Home Blog Page 4278

‘मंदिर के पुजारी अर्ध नग्न, लेकिन किसी श्रद्धालु ने आपत्ति नहीं की’: शिरडी के फैसले पर तृप्ति देसाई को याद आई ‘अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता’

शिरडी के साईबाबा मंदिर न्यास की ओर से श्रद्धालुओं को ‘सभ्य तरीके से’ कपड़े पहनकर आने की अपील के बीच ‘सामाजिक कार्यकर्ता’ तृप्ति देसाई ने पूछा है कि श्रद्धालुओं और पुजारियों के लिए दोहरे मापदंड क्यों हैं।

मंगलवार (दिसंबर 1, 2020) की शाम एक वीडियो संदेश में देसाई ने कहा कि मंदिर न्यास द्वारा श्रद्धालुओं के लिए इस प्रकार के बोर्ड लगाया जाना अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के संवैधानिक अधिकार के खिलाफ है।

देसाई ने यह भी कहा कि यदि बोर्ड नहीं हटाए जाएँगे तो वह और अन्य कार्यकर्ता महाराष्ट्र के अहमदनगर जिले में स्थित शिरडी जाकर बोर्ड को हटा देंगे। श्री शिरडी साईबाबा संस्थान न्यास के मुख्य कार्यकारी अधिकारी कान्हुराज बगाते ने मंगलवार को कहा कि न्यास ने केवल श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे सभ्य तरीके की पोशाक पहनकर वहाँ आए। कान्हुराज ने कहा कि उन्होंने वेशभूषा को लेकर कोई नियम नहीं थोपा है।

उन्होंने कहा कि श्रद्धालुओं द्वारा शिकायत की गई थी कि कुछ लोग आपत्तिजनक कपड़े पहनकर मंदिर में आते हैं जिसके बाद यह अपील की गई। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए देसाई ने कहा, “मंदिर के पुजारी अर्ध नग्न होते हैं, लेकिन किसी श्रद्धालु ने इस पर आपत्ति नहीं की। बोर्ड को तत्काल हटाया जाना चाहिए वरना हम आकर हटा देंगे।”

उन्होंने कहा कि विभिन्न जातियों, पंथ और धर्म के लोग देश और दुनिया से शिरडी आते हैं। तृप्ति ने कहा, “भारत में संविधान ने अपने नागरिकों को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार दिया है और इस अधिकार के अनुसार क्या बोलना है और क्या पहनना है यह व्यक्तिगत मामला है।”

देसाई का कहना था कि सभी भक्त इस बात से भली भाँति अवगत हैं कि जब वो पूजा स्थल पर जाते हैं तो उन्हें किस तरह का कपड़ा पहनना चाहिए। उन्होंने कहा कि कोई भी ये निर्णय नहीं ले सकता है कि श्रद्धालु किस तरह के कपड़े पहनेंगे। सभी की आस्था महत्वरूर्ण होती है।

गौरतलब है कि तृप्ति देसाई ने सबरीमाला के देवता स्वामी अय्यप्पा को चुनौती देने और उनके मंदिर के नियम भंग कर प्रवेश करने की कोशिश की, हालाँकि एक साल में दूसरी बार उनके मंसूबे नाकाम हो गए। इसके बाद तृप्ति देसाई कोच्चि हवाई अड्डे से अपने गृह नगर पुणे बैरंग लौट गईं। इसके पहले मंगलवार (26 जुलाई, 2019 को) सुबह वे इस घोषणा के साथ कोच्चि पहुँची थीं कि चाहे सुरक्षा मिले या न मिले, वे मंदिर में घुस कर रहेंगी।

राजनीतिक के कारण किसान यूनियन ने लिया बड़ा यू-टर्न: पिछले साल खुद ही उठाई थी नए कानून में शामिल सभी माँग

किसान आंदोलन में सबसे आगे आकर केंद्र सरकार द्वारा लाए गए नए कानूनों पर सवाल उठाने वाला भारतीय किसान संगठन (BKU) अब अपनी ही कही बातों से यू टर्न लेता नजर आ रहा है। बता दें कि जिन कानूनों पर संगठन आज नाराजगी दिखा रहा है, वह किसान को उनकी फसल मनमुताबिक दाम पर किसी भी बाजार में बेचने की आजादी देता है और बिचौलियों की भूमिका को खत्म करता है। कुछ समय पहले यही माँग इस संगठन की थी, लेकिन अब राजनीति के कारण हर बयान पूरी तरह उलट दिया जा रहा है।

आज संगठन का कहना है कि नए कानून किसानों के हित में नहीं हैं और इसलिए पुरानी प्रणाली वापस लाई जाए। इनकी माँग है कि बिचौलिया वाला सिस्टम दोबारा शुरू करके पुराने कानूनों को रिस्टोर किया जाना चाहिए, क्योंकि वह सर्वोत्तम थे और जिसे सरकार बिचौलिया बता रही है, वह केवल सर्विस प्रोवाइडर हैं, जो किसानों को सुविधा देने के लिए कमीशन लेते हैं।

