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चीनी विदेश मंत्री को एस जयशंकर का संदेश- सीमा पर मौजूदा स्थिति चीनी सेना की हरकतों का नतीजा

भारत और चीन के बीच वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर जारी विवाद के बीच दोनों देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक 1 घंटे, 40 मिनट तक चली। इसमें भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने अपने चीनी समकक्ष वांग यी को स्पष्ट तौर पर कहा कि सीमा पर तनाव की वजह चीनी सेना की हरकतें हैं और LAC पर यथास्थिति बदलने की एकतरफा कोशिश बर्दाश्त नहीं की जाएँगी।

दोनों नेताओं की मुलाकात पर विदेश मंत्रालय ने बयान जारी कर बताया कि दोनों देशों के बीच ‘5 सूत्रीय सहमति’ बनी है। विदेश मंत्री एस जयशंकर और चीनी विदेश मंत्री वांग यी (Wang Yi) ने माना कि दोनों देशों के रिश्तों में किसी मतभेद के चलते विवाद नहीं आना चाहिए।

भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर और चीन के विदेश मंत्री वांग यी (Wang Yi) मॉस्को में आयोजित शंघाई सहयोग संगठन में शामिल होने के लिए पहुँचे थे। बैठक के दौरान भारत के विदेश मंत्री ने साफ़ तौर पर कहा कि सीमा पर यथास्थिति में किसी भी तरह का बदलाव नहीं होना चाहिए।

एस जयशंकर ने कहा कि मौजूदा स्थित सिर्फ चीनी आक्रामकता का परिणाम है। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि सीमा संबंधी समझौतों का पूरी तरह से पालन होना चाहिए। 

मंत्रियों ने इस बात पर सहमति जताई कि जैसे ही स्थिति सामान्य होती है, दोनों पक्षों को सीमा क्षेत्रों में शांति बनाए रखने और इसे बढ़ाने के लिए नए ‘कॉन्फिडेंस बिल्डिंग’ उपायों के काम में तेजी लानी चाहिए।

बृहस्पतिवार (सितम्बर 10, 2020) को हुई द्विपक्षीय मुलाक़ात के पहले भी एस जयशंकर और वांग यी, दो अलग मौकों पर एक दूसरे के आमने – सामने आए; पहली बार, शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के विदेश मंत्रियों की बैठक के दौरान और दूसरी बार रूस, भारत, चीन (आरआईसी) की विदेश मंत्रियों की सालाना बैठक में। इन बैठकों में एस जयशंकर और वांग यी ने वैश्विक शांति, वैश्वीकरण, विज्ञान, तकनीक और शांति जैसे अहम मुद्दों पर एक दूसरे का समर्थन किया।

एस जयशंकर और उनके चीनी समकक्ष की इस बैठक में विदेश मंत्री एस जयशंकर ने अपनी बात रखते हुए कहा कि एलएसी पर शांति स्थापित किए बिना द्विपक्षीय संबंध मज़बूत नहीं हो सकते हैं। इसके बाद बैठक में हुई बातों की विस्तार से जानकारी देते हुए विदेश मंत्रालय ने बयान जारी किया।

बयान के अनुसार, दोनों देशों के विदेश मंत्रियों की इस बात पर सहमती बनी कि सीमा पर जारी वर्तमान हालात किसी भी देश के पक्ष में नहीं हैं। साथ ही, सीमा पर दोनों देशों के सैन्य अधिकारियों के बीच वार्ता जारी रखने, तत्काल प्रभाव से पीछे हटने और तनाव कम करने को लेकर भी सहमती बनी।   

विदेश मंत्रालय के बयान के मुताबिक, भारत और चीन के विदेश मंत्री इस मुद्दे पर भी सहमत हुए कि दोनों पक्षों को सभी समझौतों और प्रोटोकॉल्स का पालन करना चाहिए। वे इस बात पर सहमत हुए कि दोनों पक्षों के सीमा सैनिकों को अपना संवाद जारी रखना चाहिए, उचित दूरी बनाए रखनी चाहिए और तनाव कम करना चाहिए।

बैठक में ‘स्पेशल रिप्रेजेन्टेटिव मैकेनिज्म’ के ज़रिए अपना पक्ष रखने पर सहमती बनी। इसके अलावा, भारत-चीन सीमा विवाद पर ‘वर्किंग मैकेनिज्म फॉर कंसल्टेशन एंड कोआर्डिनेशन’ संबंधी बैठकें जारी रहेंगी। 

ख़बरों की मानें तो बैठक में भारत की तरफ से यह कहा गया कि भारतीय सेना ने विवाद के दौरान हर दिशा निर्देश का पालन किया है। भारत ने सीमा पर चीनी सेना के सैनिकों की भारी संख्या में तैनाती और उपकरणों की मौजूदगी पर भी सवाल उठाए। अंत में भारतीय पक्ष ने कहा कि ऐसे कदम साल 1993 और 1996 के दौरान किए गए समझौतों की अनदेखी हैं।  

