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हिंदुओं को भगाने, मंदिरों को बम से उड़ाने की धमकी देने वाले साजिद को यूपी पुलिस ने किया गिरफ्तार

UP की सुल्तानपुर पुलिस ने सोमवार (अगस्त 10, 2020) को साजिद नाम के एक शख्स को बलात्कार की धमकी देने और हिंदू समुदाय के खिलाफ फेसबुक पर हिंसक टिप्पणी शेयर करने के आरोप में गिरफ्तार किया है।

फेसबुक पर साजिद और अरशद नाम के दो आरोपितों की आपत्तिजनक टिप्पणियों का स्क्रीनशॉट शेयर करते हुए, एक ट्विटर यूजर ने शिकायत की, “अरशद और साजिद अली, जो सुल्तानपुर के निवासी हैं, ने हिंदुओं को भगाने और मंदिरों को बम से उड़ाने की धमकी दी है। जब सूरज पांडेय नाम के एक व्यक्ति ने सांप्रदायिक टिप्पणी पर आपत्ति जताई, तो दोनों ने उनकी नाबालिग बहन का बलात्कार करने की धमकी दी। कृपया उनके खिलाफ कार्रवाई करें।”

अरशद और साजिद सोशल मीडिया पर पंडित सूरज नाम के इस युवक को धमकी देते हुए देखे गए कि हिंदू धर्म के लोग उस इलाके में रहने के लिए उनसे भीख माँगेंगे और वो उनकी नाबालिग बहन का बलात्कार कर देंगे।

Screenshot of the abusive comments, via Twitter
Screenshot of the abusive comments, via Twitter

NCIB ने लिया संज्ञान

एक ट्विटर यूजर की शिकायत के बाद, उत्तर प्रदेश के राष्ट्रीय अपराध जाँच ब्यूरो (NCIB) ने इस मामले का संज्ञान लिया और सुल्तानपुर पुलिस को इस संबंध में आवश्यक कार्रवाई करने का निर्देश दिया है।

एक आरोपित गिरफ्तार

राष्ट्रीय अपराध जाँच ब्यूरो के ट्वीट पर संज्ञान लेते हुए सुल्तानपुर पुलिस ने बताया कि इनमें से एक आरोपित साजिद को गिरफ्तार कर लिया गया है और उसे जिला जेल भेज दिया गया है। NCIB के ट्वीट के जवाब में पुलिस ने बताया कि आरोपित साजिद उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर के सरकंडेडीह का रहने वाला है।

ट्वीट में आगे जानकारी दी गई कि साजिद को भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 295 ए (धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाने का जान बूझकर किया गया प्रयास), 504 (भड़काना), 506 (आपराधिक धमकी), सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 67 (इलेक्ट्रॉनिक रूप से यौन रूप से स्पष्ट सामग्री प्रकाशित करना) के तहत मामला दर्ज किया गया है।

सचिन पायलट की वापसी से और गहराया संकट: फूट पड़ी कॉन्ग्रेस में, थूका-चाटा कॉन्ग्रेसियों ने, लेकिन दोषी कौन है? भाजपा…

‘सत्य परेशान हो सकता है लेकिन पराजित नहीं’- राजस्थान में जब सियासी ड्रामा शुरू हुआ था, तब सचिन पायलट का यही ट्वीट सामने आया था। ये राजस्थान का ड्रामा कम और कॉन्ग्रेस का अंदरूनी कलह ज्यादा था। अब स्थिति ये है कि ‘सत्य’ परेशान भी रहा, पराजित भी हो गया और अब वापस जमीन पर धड़ाम से गिरा भी है। पायलट के प्लेन ने वहीं लैंडिंग कर दी, जहाँ से वो उड़ा था। एक ‘यू-टर्न’ के बाद सब शांत होता दिख रहा है।

मंगलवार (अगस्त 10, 2020) को सचिन पायलट इस पूरे विवाद के बीच पहली बार मीडिया से मुखातिब हुए और उन्होंने कहा कि पार्टी से उनके द्वारा किसी भी पद की माँग नहीं की गई है। बकौल पायलट, उन्होंने तो सिर्फ सरकार के कामकाज के तौर-तरीके और पार्टी कार्यकर्ताओं के सम्मान का मुद्दा उठाया था। 45 विधायकों में से एक पर राष्ट्रद्रोह तक का केस लगाए जाने और फिर इस 25 दिनों के सियासी चकल्लास के बाद आरोप वापस लिए जाने वाली प्रक्रिया पर भी उन्होंने नाराजगी जताई।

सचिन पायलट ने याद किया कि कैसे उनके ख़िलाफ़ कई मामले दर्ज किए गए। उनका कहना है कि ये सब नहीं होना चाहिए था। पायलट ने ये भी कहा कि उन्होंने तो बस कुछ मुद्दे उठाए थे। अब बदले की राजनीति नहीं होनी चाहिए। साथ ही कॉन्ग्रेस के प्रति श्रद्धा जताते हुए वो ये भी कहते नज़र आए कि वो पार्टी द्वारा दी गई जिम्मेदारियों का निर्वहन करेंगे। वो ये कहने से भी नहीं चूके कि उन्होंने कभी पार्टी, इसकी विचारधारा और नेतृत्व को लेकर कुछ भी गलत नहीं कहा।

