भारत सरकार ने चीन की 43 मोबाइल ऐप्स पर पाबंदी लगा दी है। सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 69ए के तहत सरकार ने 43 मोबाइल ऐप पर बैन लगा दिया है। इन ऐप्स को भारत की संप्रभुता, अखंडता, रक्षा, सुरक्षा और सार्वजनिक व्यवस्था के लिए खतरा बताया गया है।
Govt of India blocks 43 mobile apps from accessing by users in India, under section 69A of the Information Technology Act. Action taken based on inputs regarding these apps for engaging in activities prejudicial to India’s sovereignty, integrity, defence, security & public order. pic.twitter.com/ACVffY3SKF
केंद्र सरकार ने सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 69 ए के तहत भारत में उपयोगकर्ताओं द्वारा एक्सेस करने वाले 43 मोबाइल ऐप को बैन करने का फैसला लिया है। सरकार को इन ऐप्स को लेकर शिकायत मिली थी।
बताया जा रहा है कि ये ऐप्स भारत की सुरक्षा और कानून-व्यवस्था के लिए खतरा पैदा कर सकते थे। इसे देखते हुए सरकार ने ऐहतियाती कदम उठाते हुए इन्हें बैन कर दिया है। केंद्र सरकार की ओर से जारी किए गए बयान के मुताबिक, इन सभी बातों को ध्यान में रखते हुए ऐप्स को बैन किया गया है।
43 चायनीज ऐप्स पर बैन लगा कर एक बार फिर से डिप्लोमैटिक चोट
केंद्र ने 4 बार चीनी ऐप्स के खिलाफ एक्शन लिया
पहली बार सरकार ने 29 जून को यही कारण बताते हुए 59 चीनी ऐप्स बैन कर दिए थे। फैसला 15 जून को गलवान झड़प के बाद लिया गया था।
इसके बाद 27 जुलाई को भी 47 ऐप बैन किए गए थे। सरकार ने यह कदम तब उठाया था, जब लद्दाख में तनाव बढ़ रहा था और चीनी सैनिकों ने दो बार घुसपैठ की कोशिश की थी।
2 सितंबर को सरकार ने पबजी समेत 118 ऐप्स को बैन किया था। पबजी को 17.5 करोड़ से ज्यादा लोगों ने डाउनलोड किया है।
अब फिर सरकार ने 43 मोबाइल ऐप्स बैन की हैं। देश की सुरक्षा और अखंडता के लिए इन्हें खतरा बताया गया है।
रिपब्लिक टीवी के एडिटर-इन-चीफ अर्णब गोस्वामी की गिरफ्तारी पर मुंबई पुलिस का चेहरा 4 नवंबर को पूरे देश ने देखा। 20 सशस्त्र पुलिसकर्मी उन्हें उनके घर से घसीटकर अलीबाग थाने ले गए और उन्हें जूते पहनने का मौका तक नहीं दिया गया। यह सब एक ऐसे केस में हुआ जो साल 2019 में बंद हो चुका है।
इस गिरफ्तारी की अगुवाई एनकाउंटर स्पेशलिस्ट सचिन वाजे ने की थी, जिन्हें कुछ दिन पहले मुंबई पुलिस कमिश्नर परमबीर सिंह ने 16 साल बाद पुलिस में तैनात करवाया था और कुछ दिन पहले ही वह शिवसेना से भी जुड़े थे।
अर्णब को थाने ले जाने के दौरान किस तरह का बर्ताव किया गया इसका अंदाजा उनके हाथ पर नजर आए 6 इंच लंबे घाव को देख कर लग गया था। इसके अलावा उन्होंने अपने हलफनामे में भी कहा था कि उन्हें शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया गया और यातनाएँ भी दी गईं। अर्णब ने कहा था कि उन्हें जूतों से पीटा गया और ऐसा तरल पीने को दिया गया जिससे उनका दम घुटने लगा।
कोर्ट में उनकी पुलिस हिरासत का प्रस्ताव रद्द किए जाने के बाद भी पुलिस ने उन्हें तलोजा जेल में शिफ्ट करवाया। बाद में 9 दिन की हिरासत के बाद सर्वोच्च न्यायालय ने अर्णब को जमानत पर रिहा किया और साथ ही साथ पुलिस द्वारा की गई असंवैधानिक कार्रवाई और उच्च न्यायालय द्वारा पहले जमानत नहीं दिए जाने पर कड़ी फटकार लगाई।
सबसे ज़्यादा हैरान करने वाली बात यह थी कि अर्णब को 2018 के दौरान आत्महत्या के लिए उकसाने वाले ऐसे मामले में गिरफ्तार किया गया जिसे पहले बंद किया जा चुका था लेकिन उनपर कार्रवाई करने के लिए हाल ही में फिर से यह फाइल खोली गई। ऐसा करने के पहले न तो न्यायालय की सहमति ली गई और न ही संज्ञान। यह बात किसी और ने नहीं बल्कि अर्णब को न्यायिक हिरासत में भेजने वाले मजिस्ट्रेट ने भी कही थी।
महाराष्ट्र सरकार ने 2018 के जिस मामले की फाइल दोबारा खोल कर अर्णब गोस्वामी को गिरफ्तार किया था उस मामले में अंतरिम रिपोर्ट तक दायर की जा चुकी थी। अब ऑपइंडिया ने ARG Outlier Media Asianet News Pvt Ltd (ARG), CDPL (अन्वय नाइक की कंपनी, जिन्होंने आत्महत्या की थी) और नाइक की पत्नी और बेटी के बीच हुई पूरी बातचीत को एक्सेस किया है।
अन्वय नाइक और कथित तौर पर उनकी माँ कुमुद नाइक की आत्महत्या
5 मई 2018 को आर्किटेक्ट अन्वय नाइक और उनकी माँ कुमुद नाइक महाराष्ट्र के रायगढ़ स्थित अलीबाग क्षेत्र अंतर्गत कवीर गाँव के फ़ार्म हाउस में मृत पाए गए थे। इस दौरान उनके घर से एक सुसाइड नोट भी बरामद किया गया था।
सुसाइड नोट
बरामद किए गए सुसाइड नोट में कुल 3 लोगों के नाम का ज़िक्र था।
1.अर्णब गोस्वामी, जिनका अन्वय नाइक और इनकी माँ के मुताबिक़ 83 लाख रुपए बकाया था और यह राशि उन्हें Concorde Designs Pvt Ltd (वही कंपनी जिसके निदेशक माँ और बेटे थे) को देनी थी।
2. फ़िरोज़ शेख – 4 करोड़ बकाया
3. नितेश शारदा – 55 लाख बकाया
बरामद किए गए सुसाइड नोट में उल्लेखनीय यह था कि इस पर केवल अन्वय नाइक के हस्ताक्षर थे। अन्वय की माँ जो ठीक वहीं पर मृत पाई गई थीं उन्होंने सुसाइड नोट पर हस्ताक्षर नहीं किया था या अपना (वैकल्पिक) सुसाइड नोट नहीं छोड़ा।
बाद में इस मामले में घटना के दिन ही एफ़आईआर दर्ज की गई थी जिसमें 3 लोगों को आरोपित बनाया गया था। इसके ठीक बाद पुलिस ने अर्णब के दफ्तर जाकर उनसे इस घटना के संबंध में पूछताछ की थी और अपनी कंपनी के आर्थिक दस्तावेज़ जमा करने की बात कही थी।
8 मई को सीएफ़ओ एस सुंदरम और सीईओ खनचंदानी ने लगभग सारे आर्थिक दस्तावेज़ यहाँ तक कि आने वाले लोगों से जुड़ी जानकारी और फ़ोन रिकॉर्ड की जानकारी भी पुलिस को दे दी थी।
6 अगस्त 2018 को टाइम्स ऑफ़ इंडिया में एक रिपोर्ट प्रकाशित हुई जिसमें दावा किया गया कि अन्वय नाइक ने पहली अपनी माँ को मारा फिर खुद आत्महत्या कर ली।
साल 2018 की टाइम्स रिपोर्ट
अब यह स्पष्ट था कि कुमुद नाइक की हत्या हुई है क्योंकि पुलिस ने उस वक्त एक हत्या का मामला भी दर्ज किया था और ये उन्होंने केवल मौक़ा-ए-वारदात पर बरामद किए गए सबूत के आधार पर दर्ज किया था।
रिपोर्ट में इकलौता सबूत यही दिया गया है कि फ़ार्म हाउस पर कोई और नहीं मौजूद था। अप्रैल 2019 में पुलिस ने इस मामले में एक समरी तैयार किया जिसके मुताबिक़, “उन्हें (पुलिस वालों को) अर्णब गोस्वामी और अन्य के विरुद्ध कोई सबूत नहीं मिला है इसलिए केस की फाइल यहीं बंद की जाती है।”
अन्वय नाइक और कुमुद नाइक का शव बरामद होने से लेकर केस खुलने तक क्या-क्या हुआ?
