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सुशांत के फ्लैटमेट सिद्धार्थ पिथानी का पकड़ा गया झूठ! चौकीदार ने कहा- सुशांत की बॉडी के बारे में नहीं बताया गया

बॉलीवुड अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत सुसाइड केस में हर दिन एक नया सबूत या फिर एक नया खुलासा सामने आ रहा है। अब सुशांत सिंह सुशांत के फ्लैटमेट रहे सिद्धार्थ पिथानी का एक झूठ सामने आया है। टाइम्स नाउ के स्टिंग ऑपरेशन में झूठ उजागर हुआ है।

जानकारी के मुताबिक सिद्धार्थ पिथानी ने पहले दावा किया था कि उन्होंने सुशांत की बॉडी देखने के बाद चौकीदार को सूचित किया था, मगर चौकीदार का कहना है कि उसे किसी ने कुछ भी नहीं बताया।

सिद्धार्थ और सुशांत एक साल फ्लैटमेट रहे थे। आत्महत्या से कुछ घंटों पहले तक भी सुशांत उनके ही साथ थे। पिथानी आईटी प्रोफेशनल हैं। प्रवर्तन निदेशालय द्वारा रिया चक्रवर्ती और सुशांत के 74 वर्षीय पिता केके सिंह द्वारा लगाए गए मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों पर पिथानी से मुंबई में पूछताछ की जा रही है।

इससे पहले सिद्धार्थ पिथानी ने समाचार चैनल ‘रिपब्लिक टीवी’ के एडिटर इन चीफ अर्नब गोस्वामी के साथ एक इंटरव्यू में यह स्वीकार किया था कि वह सुशांत को एक डॉक्टर के कहे अनुसार दवाइयाँ देते थे। उन्होंने कहा था, “मैंने दो गोलियाँ दीं, लेकिन मुझे नहीं पता कि वे किस चीज़ की थी।”

हालॉंकि, रिया चकवर्ती से जुड़े सवाल पूछे जाने पर सिद्धार्थ बीच में ही रिपब्लिक टीवी का इंटरव्यू छोड़कर चले गए। इससे पहले उन्होंने रिया को जानने से इनकार किया था। साथ ही सुशांत के पिता केके सिंह के आरोपों को भी खारिज कर दिया था।

सुशांत सिंह राजपूत केस में पैसों के लेनदेन की जाँच कर रहे प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने रिया चक्रवर्ती, उनके भाई और उनके पिता ले मोबाइल फ़ोन ज़ब्त कर लिए हैं। ख़बरों के मुताबिक ED ने चक्रवर्ती परिवार के 4 मोबाइल फ़ोन 2 आई पैड और एक लैपटॉप ज़ब्त किया है।

टाइम्स नाउ की एक रिपोर्ट के मुताबिक ED ने रिया चक्रवर्ती के 2 मोबाइल फ़ोन के अलावा उनके पिता और भाई शोविक के फ़ोन भी ज़ब्त कर लिए हैं। ED अभी तक 2 बार रिया चक्रवर्ती से इस केस में पूछताछ कर चुकी है। प्रवर्तन निदेशालय ने पहली बार 7 अगस्त को रिया के बयान दर्ज किए थे, रिया के जवाबों से संतुष्ट नहीं होने पर ED ने 10 अगस्त को दोबारा रिया चक्रवर्ती, उनके भाई और पिता से पूछताछ की थी।

इसके साथ ही सुशांत सिंह राजपूत के पिता केके सिंह की रिया चक्रवर्ती और सुशांत की एक्स मैनेजर श्रुति मोदी के बीच हुई बातचीत का व्हाट्सऐप चैट सामने आया है। इस चैट में सुशांत के पिता श्रुति मोदी से कहते हैं, “मैं जानता हूँ कि सुशांत के सारे कर्ज और उसे भी तुम देखती हो। वह अभी किस स्थिति में है, इसके लिए बात करना चाह रहे थे। सुशांत से बात हुई थी तो कह कह रहा था कि मैं बहुत परेशान हूँ। अब तुम सोचो कि एक पिता को कितनी चिंता होगी उसके लिए। इसलिए तुमसे बात करना चाह रहा था। अब तुम बात नहीं कर रही हो तो मैं मुंबई जाना चाहता हूँ। फ्लाइट का टिकट भेज दो।”

श्रुति मोदी और रिया चक्रवर्ती से सुशांत के पिता की बातचीत

वहीं, सुशांत के पिता ने व्हाट्सऐप पर रिया से बात करते हुए कहा था, “जब तुम जान गई कि मैं सुशांत का पापा हूँ, तो बात क्यों नहीं की। आखिर बात क्या है? फ़्रेंड बनकर उसका देखभाल और उसका इलाज करवा रही हो तो मेरा भी फर्ज बनता है कि सुशांत के बारे में सारी जानकारी मुझे भी रहे। इसलिए कॉल कर मुझे भी सारी जानकारी दो।”

सुशांत के पिता द्वारा भेजे गए मैसेज के चैट स्क्रीनशॉट में साफ देखा जा सकता है कि दोनों ही मैसेजेस में ब्लू टिक शो हो रहे हैं जिसका साफ अर्थ है कि मैसेज देख लिए गए हैं। फिर भी सुशांत के पिता को जवाब देना मुनासिब नहीं समझा गया। इस चैट के स्क्रीन शॉट में तारीख और समय दोनों साफ साफ देखे जा सकते हैं। रिया को सुशांत के पिता ने 29 नवंबर 2019 को ये मैसेज दिन में 12.34 पर भेजा था। वहीं श्रुति मोदी को सुशांत के पिता ने इसी दिन 12.16 मिनट पर मैसेज भेजा था।

