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‘वोटर को लिबरल वैल्यू की कद्र नहीं, इसलिए…’ – कॉन्ग्रेसी सलमान खुर्शीद का बिहारियों पर निशाना, पहले कहा गया गरीब-लालची

कॉन्ग्रेस नेता सलमान खुर्शीद ने बिहार में हुई पार्टी की हार का ठीकरा मतदाताओं के सिर पर फोड़ा है। अपने फेसबुक पोस्ट में खुर्शीद ने कहा है कि अगर मतदाता उदारवादी मूल्यों के प्रतिरोधी हैं तो फिर उन्हें (कॉन्ग्रेस) सत्ता में लौटने के लिए लंबे संघर्षों के लिए तैयार रहना चाहिए।

3600 करोड़ रुपए के अगस्ता वेस्टलैंड घोटाले में नाम सामने आने के बाद सलमान खुर्शीद ने बिहार की जनता पर आरोप लगाया है कि उन्हें उदारवादी मूल्यों की कदर नहीं है। उन्होंने अपने फेसबुक पोस्ट में लिखा, “अगर मतदाता का मूड उन लिबरल वैल्यू को स्वीकारने का नहीं है, जिनका हम समर्थन करते हैं या जिन्हें हम पोषित करते हैं तो हमें सत्ता में लौटने के लिए छोटे रास्तों पर फोकस करने की बजाए लंबा संघर्ष करना होगा।”

अपने पोस्ट में खुर्शीद ने आखिरी मुगल सम्राट की प्रशंसा की और साथ ही कपिल सिब्बल जैसे उन कॉन्ग्रेसी नेताओं पर भी अप्रत्यक्ष रूप से निशाना साधा, जो चुनाव के बाद से पार्टी नेतृत्व की आलोचना कर रहे हैं। उन्होंने अपने पोस्ट में कहा, 

 “जब हम अच्छा करते हैं तो निश्चित रूप से उसे बहुत हद तक बहुत आसान समझ लिया जाता है। मगर जब हम बुरा भी नहीं, बस थोड़ा कमजोर प्रदर्शन करते हैं, वह फौरन कमियाँ निकालने लगते हैं। ऐसा लगता है कि इससे भावी निराशाओं के लिए कम कमियाँ बचेंगी। क्या यह ऐसा मामला है, जहाँ एक खराब कर्मी अपना गुस्सा अपने उपकरणों पर निकाले?”

अपने पोस्ट में सलमान खुर्शीद ने पार्टी के साथियों को पार्टी की आलोचना करने से बचने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि ये बात और है कि उनकी (कॉन्ग्रेस) राजसी राजनीति के समेकन में किसी भी वजह की तरह, समय-समय पर पुन: मूल्यांकन और रणनीति व लॉजिस्टिक में पुन: लेखन की आवश्यकता है।

आत्मनिरीक्षण की जगह कॉन्ग्रेस लगा रही इल्जाम

उल्लेखनीय है कि कॉन्ग्रेस को जिस समय में चुनावों में अपनी हार को लेकर आत्मनिरीक्षण करना चाहिए, उस समय कॉन्ग्रेस अब भी बाहरी तत्वों को अपनी हार का कारण बता रही है। ऐसा लगता है जैसे विपक्षी पार्टियों के लिए यह एक नियम बन गया है कि वो चुनाव में हारने के बाद या तो ईवीएम को दोषी ठहराएँगे या फिर वोटर्स की समझ पर सवाल खड़े कर देंगे।

सब जानते हैं कि कॉन्ग्रेस ने सत्ता में लौटने के लिए महागठबंधन से हाथ मिलाया लेकिन तब भी यह युक्ति उन्हें जीत दिलाने में काम नहीं आई और उनके बेकार प्रदर्शन के कारण राजद सबसे ज्यादा सीटें लेने के बावजूद सत्ता से वंचित रही। इसी तरह गुजरात, मणिपुर, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के चुनाव में मिली हार में पार्टी के लिए चिंता का सबब थी। 

याद दिला दें कि कुछ समय पहले कॉन्ग्रेस के एक अन्य पदाधिकारी ने बिहारियों को गरीब और लालची करार दिया था क्योंकि उन्होंने पार्टी को वोट नहीं दिया था। वहीं कपिल सिब्बल ने यह स्वीकारा था कि अब लोग कॉन्ग्रेस को एक प्रभावशाली नेतृत्व के तौर पर नहीं देखते हैं।

एक इंटरव्यू में अपनी बात रखते हुए उन्होंने कहा कि बिहार चुनाव के अलावा कई उपचुनावों के नतीजों से यह स्फ्ष्ट है कि लोग कॉन्ग्रेस पार्टी को एक प्रभावी विकल्प नहीं मानते हैं। उन्होंने कहा कि यूपी के कुछ निर्वाचन क्षेत्रों में कॉन्ग्रेस के उम्मीदवारों को 2% से भी कम वोट डले। गुजरात में तो कॉन्ग्रेस के तीन उम्मीदवारों ने जमानत जब्त करवा दी।

क्रिकेट खेलते हुए बहस के बाद बल्ले और स्टंप से जानलेवा हमला: मोहम्मद आदिल, जेनुलहक खान और इरफान गिरफ्तार

