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सुशांत सिंह केस: रिया चक्रवर्ती और बिहार सरकार ने कोर्ट में दाखिल की लिखित दलीलें, CBI ने जाँच जारी रखने की माँगी अनुमति

सुशांत सिंह केस में अदालत की ओर से सभी पक्षों को गुरुवार (अगस्त 13, 2020) तक लिखित दलीलें दाखिल कराने को कहा गया था। बिहार सरकार, सीबीआई तथा रिया च्रकवर्ती ने अपने-अपने जवाब आज कोर्ट में दाखिल कर दिए। अब कोर्ट कभी भी इस मामले में अपना फैसला सुना सकती है।

एक तरफ जहाँ रिया ने पटना में दायर एफआईआर को मुंबई ट्रांसफर करने की बात कही है। तो वहीं, दूसरी ओर सीबीआई ने कोर्ट से जाँच जारी रखने की अनुमति माँगी है। सीबीआई ने इस मामले में ईडी की जाँच को भी जारी रखने की अनुमति देने का आग्रह कोर्ट से किया है।

बिहार सरकार ने अपनी लिखित दलील में कहा है कि सुशांत के मामले में अब तक सिर्फ उनकी तरफ से ही एफआईआर दर्ज की गई है। इसके साथ ही उन्होंने ट्रांसफर याचिका निष्प्रभावी बताते हुए खारिज करने की अपील की है। अपनी दलील में बिहार सरकार ने यह भी आरोप लगाया कि मुंबई पुलिस राजनीतिक दबाव में है। इसी की वजह से वे इस मामले में कोई एफआईआर दर्ज नहीं कर रहे है।

बीते दिनों बिहार से मुंबई गई पुलिस के साथ किए गए बरताव का भी उल्लेख करते हुए दलील में कहा गया कि मुंबई पुलिस ने किसी भी प्रकार से बिहार पुलिस की मदद नहीं की। बिहार पुलिस ने कानून के दायरे में रहकर अपने क्षेत्राधिकार में ये एफआईआर दर्ज की है क्योंकि ये शिकायत एक संज्ञेनीय अपराध की थी।

अब आगे कोर्ट को तय करना है कि मामले की जाँच CBI या मुंबई पुलिस में से कौन करेगा। बता दें कुछ समय पहले जहाँ रिया ने ट्वीट कर सीबीआई जाँच की माँग की थी वहीं अब वे इसका विरोध कर रहीं है। दूसरी ओर बिहार सरकार, सुशांत के पिता और लाखों फैन सीबीआई जाँच का समर्थन कर रहे हैं। महाराष्ट्र सरकार लगातार इस मामले को घुमा फिर कर इसमें सीबीआई जाँच नहीं करवाना चाहती है।

इस बीच सुशांत की बहन श्वेता सिंह कीर्ति ने इंस्टाग्राम पर अपना एक फोटो पोस्ट किया है, जिसमें वे हाथ में व्हाइट बोर्ड लिए नजर आईं। इस पर लिखा है- “मैं सुशांत सिंह राजपूत की बहन श्वेता सिंह राजपूत हूँ और मैं सीबीआई जाँच की माँग करती हूँ।”

श्वेता ने इस फोटो के साथ लिखा- “यह ऐसा समय है जब हमें सच्चाई का पता लगाकर न्याय पाना है। सच सामने लाने में हमारी और हमारे परिवार की मदद करें, वरना हम कभी शांति से जी नहीं सकेंगे। अपनी आवाज उठाएँ और सुशांत के लिए सीबीआई जाँच की माँग करें।”

सुशांत सिंह राजपूत केस

14 जून को सुशांत अपने मुंबई स्थित फ्लैट में मृत मिले थे। इस मामले में मुंबई पुलिस की जाँच से असंतुष्‍ट सुशांत के पिता ने पटना में एफआईआर दर्ज कराई। इसमें उन्‍होंने बेटे की गर्लफ्रेंड रिया चक्रवर्ती व उनके परिवार पर धन उगाही, ब्‍लैकमेल, सुसाइड के लिए उकसाने आदि जैसे कई गंभीर आरोप लगाए। इस मामले की जाँच के लिए जब बिहार पुलिस मुंबई पहुँची तो वहाँ उसे असहयोग का सामना करना पड़ा।

फिर, बिहार सरकार की सिफारिश पर केंद्र सरकार ने यह जाँच सीबीआइ को सौंप दी। वहीं अब सोशल मीडिया पर स्टन गन थ्योरी सामने आई है, जिसे एक यूजर ने सोशल मीडिया पर डाला। इस थ्योरी को मद्देनजर रखते हुए बीजेपी सांसद सुब्रमण्यम स्वामी ने सुशांत सिंह राजपूत मृत्यु मामले की एनआईए जाँच की माँग की है। वहीं शेखर सुमन ने रिया के खिलाफ आवाज बुलंद करते हुए उसकी गिरफ्तारी की माँग की थी।

गौरतलब है कि सीबीआई तमाम मुद्दों पर रिया से पूछताछ कर रही हैं। वहीं रिया चक्रवर्ती का कॉल डिटेल रिकॉर्ड अब सीबीआई के रडार पर है। सीबीआई को रिया के कॉल लॉग से पता चलता है कि उन्होंने किसी शख्स का नाम ‘AU’ से सेव किया है।

नंबर और रिया चक्रवर्ती के बीच 44 आउटगोइंग कॉल थे। हालाँकि, जब कोई नंबर पर कॉल करता है, ‘SU’ नाम का शख्स रिसीव करता है। फिलहाल, सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) मामले की जाँच कर रही है। ऐसे में यह देखना बाकी है कि यह व्यक्ति कौन है और क्या व्यक्ति किसी भी तरह से उक्त मामले में शामिल था।

