केंद्रीय जाँच एजेंसी सीबीआई ने आज (अक्टूबर 25, 2020) मुंबई के एक टीवी कलाकार के ख़िलाफ़ मामला दर्ज किया है। आरोपित कलाकार के ऊपर विदेशी नाबालिग बच्चों की यौन संबंधी सामग्री विदेशों में बेचने का आरोप है।
सीबीआई ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चल रहे रैकेट का भंडाफोड़ करके आरोपित के ख़िलाफ़ मुकदमा दायर किया। अधिकारियों ने यह भी बताया कि वह इंस्टाग्राम पर बच्चों को धमका कर या उन्हें उकसा कर ऐसी सामग्री प्राप्त करता था।
अधिकारियों का कहना है कि कथित कलाकार ने अमेरिका, यूरोप व साउथ एशिया के 10 से 16 साल के 1000 से ज्यादा बच्चों को संपर्क किया था। वह इन बच्चों से इंस्टाग्राम पर तस्वीरें माँगता था।
#Mumbai man posed as film star to lure minors online, sold child porn to international ‘clients’: CBIhttps://t.co/4LPlOXGC5I
हाल में एजेंसी ने आरोपित के आवास की तलाश की। उसने दावा किया कि वह टीवी सीरियल्स में जूनियर कलाकर है। सीबीआई ने पड़ताल में उसके घर से उसका मोबाइल फोन व लैपटॉप जब्त कर लिया।
इन सभी डिवाइस के फॉरेंसिक जाँच में ऑनलाइन यौन शोषण से संबंधित सामग्री मिली है, जिन्हें आरोपित ने बाद में अपने ग्राहकों को व्हाट्सएप और अन्य प्लेटफॉर्मों के जरिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भेजने का काम किया।
अभी तक की जाँच में पता चला है कि आरोपित मूल रूप से हरिद्वार का रहने वाला है। वह बच्चों को अपनी पहचान फिल्म स्टार के रूप में बताता था व ऑनलाइन उनके साथ रिलेशन बनाने का नाटक करता था, फिर उनसे उनकी आपत्तिजनक तस्वीरें व वीडियो माँगता था।
आरोपित विदेश के बच्चों को फँसाने के लिए उनके व्हॉट्सएप नंबर माँगता था और वीडियो कॉल्स पर उन्हें sexual acts करने को कहता था, जिसे बाद में वह अपने क्लाइंट्स के साथ शेयर करता था। अगर बाद में कोई पीड़ित उसकी बातें नहीं सुनता था या उससे संपर्क नहीं रखता था तो वह उन्हें धमकी देता था कि उनकी तस्वीरें उनके परिवार के साथ साझा कर देगा।
सीबीआई ने आरोपित कलाकार के ऊपर पॉक्सो एक्ट व आईटी एक्ट के तहत मामला दर्ज किया है। इसके अलावा पुलिस ने एक अन्य को भी इसी आरोप में गिरफ्तार किया है। वह टेलीग्राम के जरिए 250 रुपए में बच्चों की यौन संबंधित सामग्री बेचता था।
बिहार विधानसभा चुनाव अपने चरम पर जाता दिख रहा है। सभी दलों के नेता कोरोना संकट के बावजूद अपने-अपने दलों के प्रचार में जुटे हुए हैं। वहीं हर पार्टी जीत हासिल करने के लिए तरह-तरह के हथकंडे आजमा रही है। इसी बीच डिप्टी सीएम सुशील मोदी ने लालू यादव पर अंधविश्वासी और तंत्र-मंत्र करने का आरोप लगाया है।
सुशील मोदी ने बताया है कि आरजेडी के सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव राँची के केली बंगले में तीन बकरों की बलि देने वाले हैं। उन्होंने कहा कि लालू को जनता पर भरोसा नहीं, इसलिए वे तंत्र-मंत्र, पशुबलि और प्रेत साधना जैसे कर्म-कांड कराते रहे हैं। शनिवार को किए गए उनके इस ट्वीट से बिहार में सियासी माहौल गर्म हो गया है।
चारा घोटाला में सजायाफ्ता लालू प्रसाद बिहार विधानसभा चुनाव के पहले रांची के केली बंगले में जेल मैन्युअल की धज्जी उड़ाते हुए नवमी के दिन तीन बकरों की बलि देने वाले हैं। उन्हें आभास हो चुका है कि हाशिये पर पड़े कुछ दलों से गठबंधन और बड़बोले वादे पार्टी की नैया पार नहीं लगा सकते।
यही नहीं, लालू पर हमला बोलते हुए सुशील मोदी ने ताबड़तोड़ कई ट्वीट्स किए। उन्होंने चुनाव को मद्देनजर रखते हुए ट्वीट करते हुए लिखा, “चारा घोटाला में सजायाफ्ता लालू प्रसाद बिहार विधानसभा चुनाव से पहले राँची के केली बंगले में जेल मैन्युअल की धज्जियाँ उड़ाते हुए नवमी के दिन 3 बकरों की बलि देने वाले हैं। उन्हें आभास हो चुका है कि हाशिए पर पड़े कुछ दलों से गठबंधन और बड़बोले वादे पार्टी की नैया पार नहीं लगा सकते।”
उन्होंने आगे लिखा, “लालू प्रसाद को जनता पर भरोसा नहीं, इसलिए वे तंत्र-मंत्र, पशुबलि और प्रेत साधना जैसे कर्मकांड कराते रहे। इसके बावजूद वे न जेल जाने से बचे, न सत्ता बचा पाए। वे अभी 14 साल जेल में ही काट सकते हैं।”
लालू प्रसाद को जनता पर भरोसा नहीं, इसलिए वे तंत्र-मंत्र, पशुबलि और प्रेत साधना जैसे कर्मकांड कराते रहे। इसके बावजूद वे न जेल जाने से बचे, न सत्ता बचा पाये। वे अभी 14 साल जेल में ही काट सकते हैं।
उन्होंने कहा, “लालू प्रसाद इतने अंधविश्वासी हैं कि उन्होंने न केवल तांत्रिक के कहने पर सफेद कुर्ता पहनना छोड़ा, बल्कि तांत्रिक शंकर चरण त्रिपाठी को पार्टी का राष्ट्रीय प्रवक्ता बना दिया।”
लालू प्रसाद इतने अंधविश्वासी हैं कि उन्होंने न केवल तांत्रिक के कहने पर सफेद कुर्ता पहनना छोड़ा, बल्कि तांत्रिक शंकर चरण त्रिपाठी को पार्टी का राष्ट्रीय प्रवक्ता बना दिया।