अब अजीब बात है कि संगठन के ये दावे पिछले साल के मुकाबले बिलकुल उलट है। दरअसल, साल 2019 में बीकेयू ने केंद्रीय मंत्री राम विलास पासवास की उन माँगों का समर्थन किया था, जिसमें उन्होंने पंजाब मुख्यमंत्री से अढ़तिया प्रणाली को हटाकर किसानों को डायरेक्ट भुगतान का मुद्दा उठाया था।

इसी संगठन के किसानों ने उस समय केंद्रीय मंत्री राम विलास पासवान की माँग का स्वागत किया था और ऐसे बिचौलियों की भूमिका खत्म करने की माँग उठाई थी जिनके कारण किसान पर उधार का अधिक बोझ बढ़ता है।

केंद्र सरकार ने नए कानून में किसानों को यही आजादी और अधिकार प्रदान किए हैं। लेकिन अब यही संगठन पुरानी प्रणाली वापस लाने पर जोर दे रहा है। साथ ही पंजाब सीएम अमरिंदर सिंह द्वारा इस कानून का विरोध किए जाने पर उनकी तारीफ कर रहा है। इस कानून को यह संगठन काला कानून बता रहा है।

पिछले साल मेनिफेस्टो में उठाई थी यही माँगे, अब अपनी बात से पलटे

दिलचस्प बात ये है कि साल 2019 में ऑल इंडिया किसान कॉर्डिनेशन कमेटी द्वारा तैयार किए गए बीकेयू मेनिफेस्टों में भी उन्हीं बातों का उल्लेख हैं जो नए कृषि कानून में हैं। इस मेनिफेस्टों में एक माँग APMC एक्ट और आवश्यक वस्तु अधिनियम को खत्म करने की है।

बीकेयू ने किसानों के मौलिक अधिकारों की सुरक्षा के लिए भारत के संविधान से नौवीं अनुसूची को समाप्त करने की भी माँग की थी। घोषणापत्र में कृषि भूमि को बेचने, किराए पर देने और पट्टे पर देने, बेहतर ग्रामीण बुनियादी ढाँचे, भविष्य की वस्तुओं में व्यापार आदि की माँगों का भी उल्लेख किया था।

मेनिफेस्टो में की गई माँग

सरकार के कानून में भी एपीएमसी की मोनोपॉली को खत्म करने के प्रावधान हैं, किसानों को कहीं भी फसल बेचने की आजादी है। इसके अलावा नए कानून में आवश्यक वस्तु अधिनियम में भी संशोधन किए गए हैं। साथ ही ये सुनिश्चित किया गया है कि किसानों को अपनी मेहनत का उचित दाम मिले।

ऐसे में ये हैरान होने वाली बात तो है ही कि आखिर एक साल में बीकेयू इतना बड़ा यूटर्न कैसे ले सकती है, क्योंकि वह तो अपनी माँगों में कृषि क्षेत्र में किसानों के हित के लिए बिचौलियों को हटाना चाहते थे।

यहाँ बता दें कि जब से केंद्र सरकार ने नए कानूनों को लागू किया है, तभी से विरोधी पार्टी इस पर भ्रम पैदा कर रही हैं। ये तीन कानून पीएम मोदी के ‘एक भारत एक कृषि बाजार’ विजन का हिस्सा है, जिससे किसानों के लिए अच्छा माहौल बने। लेकिन अब इन प्रदर्शनों के जरिए राष्ट्र विरोधी ताकतें अपनी आवाजें उठा रही हैं और अशांति फैलाने की लगातार कोशिश कर रही हैं।

कोरोना से जंग के बीच ऐतिहासिक क्षण: अप्रूव हुआ Pfizer-BioNTech Covid-19 वैक्सीन, UK ने लिया निर्णय

कोरोना महामारी से जंग के बीच एक सुखद सूचना यूके से आई है। खबर है कि यूके ने फाइजर-बायोएनटेक कोविड-19 वैक्सीन (Pfizer-BioNTech COVID-19 vaccine) को अधिकृत कर दिया है और इसे अगले सप्ताह से देश भर में उपलब्ध कराया जाएगा।

समाचार एजेंसी एएफपी के अनुसार, Pfizer के सीईओ ने इस कोरोना वैक्सीन (Pfizer-BioNTech COVID-19 vaccine) अप्रूवल को ऐतिहासिक क्षण करार दिया है।

इससे पहले अपने पार्टनर BioNTech के साथ फाइजर (Pfizer Inc), मॉडर्ना और एस्‍ट्राजेनेका ने दिखाया था कि उनके प्रायोगिक वैक्‍सीन कोरोना वायरस संक्रमण को रोकने में सक्षम हैं और आने वाले हफ्ते में यदि इसे मंजूरी मिली तो कंपनी इसका वितरण पूरे देश में शुरू कर देगी। साथ ही कई एशियाई देशों में इसकी बड़ी खेप जाएगी।

