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2 कॉन्ग्रेस नेताओं की हत्या, घिर गई केरल की वामपंथी सरकार: सुप्रीम कोर्ट ने दिया CBI जाँच का आदेश

केरल में पिछले साल दो कॉन्ग्रेसी नेताओं की निर्मम हत्या कर दी गई थी। कॉन्ग्रेस ने इन हत्याओं के लिए मार्क्‍सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (CPM) के कार्यकर्ताओं को जिम्मेदार ठहराते हुए सीबीआई जाँच की माँग की थी। वहीं अब इस माँग को सुप्रीम कोर्ट की भी अनुमति मिल गई है। सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला केरल की पिनराई विजयन सरकार के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।

दैनिक जागरण की रिपोर्ट के अनुसार, मृतक के परिजन और पार्टी कार्यकर्ताओं की माँग को देखते हुए हाइकोर्ट ने मामले में सीबीआई जाँच के आदेश दिए थे। जिसके बाद राज्य सरकार ने हाइकोर्ट के इस फैसले को नामंजूर करते हुए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था और आदेश को चुनौती दी थी।

दरअसल पीड़ित परिजनों और कॉन्ग्रेस ने पुलिस पर आरोपितों से मिले होने का गंभीर आरोप लगाया था। साथ ही पुलिस द्वारा मुख्य आरोपितों की गिरफ्तारी नहीं करने पर नाराजगी भी जताई थी। परिजनों का आरोप था कि हत्याकांड की साजिश कासरगोड के माकपा नेता ने रची थी और इस वजह से राज्य सरकार और पुलिस मामले को दबाने की कोशिश कर रही है। जिसके बाद मामले में सीबीआई जाँच की अपील की गई थी।

हालाँकि शीर्ष अदालत की खंडपीठ ने भी एकल पीठ के सीबीआइ जाँच के आदेश को बरकरार रखा। इस फैसले के कारण विजयन सरकार सवालों के घेरे में आ गई है। कोर्ट के फैसले को चुनौती देते ही विपक्षी दलों ने राज्य सरकार को आड़े हाथों लेते हुए हमलावर हो गई थी। हत्या के बाद राज्य सरकार के रवैए को देखते हुए अब भी केरल में अन्य पार्टी दल सरकार की मंशा पर सवाल खड़े करते रहते हैं।

गौरतलब है कि केरल के कासरगोड में पिछले साल 17 फरवरी को युवा कॉन्ग्रेस के दो कार्यकर्ता कृपेश और शारथ लाल की बेरहमी से हत्या कर दी गई थी। हत्या के पीछे स्थानीय माकपा नेता पीथांबरन मुख्य आरोपित है।

पाकिस्तान में हथियारों के बल पर हो रहा हिंदू लड़कियों का रेप: कहीं पार्वती पर आलम करता है हमला, कहीं सिर पीटते नजर आते हैं पिता

पाकिस्तान में हिंदुओं की स्थिति बयान करने वाली एक वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आई है। वीडियो में एक बूढ़ा पिता है जिसकी जवान बेटी का अपहरण पिछले महीने हथियार के दम पर किया गया था और बाद में कई दिनों तक उसे प्रताड़िता किया गया। उसके साथ गैंगरेप किया गया और फिर उसे छोड़ दिया गया।

वीडियो में देख सकते हैं कि पिता अपनी पीड़ा कुछ अन्य लोगों को बता रहा है। लेकिन कहते-कहते वह अपना सिर पीटने लगता है और तेज-तेज रोने लगता है। इसके बाद वहाँ बैठे कई लोग उन्हें चुप कराते हैं, लेकिन अपनी बेटी के साथ घटी घटना को सोचकर उनकी आँख से आँसू गिरने बंद नहीं होते।

वॉयस ऑफ पाकिस्तान माइनॉरिटी के ट्वीट के मुताबिक, पूरी घटना 2 नवंबर को सिंध के सुजावाल गोठ की है। इस ट्वीट में लिखा है, “2 नवंबर को हरि की 22 साल की बेटी का हथियार लिए लोगों ने अपहरण किया। बाद में उसे प्रताड़ित किया, उसका शोषण किया और बर्बरता से उसका कई दिनों तक सामूहिक बलात्कार किया। बाद में उसे छोड़ दिया।”

इसके बाद पाकिस्तान के सामाजिक कार्यकर्ता राहत ऑस्टिन एक ऐसे ही अन्य मामले को उजागर करते हैं और बताते हैं कि चंद्र कोहली की 15 वर्षीय लड़की का अपहरण भी सिंध के कुनरी में हुआ और उसके बाद उसका रेप करके उसका धर्म परिवर्तन करवा दिया गया।

उन्होंने अपने ट्वीट में वीडियो भी शेयर की है। लड़की के पिता इसमें बता रहे हैं कि अपहरण वाले दिन हथियार से लैस लोग उनके घर में घर में घुसे और उन्हें पीटकर उनकी बेटी अपने साथ ले गए। उनका आरोप है कि नेशनल असेंबली के सदस्य नवाब यूसुफ का कर्मचारी मोहम्मद माजिद भी उनकी बेटी के अपहरण में शामिल था।

सिंध की इन दोनों घटनाओं में जहाँ दोनों परिवारों के आँसू अभी सूखे भी नहीं है। वहीं पाकिस्तान के सिंध इलाके में ही एक और हिंदू लड़की पर हमले की खबर है। हालाँकि, इस लड़की को कुछ महिलाओं के साहस से बचा लिया गया।