बता दें कि सुशांत सिंह राजपूत ने 14 जून को मुंबई में स्थित अपने घर में फाँसी लगाकर जान दे दी थी, जिसके बाद से मुंबई पुलिस लगातार इस मामले की जाँच कर रही थी। वहीं, पटना में सुशांत के पिता द्वारा एफआईआर दर्ज करवाने के बाद बिहार पुलिस की एक टीम भी इस मामले की जाँच के लिए मुंबई पहुँची थी। अब यह मामला सीबीआई के पास है। वहीं, दूसरी ओर इस मामले में प्रवर्तन निदेशालय भी अपनी जाँच में जुटी हुई है।

PTI का पकड़ा गया झूठ: PM मोदी के कोरोना आँकड़ों से गायब किया शब्द, बदल गए मायने

सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ PM मोदी की आज मीटिंग हुई। इस मीटिंग में प्रधानमंत्री मोदी ने कोरोना से संबंधित आँकड़ों को लेकर क्या कहा, यह आप नीचे के आधिकारिक ट्वीट में देख सकते हैं।

प्रधानमंत्री मोदी ने स्पष्ट तौर पर कहा है कि कोरोना से संबंधित एक्टिव केस का प्रतिशत कम हो रहा है। ऐसा कहीं नहीं कहा गया है कि एक्टिव केस कम हो रहा है। एक्टिव केस का प्रतिशत कम होना और एक्टिव केस का कम होना – दो अलग-अलग बातें हैं। लेकिन शायद PTI को यह गणित नहीं मालूम।

PTI को यह गणित नहीं मालूम, यह आप उसके ट्वीट से समझ सकते हैं। PTI जैसी संस्था सोशल मीडिया पर पड़ती गाली को देख कर अपने ट्वीट डिलीट भी कर सकती है। इसलिए उसका ट्वीट नहीं बल्कि स्क्रीनशॉट नीचे देखिए।

PTI के ट्वीट के नीचे PM मोदी के लिए जो संबोधन आए हैं, उससे फेक न्यूज फैलाने वाली इस संस्था का काम हो गया, भले पत्रकारिता चूल्हे में गई!

अब बात करते हैं आँकड़ों की। इसके लिए थोड़ा ग्राफ देखा जाए। समझा जाए कि एक्टिव केस बढ़ रहा है या घट रहा है? या फिर एक्टिव केस का प्रतिशत बढ़ रहा है या घट रहा है?

गणित अच्छा हो तो ऊपर का ग्राफ देख कर समझ सकते हैं कि एक्टिव केस का प्रतिशत हर दिन घट रहा रहा है। लेकिन PTI को इससे क्या मतलब! उसे फेक न्यूज फैलाने से मतलब था, और वो काम उसने बखूबी कर दिया।

PTI, फेक न्यूज और विवाद

देश के सबसे बड़े पत्रकारों के संगठन आईएफडब्लूजे (इण्डियन फेडरेशन ऑफ वर्किंग जर्नलिस्ट्स) ने पीटीआई में होने वाले भाई-भतीजावाद, गलत वित्तीय प्रबंधन और निहित स्वार्थों का खुलासा करते हुए बताया है कि किस प्रकार पीटीआई हमेशा सत्ताधारी पार्टी, मुख्यतः कॉन्ग्रेस के मुखपत्र के रूप में काम करता आया है।

कुछ दिनों पहले PTI ने नई दिल्ली में चीन के राजदूत सुन वेडोंग का एक इंटरव्यू लिया था, जिसमें उन्होंने भारत के विरोध में बातें कर के चीन के प्रोपेगेंडा को आगे बढ़ाया था। लेकिन PTI ने इस दौरान भारत का पक्ष रखते हुए सवाल तक नहीं किए थे। और तो और, उसने चीन के राजदूत द्वारा किए गए झूठे दावों पर पलट कर कोई सवाल भी नहीं पूछा था। PTI के इस रुख को लेकर सोशल मीडिया में लोगों ने विरोध जताया था।

अयोध्या मस्जिद के लिए बने ट्रस्ट में हो सरकारी प्रतिनिधि: सुप्रीम कोर्ट में याचिका दर्ज, सुन्नी बोर्ड की बयानबाजी को बनाया आधार

अयोध्या में राम मंदिर के लिए नींव तो डाल दी गई है लेकिन वहाँ 5 एकड़ मस्जिद के लिए जो जमीन दिए गए हैं, उसे लेकर लगातार विवाद ही हो रहे हैं। ट्रस्ट ने वहाँ मस्जिद निर्माण के लिए तैयारियाँ शुरू कर दी हैं लेकिन सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका पहुँच गई है, जिसमें माँग की गई है कि मस्जिद के लिए बने ट्रस्ट में सरकार का कोई न कोई प्रतिनिधि होना चाहिए। अयोध्या के करुणेश शुक्ला ने ये याचिका दायर की है।

उन्होंने अपनी याचिका में कहा है कि ‘मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड’ ने हाल ही में जो बयानबाजी की है, उसे देखते हुए सरकार का कोई न कोई प्रतिनिधि अयोध्या में मस्जिद वाले ट्रस्ट में होना ही चाहिए, भले ही वो संप्रदाय विशेष से ही क्यों न हो। उन्होंने कहा है कि राम मंदिर पर सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले और वक़्फ़ एक्ट के अनुसार, सर्वधर्म समभाव अथवा धर्मनिरपेक्ष कार्यों में सरकार अपना प्रतिनिधित्व सुनिश्चित कर सकती है।