गौरतलब है कि 29 और 30 अगस्त की रात को चीनी सैनिकों ने भारतीय सीमा क्षेत्र में फिर से घुसपैठ की कोशिश की थी। हालाँकि, उन्हें मुँह की खानी पड़ी। भारतीय सैनिकों ने पैंगोंग त्सो (Pangong Tso) के दक्षिण तट पर घुसपैठ कर रहे चीनी सैनिकों को खदेड़ दिया था।

भारतीय सेना के पीआरओ, कर्नल अमन आनंद ने सोमवार (31 अगस्त) को कहा कि पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA, चायनीज सैनिक) के सैनिकों ने 29 और 30 अगस्त (शनिवार और रविवार) की रात को पैंगोंग त्सो के दक्षिणी तट पर दोनों देशों के बीच बनी आम सहमति का उल्लंघन किया।

कर्नल अमन आनंद ने बताया, “29-30 अगस्त की रात को, पीएलए सैनिकों ने दोनों देशों के बीच चल रही राजनयिक व्यस्तताओं के दौरान पिछली सर्वसम्मति का उल्लंघन किया और सीमा-स्थिति को बदलने के लिए उत्तेजक सैन्य एक्शन को अंजाम दिया।”

ये खंडहर ऐसे ही रहेगा, महिला के साहस-इच्छाशक्ति का प्रतीक है: कंगना; राज्यपाल कोश्यारी केंद्र को भेजेंगे रिपोर्ट

अभिनेत्री कंगना रनौत ने एक ट्वीट में कहा है कि वह बृहन्मुंबई नगर निगम द्वारा बुधवार को ध्वस्त किए गए अपने कार्यालय का नवीनीकरण नहीं करेंगी और इसे एक ऐसी महिला की हिम्मत के प्रतीक के तौर पर इसी तरह से रखेंगी, जिसने इस दुनिया में मजबूती से खड़े रहने की इच्छा जताई।

वहीं, महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने उद्धव ठाकरे सरकार की इस करतूत को ‘बेतुका’ बताते हुए अपनी नाराजगी जाहिर की है। BMC ने कथित अवैध निर्माण के आधार पर कंगना के ऑफिस को बुलडोजर और बड़े हथियारों से तोड़ दिया था।

एक ट्वीट में, कंगना रनौत ने लिखा, “मेरा ऑफिस 15 जनवरी को खुला, कुछ ही समय बाद कोरोना महामारी आई। हम में से ज्यादातर लोगों की तरह ही मैंने भी उसके बाद काम नहीं किया। इसे ठीक करने के लिए मेरे पास रूपए भी नहीं हैं। मैं उसी खंडहर से काम करुँगी और उस ऑफिस को इसी तरह रहने दूँगी। यह खंडहर एक ऐसी महिला की इच्छाशक्ति के प्रतीक रूप में रखा जाएगा, जो इस दुनिया के सामने उठने का साहस करती है।”

इस ट्वीट के साथ ही कंगना ने ‘कंगना बनाम उद्धव’ हैशटैग भी जोड़ा है।

उद्धव सरकार के कारनामे से निराश गवर्नर कोश्यारी केंद्र सरकार को भेजेंगे रिपोर्ट

शिवसेना द्वारा नियंत्रित बीएमसी के ऑफिस में की गई तोड़फोड़ पर महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने बृहस्पतिवार (सितम्बर 10, 2020) को बीएमसी की कार्रवाई पर नाराजगी जताई है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने इस पूरे प्रकरण में मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के मुख्य सलाहकार अजॉय मेहता से चर्चा की। उन्होंने मेहता को तलब कर सीएम ठाकरे के इस ‘बेतुके सलूक’ पर अपनी नाराजगी जाहिर की।

वरिष्ठ अधिकारियों के मुताबिक, गवर्नर ने मेहता के जरिए सीएम को सख्त संदेश भेजा है। बताया जा रहा है कि अजॉय मेहता इस संबंध में सीएम उद्धव को जानकारी दे देंगे। वहीं, राज्यपाल कोश्यारी भी इस विषय पर केंद्र को एक रिपोर्ट देने जा रहे हैं।

केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा उपलब्ध कराए गए सुरक्षा गार्डों की सुरक्षा के बीच बीएमसी द्वारा ध्वस्त किए जाने के कुछ घंटों बाद कंगना रनौत 9 सितंबर को मुंबई पहुँची। बृहस्पतिवार को, अभिनेत्री ने अपनी संपत्ति का जायजा लिया और नुकसान का सर्वेक्षण किया।

