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‘मारो, काटो’: हिंदू परिवार पर हमला, 3 घंटे इस्लामी भीड़ ने चौथी के बच्चे के पोस्ट पर काटा बवाल

चौथी के एक बच्चे ने अनजाने में एक फेसबुक पोस्ट किया। इस पोस्ट को लेकर सैकड़ों की संख्या में मुस्लिमों ने हिंदू परिवार पर दिनदहाड़े हमला कर दिया। घटना कानपुर के मकनपुर गाँव की है।

18 सितंबर को यह हमला हुआ। इस्लामी भीड़ ने तीन घंटे से ज्यादा बवाल काटा। हिंदू परिवार के घर पर पथराव किया गया। सीढ़ियों के सहारे घर की छत पर चढ़कर तोड़फोड़ और लूटपाट की गई। परिवार के बुजुर्गों और महिलाओं को भी नहीं छोड़ा।

हमले में घर के मालिक आलोक गुप्ता गंभीर रूप से घायल हो गए। उनकी माँ और लकवाग्रस्त पिता को भी चोटें आई।

बिल्होर थाने में इस संबंध में 58 लोगों के खिलाफ 21 सितंबर को एफआईआर दर्ज कराई गई।

मकनपुर थाने में दर्ज एफआईआर

घटना के बाद बजरंग दल के प्रदेश सचिव रामजी तिवारी ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखा है। इसमें उन्होंने इस घटना का उल्लेख करते हुए इलाके के हिंदुओं की दयनीय स्थिति से उन्हें अवगत कराया है।

ऑपइंडिया के पास इस पत्र की कॉपी है। इसमें बताया गया है कि ऑनलाइन पढ़ाई के दौरान आलोक गुप्ता के नाबालिग बच्चे ने अनजाने में अपने पिता के फेसबुक प्रोफाइल से एक पोस्ट कर दी। इससे इलाके के कुछ कट्टरपंथी भड़क उठे।

बजरंग दल के नेता ने यूपी सीएम योगी आदित्यनाथ को लिखा पत्र

अगली सुबह परिवार को इसका एहसास होता उससे पहले सैकड़ों की संख्या में इस्लामी कट्टरपंथी आलोक के घर के बाहर जुट गए। ‘मारो, काटो’ सहित अन्य भड़काऊ नारे लगाते हुए भीड़ ने उनके घर पर पथराव शुरू कर दिया।

पलक झपकते ही कुछ उन्मादी आलोक की घर पर चढ़ गए और लूटपाट तथा तोड़फोड़ शुरू कर दी। कोई भी बात सुने बिना उन्मादी भीड़ ने आलोक की बुजुर्ग माँ और लकवाग्रस्त पिता को एक कोने में धकेल दिया और आलोक की बुरी तरह से पिटाई शुरू कर दी। महिलाओं से गहने छीन लिए। घर में रखे पैसे ले गए और आलोक को लहूलुहान छोड़ दिया।

रामजी तिवारी का कहना है कि यह सबकुछ दिनदहाड़े पुलिस की मौजूदगी में हुआ। घटना को फिल्मा रहे कुछ स्थानीय पत्रकारों और युवाओं के मोबाइल भी भीड़ ने तोड़ दिए। लवकुश कटियार नामक एक स्थानीय पत्रकार की भीड़ ने बुरी तरह पिटाई की। गंभीर चोटों के कारण कटियार को कानपुर के अस्पताल के आईसीयू में दाखिल कराना पड़ा।

तिवारी के अनुसार इस घटना से आसपास के हिंदू परिवार भी बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। उन्होंने भी मकनपुर छोड़ने का फैसला किया। इस इलाके में हिंदू पहले से अल्पसंख्यक हैं और डर के साए में जीते हैं। तिवारी ने मुख्यमंत्री से घटना के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ, जिनका नाम एफआईआर में दर्ज है, पर सख्त कार्रवाई की माँग की है।

मुस्लिमों द्वारा किया गया तांडव तीन घंटे तक चलता रहा : पीड़ित हिन्दू परिवार

ऑपइंडिया के पास वे वीडियो भी हैं, जिसमें पीड़ित परिवार घटना की भयावहता बयाँ कर रहे हैं। आलोक की मॉं ने बताया कि सुबह 8 बजे अचानक से भीड़ उनके घर के पास जुट गई और वे समझ पाते कि क्या हुआ है, उससे पहले उनका घर लूट लिया गया। परिवार ने बताया, “पूरा तांडव तीन घंटे तक चलता रहा”। आलोक की मॉं ने बताया कि घर के भीतर घुसने वाली भीड़ ने उन्हें और उनके ​पति को धकेल दिया तथा उनके बेटे की बुरी तरह पिटाई की। घर के मंदिर और मूर्तियों को तोड़ दिया। उन्होंने बताया कि बंदूक की गोली जैसी आवाज भी अपने घर के बाहर से उन्होंने सुनी थी।

उन्होंने आगे बताया कि पुलिस मूकदर्शक बनी रही और उन्हें बचाने की कोशिश नहीं की। आलोक के बुरी तरह पिटाई होने के बाद दो पुलिस कॉन्स्टेबल घर के अंदर गए और उन्हें बाहर निकाला।

परिवार के एक अन्य सदस्य ने कहा कि बिल्होर पुलिस स्टेशन के अधिकारी, निरीक्षक हर कोई वहाँ मौजूद था लेकिन किसी ने मदद नहीं की। घटना के बाद वे आलोक को ले गए उसे भी कुछ दिन पुलिस हिरासत में रखा।

वहीं वीडियो में मौजूद तीसरे व्यक्ति ने पुष्टि की कि घटना को रिकॉर्ड करने का प्रयास करने वाले लोगों को भी पीटा गया था और उन्मादी इस्लामी भीड़ द्वारा उनके मोबाइल को भी तोड़ दिया गया था।

ऑपइंडिया ने की पीड़ित के भांजे से बात

ऑपइंडिया ने आलोक के भांजे कुणाल से भी बात की तो उन्होंने बताया कि बजरंग दल के कार्यकर्ताओं के लगातार दबाव बनाने के बाद आरोपितों को बचाने की कोशिश के आरोप में बिल्होर थाने के एसएचओ संतोष कुमार अवस्थी और मकनपुर थाने के प्रभारी वेद प्रकाश मिश्रा का ट्रांसफर कर दिया गया है। कुणाल के अनुसार एक सप्ताह बाद भी उपद्रवियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई है। बिल्होर पुलिस ने मामले में कुछ गिरफ्तारी की थी, लेकिन उनके खिलाफ आईपीसी की धाराएँ इतनी कमजोर थीं कि उन्हें तुरंत जमानत मिल गई।

