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जर्मनी जाकर विदेश मंत्री एस जयशंकर ने लगाई पश्चिमी देशों की क्लास, दो टूक बोले- हमारा लोकतंत्र खतरे में नहीं, अपना मॉडल न थोपें

विदेश मंत्री एस जयशंकर ने पश्चिमी देशों को लोकतंत्र को लेकर आइना दिखाया और कहा भारत में यह समय के साथ और भी जीवंत होते जा रहा है। उन्होंने ‘खतरे में लोकतंत्र’ की बात करने वाले पश्चिमी देशों पर बांग्लादेश का लिए बिना कटाक्ष किया। विदेश मंत्री ने कहा कि पश्चिम ने ग्लोबल साउथ में गैर-लोकतांत्रिक ताकतों को प्रोत्साहित किया। वे बाकी दुनिया पर अपने लोकतंत्र का मॉडल थोपने में लगे रहते हैं।

विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा कि पश्चिमी देशों को भी पश्चिम के बाहर के सफल मॉडलों को अपनाना चाहिए। उन्होंने मतदान के दौरान अंगुली पर लगी स्याही को दिखाते हुए कहा, “हमारे लिए लोकतंत्र केवल एक सिद्धांत नहीं, बल्कि एक डिलीवर किया गया वादा है।” उन्होंने पश्चिमी देशों को बताया कि बीतते समय के साथ भारत में लोकतंत्र और भी जीवंत होते जा रहा है।

जयशंकर ने कहा, “भारत ने आजादी के बाद लोकतंत्र को इसलिए अपनाया, क्योंकि यह हमारे परामर्शात्मक (consultative) और बहुलवादी (pluralistic) समाज के मूल्यों से मेल खाता था।” पश्चिमी देशों की आलोचना करते हुए उन्होंने कहा कि अतीत में पश्चिम ने लोकतंत्र को सिर्फ अपने तक सीमित रखा और ग्लोबल साउथ में गैर-लोकतांत्रिक शक्तियों को समर्थन दिया।

जयशंकर ने शुक्रवार (14 फरवरी 2025) को जर्मनी की राजधानी म्यूनिख में आयोजित सुरक्षा सम्मेलन में भाग लिया। इस दौरान कुछ वक्ताओं ने दुनिया में लोकतंत्र का भविष्य खतरे में बताया। हालाँकि, भारतीय विदेश मंत्री जयशंकर ने इसे खारिज कर दिया और कहा, “मैं लोकतंत्र को लेकर आशावान हूँ। मैं अभी अपने राज्य के चुनाव में हिस्सा लेकर आया हूँ।”

उन्होंने आगे बताया, “बीते साल हमारे देश में राष्ट्रीय चुनाव हुए और कुल मतदाताओं में से करीब दो तिहाई ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया।” उन्होंने अंगुली पर मतदान वाली स्याही को दिखाते हुए कहा, “मैं एक अपेक्षाकृत निराशावादी पैनल में आशावादी व्यक्ति हूँ। मैं अपनी अंगुली उठाकर शुरू करूँगा। इसे बुरा मत मानिएगा। जो निशान आप मेरे नाखून पर देख रहे हैं, वह अभी-अभी हुए मतदान का निशान है।”

जयशंकर ने बताया कि राष्ट्रीय चुनावों में लगभग 90 करोड़ मतदाताओं में लगभग 70 करोड़ मतदाताओं ने मतदान किया। उन्होंने बताया, “हम एक ही दिन में इन सभी वोटों की गिनती करते हैं। जब परिणाम घोषित होता है तो कोई भी उस पर विवाद नहीं करता। हम अच्छे से मतदान कर रहे हैं और हमारे लोकतंत्र की दिशा के बारे में आशावादी हैं।

इससे जुड़ा तर्क देते हुए उन्होंने कहा, “आधुनिक युग में जब से हमने मतदान करना शुरू किया है, तब से लेकर आज जो मतदान हो रहा है, उसमें 20 प्रतिशत अधिक लोग मतदान कर रहे हैं। इसलिए, पहला संदेश यह है कि लोकतंत्र पर कोई संकट नहीं है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र के लिए चुनौतियाँ भी हैं। अलग-अलग देशों में हालात अलग-अलग हैं, लेकिन कई देशों में लोकतंत्र अच्छे से काम कर रहा है।

वक्ताओं में शामिल अमेरिकी सीनेटर एलिसा स्लोटकिन ने कहा कि लोकतंत्र ‘खाने की मेज पर भोजन नहीं रखता’। इस पर जयशंकर ने कहा कि भारत 80 करोड़ लोगों को पोषण सहायता देता है। उन्होंने कहा कि दुनिया के कुछ ऐसे हिस्से हो सकते हैं जहाँ ऐसा नहीं होता हो, लेकिन कुछ ऐसे हिस्से भी हैं, जहाँ ये सब हो रहा है और इनमें भारत भी शामिल है।

महाकुंभ पर फर्जी जानकारी फैलाने वालों की खैर नहीं, अब तक 54 सोशल मीडिया अकॉउंटस् पर FIR दर्ज: CM योगी के निर्देश पर UP पुलिस कर रही सख्ती से निगरानी

महाकुंभ पर फर्जी जानकारी फैलाने वालों के खिलाफ सीएम योगी आदित्यनाथ सख्त हैं। उनके निर्देश पर यूपी पुलिस सोशल मीडिया पर 24*7 नजर बनाए हुए है। इसी कारण से कुंभ को लेकर झूठ फैलाने के 54 सोशल मीडिया अकॉउंट्स पर अब तक कार्रवाई हो चुकी है। 13 फरवरी को भी निगरानी के दौरान दो भ्रामक वीडियोज के बारे में पता चला। एक मिस्र से थी और एक पटना से। दोनों को दिखाकर महाकुंभ को बदनाम करने का प्रयास हो रहा था।

मिस्र की वीडियो को दिखाकर बताया जा रहा था कि मिस्र में बहुत भीषण आग लग गई है। घटना में 40-50 वाहन भी जल गए हैं, लेकिन जब जाँचा गया तो वीडियो साल 2020 में कायरो के पाइपलाइन अग्निकांड के दौरान रिकॉर्ड की गई थी।

इस झूठ को फैलाने वालों में ‘इंडिया विद कॉन्ग्रेस’ नाम का एक्स हैंडल भी शामिल है। इसके अलावा हरिंद्र राव, अनिल पटेल, विशाल बाबू, नेमी चंद, सिफा बदौरिया और हेलो प्रयागराज जैसे अकॉउंट शामिल हैं।

इसके अलावा पटना वाली वीडियो को साझा करके ऐसे दिखाया गया जैसे राष्ट्रवादी लोग कुंभ में आर्मी जवानों के ऊपर चप्पल फेंक रहे हैं। हकीकत जबकि ये है कि ये वीडियो पुष्पा-2 के लॉन्च के दौरान एक इवेंट में शूट किया गया था। इस मामले में भी 15 लोगों के खिलाफ मुकदमा दायर हो गया है।

इनमें इंद्रजीत बराक, सुनील, निहाल, निहाल शेख, डिंपी, सत सेवा, संदेश वाटक न्यूज, लोकेश मीणा, राज सिंह चौधरी, युनूस आलम, अमीनुद्दीन सिद्दीकी, अरविंद यादव अहिरवाल, शिवम कुमार कुशवाहा, जैन रेणु, अमित कुमार नाम के सोशल मीडिया यूजर्स का नाम है।