शिवसेना नेता संजय राउत के साथ जारी वाकयुद्ध के बाद कंगना ने अपनी सुरक्षा के लिए चिंता व्यक्त की थी, जिसके बाद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा उन्हें वाई-प्लस श्रेणी सुरक्षा कवर प्रदान किया गया।

हाल ही में कंगना रनौत ने कहा था कि वह मुंबई में असुरक्षित महसूस करती हैं, और इसकी तुलना पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर से की। इस पर शिवसेना नेता संजय राउत ने उन्हें ‘हरामखोर’ कहते हुए उन्हें महाराष्ट्र में पैर न रखने की धमकी दी थी।

लेबनान: एक महीने बाद बेरूत में फिर लगी भयंकर आग, बंदरगाह में हुआ हादसा

लेबनान की राजधानी बेरूत में करीब एक महीने पहले भयंकर ब्लास्ट हुआ था। वहीं आज बंदरगाह पर फिर भीषण आग लग गई है। चारों तरफ काला धुँआ और आग की भयंकर ऊँची-ऊँची लपटे उठती देखी गई।

खबरों के मुताबिक, यह आग बंदरगाह के उस हिस्से में लगी थी, जो ‘फ्री जोन’ कहे जाने वाले एक प्रमुख राजमार्ग के करीब है। यह वह क्षेत्र है जहाँ कंपनियाँ कस्टम के समान खत्म होने के बाद इम्पोर्ट सामानों को स्टोर करती हैं।

बंदरगाह के अंतरिम महाप्रबंधक बासिम अल-क़ैसी ने बताया कि आग एक निजी कंपनी के गोदाम में लगी थी जो तेल का इम्पोर्ट करती थी। आग गोदाम में रखे तेल से लगनी शुरू हुई थी। इसके बाद आग उस इलाक़े तक पहुँची जहाँ रबड़ के टायर रखे थे। रबड़ की टायरों और तेल में आग लगने की वजह से इस हादसे ने भयानक रूप ले लिया। हालाँकि, उन्होंने कहा कि अभी तक यह पता नहीं चला है कि किस वजह से आग लगी।

सेना के हेलीकॉप्टरों की सहायता से आग बुझाने का काम शुरू हो चुका है। इस आग ने शहर भर के लोगों को दहला दिया है। हालाँकि, यह हादसा पहले की तरह नहीं था, जिसमें 163 लोगों की मौतें और अरबों डॉलर का नुकसान हुआ था।

प्रधानमंत्री सहित विभिन्न कैबिनेट मंत्रियों ने विस्फोट के बाद अपना इस्तीफा सौंप दिया था। वहीं देश में भारी विरोध प्रदर्शन ने तनाव को और बढ़ा दिया था।

हम कॉन्ग्रेस का करते थे समर्थन, लेकिन हमारी मदद अमित शाह ने की: कंगना की माँ आशा रनौत

बॉलीवुड अभिनेत्री कंगना रनौत और महाराष्ट्र सरकार के बीच का विवाद बढ़ने के बाद कंगना की माँ आशा रनौत ने अपनी बेटी को सुरक्षा प्रदान करने के लिए भारतीय जनता पार्टी, गृह मंत्री अमित शाह और पीएम नरेंद्र मोदी का आभार व्यक्त किया है।

मीडिया से बात करते हुए कंगना की माँ आशा रनौत ने कहा कि उनका परिवार दशकों से कॉन्ग्रेस पार्टी की विचारधारा से जुड़ा रहा था, इस तथ्य को जानने के बावजूद आज जब कंगना पर विपदा आई और महाराष्ट्र सरकार ने इस प्रकार की हरकत की, तो केंद्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली और प्रदेश में जयराम ठाकुर के नेतृत्व वाली बीजेपी सरकार उनकी मदद के लिए खड़ी हुई।

आशा रनौत ने कहा कि बीजेपी ने उनकी बेटी को सुरक्षा मुहैया करवाई। इसके लिए वह पीएम मोदी, गृहमंत्री अमित शाह और मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर का आभार व्यक्त करती हैं।

कंगना की माँ ने कहा, “हमलोग शुरू से कॉन्ग्रेस के साथ थे। हमारे दादाजी भी शुरू से कॉन्ग्रेसी थे। लेकिन फिर हमें सपोर्ट मिला किसका, अमिता शाह जी का, जिन्‍होंने मेरी बेटी को सपोर्ट किया। मुंबई में उसके साथ कुछ भी हो सकता था अगर सरकार ने मेरी बेटी को सुरक्षा नहीं दिया होता।” उन्होंने आगे कहा, “मेरी बेटी पर मुझे गर्व है कि वह हमेशा सच्‍चाई के साथ खड़ी रहती है।”

