनाओं को आहत नहीं करना चाहती। लेकिन सभी लोग अलग-अलग होते हैं। जैनब ने उस प्रोडक्ट और प्रोड्यूसर का धन्यवाद अदा किया, जिनके साथ उन्होंने काम किया था। अंत में उन्होंने उन प्रोड्यूसर का शुक्रिया अदा किया, जिनके साथ उन्होंने कॉन्ट्रैक्ट साइन किया था। उन्होंने गुजारिश की कि उनका नाम इन कॉन्ट्रैक्ट से हटा दिया जाए।

जैनब जमील ने ‘सदा सुखी रहो’, ‘ससुराल मेरी बहन का’, ‘मनचली’, ‘मिल के हम ना मिले’ और ‘आपके कनीज’ जैसे जियो एंटरटेनमेंट के कई ड्रामे में काम किया है। पिछले महीने ही एक और मॉडल अनम मलिक ने मजहब की खातिर मॉडलिंग की दुनिया को अलविदा कह दिया था। मलिक ने कहा था कि उन्होंने मॉडलिंग की दुनिया को हमेशा के लिए छोड़ने और इस्लाम की शिक्षाओं के अनुसार जीने का फैसला किया है।

मुस्लिम दबंगों ने दलित महिला को पीट कर जमीन कब्जाने की करी कोशिश: वीडियो वायरल, एक्शन में UP पुलिस

उत्तर प्रदेश में एक जिला है बलरामपुर। यहाँ के गाँव शेखापुर पचीठे में एक दलित महिला अपने परिवार के साथ रहती हैं। नाम है रत्ना देवी उर्फ गुड़िया। यह गाँव छोड़ कर जाना चाहती हैं। कारण है – मुस्लिम दबंगों जाहिद अली, चाँद अली, सत्तार अली, पीर अली और सुबराति के द्वारा इनको तंग किया जाना, इनके साथ मार-पीट करना, इनकी जमीन पर कब्जा करने की कोशिश करना।

रत्ना देवी उर्फ गुड़िया ने आरोप लगाया है कि मुस्लिम दबंगों ने उनकी जमीन पर कब्जा करने के उद्देश्य से उनके साथ मार-पीट की है। उनका यह भी आरोप है कि जब वो इस मामले को लेकर प्रशासन के पास गईं तो उचित कार्रवाई नहीं की गई। साथ ही इन्होंने गाँव के प्रधान पर भी आरोप लगाया कि वो भी भू-माफियाओं के साथ मिला हुआ है।

इस मामले का एक वीडियो वायरल हुआ है। इस वीडियो में रत्ना देवी उर्फ गुड़िया ने खुद को पासवान जाति का बताया है और अपने ऊपर किए जा रहे अत्याचार की बात विस्तार से बताई है।

रत्ना देवी ने आरोप लगाया है कि पानी पटाने को लेकर उनके मर्द (पति) और बच्चों को आरोपितों ने लतार-लतार (पैर से) कर मारा है। इतना ही नहीं, उन्होंने बाल पकड़-पकड़ कर उठा कर पटक भी दिया है।

वीडियो में रत्ना देवी के पति अपने घर के सामने रहने वाले जाहिद अली, चाँद अली, सत्तार अली, पीर अली और सुबराति की घर की ओर इशारा करके बताते हैं कि ये लोग ही इनकी जमीन पर अतिक्रमण करना चाहते हैं। रत्ना देवी का कहना है कि गाँव का प्रधान भी मुस्लिम आरोपितों के साथ मिल कर कह रहा है कि ये लोग गाँव छोड़ कर चले जाएँ।

वीडियो वायरल होने के बाद उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सूचना सलाहकार शलभ मणि त्रिपाठी ने इस मामले पर संज्ञान लेते हुए यूपी पुलिस को सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। इसके बाद पुलिस और प्रशासन हरकत में आई।