जानकारी के मुताबिक, सिंध की पार्वती पर आलम जट्ट और उसके दोस्तों ने हमला किया था। उनका उद्देश्य उसका रेप करना था। लेकिन, तभी कुछ महिलाएँ मौके पर इकट्ठा हो गईं और लड़की को बचा लिया गया।

सिंध के लेखक जफर साहितो ने इस घटना पर लिखा, “सिंधी हिंदू लड़की पर आलम जट्ट और उसके दोस्तों ने हमला किया। ये उसका रेप करना चाहते थे, लेकिन कुछ महिलाओं के इक्ट्ठा हो जाने से लड़की बच गई। पाकिस्तान एक रेपिस्तान है जहाँ यौन शोषण, बाल शोषण, लिंग असमानता, और खासकर अल्पसंख्यकों पर अत्याचार हो रहा है।”

यहाँ बता दें कि ऐसी तमाम घटनाएँ पाकिस्तान से आए दिन आती रहती हैं। इस्लामी कट्टरपंथ पाकिस्तान में इतना अधिक है कि वहाँ हिंदुओं के साथ-साथ सभी अल्पसंख्यकों को तुच्छ माना जाता है। पिछले दिनों बहुसंख्यक आबादी ने क्रूरता दिखाते हुए सिंध में गैर मुस्लिमों के घर को जलाकर राख कर दिया था और महिलाओं को बुरी तरह पीटा गया था।

‘किसी भी केंद्रीय मंत्री को महाराष्ट्र में घुसने नहीं देंगे’: उद्धव के पार्टनर ने दी धमकी, ‘किसान आंदोलन’ का किया समर्थन

‘स्वाभिमानी शेतकारी संगठन’ के राजू शेट्टी ने धमकी दी है कि वो किसी भी केंद्रीय मंत्री को महाराष्ट्र में नहीं घुसने देंगे। ये पार्टी उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली महाराष्ट्र की सत्ताधारी गठबंधन का हिस्सा है। महाराष्ट्र की सत्ताधारी ‘महा विकास अघाड़ी’ गठबंधन के साथी ने कहा कि वो कोल्हापुर, पुणे और औरंगाबाद में पंजाब और हरियाणा के आंदोलनकारी किसानों के समर्थन में है। साथ ही संगठन ने पूरे महाराष्ट्र में जगह-जगह विरोध प्रदर्शन भी किए।

राजू शेट्टी ने धमकी दी कि अगर किसानों की समस्याओं का निपटारा नहीं हुआ, तो वे केंद्रीय मंत्रियों को महाराष्ट्र में घुसने नहीं देंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि सुधार के नाम पर केंद्र कॉर्पोरेट और बड़े औद्योगिक संस्थानों को शक्तियाँ देना चाहती है। उनका आरोप था कि मोदी सरकार के नए कृषि कानून किसानों को ताकतवर बनाने के बजाय वे और ज्यादा कमजोर कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार किसानों को बड़े व्यापारियों की दया पर निर्भर रखना चाहती है।

उद्धव सरकार में पार्टनर राजू शेट्टी ने आगे कहा कि कृषि कानून में न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) का भी जिक्र नहीं किया गया है, जो कि किसानों की वित्तीय स्थिरता के लिए सबसे बड़ी आवश्यकता है। बता दें कि पीएम मोदी कई बार साफ़ कर चुके हैं कि MSP को ख़त्म नहीं किया गया है और न ही APMC को भंग किया गया है, लेकिन फिर भी इसके नाम पर दुष्प्रचार फैला कर किसानों को भड़काया जा रहा है।

केंद्र सरकार को यह समझ लेना चाहिए कि किसानों के प्रदर्शन केवल पंजाब या हरियाणा तक सीमित नहीं हैं, बल्कि महाराष्ट्र सहित पूरे देश के किसान इस आंदोलन के समर्थन में आवाज़ उठा रहे हैं। बता दें कि राजू शेट्टी की पार्टी से कई गड़बड़ियों के कारण उसका चुनाव चिन्ह भी छीन लिया लिया गया है। एनसीपी ने एकनाथ खडसे, राजू शेट्टी, यशपाल भिंगे और आनंद शिंदे का नाम भेजा है, जिन्हें राज्यपाल कोटे से विधान पार्षद बनाया जाएगा।

ज्ञात हो कि उधर भारत के पूर्व क्रिकेटर योगराज सिंह ने भी कहा है कि उन्होंने पीएम मोदी सहित भाजपा के अन्य नेताओं के चेहरे देखे हैं, वो सभी ‘शैतानों की तरह’ दिखते हैं। पंजाबी में बोलते हुए उन्होंने कहा कि पीएम मोदी शायद ये नहीं जानते हैं कि भगवान और शैतान एक साथ नहीं रह सकते। उन्होंने कहा कि पीएम मोदी ने अपनी जिंदगी उस मोड़ पर ला खड़ी की है, जहाँ उन्हें, उनके कैबिनेट मंत्रियों और RSS नेताओं की कब्रों के साथ ऐसा ही बर्ताव करेगी, जैसा औरंगजेब के कब्र के साथ किया जाता है।

कौन है Canadian Pappu, क्यों राहुल गाँधी से जोड़ा जा रहा है नाम: 7 उदाहरणों से समझें

कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता और आलाकमान के बेटे राहुल गाँधी के पॉलिटिकल स्टंट में कनाडाई PM से बेहद खास समानता पाए जाने की वजह से कनाडाई प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो को भी अक्सर ‘कनाडाई पप्पू’ कहा जाता है। इसका मुख्य कारण है राहुल गाँधी की पीआर और मार्केटिंग टीम जोकि अक्सर ट्रूडो से प्रेरित दिखाई देती है। यहाँ कुछ ऐसे उदाहरण है जिससे आप दो राजनीतिक नेताओं की हरकतों में एक ही तरह की समानता देखेंगे।

