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लव जिहाद जैसा कुछ किया तो बर्बाद कर दूँगा, किसानों के हित में भी CM शिवराज ने दिया बड़ा बयान

कृषि बिल को लेकर घमासान खत्म नहीं हुआ है। किसानों का प्रदर्शन लगातार जारी है। इसी बीच मध्य प्रदेश सरकार की तरफ से राज्य के किसानों के लिए एक बड़ी खुशखबरी सामने आई है। किसानों के बढ़ते प्रदर्शन को देखते हुए मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने गुरुवार (3 दिसंबर, 2020) को कहा कि किसान के यहाँ जितनी पैदावार होगी राज्य की तरफ से उसे खरीद लिया जाएगा।

एमपी के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा, “मैंने तय किया है कि जितनी पैदावार किसान की यहाँ होगी उतनी खरीद ली जाएगी। लेकिन अगर बाहर से कोई आया, अगल-बगल के राज्यों से बेचने या बेचने का प्रयास भी किया तो उसका ट्रक राजसात करवाकर उसे जे़ल भिजवा दिया जाएगा।”

किसान के हित में किसान कल्याण योजना के तहत दी जानी वाली राशि को लेकर भी शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि किसानों के खाते में राशि को डायरेक्ट ट्रांसफर की जाएगी। और साथ ही किसानों का सरकार पर भरोसा बनाए रखने के लिए कहते हुए कहा कि उनकी सरकार किसानों के कल्याण के लिए समर्पित है। प्रदेश सरकार किसानों के कल्याण एवं उत्थान के लिए हरसंभव प्रयास करेगी।

इसके अलावा यूपी की योगी सरकार की ही तरह एमपी सरकार भी लव जिहाद को लेकर सख्ती दिखाई है। सीएम शिवराज ने लव जिहाद पर बड़ा बयान देते हुए कहा कि सरकार सभी धर्मों और जातियों की है।

सीएम ने कहा, “हमारे राज्य में कोई भेदभाव नहीं है, लेकिन अगर कोई हमारी बेटियों के साथ कुछ भी घृणित करने की कोशिश करेगा तो उन्हें मैं छोड़ूँगा नहीं। अगर कोई धार्मिक परिवर्तन करता है या ‘लव जिहाद’ जैसा कुछ करता है उन्हें भी सजा मिलेगी।”

‘लव जिहाद’ कानून के खिलाफ SC में 2 याचिकाएँ दाखिल, कहा- किसी को फँसाने के लिए ये बनेगा शक्तिशाली उपकरण

उत्तर प्रदेश में ग्रूमिंग जिहाद (लव जिहाद) के बढ़ते मामलों पर अंकुश लगाने के लिए लाए गए धर्मांतरण अध्यादेश को सुप्रीम कोर्ट में 2 याचिका दाखिल करके चुनौती दी गई है। इन याचिकाओं में माँग की गई है कि अध्यादेश को असंवैधानिक घोषित करके इसे लागू न करने का निर्देश दिया जाए।

गौरतलब है कि पिछले दिनों ग्रूमिंग जिहाद को रोकने के लिए योगी सरकार ने ऐतिहासिक कदम उठाते हुए कैबिनेट की बैठक में उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध अध्यादेश-2020 को मंजूरी दी थी।

ऐसे में इसके ख़िलाफ कई लोगों ने आवाज उठाई और इसको संविधान के ख़िलाफ़ बताया। अब सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिकाओं में एक याचिका दिल्ली के एक वकील की है और दूसरी दिल्ली व प्रयागराज में वकालत पढ़ रहे छात्रों की है।

इन याचिकाओं में कहा गया है कि ये उत्तर प्रदेश का लव जिहाद कानून और उत्तराखंड का कानून आर्टिकल 21 के तहत मिलने वाले निजता के अधिकार और आर्टिकल 25 के तहत मिलने वाले धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार का उल्लंघन करते हैं।

याचिकाकर्ताओं ने दलील दी है कि संसद के पास मौलिक अधिकारों में संशोधन करने की कोई शक्ति नहीं है और यदि यह अध्यादेश लागू किया जाता है तो यह बड़े पैमाने पर जनता को नुकसान पहुँचाएगा और समाज में अराजक स्थिति पैदा करेगा।

इस याचिका में यह भी कहा गया है कि यह कानून स्पेशन मैरेज एक्ट के प्रावधानों का उल्लंघन करता है और समाज में डर पैदा करता है। इसके अलावा, इस बात का भी उल्लेख है कि इस अध्यादेश के जरिए किसी भी व्यक्ति को गलत तरीके से फँसाने का काम भी होगा और यह अध्यादेश ऐसे बुरे तत्वों के लिए शक्तिशाली उपकरण बनेगा।

गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश में धर्मांतरण अध्यादेश आने के बाद बरेली के एक लव जिहाद केस में आज उवैश खान नामक लड़के की पहली गिरफ्तारी हुई। उवैश पर आरोप है कि वह शादीशुदा महिला पर धर्म परिवर्तन करके शादी का दबाव बना रहा था।

एफआईआर के मुताबिक, वह लड़की को पिछले तीन साल से प्रताड़ित कर रहा था और उसकी शादी के बाद उसके घर में घुसकर धमकी दे आया था कि वो उसकी शादी तुड़वाकर खुद निकाह करेगा। आज गिरफ्तारी के बाद उवैश को अदालत में पेश किया गया था। जहाँ से उसे जेल भेज दिया गया।

‘ओ चमचे चल, तू जिनकी चाट के काम लेता है, मैं उनकी रोज बजाती हूँ’: कंगना और दिलजीत दोसांझ में ट्विटर पर छिड़ी जंग