लालू प्रसाद पर तंत्र विद्या से मारने का आरोप लगाते हुए उपमुख्यमंत्री ने लिखा, “उसी तांत्रिक ने विंध्याचल धाम (मिर्जापुर) में लालू प्रसाद से तांत्रिक पूजा कराई थी। वे तीन साल पहले मुझे मारने के लिए भी तंत्रिक अनुष्ठान करा चुके हैं।”
उसी तांत्रिक ने विंध्याचल धाम( मिर्जापुर) में लालू प्रसाद से तांत्रिक पूजा करायी थी। वे तीन साल पहले मुझे मारने के लिए भी तंत्रिक अनुष्ठान करा चुके हैं।
11 साल पुरानी घटना का जिक्र करते हुए सुशील मोदी ने कहा, “2009 में पूर्ण सूर्य ग्रहण देखने तारेगना पहुँचे मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने जब ग्रहण के समय बिस्कुट खा लिए, तब अंधविश्वासी लालू प्रसाद ने कहा था कि इससे अकाल पड़ेगा। इसके विपरीत बिहार में एनडीए शासन के दौरान कृषि पैदावार बढ़ी।”
2009 में पूर्ण सूर्य ग्रहण देखने तारेगना पहुँचे मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने जब ग्रहण के समय बिस्कुट खा लिये, तब अंधविश्वासी लालू प्रसाद ने कहा था कि इससे अकाल पड़ेगा। इसके विपरीत बिहार में एनडीए शासन के दौरान कृषि पैदावार बढ़ी।
लालू राज के खात्मे पर सुशील मोदी ने कहा, “2005 में जब जनता ने लालू-राबड़ी के कुशासन को खारिज कर दिया, तब लालू प्रसाद ने मुख्यमंत्री आवास छोड़ने में डेढ़ महीने लगा दिए थे और बाद में कहा कि वे आवास की दीवार में ऐसी तंत्रसिद्ध पुड़िया रख आए हैं कि अब कोई वहाँ नहीं टिक पाएगा।” उन्होंने कहा, “उसी आवास में रहते हुए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार 15 साल से बिहार की सेवा कर रहे हैं और राज्य विकास की मंजिलें तय कर रहा है।”
2005 में जब जनता ने लालू-राबड़ी के कुशासन को खारिज कर दिया, तब लालू प्रसाद ने मुख्यमंत्री आवास छोड़ने में डेढ़ महीने लगा दिये थे और बाद में कहा कि वे अावास की दीवार में ऐसी तंत्रसिद्ध पुड़िया रख आये हैं कि अब कोई वहां नहीं टिक पाएगा।
सुशील मोदी ने अपने एक अन्य ट्वीट में कहा, “26 मई, 2014 को बीजेपी के शीर्ष नेता नरेंद्र दामोदर दास मोदी ने जब प्रधानमंत्री पद की शपथ ली, तब लालू प्रसाद ने शपथ ग्रहण के मुहूर्त बेला को अशुभ बता दिया और कहा कि सरकार पाँच साल नहीं चलेगी।”
26 मई, 2014 को भाजपा के शीर्ष नेता नरेंद्र दामोदर दास मोदी ने जब प्रधानमंत्री पद की शपथ ली, तब लालू प्रसाद ने शपथ ग्रहण के मुहूर्त गोधूलि बेला को अशुभ बता दिया और कहा कि सरकार पांच साल नहीं चलेगी।
पीएम मोदी के काम की प्रशंसा करते हुए सुशील मोदी ने लिखा, “प्रधानमंत्री मोदी ने न केवल भारतीय राजनीति का परिदृश्य बदला, बल्कि भ्रष्टाचार-मुक्त सरकार चलाई, जनता को जन-धन खाते दिए, नौ करोड़ गरीबों को मुफ्त गैस कनेक्शन दिए और सर्जिकल स्ट्राइक से पाकिस्तान को मुँहतोड़ जवाब भी दिया।”
प्रधानमंत्री मोदी ने न केवल भारतीय राजनीति का परिदृश्य बदला, बल्कि भ्रष्टाचार-मुक्त सरकार चलायी, जनता को जन-धन खाते दिये, नौ करोड़ गरीबों को मुफ्त गैस कनेक्शन दिये और सर्जिकल स्ट्राइक से पाकिस्तान को मुँहतोड़ जवाब भी दिया।
वहीं लालू प्रसाद के अंधविश्वास के ढकोसले को लताड़ते हुए उन्होंने कहा, “तंत्र-मंत्र के अंधभक्त लालू प्रसाद जिस मोदी सरकार के बीच में गिरने के साथ देश में अस्थिरता की कुटिल कामना कर रहे थे, उसने विश्व में भारत का मान बढ़ाया और जनता के अपार समर्थन से शानदार वापसी भी की। देवी-देवता किसी की कुटिल कामना को सफल नहीं बनाते।”
तंत्र-मंत्र के अंधभक्त लालू प्रसाद जिस मोदी- सरकार के बीेच में गिरने के साथ देश में अस्थिरता की कुटिल कामना कर रहे थे, उसने विश्व में भारत का मान बढ़ाया और जनता के अपार समर्थन से शानदार वापसी भी की। देवी-देवता किसी की कुटिल कामना को सफल नहीं बनाते।
बॉलीवुड एक्ट्रेस कंगना रनौत और शिवसेना के बीच चले घमासान के दौरान एक बार वो हिमाचल से मुंबई लौट रही थीं। सुर्खियों में चल रहे इस विवाद को कवर कर रहे कई मीडियाकर्मी भी पल-पल की खबर देने के लिए इंडिगो (Indigo) की उनकी फ्लाइट में बैठ गए थे। जिस वजह से फ्लाइट में काफी अफरा तफरी मची। वहीं अब इंडिगो ने इस फ्लाइट में सवार 9 मीडियाकर्मियों पर 15 दिन की यात्रा का प्रतिबंध लगा दिया है।
एयरलाइन कंपनी इंडिगो की एक आंतरिक कमेटी की सिफारिश के बाद इन पत्रकारों को 15 से 30 अक्टूबर तक बैन किया गया है। इंडिगो के अनुसार इन लोगों का व्यवहार फ्लाइट में अच्छा नहीं था। यह एयरलाइंस के नियमों के विरुद्ध है। 9 सितंबर को इंडिगो की एक फ्लाइट में कई पत्रकारों के कथित उपद्रवी व्यवहार के बाद यह कमेटी इस मामले को देख रही थी।