बता दें कि इससे पहले नेपाल की एक वीडियो को साझा करके भ्रम फैलाया गया था कि महाकुंभ में हुई भगदड़ के बाद शव लावारिस पड़े हैं। वहीं 9 फरवरी को भी धनबाद की वीडियो शेयर करके ऐसे ही झूठा दावा किया गया कि उत्तर प्रदेश पुलिस अपने लापता रिश्तेदारों की तलाश कर रहे तीर्थयात्रियों की पिटाई कर रही है। 12 फरवरी को भी वर्ष 2021 में गाजीपुर में मिले शवों की तस्वीरों को महाकुंभ से जोड़ने वाले 7 अकॉउंट पर एक्शन लिया गया था।

अब पुलिस ऐसी ही फर्जी जानकारी फैलाने वालों के खिलाफ एक्शन ले रही है। लोगों से भी आग्रह किया जा रहा है कि वे सटीक जानकारी के लिए आधिकारिक स्रोतो पर ही भरोसा करें और असत्यापित सामग्री को साझा करने से बचें।

सोनिया गाँधी के खास अहमद पटेल के बेटे ने कॉन्ग्रेस का झटका हाथ, BJP में जाने के लग रहे कयास: सीट न मिलने पर बढ़ा विवाद, बोले- मुझे पार्टी में हर कदम पर रोका गया

सोनिया गाँधी के राजनीतिक सलाहकार रहे कॉन्ग्रेस के दिग्गज नेता अहमद पटेल के बेटे फैसल अहमद पटेल ने पार्टी से दूरी बनाने की घोषणा की है। उन्होंने कहा कि वे अपने दिवंगत अब्बू के पदचिह्नों पर चलने की कोशिश की, लेकिन उनके हर कदम को पार्टी द्वारा रोक दिया जा रहा है। उन्होंने घोषणा की है कि अब उन्होंने कॉन्ग्रेस के लिए काम करना बंद करने का निर्णय लिया है।

फैसल पटेल पिछले साल के लोकसभा चुनावों में गुजरात की भरूच सीट से चुनाव लड़ना चाहते थे, लेकिन कॉन्ग्रेस ने उन्हें टिकट नहीं दिया। इसको लेकर वे पार्टी से नाराज हैं। बता दें कि उनके पिता अहमद पटेल कॉन्ग्रेस में काफी प्रभावशाली थे। वे सांसद रहने के साथ-साथ कॉन्ग्रेस के राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष और सोनिया गाँधी के राजनीतिक सचिव भी थे। नवंबर 2020 में उनका निधन हो गया था।

अहमद पटेल के बेटे फैसल अहमद पटेल ने सोशल मीडिया साइट X (पूर्व में ट्विटर) पर घोषणा की, “बहुत दुख और पीड़ा के साथ मैंने कॉन्ग्रेस के लिए काम करना बंद करने का फैसला किया है। यह कई सालों तक एक कठिन यात्रा रही है। मेरे दिवंगत पिता अहमद पटले ने अपना पूरा जीवन देश, पार्टी और गाँधी परिवार के लिए काम करते हुए दिया था।”

गुजरात कॉन्ग्रेस को झटका देते हुए उन्होंने आगे कहा, “मैंने उनके पदचिह्नों पर चलने की कोशिश की, लेकिन हर कदम पर मुझे रोका गया। मैं मानवता के लिए हरसंभव तरीके से काम करना जारी रखूँगा। कॉन्ग्रेस पार्टी हमेशा की तरह मेरा परिवार रहेगी। मैं कॉन्ग्रेस के सभी नेताओं, पार्टी कार्यकर्ताओं और शुभचिंतकों का शुक्रिया अदा करना चाहता हूँ, जिन्होंने मेरा समर्थन किया।”

कयास लगाए जा रहे हैं कि फैसल पटेल भाजपा में जा सकते हैं। लोकसभा चुनावों से पहले उन्होंने गुजरात भाजपा के अध्यक्ष सीआर पाटिल से मुलाकात भी की थी। अहमद पटेल के निधन के बाद फैसल पटेल और उनकी बहन मुमताज कॉन्ग्रेस में सक्रिय हैं। दिल्ली चुनावों में मुमताज प्रचार भी कीं, लेकिन फैसल ने दूरी बनाए रखी। राजनीतिक हलकों में मुमताज को अहमद पटेल के वारिस के तौर पर देखा जाता है।

बता दें कि फैसल पटेल और कॉन्ग्रेस के बीच अनबन साल 2024 में शुरू हुई थी। इसके पीछे की वजह उनके पिता की भरूच सीट थी। कॉन्ग्रेस उनके पिता अहमद पटेल की भरूच लोकसभा सीट अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी को दे दी थी। दरअसल, सीट शेयरिंग फॉर्मूले के तहत कॉन्ग्रेस ने INDI गठबंधन की सहयोगी AAP को भरूच और भावनगर सीट दी थी।

उस समय फैसल पटेल ने नाराजगी जाहिर की थी। उन्होंने मीडिया के सामने कहा था कि वह किसी भी हालत में लोकसभा चुनाव लड़ेंगे। उन्होंने कहा था कि अगर उन्हें टिकट मिलता तो कॉन्ग्रेस यह सीट जीत सकती थी, क्योंकि पिता के देहांत के बाद उन्होंने यहाँ काफी मेहनत की है। उन्होंने यह भी कहा था कि भरूच से उनका पारिवारिक लगाव है। वे अपने पिता की सीट को ऐसे जाने नहीं दे सकते। 

उमर खालिद को जमानत नहीं मिली… क्योंकि कपिल सिब्बल चाहते ही नहीं थे: डीवाई चंद्रचूड़ ने बता दी कोर्ट में पचड़े डालने वाली बात, लगाई OpIndia के विश्लेषण पर मुहर

सुप्रीम कोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ का बरखा दत्त ने 13 फरवरी 2025 को एक इंटरव्यू लिया। इस इंटरव्यू में उन्होंने उमर खालिद की बेल का मुद्दा उठाया। उन्होंने सवाल पूछा कि क्या उमर खालिद जैसे मामलों में पूर्व सीजेआई को कोई अफसोस होता है कि इनमें समय के भीतर क्यों कार्रवाई नहीं हुई। यह सुन डीवाई चंद्रचूड़ ने बरखा दत्त को करारा जवाब दिया।

उन्होंने उमर खालिद के मामले को ‘विशेष’ कहा और साफ किया कि ये विशेष ‘खूबियों’ वाला नहीं है। उन्होंने बताया कि उमर खालिद को जो बेल नहीं मिली है उसकी वजह कोई और नहीं बल्कि खुद उमर खालिद और उनके वकील हैं जिन्होंने कोर्ट में बेल याचिकाएँ लंबित रहने के दौरान ही कम से कम 7 बार मामले में एडजर्न कराया।

याद दिला दें कि फरवरी 2024 में ऐसा हुआ था। उमर खालिद की बेल याचिका सुप्रीम कोर्ट की बेंच के पास पहुँची, लेकिन बाद में कपिल सिब्बल ने उसे वापस ले लिया ये कहते हुए कि परिस्थितियों में थोड़ा बदलाव हुआ है और वो ट्रायल कोर्ट के समक्ष नए सिरे से जमानत की माँग करेंगे।

इसी तरह उन्होंने 2023 में किया था और तब तो पूरी लेफ्ट लॉबी ये साबित करने पर जुट गई थी कि सुप्रीम कोर्ट ही उमर खालिद की याचिका पर सुनवाई नहीं कर रहा है। द वायर जैसे संस्थान उमर खालिद के अब्बा (पूर्व में सिमी आतंकी) का इंटरव्यू ले रहे थे। विदेशी वामपंथी आउटलेट्सस द्वारा प्रपंच फैलाया जा रहा था कि उमर खालिद मुस्लिम होने की सजा भुगत रहा है और अपने देश में इसे हवा दे रहे थे वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण जैसे लोग।

