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सूर्य स्नान, भोजन, फोकस और टाइम टेबल: PM मोदी ने ‘परीक्षा पे चर्चा’ में सुलझाई बच्चों की समस्या, आत्मविश्वास भी बढ़ाया

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्कूली छात्रों की परीक्षाएँ शुरू होने से पहले एक बार फिर ‘परीक्षा पे चर्चा’ के जरिए कुछ बच्चों से मुलाकात की और उनकी समस्याएँ सुनकर उन्हें उसके समाधान बताए। इस दौरान उन्होंने बच्चों के आत्मविश्वास को बढ़ाते हुए उन्हें तनाव मुक्त करने का भी काम किया।

पीएम मोदी ने अलग-अलग राज्यों से आए बच्चों को सूर्य स्नान का महत्व समझाया और गेहूँ, बाजरा, चावल, मोटा अनाज सब कुछ खाने की सलाह दी। पीएम ने क्रिकेटर्स का उदाहरण देते हुए समझाया कि जैसे चारों ओर से शोर होते हुए भी क्रिकेटर का फोकस गेंद पर होता है वैसे ही बच्चों को भी अपना ध्यान सिर्फ लक्ष्य पर रखना चाहिए। बाहरी प्रेशर और लोगों की बातों का भार अपने दिमाग में न डालें।

लीडरशिप क्वालिटी पर सवाल किए जाने पर पीएम मोदी ने कहा “जब लोगों में आपके लिए विश्वास जागता है, तब लोग आपकी लीडरशिप को मान्यता देते हैं। आपमें विश्वास कर लीडर बनने के लिए धैर्य भी बेहद जरूरी है।” आगे प्रधानमंत्री मोदी ने माता-पिता और परिवार को भी सीख दी कि वो बच्चों को दीवारों में बंद करके किताबों का जेलखाना बना दें तो बच्चे कभी ग्रो नहीं कर पाएँगे। उसे खुला आसमान चाहिए। वहीं टीचर से कहा कि वो बच्चों की उस ताकत को पहचानें जिसमें वो सबसे अच्छा है।

उन्होंने बच्चों को लिखने वाली आदत डालने को कहा। वहीं ये भी कहा कि 24 घंटे ही सबके पास होते हैं, इसलिए अपने लक्ष्य पर फोकस करके मेहनत करें, जो काम करने हैं उनकी लिस्ट बनाएँ, उन्हें चेक करें ये हुए या नही। उन्होंने बच्चों को सलाह दी कि डिप्रेशन और एंग्जायटी से दूर रहने का सरल तरीका यही है कि अगर मन में दुविधा हो तो उसे कह डालें वरना एक समय पर विस्फोट हो जाएगा।

पीएम मोदी ने छात्रों को सकारात्मक सोच अपनाने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि लक्ष्य ऐसे बनाएँ जो पहुँच में हों लेकिन तुरंत हासिल न हों। इससे छात्रों को प्रेरणा मिलेगी और वे अपनी क्षमताओं पर विश्वास कर सकेंगे। परीक्षा के दौरान तनाव और डर से निपटने के लिए पीएम मोदी ने सलाह दी कि कठिन विषयों को पहले पढ़ें। इससे आत्मविश्वास बढ़ेगा और परीक्षा का अनुभव सुखद बनेगा। उन्होंने कहा कि असफलताओं से सीखना जरूरी है और इसे एक शिक्षक की तरह देखना चाहिए।

जिस रात बांग्लादेशी शरीफुल इस्लाम ने मारे चाकू, उस रात गीता ने बचाई सैफ अली खान की जान: बॉलीवुड अभिनेता ने बताया क्या-कैसे हुआ था, तैमूर साथ गया था अस्पताल

बॉलीवुड अभिनेता सैफ अली खान पर हुए जानलेवा हमले को एक महीना होने वाला है। इस बीच उनपर, उनके परिवार पर क्या गुजरी ये सब जानकारी अब तक सूत्रों के हवाले से आती रही, मगर अब सैफ अली खान ने खुद आकर घटना वाली रात पर विवरण दिया है।

टाइम्स ऑफ इंडिया की एक्सक्लूसिव रिपोर्ट के अनुसार उन्होंने बताया कि उस रात हमलावर (मोहम्मद शरीफुल इस्लाम शहजाद) जहाँगीर के कमरे में चाकू लेकर खड़ा था और पैसे माँग रहा था। उन्हें उस समय कुछ समझ नहीं आया। उन्होंने फौरन उसे पकड़ा और उससे भिड़ गए। हमलावर ने भी उनकी गर्दन पर हमला किया। शुरू में सैफ को एहसास नहीं हुआ कि हमलावर ने उनकी गर्दन पर चाकू मारा है क्योंकि वो लगातार दो हथियारों से वार कर रहा था। सैफ चूँकि बचाव में हाथ-पाँव चला रहे थे इसलिए उनके हाथ और कलाई कट गई थी।

सैफ कहते हैं, “इस स्थिति में मैं बस दुआ कर रहा था कि कोई इस आदमी को मुझसे दूर कर दे, तभी मेरी हाउसहेल्प गीता वहाँ आईं। उन्होंने उसे मुझसे दूर खींचा और जेह के कमरे में धकेलकर दरवाजा बंद कर दिया। खून से लथपथ हाल में मुझे एहसास हुआ कि मेरे दाहिने पाँव में कुछ महसूस नहीं हो रहा है। ऐसा शायद इसलिए था क्योंकि मेरी रीढ की हड्डी में चोट लगी थी, लेकिन तब मुझे ये महसूस नहीं हुआ।

सैफ बताते हैं कि गीता ने जब हमलावर को धक्का देकर जेह के कमरे में बंद किया तो उनका दूसरा हाउसहेल्प घर में डेकोरेशन पर लगी दो तलवार लेकर आ गया था। उन लोगों ने हमलावर को पकड़ने के लिए गेट खोला तब तक वो उसी रास्ते से जा चुका था जिससे वो आया था।

इसके बाद करीना उन्हें और तैमूर को लेकर नीचे गईं। वहाँ चिल्ला-चिल्लाकर उन्होंने ऑटो वाला बुलाया। फिर करीना ने कहा- “तुम अस्पताल जाओ, मैं अपनी बहन के घर जाऊँगी।” सब परेशान थे इसलिए वो तैमूर को लेकर अपने साथ चले गए। तैमूर ने रास्ते में उनसे पूछा- ‘तुम मरने वाले हो क्या।’ सैफ ने जवाब दिया- ‘नहीं।’