बॉलीवुड स्टार सुशांत सिंह राजपूत की मौत पर बॉलीवुड में कथित नशीली दवाओं के इस्तेमाल के बारे में खुलासे करने के बाद अभिनेत्री कंगना रनौत को तमाम तरह की धमकियाँ मिलने लगी थीं। जिसको मद्देनजर रखते हुए गृह मंत्री अमित शाह ने उन्हें Y+ सिक्योरिटी मुहैया कराई थी। वहीं सुरक्षा प्रदान करने के लिए कंगना ने ट्वीटर पर अमित शाह को धन्यवाद भी किया था। Y+ सिक्योरिटी में 10 सशस्त्र कमांडो की तैनाती की जाती है।

गौरतलब है कि महाराष्ट्र सरकार ने कंगना रनौत से आपसी खुन्नस निकालने के लिए उनके दफ्तर को बीएमसी की आड़ में बुधवार को ध्वस्त करा दिया था। बीएमसी अधिकारियों ने दफ्तर पर अवैध निर्माण के आरोपों का जवाब देने के लिए कंगना को मात्र 24 घंटे का समय दिया था। जिस पर तुरंत कार्रवाई करते हुए बीएमसी ने उसे ध्वस्त कर दिया। बीएमसी ने MMC अधिनियम की धारा 354 (ए) के तहत रनौत को एक नोटिस जारी किया था, जो बीएमसी को 24 घंटे के भीतर कार्रवाई करने की अनुमति देता है।

भारतीय सेना ने पैंगोंग त्सो झील के उत्तरी किनारे फिंगर- 4 को लिया अपने कब्जे में: चीन को दादागिरी का मिलेगा मुँहतोड़ जवाब

भारत-चीन के बीच वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर तनाव लगातार जारी है। इस बीच भारतीय सेना ने पैंगोंग त्सो झील के उत्तरी किनारे फिंगर- 4 पर ऊँचाई वाली जगह को अपने कब्जे में लेकर चीन के सामने अपनी स्थिति को और मजबूत कर दिया है। भारतीय सेना पूरी मजबूती से चीन की दादागिरी को करारा जवाब दे रही है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह कई पठारों का हिस्सा है जिसे भारतीय सेनाओं ने लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) के साथ कब्जे में किया। इस कदम से चीनी सेना के मुकाबले भारतीय सेना की स्थिति और भी मजबूत हो गई है।

उत्तर बैंक पर नई कब्जे वाली ऊँचाइयों के साथ, भारतीय सशस्त्र सेना फिंगर 4 क्षेत्र के उभाड़ (RIDGE) पर चीनी स्थिति को नजरअंदाज कर सकती है। चीन पिछले कुछ हफ्तों से फिंगर 4 के पास अपनी स्थिति मजबूत करने में लगा है। हालाँकि चीन ने अभी भी फिंगर 4 के मुख्य रिजलाइन पर नियंत्रण बनाए रखा है, लेकिन भारतीय सेना ने चीन की बढ़ते दबाव को देखते हुए आस-पास की ऊँचाइयों पर अपनी पोजीशन बना ली है।

भारत ने पिछले कुछ हफ्तों में अपनी स्थिति को मजबूत करते हुए दक्षिण बैंक की महत्वपूर्ण ऊँचाइयों पर कब्जा कर लिया था। इसके बाद लद्दाख की सीमा पर 29-30 अगस्त की रात को पैंगोंग त्सो झील क्षेत्र के दक्षिणी तट की ओर से चीनी सैनिकों ने घुसपैठ करने की कोशिश की थी। हालाँकि भारतीय सेना ने चीनी सैनिकों को खदेड़ कर उनके नापाक इरादों को नाकाम कर दिया था।

पैंगोंग त्सो के उत्तरी किनारे पर आठ रिगलाइन हैं, जिन्हें फिंगर्स के रूप में जाना जाता है। भारत का दावा है कि LAC फिंगर 8 से गुजरती है, लेकिन चीन इससे असहमत है और फिंगर 4 तक के क्षेत्र का दावा करता है। भारत में फिंगर 4 के पश्चिम में एक शिविर स्थित है।

पिछले कुछ हफ्तों में झील के दोनों किनारों पर भारी तैनाती के साथ भारतीय सेना ने अपनी फोर्स और बचाव को मजबूत किया है। चीनी सैनिकों ने भारतीय सैनिकों को पहाड़ की ऊँचाइयों से विस्थापित करने के लिए कई प्रयास किए हैं, जिन्हें भारतीय बलों ने नाकाम कर दिया है।

रिपोर्ट के अनुसार, चीन ने भारतीय सेना की तुलना करते हुए करीब क्षेत्र में करीब 50,000 कर्मियों को तैनात किया है। दोनों देशों का मौजूदा फोकस पैंगोंग त्सो पर है। वहीं एलएसी के साथ अन्य संघर्ष बिंदुओं पर भी स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है।

