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हनुमान चालीसा का पाठ केवल भक्ति नहीं, यौगिक ब्रीदिंग भी… हार्ट रेट रखता है स्थिर, एंग्जायटी भी करता है दूर: डॉक्टर ने चौपाइयों सहित बताए फायदे, पढ़ने का सही तरीका भी समझाया

ज्योतिष शास्त्र में हनुमान चालीसा पढ़ने के बहुत से फायदे आपने सुने होंगे, लेकिन मेडिकली भी इसके फायदे होते हैं ये शायद कम ही सुना होगा। हाल में यूट्यूब पर न्यूरोलॉजिस्ट डॉ स्वेता अड़ातिया ने इसपर वीडियो बनाई है। डॉ स्वेता ने अपनी वीडियो में हनुमान चालीसा के वैज्ञानिक दृष्टि से फायदे गिनाए और दावा किया कि हनुमान चालीसा पढ़ना दिल और दिमाग के लिए बहुत लाभकारी है।

उन्होंने बताया कि हनुमान चालीसा को ‘यौगिक ब्रीदिंग’ माना जाता है। इसका अर्थ है कि जब आप इसे पढ़ते हैं, तो आपकी सांसें एक विशेष पैटर्न में चलती हैं।

उदाहरण के लिए, कुछ चौपाइयों को बोलते समय सांस अंदर ली जाती है (जैसे- जय हनुमान ज्ञान गुण सागर), जबकि अन्य चौपाइयों को बोलते समय सांस बाहर छोड़ी जाती है (जैसे- जय कपिस तिहु लोक उजागर), कुछ में होल्ड रखी जाती है (जैसे- रामदूत अतुलित बलधामम), कुछ में सांस होल्ड रखने के बाद बाहर जाती है ( जैसे-अंजनि पुत्र पवन सुत नामा।)

डॉक्टर स्वेता के अनुसार यह प्रक्रिया हार्ट रेट वैरिएबिलिटी (HRV) को प्रभावित करती है, जो दिल की स्थिति को स्वस्थ रखने में मदद करती है। वहीं अगर हनुमान चालीसा का उच्चारण सही से किया जाए तो इसका सीधा असर ‘लिम्बिक सिस्टम’ पर पड़ता है जिसकी वजह से वाकई व्यक्ति की एंग्जायटी कम होती है और भीतर बसा डर दूर होता है।

डॉक्टर ने बताया कि हनुमान चालीसा पढ़ने से वेगस नर्व सिस्टम सक्रिय होता है, जो शरीर के कई कार्यों जैसे डाइजेशन (पाचन) और तनाव प्रबंधन में मदद करता है। जब यह नर्व सक्रिय होती है, तो शरीर की कई प्रक्रियाएँ अपने आप ठीक हो जाती हैं।

अपनी वीडियो में उन्होंने हनुमान चालीसा पढ़ने का सही तरीका भी बताया। उन्होंने कहा कि इसके फायदे इसे आराम से पाठ करके हासिल किए जा सकते हैं, तेज-तेज पढ़ना गलत है। उन्होंने कहा कि ये सारी बातें प्रयोग करके देखी जा चुकी हैं कि हनुमान चालीसा पढ़कर दिल और दिमाग दोनों पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है

इस वीडियो को यूट्यूब पर 18 जनवरी को अपलोड किया गया था। अब तक इसे 57 हजार व्यूज आ चुके हैं। वहीं इसे 2 हजार 400 लोगों ने लाइक किया है। इसमें उन्होंने हनुमान मंत्र से लेकर सांस लेने के पैटर्न तक को बताया है।

कासगंज के एक गाँव में हिंदुओं को क्यों लगाना पड़ा ‘मकान बिकाऊ है’ के पोस्टर, UP पुलिस ने कैसे सलटाया मामला: अखिलेश राज में बनी एक मस्जिद से जुड़ी है विवाद की जड़

उत्तर प्रदेश के कासगंज में एक गाँव में हिन्दू ग्रामीणों ने ‘मकान बिकाऊ है’ के पोस्टर लगा दिए हैं। उन्होंने इस बार होली त्यौहार भी ना मनाने की चेतावनी दी है। हिन्दू चाहते हैं कि उन्हें गाँव के भीतर नियत स्थान पर होलिका दहन करने दिया जाए। यह स्थान एक मस्जिद के पास है। मुस्लिम इसका विरोध कर रहे हैं। हिन्दुओं ने इस संबंध में प्रदर्शन भी किया है। हालाँकि, यूपी पुलिस ने अब यह विवाद सुलझा दिया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, कासगंज के थाना सोरों के सराय जुन्नारदार गाँव में हिन्दुओं ने यह पोस्टर लगाए। इस गाँव में बहुसंख्यक आबादी मुस्लिमों की है जबकि कुछ हिन्दुओं के परिवार भी रहते हैं। हिन्दुओं ने गाँव के भीतर एक जगह पर होलिका दहन करने की माँग को लेकर प्रदर्शन किया। जहाँ हिन्दू होलिका दहन की माँग कर रहे हैं, वह परंपरागत स्थान है। यहाँ पर बीते कई दशकों से होलिका दहन होता रहा था।

स्थानीय पत्रकार आयुष भारद्वाज ने ऑपइंडिया से बताया कि सपा सरकार में यहाँ होलिका दहन वाले स्थान के पास ही मुस्लिमों ने मस्जिद बनवा ली थी। मस्जिद बनने के बाद होलिका दहन को गाँव के बाहर कर दिया गया था। गाँव के बाहर एक स्कूल के पास हिन्दुओं को होलिका दहन करने को कहा गया था। कुछ वर्षों तक यही स्थिति बनी रही। हालाँकि, अब इस नई जगह पर भी आँगनवाड़ी बन गई है। होलिका दहन को लेकर जगह का फिर से विवाद पैदा हो गया।