ऑपइंडिया ने पहले ही किया था खुलासा

उस समय ऑपइंडिया ने आपको इस पूरे खेल से बारे में विस्तार से समझाया था जिसकी पुष्टि आज पूर्व जस्टिव डीवाई चंद्रचूड़ द्वारा भी कर दी गई है। हमने आपको पुराने लेख में जानकारी दी थी कि उमर खालिद मामले में कोर्ट द्वारा देर की ही नहीं जा रही, ये सारा विलंब याचिका डालने और फिर उसे वापस लेने में चक्कर में हो रहा है।

संक्षेप में बताएँ तो सत्र न्यायालय मे 8 माह के भीतर ही खालिद की याचिका खारिज की थी, फिर हाईकोर्ट ने 6 महीने में। इसके बाद वो जब सुप्रीम कोर्ट गया तो 14 में से 7 बार मामला उसके वकील के कारण स्थगित हुआ

केस को कैसे घुमाया गया

दरअसल, 31 अक्टूबर 2023 को जब उमर खालिद का मामला जस्टिस अनिरुद्ध बोस और बेला त्रिवेदी के पास पहुँचा उसी के बाद कपिल सिब्बल द्वारा कोर्ट की कार्यवाही स्थगित करने का भी सिलसिला शुरू हो गया था। जजों ने इस दौरान  खालिद की जमानत याचिका को गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम, 1967 के प्रावधानों की संवैधानिकता को चुनौती देने वाले अन्य मामलों के साथ जोड़ दिया था।

29 नवंबर 2023 को इन मामलों के याचिकाकर्ताओं द्वारा फिर मामले को डी-टैग करने की बात सामने आई। आगे पता चला कि प्रशांत भूषण चाहते हैं कि इस मामले की सुनवाई जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ करें। हालाँकि, एक अन्य मामले में जवाब देते हुए डीवाई चंद्रचूड़ ने यह साफ कह दिया था-  “अगर मामला किसी जज के सामने सूचीबद्ध है, तो जज ही फैसला लेंगे। मैं कुछ नहीं कहूँगा

केस को एएसजी और कपिल सिब्बल की अनुपलब्धता के कारण पहले जनवरी 2024 तक के लिए टाला गया। फिर एएसजी के मौजूद न होने के कारण इसे 17 जनवरी 2024 तक के लिए और फिर कपिल सिब्बल के ही अनुरोध पर इसे 24 जनवरी 2024 तक बढ़ाया। धीरे-धीरे मामला 14 फरवरी तक खिंचा और जब जमानत याचिका पर सुनवाई शुरू हुई तो सिब्बल ने जमानत याचिका ही वापस ले ली।

पूर्व CJI ने उठाया का जवाब

पूरी टाइमलाइन से साफ था कि उमर खालिद के मामले में सुनवाई के लिए कपिल सिब्बल ‘फोरम शॉपिंग’ के जरिए अपनी किस्मत आजमा रहे थे। खुद बरखा दत्त ने जब डीवाई चंद्रचूड़ से सवाल किया तो उन्होंने ये कहते हुए शुरुआत की थी कि डीवाई चंद्रचूड़ दोनों पक्षों (वामपंथी और दक्षिणपंथी) को जमानत देने के दावे करते हैं, जिसे सुन साफ पता चलता है कि आखिर क्यों कपिल सिब्बल, प्रशांत भूषण चाहते थे कि मामला कहीं और नहीं बल्कि डीवाई चंद्रचूड़ द्वारा सुना जाए। बरखा दत्त के साथ बातचीत में पूर्व सीजेआई ने मुद्दे पर गहराई से बात की और कपिल सिब्बल का नाम लिए बिन पूछा कि वह अदालत के समक्ष मामले पर बहस करने में अनिच्छुक क्यों थे और इसके बजाय, बार-बार स्थगन की माँग कर रहे थे?

(जानकारी- फ़ोरम शॉपिंग तब होती है जब कोई पक्ष किसी ऐसे न्यायालय या न्यायक्षेत्र को चुनता है जिसके बारे में उन्हें लगता है कि वह उनके पक्ष मेैं फैसले दे सकते हैं।)

नोट- यह लेख नुपूर जे शर्मा द्वारा अंग्रेजी में लिखे गए आर्टिकल पर आधारित है। आप उनके मूल लेख को इस लिंक पर क्लिक करके पढ़ सकते हैं। इसके अलावा इस मुद्दे पर ऑपइंडिया द्वारा किया गया खुलासा यहाँ क्लिक करके पढ़ सकते हैं।

रेशमा खान: 10वीं फेल लेकिन सेक्स रैकेट नेटवर्क मार्केटिंग मॉडल वाला – नौकरी के बहाने होटल में करवाती थी रेप, फिर धंधा के लिए करती थी मजबूर, गोरखपुर की चौंकाने वाली कहानी

गोरखपुर के रामगढ़ताल इलाके में 31 दिसंबर 2024 एक किशोरी से हुए सामूहिक दुष्कर्म के बाद पुलिस जाँच में एक सेक्स रैकेट का खुलासा हुआ था। इसके बाद कई किशोरियाँ सामने आईं। इस मामले में 10 जनवरी को शाहपुर थाने में कैंपियरगंज की किशोरी ने और 13 जनवरी को देवरिया की किशोरी ने केस दर्ज कराया था। पुलिस ने मामले की जाँच की तो इस सिडिकेंट का परत दर परत खुलकर सामने आ गया। इसका मास्टरमाइंड रेशमा खान निकल कर सामने आई है।

दरअसल, गोरखपुर के गीता वाटिका में एक हुक्का बार में इन किशोरियों के साथ बलात्कार हुआ था। शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने होटल के मालिक अनिरुद्ध ओझा, उसकी पत्नी रुचि ओझा, नितिन गौड़ और आदित्य मौर्या को गिरफ्तार कर लिया। अनिरुद्ध ओझा ने नितिन और आदित्य के साथ मिलकर 12 साल की किशोरी से सामूहिक बलात्कार किया था। किशोरी अपने सहेलियों के साथ वहाँ आई थी।

पुलिस ने इस हुक्का बार में जाँच की तो यहाँ से कई युवक-युवतियाँ पकड़ में आईँ। इसके साथ ही यहाँ मादक पदार्थों के सेवन की बात भी सामने आई। बाद में पुलिस ने तीनों आरोपितों को पकड़ लिया। बाद में हुक्का बार के मालिक अनिरुद्ध ओझा की पत्नी रुचि और उसके जीजा का नाम इस मामले में सामने आया। जाँच के दौरान यहाँ देह व्यापार का भी मामला सामने आया।

जाँच में यह भी सामने आया कि अनिरुद्ध ओझा का हुक्का बार बिना नक्शा पास कराए बिल्डिंग में चल रहा। पुलिस ने जाँच शुरू की तो देह व्यापार में शामिल कई दलालों के नाम भी सामने आए। पुलिस ने आरोपितों के मोबाइल की जाँच के बाद 30 जनवरी को तीन दलालों को गिरफ्तार कर लिया। ये लड़कियों को ब्लैकमेल कर होटलों में भेजते थे। बाद में एक नाम फ्लाइ इन