कंगना रनौत और दिलजीत दोसांझ के बीच किसान आंदोलन को लेकर ट्विटर पर जंग छिड़ गई हैं। यह बहस इस कदर बढ़ गई कि कंगना ने एक ट्वीट में दिलजीत दोसांझ को ‘करण जौहर का पालतू’ कह डाला। वहीं दिलजीत ने भी जवाब देने में कोई कसर नहीं छोड़ी है।

असल मे यह जुबानी जंग शाहीन बाग प्रदर्शन की दादी बिलकिस की वजह से छिड़ी है, जिनका कंगना ने किसान प्रदर्शन में शामिल होने पर मजाक उड़ाया था। यही मजाक कई पंजाबी एक्टर को नागवार गुजरा, जिनमें दिलजीत भी शामिल है।

कंगना ने दिलजीत के एक ट्वीट पर मुँहतोड़ जवाब देते हुए लिखा, “ओ करण जौहर के पालतू, जो दादी शाहीन बाग में अपनी नागरिकता के लिए आंदोलन कर रही थी वो ही बिलकिस बानो दादीजी किसान आंदोलन के एमएसपी के लिए भी आंदोलन करती हुई दिखीं। महिंदर कौर जी को तो मैं जानती भी नहीं। क्या ड्रामा चलाया है तुम लोगों ने। इसे तुरंत खत्म करो।”

अब दिलजीत ने इस पर पलटवार करते हुए लिखा, “तूने जितने लोगों के साथ फिल्म की तू उन सबकी पालतू है…? फिर तो लिस्ट लंबी हो जाएगी मालिकों की…? ये बॉलिवुड वाले नहीं पंजाब वाले हैं… झूठ बोलकर लोगों को भड़काना और इमोशंस से खेलना आप अच्छे से जानती हो।”

मामला यहीं नहीं खत्म हुआ। कंगना ने दिलजीत को इस पर जवाब दिया, “ओ चमचे चल, तू जिनकी चाट चाट के काम लेता है, मैं उनकी रोज बजाती हूँ, ज्यादा मत उछल, मैं कंगना रनौत हूँ तेरे जैसी चमची नहीं, जो झूठ बोलूँ, मैंने सिर्फ और सिर्फ शाहीन बाग वाली प्रोटेस्टर पर कमेंट किया है, अगर कोई गलत साबित कर दे तो माफी माँग लूँगी।” इसके बाद दिलजीत ने कंगना को जवाब दिए हैं। हालाँकि, कंगना ने इसे बाद में डिलीट कर दिया।

जब कंगना ने एक जवाब में लिखा था- “पंजाबी समझ आती है मुझे जिन्होंने दिल्ली में दंगे करवाए। खून की नदियाँ बहाईं उनको बचाते हुए शर्म नहीं आती? तुझे क्या शर्म आएगी, करण जौहर कैसे काम देता है, सबको पता है।”

वहीं दिलजीत ने इससे पहले पोस्ट में कंगना को कहा था, “बात क्या हो रही है और ये जा किधर रही है। दिमाग ठीक है तेरा? बात न घुमा, सीधा जवाब दे। जो भौंकी है तू हमारी माँओं के लिए। आके हमारी उन माँओं से बात कर जिन्हें तूने 100 रुपए का कहा, सारी हीरोइनगिरी निकाल देंगी।”

ट्वीट के जरिए दिलजीत और कंगना एक दूसरे पर लगातार हावी होते दिख रहे हैं। एक और पोस्ट में दिलजीत ने कंगना को लेकर लिखा- “आजा आजा, ओए बददिमाग, बदतमीज। बात हो रही है उसकी जिस माँ को तूने 100 रुपए दिहाड़ी वाला कह के फोटो डाली थी। उसका जवाब सुन लिया या दोबारा भेजूँ। ऐसे ही बात न घुमा। जोड़-तोड़ बॉलीवुड में चलता हेागा तेरा, पंजाबियों के साथ नहीं चलना।”

इसके पहले कंगना ने पोस्ट में लिखा था- “ओए डम्बो, बात वही है जब किसी की सिटीजनशिप गई ही नहीं तो शाहीन बाग दादी ने किसके कहने पे प्रोटेस्ट किए? जब एमएसपी हटाया ही नहीं तो फिर वही दादी किसके भेजने पे फार्मर्स प्रोटेस्ट में हिस्सा ले रही हैं। कौन किसको पीछे से प्रॉम्प्ट करता है जब वह बोलती है।”

दरअसल, किसान आंदोलन को लेकर कंगना रनौत ने अपने एक और ट्वीट में शाहीन बाग का जिक्र करते हुए लिखा था, “शर्मनाक… किसानों के नाम पर हर कोई अपनी रोटियाँ सेंक रहा है। आशा है कि सरकार ऐसे राष्‍ट्र विरोधी तत्‍वों को फायदा उठाने का मौका नहीं देगी और फिर से शाहीन बाग जैसे हालात बनाने से रोकेगी।”

‘गुस्ताख़-ए-रसूल की एक ही सज़ा…’- दीवारों पर ग्राफिटी लिखने वाले मो नजीर को मेंगलुरु पुलिस ने किया गिरफ्तार

कर्नाटक के मेंगलुरु में एक अपार्टमेंट की दीवारों पर संघियों और मनुवादियों को धमकी भरी भयावह बातें लिखने के मामले में पुलिस ने गुरुवार (दिसंबर 3, 2020) को एक मोहम्मद नजीर नामक युवक को गिरफ्तार किया है। सोशल मीडिया पर आरोपित को जॉमेटो का डिलीवरी ब्वॉय बताया जा रहा है।