करुणेश का कहना है कि उन्होंने संवैधानिक और क़ानूनी प्रावधानों को ध्यान में रखते हुए ही ये याचिका दायर की है। बता दें कि मस्जिद के लिए इंडो-इस्लामिक कल्चरल फाउंडेशन ट्रस्ट का गठन किया गया है, जिसने स्पष्ट किया है कि अयोध्या में बनाए जाने वाली मस्जिद का नाम बाबर के नाम पर नहीं रखा जाएगा। मस्जिद के शिलान्यास के लिए सीएम योगी आदित्यनाथ को भी बुलावा भेजे जाने की बात भी कही गई है।

ट्रस्ट के भवन और अस्पताल के लिए नींव रखे जाने की बात भी हो रही है। कम्युनिटी सेंटर और कम्युनिटी किचन बनाने की बात भी कही गई है। हालाँकि, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्पष्ट कर दिया था कि मस्जिद के शिलान्यास में वो नहीं जाने वाले हैं। फिलहाल सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर होने के बाद अब इस मामले में विवाद बढ़ता ही जा रहा है। अब ट्रस्ट में सरकारी नुमाइंदगी होगी या नहीं, ये आगे पता चलेगा।

वक्फ़ बोर्ड ने साफ कर दिया है कि वह इस ज़मीन पर मस्जिद बनाएँगे। जिस पर साधू संतों ने प्रतिक्रिया दी है। उनका कहना है कि संप्रदाय विशेष समाज के लोग चाहें तो मिली हुई ज़मीन पर अस्पताल या विद्यालय बनवा सकते हैं। संत समाज इस पहल में उनकी आर्थिक मदद भी करेगा। इस मुद्दे पर राम जन्मभूमि के मुख्य पुजारी आचार्य सत्येन्द्र दास ने भी अपना मत रखा है। उन्होंने कहा उनका (वक्फ़ बोर्ड) का जो मन करे वह बनवाएँ।

लेकिन, बाबर के नाम की मस्जिद किसी भी सूरत में नहीं बनाई जा सकती है। अगर ऐसा होता है तो संत समाज इसका पूरी ताकत से विरोध करेगा। तपस्वी छावनी के महंत परमहंस दास ने भी इस मुद्दे पर अपनी बात रखी है। उनका कहना है कि बाबर के नाम की मस्जिद पूरे देश में नहीं है। दान की भूमि पर मस्जिद का निर्माण नहीं किया जा सकता है, ऐसा होने पर मस्जिद में की गई दुआ कबूल नहीं होती है।

भगवा झंडों से डरा नागरिक, कल हमारी मस्जिद में भी बाँध देंगे: अजीत भारती का वीडियो । Ajeet Bharti on Muslims Playing Victim On Bhumipujan

द वायर में एक खबर आती है कि दिल्ली के उस इलाके के समुदाय विशेष के लोग डरे हुए हैं, जिस इलाके में 5 महीने पहले हिन्दू विरोधी दंगे हुए थे। इन लोगों के डर के पीछे की वजह अयोध्या में भूमिपूजन के दौरान दीया जलाना और भगवा झंडा लहराना था। ये लोग कह रहे हैं कि आज सोसाइटी के गेट पर भगवा झंडा बाँधा है, कल को हमारी मस्जिद में न बाँध दें।

आर्टिकल में कहा गया है कि ‘मुल्ले बाहर निकलो’, ‘जय श्री राम’ के नारे लगाए गए। जब हमने गली नंबर 2 के हिन्दुओं से बात की, तो उन्होंने कहा कि उन्होंने दीए जलाए और झंडे लगाए, मगर कोई मजहब विरोधी नारे नहीं लगाए। कुछ लोगों ने जानबूझकर मजहबी पत्रकारों को फोन करके बुलाया और साम्प्रदायिक रंग दे रहे हैं।

पूरी वीडियो इस यूट्यूब लिंक पर क्लिक कर के देखें

कोरोना संकट: PM ने राज्यों से की टेस्टिंग बढ़ाने की अपील, बोले- अपनाएँ 72 घंटे वाला फॉर्मूला, देश जीत जाएगा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश में कोरोना की बढ़ती रफ्तार के बीच मंगलवार (अगस्त 11, 2020) को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए कोविड-19 से सबसे ज्यादा प्रभावित 10 राज्यों के सीएम के साथ बैठक की। पीएम ने बैठक में इन राज्यों को कोरोना से जीतने का मंत्र दिया।

उन्होंने कहा कि अगर ये 10 राज्य कोरोना को हरा दें तो देश जीत जाएगा। उन्होंने कहा कि कोविड-19 केस की 72 घंटे में पहचान और ज्यादा से ज्यादा टेस्टिंग के जरिए हम इस बीमारी को मात दे सकते हैं। पीएम के साथ बैठक में आंध्रप्रदेश, कर्नाटक, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र, पंजाब, बिहार, गुजरात, तेलंगाना और उत्तर प्रदेश के सीएम शामिल हुए।