‘कुछ फेक मीडिया वाले आकर यहाँ धर्म के नाम पर खेलना चाहते थे’: कारवाँ और द वायर की पोल खोलता सुभाष मोहल्ले का फखरुद्दीन

उत्तर पूर्वी दिल्ली के सुभाष मोहल्ला से एक फखरुद्दीन नामक व्यक्ति का वीडियो सामने आया है। वीडियो में उसे कहते सुना जा सकता है कि कुछ फेक मीडिया वालों ने वहाँ जाकर धर्म के नाम पर खेल करने का प्रयास किया। वह लोग तो बरसों से वहाँ प्रेम से रहते हैं।

याद दिला दें, ये फखरुद्दीन उसी सुभाष मोहल्ले के निवासी हैं जो राम मंदिर भूमिपूजन के बाद चर्चा में आया। इस मोहल्ले को लेकर वामपंथी मीडिया ने दावा किया था कि यहाँ संप्रदाय विशेष पर ज्यादतियाँ होती हैं। उन्हें दबाया जाता है। उन्हें खौफ में रखा जाता है।

कारण- एक शन्नो नाम की महिला की शिकायत थी। जिसके हवाले से द वायर ने अपनी रिपोर्ट में कई अनर्गल दावे कर दिए थे। हालाँकि, जब ऑपइंडिया ने अपनी पड़ताल की तो मालूम चला कि वहाँ वैसा कुछ नहीं हुआ जैसा रिपोर्ट में बताया गया। बल्कि रिपोर्ट के उलट पूछताछ में ये पता चला कि मोहल्ले के कुछ लोगों ने उस महिला के ख़िलाफ़ माहौल बिगाड़ने का आरोप लगाया है। जिसमें फकरुद्दीन भी एक शिकायतकर्ता है।

हमने इस पूरे मामले पर शन्नो की शिकायत, पुलिस के बयान, मोहल्ले वालों की शिकायत के साथ आपके समक्ष एक विस्तृत रिपोर्ट पेश की थी।

इस घटना के अलावा द कारवाँ ने भी अपनी रिपोर्ट में दावा किया था कि उनके पत्रकार के साथ इस मोहल्ले में घेरकर बदसलूकी हुई।

अब इसी मोहल्ले की हकीकत और द वायर व कारवाँ जैसे मीडिया पोर्टलों की सच्चाई को उजागर करते फखरुद्दीन की वीडियो सामने आई है। फखरुद्दीन को इस वीडियो में कहते सुना जा सकता है कि वह सुभाष मोहल्ले में 16 बरसों से रह रहे हैं। वह बताते हैं कि यहाँ कुछ फेक मीडिया वाले आए। जो खुद को पत्रकार बता रहे थे।

फकरुद्दीन के अनुसार, “जब उनसे आईडी के बारे में पूछा गया तो उन्होंने दिखाने से मना कर दिया। वह यहाँ का माहौल बिगाड़कर धर्म के नाम पर खेल करवाना चाह रहे थे। हम यहाँ बरसों से रह रहे हैं। यहाँ सभी प्यार से रहते हैं यहाँ ऐसा कुछ नहीं है। यहाँ सभी मिलजुल कर रहते हैं।”

पंचजन्य की रिपोर्ट में एक नियाज मोहम्मद नाम के व्यक्ति का जिक्र है। रिपोर्ट के अनुसार नियाज कहते हैं, “हम यहाँ 25 बरसों से रह रहे हैं। हिंदू और इस्लाम को मानने वाले दोनों मिलजुल कर रहते हैं। कभी किसी तरह की कोई लड़ाई यहाँ नहीं हुई। सभी बहुत शांति से रहते हैं। यहाँ कुछ मीडिया वाले आए थे और यहाँ का माहौल बिगाड़ने की कोशिश कर रहे थे। जब उन्हें रोका गया तो उन्होंने लोगों ने बहस की।”

गौरतलब है कि शन्नो का मामला सामने आने के बाद और द वायर की रिपोर्ट देखकर इस बारे में हमारी ओर से भजनपुरा थाने के एसएचओ की संपर्क किया गया था। SHO अशोक शर्मा ने कहा था कि इस इलाके में हिंदू और संप्रदाय विशेष दोनों लोग रहते हैं। उन्होंने पटाखे भी फोड़े। अब वे हमें उन लोगों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए कह रहे हैं। जब राष्ट्र में हर कोई जश्न मना रहा है, दीया जला रहा है और पटाखे फोड़ रहा है, तो फिर मुद्दा क्या है?

SHO शर्मा ने कहा कि यह एक समस्या तब होती, जब उनके घर के दरवाजे पर यह किया गया होता, दीया जलाना और केसरिया झंडे लगाना कोई अपराध नहीं है। अशोक शर्मा ने कहा है कि इस विषय में स्थानीय लोगों के साथ बात करने पर ही पता चल पाएगा कि यह मुद्दा क्या है और यदि कोई विवाद है तो क्या यह आपसी बातचीत से हल किया जा सकता है।

चीन के ग्लोबल टाइम्स ने जम्मू-कश्मीर मुद्दे पर छापा पाकिस्तानी प्रोपेगेंडा: गायब किया भारत का पक्ष, पढ़ें पूरा मामला

पिछले कुछ समय में चीन ने भारत के खिलाफ़ षड्यंत्र रचने का कोई मौक़ा नहीं छोड़ा है। सबसे ताज़ा घटना में भी कुछ ऐसा ही हुआ है। चीन के समाचार समूह ग्लोबल टाइम्स ने पाकिस्तान के राजदूत मोईन उल हक़ का एक साक्षात्कार प्रकाशित किया है। इस साक्षात्कार में पाकिस्तानी दूत ने जम्मू कश्मीर के हालात बताने का प्रयास किया है। लेकिन दूसरी तरफ ग्लोबल टाइम्स ने इस मुद्दे पर भारत का पक्ष प्रकाशित नहीं किया है।  