ऑपइंडिया द्वारा एक्सेस किए गए पत्रों के मुताबिक़ ARG Pvt Ltd और अक्षता नाइक व आद्या नाइक (अन्वय नाइक की पत्नी और बेटी) के बीच भुगतान संबंधी विवाद सुलझाने के लिए तमाम बैठकें हुईं। फिर इस मुद्दे पर चर्चा हुई कि क़ानूनी रूप से किस तरह ARG, CDPL को सीधे भुगतान कर सकती है जैसा कि पहले भी माँग उठाई गई थी लेकिन इस विवाद पर कोई समझौता नहीं हो पाया था।
पत्रों को खंगालने के बाद एक बात स्पष्ट हो जाती है कि यह मामला उतना भी सुलझा हुआ नहीं है जितना कोई भी मान कर चल रहा है। मामले से जुड़ी तमाम तरह की भ्रांतियाँ भी फैलाई गई लेकिन निम्न पत्रों को देखने के बाद सब दूर हो जाती हैं।
पत्र संख्या 1- 12 अप्रैल 2019
12 अप्रैल 2019 को ARG ने CDPL को एक पत्र लिखा था जिसमें अक्षता नाइक (अन्वय नाइक की पत्नी) और आद्या नाइक (अन्वय नाइक की बेटी) और जाँच अधिकारी डीएस पाटिल का भी ज़िक्र था।
इस पत्र से इतना साफ़ है कि नाइक परिवार, CDPL के सब कांट्रेक्टर और ARG के बीच बकाया भुगतान पर चर्चा करने के लिए तमाम बैठकें ही चुकी थीं। इस पत्र में ARG ने नाइक परिवार को इस बात की जानकारी दी थी कि अभी काफी काम बचा हुआ है जिसे ARG द्वारा नियुक्त किए गए कॉन्ट्रैक्टर्स द्वारा स्वतंत्र रूप से ही पूरा किया जाएगा।
पत्र के मुताबिक़ बचे हुए कार्य की राशि को लेकर समझौते के बाद, ARG के मुताबिक़ CDPL पर 39,01,721 रुपए बकाया था। ARG का कहना था कि CDPL को राशि का भुगतान किया जा सकता है और इसके बाद पत्र में उन बैंकों का नाम लिखा हुआ था जिनके ज़रिए CDPL को भुगतान किया गया था।
हैरानी की बात है कि पत्र में यह भी लिखा हुआ है कि CDPL ने अपने सब कांट्रैक्टर को भुगतान नहीं किया है और इसलिए वह ARG के पास गए ताकि उन्हें सीधे पैसे दिलवा सकें।
आगे पत्र में निवेदन भी किए गए कि: – CDPL के अधिकृत कर्मियों के नामों की पुष्टि की जाए। -अगर ARG द्वारा सब कॉन्ट्रैक्टर्स को CDPL की जगह पर बकाया भुगतान किया गया है तो इसकी पुष्टि हो।
CJM ने स्वीकारी 16 अप्रैल को क्लोजर रिपोर्ट
गौर करने वाली बात है कि इस संबंध में फाइल की गई क्लोजर रिपोर्ट की समरी अप्रैल 2019 में दायर हुआ था। इस क्लोजर रिपोर्ट को भी ऑपइंडिया ने एक्सेस किया जो बताती है कि जाँच अधिकारियों को अन्वय नाइक की मौत के पीछे रिपब्लिक टीवी एडिटर अर्णब गोस्वामी, नीतेश शारदा और फिरोज शेख का कोई लिंक नहीं मिला।
उन्हें अपनी पड़ताल में ऐसे कोई सबूत नहीं मिले थे जो यह साबित कर सकें इन तीनों ने नाइक का जीवन असहनीय बना दिया था और इसके कारण उन्हें सुसाइड करनी पड़ी। रायगढ़ पुलिस ने इस केस में पड़ताल की थी और क्लोजर रिपोर्ट की समरी मजिस्ट्रेट के सामने अप्रैल 2019 में पेश किया था। इस रिपोर्ट में साफ था कि उन्हें आरोपितों के ख़िलाफ़ कोई सबूत नहीं मिले जिसके कारण पुलिस चार्जशीट दाखिल नहीं की।
क्लोजर रिपोर्ट में लिखा था,
“उल्लेखित तीनों आरोपित अलग-अलग क्षेत्र और जगहों पर काम करते हैं और पड़ताल में इनमें बीच कोई संबंध उजागर नहीं हुआ है। पड़ताल में अब तक कोई सबूत नहीं मिले हैं कि सुसाइड नोट में शामिल तीनों आरोपितों के खिलाफ़ एक्शन लिया जाए कि इन्होंने अकेले या साथ में मृतक का जीवन इतना मुहाल कर दिया कि उसके पास सुसाइड करने के अलावा कोई चारा नहीं बचा। इसलिए सबूतों के अभाव में यह ‘अंतिम’ समरी स्वीकारा जाए।”
आगे इस रिपोर्ट में कहा गया,
“जाँच से खुलासा हुआ है कि पिछले 6-7 सालों में कॉन्कॉर्ड (अन्वय नाइक की कंपनी) आर्थिक नुकसान से गुजर रही थी, जिसके कारण अन्वय और उनकी माता मानसिक तनाव में थे। चूँकि उनकी माता भी इसी कंपनी की पार्टनर थी, तो अन्वय ने अपनी माँ को मौत के घाट उतारा और फिर खुद को फंदे पर लटका लिया।”
क्लोजर रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि concorde private limited ने अपने कई क्लाइंट्स के कामों को अधूरा छोड़ दिया था जिसमें वह क्लाइंट भी शामिल थे जिनका नाम सुसाइड नोट में लिखा गया।
इसके बाद रिपोर्ट में स्पष्ट बताया गया कि आरोपितों ने बाद में अधूरे कामों को खुद से करवाया और वेंडर्स को पुलिस के पास जमा किए दस्तावेजों के अनुसार कीमत दी। रायगढ़ पुलिस की इस रिपोर्ट को चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट ने अप्रैल 16, 2019 को स्वीकारा था।
इंडियन एक्सप्रेस ने भी concorde द्वारा भरे गए वार्षिक वैधानिक रिटर्न (annual statutory returns) को एक्सेस किया। डिटेल के मुताबिक, कंपनी पर वित्तीय वर्ष 2016 में 26.5 करोड़ का कर्ज था। इतना ही नहीं, कंपनी कुछ ही समय में निष्क्रिय हो गई थी और उस वर्ष के बाद से अपने वार्षिक रिटर्न भरना भी बंद कर दिया था।
दूसरा पत्र: 11 जून 2019
11 जून को एक पत्र ARG की ओर से अक्षता नाइक और आद्या नाइक (Adnya Naik) व मृतक की कंपनी CDPL को भेजा गया। ये पत्र केवल स्पीड पोस्ट या कूरियर के जरिए नहीं भेजा गया बल्कि इसे अक्षता नाइक के व्हॉट्सएप पर भी भेजा गया।
इस पत्र में उन तमाम बैठकों का जिक्र था जो अक्षता नाइक, आद्या नाइक और सब कॉन्ट्रैक्टर्स के बीच हुई, जिन्हें ARG डायरेक्ट भुगतान करना चाहता था। एआरजी का कहना है कि उन्होंने बस एक हर्जाना पत्र (indemnity letter) माँगा था ताकि वे उप-ठेकेदारों को सीधे भुगतान कर पाएँ। लेकिन नाइक परिवार की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई।
यहाँ स्पष्ट कर दें कि अक्षता नाइक और आद्या नाइक ने ARG के साथ अन्वय नाइक के ‘वारिस’ के तौर पर मीटिंग की थी, उनका CDPL में कोई स्टेक नहीं था। ARG ने यह भी खुलासा किया कि CDPL ने अपने सब कॉन्ट्रैक्टर्स को रिपब्लिक स्टूडियों में काम करने के लिए कोई पेमेंट नहीं की थी और अब वह डायरेक्ट एआरजी से पेमेंट माँग रहे हैं। यही कारण था कि एआरजी ने सीडीपीएल से भविष्य के लिए एक हर्जाना पत्र माँगा था कि वह सीडीपीएल के बकाया को चुका कर सब सेटल कर लें।
एआरजी कहता है कि न सीडीपीएल ने और न ही वारिसों (अक्षता और आद्या नाइक) ने ARG के अनुरोध पर गौर किया। अपने पत्र में एआरजी ने कहा जब सीडीपीएल और नाइक दोनों ने एआरजी के अनुरोध को नहीं सुना तो उनके पास सीडीपीएल के अकॉउंट में फंड ट्रांसफर करने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा। उन्होंने बकाया चुकाया। अपने पत्र में एआरजी ने सीडीपीएल को 10 दिन का समय दिया कि वह लेनदार, ऋणदाता, अंशधारकों के निदेशकों से क्षतिपूर्ति प्रस्तुत करे, या राशि (कम टीडीएस) को CDPL के बैंक खाते में जमा किया जाएगा।
ध्यान रखने वाली बात यह है कि ARG ने जो राशि अदा करने के लिए कहा था वह काम नहीं करने के लिए कटौती के बाद 39,01,721 रुपए थी। एआरजी इससे पहले ही 5.20 करोड़ रुपए से अधिक की सीडीपीएल का भुगतान कर चुका था।
अब दिलचस्प प्रश्न यह है कि जब ARG पहले ही सीडीपीएल को 5.20 करोड़ रुपए दे चुका था, तब आखिर क्यों CDPL ने अपने वेंडर्स को उनका बकाया नहीं चुकाया? क्यों सीडीपीएल ने हर्जाना पत्र नहीं जारी किया?