राजस्थान के सलूंबर में गवर्नमेंट हायर सेकेंडरी स्कूल में रविवार शाम काे क्रिकेट खेलते समय दो समुदायों के बीच आपसी हाथापाई हुई और फिर मामला सांप्रदायिक झड़प में बदल गया।

रिपोर्ट्स के अनुसार, विद्यालय प्रांगण में मौजूद खेल के मैदान पर कुछ लड़के अलग-अलग पिच पर क्रिकेट खेल रहे थे। जिस दौरान एक तरफ से दूसरी तरफ गेंद के चले जाने पर दोनों पक्षों में बहस शुरू हो गई। देखते ही देखते बहस करते हुए लोग आपस मे गाली-गलौज करने लगे। यही नहीं, यह विवाद ऐसा बढ़ा कि एक पक्ष ने दूसरे पक्ष पर बल्ले और स्टंप से जानलेवा हमला कर दिया।

इस मारपीट में सोहन, नीलेश भोई, गौतम, अशोक और मोइन खान सहित पाँच लोग घायल हो गए। वहीं घटना को शांत कराने और बीच-बचाव करने पहुँचे सोहनलाल भोई को भी हमलावरों ने नहीं बख्शा। आरोपितों ने उनके सिर पर वार किया, इससे वे गंभीर रूप से घायल हाे गए। इसके बाद उन्हें और अन्य दाे युवकाें काे प्राथमिक उपचार के बाद महाराणा भूपाल सरकारी अस्पताल में रेफर किया गया है।

घटना की जानकारी होते ही पुलिस महकमा एक्शन में आया। एएसपी मुकेश सांखला, डीएसपी रतन चावला, थाना प्रभारी हनवंत सिंह सोढ़ा, थाना प्रभारी (सारदा) अनिल बिश्नोई, थाना प्रभारी (सेमरी) कर्मवीर सिंह, थाना प्रभारी (लसाड़िया) सूरजमल, थाना प्रभारी (झल्लारा) भैयालाल, गींगला से थाना प्रभारी तेज करण सिंह सहित अन्य थानों से पुलिस बल को मौके पर तैनात किया गया है।

पुलिस ने घायल सलूंबर निवासी नीलेश पुत्र जगदीश भोई की शिकायत पर 19 नामजद और 50 अज्ञात आरोपितों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। घटना के एक दिन बाद, पुलिस ने मामले के सिलसिले में सोमवार को मोहम्मद आदिल, मोनू उर्फ जेनुलहक खान और मोहम्मद इरफान को गिरफ्तार किया है।

वहीं घटना से आक्रोशित एक समुदाय के लोगों ने चुंगी नाका की सड़कों पर जमकर हंगामा किया। भीड़ ने कोरोनो वायरस महामारी के मद्देनजर बनी अस्थायी चाैकी की कुर्सियाँ तोड़ दी और डिवाइडर को बीच रास्ते में लगाकर सड़क को ब्लॉक कर दिया।

इस बीच स्थित को काबू करने पहुँची पुलिस से भी भीड़ ने हाथापाई की। जिसके बाद इलाके में कानून व्यवस्था की स्थिति को बहाल करने के लिए पुलिस को सख्त कदम उठाने पड़े। यह बवाल यहीं नहीं रुका। सर्व समाज के सदस्यों ने सोमवार को भाेईवाड़ा चाैराहे से उप-मंडल कार्यालय तक मौन रैली निकाल कर विरोध प्रदर्शन किया और उचित कार्रवाई की माँग की।

‘जब भी आप किसी मिलिट्री डील में ‘दलाली’ के बारे में सुनें तो कॉन्ग्रेस के बारे में सोचें’: रविशंकर प्रसाद

अगस्ता वेस्टलैंड डील में मुख्य आरोपित राजीव सक्सेना के खुलासे के बाद बीजेपी ने कॉन्ग्रेस अध्यक्ष पर सीधा हमला बोला है। केंद्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर रहा कि यूपीए की विरासत खत्म होने का नाम नहीं ले रही है।

उन्होंने कहा, “हमें सत्ता में आए 6 साल हो चुके हैं लेकिन अब तक यूपीए के किए कारनामे बाहर आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि मामले के मुख्य आरोपित राजीव ने प्रवर्तन निदेशालय के सामने खुलासा किया है कि उसने ये पैसे नेताओं और टॉप अधिकारियों को दिए गए थे।”

अगस्ता वेस्टलैंड को लेकर केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कॉन्ग्रेस पर कई गंभीर आरोप लगाए। मंगलवार (नवंबर 17, 2020) को प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए रविशंकर प्रसाद ने कहा, “बहुत बड़ी पेंट कंपनी जेंसन निकॉल्सन का एक बैनर देशभर में लगा होता था- “जब भी रंगों को देखो तो हमारे बारे में सोचो।” इसको थोड़ा बदल दूँ तो- “जब भी आप किसी मिलिट्री डील में किक बैक के बारे में सुनें तो कॉन्ग्रेस नेताओं के बारे में सोचें।”

उन्होंने आगे कहा, “बिना लूट के कोई सुरक्षा की डील नहीं, बिना किक बैक के कोई सुरक्षा से संबंधित खरीदारी नहीं और इन सब में कहीं न कहीं कुछ कॉन्ग्रेस नेताओं के नाम आते हैं, उनके व उनके परिवार से जुड़े लोग आते हैं। कॉन्ग्रेस पार्टी को इसका जवाब देना पड़ेगा।”

केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा, “राजीव सक्सेना ने ईडी को बताया कि पैसे नेताओं और टॉप अधिकारियों को दिए गए थे। टोटल कीकबैक 70 मिलियन यूरो था। अगर AP का मतलब अहमद पटेल तो FAM का मतलब भी सामने आना चाहिए। क्या FAM का मतलब फैमिली है और सब जानते हैं कि कॉन्ग्रेस पार्टी में परिवार किसका है।”

केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा, “ये गंभीर आरोप कॉन्ग्रेस पार्टी के बड़े नेताओ पर लगे हैं। इस पर कॉन्ग्रेस पार्टी को क्या कहना है या चुप रहना है। डिफेंस डील में कॉन्ग्रेस पार्टी के नेताओ का नाम आना ही है, ऐसे में हमारे देश की सुरक्षा के साथ ऐसे ही ये लोग खिलवाड़ करते रहे। सोनिया जी, राहुल जी बताएँ कि इस पर क्या कहना है।”

केंद्रीय मंत्री ने कहा, “जाँच एजेंसी अपना काम कर रही है, उस मामले में हम दखल नहीं देते हैं।” गुपकार मसले पर रविशंकर प्रसाद ने कहा, “अमित शाह ने बहुत सही ट्वीट किया है, मुफ्ती जी कहती हैं कि जब तक कश्मीर का झंडा नहीं आएगा, हम तिरंगा नहीं लहराएँगे। हमारी सेना आतंक पर भारी पड़ी है, इसलिए ये लोग घबराए हुए हैं।”

उन्होंने कहा, “प्रधानमंत्री की अपील लोकल फ़ॉर वोकल का बहुत बड़ा असर हुआ है और इस त्यौहार के सीजन में चीन को बहुत बड़ा आर्थिक नुकसान हुआ है।” कपिल सिब्बल के बयान पर रविशंकर प्रसाद ने कहा, “कॉन्ग्रेस में नेता अब बोलने लगे है, लेकिन कॉन्ग्रेस में सुनने वाला कौन है।”

रविशंकर प्रसाद ने कहा कि डिफेंस डील में कॉन्ग्रेस पार्टी के नेताओं का नाम आना ही बताता है कि हमारे देश की सुरक्षा के साथ ऐसे ही ये लोग खिलवाड़ करते रहे हैं। सोनिया गाँधी और राहुल गाँधी बताएँ कि इस पर क्या कहना है। उन्होंने कहा कि जाँच एजेंसी अपना काम कर रही हैं, उस मामले में हम दखल नहीं देते हैं।

उन्होंने कहा, “2010 में 3,600 करोड़ रुपए के अमाउंट से राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के लिए VVIP अगस्ता वेस्टलैंड हेलीकॉप्टर खरीदने की बात हुई थी। दो साल बाद 2012 में मीडिया रिपोर्ट आ गई थी कि इसमें किक बैक हुआ है।”

गौरतलब है कि अगस्ता वेस्टलैंड घोटाले (Agusta Westland Deal) के प्रमुख आरोपित और पेशे से चार्टर्ड अकाउंटेंट राजीव सक्सेना ने पूछताछ कमलनाथ के भतीजे रतुल पुरी, बेटे बकुल नाथ, सलमान खुर्शीद और अहमद पटेल का नाम लिया है। जाँच एजेंसियाँ पूरे मामले की जाँच कर रही हैं। जल्द ही इन नेताओं पर शिकंजा कस सकता है। अगस्ता वेस्टलैंड VVIP चॉपर डील केस में तीन हफ्ते पहले ही सक्सेना को अंतरिम जमानत दी गई है। 

पति को छोड़ इस्लाम कबूल कर मेरे साथ रहो… वरना तेरा अश्लील वीडियो वायरल कर दूँगा: UP पुलिस ने किया गिरफ्तार

गोरखपुर के गीडा इलाके की एक महिला ने अपने ही गाँव के एक व्यक्ति पर जबरन धर्मपरिवर्तन और यौन शोषण का आरोप लगाया है। महिला का आरोप है कि आरोपित शख्स उसकी अश्लील वीडियो बना कर उस पर धर्म परिवर्तन करने का दबाव बना रहा है और ऐसा नहीं करने पर वीडियो सोशल मीडिया पर अपलोड करने की धमकी भी दे रहा है। इस संबंध में पुलिस ने आरोपित युवक को हिरासत में ले लिया है और उससे पूछताछ कर रही है।

दैनिक जागरण की रिपोर्ट के अनुसार, महिला का पति शहर से बाहर रहता है। इस दौरान उसकी दोस्ती गाँव के एक युवक से हो गई। जिसका फायदा उठाकर युवक ने मौका देखते ही मोबाइल फोन से महिला का आपत्तिजनक वीडियो बना लिया।

आरोपित पिछले कुछ दिनों से महिला पर दबाव बनाने लगा कि वह अपने पति को छोड़ कर इस्लाम धर्म कबूल करे और उसके साथ रहे। जब महिला ने धर्मपरिवर्तन से इनकार कर दिया, तो उसने उसे धमकी दी कि वह उसका वीडियो वायरल कर देगा।