अपने आप को बुद्धिमान दर्शाना

जस्टिन ट्रूडो 2016 में एक रिपोर्टर को क्वांटम कंप्यूटिंग का पाठ सिखाने लग गए। वहीं उनके इस लड़कपन को देखते हुए अंतर्राष्ट्रीय मीडिया ने उनपर जमकर कटाक्ष किया।

वहीं दूसरी ओर हमारे नेता राहुल गाँधी ने फैसला किया कि वह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर एक सभा को संबोधित करेंगे।

हालाँकि, कुछ दिनों बाद पता चला कि वह सिर्फ इंडियन ओवरसीज कॉन्ग्रेस की एक सभा को संबोधित करने जा रहे थे और वास्तव में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे किसी मुद्दे पर वो कोई बातचीत नहीं करेंगे।

फिटनेस

वहीं कनाडा के ट्रूडो को उनके फिटनेस के लिए भी जाना जाता है। साथ ही वे दुनिया के सबसे फिट नेताओं की लिस्ट में भी शामिल है। वह बॉक्सिंग करते है, साथ ही उन्हें एक हाथ बच्चें को पकड़ते और एक हाथ से स्पोर्ट्स का कोई एक्टिविटी करते हुए भी देखा गया गया है जिसके चलते भी उन्हें फिट कहा जाता है।

वहीं इसकी दूसरी तरफ राहुल गाँधी अचानक से एक दिन एकेडो (एक जापानी मार्शल आर्ट) में विशेषज्ञ बन जाते है।

बता दें एक दिन अचानक से सबके सामने यह खबर आती है कि राहुल गाँधी न केवल ऐकिडो को जानते हैं, बल्कि वह इसमें एक ‘ब्लैक बेल्ट’ खिलाड़ी भी हैं। इतना ही नहीं राहुल जाहिर तौर पर शूटिंग विशेषज्ञ भी हैं। वहीं राहुल गाँधी की कुछ ऐकिडो मूव्स करते हुए वीडियो भी वायरल हुई थी और शायद वह आखिरी वीडियो भी थी जिसे पीआर टीम ने सिर्फ दिखावे के लिए रिलीज किया था।

पिडी और केंजीए (Pidi and Kenzie)

आपको याद होगा कि जब कॉन्ग्रेस असम में हार गई उस समय पिडी यानी कि राहुल गाँधी का पालतू कुत्ता किस प्रकार प्रसिद्ध हुआ था, क्योंकि चुनाव के दरमियान राहुल गाँधी ने पार्टी की समस्याओं पर चर्चा करने के बजाय अपने पालतू कुत्ते के साथ खेलना ज्यादा उचित समझा। ट्रूडो ने राहुल गाँधी का यह स्टंट पहले किया था। दरअसल, उन्होंने चुनाव के दौरान तो ऐसा नहीं किया लेकिन अपने पालतू कुत्ते को दुनिया से जरूर रूबरू कराया।

जस्टिन ट्रूडो ने 2016 में ट्विटर पर अपने पालतू कुत्ते के बच्चे को लेकर घोषणा की थी।

जिसके बाद मीडिया ने उसे प्रधानमंत्री के परिवार का नया सदस्य बताते हुए जमकर मजे लिए।

जिसके एक साल बाद राहुल गाँधी ने भी अपने ‘प्यारे’ दोस्त यानी अपने पालतू कुत्ते का खुलासा किया था।

राहुल गाँधी के इस ट्वीट पर उन्हीं के पार्टी के पूर्व नेता हिमंत बिस्वा सरमा ने चुनाव को इससे जोड़ते हुए कटाक्ष किया था। जोकि असल मे राहुल गाँधी को बहुत चुभा होगा।

अचानक से दयालु दिखना

2016 में ट्रूडो की एक छोटे बच्चें के साथ बैठे हुए एक फोटो सोशल मीडिया पर वायरल हुई थी। दरअसल वह फ़ोटो 2015 की थी जब ट्रूडो एक स्कूल के बच्चे को सांत्वना दे रहे थे क्योंकि स्कूल में उसका दिन खराब गया था।

उसी प्रकार की ट्रूडो की एक और फोटो वायरल हुई थी, जिसमें उन्हें वीलचेयर पर बैठे एक आदमी की मदद करते हुए देखा गया था।

उसी प्रकार हमारे नेता राहुल गाँधी भी एक पत्रकार को बचाते हुए दिखे थे जोकि घायल हो गया था। दूसरी तरफ कॉन्ग्रेस के कार्यकत्ताओं ने कुछ दिनों बाद ही 1 पत्रकार को सिर्फ इसीलिए पीटा क्योंकि वह सार्वजनिक रैली में खाली कुर्सियों की फ़ोटो खींच रहा था।

फैंस

फैंस की बात करे तो जस्टिन ट्रूडो ने काफी फैंस है।

तो दूसरी तरफ हमारे नेता तो फैंस से मिलने के लिए बस तक से भी उतर जाते है।

जन्मदिन

राहुल गाँधी ने 2017 में बहुत ही बेबाकी से कॉन्ग्रेस समर्थक के 107 वर्षीय दादी को जन्मदिन की बधाई दी थी। इतना ही नहीं उन्होंने उसे मिलने के लिए भी बुलाया था।

लेकिन ये क्या जस्टिन ट्रूडो उनके पहले ही यह कर चुके हैं।

120 साल की महिला ने अपने जन्मदिन पर कनाडाई पीएम जस्टिन ट्रूडो से मिलने की इच्छा जताई थी।