अगर नाइक भी चाहता था कि एआरजी सभी विक्रेताओं का भुगतान करे जिसे सीडीपीएल 5 करोड़ मिलने के बाद भी नहीं कर पाई तो हो सकता है वह इसी अवसर से खुश हो और हर्जाना देकर बकाया चुकाना चाहता हो, जो कि न ही बाद में वारिस के द्वारा किया गया और न ही सीडीपीएल के जरिए हुआ।
तीसरा पत्र, 15 जून 2019: अक्षता नाइक ने गुस्से में एआरजी को भेजा पत्र
15 जून को अक्षता नाइक ने ARG Outlier Media Private Limited को पत्र लिखा। इस पत्र में उन्होंने निम्नलिखित आरोप लगाए:- अक्षता नाइक ने दावा किया कि उनके एआरजी के साथ कॉन्ट्रैक्ट में एक साल के डिफेक्ट लायबिलिटी के लिए 5% रिटेंशन रेट थी। उन्होंने कहा कि अप्रैल 2018 में एक साल पूरा होना था और इसलिए एआरजी गलत या फिर अधूरे कार्यों के लिए किसी भी राशि को रोक या घटा नहीं सकता है। इसके बाद उन्होंने कहा कि कंपनी को 88 लाख रुपए चुकाए जाने हैं न कि एआरजी द्वारा कैलकुलेट किए गए 39.01 लाख रुपए।
– उन्होंने कहा कि ARG कंपनी (CDPL) को भुगतान करना चाहती है न कि वारिसों (नाइक की पत्नी और बेटी) को, ये जानते हुए कि अकॉउंट को वह ऑपरेट नहीं कर सकते क्योंकि कंपनी के दोनों निदेशकों ने अर्णब गोस्वामी द्वारा उकसाए जाने के बाद आत्महत्या कर ली है, जिसके लिए उनके ख़िलाफ अलीबाग पुलिस थाने में शिकायत भी दर्ज हुई है।
-आगे उन्होंने अर्णब पर आरोप लगाया कि वही सीडीपीएल से हर्जाना माँग रहे हैं, जबकि वह जानते हैं कि कंपनी के निदेशकों के मरने के बाद कोई भी उन्हें उसका भुगतान नहीं कर सकता।
-अक्षता ने अर्णब पर घटिया मंशा रखने का आरोप मढ़ा और सीडीपीएल के साथ डीफ्रॉड बात करने की बात कही।
– उन्होंने अपने पत्र में कहा, “आपको मालूम था कि मैं और बेटी दुख और पीड़ा से निकल कर किस दबाव से गुजर रही हैं, आपने तब तक हमें किसी प्रकार का भुगतान करने से मना कर दिया, जब तक अपने उन ठेकेदारों के दबाव के चलते हम आपके पास नहीं आए, जिन्हे मजदूरों को भुगतान करना था। जब हमने आपको बताया तब आपको एहसास हुआ कि मजदूरों का पैसा तो देना होगा क्योंकि कानून के तहत आप इससे पीछा नहीं छुड़ा सकते। आपको एहसास हुआ कि आपके पास स्थिति से भागने का कोई विकल्प नहीं है और इसीलिए आपने जानबूझ कर ऐसा पत्र लिखा ताकि आप अपने गुनाहों से बच सकें।”
-अक्षता ने आगे कार्रवाई करने पर ARG को मुकदमा चलाने की धमकी भी दी।
अब यहाँ आवश्यक है कि हम अक्षता नाइक की भावनाओं में बहने की बजाय कानून को समझें। सबसे पहले तो सीडीपीएल एक प्राइवेट लिमिटेड कंपनी है। इनका अंत निदेशकों की मौत के साथ नहीं होता। अक्षता बार-बार कहती हैं कि सीडीपीएल भुगतान रिसीव नहीं कर सकता और हर्जाना पत्र भी नहीं जारी कर सकता इसलिए ठेकेदारों को प्रत्यक्ष भुगतान किया जाए, जबकि वास्तविकता में यह सत्य नहीं है।
पूरे केस में में जहाँ दोनों निदेशकों की मौत हो चुकी है। उस समय इस पूरे मामले से निपटने के दो तरीके हैं।
पहला- दोनों माँ-बेटी को अन्वय नाइक का कानूनी रूप से वारिस बनने के लिए कंपनी को पत्र लिखना होगा और साबित करना होगा कि वह कानूनी रूप से उनकी वारिस हैं। इसके बाद कंपनी अन्वय नाइक और उनकी माँ के शेयर्स को उन्हें ट्रांसफर करेगी। अब जैसे ही ट्रांसफर प्रोसेस पूरा होगा, उन्हें ईजीएम (एक्सट्रा ऑर्डिनरी जनरल मीटिंग) बुला कर दो नए निदेशकों को नियुक्त करना होगा। फिर जब भी निदेशक नियुक्त होंगे, वह बैंक जाकर अकॉउंट में मौजूद सारे पैसे का इस्तेमाल कर सकते हैं।
दूसरा- अगर कंपनी पर बहुत ज्यादा उधार है और दोनों माँ-बेटी इसे अपने सिर नहीं लेना चाहती, तो वह चुप बैठ जाएँ, जब भी उधार माँगने वाले कोर्ट में जाएँगे तो वह स्पष्ट कह सकती है कि उनका इस कंपनी में कोई लेना देना नहीं है न उनके कोई स्टेक हैं। अगर इसके बाद भी कंपनी के पास बकाया राशि चुकाने के लिए संपत्ति नहीं है, तो अदालत उदाहरण के लिए आरओसी को कंपनी अकॉउंट खोलने का आदेश दे सकती है और कंपनी से जुड़े लोगों से पैसे लेकर सभी बकाया पैसे चुका सकती है।
कुल मिलाकर किसी भी स्थिति में आद्या नाइक या अक्षता नाइक की यह माँग की सारा पैसा उन्हें मिले न कि कंपनी को बिलकुल जायज नहीं है। अगर इन लोगों ने उक्त तरीकों में से पहला तरीका अपनाया होता तो पैसे का मामला सुलझ जाता और दूसरा रास्ता अपनाया होता तो इन्हें उधारी से मुक्ति मिल गई होती, बस इसके लिए उन्हें कंपनी संपत्ति को त्यागना पड़ता।
अक्षता नाइक ने इनमें से कोई रास्ता नहीं अपनाया। उन्होंने बस अपने अकॉउंट में पैसे माँगे या एआरजी से ठेकेदारों को बकाया चुकाने को कहा, जो कि कानूनी रूप से गलत है। उनका इस प्रकार कंपनी में कोई अधिकार न होने के बावजूद भी निजी अक़ॉउंट में पैसे माँगना उनकी मंशा पर सवाल उठाता है।
चौथा पत्र, 6 नवंबर 2019: ARG ने अक्षता नाइक के दावों पर किया पलटवार
4 पेज के पत्र में ARG ने बिंदुवार तरीके से अक्षता नाइक के आरोपों पर जवाब दिया। इस पत्र में उन्होंने स्पष्ट किया कॉन्ट्रैक्ट एआरजी और सीडीपीएल के बीच था कोई तीसरी पार्टी (दोनो माँ-बेटी) भुगतान की माँग नहीं कर सकती।
इसमें कहा गया कि दोनों निदेशकों के निधन के बाद नए निदेशक नियुक्त करने की प्रक्रिया नहीं अपनाई गई। कई अनुरोध के बाद भी दोनों माँ-बेटी ने शेयरहोल्डर या कंपनी का निदेशक बनने में दिलचस्पी नहीं दिखाई।
उन्होंने अर्णब गोस्वामी पर आपत्तिजनक टिप्पणी करने के लिए भी लताड़ा। उन्होंने कहा कि सुसाइड नोट में तीन लोगों का नाम है सिर्फ अर्णब का नहीं और दूसरा इस मामले में सबूतों के अभाव में केस बंद हो चुका है।
उन्होंने Defect liability period पर अक्षता के सभी दावों को नकारा और कहा कि उन दोनों को कॉन्ट्रैक्ट की जानकारी नहीं है क्योंकि वह उस समय मौजूद नहीं थी। इसके बाद कई आरोपों को एआरजी खारिज करता गया।
इसमें कहा गया कि अन्वय नाइक और कुमुद नाइक के अलावा ARG की कोई बैठक कभी भी अक्षता या आद्या में से किसी के साथ नहीं हुई इसलिए वह सिर्फ सीडीपीएल को भुगतान करेंगे।
कंपनी ने उन आरोपों को भी नकारा जिसमें दोनों की ओर से कहा गया कि ठेकेदारों की सख्ती के कारण एआरजी ने उनके साथ मीटिंग की। कंपनी बताती है कि उन्हें खुद उप ठेकेदारों ने बताया कि दोनों माँ बेटी इस मुद्दे को खुद स्टेक होल्डर और निदेशक बनके सुलझाना चाहती हैं।
ARG और CDPL के इन पत्रों से कुछ सवाल उठते हैं?
