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बेंगलुरु दंगों में सामने आया कॉन्ग्रेस पार्षद के पति कलीम पाशा का नाम: रह चुका है पूर्व कॉन्ग्रेसी मंत्री का करीबी

मंगलवार की रात (11 अगस्त 2020) बेंगलुरु में हुई हिंसा से जुड़ी बड़ी ख़बर सामने आ रही है। बेंगलुरु में हुए दंगों के मामले में पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज की है। इसमें जिन लोगों को आरोपित बनाया गया है उसमें 7वां नाम कॉन्ग्रेस पार्षद इरशाद बेगम के पति कलीम पाशा का है। पुलिस के मुताबिक़ दंगों की साज़िश रचने वाले मुख्य आरोपितों में एक नाम कलीम पाशा का भी है।    

इरशाद बेगम बेंगलुरु नगरपालिका के नगवाड़ा वार्ड से कॉन्ग्रेस पार्षद हैं। लेकिन क्षेत्र के ज़्यादातर काम उसका पति कलीम पाशा ही देखता है। टाइम्स नाउ में प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक़ जब पुलिस कलीम को गिरफ्तार करने गई तब वह अपने घर पर नहीं था। पुलिस को अभी तक कलीम की कोई जानकारी नहीं मिली है।   

कलीम पाशा (लाल घेरे में)
साभार टाइम्स नाउ

इसके अलावा कलीम पाशा के कॉन्ग्रेस नेता और पूर्व मंत्री केजे जॉर्ज से भी काफी अच्छे संबंध हैं। पिछले साल सितंबर में कर्नाटक राष्ट्र समिति ने केजे जॉर्ज पर प्रवर्तन निदेशालय को संज्ञान में लेते हुए मनी लॉन्ड्रिंग का मामला दर्ज कराया था। केजे जॉर्ज पर आरोप लगा था कि उनके पास विदेशों में करोड़ों की संपत्ति मौजूद है।

पूर्व कॉन्ग्रेस मंत्री केजे जॉर्ज

दंगों से संबंधित एफ़आईआर में और भी कई हैरान कर देने वाली बातें सामने आई हैं। एफ़आईआर में लिखा है कि 5 लोगों ने लगभग 200 से 300 लोगों की भीड़ का नेतृत्व किया। उनके पास मशाल से लेकर पेट्रोल बम जैसे ख़तरनाक हथियार मौजूद थे। साथ ही उन्हें इस बात के आदेश मिले हुए थे कि रास्ते में आने वाले हर पुलिसकर्मी को जान से मार देना है। बीते दिन पुलिस ने SDPI के 2 नेताओं को दंगों के मामले में गिरफ्तार किया था। वहीं SDPI के ज़िला सचिव का कहना था कि उनकी पार्टी के सदस्यों का दंगों से कोई लेना देना नहीं है। उनकी पार्टी से जुड़े लोगों पर झूठे आरोप लगा जा रहे हैं।  

बेंगलुरु में हुई दंगे की घटनाओं में लगभग 200 से 250 वाहन मौके पर ही जला दिए गए थे। कुछ ही समय पहले इस घटना का एक नया वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आया था। इस वीडियो में डीजे हल्ली पुलिस स्टेशन के कर्मचारी अपने वरिष्ठ अधिकारियों से आत्मरक्षा के लिए गोली चलाने की इजाज़त माँग रहे थे। वीडियो में साफ़ सुना जा सकता है कि इस्लामी भीड़ पुलिस वालों पर टूट पड़ी। हालात इतने भयावह हो जाने के बाद पुलिस कर्मियों ने वरिष्ठ अधिकारियों से आत्मरक्षा में गोली चलाने की अनुमति माँगी थी।  

जिस पर अधिकारियों ने साफ़ तौर पर कहा कि वह भीड़ को नियंत्रित करने के लिए जो ज़रूरी समझें, वह करें। वीडियो में पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने कहा, “आपको जो सही लगे वह करिए! इस समय आपको कोई और नहीं बचा सकता है। आपको अपनी सुरक्षा खुद से ही करनी होगी।” टीवी 9 कर्नाटक द्वारा प्रसारित इस वीडियो में साफ़ तौर पर देखा जा सकता है कि कैसे संप्रदाय विशेष की उग्र भीड़ ने पूरे बेंगलुरु शहर को आग में झोंक दिया। राज्य सरकार ने इस मामले में न्यायिक जाँच के आदेश जारी कर दिए हैं।

न्यायिक जाँच का फैसला कर्नाटक के मुख्यमंत्री बीएस येदुराप्पा, गृहमंत्री बसवराज बोम्मई और पुलिस अधिकारियों की बैठक में लिया गया था। इस जाँच की अगुवाई मजिस्ट्रेट करेंगे। बेंगलुरु के पूर्वी और उत्तर पूर्वी इलाक़ों में हुए इन दंगों में 3 लोगों की जान जा चुकी है। साथ ही कई लोग घायल भी हुए हैं। 

