Home Blog Page 4588

सुशांत केस: सुब्रमण्यम स्वामी ने उठाए 2 एम्बुलेंस और 2 सैमुएल पर सवाल, संजय राउत ने कहा- हम चाहते हैं कि सच सामने आए

सुशांत सिंह राजपूत की कथित तौर पर आत्महत्या के मामले में निष्पक्ष जाँच की माँग लगातार बढ़ती जा रही है। भाजपा सांसद सुब्रमण्यम स्वामी ने इस मुद्दे पर कई सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा कि अभिनेता की मृत्यु के बाद दो एम्बुलेंस क्यों बुलाई गई थी? इस बात की जाँच क्यों नहीं होती है कि किसने मौके पर दो एम्बुलेंस बुलाई थी? 

सुब्रमण्यम स्वामी इस मामले में शुरू से सीबीआई जाँच की वकालत कर रहे हैं। इस मामले में ट्वीट करते हुए सुब्रमण्यम स्वामी ने लिखा कि सुशांत के घर का मैनेजर सैमुएल का कुछ अता-पता नहीं है। आखिर दोनों सैमुएल कह क्या रहे हैं? स्वामी ने दो सैमुएल का ज़िक्र किया है, पहला जो सुशांत सिंह राजपूत के साथ साझा तौर पर रहता था। दूसरा जिसे रिया चक्रवर्ती ने सुशांत के घर का मैनेजर बनाया था।   

रिपब्लिक टीवी द्वारा प्रकाशित रिपोर्ट में सुशांत सिंह की मौत के वक्त से संबंधित तीन अलग-अलग जानकारी सामने आ चुकी हैं। एम्बुलेंस मालिक लक्ष्मण बंडगर ने रिपब्लिक टीवी से बात करते हुए इस बारे में जानकारी दी। उसने कहा मुंबई पुलिस शव लेकर गई थी। सिद्धार्थ पिथानी ने कहा था उसने चाक़ू से कपड़ा काटा और सुशांत के शव को उतारा। वहीं अक्षय बंडगर (एम्बुलेंस चालक) का कहना था कि उसने शव उतारा था।   

इसके अलावा स्वामी का कहना है कि सैमुएल की कोई जानकारी नहीं है। सुशांत के घर का मैनेजर सैमुएल मिरांडा पिछली बार 6 अगस्त को नज़र आया था। जब उसे प्रवर्तन निदेशालय ने 9 घंटे तक चली पूछताछ के लिए बुलाया था। वहाँ से निकलने की बाद उसने मीडिया से कोई बातचीत नहीं की थी। इसके पहले उसने बिहार पुलिस को अपना बयान दर्ज कराया था। पड़ोसियों के मुताबिक़ उस दिन के बाद से उसकी कोई जानकारी नहीं मिली है।   

दूसरी तरफ सुशांत सिंह राजपूत के फ़्लैटमेट सैमुएल हाओकिप ने इस मुद्दे पर सीबीआई जाँच की माँग की थी। उसने यह भी कहा था कि वह मीडिया द्वारा दिखाई या बताई जा रही किसी भी जानकारी पर भरोसा नहीं करना चाहता है। सैमुएल ने यह भी कहा था कि उसे सिद्धार्थ पिथानी द्वारा कही गई किसी बात पर भी भरोसा नहीं है। इसलिए वह इस मामले की सीबीआई जाँच चाहता है।           

इसके अलावा संजय राउत ने भी सुशांत सिंह राजपूत मामले पर लगातार महाराष्ट्र सरकार का पक्ष रखा है। इस दौरान उन्होंने कई विवादित बयान भी दिए थे। ताज़ा बयान में संजय राउत ने कहा, “हमें सुशांत सिंह के परिवार के साथ पूरी सहानुभूति है। बीते दिन कही गई मेरी बात का यह मतलब था कि सभी को धैर्य रखना चाहिए। जबकि इसे कुछ ऐसा दिखाया गया जैसे मैं उन्हें धमका रहा हूँ।” 

क्या लोगों को वाकई लगता है कि मैंने कोई धमकी दी थी? मुंबई पुलिस पर भरोसा रखिए अगर उस पर भरोसा नहीं हो तो सीबीआई की जाँच की माँग करिए। इसके अलावा भी संजय राउत ने सुशांत सिंह के मामले पर कई बातें कहीं। उन्होंने कहा सुशांत सिंह हमारे बेटे जैसा था। वह मुंबई में रहता था और एक उम्दा कलाकार था। आखिर हमारी उससे क्या ही दुश्मनी होगी? हम खुद यह चाहते हैं कि इस मौत के पीछे जितने राज़ हों वह बाहर आएँ।     

इसके पहले टाइम्स नाउ की रिपोर्ट के मुताबिक़ संजय राउत अब राजनेताओं से लेकर सुशांत के परिवार तक से चुप रहने की बात कर रहे थे। श‍िवसेना नेता संजय राउत ने कहा था कि यह जाँच अब खत्‍म होने ही वाली है। ऐसे में जब तक जाँच पूरी नहीं हो जाती, सभी को शांत बैठना चाहिए। संजय राउत ने कहा कि सुशांत की फैमिली हो या कोई राजनीतिक दल सभी को शांत बैठना चाहिए।