सैफ अली खान बताते हैं कि उन्हें उस समय तैमूर की जरूरत थी। उन्हें लग रहा था कि अगर भगवान न करे कुछ उन्हें होता है तो तैमूर उनके साथ होना चाहिए। वो तैमूर को लेकर ऑटो में बैठे। ऑटो वाले ने भी उनकी हालत देखी तो आराम से, बिना झटका दिए ऑटो चलाया। कुछ समय बाद वो और तैमूर, लीलावती अस्पताल की इमरजेंसी में गए। उन्होंने अपना परिचय देकर स्ट्रेचर फटाफट मंगवाया और इलाज शुरू हुआ।

सैफ कहते हैं कि डॉक्टरों ने बड़ी सूझबूझ से उनका केस हैंडल किया, जाँच के बाद बताया कि जो चाकू गर्दन पर मारा गया था, स्पाइन के पास। अगर वो दो-तीन इंच और अंदर होता तो वो पैरालाइज हो सकते थे।

वहीं जब इंटरव्यू में उनसे ये पूछा गया कि सोशल मीडिया पर लोग सवाल उठा रहे हैं कि इतने बड़े सेलीब्रेटी के घर चोर कैसे घुस सकता है, उन्हें अस्पताल जाने के लिए ऑटो क्यों लेना पड़ा, क्या वो नाटक कर रहे आदि-आदि। इस पर सैफ ने जवाब दिया कि वो इसमें किसी की गलती नहीं देते, सिर्फ अपनी देते हैं कि उन्होंने प्रोटेक्शन टाइट नहीं रखी।

उन्होंने ये भी बताया कि उनके पास ड्राइवर है लेकिन रात में कोई घर नहीं रुकता। अगर वो फोन करते तो ड्राइवर को आने में समय लग सकता था। रही बात मजाक उड़ाने की तो उन्हें पहले से पता था कि उनके साथ हुई घटना का लोग मजाक बनाएँगे।

उन्होंने कहा कि वो इस घटना के बाद भी अपने शहर में सुरक्षित महसूस करते हैं। उनका परिवार इस मुश्किल की घड़ी में उनके साथ खड़ा रहा। जेह ने उन्हें एक प्लास्टिक की तलवार भी दी है और कहा है कि अगर अब चोर आए तो वो उसे इसी से मारें।

दिल्ली दारू घोटाले में फिर जेल जा सकते हैं केजरीवाल-सिसोदिया, CBI ने अदालत में दी अर्जी: पंजाब में CM भगवंत मान की कुर्सी पर खतरा, कॉन्ग्रेस का दावा- AAP के 30 MLA संपर्क में

दिल्ली विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी (AAP) को मिली करारी हार के बाद उसकी मुश्किलें और बढ़ती जा रही है। पार्टी को अब राजनैतिक और कानूनी फ्रंट पर समस्याएँ आ रही हैं। दिल्ली के बाद उसका पंजाब का सिंहासन डोल रहा है।

कॉन्ग्रेस पंजाब में उसकी सरकार गिराने की फिराक में हैं। दूसरी तरफ शराब घोटाला मामले में मुखिया केजरीवाल और मनीष सिसोदिया के खिलाफ CBI ने जल्दी मुकदमा चलाने को कदम बढ़ा दिए हैं। AAP को एकसाथ कई फ्रंट पर चुनौती मिलने वाली है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, दिल्ली में हार के बाद पंजाब की कॉन्ग्रेस ईकाई सरकार गिराने में जुट गई है। पंजाब विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष प्रताप सिंह बाजवा ने रविवार (9 फरवरी, 2025) को दावा किया है कि सत्तारूढ़ AAP के 30 विधायक कॉन्ग्रेस के सम्पर्क में हैं।

उन्होंने दावा किया है कि यह सम्पर्क पिछले एक वर्ष से बना हुआ है। उन्होंने कहा है कि यह सभी विधायक AAP छोड़ कर कॉन्ग्रेस को समर्थन देने को भी तैयार हैं। उन्होंने पार्टी में भीतरी लड़ाई का भी हवाला दिया है।

प्रताप सिंह बाजवा ने दावा किया है कि केजरीवाल, पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान को पद से हटा कर खुद सीएम बनने का कदम उठा सकते हैं। बाजवा ने कहा है कि आगामी दिनों में पंजाब में एक सीट पर उपचुनाव होना है और इस सीट से केजरीवाल अपनी किस्मत आजमा सकते हैं।

उन्होंने कहा, “अपने करीबियों की बड़ी फ़ौज को समायोजित करने के साथ ही केन्द्रीय एजेंसियों की जाँच एवं कार्रवाई से बचें और फंड्स जुटाने को AAP मुखिया पंजाब का मुख्यमंत्री बनने की कोशिश करेंगे।”

बाजवा ने यह भी दावा किया कि भगवंत मान दिल्ली में भाजपा के हाईकमान से अपने संबंध सुधारने में जुटे हैं। बाजवा जैसे ही कुछ सुर पंजाब कॉन्ग्रेस के मुखिया और सांसद अमरिंदर सिंह ‘राजा वरिंग’ के हैं। उन्होंने कहा है कि आने वाले दिनों में राज्य के भीतर कई नेता AAP छोड़ सकते हैं।

उन्होंने कहा है कि अब पंजाब में कॉन्ग्रेस असफल ‘पंजाब मॉडल’ और असफल ‘दिल्ली मॉडल’ को लेकर सरकार पर हमलावर होगी। उन्होंने कहा है कि दिल्ली में AAP की हार, पंजाब में कॉन्ग्रेस के लिए ‘आपदा में अवसर’ जैसी है।

वरिंग ने कहा है कि AAP को पंजाब से भी अपना बोरिया बिस्तर बाँध लेना चाहिए। वहीं AAP ने पार्टी में टूट के सभी दावों को नकारा है। पंजाब AAP के प्रवक्ता नील गर्ग ने कहा, “केजरीवाल हमारे राष्ट्रीय संयोजक हैं और भगवंत मान पंजाब के मुख्यमंत्री हैं। कॉन्ग्रेस का ग्राफ रसातल को जा रहा है। दिल्ली में लगातार तीसरी बार उसका प्रदर्शन जीरो रहा है।”

नील गर्ग ने दावा किया कि 2027 चुनाव में कॉन्ग्रेस का प्रदर्शन 2022 के मुकाबले और भी बुरा होगा। गौरतलब है कि 117 सीटों वाली पंजाब विधानसभा में वर्तमान में AAP को प्रचंड बहुमत हासिल है। उसके पास 93 विधायक हैं जबकि कॉन्ग्रेस के पास मात्र 16 विधायक हैं।

राज्य में शिरोमणि अकाली दल के पास 3 जबकि भाजपा के पास 2 विधायक हैं। कॉन्ग्रेस लगातार कहती आई है कि उसका अधिकांश वोट AAP ने ही लिया है। वह अब दिल्ली में AAP की हर और पंजाब में अंदरूनी लड़ाई के शेयर वापसी करने के मूड में है।