हालाँकि, मीडिया रिपोर्ट्स में इसकी पुष्टि नहीं हुई है। रिपोर्ट्स में बस ये लिखा है कि नजीर तीर्थहल्ली का रहने वाला है और ऑनलाइन खाना डिलीवर करने का काम करता है।

बता दें कि एक हफ्ते पहले मेंगलुरु में 28 नवंबर को पुलिस चौकी की दीवार पर एक ग्राफिटी देखी गई थी। इसमें लिखा था, “गुस्ताख़-ए-रसूल की एक ही सज़ा, सर तन से जुदा।” 

इसके अलावा इससे पहले एक अपार्टमेंट की दीवार पर लिखा गया था, “हमें इस बात के लिए मजबूर नहीं किया जाए कि हमें संघियों और मनुवादियों का सामना करने के लिए लश्कर-ए-तैय्यबा और तालिबान की मदद लेनी पड़े।” आगे लश्कर के समर्थन में लिखा था, “‘लश्कर जिंदाबाद।”

मामले के उजागर होने के कुछ समय बाद ऑपइंडिया ने इस संबंध में पुलिस से बात की थी। पुलिस ने हमें तब विस्तार से जानकारी देते हुए कहा था कि पहली ग्राफिटी मेंगलुरु के सर्किट रोड स्थित अपार्टमेंट पर बनाई गई। जिसके बाद कदरी पुलिस थाने ने इस प्रकरण के संबंध में मामला दर्ज कर लिया है और सीसीटीवी फुटेज के आधार पर जाँच शुरू है।

इसके कुछ समय बाद पुलिस ने बताया था कि ग्राफिटी को ढक दिया गया है और भारतीय दंड संहिता की धारा 153 व सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुँचाने से संबंधित अन्य धाराओं के तहत अज्ञात लोगों के विरुद्ध मामला दर्ज किया जा चुका है। 

इस ग्राफिटी की तस्वीर सामने आने के बाद तरह-तरह के सवाल उठ रहे थे। ऐसे में एसडीपीआई ने इस कृत्य के लिए हिंदुत्व कार्यकर्ताओं को जिम्मेदार बताया था। SDPI ने कहा था कि संघ परिवार की भूमिका इसमें संदिग्ध है। दक्षिण कन्नड़ में SDPI की अध्यक्ष अतौल्ला जोकट्टे ने कहा था कि ऐसा इलाके की शांति भंग करने के लिए हुआ है।

गौरतलब है कि पिछले दिनों मेंगलुरू की दीवारों पर लिखी गई ये बातें बिलकुल ऐसी थीं जैसे पाकिस्तान के लोग फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के विरोध में उतरे थे। तहरीक-ए-लब्बैक (TLP) के हज़ारों समर्थक फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के विरोध में रावलपिंडी की सड़कों पर उतरे थे। उनका विरोध इस मुद्दे पर था कि फ्रांस के राष्ट्रपति ने पैगंबर मोहम्मद का कार्टून बनाने के अधिकार का बचाव किया था। 

PFI नेताओं के 26 ठिकानों पर ED की छापेमारी: दंगों-अराजक गतिविधियों की फंडिंग के मामले में चला अभियान

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने आज पॉपुलर फ्रंट ऑफ़ इंडिया (पीएफ़आई) के नेशनल एग्जीक्यूटिव काउंसिल मेम्बर करमना अशरफ मौलवी के तिरुअनंतपुरम स्थित पूंथुरा आवास पर छापा मारा। ईडी ने साल 2018 के दौरान पीएफ़आई के कई सदस्यों पर धन शोधन निरोधक अधिनियम (मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट) के तहत मामला दर्ज किया था। इस संबंध में ईडी ने अभी तक कोई आधिकारिक बयान नहीं जारी किया है। इसके अलावा कोज़ीकोड़े, मल्लापुरम और एर्नाकुलम स्थित पीएफ़आई नेताओं के आवासों पर भी छापा मारा गया। 

सिर्फ यही नहीं बल्कि प्रवर्तन निदेशालय ने सिंहवाड़ा थाना क्षेत्र के अंतर्गत शंकरपुर में पीएफ़आई के जनरल सेक्रेटरी मोहम्मद सनाउल्लाह के घर छापा मारा। यह छापा सीएए और एनआरसी विरोधी प्रदर्शन के दौरान फंडिंग को लेकर मारा गया था। फ़िलहाल ईडी इस संबंध में पीएफ़आई के अन्य सदस्यों से पूछताछ कर रही है, छापेमारी के दौरान ईडी को क्या हासिल हुआ इस बात की जानकारी सामने नहीं आई है। ईडी की कार्रवाई के दौरान सनाउल्लाह अपने आवास पर नहीं मौजूद थे।   

बता दें कि पीएफ़आई और एसडीपीआई अपनी अराजक गतिविधियों, आपराधिक कृत्यों, जबरन धर्मांतरण और देश विरोधी गतिविधियों की वजह से संदेह और जाँच के दायरे में रहा है। मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो ईडी ने 9 राज्यों के कुल 26 ठिकानों पर छापेमारी का अभियान चलाया। 

सीएए विरोध प्रदर्शन में पीएफ़आई की भूमिका संदिग्ध

पिछले साल दिसंबर महीने के दौरान हुए सीएए और एनआरसी के विरोध प्रदर्शन में पीएफ़आई पर फंडिंग उपलब्ध कराने और दंगा भड़काने का आरोप लगा था। इस साल के जनवरी महीने में केंद्रीय जाँच एजेंसी ने इस संबंध में कई दस्तावेज़ भी पेश किए थे जिसमें पीएफ़आई के खातों और प्रदर्शनकारियों के खातों के बीच लेन-देन की पूरी जानकारी मौजूद थी।