कर्नाटक के गृहमंत्री बोम्मई ने इस बारे में जानकारी देते हुए कहा, “बेंगलुरु में हुई दंगों की न्यायिक जाँच होगी। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के तमाम नीति-निर्देशों को मद्देनज़र रखते हुए पूरे घटनाक्रम की जाँच मजिस्ट्रेट की निगरानी में होगी। इस जाँच के बाद षड्यंत्र रचने वाले असल आरोपित सामने आएँगे।”  

मंगलवार की शाम कॉन्ग्रेस विधायक अखंडा श्रीनिवास मूर्थी के आवास पर संप्रदाय विशेष की हज़ारों की भीड़ इकट्ठा हुई। कुछ ही देर में भीड़ ने पूरे घर को तबाह कर दिया। इसके बाद डीजे हल्ली और केजी हल्ली पुलिस थाने पर भी जम कर तोड़ फोड़ की। पुलिस द्वारा की गई जवाबी कार्रवाई में कुल 3 लोगों की जान गई थी और 6 लोग घायल हुए थे। दंगे की घटनाओं में 60 पुलिसकर्मी घायल हुए थे जिसमें से 15 नज़दीकी अस्पतालों में भर्ती हैं।  

नेहरू समेत सभी पूर्ववर्ती PM से आगे निकले मोदी, गैर-कॉन्ग्रेसी PM मामले में नंबर-1: अगस्त में बनाए 4 रिकॉर्ड

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बृहस्पतिवार (अगस्त 13, 2020) को अपने दूसरे कार्यकाल में एक और मील का पत्थर छू लिया है। दरअसल, पीएम नरेंद्र सबसे लंबे समय तक सेवा करने वाले पहले भारतीय पीएम (गैर-कॉन्ग्रेसी) बन गए हैं।

67 साल के पीएम नरेंद्र मोदी ने भारतीय जनता पार्टी के ही दिवंगत पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहार वाजपेयी के 2,268 दिनों तक भारत के प्रधानमंत्री रहने के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया है। जबकि, सबसे लंबे समय तक भारत के प्रधानमंत्री का रिकॉर्ड पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के नाम है।

जवाहरलाल नेहरू 16 वर्ष 286 दिनों तक प्रधानमंत्री रहे। इस मामले में दूसरा स्थान उनकी बेटी इंदिरा गाँधी का है, जो कि 15 वर्ष 350 दिनों तक देश की प्रधानमंत्री रहीं। जबकि, तीसरे नंबर पर मनमोहन सिंह हैं, जो कि 10 वर्ष 4 दिनों तक देश के प्रधानमंत्री रहे।

इस तरह से आज के दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भारत के इतिहास में सबसे लंबे समय तक सेवा देने वाले चौथे प्रधानमंत्री बन गए हैं। इसे पहले, अटल बिहारी वाजपेयी 3 बार भारत के प्रधानमंत्री बने। पहली बार वह वर्ष 1996 में प्रधानमंत्री बने, लेकिन बहुमत साबित नहीं कर पाए। दूसरी बार वह 1998 और 1999 में प्रधानमंत्री बने और 2004 तक सत्ता में रहे थे।

इससे पहले, 5 अगस्त को अयोध्या श्रीराम मंदिर भूमिपूजन के दिन पीएम मोदी ने प्रधानमंत्री के रूप में 3 रिकॉर्ड बनाए, क्योंकि वह श्रीराम जन्मभूमि का दौरा करने वाले पहले प्रधानमंत्री बने थे। यह पहला मौका भी था, जब किसी प्रधानमंत्री ने हनुमान गढ़ी का दौरा किया। इसके अलावा, वह देश की सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के प्रतीक किसी मन्दिर के ‘भूमिपूजन’ कार्यक्रम में भाग लेने वाले पहले प्रधानमंत्री बने।

पीएम नरेंद्र मोदी ने भारतीय पीएम के रूप में छह साल पूरे कर लिए हैं। पीएम मोदी के नेतृत्व वाली भारतीय जनता पार्टी ने 303 सीटों के बहुमत के साथ 2019 के आम चुनावों में अपना दूसरा चुनाव जीता और भाजपा के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) ने 353 सीटें जीतीं थीं।

सुशांत के परिवार का अल्टीमेटम मिलते ही बदले संजय राउत के सुर, कहा- ‘अभी सबको शांत रहना चाहिए’

सुशांत सिंह राजपूत की मौत के मामले में शिवसेना नेता संजय राउत ने कुछ समय पहले तक सुशांत के परिवार पर बेबुनियाद इल्जाम लगाए। पर, अब जब सुशांत के परिवार ने उन्हें लीगल नोटिस भेजकर 48 घंटों में माफी माँगने का अल्टीमेटम दिया। तो, उनके सुर बदल गए और वह सबसे शांत बैठने की अपील करने लगे।