पीएम ने कहा कि देश में ऐक्टिव केस 6 लाख से ज्यादा हो चुके हैं। इनमें से ज्यादा मामले हमारे इन 10 राज्यों में ही है। इसीलिए हम समीक्षा के लिए बैठे हैं। आज की चर्चा से हमें एक-दूसरे के अनुभवों से काफी कुछ सीखने को मिला। एक बात निकलकर आया है कि अगर हम मिलकर अपने इन 10 राज्यों में कोरोना को हरा देते हैं, तो देश भी जीत जाएगा।

मोदी ने कहा कि टेस्टिंग की संख्या बढ़कर हर दिन 7 लाख पहुँच चुकी है। इससे संक्रमण को पहचानने और रोकने में जो मदद मिल रही है, आज हम उसके परिणाम देख रहे हैं। हमारे यहाँ मौत की दर पहले भी दुनिया के मुकाबले कम था और संतोष की बात है कि यह लगातार और कम हो रहा है। ऐक्टिव केस कम हुआ है, रिकवरी रेट बढ़ता जा रहा है। लोगों के बीच भी आत्मविश्वास बढ़ा है।

इस दौरान पीएम ने कहा कि बिहार, गुजरात, यूपी, पश्चिम बंगाल, गुजरात और तेलंगाना में टेस्टिंग रेट बढ़ाने की जरूरत है। कोरोना के खिलाफ कंटेनमेंट, कंटैक्ट ट्रेसिंग और सर्विलांस सबसे प्रभावी हथियार है। हम सब कोशिशों से अच्छे परिणाम की ओर आगे बढ़े हैं। शुरुआत के 72 घंटे में केस की पहचान कर लें तो इसका संक्रमण नहीं फैल सकता है।

पीएम ने कहा कि अस्पतालों पर दबाव, हमारे स्वास्थ्य कर्मियों पर दबाव, रोजमर्रा के काम में निरंतरता का ना आ पाना, ये हर दिन एक नई चुनौती लेकर आते हैं। ये लगातार मिलना, चर्चा करना जरूरी भी है, क्योंकि जैसे-जैसे कोरोना महामारी को समय बीत रहा है, नई-नई परिस्थितियाँ भी पैदा हो रही हैं।

बैठक के दौरान पीएम ने कहा कि हरियाणा, यूपी के कुछ जिले और दिल्ली में एक समय ऐसा आया कि लगा कि अब कोरोना काबू में नहीं आएगा। दिल्ली सरकार ने तो ऐसी घोषणा की कि बहुत बड़ा संकट आएगा। पीएम ने कहा, “लेकिन हमने गृह मंत्री अमित शाह के साथ बैठक की। दिल्ली कार्ययोजना पर काम किया गया और हमें सफलता मिली। आज हम सबका प्रयास सामने है।”

पीएम मोदी ने आगे कहा, “आपके राज्यों में जमीनी हकीकत की निरंतर निगरानी करके जो नतीजे पाए गए सफलता का रास्ता उसी से बन रहा है! मुझे विश्वास है कि आपके इस अनुभव की ताकत से देश ये लड़ाई पूरी तरह से जीतेगा, और एक नई शुरुआत होगी।”

स्वप्ना सुरेश को केरल सरकार से मिले ₹1 करोड़, CM विजयन को UAE से मिले ₹20 करोड़: केरल सोना तस्करी का पूरा ब्यौरा

केरल में डिप्लोमेटिक बैगेज की आड़ में सोने की तस्करी का मामला स्वप्ना सुरेश से शुरू हुआ और फिर इसके तार मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन के दफ्तर तक पहुँच गए। अब स्वप्ना सुरेश ने कहा है कि उनके अकाउंट से जो 1 करोड़ रुपए जब्त किए गए हैं, वो उन्हें केरल सरकार से ‘लाइफ मिशन प्रोजेक्ट’ के एजेंट के रूप में काम करने के लिए बतौर कमीशन मिले थे। ये केरल सरकार का फ्लैगशिप प्रोजेक्ट है जिसे 2017 में लॉन्च किया गया था।

इस प्रोजेक्ट का उद्देश्य है कि भूमिहीन और जिनके पास आवास नहीं है, ऐसे परिवारों को बसाया जाए और उनके लिए घर बनाए जाएँ। अब इसमें केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन का नाम इसीलिए आता है क्योंकि इस प्रोजेक्ट के मुखिया वही हैं और उन्होंने UAE की यात्रा भी की थी ताकि इसके लिए 20 करोड़ का डोनेशन जुटा सकें। UAE के ‘Red Crescent’ से उन्हें 20 करोड़ रुपए मिले, जिस पर सवाल उठ रहे हैं।

स्वप्ना सुरेश ने कहा है कि इस प्रोजेक्ट को पास कराने के लिए उन्हें 1 करोड़ रुपए कमीशन मिले। कॉन्ग्रेस का तो यहाँ तक आरोप है कि केरल सीएम के UAE जाने के बाद ही स्वप्ना सुरेश और IT सचिव एम शिवशंकर भी दुबई गए थे। ऐसे में विपक्षी नेताओं का सवाल है कि विजयन ने जो MoU पर हस्ताक्षर किया, वो कहाँ और किसकी मौजूदगी में किया। क्या उस समय वहाँ स्वप्ना सुरेश भी उपस्थित थी?