ये लोग नाबालिग लड़कियों को नौकरी का झाँसा देकर बुलाते थे और फिर दोस्ती करके पार्टी करते थे। उस दौरान उन्हें नशा देकर दुष्कर्म करते थे। फिर बाद में ब्लैकमेल करके उन्हें देह व्यापार में ढकेल देते थे। काम करने का उनका यही तरीका था। इस काम में रेशमा खान और उसकी सहयोगी मुस्कान और श्रेय शुक्ला शामिल थे। बाद में पुलिस ने तीनों को गिरफ्तार किया तो इनका काम करने का तरीका देखकर पुलिस भी चौंक गई।

22 साल की रेशमा खान ही वो लड़की है जो दूसरी लड़कियों को बहलाकर उन्हें हुक्का बार और होटलों तक लाती थी और देह व्यापार में धकेलती थी। रेशमा खान हुक्का बार के मालिक अनिरुद्ध ओझा से जुड़ी थी। वहीं, मुस्कान और श्रेय शुक्ला शाहपुर स्थित जेनिस बॉटल रेस्टोरेंट के हुक्का बार में देह व्यापार से संबंधित ग्राहकों को तय कमरों में पहुँचाते थे। इसके बदले दोनों को रोजाना 700 रुपए मिलते थे।

बाद में एक चौथी लड़की ने अनिरुद्ध और उसकी पत्नी के खिलाफ मुकदमा दर्ज करवाया। लड़की ने आरोप लगाया कि अनिरुद्ध की पत्नी भी इसमें मदद करती थी। वह लड़कियों को देह व्यापार के लिए अलग-अलग जगहों पर लेकर जाती थी। इसके बदले में उसे 4000 रुपए दिए जाते थे। मना करने पर हत्या की धमकी दी जाती थी। इसमें एक नाम और जुटा होटल फ्लाई इन के मालिक अनुराग सिंह का।

पुलिस जाँच में पता कि रेशमा खान शाहपुर के गीता वाटिका स्थित ‘जेनिस बॉटल रेस्टोरेंट’ के हुक्का बार में सक्रिय थी। वह यहाँ आने वाली लड़कियों पर नजर रखती, उनकी परेशानियों और कमजोरियों को समझकर उन्हें जाल में फँसाती थी। उसने देह व्यापार का अपना एक नेटवर्क खड़ा कर लिया था, जो बेहद संगठित था। इस मामले में रेशमा खान सहित अब तक 14 लोगों को गिरफ्तार किया गया है।

जाँच में यह बात सामने आई है कि रेशमा ने अब तक 300 लड़कियों को इस गंदे धंधे में धकेल चुकी है। वह नेटवर्क मार्केटिंग की तरह इस धंधे को ऑपरेट करती थी। वह जिस लड़की को देह व्यापार में धकेलती थी, उसके सामने यह प्रस्ताव रखती थी कि वह कोई दूसरी लड़की तो लाती है तो उसे कमीशन मिलेगा। इसके अलावा, वह लड़की जिस ग्राहक के पास जाएगी, उसका एक हिस्सा उसे मिलेगा।

धीरे-धीरे उसने इस धंधे को गोरखपुर के आसपास के जिलों में भी फैला दिया। रिपोर्ट के मुताबिक, वह नौकरी दिलाने के लिए इंटरव्यू के बहाने लड़कियों को होटल में बुलाती थी। फिर नशा देकर उनका रेप करवाती थी। इस दौरान लड़कियों का अश्लील वीडियो बना लिया जाता था। जो लड़की देह व्यापार के लिए तैयार नहीं होती थी, उसे धमकी दी जाती थी कि उसकी अश्लील तस्वीर उसके परिवार को भेज दी जाएगी।

डर और शर्म-लाज से लड़कियाँ उसके चंगुल में फँस जाती थीं। फिर उनके सामने कमीशन की बात रखी जाती थी। जब गिरोह को ग्राहक नहीं मिलते थे तो लड़कियों पर ग्राहक लाने का दबाव डाला जाता था। उन्हें लालच दिया जाता था कि रिफरेंस से ग्राहक लाने पर 30 प्रतिशत कमीशन दिया जाएगा। लड़कियों की डिलिंग मोबाइल और व्हाट्सएप के जरिए होती थी और सुंदरता के आधार पर रेट तय होते थे।

रेशमा 14 साल की उम्र में इस धंधे में आ गई थी। वह 10वीं फेल है, लेकिन लग्जरी लाइफ जीती है। रेशमा खान का नेटवर्क गोरखपुर के अलावा देवरिया, कुशीनगर, महाराजगंज, मऊ, बलिया, आजमगढ़, बस्ती, सिद्धार्थनगर के ज्यादातर होटलों तक है। वह रिसेप्शन पर बैठी महिलाओं के संपर्क में रहती थी। उनके जरिए ही ग्राहकों तक लड़कियाँ भेजती थीं।

रेशमा खान ने पूछताछ में बताया कि करीब 3 साल पहले वह जीनस बाटल रेस्टोरेंट के मालिक अनिरुद्ध ओझा के संपर्क में आई थी। इस रेस्टोरेंट में अनिरुद्ध हुक्का बार भी चलाता था। कहा जा रहा है कि वह ओझा के गिरोह का पहले शिकार बनी थी और बाद में खुद इसकी संचालक बन गई। इसके अलावा, रेशमा कुशीनगर की एक महिला से भी संपर्क में थी।

दैनिक भास्कर ने सोर्स के हवाले से लिखा है कि यही महिला रेशमा खान की मेंटर है। लड़कियों को फँसाने की शुरुआती ट्रेनिंग उसी ने दी है। फिलहाल पुलिस उससे पूछताछ कर रही है और उसके मोबाइल में डिलीट किए गए डेटा को रिकवर करवा रही है। इसके साथ ही अन्य आरोपितों की तलाश भी की जा रही है। रेशमा गोरखपुर के चिलुआताल के फतेहपुर डिहवा गाँव की रहने वाली है।

‘महाकुंभ में नहाने से पाप धुलता तो नरक में कोई रहेगा ही नहीं’: गाजीपुर से सपा सांसद अफजाल अंसारी ने फिर दिखाई हिंदू घृणा, दर्ज हुआ मुकदमा

उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में जारी महाकुंभ को लेकर विवादित टिप्पणी करने वाले गाजीपुर से समाजवादी पार्टी के सांसद अफजाल अंसारी के मुकदमा दर्ज किया गया है। अंसारी के खिलाफ धार्मिक भावनाओं को आहत करने का आरोप लगाया गया है। उनके खिलाफ गाजीपुर जिला सहकारी बैंक के पूर्व अध्यक्ष देव प्रकाश सिंह ने गुरुवार (13 फरवरी) की रात शादियाबाद थाने में मुकदमा दर्ज कराया।

प्रार्थी देव प्रकाश सिंह ने अपनी शिकायत में कहा है कि वे बिरनो थाना क्षेत्र के बुद्ध‌पुर गाँव के रहने वाले हैं। उन्हें सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो क्लिप के माध्यम से इस संबंध में जानकारी हुई। दरअसल, 12 फरवरी को समय करीब लगभग 7 बजे शाम को शादियाबाद चौराहे पर सन्त शिरोमणि गुरु रविदास जी का जन्म उत्सव मनाया जा रहा था। इसमें कई गणमान्य लोगों को बुलाया गया था।

देव प्रकाश सिंह ने आगे कहा कि इनमें गाजीपुर से सपा सांसद अफजाल अंसारी मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए थे। इस दौरान उन्होंने महाकुंभ पर अमर्यादित टिप्पणी की। शिकायतकर्ता के अनुसार, सांसद द्वारा अपने पद की गरिमा के खिलाफ जाकर की गई उनकी इस टिप्पणी से सनातन हिन्दू धर्म की धार्मिक भावनाएँ आहत हुई हैं।