उन्होंने यह भी पुष्टि की कि थाने लाए गए कुछ और उपद्रवियों को बिना सवाल पूछे ही जाने दिया गया। कुणाल ने आरोप लगाया कि भीड़ में शामिल लोगों ने पुलिस को रिश्वत दी थी, जिसके कारण उनके खिलाफ कोई कार्रवाई शुरू नहीं की गई।

ऑपइंडिया ने कानपुर के सिटी एसपी राजकुमार अग्रवाल और ग्रामीण एसपी ब्रजेश कुमार श्रीवास्तव से संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन फिलहाल उनसे संपर्क नहीं हो सका। पुलिस के बयान प्राप्त होने पर हम दोबारा से लेख को अपडेट करेंगे।

चीन ने शिनजियांग में 3 साल में 16000 मस्जिद ध्वस्त किए, 8500 का तो मलबा भी नहीं बचा

साल 2017 से लेकर अब तक चीन की सरकार ने शिनजियांग प्रांत में लगभग 16,000 मस्जिदों को नष्ट किया है। इनमें से करीब 8500 मस्जिद पूर्ण रूप से ध्वस्त किए गए हैं। ये जमीनें अभी तक खाली पड़ी हैं। यह जानकारी ऑस्ट्रेलियन स्ट्रैटेजिक पॉलिसी इंस्टीट्यूट (ASPI) ने दी है। ऑस्ट्रेलिया के इस थिंक टैंक ने यह दावा सैटेलाइट इमेजरी और स्टैटिस्टिकल मॉडलिंग ( statistical modelling) के आधार पर किया है।

थिंक टैंक ने दावा किया है कि प्रांत में करीब 28% मस्जिदों को क्षतिग्रस्त किया गया है या उन्हें किसी और चीज में तब्दील कर दिया गया। वहीं, धार्मिक मार्ग, इबादतगाहों और कब्रिस्तानों सहित 30% महत्वपूर्ण इस्लामी स्थलों का शिनजियांग में समूल विनाश किया गया है। अनुमान के मुताबिक साल 2017 के बाद प्रांत में हर तीन मस्जिदों में से एक को ध्वस्त किया गया।

24000 मस्जिदों के होने का चीन प्रशासन का दावा

इस थिंक टैंक ने प्रांत में मौजूद मस्जिदों और चीनी प्रशासन द्वारा दावे किए जा रहे मस्जिदों के आँकड़े में भी विरोधाभास पाया। एक तरफ जहाँ चीनी सरकार का कहना है कि शिनजियांग में 24000 से ज्यादा मस्जिद हैं, वहीं उनकी रिपोर्ट कहती है कि आज के समय में वहाँ 15,500 मस्जिद हैं। इसमें भी दिलचस्प बात यह है कि मौजूदा मस्जिदों में से भी लगभग 7500 मस्जिद कुछ हद तक क्षतिग्रस्त हो गए हैं।

एएसपीआई ने इस बात पर जोर दिया है कि 2012-2016 के बीच कई मस्जिदों का रेनोवेट किया गया था, लेकिन 2017 के बाद से ऐसा प्रतीत होता है कि ‘चीजों को सुधारने’ के लिए नीति में परिवर्तन हुआ।

मस्जिदों में कमी और क्षतिग्रस्त इस्लामिक स्थलों में इजाफा (साभार-Australian Strategic Policy Institute)

एएसपीआई ने अनुमान लगाया है कि शिनजियांग में लगभग 8,450 मस्जिदें नष्ट हो गई थीं और अनुमानित 7,550 मस्जिदों को क्षतिग्रस्त कर दिया गया था या फिर इस्लामी शैली की वास्तुकला और प्रतीकों को हटाने की आड़ में उनमें ‘सुधार’ किया गया। यह गौर करने वाली बात है कि शिनजियांग में बहाली या नवीकरण कार्य के नाम पर सांस्कृतिक विनाश का काम अक्सर किया जाता रहा है।

थिंक टैंक ने सैटेलाइट इमेजरी का इस्तेमाल करते हुए, 2017 से पहले मौजूद मस्जिदों का एक नया डेटा-सेट बनाया है। इसके जरिए उन्हें साल 2017 से पहले 900 से अधिक इस्लामी स्थलों का पता चला है। उन्होंने हालिया तस्वीरों का उपयोग करते हुए, अव्यवस्थित, कम क्षतिग्रस्त, काफी क्षतिग्रस्त और नष्ट कर दिए गए मस्जिदों को वर्गीकृत किया। इसके बाद विश्लेषण करके उन्होंने इस्लामी स्थलों की संरचना में किए गए बदलाव को आसानी से देखा।

संगठन ने यह भी पाया कि मस्जिदों के अलावा, चीनी सरकार के अधिकारियों ने महत्वपूर्ण पवित्र मजहबी जगहों, कब्रिस्तानों और इबादतगाहों को भी खंडित किया है। डेटा और विश्लेषण से पता चलता है कि उन पवित्र स्थलों में से 30% को ध्वस्त कर दिया गया है। वहीं, बाकी के 27.8% किसी अन्य वजहों से क्षतिग्रस्त हो गए हैं। कुल मिलाकर चीनी कानून के तहत संरक्षित 17.4% स्थल नष्ट हो गए और 61.8% असुरक्षित स्थल क्षतिग्रस्त या ध्वस्त कर दिए गए।

इस दौरान ऑस्ट्रेलिया की इस थिंक टैंक को एक तरह का पैटर्न भी देखने को मिला, जिससे मस्जिदों को ध्वस्त करने का काम हुआ। उन्होंने पाया कि जिन क्षेत्रों में कम टूरिस्ट आते थे, वहाँ विध्वंस की दर कम थी, जैसे कि उरुमकी। थिंक टैंक ने अपने विश्लेषण में यह भी देखा कि जो मस्जिद क्षतिग्रस्त नहीं हुए, उनमें पहले कोई इस्लामिक वास्तुशिल्प का काम नहीं है, इसलिए ‘उनको ‘सुधार’ अभियान के नाम पर ध्वस्त नहीं किया गया। फिर कई मस्जिदों को नागरिक और कमर्शियल स्थानों जैसे कि कैफे-बार और सार्वजनिक शौचालयों में बदल दिया गया। मौजूदा मस्जिदों में से 75% में ताला जड़ा है या आज उनमें कोई आता-जाता नहीं है।