टाइम्स नाउ की रिपोर्ट बताती है कि संजय राउत अब राजनेताओं से लेकर सुशांत के परिवार तक से चुप रहने की बात कर रहे हैं। श‍िवसेना नेता संजय राउत का कहना है कि यह जाँच अब खत्‍म होने ही वाली है। ऐसे में जब तक जाँच पूरी नहीं हो जाती, सभी को शांत बैठना चाहिए। संजय राउत ने कहा कि सुशांत की फैमिली हो या कोई राजनीतिक दल सभी को शांत बैठना चाहिए।

यहाँ बता दें कि शिवसेना सांसद संजय राउत ने बीते दिनों पार्टी के मुखपत्र सामना में एक लेख लिखा था, जिसमें उन्‍होंने सुशांत के परिवार पर टिप्‍पणी की थी। इसमें उन्‍होंने कहा था कि सुशांत के पिता ने दो शाद‍ियाँ की हैं और दूसरी शादी के बाद से सुशांत और उनके पिता के रिश्‍ते ठीक नहीं थे।

हालाँकि, राउत के इस बयान के बाद सुशांत के परिजनों ने इस बयान का खंडन किया और इसे बिलकुल झूठा बताया। इसके साथ ही उन्होंने ऐसी हरकत पर राउत को लीगल नोटिस भेजकर उनसे माफी माँगने को कहा। लेकिन संजय राउत ने मीडिया से बात करते हुए शांत बैठने की अपील तो कर ली, पर माफी अभी भी नहीं माँगी। उन्होंने केवल यही कहा कि उन्होंने अपना बयान उन्हें मिली जानकारी के आधार पर दिया था।

उन्होंने कहा, “अगर हमारी ओर से किसी तरह की चूक हुई है, तो हम इसके बारे में सोचेंगे। लेकिन मुझे इस पर गौर करना होगा। मैंने अब तक जो कुछ कहा है, वह मेरे पास मौजूद जानकारी के आधार पर है, सुशांत का परिवार उनके पास मौजूद जानकारी के आधार पर बोल रहा है।”

मीडिया से बातचीत में संजय राउत ने सुशांत का मामला सीबीआई को सौंपे जाने पर कहा कि यह बिहार सरकार की सिफारिश का नतीजा है। उन्होंने यह भी कहा, “मुझे लगता है कि अभी सभी को शांत बैठना चाहिए। जब तक कि मुंबई पुलिस की जाँच पूरी नहीं हो जाती, सभी को शांत बैठना चाहिए, फिर चाहे वह सुशांत का परिवार हो, कोई राजनीति दल हो या हमारे विरोधी। मुझे लगता है क‍ि मुंबई पुलिस की जाँच भी अब खत्‍म होने वाली है।”

बता दें कि इससे पहले भाजपा विधायक नीरज कुमार सिंह के वकील अनीश झा ने इस बात का खुलासा किया था कि सुशांत के परिवार ने राउत से 48 घंटों में माफी की अपील की है। उन्होंने कहा कि सुशांत के मामले में जाँच चल रही है। लेकिन लोग सच को बाहर नहीं आने देना चाहते। अगर कोई राजनीतिक दबाव या किसी कारणवश उन्होंने यह विवादित बयान दिया है, तो उन्हें 48 घंटे के भीतर माफी माँगनी चाहिए। हर कोई गलती करता है। इसलिए हमने उन्हें पहले नोटिस भेजा है।”

‘कैप्टन अमरिंदर सिंह खो चुके हैं मानसिक संतुलन’ – कॉन्ग्रेसी सांसद ने कॉन्ग्रेसी मुख्यमंत्री पर लगाया आरोप

कॉन्ग्रेस पार्टी की दिक्कतें ख़त्म होने का नाम ही नहीं ले रही हैं। राजस्थान में लंबा नाटक चलने के बाद अब पंजाब से विवाद की ख़बरें आ रही हैं। कॉन्ग्रेस सांसद प्रताप सिंह बाजवा ने अपनी ही पार्टी के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह के तौर तरीक़ों पर सवाल खड़े किए हैं। कॉन्ग्रेस सांसद का कहना है कि क्या अमरिंदर सिंह को वाकई लोकतंत्र में विश्वास है? अगर ऐसा तो वह महाराजा की तरह बर्ताव क्यों कर रहे हैं?

दरअसल सांसद प्रताप सिंह बाजवा ने चंडीगढ़ के डीजीपी को एक पत्र लिखा था। जिसमें उन्होंने कहा था अगर उनकी सुरक्षा को किसी भी तरह का नुकसान पहुँचता है, तो इसके लिए मुख्यमंत्री और डीजीपी ज़िम्मेदार होंगे। इसके जवाब में मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने भी जवाब दिया था।

कैप्टन अमरिंदर सिंह के जवाब पर सांसद प्रताप सिंह बाजवा का कहना है, “जिस तरह का जवाब उन्होंने (अमरिंदर सिंह) ने दिया है, उससे ऐसा लगता है कि वह अभी तक अपने सपनों में पटियाला के महाराजा बने हुए हैं। उनकी बातें सुन कर ऐसा लगता है, जैसे उन्हें लोगों की ज़रूरत ही नहीं है। न ही वह किसी को जवाब देना ज़रूरी समझते हैं।”