यहाँ पर सवाल उठता है कि अगर सब कुछ इतना ही सीधा और सपाट था तो वो गए ही क्यों थे? एक तरफ तो वो कहते हैं कि सरकार के कामकाज की प्रक्रिया को लेकर वो नाराज़ थे और दूसरी तरफ वो ये भी कहते हैं कि सरकार के ख़िलाफ़ तो उन्होंने कुछ कहा ही नहीं। जब कहने की बात आती है तो गहलोत ने पायलट को निकम्मा, नकारा कर धोखेबाज से लेकर और न जाने क्या-क्या कहा। अब यही सचिन पायलट कह रहे हैं कि अशोक गहलोत तो सम्मानित और बुजुर्ग हैं।

कॉन्ग्रेस में ड्रामा चल रहा था और मीडिया के साथ-साथ पार्टी के कई नेता इसे अमित शाह और भाजपा की चाल बताते रहे। मीडिया ने इसे ऐसे पेश किया जैसे भाजपा ही अशोक गहलोत की सरकार गिराने की कोशिश कर रही हो। अगर ऐसा था तो फिर सचिन पायलट अब वापस मान गए हैं तो फिर वो या उनकी पार्टी खुलासा क्यों नहीं करती कि इसमें भाजपा का क्या रोल था? अब सब एक हैं तो बता दें।

कॉन्ग्रेस में सोनिया गाँधी की बैठक में घमासान हुआ। ‘बुजुर्ग बनाम युवा’ की लड़ाई छिड़ गई। कुछ नेताओं द्वारा मनमोहन सिंह की यूपीए सरकार पर ठिकरा फोड़ने के बाद ये बहस सोशल मीडिया पर आ गई और शशि थरूर व आनंद शर्मा जैसे नेताओं ने आगे आकर यूपीए के 10 साल के कार्यकाल का समर्थन करते हुए ‘आलोचक नेताओं’ से नाराज़गी जताई। अगर कोई मुद्दा ही नहीं था तो कलह ट्विटर पर क्यों हुआ?

अब मीडिया का एक बड़ा वर्ग ये प्रचारित करने में सक्रिय हो गया है कि कैसे राहुल गाँधी ने चुटकियों में इस मसले को सुलझा लिया। कैसे उन्होंने अपनी नेतृत्व क्षमता का परिचय देते हुए सचिन पायलट को मनाम लिया और राजस्थान की सरकार गिराने से बचा कर भाजपा की साजिश को नाकाम कर दिया। राहुल गाँधी को हर महीने नए तरीके से लॉन्च किया जाता है। सचिन पायलट के बहाने भी उन्हें एक बार और लॉन्च किया जा रहा है।

कॉन्ग्रेस के अंदरूनी रायते भाजपा के लिए झटका कैसे?

अब आते हैं उन लोगों पर, जो इसे भाजपा के लिए झटका बता रहे हैं। भाजपा को झटका, ‘ऑपेरशन लोटस’ नाकाम, अमित शाह से बड़े चाणक्य निकले अशोक गहलोत, राहुल ने भाजपा की चाल पर फेरा पानी और विधायकों को नहीं खरीद पाई भाजपा- मीडिया में ऐसी बातें चल रही हैं। उन लोगों से एक ही सवाल है कि इस पूरे मामले में भाजपा थी कहाँ? सिर्फ कॉन्ग्रेस नेताओं ने बयानों के अलावा? फिर भाजपा को झटका कैसे?

ये स्वाभाविक है कि अगर विरोधी पार्टी कमजोर होगी तो किसी भी दल को फायदा होगा। लेकिन, वहाँ चल रहे ड्रामे से भाजपा को झटका कैसे लग गया? कॉन्ग्रेस का संकट टला नहीं है। विधायकों को मनाने का दौर जारी है। गहलोत कैम्प के ही विधायकों की नाराजगी की खबर आ रही है, जो ये कह रहे हैं कि उनकी सरकार रहते हुए भी उन्हें बन्दी की तरह रहना पड़ रहा है। रेगिस्तानों में विधायकों को भटकाया जा रहा है।

जैसलमेर के सूर्यागढ़ में ठहरे विधायक मायूस हैं। उन्होंने रणदीप सुरजेवाला के सामने ही पूछा है कि जिन लोगों ने अपने स्वार्थ के लिए सरकार को संकट में डाला, सरकार के काम-काज को प्रभावित किया और जिनके कारण ये पूरा ड्रामा चला, अब पार्टी उनके लिए ही बाहें फैलाए खड़ी हैं। परिवार से दूर रहे विधायक नाराज़ हैं कि वो वैसे के वैसे ही रह गए और जिनके कारण ये सब हुआ उनका स्वागत किया जा रहा है।

विधायकों के मान-मनव्वल का एक दौर फिर से चलेगा। एक बगावत टलने के बाद कई छोटे-छोटे बगावतों से पार्टी को नुकसान होने की पूरी संभावना है। कॉन्ग्रेस के जिन विधायकों को उम्मीद थी, झटका उन्हें लगा है, भाजपा को नहीं! अब सचिन पायलट अपने गुट के विधायकों को मंत्री बनवाएँगे, तो इन विधायकों के अरमान धरे के धरे रह जाएँगे। इन सबसे कॉन्ग्रेस को ही निपटना है, भाजपा को नहीं!