न्यायपालिका की अवमानना करने के लिए इंडिया टुडे के संपादक राजदीप सरदेसाई के खिलाफ SC में याचिका दायर

प्रशांत भूषण और न्यायतंत्र के खिलाफ अवमानना के मामले में स्वतः संज्ञान लेते हुए इंडिया टुडे के संपादक राजदीप सरदेसाई के ट्वीट को लेकर उनके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दाखिल की गई है।

रिपोर्ट्स के अनुसार, जिस याचिका में राजदीप सरदेसाई के खिलाफ देश की न्यायपालिका को लेकर विवादित टिप्पणी करने के लिए अवमानना ​​की कार्रवाई की माँग की गई थी, उसमें यह भी कहा गया कि राजदीप सरदेसाई के ट्वीट से पता चलता है कि ये न केवल लोगों के बीच प्रचार का एक सस्ता स्टंट था बल्कि भारत विरोधी अभियान के रूप में नफरत फैलाने का जानबूझकर एक प्रयास किया गया था।

याचिकाकर्ता ने राजदीप सरदेसाई के खिलाफ अवमानना ​​कार्यवाही शुरू करने के लिए अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल की सहमति भी माँगी है।

सर्वोच्च न्यायालय के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी करने के लिए विवादास्पद वामपंथी गिरोह के कार्यकर्ता प्रशांत भूषण को दोषी ठहराए जाने के बाद राजदीप सरदेसाई ने सुप्रीम कोर्ट की आलोचना की थी।

हालाँकि यह अभी तक स्पष्ट नहीं है कि उनके किस ट्वीट को लेकर न्यायपालिका की अवमानना ​​पर याचिका दायर की गई है, यहाँ कुछ ट्वीट्स है जिसे राजदीप सरदेसाई ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा प्रशांत भूषण को उनके खिलाफ अवमानना ​​कार्यवाही में दोषी ठहराए जाने के बाद किए थे।

राजदीप सरदेसाई ने एक अन्य ट्वीट में प्रशांत भूषण मामले पर दिए गए फैसले पर सर्वोच्च न्यायालय की आलोचना करते हुए दावा किया कि शीर्ष अदालत के पास अवमानना ​​मामले की सुनवाई के लिए समय था जबकि कश्मीर में हिरासत में लिए गए लोगों की बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका एक साल से अधिक समय से लंबित पड़ी थी।

उन्होंने यह भी कहा था कि भूषण को कोर्ट केस की अवमानना ​​में दी गई सजा सुप्रीम कोर्ट के लिए खुद में एक शर्मिंदगी है।

एक और ट्वीट में उन्होंने अदालतों को काम करने का तरीका भी बताया था।

गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने मुख्य न्यायाधीश की अवमानना के मसले पर प्रसिद्ध वकील प्रशांत भूषण पर एक रुपए का ज़ुर्माना लगाया था। कोर्ट ने ज़ुर्माना न भर पाने की सूरत में तीन महीने की क़ैद तथा साथ ही तीन साल के लिए वकालत पर प्रतिबंध लगाया था। हालाँकि बेशर्मी से माफी नहीं मॉंगने की बात कहने वाले भूषण अब जुर्माना भरने को तैयार हो गए थे।

प्रशांत भूषण ने कहा है कि उनके ट्वीट्स का उद्देश्य सुप्रीम कोर्ट की अवमानना नहीं था, वे सुप्रीम कोर्ट के अपने शानदार रिकॉर्ड से भटकने को लेकर नाराजगी की वजह से किए गए थे। भूषण ने कहा, “सुप्रीम कोर्ट के द्वारा लगाए गए जुर्माने की रिव्यू पिटिशन फाइल करने का मुझे अधिकार है। कोर्ट ने मुझ पर जो जुर्माना लगाया है, उसका मैं एक नागरिक को तौर पर कर्तव्य निभाते हुए भुगतान करूँगा।”

कंगना को जानबूझकर हुआ तकलीफ देने का काम: अभिनेत्री से मुलाकात के बाद बोले राम दास अठावले

बॉलीवुड अभिनेत्री कंगना रनौत की संपत्ति पर बीएमसी की कार्रवाई के बाद आज (सितंबर 10, 2020) केंद्रीय मंत्री राम दास अठावले ने उनसे मुलाकात की। इस मुलाकात के दौरान अठावले ने करीब 1 घंटे कंगना से बात की। इस बातचीत में उन्होंने अभिनेत्री को आश्वासन दिया कि उन्हें मुंबई में डरने की जरूरत नहीं है।