ग्लोबल टाइम्स का पाकिस्तानी प्रोपोगैंडा

ग्लोबल टाइम को दिए साक्षात्कार में पाकिस्तान राजदूत मोईन उल हक़ ने जम्मू कश्मीर के तमाम पहलुओं पर अपना पक्ष रखा है। मोईन ने कहा, “सिर्फ इस साल के अंदर लगभग 200 निर्दोष कश्मीरियों की हत्या हुई है। 50 से अधिक दुष्कर्म और शोषण के मामले सामने आए हैं। तकरीबन 1000 घरों को तबाह कर दिया गया है। लगभग 2200 आम नागरिकों को गिरफ्तार किया जा चुका है।  

जम्मू कश्मीर में स्थानीय नागरिकों और सेना के बीच होने वाले टकराव पर संयुक्त राष्ट्र ने जून में एक रिपोर्ट तैयार की थी। उस रिपोर्ट में लगभग 15 बच्चों की मृत्यु की जानकारी दी हुई थी जिनकी उम्र 1 साल से लेकर 17 साल तक थी। रिपोर्ट में यह भी कहा गया था कि यह जानें केंद्रीय सुरक्षा बल, भारतीय सेना (राष्ट्रीय राइफल) और जम्मू कश्मीर पुलिस द्वारा चलाए गए अभियान के दौरान हुई हैं।  

इसके अलावा 68 ऐसी घटनाएँ भी सामने आई हैं  जिसमें कम उम्र के बच्चों की गिरफ्तारी हुई है। साथ ही सुरक्षाबलों पर आरोप है कि वह घाटी के आम लोगों पर पैलेट गन का इस्तेमाल करते हैं। इसके अलावा चीनी राजदूत ने कहा, “भारत के फैसलों की वजह से जम्मू कश्मीर की शांति व्यवस्था और सुरक्षा का बुरी तरह नुक्सान हुआ है।” 

अंत में मोईन ने कहा पाकिस्तान यह चाहता है कि इस मुद्दे के संबंध में वैश्विक स्तर पर दखलंदाज़ी हो। जिससे जम्मू कश्मीर में परेशानियों का सामना कर रहे आम लोगों की ज़िंदगी बेहतर हो पाए। हम इसकी उम्मीद करते हैं कि दुनिया के देश इस मुद्दे पर एक साथ आए आएँ जिससे भारत के ग़ैरक़ानूनी फ़ैसलों पर लगाम लगे।       

लेकिन यह जम्मू कश्मीर मुद्दे का केवल एक पक्ष था जो चीन के समाचार समूह ग्लोबल टाइम्स ने प्रकाशित किया। ग्लोबल टाइम्स ने इस मुद्दे के हिस्से का ज़िक्र नहीं किया वह था भारत का पक्ष। जम्मू कश्मीर के हालातों पर भारत ने भी जानकारी दी थी लेकिन चीन के ग्लोबल टाइम्स ने उसे प्रकाशित नहीं किया है। भारत ने जम्मू कश्मीर से विशेष राज्य का दर्जा हटाए जाने के बाद वहाँ के हालातों का विस्तृत वर्णन किया है।  

भारत ने अपने पक्ष की शुरुआत में लिखा है कि केंद्र शासित राज्य जम्मू कश्मीर भारत का अभिन्न अंग हैं। उससे पाकिस्तान जैसे किसी भी देश का कोई लेना देना ही नहीं है। मोईन उल हक़ ने जम्मू कश्मीर के बारे में बहुत सी बातें बताई। लेकिन इतने दिनों में वहाँ जितना कुछ अच्छा हुआ उसके बारे में कुछ नहीं कहा। उन्हें मालूम होना चाहिए कि 5 अगस्त 2019 को जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद वहाँ के स्थानीय लोगों के सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक अधिकार सुनिश्चित हुए हैं।  

साथ ही वंचित वर्ग से आने वाले बच्चे और महिलाओं के अधिकारों पर भी खूब काम हुआ है। 24 अक्टूबर 2019 को वहाँ के खंड विकास चुनाव हुए थे। जिसमें लोगों को अपना प्रतिनिधि चुनने की पूरी आज़ादी थी। इसके अलावा जम्मू कश्मीर में शिक्षा और रोज़गार के नए अवसर भी तैयार हो रहे हैं। पिछले एक साल में वहाँ लगभग 50 से अधिक शिक्षण संस्थान शुरू किए गए हैं। लगभग 5 लाख छात्रों को छात्रवृत्ति मिली है और 10 हज़ार नई नौकरियों की शुरुआत होगी। इसके अलावा लगभग 3 लाख घरों में बिजली बाँटी गई।   

अंत में भारत ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि भारत की कोशिश हमेशा से यही रही है कि घाटी में शांति व्यवस्था बनी रहे। लेकिन सीमा पार से होने वाली आतंकवाद की घटनाएँ वहाँ के हालात बिगाड़ने की हर संभव कोशिश करती हैं। पाकिस्तानी सीमा की तरफ से साल 2020 के जुलाई महीने तक सीज़फ़ायर की 3 हज़ार घटनाएँ हुई हैं। इतना ही नहीं 450 आतंकवादी गतिविधियों की ख़बरें भी सामने आई हैं। इसके बाद अगर पाकिस्तान के दूत का दावा कुछ और कहता हो तो यह खुद में हैरानी की बात है।   

रिलायंस खरीद सकता है चाइनीज ऐप TikTok: भारत में 3 बिलियन डॉलर से ज़्यादा लगाई गई है ऐप की वैल्यू

भारत से बैन किए जाने के बाद TikTok यहाँ फिर से एंट्री करने की तैयारी में दिख रहा है। टेक क्रंच की एक रिपोर्ट के मुताबिक मुकेश अंबानी की कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज़ लिमिटेड टिक टॉक में निवेश करने को लेकर बातचीत कर रही है। बता दें 29 जून से टिकटॉक ऐप भारत में बैन है और इसके साथ ही चीन के 58 और ऐप्स बैन किए गए थे।