Red represents completely demolished mosques whereas orange circles represent destroyed ones (Image Courtesy: ASPI)

गौरतलब है कि इस रिपोर्ट में इस बात का भी उल्लेख किया गया है कि चीन ने उत्तर पश्चिमी क्षेत्र में बने कॉन्सन्ट्रेशन कैंप में करीब 1 लाख उइगरों को रखा हुआ है, जहाँ उन्हें उनके मजहबी रिवाजों का छोड़ने के लिए मजबूर किया जाता है। थिंक टैंक ने यह भी देखा कि अप्रैल 2016 में चीन प्रधानमंत्री के भाषण के बाद मस्जिदों में नवीनीकरण का काम बंद हो गया था, इसके बाद केवल चीनी संस्कृति का वहाँ विस्तार हुआ। जिनपिंग के ही नेतृत्व में ‘सांस्कृतिक आत्मसात’ और ‘अंतर जातीय मिलन’ (Inter-ethnic mingling) शुरू हुआ।

चीन के whitepaper ने खोली प्रांत में उइगरों की हकीकत

स्टेट काउंसिल इंफॉर्मेशन ऑफ़िस द्वारा प्रकाशित एक श्वेतपत्र में, चीनी कम्युनिस्ट पार्टी (CCP) ने कहा है कि चीन जो कर रहा है उसके लिए उइगर ज़िम्मेदार हैं। चीन ने एक चौंकाने वाले दावा करते हुए खुलासा किया कि उसने शिनजियांग के उइगर-बहुल प्रांत में 2014 और 2019 के बीच शिक्षा शिविरों में 1.29 मिलियन से अधिक लोगों को रखा है।

श्वेतपत्र में यह भी दावा किया गया कि उइगर आतंकवादी थे, जो ‘आफ्टरलाइफ’ में विश्वास करते थे। मजहबी शिक्षा के कारण उन्होंने आधुनिक विज्ञान को खारिज कर दिया। इसके साथ ही वे अपने व्यावसायिक कौशल, आर्थिक परिस्थितियों और अपने स्वयं के जीवन को बेहतर बनाने की क्षमता में सुधार करने को तैयार नहीं थे।

‘मुझे सोफे पर धकेला, पैंट खोली और… ‘: पुलिस को बताई अनुराग कश्यप की सारी करतूत

बॉलीवुड के मशहूर फिल्म निर्माता-निर्देशक अनुराग कश्यप के ख़िलाफ अभिनेत्री पायल घोष ने साल 2013 की एक घटना पर एफआईआर दर्ज करवाई है। मुंबई वर्सोवा थाने में दिए अपने बयान में उन्होंने बताया है कि अनुराग से उनकी मीटिंग उस साल 3 बार हुई थी। अभिनेत्री के अनुसार, तीसरी मुलाकात अनुराग के घर पर हुई थी। वहीं मशहूर निर्देशक ने उन्हें सोफे पर धक्का दिया और अपनी पैंट खोल कर जबरदस्ती करने लगे।

अपने बयान में घोष ने यह भी बताया कि इस दौरान उन्होंने चिल्लाने की कोशिश की मगर, अनुराग ने उनका मुँह दबाकर उनका रेप किया।

पहली मुलाकात अनुराग के ऑफिस में

अभिनेत्री पायल घोष के अनुसार, साल 2013 के अगस्त महीने में उनकी कुछ ही दिनों में तीन मुलाकातें हुईं। पहली मीटिंग में वह अपने मैनेजर के साथ कश्यप से अंधेरी के आराम नगर स्थित उनके ऑफिस में मिलीं। बाकी दो मुलाकातें निर्देशक के घर पर हुई, जहाँ पायल घोष उनसे अकेले मिलने गईं।

दूसरी मुलाकात घर पर

दूसरी मुलाकात के बारे में बताते हुए घोष ने पुलिस को कहा उस दौरान अनुराग बड़े सलीके से पेश आए थे। वह कहती हैं, “दूसरी मुलाकात में मेरी उनसे दो घंटे से ज्यादा बातचीत चली। तभी उन्होंने मुझे अपने फिल्म करियर और उपलब्धियों के बारे में भी बताया। मैंने उनके साथ डिनर किया, फिर उन्होंने मुझे कुछ देर और रुकने को कहा। मगर मैं चली गई, क्योंकि ड्राइवर इंतजार कर रहा था।”

तीसरी मुलाकात में रेप

तीसरी मुलाकात का खुलासा करते हुए घोष ने बताया है कि कश्यप से दूसरी बार मिलने के बाद उन्हें कुछ दिन बाद मैसेज आया। इस मैसेज में कश्यप ने अभिनेत्री को एक रोल ऑफर करते हुए उनसे घर आकर मिलने को कहा। मैसेज में अनुराग कश्यप ने पायल घोष से अलग से कहा कि वह सलवार-कमीज पहनकर उनसे मिलने आए ताकि कोई उन्हें पहचान न पाए।

पायल घोष का बयान

पायल घोष ने बयान में कहा है, “लगभग 7:30 बजे मैं अपनी होंडा सिटी कार में अनुराग कश्यप के घर पहुँची। वह अंदर बैठकर स्मोक कर रहा था। घर से वाकई बहुत बदबू आ रही थी और जब मैंने उससे पूछा, तो उसने कहा कि वह मारिजुआना का सेवन कर रहा था। उसने मुझे भी स्मोक करने को कहा, लेकिन मैंने मना कर दिया। वह मुझे अपने फिल्मों के संग्रह को दिखाने के लिए दूसरे कमरे में ले गया। अपनी पुरानी फिल्मों के कैसेट दिखाते हुए, उसने अचानक मुझे सोफे पर धकेल दिया। फिर उसने अपनी पैंट खोली और मुझसे जबरदस्ती करने लगा। मैंने बहुत चिल्लाने की कोशिश की, लेकिन उसने मेरा मुँह दबा दिया और मेरा बलात्कार किया।”

पायल के अनुसार, इसके बाद उसे जैसे ही मौका मिला वह वहाँ से भाग निकली। पहले तो उसने आपबीती किसी के साथ साझा नहीं की, लेकिन कुछ दिनों बाद, उसने अपने मैनेजर और ड्राइवर को यह सब बताया।

पायल उस समय को याद करते हुए कहती हैं कि वह उस समय निर्देशक के खिलाफ शिकायत दर्ज कराने के लिए बेचैन थीं, लेकिन उनके कुछ करीबी दोस्तों ने उन्हें ऐसा करने से रोक दिया। साथ ही चेतावनी दी कि अगर वह अनुराग कश्यप जैसे बड़े निर्देशक के खिलाफ बोलती हैं तो शायद उन्हें फिल्म में काम नहीं मिलेगा।