धमकियों से परेशान हो महिला ने इसकी शिकायत अपने पति से कर दी। मामले के बारे में जानने के बाद पति ने युवक को फोन कर फटकार लगाई। साथ ही धमकियों के बारे में महिला के मायके वालों को भी जानकारी दी।

मामले को गम्भीरता से लेते हुए सोमवार को महिला के परिजनों ने गीडा थाने पहुँच कर इसकी शिकायत दर्ज कार्रवाई। पीड़िता के परिजनों ने पुलिस से मामले में उचित कार्रवाई करने की माँग भी की।

गौरतलब है कि मामले को संज्ञान में लेते हुए गीडा थाना प्रभारी डीके सिंह ने कहा कि क्षेत्र में पुलिस बल तैनात किया गया है क्योंकि इस मामले में दो अलग-अलग समुदाय के लोग शामिल हैं।

वो यूनिवर्सिटी जहाँ से निकले ग्रैजुएट्स बनते हैं दुनिया के सबसे बड़े और खूंखार आतंकी

पाकिस्तान का नाम आतंकवाद को बढ़ावा देने के लिए विश्व भर में कुख्यात है। पाकिस्तान लगातार ऐसे इस्लामी आतंक को पनाह देता आया है जिनके निशाने पर भारत, अफगानिस्तान और संयुक्त राष्ट्र जैसे पश्चिमी देश हैं। 

वहाँ अलकायदा, लश्कर-ए-तैयबा, तालिबान जैसे आतंकी संगठन बिलकुल आजाद होकर घूमते हैं। इतना ही नहीं राजनीतिक और सेना का संरक्षण भी इन संगठनों को दिया जाता है और इन्हीं को सुरक्षित रख कर या सबकी नजरों से छिपाकर पाकिस्तान अपने गुप्त प्रोपगेंडे को पूरा करता है।

पाक की ऐसी हरकतों के कारण FATF ने उसे साल 2018 से ग्रे लिस्ट में रखा हुआ है। उस पर लगातार आरोप लग रहे हैं कि वह अपनी सरजमीं पर आतंकियों को ऐसा माहौल देते हैं कि उनके संगठन ऑपरेट किए जा सकें।

सोचने वाली बात यह है कि आखिर एक इस्लामिक राष्ट्र इतनी तेजी से आतंकवाद की फैक्ट्री कैसे बन रहा है? क्यों हर आतंकी इस जगह को अपने लिए जन्नत मानता है? क्यों यहाँ 9/11 का मास्टरमाइंड ओसामा बिन लादेन पकड़ा जाता है? कहाँ से यह आतंकी संगठन नए लोगों को भर्ती करते हैं? 

दारुल उलूम हक्कानिया- ‘यूनिवर्सिटी ऑफ जिहाद’

एएफपी की हालिया रिपोर्ट ने इन सभी प्रश्नों के उत्तर दिए हैं। इस रिपोर्ट में दारुल उलूम हक्कानिया का जिक्र किया गया है। इसे जिहाद यूनिवर्सिटी बताते हुए कहा गया है कि यही संगठन लोगों में इस्लामी जिहाद के बीज बोता है और बाद में उन्हें आतंकी संगठनों को मुहैया करवाकर उनकी मैनपावर बढ़ाता है।

यहाँ तालिबान से जुड़े आतंकियों का नाम शान से लिया जाता है और बताया जाता है कि इस मदरसे से तालीम लेकर निकले आतंकी कैसे तालिबान में बड़े ओहदों पर पहुँचे है। इसमें इस्लाम के ‘दुश्मनों’ के ख़िलाफ नए जिहादियों को मजहबी लड़ाई जारी रखने के लिए प्रेरणा भी दी जाती है।

मौजूदा जानकारी के अनुसार, पेशावर से लगभग 60 किलोमीटर (35 मील) पूर्व में अकोरा खट्टक में दारुल उलूम हक्कानिया मदरसे का कैंपस बना हुआ है। यहाँ 4000 जिहादियों को पनाह दी जाती है। इन्हें मुफ्त में खाना, आश्रय और पहनने को कपड़े मिलते हैं। इनके भीतर तालीम के नाम पर उग्रवाद और कट्टरपंथ भरा जाता है।

कई तालिबानियों ने ली है दारुल उलूम हक्कानिया से तालीम

इस मदरसे की शुरुआत मौलाना अब्दुल हक ने 1947 में की थी। उनके बाद 81 साल के कट्टरपंथी उलेमा समीउल हक को इसकी देख-रेख की जिम्मेदारी मिली मगर आतंकियों ने साल 2018 में उसे उसके घर पर ही मार डाला।

उसने 1980 के दशक में सोवियत के ख़िलाफ़ अफगान मुजाहिद्दिनों का साथ दिया था और बाद में उस तालिबान का भी समर्थन किया था, जिसने यूएस-नाटो के ख़िलाफ़ अफगान में हमले शुरू किए। कहा जाता है कि पाकिस्तान की पूर्व पीएम बेनेजीर भुट्टो को मारने वाला आतंकी भी इसी यूनिवर्सिटी का ग्रैजुएट था।