AAP के लिए सिर्फ पंजाब ही नहीं बल्कि दिल्ली में भी मुश्किलें खड़ी हो गई हैं। उसके दोनों बड़े नेताओं केजरीवाल और सिसोदिया पर चुनाव हारने के बाद जेल जाने की तलवार लटक रही है। दिल्ली शराब घोटाला मामले में जमानत पर चल रहे दोनों के खिलाफ जाँच एजेंसी CBI ने मुकदमा जल्दी चालू करने की अर्जी अदालत को दी है।

CBI की एक विशेष अदालत ने सिसोदिया और केजरीवाल के वकीलों से कहा है कि वह मुकदमे के कागजों की जाँच जल्दी पूरी कर लें ताकि जल्द से जल्द मुकदमा चालू किया जा सके। अदालत ने यह बात 3 फरवरी, 2025 को कही। इससे पहले CBI ने कहा है कि वह जल्द से जल्द इस मामले में 23 आरोपितों के खिलाफ मुकदमा चालू करना चाहती है।

गौरतलब है कि केजरीवाल समेत बाकी लोगों पर आरोप है कि उन्होंने दिल्ली की आबकारी नीति ने बदलाव किया जिससे सरकारी खजाने को नुकसान हुआ। इस नीति बदलने से निजी विक्रेताओं फायदा पहुंचाया गया और उनसे वापसी में मिले ₹100 करोड़ को गोवा चुनाव में खपाया गया।

ससुराल में जिसे नंगा कर देखा ‘खतना’, बदले की आग में वो अब तक 4000+ घुसपैठियों को भिजवा चुका है बांग्लादेश: ‘खबरीलाल’ की असली कहानी

बांग्लादेशी घुसपैठियों के खिलाफ पूरे देश में अभियान छिड़ा हुआ है। आए दिन खबरें आती हैं कि कभी बांग्लादेशी भारत में घुसते वक्त बॉर्डर से पकड़े गए तो कभी फर्जी पहचान के साथ देश के किसी कोने में सालों से रहते हुए। ताजा खबर है कि मुंबई में पुलिस ने 16 बांग्लादेशी नागरिकों को गिरफ्तार किया है। ये लोग भारत में अवैध रूप से रह रहे थे।

डोंगरी पुलिस को इनकी जानकारी हुई तो उनकी टीम ने मानखुर्द, वासी नाका,कल्याण,मुंब्रा, कलंबोली,पनवेल, कोपरखैरने इलाके से 16 बांग्लादेशी नागरिक को गिरफ्तार किया

ये पहली बार नहीं है कि मुंबई पुलिस ने बांग्लादेशी घुसपैठियों के खिलाफ एक्शन लिया हो। इससे पहले भी बड़ी-बड़ी कार्रवाई हुई हैं। दो दिन पहले ही मुंबई से 201 बांग्लादेशी गिरफ्तार हुए थे और उससे पहले भी इनकी धड़पकड़ तेज ही थी।

बता दें कि मुंबई में बांग्लादेशियों को पकड़ने में जितनी भूमिका पुलिस की है उतनी ही उन लोगों की भी है जो इनकी जानकारी देते हैं। आज हम आपको एक ऐसे ही पुलिस के खबरी की दिलचस्प कहानी बताने जा रहे हैं जिन्होंने बीवी से धोखा मिलने के बाद ही अपने जीवन का उद्देश्य ही बांग्लादेशियों को पकड़वाना बना लिया। उनके प्रयास से पुलिस ने साल 2023 तक में 3500-4000 बांग्लादेशी पकड़कर वापस मुल्क भेजे थे।

46 वर्षीय इस पुलिस खबरी की पहचान रिपोर्टों में नहीं बताई गई है, पर ये जानकारी दी गई है कि इनकी बांग्लादेशी बीवी ने इन्हें धोखा दिया था। इसी के बाद इन्होंने बांग्लादेशियों को चुन-चुनकर वापस मुल्क भिजवाने का प्रण लिया। मिड-डे से बाचतीच के दौरान उन्होंने साल 2023 में बताया था कि वो ठाणे में रहते हैं। यही पले-बढ़े हैं। अबी अपनी पोल्ट्री की दुकान चलाते हैं। उन्होंने पुलिस मुखबिर के तौर पर करियर की शुरूआत 20 साल पहले की थी जब उनकी पहली बीवी सलेहा बेगम उन्हें धोखा देकर चली गई थी।

पुलिस के इस मुखबिर के मुताबिक जिस सलेहा बेगम को उन्होंने बीवी बनाया, वो पहले बार में डांसर का काम करती थी। उन्हें उससे प्यार हुआ तो उनकी मुलाकातें बढ़ीं। सलेहा ने बताया कि वो कोलकाता से है, लेकिन हकीकत में वो थी बांग्लादेश से। निकाह हुआ तो वो शादी के बाद उन्हें और दो बेटियों को बांग्लादेश लेकर गई। शुरू में उन्हें लगा कि वो लोग कोलकाता में है मगर बाद में एहसास हुआ कि ये तो बांग्लादेश है।

मुखबिर के अनुसार उनकी बीवी उनको बांग्लादेश के सतखीरा जिले के कोलारोआ थानांतर्गत आने वाले एक गाँव ले गई। सलेहा के परिजनों को नहीं पता था कि वो निकाह कर चुकी है। उसके परिजनों को लगा कि शौहर हिंदू है। मुखबिर ने बार-बार बताना चाहा कि वो मुस्लिम हैं, उन्हीं के मजहब के हैं, लेकिन किसी ने उनकी बात नहीं मानी।

जाँच के लिए कपड़े उतारे, उनका खतना देखा, फिर भी यकीन नहीं किया और बाद पुलिस के भी हवाले कर दिया। पुलिस ने हिरासत में रखकर उन्हें खूब पीटा। इस बीच न सलेहा और न उनके परिवार का कोई शख्स उनसे मिलने आया। जब पुलिस ने रिहाई के लिए पैसे माँगे तो वहीं से उन्होंने अपने अब्बा को फोन किया। सारी बात सुनने के बाद अब्बा ने बंगाल में ले रखी एक जमीन को बेच दिया और कोलारोआ पुलिस को 5 लाख रुपए का भुगतान किया।

मुखबिर ने पुलिस के पास से छूटते ही सलेहा से वापस चलने को कहा, लेकिन उसने आने से मना कर दिया। वो उस समय अपनी बड़ी बेटी को लेकर अपने मुल्क लौट आए और यहाँ आकर कसम खाई कि एक भी बांग्लादेशी को भारत में नहीं रहने देंगे। मुखबिर ने बाद में दूसरी शादी कर ली। आज उनके तीन बच्चे हैं। वही बड़ी बेटी की शादी हो गई है।