यहाँ बता दें कि शिवसेना सांसद संजय राउत ने बीते दिनों पार्टी के मुखपत्र सामना में एक लेख लिखा था, जिसमें उन्‍होंने सुशांत के परिवार पर टिप्‍पणी की थी। इसमें उन्‍होंने कहा था कि सुशांत के पिता ने दो शाद‍ियाँ की हैं और दूसरी शादी के बाद से सुशांत और उनके पिता के रिश्‍ते ठीक नहीं थे।

 

शृंगेरी स्थित आदि शंकराचार्य की मूर्ति को इस्लामी झंडे में लपेटा: आरोपित रफ़ीक, साहिल गिरफ्तार, SDPI पर साज़िश का आरोप

कर्नाटक हाल ही में हुए दंगों से उबर ही रहा था कि राज्य का माहौल बिगाड़ने की एक और कोशिश सामने आई है। यह घटना चिकमंगलूर जिले के शृंगेरी में हुई है जहाँ शारदा पीठ स्थित है। आदि शंकराचार्य द्वारा स्थापित 4 अद्वैत और दिव्य पीठों में एक। यह स्थान हिंदू समुदाय के लोगों के लिए बेहद पवित्र मानी जाती है। बुधवार (12 अगस्त 2020) को शृंगेरी स्थित आदि शंकराचार्य की मूर्ति को किसी अज्ञात व्यक्ति ने एक इस्लामिक झंडे से ढँक दिया। उस इस्लामी झंडे पर अरबी भाषा में काफी कुछ लिखा हुआ था।   

ख़बरों के मुताबिक़ श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों को इस घटना की जानकारी एक दिन बाद हुई। जानकारी मिलने के बाद मौके पर काफी भीड़ इकट्ठा हुई और श्रद्धालुओं ने शारदा पीठ की मूर्ति से इस्लामिक झंडा हटाया। इसके बाद लोगों ने इस घटना को लेकर विरोध प्रदर्शन भी किया। इस प्रदर्शन में विधायक डीएन जीवाराज भी शामिल हुए। उनके साथ मौजूद तमाम लोगों ने माँग उठाई कि आरोपितों को गिरफ्तार कर उन पर सख्त कार्रवाई की जाए। विधायक जीवाराज ने यह भी कहा कि यह हरकत SDPI के सदस्यों द्वारा की गई है। उनका उद्देश्य ऐसी घटनाओं को अंजाम देकर शहर का माहौल बिगाड़ना है।   

इसके अलावा भाजपा विधायक ने कहा यह स्थान हिंदुओं के लिए आस्था का प्रतीक माना जाता है। इस हरकत से हिंदुओं में आक्रोश है अगर आरोपित जल्द से जल्द गिरफ्तार नहीं किए जाते हैं तो विरोध प्रदर्शन बड़े पैमाने पर होगा। वहीं पुलिस ने फिलहाल संप्रदाय विशेष के दो युवकों पर मामला दर्ज कर लिया है। इन युवकों का नाम रफ़ीक और साहिल है। क्षेत्र के स्थानीय लोगों ने इन दोनों के खिलाफ़ शिकायत दर्ज कराई है। रफ़ीक नगर पंचायत का सदस्य भी है।   

इस घटना पर कन्नड़, संस्कृति और पर्यटन मंत्री सीटी रवि जो कि इस शहर के मुखिया हैं उन्होंने भी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने इस मुद्दे पर ट्वीट करते हुए लिखा, “मुझे शंकराचार्य की मूर्ति पर इस्लामी झंडा लगाए जाने की ख़बर का पता चला। यह घटना निराशाजनक है, मैंने एसएसपी को इसकी जाँच के आदेश दे दिए हैं।” इसके अलावा उडुपी चिकमंगलूर से भाजपा सांसद शोभा करन्दल्जे ने भी इस घटना पर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने ट्वीट करते हुए गुस्सा जताया और साथ ही आरोपितों को गिरफ्तार करने की माँग उठाई है।   

यह घटना बेंगलुरु में हुए दंगों के ठीक एक दिन बाद हुई है। हैरानी की बात यह है कि बेंगलुरु की घटना में भी भीड़ की अगुवाई SDPI के सदस्यों ने की थी। कर्नाटक के कॉन्ग्रेस विधायक के भतीजे नवीन द्वारा सोशल मीडिया पर पैगम्बर मोहम्मद के कथित अपमानजनक पोस्ट को लेकर कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु में हुए दंगों में उग्र भीड़ द्वारा ‘पुलिसकर्मियों को मार डालो, उन्हें मत छोड़ो, उन्हें खत्म करो’ के नारे भी लगाए गए। नवीन को भी फिलहाल गिरफ्तार किया गया है।

विधायक के आवास और डीजे हाली के एक थाने में संप्रदाय विशेष के उपद्रवियों ने उत्पात मचाया, जिन्होंने कई पुलिस और निजी वाहनों को भी आग लगा दी और लूटपाट भी मचाई। मंगलवार (अगस्त 11, 2020) की शाम कॉन्ग्रेस विधायक अखंडा श्रीनिवास मूर्थी के आवास पर संप्रदाय विशेष के हज़ारों की भीड़ इकट्ठा हुई। कुछ ही देर में भीड़ ने पूरे घर को तबाह कर दिया। इसके बाद डीजे हल्ली और केजी हल्ली पुलिस थाने पर भी जम कर तोड़ फोड़ की। पुलिस द्वारा की गई जवाबी कार्रवाई में कुल 3 लोगों की जान गई थी और 6 लोग घायल हुए थे। दंगे की घटनाओं में 60 पुलिसकर्मी घायल हुए थे जिसमें से 15 नज़दीकी अस्पतालों में भर्ती हैं।  