इस यूनिवर्सिटी का प्रभाव साल 2014-15 में देखने को मिला था, जब पूर्व पीएम नवाज शरीफ को देश में चल रहे संघर्ष को खत्म करने के लिए समीउल हक से अनुरोध करना पड़ा था कि वह आतंकी संगठनों पर अपनी आड़ का इस्तेमाल करें। दिलचस्प बात यह है कि यह वो समय था, जब पाकिस्तान के तालिबानियों ने देश के भीतर हमले करने शुरू कर दिए थे। पेशावर आर्मी स्कूल में साल 2014 में हमला हुआ था, जिसे पाकिस्तानी तालिबानियों ने करवाया था।

पाक सरकार देती है हक्कानिया यूनिवर्सिटी को आर्थिक संरक्षण

आज हक्कानिया को इमरान सरकार की ओर से आर्थिक संरक्षण दिया जाता है। साल 2018 में खैबर पख्तूनख्वा सरकार ने दारुल उलूम के लिए 277 मिलियन रुपए अनुदान किए थे। इससे पहले साल 2016-2017 में 300 मिलियन रुपयों की सहायता दारुल उलूम को मिली थी।

इतना ही नहीं, साल 2018 में पीएम इमरान खान ने भविष्य के आतंकी नेताओं को पोषित करने के लिए आर्थिक सहायता का समर्थन किया था। खान ने दावा किया था कि ऐसी मदद से मदरसों के छात्रों को मुख्यधारा में लाने में और कट्टरता से दूर रखने में मदद होगी।

अफगान के नेता भी है पाकिस्तान के इस समर्थन के खिलाफ़

भारत की तरह अफगानिस्तान भी पाकिस्तान द्वारा ऐसे कट्टरपंथी संगठनों को बढ़ावा देने के लिए उन पर निशाना साधता रहता है। हाल में अफगान के नेताओं ने पाकिस्तान द्वारा मदरसे को आर्थिक समर्थन देने पर सवाल उठाए थे और दावा किया था कि इससे पता चलता है कि पाक तालिबान को समर्थन देता है।

बता दें कि अभी हाल में दारुल उलूम हक्कानिया के नेताओं ने अफगानिस्तान में तालिबान विद्रोह का समर्थन करते हुए गर्व से एक ऑनलाइन वीडियो साझा किया था, जिस पर काबुल की सरकार ने नाराजगी जताई थी।

इस पर अफगानिस्‍तान के राष्ट्रपति अशरफ गनी के प्रवक्ता सादिक सिद्दीकी ने कहा था, “ये संस्थाएँ कट्टरपंथी जिहाद को जन्म देती हैं, तालिबानी पैदा करती हैं और हमारे देश को धमकी दे रही हैं।” 

पूर्व सांसद अतीक अहमद के साढ़ू इमरान जई की अवैध इमारत पर चला योगी सरकार का बुलडोजर: गैंग के धंधों को करता है मैनेज

उत्तर प्रदेश में माफियाओं के खिलाफ कार्रवाई लगातार जारी है। योगी आदित्यनाथ की सरकार मुख्य रूप से मुख़्तार अंसारी और अतीक अहमद की अवैध सम्पत्तियों पर शिकंजा कस रही है। इसी क्रम में अब पूर्व सांसद अतीक अहमद के साढ़ू इमरान जई की अवैध संपत्ति पर बुलडोजर चलाया गया है। मंगलवार (नवंबर 17, 2020) को अतीक अहमद के साढ़ू इमरान जई के अवैध निर्माण पर योगी सरकार का बुलडोजर चला।

अतीक अहमद के साढ़ू इमरान जई के जिस अवैध निर्माण को बुलडोजर से ध्वस्त किया गया, वो 2500 वर्ग गज का है और खुल्दाबाद के चकिया क्षेत्र में बनाया गया था। पीडीए से नक्शा स्वीकृत कराए बिना ही यहाँ अवैध रूप से निर्माण कर दिया गया। इमरान जई ही अतीक अहमद के सारे अवैध कारोबार को संभालता है और उसके धंधों और सम्पत्तियों का प्रबंधन करता है। उस पर कई गंभीर आपराधिक मुक़दमे दर्ज हैं।

हिस्ट्रीशीटर इमरान फ़िलहाल फरार चल रहा है। उत्तर प्रदेश सरकार की अलग-अलग संस्थाएँ प्रदेश भर के माफियाओं और अपराधियों पर कार्रवाई कर रही है, उसी क्रम में इस कार्रवाई को भी अंजाम दिया गया। जिस इमारत को ध्वस्त किया गया, वो इमरान जई का आवास हुआ करता था। पुलिस को उसकी तलाश है और उसकी गिरफ़्तारी के लिए दबिश दी जा रही है। अतीक अहमद गैंग के अन्य सदस्यों पर भी कार्रवाई जारी है।

इससे पहले प्रशासन ने अहमद के करीबी जुल्फिकार उर्फ तोता पर भी शिकंजा कसा था। शूटर तोता के तीन मंजिला अवैध मकान को अक्टूबर 2020 में धूमनगंज के कंसारी मसारी में पीडीए में ध्वस्त किया गया था। इस मकान की कीमत करोड़ो में थी। जुल्फिकार का ये अवैध मकान करीब 300 वर्ग गज क्षेत्रफल में बना हुआ था, जिसका नक्शा उसने पास नहीं कराया था। वो फ़िलहाल जेल में बंद है।