बलरामपुर के एसपी और डीएम दोनों ने खुद पीड़िता के घर पहुँच कर उनसे बात की। वीडियो में स्पष्ट सुना जा सकता है कि एसपी पीड़िता को आराम से रहने का आश्वासन दे रहे हैं। साथ ही पूछते हैं कि कोई परेशान तो नहीं कर रहा है? और संबंधित थाने के अधिकारी से भी इस बात को ध्यान में रखने को कहते हैं।

एसपी की बात पर थाने के अधिकारी उन्हें और पीड़ित परिवार को आश्वस्त करते हैं कि वो दिन-रात उनकी सुरक्षा में लगे हैं। खुद पीड़ित महिला ने भी अपनी बात रखते हुए कहा कि जब से यह पुलिस अधिकारी (वीडियो में दिख रहे) आए हैं, तब से मदद कर रहे हैं और वो कार्रवाई से संतुष्ट हैं।

पीड़ित महिला रत्ना देवी उर्फ गुड़िया ने एसपी और डीएम के सामने यह बात रखी कि जैसे सबके घरों के आगे खाली जगह है, वैसे ही उनके घर के आगे भी जगह खाली रहे। और जो भी अतिक्रमण उन्होंने अपने घर के आगे कर रखा है, वो उसे हटा लेंगी लेकिन यह सभी घरों के सामने से हटना चाहिए।

इसके पहले 6 दिसंबर को बलरामपुर पुलिस ने इस मामले पर ट्वीट करते हुए बताया था कि यह दो पक्षों में जमीन का विवाद है। इसमें राजस्व विभाग द्वारा नोटिस भी दिया जा चुका है और यह मामला न्यायालय में विचाराधीन है। साथ ही पुलिस ने यह भी लिखा था कि यह वीडियो पुलिस प्रशासन पर दबाव बनाने के लिए बनाया गया है।

कानपुर: खाली प्लॉट से मिले 4 नरमुंड, पुलिस ने कहा- पुरानी हैं खोपड़ी, कहीं से लाकर यहाँ रखा गया

कानपुर के पनकी थाना क्षेत्र के कांशीराम कॉलोनी में एक खाली प्लॉट में नरमुंड मिलने के बाद स्थानीय लोगों में सनसनी फैल गई। शुरुआत में बताया गया कि 4 नरमुंड बच्चों के हैं। खोपड़ी पर लगे खून एवं लाल रंग को देखकर लोगों ने तंत्र-मंत्र की आशंका जता रहे थे।

हालाँकि अब पुलिस अधीक्षक ने बयान देकर स्थिति को स्पष्ट कर दिया है। उन्होंने जानकारी देते हुए बताया, “इन नर कंकालों की फोरेंसिक टीम द्वारा जाँच की जा रही है। अभी तक की जाँच में यह बात सामने आई है कि यह काफी पुराने हैं। देखने से मालूम पड़ता है कि यह बच्चों का नहीं, बल्कि बड़ों का है। ऐसा लगता है कि इसे कहीं से लाकर यहाँ पर रख दिया गया है। इस संबंध में फोरेंसिक टीम और हमारी पुलिस की टीम आगे की जाँच कर रही है।”

तंत्र-मंत्र के बारे में पूछे जाने पर पुलिस अधीक्षक ने बताया कि विस्तृत जाँच की जा रही है। तथ्यों के सामने आते ही इससे अवगत कराया जाएगा।

बताया जा रहा है कि पनकी थाना अंतर्गत कांशीराम आवास योजना की कॉलोनी के ठीक सामने खाली प्लॉट है। सुबह में टहलने निकले कुछ लोगों ने खाली प्लॉट में पाँच नरमुंड पड़े देखे। नरमुंड पड़े होने की सूचना के बाद मौके पर भारी भीड़ लग गई और क्षेत्र में सनसनी फैल गई। पुलिस के पहुँचने से पहले एक नरमुंड कुत्ते उठा कर ले गए। पुलिस ने चार नरमुंड को कब्जे में लेकर जाँच के लिए भेज दिया है।

‘इस्लाम का शेर’: फ्रांसीसी शिक्षक का सिर कलम करने वाले का ‘हीरो’ की तरह निकला जनाजा, गाँव की सड़क भी हत्यारे के नाम पर