हिन्दुओं ने कहा है कि वह बार-बार होलिका दहन का स्थान नहीं बदल सकते। उन्होंने माँग की है कि गाँव के भीतर मस्जिद के पास वाले स्थान पर ही उन्हें होलिका दहन की दोबारा अनुमति दी जाए। इस माँग को लेकर प्रदर्शन किया है और प्रशासन से इस समस्या को सुलझाने को कहा है। उन्होंने कहा था कि अगर परम्परागत स्थान पर होलिका दहन नहीं करने दिया गया तो इस साल होली नहीं मनाएँगे और घर गाँव छोड़ कर भी चले जाएँगे।

वहीं मुस्लिम मस्जिद के सामने वाली जगह पर होलिका ना जलाने देने के लिए अड़े हुए हैं। मामले में प्रशासन ने मंगलवार (11 फरवरी, 2025) को बातचीत की है। ऑपइंडिया ने इस मामले में CO आँचल चौहान से भी बात की है। उन्होंने बताया कि हिन्दू और मुस्लिम पक्ष को बिठा कर बात की गई है। हिन्दू पक्ष ग्राम पंचायत की जमीन पर होलिका दहन के लिए राजी हो गया है। उन्होंने कहा है कि गाँव में लगाए गए पोस्टर भी हट गए हैं और अभी शान्ति बनी हुई है।

‘ईसाई बनो या घर बेचो’: पहले घर में बनाया ‘चर्च’ फिर पूरे मोहल्ले के धर्मांतरण की रची साजिश, लखनऊ के गोमती नगर में हिंदू भड़के, बताया- पैसे और प्लॉट का दे रहे लालच

लखनऊ के गोमतीनगर विस्तार के भरवारा स्टेट कॉलोनी में स्थानीय निवासियों द्वारा एक शख्स पर ईसाई धर्मांतरण करवाने का आरोप लगाया गया है। स्थानीयों ने इसे लेकर रविवार (9 फरवरी 2025) को जमकर हंगामा भी किया। उन्होंने राजीव लाल नाम के शख्स को लेकर कहा कि उसने घर में चर्च बनवा रखा है और हर रविवार दोपहर 1-3 बजे के बीच 150-200 लोगों को बुलवाकर प्रार्थना करवाता है। इसी सभा में धर्मांतरण भी होता है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, राजीव के घर के बगल में रहने वाले रितेश मिश्रा कहते हैं कि राजीव लाल लोगों को घर और फ्लैट का लालच दे देकर परिवर्तित करवाता है। इसके बाद जो कोई उससे जुड़ते हैं उन्हें भी टास्क मिलते हैं कि वो ईसाई धर्म में लोगों को लेकर आए।

इसी तरह इलाके के अन्य लोगों का आरोप है कि राजीव के घर में आने वाले लोग उनके इलाके में खास समुदाय के लोगों को बसा रहे हैं। ये लोग खाली जमीनी को दो गुणे दाम पर खरीदते हैं। इसके बाद मकान बनवाकर उन लोगों को दिया जाता है जो धर्म परिवर्तन करते हैं।

भरवारा स्टेट कॉलोनी के निवासियों के अनुसार, राजीव लाल ने 5-6 साल पहले अपना घर बनवाया था और उसी के 6 महीने बाद से ये सब होने लगा। यहाँ धर्मांतरण करने वालों को घर-फ्लैट मिलता है और जो धर्मांतरण से इंकार करता है उसे घर बेचकर जाने को कहा जाता है।

बता दें कि स्थानीय लोगों द्वारा आवाज उठाने के बाद पुलिस भी मौके पर पहुँची। उन्होंने घर में घुसकर कई लड़कियों समेत 50 से अधिक लोगों को बाहर निकाला। कुछ को थाने ले जाकर समझाया गया कि अगर इलाके का माहौल बिगड़ा तो कार्रवाई होगी। चूँकि पुलिस ने उस समय धर्मांतरण के एंगल को भी खारिज कर दिया था इसलिए स्थानीय संतुष्ट नहीं हुए।

रिपोर्ट्स बताती हैं कि हालातों के मद्देनजर इलाके में पीएसी तैनात की गई है। पुलिस जहाँ मामले में साक्ष्य जुटाकर केस की जाँच कर रहे हैं। वहीं हिंदू समाज ने इस मामले में कहा है कि अगर उचित कार्रवाई नहीं की गई तो वह लोग चर्च को अपने हिसाब से हटाएँगे और हर रविवार चर्च के बाहर सुंदरकांड पढ़ेंगे। हिंदुओं की माँग है कि उनके इलाके में पिछले 4-5 सालों से जो अवैध गतिविधि चल रही है। उसे बंद करवाया जाए।

रवीश कुमार, प्रतीक सिन्हा… लेफ्ट-लिबरल गैंग के ‘अड्डे’ पर भी USAID की छाया: जिस ‘इंटरन्यूज’ को अमेरिकी एजेंसी ने दिए ₹4100+ करोड़, उससे प्रशांत भूषण की ‘संभावना’ का रिश्ता

USAID के फंडिंग वाले विवाद में अब प्रोपगेंडाबाज प्रशांत भूषण का नाम उजागर हुआ है। X यूजर ‘द स्टोरी टेलर’ ने खुलासा किया है कि प्रशांत भूषण अपने संस्थान ‘संभावना इंस्टीट्यूट ऑफ पब्लिक पॉलिसी एंड पॉलिटिक्स’ के माध्यम से उस ‘इंटरन्यूज’ से जुड़े थे जिसे USAID फायदा दे रहा था।