बता दें कि ब्रिटेन ने फाइजर और बायोएनटेक (फाइजर-बायोएनटेक कोविड-19 वैक्सीन) की दो-शॉट वाली वैक्सीन की चार करोड़ खुराक का ऑर्डर दिया हुआ है। यह Pfizer-BioNTech COVID-19 vaccine जाँच में 95% से अधिक प्रभावी बताई गई है।

ब्रिटेन ने गत 20 नवंबर को अपने चिकित्सा नियामक, मेडिसिन एंड हेल्थकेयर प्रोडक्ट्स रेगुलेटरी एजेंसी (एमएचआरए) से फाइजर-बायोएनटेक कोरोना वायरस वैक्सीन (Pfizer-BioNTech COVID-19 vaccine) का आँकलन करने को कहा था। इसके अलावा, एजेंसी यह भी निर्धारित करने की प्रक्रिया में थी कि क्या ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी और एस्ट्राजेनेका की वैक्सीन कठोर सुरक्षा मानकों को पूरा कर पाएगी या नहीं।

इस दौरान ब्रिटेन की ओर से कहा गया था कि अगर सब कुछ योजना के अनुसार हुआ और फाइजर और बायोएनटेक द्वारा विकसित वैक्सीन (Pfizer-BioNTech COVID-19 vaccine) को प्राधिकरण की मंजूरी मिली, तो उसके कुछ ही घंटों में वैक्सीन का वितरण और टीकाकरण शुरू कर दिया जाएगा। जरूरी तैयारियाँ को अंतिम रूप दिया जा रहा है।

‘₹100 में उपलब्ध हैं शाहीन बाग वाली दादी बिल्किस बानो’ – कंगना रनौत को कानूनी नोटिस, डिलीट कर दिया था विवादित ट्वीट

शाहीन बाग़ उपद्रव से सुर्ख़ियों में आई ‘दादी’ बिल्किस बानो के ‘किसान आंदोलन’ में भाग लेने की खबर के बाद कंगना रनौत ने उन पर टिप्पणी की थी, जिसके बाद बॉलीवुड अभिनेत्री को एक कानूनी नोटिस भेजा गया है। एक वायरल तस्वीर में दिख रही एक बूढ़ी महिला को लेकर कंगना रनौत ने कहा था कि ये शाहीन बाग़ वाली वही ‘दादी’ हैं, जिन्हें टाइम मैगजीन ने सबसे प्रभावशाली लोगों में शुमार किया था।

कंगना रनौत ने दावा किया था कि शाहीन बाग़ वाली ‘दादी’ अब 100 रुपए में भी उपलब्ध हैं। उन्होंने पाकिस्तानी पत्रकारों पर भारत का अंतरराष्ट्रीय PR गलत तरीके से हाईजैक करने का आरोप भी लगाया। कंगना रनौत ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की बात पहुँचाने के लिए हमारे अपने लोग चाहिए। अब ये ट्वीट तो डिलीट कर लिया गया है, लेकिन इसके कारण कंगना कानूनी पचड़े में फँस गई हैं।

वहीं ‘न्यूज़ 18’ की एक खबर के अनुसार, जिस ‘दादी’ की तस्वीर पर कंगना रनौत ने टिप्पणी की, उस तस्वीर में वो शाहीन बाग़ वाली बिल्किस बानो नहीं हैं। इस खबर में बताया गया है कि ये तस्वीर भारतीय किसान यूनियन के एक प्रदर्शन का है, जब पीली साड़ी में कई महिलाओं को केंद्र के कृषि कानूनों के खिलाफ प्रदर्शन करते हुए देखा गया था। बिल्किस बानो ने भी दावा किया कि ये उनकी तस्वीर नहीं है।

हालाँकि, बिल्किस बानो खुद भी मंगलवार (दिसंबर 1, 2020) को ‘किसान आंदोलन’ में हिस्सा लेने पहुँचीं, लेकिन उपद्रव की आशंका के कारण उन्हें पुलिस ने उन्हें रोक दिया था। अब वो खुद को ‘किसान की बेटी’ बताते हुए सरकार को किसानों की आवाज़ सुनने की नसीहत दे रही हैं। उन्हें सिंघु सीमा पर रोका गया। पुलिस ने उन्हें अपनी सुरक्षा में लेकर साउथ ईस्ट दिल्ली स्थित उनके आवास पर पहुँचाया।

यहाँ गौरतलब हो कि केंद्र सरकार द्वारा हाल ही में लाए गए कृषि सुधार कानूनों को लेकर जारी किसानों के ‘विरोध प्रदर्शन’ में धीरे-धीरे वह सभी लोग एक साथ आ रहे हैं, जिन्होंने पिछले दिनों शाहीन बाग जैसे आंदोलन का समर्थन किया था। भीम आर्मी के चीफ चंद्रशेखर रावण ने भी गाजीपुर बॉर्डर पर जाकर विरोध प्रदर्शन में हिस्सा लिया। उदित राज ने कहा है कि वो किसानों की माँगों का समर्थन करते हैं।

अंतरधार्मिक विवाह के बाद मिलने वाली प्रोत्साहन राशि को ख़त्म करेगी उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार!

उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार उस 44 वर्ष पुराने कानून को ख़त्म करने पर विचार कर रही है, जिसके तहत अलग-अलग धर्म से आने वाली वैवाहिक जोड़ों को प्रोत्साहित किया जाता है। अंतरधार्मिक शादी को बढ़ावा देने वाली इस योजना को अब ख़त्म किया जा सकता है। जबरन धर्मांतरण को लेकर योगी सरकार पहले ही अध्यादेश ला चुकी है, अब अंतरधार्मिक विवाह को बढ़ावा देने वाली योजना भी बंद हो सकती है।

उत्तर प्रदेश में 1976 से ही ये योजना चल रही है, जिसके तहत अंतरजातीय और अंतरधार्मिक शादी के बाद वैवाहिक जोड़ों को शादी के बाद प्रोत्साहन राशि प्रदान की जाती है। आज जब ‘ग्रूमिंग जिहाद (लव जिहाद)’ के खतरे को लेकर लोग चर्चा कर रहे हैं, शादी के लिए धर्मांतरण वाली समस्या भी सिर उठाए खड़ी है। उत्तर प्रदेश में ‘नेशनल इंटीग्रेशन डिपार्टमेंट’ ने ये योजना लागू की थी। बाद में उत्तराखंड अलग राज्य बना तो ये योजना वहाँ भी लागू हो गई।

अब जब उत्तराखंड इस योजना को ख़त्म करने ही वाला है, उत्तर प्रदेश में भी इस कदम को लेकर विचार शुरू हो गया है। इस योजना लाभ उठाने के लिए अलग-अलग धर्मों वाले वैवाहिक जोड़ों को विवाह के 2 वर्षों के भीतर जिलाधिकारी के पास आवेदन करना होता है। इसके बाद डीएम विभाग को आगे ये आवेदन भेजते हैं। पिछले साल ही 11 अंतरधार्मिक जोड़ों ने इस योजना का लाभ लिया है। उन सभी को 50,000 रुपए दिए गए।

हालाँकि, इस वर्ष अब तक इस योजना के लिए कोई राशि जारी नहीं की गई है। TOI की खबर के अनुसार, 4 आवेदन जरूर आए हैं, लेकिन वो सभी पेंडिंग पड़े हुए हैं। ‘उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध अध्यादेश, 2020’ के बाद अब इस पर भी पुर्विचार किया जाएगा। 2017 में इस योजना में एक शर्त ये जोड़ी गई थी कि अगर अंतरधार्मिक जोड़े शादी के बाद धर्मांतरण करते हैं तो उन्हें इसका लाभ नहीं मिल पाएगा।

यूपी सरकार के प्रवक्ता श्रीकांत शर्मा ने कहा कि इस योजना का अब अस्तित्व नहीं है और इसे जारी रखने के विषय में वो टिप्पणी नहीं कर सकते। ताज़ा कानून के बारे में उन्होंने कहा कि अपने पार्टनर को अंधेरे में रख कर धोखा देने वाला और धर्मांतरण कराने वालों पर लगाम लगाने के लिए इसे लाया गया है। यूपी के मुख्य सचिव राजेंद्र तिवारी ने इस बात से इनकार किया कि ये अध्यादेश अंतरधार्मिक विवाह को हतोत्साहित करता है।

हाल ही में उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने ‘ग्रूमिंग जिहाद (लव जिहाद)’ के खिलाफ बने विधि विरुद्ध धर्म परिवर्तन प्रतिषेध अध्यादेश 2020 पर हस्ताक्षर कर इसे मंजूरी दी। इसके बाद ये प्रदेश में औपचारिक रूप से लागू हो गया है। राज्यपाल ने शनिवार (नवंबर 28, 2020) को इसकी मंजूरी दी। राज्यपाल की अनुमति मिलते ही ये अपराध गैर-जमानती हो गया है और इसे 6 महीनों के भीतर विधानमंडल के दोनों सदनों में पास कराना होगा।

शादीशुदा और कई बच्चों के अब्बा बिलाल ने 23 साल की मेहर को मारी गोली, माँ को उतारा मौत के घाट: करना चाहता था निकाह

उत्तर पूर्वी दिल्ली के शाहदरा में मानसरोवर पार्क के पास बिलाल नाम के युवक ने एकतरफा प्रेम के कारण एक लड़की के घर में घुस कर उसकी माँ और उस पर गोली चला दी। अपनी बेटी को बचाने के लिए आगे आई शमा परवीन (56) की मौके पर मौत हो गई, वहीं बेटी मेहर (रिपोर्ट में अन्य नाम मेहेद और महक) इस हमले में बुरी तरह घायल है। मेहर का इलाज फिलहाल अस्पताल में चल रहा है लेकिन उसकी हालत बेहद गंभीर है।