समाचार एजेंसी एएनआई के अनुसार उन्होंने कहा, “मैंने अभिनेत्री कंगना रनौत से एक घंटे तक बात की। मैंने उनको बताया कि आपको मुंबई में डरने की जरूरत नहीं है। मुंबई शिवसेना की भी है, BJP की है, कॉन्ग्रेस की है। मुंबई सभी धर्म, जाति और भाषाओं के लोगों की है। यहाँ सबको रहने का अधिकार है।”

इस मुलाकात के बाद मीडिया से बात करते हुए अठावले ने बताया कि कंगना ने उनसे क्या कहा है। उन्होंने कंगना के हवाले से कहा , “मुंबई महानगर प्रशासन ने मेरा बहुत बड़ा अपमान किया है। मैंने बड़े अरमानों से जो ऑफिस बनाया था, अगर उसमें दो तीन इंच आगे था, तो उन्हें वो तोड़ना चाहिए था। मगर, उन्होंने मेरी दीवारें, मेरा फर्नीचर सब तोड़ दिया है। इससे मेरा भारी नुकसान हुआ है। तो मैं कोर्ट में जा रही हूँ। मुझे मुंबई महानगर प्रशासन से मुआवजा मिलना चाहिए।”

राम दास अठावले आगे बताते हैं कि उन्होंने भी कंगना को कहा, “आपके ऊपर अन्याय हुआ है। आप जब आ रही थीं तो मुंबई महानगर प्रशासन को आपको नोटिस देना चाहिए था। आपको तीन चार दिन का नोटिस देना चाहिए था। कोर्ट में जाने का मौका देना चाहिए था। अभी कोर्ट ने स्टे दिया है। मगर, उसका कोई मतलब नहीं है। क्योंकि पूरा ऑफिस तोड़ दिया है। उसमें करोड़ों रुपए खर्च हुए।”

कंगना ने केंद्रीय मंत्री को बताया कि उन्होंने अपनी कमाई का सारा हिस्सा ऑफिस बनाने में लगाकर बहुत अच्छा ऑफिस बनाया था। इसलिए उन्हें मुआवजा मिलना चाहिए। केंद्रीय मंत्री के अनुसार, इसके अलावा अभिनेत्री ने उनसे जातिव्यवस्था पर बात की। उन्होंने कहा कि उनके मन में बाबा साहेब के लिए और उनके द्वारा बनाए गए संविधान के प्रति बहुत बड़ा आदर और सम्मान है। उनका कहना है कि देश में जातिव्यवस्था खत्म होना चाहिए। कंगना कहती हैं कि जब वह अपनी फिल्म करती हैं तो वह ये सब नहीं देखती कि उनके साथी कौन सी जाति के हैं। वो इस देश में जातिव्यवस्था को खत्म करना चाहती हैं।

अठावले कहते हैं कि उनको ऐसा लगता है कि कंगना को जानबूझकर तकलीफ देने का काम हो रहा है। इसलिए वह इस मामले में मुख्यमंत्री से बात करेंगे। इसके अलावा मुंबई महानगर पालिका के जो आयुक्त हैं, उनसे भी बात की जाएगी। केंद्रीय मंत्री ने कंगना से कहा, “आपके ऊपर अन्याय नहीं होना चाहिए। आप जैसी एक महिला को किसी प्रकार की तकलीफ नहीं होनी चाहिए।”

मीडिया से बात करते हुए वह पूछते हैं कि आखिर बीएमसी ने इसी दौरान नोटिस क्यों निकाला? उनका अधिकार है तो जब कंगना आ ही रहीं थीं, तभी उनके हाथ में नोटिस देना चाहिए था। इसलिए जो अधिकारी जिम्मेदार हैं, उन पर कार्रवाई होनी चाहिए। अब कंगना जब कोर्ट में जा ही रही हैं, तो कोर्ट मुआवजे का आदेश देगा, और जिसने भी उनके ऊपर अन्याय किया है, उन पर जरूर कार्रवाई होगी।

उन्होंने आगे कहा कि ये सब बदले की भावना से हुआ है। कंगना ने सुशांत सिंह राजपूत मामले में सही बातें बताई थीं। ड्रग के बारे में भी उन्होंने ही सूचना दी थी। उसके बाद ही एनसीबी ने जाँच की और रिया चक्रवर्ती, उनका भाई शौविक समेत कई लोग चक्रवर्ती गिरफ्तार हुए।

केंद्रीय मंत्री ने अपनी बातचीत में शिवसेना मुखपत्र सामना पर कार्रवाई की बात की। उन्होंने कहा कि उसमें कंगना के ख़िलाफ़ ड्रग्स के आरोप लगे हैं और जाँच की बात कही गई है। अगर ऐसी ही बात है तो सामना पर भी मामला दर्ज होना चाहिए और संजय राउत पर भी। आखिर बिन सबूत के कोई ऐसे इल्जाम कैसे लगा सकता है।