इस इंटरन्यूज का काम दिखाने को दुनिया भर में ‘स्वतंत्र मीडिया’ को बढ़ावा देना है लेकिन हकीकत में ये फैलाता प्रोपगेंडा है। अगस्त 2024 में भी ये भारत विरोधी गुटों के साथ मिलकर सत्ता परिवर्तन के उद्देश्य से काम कर रहा था। इसके अलावा इसका उद्देश्य अलग-अलग मीडिया आउटलेट को पैसा देकर फैक्ट चेक के नाम पर सोशल मीडिया पर सेंसरशिप करना और सूचनाओं को नियंत्रित करना है।

वहीं भूषण के संभावना इंस्टिट्यूट की बात करें तो 20 साल पहले इसकी स्थापना कुमुद भूषण एजुकेशन सोसायटी के अंतर्गत हुई थी। इसका उद्देश्य दिखाया जाता है कि ये संस्थान अन्याय से निपटने और उसपर चिंतन करने का काम करते हैं, लेकिन अगर इसकी परतें खंगालेंगे तो वामपंथी इकोसिस्टम का असर यहाँ पर पूरा-पूरा दिखेगा।

हिमाचल प्रदेश के कंगरा जिले के पालमपुर के कंदबारी गाँव में संगठन के लिए जगह ली गई थी, लेकिन बाद में ये अड्डा बना वामपंथियों का। जहाँ अक्सर योगेंद्र यादव, हर्ष मंदर, मेधा पाटकर, प्रतीक सिन्हा, नंदिनी राव, रवीश कुमार जैसे वामपंथी जुड़े रहते हैं। इसके अलावा प्रणजॉय गुहा, रवलीन कौर, मनु मुदगिन, नीतू सिंह, भाषा सिंह, स्वाति पाठक, अतुल चौरसिया, अपूर्वानंद झा जैसे पत्रकार प्रशांत भूषण के संगठन से प्रत्यक्ष तौर पर जुड़े हुए हैं। अब सबसे खास बात। अगस्त 2024 में इसी जगह एक वर्कशॉप हुई थी जिसे सपोर्ट कर रहा था वही इंटरन्यूज जिसे न सिर्फ जोर्ज सोरोस वाली ओपन सोसायटी फाउंडेशन से फंड मिलता है बल्कि यूएसएड भी इसे भारी मात्रा में फंडिंग देती है।

इंटरन्यूज और USAID का संबंध

विकीलिक्स द्वारा दी जानकारी के अनुसार, बता दें कि यूएसएड ने इस इंटरन्यूज को करीबन 472.6 मिलियन डॉलर (4106 करोड़ रुपए) दिए हुए हैं और यही इंटरन्यूज भारत में डेडलीड्स के अंतर्गत चलने वाले ‘फैक्ट शाला’ के साथ काम करता है, जिसके प्रमुख चेहरे द प्रिंट के शेखर गुप्ता, द क्विंट की ऋतु कपूर और बीटरूट न्यूज के फाय डिसूजा हैं। इन कनेक्शन्स से समझा जा सकता है कि कैसे भारत में फैक्ट चेकिंग और मीडिया लिटरेसी के नाम पर सूचनाओं को सेंसर करने में USAID का पीछे से हाथ है।

इतना ही नहीं इसी यूएसएड ने उस वार्षिक अंतर्राष्ट्रीय भ्रष्टाचार विरोधी सम्मेलन (आईएसीसी) को भी वित्त पोषित किया है जिसने साल 2022 में भारत विरोधी दिशा रवि को बोलने के लिए मंच दिया था। दिशा रवि वही हैं जिनका नाम 2021 में भारत विरोधी टूलकिट में आया था और दिल्ली पुलिस ने उन्हें पकड़ा था। आईसीसी की लिस्ट में एक संजय प्रधान भी थे जो ओपन गवर्नमेंट पार्टनरशिप के अंबेसडर हैं। यही ओजीपी उस ‘वी-डेम इंस्टिट्यूट’ को फंड देते हैं जो बेबुनियाद डेटा देकर भारत विरोधी प्रोपगेंडा फैलाने का काम करता है।

इक्वेलिटी लैब्स और इंटरन्यूज कनेक्शन

एक यूजर तापेश यादव ने इंटरन्यूज और इक्वेलिटी लैब्स के बीच फंड देने के कनेक्शन को भी उजागर किया है। ये इक्वेलिटी लैब्स अपने आपको दलित नागरिक अधिकार संगठन के रूप में बताता है, लेकिन हकीकत में ये जातिगत रंगभेद, इस्लामोफोबिया और धार्मिक असहिष्णुता पर केंद्रित एजेंडे को बढ़ाने का काम करता है।

इसी ने अन्य संगठनों के साथ मिलकर ‘संयुक्त राज्य अमेरिका में जाति: दक्षिण एशियाई अमेरिकियों के बीच जाति का सर्वेक्षण’ नामक रिपोर्ट तैयार की थी। इसके अलावा ट्विटर पर जब सीईओ जैक डोर्सी ने ‘ब्राह्माणवादी पितृसत्ता को तोड़ो’ लिखा अभियान चलाया था और बाद में पता चला था कि उसे डिजाइन करने वाले इक्वालिटी लैब्स के कार्यकारी निदेशक थेनमोझी सुंदरराजन ही थे।

बता दें कि यूएसएड का प्रोपगेंडा नेटवर्क अभी भी पूरी तकरह एक्सपोज नहीं है, ये किस संस्था को फंड देते थे, वो संस्था किससे जुड़ी थी, उस संस्था के लोग कैसे नैरेटिव बनाते थे और यूएसएड द्वारा दी धनराशि का प्रयोग किन कामों में होता था… इन सबका खुलासा अभी और भी होना बाकी है। दशकों से यूएसएड ने अमेरिकियों के पैसों का गलत इस्तेमाल किया है और अब धीरे-धीरे सबका पता चला रहा है।