डायरेक्टर जनरल ऑफ सिविल एविएशन (DGCA) ने इंडिगो से 9 सितंबर की घटना का संज्ञान लेते हुए इस सिलसिले में कार्रवाई करने के निर्देश दिए थे। डीजीसीए ने विमानन कंपनी को कहा था कि चंडीगढ़ से मुंबई जा रही फ्लाइट में हंगामा करने वाले लोगों के खिलाफ उचित कार्रवाई की जाए। कंगना इंडिगो की फ्लाइट संख्या 6E-264 में पहली रो में बैठी थीं। विमान में सवार मीडियाकर्मी इस दौरान उनकी बाइट लेने के लिए मानो टूट पड़े थे।
DGCA के इस आदेश के बाद इंडिगो ने रेगुलेटर को एक रिपोर्ट सौंपी थी, जिसमें कहा गया कि कंपनी के क्रू ने सभी जरूरी प्रोटोकॉल फॉलो किया था। इस प्रोटोकॉल में फोटोग्राफी न करने, सोशल डिस्टेंसिंग का ध्यान रखने और ओवरऑल सेफ्टी बनाए रखने का अनाउंसमेंट शामिल था। डीजीसीए ने कहा कि अब यात्री ऐसा कोई डिवाइस इस्तेमाल नहीं कर सकते, जिससे भीड़-भाड़ हो, लोगों की सुरक्षा को खतरा हो या फ्लाइट खतरे में पड़ जाए।
साल 1936 में जर्मनी की नाज़ी सेना ने एडोल्फ़ हिटलर की अगुवाई में ओलम्पिक (समर) खेलों की मेजबानी की थी। इस आयोजन को लगभग 80 वर्ष बीत चुके हैं लेकिन आज भी उसे स्वप्रचार के लिए इस्तेमाल किए गए सबसे बड़े अंतरराष्ट्रीय आयोजनों में से एक माना जाता है। हालाँकि उन खेलों के आयोजन का उद्देश्य यह था कि अलग-अलग देश के खिलाड़ियों के बीच खेल भावना विकसित हो।
इन सारी बातों के विपरीत हिटलर ने इसे ‘नए जर्मनी’ का प्रोपेगेंडा फैलाने का माध्यम बना लिया था। अब इस कड़ी में तमाम सामाजिक कार्यकर्ताओं का अनुमान है कि शी जिनपिंग 2022 के दौरान बीजिंग में होने वाले ओलम्पिक (विंटर) का उपयोग भी कुछ इस तरह कर सकते हैं।
ट्विटर पर ट्रेंड कर रहा #MoveTheGames
ट्विटर पर एक हैशटैग ट्रेंड कर रहा है #MoveTheGames और लोग इसके तहत आयोजकों से माँग कर रहे हैं कि 2022 में होने वाले ओलम्पिक का स्थान बदल दिया जाए, उसे चीन की जगह कहीं और आयोजित कराया जाए। 6 अक्टूबर को ब्रिटेन ने इस बात का ऐलान किया कि अगर इस बात के और सबूत सामने आते हैं कि चीन में उइगरों के मानवाधिकारों का हनन होता है तो वह 2022 के विंटर ओलम्पिक का बहिष्कार कर सकता है।
इस मुद्दे पर ट्वीट करते हुए विदेश सचिव डोमिनिक राब ने लिखा, “आम तौर पर कहूँ तो मेरा अनुमान कहता है कि खेल को कूटनीति और राजनीति से अलग रखना चाहिए लेकिन कभी-कभी हालात ऐसे होते हैं, जब ऐसा करना संभव नहीं होता है।”
When CCP continues using hostage diplomacy and arbitrary detention of foreign citizens, how could we risk our athletes’ safety by sending them to China ?? for 2022 Beijing @Olympics? @iocmedia, how can you possibly protect athletes in a totalitarian country? #MoveTheGames
— Natalie Hui ?? #FreeCanadianMichaels (@NH4HumanRights) October 25, 2020
हाल फ़िलहाल के कई मुद्दों पर चीन को लेकर पूरे विश्व में विरोध काफी बड़े पैमाने पर बढ़ा है। विकासशील देशों की चीज़ों पर कब्ज़ा करने के लिए उन्हें क़र्ज़ देने से लेकर, तकनीक के माध्यम से दुनिया भर के तमाम प्रशासनिक अधिकारियों की जासूसी करने तक, चीन का नाम कई नकारात्मक कार्यों में सामने आया है। इसके अलावा जिस तरह चीन के वुहान से कोरोना वायरस की शुरुआत हुई और उससे पूरी दुनिया में इतने बड़े पैमाने पर लोग प्रभावित हुए, इसके चलते भी दुनिया के तमाम देशों ने चीन और चीन की बनाई चीज़ों का बहिष्कार किया।
भारत चीन सीमा पर दोनों देशों की सेनाओं के बीच विवाद होने पर भारत सरकार ने लगभग 300 से अधिक चीनी एप्लीकेशन पर प्रतिबंध लगा दिया था और चीनी समूहों के साथ समझौते रद्द कर दिए थे। इस कड़ी में अमेरिका ने भी चीन के विरुद्ध ट्रेड वॉर छेड़ दिया है। दुनिया सहित यूरोप के तमाम देशों ने चीन के दूरसंचार समूह हुआवे और ज़ेटीई (5जी प्रोजेक्ट) पर पाबंदी लगा दी।
हिटलर और जिनपिंग के बीच समानताएँ
अगर किसी में भी इतिहास के सबसे आततायी तानाशाह से मिलती-जुलती बातें मौजूद हैं, तब ज़िम्मेदार देशों को किसी भी तरह के युद्ध को रोकने के लिए ज़रूरी कदम उठाने चाहिए। बेंजमिन फ्रेंकलिन ने किसी ज़माने में कहा था, “ग्लास, चीन और छवि बड़ी आसानी से बिगड़ जाते हैं और फिर इनमें सुधार नहीं किया जा सकता है।”
चीन ने अपनी वैश्विक शक्ति का उपयोग करके दुनिया के अनेक देशों की तकनीकी और उद्योग खरीद लिया है या उसकी नक़ल की है। खुद को वैश्विक शक्ति घोषित करने की होड़ में चीन ने हर उस आवाज़ को दबाने का प्रयास किया है, जो उसके विरोध में उठाई गई। कुछ जानकारों का यहाँ तक कहना है कि जिनपिंग माओ से आगे निकल चुके हैं और अब हिटलर के समानांतर हैं।