ये झटका किसे है? सचिन पायलट अब राजस्थान में कॉन्ग्रेस के अध्यक्ष नहीं रहे। न ही वो अब राज्य के उप-मुख्यमंत्री हैं। महीने भर उनका अपमान हुआ। कॉन्ग्रेस नेताओं ने उन्हें भला-बुरा कहा। अगर उन्हें प्रदेश अध्यक्ष और डिप्टी सीएम का पद वापस मिल भी जाता है तो फिर उन्हें क्या फायदा हुआ? साथ में उनका जो अपमान किया गया, वो भी तो रह गया। कल अगर उनकी कोई नाराज़गी होती है तो क्या उन्हें वैसा ही समर्थन मिलेगा, जैसा अभी मिला था?

हो सकता है कि इसी बीच गैंगस्टर विकास दुबे, भारत-चीन गतिरोध और सुशांत सिंह राजपूत के मुद्दे मीडिया में ऐसे छाए हुए थे कि एक समय के बाद सचिन पायलट को फुटेज मिलनी बन्द हो गई थी और उन्होंने सोच-विचार में इतना समय ले लिया कि अब उनके पास विकल्प ही नहीं बचे थे। भाजपा ने उनके मन-मुताबिक पद देने से मना कर दिया हो, ये भी हो सकता है। इस स्थिति में भी तो झटका सचिन पायलट को ही है।

शेहला रशीद के लिए मेडिकल किट बुर्का है, और मास्क हिजाब… बकैती से कुप्रथाओं का कर रही समर्थन

शेहला रशीद मानती हैं कि कोरोना वायरस के आने के बाद से पूरी दुनिया ने पीपीई के रूप में बुर्का और मास्क के रूप में नकाब को स्वीकारा है।

अपनी इस बात को शेहला ने सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश मार्कंडेय काटजू के एक ट्वीट के रिप्लाई में कहा है। उन्होंने भले ही इस मुद्दे को तंज भरे अंदाज में कहा है। लेकिन लोग इसे सुनकर अब शेहला का ही मजाक बना रहे हैं और उनसे इस बचकाने जवाब पर सवाल कर रहे हैं

दरअसल, सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज मार्कंडेय काटजू ने 10 अगस्त को एक ट्वीट किया। इस ट्वीट में उन्होंने द वायर की पत्रकार आरफा खानुम शेरवानी और शेहला रशीद की हालिया बातचीत पर सवाल उठाए। पूर्व जज काटजू ने पूछा कि आखिर आरफा जेएनयू की पूर्व छात्रा से शरिया, बुर्का, मदरसा जैसे मुद्दों पर क्यों नहीं पूछतीं।

उन्होंने ट्वीट में लिखा, “मैंने यूट्यूब पर शेहला राशिद का आरफा के साथ इंटरव्यू देखा। आरफा ने एक भी बार इस इंटरव्यू में नहीं पूछा कि शेहला कभी भी बुर्का, मदरसा, मौलानाओं की निंदा क्यों नहीं करती, जिनके कारण संप्रदाय विशेष के लोग पीछे हो रखे हैं। शेहला भविष्य के चुनावों में संप्रदाय विशेष के वोट बैंक खोने के डर से कभी भी आलोचना नहीं करती हैं। लेकिन आरफा इस पर क्यों चुप्पी साधे हुए हैं?”

अब इसी ट्वीट के रिप्लाई में शेहला रशीद बुर्के और नकाब का समर्थन करते हुए कहती हैं, “अंकल अब तो पूरी दुनिया बुर्का (पीपीई) और निकाब (मास्क) पहन रही है। शांत हो जाओ।” अपने इस ट्वीट के साथ शेहला हँसी वाले इमोजी भी लगाती हैं।

इसके बाद उनके ट्वीट पर लोगों की प्रतिक्रिया आनी शुरू हो जाती है। लोग कहते हैं कि जब इंसान के पास दिमाग नहीं होता है, तो वह ऐसे ही जवाब देता है। ऐसे ही एक यूजर उनके इस तंज का उन्हें दूसरा पहलू बताता है और पूछता है कि क्या संप्रदाय विशेष की महिलाएँ जो बुर्का और नकाब पहनती हैं, वो हमेशा महामारी झेलती हैं।

एक विशाल नाम का यूजर कहता है,”ऐसे बेवकूफाना रिप्लाई देने से बेहतर होता कि आप इनका जवाब देतीं। मैने हमेशा देखा है कि लोग अपने समुदाय और धर्म की कुरीतियों की आलोचना करते हैं। लेकिन मैंने कभी भी एक संप्रदाय विशेष को पिछड़े रिवाजों की आलोचना करते नहीं देखा।”