आपको फ्रांस के शिक्षक सैमुअल पैटी याद होंगे, जिन्हें एक इस्लामी कट्टरवादी अब्दुल्लाख ने सिर्फ इसीलिए मार डाला था, क्योंकि उन्होंने अपनी कक्षा में पैगम्बर मुहम्मद के कार्टून्स दिखाए थे। अब उसे उसके गृह क्षेत्र चेचन्या में दफ़न किया गया है, जहाँ उसे पूरा हीरो वाला सम्मान दिया गया। सैकड़ों लोगों ने उसके जनाजे में भाग लिया और मुस्लिम भीड़ ने ‘इस्लाम का शेर’ के नारे लगाए। उसके सम्मान में गाने गाए गए।

उसे दफनाए जाने का पूरा वीडियो भी वायरल हो गया है, जिसमें सैकड़ों लोगों को हिस्सा लेते हुए देखा जा सकता है। अब्दुल्लाख अँजोरोव मात्र 18 साल का था और उसने फ्रेंच शिक्षक का सिर कलम कर दिया। बाद में पुलिस मुठभेड़ में उसी दिन अक्टूबर 16, 2020 को उसे भी मार गिराया गया था। शनिवार (दिसंबर 5, 2020) को उसकी लाश को उसके गृह क्षेत्र ‘रिपब्लिक ऑफ रूस’ के चेचन्या में लाया गया।

उसके गाँव शालाजी में ग्रामीणों ने उसके सम्मान में कार्यक्रम किए और अपने गाँव के इस्लामी रीति-रिवाजों के साथ दफ़न किया। भारी बर्फबारी के बावजूद 200 लोगों ने उसके अंतिम-संस्कार में हिस्सा लिया। पूरे गाँव में उसके शव को घुमाया गया, जो ‘Urus-Martanovsky’ नमक जिले में स्थित है। 5330 लोगों की जनसंख्या वाले इस गाँव के बाहर के लोग कहीं आकर शामिल न हो जाएँ, इसके लिए 65 पुलिस अधिकारियों को लगाया गया था।

गाँव की सीमाओं को सील कर दिया गया था। कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में तो यहाँ तक कहा जा रहा है कि गाँव के लोगों ने एक सड़क का नामकरण भी अब्दुल्लाख के नाम पर किया है। वहाँ के लोगों ने कहा, “इस्लाम का शेर अपने जन्मस्थान पर आ गया है। वो अपनी मिट्टी में वापस चला गया है। केवल अल्लाह के पास ही सत्ता और शक्ति है, और किसी के पास भी नहीं।” वहाँ के कट्टरपंथी नेता भी उसके समर्थन में दिखे।

चेचन्या के एक कट्टरवादी नेता रमजान कादीरोव ने कहा कि फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों लोगों को आतंकवाद का रास्ता अपनाने के लिए मजबूर कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि लोगों के पास कोई विकल्प भी नहीं बचा है, क्योंकि फ्रांस की सरकार ‘शार्ली हेब्दो’ में बने पैगम्बर मुहम्मद के कार्टून्स को जायज ठहरा रहे हैं। हालाँकि, रूस ने कट्टरपंथी नेता को फटकार लगाई और विदेशी मामलों पर बयानबाजी न करने को कहा।

इस्लामी कट्टरपंथ से निपटने के लिए अपनी नई योजना को लेकर फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों लगातार मुस्लिम देशों के निशाने पर हैं। मैक्रों ने देश के मुस्लिम नेताओं से ‘चार्टर ऑफ रिपब्लिकन वैल्यूज’ पर सहमति देने के लिए कहा है। इसको लेकर विवाद चल रहा है। चार्टर के मुताबिक, इस्लाम एक मजहब है और इससे किसी भी तरह के राजनीतिक आंदोलन को जोड़ा नहीं जा सकता है। चार्टर के तहत, फ्रांस के मुस्लिम संगठनों में किसी भी तरह के विदेशी हस्तक्षेप को प्रतिबंधित किया जाएगा।