नोट- ये खबर मूल रूप से अंग्रेजी में अनुराग ने लिखी है। आप उनके लेख को इस लिंक पर क्लिक करके पढ़ सकते हैं।

मुकुल से ‘प्यार’ करती थी सायमा, लेकिन कलमा पढ़वाकर ही किया निकाह: अम्मी-अब्बू संग मिल मुस्लिम बनवाया, 2 मौलाना भी पकड़े गए

उत्तर प्रदेश के बिजनौर में एक मुस्लिम लड़की ने हिन्दू लड़के से निकाह के लिए धर्मांतरण की शर्त रख दी। लड़की ने हिन्दू युवक को इस्लाम कबूल करने पर मजबूर कर दिया। उसका धर्मांतरण एक मस्जिद के मुफ़्ती और मदरसा संचालक ने मिलाकर करवा भी दिया। इसके बाद निकाह हुआ। जानकारी हिन्दू युवक के परिवार को हुई तो हंगामा मच गया। पुलिस ने मामले में FIR दर्ज कर अब मुस्लिम लड़की समेत 5 लोगों को जेल भेजा है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, धामपुर का युवक मुकुल लम्बे समय से एक मेडिकल स्टोर पर काम करता है। उसकी जान पहचान कुछ समय पहले सायमा नाम की एक मुस्लिम लड़की से हुई थी। मुकुल इस लड़की से शादी करना चाहता था। हालाँकि, सायमा ने शर्त लगा दी कि मुकुल को इस्लाम कबूल करना होगा, तभी वह उससे शादी करेगी। मुकुल को इस्लाम कबूल करवाने की इस साजिश में सायमा के माता-पिता भी शामिल हो गए। कुछ ही दिनों में मुकुल का ब्रेनवॉश भी हो गया।

इसके बाद मुकुल को इस्लाम कबूल करवाने के लिए राजी कर लिया गया। मुकुल को धामपुर के ही एक मदरसे में ले जाया गया। यहाँ मौजूद मौलाना ने उसे कलमा पढ़वाया। उसका नाम बदल कर माहिर अंसारी रख दिया गया। उसके मुस्लिम बनने के बाद एक मुफ़्ती ने उसका निकाह सायमा से करवा दिया। इस बीच यह खबर मुकुल के परिजनों को लग गई। उन्होंने इस पर हंगामा काट दिया। मुकुल के पिता ने यह सूचना पुलिस के साथ ही हिन्दू संगठनों को दी। इसके बाद पुलिस ने FIR दर्ज की और कार्रवाई चालू की।

पुलिस ने इस मामले में मुस्लिम युवती सायमा, उसकी अम्मी रुकसाना और अब्बू शाहिद को गिरफ्तार कर लिया। मामले में मदरसा के मौलाना कारी इरशाद और मुफ़्ती गुफरान को भी गिरफ्तार किया गया है। पुलिस ने कहा है कि मुकुल के धर्मांतरण में कानून का उल्लंघन हुआ है। ना इस विषय में प्रशासन को सूचना दी गई है और ना आपत्तियों को लेकर कोई नियम माने गए हैं। वहीं इस मामले के बीच धर्मांतरित युवक मुकुल सामने नहीं आ रहा है।

पुजारी की प्लेट में दक्षिणा वाले सिक्के भी सरकार के, मंदिर में आया एक-एक रुपया सरकारी खजाने में जमा करवाओ: तमिलनाडु सरकार, बवाल के बाद आदेश वापस

तमिलनाडु सरकार ने एक आदेश में कहा है कि मंदिर के पुजारी अपनी प्लेट में आने वाले सिक्कों को भी सरकारी खजाने में जमा करवाएँ। सरकारी आदेश में मंदिर के सुरक्षाकर्मियों को पुजारियों पर नजर रखने का निर्देश दिया गया है। हिन्दू संगठनों ने इसका विरोध किया है। बवाल के बाद सरकार ने आदेश वापस लिया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, तमिलनाडु के हिंदू धार्मिक और धर्मार्थ प्रबन्धन विभाग (HR&CE) ने 7 फरवरी, 2025 को एक आदेश जारी किया। आदेश विभाग की मदुरई शाखा ने धन्दायुथापानी मंदिर को जारी किया। इस आदेश में लिखा गया कि पुजारियों को उनकी प्लेट पे चढ़ाया गया एक भी रुपया नहीं लेना चाहिए।

आदेश में कहा गया कि पुजारी सरकार से सैलरी पाते हैं इसलिए मंदिर के भीतर आया हर दान सरकारी खजाने में जमा करवाया जाना चाहिए। इस आदेश में पुजारियों की गतिवधियों पर नजर रखने का निर्देश मंदिर के गार्ड को दिया गया था। अब इसको लेकर हिन्दू संगठन, हिन्दू तमिलार काची (HTK) ने विरोध जताया है। उन्होंने इसे बेहूदा करार दिया है।

द न्यू इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में HTK के एक पदाधिकारी ने कहा, “यह नोटिस बेतुका और निंदनीय है। मंदिर के पुजारियों की थाली में आमतौर पर भक्त ₹1 या ₹5 तक के सिक्के चढ़ाते हैं, यह उस इलाके और वहाँ के स्थानीय रीति रिवाजों के अनुसार चढ़ाए जाते हैं।”

HTK ने कहा कि सिक्के भगवान के प्रति श्रद्धा और आभार प्रकट करने के लिए चढ़ाए जाते हैं और HR&CE का इस छोटे चढ़ावे के पीछे पड़ना गलत है, वह इस मामले का विरोध करेंगे। उन्होंने इस मामले में लड़ाई को कोर्ट तक ले जाने का ऐलान किया है।