पायल ने अपने बयान में कहा, “मीटू आंदोलन ने मुझे हिम्मत दी। मैंने इस महीने अपनी बहन और चचेरे भाई के साथ इसे साझा किया और अपने परिजनों से सलाह-मशविरा करने के बाद शिकायत दर्ज करने का फैसला किया।”

पुलिस को दिए अपने बयान में अभिनेत्री ने कहा है कि उनके मैनेजर ने साल 2013 में अनुराग कश्यप से उनकी पहली मीटिंग करवाने के लिए फेसबुक पर उन्हें रिक्वेस्ट भेजी थी।

गौरतलब है कि करीब एक हफ्ते पहले अभिनेत्री पायल घोष ने दावा किया था कि फिल्म निर्माता अनुराग कश्यप द्वारा उनका यौन उत्पीड़न किया गया था। उन्होंने बताया कि अनुराग कश्यप ने उन्हें सहज करने के लिए उनसे कहा था कि इंडस्ट्री में फिल्म निर्माताओं और अभिनेत्रियों के बीच शारीरिक संबंध आम बात है। पायल घोष ने आगे कहा कि ऐसा आदमी अब महिलाओं की स्वतंत्रता के लिए बोल रहा है, वह एक ‘f***ing hypocrite’ है।

पायल घोष ने यह गंभीर आरोप एबीएन तेलुगू को दिए इंटरव्यू में लगाए थे। इसके बाद एनसीडब्ल्यू अध्यक्ष ने अभिनेत्री को उन्हें सारी जानकारी और उनकी शिकायत भेजनी की सलाह दी थी। शुरुआत में तो इस मामले में मुंबई पुलिस ने अभिनेत्री की शिकायत नहीं लिखी। मगर बाद में आईपीसी की धारा 376, 354, 342, 342 के तहत मामला दर्ज करके जाँच शुरू कर दी थी। कहा जा रहा है कि इस 7 साल पुराने मामले में अनुराग को जल्द ही पूछताछ के लिए तलब किया जाएगा।

‘नशे में कौन नहीं है, मुझे बताओ जरा?’: सितारों का बचाव कर संजय राउत ने ‘शराबी’ वाले अमिताभ की याद दिलाई

सुशांत सिंह राजपूत की मौत के बाद सामने आए बॉलीवुड ड्रग्स स्कैंडल का दायरा दिनोंदिन बढ़ता जा रहा है। नार्कोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) के रडार पर कई बड़े सितारे हैं। ऐसे में शिवसेना सांसद संजय राउत ने बॉलीवुड सितारों का बचाव करते हुए एनसीबी पर निशाना साधा है। उन्होंने अपने बयान से ‘शराबी’ फिल्म में अमिताभ बच्चन पर फिल्माए उस गाने की यादें भी ताजा कर दी है, जिसमें वह पूछते हैं कि नशे में कौन नहीं है, मुझे बताओ जरा।

शिवसेना नेता राउत ने बॉलीवुड में ड्रग्स केस पर हो रही जाँच पर एनसीबी को उसकी जिम्मेदारियाँ याद दिलाई है। साथ ही बताया है कि उनका काम क्या है और वह क्या कर रहे हैं। राउत ने कहा कि नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो का काम ड्रग्स की तस्करी को रोकना है। लेकिन वे एक के बाद दूसरे लोगों को बुला रहे हैं। किस क्षेत्र में लत नहीं है? किसी को पैसे का लत है तो किसी को कुछ और चीज का।

उन्होंने कहा, “एनसीबी का काम देश के बाहर से आने वाले ड्रग के बड़े-बड़े कनसाइनमेंट को पकड़ना और उसकी जड़ तक पहुँचकर उसे खत्म करना है। फिर चाहे वो सामान हवाई मार्ग से आता हो या दूसरे किसी माध्यम से। लेकिन अभी एनसीबी क्या कर रही है?”

वह आगे कहते हैं, “अभी एनसीबी एक-एक आदमी को पकड़कर पूछताछ कर रही है। जबकि इसके लिए प्रत्येक शहर और राज्य में सरकार द्वारा गठित एक पुलिस डिपार्टमेंट होता है।” राउत ने आरोप लगाया कि सुशांत केस में सीबीआई के हाथ कुछ नहीं लगा, इसलिए एनसीबी से जाँच शुरू करवा दी गई। सुशांत के मामले में जाँच कहाँ तक पहुँची है, ये भी मालूम होना चाहिए।

यहाँ बता दें कि एक ओर जहाँ संजय राउत बॉलीवुड कलाकारों के पक्ष में उतर आए है, वहीं एनसीबी कल यानी शनिवार (26 सितंबर 2020) को दीपिका पादुकोण से ड्रग्स मामले में पूछताछ करने वाली है। ख़बर के मुताबिक़ दीपिका पादुकोण उस व्हाट्सएप ग्रुप की एडमिन थीं, जिसमें ड्रग्स के सेवन और लेन-देन को लेकर चर्चा होती थी। इस व्हाट्सएप ग्रुप के ज़रिए कई बड़े कलाकारों का नाम सामने आने की संभावना है।

एनसीबी जहाँ बॉलीवुड के काले सच को उजागर करने की कोशिश कर रही है, वहीं शिवसेना नेता नामी हस्तियों का नाम मामले में आने के बाद ऐसे बयान दे रहे हैं, जिससे लोगों को अमिताभ बच्चन की फिल्म ‘शराबी’ की याद आए। इसलिए, अब जब तक संजय राउत कोई नया ज्ञान या बयान नहीं देते, ऑपइंडिया की टीम यह गाना संजय राउत को समर्पित करती है।

कानुपर में रिवर फ्रंट: ऐलान कर बोले योगी- PM मोदी ने की थी यहाँ गंगा स्वच्छता की प्रशंसा

राज्य में एक विशाल फिल्म सिटी की स्थापना की घोषणा के बाद उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार अब कानपुर में गंगा किनारे रिवर फ्रंट बनाने की तैयारी में है। उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा ग्रेटर नोएडा के पास फिल्म सिटी परियोजना सहित कई विकास परियोजनाओं पर काम चल रहा हैं। विकास परियोजनाओं की सूची में कानपुर में बनने वाली गंगा रिवर फ्रंट को हाल में जोड़ा गया है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गुरुवार (24 सितंबर 2020) को कानपुर क्षेत्र में विकास परियोजनाओं की समीक्षा करते हुए इसकी घोषणा की। उन्होंने कहा कि रिवर फ्रंट पीएम मोदी के लिए एक उपहार होगा, जिन्होंने यहाँ गंगा नदी की सफाई को लेकर प्रशंसा की थी। वर्तमान में कानपुर रेंज में प्रत्येक डिवीजन में 50 करोड़ रुपये की लागत वाली 30 विकास परियोजनाएँ चल रही हैं। इनमें कानपुर नगर, कानपुर देहात, कन्नौज, फर्रुखाबाद, औरैया और इटावा शामिल हैं।