भीमा कोरेगाँव मामले में DU में अंग्रेजी के प्रोफेसर विजयन को UAPA के तहत नोटिस जारी

भीमा कोरेगाँव मामले में हिंदू कॉलेज, दिल्ली यूनिवर्सिटी के अंग्रेजी विभाग के एक प्रोफेसर, पीके विजयन को पूछताछ के सम्बन्ध में राष्ट्रीय जाँच एजेंसी द्वारा नोटिस भेजा गया है। यह समन भारतीय दंड संहिता (IPC) और गैरकानूनी गतिविधियों (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) के कई सेक्शन के तहत जारी किए गए हैं।

पीके विजयन को एनआईए का नोटिस भीमा कोरेगाँव मामले के संबंध में पूछताछ के लिए भेजा गया है। नोटिस में कहा गया है कि वह सुबह 11 बजे लोधी रोड स्थित एनआईए मुख्यालय में पेश होंगे। जाँच एजेंसी के नोटिस के अनुसार, विजयन को नई दिल्ली में पुलिस उपाधीक्षक, एनआईए के सामने पेश किया जाएगा।

‘द टाइम्स ऑफ इंडिया’ से बात करते हुए, पीके विजयन ने कहा, “मुझे कल सुबह मुख्यालय में बुलाया गया है। यह सिर्फ एक समन नोटिस है, जो मुझे मिला है।” इससे पहले, जुलाई 28, 2020 को एनआईए ने इसी तरह के एक मामले में दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रोफेसर हनी बाबू को गिरफ्तार किया था।

हनी बाबू भी दिल्ली विश्वविद्यालय के अंग्रेजी विभाग में पढ़ाते थे और जाति-विरोधी कार्यकर्ता के रूप में जाने जाते हैं। बाबू के कई छात्रों और नागरिक अधिकार समूहों ने उनकी गिरफ्तारी की आलोचना करते हुए इसे भारत में बुद्धिजीवियों को मौन कराने का प्रयास कहा है।

हनी बाबू और विजयन, 90% विकलांगता वाले एक अंग्रेजी शिक्षक, जीएन साईबाबा की रिहाई के लिए बनाई गई रक्षा समिति के सदस्य हैं, जिन पर वामपंथी संगठनों से सम्बन्ध को लेकर यूएपीए के तहत आरोप लगाया गया है और नागपुर केंद्रीय कारावास में बंद है।

यह पूछे जाने पर कि क्या रक्षा समिति के साथ जुड़ाव के कारण उन्हें बुलाया जा रहा है? विजयन ने कहा, “मुझे इस बारे में पता नहीं है, लेकिन मुझे संदेह है कि यही मामला है।”

भीमा कोरेगाँव मामला

जनवरी 01, 2018 को पुणे के पास भीमा कोरेगाँव में दलितों और मराठों के बीच हिंसा भड़क उठी। दलित समुदाय के लोग करीब 200 साल पहले दलितों और मराठाओं के बीच हुई लड़ाई में दलितों की जीत का जश्न मनाने के लिए वहाँ हर साल इकट्ठा होते हैं। पुलिस का आरोप था कि कार्यक्रम के आयोजकों के नक्सलियों से संबंध थे। 2 जनवरी को दलित संगठनों द्वारा बुलाए गए भारत बंद के दौरान हिंसा में एक व्यक्ति की मौत हो गई।

जनवरी 01, 1818 को ईस्ट इंडिया कपंनी की सेना ने पेशवा की बड़ी सेना को कोरेगाँव में हरा दिया था। पेशवा सेना का नेतृत्व बाजीराव-2 बाद में इस लड़ाई को दलितों के इतिहास में एक खास जगह मिल गई। बीआर अम्बेडकर के समर्थक दलित इस लड़ाई को राष्ट्रवाद बनाम साम्राज्यवाद की लड़ाई न मानकर इस लड़ाई को दलितों की जीत मानते हैं। उनके मुताबिक इस लड़ाई में दलितों के खिलाफ अत्याचार करने वाले पेशवा की हार हुई थी।

2018 इस युद्ध का 200वाँ साल था। इस अवसर पर भीमा कोरेगाँव में आयोजित जनसभा में मुद्दे हिन्दुत्व की राजनीति के खिलाफ थे। इस मौके पर कई तथाकथित बुद्धिजीवियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भाषण भी दिए थे और इसी दौरान अचानक हिंसा भड़क उठी।

SC ने अवमानना मामले में प्रशांत भूषण को ठहराया दोषी: 20 अगस्त को होगी सजा

अवमानना केस में वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण को सुप्रीम कोर्ट ने दोषी करार दिया है। इस मामले में अब 20 अगस्त को सजा सुनाई जाएगी। विवादित ट्वीट मामले में स्वत: संज्ञान लेते हुए सुप्रीम कोर्ट ने वकील प्रशांत भूषण को कोर्ट की अवमानना का दोषी माना है। इस मामले की सुनवाई के दौरान प्रशांत भूषण ने कहा था कि ट्वीट भले ही अप्रिय लगे, लेकिन यह अवमानना नहीं है।