20 साल से वो बांग्लादेशियों को पकड़वाने का काम कर रहे हैं। आज उन्हें इतना अनुभव हो गया है कि वो किसी भी बांग्लादेशी नागरिक के बातचीत करने के ढंग से जान जाते हैं कि कौन बांग्लादेशी है, कौन नहीं। वो ऐसे लोगों को आसान से पहचान जाते हैं और फिर उनकी जानकारी पुलिस को दी जाती है। उन्होंने अब तक इस दिशा में कई पुलिस एजेंसियों के साथ काम किया है। वो कहते हैं कि सरकार को बांग्लादेशी घुसपैठ रोकने के लिए सख्त कानून बनाने की जरूरत है।

चर्च, जिहादी, नक्सली, NGO… भारत विरोधी हर एजेंट को पाल-पोस रहा था अमेरिका का USAID, हिंदुओं के धर्मांतरण पर भी था जोर

डोनाल्ड ट्रंप के अमेरिकी राष्ट्रपति बनने के बाद USAID पर ताला लगा दिया गया है। ‘मानव भलाई’ के नाम पर यह विवादित एजेंसी साल 1960 से ही अमेरिकियों का पैसा दुनिया भर में उथल-पुथल पैदा करने पर खर्च करती रही है। खासकर भारत और हिंदू इसके टारगेट पर रहे हैं।

भारत और हिंदू विरोधी गैर सरकारी संगठनों (NGO) से लेकर ईसाई-इस्लामी संगठनों तक को यह फंड देती रही है। ऐसे ही संगठनों में एटलांटिक काउंसिल और वर्ल्ड विजन शामिल है। ये संगठन भारत सरकार विरोधी गतिविधियों और हिंदुओं के धर्मांतरण को बढ़ावा देते हैं।

वर्ल्ड विजन को मिली मदद

एटलांटिक काउंसिल को जॉर्ज सोरोस तक से फंड मिला है। यह संगठन भारत के पत्रकारों और फैक्टचेकर्स का इस्तेमाल करके पीएम मोदी के खिलाफ माहौल बनाने का काम कर रहा था। वहीं ‘वर्ल्ड विजन’ का दावा है कि वह बिना धार्मिक भेदभाव के इंसानों की भलाई के लिए काम करता है। लेकिन गहराई से पड़ताल करने पर पता चलता है कि उसकी निष्ठा केवल चर्चों तक सीमित है।

वर्ल्ड विजन की साइट पर जुड़ी जानकारी

ये संगठन भारत के अलग-अलग इलाकों में काम कर रहा है। कुछ इलाकों में इसका खासा प्रभाव है। उड़ीसा के गजपति जिले के गुम्मा ब्लॉक में तो 85 से 90% लोग इसके झाँसे में आकर ईसाई बन चुके हैं। इनका एक साझेदार ‘वर्ल्ड एवेंजेलिकल एलायंस (WEA)’ भी है।

इस संगठन का उद्देश्य ही हर राष्ट्र में ईसाई धर्म स्थापित करना है और बच्चों के लिए चर्च बनाना है। ये बात धर्म की आजादी की करते हैं, लेकिन उससे इनका मतलब ईसाई धर्म में लोगों को परिवर्तित करना होता है। जानकर हैरानी होगी कि WEA धर्मांतरण की बातों को खुलेआम साल 2008 में स्वीकार भी कर चुके हैं।

एक इस्लामी संगठन से भी इसका समझौता भी हुआ था। इसका आधार यह था कि जब दोनों ही समुदायों का उद्देश्य धर्मांतरण है तो फिर बाद में विवाद नहीं होना चाहिए।

‘वर्ल्ड विजन’ आतंकी संगठन हमास को पैसे देने के कारण भी बदनाम है। साल 2021 में इजरायलियों ने इसकी एक ब्रांच को बंद करने के लिए आवाज उठाई थी। उस समय वर्ल्ड विजन का गाजा में मैनेजर मोहम्मद अल हबाबी था जिसपर हमास को 50 मिलियन डॉलर की मदद देने का आरोप था। जब इस पर सवाल उठे तो वर्ल्ड विजन के अन्य अधिकारियों ने इन आरोपों को खारिज कर दिया।

इसी तरह वर्ल्ड विजन का कनेक्शन उस वर्ल्ड काउंसिल ऑफ चर्चेस से भी है जिसके संपर्क में ब्रेड फॉर द वर्ल्ड जैसी संस्था है जो भारत में हर्ष मंदर जैसे हिंदू विरोधियों, अलगाववादियों और अर्बन नक्सलियों को सहायता करते हैं। इनको भी यूएसएड मदद करती है। खुद यूएसएड की एडमिनिस्ट्रेटर ने इसकी तारीफ कुछ ही महीने की थी।

गौरतलब है कि साल 2024 में जब यूपी सरकार ने धर्मांतरण विरोधी कानून पारित किया तो वर्ल्ड काउंसिल ऑफ चर्चेस, वर्ल्ड इवेंजेलिकल अलायंस और वर्ल्ड विजन ने धर्मांतरण विरोधी कानूनों के खिलाफ रैली निकाली थी। वहीं 2014 से पहले WEA हिंदुओं को निशाना बनाने का काम और तथ्यों को गलत दिखाने का काम करता था। इनकी यही भारत विरोधी हरकतों के साथ जनवरी 2024 में मोदी सरकार ने वर्ल्ड विजन का एफसीआरए लाइसेंस निलंबित कर दिया जिससे वामपंथी काफी नाराज हुए थे।

नोट: मूल रूप से यह लेख अंग्रेजी में नुपूर शर्मा द्वारा लिखा गया है। विस्तृत रूप से पढ़ने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें।

सुरक्षा बलों ने 31 नक्सलियों को मार गिराया, भारी मात्रा में हथियार-विस्फोटक भी मिले: 2 जवान बलिदान, बोले गृह मंत्री अमित शाह- 31 मार्च 2026 से पहले नक्सल मुक्त होगा भारत

छत्तीसगढ़ के बीजापुर में सुरक्षाबलों ने मुठभेड़ में 31 नक्सलियों को मार गिराया है। हालाँकि, इस कार्रवाई में 2 जवान बलिदान भी हो गए, जबकि दो जवान घायल हो गए हैं। घायलों को एयरलिफ्ट करके इलाज कराया जा रहा है। इस कार्रवाई में भारी मात्रा में हथियार एवं विस्फोटक बरामद किए गए हैं। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने कहा कि 31 मार्च 2026 तक देश को नक्सल मुक्त कर दिया जाएगा।