तुलना और विरोधाभास

गौरतलब है कि राहुल गाँधी और जस्टिन ट्रूडो दोनों मजबूत राजनीतिक परिवारों से आते हैं। राहुल गाँधी के पिता, दादी और परदादा सभी भारत के प्रधानमंत्री रहे हैं। ट्रूडो के पिता पियरे ट्रूडो भी कनाडा के प्रधानमंत्री थे। लेकिन कनाडा में ट्रूडो के नेतृत्व में लिबरल पार्टी ने 2015 का चुनाव जीता तो वहीं राहुल गाँधी के नेतृत्व में कॉन्ग्रेस 2019 के आम चुनावों में बहुत ही बुरी तरह हारी थी।

राहुल गाँधी वास्तव में जस्टिन ट्रूडो से प्रेरित हैं या नहीं यह कोई नहीं जानता है, लेकिन उनकी पीआर रणनीति समानताएं सोचने योग्य है। जिस वजह से ट्रूडो को कनाडा के राहुल गाँधी के समकक्ष जाना जाता है।

‘गुजराती कसम खा कर पलट जाते हैं, औरंगजेब की तरह BJP नेताओं की कब्रों पर थूकेंगे लोग’: क्रिकेटर युवराज सिंह के पिता की धमकी

भारत के पूर्व-क्रिकेटर युवराज सिंह के पिता योगराज सिंह भी अब दिल्ली में चल रहे ‘किसान आंदोलन’ में शामिल हो गए हैं। उन्होंने प्रदर्शनकारियों के बीच जाकर भड़काऊ भाषण दिए और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का नाम लेकर कहा कि अगर ‘हिम्मत है तो वो अकेले आएँ और किसानों से बात करे।’ एक पंजाबी समाचार चैनल से बात करते हुए उन्होंने पीएम मोदी को जान से मारने की दी गई धमकियों का भी समर्थन किया।

जब योगराज सिंह से पूछा गया कि इस ‘किसान आंदोलन’ में इंदिरा गाँधी की हत्या को याद कराते हुए पीएम मोदी को भी धमकी दी गई है, तो उन्होंने कहा कि जिसने जो बोया है, वो वही काटेगा। उन्होंने इसे भावनाओं की लड़ाई बताते हुए कहा कि सरकार को ऐसा कोई भी बयान नहीं देना चाहिए, जो भारत को विभाजित करे। उन्होंने भारत सरकार पर मुग़ल बादशाहों बाबर, औरंगजेब और अंग्रेजों से भी ज्यादा क्रूरता और अत्याचार करने के आरोप लगाए।

योगराज सिंह ने कहा कि उन्होंने पीएम मोदी सहित भाजपा के अन्य नेताओं के चेहरे देखे हैं, वो सभी ‘शैतानों की तरह’ दिखते हैं। पंजाबी में बोलते हुए उन्होंने कहा कि पीएम मोदी शायद ये नहीं जानते हैं कि भगवान और शैतान एक साथ नहीं रह सकते। उन्होंने कहा कि पीएम मोदी ने अपनी जिंदगी उस मोड़ पर ला खड़ी की है, जहाँ उन्हें, उनके कैबिनेट मंत्रियों और RSS नेताओं की कब्रों के साथ ऐसा ही बर्ताव करेगी, जैसा औरंगजेब के कब्र के साथ किया जाता है।

उन्होंने कहा कि जनता उनकी कब्रों पर थूकेगी। उन्होंने कहा कि दिल्ली की सीमाएँ सील कर दी गई हैं। उन्होंने कहा कि दिल्ली की सीमा खोल कर पुलिस व सुरक्षा बलों को हटा दिया जाए, और हिम्मत है तो पीएम मोदी अकेले आएँ। उन्होंने कहा कि पुलिस व सुरक्षा बलों को हटाने के बाद देखते हैं कि क्या होता है। युवराज सिंह के पिता योगराज सिंह भी क्रिकेटर रहे हैं। उन्होंने आगे धमकाते हुए कहा:

“मैं आपको बताना चाहता हूँ कि पंजाबियों ने दिल्ली पर 18 बार विजय प्राप्त की है। अब 19वीं बार भी हम दिल्ली जीत सकते हैं। हमें इस मुकाम तक लाकर मत खड़ा करो। आपकी गोलियाँ ख़त्म हो जाएँगी, लेकिन अपनी छाती पर गोलियाँ खाने वाले पंजाबियों का आना कम नहीं होगा। अगर आप एक गोली भी दागते हो तो आपको उसी तरह उखाड़ फेंका जाएगा, जैसे मुगलों को हटाया गया था। किसे पता कि अमित शाह के पास कितने दिन बचे हुए हैं?”