हरियाणा के मेवात में एक बार फिर से हिंदुओं की भावनाओं को ठेस पहुँचाने का प्रयास हुआ है। खबर है कि नवरात्र के पावन अवसर पर मेवात के नगीना खंड के माँडीखेड़ा गाँव में दुर्गा माता की मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा की गई थी मगर मात्र दो ही दिन में मंदिर की मूर्ति को तोड़ दिया गया। दुर्गा माँ के मंदिर में अब मूर्ति की जगह सिर्फ़ शेर के पंजे बचे हैं।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि पहले भी इस तरह की घटनाएँ होती आई हैं और मंदिर से कुछ दूरी पर बने मदरसे के मौलवी के इशारों पर यह काम किया गया। हालाँकि, पुलिस की मानें तो पूरे मामले में अज्ञात लोगों के ख़िलाफ़ मामला दर्ज हुआ है।
मूर्ति चोरी के बाद मंदिर के पास इकट्ठा हुई भीड़
ऑपइंडिया को प्राप्त जानकारी के मुताबिक, यह घटना 19 अक्टूबर की रात की है। नवरात्र के पहले दिन यानी, 17 अक्टूबर को मंदिर में मूर्ति की स्थापना हुई थी। सभी लोगों ने पूजा-पाठ के लिए मंदिर को सजाया था। लेकिन नवरात्र दिन पता चला कि मूर्ति वहाँ से गायब है।
मूर्ति चोरी के बाद गठित हुए 11 सदस्यों की पंचायत समिति
माता की मूर्ति को टूटी देख हिंदू समुदाय के लोग आक्रोशित हैं। उन्होंने मामले में एफआईआर दर्ज करवाई और जल्द से जल्द कार्रवाई करने की माँग की है। इस केस में 20 अक्टूबर को एक 11 सदस्य पंचायत समिति का गठन भी हुआ।
इस समिति के ही एक सदस्य धर्मपाल आर्या से ऑपइंडिया का संपर्क हुआ। उन्होंने पूरे मामले की पुष्टि करते हुए कहा कि माँडीखेड़ा गाँव में 19 अक्टूबर की रात्रि यह घटना हुई। कुछ अज्ञात लोग मंदिर का ताला तोड़ कर मूर्ति को खंडित कर दिया। घटना को 5 दिन बीत गए हैं मगर आरोपितों का अभी तक कुछ पता नहीं है। किसी पर कोई कार्रवाई भी नहीं हुई है।
वह बताते हैं कि गाँव में अल्पसंख्यक आबादी में हिंदू कुछ बोल नहीं पाते हैं। मगर उन्हें अपनी बैठक में पता चला है कि मंदिर से थोड़ी दूर पर एक मदरसा है। कुछ लोग उसी मदरसे को शक की निगाह से देख रहे हैं।
मंदिर और उसके भीतर की तस्वीर
उनका कहना है कि जब मंदिर की चारदीवारी करवाई गई थी या इससे पहले जब मूर्ति स्थापित हुई थी तब भी ऐसी घटनाएँ सामने आई थीं, इसलिए संभावना है कि उसी (मदरसे का रोल इस बार भी) का हाथ हो।
धर्मपाल के अनुसार, यह मंदिर बहुत पुराना है, लेकिन साल 2016 में एक ऐसी ही घटना घटी थी, तब लोगों ने आपस में बात करके समझौता कर लिया था और माफी भी माँगी गई थी। इस घटना में मुस्लिम समाज ने हिंदुओं के सामने घटना का खेद प्रकट किया था। उन्हें आश्वासन दिया था कि दोबारा ऐसी घटनाएँ नहीं होंगी।
इसी के बाद इस मंदिर पर चारदीवारी करवाई गई और मूर्ति की इन नवरात्रियों में प्राण प्रतिष्ठा हुई, लेकिन फिर दो दिन बाद यह घटना हो गई। अब समाज के लोगों का कहना है कि वह पुलिस कार्रवाई से संतुष्ट नहीं है क्योंकि मामले में ढुलमुल रवैया अपनाया जा रहा है।
पेशे से पत्रकार और समिति के सदस्य धर्मपाल की मानें तो इस पूरे केस में हिंदू संगठनों में भी काफी नाराजगी है। उन्होंने कहा है कि यदि मामला नहीं सुलझता तो फिर उन्हें सड़कों पर उतरने को मजबूर होना पड़ेगा।
स्थानीय लोगों का क्या कहना है?
इसी प्रकार एक अन्य स्थानीय का कहना है कि पुलिस ने उन्हें इस मामले में कार्रवाई का आश्वासन दिया है, लेकिन उनके लिए बात केवल आश्वासन की नहीं है। यदि यह घटना दूसरे पक्ष के साथ हो गई होती, तो अभी तक पूरा मेवात बंद हो जाता।
घटना के बाद मंदिर के पास मौजूद लोगों की एक वीडियो भी सामने आई है। पत्रकार गौरव मिश्रा ने इस वीडियो को शेयर करते हुए बताया कि मेवात के माँडीखेड़ा गाँव के मंदिर में ‘शांतिदूतों’ ने नवरात्र की पूजा नहीं होने दी। जो मूर्ति स्थापित की गई थी, उसे भी ‘शांतिदूतों’ ने तोड़ दिया और मंदिर का गेट भी तोड़ दिया। उन्होंने लिखा कि पथरावी मंदिर से स्थापित देवी माँ की प्रतिमा को तोड़ डाला गया।
#मेवात के मांडीखेड़ा गांव के मंदिर में शांतिदूतों ने नही होने दी नवरात्री की पूजा मूर्ती स्थापित की गई थी, लेकिन #शांतिदूतों उसे वहां से चोरी कर लिया,मंदिर का गेट भी तोड़ा,पथवारी मंदिर से स्थापित देवी माँ की प्रतिमा को तोड़ कर ले गए अपने साथ।#save_mevati_hindupic.twitter.com/WMYgSx7RLE
— Gaurav Mishra गौरव मिश्रा ?? (@gauravstvnews) October 24, 2020
इस वीडियो में देख सकते हैं कि मंदिर के सामने कुछ लोग खड़े हैं। वह कहते हैं कि उनके मंदिर को दूसरी बार तोड़ा गया है। पहली बार में जब उन लोगों ने कुछ नहीं कहा तो दूसरी बार भी उनके साथ ऐसा हुआ। दूसरा व्याक्ति वीडियो में कहते सुना जा सकता है कि ये लोग जानबूझकर ऐसा काम करते हैं और फिर बच्चों का नाम लगा दिया जाता है।
घटनास्थल पर पहुँची पुलिस