सभी तथ्यों को देखते हुए यह साफ होता है अन्वय नाइक की सुसाइड मामले में एफआईआर पहले दिन हो गई थी, फिर आखिर आद्या ने ये क्यों कहा कि पुलिस ने एफआईआर दर्ज करने से मना कर दिया क्योंकि शायद वह अर्णब का नाम सुनकर डर गए थे?
वास्तविकता यह है कि घटना वाले दिन पुलिस ने रिपब्लिक टीवी आकर इस मामले पर जानकारी दी थी और बाद में ARG के अधिकारियों ने सारी जानकारी पुलिस को दी थी। जिसके चलते आद्या नाइक द्वारा कारवां मैग्जीन को दिए इंटरव्यू और अक्षता नाइक के कई मौकों पर दिए बयान अपने आप झूठे साबित होते हैं।
गौरतलब है कि अपने पूरे साक्षात्कार में कारवां मैग्जीन के साथ आद्या ने सिर्फ अर्णब गोस्वामी पर चर्चा की थी। उन्होंने दावा किया था कि अर्णब ने अन्वय को धमकाया कि अन्वय चाहे जो करलें वह उन्हें पैसे नहीं देंगे। आद्या ने दावा किया था कि देय राशि 83 लाख रुपए से ज्यादा है लेकिन उसके पिता ने अर्णब गोस्वामी की धमकियों से तंग आकर उसे 83 लाख कर दिया।
5 नवंबर 2020 को दिए इस इंटरव्यू से ठीक एक साल पहले अक्षता नाइक ने एआरजी को पत्र लिखा था। दिलचस्प बात यह है कि इसमें कहीं भी अर्णब की धमकियों का उल्लेख नहीं था और न ही इस बात का की अर्णब को 83 लाख से ज्यादा पेमेंट देनी थी।
इतना ही नहीं इसमें ये तक नहीं लिखा था कि अर्णब गोस्वामी अन्वय नाइक को पैसे देना नहीं चाहते थे। वहीं, आद्या का कहना है कि वो साल 2017 के अप्रैल से पैसों की माँग कर रही हैं, लेकिन उन्हें अभी तक पैसे नहीं मिले।
आद्या का दावा है कि उन्हें मई 2020 तक नहीं पता था कि मामले में क्लोजर रिपोर्ट दर्ज हो चुकी है। ऐसे ही अक्षता भी कई वीडियोज में कह चुकी हैं कि उन्हें इसकी जानकारी नहीं थी। मगर, यदि उक्त पत्र देखें जिसमें ARG ने अपने ऊपर लगे आरोपों का पलटवार किया है तो पता चलेगा कि क्लोजर रिपोर्ट का जिक्र उसमें साफ तौर पर है। तो फिर ऐसे झूठे दावे क्यों किए जा रहे हैं?
कानूनी तौर पर जब अक्षता नाइक और आद्या नाइक के पास सीडीपीएल का स्टेकहोल्डर या डायरेक्टर बनने का मौका है तो आखिर वह उसमें दिलचस्पी क्यों नहीं दिखाती?
इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक कंपनी साल 2016 के वित्तीय वर्ष में घाटे में है। क्लोजर रिपोर्ट भी कहती है कि कंपनी की स्थिति 7-8 साल से ठीक नहीं है तो क्या अक्षता नाइक स्टेक होल्डर या निदेशक पद न अपना कर उधारी से बचना चाहती हैं लेकिन देयदाताओं से भुगतान की माँग करके कंपनी पर अधिकार चाहती है?
ये कुछ सवाल है जिनका उत्तर देना इस मामले में आवश्यक है। इसके अलावा दो स्थितियाँ हैं यदि अक्षता नाइक और आद्या नाइक के कहने पर ARG उन्हें भुगतान करनी बात पर सहमति दे देता? – यदि एआरजी माँ-बेटी की निजी अकॉउंट में पैसा भेजता तब भी सीडीपीएल का अकॉउंट एक्टिव रहता है और वो कानूनी रूप से आकर दावा कर सकते थे कि एआरजी उन्हें पैसा दे। – एक अन्य स्थिति में, एआरजी ने यदि सब कॉन्ट्रैक्टर को पेमेंट किया होता बिना सीडीपीएल के प्रतिनिधियों के हर्जाना पत्र के तो अक्षता नाइक और आद्या नाइक तब कंपनी के शेयरधारक / निदेशक बन सकते थे और माँग कर सकते थे कि एआरजी अब सीडीपीएल का भुगतान करें क्योंकि सीडीपीएल ने उन्हें अपनी ओर से उप-ठेकेदारों को भुगतान करने के लिए अधिकृत नहीं किया था।
अर्णब गोस्वामी को कैसे पकड़ा गया इस केस में?
26 मई को अनिल देशमुख ने इस मामले को ओपन करवाया और सीआईडी को इसकी जाँच दी। खास बात यह है कि इससे कुछ दिन पहले ही रिपब्लिक टीवी पालघर के कारण कॉन्ग्रेस के निशाने पर आया था जिसके कुछ दिन में ही अक्षता नाइक ने भी वीडियो जारी कर दी और दावा किया उनके मामले में एफआईआर नहीं हुई थी और क्लोजर रिपोर्ट का भी उन्हें नहीं मालूम।
Adnya Naik had complained to me that #AlibaugPolice had not investigated non-payment of dues from #ArnabGoswami‘s @republic which drove her entrepreneur father & grandmom to suicide in May 2018. I’ve ordered a CID re-investigation of the case.#MaharashtraGovernmentCares
Mrs.Akshata Naik has alleged that her entrepreneur husband and her mother in law had to commit suicide due to non payment of dues from Mr. Arnab Goswami’s @republic. This is serious and needs further investigation. pic.twitter.com/sp0dovnMDr
— Maharashtra Congress (@INCMaharashtra) May 5, 2020
मामला खुलने के महीनों बाद 4 नवंबर को अर्णब को उनके घर से खींचते हुए थाने ले जाया गया। जहाँ बाद में न्यायाधीश ने उन्हें पुलिस हिरासत में देने की बजाय ज्यूडिशियल कस्टडी में रखा। इस दौरान 9 चीजें गौर करने लायक हैं:
इस मामले में दायर की गई समरी रिपोर्ट अब भी वही है।
पुलिस ने अर्णब के खिलाफ़ बिना कोर्ट परमिशन के कार्रवाई की।
अर्णब की गिरफ्तारी गैरकानूनी थी।
अगर अन्वय नाइक पर दबाव बनाया जा रहा था तो आखिर उनकी माँ ने क्यों सुसाइड की?