योगराज सिंह ने दिए भड़काऊ बयान

उन्होंने यहाँ तक आरोप लगाया कि अमित शाह ने अपनी सुरक्षा घेरे में से सिख सुरक्षाकर्मियों को हटा दिया है। उन्होंने चुनौती दी कि मोदी-शाह ‘अपने दोस्त’ अम्बानी-अडानी को पंजाब लाकर दिखाएँ, फिर हम देखेंगे कि वो कैसे वापस जाते हैं? उन्होंने कहा कि गुजराती अपनी माँ-बहन की कसम खा कर भी पलट जाते हैं। उन्होंने प्रदर्शनकारियों से उनके बीच से ‘एक और जरनैल सिंह भिंडरवाला’ को पैदा करने के लिए कहा।

उधर केंद्र सरकार के तीन नए कृषि कानूनों को लेकर दिल्ली के विज्ञान भवन में सरकार और किसान संगठनों के बीच चली बैठक मंगलवार (दिसंबर 1, 2020) शाम को खत्म हो गई। हालाँकि, बैठक में कोई भी नतीजा नहीं निकल सका है और फिर से तीन दिसंबर को बातचीत होगी। बातचीत में शामिल प्रतिनिधिमंडल में स्वराज पार्टी (Swaraj Party) के नेता योगेंद्र यादव (Yogendra yadav) का भी नाम था। मगर बाद में केंद्र सरकार के कहने के पर उनका नाम हटा दिया गया।

रिया के भाई शौविक चक्रवर्ती को ड्रग मामले में NDPS से मिली बेल, 3 महीने से थे हिरासत में

अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की मौत से जुड़े ड्रग मामले में अभिनेत्री रिया चक्रवर्ती के भाई शौविक चक्रवर्ती को आज (दिसंबर 2, 2020) एनडीपीएस की विशेष अदालत से जमानत मिल गई है। पिछले महीने शौविक ने अपनी बेल के लिए विशेष अदालत में याचिका दी थी।

3 नवंबर को दायर की गई अपनी याचिका में उन्होंने कहा था कि उन्हें इस केस में फँसाया जा रहा है, क्योंकि उनके मुताबिक उनके कब्जे से कोई भी ड्रग या साइकोट्रॉपिक पदार्थ जब्त नहीं हुए थे।

इसके अलावा उन्होंने हाइकोर्ट के आदेश का भी याचिका में जिक्र किया था, जिसमें अदालत ने एनसीबी अधिकारियों के समक्ष दिए बयानों को लेकर कहा था कि उन्हें स्वीकार नहीं किया जा सकता और इसलिए शौविक को जेल में रखने का कोई कारण नहीं है।

बता दें, एनडीपीएस की विशेष अदालत से जमानत मिलने से पहले शौविक की बेल याचिका बॉम्बे हाईकोर्ट ने खारिज की थी। अदालत ने पेश किए गए सबूतों में यह पाया था कि शौविक ड्रग डीलर्स के संपर्क में थे और सुशांत के लिए ड्रग्स खरीदते थे।

ड्रग मामले में एनसीबी ने शौविक चक्रवर्ती को 5 सितंबर से हिरासत में लिया हुआ था। उन्हें पूरे तीन माह बाद आज राहत मिली है। इससे पहले मुंबई की विशेष अदालत ने मादक पदार्थ से जुड़े मामले में संदिग्ध तस्कर समेत दो आरोपितों को मंगलवार को जमानत दी थी। इनमें से एक शौविक के दोस्त सूर्यदीप मल्होत्रा हैं और दूसरा अंकुश अनरेजा है। इन्हें कोर्ट ने 50,000 रुपए के मुचलके पर जमानत दी थी।

इसके अलावा 7 अक्टूबर को सुशांत केस में मुख्य आरोपित रिया चक्रवर्ती को भी बॉम्बे हाईकोर्ट ने सशर्त जमानत पर रिहा किया था। उनके साथ सैमुअल मिरांडा को भी बेल मिली थी। रिया को 1 लाख के निजी मुचलके पर छोड़ा गया था और उन्हें निर्देश दिए गए थे कि जब भी उन्हें पूछताछ के लिए बुलाया जाएगा, तब उन्हें पहुँचना होगा।

केंद्र सरकार ने किसानों की वार्ता से योगेन्द्र यादव को किया बाहर, कहा- राजनेता नहीं, सिर्फ किसान आएँ

केंद्र सरकार के तीन नए कृषि कानूनों को लेकर दिल्ली के विज्ञान भवन में सरकार और किसान संगठनों के बीच चली बैठक मंगलवार (दिसंबर 1, 2020) शाम को खत्म हो गई। हालाँकि, बैठक में कोई भी नतीजा नहीं निकल सका है और फिर से तीन दिसंबर को बातचीत होगी। 

केंद्रीय कृषि कानूनों के खिलाफ किसान संगठन पूरे देश में प्रदर्शन कर रहे हैं। जिसके बाद केंद्र सरकार ने किसान नेताओं को बातचीत के लिए बुलाया था। इस बातचीत में शामिल प्रतिनिधिमंडल में स्वराज पार्टी (Swaraj Party) के नेता योगेंद्र यादव (Yogendra yadav) का भी नाम था। मगर बाद में केंद्र सरकार के कहने के पर उनका नाम हटा दिया गया।

सरकार ने इसका तर्क रखते हुए कहा था कि वह ऐसा इसलिए कर रहे हैं क्योंकि वह नहीं चाहते कि कोई राजनीतिक व्यक्ति इसमें शामिल हो। इस वजह से केंद्र सरकार ने योगेन्द्र यादव को शामिल करने से इनकार किया है।

बता दें कि शुरुआत में किसानों के संघ ने केवल पंजाब के प्रतिनिधियों को दिए जा रहे निमंत्रण पर सरकार के समक्ष चिंता जताई थी। उन्होंने देश भर से प्रतिनिधित्व प्राप्त करने के लिए पंजाब के 32 प्रतिनिधियों के अलावा प्रतिनिधिमंडल में 4 नामों का प्रस्ताव रखा।

इस चार प्रतिनिधि में शामिल थे- बीकेयू हरियाणा से गुरनाम सिंह चादुनी, मध्य प्रदेश के राष्ट्रीय किसान मज़दूर महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष शिव कुमार कक्का, अखिल भारतीय किसान सभा के महासचिव हन्नान मोल्लाह और स्वराज इंडिया के अध्यक्ष योगेंद्र यादव।