रिपोर्ट के मुताबिक़ जुलाई के अंत से रिलायंस और टिकटॉक की पेरेंट कंपनी बाइटडांस डील को लेकर दोनों कंपनियाँ आपस में बातचीत कर रही हैं, हालाँकि, दोनों कंपनियाँ अभी किसी भी सौदे पर नहीं पहुँची हैं।

भारत टिकटॉक के लिए चीन के बाद सबसे बड़ा मार्केट है और शायद यही वजह की कंपनी किसी भी तरह से यहाँ बिज़नेस करना चाहेगी। चाहे डायरेक्ट या इनडायरेक्टली। टेक क्रंच ने सूत्रों के हवाले से रिपोर्ट में कहा है कि भारत में टिकटॉक की वैल्यू 3 बिलियन डॉलर से ज़्यादा की लगाई जा रही है। लेकिन रिलायंस और बाइटडांस ने इसे लेकर फिलहाल कोई प्रतिक्रिया या स्टेटमेंट नहीं जारी किया है।

बता दें अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने भी शॉर्ट वीडियो प्लेटफार्म टिकटॉक को 15 सितंबर तक की डेडलाइन दी है। 15 सितंबर के बाद टिक टॉक को अमेरिका में बैन किया जा सकता है। टिकटॉक का अमेरिकी कारोबार बेचने के लिए भी माइक्रोसॉफ्ट और ट्विटर के अलावा कई कंपनियों के साथ बात चल रही है।

इस ऐप को बैन करने से चीन को बहुत बड़ा झटका लगा था। इस शॉर्ट वीडियो मेकिंग और शेयरिंग ऐप के भारत में करीब 12 करोड़ यूजर्स थे। यूजर्स के लिहाज से भारत टिकटॉक के लिए दूसरा सबसे बड़ा बाजार रहा है। अगर रिलायंस इंडस्ट्रीज ने टिकटॉक में निवेश कर लिया। तो इससे दोनों कंपनी को काफी फायदा होगा। एक तरफ भारत में फिर से टिक टॉक शुरू हो जाएगा। तो वहीं रिलायंस का दबदबा इस ऐप पर भी हो जाएगा।

गौरतलब है कि पिछले दिनों गलवान घाटी में 20 भारतीय जवानों की शहादत के बाद भारत में 59 चीनी ऐप्लीकेशन को बैन कर दिया गया था। भारत ने अपने फैसले के पीछे संप्रभुता, सुरक्षा और निजता का हवाला देते हुए बैन की बात कही थी। बता दें कि TikTok पर चीन की सरकार के साथ यूजर के डेटा शेयर करने का आरोप कई देश लगाते रहे हैं।

टिकटॉक के अलावा यूसी ब्राउजर, कैम स्कैनर, शेयर इट, हैलो, लाइक सहित कई ऐप्स को भी बैन कर दिया गया है।बायडू मैप, केवाई, डीयू बैटरी स्कैनर भी बैन हो गया है। सरकार ने इन चीनी एप्स पर आईटी एक्ट 2000 के तहत बैन लगाया है।

चीन से अपनी गन्दी होती नदियों को बचाने के लिए POK में लोगों ने निकाली मशाल रैली: हुआ भारी विरोध प्रदर्शन

कोरोना वायरस के समय में एक ओर जहाँ चीन और पाकिस्तान की दोस्ती और गहरी हुई है। वहीं, पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में स्थानीय लोगों के बीच चीन के ख़िलाफ़ रोष बढ़ता ही जा रहा है।

खबरों की मानें तो नीलम-झेलम नदी पर बाँध निर्माण के विरोध में पीओके के मुजफ्फराबाद शहर में लोगों ने बुधवार (अगस्त 12, 2020) को विशाल मशाल रैली निकाल कर अपना विरोध दर्ज कराया है। ये विरोध मुख्यत: चीनी कंपनियों के खिलाफ़ था जो वहाँ बाँध निर्माण करवाने का काम कर रहे हैं।

बता दें कि पीओके की जनता की ओर से निकाली गई इस रैली में शामिल प्रदर्शनकारियों ने नदियों को बचाने के लिए नारेबाजी भी की। एएनआई न्‍यूज एजेंसी के मुताबिक वहाँ, ”दरिया बचाओ, मुजफ्फराबाद बचाओ,’ ‘नीलम-झेलम बने, हम जिंदा फिर से करें’ ‘नीलम और झेलम नदियों को बहने दो, हमें जीने दो” जैसे नारे लगाए।

पीओके के कार्यकर्ता डॉ अमजद मिर्जा ने नदी पर चीनी कंपनियों द्वारा बाँध निर्माण को पानी के प्राकृतिक संसाधनों के लिए खतरनाक बताया। उन्होंने कहा, “नीलम-झेलम नदी अब नाले जैसी बनती जा रही है। यह गंदगी से भरी हुई है। स्थानीय लोगों के पास पीने का पानी नहीं है।” 

उन्होंने कहा कि पानी को लेकर हमारे प्राकृतिक संसाधन CPEC (चीन पाकिस्तान आर्थिक गलियारा) की चपेट में आकर बर्बाद होते जा रहे हैं।

यहाँ बता दें कि हाल ही में, पाकिस्तान और चीन ने पीओके में आजाद पट्टन और कोहाला जलविद्युत परियोजनाओं के निर्माण के लिए समझौतों पर हस्ताक्षर किए थे। इस समझौते के अनुसार 1.54 बिलियन अमेरिकी डालर की इस परियोजना को चीन के जियोझाबा ग्रुप कंपनी (CGGC) द्वारा प्रायोजित किया जाएगा।