दस्तावेज़ में यह लिखा था, “4 दिसंबर 2019 से 6 जनवरी 2020 के बीच कुल 15 खातों में (10 पीएफ़आई और 5 रेहब इंडिया फाउंडेशन) 1.04 करोड़ रुपए डाले गए थे। इन खातों में पूरी राशि नगद ही डाली गई थी और यह 5 हज़ार से 49 हज़ार के बीच थी। डिपाजिट की जाने वाली को 50 हज़ार से नीचे इसलिए रखा गया था जिससे जमा करने वाले व्यक्ति की पहचान सामने नहीं आए। हिंदुस्तान टाइम्स में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार दस्तावेज़ में यह लिखा हुआ था कि 4 दिसंबर 2019 से 6 जनवरी 2020 के बीच 15 खातों में से 1.34 करोड़ रुपए नगद NEFT/IMPS के माध्यम से निकाले गए थे। 

वहीं 12 से 21 दिसंबर के बीच उत्तर प्रदेश में विरोध प्रदर्शन हुए थे और इसी बीच एक ही खाते से कुल 90 विदड्राल (निकासी) हुए थे। उस दस्तावेज़ के अगले हिस्से में लिखा था कि रुपए के लेन देन से इतना साफ़ है कि सीएए और एनआरसी के विरोध प्रदर्शन में पीएफ़आई ने आर्थिक भूमिका निभाई है। फ़िलहाल इस पूरे प्रकरण में ईडी की तरफ से जाँच अभियान जारी है। 

पीएफ़आई ने नकारे सारे आरोप 

हालाँकि, इन सभी आरोपों पर पीएफ़आई का साफ़ कहना है कि सभी आरोप निराधार हैं। पीएफ़आई के तमाम लोगों पर दिल्ली दंगों के संबंध में भी जाँच जारी है। हाल ही में पीएफ़आई के 4 सदस्य (केरल का सिद्दीकी कप्पन) को हाथरस प्रकरण में जातीय उन्माद भड़काने के आरोप में यूएपीए के तहत गिरफ्तार किया गया था। पीएफ़आई पर केरल में तमाम तरह के कैम्प चलाने का भी आरोप है। इसकी स्थापना साल 2006 के दौरान केरल में हुई थी।                       

कोरोना वैक्सीन को लेकर राहुल गाँधी गढ़ रहे झूठ, फैला रहे भ्रम: मोदी-विरोध में कॉन्ग्रेसी राजनीति का Fact Check

कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी ने गुरुवार (दिसंबर 3, 2020) को कोरोना वैक्सीन को लेकर भारत सरकार के ख़िलाफ़ जनता को बरगलाने का ओछा प्रयास किया। उन्होंने जनता को कुछ हेडलाइनों के जरिए भ्रमित किया और मोदी सरकार पर सवाल उठाए।

अपने ट्वीट में उन्होंने तीन बिंदु बताए, जो एक-दूसरे से बिलकुल भिन्न थे। उनके ट्वीट का उद्देश्य पूर्ण रूप से लोगों को कन्फ्यूज करने का था। सबसे पहले राहुल ने अपने ट्वीट में पीएम मोदी के 29 अक्टूबर को दिए बयान का उल्लेख किया, जिसमें पीएम ने कोरोना वैक्सीन सबको उपलब्ध कराने की बात कही थी। 

पीएम मोदी ने उस दौरान बताया था कि एक राष्ट्रीय विशेषज्ञ समूह को तैयार किया गया है ताकि वह वैक्सीन प्रबंधन को संभाले और इसका सही चार्ट तैयार करे। इसके साथ ही उन्होंने कहा था कि हर किसी को वैक्सीन मिलेगी, कोई भी भारतीय पीछे नहीं छोड़ा जाएगा। पीएम मोदी के इस बयान का मतलब था कि किसी भी नागरिक को वैक्सीन के लिए मना नहीं किया जाएगा।

उन्होंने अपनी बात रखते हुए स्पष्ट करके कहा था कि सबसे पहले सरकार सबसे कमजोर और अग्रिम पंक्तियों के कार्यकर्ताओं की रक्षा पर ध्यान केंद्रित करेगी। बाकी देशों में भी इसी क्रम में काम हो रहा है। प्रधानमंत्री ने बताया था कि कोरोना वैक्सीन का कार्य अभी भी चल रहा है और ट्रायल किए जा रहे हैं।

अपने इंटरव्यू में पीएम मोदी ने कहा था कि आने वाले समय में पूरे देश को वैक्सीन दी जाएगी। हालाँकि वैक्सीन परीक्षण, उसके उत्पादन और टीका लगाने में आवश्यक टाइम लगेगा, यह पहले समाज के कमजोर वर्गों को दिया जाएगा और फिर अन्य नागरिकों को बाँटा जाएगा। उन्होंने इस बात को भी स्पष्ट कहा था कि जो वैक्सीन लेना चाहेगा, उसे उसके लिए मना नहीं किया जाएगा।

बयानों में इतनी स्पष्टता होने के बावजूद राहुल गाँधी अपनी राजनीति करने के लिए एक हेडलाइन या एक लाइन बताकर लोगों को बरगला रहे हैं। दिलचस्प यह है कि वह केवल इतने पर नहीं रुक रहे। वह इसे बिहार चुनाव से भी जोड़ रहे हैं और भारत सरकार के हालिया बयान से भी।