वहीं भारी विरोध के चलते HR&CE विभाग ने यह नोटिस वापस ले लिया है। विभाग ने कहा है कि मंदिर के ट्रस्टी से बातचीत किए बिना ही यह नोटिस जारी कर दिया गया था। अब विभाग ने कहा है कि नया आदेश जारी करने की कोई जरूरत नहीं थी क्योंकि पुजारी लगातार पैसा जमा करते आए हैं ।

पुजारियों के खिलाफ कार्रवाई का ऐसा कोई यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले अप्रैल, 2024 में मंदिर के भीतर आए कुछ रूपए लेने के आरोप में 4 पुजारियों को तमिलनाडु की सरकार ने गिरफ्तार कर लिया था। इन पर भी थाली में चढ़ाए गए पैसे लेने का आरोप लगा था।

उस रब की कसम हँसते-हँसते, इतनी लाशें दफना देंगे… सुप्रीम कोर्ट ने समझाया अर्थ, कहा- यह कविता हिंसा का संदेश नहीं देती: कॉन्ग्रेस सांसद इमरान प्रतापगढ़ी के खिलाफ FIR पर उठाए सवाल

कॉन्ग्रेस सांसद इमरान प्रतापगढ़ी के खिलाफ गुजरात पुलिस द्वारा दर्ज की गई एक एफआईआर पर सुप्रीम कोर्ट ने सवाल उठाए हैं। प्रतापगढ़ी के खिलाफ यह एफआईआर एक विवादित कविता के कारण दर्ज हुई थी जिसकी ऑडियो पर कॉन्ग्रेस सांसद ने इंस्टा पोस्ट किया था। इसी मामले में सुनवाई करते हुए अब सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पुलिस ने कविता का सही अर्थ समझने में गलती की है।

इससे पहले गुजरात हाईकोर्ट ने 17 जनवरी 2025 को इस एफआईआर को रद्द करने से इनकार कर दिया था। हाईकोर्ट ने ‘कविता की पंक्तियाँ’ सुनने के बाद कहा था कि एक सांसद होने के नाते, प्रतापगढ़ी को अधिक संयम से व्यवहार करना चाहिए और किसी भी भारतीय नागरिक से अपेक्षा की जाती है कि वह सामाजिक या सांप्रदायिक सौहार्द्र को बिगाड़ने वाला कार्य न करे।

जस्टिस संदीप भट्ट ने कहा, “कविता की भाषा और लहजे से स्पष्ट है कि यह ‘सत्ता’ और ‘ताकत’ की बात करती है। इसके अलावा पोस्ट पर आए रिएक्शन भी बताते हैं कि यह साम्प्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने वाला संदेश है। सांसद के रूप में उनसे जिम्मेदारीपूर्ण व्यवहार की उम्मीद है।”

इस आदेश के बाद इमरान प्रतापगढ़ी ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया और जस्टिस एएस ओका के समक्ष ये मामला पहुँचा। सुप्रीम कोर्ट ने हर पक्ष सुनने के बाद पहले प्रतापगढ़ी को अंतरिम राहत देते हुए एफआईआर के आधार पर आगे की किसी भी कार्रवाई पर रोक लगा दी और आज इस केस में गुजरात पुलिस को फटकारा।

अदालत ने प्रतापगढ़ी की याचिका पर विचार करते हुए कहा कि कविता का संदेश सिर्फ ये है, ‘अगर कोई हिंसा करता है, तब भी हम हिंसा नहीं करेंगे।’ वहीं राज्य सरकार के वकील से अदालत ने कहा– “कृपया दिमाग लगाएँ, कविता का सही विश्लेषण करें और इसे रचनात्मकता के दृष्टिकोण से देखें। यह कविता किसी विशेष समुदाय के खिलाफ नहीं है और इसके अर्थ को गलत तरीके से समझा गया है।”

गौरतलब है कि इमरान प्रतापगढ़ी के खिलाफ ये मुकदमा तब दर्ज हुआ था जब उन्होंने जामनगर के एक कार्यक्रम की क्लिप पर कविता की ऑडियो के साथ अपनी वीडियो शेयर की थी। इस कविता के बोल थे “उस रब की कसम हँसते-हँसते, इतनी लाशें दफना देंगे।” इसी के बाद जामनगर पुलिस ने इस मामले को बीएनएस की उचित दर्ज किया और फिर कॉन्ग्रेस सांसद गुजरात हाई कोर्ट गए और बाद में सुप्रीम कोर्ट।

राम भक्त पर एक दिन में ठोक दिए 76 केस, ISI ने बम से उड़वा दिया: चिता की राख से निकली थी 40 कीलें; जानिए कौन थे काला बच्चा सोनकर, क्यों कहलाते थे ‘हिंदुओं के भौकाल’?

काला बच्चा सोनकर, एक ऐसे रामभक्त का नाम है, जिन पर उत्तर प्रदेश में ‘रामकाज’ के लिए एक ही दिन में 76 FIR ठोंक दिए गए। जिन्हें पाकिस्तान की कुख्यात खुफिया एजेंसी ISI ने 9 फरवरी 1994 को बम से उड़वा दिया। जिनकी चिता की राख से बम की करीब 40 कीलें मिली थीं। जिनका होना कानपुर में हिन्दुओं की सुरक्षा की गारंटी थी। जिन्हें ‘हिन्दुओं का भौकाल’ कहा जाता था।

कौन थे काला बच्चा सोनकर?