अमित शाह ने बैठक में मेरी उपस्थिति पर आपत्ति जताई: योगेंद्र यादव

हालाँकि, भारत सरकार ने योगेंद्र यादव का नाम सूची में शामिल करने पर आपत्ति जताई। यादव ने मीडिया से बात करते हुए दावा किया है कि यह गृह मंत्री अमित शाह ने उनकी उपस्थिति पर ‘व्यक्तिगत रूप से आपत्ति जताई थी।’ शाह ने कथित तौर पर किसानों से कहा था कि यादव एक राजनीतिक नेता हैं। अमित शाह का कहना था कि वो केवल वास्तविक हितधारकों अर्थात किसानों के साथ बातचीत करने में रुचि रखते हैं, राजनेताओं के साथ नहीं।

योगेंद्र यादव ने इंडियन एक्सप्रेस से कहा, “हालाँकि किसान यूनियन ने फैसला किया कि बैठक का निमंत्रण तभी स्वीकार किया जाएगा जब चार प्रतिनिधि भी प्रतिनिधिमंडल में शामिल किए जाएँगे। मुझे सूचित किया गया कि मेरे इस प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा होने पर अमित शाह ने व्यक्तिगत रूप से आपत्ति जताई थी। सरकार ने कहा कि मैं राजनीतिक व्यक्ति था। किसान संघ बैठक का बहिष्कार करने के लिए तैयार थे, लेकिन वे मेरी जिद पर बाकी प्रतिनिधियों के साथ बैठक में जाने के लिए राजी हुए।”

वहीं ‘द हिन्दू’ की रिपोर्ट में कहा गया है कि आंदोलन से जुड़े कुछ किसान इस समूह और नेता योगेंद्र यादव से नाराज़ हैं। कुछ नेताओं का कहना है कि शुरुआत में यादव ने प्रदर्शनकारियों से बॉर्डर से बुराड़ी मैदान में शिफ़्ट होने का आग्रह किया था। जिसके बाद कुछ लोग नाराज़ हो गए थे। इसके अलावा कुछ लोग इसलिए नाराज़ हैं कि उनके और कुछ राष्ट्रीय नेताओं के आसपास मीडिया की मौजूदगी ज़्यादा थी। जबकि उन्होंने मुट्ठी भर प्रदर्शनकारियों को ही लामबंद किया था।

बता दें किसानों के प्रदर्शन को देखते हुए केंद्र सरकार ने उन्हें बिना शर्त बातचीत के लिए आमंत्रण भेजा था, बैठक के लिए मंगलवार दोपहर 3 बजे किसान नेता विज्ञान भवन पहुँचे थे। सरकार की ओर से केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर, रेल मंत्री पीयूष गोयल और योजना आय़ोग के पूर्व अध्यक्ष सोम प्रकाश बैठक में शामिल हुए। हालाँकि, इस बातचीत का कोई नतीजा नहीं निकल सका।

‘बॉलीवुड को कहीं और ले जाना आसान नहीं’: मुंबई पहुँचे CM योगी अक्षय से मिले, महाराष्ट्र की तीनों सत्ताधारी पार्टियों ने किया विरोध

शिवसेना ने उत्तर प्रदेश के नोएडा में प्रस्तावित फिल्म सिटी को लेकर एक बार फिर से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर निशाना साधा है। पार्टी मुखपत्र ‘सामना’ के एग्जीक्यूटिव एडिटर संजय राउत ने धमकाया है कि बॉलीवुड को कहीं और ले जाना आसान नहीं है। योगी आदित्यनाथ इसी सिलसिले में मुंबई भी पहुँचे हुए हैं, इसीलिए शिवसेना और ज्यादा चिढ़ी हुई है। वहाँ अभिनेता अक्षय कुमार ने उनसे मुलाकात की।

राज्यसभा सांसद संजय राउत ने सवाल दागा है कि क्या सीएम योगी अन्य राज्यों में बनी फिल्म सिटी को लेकर भी वहाँ के कलाकारों से मुलाकात करेंगे या फिर सिर्फ मुंबई में ही ऐसा करने वाले हैं? उन्होंने कहा कि दक्षिण भारत में भी फिल्म उद्योग काफी बड़ा है, पश्चिम बंगाल और पंजाब में भी फिल्म सिटी है। साथ ही पूछा कि क्या योगी जी इन स्थानों पर भी जाएँगे और वहाँ के निर्देशकों-अभिनेताओं से बात करेंगे या क्या वह केवल मुंबई में ही ऐसा करने जा रहे हैं?’ 

साथ ही उन्होंने पूछा कि नोएडा फिल्म सिटी का क्या हुआ? साथ ही धमकाया कि मुंबई की फिल्म सिटी को कोई कहीं नहीं ले जा सकता है। वहीं मुंबई कॉन्ग्रेस के अध्यक्ष रहे संजय निरुपम ने भी इस मामले में टिप्पणी करते हुए कहा कि बॉलीवुड किसी सरकार या राजनीतिक पार्टी के संरक्षण की मोहताज नहीं है, इसीलिए इसे कोई कहीं नहीं ले जा सकता है। उन्होंने कहा कि सिनेमा के दीवानों ने अपनी मेहनत से इस विराट दुनिया को बसाया है और 100 वर्षों से ऐसा ही होता आ रहा है।