कोहाला हाइड्रोइलेक्ट्रिक पावर प्रोजेक्ट जो झेलम नदी पर बनाया जाएगा, पीओके के सुधनोटी जिले में आज़ाद पट्टन ब्रिज से लगभग 7 किमी ऊपर और पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद से 90 किमी दूर है।साल 2026 तक पूरा होने की उम्मीद वाला यह प्रोजेक्ट चाइना थ्री गोरजेस कॉर्पोरेशन, इंटरनेशनल फाइनेंस कॉर्पोरेशन (IFC) और सिल्क बैंक फंड द्वारा प्रायोजित किया जाएगा।

केरल नन रेप केस: बिशप फ्रैंको मुलक्कल पर अदालत ने आरोप तय, सुनवाई के दौरान पादरी ने खुद को बताया निर्दोष

केरल में आज (अगस्त 13, 2020) कोट्टायम अदालत ने नन के बलात्कार मामले में जालंधर डायोसिज के बिशप फ्रैंको मुलक्कल (Bishop Franco Mulakkal) के विरुद्ध आरोप तय कर दिए।

अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश ने मामले की सुनवाई करते हुए मुलक्कल के विरुद्ध आईपीसी के तहत तय किए गए आरोपों को पढ़ कर सुनाया। इस बीच मुलक्कल अपने ऊपर लगे आरोपों से इंकार करते रहे। लेकिन कोर्ट ने अगली तारीख देते हुए कहा कि इस संबंध में 16 सितंबर को पीड़िता से पूछताछ की जाएगी।

जानकारी के मुताबिक, मुलक्कल के खिलाफ़ आईपीसी की धारा 342, 376 (c)(a), 376 और 506 के तहत मामला दर्ज हुआ है। सुनवाई में बिशप ने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों से मना किया। उन्होंने खुद को निर्दोष बताते हुए कहा कि वह न्यायपालिका में विश्वास रखते हैं और अदालत जो भी कहेगी वह उसका पालन करेंगे।

इससे पहले बिशप फ्रैंको मुलक्कल को कड़ी शर्तों पर अदालत से जमानत दी गई थी और आज के दिन यानी सुनवाई के दिन अदालत में उपस्थित होने के निर्देश दिए गए थे।

5 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने नन से बलात्कार मामले में बिशप फ्रैंको मुलक्कल की आरोप मुक्त करने की याचिका को खारिज किया था। इसके साथ ही कोर्ट ने उन्हें मुकदमे का सामना करने का निर्देश दिया था।

प्रधान न्यायाधीश एसए बोबडे, न्यायमूर्ति एएस बोपन्ना और न्यायमूर्ति वी रामासुब्रमणियन की पीठ ने बिशप के वकील से कहा था कि न्यायालय इस मामले के गुण-दोष पर कोई टिप्पणी नहीं कर रहा लेकिन आरोप मुक्त करने के मुद्दे पर ही याचिका खारिज की जा रही है।

गौरतलब है कि बिशप के खिलाफ कोट्टायम जिले में पुलिस ने रेप का मामला दर्ज किया था। हाई कोर्ट में दायर याचिका में पादरी ने कहा था कि जब उन्होंने पीड़िता नन से वित्तीय लेन-देन को लेकर सवाल किया तो उसने उन्हें फँसा दिया।

इस मामले की प्रमुख गवाहों में से एक सिस्टर लिसी ने पिछले दिनों आरोप लगाया था कि उनके वरिष्ठ लोग लगातार उन पर फ्रैंको मुलक्कल के खिलाफ दिए गए बयान को बदलने के लिए दबाव डाल रहे हैं। वहीं आरोपित बिशप को नोटिस जारी करने के बाद केरल पुलिस के एक अधिकारी का तत्काल तबादला कर दिया गया था।

करिश्मा भोंसले को मिला इंसाफ: BMC पोल से हटाया गया मस्जिद का अवैध लाउडस्पीकर

मुंबई के मानखुर्द इलाके में स्थित मस्जिद से आज अवैध लाउडस्पीकर हटा दिया गया। इसकी जानकारी भाजपा सांसद किरीट सौमैया ने अपने ट्विटर हैंडल से दी। उन्होंने लिखा, “मानखुर्द की करिश्मा भोंसले को न्याय मिल गया। आज बीएमसी के खंबे से अवैध लाउडस्पीकर हटा दिया गया।”

बता दें, कुछ समय पहले करिश्मा भोंसले चर्चा में आई थीं। उन्होंने मानखुर्द में एक मस्जिद के लाउडस्पीकर की आवाज कम करने को कहा था। लेकिन संप्रदाय विशेष के लोगों ने उनकी बात सुनने की जगह उनसे बहस शुरू कर दी। बात बढ़ने पर वहाँ आपसी झड़प भी हुई। संप्रदाय विशेष के लोगों ने करिश्मा को धमकाया भी।

इस घटना के बाद करिश्मा ने जब स्थानीय विधायक से इस सम्बन्ध में मदद माँगी तो उन्होंने सलाह दी कि यदि उन्हें लाउडस्पीकर की आवज से परेशानी है तो उन्हें अपना घर बदल लेना चाहिए।

अजान-मुम्बई
लाउडस्पीकर की आवाज कम करने को कहा तो करिश्मा और उसकी मॉं से बदसलूकी

फिर, करिश्मा भोंसले ने इस घटना का वीडियो अपने ट्विटर अकाउंट पर शेयर किया। साथ ही लिखा, “मुंबई के मानखुर्द में रहती हूँ। बहुत कम उम्मीद थी कि मेरी बात सुनी जाएगी, फिर भी मैं पास की मस्जिद में सम्बन्धित लोगों से अनुरोध करने के लिए गई कि वो उस लाउडस्पीकर (अज़ान) की आवाज कम कर दें, जो कि मेरी खिड़की के ठीक सामने लगा है। लेकिन यह प्रयास व्यर्थ रहा।”