जानकारी के मुताबिक पूरी घटना सोमवार (दिसंबर 1, 2020) शाम करीब 7:30 बजे की है। शमा अपने पति से अलग होने के बाद अपनी तीन बेटियों के साथ मानसरोवर पार्क के जी ब्लॉक में किराए के घर में चौथी मंजिल पर रहती थी। सोमवार को बिलाल ने इस घटना को तब अंजाम दिया, जब मेहर के घर एक व्यक्ति इंटरनेट कनेक्शन लगाने आया। इसी बीच बिलाल ने अपने साथी के साथ मौका देखकर घर में एंट्री ली और पहले मेहर पर हमला बोला, फिर माँ शमा परवीन को गोली मार दी।

कहा जा रहा है कि सोमवार को माँ-बेटी पर गोलियाँ चलाने से पहले वह मेहर के लिए अपना रिश्ता लेकर उनके घर पहुँचा था, लेकिन जब इस रिश्ते के लिए मना किया गया तो उसने उन पर ताबड़तोड़ गोलियाँ बरसाईं। फिर अपने साथी के साथ फरार हो गया। पुलिस अब इस मामले को दर्ज करके आरोपित बिलाल की तलाश कर रही है।

हिंदुस्तान अखबार में प्रकाशित संबंधित खबर

मृतक शमा के रिश्तेदार खालिद ने मीडिया को बताया कि बिलाल शादीशुदा है और कई बच्चे होने के बाद भी मेहर से एक तरफा प्यार करता था। इसी क्रम में वह सोमवार को अपना रिश्ता लेकर आया था और न सुनने के बाद उसने पिस्टल निकाल कर मेहर के मुँह पर चला दी। पल भर में गोली मुँह के पार हो गई। बेटी को बचाने दौड़ी शमा पर भी सनकी बिलाल ने गोलियाँ चलाई और उसे वहीं मार डाला।

दैनिक भास्कर की रिपोर्ट में पुलिस के हवाले से बताया गया कि बिलाल द्वारा शमा परवीन को गोली मारने से पहले शमा की बेटी मेहर के साथ बिलाल की तीखी बहस हुई थी। जब शमा ने अपनी बेटी को बचाने की कोशिश की, तो उसे भी मारा। गंभीर रूप से घायल शमा की मौके पर मौत हो गई।

पुलिस ने बताया कि बिलाल नंद नगरी (ये इलाका मानसरोवर पार्क से थोड़ी दूरी पर है) का निवासी है। शमा का परिवार भी पहले नंद नगरी में रहता था। शाहदरा के एडिशनल डीसीपी संजय कुमार सेन ने बताया कि मेहर को सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया गया। जबकि उसकी माँ ने दम तोड़ दिया है। आरोपी फरार है और उसे पकड़ने के लिए कई टीमें गठित की गई हैं।

‘जो ट्विटर पर आलोचना करेंगे, उन सब पर कार्रवाई करोगे?’ बॉम्बे हाई कोर्ट ने महाराष्ट्र की उद्धव सरकार पर दागा सवाल

बॉम्बे हाई कोर्ट ने एक मामले में सुनवाई करते हुए महाराष्ट्र की उद्धव ठाकरे सरकार से कड़े सवाल पूछे हैं। हाई कोर्ट ने कहा कि किसी भी सार्वजनिक दफ्तर को आलोचना सहनी ही पड़ेगी। हाई कोर्ट ने मंगलवार (दिसंबर 1, 2020) को कहा कि पूरे समाज के अधिकारों और व्यक्तिगत अधिकारों के बीच लोगों को संतुलन बनाना ही पड़ेगा। उसने उद्धव ठाकरे और आदित्य ठाकरे से जुड़े मामले में सुनवाई करते हुए पूछा कि क्या उन सभी के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी, जो ट्विटर पर कुछ आपत्तिजनक लिखेंगे।

एसएस शिंदे और एमएस कार्णिक ने सुनैना होली की याचिका पर सुनवाई करते हुए ये टिप्पणी की। उनके द्वारा पोस्ट की गई 3 ट्वीट के आधार पर महाराष्ट्र पुलिस ने 3 अलग-अलग FIR दर्ज की थी। बांद्रा कुर्ला कॉम्प्लेक्स साइबर क्राइम डिपार्टमेंट द्वारा रजिस्टर किए गए एक केस के मामले में उन्हें अगस्त 2020 में गिरफ्तार भी किया गया था। बाद में उन्हें जमानत मिली। उनके वकील ने कोर्ट में अभिव्यक्ति की आजादी का हवाला दिया।

उन्होंने कहा कि उनके क्लाइंट ने बस अपने विचारों को प्रकट करते हुए सरकार की नीतियों की आलोचना की थी। इसके बाद बॉम्बे हाई कोर्ट ने महाराष्ट्र के सरकारी वकील से पूछा कि आप कितनों के खिलाफ एक्शन लोगे? सरकारी वकील का कहना था कि पुलिस सुनैना के ‘उद्देश्य’ की जाँच करना चाहती थी। उन्होंने कहा कि ये ट्वीट राजनीतिक दलों के खिलाफ थे। इस पर कोर्ट ने कहा कि हर सार्वजनिक दफ्तर को आलोचना सुननी ही पड़ती है।