अवमानना के मामले में दोषी पाए जाने पर कंटेम्ट ऑफ़ कोर्ट्स ऐक्ट, 1971 के तहत प्रशांत भूषण को 6 महीने तक की जेल की सज़ा जुर्माने के साथ या इसके बगैर भी हो सकती है। हालाँकि, इसी क़ानून में यह भी प्रावधान है कि यदि अभियुक्त माफ़ी माँग ले तो अदालत चाहे तो उसे माफ़ भी कर सकती है।

सुप्रीम कोर्ट का कहना है कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और अवमानना के बीच एक पतली रेखा है। सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा था, “पहली नज़र में हमारी राय यह है कि ट्विटर पर इन बयानों से न्यायपालिका की बदनामी हुई है और सुप्रीम कोर्ट, और ख़ास तौर पर भारत के चीफ़ जस्टिस के ऑफ़िस के लिए जनता के मन में जो मान-सम्मान है, यह बयान उसे नुक़सान पहुँचा सकते हैं।”

हाल ही में चीफ़ जस्टिस बोबडे के मोटरसाइकिल पर बैठने को लेकर की गई टिप्पणी पर प्रशांत भूषण ने अपने एफिडेविट में कहा था कि पिछले 3 महीने से भी ज़्यादा समय से सुप्रीम कोर्ट का कामकाज व्यवस्थित रूप से न हो पाने के कारण वे परेशान थे और उनकी टिप्पणी इसी बात को जाहिर कर रही थी।

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार (जुलाई 21, 2020) को स्वत: संज्ञान लेते हुए प्रशांत भूषण के खिलाफ अदालत की अवमानना का केस दर्ज किया था। अपने ट्वीट में प्रशांत भूषण ने कहा था, “जब भविष्य में इतिहासकार वापस मुड़कर देखेंगे कि किस तरह से पिछले 6 वर्षों में औपचारिक आपातकाल के बिना ही भारत में लोकतंत्र को नष्ट किया गया है, तो वे विशेष रूप से इस विनाश में सर्वोच्च न्यायालय की भूमिका को चिह्नित करेंगे, और पिछले 4 CJI की भूमिका को और भी अधिक विशेष रूप से।”

22 जुलाई को सर्वोच्च न्यायालय ने प्रशांत भूषण को नोटिस जारी कर पूछा था कि उनके खिलाफ अदालत की अवमानना का मामला क्यों नहीं चलाया जाना चाहिए।

इसके अलावा, सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (अगस्त 10, 2020) को वकील प्रशांत भूषण के खिलाफ 2009 का आपराधिक अवमानना मामला खारिज करने से इनकार कर दिया। 11 साल पुराने इस केस में कोर्ट ने प्रशांत भूषण की स्पष्टीकरण और माफ़ी माँगने से इनकार कर दिया है।

ज्ञात हो कि यह केस प्रशांत भूषण की ओर से तहलका पत्रिका को दिए गए इंटरव्यू को लेकर है। इसमें उन्होंने आरोप लगाया था कि भारत के पिछले 16 मुख्य न्यायाधीशों में से आधे भ्रष्ट थे। तरुण तेजपाल उस समय तहलका पत्रिका के संपादक थे। मामले की अगली सुनवाई 17 अगस्त को होगी।

नेपाल के रुई गाँव पर चीन के कब्ज़े का खुलासा करने वाले पत्रकार बलराम बनिया का मिला शव: संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत

नेपाल के 50 वर्षीय पत्रकार बलराम बनिया मंगलवार (11 अगस्त 2020) को मृत पाए गए थे। उनका शरीर मकवानापुर, सिसनेरी के मंडो हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट के पास बरामद किया गया था। लगभग 2 महीने पहले उन्होंने नेपाल के रुई गाँव पर चीन के कब्ज़े की ख़बर तैयार की थी। ख़बरों के मुताबिक़ बलराम सोमवार तक अपने परिवार से संपर्क में थे।   

बलराम ने अंतिम बातचीत अपने दफ्तर में कॉन्ग्रेस नेता राम चंद्र पौडेल के संबंध में की थी। उनका शरीर बागमती नदी में बालखु पुल के पास तैरता हुआ पाया गया था। जिसके बाद उन्हें हेतौडा अस्पताल लेकर जाया गया था। उनका शव एक दिन पहले यानी मंगलवार को ही बरामद कर लिया गया था।   

फिर भी पुलिस ने शव की पहचान करने के लिए 1 दिन का समय लगाया। बलराम बनिया के परिवार में उनकी पत्नी और एक बेटा-बेटी भी मौजूद हैं। वह ‘कान्तिपुर डेली’ नाम के अखबार में काम करते थे। बलराम ने राजनीति, संसद, नौकरशाही, गवर्नेंस, ऊर्जा, हाइड्रो पावर जैसे अहम मुद्दों पर पत्रकारिता की। 

ख़बरों के मुताबिक़ चीन ने रुई नामक गाँव पर कब्ज़ा किया है। यह नेपाल के गोरखा जिले में स्थित है। इस ख़बर को सबसे पहले बलराम बनिया ही सामने लेकर आए थे। जबकि तिब्बत और चीन दोनों इस गाँव को लेकर दावे करते हैं। चुम्बुल नगरपालिका वार्ड संख्या 1 के राष्ट्रपति बीर बहादुर लामा ने इस बात की पुष्टि की थी। गाँव के लोगों ने नेपाल सरकार के साथ ज़मीन का रेवेन्यू साझा किया था।   