ट्वीट की एक शृंखला में करिश्मा ने कुछ वीडियो पोस्ट करते हुए लिखा था कि जब वो सम्बन्धित लोगों से बात करने वहाँ पहुँची तो कुछ ही देर में वहाँ काफी लोग इकट्ठे हो गए और बहस शुरू हो गई।

करिश्मा को यह भी बोला गया कि तुम्हारे मंदिर में भी तो घंटा बजता है और क्या हम स्पीकर किसी के घर में लगा रहे हैं? जिसपर युवती ने जवाब दिया कि अगर मंदिर में घंटी बजती है तो उन्हें वहाँ जाकर अपनी बात रखनी चाहिए।

करिश्मा ने वो स्क्रीनशॉट भी शेयर किए थे जिसमें स्थानीय विधायक अबू आसिम आजमी ने उनसे कहा था कि यदि अजान की आवाज से समस्या है तो उन्हें वह जगह छोड़ देनी चाहिए।

करिश्मा के इन ट्विट्स के बाद ही यह मामला सबके संज्ञान में आया था और आज 2 महीने के भीतर इस मामले पर सुनवाई हो गई। लोगों ने लाउडस्पीकर हटने की खबर सुनने के बाद करिश्मा को उनकी हिम्मत के लिए बधाई भी दी।

आदित्य ठाकरे का कनेक्शन अभिनेत्रियों के साथ हो सकता है, मगर सुशांत की मौत से उसका कोई लेना-देना नहीं: सुब्रमण्यम स्वामी

बीजेपी नेता सुब्रमण्यम स्वामी अपने तेज तर्रार अंदाज के लिए जाने जाते हैं। बेबाकी से बोलना उनकी फितरत है। सुशांत सुसाइड केस में भी स्वामी एक सक्रिय भूमिका निभाते नजर आ रहे हैं। 2 अगस्त को “विराट हिंदुस्तान संगम” के साथ एक लाइव प्रश्न और उत्तर सत्र में बात करते हुए, उन्होंने आरोप लगाया कि जो सबूत उन्होंने एकत्र किए हैं, उससे यह स्पष्ट होता है कि कोई सीएम (उद्धव ठाकरे) को डराने की कोशिश कर रहा है।

उन्होंने कहा, “कोई उनके बेटे (आदित्य ठाकरे) के नाम को इस मामले में खींचने की कोशिश कर रहा है, लेकिन मेरे पास मौजूद सबूतों के आधार पर मैं आपको बता सकता हूँ कि उसका बेटा अभिनेत्रियों के साथ हो सकता है, मगर उसका सुशांत की मौत से कोई लेना-देना नहीं है।”

उन्होंने इंटरव्यू में आईपीएल सहित विभिन्न विषयों पर अपने विचार व्यक्त किए। जैसे कि बॉलीवुड में “माफिया” और सुशांत सिंह राजपूत की मृत्यु।

स्वामी ने आरोप लगाया कि जो व्यक्ति इस मामले में शामिल है वह संभवत: किसी और का बेटा है, जिसका नाम लेने की स्थिति में वे नहीं है क्योंकि उनके पास पर्याप्त सबूत नहीं हैं। उन्होंने दावा किया कि उनके पास ऐसे शख्स के बेटे के खिलाफ सबूत है जोकि बहुत पावरफुल है। जिसका नाम बाहर आने पर वह सिस्टम को काफी प्रभावित कर सकता है।

उन्होंने कहा, “हमारे पास एक ऐसी स्थिति है जहाँ राजनेता, गैंगस्टर और सिनेमा के सितारे जिनको लोग सम्मान देते हैं, उन लोगों ने एक कार्टेल बनाया है जो यह सुनिश्चित करना चाहता है कि सबसे खराब इंसान हमारे अभिनेता और अभिनेत्री बनें।

वहीं कोई और शख्श जो अपने साथ कुछ शालीनता, कुछ शैक्षिक पृष्ठभूमि, और कुछ नैतिकता लेकर आता है उन्हें हटा दिया जाता है। उन्हें (फिल्मों में) रोल नहीं दिया जाता है। इसके अलावा उनकी हत्या कर दी जाती है। यह एक ऐसी चीज है जिसे हम अपने लोकतांत्रिक देश में स्वीकार नहीं कर सकते।

स्वामी ने कहा कि वह सुशांत सिंह को न्याय दिलाने के मामले में लोगों द्वारा उठाई जा रही आवाज को देख कर खुश है। खासकर जब उन्होंने घोषणा की कि वह भी इस मामले में पूरा सहयोग देंगे। भाजपा सांसद ने कहा कि, उन्होंने ईशान सिंह को अदालत में सहायता के लिए नामित किया था। इसके साथ ही कानून के तहत जाँच में भी सहयोग की बात कही।

उन्होंने कहा कि सरकार को न केवल केंद्रीय जाँच ब्यूरो (सीबीआई) से मामले की जाँच के लिए कहना चाहिए बल्कि राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (एनआईए) को भी शामिल करना चाहिए क्योंकि इस मामले में दाऊद का एक आतंकवादी एंगल भी है।

सीबीआई द्वारा मामले की जाँच के निर्देश के पहले यह प्रश्न और उत्तर सत्र हुआ था। वहीं जब 5 अगस्त को अटॉर्नी जनरल ने भारत के सर्वोच्च न्यायालय को सूचित किया कि भारत सरकार पहले ही सीबीआई को इस मामले को उठाने का निर्देश दे चुकी है, तो स्वामी ने ट्वीट किया और कहा, “केंद्र ने SC को सूचित किया है कि सुशांत मामले को सीबीआई को सौंप दिया गया है। क्या मैंने अपनी प्रतिबद्धता पूरी कर ली है और मैं स्वतंत्र हूँ? “