2 हिंदू बहनों का अपहरण और धर्मांतरण: जब पिता ने खुद पर पेट्रोल डाल कर माँगा था इंसाफ, Video फिर से हुई वायरल

पाकिस्तान के सिंध के घोटकी इलाके में पिछले साल दो हिंदू बहनों के अपहरण की खबर मीडिया में सामने आई थी। बताया गया था कि इन दोनों बहनों का धर्म परिवर्तन करवा कर इनका निकाह उम्र में बड़े दूसरे समुदाय के युवकों से करवा दिया गया और अर्जी में लिखवाया गया कि इन्होंने खुद इस्लाम से प्रभावित होकर अपना धर्म बदला है। मामला जब इस्लामाबाद हाईकोर्ट में पहुँचा तो अदालत ने भी लड़कियों को उनके शौहरों के साथ रहने का निर्देश दिया।

अब इस मामले के करीब डेढ़ साल बीत जाने के बाद वॉयस ऑफ पाकिस्तान माइनॉरिटी ने इसे दोबारा उठाया है। उन्होंने उस मजलूम पिता की वीडियो साझा की है, जिसे पिछले साल प्रशासन से उसकी बेटियों के लिए इंसाफ की जगह सिर्फ़ निराशा हाथ लगी। वीडियो में वह पुलिस थाने के बाहर अपने लिए इंसाफ माँग रहे हैं। जानकारी के मुताबिक, यह वीडियो पिछले साल की है।

वीडियो को लेकर ट्विटर अकॉउंट से दावा किया जा रहा है कि अपने साथ हुई नाइंसाफी से नाराज रीना-रवीना के पिता ने पुलिस स्टेशन के बाहर खुद पर पेट्रोल डालने की कोशिश की। मगर, प्रशासन ने उनकी सुनवाई करने की बजाय लड़कियों को उनके नए पतियों के साथ रहने के निर्देश दे दिए।

गौरतलब है कि 20 मार्च को, होली की पूर्व संध्या पर दो नाबालिग हिंदू लड़कियों, 13 वर्षीय रवीना और 15 वर्षीय रीना का अपहरण करके उन्हें पाकिस्तान के सिंध प्रांत में अपने उम्र से बहुत बड़े पुरुषों से जबरन निकाह करने के लिए मजबूर किया गया था। इसके बाद खबर आई थी कि मेघवार समुदाय की एक अन्य हिंदू नाबालिग लड़की को भी पाकिस्तान के सिंध प्रांत में बाडिन ज़िले के टांडो बाघो से कथित तौर पर अगवा कर लिया गया था।

इन घटनाओं को गंभीरता से लेते हुए पूर्व केंद्रीय विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने पाकिस्तान स्थित भारतीय उच्चायोग से रिपोर्ट माँगी थी। पाकिस्तान के सिंध में होली की शाम हुई इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना को लेकर गंभीर सुषमा स्वराज ने ट्वीट करते हुए भारतीय उच्चायोग को टैग किया था और इस सम्बन्ध में एक रिपोर्ट देने का निर्देश दिया था। इसके बाद इस मामले में 7 लोगों की गिरफ़्तारी भी हुई थी।

हालाँकि, बाद में पता चला कि इस्लामाबाद हाईकोर्ट में दोनों बहनों को अपने मुस्लिम पतियों सफ़दर अली और बरक़त अली के साथ रहने का आदेश दिया है। इस्लामाबाद हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश अथर मिनल्लाह की अगुवाई वाली एक उच्च न्यायालय की पीठ ने पाँच सदस्यीय आयोग की रिपोर्ट पेश करने के बाद यह निर्णय लिया था, जिसमें यह जाँच करने का काम सौंपा गया था कि क्या हिंदू बहनों का इस्लाम में धर्मांतरण मजबूर किया गया था।

कंगना के रुख से उद्धव सरकार की नींद उड़ी, आवाज दबाने के लिए उसके खिलाफ की गई कार्रवाई: अखाड़ा परिषद

महाराष्ट्र सरकार के साथ चल रही रस्साकशी के बीच बॉलीवुड की ‘क्वीन’ कंगना रनौत को अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद ने अपना समर्थन दिया है। अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि ने ठाकरे सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि उन्होंने सच की आवाज को दबाने के लिए कंगना के कार्यालय पर बुलडोजर चलवाया है और बदले की कार्रवाई की है।

अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरी ने अपने जारी बयान में कहा कि कंगना रनौत बहादुर और हिम्मत वाली बेटी हैं, जिन्होंने खुलकर बॉलीवुड के माफियाओं और ड्रग माफियाओं के रैकेट का भंडाफोड़ किया है। कंगना ने निडर होकर बॉलीवुड में एक विशेष समुदाय के वर्चस्व के खिलाफ खुलकर आवाज उठाई है। इससे न केवल बॉलीवुड के माफिया डर गए हैं, बल्कि सरकार भी घबरा गई है। इसी कारण बदले की भावना से उनके ऊपर कार्रवाई की गई है।