इसके बावजूद यहाँ तिब्बत और चीन की तरफ से अतिक्रमण हुआ था। खबरहब ने इस संबंध में रिपोर्ट भी प्रकाशित की थी। उन्होंने अपनी रिपोर्ट में बताया था कि समदो और रुई गाँव के बीच पिलर नंबर 35 बनाया गया था। इस पिलर के पुनर्निर्माण का काम शुरू हुआ। तमाम विरोधों के बावजूद चीन ने इस गाँव पर कब्ज़ा कर लिया।       

अभी तक सामने आई ख़बरों के मुताबिक़ फेडरेशन ऑफ़ नेपाली जर्नलिस्ट, फ्रीडम फोरम और नेपाल प्रेस यूनियन ने पत्रकार बलराम की हत्या पर जाँच की माँग उठाई है। समूह के प्रतिनिधियों का कहना है कि वह चाहते हैं पत्रकार की रहस्यमयी परिस्थितियों में हुई मृत्यु की जाँच की जाए। नेपाल प्रेस यूनियन का इस मुद्दे पर यह भी कहना था कि बलराम के शरीर पर कई घाव के निशान थे। नेपाल प्रेस यूनियन के सचिव अजय बाबू शुवाकोटी ने इस मुद्दे पर कहा कि वह जिस तरह के विषय उठाते थे। उसका इस मृत्यु से संबंध ज़रूर हो सकता है।   

बलराम बनिया के साथियों का कहना है कि वह बेहद ईमानदार,सहज और मृदुभाषी थे। इसके अलावा पत्रकारिता के सिद्धांतों से समझौता नहीं करते थे। वह फेडरेशन ऑफ़ नेपाली जर्नलिस्ट के सचिव भी रह चुके हैं। कान्तिपुर के संपादक का कहना था कि बलराम अपने काम को लेकर जुझारू स्वभाव के व्यक्ति थे। उन्हें नेपाल के तंत्र और राजनीति की अच्छी भली समझ थी। इसके अलावा उन्होंने कहा, “मुझे हमेशा बलराम की ज़रूरत महसूस होती थी जब किसी अहम मुद्दे पर सवाल तैयार करने होते थे। उसके जैसा काम करने वाला बहुत मुश्किल से मिलता है।”

श्रीनगर में सुरक्षाबलों पर आतंकी हमले में 2 जवान वीरगति को प्राप्त, 1 घायल: आतंकियों की तलाश जारी

जम्मू-कश्मीर में आतंकियों ने एक बार फिर भारतीय सुरक्षाबलों को निशाना बनाया है जिसमें 2 जवान वीरगति को प्राप्त हुए हैं, जबकि एक जवान घायल है। शुक्रवार (अगस्त 14, 2020) सुबह श्रीनगर के बाहरी इलाके में नौगाम बाईपास पर आतंकियों ने पुलिस पार्टी पर हमला किया। इस आतंकी हमले के पीछे कौनसा आतंकी संगठन जिम्मेदार है, इस बारे में अभी जानकारी आनी बाकी हैं।

पुलिस ने एक ट्वीट में लिखा, “आतंकवादियों ने नौगाम बाईपास के पास पुलिस पार्टी पर अंधाधुंध गोलीबारी की, जिसमें तीन पुलिसकर्मी घायल हो गए।”

आतंकवादियों ने शुक्रवार सुबह श्रीनगर शहर के गुलशन चौक नौगाम इलाके में एक गश्ती पार्टी पर गोलीबारी की। रिपोर्ट्स के अनुसार, घायल पुलिसकर्मियों को पीसीआर अस्पताल श्रीनगर ले जाया गया, जहाँ उनमें से दो को मृत घोषित कर दिया गया। उनकी पहचान 715 आईआरपी 20 बटालियन के इश्फाक अयूब और 307 आईआरपी 20 बटालियन के फैयाज अहमद के रूप में की गई है।

इन दो के अलावा, तीसरे जवान के दाहिने हाथ में गोली लगने से घायल हुए सिपाही की पहचान सेलेक्शन ग्रेड कांस्टेबल मुहम्मद अशरफ के रूप में हुई है। घटना के बाद इस इलाके को बंद कर दिया गया है और तलाशी अभियान जारी है।

हाल ही में आतंकियों ने बारामूला के सोपोर में एक सेना की पेट्रोलिंग पार्टी को निशाना बनाया था, जिसमें एक जवान के घायल होने की सूचना सामने आई थी। आतंकवादियों ने सेना, CRPF और पुलिस की संयुक्त नाका पार्टी पर ह्यागम में एक होटल के पास फायरिंग की, जिसकी जवाबी कार्रवाई में सुरक्षाबलों ने भी फायर किया, लेकिन आतंकवादी वहाँ से भागने में सफल रहे। 

कर्नाटक में अंजनेय स्वामी मंदिर में जीसस-मैरी की तस्वीर लगाने का वायरल क्लेम: पुलिस और पुजारी ने किया दावे को ख़ारिज