शिकायत में कहा गया है कि अफजाल अंसारी ने कहा, “श्रद्धा के इस पर्व पर मान्यता है कि संगम तट पर नहाकर व्यक्ति पवित्र हो जाएगा। पाप धुल जाएगा। अगर पाप धुल जाएगा तो मतलब आगे बैकुण्ठ जाने का रास्ता खुल जाएगा। जो आलम दिख रहा है, उससे लग रहा है कि नरक में तो कोई बचेगा ही नहीं। नरक में कोई बचेगा नहीं और उधर (बैकुण्ठ में) हाउसफुल हो जाएगा।”

देव प्रकाश सिंह ने तहरीर में आगे कहा कि सांसद अफजाल अंसारी इसके पहले भी हिन्दू धर्म के साधु-संतों के खिलाफ अमर्यादित टिप्पणी की थी। शादियाबाद पुलिस थाने ने तहरीर के आधार पर अफजाल अंसारी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 299 और 253(2) के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया है।

इससे पहले भी अफजाल अंसारी ने महाकुंभ और साधु-संतों पर अमर्यादित टिप्पणी की थी। उन्होंने कुंभ आने वाले लोगों को एक तरह से गंजेड़ी बता दिया था। इसको लेकर भी उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया था। अफजाल अंसारी ने कहा था कि अगर कुंभ मेले में एकाध मालगाड़ी गांजा भेजवा दिया जाए तो उसकी भी वहाँ खपत हो जाएगी।

NDTV ने जिस आतंकी को दिखाया था ‘अल्लाह का बंदा’, अमेरिकी कोर्ट ने जिसे किया था बरी… PM मोदी-ट्रंप की दोस्ती से अब भारतीय अदालत सुनाएगी सजा

साल 2008 में हुए मुंबई में हुए 26/11 हमले का आरोपित तहव्वुर राणा जल्द भारत लाया जाएगा। खुद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इसकी पुष्टि की है। इस ऐलान के बाद हर जगह मोदी सरकार की दृढ़ शक्ति की तारीफ हो रही है। कारण यही है कि मोदी सरकार हमेशा से आतंकवाद के मुद्दे पर स्पष्ट थी। जिस समय पर वामपंथी मीडिया एड़ी-चोटी का जोर लगाकर राणा को निर्दोष दिखा रहा था उस समय भी नरेंद्र मोदी तहव्वुर राणा को रियायत मिलने पर अपनी अमेरिका की न्याय व्यवस्था पर सवाल उठा रहे थे। उन्होंने आवाज उठाई थी कि भारत के दोषियों का मामला भारत की कोर्ट में सुना जाना चाहिए।

जब तहव्वुर राणा की रिहाई पर भड़के थे नरेंद्र मोदी

14 साल पहले जब साल 2011 में अमेरिका की शिकागो कोर्ट ने तहव्वुर राणा को 26/11 हमले मामले में बरी करने का निर्णय लिया था तो नरेंद्र मोदी ने भड़कते हुए सवाल पूछा था कि किस आधार पर 26/11 हमले के दोषियों को निर्दोष दिखाकर छोड़ा जा रहा है? मामले में इन्वेस्टिगेशन आखिर किसने की और कौन हमलों के पीड़ितों को न्याय दिलाएगा?

उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा था कि ये सब अमेरिका ने पाकिस्तान को खुश करने के लिए किया है। देश के प्रधानमंत्री अगर अमेरिका के मित्र माने जाते हैं तो फिर यहाँ एकतरफा कार्रवाई कैसे हो रही है? उन्होंने कहा था कि शिकागो की कोर्ट में जो कुछ भी हुआ है, उसे देख तो हिंदुस्तान में आतंकी गतिविधि करने वाले सारे आतंकी अमेरिका की कोर्ट में चले जाएँगे।

उन्होंने अमेरिका से पूछा था क्या 9/11 के दोषियों का केस भारत में चल सकता है? क्या यहाँ की कोर्ट उनके दोषियों के लिए फैसला दे सकती है? उन्होंने उस समय भारत सरकार से अपील की थी कि वो लोग अमेरिका के सामने आवाज उठाएँ और पाकिस्तान का जो रवैया उससे सख्ती से डील करें, क्योंकि अगर ऐसा नहीं हुआ तो एक के बाद एक दोषी अमेरिका चले जाएँगे, वहाँ की कोर्ट में केस चलेंगे, फिर उन्हें निर्दोष छोड़ दिया जाएगा।

बता दें कि ये बयान उसी दौर में आया था जब मीडिया पर वामपंथियों का कब्जा था। आतंकियों को सजा दिलाने की माँग की बजाय, टीवी पर आतंकियों के लिए संवेदना बटोरने का काम होता था। तहव्वुर राणा के समय भी ऐसा ही हुआ था।

NDTV ने बटोरी थी तहव्वुर राणा के लिए संवेदना

वामपंथी दबदबे के कारण लंबे समय तक बदनाम रहा एनडीटीवी साल 2010 में तहव्वुर राणा के मामले को इमोशनल एंगल देने में जुटा था। उस समय जब तहव्वुर राणा के खिलाफ पुख्ता सबूत मिल रहे थे कि उसने 26/11 हमले के साजिशकर्ता की मदद की, कोर्ट में चार्जशीट दाखिल थी, तब भी एनडीटीवी इस बात को दिखा रहा था कि राणा कैसे अल्लाह का बंदा है।

एनडीटीवी ने तहव्वुर राणा के पिता से उस समय एक्सक्लूसिव बात की थी। इस बातचीत में राणा के अब्बा का कहना था- उनके बेटे का कोई दोष नहीं है। उसे खुद नहीं पता कि उसे कैसे फँसाया गया। सब हैरान हैं। वो तो अल्लाह का बंदा है, पाँच वक्त का नमाजी है। दिल का इतना नेक है कि अगर कोई रोटी माँगने आ जाए और उसपर एक रोटी हो तो अपनी दे देता है कि दूसरा खा ले।

राणा के अब्बा बार-बार बयान में दोहरा रहे थे कि उन्हें तो कुछ समझ नहीं आ रहा कि आखिर उनके नेक बेटे को कैसे फँसा दिया गया। वो कहते हैं कि हम जानते हैं हमें न्याय मिलेगा चाहे या मिले या अल्लाह की अदालत में मिले। दिलचस्प बात ये है कि एक तरफ वो बेटे के जुर्म को छिपा रहे थे और दूसरी तरफ एनडीटीवी के आगे स्वीकार रहे थे कि वो मुंबई हमलों के साजिशकर्ता हेडली को जानते हैं

वीडियो में सुन सकते हैं कि कैसे एनडीटीवी रिपोर्टर आतंकी साजिश रचने वाले को मिस्टर हेडली कहकर सम्मान दे रही थी। वहीं राणा के अब्बा हले बता रहे थे कि वो हेडली को जानते हैं, उनकी बीवी उनके यहाँ सौदा लेने आती है, लेकिन बाद में वो अपनी बात से पलट गए। उन्होंने कहा कि उन्होंने हेडली को देखा नहीं है।