वीडियो में व्यक्ति स्पष्ट रूप से कहता है कि मदरसे वाला जो मुफ्ती है, वो आस-पास के लोगों को इकट्ठा करके यह काम करवाता है। 17 अक्टूबर को मूर्ति आई थी और अब इसे तोड़ दिया गया। ये लोग हिंदू धर्म को भंग कर रहे हैं। कल को कुछ और भी करेंगे। लोगों की माँग है कि प्रशासन इस मामले पर कार्रवाई करे और उन्हें न्याय दिलाए।
एक अन्य वीडियो भी इस केस में सामने आई है, इसमें कहता सुना जा सकता है कि मंदिर में सिर्फ़ शेर के पंजे बचे हैं और उत्पाती बाकी पूरी मूर्ति को तोड़ दिए।
पुलिस कार्रवाई
ऑपइंडिया ने इस मामले में कार्रवाई संबंधी जानकारी के लिए नगीना थाने के एसएचओ रमेश चंद से बात की। उन्होंने मंदिर में तोड़फोड़ की बात को नकारा और कहा कि मंदिर से मूर्ति की चोरी हुई है। इस मामले में एफआईआर दर्ज है और पूरे मामले की तफ्तीश की जा रही है। अभी तक कोई भी व्यक्ति हिरासत में नहीं लिया गया है। मगर, जल्द से जल्द इस मामले के निष्कर्ष में पहुँचा जाएगा। साल 2016 में मंदिर पर हुए हमले की बात को भी एसएचओ ने ऑन रिकॉर्ड होने से मना किया। उन्होंने कहा कि उनके नोटिस में बस हालिया मामला है।
गौरतलब है कि पिछले दिनों हरियाणा का मेवात दलितों पर अत्याचार के कारण चर्चा में आया था और अब भी वहाँ हिंदू के साथ भेदभाव की घटनाएँ थमी नहीं है। पिछले दिनों नगीना थाने के उलेटा गाँव में ही एक दलित परिवार बहुसंख्यक आबादी की बर्बरता का शिकार हुआ था। राहुल नाम के दलित लड़के के सिर पर धारदार फरसा मार कर कहा गया था कि अगर गाँव में रहना है तो उनकी जूती के नीचे रहना होगा। इस मामले पर भी पुलिस का आज भी यही कहना है कि मामले में जाँच चल रही है।
उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर की सांसद और अपना दल (सोनेलाल) की अध्यक्ष अनुप्रिया पटेल ने अमेज़न प्राइम वीडियो की वेब सीरीज ‘मिर्जापुर’ को लेकर आपत्ति जताई है। पूर्व केंद्रीय मंत्री ने कहा कि इस वेब सीरीज के जरिए इस क्षेत्र को हिंसक बताते हुए इसे बदनाम किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में मिर्जापुर विकास के पथ पर अग्रसर है।
पूर्व केंद्रीय मंत्री अनुप्रिया पटेल ने कहा कि मिर्जापुर समरसता का केंद्र है, लेकिन जिले के नाम पर वेब सीरीज बना कर जातीय वैमनस्य फैलाया जा रहा है। बता दें कि ‘मिर्जापुर’ में यूपी की सीएम बनने से पहले माधुरी नामक किरदार एक डायलॉग बोलती है कि वो यादव की बेटी है और ब्राह्मण परिवार की बहू, इसीलिए उनके पार्टी को संभालने से इन दोनों ही जातियों में अच्छा सन्देश जाएगा। फिल्म में सारे गुंडे-बदमाशों को ब्राह्मण ही दिखाया गया है।
सांसद ने कहा कि मिर्जापुर लोकसभा क्षेत्र की सांसद होने के नाते वो माँग करती हैं कि इस वेब सीरीज की जाँच होनी चाहिए और इसके विरुद्ध कार्रवाई की जानी चाहिए। मिर्जापुर में ‘अपना दल’ के कई अन्य नेता भी वेब सीरीज में इलाके का नाम खराब किए जाने को लेकर खफा हैं। फ़िलहाल यहाँ से विंध्यवासिनी मंदिर के वरिष्ठ पुजारी रत्नाकर मिश्रा भाजपा से विधायक हैं, जिन्हें पार्टी ने बिहार चुनावों में लगा रखा है।
‘अमेज़न प्राइम वीडियोज’ ने बृहस्पतिवार (अक्टूबर 22, 2020) को अपनी बहुचर्चित वेब सीरीज ‘मिर्जापुर’ का दूसरा सीजन 10 एपिसोड्स के साथ लाइव किया था। इसे तय समय से 3 घंटे पहले ही लाइव किया गया। इसमें अली फजल और दिव्येंदु शर्मा मुख्य किरदारों में हैं लेकिन दूसरे सीजन को कालीन भइया यानी, पंकज त्रिपाठी के नाम पर ही बेचा गया। सीजन-2 में विजय वर्मा को 2 जुड़वाँ किरदारों के रूप में एंट्री दी है, जो ‘बिहार के गुंडे’ होते हैं।
पहले सीजन की तरह ‘मिर्जापुर’ का दूसरा सीजन भी गालियों से भरा पड़ा है, जहाँ गालियाँ न सिर्फ गुस्से में दी जाती है, बल्कि ये भी दिखाया गया है कि यूपी-बिहार के युवक आपस में बातचीत करते हुए मजाक में भी एक-दूसरे के माँ-बाप और परिवार को माँ-बहन की गालियाँ बकते हैं। अश्लीलता के प्रदर्शन में भी कोई कमी नहीं रखी गई है। हाँ, ‘वफादार’ मुस्लिम किरदारों का महिमामंडन ज़रूर जारी रखा गया है।
आजकल लालू यादव के दोनों बेटे तेजस्वी और तेज प्रताप बिहार में होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए प्रचार अभियान में लगे हुए हैं। तेजस्वी यादव अपने पिता की अनुपस्थिति में महागठबंधन के मुख्यमंत्री उम्मीदवार हैं और तेज प्रताप भी अपने पिता की स्टाइल में कैम्पेनिंग कर रहे हैं। आज सारा बिहार दोनों को जानने लगा है। लेकिन, आज से लगभग 13 साल पहले ऐसा समय भी आया था, जब तेजस्वी और तेज प्रताप पर छेड़खानी के आरोप लगे थे।
जनवरी 1, 2008 को जब पूरी दुनिया नए साल का स्वागत करने में जुटी हुई थी, लालू यादव के बेटों पर लड़कियों से छेड़खानी के आरोप लगे थे। इसके अगले दिन ‘हिंदुस्तान टाइम्स’ में प्रकाशित खबर के अनुसार, साउथ दिल्ली में कथित रूप से लड़कियों से छेड़खानी करने के कारण लालू यादव के दोनों बेटों तेज प्रताप और तेजस्वी की कुछ अज्ञात युवकों ने जम कर पिटाई की थी। इस खबर में तेजस्वी यादव की जगह उनका निकनेम तरूण लिखा हुआ था।