एक कन्नड़ वेब पोर्टल की रिपोर्ट में किए गए दावे के अनुसार, कर्नाटक के चामराजनगर की एक नई पुलिस अधीक्षक (SP) दिव्या सारा थॉमस ( Divya Sara Thomas) कथित रूप से मंदिर में यीशु और मैरी की तस्वीर लगाने और उनकी पूजा करने के लिए अंजनेय स्वामी मंदिर के पुजारी पर दबाव बनाया गया है। जबकि अब नई सूचनाओं के आलोक में यह दावा गलत साबित हुआ है।

इससे पहले बताया जा रहा था कि पुलिस अधिकारी उस समय अपने हाथों में जीसस और मैरी की फोटो लिए हुए थी, जब वह मंदिर में दर्शन करने गई। आखिरकार, पुजारी ने अधिकारी के दबाव के आगे झुक कर गर्भगृह में जीसस और मेरी की तस्वीर लगानी पड़ी। लेकिन पुलिस के बयान के अनुसार, दरअसल, मंदिर प्रशासन द्वारा ही वह तस्वीर SP दिव्या थॉमस को कई अन्य उपहारों के साथ दिया गया था।

ज्ञात हो कि 2013 के कर्नाटक बैच की आईपीएस अधिकारी दिव्या सारा थॉमस ने इसी साल जुलाई माह में कर्नाटक चामराजनगर में पहली महिला पुलिस अधीक्षक के रूप में पदभार सँभाला है। वह पहले बेंगलुरु में केंद्रीय सशस्त्र रिजर्व बल में डीसीपी के पद पर थीं।

यह घटना 5 अगस्त की ही बताई जा रही है, जिस दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अयोध्या में राम मंदिर का भूमिपूजन किया। इस अवसर पर, विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल के स्वयंसेवकों ने भूमिपूजन की विशेष पूजा का आयोजन किया था।

इस अनुष्ठान के बाद ही मंदिर में जीसस और मैरी की तस्वीर लगाने के दावे के साथ बहुत सारे ट्वीट में यह अधूरी सूचना साझी की गई थी जो कि बाद में वायरल हो गया। वायरल होने के बाद अब मंदिर प्रशासन और पुलिस ने जीसस और मैरी की तस्वीरें लगाने की भ्रामक दावे पर स्पष्टीकरण देकर सच उजागर किया है। जिसके बाद नवीनतम जानकारी के आधार पर यह पोस्ट अपडेट की गई है।

कर्नाटक पुलिस ने तस्वीर लगाने के दावे को ख़ारिज करते हुए, इस घटना का सच बताने के उद्देश्य से अपने बयान में कहा, “SP जब मंदिर गई थीं तो अपने साथ कोई तस्वीर लेकर नहीं गई थी। बल्कि जीसस और मैरी की तस्वीर को मंदिर प्रशासन ने ही उन्हें अन्य हिन्दू देवी-देवताओं की तस्वीरों के साथ अनुष्ठान समाप्त होने के बाद उपहार स्वरुप दिया गया था।”

अतः अब यह स्पष्ट है कि वायरल दावे में कोई सच्चाई नहीं है। तो ऑपइंडिया ने भी अपनी यह रिपोर्ट जो वायरल क्लेम और कई दूसरे मीडिया रिपोर्ट के आधार पर थी। उसमें अपडेट किया है।

अपडेट: यह खबर नई सूचनाओं के आधार पर अगस्त 15, 2020, समय- 6 PM पर अपडेट की गई है।

अतीक अहमद पर योगी सरकार सख्त: प्रयागराज की 7 संपत्तियों की कुर्की के आदेश, हथियार लाइसेंस भी होगा रद्द

उत्तर प्रदेश की योगी सरकार की तरफ से अपराधियों और माफियाओं पर कार्रवाई जारी है। पिछले कुछ समय में योगी सरकार ने राज्य के कई ऐसे नामों पर शिकंजा कसा है। जो अपराध की दुनिया में जाने-पहचाने नाम थे और राजनीति से भी अच्छा भला संबंध रखते थे। इस कड़ी में योगी सरकार ने पूर्व बाहुबली सांसद अतीक अहमद पर कार्रवाई की है। उत्तर प्रदेश के प्रयागराज जिले में अतीक अहमद की तमाम अवैध संपत्तियाँ हैं। योगी सरकार ने इन संपत्तियों की कुर्की के आदेश जारी किए हैं।   

न्यूज़ 18 में प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक़ प्रयागराज जिला प्रशासन ने अतीक अहमद की कुल 7 अचल संपत्तियों को कुर्की करने के निर्देश जारी किए हैं। प्रयागराज के जिलाधिकारी भानु चन्द्र गोस्वामी ने उत्तर प्रदेश की बंद एवं समाज विरोधी क्रियाकलाप निवारण अधिनियम की धारा-14 (1) के अंतर्गत अतीक अहमद की कुल सात सम्पत्तियों (अवैध) को कुर्क करने का आदेश जारी किया है। इस आदेश में चकिया में स्थित तीन मकान, कालिंदीपुरम में स्थित एक मकान, ओमप्रकाश सभासद नगर में एक मकान, सिविल लाइन में एक मकान और कर्बला में एक मकान शामिल है।    