संजय निरुपम ने कहा कि नेता लोग इस मुगालते में हैं कि वो इसे शिफ्ट कर देंगे, या बचा देंगे। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने यूपी में फिल्म सिटी को लेकर मुंबई में कई उद्योगपतियों से भी मुलाकात की है। वो वहाँ ट्राइडेंट होटल में ठहरे हुए हैं। उन्होंने कहा कि यूपी में फिल्म निर्माण की असीम संभावनाएँ हैं। उन्होंने जानकारी दी कि फिल्म नीति-2018 के माध्यम से फिल्म निर्माण गतिविधियों को बढ़ावा दे रही है।

साथ ही ये भी बताया कि राज्य में फिल्मों की शूटिंग होने से स्थानीय लोगों को रोजगार व प्रदेश के कलाकारों को अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर प्राप्त होगा। उन्होंने आश्वासन दिया कि प्रदेश में फिल्म की शूटिंग करने वाले निर्माताओं को हरसंभव सहयोग व सुविधा प्रदान की जा रही है। उन्होंने अक्षय कुमार की ‘टॉयलेट – एक प्रेम कथा’ फिल्म की प्रशंसा की, जिसके माध्यम से एक समाजिक सन्देश दिया गया है। उन्होंने ऐसी फिल्मों को जागरूकता के लिए मददगार बताया।

वहीं NCP भी सीएम योगी के विरोध में उतर आई है। NCP नेता नवाब मलिक ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी यूपी में बॉलीवुड जैसी फिल्म सिटी बनाने की बात कर रहे हैं, जो अच्छी बात है लेकिन, ये समझ लेना गलत है कि 100 वर्षों से मुंबई को मिला बॉलीवुड का दर्ज़ा ख़त्म हो जाएगा, लोग पूरी तरह से अन्य राज्यों में चले जाएँगे। उन्होंने दावा किया कि बॉलीवुड को मिले दर्जे को कोई भी नहीं छीन सकता है।

इससे पहले महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने भी कहा था कि बॉलीवुड को जिस तरह से मुंबई से खत्म करने या शिफ्ट करने की कोशिश की जा रही है, उसे वह बिलकुल बर्दाश्त नहीं करेंगे।  मल्टीप्लेक्स और सिनेमा थिएटर मालिकों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग करते हुए उन्होंने कहा, “मुंबई न केवल भारत की वित्तीय राजधानी है, बल्कि यह सांस्कृतिक राजधानी भी है। बॉलीवुड और सिनेमा बड़ी संख्या में लोगों के लिए रोजगार पैदा करते हैं।”

कॉन्ग्रेस समर्थक साकेत गोखले को झटका, शेफाली वैद्य के खिलाफ अवमानना कार्यवाही से AG का इनकार

अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने कॉन्ग्रेस समर्थक साकेत गोखले को झटका देते हुए एक्टिविस्ट-लेखिका शेफाली वैद्य के खिलाफ अवमानना कार्यवाही शुरू करने के लिए अपनी सहमति देने से इनकार कर दिया। लाइव लॉ ने अपनी रिपोर्ट में इसकी जानकारी दी।

खुद को राहुल गाँधी का फॉलोवर बताने वाले साकेत गोखले ने अटॉर्नी जनरल से लेखिका शेफाली वैद्य के खिलाफ अदालत की अवमानना अधिनियम, 1971 (Contempt of Courts Act) की धारा 15 के तहत अवमानना याचिका दायर करने की अनुमति माँगी थी। साकेत ने आरोप लगाया था कि शेफाली वैद्य ने देश की न्यायपालिका के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी की है।

कॉन्ग्रेस समर्थक साकेत गोखले द्वारा शेफाली वैद्य के खिलाफ कार्रवाई की माँग वाले पत्र का जवाब देते हुए अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने कहा कि जिस ट्वीट को लेकर वो अदालत की अवमानना कार्यवाही शुरू करना चाहते हैं, वह ट्वीट शेफाली वैद्य के ट्विटर पेज पर लगभग एक साल पहले पोस्ट किया गया था।

अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने कहा कि केंटेम्प्ट ऑफ कोर्ट्स एक्ट, 1971 की धारा 20 के अनुसार, कोई भी कथित रूप से विरोधाभासी आचरण की एक साल की अवधि समाप्त होने के बाद उसके खिलाफ कोई अवमानना कार्रवाई शुरू नहीं किया जा सकता, जब तक कि मामले का स्वत: संज्ञान न लिया जाए।

एजी केके वेणुगोपाल ने कहा, “इसलिए इन परिस्थितियों को देखते हुए शेफाली वैद्य के खिलाफ कार्रवाई शुरू नहीं की जा सकती। अत: मैं आपको इसकी सहमति देने से इनकार करता हूँ।”

बता दें कि साकेत गोखले जिस ट्वीट को लेकर अदालत की अवमानना याचिका दायर करना चाहते थे, वह ट्वीट शेफाली वैद्य ने 2017, 2018 और 2019 में किए थे। गोखले ने पिछले महीने उन ट्वीट्स के स्क्रीनशॉट पोस्ट किए थे, जिनमें कहा गया था कि वह ‘एक दिलचस्प अदालत की अवमानना याचिका’ पर काम कर रहे हैं। ट्वीट में शेफाली वैद्य ने दिवाली के दौरान पटाखों पर प्रतिबंध और अन्य मामलों में किए गए विवादास्पद टिप्पणियों पर शीर्ष अदालत की आलोचना की थी।