मोदी सरकार आते ही आतंकियों पर शिकंजा कसना शुरू

आज इन दोनों पक्षों को 15 साल बीत गए हैं। 2014 के बाद भी जहाँ वामपंथी मीडिया आतंकियों का बैकग्राउंड, पारिवारिक पक्ष, माता-पिता के बयान, घर की गरीबी, आतंकी की शिक्षा, दिखाकर उनके लिए एक नर्म माहौल बनाने का काम करता रहा। वहीं नरेंद्र मोदी की सरकार आने के बाद न केवल पाकिस्तान के खिलाफ सख्त रवैया अपनाया गया बल्कि आतंकवाद पर शिकंजा कसना भी शुरू हुआ। नतीजा- राणा जैसे आतंकियों को भारत लाने की प्रक्रिया भी तेज हुई।

तहव्वुर राणा के मामले की बात करें तो 26/11 मामले में उसे रिहाई मिलने के बाद भी मोदी सरकार ने अपने प्रयास रोके नहीं। साल 2019 में भारत ने राणा के प्रत्यर्पण के लिए अमेरिका को एक कूटनीतिक/ डिप्लोमेटिक नोट सौंपा। 2020 में भारत ने प्रत्यर्पण के उद्देश्य से राणा की अस्थायी गिरफ्तारी की माँग करते हुए शिकायत दर्ज की। 2023 में अमित शाह ने बताया कि तहव्वुर राणा जल्द भारत आएगा उसे गिरफ्तार कर लिया गया है। 25 जनवरी को अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने मुंबई हमले में शामिल तहव्वुर राणा के भारत प्रत्यर्पण को मंजूरी दे दी और अब डोनाल्ड ट्रंप ने खुद इसकी पुष्टि की है कि तहव्वुर भारत भेजा जाएगा

टैरिफ से चीन परेशान, जबकि भारत के साथ व्यापार दोगुना कर $500 बिलियन का प्लान: PM मोदी और ट्रंप की मुलाकात में आतंकवाद-AI-डिफेंस तक चर्चा और समझौते

संयुक्त राज्य अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने 13 फरवरी 2025 को राजधानी वॉशिंगटन डीसी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मेज़बानी की। इस दौरान दोनों राष्ट्राध्यक्षों ने वैश्विक रणनीतिक साझेदारी में भारत-अमेरिका की साझेदारी को महत्वपूर्ण ताकत बताया, जो आपसी विश्वास, साझा हितों, सद्भावना और अपने नागरिकों की मजबूत भागीदारी पर आधारित है।

दोनों देशों ने ’21वीं सदी के लिए यूएस-इंडिया कॉम्पैक्ट (सैन्य साझेदारी के लिए अवसरों को बढ़ाना तथा वाणिज्य एवं प्रौद्योगिकी में तेजी लाना) की शुरुआत की। इस पहल के तहत दोनों देशों ने लाभकारी साझेदारी पर प्रतिबद्धता जताई। दोनों देशों ने रक्षा, व्यापार एवं निवेश, ऊर्जा सुरक्षा, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार, बहुपक्षीय सहयोग तथा दोनों देशों के नागरिकों के बीच संपर्क को लेकर महत्वपूर्ण निर्णय लिए।

रक्षा

भारत और अमेरिका ने रक्षा संबंधों को और आगे बढ़ाने के लिए इस साल 21वीं सदी में अमेरिका-भारत प्रमुख रक्षा साझेदारी के लिए एक नए 10 वर्षीय फ्रेमवर्क पर हस्ताक्षर करने की योजना की घोषणा की। इसके साथ ही ट्रम्प ने कहा कि अमेरिका भारत से रक्षा सहयोग को और बढ़ाएगा। संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने कहा कि इस साल से लॉकहीड मार्टिन F-35 लाइटनिंग II भी भारत को उपलब्ध कराए जाएँगे।

भारत हिंद महासागर क्षेत्र में निगरानी को बढ़ाने के लिए अमेरिका से 6 अतिरिक्त P-8I विमान भी खरीदेगा। भारत अमेरिका से अब तक C-130J सुपर हरक्यूलिस, C-17 ग्लोबमास्टर III, P-8I पोसिडॉन विमान, CH-47F चिनूक, MH-60R सीहॉक्स और AH-64E अपाचे, हार्पून एंटी-शिप मिसाइल, M-777 हॉवित्जर और MQ-9B जैसे विमान, मिसाइल एवं तोप आदि खरीद चुका है।

अमेरिका रक्षा औद्योगिक सहयोग को मजबूत करने के लिए भारत को रक्षा एवं सैन्य की बिक्री को बढ़ाएगा और भारत के साथ मिलकर उनके उत्पादन का विस्तार भी करेगा। इनमें ‘जैवलिन’ एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइलों और ‘स्ट्राइकर’ इन्फैंट्री कॉम्बैट वाहनों की नई खरीद और सह-उत्पादन व्यवस्था को बढ़ाने की योजना है। अमेरिका द्वारा दी जाने वाली रक्षा प्रणालियों की देश में ही मरम्मत की भी व्यवस्था की जाएगी।

इसके साथ ही रक्षा सौदों में तेजी लाने के लिए इस साल पारस्परिक रक्षा खरीद (RDP) समझौते को पूरा करने के लिए बातचीत शुरू करने पर भी सहमति व्यक्त की है। साथ ही अंतरिक्ष, वायु रक्षा, मिसाइल, समुद्री और पानी के नीचे की प्रौद्योगिकियों में सहयोग तथा 5वीं पीढ़ी के लड़ाकू विमानों को भारत को देने के लिए अपनी नीति की समीक्षा की बात कही है।

इंडो-पैसिफिक में रक्षा उद्योग साझेदारी और उत्पादन को बढ़ाने के लिए ‘ऑटोनोमस सिस्टम इंडस्ट्री अलायंस (ASIA) की घोषणा की गई है। अत्याधुनिक समुद्री प्रणालियों और उन्नत एआई-सक्षम काउंटर मानवरहित हवाई प्रणाली (UAS) के सह-विकास और सह-उत्पादन के लिए एंडुरिल इंडस्ट्रीज और महिंद्रा समूह तथा टोही ऐरे प्रणालियों के सह-विकास के लिए L3 हैरिस और भारत इलेक्ट्रॉनिक्स के बीच साझेदारी का स्वागत किया।

दोनों देश नेताओं ने वायु, भूमि, समुद्र, अंतरिक्ष और साइबरस्पेस में नवीनतम तकनीकों को शामिल करते हुए उन्नत प्रशिक्षण, अभ्यास और संचालन के जरिए सैन्य सहयोग को बढ़ाने का भी संकल्प लिया। इसके साथ ही आपदा राहत कार्यों तथा सुरक्षा सहयोग के लिए भारत-प्रशांत क्षेत्र में अमेरिकी और भारतीय सेनाओं की विदेशी तैनाती को बनाए रखने के लिए नई राह खोलने की प्रतिबद्धता जताई।

व्यापार और निवेश

दोनों देशों ने व्यापार एवं निवेश को बढ़ाने का संकल्प लिया है। इसके लिए ‘मिशन 500’ तैयार किया गया है, जिसका लक्ष्य सन 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना से अधिक करके 500 बिलियन डॉलर करना है। निष्पक्ष व्यापार शर्तों के लिए दोनों देश बहु-क्षेत्रीय द्विपक्षीय व्यापार समझौते (BTA) के पहले चरण पर इस साल के अंत तक बातचीत करेंगे। इसमें टैरिफ को कम करना आदि शामिल होगा।