कानपुर में हुए बैठक में राज्य के कृषि मंत्री सूर्य प्रताप सिंह साही और पंचायती राज मंत्री भूपेंद्र चौधरी ने भी भाग लिया था। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को कानपुर में स्मार्ट सिटी परियोजनाओं और मेट्रो परियोजनाओं को प्राथमिकता देने के लिए कहा।

उन्होंने कहा कि इटावा और औरैया जिलों से गुजरने वाला अंडर कंस्ट्रक्शन बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे राज्य की आर्थिक स्थिति को और मजबूती देगा। गंगा नदी पर विकास कार्य नमामि गंगे परियोजना के तहत लागू किया जाएगा। उन्होंने अधिकारियों को नमामि गंगे के शीघ्र इम्पलीमेंटेशन के अलावा रिवर फ्रंट के तत्काल निर्माण के लिए एक कार्य योजना तैयार करने का निर्देश दिया।

सीएम योगी ने अधिकारियों को कानपुर मेडिकल कॉलेज का निर्माण शुरू करने का भी निर्देश दिया। उन्होंने अधिकारियों से फर्रुखाबाद जिले में कोविड-19 की मृत्यु दर को कम करने के लिए कहते हुए यह भी निर्देश दिया कि अस्पतालों में प्रत्येक बिस्तर पर उचित ऑक्सीजन की सप्लाई होनी चाहिए।

उन्होंने पीएम आवास योजना, मुख्यमंत्री आवास योजना और स्वच्छ भारत मिशन के तहत निर्मित शौचालयों की सौ प्रतिशत जियो-टैगिंग का भी निर्देश दिया।

अतीक अहमद से अवैध प्रॉपर्टी को जमींदोज करने पर हुआ खर्च भी वसूलेगी योगी सरकार

बाहुबली अतीक अहमद की अवैध प्रॉपर्टी पर कार्रवाई के बाद अब उससे इस पर आया खर्च भी वसूलने की योगी सरकार तैयारी कर रही है। इसमें मजदूरों की दिहाड़ी, जेसीबी का किराया, अधिकारियों और पुलिस बलों का खर्च शामिल है। प्रयागराज विकास प्राधिकरण (पीडीए) इस पूरी कार्रवाई का एक लेखा-जोखा तैयार कर रही है।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, PDA ने इस पूरे खर्चे का अनुमान लगभग 25 लाख रुपए लगाया है। योगी सरकार ने अतीक अहमद को फरमान जारी करते हुए साफ कर दिया है कि ध्वस्तिकरण की कार्रवाई का खर्च अतीक अहमद को वहन करना होगा। यदि वह ऐसा नहीं करता है तो उसके खिलाफ आरसी जारी की जाएगी।

रिपोर्ट के अनुसार, फूलपुर के सांसद रह चुके अतीक अहमद की अब तक करीब 300 करोड़ रुपए की अवैध सम्पतियों को जमींदोज किया गया है। सरकार द्वारा पहले से बेनामी सम्पतियों की पूरी कार्रवाई का ब्यौरा तैयार कर लिया गया था। जिसके बाद पुलिस की मदद से ताबड़तोड़ एक्शन लिया गया।

कार्रवाई में आधा आधा दर्जन अधिकारी, प्रवर्तन दल की पूरी टीम, लगभग 50 की संख्या में पुलिसकर्मी, हर कार्रवाई में 4 से 6 जेसीबी मशीनों का प्रयोग और 70 से अधिक मजदूर लगाए गए थे।

गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश में माफिया घोषित किए गए पूर्व सांसद अतीक अहमद की बेनामी सम्पत्तियों को योगी आदित्यनाथ की सरकार द्वारा एक-एक कर के जमींदोज किया गया है। सिर्फ अतीक ही नहीं योगी सरकार द्वारा उसके गुर्गों, परिजनों और करीबियों की अवैध सम्पतियों को भी बख्शा नहीं गया है।

पैगंबर पर कार्टून छापने वाली ‘शार्ली एब्दो’ के पुराने कार्यालय के पास चाकू से हमला: 4 घायल, 2 गंभीर

फ्रांस की व्यंग्य मैग्जीन ‘शार्ली एब्दो’ के पुराने ऑफिस के बाहर एक बार फिर हमले की खबर सामने आई है। धारदार हथियार से शुक्रवार (सितंबर 25, 2020) को हुए इस हमले में 4 लोग घायल हो गए। दो की हालत गंभीर बताई जा रही है।

पेरिस पुलिस का कहना है कि वह हमलावरों की तलाश में जुटी है। संदिग्ध पैकेट मिलने के बाद पूरे एरिया को बंद कर दिया गया है। हमला पेरिस के रिचर्ड लेनोरो मेट्रो स्टेशन के पास हुआ। हमले के बाद से क्षेत्र में स्कूल और केयर होम बंद हैं। अभी तक पुलिस ने हमलावरों और पीड़ितों की पहचान उजागर नहीं की है।

पत्रकार लुकास ब्यूरेल ने ट्विटर पर इस बात की पुष्टि की है कि इलाके में एक संदिग्ध पैकेट देखा गया है। एक गवाह ने BFMTV को बताया, “मैंने एक युवा महिला को देखा। उसके सिर पर गहरी चोट थी और पूरे मुँह पर खून ही खून था।”

उल्लेखनीय है कि इससे पहले शार्ली एब्दो मैग्जीन के दफ्तर पर साल 2015 में हमला हुआ था। यह हमला पैगंबर का एक कार्टून छापने के कारण हुआ था। इस घटना के करीब 5 साल बाद मैग्जीन ने दोबारा उस कार्टून को हाल में पब्लिश करने का फैसला किया, जिसके कारण विश्व भर के मुस्लिमों ने जगह-जगह प्रदर्शन किया और कई जगहों से हिंसा की घटना भी सामने आई।