बता दें, जम्मू कश्मीर से आर्टिकल 370 हटने के एक साल पर आरफा खान्नुम ने शेहला रशीद के साथ बातचीत की थी। इस बातचीत में उन्होंने केवल ऐसे मुद्दे उठाए जिनसे यह पता चले कि मोदी सरकार के फैसले के बाद वहाँ चीजें कितनी बिगड़ीं।

द वायर पर अपलोड हुई करीब 33 मिनट की वीडियो में के नीचे कमेंट्स से भी हम देख सकते हैं कि अब लोग वास्तविकता में सेकुलरिज्म की आड़ में इस्लामिक एजेंडा चलाने वालों की सच्चाई जान चुके हैं।

https://www.youtube.com/watch?v=Jei0mRMi1Ro

रूस ने किया पहली कोरोना वैक्सीन बनाने का दावा, WHO सहित अमेरिका और ब्रिटेन संशय में

कोरोना वायरस की पहली वैक्सीन तैयार करने की रेस में रूस से आज (अगस्त 11, 2020) एक बड़ी खुशखबरी आई है। रूस के राष्ट्रपति व्लादीमिर पुतिन ने मंगलवार को ऐलान किया है कि देश में तैयार की गई कोरोना वैक्सीन को रूस के स्वास्थ्य मंत्रालय से मंजूरी मिल गई है और खुद पुतिन की बेटी को इसका पहला टीका भी लगाया जा चुका है।

सरकारी बैठक में बात करते हुए पुतिन ने कहा कि इस वैक्सीन के परिणाम बहुत अच्छे आए हैं और यह कोरोना वायरस से इम्युनिटी विकसित करने में कारगर है। राष्ट्रपति पुतिन ने इस बात पर भी जोर दिया कि वैक्सीन के लिए कई आवश्यक परीक्षण किए गए।

उन्होंने आगे कहा, “मेरी बेटी ने भी इस वैक्सीन का टीका लिया है, शुरू में उसे हल्का बुखार था, लेकिन अब वह बिल्कुल ठीक है।” उन्होंने बताया कि उनकी बेटी न सिर्फ़ ठीक है बल्कि बढ़िया महसूस कर रही है। उसने भी इस पूरे परीक्षण में हिस्सा लिया था।

रूसी अधिकारियों के मुताबिक, Gam-Covid-Vac Lyo नाम की इस वैक्सीन को तय योजना के अनुसार रूस के स्वास्थ्य मंत्रालय और रेग्युलेटरी बॉडी का अप्रूवल मिल गया है।

गौरतलब है कि इस ऐलान के साथ ही रूस अब पहला देश बन गया है, जिसने इस वैश्विक महामारी से बचाव हेतु वैक्सीन बनाने का दावा किया है। रूस ने कहा है कि अब यह वैक्सीन पहले स्वास्थ्य कर्मचारियों को दी जाएगी, फिर इसका इस्तेमाल बुजुर्गों पर होगा।

खबरों की मानें तो मॉस्को ने कई देशों को वैक्सीन सप्लाई करने की बात कही हैं। इसके लिए वह बड़े पैमाने पर उत्पादन सितंबर माह में शुरू कर सकता है।

इससे पहले रूस ने महीने भर पूर्व ही इस बात के संकेत दे दिए थे कि उनकी वैक्सीन ट्रायल में सबसे आगे है और वे उसे 10 से 12 अगस्त के बीच रजिस्टर्ड करा लेंगे। हालाँकि, उस समय किसी देश ने उनकी बात को इतनी गंभीरता से नहीं लिया था।

वहीं, WHO सहित अमेरिका और ब्रिटेन जैसे देश अभी तक भी रूस के इस दावे पर भरोसा नहीं कर रहे हैं और रूस पर वैक्सीन का फार्मूला चुराने के आरोप भी लगा रहे हैं।

WHO ने भी रूस द्वारा तैयार की गई कोरोना की वैक्सीन को लेकर कई तरह के संदेह जताए हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) वैक्सीन के तीसरे चरण को लेकर संशय में है।

संगठन के प्रवक्ता क्रिस्टियन लिंडमियर ने प्रेस ब्रीफिंग के दौरान कहा कि अगर किसी वैक्सीन का तीसरे चरण का ट्रायल किए बगैर ही उसके उत्पादन के लिए लाइसेंस जारी कर दिया जाता है, तो इसे खतरनाक मानना ही पड़ेगा।

रिया से SC ने पूछा- आप CBI जाँच चाहती हैं या नहीं? केस मुंबई ट्रांसफर करने की याचिका पर फैसला रखा सुरक्षित

बॉलीवुड अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की मौत के मामले में आरोपित उनकी गर्लफ्रेंड रिया चक्रवर्ती (Rhea Chakraborty) की सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिका पर आज सुनवाई करते हुए फैसला सुरक्षित रख लिया है। सुप्रीम कोर्ट ने रिया चक्रवर्ती से सवाल किया है कि वो इस मामले में सीबीआई जाँच चाहती हैं या नहीं?