इन मकानों में मकान नं0-95 डी/1/3 चकिया थाना खुल्दाबाद, मकान नं0-3/6डी/1 कर्बला थाना खुल्दाबाद, मकान नं0-95 डी/4 चकिया थाना खुल्दाबाद, मकान नं0-95 सी/57के/1 चकिया थाना खुल्दाबाद, मकान नं0-24 एमआईजी कालिंदीपुरम थाना धूमनगंज, मकान नं0-197/39 महात्मा गाँधी मार्ग थाना सिविल लाइन्स, मकान नं0-95/51 ओम प्रकाश सभासद नगर शामिल हैं। अतीक अहमद की संपत्तियों को कुर्क किए जाने की संस्तुति पहले ही जारी कर दी गई थी। एसएसपी अभिषेक दीक्षित ने अपनी रिपोर्ट में यह संस्तुति जारी की थी। संस्तुति की रिपोर्ट को आधार बनाते हुए जिलाधिकारी ने अतीक अहमद की अचल संपत्तियों को कुर्क करने का आदेश जारी किया था।     

जिलाधिकारी ने प्रभारी निरीक्षक थाना खुल्दाबाद को मकान नं0-95 डी/1/3, मकान नं0-95 डी/4, मकान नं0-95 सी/57के/1 और मकान नं0-3/6डी/1 की अचल सम्पत्तियों का प्रशासक नियुक्त किया है। इसके अलावा प्रभारी निरीक्षक थाना सिविल लाइन्स को मकान नं0-197/39 महात्मा गांधी मार्ग की अचल सम्पत्ति का प्रशासक नियुक्त किया है।   

जबकि प्रभारी निरीक्षक थाना धूमनगंज को मकान नं0-95/51 ओम प्रकाश सभासद नगर और मकान नं0-24 एमआईजी कालिंदीपुरम की अचल सम्पत्ति का प्रशासक नियुक्त किया है। इसके बाद जिलाधिकारी भानु चंद्र गोस्वामी ने यह भी स्पष्ट किया है कि अतीक अहमद की इन संपत्तियों को कुर्क करने के आदेश का अनुपालन 28 अगस्त के पहले करना है।   

इतना ही नहीं जिलाधिकारी ने अतीक अहमद के पास मौजूद हथियारों को लेकर भी अहम आदेश जारी किया है। उन्होंने अतीक अहमद समेत आपराधिक पृष्ठभूमि वाले कुल 23 लोगों के शास्त्र लाइसेंस रद्द करने का आदेश दिया है। जिलाधिकारी ने इन 23 लोगों पर लगाई गई तमाम गंभीर धाराओं को आधार बनाते हुए इनके हथियार का लाइसेंस निरस्त करने की संस्तुति जारी की। इस मामले में भी एसएसपी की रिपोर्ट का हवाला लिया गया है।   

बेंगलुरु हिंसा मामले में कॉन्ग्रेस पार्षद का पति कलीम पाशा गिरफ्तार: सामने आया SDPI-कॉन्ग्रेस कनेक्शन, SDPI पर बैन की तैयारी

कर्नाटक के पूर्व मंत्री और कॉन्ग्रेस नेता केजे जॉर्ज के करीबी सहयोगी कलीम पाशा को बेंगलुरु हिंसा के सिलसिले में गिरफ्तार किया गया है। दरअसल, आरोपित कलीम पाशा की पत्नी इरशाद बेगम कॉन्ग्रेस पार्टी की पार्षद हैं। इस हिंसा के पीछे PFI समर्थित संगठन SDPI और कॉन्ग्रेस के गठजोड़ की आशंका भी जताई जा रही है क्योंकि कलीम पाशा के कॉन्ग्रेस से बहुत अच्छे संबंध हैं।

बेंगलुरु के संयुक्त पुलिस आयुक्त (अपराध) संदीप पाटिल ने कहा कि बेंगलुरु में 11 अगस्त की हिंसा के सिलसिले में 60 और लोगों को गिरफ्तार किया गया है, जिसमें कलीम पाशा को मिलाकर हिरासत में लिए गए लोगों की कुल संख्या 206 हो चुकी है।

4 SDPI सदस्य गिरफ्तार

बेंगलुरु हिंसा की जाँच के लिए चार टीमों का गठन किया गया है, जिसमें तीन लोग मारे गए और लगभग 60 पुलिसकर्मियों को चोटें आईं।

संप्रदाय विशेष की भीड़ द्वारा किए गए दंगों के पीछे सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया (SDPI) की भूमिका भी संदेह के घेरे में है और उपमुख्यमंत्री सीएन अश्वथ नारायण के अनुसार, हिंसा के संबंध में इसके 4 सदस्यों को गिरफ्तार किए जाने के बाद सरकार SDPI पर प्रतिबंध लगाने पर भी विचार कर रही थी।

नारायण ने कार्यालय द्वारा जारी एक विज्ञप्ति में कहा, “पहले की घटनाओं (एसडीपीआई को मिलाकर) के सबूत हैं। सरकार ऐसे संगठनों पर प्रतिबंध लगाने का साहसिक निर्णय लेगी। आवश्यक साक्ष्य एकत्र करने के बाद सरकार इस संगठन पर प्रतिबंध लगाने के लिए कदम उठाएगी।”

पुलिस द्वारा दर्ज की गई FIR के अनुसार, 5 लोगों के एक गिरोह ने 200 से 300 लोगों की भारी सशस्त्र भीड़ का नेतृत्व किया और उन्हें पुलिस अधिकारियों से मुठभेड़ करने के लिए कहा।