उधर स्वप्ना सुरेश की जमानत याचिका भी NIA की स्पेशल कोर्ट ने खारिज कर दी है। सबूतों और केस डायरी के अध्ययन के बाद ये फैसला लिया गया। सोने की तस्करी में स्वप्ना सुरेश के खिलाफ कई सबूत हैं, ऐसा कोर्ट ने माना है। इस अपराध में UAPA एक्ट के तहत कार्रवाई हो रही है। आतंकी गतिविधियों के भी इससे जुड़े होने की आशंका है। इस प्रकरण में अब तक क्या-क्या हुआ और कब हुआ, ये हम आपको बताते हैं।

केरल: सोने की तस्करी मामले में अब तक क्या हुआ

NIA ने खुलासा किया था कि पिछले 10 महीनों में केरल में लगभग 150 किलोग्राम सोने की तस्करी की गई थी। एजेंसी ने अदालत को बताया था कि जाँच में यह भी पता चला है कि तस्करी मुख्य रूप से आभूषण बनाने में नहीं बल्कि आतंकी गतिविधियों के लिए किया जाता था, क्योंकि नकदी में लेन-देन करना मुश्किल हो गया था। एनआईए ने अदालत में कहा था कि आरोपितों ने सोना तस्करी के लिए यूएई दूतावास की सील और राजकीय चिन्ह से छेड़छाड़ कर अपराध को अंंजाम दिया।

राजनयिक के सामान के जरिए सोने की तस्करी करने की कोशिश करने वाली महिला स्वप्ना सुरेश के खिलाफ गैरकानूनी गतिविधियाँ (रोकथाम) अधिनियम (पीएमएलए) के तहत मामला दर्ज किया गया था। गृह मंत्रालय ने प्रारंभिक जाँच की थी और पाया था कि तस्करी का सोना आतंकवादी गतिविधियों के लिए उपयोग किया जाता था। स्वप्ना सुरेश और सरिथ, जो पहले यूएई वाणिज्य दूतावास के कर्मचारी थे, ने राजनयिक सामान की आवाजाही के बारे में सीखा और सोने की तस्करी करने के लिए इसे मॉडस ऑपरेंडी के रूप में इस्तेमाल किया।

फर्जी डाक्यूमेंट्स पेश कर के गुरुवार (जुलाई 2, 2020) को ‘डिप्लोमेटिक इम्युनिटी’ का प्रयोग कर के खाड़ी देशों से 30 किलो सोने की तस्करी हुई। इतना सारा सोना डिप्लोमैटिक बैग में भर कर लाया गया था। इसका खुलासा 6 जुलाई को तब हुआ, जब कस्टम के अधिकारियों ने यूएई कॉन्सुलेट के एक अधिकारी सरिथ से पूछताछ की, जो PRO के पद पर तैनात रहा था। कहा जा रहा है कि 6 महीने पहले स्वप्ना को आईटी विभाग में इतना बड़ा पद दिए जाने के पीछे एम शिवशंकर ही है।

स्वप्ना सुरेश की फोन कॉल से यह खुलासा हुआ है, इतना ही नहीं वह केरल के उच्च शिक्षा मंत्री केटी जलील से भी टच में थी। केरल के उच्च शिक्षा मंत्री और CPI (M) नेता केटी जलील और आरोपित स्वप्ना सुरेश के बीच कॉल डेटा रिकॉर्ड से पता चला कि दोनों के बीच 16 कॉल किए गए थे और वह निरंतर सम्पर्क में थे। मंत्री और स्वप्ना सुरेश के बीच मई और जून के महीने में कई कॉल हुए थे।

स्वप्ना सुरेश के साथ मुख्यमंत्री विजयन के नजदीकी को लेकर केरल में राजनीतिक घमासान मचा हुआ है। विपक्ष मुख्यमंत्री के इस्तीफे की माँग कर रहा है। एनआइए के अनुसार, इतनी बड़ी मात्रा में सोना तस्करी सीधे तौर पर देश की आर्थिक स्थिरता पर हमले की कोशिश है। साथ ही इसका उपयोग आतंकी फंडिंग के लिए किए जाने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता है। मामला खुलने के बाद केरल के प्रमुख सचिव एम शिवशंकर को पद से हटा दिया गया था।

NIA इस मामले में पाँचवे आरोपित रमीज़ को पूरे प्रकरण की अहम कड़ी मान रहा है और उससे पूछताछ में कई राज़ खुलने की सम्भावना है। सामान्यतः रमीज़ 2 महीने के लिए दुबई जाया करता था और फिर कुछ दिनों के लिए केरल वापस लौटता था। वो विजिटिंग वीजा लेकर दुबई में रुकता था। वो बिजनेस का बहाना बना कर वहाँ जाता था लेकिन जाँच में पता चला है कि वहाँ न तो उसका कोई बिजनेस है और न ही वो वहाँ कोई नौकरी करता है।

‘गलती नहीं सुधारी तो परिवार को नहीं छोड़ा जाएगा’: भूमिपूजन पर खुश BJP-RSS से जुड़े संप्रदाय विशेष को बंगाल इमाम एसोसिएशन की धमकी

राम मंदिर निर्माण के लिए हुए भूमिपूजन के बाद से जगह-जगह समुदाय विशेष के लोग इसका विरोध कर रहे हैं। इसी संबंध में 7 अगस्त को बंगाल इमाम एसोसिएशन ने अपने बयान में भाजपा और आरएसएस से जुड़े संप्रदाय विशेष के लोगों को धमकी दी।

बयान में कहा गया कि अगर उन लोगों ने अपनी गलती नहीं सुधारी तो उनके परिवारों को नहीं छोड़ा जाएगा। एसोसिएशन ने अपने बयान में कहा है कि संप्रदाय विशेष का जो भी कोई राम मंदिर के भूमिपूजन की खुशियाँ मना रहा है, वो इस्लाम को मानने वाला नहीं है। वो गैर-इस्लामी है।