अन्वय नाइक की मौत और आरोपितों के बीच कोई लिंक नहीं मिला।
ऐसे कोई सबूत नहीं है जो साबित करे कि पहले की जाँच अधूरी है।
आरोपितों के ख़िलाफ़ कोई सबूत नहीं है।
सारे सबूत केवल शिकायतकर्ताओं से ही एकत्रित किए गए थे।
पुलिस आत्महत्या में आरोपितों की कथित भूमिका का उल्लेख करने में विफल रही है।
शाहिद नाम का लड़का जेल जाता है। आरोप होता है एक लड़की को बहला-फुसला कर भगा ले जाने का। लड़के को बेल मिलती है, जेल से बाहर आता है और फिर उसी लड़की को भगा कर ले जाता है।
यह पूरा मामला उत्तर प्रदेश के भदोही का है। जिस लड़की को शाहिद भगा कर ले गया, उनके माँ-पिता के अनुसार लड़की की उम्र मात्र 15 साल है। इसके लिए वो आधार कार्ड के साथ-साथ स्कूल का रिकॉर्ड भी दिखाते हैं।
लड़की के परिवार वालों के अनुसार पुलिस और उम्र की जाँच करने वाली मेडिकल टीम ने मिलीभगत की है। रेडियोलॉजिस्ट की जाँच में लड़की की उम्र 18 से 20 वर्ष के बीच आँकी गई है। यही कारण है कि पिछली बार जब आरोपित शाहिद ने बहला-फुसला कर लड़की को भगाया था तब भी पाक्सो एक्ट की धाराएँ नहीं लगाई गई थी।
नाबालिग या बालिग लड़की (मेडिकल रिपोर्ट या आईडी के जरिए) के बीच फँसे इस केस में आरोपित शाहिद को जमानत मिल जाती है। और जिस बात का लड़की के परिवार वालों को डर था, वही होता है – छूटते ही शाहिद फिर से लड़की को बहला-फुसला कर भगा ले जाता है।
12 नवंबर को ही इस मामले में दोबारा शाहिद के खिलाफ शिकायत दर्ज की जाती है। लेकिन उम्र पर तकनीकी झोल के कारण न तो फिर से पाक्सो एक्ट की धाराएँ लगाई गईं और न ही अभी तक शाहिद या भगाई गई लड़की का ही कुछ पता चल पाया है। आरोपित और लड़की के अलग-अलग धर्म से होने के कारण मामला संवेदनशील है।
लड़की के परिवार वालों ने पुलिस और प्रशासन से समुचित कार्रवाई की माँग की है। आपको बता दें कि इससे पहले इसी साल मार्च में शाहिद ने लड़की को बहला-फुसला कर भगाया था।
अब जब कोरोना वायरस की दूसरी लहर आ रही है और वैक्सीन को लेकर सुगबुगाहट तेज हो रही है, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 8 राज्यों के मुख्यमंत्रियों से इससे जुड़ी तैयारियों को लेकर बैठक की और उसके बाद वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सम्बोधित किया। पीएम मोदी ने कहा कि भारत में रिकवरी दर ज्यादा है और मृत्यु दर कम है, जिससे पता चलता है कि हमारा देश इस दिशा में ठीक तरीके से आगे बढ़ रहा है।
उन्होंने कहा कि जिस तरह से टेस्टिंग से लेकर इलाज तक एक बड़े नेटवर्क को लगाया गया और उसका सफलतापूर्वक संचालन किया गया, अब भी उस नेटवर्क को बढ़ाने की प्रक्रिया जारी है। उन्होंने जानकारी दी कि पीएम केयर्स के माध्यम से भी कोरोना के खिलाफ लड़ाई में योगदान दिया जा रहा है। अच्छे इलाज के लिए अस्पतालों को हजारों नए वेंटिलेटर्स मुहैया कराए गए और इसके लिए 2000 करोड़ रुपए की रकम खर्च की गई।
पीएम मोदी ने कहा कि जहाँ कोरोना वायरस का पहला चरण डर के साए में बीता, दूसरे चरण में ढेर सारे संशय हैं, संदेह हैं और सामाजिक अलगाव की भावना भी थी। वहीं अब तीसरे चरण में लोगों ने सही कदम उठाने शुरू कर दिए हैं, साथ ही वो इस बीमारी को लेकर ज्यादा सतर्क और सावधान हैं। उन्होंने कहा कि चौथे चरण में लोगों के मन में ये भावनाएँ आने लगी हैं कि अब तो वैक्सीन आ ही जाएगी, वायरस कमजोर हो गया है और अब इसका प्रभाव नहीं बचा।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जनता को सचेत किया कि इसी सोच के कारण मन में असावधानी का भाव आता है और लोग सतर्कता खो रहे हैं। उन्होंने वायरस के संक्रमण को कम करने पर जोर देते हुए कहा कि टेस्टिंग, पुष्टि, कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग और उसके आँकड़ों को सबसे ज्यादा प्राथमिकता तो दी ही जानी चाहिए, साथ ही पाजिटिविटी रेट को भी हमें कम से कम 5% के पास लाना होगा। उन्होंने RT-PCR टेस्टिंग की संख्या भी बढ़ाने को कहा।
प्रधानमंत्री ने कहा कि आइसोलेट किए गए मरीजों की देखभाल और बेहतर तरीके से की जानी चाहिए और उनके स्वास्थ्य की लगातार निगरानी होनी चाहिए, ताकि उन्हें बेहतर इलाज मिले। उन्होंने कम्युनिटी हेल्थ सेंटर्स और ग्रामीण हेल्थ सेंटर्स को उपकरणों से लैस कर बेहतर बनाने पर जोर दिया। पीएम ने अपील की कि हम सभी को पहले से भी अधिक जागरूक रहने की और ट्रांसमिशन को कम करने के लिए आने प्रयासों को और गति देने की जरूरत है।
उन्होंने बताया कि भारत सरकार की टीम कोरोना वैक्सीन बनाने और विकसित कर रही संस्थाओं से सीधे जुड़ी हुई है। साथ ही अन्य देशों की सरकारों, वैश्विक नियामकों, बहुराष्ट्रीय संस्थाओं और अंतरराष्ट्रीय कंपनियों से भी लगातार संपर्क बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि वैक्सीन को लेकर भारत के पास जैसा अनुभव है, वो दुनिया के बड़े बड़े देशों के पास भी नहीं है। हमारे लिए जितनी जरूरी स्पीड है, उतनी ही सेफ्टी भी है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि कोरोना की लड़ाई की शुरुआत से ही हमने एक-एक देशवासी का जीवन बचाने को प्राथमिकता दी है और अब वैक्सीन आने के बाद भी हमारी प्राथमिकता होगी कि सभी तक वैक्सीन पहुँचे। उन्होंने जनता को आश्वासन दिया कि भारत जो भी वैक्सीन अपने नागरिकों को देगा, वो हर वैज्ञानिक कसौटी पर खरी होगी, और जहाँ तक वैक्सीन के वितरण की बात है, तो उसकी तैयारी भी सभी राज्यों के साथ मिलकर की जा रही है।
The number of RT-PCR tests must increase and monitoring of isolated patients must get better to ensure they get better treatment.
Community Health Centres and health centres in rural India must also be better-equipped.
उन्होंने सभी राज्य सरकारों को सलाह दी कि वो अब स्टोरेज कैपेसिटी को बढ़ाने में लग जाएँ। उन्होंने बताया कि वैक्सीन को लेकर विस्तृत योजना पर जल्द ही विचार-विमर्श होगा। उन्होंने राज्य, जिला और प्रखंड स्तर तक पर टास्क फोर्स के गठन की सलाह दी। पीएम ने कहा कि वैक्सीन प्राथमिकता के आधार पर किसे लगाई जाएगी, ये भी राज्यों के साथ मिलकर तय किया जाएगा। हर राज्य के सुझाव का इसमें बहुत महत्व होगा।
उन्होंने कहा कि आखिरकार राज्य सरकारों को ही इसका अंदाजा है कि उनके राज्यों में ये कैसे होगा। उन्होंने कहा कि कोरोना वैक्सीन से जुड़ा भारत का अभियान अपने हर देशवासी के लिए एक तरह से नेशनल कमिटमेंट की तरह है। देश में इतना बड़ा टीकाकरण अभियान ठीक से हो, सिस्टेमेटिक और सही प्रकार से चलने वाला हो, ये केंद्र और राज्य सरकार सभी की जिम्मेदारी है। पीएम मोदी ने बताया कि कोरोना से निपटने हेतु वैक्सीन का निर्माण राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय, दोनों स्तर पर फाइनल स्टेज में है।
Developments on COVID vaccines are in final stages at international & national level. However, we still don’t have certain answers to some questions.