अक्टूबर 2020 के अंतिम सप्ताह में खबर आई थी कि अतीक अहमद की अब तक 200 करोड़ रुपए से अधिक की सम्पत्तियों को जब्त किया जा चुका है। इसके साथ ही उसके कई गुर्गों के खिलाफ भी ऐसी ही कार्रवाई की गई है। उसके गुर्गों की 50 करोड़ रुपए की संपत्ति पर बुलडोजर चला है। इस तरह से कुल आँकड़ा 250 करोड़ रुपए हो जाता है। अभी कार्रवाई रुकी नहीं है और उसकी और सम्पत्तियों को नेस्तनाबूत किया जाना है।

MP में लव जिहाद के खिलाफ सख्त कानून बनाने जा रही शिवराज सरकार: दोषी को 5 साल तक की कठोर सजा

मध्य प्रदेश सरकार जल्द ही लव जिहाद पर कानून बनाने जा रही है। सरकार आगामी विधानसभा सत्र में धर्मांतरण और लव जिहाद के बढ़ते मामलों को रोकने के मकसद से मध्यप्रदेश धर्म स्वातंत्र्य कानून 2020 लाने की तैयारी में है। इस नए अधिनियम में जोर जबरदस्ती से धर्मांतरण कराने पर पाँच साल तक की सजा का प्रावधान हेागा।

मध्य प्रदेश के गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा ने मंगलवार (17 नवंबर, 2020) को यह बड़ा बयान दिया है। नरोत्तम मिश्र ने कहा कि जल्द ही हम विधानसभा में लव जिहाद के खिलाफ कानून लाएँगे। यह गैर-जमानती अपराध होगा। जिसमें दोषियों को 5 साल तक की सजा का प्रावधान होगा।

उन्होंने कहा कि आगामी विधानसभा सत्र में शिवराज सरकार लव जिहाद को लेकर फ्रीडम ऑफ रिलीजन बिल 2020 के लिए विधेयक पेश किया जाएगा और कानून बन जाने के बाद गैर जमानती धाराओं में केस दर्ज कर 5 साल तक की कठोर सजा दी जाएगी।

साभार:जी न्यूज

उन्होंने यह भी कहा कि लव जिहाद में किसी भी प्रकार से सहायता करने वालों को भी मुख्य आरोपित की ही तरह सज़ा दी जाएगी और शादी के लिए धर्मांतरण कराने वालों को भी सजा देने का प्रावधान इस कानून में रहेगा।

उन्होंने यह भी बताया कि कोई भी अपनी मर्जी से धर्मपरिवर्तन कर शादी नहीं कर सकता लेकिन अगर कोई स्वेच्छा से धर्म परिवर्तन कर शादी करना चाहता हो, तो इसके लिए सम्बंधित शख्स को एक महीने पहले कोर्ट में अर्जी लगानी पड़ेगी। वहीं, बिना आवेदन के अगर धर्मांतरण किया गया तो सख्त कार्रवाई की जाएगी।

राज्य के गृह मंत्री ने यह भी कहा कि अगर कोई जोर-जबरदस्ती, बलपूर्वक या धोखे से शादी करता है तो धोखे से पहचान छिपाकर की गई शादी को इस कानून के बाद रद्द माना जायेगा।

गौरतलब है कि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने पहले ही लव जिहाद के खिलाफ सख्त कानून बनाने की बात कही थी। बेटियों की सुरक्षा को मद्देनजर रखते हुए सीएम ने कहा था कि कि लव जिहाद के मामलों से सख्ती से निपटा जाएगा। साथ ही उन्होंने यह भी कहा था कि लव जिहाद के खिलाफ जो कानून बनाया जाना है उसका खाका तैयार कर लिया गया है। बता दें कि इससे पहले उत्तर प्रदेश की योगी सरकार लव जिहाद को लेकर कानून बनाने की बात कह चुके है।

‘J&K को वापस आतंक के काल में ले जाना चाहता है गुपकार गैंग, सोनिया-राहुल साफ करें स्टैंड’: अमित शाह

जम्मू कश्मीर में स्थानीय पार्टियों ने साथ मिल कर ‘गुपकार गठबंधन’ बनाया है और कॉन्ग्रेस भी उसके साथ जुड़ी है। अब केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने इस गठबंधन पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि जम्मू कश्मीर हमेशा से भारत का अभिन्न हिस्सा रहा है, जो अभी भी है और भविष्य में भी रहेगा। अमित शाह ने इसे गैंग बताते हुए कहा कि जनता इस ‘अपवित्र गठबंधन’ को बर्दाश्त नहीं करेगी, जो देश के हितों के खिलाफ काम करने में लगा हुआ है।

अमित शाह ने ट्विटर पर 3 ट्वीट्स कर के इस गठबंधन को आड़े हाथों लिया। उन्होंने लिखा कि या तो ‘गुपकार गैंग’ देश के मूड के हिसाब से चले, या फिर जनता इसकी नैया डुबो देगी। उन्होंने कॉन्ग्रेस और गुपकार गठबंधन पर आरोप लगाया कि वो जम्मू कश्मीर को उस काल में वापस लेकर जाना चाहते हैं, जब वहाँ सिर्फ आतंक और उथल-पुथल का साम्राज्य हुआ करता था। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार ने अनुच्छेद-370 के प्रावधानों को निरस्त कर दलितों, महिलाओं और आदिवासियों को अधिकार दिए हैं, उन्हें ये वापस छीनना चाहते हैं।