इसके अलावा कॉन्ग्रेस सांसद ने यह भी कहा, “जब से हमने ज़हरीली शराब पीने के बाद हुई 121 मौतों पर सवाल उठाया है, तब से ऐसा लगता है जैसे मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह अपना मानसिक संतुलन खो चुके हैं। जैसे उन्हें इस बात का दुःख है कि उनकी पार्टी के सांसद ने ही उनसे सवाल कर लिया।”  

कॉन्ग्रेस सांसद प्रताप सिंह बाजवा ने इस मुद्दे पर कुछ और अहम बातें कही। उनका कहना है:

“2 साल पहले अमृतसर में रेलवे दुर्घटना हुई थी। इस दुर्घटना में 60 लोगों की मौत हुई थी। मुख्यमंत्री ने जाँच के लिए एसआईटी के गठन का आदेश भी दिया था लेकिन अभी तक कुछ नहीं हुआ। इसके बाद बाटला की पटाखे फ़ैक्टरी में धमाके हुए थे। इसकी जाँच के लिए भी एसआईटी का गठन हुआ था लेकिन इस मामले में भी कुछ नहीं हुआ था। इसलिए कच्ची शराब से हुई मौतों को लेकर मेरे कुछ सवाल हैं। क्या जालंधर के मंडलायुक्त इस मामले की जाँच कर सकते हैं?”  

आबकारी विभाग अमरिंदर सिंह के पास है। गृह मंत्रालय की तरह पंजाब की पुलिस भी अमरिंदर सिंह सरकार के दायरे में आती है। इसके बाद बाजवा ने कहा आबकारी विभाग की वजह से हुए नुकसानों की जानकारी के लिए उन्होंने राज्यपाल से भी संपर्क किया। इसके बाद सासंद बाजवा के अनुसार, “हमने माँग उठाई कि कच्ची शराब की वजह से हुई मौतों के मामले की जाँच सीबीआई या सीआईडी करे। लेकिन इस बात की वजह से अमरिंदर सिंह का मानसिक संतुलन बिगड़ गया और उन्होंने मेरी सुरक्षा तक छीन ली।”    

प्रताप सिंह बाजवा ने डीजीपी को लिखे पत्र में कई बातों का ज़िक्र किया था। उन्होंने कहा, “मैंने पिछले कुछ समय में राजनीति-ड्रग्स-पुलिस के गठजोड़ का खुलासा किया है। कैसे इन सभी की मिलीभगत से राज्य में इतने बड़े पैमाने पर नशे का कारोबार हो रहा है। यह बेहद स्वाभाविक है कि पंजाब में ड्रग माफिया बहुत बड़े पैमाने पर अपनी गतिविधियों को अंजाम दे रहा है। इसमें उसे पुलिस की तरफ से पूरा सहयोग और बराबर राजनीतिक संरक्षण मिल रहा है।” इन बातों को आधार बनाते हुए कॉन्ग्रेस सांसद ने सुरक्षा की माँग की थी।   

कैमरा के आगे पेपर रख हुक्का पीने लगे सीनियर वकील धवन: राजस्थान HC में BSP MLA मामले की चल रही थी वर्चुअल सुनवाई, देखें वीडियो

राजस्थान उच्च न्यायालय की एक वर्चुअल सुनवाई के दौरान वरिष्ठ वकील राजीव धवन को हुक्का पीते हुए देखे गए जिसके बाद यह वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो गया है। कथित तौर पर यह घटना बृहस्पतिवार (अगस्त 12, 2020) को हुई जब राजस्थान उच्च न्यायालय की जयपुर पीठ ने कॉन्ग्रेस के साथ बसपा के छह विधायकों के विलय को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई फिर से शुरू की।

दरअसल, हाईकोर्ट में मामले की सुनवाई के दौरान कपिल सिब्बल जब बहस कर रहे थे उसी समय सीनियर एडवोकेट राजीव धवन कैमरे के सामने पेपर रखकर स्मोकिंग करते नजर आए।

सोशल मीडिया पर वायरल हुई वीडियो क्लिप में वरिष्ठ वकील राजीव धवन ने वकील कपिल सिब्बल की दलील के रूप में अपने चेहरे के सामने कागज का एक सेट पकड़कर दिखाया। हालाँकि, वरिष्ठ अधिवक्ता धवन इन दस्तावेजों के पीछे अपने चेहरे को छिपाते हुए देखे जा सकते हैं, फिर भी, वायरल वीडियो क्लिप में धुएँ के छल्ले आराम से नजर आ रहे हैं।

इसके बाद अधिवक्ता दस्तावेजों को अलग रख देते हैं। लेकिन जैसे ही वह दस्तावेजों को किनारे रखते हैं, राजीव धवन सुनवाई के दौरान हुक्का पीते हुए दिखाई पड़ते हैं। यह स्पष्ट नहीं है कि इस वर्चुअल सुनवाई के दौरान अधिवक्ता धवन द्वारा हुक्का पीने की इस घटना को राजस्थान उच्च न्यायालय द्वारा नोटिस किया गया था या नहीं।

शुक्रवार (अगस्त 13, 2020) को सुनवाई फिर से शुरू होने पर, वरिष्ठ वकील राजीव धवन का वीडियो अचानक गायब हो गया। इसके लिए राजस्थान HC ने उनसे पूछा कि क्या उनके द्वारा वीडियो को बंद कर दिया गया था?