रिया चक्रवर्ती ने पटना में दर्ज केस मुंबई ट्रांसफर करने की अर्जी लगाई है। उन्होंने दलील दी है कि सुशांत के पिता की एफआईआर का पटना में किसी अपराध से कोई कनेक्शन नहीं है और राज्य इसमें भारी दखल दे रहा है।

रिया चक्रवर्ती की केस ट्रांसफर की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार (अगस्त 11, 2020) को सुनवाई पूरी कर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। सुप्रीम कोर्ट ने सभी पक्षों से बृहस्पतिवार (अगस्त 13, 2020) तक अदालत के समक्ष संकलित सभी पूर्ववर्ती निर्णयों का लिखित नोट दाखिल करने को कहा। अब सुशांत केस की जाँच मुंबई पुलिस करेगी या सीबीआई, इस पर अपना आखिरी फैसला सुप्रीम कोर्ट आगामी बृहस्पतिवार को दे सकता है।

आज याचिका की सुनवाई के दौरान रिया चक्रवर्ती के वकील ने कहा कि पटना में सुशांत के पिता द्वारा दर्ज करवाई गई FIR का मामला भी मुंबई में ट्रांसफर किया जाए, वरना रिया चक्रवर्ती को इंसाफ नहीं मिल पाएगा।

इस पर रिया चक्रवर्ती के वकील ने केस को मुंबई पुलिस को ट्रांसफर करने और जाँच में पूर्वग्रह की आशंका की दलील देते हुए कहा – “मैं निष्पक्ष जाँच चाहता हूँ। जिस तरह से बिहार पुलिस की माँग पर इस केस को सीबीआई द्वारा टेक ओवर किया गया, मेरी चिंता इस बात को लेकर थी। इस मामले को पहले मुंबई जाना चाहिए। और अगर सीबीआई को आना है, तो बाद में आ सकती है।”

आज की सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट को यह तय करना है कि रिया के खिलाफ मामले की जाँच कौन करेगा? दरअसल, इस मामले में रिया चक्रवर्ती चाहती हैं कि उनके खिलाफ पटना में दर्ज एफआइआर मुंबई ट्रांसफर की जाए। और अगर सीबीआइ जाँच हो तो उसका क्षेत्राधिकार मुंबई ही रहे।

इस पर महाराष्‍ट्र सरकार का कहना है कि यह सीबीआइ की जाँच का कोई मामला ही नहीं है। बिहार सरकार ने कोर्ट में दाखिल अपने हलफनामे में कहा है कि अब यह जाँच सीबीआई कर रही है, इसलिए रिया की याचिका का कोई अर्थ नहीं रहा। सुशांत के पिता भी सीबीआई जाँच के समर्थन में हैं। सुनवाई के दौरान रिया के वकील श्‍याम दिवान ने कहा है कि इस मामले में पक्षपात की पूरी आशंका है।

इससे पहले रिया चक्रवर्ती ने कहा कि बिहार में FIR कानूनन गलत और पूर्वग्रहयुक्त है। जस्टिस ऋषिकेश रॉय की बेंच में रिया चक्रवर्ती की ओर से पेश हुए वकील श्याम दीवान ने कहा, “यह ट्रांसफर के लिए एक आवेदन है और हमारी संक्षिप्त दलील यह है कि जहाँ तक सुशांत के पिता द्वारा दर्ज की गई FIR का सवाल है, इसका पटना से कोई लेना-देना नहीं है।

राज्य द्वारा भी काफी हस्तक्षेप है, जिसका मतलब है कि पूर्वाग्रह की आशंका है। FIR पटना में दर्ज की गई, जबकि वहाँ घटना हुई ही नहीं थी। FIR 38 दिन की देरी से दर्ज करवाई गई। अगर मामला पटना से मुंबई ट्रांसफर नहीं होता, तो रिया को इंसाफ नही मिल पाएगा।”

गौरतलब है कि इस केस में रिया चक्रवर्ती की ओर से श्याम दीवान, महाराष्ट्र सरकार की ओर से अभिषेक मनु सिंघवी, बिहार सरकार की ओर से मनिंदर सिंह और भारत सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अपने-अपने पक्ष रखे।

‘किसी के बाप का हिन्दोस्तान थोड़े ही है’ के शायर राहत इंदौरी का निधन, इंटरनेट पर प्रशंसक सदमे में

मशहूर शायर डॉ राहत इंदौरी का कोरोना वायरस संक्रमण के कारण मंगलवार (अगस्त 11, 2020) निधन हो गया है। उनका कोरोना वायरस टेस्ट पॉजिटिव आया था। इसके बाद वे इलाज के लिए इंदौर के अरविंदो अस्पताल में भर्ती हुए थे। राहत इंदौरी ने खुद ट्वीट कर यह जानकारी दी थी।

मंगलवार सुबह ही राहत इन्दौरी ने अपने ट्विटर अकाउंट पर लिखा था – “कोविड के शरुआती लक्षण दिखाई देने पर कल मेरा कोरोना टेस्ट किया गया, जिसकी रिपोर्ट पॉज़िटिव आई है। ऑरबिंदो हॉस्पिटल में एडमिट हूँ। दुआ कीजिए जल्द से जल्द इस बीमारी को हरा दूँ। एक और इल्तेजा है, मुझे या घर के लोगों को फ़ोन ना करें, मेरी ख़ैरियत ट्विटर और फेसबुक पर आपको मिलती रहेगी।”