अमित शाह ने अपने सोशल मीडिया हैंडल X पर लिखा, “नक्सल मुक्त भारत बनाने की दिशा में सुरक्षा बलों ने छत्तीसगढ़ के बीजापुर में बड़ी सफलता हासिल की है। इस ऑपरेशन में 31 नक्सलियों को ढेर करने के साथ ही भारी मात्रा में हथियार और विस्फोटक सामग्री भी बरामद की गयी है। मानवता विरोधी नक्सलवाद को समाप्त करने में आज हमने अपने दो बहादुर जवानों को खोया है।”

बलिदान हुए जवानों को श्रद्धांजलि एवं परिजनों को सांत्वना देते हुए केंद्रीय गृहमंत्री ने आगे कहा, “यह देश इन वीरों का सदा ऋणी रहेगा। शहीद जवानों के परिजनों के प्रति भावपूर्ण संवेदनाएँ व्यक्त करता हूँ। साथ ही पुनः यह संकल्प दोहराता हूँ कि 31 मार्च 2026 से पहले हम देश से नक्सलवाद को जड़ से समाप्त कर देंगे, ताकि देश के किसी भी नागरिक को इसके कारण अपनी जान न गँवानी पड़े।”

इस घटना को लेकर बस्तर रेंज के आईजी पी सुंदरराज ने कहा के बीजापुर के राष्ट्रीय उद्यान क्षेत्र में प्रतिबंधित नक्सली संगठनों से जुड़े नेशनल पार्क कमिटी और तेलंगाना स्टेट कमिटी की बैठक की जानकारी मिली। इसके बाद वहाँ बीजापुर डीआरजी, एसटीएफ और बस्तर फाइटर के जवानों को भेजा गया। जवानों ने माओवादियों को चारों तरफ से घेर लिया गया और मुठभेड़ में 31 माओवादी मारे गए।

मुठभेड़ में घायल 2 जवानों को एयरफोर्स के MI-17 हेलीकॉप्टर से रेस्क्यू किया गया और रायपुर लाकर उन्हें निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। रायपुर के एसएसपी लाल उमेद सिंह ने बताया, “बीजापुर मुठभेड़ में घायल दोनों जवानों को एयरलिफ्ट कर रायपुर अस्पताल ले जाया गया है। मैंने दोनों घायल जवानों और डॉक्टर से मुलाकात की है। जवान अब खतरे से बाहर हैं। उनमें से एक के पैर में चोट आई है और दूसरे के सिर और सीने में छर्रे लगे हैं।”

राम किशन अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक संतोष सिंह ने घायल जवानों को लेकर कहा, “दो जवान हमारे पास आए हैं। दोनों को चोट लगी है। एक के पैर में चोट लगी है, जिसके पैर में लगी गोली अभी दिख रही है अंदर। उसकी जाँच हम लोग कर रहे हैं। इस जवान का नाम गुलाब है। दूसरे जवान के चेहरे, छाती सहित शरीर पर कई छर्रे लगे हैं। इनका नाम जग्गू है। दोनों की स्थिति स्थिर है।”

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि राज्य में सरकार बने अभी 13 महीने हुए हैं और इस दौरान सुरक्षाबलों ने नक्सलियों के साथ मजबूती से लड़ाई लड़ी है। उन्होंने सुरक्षा बलों के साहस को नमन किया। इसके साथ ही बलिदान हुए जवानों को भी उन्होंने श्रद्धांजलि अर्पित की।

अब चिकन बिरयानी नहीं, रविवार को परोसी जाएगी बीफ बिरयानी: ‘पॉपुलर डिमांड’ बता AMU ने पहले जारी किया नोटिस फिर बताया ‘टाइपिंग मिस्टेक’, विवाद के बाद 2 पर FIR

आतंकियों के समर्थन करने से लेकर देश विरोधी गतिविधियों के लिए बदनाम हो चुके अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (AMU) ने एक बार फिर हिंदुओं को चिढ़ाने का काम किया है। यहाँ अब छात्रों को बीफ परोसने की जानकारी सामने आई है। AMU की नोटिस में कहा गया है कि रविवार के लंच मेन्यू में परिवर्तन किया गया है। छात्रों की माँग पर चिकन बिरयानी की जगह बीफ बिरयानी परोसी जाएगी।

सुलेमान हॉल नाम के होस्टल द्वारा अंग्रेजी में जारी नोटिस पर सीनियर फूड डाइनिंग हॉल के मोहम्मद फैजुल्लाह और मुजास्सिम अहमद भाटी के नाम लिखे हुए हैं। बता दें कि अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में छात्र और छात्राओं के लिए अलग-अलग 20 छात्रावास हैं। यहाँ 3 टाइम खाना दिया जाता है। इन छात्रावासों को अपने-अपने मेन्यू होते हैं। सुलेमान हॉस्टल के लिए यह नोटिस जारी किया गया है।

इस नोटिस के जारी होने के बाद बवाल हो गया है। हिंदूवादी नेताओं ने AMU के वाइस चांसलर के खिलाफ कठोर कार्रवाई करने की माँग की है। इनका कहना है कि हिंदुओं की आस्था के साथ खिलवाड़ करने की इजाजत नहीं दी जाएगी। वहीं, हिंदूवादी छात्रों का कहना है कि इस मामले को तत्काल रूप से लेकर जिम्मेदार लोगों पर एक्शन हो। ऐसा नहीं होने पर उन्होंने आंदोलन की चेतावनी दी है।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, अलीगढ़ से भाजपा के लोकसभा सांसद सतीश गौतम ने भी यूनिवर्सिटी प्रशासन को चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि एएमयू में अभी भी कुछ लोगों की मानसिकता नहीं बदल पा रही है। मौजूदा वाइस चांसलर को इन पर अंकुश लगाना चाहिए। उन्होंने बीफ पार्टी बुलाने वालों पर सख्त कार्रवाई की माँग की है।

वहीं, AMU के प्रॉक्टर वसीम अहमद का कहना है कि मेन्यू में बदलाव से संबंधित सूचना में एक प्रकार की टाइपिंग गलती थी। उन्होंने कहा कि मेन्यू में कोई बदलाव नहीं किया गया है। खाना पहले की तरह ही परोसा जाएगा। यूनिवर्सिटी प्रशासन का कहना है कि लापरवाही बरतने के कारण सीनियर फूड और सीनियर हाल को हटा दिया गया है। दोनों यूनिवर्सिटी के छात्र हैं।

खबर के वायरल होने के बाद अलीगढ़ पुलिस ने कहा कि इस मामले को संज्ञान में लिया गया है और इसमें कठोर कानूनी कार्रवाई की जा रही है। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने नोटिस जारी करने वाले दोनों लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। दोदपुर चौकी इंचार्ज जितेंद्र धामा की ओर से भावनाओं को आहत करने के आरोप में मुकदमा दर्ज कराया गया है।