फ्रांस के प्रेसिडेंट इमैनुएल मैक्रों ने फ्रेंच व्यंग्य साप्ताहिक पत्रिका शार्ली एब्दो के पैगम्बर मुहम्मद पर पुनः प्रकाशित किए जाने वाले कार्टून के फैसले को लेकर किसी भी प्रकार की निंदा नहीं की। मैक्रों ने लोकतंत्र और अभिव्यक्ति की आज़ादी पर बल देते हुए कहा था कि कोई भी प्रेसिडेंट पत्रकार या न्यूज़ रूम के संपादकीय की पसंद को लेकर कोई जजमेंट पास नहीं कर सकता।

मोइनुद्दीन चिश्ती पर अमीश देवगन की माफी राजस्थान सरकार को नहीं कबूल, कहा- धार्मिक भावनाएँ आहत हुई है

न्यूज 18 के पत्रकार अमीश देवगन के ख़िलाफ जाँच कराने के लिए राजस्थान की कॉन्ग्रेस सरकार ने असाधारण तत्परता दिखाई है। बता दें अमीश देवगन ने 15 जून को आर-पार शो के दौरान सूफी संत मोहम्मद चिश्ती पर कथिततौर पर आपत्तिजनक टिप्पणी की थी।

प्रदेश की ओर से मामले की पैरवी करते हुए वकील मनीष सिंघवी ने अदालत में दलील पेश की। उन्होंने अमीश देवगन के ख़िलाफ़ दर्ज एफआईआर को रद्द करने का विरोध किया। साथ ही कहा कि लोगों की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाने के इरादे से की गई टिप्पणी पर पत्रकार के ख़िलाफ़ जाँच हो।

उल्लेखनीय है कि देवगन की ओर से चिश्ती पर की गई टिप्पणी को ‘जुबान फिसलना’ बताते हुए अपील की गई थी कि उनकी माफी को मद्देनजर रखते हुए अलग-अलग प्राथमिकियों को रद्द किया जाए। इसी अपील के ख़िलाफ़ राजस्थान सरकार की ओर से मनीष सिंघवी ने दलीलें दी और कहा कि इससे लोगों की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँची है।

सिंघवी ने कहा, “जाँच के लिए एफआईआर ही एक मशीनरी है। पड़ताल होनी चाहिए और चार्जशीट भी फाइल किए जाने की जरूरत है। कोर्ट को प्रथम दृष्ट्या चार्जशीट और गवाहों पर विचार करना होगा।”

यहाँ बता दें कि राजस्थान, मध्यप्रदेश, उत्तरप्रदेश, महाराष्ट्र, तेलंगाना में पत्रकार के ख़िलाफ़ 7 एफआईआर दर्ज की गई है। पत्रकार के वकील सिद्धार्थ लुथरा ने न्यायाधीश एएम खानविल्कर व न्यायाधीश संजीव खन्ना के सामने पेश होते हुए कहा कि सभी एफआईआर में आईपीसी की धारा 153ए, 153जी, 295ए, 298, 5050(2) और आईटी एक्ट की धारा 66(फ) के तहत मामला दर्ज है। मगर, इनमें से कोई भी धारा इस मामले में उपयुक्त नहीं है।

इस पर सिंघवी ने कहा कि आईपीसी की धारा 295ए (जान-बूझकर अपराध करना और धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाना) भी इन एफआईआर में है, इसलिए जाँच होनी चाहिए और देवगन के ख़िलाफ़ दायर मुकदमे रद्द नहीं हो सकते।

कोर्ट की सुनवाई में यह भी कहा गया कि अमीश देवगन ने गलती करने के 30 घंटे बाद माफी माँगी थी, इसलिए यह भी जाँच का विषय है कि बाद में माँगी गई उनकी माफी वास्तविक है या नहीं। बता दें इस सुनवाई से पहले अमीश देवगन के वकील लुथरा कोर्ट को बता चुके थे कि उनके मुवक्किल ने अपने खिलाफ़ पहली एफआईआर होने से पहले ही माफी माँग ली थी, इसलिए उनकी अपील है कि उनके ख़िलाफ़ दायर एफआईआर रद्द की जाए।

उल्लेखनीय है कि 15 जून को अपने शो ‘आर-पार’ पर पूजा स्थल विशेष प्रावधान अधिनियम के संबंध में पीआईएल के बारे में एक बहस की मेजबानी करते हुए, अमीश ने ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती, जिन्हें ख़्वाजा ग़रीब नवाज़ के रूप में जाना जाता है, उन्हें “हमलावर” और “लुटेरा” कहकर बुलाया था। हालाँकि, अमीश देवगन ने सूफी संत को “लुटेरा” के रूप में संदर्भित करने के लिए भी माफी माँगी थी और इसे “अनजाने” में हुई गलती बताया था।

इसके बाद  26 जून को सूफी संत ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती पर टिप्पणी के बाद न्यूज 18 एंकर अमीश देवगन के खिलाफ दर्ज कई एफआईआर पर जाँच और कार्रवाई पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई की अगली तारीख तक रोक लगा दी थी। देवगन की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ लूथरा ने कहा था कि उनके मुवक्किल ने अपने शो के दौरान अनजाने में गलती की थी, जिसके लिए उन्होंने बाद में सार्वजनिक माफी माँगी थी। लूथरा ने कहा था, “अगर ऐसा होने लगे, जहाँ लोगों को जुबान फिसलने के कारण समस्या से सामना करना पड़े तो क्या होगा? लोग गलती करते हैं। उन्होंने माफी भी माँगी है।”

ड्रग्स चैट वाले ग्रुप की एडमिन थी दीपिका पादुकोण, दो नंबरों का करती थी इस्तेमाल

ड्रग्स और बॉलीवुड के बीच संबंधों की लंबी कड़ी को लेकर लगातार खुलासे हो रहे हैं। दीपिका पादुकोण को लेकर एक और हैरान करने वाली बात सामने आई है। टाइम्स नाउ के अनुसार दीपिका उस व्हाट्सएप ग्रुप की एडमिन थी, जिसमें ड्रग्स को लेकर बॉलीवुड से जुड़े लोग बात करते थे।

ख़बरों के अनुसार यह खुलासा एनसीबी की बॉलीवुड अभिनेत्री दीपिका पादुकोण से पूछताछ के ठीक पहले हुआ है। एनसीबी कल यानी शनिवार (26 सितंबर 2020) को दीपिका पादुकोण से ड्रग्स के मामले में पूछताछ करने वाली है। ख़बर के मुताबिक़ दीपिका पादुकोण उस व्हाट्सएप ग्रुप की एडमिन थीं जिसमें ड्रग्स के सेवन और लेन-देन को लेकर चर्चा होती थी। इस व्हाट्सएप ग्रुप के ज़रिए कई बड़े कलाकारों का नाम सामने आने की संभावना है।