बॉम्बे हाई कोर्ट ने महाराष्ट्र की उद्धव ठाकरे सरकार पर टिप्पणी करते हुए ये भी कहा कि युवा वर्ग को अपने विचारों को प्रकट करने के लिए जगह देनी ही पड़ेगी। अब इस मामले में अगली सुनवाई बुधवार को होगी। उसने पूछा कि अगर ये स्वतंत्रता नहीं दी गई तो युवा वर्ग को पता कैसे चलेगा कि वो सही विचार प्रकट कर रहे हैं या गलत? सुनैना ने अपने खिलाफ दायर सभी FIR को रद्द करते हुए गिरफ़्तारी से अंतरिम राहत की माँग की थी।

अक्टूबर 30, 2020 को कोर्ट ने सुनैना को आदेश दिया था कि वो पुलिस के समक्ष पेश हों और जाँच में सहयोग करें। कोर्ट ने कहा था कि इन दिनों पुलिसकर्मियों का काम काफी कठिन हो गया है, हड़ताल और प्रदर्शनों के लिए विशेष तैयारियाँ करनी पड़ती हैं। जस्टिस शिंदे ने पुलिसकर्मियों द्वारा 12 घंटे काम करने को लेकर कहा था कि पूरी दुनिया में ‘स्कॉटलैंड यार्ड’ के बाद मुंबई पुलिस को सर्वश्रेष्ठ माना जाता है।

सरकारी वकील ने कोर्ट से मिन्नतें की कि आरोपित को पूरी तरह नहीं छोड़ा जाना चाहिए, कुछ कार्रवाई ज़रूर की जानी चाहिए। पीठ ने कहा कि हम जजों को कहा जाता है कि टीवी और ट्विटर न देखने को, ताकि हम एकदम फ्रेश दिमाग लेकर कोर्ट में सुनवाई के लिए आएँ। कोर्ट ने कहा कि हमने एक लोकतांत्रिक संरचना अपनाया है। अब सभी की नजरें 3 दिसंबर को होने वाली सुनवाई पर टिकी हुई हैं।

इससे पहले महाराष्ट्र सरकार की आलोचना करने वाले अपने फेसबुक पोस्ट की वजह से मुंबई के कमाठीपुरा के रहने वाले बालकृष्ण दीकोंडा (Balakrishna Deekonda) मुसीबत में पड़ गए थे। मुख्यमंत्री और राज्य सरकार ने उन्हें सीएम और उनकी सरकार की प्रतिष्ठा को खराब करने का आरोप लगाते हुए एक वैधानिक नोटिस भेजा था। उद्धव की तुलना धृतराष्ट्र से और अदित्य ठाकरे को पेंगुइन कहने पर 10 लाख रुपए के मानहानि का मुकदमा ठोका गया था।

गैंग्स ऑफ वासेपुर में डेफिनिट बनने वाले जीशान कादरी के खिलाफ FIR, ₹1.25 करोड़ की धोखाधड़ी का मामला

कई बॉलीवुड फिल्मों के स्क्रीन राइटर जीशान कादरी के ख़िलाफ़ 1.25 करोड़ रुपए की हेरा-फेरी के मामले में मुकदमा दर्ज हुआ है। जीशान ने गैंग्स ऑफ वासेपुर-2 में बतौर एक्टर ‘डेफिनिट’ का किरदार निभाया था। उनके ख़िलाफ अंधेरी के अंबोली पुलिस थाने में शिकायत दर्ज हुई है। इसमें कहा गया कि जीशान की कंपनी ‘फ्राइडे टू फ्राइडे एंटरमेंट’ ने करोड़ों रुपयों का घपला किया।

रिजवान सिद्दकी नामक वकील ने कल अपने ट्विटर पर बताया कि जीशान के ख़िलाफ़ 420, 406 के तहत धोखाधड़ी और विश्वास उल्लंघन का मामला दर्ज हुआ है। इस शिकायत को उनके क्लाइंट जतिन सेठी ने दर्ज करवाया है।

अब आगे इस मामले में पड़ताल चल रही है। हो सकता है इस शिकायत में डायरेक्टर प्रियंका बस्सी का नाम भी जोड़ा जाए, क्योंकि वह भी इस घोटाले में शामिल थीं। अपने अगले ट्वीट में उन्होंने एफआईआर शेयर करते हुए यह भी बताया कि जीशान के ख़िलाफ़ 1.25 करोड़ रुपए की हेराफेरी के मामले में केस दर्ज करवाया गया है।

मामले की जानकारी देते हुए शिकायतकर्ता जतिन सेठी ने बताया कि उनकी कंपनी नाद फिल्म्स प्रोडक्शन हाउस और जीशान कादरी की कंपनी में पैसे की यह डील एक वेब सीरीज को लेकर हुई थी। लेकिन जीशान कादरी ने उस वेब सीरीज में यह पैसा इन्वेस्ट ही नहीं किया।