बयान में कहा गया कि हाल ही में राम मंदिर निर्माण करने के लिए उस जगह पर भूमिपूजन हुआ जहाँ कभी बाबरी मस्जिद हुआ करती थी। इसलिए यह बात साफ है कि आरएसएस और भाजपा संप्रदाय विशेष के लोगों के मित्र नहीं है।

इस फरमान में यह भी कहा गया कि संप्रदाय विशेष का एक आदमी कभी भी तब संप्रदाय विशेष का नहीं रहता अगर वह उस व्यक्ति के पक्ष में हो जो इस्लाम विरोधी है। इसलिए जो सदस्य आरएसएस और वीएचपी के सदस्य हैं या उनसे जुड़े हुए हैं। उन्हें अपनी स्थिति के बारे में गौर करना चाहिए। उन्हें निर्णय लेना होगा कि वह भाजपा-आरएसएस में रहना चाहते हैं या फिर अपनी भूल सुधारना चाहते हैं।

फरमान में आगे भाजपा व आरएसएस से जुड़े संप्रदाय विशेष के लोगों को धमकी भी दी गई। इसमें लिखा गया कि इन लोगों को यह याद रखना चाहिए कि आने वाले समय में इनके परिजनों को बख्शा नहीं जाएगा।

गौरतलब है कि यह बयान बंगाल इमाम एसोसिएशन की ओर से ठीक उसी समय आया था जब ऑलइंडिया इमाम एसोसिएशनन के साजिद रशीदी ने कहा था कि एक मस्जिद हमेशा मस्जिद ही रहेगा और शायद अब एक मंदिर उसे बनाने के लिए ध्वस्त किया जाए।

इसके अलावा ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल बोर्ड ने भी तभी कहा था कि बाबरी मस्जिद वहाँ था और हमेशा वहाँ मस्जिद ही रहेगा। अपने बयान में AIMPB ने इस भूमिपूजन से निराश लोगों को समझाते हुए यह भी कहा था कि दिल दुखाने की जरूरत नहीं है। स्थिति कभी एक जैसी नहीं रहती।

बता दें, बंगाल इमाम एसोसिएशन के अध्यक्ष मोहम्मद याहिया ने कहा, “यह संप्रदाय विशेष के उन लोगों को चेतावनी देना है जो आरएसएस-बीजेपी का समर्थन कर रहे हैं। उन्हें अब यह तय करना चाहिए कि वे आने वाले दिनों में किसे समर्थन देना चाहते हैं। यह कोई फतवा नहीं है, लेकिन उन्हें यह समझने की जरूरत है कि वे उन्हें मदद कर रहे हैं जो संप्रदाय विशेष के लोगों को नुकसान पहुँचाना चाहते हैं।”

शिव मंदिर में लाउडस्पीकर बैन, मजिस्ट्रेट ने ऑर्डर देकर कहा – ‘इसे बजाने से कोरोना फैलेगा’

गुजरात के भुज क्षेत्र के मजिस्ट्रेट ने सावन के पवित्र महीने में शिव मंदिरों पर लाउडस्पीकर के इस्तेमाल की अनुमति देने से मना कर दिया है। मजिस्ट्रेट ने अपना फैसला कोरोना वायरस का हवाला देते हुए सुनाया। उन्होंने कहा है कि लाउडस्पीकर से वायरस तितर-बितर हो जाएगा और ज्यादा जगहों पर फैलेगा।

मजिस्ट्रेट के इस आदेश में लिखा है कि भुज में कोरोना संक्रमण तेजी से बढ़ा है। इसलिए लाउडस्पीकर चलाने की अनुमति नहीं दी जा सकती है क्योंकि माइक्रोफोन से निकलने वाली ध्वनि तरंगे संक्रमण को फैला सकती हैं।

गौरतलब है कि सावन महीने की शुरुआत में शिवमंदिर के प्रतिनिधियों ने भुज प्रशासन को एक पत्र लिखा था। इस पत्र में उन्होंने 20 जुलाई से लेकर 20 अगस्त के बीच में सुबह 8 से दोपहर 1 बजे और रात 8 बजे से 10 बजे तक लाउडस्पीकर चलाने की अनुमति माँगी थी। लेकिन अनुमति देने की जगह मजिस्ट्रेट की ओर से ऐसा अजीबोगरीब बहाना लिखित तौर पर आया।

यहाँ बता दें कि हिंदू धर्म में सावन महीने को बेहद पावन माना जाता है। इस महीने में श्रद्धालु भगवान शिव को आराध्य मानकर अपनी पूजा अर्चना करते हैं। इस महीने में शिवभक्त व्रत रखते हैं।

इसके अलावा इस माह में हरिद्वार और गंगोत्री में स्नान की भी एक पुरानी परंपरा है, जिसे पिछले कई दशकों से लोग निभाते हुए आ रहे हैं। शिवभक्तों के लिए इस दौरान जगह-जगह विशेष इंतजाम होता है। काँवड़ ले जाते हुए वह इन जगहों पर विश्राम करते हैं।

मगर, इस साल कोरोना वायरस के कारण ये सब सावन महीने में संभव नहीं हो पाया। जिसके कारण लोगों अपने इलाकों में स्थित मंदिरों में ही इस महीने को पर्व की तरह मना रहे हैं।