अमित शाह ने कहा कि यही कारण है, जिससे गुपकार गठबंधन और कॉन्ग्रेस को देश में हर जगह जनता द्वारा नकारा जा रहा है। उन्होंने लिखा कि अब ‘गुपकार गैंग’ वैश्विक हो गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि ये लोग चाहते हैं कि विदेशी ताकतें भारत के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप करें। उन्होंने ‘गुपकार गैंग’ पर भारत के राष्ट्रीय ध्वज तिरंगे के अपमान का भी आरोप लगाया। शाह ने कॉन्ग्रेस की सोनिया गाँधी और उनके बेटे राहुल गाँधी से पूछा कि क्या वो इन चीजों का समर्थन करते हैं?

उन्होंने कहा कि कॉन्ग्रेस की वर्तमान अध्यक्ष सोनिया गाँधी और पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी को अब इस मामले में अपना स्टैंड साफ़ कर देना चाहिए। एक अन्य केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने भी सोनिया-राहुल से पूछा था कि वो अनुच्छेद-370 पर फ़ारूक़ अब्दुल्लाह के साथ हैं या विरोध में? जम्मू कश्मीर में होने वाले पंचायती चुनाव में कॉन्ग्रेस द्वारा गुपकार के साथ हाथ मिलाने पर उन्होंने कहा कि ये लोग चीन से समर्थन माँग रहे हैं, क्या कॉन्ग्रेस इसके पक्ष में है?

अमित शाह ने गुपकार गठबंधन पर साधा निशाना

रविशंकर प्रसाद ने कहा कि जो लोग ये चाहते हैं कि अनुच्छेद-370 वापस आ जाए, वो यहाँ भ्रष्टाचार को जारी रहते देखना चाहते हैं। उन्होंने याद दिलाया कि कैसे पहले जम्मू कश्मीर की कोई ‘मुस्लिम बेटी’ राज्य से बाहर शादी करती थी तो उसे संपत्ति के अधिकार से बाहर कर दिया जाता था, जिसे मोदी सरकार ने बदला। उन्होंने आरोप लगाया कि अब फिर से जम्मू कश्मीर को संकीर्ण मानसिकता की तरफ ढकेलने का प्रयास हो रहा है।

इससे पहले भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता संबित पात्रा ने अनुच्छेद-370 को निरस्त किए जाने के फैसले के बारे में पूछा था कि ये निर्णय किसका है? साथ ही जवाब देते हुए कहा था कि ये पूरे देश का निर्णय है, क्योंकि भारत का कोई भी कानून लोकतंत्र के सर्वोच्च मंदिर संसद भवन में विचार-विमर्श के बाद ही बनता है। उन्होंने कहा था, ‘मै राहुल गाँधी और सोनिया जी से पूछता हूँ कि इस गठबंधन की एक पार्टी चीन के साथ अनुच्छेद 370 को वापस लाने की बात कहती है, वहीं महबूबा मुफ्ती तिरंगा नहीं उठाना चाहतीं।‘

‘बचपन से रामायण और महाभारत की कथाएँ सुनते हुए बड़ा हुआ हूँ, भारत से खास लगाव’: बराक ओबामा

अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा भारत में लगातार सुर्ख़ियों में हैं। अब बराक ओबामा ने बताया है कि उनका भारत से हमेशा से अच्छा जुड़ाव रहा है, क्योंकि उनका बचपन इंडोनेशिया में रामायण और महाभारत की कथाओं को सुनते हुए बीता है। उन्होंने बताया है कि वो ये दोनों हिन्दू धर्मग्रंथों की कथाएँ सुनते हुए बड़े हुए। उन्होंने अपनी पुस्तक ‘अ प्रॉमिस्ड लैंड’ में लिखा है कि भारत जनसंख्या के हिसाब से कितना विशाल राष्ट्र है।

उन्होंने इसमें भारत में हजारों संजातीय समुदाय के लोगों के एक साथ मिल कर रहने और 700 से अधिक भाषाएँ बोले जाने की चर्चा करते हुए इसे खास बताया है। हालाँकि, बतौर अमेरिकी राष्ट्रपति 2010 में भारत आने से पहले कभी उन्होंने यहाँ का दौरा तो नहीं किया था, लेकिन उन्होंने लिखा कि उनके मन में हमेशा से भारत को लेकर एक खास जगह थी। वो इसके बारे में सोचा करते थे। यहाँ आने की इच्छा रखते थे।

8 साल तक अमेरिका के राष्ट्रपति रहे बराक ओबामा ने लिखा कि हो सकता है कि ये सब इसीलिए हुआ होगा क्योंकि अपने बचपन के दिनों में वो इंडोनेशिया में रामायण एवं महाभारत की कथाएँ सुनते हुए बड़े हुए थे और पूर्वी धर्मों के प्रति हमेशा से उनकी रुचि रही है। उन्होंने बताया कि भारत और पाकिस्तान के रहने वाले उनके कई दोस्त थे जो उन्हें दाल और कीमा बनाना सिखाते थे। इसी दौरान उन्होंने बॉलीवुड की फ़िल्में देखनी भी शुरू कर दी थी।