उनके ट्वीट में ये समझाने की कोशिश हुई है कि पहले कहा गया कि पूरे देश को वैक्सीन मिलेगी, फिर बिहार में कहा गया कि बिहार की जनता को मिलेगी और अब भारत सरकार कह रही है कि हर किसी को वैक्सीन नहीं मिलेगी। राहुल गाधी का पूछना है कि आखिर पीएम बताते क्यों नहीं कि वह किस बात पर स्टैंड ले रहे हैं।

राहुल गाँधी ने जोड़ा बिहार मेनिफेस्टो का मुद्दा और अधिकारी के बयान से की छेड़छाड़

भाजपा के वादों पर भ्रम पैदा करने के लिए राहुल गाँधी ने दो मुद्दों को साथ में जोड़ा। पहले पीएम का बयान और फिर बिहार चुनाव में जनता से किया गया वादा। दरअसल भाजपा ने बिहार चुनाव में जारी किए मेनिफेस्टो में जनता से कोरोना वैक्सीन का वादा किया था, जिस पर कॉन्ग्रेस ने ये कहना चाहा कि भाजपा तो सिर्फ चुनाव देखते हुए बिहार वालों को वैक्सीन देने के लिए कह रही थी, जबकि वास्तविकता में भाजपा का पक्ष बिलकुल साफ था कि अगर उनकी सरकार सत्ता में आई तो वह लोगों को वैक्सीन मुफ्त में उपलब्ध करवाएगी।

इस बिंदु को भी अच्छे से समझने और जानने के बाद कि चुनाव में किए वादे कोई भी पार्टी सत्ता में आने के बाद पूरा करती है, राहुल गाँधी ने जनता के बीच भ्रम पैदा किया।

अलग-अलग बयानों को जोड़ने के बाद राहुल गाँधी ने भारत सरकार के हालिया बयान के साथ भी छेड़छाड़ की, जिसमें केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के अधिकारी ने कहा था कि लोगों को उनकी इच्छा के विरुद्ध टीका लगाने का कोई प्रयास नहीं किया जाएगा।

सरकार ने यह भी कहा था कि वह कोरोनो वायरस के खिलाफ पूरे देश में टीकाकरण नहीं कर सकती है। जिसका मतलब है कि सरकार के समर्थन से टीका पहले मुख्य समूह को दिया जाएगा जबकि देश के अन्य नागरिकों को स्वास्थ्य स्थितियाँ देखते हुए किसी भी अन्य मेडिकल प्रोडक्ट की तरह वैक्सीन खरीदने की जरूरत पड़ सकती है।

अब ऑपइंडिया से बात करते हुए सरकारी सूत्रों ने सचिव के बयान पर कहा है कि उसे गलत तरह से पेश किया गया। अधिकारी केवल अपना बयान अनिवार्य टीकाकरण के संदर्भ में दे रहे थे। यहाँ बता दें कि वरिष्ठ अधिकारी ने न्यूज 18 से बातचीत में कहा था, “यह एक लोकतंत्र है। यहाँ तक ​​कि अगर आप प्राथमिकता समूह में हैं और संवेदनशील हैं, तो भी आपको टीका लेने के लिए मजबूर नहीं किया जाएगा।”

मोदी सरकार की वैक्सीन पर नीति और राहुल गाँधी के प्रयास

गौरतलब है कि मोदी सरकार लगातार एक पॉलिसी पर काम कर रही है, जिससे देश के हर कोने में वैक्सीन को पहुँचाया जा सके। वैक्सीन कैंपेन चलाने में पहले केंद्र सरकार का फोकस दो चीजों पर है। एक, वैक्सीन बनते ही हर किसी को टीका मिले और कोई इससे अछूता न रहे। दूसरा- वैक्सीन सिर्फ उस तबके के लिए फ्री हो, जो कमजोर हैं और बाकी सबको इसके लिए कुछ पैसे देने पड़ सकते हैं।

इस बात पर ध्यान दीजिए कि वैक्सीन को जनता के बीच फ्री में मुहैया कराना या उनसे राशि लेना सिर्फ राज्य सरकार की इच्छा पर है। राज्य सरकारों पर इसका जिम्मा होगा कि वह केंद्र सरकार से वैक्सीन लेकर उसका फायदा जनता को फ्री में पहुँचाए या कुछ पैसे लेकर। अगर राज्य सरकार जनता को फ्री में वैक्सीन देना चाहेगी तो उन्हें उसके लिए राज्य के खजाने से उसका फंड देना होगा।

ऐसे में दुर्भाग्य यह है कि राहुल गाँधी को कौन और कैसे समझाए? वह हर स्पष्टीकरण के बाद भी लगातार लोगों को भ्रमित कर रहे हैं और हैरानी तो इस बात की है कि जब पूरा देश कोरोना वायरस के ख़िलाफ़ जंग लड़ रहा है, तब राहुल गाँधी जनता को बरगलाना चाहते हैं और अपने झूठे दावों से जनता में भय पैदा करना चाहते हैं। उनके लिए ऐसे अवसर पर भी अपनी राजनीति पहली प्राथमिकता है।

लवजिहाद आरोपित उवैश अहमद 5 दिनों से चल रहा था फरार: नए कानून के तहत यूपी पुलिस ने किया गिरफ्तार

उत्तर प्रदेश में लव जिहाद के खिलाफ कानून बनने के बाद बरेली में दर्ज हुए पहले मुकदमे में गिरफ्तारी हो गई है। देवरनिया थाने में 28 नवंबर को ‘लव जिहाद’ का पहला मुकदमा दर्ज होने के बाद से ही फरार चल रहे आरोपित उवैश को आखिरकार पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तारी के बाद अरोपित उवैश अहमद को बुधवार को अदालत में पेश किया गया था। जहाँ से उसे जेल भेज दिया गया।