बसपा के टिकट पर चुनाव जीत विधानसभा पहुँचने के बाद कॉन्ग्रेस में विलय करने वाले 6 विधायकों को सदन की सदस्यता के लिए अयोग्य घोषित करने का अनुरोध करते हुए भाजपा विधायक मदन दिलावर ने राजस्थान उच्च न्यायालय में अर्जी दी है।

इस अर्जी में उन्होंने कहा है कि इन विधायकों ने अपनी पार्टी के व्हिप का उल्लंघन किया है। अभी यह याचिका उच्च न्यायालय में विचाराधीन है। जिसकी सुनवाई के दौरान अधिवक्ता राजीव धवन हुक्का पीते और धुएँ के छल्ले बनाते देखे गए।

बेंगलुरु दंगों के पीछे कट्टरपंथियों का हाथ: कर्नाटक के गृहमंत्री ने बताया- ‘बड़ी साजिश का हिस्सा’

कर्नाटक के गृहमंत्री बसवराज बोम्मई ने गुरुवार (13 अगस्त, 2020) को बेंगलुरु में हुए दंगों के पीछे कट्टरपंथियों का हाथ बताया है। मंगलवार रात हुए दंगों को एक बड़ी साजिश का हिस्सा बताते हुए उन्होंने जाँच के आदेश भी दिए है।

गौरतलब है कि कर्नाटक की राजधानी बंगलुरू में हुए दंगे में 3 लोगों की मौत हो गई और सैकड़ों लोग जख्मी हुए हैं। इसके साथ ही दंगाइयों ने दर्जनों गाड़ियों को आग लगा दी और करोड़ों की संपत्ति को नुकसान पहुँचाया है।

टाइम्स नाउ के दीपक बोपन्ना के साथ एक विशेष बातचीत में, कर्नाटक के गृह मंत्री ने कहा, “कॉन्ग्रेस विधायक और उनके फॉलोवर्स के बीच इंटरनल डिफरेंस है, उनके और सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया (एसडीपीआई) के बीच मतभेद है, ये सभी चीजें सामने आ रही हैं। इसके अलावा, यह एक बड़ी साजिश का हिस्सा था और बड़े पैमाने पर एसडीपीआई की भूमिका सामने आ रही है।”

उन्होंने आगे कहा, “हम इस घटना की गहराई से जाँच कर रहे हैं। हमने वीडियो फुटेज में पाया है कि पड़ोसी क्षेत्रों के एसडीपीआई के लोग भी दंगे में शामिल हुए थे।”

गृह मंत्री ने आगे कहा कि सभी नुकसान दंगाइयों से सुप्रीम कोर्ट के दिशानिर्देशों के अनुसार वसूल किए जाएँगे। बोम्मई ने कहा कि, सभी एंगल की जाँच कर यह भी पता लगाया जाएगा कि कहीं इस घटना का देश की किसी पिछली घटना से कोई संबंध तो नहीं है।

गौरतलब है कि कॉन्ग्रेस विधायक श्रीनिवास मूर्ति के भतीजे नवीन के फेसबुक पोस्ट को लेकर सारा विवाद शुरू हुआ था। उस पर पैगम्बर मुहम्मद को लेकर विवादित पोस्ट डालने का आरोप है। अब तक हिंसा करने वालों में से 150 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। बेंगलुरु के पुलिस कमिश्नर कमल पंत ने लोगों को शांति बनाए रखने की अपील की है। इस घटना में 3 लोग मारे गए और 60 पुलिसकर्मी घायल हुए हैं।

बता दें कि 200-300 के क़रीब संप्रदाय विशेष की भीड़ ने न सिर्फ कॉन्ग्रेस विधायक अखंड श्रीनिवास मूर्ति के घर पर तोड़फोड़ की थी बल्कि बाहर खड़ी गाड़ियों को भी जला डाला था। विधायक आवास में तोड़फोड़ का नज़ारा अभी भी देखा जा सकता है। दंगाइयों ने मजहबी नारे लगाते हुए पत्थरबाजी और आगजनी की। जिसके बाद बोम्मई ने एक महत्वपूर्ण घोषणा करते हुए कहा था कि सार्वजनिक संपत्ति और वाहनों को नुकसान की भरपाई क्षति पहुँचाने वाले दंगाइयों को करना होगा।

पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर और लद्दाख से बने हैं डॉक्टर तो नहीं कर सकेंगे प्रैक्टिस, MCI ने लिया फैसला

मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया (MCI) ने पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर और लद्दाख (PoJKL) की मेडिकल शिक्षा को लेकर एक बड़ा फैसला लिया है। भारत में मेडिकल एजुकेशन संबंधी मानकों को देखने वाली संस्था मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया की ओर से जारी सर्कुलर के मुताबिक, पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर और लद्दाख स्थित मेडिकल कॉलेजों से शिक्षा प्राप्त करने वाला कोई भी व्यक्ति भारत में आधुनिक चिकित्सा की प्रैक्टिस करने के योग्य नहीं होगा।

बोर्ड ऑफ गवर्नर्स (BoG) ने अगस्त 10, 2020 को एक सार्वजनिक सूचना में कहा कि समूचा जम्मू कश्मीर और लद्दाख क्षेत्र भारत का अभिन्न अंग है। पाकिस्तान ने इन क्षेत्रों के हिस्सों पर अवैध और जबरन कब्जा कर रखा है।

बीओजी के महासचिव डॉक्टर आरके वत्स ने जारी नोटिस में कहा है कि पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू कश्मीर और लद्दाख क्षेत्र स्थित किसी भी चिकित्सा संस्थान को भारतीय चिकित्सा परिषद अधिनियम 1956 के तहत अनुमति और मान्यता की जरूरत है। पीओजेकेएल स्थित ऐसे किसी भी चिकित्सा संस्थान को इस तरह की अनुमति नहीं दी गई है।

जारी सूचना में कहा गया है कि पीओजेकेएल के इन इलाकों में स्थित चिकित्सा कॉलेजों से शिक्षा प्राप्त करने वाला व्यक्ति भारत में आधुनिक चिकित्सा की प्रैक्टिस करने के लिए भारतीय चिकित्सा परिषद अधिनियम 1956 के तहत पंजीकरण हासिल करने के योग्य नहीं होगा।

उल्लेखनीय है कि पाकिस्तान बीते कई सालों से कश्मीरी युवाओं तक अपनी पहुँच बनाने के लिए कश्मीरी स्टूडेंट्स को कम कीमत में शिक्षा का लालच देता रहा है। जिसके बाद कई ऐसे मामले सामने आ चुके हैं, जब कश्मीरी युवा पढ़ाई के लिए लीगल चैनल से पाकिस्तान या पीओजेके गए, लेकिन उसके बाद आतंकी कैंपों में ट्रेनिंग लेकर लाइन ऑफ कंट्रोल के रास्ते से लौटे।

जम्मू-कश्मीर के बहुत सारे युवक पाकिस्तान में मेडिसिन की पढ़ाई करने जाते थे, जिनमें से कई सारे अलगाववादी नेताओं की सिफारिश पर जाया करते थे और पाकिस्तान सरकार ने उन मेडिकल इंस्टीट्यूट्स में जम्मू-कश्मीर के छात्रों के लिए आरक्षण भी तय कर दिया था। मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया के इस नीतिगत फैसले से पाकिस्तान को गहरी चोट लगी है।

बेंगलुरु दंगे: 5 लोगों ने किया 200-300 की भीड़ का नेतृत्व, लगे-‘पुलिस को मारो और खत्म करो’ के नारे, 9 FIR दर्ज

बेंगलुरु में मंगलवार (अगस्त 11, 2020) को हिंसा भड़कने के मामले में 5 लोगों का नाम FIR में शामिल किया गया है। इन पाँचों पर आरोप है कि इन्होंने ही 200-300 लोगों की इस्लामिक भीड़ को एकत्रित करके बेंगलुरु में दंगे करवाए।

टाइम्स ऑफ इंडिया ने इस एफआईआर पर रिपोर्ट की है। रिपोर्ट के मुताबिक FIR में बताया गया है कि भीड़ के पास पहले से माचिसें, पत्थर, रॉड जैसे हथियार थे। ये भीड़ कथित तौर पर नारे लगा रही थी, “पुलिस को मारो और खत्म करो।”

इन लोगों ने केजी हल्ली और डीजे हल्ली थाने में 11 अगस्त को आ गजनी करके हड़कंप मचाया था। इन्होंने पेट्रोल से भरी प्लास्टिक की बोतलें थाने में पुलिस के ऊपर फेंकीं थी।

रिपोर्ट यह भी बताती है कि यह दंगे संप्रदाय विशेष के कुछ स्थानीय नेताओं की एक बैठक के बाद शुरू हुए। इस बैठक का एजेंडा ही नवीन के पोस्ट पर विचार करना था। सदस्यों ने इस बैठक के बाद निर्णय लिया कि वह इस मामले को पुलिस में लेकर जाएँगे। वहीं, कट्टरपंथी इस्लामिक संगठन SDPI के सदस्य समेत कई इस्लामिक नेताओं ने विधायक के भतीजे के ख़िलाफ़ एक्शन लेने की ठानी।