नाम का मुद्दा जनवरी 2020 में भी उछला था, जब जदयू नेता नीरज कुमार ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर लालू यादव से पूछा था कि बेनामी संपत्ति वाले दस्तावेज पर एक तरूण यादव का नाम लिखा है, तो वो जवाब दें कि ये तरूण यादव कौन हैं, उनके नाम से आपने जमीन खरीदी और तरूण यादव के पिता का नाम लालू यादव लिखा है। उस दौरान तेजस्वी ने बताया था कि वो तब क्रिकेट खेलते थे और उनका निकनेम तरूण था, व उनके भाई का तेजू।
खबर में आगे बताया गया था कि तब केंद्रीय रेल मंत्री रहे लालू यादव के बेटों पर पहले तो अशोका होटल और फिर दिल्ली के कनॉट प्लेस में लड़कियों से छेड़खानी का आरोप लगा। इसके बाद उन दोनों ने दिल्ली-हरियाणा सीमा पर स्थित छतरपुर में एक पार्टी में हिस्सा लेने का मन बनाया। उनके साथ दिल्ली पुलिस के PSOs और रेलवे प्रोटेक्शन फोर्स (RPF) के जवान भी थे। वहाँ से लौटते समय फिर विवाद हुआ।
आरोप लगा था कि दोनों ने मेहरौली में पार्टी कर रही लड़कियों पर कुछ आपत्तिजनक टिप्पणियाँ की। वहाँ युवक-युवतियाँ एक फार्म हाउस में पार्टी कर रहे थे। वहाँ युवकों ने उनकी पिटाई कर दी। उनके साथ गए जवानों ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए दोनों की पहचान छिपा ली। दोनों को जल्दी से अस्पताल ले जाया गया, जहाँ उनका इलाज हुआ। एक बॉडीगार्ड का रिवाल्वर भी छीन लिया गया था।
Lalu’s children- Two beaten up by youths for eve-teasing. One has completely lost it. Another one is embracing cancer. pic.twitter.com/1rn4QZIc2X
इसके बाद हथियार गायब होने और सार्वजनिक ड्यूटी पर सरकारी कर्मचारियों के साथ बदतमीजी का मामला दिल्ली पुलिस ने दर्ज किया था। इस मामले में न तो लड़कियों और न ही लालू के बेटों ने कोई मामला दर्ज कराया था लेकिन सरकारी हथियार गुम होने के कारण मामला दर्ज करना पड़ा। तब तेज प्रताप की उम्र 19 साल और तेजस्वी की उम्र मात्र 17 साल थी। युवकों ने दिल्ली पुलिस के एक जवान की भी पिटाई की थी, फिर भाग निकले।
अगस्त 2018 में जदयू ने इस मुद्दे को उठाया था, जिसका जवाब देते हुए राजद के प्रवक्ता शिवानंद तिवारी ने कहा था कि उस समय ये लोग काफी छोटी उम्र के थे और उस उम्र में ये चीजें ‘सामान्य’ मानी जाती हैं। उन्होंने खबरों को नकारा नहीं और पूछा था कि अगर ये लोग उस उम्र में लड़कियों को नहीं देखेंगे और ऐसी हरकतें नहीं करेंगे तो कब करेंगे? जदयू ने नीरज कुमार और संजय सिंह ने इस मुद्दे को उठाया था।
अक्टूबर 2020 में ही बिहार में राजद के 37 वर्षीय दलित नेता शक्ति मलिक की हत्या के मामले में तेजस्वी यादव और तेज प्रताप यादव को आरोपित बनाया गया था। दलित नेता शक्ति मलिक की रविवार (अक्टूबर 4, 2020) को पूर्णिया स्थित उनके आवास के बाहर ही गोली मार कर हत्या कर दी गई थी। शक्ति मलिक को राजद सुप्रीमो लालू यादव ने पार्टी से निकाल दिया था, जिसके बाद उन्होंने स्वतंत्र उम्मीदवार के रूप में किस्मत आजमाने का फैसला किया था। हालाँकि, इस मामले में दोनों को क्लीन-चिट मिल चुकी है और अपराधी पकड़े जा चुके हैं।
कमजोर राजनीतिक नेतृत्व और इच्छाशक्ति के कारण जम्मू कश्मीर राज्य सदियों तक आतंक और कट्टरपंथ का शिकार रहा। यही वजह है कि भारत के इस सबसे महत्वपूर्ण हिस्से की पहचान मात्र जिहाद और आतंकवाद बनकर रह गया। हालाँकि, घाटी से आर्टिकल 370 के निष्क्रीय होते ही लोगों के जनजीवन पर भी इसका प्रभाव देखने को मिला है और हालात बहुत हद तक सुधरते नजर आ रहे हैं।
केंद्र सरकार और खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी घाटी के लोगों के जीवन, अर्थव्यवस्था सुधारने और उन्हें पहचान दिलाने में पूरी कोशिश कर रहे हैं। लोग अब जान पा रहे हैं कि कश्मीर या पुलवामा का हमारे दैनिक जीवन से जुड़ी वस्तुओं में सबसे महत्वपूर्ण योगदान रहा है। यही नहीं, पुलवामा ने इस देश को साक्षर बनाने में भी अहम भूमिका निभाई है।
कश्मीर का ‘पेंसिल वाला गाँव’ – उक्खू
आज पीएम मोदी ने अपने रेडियो प्रसारण मन की बात करते समय ‘वोकल फ़ॉर लोकल’ के तहत जम्मू-कश्मीर के बारे में एक ऐसी अनोखी बात का जिक्र किया जिसके बारे में बहुत ही कम लोग जानते होंगे। पढ़ाई के शुरुआती दौर में हम सबने हाथों में पेंसिल पकड़कर लिखना-पढ़ना सीखा है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इसका उत्पादन कश्मीर के पुलवामा जिले के उक्खू गाँव से होता है, जो कि ‘पेंसिल वाले गाँव’ के नाम से भी जाना जाता है।