यहाँ बता दें कि जीशान कादरी ने गैंग्स ऑफ वासेपुर, छलांग और हलचल जैसी बॉलीवुड फिल्मों की पटकथाएँ लिखी हैं। इससे पहले गैंग्स ऑफ वासेपुर के एक सीन में एक सड़क चलती लड़की का अपहरण हिंदू युवकों द्वारा दिखाए जाने पर सोशल मीडिया यूजर्स ने जीशान की आलोचना करना शुरू किया था। उनके साथ अनुराग कश्यप पर भी लोगों ने हिंदू घृणा फैलाने का आरोप लगाया था। लोगों ने फिल्म में दर्शायी सामग्री को भी गलत तरह से पेश करने के लिए जीशान को लताड़ा था।

‘मोदी चला रहे 2002 का चैनल और योगी हैं प्यार के दुश्मन’: हिंदुत्व विरोधियों के हाथ में है Swiggy का प्रबंधन व रणनीति

भारत की सबसे बड़ी फूड डिलीवरी कंपनी Swiggy के सोशल मीडिया हैंडल्स से कुछ ऐसी चीजें लिखी गईं, जिससे उसका मोदी विरोध साफ़ नजर आता है। विजय पटेल नामक ट्विटर यूजर ने खुलासा किया है कि Swiggy के पीछे एक ऐसी मार्केटिंग कंपनी है, जिसमें मोदीफोबिक लोग भरे पड़े हैं। उन्होंने बताया कि ‘Dentsu Webchutney‘ नामक कंपनी ही Swiggy की मार्केटिंग रणनीति तैयार करती है।

इस ‘Dentsu Webchutney‘ के चेयरमैन हैं सिद्धार्थ राव, जिनके दो स्क्रीनशॉट्स शेयर कर के विजय पटेल ने उनके हिंदुत्व विरोध को सामने लाया। उन्होंने प्रोपेगंडा पोर्टल AltNews के संपादक प्रतीक सिन्हा के उस ट्वीट को लाइक किया था, जिसमें उन्होंने कहा था कि सभी चीजें बदल जाती हैं, लेकिन ठीक से काम न करने वाला धर्म एकमात्र ऐसा सिस्टम है, जिसे बदला नहीं जा सकता। प्रतीक सिन्हा और उसका AltNews फेक न्यूज़ फैलाने में मास्टर है।

साथ ही सिद्धार्थ राव ने ‘राष्ट्रीय कामधेनु आयोग’ के अध्यक्ष के उस बयान का भी मजाक उड़ाया था, जिसमें उन्होंने गाय के गोबर को एंटी-रेडिएशन और और रोग-प्रतिरोधी बताया था। जब फिल्म निर्देशक अनुभव सिन्हा ने लिखा था कि ‘कुछ दिनों से कोई धर्म खतरे में नहीं है। सब ठीक है ना?‘, तो सिद्धार्थ ने इस ट्वीट को रीट्वीट किया। अब इसके बाद पटेल ने कम्पनी के क्रिएटिव टीम का हिस्सा संकेत के वैचारिक झुकाव का खुलासा किया।

जब पीएम मोदी ने एक सप्ताह तक भारत को कोरोना मुक्त करने का अभियान चलाया तो संकेत ने पूछा कि फिर ‘भक्त’ कहाँ जाएँगे? बता दें कि मोदी समर्थकों के लिए लिबरल गिरोह ‘भक्त’ शब्द का इस्तेमाल करता है। साथ ही ‘श्रीराम जन्मभूमि निर्माण क्षेत्र’ ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास जब कोरोना पॉजिटिव हुए थे, तब संकेत ने ‘गो कोरोना गो’ लिख कर उनका मजाक बनाया। जब पीएम मोदी की रिमोट से किसी योजना के उद्घाटन की तस्वीर सामने आई थी, तब संकेत ने पूछा था कि ‘चैनल नंबर 2002’ पर क्या चल रहा है?

कई लिबरल पत्रकार अभी भी 2002 गुजरात दंगों में पीएम मोदी का नाम घसीटते हैं। साथ ही संकेत ने ये भी लिखा था कि पीएम मोदी ‘जुडिशरी के चैनल’ को म्यूट कर रहे हैं। साथ ही उसने पीएम मोदी के लिए ‘खाली कुकर’ शब्द का इस्तेमाल किया था। योग करते हुए पीएम मोदी की तस्वीर पर ‘उमराव जान’ भी लिखा। उसने एक ट्वीट को रीट्वीट किया, जिसमें कहा गया था कि पीएम मोदी ने एक बार अपने हाथों से ट्रेन खींच दी थी।

जब Swiggy की तरफ से ‘किसान आंदोलन’ पर मोदी समर्थकों का मजाक उड़ाया गया था, तब कम्पनी के कार्तिक ने पूछा था कि अब कौन केंद्रीय मंत्री सबसे पहले बॉयकॉट की अपील करेगा? कंटेंट क्रिएटर प्रज्ञा सरीन और संकेत ने अपनी पोल खुलने के बाद अपने एकाउंट्स लॉक कर लिए। इसके बाद कंपनी ने भी अपना ट्विटर हैंडल लॉक कर लिया और अपनी इंस्टा प्रोफाइल्स को प्राइवेट कर लिया।