कोरोना संक्रमण के कारण राहत इंदौर को आज सुबह ही अस्पताल में भर्ती किया गया था और इसकी जानकारी उन्होंने खुद अपने फेसबुक अकाउंट पर भी दी थी। शाम को अचानक उन्हें तीन दिल के दौरे आए और उन्होंने अस्पताल में ही अंतिम सांस ली। डाक्टरों के अनुसार दोनों फेफड़ों में कोरोना का संक्रमण, किडनी में सूजन थी और साँस लेने में तकलीफ होने के कारण वे अस्पताल में भर्ती हुए थे।

राहत इंदौरी मशहूर शायर थे। उन्होंने बॉलीवुड की कई फिल्मों के लिए गाने लिखे हैं। उनकी एक मशहूर शायरी ‘सभी का खून है शामिल यहाँ की मिट्टी में किसी के बाप का हिंदुस्तान थोड़ी है’ प्रगतिशील युवाओं के बीच ख़ास तौर पर लोकप्रिय रही है। खासकर CAA विरोध प्रदर्शन के दौरान और मोदी सरकार के विरोध में ये पंक्तियाँ खूब इस्तेमाल की गई हैं।

राहत इंदौरी के निधन के समाचार से सोशल मीडिया पर उनके प्रशंसक बेहद हैरान हैं। भाजपा नेता कपिल मिश्रा ने ट्विटर पर उनकी मौत पर संवेदना प्रकट करते हुए लिखा है – “राहत इंदौरी नहीं रहे। प्रभु उनकी आत्मा को अपने श्री चरणों में स्थान दें। ॐ शांति।”

नोएडा के स्पा सेंटर में काम करने वाली माधुरी की छुरी से गला रेतकर हत्या: आरोपित मुस्तफा गिरफ्तार, नहर में मिला शव

उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद की रहने वाली और नोएडा के एक स्पा सेंटर में काम करने वाली महिला की हत्या कर शव नहर में फेंकने का मामला सामने आया है। आरोपित मुस्तफा ने छुरे से महिला की हत्या करने के बाद शव को वैशाली में हिंडन नहर में फेंक दिया था। पुलिस ने आरोपित को गिरफ्तार कर हत्याकांड का खुलासा कर दिया है। महिला तीन दिन से लापता थी।

नोएडा के स्पा सेंटर में काम करने वाली महिला 6 अगस्त को लापता हो गई थी। रविवार (अगस्त 9, 2020) देर रात पुलिस ने वैशाली सेक्टर 4-5 की पुलिया के पास से महिला के शव को बरामद किया। पुलिस ने शव के पास से महिला का मोबाइल और हत्या में प्रयोग की गई छुरी भी बरामद किया है। परिजनों की शिकायत के आधार पर आरोपित मुस्तफा को गिरफ्तार कर लिया गया है।

वहीं मृतक महिला की पहचान माधुरी उर्फ पलक (36) निवासी के रूप में पहचान हुई है। माधुरी के पति की पाँच साल पहले मृत्यु हो गई थी। वह इंदिरापुरम में तीन बच्चों के साथ किराए के मकान में रहती थी और बच्चों का पालन-पोषण करने के लिए जगतपुर फार्म नोएडा स्थित एक स्पा सेंटर में नौकरी करती थीं।

पूछताछ में मुस्तफा ने बताया कि महिला से उसका परिचय था। अपने बच्चों के पालन-पोषण के लिए वह अक्सर उससे पैसों की माँग करती थी। कुछ दिन पहले उसने दस हजार रुपए महिला को दिए थे। फिर और पैसों की माँग करने पर दोनों के बीच कई बार झगड़ा हुआ था। इसके बाद उसने माधुरी की हत्या करने की योजना बनाई। आरोपित मुस्तफा ने बताया कि 6 अगस्त को महिला जब ग्रेटर नोएडा से घर जा रही थी, तो उसे कॉल कर शुक्र बाजार स्थित अपनी मीट की दुकान में बुला लिया। फिर दुकान के अंदर ही छुरी से गला रेत कर उसकी हत्या कर दी और शव को नहर की झाड़ियों में फेंक दिया।

जानकारी के मुताबिक हत्यारोपित मुस्तफा मीट बेचने का काम करता है। इंदिरापुरम थाना प्रभारी निरीक्षक संजीव शर्मा ने बताया कि मुस्तफा मूलरूप से ग्राम दासपारा थाना चोपरा जिला उत्तर दिनारपुर पश्चिम बंगाल का रहने वाला है। कड़ाई से पूछताछ की गई, तो उसने माधुरी की हत्या करने की बात कबूल की। इंदिरापुरम के सीओ अंशु जैन ने बताया कि आरोपित मुस्तफा को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है।

राम मंदिर के साथ Happy Independence Day का पोस्टर: पुलिस ने उतार दिया हैदराबाद में, BJP ने की जाँच की माँग

हैदराबाद में एक मौजूमजही मार्केट है। यहाँ एक पोस्टर लगाया गया। पोस्टर के बीच में राम मंदिर की फोटो है, उसके नीचे Happy Independence Day लिखा है। एक कॉर्नर पर PM मोदी के साथ स्वतंत्रता सेनानियों की फोटो है जबकि दूसरे कॉर्नर पर गृहराज्य मंत्री की फोटो। पोस्टर पर चर्चा से पहले इसे देख लिया जाए एक बार।