पुलिस बताती है कि यह जानकारी फर्जी है कि पुलिस वाले नवीन के ख़िलाफ़ कंप्लेन नहीं स्वीकार कर रहे थे, जिसके कारण दंगे हुए और 3 लोग मारे गए व 60 पुलिस वाले घायल हुए।

इकोनॉमिक टाइम्स के अनुसार, इस मामले में अब तक 9 FIR दर्ज हुई हैं और कहा जा रहा है कि साइबर पुलिस इस केस में और शिकायत दर्ज कर सकती है।

गौरतलब है कि हमने पहले इस बात की जानकारी दी थी कि कैसे संप्रदाय विशेष की भीड़ ने डीजे हल्ली थाने के बेसमेंट इलाके में घुसकर हिंसा की और 200-250 वाहनों को आग के हवाले झोंक दिया।

ऐसी वीडियोज भी सामने आई जहाँ इस्लामिक भीड़ के सामने लाचार पुलिस अधिकारी अपने वरिष्ठों से रो रोकर गोली चलाने की अनुमति माँग रहे हैं। लेकिन, तब भी घटना के अगले ही दिन SDPI पूरी घटना के लिए संप्रदाय विशेष की भीड़ की जगह बेंगलुरु पुलिस पर इल्जाम मढ़ देती है।

सुवर्ण न्यूज के अनुसार, संगठन के राज्य अध्यक्ष इलियास मुहम्मद थाम्बे ने बुधवार को दावा किया कि बेंगलुरु पुलिस ने आरोपित की गिरफ्तारी में देरी की, जिससे संप्रदाय विशेष की भीड़ नाराज हो गई और बेंगलुरु की सड़कों पर हिंसा करने के लिए विवश हो गई।

बता दें इस पूरी घटना में 60 से ज्यादा पुलिसकर्मी पत्थरबाजी और दंगों के दौरान घायल हुए हैं। कम से कम 10 वाहन जिसमें दो डीसीपी की इनोवा गाड़ी थी, थाने के सामने तोड़ी गई। इसके बाद भीड़ ने डीजे हल्ली थाने के सामने ही वाहनों में आग भी लगाई।

पूर्व नियोजित दंगे में संप्रदाय विशेष की भीड़ ने थाने पर पेट्रोल बम और हथियारों से हमला किया। इस दौरान भीड़ अल्लाह हू अकबर और नारा ए तकबीर के नारे लगाती रही। मामला शांत पड़ने पर कर्नाटक गृहमंत्री ने आदेश दिए कि वह इन दंगों की जाँच करवाएँगें और जो नुकसान हुआ है उसकी भरपाई भी दंगाइयों से की जाएगी। इस पूरे केस में अभी तक 146 लोग गिरफ्तार हुए हैं। 

आनंद रंगनाथन को वापस लाओ: कुरान की आयतें लिखने पर ‘घृणा वाला’ कह कर ट्विटर ने किया अकाउंट ब्लॉक

बेंगलुरु में इस्लामिक हिंसा भड़कने के बाद जेएनयू प्रोफेसर आनंद रंगनाथन ने एक ट्वीट किया। इस ट्वीट में उन्होंने समुदाय विशेष से अपील की कि जो भी लोग कुरान की एक ऐसी आयत का विरोध करते हैं, जिसमें अल्लाह या अल्लाह के बंदों को दुत्कारने पर सजा मिलने की बात है, उन्हें अब मुखर होकर बोलना चाहिए।

आनंद रंगनाथन का यह ट्वीट उन लोगों पर एक निशाने की तरह था, जो आम दिनों में मजहब और दीन की बातें करते हैं लेकिन जब बेंगलुरु जैसी कोई मजहबी हिंसा घट जाती है तो मानवता की बात करके उनके अपराधों से ध्यान भटकाने में लग जाते हैं।

जेएनयू के प्रोफेसर ने इसी रवैये पर कुरान की इस आयत को कोट किया था- “जो भी अल्लाह और उसके बंदे को दुत्कारेगा, अल्लाह उन्हें इस जहां में लानत देता है और उनके लिए अपमानजनक दंड भी तैयार रखता है।”

डॉ रंगनाथन ने कुरान की इन पंक्तियों को लिखते हुए कहा था कि जो कुरान की इन बातों में विश्वास नहीं रखते, उन्हें यह बात मुखर हो कर कहना चाहिए। मगर, ट्विटर ने उनके इस ट्वीट को नियमों का उल्लंघन बताकर उनका अकाउंट लॉक कर दिया।

कारण में ट्विटर ने आनंद रंगनाथन के ट्वीट को ‘घृणा वाला’ बताया। जिस पर जेएनयू प्रोफेसर ने अपील करते हुए ट्विटर को लिखा कि उन्होंने जो भी ट्वीट किया है, वह कुरान की एक आयत है। तो क्या इसका मतलब ये है कि कुरान में लिखी आयात घृणा वाली है। किस मामले में ये निर्धारित होगा कि किसी आयत का हवाला देना आपके नियमों का उल्लंघन है।

आपको बता दें कि डॉ आनंद रंगनाथन ने अपने ट्वीट में जिस कुरान की आयत का उल्लेख किया है, उसे https://quran.com/33/57 पर यहाँ पढ़ा जा सकता है। फिर सवाल उठता है कि ट्विटर के नियमों का उल्लंघन किससे हुआ। क्या बस आनंद रंगनाथन के ट्वीट से? या फिर आयात में मौजूद आदेश से?