परिषद ने कंगना के कार्यालय पर हुई कार्यवाई पर अपने विरोध जताया। उन्होंने आगे कहा कि हालाँकि महाराष्ट्र हाई कोर्ट ने कंगना को बड़ी राहत देते हुए ध्वस्तीकरण की कार्रवाई पर रोक लगाई है, लेकिन सुशांत सिंह मर्डर केस में जिस बहादुरी से कंगना रनौत ने ड्रग और बॉलीवुड माफियाओं का सामना किया, उससे लोगों में बौखलाहट है। बता दें कि कंगना की याचिका पर हाई कोर्ट ने आज की सुनवाई टाल दी और अब अगली सुनवाई 22 सितंबर को होगी।

अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि ने कहा है कि महाराष्ट्र में कानून व्यवस्था की हालत बेहद खराब है। पालघर में 2 साधुओं की हुई हत्या के मामले में भी महाराष्ट्र सरकार ने कोई कार्रवाई नहीं की। उन्होंने कहा है क्या अखाड़ा परिषद ने पालघर मामले में भी सीबीआई जाँच की माँग की है।

महंत नरेंद्र गिरि ने कहा कि कंगना की इस लड़ाई में साधु-संत और पूरा देश उनके साथ है। साथ ही उन्होंने हिमाचल प्रदेश सरकार को कंगना रनौत को सुरक्षा देने के लिए धन्यवाद दिया है। बता दें कि बुधवार को बीएमसी ने कंगना रनौत के दफ्तर के कुछ हिस्सों को अवैध निर्माण कहते हुए तोड़ दिया था।

सुदर्शन न्यूज के ‘बिंदास बोल’ को मिले ब्रॉडकास्ट करने के निर्देश, जामिया के छात्रों की याचिका पर दिल्ली HC ने लगाई थी रोक

सुदर्शन न्यूज के प्रोग्राम ‘बिंदास बोल’ को आज (सितंबर 10, 2020) ब्रॉडक्रॉस्ट करने के निर्देश सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय की ओर से दे दिए गए। मंत्रालय ने मीडिया संस्थान को यह प्रोग्राम ब्रॉडकास्ट करने से पहले सुनिश्चित करने को कहा कि उसमें किसी संहिता का उल्लंघन न हो।

इससे पहले 28 अगस्त को दिल्ली हाईकोर्ट ने सुदर्शन न्यूज चैनल के प्रोग्राम को प्रसारित करने पर रोक लगाई थी। कोर्ट ने यह फैसला जामिया मिलिया इस्लामिया के छात्रों की याचिका पर लिया था। इस याचिका में आरोप लगाया गया था कि शो में खुलेआम जामिया मिलिया इस्लामिया के छात्रों और मुस्लिम समुदाय के ख़िलाफ़ हेट स्पीच दी जा रही है।

दिल्ली हाईकोर्ट का यह फैसला सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले के बाद आया था, जिसमें सर्वोच्च न्यायालय ने इस प्रोग्राम पर रोक लगाने से मना किया था। सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि विचारों के प्रकाशन या प्रसारण के सम्बन्ध में रोक लगाने वाला निर्णय देने से पहले कोर्ट को सतर्कता बरतनी चाहिए। कोर्ट ने इस मामले में केंद्र सरकार, न्यूज़ ब्रॉडकास्टर्स एसोसिएशन, प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया और ‘सुदर्शन न्यूज़’ को नोटिस भी भेजा था। 

गौरतलब है कि पिछले दिनों सुदर्शन न्यूज के मुख्य संपादक सुरेश चव्हाणके ने ‘ब्यूरोक्रेसी जिहाद’ के खिलाफ अभियान शुरू किया था, जिसमें कई सबूतों के आधार पर सच दिखाने का दावा किया गया था। इस प्रोग्राम के बारे में बताने के लिए उन्होंने सोशल मीडिया पर एक वीडियो भी पोस्ट की थी। जिसके बाद यह पूरा मामला गर्माया।

उन्होंने इस वीडियो में बताया था कि उनका चैनल इस बात का विश्लेषण कर रहा है कि कि दूसरों की तुलना में प्रशासनिक और पुलिस सेवाओं में विभिन्न पदों पर चयनित संप्रदाय विशेष के लोगों की संख्या में अचानक वृद्धि हुई है। उन्होंने अपने वीडियो में चेतावनी दी थी कि, सोचिए, जामिया के जिहादी अगर आपके जिलाधिकारी और हर मंत्रालय में सचिव होंगे तो क्या होगा?