वो पोस्टर जिस पर है बवाल (फोटो साभार: इंडिया TV)

हैदराबाद म्युनिसिपल कॉरपोरेशन (GHMC) ने अब इस पोस्टर को हटा दिया है। क्यों? पोस्टर देख कर समझ पाना मुश्किल है। लेकिन प्रशासन ने ऐसा किया। इसलिए किया क्योंकि प्रशासन को इसके बारे में लिखित शिकायत मिली थी। शिकायत किससे मिली थी? जिससे मिली थी, उसका नाम और किस पार्टी से वो जुड़ा है, जानने के बाद आप इसके पीछे की राजनीति को आसानी से समझ जाएँगे।

शिकायत ओवैसी की पार्टी AIMIM के एक समर्थक अब्दुल काशिफ ने की थी। अब्दुल काशिफ ने पुलिस को बताया था कि इस पोस्टर से दो समुदायों के बीच घृणा पैदा हो सकता है। इसलिए इसे हटाया जाना चाहिए। इस शिकायत के बाद पुलिस और हैदराबाद म्युनिसिपल कॉरपोरेशन की तरफ से कार्यवाही की गई और पोस्टर को हटा दिया गया।

लेकिन मामला बढ़ गया। क्योंकि मौजूमजही मार्केट BJP विधायक राजा सिंह के विधानसभा क्षेत्र में आता है। पोस्टर को हटाने की कार्रवाई निश्चित तौर पर विधायक राजा सिंह के लिए एक चुनौती हुई। इस मामले पर उन्होंने कहा कि PM मोदी ने राम मंदिर बनाने का रास्ता दिखाया, जिसके लिए उनका धन्यवाद किया गया है। उन्होंने यह भी कहा कि पोस्टर में लिखे जिस नारे को लेकर विवाद हो रहा है, वह भगत सिंह ने कहा था और उनके नारे को पोस्टर में लिखना किसी भी तरह से अनुचित नहीं है।

विवाद क्यों?

पोस्टर को ध्यान से देखेंगे तो राम मंदिर की फोटो के नीचे लिखा है – “बहरों को सुनाने के लिए धमाके की जरूरत होती है।” विवाद इसी नारे पर है। मजलिस बचाओ तहरीक के अध्यक्ष अमजदुल्लाह ने भी इस पोस्टर को लेकर सवाल खड़े किए हैं। अमजदुल्लाह के अनुसार पोस्टर लगाने वाले की नीयत ठीक नहीं है और उन्होंने आरोप लगाया कि दो समुदायों के बीच ईर्ष्या पैदा करने के लिए इस पोस्टर को लगाया गया है।

पोस्टर विवाद पर हिंदू पक्ष नीचे के वीडियो में

सुदीक्षा भाटी की मौत को लेकर पुलिस एवं प्रशासन ने किया छेड़खानी की बात से इनकार, भाई ने कहा- ब्रेक लगाने से टकराई बाइक

उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर की एक युवती की सड़क दुर्घटना में मृत्यु होने को लेकर इसे छेड़छाड़ की घटना बताया जा रहा है। हालाँकि, बुलंदशहर पुलिस और जिलाधिकारी रविंद्र कुमार की तरफ से एक वीडियो जारी किया गया है, जिसमें उन्होंने इसे छेड़छाड़ की घटना से इनकार करते हुए कहा है कि दुर्घटना के समय बाइक सुदीक्षा का भाई चला रहा था।

अमर उजाला की एक रिपोर्ट के अनुसार, जिलाधिकारी ने कहा कि सोमवार (अगस्त 10, 2020) सुबह सुदीक्षा अपने भाई के साथ बुलंदशहर अपने मामा के घर जा रही थी। औरंगाबाद से 3 किलोमीटर पहले ट्रैफिक के कारण इनके आगे जा रही एक बाइक ने अचानक ब्रेक मारा, जिससे उनकी बाइक उससे टकरा गई।

वहीं, सोशल मीडिया और कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में इसे छेड़छाड़ की घटना से जोड़ते हुए दावा किया जा रहा है कि सड़क पर एक बुलेट बाइक पर एक व्यक्ति ने सुदीक्षा और उनके भाई की बाइक का पीछा करना शुरू किया और उसे परेशान किया।

जिलाधिकारी के बयान से इस केस में सबसे बड़ा खुलासा दुर्घटना के दौरान बाइक चला रहे व्यक्ति को लेकर हुआ है। इस मामले में सबसे बड़ा सवाल तो यही है कि हादसे के वक्त जिस बाइक पर सुदीक्षा बैठी थी वह कौन चला रहा था? क्योंकि कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में यह बताया जा रहा था कि दुर्घटना के दौरान बाइक सुदीक्षा के मामा चला रहे थे