अमेरिका ने बोरबॉन, मोटरसाइकिल, आईसीटी उत्पादों और धातुओं के क्षेत्रों में अमेरिकी उत्पादों पर टैरिफ कम करने के भारत के हालिया उपायों का स्वागत किया। इसके साथ ही अल्फाल्फा घास और बत्तख के मांस जैसे अमेरिकी कृषि उत्पादों और चिकित्सा उपकरणों के लिए भारत द्वारा बाजार पहुँच बढ़ाने के लिए किए गए उपायों का भी स्वागत किया।

वहीं, भारत ने आमों और अनार के निर्यात को बढ़ाने के लिए अमेरिका द्वारा उठाए गए कदमों की भी सराहना की। दोनों पक्ष कृषि वस्तुओं के व्यापार को बढ़ाने के लिए भी मिलकर काम करने पर सहमति व्यक्त की है। दोनों नेताओं ने अमेरिकी और भारतीय कंपनियों के लिए एक-दूसरे के देशों में उच्च-मूल्य वाले उद्योगों में ग्रीनफील्ड निवेश करने के अवसरों को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्धता जताई।

भारतीय कंपनियों द्वारा अमेरिका में लगभग 7.35 बिलियन डॉलर के निवेश का स्वागत किया गया। इनमें अलबामा और केंटकी में हिंडाल्को की नोवेलिस द्वारा एल्युमीनियम सामान का निर्माण, टेक्सास और ओहियो में JSW द्वारा स्टील निर्माण, उत्तरी कैरोलिना में एप्सिलॉन द्वारा बैटरी सामग्री निर्माण, वाशिंगटन में जुबिलेंट फार्मा द्वारा इंजेक्टेबल्स का निर्माण आदि शामिल हैं। इससे 3,000 से अधिक लोगों को नौकरी मिली है।

ऊर्जा सुरक्षा

भारत और अमेरिका ने तेल, गैस और असैन्य परमाणु ऊर्जा सहित अमेरिका-भारत ऊर्जा सुरक्षा साझेदारी के लिए फिर से प्रतिबद्धता जताई। दोनों देशों ने अपने नागरिकों को किफायती और विश्वसनीय ऊर्जा उपलब्ध कराने के लिए हाइड्रोकार्बन के उत्पादन को बढ़ाने पर सहमति व्यक्त की। वहीं, अमेरिका ने भारत को अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी में पूर्ण सदस्य के रूप में शामिल करने का समर्थन किया।

दोनों नेताओं ने तेल और गैस अवसंरचना में निवेश बढ़ाने और दोनों देशों की ऊर्जा कंपनियों के बीच अधिक सहयोग को सुविधाजनक बनाने पर जोर दिया। साथ ही प्रौद्योगिकी हस्तांतरण के माध्यम से भारत में अमेरिका द्वारा डिजाइन किए गए परमाणु रिएक्टरों के निर्माण के लिए मिलकर काम करेंगे। अमेरिका-भारत 123 असैन्य परमाणु समझौते को पूरी तरह से साकार करने की अपनी प्रतिबद्धता की घोषणा की।

प्रौद्योगिकी और नवाचार

दोनों देशों ने अमेरिका-भारत Trust (Transforming the Relationship Utilizing Strategic Technology) की शुरुआत की है। यह पहल रक्षा, AI, सेमीकंडक्टर, क्वांटम, जैव प्रौद्योगिकी, ऊर्जा और अंतरिक्ष जैसे क्षेत्रों में महत्वपूर्ण और उभरती प्रौद्योगिकियों को बढ़ावा देंगे। इसके लिए सरकार-से-सरकार, शिक्षा और निजी क्षेत्र के सहयोग जैसे कदमों को उठाया जाएगा।

‘ट्रस्ट’ पहल के तहत AI इंफ्रास्ट्रक्चर में तेजी लाने के लिए दोनों देशों के निजी क्षेत्र मिलकर काम करेंगे। इसमें AI इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए फंडिंग, निर्माण आदि शामिल होंगी। इसके साथ ही दोनों देश अगली पीढ़ी के डेटा केंद्रों में उद्योग भागीदारी और निवेश को बढ़ाएँगे, जो विभिन्न क्षेत्रों में इनका इस्तेमाल किया जा सकेगा। मेडिकल के क्षेत्र में इसका विशेष तौर पर प्रयोग किया जाएगा।

TRUST के अलावा, दोनों देशों ने INDUS इनोवेशन के शुभारंभ की घोषणा की है। यह सफल इंडस-एक्स प्लेटफॉर्म के आधार पर तैयार किया गया एक नया इनोवेशन ब्रिज है, जो अमेरिका-भारत उद्योग और शैक्षणिक साझेदारी को आगे बढ़ाएगा। इसके साथ ही यह अंतरिक्ष, ऊर्जा और अन्य उभरती प्रौद्योगिकियों में नवाचार के लिए निवेश को बढ़ावा देगा।

दोनों देशों ने महत्वपूर्ण खनिजों की खोज, लाभकारीकरण और प्रसंस्करण के साथ-साथ रिसाइकिल करने की प्रौद्योगिकियों में सहयोग की प्रतिबद्धता जताई है। दोनों देशों ने रणनीतिक खनिज की खोज करने की घोषणा की। इसमें एल्यूमीनियम, कोयला खनन और तेल एवं गैस के अलावा लिथियम, कोबाल्ट और दुर्लभ खनिज शामिल हैं।

महत्वपूर्ण और उभरती प्रौद्योगिकियों पर शोध करने के लिए अमेरिकी राष्ट्रीय विज्ञान फाउंडेशन और भारतीय अनुसंधान राष्ट्रीय अनुसंधान फाउंडेशन के बीच एक नई साझेदारी की घोषणा की गई है। यह साझेदारी सेमीकंडक्टर, कनेक्टेड वाहन, मशीन लर्निंग, अगली पीढ़ी के दूरसंचार, बुद्धिमान परिवहन प्रणाली और भविष्य के बायो-मैन्युफैक्चरिंग के क्षेत्रों में संयुक्त अनुसंधान में सहयोग शामिल है।

बहुपक्षीय सहयोग

दोनों देशों ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भारत की महत्वपूर्ण भागीदारी और अमेरिकी सहयोगी को रेखांकित किया। इसमें मेटा द्वारा समुद्र में 50 हजार किलोमीटर से अधिक बिछाए जाने वाले केबल के निर्णय का भी स्वागत किया। यह कई बिलियन अमेरिकी डॉलर का प्रोजेक्ट है, जो इस साल शुरू होगा। इन केबल की देखरेख करने के लिए भारत इच्छुक है। इसके अलावा आतंकवाद के खिलाफ कठोर रूख पर भी दोनों देश सहमत हुए।

दोनों देशों ने कहा कि आतंकवाद के वैश्विक संकट से लड़ा जाना चाहिए और दुनिया के हर कोने से आतंकवादियों के सुरक्षित ठिकानों को खत्म किया जाना चाहिए। उन्होंने 26/11 को मुंबई में हुए हमलों और 26 अगस्त 2021 को अफगानिस्तान में एबी गेट बम विस्फोट जैसे जघन्य कृत्यों को रोकने के लिए अल-कायदा, आईएसआईएस, जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा सहित आतंकवादी समूहों का मजबूती से मुकाबला करने की प्रतिबद्धता जताई।

अमेरिका ने घोषणा की कि तहव्वुर राणा के भारत प्रत्यर्पण को मंजूरी दे दी गई है। दोनों नेताओं ने सामूहिक विनाश के हथियारों और उनकी डिलीवरी प्रणालियों के प्रसार को रोकने और आतंकवादियों और गैर-राज्य एक्टर्स द्वारा ऐसे हथियारों तक पहुँच को रोकने के लिए मिलकर काम करने का भी संकल्प लिया।