ईद पर बदले की कमस खाने वाले शाह फैसल ने कहा- ‘मैं देशद्रोही नहीं, जो गलतियाँ हुईं, सुधारना चाहता हूँ’

जम्मू कश्मीर के पूर्व IAS अधिकारी शाह फैसल ने अपने पद से इस्तीफा देकर राजनीति में शामिल होने का फैसला लिया था लेकिन अब उनका राजनीति से मोहभंग हो गया है। उन्होंने ‘जम्मू कश्मीर पीपल्स मूवमेंट’ से नाता तोड़ लिया है। शाह फैसल ने कहा कि जम्मू कश्मीर की राजनीतिक वास्तविकता अब पूरी तरह बदल गई है और वो राज्य के लोगों को कल्पनायुक्त और अव्यावहारिक सपने नहीं दिखाना चाहते।

शाह फैसल ने सोमवार (अगस्त 10, 2020) को कहा कि जब उनके पास उन सपनों को पूरा करने के लिए कोई ताकत ही नहीं है तो फिर उनका राजनीति में रहने से क्या फायदा। ‘इंडियन एक्सप्रेस’ को दिए गए इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि उनके बारे में एक धारणा बना दी गई है कि वो देशद्रोही हैं। पूर्व IAS अधिकारी ने कहा कि पिछले कुछ सालों में उनके समस्यात्मक बयानों के कारण उनके देशविरोधी होने की बात कही गई।

उन्होंने कहा कि पिछले एक सालों में उन्होंने अपने बयानों से कई ऐसे लोगों को दुःख पहुँचाया है, जो उनके लिए अपने मन में सकारात्मक सोच रखते थे। शाह फैसल ने कहा कि उन्होंने ऐसे लोगों को नाराज़ किया है। उन्होंने कहा कि अब उनसे जो भी गलतियाँ हुई हैं, उन्हें वो सुधारना चाहते हैं। उन्होंने अपना अनुभव बताते हुए कहा कि राजनीति में लोगों को वास्तविकता का भान कराना खासा मुश्किल कार्य है।

शाह फैसल ने कहा कि वो जम्मू कश्मीर को सुनहरे सपने दिखा कर उन्हें बाद में निराश नहीं करना चाहते। जब उनसे पूछा गया कि क्या वो फिर से IAS ज्वाइन करेंगे तो उन्होंने जवाब दिया कि उनके आगे एक पूरी ज़िंदगी पड़ी हुई है और वो कुछ प्रोडक्टिव करना चाहते हैं, वो आगे बढ़ना चाहते हैं। हालाँकि, उन्होंने कहा कि भविष्य में उनके लिए क्या है और वो कहाँ जाएँगे, कुछ भी निश्चित नहीं है।

शाह फैसल ने कहा कि शिक्षा, स्वास्थ्य, गरीबी उन्मूलन और रोजगार उत्पन्न करने से जुड़े क्षेत्रों में उनकी रुचि है और वो इन्हीं क्षेत्रों में योगदान देना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि वो अब काफी साफ़-सफाई से कुछ शुरू करना चाहते हैं क्योंकि जम्मू कश्मीर के लिए उनके पास कुछ सपने हैं। उन्होंने अपनी हिरासत अवधि में हुए अनुभवों के बारे में भी कहा। शाह फैसल ने इस बारे में बात करते हुए ‘इंडियन एक्सप्रेस’ से कहा:

“हिरासत में मैं जब तक रहा, वो मेरे लिए अनगिनत चीजें सीखने का एक अनुभव साबित हुआ। मुझे इस वास्तविकता का भान हुआ कि सब सब कुछ ख़त्म हो जाता है तो आप अंत में अकेले ही बचते हैं। इन सबमें सबसे ज्यादा आपका परिवार कष्ट उठाता है और आप जिसके लिए संघर्ष कर रहे हैं, वही लोग आपकी विपत्ति में अपना मजा ढूँढ लेते हैं। हिरासत ने मुझे बताया है कि मैं कहीं और से सम्बन्ध रखता हूँ। मैं उनके लिए अपनी ज़िंदगी को बर्बाद नहीं कर सकता, जो मेरी विपत्ति पर रो तक नहीं सकते।”

शाह फैसल ने ये भी कहा कि उन्होंने पिछले एक साल से कोई बयान नहीं दिया है। एक साल से वो चुप हैं, उन्होंने समय लिया, फिर भी राजनीति छोड़ने को उनका उतावलेपन में लिया गया निर्णय बताया गया। 2009 में UPSC की परीक्षा में पूरे देश में पहला स्थान पाने वाले पहले कश्मीरी फैसल ने कहा कि उनके लिए जम्मू कश्मीर की मेनस्ट्रीम राजनीति में कोई जगह है या नहीं, इस बारे में भी उन्हें कोई आइडिया नहीं है।

बता दें कि शाह फैसल का विवादों से पुराना नाता रहा है और वो अक्सर देशविरोधी ब्यान देते रहे हैं। शाह फैसल को अगस्त 2019 में दिल्ली एयरपोर्ट से हिरासत में लेकर कश्मीर में नजरबंद किया गया था। अगर 14 अगस्त को शाह फैसल दिल्ली में नहीं रोके गए होते तो वह इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस (ICJ) में भारत के खिलाफ मामला दर्ज करा चुके होते। वह घाटी में अनुच्छेद-370 के प्रावधानों को निष्प्रभावी करने के केंद्र सरकार के फैसले के खिलाफ याचिका दायर करने की तैयारी में थे।