बरेली पुलिस के आधिकारिक ट्विटर हैंडल पर लव जिहाद के आरोपित की गिरफ्तारी की जानकारी साझा की है।

उवैश पर आरोप है कि वह एक हिन्दू लड़की को अपने प्रेमजाल में फँसाकर उस पर धर्मांतरण का दबाव बना रहा था। इतना ही नहीं लड़की की शादी कहीं और हो जाने के बाद भी आरोपित उसे जान से मारने की धमकी भी दे रहा था। योगी सरकार द्वारा लाए गए विधि विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम-2020 को राज्यपाल से मंजूरी मिलने के बाद प्रदेश में यह पहला केस दर्ज हुआ था।

बरेली के पुलिस उपमहानिरीक्षक राजेश कुमार पांडे ने कहा, ‘‘जिले की बहेड़ी पुलिस ने रिछा रेलवे फाटक के पास से आरोपी युवक को गिरफ्तार कर लिया।”

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, बरेली के प्रभारी वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक संसार सिंह ने मामले की जानकारी देते हुए गुरुवार (3 दिसंबर, 2020) को बताया, ‘‘जिले के थाना देवरनिया के गाँव शरीफ नगर में रहने वाली एक युवती का आरोप था कि आरोपी उसे तीन साल से परेशान कर रहा था और विवाह के लिए धर्म परिवर्तन का दबाव बनाता था।’’

गौरतलब है कि लड़की के पिता ने अपनी शिकायत में पुलिस को कहा है कि उनकी बेटी इंटर कॉलेज की पढ़ाई के दौरान उवैस के संपर्क में आई थी। उवैस ने उसे अपने जाल में फँसाया और जब लड़की ने 2019 में बीए में एडमिशन लिया तो वह उसे बहलाकर अपने साथ भोपाल ले गया।

उस समय लड़की के घरवालों ने पुलिस में शिकायत नहीं की थी। गाँव में एक पंचायत बैठी थी और उसमें निर्णय लिया गया कि मुकदमा दर्ज नहीं करवाया जाएगा और उवैस उनकी लड़की को वापस कर देगा।

युवती के वापस आते ही उसके परिजन ने जून 2020 में उसकी शादी किसी दूसरी जगह कर दी, इससे बौखलाया आरोपित अक्सर उसके पिता के घर पहुँच कर धमकी देता था। पिछले शनिवार को भी उसने पिता को तमंचा दिखाकर जान से मारने की धमकी दी थी। अंत में परिवार ने तंग आकर शिकायत करवाई।

पुलिस ने इस मामले की पुष्टि करते हुए परिजनों को बताया था कि हाल में जो अध्याधेश (विधि विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम’) जारी हुआ है, उसकी धारा 3 व 5 के तहत यह मुकदमा दर्ज हुआ है। इसके अलावा आईपीसी की अन्य धाराएँ भी उवैस के ख़िलाफ़ लगाई गई हैं। एफआईआर दर्ज होने के बाद से आरोपित फरार चल रहा था। जिसको 5 दिन बाद पुलिस ने गिरफ्तार किया है। और उसे 14 दिन के न्यायिक हिरासत में भेजा गया है।

‘अपनी 12 बीघा जमीन PM मोदी को देना चाहती हूँ’ – 85 साल की बुजुर्ग महिला का ‘सीरियस’ वीडियो हो रहा वायरल

हर राजनेता को समझने के दो सबसे बड़े पैमाने हैं, पहला उसकी लोकप्रियता और दूसरा उसकी स्वीकार्यता। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी इन दोनों ही मामलों में देश और दुनिया के तमाम नेताओं से कहीं आगे हैं। ताज़ा मामले में देश के प्रधानमंत्री की लोकप्रियता और स्वीकार्यता सामने आई है। उत्तर प्रदेश की 85 वर्षीय वृद्ध महिला अपनी पूरी संपत्ति प्रधानमंत्री के नाम करना चाहती हैं और इसके पीछे की वजह बेहद भावनात्मक है। 

उत्तर प्रदेश के मैनपुरी की रहने वाली 85 वर्षीय बिट्टन देवी का कहना है कि उनके पति की कुछ समय पहले मौत हो चुकी है। उनके परिवार में दो बेटे और बहु हैं और वह उनका बिलकुल ध्यान नहीं रखते हैं।

बिट्टन देवी ने कहा कि सालों बीत गए लेकिन वह जानने का प्रयास तक नहीं करते हैं कि वह किस हालात में हैं और उनकी मूलभूत आवश्यकताएँ कैसे पूरी होती हैं। उनका जीवनयापन केंद्र सरकार द्वारा प्रदान की जा रही वृद्धा पेंशन से हो रहा है। यही वजह है कि वह अपनी कुल 12 बीघा ज़मीन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नाम करना चाहती हैं। 

पिछले कुछ समय से सोशल मीडिया पर उनका वीडियो भी खूब चर्चा में बना हुआ है। इसमें वह साफ़ तौर पर कहती हुई नज़र आ रही हैं कि उनके पति की मृत्यु के बाद वह बहुत परेशान थीं। उनके बच्चे उनका बिलकुल ध्यान नहीं रखते हैं, प्रधानमंत्री मोदी पेंशन देते हैं तो काम चलता है, इसलिए वह अपनी पूरी ज़मीन प्रधानमंत्री मोदी के नाम करना चाहती हैं। अपनी यह गुज़ारिश लेकर वह मैनपुरी तहसील के अधिवक्ता कृष्ण प्रताप सिंह के चेंबर में गई थीं। 