However, we are fully ready for all possibilities. The final roll out decision will be taken in consultation with the States. pic.twitter.com/43PhLVh3OV
बता दें कि किसी भी दवा/वैक्सीन के क्लीनिकल रिसर्च के बाद भी यह दावा नहीं किया जा सकता कि उसकी सभी क्षमताओं अथवा संभावित हानिकारक तत्वों के बारे में पूर्ण जानकारी हासिल की जा चुकी है। इसका एक मुख्य कारण है कि क्लीनिकल रिसर्च एक सीमित जनसंख्या, सीमित प्रकार के लोगों और सीमित समय में संचालित की जाती हैं। मार्केटिंग की इजाजत मिलने के बाद भी किसी दवा/वैक्सीन की हमेशा ही (दवा की मार्केटिंग के बाद आजीवन) कुशल मेडिकल प्रोफेशनल्स द्वारा दवा के अन्य किसी भी हानिकारक प्रभाव को जाँचने और रोकने के प्रयास किए जाते हैं।
प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मंगलवार (नवंबर 24, 2020) को शिवसेना नेता प्रताप सरनाईक के आवास और दफ्तर पर छापेमारी की। यह छापेमारी सरनाईक के मुंबई और ठाणे के 10 ठिकानों पर की गई। उन पर वित्तीय अनियमितता का आरोप है, जिसके कारण ईडी ने इस कार्रवाई को अंजाम दिया है।
बताया जा रहा है कि यह छापेमारी मनी लॉन्ड्रिंग को लेकर की गई है। हालाँकि, फिलहाल ईडी की तरफ से इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है कि छापेमारी मनी लॉन्ड्रिंग मामले से संबंधित हैं। प्रताप सरनाईक खुद एक रियल एस्टेट डेवलपर हैं। शिवसेना में उनको एक तेेजतर्रार नेता के तौर पर जाना जाता है।
ठाणे के ओवला-मजीवाड़ा निर्वाचन क्षेत्र के विधायक ने हाल ही में माँग की थी कि मुंबई की तुलना पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर से करने के लिए अभिनेत्री कंगना रनौत के खिलाफ राजद्रोह का मामला दर्ज किया जाए।
सरनाईक ने कंगना को मुँह तोड़ने की धमकी दी थी
इसके साथ ही शिवसेना विधायक ने मुंबई की तुलना पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) से करने पर कंगना रनौत का मुँह तोड़ने की भी धमकी दी थी। प्रताप सरनाईक ने मराठी में ट्विटर पर लिखा था, “अगर कंगना यहाँ आती है, तो हमारे योद्धा उसका मुँह तोड़ देंगे। मैं गृह मंत्री से अनुरोध करता हूँ कि वह कंगना रनौत के खिलाफ मुंबई को पाक अधिकृत कश्मीर (पीओके) बताने के लिए राजद्रोह का मुकदमा दर्ज करे।”
गौरतलब है कि इससे पहले शिवसेना नेता संजय राउत भी कंगना रनौत को मुंबई न लौटने की धमकी दी थी। दरअसल, कंगना रनौत ने कहा था कि उन्हें दिवंगत अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की मौत की जाँच के मामले में मुंबई पुलिस की सुरक्षा नहीं चाहिए। इसके अलावा अभिनेत्री कंगना रनौत, भाजपा प्रवक्ता संबित पात्रा, रिपब्लिक टीवी के प्रधान संपादक अर्नब गोस्वामी और ZEE न्यूज के प्रधान संपादक सुधीर चौधरी को निशाना बनाते हुए अपमानजनक भित्ति चित्र (graffiti) बनाए गए थे।
इसको लेकर कंगना रनौत ने मुंबई की तुलना पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर से की थी। इस पर शिवसेना नेता संजय राउत ने उन्हें धमकी दी थी कि कंगना रनौत को मुंबई वापस नहीं आना चाहिए। उनकी टिप्पणियों के बाद, NCW की चेयरपर्सन रेखा शर्मा ने कंगना रनौत को धमकी देने के आरोप में शिवसेना विधायक की गिरफ्तारी की माँग की थी।
विपक्षी दलों के मुखर आलोचक और शिवसेना के कट्टर रक्षक प्रताप सरनाईक
फायरब्रांड राजनेता सरनाईक महाराष्ट्र में विपक्ष के खिलाफ काफी मुखर रहे हैं। उन्होंने महाराष्ट्र के पर्यावरण मंत्री आदित्य ठाकरे पर लगाए गए आरोपों का सख्ती से बचाव किया था और कंगना रनौत के खिलाफ बॉलीवुड में ड्रग्स के इस्तेमाल के बारे में उनकी टिप्पणी के लिए उनके खिलाफ ड्रग्स की जाँच के लिए कहा था। सरनाईक ने विधानसभा के पिछले सत्र में कंगना रनौत और अर्णब गोस्वामी के खिलाफ विशेषाधिकार हासिल किए।
रनाइक को ठाणे क्षेत्र में काफी दबदबा रखने और एनसीपी के जितेंद्र अवध के साथ अपनी लंबी प्रतिद्वंद्विता के लिए भी जाना जाता है, जो वर्तमान में ठाकरे सरकार में कैबिनेट मंत्री हैं। हालाँकि, महाराष्ट्र में महा विकास आघाड़ी सरकार बनाने के लिए शिवसेना और एनसीपी के हाथ मिलाने के बाद सरनाईक और अवध साथ आए थे। हाल ही में उन्हें एनसीपी नेता द्वारा शुरू की गई एक आवास योजना को लेकर किए गए संयुक्त संवाददाता सम्मेलन में देखा गया था।
रवीश कुमार ने लव जिहाद के मुद्दे पर काफी लिखा है। रवीश ने बकैती में यह बताने की कोशिश की कि लव जिहाद कुछ नहीं है, और सरकार अंतरधार्मिक प्रेम विवाह को बंद करने वाली है। अर्णब के बेल पर भी बकवास किया, कोरोना का नया मॉडल भी दिखाया। लव जिहाद के मुद्दे पर न सिर्फ रवीश कुमार ने बल्कि कई मीडिया संस्थानों और स्तंभकारों ने लगातार लिखना शुरू किया है, क्योंकि अभी मध्य प्रदेश, कर्नाटक और उत्तर प्रदेश की सरकार इस पर कानून लाने वाली है।
रवीश ने कहा कि भारतीय समाज प्रेम विरोधी है। हालाँकि, रवीश कुमार ने ये नहीं बताया कि उन्होंने यह बातें किस आधार पर कही। उन्होंने कहा कि ये सारे पैंतरे सरकार की विफलताओं को छुपाने के लिए है। रवीश कुमार हर विषय के ज्ञाता बन जाते हैं। वह खुद ही अपने फेसबुक वॉल पर लॉकडाउन के पक्ष में लिखते हैं कि यह पहले क्यों नहीं लगाया गया फिर लिखते हैं कि नोटबंदी, जीएसटी और लॉकडाउन ने अर्थव्यवस्था को तबाह कर दिया।
सुप्रीम कोर्ट में उस समय सभी की नजरें भारत के सबसे लोकप्रिय वरिष्ठ अधिवक्ताओं में से एक हरीश साल्वे की तरफ घूम गईं, जब उन्होंने एक महिला का केस मुफ्त में लड़ने के लिए हामी भर दी। हुआ यूँ कि एक रिटायर्ड सैन्य अधिकारी की पत्नी सुप्रीम कोर्ट में एक मामले को लेकर आईं और उन्होंने मुख्य न्यायाधीश जस्टिस एसए बोबडे से आग्रह किया कि उनके मामले में एक वकील को एमिकस क्यूरी (Amicus Curiae) बना दिया जाए।
दरअसल, जो आरोपित वकील रखने की वित्तीय स्थिति में नहीं हैं, उन्हें सरकारी खर्च से कोर्ट ही वकील मुहैया करा देता है और इस प्रकार सुनवाई आगे बढ़ती है। केस में किसी भी स्टेज में एमिकस क्यूरी को बहाल किया जा सकता है। कई मामलों में कोर्ट की सहायता के लिए ऐसी नियुक्ति होती है। इस शब्द का अर्थ ही होता है – न्यायालय का मित्र। सम्बंधित मामले में वो कोर्ट को क़ानूनी पहलुओं की जानकारी देता है।
इसी तरह उक्त महिला ने भी सुप्रीम कोर्ट से गुहार लगाई। उन्होंने कहा कि उनके पास वकील को देने के लिए रुपए नहीं हैं। महिला ने बताया कि उसकी बेटी लंदन में रहने के लिए भी संघर्ष कर रही है। साथ ही पूछा कि क्या इस मामले में एमिकस क्यूरी के रूप में हरीश साल्वे को नियुक्त किया जा सकता है? हरीश साल्वे से जब CJI ने पूछा कि क्या वो इसके लिए तैयार हैं, तो उन्होंने सकारात्मक जवाब दिया।
याचिकाकर्ता महिला ने एक बार फिर कहा कि उसके पास पैसे नहीं हैं। इसके बाद हरीश साल्वे ने कहा कि वो इस केस में एमिकस क्यूरी के रूप में नहीं, बल्कि याचिकाकर्ता की तरफ से बतौर अधिवक्ता पैरवी करेंगे। उन्होंने कहा कि वो ये सार्वजनिक भलाई के लिए कर रहे हैं, याचिकाकर्ता को रुपयों को लेकर तनाव लेने की कोई ज़रूरत नहीं है। इसके बाद याचिकाकर्ता महिला ने कहा – “ओह! सत्य हमेशा विजयी होता है।“
CJI: Will you appear for her?
Petitioner: I dont have money..
