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मैं झूम के नाचूँ आज… AAP की झाड़ू बिखर गई तो क्या, मैंने छोड़ दी सबकी लाज… कॉन्ग्रेस ने 0 की पूरी कर ली हैट्रिक तो क्या

दिल्ली चुनावों के नतीजे आ चुके हैं। आम आदमी पार्टी सत्ता से बेदखल हो गई है और कॉन्ग्रेस लगातार तीसरी बार दिल्ली विधानसभा चुनावों में अपना खाता नहीं खोल पाई है। बावजूद इसके दो ऐसी वीडियोज सामने आई है जिसे देख आप हैरान रह जाएँगे। एक वीडियो दिल्ली मुख्यमंत्री आतिशी की है और दूसरी कॉन्ग्रेस नेता रागिनी नायक की। दोनों वीडियो को देख ऐसा लग रहा है जैसे इन लोगों को पार्टी के जीतने की नहीं हारने की ही उम्मीद थी

दिल्ली में AAP के हारने के बाद जहाँ पार्टी का हर नेता दुखी था वहीं आ्तिशी खुशी से नाच रही थीं। उन्हें सत्ता जाने का, पार्टी के हारने का, बड़े-बड़े नेताओं के न जीत पाने का कोई दुख नहीं था, उन्हें सिर्फ और सिर्फ अपनी उस जीत की खुशी थी जो उन्हें आखिरी राउंड की वोटिंग के दौरान बड़ी मुश्किल से मिली।

राज्यसभा सांसद स्वाति मालीवाल ने उनकी वीडियो शेयर की है। इस वीडियो में आतिशी अपने कार्यकर्ताओं के साथ नाचती दिखाई दे रही हैं। स्वाति ने इस वीडियो को साझा करते हुए लिखा है- ये कैसा बेशर्मी का प्रदर्शन है? पार्टी हार गई, सब बड़े नेता हार गए और आतिशी ऐसे जश्न मना रही है?

लोग इसके नीचे कॉमेंट करके लिख रहे हैं- ये बेशर्मी आतिशी मार्लेना ने अपने मालिक केजरीवाल से सीखी होगी। आग मौका मिला तो बेशर्मी दिखाने में आगे निकल गई। कोई-कोई ये भी लिख रहा है कि हो सकता है कि आतिशी जल्द बीजेपी ज्वाइन कर ले।

अगली वीडियो बीजेपी नेता राधिका खेड़ा ने शेयर की है। उन्होंने अपने ट्वीट में लिखा- “दिल्ली में 4.26% वोट वाली कॉन्ग्रेस का ‘भांगड़ा’ देख कर लगा, जैसे सियासी दफ्तर नहीं, ‘पागलखाने का वार्ड’ खुल गया हो! जिनकी राजनीति को जनता ने बार-बार नकारा,वो अब अपनी हार पर ही जश्न मनाने में मस्त हैं! कॉन्ग्रेस का नया नारा—‘हारो, नाचो, भूल जाओ!”

बता दें कि दिल्ली में मतगणना की प्रतिक्रिया 8 फरवरी को पूरी हुई। भारतीय जनता पार्टी को इन चुनावों में 48 सीटें मिलीं जबकि आम आदमी पार्टी 22 सीट पाकर सिमट कर रह गई। कॉन्ग्रेस भी इन चुनावों में रेस में मानी जा रही थी, लेकिन उन्हें पूरी दिल्ली में सिर्फ 6.34% वोट मिले जो चुनाव में 1 सीट भी नहीं दिला पाए। बीजेपी का वोट शेयर इस बार 45.56% का रहा जबकि AAP का 43.57% का।

14 साल के दलित बच्चे का जबरन करवाया खतना, नाम रख दिया- नूर मोहम्मद: बंधक बनाकर रखा भूखा-पढ़वाया नमाज, पीड़ित बोला- मुस्लिम सौतेली माँ ने पिता की हत्या करवा मुझे घर से निकाला

उत्तर प्रदेश के बाराबंकी में एक किशोर का खतना कराकर धर्म परिवर्तन कराने का मामला सामने आया है। उससे एक होटल में काम कराया जाता था और उसे लगातार प्रताड़ित किया जाता था। उसे बंधक बनाकर रखा गया था और खाना भी नहीं दिया जाता था। किशोर का कहना है कि उसकी माँ की मौत होने के बाद उसके पिता ने एक मुस्लिम से दूसरी शादी की थी, लेकिन उस महिला ने उसके पिता की हत्या करवा दी और फिर उसे घर से निकाल दिया।