सुशांत सिंह राजपूत केस

गौरतलब है कि 14 जून को सुशांत अपने मुंबई स्थित फ्लैट में मृत मिले थे। इस मामले में मुंबई पुलिस की जाँच से असंतुष्‍ट सुशांत के पिता ने पटना में एफआइआर दर्ज कराई। इसमें उन्‍होंने बेटे की गर्लफ्रेंड रिया चक्रवर्ती व उनके परिवार पर धन उगाही, ब्‍लैकमेल, सुसाइड के लिए उकसाने आदि के कई गंभीर आरोप लगाए। इस मामले की जाँच के लिए जब बिहार पुलिस मुंबई पहुँची तो वहाँ उसे असहयोग का सामना करना पड़ा।

फिर, बिहार सरकार की सिफारिश पर केंद्र सरकार ने यह जाँच सीबीआइ को सौंप दी। वहीं अब सोशल मीडिया पर स्टन गन थ्योरी सामने आई है, जिसे एक यूजर ने सोशल मीडिया पर डाला। वहीं इस थ्योरी को मद्देनजर रखते हुए बीजेपी सांसद सुब्रमण्यम स्वामी ने सुशांत सिंह राजपूत मृत्यु मामले की एनआईए जाँच की माँग की है। वहीं शेखर सुमन ने रिया के खिलाफ आवाज बुलंद करते हुए उसकी गिरफ्तारी की माँग की थी।

‘बादशाह’ फेक व्यूज केस: मुंबई पुलिस ने पत्रकार फ़ाय डिसूज़ा के पति से की पूछताछ, ‘पागल है’ गाने के लिए 75 लाख का भुगतान

सोशल मीडिया पर फर्जी फॉलोवर रैकेट मामले की जाँच कर रही मुंबई पुलिस की क्राइम ब्रांच ने गुरुवार (13 अगस्त, 2020) को क्यूकी डिजिटल प्राइवेट लिमिटेड के मुख्य संचालन अधिकारी सागर गोखले का बयान दर्ज किया। इस कंपनी का नाम रैपर बादशाह के वीडियो के लिए फेक फॉलोवर्स बढ़ाने में सामने आया है। सागर गोखले पत्रकार फ़ाय डिसूज़ा के पति हैं।

पिछले हफ्ते, रैपर आदित्य प्रतीक सिंह सिसोदिया उर्फ ​​बादशाह से फर्जी व्यूज और लाइक के घोटाले के संबंध में पूछताछ की गई थी। इस दौरान उन्होंने स्वीकार किया था कि उन्होंने YouTube पर अपने गाने ‘पागल है’ के लिए फर्जी व्यूज खरीदने के लिए कंपनी क्यूकी को 75 लाख रुपए का भुगतान किया था।

उन्होंने 24 घंटे में वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाने के लिए यूट्यूब व्यूज को खरीदा था। रैपर ने दावा किया कि था कि ‘पागल है’ के म्यूजिक वीडियो को रिलीज़ होने के पहले दिन में अन्य पिछले रिकॉर्ड को पछाड़ते हुए 75 मिलियन बार देखा गया था।

रैपर द्वारा किए गए खुलासे के बाद, पुलिस ने कंपनी के सीईओ सागर गोखले से पूछताछ की थी। लेकिन पूछताछ के दौरान, सागर ने मामले के बारे में अनभिज्ञता व्यक्त की, और इस मामले में अपने मृत सहकर्मी को दोषी ठहराया।

उन्होंने कहा कि उन्हें कंपनी के मामलों के बारे में अधिक जानकारी नहीं है। कंपनी के सह-संस्थापक और प्रबंध निदेशक समीर बंगारा कंपनी के कामकाज के बारे में अधिक जानते थे। गौरतलब हो कि इसी साल जून में एक बाइक दुर्घटना में बंगारा की मौत हो गई थी।

गोखले ने यह भी कहा कि कंपनी के सीएफओ और वीडियो नेटवर्क मैनेजर को बादशाह के वीडियो से संबंधित मामले के बारे में अधिक जानकारी होगी। उनके बयान के बाद, पुलिस ने उनके लिए समन जारी किया है।

मुंबई पुलिस ने बादशाह से एक इनवॉइस बरामद किया था। जिसमें क्यूकी कंपनी को 75 लाख रुपए का भुगतान किया गया था। इनवॉइस के अनुसार यह भुगतान विज्ञापन के लिए किया गया था। वहीं पुलिस के मुताबिक यह भुगतान व्यूज बढ़वाने के लिए किया गया था। न कि विज्ञापन के लिए।

क्यूकी कंपनी के डाटा के अनुसार, सागर गोखले कंपनी के तीन डायरेक्टर्स में से एक हैं। वह पाँच अन्य कंपनियों में भी डायरेक्टर है। उन कंपनियों में से एक फ्रीमेडिया इंटरएक्टिव प्राइवेट लिमिटेड में वे और उनकी पत्नी फ़ाय डिसूज़ा डायरेक्टर हैं।

उल्लेखनीय है कि दो मशहूर हस्तियों द्वारा सोशल मीडिया पर उनके नाम से फर्जी अकाउंट बनाए जाने की शिकायत के बाद फर्जी व्यूज और लाइक के मामले का भंडाफोड़ किया गया था। सिंगर भूमि त्रिवेदी और एक्टर कोएना मित्रा द्वारा इस संबंध में शिकायत दर्ज की गई थी।

दर्ज शिकायत की जाँच के दौरान पुलिस ने पाया कि कुछ कंपनियों द्वारा फर्जी फॉलोअर, लाइक, कमेंट और अन्य सोशल मीडिया संबंधी सेवाएँ प्रदान करने के लिए अकाउंट बनाए गए थे। बाद में मुंबई पुलिस ने 50 से अधिक कंपनियों का पता लगाया था जो सोशल मीडिया फॉलोवर्स, लाइक और टिप्पणियों को बेचने में शामिल थीं।