चुनावों में जीत-हार लगी रहती है… पर अरविंद केजरीवाल के पतन की प्रतीक्षा में था आम आदमी

अभी प्रयागराज में महाकुंभ चल रहा है। प्रयागराज के अलावा हरिद्वार, उज्जैन और नासिक में भी कुंभ लगते हैं। कुंभ की कथा समुद्र मंथन से जुड़ती है। समुद्र मंथन में जब अमृत कलश निकला तो उसकी कुछ बूँदें पृथ्वी पर जिन चार जगहों पर गिरी वे ‘कुंभ स्थान’ हो गए। लेकिन समुद्र मंथन में अमृत प्राप्त होने से पहले विष निकला था, जिसे पीकर महादेव, नीलकंठ हुए।

यह पौराणिक कथा हमें बताती है कि मंथन से बहुत कुछ निकलता है। विष से लेकर अमृत तक। स्वतंत्र भारत की राजनीति में मंथन के ऐसे दो अध्याय दिखते हैं। पहला, जब जयप्रकाश नारायण यानी जेपी के नेतृत्व में ‘संपूर्ण क्रांति’ हुई। दूसरा, जब अन्ना हजारे के नेतृत्व दिल्ली की रामलीला मैदान से भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज बुलंद हुई।

संपूर्ण क्रांति नाम के राजनीतिक मंथन से जो विष निकला, वह बिहार के हिस्से आया। इसे वह आज भी भोग रहा है। इसी तरह अन्ना की प्रयोगशाला से निकला विष दिल्ली के हिस्से आया। दुर्भाग्य से इन दोनों राजनीतिक मंथन का अमृत कहाँ गया, इसका किसी को पता नहीं है।

भारत की राजनीति में दो दल ऐसे हैं, जिनका वैचारिक आधार है। जो कार्यकर्ताओं/कैडरों के दम पर चलते हैं। पहला, जनसंघ जो आज भारतीय जनता पार्टी (BJP) कहलाती है। दूसरे, वामपंथी दल जो अब केरल जैसे राज्य तक सिमटकर रह गए हैं। ऐसे में इन दो राजनीतिक मंथन से जो दल/नेता निकले उनकी ताकत ‘आम लोग’ थे। दुर्भाग्य यह भी है कि जनता को सबसे अधिक मायूसी भी इन्हीं दलों और इनके नेताओं ने दी। इन्होंने साफ-सुथरी राजनीति का भरोसा देकर भ्रष्टाचार के शीशमहल बनाए। पैसे के लिए पशुओं के चारा तक को नहीं छोड़ा। जनता की आवाज के नाम पर व्यक्तिवाद/परिवारवाद थोप दिया। जीवन सुलभ-सरल करने का वादा कर जनता को सड़क, बिजली, साफ पानी, स्कूल, अस्पताल जैसी मूलभूत चीजों के लिए तरसा दिया। विकास की जन आकांक्षाओं को कुचलने के लिए जातिवाद/क्षेत्रवाद/मजहबवाद जैसी आगों को धधकाया।

चूँकि राजनीति में कुछ भी स्थायी नहीं है। कोई भी अजेय नहीं है। अर्श से फर्श पर गिरने की गति की गणना नहीं की जा सकती। इन राजनीतिक मंथनों से निकले दल/नेताओं ने भी जिस तरह सफलताओं की गाथा लिखी, उसी तरह पराजय का गर्त भी देखा। लेकिन 8 फरवरी 2025 को आए दिल्ली विधानसभा चुनावों के नतीजों ने यह भी बताया है कि आम आदमी पार्टी (AAP) और उसके नेता अरविंद केजरीवाल के पतन की जिस बेसब्री से प्रतीक्षा थी, वैसा इससे पहले कभी देखने को नहीं मिला।

इसका कारण यह है कि केजरीवाल ने आम आदमी का वेष धरकर झूठ और मक्कारी की राजनीति को आगे बढ़ाया। नीचता की नई परिभाषाएँ गढ़ी। आम आदमी को धुर समझ कु-कर्म किए, जिनमें कुछ सामने आ चुके हैं, बाकी आगे आते रहेंगे।

किसी राजनीतिक दल या नेता के खत्म होने की भविष्यवाणी करने से बचना चाहिए, क्योंकि ये एक चुनाव में राख का ढेर बन जाते हैं तो दूसरे ही चुनाव में उसी से ढेर उठकर खड़े भी हो जाते हैं। दिल्ली में भले AAP हार गई हो पर पंजाब में अभी भी उसकी सरकार है। दिल्ली में भी उसे 43.57% लोगों ने अब भी वोट दिया है। अब भी उसके 22 विधायक चुनकर सदन में पहुँचे हैं। इसलिए AAP का फातिहा पढ़ना तो जल्दबाजी ही मानी जाएगी।

फिर भी AAP और अरविंद केजरीवाल अब अलग होने का दंभ नहीं भर सकते। वे वैसे ही हैं जैसे राजनीतिक कोठरी में शामिल दूसरे दल और नेता हैं। वे इस मायने में जरूर अलग हैं कि उन्होंने जिस तरह के राजनीतिक प्रतिमान गढ़े हैं, उससे भविष्य में जनांदोलनों और उससे जुड़े लोगों की विश्वसनीयता पहले दिन से ही संदेह के घेरे में होगी। इनके कारण शायद अगले कुछ वर्षों/दशकों तक हमें ऐसा कोई जनांदोलन देखने को भी न मिले।

यही कारण है कि AAP और अरविंद केजरीवाल के पतन पर जमीन से लेकर सोशल मीडिया तक में उत्साह दिख रहा है। यह केवल राजनीतिक उत्साह नहीं है। यह केवल बीजेपी समर्थकों का जोश नहीं। यह हर उस आदमी का ‘प्रायश्चित’ है, जिसने AAP और अरविंद केजरीवाल के उदय को साफ-सुथरी राजनीति का अभ्युदय समझने का ‘पाप’ किया था। आम आदमी का यह प्रायश्चित अरविंद केजरीवाल को अब ठीक उसी तरह न चैन से सोने देगा, न जागने देगा, जैसे कथित ‘सुशासन’ के करीब दो दशक बाद भी बिहार में ‘जंगलराज’ लालू एंड गैंग को न चैन से सोने देता है, न जागने, भले उन्हें चुनाव में सफलता मिलती रहे।

लाइक, कमेंट, शेयर… सब कुछ हजारों-लाखों में है इस यूट्यूबर के पास, AltNews वाले जुबैर से ‘यारी’ भी, पर दिल्ली चुनावों में जमानत भी न बचा सका: NOTA से भी कम वोट मिले