उन्होंने अधिवक्ता से इस मुद्दे पर बात की और कहा कि वह 12 बीघा ज़मीन प्रधानमंत्री मोदी के नाम करना चाहती हैं। यह बात मौके पर मौजूद हर किसी के लिए हैरान करने वाली थी। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़ अधिवक्ता और मौके पर मौजूद लोगों ने उन्हें समझाने का बहुत प्रयास किया लेकिन वह अपनी बात से पीछे हटने को तैयार नहीं थीं। 

अंत में अधिवक्ता ने उन्हें आश्वासन दिया कि वह इस संबंध में जिलाधिकारी से बात करेंगे, तब कहीं जाकर बिट्टन देवी ने बात मानी। हालाँकि बुजुर्ग महिला अपनी बात पर टिकी हुई हैं और इस कारण से अधिवक्ता ने उन्हें दो दिन बाद वापस आने की बात भी कही है। फ़िलहाल बुजुर्ग महिला का प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के प्रति स्नेह पूरे सोशल मीडिया पर चर्चा का कारण बना हुआ है।        

बेंगलुरु दंगे में आरोपित एक और फरार कॉन्ग्रेसी नेता रकीब जाकिर को क्राइम ब्रांच ने किया गिरफ्तार

कर्नाटक की राजधानी बंगलूरू में हुए दंगों के मामले में मुख्य आरोपित कॉन्ग्रेस नेता और पूर्व कॉर्पोरेटर रकीब जाकिर को सेंट्रल क्राइम ब्रांच (CCB) के अधिकारियों ने गिरफ्तार कर लिया है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, संयुक्त अपराध आयुक्त संदीप पाटिल ने कहा कि कॉन्ग्रेस नेता रकीब जाकिर को बुधवार (3 दिसंबर, 2020) देर रात गिरफ्तार किया गया था। बेंगलुरु हिंसा के मामले में आरोपित ठहराए जाने के बाद से ही कॉन्ग्रेस नेता फरार चल रहे थे।

बता दें जाकिर बेंगलुरु दंगों के मामले में गिरफ्तार होने वाला दूसरे कॉर्पोरेटर है। इससे पहले सीसीबी अधिकारियों ने कॉन्ग्रेस नेता और पूर्व मेयर आर संपत राज को गिरफ्तार किया था। लगभग डेढ़ महीने से भी पहले से जाकिर संपत के साथ फरार चल रहा था। हालाँकि, पूर्व मेयर ने एफआईआर को रद्द करने और अग्रिम जमानत खारिज करने के अपने प्रयासों के बाद 17 नवंबर को पुलिस के सामने आत्मसमर्पण करने का फैसला किया था।

कथित तौर पर, जाकिर और संपत दोनों नगरहोल के पास एक ही फार्महाउस में छिपे हुए थे। दो हफ्ते पहले केंद्रीय क्राइम ब्रांच के अधिकारियों ने कॉन्ग्रेस नेता संपत राज के करीबी रियाजुद्दीन को गिरफ्तार किया था। खुद को छुपाने और फरार आरोपित की मदद करने के आरोप में रियाजुद्दीन को गिरफ्तार किया गया और न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।

गौरतलब है कि आरोपित रियाजुद्दीन खुद फरार था और साथ ही संपत राज की मदद करने और उसे शरण देने के आरोप में 7 नवंबर को गिरफ्तार किया गया था। जाहिर तौर पर वह कॉन्ग्रेस नेता राज को नगरहोल के पास एक फार्महाउस में ले गया था और उसे कुछ दिनों के लिए वहाँ छिपा दिया था।

बता दें कि राज इस साल अगस्त में बेंगलुरु दंगों को भड़काने के साजिशकर्ताओं में से एक है। सेंट्रल क्राइम ब्रांच (CCB) द्वारा बेंगलुरु दंगों के मामले में दायर आरोप-पत्र में कहा गया है कि कॉन्ग्रेस नेता संपत राज ने अपनी ही पार्टी के दलित विधायक अखण्ड श्रीनिवास मूर्ति को निशाना बनाने के लिए जाकिर और अन्य कट्टरपंथी इस्लामिक संगठन जैसे SDPI से हाथ मिलाया था।

उल्लेखनीय है कि 850 पन्नों की दायर चार्जशीट में CCB ने 52 लोगों को आरोपित बनाया है। इस चार्जशीट में 30 से अधिक चश्मदीदों के बयान हैं। जाँच एजेंसी ने कॉन्ग्रेस पार्टी के पूर्व मेयर संपत राज को 51वें और जाकिर हुसैन 52वें नंबर पर आरोपित घोषित किया है।

बेंगलुरु दंगा

बेंगलूरु में 11 अगस्त को डीजे हल्ली और केजे हल्ली पुलिस स्टेशन की सीमाओं के बीच लगभग 8:30 बजे हिंसक दंगे को अंजाम दिया गया था। रिपोर्ट्स के मुताबिक, कॉन्ग्रेस के विधायक अखंड श्रीनिवास मूर्ति के घर के बाहर 1000 से ज्यादा लोग जमा थे, जिन्होंने कथित रूप से फेसबुक पर पैगंबर मोहम्मद के खिलाफ आपत्तिजनक कंटेंट पोस्ट करने पर घर पर हमला कर दिया था। बता दें यह पोस्ट असल में कॉन्ग्रेस विधायक श्रीनिवास मूर्ति के भतीजे नवीन ने पोस्ट किया था।

पुलिस ने स्थिति को अगले दिन यानी 12 अगस्त तक अपने नियंत्रण में किया। इस दंगे में तीन लोग मारे गए और 60 से अधिक पुलिस कर्मी घायल हो गए थे। वहीं दंगों में 300 से अधिक वाहन क्षतिग्रस्त हो गए थे।