इन मीडिया रिपोर्ट्स में कहा गया है कि अज्ञात बदमाश द्वारा उन्हें ओवरटेक करने के बाद सुदीक्षा के मामा ने अपनी बाइक पर नियंत्रण खो दिया, जिसने बाइक में सवार सुदीक्षा और उसके मामा, दोनों ही सड़क पर गिर गए। सुदीक्षा के मामा दुर्घटना में बच गए, जबकि सुदीक्षा के सिर पर गंभीर चोटें आईं और अस्पताल में उन्हें मृत घोषित कर दिया गया।

वास्तव में, मृतक सुदीक्षा का छोटा भाई, जो कि सड़क हादसे के समय बाइक चला रहा था, उसका एक वीडियो के जरिए बयान सामने आया है कि वह दीदी (सुदीक्षा) को लेकर मामा के घर जा रहा था। उसी समय एक बाइक उनसे आगे निकलकर तेजी से जा रही थी और जब उसने अचानक ब्रेक मारा तो उनकी बाइक उससे टकरा गई। सुदीक्षा के भाई ने इस वीडियो में कहा है कि इस टक्कर से वो और दीदी (सुदीक्षा) नीचे गिर गए।

गौरतलब है कि अमेरिका के बॉबसन कॉलेज में पढ़ने वाली उत्तर प्रदेश की छात्रा सुदीक्षा भाटी की सोमवार रात सड़क हादसे में मौत हो गई। वह अपने भाई के साथ मामा के घर जा रही थी तभी एक बाइक ने टक्कर मारी और वह सड़क पर गिर गई।

कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में यह भी कहा जा रहा है कि पुलिस और प्रशासन सुदीक्षा की मौत में छेड़खानी की बात बेबुनियाद बता रही है जबकि, मृतक युवती के पिता इसे छेड़छाड़ का मामला बता रहे हैं।

5 अगस्त के बाद अब 15 अगस्त को भी टाइम्स स्क्वायर पर दिखेगी भारत की छवि: स्वतंत्रता दिवस पर पहली बार नजर आएगा तिरंगा

राम मंदिर भूमिपूजन के बाद एक बार दोबारा वह अवसर आया है जब भारत की छवि फिर अमेरिका की प्रसिद्ध इमारत टाइम्स स्क्वायर पर नजर आएगी।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, 15 अगस्त के मौके पर पहली बार तिरंगा टाइम्स स्क्वायर पर नजर आने वाला है। इसकी पुष्टि स्वयं न्यूयॉर्क, न्यू जर्सी और कनेक्टिकट के फेडरेशन ऑफ इंडियन एसोसिएशन (FIA) की ओर से जारी बयान में की गई हैं।

इस बयान में कहा गया है कि इस बेहद खास मौके पर भारत के महावाणिज्य दूत रणधीर जायसवाल विश‍िष्‍ट अतिथि होंगे।

गौरतलब है कि यह पहली बार होगा जब भारत का राष्ट्रीय ध्वज इस इमारत पर लहराता दिखेगा। अमेरिका के मैनहट्टन में भी भारत के 74वें स्वतंत्रता दिवस का जश्न मनाने के लिए विशेष कार्यक्रम रखा गया है।

ज्ञात हो कि इस वर्ष FIA के लिए स्वतंत्रता दिवस एक गौरवशाली पल है। दरअसल, FIA इस साल अपनी गोल्डन जुबली मना रहा है। इसकी स्थापना 1970 में हुई थी और आज यह भारतीय समुदाय की सबसे बड़ी संस्थाओं में से एक है।

1981 से लेकर अब तक FIA हर साल इंडियन डे परेड आयोजित करता आया है। इस परेड में भारत का गौरवशाली इतिहास दुनिया के सामने प्रदर्शित किया जाता है।

जानकारी के मुताबिक 15 अगस्त को होने जा रहे इस समारोह को डंकिन डोनट्स द्वारा स्पांसर किया जाएगा। इसके अलावा न्यूयॉर्क सिटी के मेयर बिल डे ब्लासियो और उनके पूरे स्टाफ के साथ-साथ न्यूयॉर्क पुलिस के द्वारा भी इस कार्यक्रम को सपोर्ट किया जा रहा है।

बता दें, इससे पहले 5 अगस्त को भूमिपूजन के अवसर पर राम मंदिर की तस्वीर और भगवान श्री राम की तस्वीर को टाइम्स स्क्वायर पर दिखाने का ऐलान हुआ था।

हालाँकि संप्रदाय विशेष के विरोध के बाद एक कंपनी ने ऐसा करने से मना कर दिया। जिससे आतिश तासिर समेत कई कट्टरपंथियों में खुशी की लहर दौड़ गई। लेकिन भूमिपूजन के बाद जब टाइम्स स्क्वायर पर राम मंदिर की तस्वीर नजर आई तो वहाँ का पूरा माहौल राममय हुआ दिखा।

इसी दिन वाशिंगटन डीसी में भारतीय समुदाय के लोग पारंपरिक कपड़ों में जश्न मनाते दिखे थे। यहाँ तक कि US कैपिटोल हिल से व्हाइट हाउस तक रथयात्रा भी निकाली गई थी। वहीं, कैलिफोर्निया, वॉशिंगटन, टेक्सस और फ्लोरिडा के मंदिरों में भी विशेष आयोजन किए गए थे।