दिल्ली चुनाव के नतीजे आने के बाद कई नेताओं की चर्चा तेज है। कुछ की जीत के चर्चे हैं तो कुछ की हार के। इस बीच एक यूट्यूबर पर भी खूब बात हो रही है जिसने मालवीय नगर विधानसभा से मैदान में उतरकर अपनी किस्मत आजमाई थी। यूट्यूबर पर अच्छे-खासे सब्सक्राइबर होने के कारण उसे लगा था कि शायद चुनाव में भी उसे वोट मिल जाएँगे, लेकिन जब नतीजे आए तो बुरी तरह फजीहत हुई और उसे नोटा से भी कम वोट मिले।

इस यूट्यूबर का नाम मेघनाद है जिन्होंने मालवीय नगर में निर्दलीय उतरकर चुनाव लड़ा था। यहाँ उन्हें टक्कर देने के लिए थे- भारतीय जनता पार्टी के सतीश उपाध्याय, आम आदमी पार्टी के सोमनाथ भारती, कॉन्ग्रेस के जीतेंद्र कुमार कोचर और बहुजन समाज पार्टी के चरण जीत कौर।

इन सब दिग्गजों के आगे यूट्यूबर सिर्फ और सिर्फ 192 वोट ला पाने में सफल हुए और इन्हें हार मिली 39 हजार 372 वोटों से। अजीब बात ये है कि यूट्यूबर ने जिस विधानसभा में केवल 192 वोट पाए उसी विधानसभा में NOTA पर 532 लोगों ने बटन दबाया था, यानी यूट्यूबर को नोटा पसंद करने वालों से भी कम लोगों ने पसंद किया।

यूट्यूबर ने इस करारी शिकस्त को देखते हुए अपने पोस्ट में ऐसे दिखाया जैसे उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ा। उन्होंने लिखा कि उन्हें इतने वोट मिले, पर उन्हें तो सिर्फ 7 वोटों की उम्मीद थी। ऐसा लिखकर शायद वो खुद को संतुष्ट कर रहे थे क्योंकि जब हम उनके यूट्यूब पर गए तो देखा कि मेघनाद ने जीतने की कोशिश तो पूरी-पूरी की थी।

चुनाव के मद्देनजर उन्होंने अपने यूट्यूब पर एक कैंपेन सॉन्ग को भी लॉन्च किया था। उस कैंपेन सॉन्ग वाली वीडियो पर व्यूज 13 हजार, लाइक 1700 और कॉमेंट करीबन 187 हैं। इसमें उन्होंने बड़े क्रिएटिव ढंग से लोगों से अपील की थी कि वो नेता नहीं दिल्ली के नॉर्मी नेता को चुनें क्योंकि वो मालवीय नगर के लोगों की देखभाल करेंगे। मगर नतीजों वाले दिन यूट्यूबर को 192 वोट के साथ निराशा ही हाथ लगी।

वैसे बता दें कि मेघनाद को लेकर दावा है कि यह चुनाव उन्होंने अपने खर्चे पर लड़ा था। हलफनामा देते समय उन्होंने बताया कि उनके पास 55 लाख रुपए की अचल संपत्ति है और 1 लाख की लायबिलिटीज हैं। वहीं एक्स की बात करें तो उसपर मेघनाथ के 1.9 लाख फॉलोवर हैं। इसी तरह इंस्टा पर भी 65 हजार फॉलोवर हैं।

इंस्टाग्राम पर फॉलोवर्स

यूट्यूब की बात करें तो मेघनाद के यूट्यूब पर 80 हजार 800 सब्सक्राइबर हैं। मेघनाद की ज्यादातर वीडियोज पर 10 हजार से ज्यादा व्यूज आते हैं और चैनल को भी अब तक कुल 7,723,757 व्यूज आ चुके हैं। सबसे ज्यादा व्यूज उनके चैनल पर मोदी को डिक्टेटर बताने वाली रिएक्शन वीडियो पर है।

एक्स पर फॉलोवर्स

चैनल देखने पर पता चलता है कि ज्यादातर कंटेंट में उन्होंने उन लोगों की आलोचना की है जो मोदी समर्थन में दिखाई देते हैं। इसके अलावा मेघनाद की दोस्ती किनसे हैं ये भी 4 महीने पुरानी एक वीडियो देखने पर पता चलता है जिसमें वह मिलने एक कॉन्ग्रेस नेता से जाता है और मुलाकात ऑल्ट न्यूज वाले मोहम्मद जुबैर से हो जाती है।

मेघनाद और जुबैर की बातचीत को वीडियो में 14 मिनट के स्लॉट के बाद सुन सकते हैं। इस वीडियो में मेघनाद बताते हैं कि जुबैर को हर दक्षिणपंथी नफरत करता है लेकिन वो ये नहीं बताते है कि इसके पीछे वजह क्या है। वो जुबैर के फैलाए झूठ और हिंदू घृणा की चर्चा नहीं करते बल्कि उनके बालों पर नजर आ रही लाल स्ट्रीक की चर्चा करते हैं और ऐसा दिखाया जाता है कि क्योंकि जुबैर सवाल उठाते हैं इसलिए दक्षिणपंथियों के निशाने पर रहते हैं।

प्रसन्न राम 5 वक्त के नमाजी, पर कागजों में बने हुए हैं ST: कहानी छत्तीसगढ़ के ‘सबसे खतरनाक गाँव’ की, धर्मांतरण के बाद बन गया गोतस्करी का अड्डा-पुलिस भी जाने से डरने लगी

छत्तीसगढ़ के आखिरी ग्राम पंचायत साईटांगरटोली में देखते-देखते जनजातीय से मुस्लिम बहुल हो गया। यह ग्राम पंचायत चुनावों में जनजातीय समाज के लोगों के लिए आरक्षित है, लेकिन हिंदू नाम रखने वाले मुस्लिम या जनजातीय समाज की महिला से निकाह कर रखने वाले मुस्लिम यहाँ से चुनाव लड़ते और जीतते हैं। गौतस्करी के लिए कभी कुख्यात इस गाँव में पुलिस के आने पर अघोषित प्रतिबंध था।

गाँव के रहने वाले बृजेश के हवाले से दैनिक भास्कर ने अपनी ग्राउंड रिपोर्ट में बताया कि साल 1970 में इस ग्राम पंचायत में 32 घर जनजातीय समुदाय के और 30 घर मुस्लिमों के थे। धीरे-धीरे सभी जनजातीय लोग धर्मांतरित होकर मुस्लिम बन गए। गाँव में 1760 मतदाता हैं, जिनमें 90 ईसाई हैं और सभी बाकी मुस्लिम हैं। वर्तमान में यहाँ का सरपंच दुबराज है। नाम हिंदू है, लेकिन वह मुस्लिम है।