इस घटना के बाद आनंद रंगनाथन के ट्विटर पर वापस लाने की माँग तेज हो गई है। लोग अपने-अपने ट्विटर हैंडल से #BringBackAnandRanganathan ट्वीट करके उनकी वापसी की माँग करने लगे। लोगों ने उन्हें सबसे समझदार आवाज बताते हुए ट्विटर से अपील की कि उन्होंने कोई भी नियम उल्लंघन नहीं किया। उन्हें वापस लाया जाए।

एक ने आनंद रंगनाथन के अकॉउंट ब्लॉक सुनकर कहा कि मतलब कुरान की आयत ट्विटर पर न डाली जाए, क्योंकि ट्विटर उसे हेटस्पीच मानता है। एक यूजर ने ट्विटर को वामपंथियों का उपकरण बताया। एक अन्य नेटिजन ने पूछा कि क्या कुरान की आयत कोट करना ईशनिंदा हो गई?

वहीं, डॉ रंगनाथन ने खुद भी टाइम्स नाऊ में एक डिबेट में अपने साथ हुई घटना पर बात करते हुए कुछ उन पुराने मुद्दों का जिक्र किया, जब पैगंबर का नाम आने के कारण इस्लामिक भीड़ भड़क गई। वह रंगीला रसूल की किताब का जिक्र करते हैं और बताते हैं कि कैसे इल्मुद्दीन नामक कट्टरपंथी ने उन्हें मारा और बाद में जिन्ना ने उसी हत्यारे का केस लड़ा।

वह कहते हैं कि यह पहली बार नहीं हुआ है। कमलेश तिवारी की हत्या की माँग भी कॉन्ग्रेस विधायक समेत संप्रदाय विशेष के सैंकड़ों द्वारा की जा रही थी। वह पूछते हैं कि क्या एक पोस्ट मात्र से भड़क जाना असहिष्णुता नहीं है? साजिद बुखारी नामक पत्रकार की बात का जिक्र करते हुए आनंद रंगनाथन बताते हैं कि उसने भी कहा था, “जब बात पैगंबर की आती है जो मुझे गर्व है असहिष्णु होने पर।”

आनंद रंगनाथन शार्ली ऐब्दो मैग्जीन पर हुए हमले की ओर ध्यान आकर्षित करवाते हैं और कमलेश तिवारी मामले में ओवैसी की उस बात को कोट करते हैं, जिसमें ओवैसी ने कमलेश तिवारी को गाली देते हुए कहा था कि अब उनकी गुस्ताखी ने बर्बादी को दावत दी है।

राम जन्मभूमि ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास कोरोना पॉजिटिव, भूमिपूजन के दौरान पीएम मोदी के साथ साझा किया था मंच

श्रीराम जन्मभूमि ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास कोरोना पॉजिटिव पाए गए हैं। 5 अगस्त यानी आज से 8 दिन पहले महंत नृत्य गोपाल दास प्रधानमंत्री मोदी और आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के साथ अयोध्या में राम मंदिर के भूमिपूजन में शामिल हुए थे। इसके साथ उन्होंने उनके साथ मंच भी साझा किया था।

नृत्य गोपाल दास बुधवार को जन्माष्टमी मनाने मथुरा पहुँचे थे। जहाँ उन्हें कृष्ण जन्माष्टमी समारोह के दौरान साँस लेने में तकलीफ हुई। गोपाल दास को आगे के इलाज के लिए मेदांता अस्पताल, गुरुग्राम शिफ्ट किया जा रहा है। 5 अगस्त 2020 को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और आनंदीबेन पटेल भी उनके साथ मंच पर थे।

इस समय देश में कुल कोरोना मरीजों का आँकड़ा 24 लाख के करीब पहुँच गया है। पिछले 24 घंटे में करीब 67 हजार नए मामले सामने आए हैं और 942 लोगों की मौत हो गई है। गुरुवार को स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से जारी अपडेट के मुताबिक, कुल मरीजों की संख्या 23 लाख 96 हजार 637 है।

कोरोना से अब तक 47 हजार 33 लोगों की मौत हो चुकी है। वहीं अब तक 16 लाख 95 हजार 982 लोग ठीक हो चुके हैं, जबकि एक्टिव केस की संख्या 6 लाख 53 हजार 622 है। आँकड़ो के मुताबिक देश में कोरोना से औसत रिकवरी दर 70 फीसदी से ज्यादा हो गई है। इसके साथ ही देशभर में एक दिन में सबसे ज्यादा 7 लाख 33 हजार 449 टेस्ट किए गए।