Salve: I will appear as the lawyer. Not amicus..don’t worry about fine. Its pro bono
विभिन्न खबरों की मानें तो हरीश साल्वे एक सुनवाई के लिए 15-30 लाख रुपयों के बीच फी लेते हैं और कई बार ये बात इस पर निर्भर करता है कि केस कितना जटिल है और क्लाइंट कौन है। रतन टाटा की भी वो पहली पसंद थे। मुकेश अम्बानी के खिलाफ जब राम जेठमलानी और मुकुल रोहतगी जैसे वकील थे, तब हरीश साल्वे ने उन्हें केस जिताया था। सामान्यतः सुप्रीम कोर्ट में केस लड़ने वाले साल्वे ज़रूरत पड़ने पर हाईकोर्ट्स में भी सुनवाइयों में हिस्सा लेते हैं।
तलोजा जेल से रिहा होने के बाद रिपब्लिक टीवी के एडिटर-इन-चीफ अर्णब गोस्वामी ने भी लाइव शो में वरिष्ठ वकील हरीश साल्वे के प्रति आभार व्यक्त किया था। साल 2018 के सुसाइड केस में बेल दिलाने के लिए हरीश साल्वे ने ही उनके केस को सुप्रीम कोर्ट में पेश किया था और अपने तर्कों से वो अर्णब को जमानत दिलाने में सफल भी हुए। उन्होंने बताया कि साल्वे ने उनका केस कोर्ट में लड़ने के लिए न्यूज नेटवर्क से 1 रुपया भी नहीं लिया।
सितम्बर 2019 में पूर्व केंद्रीय विदेश मंत्री सुषमा स्वराज की बेटी बाँसुरी ने कुलभूषण जाधव को अंतरराष्ट्रीय न्यायालय में मौत की सज़ा से बचाने वाले भारत के वकील हरीश साल्वे को उनकी फीस का वह एक रुपया भेंट किया, जो अपनी आकस्मिक मृत्यु के महज़ कुछ घंटे पहले स्वराज ने साल्वे से आकर अगले दिन ले जाने के लिए कहा था। अंतरराष्ट्रीय न्यायालय में पाकिस्तान के खिलाफ दलीलें देकर हरीश साल्वे ने जाधव को फाँसी के फंदे से बचाया था।
देश भर में कई मामले सामने आने के बाद ‘ग्रूमिंग जिहाद (लव जिहाद)’ के खिलाफ विरोध तेज हो गया है। उत्तर प्रदेश में ‘ग्रूमिंग जिहाद (लव जिहाद)’ के खिलाफ क़ानून बनाने के लिए चल रही तैयारियों के बीच इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला दिया है। अदालत ने कहा कि सभी नागरिकों को अपनी पसंद का जीवनसाथी चुनने का अधिकार तो है ही, साथ ही क़ानून दो बालिग़ व्यक्तियों को स्वेच्छा से एक साथ रहने की अनुमति प्रदान करता है।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि दो व्यक्ति चाहे विपरीत सेक्स के हों या समान सेक्स के हों, उन्हें संविधान अनुमति देता है कि वो अपनी मर्जी से साथ रहें। अदालत ने कुशीनगर निवासी सलामत अंसारी और प्रियंका खरवार मामले की सुनवाई करते हुए ये टिप्पणी की और कहा कि बालिग़ स्त्री-पुरुषों को साथ रहने का अधिकार क़ानून ही देता है। साथ ही कहा कि उनके शांतिपूर्ण जीवन में दखल देने का अधिकार न तो किसी व्यक्ति, और न ही किसी परिवार को है।
अदालत ने यहाँ तक कहा कि कोई सरकार भी उनके जीवन में हस्तक्षेप नहीं कर सकती। सलामत और प्रियंका ने मुस्लिम रीति-रिवाज से परिवार की मर्जी के खिलाफ अगस्त 2019 में निकाह किया था। प्रियंका के परिवार ने सलामत पर आरोप लगाया कि उनकी बेटी को बहला-फुसला कर ले जाया गया है, जिसके बाद आरोपित के खिलाफ पॉस्को एक्ट के तहत कार्रवाई की जा रही थी। जस्टिस पंकज नकवी और विवेक अग्रवाल की डिवीजन बेच ने इसकी सुनवाई की।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यहाँ तक कहा कि अदालत तो सलामत और प्रियंका को हिन्दू-मुस्लिम के रूप में देखती ही नहीं है। दर्ज की गई FIR को रद्द करते हुए कोर्ट ने कहा कि ये प्रियंका की मर्जी है कि वो किससे मिलना चाहती हैं और किससे नहीं। लेकिन, साथ ही कोर्ट ने प्रियंका से भी कहा कि वो अपने परिवार की बेटी होने के कारण उनके साथ उचित सम्मान और शिष्टाचार का व्यवहार करें।
A Division Bench of Justice Vivek Agarwal and Pankaj Naqvi held that the judgments in Noor Jahan and Priyanshi as not laying good law pic.twitter.com/qgbsHVeskx
‘ग्रूमिंग जिहाद (लव जिहाद)’ पर चहुँओर चल रही बहस के बीच इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि ये तो व्यक्ति की पर्सनल लिबर्टी का हिस्सा है और उसमें अगर कोई हस्तक्षेप कर के उसका अतिक्रमण करता है, तो ये दो लोगों के बीच ‘फ्रीडम ऑफ चॉइस’ का उल्लंघन है।
सरकारी वकील का कहना था कि शादी के लिए धर्मांतरण के कारण इस निकाह की क़ानूनन कोई वैधता नहीं है, इसीलिए कोर्ट इस पर ‘एक्स्ट्रा ऑर्डिनरी जजमेंट’ देने से बचे। साथ ही कोर्ट ने अंसारी के खिलाफ लगाए गए आरोपों को अतिशयोक्तिपूर्ण और गलत तरीके से प्रेरित करार दिया।
हाल ही में मध्य प्रदेश के गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने अगले सत्र में ‘ग्रूमिंग जिहाद (लव जिहाद)’ के खिलाफ कानून को लेकर बिल लाने की बात कही थी। वहीं, उत्तर प्रदेश सरकार भी इसके खिलाफ सख्त कदम उठाने की दिशा में आगे बढ़ रही है। AIMIM के राष्ट्रीय अध्यक्ष असदुद्दीन ओवौसी ने इसे संविधान की भावना के खिलाफ बताया था। उन्होंने कहा था कि अगर ऐसा है तो स्पेशल मैरिज एक्ट को तब खत्म कर दें।
पाकिस्तान में भी अजीत डोभाल को लेकर भय का माहौल बन गया है। पाकिस्तानी अख़बार ‘द एक्सप्रेस ट्रिब्यून’ में मुल्क के रिटायर्ड एयर मार्शल और पूर्व एम्बेस्डर शहजाद चौधरी ने एक लेख लिखा है, जिसमें उन्होंने दावा किया है कि अजीत डोभाल ‘गंदे हथकंडे’ अपना रहे हैं। उन्होंने लिखा है कि 2014 में नरेंद्र मोदी के पीएम बनने के साथ NSA बनाए गए अजीत डोभाल ख़ुफ़िया विभाग के दक्ष व अनुभवी व्यक्ति हैं और 90 के दशक में 6 वर्षों तक पाकिस्तान में रहे हैं।
शहजाद चौधरी के अनुसार, अजीत डोभाल ने उस दौरान पूरे पाकिस्तान का दौरा किया था और अपने देश के प्रति अपनी ड्यूटी को निभाते हुए समाज के कई वर्गों में भारत और उसके अभियान के लिए सहानुभूति और समर्थन को लेकर एक बड़ा नेटवर्क तैयार किया था। उन्होंने कबूल किया है कि पाकिस्तानी समाज में भारतीय कूटनीतिज्ञ खासे लोकप्रिय हैं। वो लिखते हैं कि लौटते ही डोभाल ने ‘कश्मीर इंतिफाद’ का सफलतापूर्वक निपटारा किया।
वो लिखते हैं कि बतौर NSA डोभाल ने अपने कर्तव्यों की फेरहिस्त में जम्मू कश्मीर और पाकिस्तान को सबसे ऊपर रखा हुआ है। पाकिस्तान की समझ से भारत-पाकिस्तान संबंधों की नीतियाँ साउथ ब्लॉक में न बन कर NSA द्वारा बनाई जाती हैं और यही चिंता उसे खाए जा रही है। चौधरी का दावा है कि एक सेमिनार में अजीत डोभाल ने कहा था कि पाकिस्तान से निपटने के लिए आक्रामक नीति अपनानी होगी, जिसमें पाकिस्तानियों को एसेट की तरह प्रयोग में लाना होगा।
उनका कहना है कि 2008 में हुए मुंबई हमलों के बाद ज़रूर भारत ने पाकिस्तान पर आतंकवाद के आरोप लगाए थे, लेकिन अजीत डोभाल ने इस प्रक्रिया को एक इंडस्ट्री के रूप में बदल दिया है। उनकी चिंता है कि अब भारत ने नीति बना ली है कि कश्मीर में जो भी होगा, उसके बदले पाकिस्तान के बलूचिस्तान में कई घाव दिए जाएँगे। उनका दावा है कि अजीत डोभाल बलूचिस्तान को एक नया जम्मू कश्मीर बनाना चाहते हैं, उसे विवादित क्षेत्र बनाना चाहते हैं। रिटायर्ड पाकिस्तानी एयर मार्शल ने लिखा:
“भारत ने ‘नौसेना अधिकारी’ कुलभूषण जाधव के पकड़े जाने के बाद उनके इशारों पर कराची और बलूचिस्तान में स्थित भारत के नेटवर्क को ध्वस्त किया गया। अफगानिस्तान में सड़क-रेल का जिस तरह से विकास किया जा रहा है और भारत वहाँ जैसे सक्रिय है, RAW के लिए आवागमन की पूरी सुविधा विकसित कर ली गई है। भारत के ‘प्रोपेगंडा’ के सामने पाकिस्तान संघर्ष ही कर रहा है। डोभाल की योजना के अनुसार, बलूच विद्रोहियों के साथ RAW मिल कर काम कर रहा है। अनुछेद-370 और धारा-35A को निरस्त करना भी अजीत डोभाल की योजना का हिस्सा था। अगर कोई युद्ध गन्दा है तो, आप स्वच्छ तरीके से इससे नहीं लड़ सकते।”
आगे बढ़ने से पहले बता दें कि कुलभूषण जाधव एक कारोबारी थे, जिनका अवैध तरीके से अपहरण कर के पाकिस्तानी फ़ौज ने उन पर भारतीय जासूस होने के आरोप लगा फाँसी की सजा सुना दी, लेकिन अंतरराष्ट्रीय न्यायालय ने इस फैसले को रोक दिया। पाकिस्तानी विश्लेषक का लिखना है कि जम्मू कश्मीर में पाकिस्तान के खिलाफ अपनाई गई रणनीति को अब अजीत डोभाल लद्दाख में चीन के खिलाफ आजमा रहे हैं।
‘We know India is an enemy and it will do what enemies do,’ says a former Pakistani military man considered by many to be one of the more reasonable voices there. In India of course many, including ex-faujis, live in fond hope of bhaichara with Pakistan.