‘खटिक’ समाज से आने वाले मुन्ना सोनकर उर्फ़ ‘काला बच्चा’ सोनकर कानपुर के बिल्हौर के रहने वाले थे। खटिक समाज दलित समुदाय का एक बड़ा हिस्सा है। काला बच्चा सोनकर कानपुर में इसी का नेतृत्व करते थे। वह खटिकों के साथ ही पूरे हिन्दू समाज में काफी पॉपुलर थे। वह भाजपा से जुड़े हुए थे। इस्लामी कट्टरपंथियों के आतंक से हिन्दुओं को बचाने वाले काला बच्चा पहले सूअर पालने का काम करते थे। इसी के साथ ही वह स्थानीय राजनीति में भी सक्रिय थे।

काला बच्चा सोनकर

हिन्दुओं पर पकड़ और दलितों में बड़ा नाम मुन्ना सोनकर को भाजपा ने 1993 में बिल्हौर विधानसभा सीट से प्रत्याशी भी बनाया था। हालाँकि, वह समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी से हार गए थे। लेकिन वह हार के बाद भी कानपुर क्षेत्र में भाजपा के पोस्टर बॉय थे। काला बच्चा सोनकर के बेटे राहुल बच्चा सोनकर वर्तमान में इसी सीट से भाजपा के विधायक हैं। वह लगातार अपने पिता के बलिदान और हिन्दुओं के लिए किए गए कामों को याद दिलाते हैं।

राम मंदिर आंदोलन और काला बच्चा

काला बच्चा का नाम पहले से प्रसिद्ध तो था ही, वह हीरो बन कर तब उभरे जब उन्होंने बाबरी विध्वंस के बाद कानपुर के भीतर हिन्दुओं को बचाया था। 6 दिसम्बर, 1992 को अयोध्या में बाबरी ढाँचे के विध्वंस के बाद देश के बाकी हिस्सों के साथ कानपुर में भी दंगे भड़के थे। बाबूपुरवा, जूही समेत मुस्लिम बहुल इलाकों के अलावा कई जगह हिंसा हुई थी। 6 दिसम्बर के बाद मुस्लिमों ने एक मार्च निकाला था जिसके चलते खून खराबा हुआ। इस दंगे के दौरान आतातायी मुस्लिम भीड़ से काला बच्चा सोनकर ने हिन्दुओं को बचाया और मुस्लिमों का प्रतिरोध किया।

काला बच्चा सोनकर

1994 में हो गई हत्या

1992 में उनके ऊपर मुकदमे लगे लेकिन लोकप्रियता बढ़ती गई। काला बच्चा सोनकर को 1993 चुनाव में भाजपा ने बिल्हौर से टिकट दिया लेकिन वह हार गए। इस चुनाव के कुछ ही दिनों के बाद 9 फरवरी, 1994 को उनकी हत्या हो गई। हत्या के दिन काला बच्चा सोनकर स्कूटर पर जा रहे थे। उन पर कानपुर में बम चलाया गया था, इससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई। पुरानी रिपोर्ट्स के अनुसार, इस बम धमाके में उनके शरीर का एक ही हिस्सा बचा था। उन पर इतने शक्तिशाली बम मारे गए थे कि बाद में अस्थियों तक से 40 लोहे के टुकड़े निकले थे।

ISI का हाथ सामने आया, मुंबई से हुई थी फंडिंग

काला बच्चा की हत्या मामले में कुछ मुस्लिम आरोपित बनाए गए थे। इनमें से कुछ की बाद में हत्या भी हो गई। इस मामले में जाँच में सामने आया था कि काला बच्चा को निशाने पर लेने वाले ISI से जुड़े हुए लोग थे। सोनकर को मारने के लिए मुंबई से पैसा भेजे जाने की बात भी सामने आई थी। उनके बेटे राहुल सोनकर बताते हैं कि ₹10 लाख मुंबई से भेजे गए थे, जिनमें से ₹4 लाख का इस्तेमाल इस हत्या में हुआ।

मुलायम सिंह ने नहीं दिया शव, परिवार की पिटाई की

काला बच्चा सोनकर के परिवार पर भी मुलायम सिंह यादव की तब की सरकार ने काफी अत्याचार किए थे। काला बच्चा सोनकर के परिवार को उनका शव ही नहीं दिया गया। उनके शव को पुलिस ने जब्त किए रखा। भाजपा नेता ब्रह्मदत्त द्विवेदी भी कानपुर पुलिस से बातचीत करने पहुँचे। पहले पुलिस ने शव लौटाने की हामी भरी और भाजपा नेताओं से तैयारी करने को कहा। लेकिन बाद में मुलायम सरकार ने शव लौटाने से इनकार कर दिया। काला बच्चा को पुलिस ने सुबह 4 बजे चुपके से सिंधियों के शमशान में जला दिया।

इसके बाद जब काला बच्चा के परिवार ने प्रदर्शन किया और मामले में कार्रवाई की माँग की तो उनकी विधवा और बूढ़ी माँ को मुलायम सिंह यादव की पुलिस ने घेर कर मारा पीटा। प्रदर्शन करने पहुँचे भाजपा कार्यकर्ताओं को पकड़ लिया गया और उनकी बेरहमी से पिटाई हुई। काला बच्चा के परिवार के सड़क पर निकलने पर तक बैन लगा दिया गया। इस मामले में यह तक आदेश दिया गया कि हत्या का विरोध करने वालों को ऐसा सबक सिखाया जाए कि वह आगे विरोध करने लायक ना रहें।

काला बच्चा सोनकर

अब बेटे राहुल हैं विधायक, याद दिला रहे पिता का बलिदान

काला बच्चा सोनकर के बेटे राहुल बच्चा सोनकर को 2022 में भाजपा ने बिल्हौर विधानसभा से टिकट दिया था। उन्होंने अपने पिता के काम को आगे बढाते हुए प्रचार किया और 2022 में 1 लाख से अधिक अंतर से चुनाव जीता।