टाइम्स नाउ ने अपनी रिपोर्ट में दावा किया है कि दीपिका के अलावा करिश्मा और जाया साहा भी इस ग्रुप की एडमिन थीं। इस व्हाट्सग्रुप में दीपिका पादुकोण के कुल 2 नंबर शामिल थे। इस हफ्ते की शुरुआत में एक व्हाट्सएप चैट वायरल होने के बाद दीपिका पादुकोण का नाम ड्रग्स मामले में सामने आया था। व्हाट्सएप चैट में दीपिका पादुकोण ‘K’ नाम के व्यक्ति से कथित तौर पर हैश की माँग कर रही थी। 

रिपोर्ट्स के मुताबिक, 28 अक्टूबर 2017 को हुई यह बातचीत इस प्रकार है:

10:03AM (+91-992——-) D(D मतलब दीपिका माना जा रहा है):K।।तुम्हारे पास माल है?

10:05 AM (+91-961——-) ‘K’: मेरे पास है लेकिन घर पर है। मैं बांद्रा में हूँ। मैं अमित से पूछ सकती हूँ अगर आपको चाहिए।

10:07, दीपिका:हाँ!! प्लीज

10:08, K: अमित के पास है, वो इसे ला रहा है।

10:12, दीपिका: हैश न?

10:12, दीपिका: वीड नहीं।

10:14, K: आप कोको किस समय आ रहे हो?

10:15: दीपिका: 11:30/12:00

10:15: दीपिका: शाल किस समय तक है वहाँ?

K: मुझे लगता है कि उसने 11:30 तक कहा है, क्योंकि उसे 12 बजे कहीं और जाना है

इसके पहले दीपिका पादुकोण की मैनेजर करिश्मा प्रकाश को एनसीबी ने पूछताछ के लिए समन भेजा था। यह जानकारी तब सामने आई जब रिया चक्रवर्ती की टैलेंट मैनेजर जाया साहा का नाम कई टेक्स्ट मैसेज के ज़रिए सामने आया। रिपब्लिक टीवी द्वारा प्रकाशित ख़बर के अनुसार ‘D’ और ‘K’ दोनों ही उस व्हाट्सएप ग्रुप का हिस्सा थे, जिसमें ड्रग्स पर चर्चा हुई थी। 

एनसीबी फिलहाल बॉलीवुड में फैले ड्रग्स नेटवर्क के मामले में जाँच कर रही है। दीपिका पादुकोण के अलावा ड्रग्स मामले में सारा अली खान, रकुल प्रीत सिंह और श्रद्धा कपूर को भी समन भेज चुकी है।         

मीडिया रिपोर्टों के अनुसा एनसीबी के सामने पूछताछ में रकुल प्रीत ने बताया है कि उनके घर से बरामद ड्रग्स रिया चक्रवर्ती के थे। रिपोर्ट के अनुसार, रकुल प्रीत ने कहा है कि रिया चक्रवर्ती ही उनके घर में ड्रग्स रखती थी और एजेंसी को जो ड्रग्स मिले हैं वो रिया के हैं। अभिनेत्री ने कथित तौर पर यह भी कहा कि उसका ड्रग पेडलर्स के साथ कोई संबंध नहीं है।

छद्म नारीवाद और हिंदू घृणा का जोड़: भारतीय संस्कृति पर हमला बोल कर कहा जाएगा- ‘ब्रेक द स्टिरियोटाइप्स’

प्रोपगेंडा वाले फेमिनिज्म का असली मतलब क्या होता है, इसका एक चेहरा कल सोशल मीडिया पर दोबारा देखने को मिला। एक फोटोग्राफर द्वारा खींची गई दो तस्वीरें कल अचानक हर जगह वायरल होना शुरू हुईं। एक में मॉडल ने सज धज कर साड़ी पहनी है और दूसरे में लड़की नन की ड्रेस में नजर आ रही है।

फोटोग्राफर की तस्वीरें वायरल होने की वजह सिर्फ़ साड़ी वाली फोटो है। इसमें नजर आ रहा है कि उसने हिंदुओं की पारंपरिक पोशाक साड़ी का कैसे अपमान किया। तस्वीर में देख सकते हैं कि साड़ी को नीचे से काटकर अलग कर दिया गया है और मॉडल कैंची अपने हाथ में लेकर कैमरे की ओर देख रही है। 

यामी नाम की फोटोग्राफर ने सोशल मीडिया पर यह तस्वीर 8 मार्च 2020 को अपलोड की थी। वही दिन, जिसे अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर महिला दिवस के रूप में मनाया जाता है। वही, दिन जब हर जगह महिला सशक्तिकरण की बात होती है।

यामी ने इसी दिन इस फोटोशूट की कुछ तस्वीर इंस्टाग्राम पर डालीं और एक तस्वीर के नीचे महिला दिवस, की शुभकामनाएँ देते हुए कैप्शन में लिखा- “ब्रेक द स्टिरियोटाइप्स।” वहीं दूसरी तस्वीर में लिखा, “Why fit in when you were able to stand out “

सोशल मीडिया पर इन तस्वीरों की बहुत आलोचना की जा रही है। कुछ लोगों का कहना है कि सीधे-सीधे हिंदुओं की संस्कृति पर प्रहार है। कुछ लोगों का पूछना है कि आखिर फोटोग्राफर को लेकर इतना बवाल क्यों हो रहा है, तस्वीर में नजर आने वाली महिला तो बस एक मॉडल है।

बता दें, जिन लोगों का इस तस्वीर को देखने के बाद यह सवाल है कि आखिर तस्वीर को लेकर हुआ बवाल बेवजह है या आधुनिक दौर में उसे इतना हाइलाइट नहीं किया जाना चाहिए। वो यामी के ही अकॉउंट पर अपलोड दूसरी फोटो को देखें। यह भी सोशल मीडिया पर धड़ल्ले से शेयर हो रही है। इसमें लड़की, एक नन की ड्रेस पहने हुए है और चेहरे पर मुस्कान के साथ फोटो खिंचवा रही हैं। 

बात सिर्फ़ फोटो की नहीं है। कैप्शन में भी अंतर देखिए। साड़ी को घुटनों के ऊपर तक काटकर जहाँ यामी उसे ‘ब्रेक द स्टिरियोटाइप’  मानती और समझती हैं कि जब आप बाहर नजर आ सकते हैं तो अंदर क्यों रहना । वहीं नन की ड्रेस वाली तस्वीर पर लिखती हैं, “उनकी कृपा से.. तब तक जीवन का आनंद लेंगे और एक दूसरे से प्यार करेंगे जब तक उनका राज (किंगडम) नहीं आता।”