दोनों देशों ने आपसी सुरक्षा को बढ़ावा देने के लिए अपराधियों, उनके संरक्षकों, आतंकवादी, हथियार तस्कर, ड्रग तस्कर, मानव तस्कर, अवैध आव्रजन नेटवर्क, संगठित अपराध सिंडिकेट और सार्वजनिक एवं राजनयिक सुरक्षा के साथ-साथ दोनों देशों की संप्रभुता एवं क्षेत्रीय अखंडता को खतरा पहुँचाने वालों के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई की प्रतिबद्धता दोहराई गई।

राहुल गाँधी पर FIR से तिलमिलाई कॉन्ग्रेस, ओडिशा पुलिस को पढ़ा रही थी कानून: IG लाल ने कर दिया शंट, जानिए क्या है मामला

राहुल गाँधी के विवादित बयान पर ओडिशा में हुई FIR को लेकर कॉन्ग्रेस ने सवाल उठाए हैं। कॉन्ग्रेस ने दावा किया है कि राहुल गाँधी के खिलाफ ओडिशा में FIR नहीं दर्ज की जा सकती। कॉन्ग्रेस ने दावा किया है कि इसके लिए पहले अनुमति लेना जरूरी है।

वहीं पुलिस ने स्पष्ट कर दिया है कि उनके पास राहुल गाँधी के खिलाफ FIR दर्ज करने और उसकी जाँच का पूरा अधिकार है। राहुल गाँधी के खिलाफ यह FIR ओडिशा के झारसुगुडा में हिन्दू संगठनों ने उनके ‘इंडियन स्टेट से लड़ रहे’ वाले बयान पर दर्ज करवाई है।

ओडिशा कॉन्ग्रेस के नेताओं ने FIR को लेकर एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की है। कॉन्ग्रेस नेता सुदर्शन दास ने FIR पर सवाल उठाते हुए कहा है कि क्या राहुल गाँधी का मामला झारसुगुडा के अंतर्गत आता है। उन्होंने पूछा कि क्या पुलिस FIR दर्ज करते समय उच्चाधिकारियों से सलाह ली थी।

कॉन्ग्रेस ने इस मामले में DGP ओडिशा से मिलने की बात कही है। कॉन्ग्रेस नेता सिबानंद रे ने दावा किया है कि पुलिस ने राज्य की भाजपा सरकार को खुश करने के लिए यह मामला दर्ज किया है। कॉन्ग्रेस नेताओं ने कहा है कि CRPC कानून के तहत किसी सरकारी पद पर बैठे व्यक्ति के खिलाफ जाँच के लिए पहले अनुमति जरूरी होती है।

वहीं इस मामले में FIR का आदेश देने वाले IG संबलपुर हिमांशु लाल ने कॉन्ग्रेस नेताओं को कानून समझाया है। IG लाल ने कहा, “आम तौर पर किसी अपराध के खिलाफ FIR वहीं दर्ज होती है जहाँ वह घटित होते हैं, लेकिन बयान अगर किसी दूसरे राज्य में प्रकाशित किया गया या उसे लोगों ने देखा तो वहाँ भी कार्रवाई का अधिकार पुलिस को है।”

IG हिमांशु लाल ने कहा है कि राहुल गाँधी के विवादित बयान से शिकायतकर्ता को ठेस पहुँची है, ऐसे में मामला दर्ज किया गया है। उन्होंने अधिकार क्षेत्र के अलावा सरकारी पद वाले व्यक्ति के खिलाफ FIR दर्ज करने के नियम भी समझाए हैं।

IG हिमांशु लाल ने बताया, “CRPC की धारा 197 के तहत किसी भी लोकसेवक के अपराध की जाँच के लिए कोई भी अनुमति जरूरी नहीं है। अनुमति केवल मुकदमा चलाने के मामले में ली जाती है और वह भी तब जब अपनी ड्यूटी करते समय आरोपित लोकसेवक ने अपराध किया हो, यह इस मामले में लागू नहीं है।”

गौरतलब है कि 7 फरवरी, 2025 को राहुल गाँधी के खिलाफ झारसुगुडा में FIR दर्ज की गई थी। इसको लेकर हिन्दू संगठनों के कार्यकर्ताओं ने शिकायत दी थी, जिसके बाद IG हिमांशु लाल ने इस मामले पर जाँच के बाद FIR के आदेश दिए थे।

ओडिशा में राहुल गाँधी के खिलाफ FIR होने पर अधिकार क्षेत्र का रोना रोने वाली कॉन्ग्रेस ने कुछ ही महीनों पहले कर्नाटक में FIR दर्ज करके उत्तर प्रदेश में एक राष्ट्रवादी पत्रकार पर कार्रवाई के लिए टीम भेजी थी। यह FIR राहुल गाँधी के खिलाफ किए गए एक ट्वीट के आधार पर दर्ज की गई थी।

जर्मनी में फरहाद ने गाड़ी से 28 लोगों को रौंदा, पड़ताल में निकली ‘अफगानिस्तानी’ पहचान: सिक्योरिटी कॉन्फ्रेंस से पहले किया हमला

जर्मनी के म्युनिख में 13 फरवरी को एक कार चालक ने भीड़ में गाड़ी घुसाकर कई लोगों को रौंद दिया। खबर आ रही है कि घटना में 28 लोग घायल हो गए हैं जिनमें बच्चे भी शामिल हैं। इनमें दो की हालत बेहद गंभीर है। पुलिस की पड़ताल में सामने आया है कि आरोपित अफगानिस्तानी है। उसकी उम्र मात्र 24 साल है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, जिस समय ये घटना घटी उस समय म्युनिख में सर्विस वर्कर्स यूनियन के लोग प्रदर्शन कर रहे थे। कई लोग उस प्रदर्शन में शामिल होने आए हुए थे, तभी गाड़ी आई और रौंदते हुए आगे चली गई।

इस हमले को म्युनिख के गवर्नर मार्कस सॉडर ने संदिग्ध हमला करार दिया है। उनका कहना है कि वो इस घटना से सदमे में है। ये हमला उस समय हुआ है जब बावेरिया प्रांत की राजधानी म्युनिख में शुक्रवार से सिक्योरिटी कॉन्फ्रेंस शुरू होने जा रही है।

जानकारी के मुताबिक इस कॉन्फ्रेंस में कई प्रमुख अंतरराष्ट्रीय नेता भाग लेने वाले थे, जैसे अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की आदि। घटना स्थल से सम्मेलन स्थल की दूरी लगभग 1.5 किलोमीटर थी।

पुलिस अब मामले की जाँच कर रही है। पता लगाने की कोशिश हो रही है कि क्या यह जानबूझकर किया गया हमला था या कोई दुर्घटना। अधिकारियों ने घटनास्थल पर सुरक्षा बढ़ा दी है और नागरिकों से उस क्षेत्र में जाने से बचने का आग्रह किया है।

इसके अलावा ये भी खबर है कि आरोपित को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। कुछ सोशल मीडिया अकॉउंट्स पर उसकी पहचान फरहाद के तौर पर बताई गई है। ये भी कहा जा रहा है कि फरहाद इस्लमी कंटेंट अपने सोशल मीडिया पर बहुत शेयर कर रहा था। 2016 में उसके शर्णार्थी होने की याचिका को खारिज कर दिया गया था लेकिन उस समय उसे वापस अफगानिस्तान नहीं भेजा गया। अब जर्मन के लोग इस घटना को आतंकवाद से जोड़कर भी दे रहे हैं।