2021 में अपने पिता को ट्विटर पर राहुल सोनकर ने ‘कानपुर का भौकाल’ बताया था। वर्तमान में राहुल सोनकर अपने पिता की तरह इस इलाके में दलितों का बड़ा चेहरा हैं।

जब तक डेविड डिकॉस्टा जिंदा रहेगा, बीयरबायसेप्स आपको जकड़ेगा ही… समय आपको बर्बाद कर देगा

यह कहानी है डेविड डिकॉस्टा की। लंबा-चौड़ा था, लेकिन था गरीब। लाइफ लेकिन मस्त जी रहा था। मस्ती भरे जीवन की साथी थी उसकी सुंदर बीवी। नाम था मैरी डिकॉस्टा। शादी के बाद अमूमन जो होता है, वही हुआ। मैरी प्रेगनेंट हो गई। और कुछ महीनों के बाद उनके घर आया एक नन्हा-मुन्ना बेटा।

अब कहानी है चतुर्वेदी की। डेविड डिकॉस्टा और चतुर्वेदी का है कनेक्शन। चतुर्वेदी है नेता और डेविड है कार्यकर्ता – जान तक देने वाला कार्यकर्ता! वो चतुर्वेदी को हीरो मानता है हीरो! इसीलिए अपने बेटे का नाम खुद से रखने के बजाय सुंदर सी बीवी को लेते-देते पहुँच जाता है चतुर्वेदी के बंगले पर। बेटे का नाम रख दिया जाता है – जेम्स।

अब कहानी है जेम्स की। उस जेम्स की, जिसकी माँ का बलात्कार किया गया। किसने किया – चतुर्वेदी ने। क्योंकि सुंदर महिला को देख उसका हवस जाग गया था। कैसे किया – विश्वासघात करके। जान देने वाले कार्यकर्ता को रेल रोको आंदोलन में भेजा, उसको जेल भिजवाया, फिर उसकी बीवी का बलात्कार किया। पति जेल में, गोद में दूधमुँहा बच्चा और खुद रेप-पीड़ित। बेचारी मैरी आत्महत्या कर लेती है।

धीरे-धीरे समय बीतता है। 39 साल के बाद दो नाम आते हैं – रणवीर (Ranveer Allahbadia) और समय (Samay Raina)। ऊपर वाली कहानी से इस कहानी का दूर-दूर तक कोई वास्ता नहीं है। क्योंकि वो ‘आखिरी रास्ता’ की कहानी है। अमिताभ वाली फिल्म। 1986 में रिलीज हुई थी। वास्ता इसलिए भी नहीं है क्योंकि वो रील थी, ये रियल है। रील में डेविड डिकॉस्टा सिर्फ एक था, रियल में लाखों-करोड़ों डेविड डिकॉस्टा हैं।

समय बदल गया है। सिंगल स्क्रीन से मल्टीपल स्क्रीन के बाद अब तो हाथम-हाथ स्क्रीन का जमाना आ गया है। ऐसे में कब कोई रणवीर आपको अपने बीयरबायसेप्स में जकड़ ले, कब कोई रैना आपका समय बदल दे – आपको पता भी नहीं चलेगा। क्योंकि आप भले उसे अपना आदर्श बना लें, उसके लिए आप सिर्फ और सिर्फ डेविड डिकॉस्टा हैं।

चतुर्वेदी के हवस और वासना और फिर बलात्कार से अगर आप रणवीर इलाहाबादिया या समय रैना को अलग करके देख रहे हैं, इसका मतलब है आप डेविड डिकॉस्टा की श्रेणी में फिट बैठते हैं। सोशल मीडिया पर किसको कितने लोग देखते-सुनते हैं, आप विश्वास मानिए इनकी यौन संतुष्टि का पैमाना ही यही है। “माँ की योनि”, “माँ-बाप को सेक्स करते देखना” जैसे शब्द इनके फोरप्ले हैं। इसके बाद ही इनको मिलता है व्यूज का चरम-सुख!

कोई रणवीर या समय रैना आज पहली बार आया, आज के बाद खत्म हो जाएगा – इस भुलावे में भी मत रहिएगा। जब तक इस मानव-समाज में हमारे-आपके जैसे डेविड डिकॉस्टा रहेंगे, रणवीर या समय जैसे लोग न सिर्फ रहेंगे बल्कि हमारे-आपसे ऊपर की श्रेणी में बैठेंगे। रील लाइफ में हम सब पर फ्लाइंग किस फेंक मन ही मन में चूतिया बना देने के अहसास से पुष्पित-पल्लवित होते रहेंगे।

अपने हीरो को भगवान बनाने वाली मानसिकता से पैदा होता है रणवीर या समय रैना। अपने हीरो को भगवान बनाने वाली मानसिकता के कारण शाहरुख खान को देखने के चक्कर में मारा जाता है कोई। अपने हीरो को भगवान बनाने वाली मानसिकता के कारण आत्महत्या कर लेते हैं कई लोग।

बदले में हीरो क्या करता है? धंधा करता है, धंधा। व्यूज का धंधा। गूगल-फेसबुक से पैसे का धंधा। आपको क्या मिलता है? वामपंथी हैं तो ध्रुव राठी। दक्षिणपंथी हैं तो एल्विश यादव। मनोरंजनपंथी हैं तो Ranveer Allahbadia या Samay Raina या Apoorva Mukhija… कॉमेडीपंथी हैं तो Tanmay Bhat या Munawar Faruqui – और ये सब आपको मिल कर बनाते हैं चूतिया।

पटकथा लेखक-हीरो-डायरेक्टर-प्रोड्यूसर सबने ‘आखिरी रास्ता’ का वास्ता देकर आपको समझाया था कि डेविड डिकॉस्टा नहीं बनने का। लेकिन यहाँ देखता-सुनता-गुनता कौन है? पहले सब के सब ‘है साला’ डायलॉग सुन के सीटी बजाते थे, टाइम पास करके घर चले आते थे… अब “माँ की योनि”, “माँ-बाप को सेक्स करते देखना” सुन कर ठहाके लगाते हैं… सिंपल!