अनुच्छेद 370 का विरोध करते हुए शाह फैसल ने कहा था, “कैसी ईद। दुनिया भर के कश्मीरी अपनी जमीन पर अवैध कब्जे का शोक मना रहे हैं। तब तक कोई ईद नहीं मनेगी, जब तक 1947 से हमसे छीनी गई हर चीज वापस नहीं ले ली जाती। जब तक हर अपमान का बदला पूरा नहीं होता, ईद नहीं मनेगी।” उन्होंने कहा था कि वो तब तक ईद नहीं मनाएँगे जब तक जम्मू-कश्मीर को दो केन्द्रशासित प्रदेशों में बॉंटने के फैसले से हुई ‘पीड़ा’ का बदला नहीं ले लेते।

रायटर्स के पत्रकार देवज्योत घोषाल के अनुसार, उन्होंने अगस्त 2019 में शाह फैसल से बात की थी। पत्रकार ने जम्मू-कश्मीर में ‘संचार व्यवस्था पूरी तरह ठप्प’ होने का दावा करते हुए लिखा था कि सैटेलाइट टीवी चालू थे और कई लोगों को सरकार के निर्णय की ख़बर मिल चुकी थी। घोषाल से बातचीत में शाह फैसल ने कहा कि सुरक्षा कम होते ही कश्मीर के भभक उठने की संभावना है, क्योंकि लोग ख़ुद को छला महसूस कर रहे हैं। घोषाल ने दावा किया है कि इसके बाद पत्थरबाजी शुरू हो गई।

‘भारत के लिए कोरोना से भी घातक है कुरान’ – फेसबुक पर युवक ने लिखा, हाईकोर्ट ने दी जमानत

सोशल मीडिया पर एक आपत्तिजनक पोस्ट करने के मामले में कर्नाटक हाईकोर्ट ने 32 वर्षीय युवक को अग्रिम जमानत दे दी। युवक पर आरोप है कि उसने लॉकडाउन के समय कोरोना वायरस की तुलना कुरान से करके उसका अपमान किया और समुदाय विशेष की भावनाएँ भी आहत कीं।

न्यायमूर्ति के नटराजन ने कुसुमधरा कन्नियूर (kusumdhara kaniyoor) को अग्रिम जमानत देते हुए 25000 रुपए का पर्सनल बॉन्ड जमा करवाया। इसके बाद उसे इस आदेश की तारीख के ठीक 15 दिन के भीतर स्वयं जाँच अधिकारी के समक्ष पेश होने को कहा। साथ ही निर्देश दिए गए कि वह दोबारा ऐसा कोई अपराध न करें।

जानकारी के अनुसार बेल्लारी पुलिस ने आरोपित के ख़िलाफ़ आईपीसी की धारा 153ए और 505 (2) के तहत मामला दर्ज किया था। इस मामले में मोहम्मद शहीर की ओर से तहरीर दी गई थी। केस दर्ज होने के बाद आरोपित ने मंगलोर के सत्र न्यायालय का दरवाजा खटखटाया मगर वहाँ से उसे राहत नहीं मिली। इसके बाद वह हाईकोर्ट पहुँचा।

यहाँ वकील सचिन बीएस ने याचिकाकर्ता के मामले की पैरवी की। उन्होंने कहा कि याचिकाकर्ता निर्दोष है, उसके खिलाफ़ गलत मामले में केस दर्ज हुआ है। इतना ही नहीं उसने कुछ भी ऐसा नहीं किया, जिसके कारण आईपीसी की धारा 153 ए और 505 (2 ) के तहत मामला दर्ज हो। उन्होंने कहा कि याचिकाकर्ता ने ऐसा कोई अपराधिक कार्य नहीं किया, जो प्राथमिक दृष्टि में समाज के विभिन्न वर्गों में शत्रुता पैदा करे।

वहीं, वकील महेश शेट्टी ने इस दलील का विरोध करते हुए कहा कि याचिकाकर्ता ने फेसबुक पर एक पोस्ट डाला था, जिसमें उसने लिखा कि भारत के लिए कोरोना वायरस से भी ज्यादा कुरान घातक है- और ये धारा 153ए और 505 (2) के तहत दण्डनीय है। उन्होंने कहा कि जबसे ये केस शुरू हुआ, उसी वक्त से आरोपित फरार है। अगर ऐसे में इसे बेल मिल गई तो ये इस केस से भी बच निकलेगा। इसलिए इसे कस्टडी में लेकर जाँच करने की आवश्यकता है।

दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद बेंच ने कहा कि सरकार के वकील की ओर से कोई भी ऐसा सबूत नहीं दिखाया गया, जिससे साबित हो कि पुलिस ने शिकायत दर्ज करने से पहले इजाजत ली। इस मामले में जिलाधिकारी को संज्ञान लेना था।

“इसलिए तथ्यों और केस के हालातों को देखते हुए, मंजर सईद खान के केस में माननीय सुप्रीम कोर्ट द्वारा तय किए गए सिद्धांतों के मद्देनजर व याचिकाकर्ता के मैसेज को देखते हुए, इस समय यह नहीं कहा जा सकता कि जो उसने किया वह दण्डनीय अपराध है, जिससे समाज के दो समुदायों में साम्प्रदायिक हिंसा भड़के या दोनों के बीच तनाव हो।” – जज ने बेल देते हुए यह तर्क दिया।