इतना ही नहीं, Swiggy के फ़ाउंडिंग मेंबर राहुल जैमिनी भी राहुल गाँधी की प्रशंसा वाले ट्वीट्स किए और योगी आदित्यनाथ का अपमान करने वाले कार्टून की तस्वीर को भी लाइक किया, जिसमें उन्हें ‘प्यार का दुश्मन’ बताया गया था। वो सलिल त्रिपाठी और प्रतीक सिन्हा के ट्वीट्स लाइक करते रहे हैं। अब ये भी सामने आ रहा है कि ‘Dentsu Webchutney‘ कम्पनी राहुल गाँधी की छवि चमकाने के लिए भी हायर की गई थी।

एक खबर आई थी कि लोकसभा चुनाव 2019 से पहले राहुल गाँधी की छवि चमकाने के लिए जापान के एडवर्टाइजिंग फर्म ‘Dentsu‘ को हायर किया गया है। साथ ही इसके लिए 500 करोड़ रुपए खर्च करने की खबर भी आई थी। शॉर्ट फिल्मों और प्रिंट प्रचार सामग्रियों का प्रयोग कर के ऐसा किए जाने की योजना थी। इन सबसे साफ़ है कि Swiggy का पूरा प्रबंधन और मार्केटिंग मोदी विरोधियों के हाथ में है।

अप्रैल 2019 में बेंगलुरु में Swiggy की अजीबोगरीब माफी का मामला सामने आया था। ऑन-डिमांड खाना पहुँचाने वाली कंपनी Swiggy के डिलीवरी एजेंट पे एक महिला को गाली देने का आरोप लगा था और साथ ही अश्लील और अभद्र आचरण करने का भी आरोप लगा था। महिला का आरोप था कि शिकायत करने पर कंपनी ने उसे एक “Sorry” नोट और ₹200 का कूपन दे कर मामला रफा-दफा करने का प्रयास किया।

इस्लाम और उर्दू की शिक्षा के लिए अब्बा भेजते थे मदरसा, अच्छा नहीं लगता था… इसलिए मुंबई भागा: 14 साल के बच्चे की कहानी

दिल्ली के जामिया नगर से सितंबर में गायब हुआ 14 साल का बच्चा मुंबई से बरामद कर लिया गया है। दिल्ली पुलिस ने 1 दिसंबर 2020 को प्रेस रिलीज जारी करके यह सूचना दी। इस रिलीज में बताया गया कि बच्चे के माता-पिता उस पर मदरसा जाने का दबाव बनाते थे, इसलिए उसने घर छोड़ा और अब वह मुंबई में जाकर मिला है।

पुलिस के मुताबिक 14 साल के बच्चे की गुमशुदगी की रिपोर्ट 27 सितंबर को दर्ज की गई थी। इस केस को आईपीसी की धारा 363 के तहत दर्ज किया गया था। इसके बाद एसआई जनक सिंह और एचसी रावत को इस केस की जिम्मेदारी सौंपी गई और कुछ ही समय में उन्होंने गायब लड़के के दोस्तों से उसकी जानकारी जुटाई। इस बीच बच्चे के माता-पिता से बात की गई और अंतत: बच्चे को ढूँढ लिया गया।

आगे की पड़ताल में पुलिस ने पाया कि बच्चे के माता-पिता उसे मदरसा पढ़ाई करने के लिए भेजना चाहते थे लेकिन उसको वो जगह पसंद नहीं थी। उसे जबरन वहाँ भेजा जाता था। एक दिन उसने क्लास को छोड़कर भागने का प्लान बनाया और मुंबई निकल गया। जहाँ वह घुमक्कड़ों की तरह घूमने लगा। इसके बाद AHTU (Anti-Human Trafficking Unit) टीम ने उसे ढूँढा और पिता पुत्र की काउंसिलिंग के बाद उसे उसके परिवार को सौंप दिया गया।

हिंदुस्तान की रिपोर्ट के अनुसार पुलिस उपायुक्त राजेन्द्र प्रसाद मीणा ने बताया कि 27 सितंबर को जब किशोर के लापता होने की शिकायत पुलिस को दी गई, तो उन्होंने यह जानकारी दक्षिणी दिल्ली की एएचटीयू टीम से साझा की। इसके बाद इस केस के लिए टीम गठित हुई और टीम ने सीसीटीवी और करीबियों से पूछताछ कर किशोर को मुंबई से बरामद कर लिया।

किशोर ने पुलिस को पूछताछ में बताया कि उसके अब्बा उसे जबरदस्ती इस्लाम और उर्दू की शिक्षा के लिए मदरसे भेजता था, जबकि उसे मदरसा जाना अच्छा नहीं लगता था। इसी कारण से वह एक दिन क्लास के लिए निकला और घर वापस नहीं गया। इसके बाद वह ट्रेन में बैठकर मुंबई चला गया। मुंबई जाने के लिए उसने घर से रुपए लेकर रिजर्वेशन पहले ही करा लिया था। किशोर मुंबई में एक दुकान में काम कर रहा था।