जीवन में आपको डेविड डिकॉस्टा नहीं बनना है।

राजीव गाँधी फाउंडेशन-सैम पित्रोदा को USAID से मिला पैसा, भारत को तोड़ने के लिए जॉर्ज सोरोस को मिले ₹5000 करोड़? ऑपइंडिया ने जो सच बताया, संसद में उसी तूफान में घिरा गाँधी परिवार

जब से अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने USAID पर ताला लगाया है लगातार इसकी करतूतें बाहर आ रही है। भारत विरोधी ताकतों को यूनाइटेड स्टेट्स एजेंसी फॉर इंटरनेशनल डेवलपमेंट (USAID) से हुई फंडिंग का मामला 10 फरवरी 2025 को लोकसभा में बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने उठाया।

ट्विटर/एक्स पर एक पोस्ट में उन्होंने कहा है, “आजादी से लेकर अब तक कॉन्ग्रेस ने सिर्फ देश को तोड़ने का काम किया है। राजीव गाँधी फाउंडेशन सहित कई NGO ने USAID से पैसे लेकर देश विरोधी तत्वों को फायदा पहुँचाया। विपक्ष देश तोड़ना चाहता है।” इसके साथ ही उन्होंने लोकसभा की कार्रवाई का एक वीडियो भी शेयर किया है, जिसमें वे इससे जुड़े सवाल उठा रहे हैं।

ये सवाल क्या हैं इन्हें नीचे पढ़ा जा सकता है-

“USAID ने ओपन सोसायटी फाउंडेशन के जॉर्ज सोरोस को 5000 करोड़ रुपया भारत को तोड़ने के लिए दिया या नहीं दिया?”

“USAID ने राजीव गाँधी फाउंडेशन चैरिटेबल ट्रस्ट को पैसा दिया कि नहीं दिया?”

“ओवरसीज कॉन्ग्रेस के जो अध्यक्ष हैं सैम पित्रौदा उनको USAID ने पैसा दिया या नहीं दिया?”

“बांग्लादेश में मोहम्मद युनूस, जिन्होंने वहाँ के लोकतंत्र को बर्बाद किया, उसके साथ गाँधी परिवार के साथ क्या संबंध हैं?”

“राजीव गाँधी फाउंडेशन में जो विजय महाजन है, उनकी संस्था को USAID पैसा दे रही है या नहीं दे रही है? कॉन्ग्रेस ने उसे राजीव गाँधी फाउंडेशन में देश के टुकड़े रखने के लिए रखा है या नहीं रखा है?

“ग्रामीण विकास ट्रस्ट जो कि जातिगत जनगणना की बात करता है यूएस उसको पैसा देता है कि नहीं देता है?”

“तालिबान को यूएसएड ने पैसा दिया कि नहीं दिया?”

“नेपाल में जो नास्तिकता के लिए मूवमेंट चला उसके लिए यूएसएड ने पैसा दिया कि नहीं दिया?”

“सामंता पावर से आपकी मुलाकात हुई कि नहीं हुई?”

“फलाह-ए-पाकिस्तान, एल खिदमत जैसे आतंकी संगठनों को यूएसएड ने पैसा दिया कि नहीं दिया?”

“वक्फ एक्ट को जो जकात फाउंडेशन चला रहा है जिसको कॉन्ग्रेस सपोर्ट करती है उसको यूएसएड ने पैसा दिया कि नहीं दिया?”

USAID को लेकर ऑपइंडिया की रिपोर्ट

बता दें कि जिस यूएसएड को लेकर भाजपा सांसद द्वारा सवाल खड़े किए गए हैं उसे लेकर ऑपइंडिया लगातार रिपोर्ट कर रहा है। हम आपको पहले की रिपोर्टों में बता चुके हैं कि कैसे इस यूएसएड ने अमेरिकी करदाताओं के करोड़ों रुपए आतंकवादियों को पोसने वाले संगठनों को देने में और धर्मांतरण को बढ़ावा देने वाली संस्थाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के लिए खर्च किया। नेपाल में नास्तिकता का मूवमेंट चलाना हो या देश-विदेश में LGBTQ के एक्टिविज्म को बढ़ाना हो… इन सब पर यूएसएड ने खुलकर डॉलर उड़ाए।

कहने को ये संगठन मानव भलाई की दिशा में काम करता है लेकिन हकीकत यह है कि इनका फायदा अफगानिस्तान में बैठे तालिबान, पाकिस्तान में बैठे लश्कर-ए-तैयबा, फलाह-ए-पाकिस्तान और गाजा में बैठे हमास जैसे आतंकी संगठनों को भी हुआ है।

इसके अलावा यूएसएड का संबंध कॉन्ग्रेस से, गाँधी परिवार के करीबी सैम पित्रौदा से और जॉर्ज सोरोस से कैसे है इसे भी ऑपइंडिया अपनी रिपोर्ट में बता चुका है। 2024 में भी हमने ये खुलासा किया था कि सैम पित्रौदा की एनजीओ को USAID से फंड आता था। आज इसी मामले को निशिकांत दुबे ने फिर से उठाकर ताजा कर दिया है।