UP में फिल्म सिटी पर महाराष्ट्र की सत्ता में ‘आग’: NCP का प्रदर्शन, CM ठाकरे ने कहा – ‘ईर्ष्या नहीं कर रहे लेकिन…’

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज में 200 करोड़ रुपए के लखनऊ नगर निगम के बॉन्ड को लॉन्च करने के लिए मुंबई में थे। उन्होंने गौतम बुद्ध नगर जिले में यूपी की आगामी फिल्म सिटी में निवेश पर चर्चा करने के लिए कई फिल्मी हस्तियों से मुलाकात की। इस सिलसिले में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी ने अभिनेता अक्षय कुमार से भी बातचीत की है। हालाँकि उनके इस दौरे ने मुंबई के सत्तारूढ़ पार्टी गठबंधन में हलचल मचा दी है।

राष्ट्रीय कॉन्ग्रेस पार्टी (एनसीपी) और शिवसेना के नेताओं ने उनकी यात्रा पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया है कि सीएम योगी मुंबई से फिल्म उद्योग को हटाने की कोशिश कर रहे हैं।

यूपी में सबसे बड़ी फिल्म सिटी का निर्माण

दरअसल सितंबर में योगी आदित्यनाथ की यूपी सरकार ने गौतम बुद्ध नगर में फिल्म सिटी के लिए 1000 एकड़ जमीन आवंटित किया था। 22 सितंबर को मुख्यमंत्री ने लखनऊ में कई फिल्मी हस्तियों से मुलाकात की, जिनमें फिल्मकार सुभाष घई, ओम राउत (तानाजी के निर्देशक), तमिल अभिनेता रजनीकांत और उनकी बेटी सौंदर्या, गायक कैलाश खेर और उदित नारायण शामिल थे।

वहीं एनसीपी कार्यकर्ताओं ने 2 दिसंबर को आगामी फिल्म सिटी के खिलाफ यूपी में विरोध प्रदर्शन किया। साथ ही उन्होंने 2 दिवसीय यात्रा के लिए मुंबई पहुँचे योगी आदित्यनाथ के खिलाफ नारे भी लगाए।

एनसीपी ने आरोप लगाया कि सीएम योगी महाराष्ट्र के फिल्म उद्योग को ले जाने की कोशिश कर रहे हैं। और वे किसी भी कीमत पर यह नहीं होने देंगे। एनसीपी नेताओं ने मीडिया से कहा कि योगी का मुंबई में स्वागत है लेकिन मुंबई से फ़िल्म सिटी को किसी भी कीमत पर शिफ्ट नहीं होने देंगे। एनसीपी के माजिद ने यहाँ तक ​​दावा किया कि बॉलीवुड निवेशक मुंबई छोड़ना पसंद नहीं करेंगे।

इतना ही नहीं, हद तो तब हो गई जब एनसीपी ने यह मानते हुए कि यूपी के सीएम योगी बॉलीवुड के फिल्म उद्योग को अपने राज्य में ले जाएँगे तो उन्होंने इसका विरोध भी करना शुरू कर दिया। यह समझ में नहीं आता है कि वे उस निष्कर्ष पर कैसे पहुँचे, क्योंकि भारत में कई फिल्मी शहर हैं और यह बताने के लिए कोई कानून नहीं है कि सिनेमा उद्योग के निवेशक दूसरे राज्य में निवेश नहीं कर सकते।

गौरतलब है कि महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने 2 दिसंबर को यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ पर कटाक्ष किया और कहा कि कोई भी महाराष्ट्र से कोई उद्योग नहीं ले जा सकता है। उद्धव ठाकरे ने कहा, “महाराष्ट्र कॉम्पिटिशन से नहीं डरता है लेकिन कोई जबरन यहाँ से बिजनस लेकर नहीं जा सकता है। इसकी इजाजत नहीं होगी। हम किसी की प्रगति से ईर्ष्या नहीं कर रहे लेकिन यह फेयर कॉम्पिटिशन के जरिए होना चाहिए।”

उद्धव ने कहा कि जो कोई भी उद्योग को ले जाने की कोशिश करेगा, वह सफल नहीं होगा क्योंकि महाराष्ट्र की मैग्नेटिक मजबूती काफी शक्तिशाली है जो चीजों को यहाँ से जाने से रोकेगी।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, यूपी सरकार के प्रवक्ता ने कहा कि सीएम योगी राज्य में फिल्म सिटी की स्थापना की प्रक्रिया को अंतिम रूप देने के लिए सुभाष घई, बोनी कपूर, ज़ी स्टूडियो के जतिन सेठी, टी-सीरीज़ के भूषण कुमार, रणदीप हुड्डा, जिमी शेरगिल, कोमल नाहटा और राज कुमार संतोषी सहित अन्य लोगों से मिलेंगे। वह चर्चा करेंगे कि फिल्म निर्माताओं के लिए फ़िल्म सिटी और अधिक आकर्षक बनाने के लिए कौन-कौन सी सुविधाएँ शामिल की जानी चाहिए।

मैं नई फिल्म सिटी बना रहा हूँ: योगी आदित्यनाथ

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने महाराष्ट्र की अपनी यात्रा पर शिवसेना के संजय राउत की टिप्पणियों का करारा जवाब देते हुए कहा था कि वह महाराष्ट्र राज्य से कुछ भी नहीं ले जा रहे और वह उत्तर प्रदेश में एक नई फिल्म सिटी का निर्माण कर रहे हैं। बता दें कि राउत ने चेतावनी दी थी कि मुंबई फिल्म सिटी को दूसरी जगह पर शिफ्ट करना आसान नहीं है।