दुबराज के पिता का नाम प्रसन्न राम है। प्रसन्न राम भी जनजातीय समाज छोड़कर मुस्लिम बन चुका है और उसका नाम बारिस अली हो चुका है। हालाँकि, वह खुद को प्रसन्न राम के तौर पर ही पेश करता है। प्रसन्न राम कहता है कि वह गौड़ जनजातीय जाति से ताल्लुक रखता है। वह अब पाँच वक्त का नमाजी है। उसने हज जाने की भी इच्छा जताई और कहा कि ‘जब ऊपर वाला बुलाएगा तो जाऊँगा।’

प्रसन्न राम का कहना है कि वह 50 साल पहले यहाँ आया था। साल 1999 में यह सीट जनजातीय समाज के लोगों के लिए आरक्षित हो गई है। इसके बावजूद, पिछले 25 साल में 15 साल उसके परिवार के लोग ही सरपंच रहे। बाकी 10 साल भी जनजातीय नाम वाले मुस्लिम परिवार के लोग ही सरपंच बने। इस बार फिर यहाँ चुनाव हो रहा है और बारिस अली इसकी तैयारी कर रहा है।

प्रसन्न राम उर्फ बारिस अली के 2 बेटे और 4 बेटियाँ हैं। बारिस अली का कहना है कि इस बार ग्राम पंचायत महिला के लिए आरक्षित कर दी गई है। इसलिए वह अपनी बीवी जयमुनी बाई और उपसरपंच के लिए बेटी शगुफ्ता को चुनाव लड़ाएगा। वहीं, जब्बार भी जनजातीय समाज की दूसरी बीवी सुमंती बाई को चुनाव लड़ा है, जबकि पहले सरपंच रह चुकी अहमद की पत्नी मार्सेला एक्का भी मैदान में है।

जब्बार ने चार निकाह किए हैं। इनमें से सुमंती बाई और परवीन कुजूर भी शामिल हैं। यही हाल अहमद का भी है। इस तरह गाँव में चुनाव लड़वाने के लिए कई मुस्लिमों ने जनजातीय समाज की महिलाओं से शादी की है। साल 2004 में अहमद ने मार्शेल एक्का से निकाह किया और उसे चुनाव लड़वाया। वह चुनाव जीत गई। इसके बाद 2009 में प्रसन्न राम की बीवी सुमंती बाई सरपंच बनी।

उसे चुनाव लड़ाया और वह जीत गई। 2009 में प्रसन्न राम की पत्नी सरपंच बनीं। 2013 में जब्बार ने जनजातीय समाज की अपनी बीवी प्रवीण कुजूर को चुनाव लड़ाकर सरपंच बनाया था। इस समय प्रसन्न राम का बेटा दुबराज सरपंच है। चुनावों में प्रसन्न राम का परिवार या इन मुस्लिम लोगों की जनजातीय पत्नियाँ ही चुनाव लड़ती हैं। पंचायत में 6 मुस्लिमों ने जनजातीय समाज की लड़कियों से शादी की है।

गौतस्करी का अड्डा है यह गाँव

यह गाँव छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले में आता है। जशपुर के एसपी शशिमोहन सिंह का कहना है कि यह गाँव गौतस्करी का अड्डा था। पूरे राज्य से गायों को यहाँ लाकर रखा जाता था और यहाँ से उन्हें बांग्लादेश भेजा जाता था। एसपी शशि मोहन सिंह के अनुसार, “जब मैं जशपुर आया तो पता चला कि इस गाँव में पुलिस का जाना मना है। पुलिस जाती थी तो उस पर हमला कर दिया जाता था।”

इसके बाद शशि मोहन सिंह ने गौतस्करों के खिलाफ ‘ऑपरेशन शंखनाद’ शुरू किया। उन्होंने मुखिया सहित कई लोगों को जेल भेजा। गोतस्करी में पकड़ी जाने वाली गाड़ियों को नष्ट करना शुरू किया। इसके बाद एक दिन भारी संख्या में पुलिस बल लेकर एसपी शशि मोहन सिंह गाँव में घुस गए। इसके बाद सबसे पहले महिलाओं ने हमला किया। पुलिस ने किसी तरह हालात कंट्रोल किए।

इसके बाद पुलिस ऑपरेशन शंखनाद के तहत लगातार यहाँ कार्रवाई करती रहती है। यहाँ के लोग गौतस्करी में अब शामिल हैं, लेकिन ये काम अब वे छिपकर करते हैं। अभी छह दिन पहले ही जशपुर पुलिस ने इस गाँव के 29 वर्षीय बल्लीबुल हक उर्फ उल्लाह और 35 साल के सलीम खान को ऑपरेशन शंखनाद के तहत गिरफ्तार किया है। इनके पास से 14 गौवंश को छुड़ाया गया है।

छत्तीसगढ़ और भोजपुरी फिल्मों में बतौर अभिनेता काम कर चुके एसपी शशि मोहन सिंह ने छह महीना पहले यानी अगस्त 2024 में 125 जवानों को लेकर इस गाँव में बड़ी कार्रवाई की थी। उन्होंने पूरे गाँव को घेर लिया था। खुद हाथ में एके-47 लेकर मौके पर मौजूद थे। इस दौरान 10 गोतस्करों को गिरफ्तार किया था। साथ ही 37 मवेशियों और तस्करी के लिए इस्तेमाल होने वाले 18 वाहनों को जब्त किया था।

इस गाँव को लेकर कहा जाता है कि एसपी शशि मोहन सिंह के आने से पहले यहाँ के अपराधी अपराध करते थे, लेकिन उन्हें पकड़ने के लिए इस गाँव में जाने की हिम्मत पुलिस नहीं जुटा पाती थी। कहा जाता है कि एसपी शशि मोहन सिंह के पहले इस गाँव में आजादी के बाद कार्रवाई के लिए सिर्फ चार बार पुलिस गई थी। चारों बार पुलिस पर हमला कर दिया गया था और पुलिस पिटकर लौट आई थी।

जनवरी 2024 में शुरू हुए ऑपरेशन शंखनाद में जशपुर पुलिस ने 61 मामले दर्ज किए हैं। इनमें कुल 109 आरोपितों की गिरफ्तारी हुई है और कुल 700 से अधिक गोवंश छुड़ाए गए हैं। जशपुर छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का गृह जिला है। वहीं, अग्रेसिव पुलिसिंग के लिए विख्यात शशि मोहन सिंह स्टेट कैडर से IPS बने हैं। वह बिहार के बक्सर जिले के सेमरी थाना अंगर्गत दुल्लहपुर के रहने वाले हैं।