कर्नाटक के कॉन्ग्रेस विधायक के भतीजे नवीन द्वारा सोशल मीडिया पर पैगम्बर मोहम्मद के कथित अपमानजनक पोस्ट को लेकर कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु में हुए दंगों में उग्र भीड़ द्वारा ‘पुलिसकर्मियों को मार डालो, उन्हें मत छोड़ो, उन्हें खत्म करो’ के नारे भी लगाए गए। नवीन को भी फिलहाल गिरफ्तार किया गया है।

विधायक के आवास और डीजे हाली के एक थाने में संप्रदाय विशेष उपद्रवियों ने उत्पात मचाया, जिन्होंने कई पुलिस और निजी वाहनों को भी आग लगा दी और लूटपाट भी मचाई। मंगलवार (अगस्त 11, 2020) की शाम कॉन्ग्रेस विधायक अखंडा श्रीनिवास मूर्थी के आवास पर संप्रदाय विशेष की हज़ारों की भीड़ इकट्ठा हुई।

कुछ ही देर में भीड़ ने पूरे घर को तबाह कर दिया। इसके बाद डीजे हल्ली और केजी हल्ली पुलिस थाने पर भी जम कर तोड़ फोड़ की। पुलिस द्वारा की गई जवाबी कार्रवाई में कुल 3 लोगों की जान गई थी और 6 लोग घायल हुए थे। दंगे की घटनाओं में 60 पुलिसकर्मी घायल हुए थे जिसमें से 15 नज़दीकी अस्पतालों में भर्ती हैं।  

पूर्व सपा नेता शाहजेब रिजवी ने कॉन्ग्रेस के दलित विधायक के भतीजे का सर कलम करने पर रखा ₹51 लाख का इनाम

नेता शाहजेब रिजवी (Shahzeb Rizvi) ने गुरुवार (13 अगस्त, 2020) को एक विवादित वीडियो पोस्ट करते हुए बेंगलुरु में कॉन्ग्रेस के दलित विधायक के भतीजे नवीन का सिर काटने पर 51 लाख रुपया का इनाम रखा है। बता दें नवीन ने पैगम्बर मोहम्मद के खिलाफ़ आपत्तिजनक पोस्ट किया था। सोशल मीडिया पर यह वीडियो इस वक्त तेजी से वायरल हो रहा है।

शाहजेब रिजवी ने अपने विवादित वीडियो में कहा, “फेसबुक पोस्ट के माध्यम से उसनें हुजूर के शान में जो गुस्ताखी की है, मैं उसकी कड़ी शब्दों में निंदा करता हूँ, रिजवी ने ऐलान किया की इस युवक जो सर कलम करके लाएगा उसे मैं 51 लाख का नगद ईनाम दूँगा। रिजवी ने संप्रदाय विशेष के लोगों से अपील की है कि सब मिलकर 51 लाख रुपए जमा करो।”

हिंदुस्तान की रिपोर्ट के मुताबिक शाहजेब रिजवी उत्तरप्रदेश के मेरठ में फलावदा थाना क्षेत्र के रसूलपुर गाँव के रहने वाला हैं। वह पहले समाजवादी पार्टी का अल्पसंख्यक सभा के प्रदेश सचिव रह चुका है। लेकिन इस वक्त वह सपा में सक्रिय नहीं हैं। पिछली बार जिला पंचायत के चुनाव में वह हार गया था।

फिलहाल मेरठ पुलिस रिजवी की धरपकड़ में जुट गई है। इस विवादित वीडियो को एसएसपी अजय साहनी ने संज्ञान में लेते हुए थाना अधिकारियों को जाँच के आदेश दिए है। पुलिस मामले की तहकीकात में जुट गई है।

गौरतलब है कि कॉन्ग्रेस विधायक श्रीनिवास मूर्ति के भतीजे नवीन के फेसबुक पोस्ट को लेकर सारा विवाद शुरू हुआ था। उस पर पैगम्बर मुहम्मद को लेकर विवादित पोस्ट डालने का आरोप है।

बेंगलुरु दंगों में शामिल अब तक हिंसा करने वालों में से 150 को गिरफ्तार किया गया है। बेंगलुरु के पुलिस कमिश्नर कमल पंत ने लोगों को शांति बनाए रखने की अपील की है। इस घटना में 3 लोग मारे गए और 60 पुलिसकर्मी घायल हुए हैं। इसके साथ ही दंगाइयों ने 250 के करीब गाड़ियों को आग लगा दी और करोड़ों की संपत्ति को नुकसान पहुँचया है।

बता दें कि 200-300 के क़रीब की संप्रदाय विशेष की भीड़ ने न सिर्फ कॉन्ग्रेस विधायक अखंड श्रीनिवास मूर्ति के घर पर तोड़फोड़ की थी बल्कि बाहर खड़ी गाड़ियों को भी जला डाला था। विधायक आवास में तोड़फोड़ का नज़ारा अभी भी देखा जा सकता है। दंगाइयों ने मजहबी नारे लगाते हुए पत्थरबाजी और आगजनी की। जिसके बाद कर्नाटक के गृहमंत्री बोम्मई ने एक महत्वपूर्ण घोषणा करते हुए कहा था कि सार्वजनिक संपत्ति और वाहनों को नुकसान की भरपाई क्षति पहुँचाने वाले दंगाइयों को करना होगा।