उन्होंने आशंका जताई है कि भारत एक ‘दुश्मन’ है और वो यही कार्य करेगा, जो दुश्मन करते हैं। उन्होंने लिखा कि ये एक युद्ध है, जिसे पाकिस्तान को जीतना होगा। साथ ही पाकिस्तान की रणनीति को फिर से तैयार करने की ज़रूरत पर बल दिया। और दावा किया कि जम्मू कश्मीर का आखिरी चैप्टर अभी लिखा जाना है। इस लेख से स्पष्ट है कि पाकिस्तान में अजीत डोभाल को लेकर भय का माहौल बना हुआ है।
जम्मू कश्मीर में बड़ी साजिश के तहत आए 4 जैश आतंकियों के नगरोटा में भारतीय सुरक्षा बलों के हाथों मारे जाने के बाद से दोनों देशों के बीच फिर तनाव का माहौल है। BSF के डायरेक्टर जनरल राकेश अस्थाना ने जवानों को आदेश दिया है कि वो जम्मू कश्मीर के साम्बा और राजौरी सेक्टर में भारत और पाकिस्तान की सीमा पर गश्त में तेज़ी और सतर्कता लाएँ, क्योंकि वहाँ आतंकियों के कुछ अन्य सुरंगों के भी मिलने की आशंका है।
अमेरिका के नव-निर्वाचित राष्ट्रपति ने अपनी टीम के गठन की प्रक्रिया शुरू कर दी है और इसी क्रम में एंटोनी ब्लिंकन को ‘सेक्रेटरी ऑफ स्टेट’ बनाया गया है। अर्थात, वो संयुक्त राष्ट्र अमेरिका के नए विदेश मंत्री होंगे। ये भारत के लिए अच्छी, तो पाकिस्तान और चीन के लिए बुरी खबर है। वो पहले से ही जो बायडेन की विदेशी नीतियों को बनाने वाली टीम के मुखिया रहे हैं। वो जो बायडेन के उपराष्ट्रपति के कार्यकाल में उनके NSA भी रह चुके हैं।
वो ‘स्टेट फॉरेन रिलेशन कमिटी’ के स्टाफ डायरेक्टर भी रहे हैं। फिर वो डिप्टी सेक्रेटरी बन गए। उनके पिता हंगरी में एम्बेस्डर रहे थे। उन्होंने तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति बिल क्लिंटन के विदेशी मुद्दों पर स्पीच लिखने से अपने करियर की शुरुआत की थी। मध्य-पूर्व, चीन, यूरोप, ईरान और भारत को लेकर जो बायडेन की रणनीतियों के पीछे एंटोनी ब्लिंकन ही रहे हैं। भारत-अमेरिका परमाणु करार के समय उन्होंने सीनेट में इसके पक्ष में माहौल तैयार किया था।
तब बराक ओबामा तक इस करार को सीनेट में पास करने से हिचक रहे थे और डेमोक्रेट पार्टी के फार लेफ्ट वर्ग में एकमत नहीं था, तब उन्होंने बड़ी भूमिका निभाई थी। इस साल की शुरुआत में हडसन इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी में भारत के साथ रिश्तों पर बोलते हुए उन्होंने कहा था कि भारत के साथ रिश्तों को मजबूत करना और भारत-अमेरिका संबंधों में गहराई लाना जो बायडेन की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में से एक होगी।
उन्होंने कहा था कि इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में भारत-अमेरिका के रिश्ते का महत्व है और इसीलिए वैश्विक मुद्दों पर स्थिरता के लिए इस पर आगे बढ़ना ज़रूरी है क्योंकि ये काफी लोकतांत्रिक होगा। उन्होंने याद दिलाया कि पेरिस क्लाइमेट समझौते के वक्त भारत को उसमें शामिल करने में तत्कालीन अमेरिकी उपराष्ट्रपति जो बायडेन ने बड़ी भूमिका निभाई थी, क्योंकि भारत और चीन के बिना इस समझौते का कोई अर्थ ही नहीं रह जाता।
उन्होंने कहा था कि भारत को हमने समझाया कि वो इस समझौते में आने के बाद ज्यादा समृद्ध और सुरक्षित होगा। उन्होंने कहा कि ये कठिन था लेकिन भारत को मनाने में हम कामयाब रहे। साथ ही बताया कि अगर भारत इसका हिस्सा नहीं बनता तो वैश्विक चुनौतियों का समाधान नहीं हो पाता। पेरिस समझौते, WHO और ईरान JCPOA से डोनाल्ड ट्रम्प ने नाता तोड़ लिया था। नए अमेरिकी राष्ट्रपति इन तीनों में फिर से अमेरिका को वापस लेकर जाएँगे।
U.S. President-elect Joe Biden named key members of his administration, including Antony Blinken to lead the State Department, John Kerry as a climate envoy and Janet Yellen for Treasury Secretary — a history-making move for that office https://t.co/eBiUb9cqETpic.twitter.com/UVzmHy76IJ
एंटोनी ब्लिंकन का मानना है कि जम्मू कश्मीर या अन्य मुद्दों पर, जिनमें दोनों देशों के बीच सहमति न हो, उस पर भारत जैसे देश से खुल कर बात की जा सकती है। चीन और पाकिस्तान में उनकी नियुक्ति को लेकर नाराजगी देखने को मिल सकती है। 58 वर्षीय एंटोनी ब्लिंकन ने याद किया था कि अमेरिका और भारत के रक्षा पार्टनर बनने के पीछे जो बायडेन का भी योगदान था।
उन्होंने ये भी कहा था कि न सिर्फ संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद, बल्कि अन्य वैश्विक संगठनों में भी भारत को महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दिलाने के लिए प्रयास किया जाएगा। उन्होंने कहा था कि जिस तरह सीमा से लेकर आर्थिक मोर्चों तक चीन आक्रामक होकर गलत तरीके से फायदा उठा रहा है, उससे हमें निपटना है। साथ ही वो आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति की भी वकालत करते रहे हैं और लोकतांत्रिक मूल्यों पर भारत को मुख्य पार्टनर बताते हैं।
उधर चीन की कम्युनिस्ट सरकार के एक सलाहकार का कहना है कि चीन को इस ग़लतफ़हमी को दूर कर लेना चाहिए कि जो बायडेन प्रशासन के अंतर्गत उसके अमेरिका के साथ रिश्ते अपने-आप सुधरने लगेंगे। उसने चेताया कि उनके अंतर्गत अमेरिका अब चीन के खिलाफ और ज्यादा सख्त रवैया अपना सकता है। उसका मानना है कि वो अच्छे और पुराने दिन अब चले गए हैं। SCMP के अनुसार, 40 साल पहले एक-दूसरे के देश में दूतावास स्थापित होने के बाद दोनों के रिश्ते सबसे बुरी स्थिति में हैं।