विचार योग्य बात यह है कि दोनों पोशाकों को लेकर एक फोटोग्राफर की राय इतनी भिन्न कैसे है? जिन्हें लगता है कि यह काम अब भी केवल प्रोफेशन के लिहाज से हुआ है। उन्हें सोचना चाहिए कि एक तस्वीर में मॉडल को जहाँ धार्मिक पोशाक पहना कर ईश्वर की तलबगार दिखाया जा रहा है। वहीं दूसरी तस्वीर में मॉडल को, ऐसी पोशाक जिसका संबंध सीधे हिंदू संस्कृति व भारतीय सभ्यता से है, उसे रूढ़िवाद का बिंब तोड़ने वाली बताया जा रहा है।

इस तरह के नारीवाद में गौर करें कि इनके लिए किसी पहनावे में खुद को सिर से लेकर पाँव तक ढके रखना तब तक ही बंदिश नहीं है, जब तक उसका संबंध हिंदू धर्म से न हो। जैसी ही किसी पोशाक का संबंध हिंदू संस्कृति से जुड़ जाए तो इस तरह के छद्म नारीवाद के लिए उस पहनावे को कैंची से काटने का अर्थ पितृसत्ता से लड़ना बन जाता है।

इसलिए, ऐसी तस्वीरें देखकर सवाल तो पूछा जाना चाहिए क्या ऐसी मॉडल्स, या ऐसी फोटोग्राफर्स इस पितृसत्ता के ख़िलाफ़ लड़ाई को आगे बढ़ाने से पहले अपने अकॉउंट पर स्पष्ट तौर पर यह लिख सकती हैं कि उनके नारीवाद में केवल हिंदू धर्म से संबंधी धारणाओं की छीछालेदर की जाती है।

अगर, नहीं लिख सकतीं। तो यह स्टिरियोटाइप हर पोशाक की कतरनों के साथ क्यों नहीं ब्रेक किए जाते? हिंदुओं के पहनावे पर ही ऐसा प्रहार क्यों? क्यों नन की ड्रेस में मॉडल आदर्श होती है? क्यों बुर्के को स्टिरियोटाइप का हिस्सा नहीं माना जाता? क्यों केवल रूढ़िवाद की परिभाषा साड़ी और घूँघट तक सीमित हो जाती है?

वर्तमान समय की बात करें तो आज साड़ी ने विदेशों में भी अपना सौन्दर्य बिखेरा है। वह महिलाएँ जिन्हें वैश्विक स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व करना होता है, वह सभी साड़ी को अपनी प्राथमिकता में रखती हैं। मतलब तो साफ है न कि यह पोशाक केवल हिंदुओं की संस्कृति को ही नहीं बल्कि भारत की सभ्यता को भी दर्शाती है। फिर नारीवाद के नाम पर या महिला सशक्तिकरण के नाम पर ऐसा घिनौना प्रयास क्यों? आखिर कैसे एक नन की ड्रेस में लड़की का सशक्तिकरण मुमकिन है और साड़ी जैसे लिबास में नहीं।

भारत ने कई विदेशी संस्कृतियों को अपने भीतर समाहित किया है। यहाँ पाश्चत्य संस्कृति का सृजन भी वर्तमान में अपने चरम पर है। बावजूद इसके ऐसी कोशिशों को यदि एंटी हिंदू प्रोपगेंडा न कहा जाए तो क्या कहा जाएगा। साड़ी को रिग्रेसिव मानना किसी के विचार का हिस्सा जरूर हो सकता हैं, लेकिन उसी इंसान का यह समझना कि अन्य संस्कृतियों से जुड़़े ऐसे लिबास प्रोग्रेसिव हैं और महिला को खुशी देते हैं, केवल प्रोपगेंडा युक्त स्यूडो फेमिनिज्म का उदहारण हैं और उसे दिक्कत रूढ़िवाद से नहीं हिंदू धर्म से है।

सोचने वाली बात है क्या अगर सिर्फ़ पैरों को दिखाकर स्टिरियोटाइप्स तोड़ना है तो हमारे पास विकल्प के तौर पर शॉर्ट्स और स्कर्ट्स बाजार में उपलब्ध नहीं है क्या? हम उन्हें पहनकर क्यों नहीं सशक्त हो जाते। इसके लिए हमें क्यों जरूरत पड़ती है भारत की हजारों साल पुरानी सभ्यता से खिलवाड़ करने की?

पिछले दिनों याद करिए सोशल मीडिया पर कुछ वीडियोज वायरल हुईं थी। इनमें एक दुल्हन ब्लाउज के नीचे शॉर्ट्स पहन कर शादी से पहले डांस करती नजर आई थी। लेकिन, जैसे ही वह अपने शादी के मंडप पर पहुँची, तो वहाँ उसकी पोशाक वही थी, जिसमें आम दुल्हनें होती हैं। इसका अर्थ साफ है कि मॉर्डन से मॉर्डन लड़कियाँ भी भारतीय लिबास के मायने जानती हैं। उस दुल्हन ने भी वीडियो जारी करके कई स्टिरियोटाइप्स तोड़े थे मगर उसने अपने लहँगे को शॉर्ट्स बना कर शादी नहीं की। लड़की जानती थी कि भारतीय लिबास की खूबसूरती के अर्थ क्या है।

ध्यान रखिए लोकतांत्रिक भारत में किसी भी महिला को पुरुषों के बराबर स्वतंत्रता है। यहाँ उनका सशक्तिकरण केवल उस पितृसत्ता से लड़कर होगा जो उन्हें चार दीवारी से बाहर न निकलने की वस्तु मानता है। ऐसे छद्म नारीवाद से नहीं। वेशभूषा से निजात पाना अगर पितृसत्ता को हराना है तो इस तरह का प्रयोग बुर्के या हिजाब पर भी होना जरूरी है। लेकिन, शायद ऐसा कभी होगा नहीं, क्योंकि ऐसी तथाकथित प्रोग्रेसिव महिलाएँ जानती हैं कि यदि अपनी ऐसी रचनात्मकता किसी मजहब विशेष के तौर-तरीकों के साथ दिखा दी गई तो हश्र क्या होगा। इन्हें मालूम है कि कहाँ चोट करना सबसे सेफ हैं और किससे इन्हें अन्य समुदाय में ख्याति मिलेगी।