अपनी पुस्तक ‘A Promised Land’ में बराक ओबामा ने 2008 में बतौर राष्ट्रपति उम्मीदवार अपने चुनावी अभियान से लेकर पाकिस्तान के एबटाबाद में खूँखार आतंकी संगठन अलकायदा के संस्थापक ओसामा बिन लादेन को मार गिराने तक के सफर का ब्यौरा दिया है। अभी इसका पहला भाग ही प्रकाशित हुआ है। मंगलवार (नवंबर 10, 2020) को ये दुकानों में उपलब्ध कराया गया। अब इसका दूसरा भाग आएगा।

इसी पुस्तक में ओबामा ने वायनाड के सांसद राहुल गाँधी के लिए लिखा है, “उनमें एक ऐसे ‘घबराए हुए और अनगढ़ (Unformed- जो तराशा न गया हो)’ छात्र के गुण हैं, जिसने अपना पूरा पाठ्यक्रम पूरा कर लिया है और वह अपने शिक्षक को प्रभावित करने की चाहत रखता है, लेकिन उसमें ‘विषय में महारत हासिल’ करने की योग्यता या फिर जूनून की कमी है।” इसके बाद कॉन्ग्रेस नेताओं व समर्थकों ने उनकी खासी आलोचना की।

तेलंगाना HC ने वक्फ बोर्ड के CEO को पाया कब्रिस्तान के अतिक्रमण में शामिल होने का दोषी: दिया निष्कासन का आदेश

तेलंगाना उच्च न्यायालय ने सोमवार (नवंबर 17, 2020) को वक्फ बोर्ड की निंदा करते हुए राज्य सरकार से तेलंगाना वक्फ बोर्ड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) को तत्काल बर्खास्त करने का आदेश दिया। अदालत ने सरकार को उनकी जगह पर एक ऐसे अधिकारी को नियुक्त करने के लिए कहा जो इन संपत्तियों की रक्षा कर सके।

आरोप है कि उन्हें भारतीय आपराधिक संहिता प्रक्रिया (सीआरपीसी) के प्रावधानों की जानकारी नहीं थी वक्फ संपत्तियों के अतिक्रमण के मामले में वह भी शामिल थे। टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, चीफ जस्टिस राघवेंद्र सिंह चौहान और जस्टिस बी विजयसेन रेड्डी की खंडपीठ ने यह आदेश तब दिया जब वक्फ बोर्ड के सीईओ मोहम्मद कासिम ने कहा कि उन्हें सीआरपीसी के प्रावधानों की जानकारी नहीं है।

मोहम्मद कासिम ने अदालत से कहा कि उन्होंने सीआरपीसी के प्रावधानों को नहीं पढ़ा था। बता दें कि इस प्रावधान का इस्तेमाल वक्फ संपत्तियों को अतिक्रमणकारियों से बचाने के लिए किया जा सकता है। अदालस ने कासिम से पूछा कि उन्होंने वक्फ बोर्ड की संपत्तियों को अतिक्रमणकारियों से बचाने के लिए वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों से संपर्क क्यों नहीं किया?

दरअसल, हैदराबाद में मुस्लिम कब्रिस्तानों को अतिक्रमणकारियों से बचाने के लिए कोर्ट में तीन याचिकाएँ डाली गई थी, जिस पर सुनवाई करते हुए अदालत ने कहा, “वह अतिक्रमणकारियों के साथ मिले हुए हैं।” टीओआई ने जुलाई में बताया था कि राज्य में वक्फ के स्वामित्व वाली जमीन की कीमत लगभग 1 लाख करोड़ रुपए है।

न्यायाधीशों ने कासिम से अतिक्रमित संपत्तियों पर कई सवाल पूछे, लेकिन उनका एक ही जवाब था कि पुलिस ये कहते हुए एफआईआर दर्ज करने से इनकार कर दिया कि ये नागरिक विवाद हैं, जिसमें पुलिस के हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं है। इससे इतर पीठ ने अपनी रिपोर्ट में पाया कि हैदराबाद में 86 मुस्लिम कब्रिस्तानों का अतिक्रमण किया गया है, जबकि बोर्ड ने केवल पाँच मामलों में एफआईआर दर्ज करवाया था।

न्यायाधीशों ने कहा कि अगर स्टेशन हाउस अधिकारी ने मामला दर्ज करने से इनकार कर दिया, तो सीईओ को पुलिस अधीक्षक से संपर्क करना चाहिए था, जिस पर कासिम ने कहा कि उन्होंने सीआरपीसी नहीं पढ़ा है। इस पर पीठ ने आश्चर्य व्यक्त किया और उसे हटाने का आदेश दिया।

मुख्य न्यायाधीश ने कहा, “मैं कासिम के रवैये से हैरान हूँ। उसे उसके पद से मुक्त करो। वह अल्लाह के संपत्तियों की रक्षा कैसे कर सकता है? हैदराबाद में कई वक्फ संपत्तियाँ हैं। यह सीईओ उनमें से कई की रक्षा करने में विफल रहा है। राज्य को कासिम द्वारा कर्तव्य के प्रादुर्भाव के बारे में गंभीरता से विचार करना चाहिए।”