यहाँ पर बताने की जरूरत नहीं है कि साकेत गोखले ने शेफाली वैद्य के खिलाफ इसलिए अवमानना का मामला दर्ज करना चाहा था क्योंकि अटॉर्नी जनरल ने उन लेफ्ट-लिबरलों के खिलाफ मुकदमा दायर करने की अनुमति दी थी, जिन्होंने रिपब्लिक टीवी के एडिटर-इन-चीफ अर्णब गोस्वामी को जमानत देने के लिए सुप्रीम कोर्ट की कड़ी आलोचना की थी। 

अटॉर्नी जनरल ने लेफ्ट ट्रोल के खिलाफ अवमानना कार्रवाई शुरू करने की सहमति दी

गौरतलब है कि अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने लॉ के एक छात्र को कॉमिक आर्टिस्ट रचिता तनेजा के खिलाफ अवमानना कार्यवाही शुरू करने के लिए सहमति दे दी है। रचिता तनेजा पर अवमानना की कार्यवाही की सहमति उन ट्वीट्स के लिए दी गई, जो ‘दुस्साहसिक हमला और संस्था का अपमान’ था। 

अर्णब गोस्वामी को बेल दिए जाने को लेकर sanitarypanels ने एक कार्टून बनाया था। जिसमें लिखा था, “तू जानता नहीं मेरा बाप कौन है।” इसमें बीच में अर्णब गोस्वामी को, एक तरफ सुप्रीम कोर्ट और दूसरी तरफ बीजेपी को दिखाया गया।

इसी तरह के दूसरे ट्वीट में सुप्रीम कोर्ट को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जोड़ते हुए ‘संघी कोर्ट ऑफ इंडिया’ के रूप में उल्लेखित किया। इसमें कैप्शन दिया गया, “अर्णब को जमानत मिलती है, असली पत्रकारों को जेल मिलती है, स्वतंत्र न्यायपालिका विफल होती है।”

इससे पहले गालीबाज ‘कॉमेडियन’ कुणाल कामरा द्वारा किए गए विवादित ट्वीट को लेकर अटॉर्नी जनरल ने अवमानना का मुकदमा चलाने की अनुमति दी थी। अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने यह अनमुति इलाहाबाद हाईकोर्ट के वकील अनुज सिंह की शिकायत के आधार पर दी थी। 

गलवान घाटी में चीन ने रची थी खूनी साजिश, तैनात थे 1000 PLA सैनिक: अमेरिकी रिपोर्ट ने किया खुलासा

गत जून माह में गलवान घाटी (Galwan valley) पर भारतीय सैनिक और चीनी फौजियों के बीच हुई आपसी झड़प चीन की साजिश का परिणाम थी, इसका खुलासा अमेरिका ने अपनी वार्षिक रिपोर्ट में किया है।

अमेरिकी संसद कॉन्ग्रेस की एक शीर्ष सम‍िति ने बुधवार  (दिसंबर 2, 2020) को जारी की गई अपनी वार्षिक रिपोर्ट में कहा है कि चीन सरकार ने इस साल जून में गलवान घाटी में हुई खूनी हिंसा की ‘साजिश’ रची थी। यानी वह झड़प जिसमें भारत ने अपने 20 सैनिक खोए, वह कोई तुरंत पैदा हुई स्थिति का परिणाम नहीं थी बल्कि उनकी ही योजना का हिस्सा थी।

झड़प के 6 महीने बाद अमेरिका ने अपनी रिपोर्ट ‘यूएस-चाइना इकोनॉमिक एंड सिक्योरिटी रिव्यू कमिशन’ में इस बात का उल्लेख किया है कि कुछ ऐसे सबूत हैं जिनसे पता चला है कि चीनी सरकार ने गलवान घाटी पर हिंसा के लिए अपनी योजना बनाई थी, जिसमें संभावित रूप से जानलेवा हमले की संभावना भी शामिल थी। रिपोर्ट में अमेरिका ने अपना दावा करते हुए सैटेलाइट तस्वीरों का हवाला दिया है। उन्होंने कहा कि गलवान घाटी में झड़प वाले हफ्ते हजार की तादाद में पीएलए सैनिकों को तैनात किया गया था।

इसके अलावा रक्षा मंत्री वेई ने भी झड़प से कई हफ्ते पहले अपने बयान में चीन को उकसाते हुए स्थिरता को बढ़ावा देने के लिए लड़ने के लिए प्रोत्साहित किया था। रिपोर्ट में बताया गया है कि चीन सरकार के वा‍स्‍तविक नियंत्रण रेखा पर इस उकसावे वाले कदम को उठाने के पीछे का ठीक-ठीक कारण अभी इस वर्ष पता नहीं चल पाया है। लेकिन अंदाजा लगाया जा रहा है कि इसके पीछे उनका उद्देश्य रणनीतिक सड़क तैयार करना था। इतना ही नहीं चीन के सरकारी मुखपत्र ग्लोबल टाइम्स ने भी भारत को चेतावनी दी थी कि भारत अमेरिका-चीन प्रतिद्वंदिता में शामिल होता है तो उसे व्‍यापार और आर्थिक मोर्चे पर करारा जवाब दिया जाएगा।

गौरतलब है कि जून में LAC पर हुई हिंसा 1975 के बाद पहली ऐसी हिंसा थी जिसमें सैनिकों ने जान गवाई। लद्दाख की गलवान घाटी में भारत और चीनी सैनिकों के बीच हाथापाई और संघर्ष में भारत के 20 जवान वीरगति को प्राप्त हुए थे जबकि चीन के 43 से अधिक जवानों के हताहत होने की सूचना सामने आई थी। चीन ने भारतीय सेना पर हमला करने के लिए लाठी-ंडंडे, रॉड, हॉकी, ड्रैगन पंच, कंटीली तारों वाले हथियार आदि का इस्तेमाल किया था।