‘मन की बात’ के 70वें कार्यक्रम में पीएम मोदी ने आज (अक्टूबर 25, 2020) कहा कि आज पुलवामा पूरे देश को शिक्षित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। आज यदि देश भर के छात्र अपना होमवर्क करते हैं, नोट्स तैयार करते हैं तो यह पुलवामा के लोगों की कड़ी मेहनत की वजह से है। देश में पेंसिल स्लेट की माँग का लगभग 90% कश्मीर घाटी से पूरा होता है। इसमें पुलवामा की बड़ी हिस्सेदारी है।
पुलवामा के एक छोटे से गाँव से शुरू हुई पेंसिल स्लेट बनाने की प्रक्रिया अब पूरे पुलवामा ज़िले में फैल गई है। पेंसिल स्लेट के इस उद्योग से पुलवामा में हर साल 100 करोड़ का कारोबार किया जाता है। कुल मिला कर यहाँ इसकी 17 यूनिट है जिसके जरिए पूरे देश में 90% पेंसिल स्लेट की सप्लाई की जाती है।
जानकारी के मुताबिक, देश की सभी बड़ी पेंसिल कंपनियाँ कश्मीर के पुलवामा से पेंसिल बनाने के लिए कच्चा माल खरीदती हैं। पेंसिल स्लेट का उत्पादन करने वाले बताते हैं कि अगर उन्हें कच्चा माल मिलेगा तो इस कारोबार को पूरे कश्मीर में फैलाया जा सकता है। इससे प्रदेश में रोजगार बढ़ेगा और प्रदूषण भी नहीं होगा।
रिपोर्ट्स के अनुसार, कश्मीर के इन नम इलाकों में पाया जाने वाला यह पेड़ चिनार की ही एक किस्म है। यहाँ दर्जनों छोटी-छोटी इकाइयाँ इस लकड़ी को पेंसिल इंडस्ट्री को मुहैया कराने के कारोबार में लगी हुई हैं।
पीएम मोदी ने भी इन लकड़ियों का जिक्र करते हुए कहा, “कश्मीर घाटी में चिनार की लकड़ी में उच्च नमी की मात्रा और कोमलता है, जो इसे पेंसिल के उत्पादन के लिए सबसे उपयुक्त बनाती है। एक समय में हम पेंसिल के लिए लकड़ी का आयात करते थे, लेकिन पुलवामा अब इस क्षेत्र में देश को आत्मनिर्भर बना रहा है। यहाँ का उक्खू देश विदेश में पेंसिल विलेज के नाम से जाना जाता है।”
समाचार पत्र ‘हिंदुस्तान टाइम्स’ की एक रिपोर्ट के मुताबिक, नटराज और अप्सरा पेंसिल जैसे ब्रांड बनाने वाली हिंदुस्तान पेंसिल्स को यहीं से कच्चा माल मिलता है। यह कंपनी दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी पेंसिल निर्माता है।
महिलाओं को रोजगार का बड़ा साधन
गौरतलब है कि इस उद्योग में बड़ी संख्या में महिलाएँ काम कर रही है। लगभग 2000 लोगों को इस उद्योग के चलते रोजगार मिला है। उक्खू गाँव के घरों में ही छोटी-छोटी यूनिट्स में महिलाएँ कुशलता से कारीगरी कर रही हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने भी इस उद्योग में बढ़-चढ़ कर हिस्सा ले रही महिलाओं की प्रशंसा करते हुए कहा, “यहाँ पेंसिल स्लेट के उत्पादन के लिए कई इकाइयाँ काम कर रही हैं, जिनसे रोज़गार पैदा हो रहा है। इन यूनिट्स में महिलाएँ बड़ी संख्या में काम कर रही हैं।”
उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री ने ‘वोकल फ़ॉर लोकल’ के तहत पुलवामा के पेंसिल स्लेट उद्योग की तारीफ करते हुए कहा, “पुलवामा ने यह विशिष्ट पहचान तब हासिल की, जब यहाँ के स्थानीय लोगों ने कुछ अच्छा करने का फैसला किया। उन्होंने इसके लिए जोखिम उठाया और खुद को इसके लिए पूरी तरह से समर्पित कर दिया।” प्रधानमंत्री ने कहा, “मैं पुलवामा के भाइयों और बहनों और उनके परिवारों की सराहना करता हूँ, जो भारत को शिक्षित करने में योगदान दे रहे हैं।”
तृणमूल कॉन्ग्रेस की सांसद नुसरत जहां एक बार फिर से कट्टरपंथियों के निशाने पर हैं। दुर्गा पूजा में शामिल होने के कारण उन पर आरोप लगाए जा रहे हैं कि उन्होंने गुनाह किया है और इस्लाम की तौहीन की है।
नुसरत जहां ने दुर्गा पूजा के अवसर पर अपने इंस्टाग्राम पर भी अपनी डांस की वीडियो अपलोड की। हालाँकि थोड़ी ही देर में कट्टरपंथियों ने उनपर निशाना साधना शुरू कर दिया। इनमें से कुछ लोग भारत के थे और कुछ बांग्लादेश के भी थे।
मोहम्मद वसीम ने लिखा, “शर्म आनी चाहिए तुम्हें नुसरत जहां, तुम्हें हमारे धर्म की इज्जत करनी चाहिए। कोई तुम्हें जश्न मनाने से नहीं रोक रहा लेकिन तुम मूर्ति पूजन कर रही हो। शर्म आनी चाहिए। तुम मजहब के नाम पर कलंक हो। मैं तुम्हें हदीस पढ़ने की सलाह दूँगा।”
मोहम्मद तारिक ने ट्विटर पर लिखा, “लोकप्रियता के लिए कुछ भी करेगी, नाचना-गाना तो इसका पहले से धंधा है, कोई अपना धंधा बढ़ा रहा है क्या बुरा है।”
गौरतलब हो कि इस्लाम में नाचने और गाने को ‘हराम’ कहा जाता है। इसी आधार पर शायद तारीक ने नुसरत जहां को चरित्रहीन कहते हुए उनके डांस के लिए ‘धंधा’ शब्द का प्रयोग किया।
कुछ कट्टरपंथियों ने उन्हें शैतान, रं#&, जहानमी लिखा। एक यूजर ने लिखा, “अल्लाह इस औरत को जहन्नुम में जलाएगा।” अली नामक यूजर ने उन्हें, “रं&* की औलाद बताया।” शैफुद्दीन कहता है, “शैतान की नस्ल हो तुम, तुमको शर्म नहीं आती इतना गंदा काम करने से।”