5 कारण जो ‘#TirupatiVirus’ को झूठा साबित करते हैं: खोलते हैं लिबरलों और वामपंथियों के प्रोपेगेंडा की पोल

मार्च 2020 के फ्लैशबैक में जाएँ तो याद आएगा कि उस समय देश भर में 30% से अधिक कोरोना वायरस संक्रमण फैलाने (प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप से) वाले तबलीगी जमात के कारनामे को कैसे वामपंथियों और कट्टरपंथियों ने अपने तर्कों से धोने-पोछने का काम किया था। 

वामपंथियों ने कहा था कि यह समारोह उस समय आयोजित हुआ जब दिल्ली पुलिस ने किसी प्रकार की कोई सूचना नहीं दी थी। (हालाँकि, उस समय यह तर्क तब झूठा साबित हो गया। जब पुलिस अधिकारी की एक वीडियो सामने आई जिसमें वह जमात प्रशासन से समारोह को रोकने की अपील कर रहा था।)

अब अगस्त 2020 को देखिए। यही वामपंथियों और कट्टरपंथियों ने एक नया ट्रेंड चलाया है- “Tirupativirus” इसमें दावा किया जा रहा है कि 75% कोरोना वायरस भारत में मंदिरों से फैला। अब इस इंफोग्राफिक के जरिए जो आँकड़े दर्शाए जा रहे हैं उसका दावा है कि यह इंडिया टुडे का ‘अनऑफिशियल इंफोग्राफिक’ है।

दिलचस्प बात यह है कि ये वामपंथी वही हैं जिन्होंने जमात की निंदा पर लोगों को इस्लामोफोबिया से ग्रसित करार दे दिया था। लेकिन जब बात तिरुपति की आई तो महामारी चरम तक पहुँचने के बाद वह इसे तिरुपति वायरस कह रहे हैं और इसके लिए हिंदुओं को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं।

वामपंथियों के पाखंड और दोहरे रवैये का अंदाजा इस बात से भी लग सकता है कि उन्हें यह तिरुपति वायरस का ट्रेंड चलाने में इतनी उत्सुकता है कि वह वास्तविक जानकारी भी नहीं जानना चाहते। इनके द्वारा चलाए जा रहे प्रोपगेंडा में इतनी कमियाँ हैं कि यह एक बार फिर हिंदुओं को बदनाम करने के अपने प्रयास में असफल हो रहे हैं।

लेफ्ट-लिबरल्स की इस हार के पीछे 5 महत्तवपूर्ण कारण हैं:

1.कोई प्रमाणिक स्रोत नहीं है दावा साबित करने के लिए

इस आर्टिकल को लिखने के समय तक, इस बात के कोई सबूत कहीं भी नहीं थे कि देश में कोरोना वायरस संक्रमण बढ़ने का कारण मंदिर है। इस इंफोग्राफिक में भी इस बात का कहीं उल्लेख नहीं है कि जो आँकड़े उन्होंने बताए वो कहाँ से लिए।

2.सरकारी प्रशासन से तिरुपति श्रद्धालुओं ने खुद को छिपाया नहीं

तबलीगी जमातियों की तरह तिरुपति श्रद्धालुओं ने खुद को प्रशासन से छिपाने के लिए या जाँच प्रक्रिया से बचाने के लिए मंदिरों में नहीं छिपाया हुआ था। उन्होंने खुद का टेस्ट खुद ही करवाया और खुद को क्वारंटाइन भी किया।

3. तिरुपति श्रद्धालु ऐसा नहीं मानते हैं कि कोरोना वायरस हिंदू धर्म को न मानने वालों के लिए दंड है

मरकज के दौरान तबलीगी जमात के मौलाना साद ने यह दावा किया था कोरोना वायरस उन लोगों के लिए अल्लाह की ओर सजा है जो उसको नहीं मानते। इसलिए संप्रदाय विशेष के लोगों को इस संक्रमण से डरने की आवश्यकता नहीं है। जबकि तिरुपति श्रद्धालुओं को न ऐसा कुछ बताया गया और न ही उन्होंने ऐसा कुछ सोचा। उन्होंने अधिकारियों और डॉक्टरों के साथ सहयोग भी किया।

4. तिरुपति श्रद्धालु कभी भी स्वास्थ्यकर्मियों के साथ बदसलूकी नहीं की

तिरुपति श्रद्धालुओं ने कभी भी स्वास्थ्यकर्मियों से अपना इलाज करवाने से मना नहीं किया और न ही उनको इलाज के दौरान प्रताड़ित किया। वहीं तबलीगियों के रवैये को याद करें तो उन्होंने कानपुर अस्पताल में नर्सों के साथ दुर्व्य्वहार किया और उनके साथ हिंसा भी की थी।

5. कोई विदेशी श्रद्धालु तिरुपति मंदिर में जुलूस के समय शामिल नहीं हुआ

तबलीगी जमातियों का मामला उजागर होने के बाद पूरे देश में कोरोना के मामलों में औचक बढ़ौतरी देखने को मिली। क्योंकि वहाँ बिना दिशा निर्देश का पालन करने वाले बाहरी लोगों को काफी संख्या थी। लेकिन, तिरुपति मंदिर में केवल यहीं के श्रद्धालु आए थे। कोई बाहरी श्रद्धालु नहीं था।

इसलिए, इन दोनों घटनाओं की तुलना बेहद हास्यास्पद है। वामपंथियों ने बस जमातियों की तुलना तिरुपति श्रद्धालुओं से करके और कोरोना के लिए मंदिरों को जिम्मेदार बताकर, एक बार दोबारा अपने पाखंडी रवैये को उजागर किया है।