इंस्टाग्राम पर केवल डांस की वीडियो पोस्ट करने पर एक्ट्रेस को जान से मारने की धमकियाँ भी मिली। @shahbuzgalisa नाम की यूजर ने लिखा, “मौत का खौफ करो। कयामत का दिन नजदीक है।” दूसरी यूजर ने लिखा, “वाह! तुम लोग दुर्गा पूजन के बाद भी खुद को मजहबी कहते हो।” एक कट्टरपंथी ने इस बात पर हैरानी जताई कि उसे समझ नहीं आ रहा कि ये महिला (नुसरत) अब तक जीवित कैसे है।
दुर्गा पूजा से पहले भी नुसरत पर भड़के थे कट्टरपंथी
गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब नुसरत जहां को इस्लामी कट्टरपंथियों का शिकार होना पड़ा हो। पिछले महीने भी उन्हें इसी तरह निशाना बनाया गया था, जब उन्होंने महालया के अवसर पर माँ दुर्गा की भाँति श्रृंगार किया था और सोशल मीडिया पर वीडियो पोस्ट की थी। @mkkhan486 आईडी से उनके लिए लिखा गया था, “तुम्हारा समय नजदीक आ गया है। अल्लाह से डरो। क्या तुम अपना शरीर ढक कर नहीं रख सकती। छी छी छी।”
एक अन्य का कहना था कि मजहबी होने के नाते नुसरत को यह सब करते हुए शर्म आनी चाहिए। लेकिन उनमें कोई शर्म नहीं बची है। यूजर ने यह भी कहा था कि नुसरत जहान्नुम में जाएँगी। उन्हें कोई शर्म नहीं है। मगर अल्लाह उन्हें देख रहा है।
याद दिला दें कि पिछले साल भी जब नुसरत जहां ने निखिल जैन से शादी के बाद दुर्गा पूजा में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई थी, तब भी कट्टरपंथियों ने इसी तरह उन्हें अपने निशाने पर लिया था और उनकी शादी को लेकर कई सवाल उठाए थे। साथ ही उन्हें जल्द ही मारने की धमकी भी दी थी।
वहीं नुसरत की शादी से नाराज देवबंद के उलेमा ने कहा था कि अगर उन्हें ग़ैर-मज़हबी कार्यों में इतनी ही रुचि है तो वो अपना नाम बदल लें। उलेमा ने पूछा कि अभिनेत्री नुसरत आख़िर ग़ैर-मज़हबी काम कर क्यों रही हैं?
अभिनेता वीर दास के एक कॉमिक एक्ट का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें वो इस्लाम को ‘एप्पल’ कम्पनी के साथ जोड़ कर देखते हुए मजाक-मस्ती करते नज़र आ रहे हैं और लोग उनके चुटकुलों पर ठहाके भी लगा रहे हैं। इस वीडियो में वीर दास कहते हैं कि वो हिन्दू हैं और इसीलिए ‘हेट क्राइम’ से नहीं डरते क्योंकि ‘कर्म के सिद्धांत’ के आधार पर वो बियॉन्से बन कर वापस आ जाएँगे।
बता दें कि बियॉन्से अमेरिका की मशहूर गायिका हैं। उन्होंने कहा कि उन्हें एक ‘रिलीजियस फोबिया’ है क्योंकि उन्हें लगता है कि दुनिया लगातार बदल रही है और सारे धर्म इस बदलाव के साथ तालमेल बिठाने में सक्षम नहीं हो पा रहे हैं। इसके बाद उन्होंने मजाक करते हुए कहा कि दुनिया के सभी बड़े मजहबों को ‘अपडेट’ किए जाने के जाने की ज़रूरत है, इसीलिए इन सभी मजहबों को लेकर ‘एप्पल’ कम्पनी को दे देना चाहिए।
‘इस्लाम 6S और जीसस प्रो वर्जन’
उन्होंने कहा कि हर 6 महीने के बाद इन मजहबों को एप्पल अपडेट करेगा और फिर से लॉन्च करेगा, जो काफी अच्छा होगा। उदाहरण गिनाते हुए उन्होंने कहा कि जैसे हमें ‘इस्लाम 6S’ की ज़रूरत होगी तो उसे लॉन्च कर दिया जाएगा। बता दें कि उन्होंने एप्पल कम्पनी के स्मार्टफोन के मॉडल के आधार पर इस्लाम का भी नया नामकरण किया। साथ ही उन्होंने कहा कि तब हमें ‘जीसस प्रो’ की ज़रूरत पड़ सकती है।
इसके बाद वीर दास आतंकवाद के मुद्दे पर आ गए और कहा कि इससे आतंकवाद को भी कम किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि जब भी ‘जिहाद’ का काम करना चाहेगा, तो इसके लिए उसे सबसे पहले एप्पल कम्पनी के साथ एक नए ऑनलाइन एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर करना पड़ेगा। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि पहले ‘जिहाद आईडी’ बनानी पड़ेगी, फिर सारे डिवाइसेज के बॉम्ब्स को उस आईडी के साथ सिंक्रनाइज करना पड़ेगा।
Liberals fav standup comedian @thevirdas connects terrorism,jihad,and 72 hoors with Islam and muslims.. He wants islam 6s like iphone 6s?..
वीर दास ने आगे चुटकुले छोड़ते हुए इस वीडियो में कहा कि ऐसा करने पर हो सकता है कि कोई एक ऐसा बम हो जो एप्पल के आईट्यून्स के साथ काम करने में सक्षम नहीं हो और फिर इसके लिए आईट्यून्स का नया वर्जन डाउनलोड करना पड़े। इसके बाद उन्होंने कहा कि जन्नत में आपको 72 वर्जिन हूर मिलने ही वाले हैं, लेकिन आपके आईक्लाउड में मात्र 6 वर्जिन हूरें आ सकती हैं, तो फिर आपको अपग्रेड करना पड़ जाएगा।
बता दें कि हिन्दू धर्म का मजाक उड़ाने के कारण कई कॉमेडियंस लोगों एक रडार पर आ चुके हैं। सितम्बर 2019 में अर्मिन नवाबी ने ट्विटर पर माँ काली की एक तस्वीर ट्विटर पर शेयर करते हुए लिखा था, “मैं हिन्दू धर्म से प्यार करने लगा हूँ। मुझे पहले नहीं पता था कि तुम्हारी देवियाँ इतनी कामुक हैं। फिर कोई और धर्म क्यों अपनाएगा?” ईरानी-कनाडाई कॉमेडियन अर्मिन नवाबी के खिलाफ विश्व हिन्दू परिषद् (विहिप) ने शिकायत भी दर्ज कराई थी।