इस मामले में विश्व हिंदू परिषद को कार्यकर्ताओं ने थाने में FIR दर्ज कराई है। 14 साल के किशोर को फिलहाल बाल सुधार गृह में भेज दिया गया है। किशोर मूल रूप से आजमगढ़ का रहने वाला है। बाराबंकी में विश्व हिंदू परिषद के जिला संयोजक विनय सिंह राजपूत का कहना है कि वे पल्हरी चौराहे के पास हिंद मेडिकल स्टोर के पास खड़े थे। वहाँ एक किशोर आया और उसने पहले नाम नूर मोहम्मद बताया, फिर हिंदू नाम बताया।

इसके बाद विनय सिंह को शंका हुई तो उन्होंने विस्तार में बात की। किशोर ने बताया कि कहा कि वह आजमगढ़ के अतरौलिया का रहने वाला है। वह दलित समाज से ताल्लुक रखता है। उसने बताया कि उसकी माँ की मौत होने के बाद उसके पिता ने एक मुस्लिम महिला से दूसरी शादी कर ली। इसके बाद उसके घर मुस्लिम लोगों का आना-जाना शुरू हो गया। किशोर ने कहा कि उसकी सौतेली माँ ने प्रॉपर्टी के लिए उसके पिता की हत्या करवा दी और उसे घर से निकाल दिया।

इसी दौरान वह कबाड़ी का काम करने वाले रियासत और उसके बेटे मुर्शीद के संपर्क में आया। दोनों ने उसे कई महीनों तक अपने पास रखा और मुफ्त में काम करवाया। इसके बाद नौकरी दिलाने के नाम पर मुर्शीद ने उसे बाराबंकी में लाकर एक रेस्टोरेंट में नौकरी रखवा दिया। इस रेस्टोरेंट का नाम अफीफा रेस्टोरेंट है। यहाँ पर उससे काम करवाया जाता था और उससे ढंग से खाना भी नहीं दिया जाता था।

किशोर ने बताया कि एक दिन अफीफा रेस्टोरेंट के मालिक ने उससे उसके परिवार के बारे में पूछा। लड़के ने बताया कि उसका परिवार नहीं है। इसके बाद होटल का मालिक उसे बातों में फँसाकर अस्पताल ले गया और वहाँ खतना करवा दिया। रेस्टोरेंट में वापस आने के बाद उसका मालिक बोला, “अब तुम मुसलमान हो गए हो और तुम्हारा नाम नूर मोहम्मद हो गया है।” इसके बाद रेस्टोरेंट का मालिक उससे जबरन नमाज पढ़वाने लगा।

तहरीर के आधार पर पुलिस ने मुर्शीद, उसके अब्बू रियासत अली और अफीफा रेस्टोरेंट के मालिक के खिलाफ धर्म परिवर्तन, एससी-एसटी एक्ट और शारीरिक शोषण का मुकदमा दर्ज कर लिया है। बच्चे को बाराबंकी पुलिस ने किशोर न्याय बोर्ड आजमगढ़़ में पेश कराकर उसका बयान दर्ज करवा दिया है। किशोर ने इसके बारे में सिलसिलेवार ढंग से से न्याय बोर्ड को बता दिया है। बोर्ड ने उसकी काउंसलिंग कराई है।

2MP फैक्टर जिससे ‘AAP-दा’ मुक्त हुई दिल्ली

दिल्ली विधानसभा चुनावों के नतीजे आने के बाद स्पष्ट हो गया है कि राजधानी में 27 साल बाद भाजपा की वापसी हो रही है। नतीजे देख न केवल बीजेपी के नेता-कार्यकर्ता खुश हैं बल्कि वो आम जनता भी खुश है जो रोजमर्रा की समस्याओं से तंग आकर सत्ता परिवर्तन को ही एक विकल्प मान रही थी। वैसे तो इतने वर्षों तक कड़ी मेहनत के बाद सत्ता में वापसी के लिए भाजपा ने कई फैक्टर्स पर काम किया होगा, लेकिन दिल्ली की जनता ने उन्हें असल में किसलिए वोट दिया ये समझना जरूरी है।

आइए दिल्ली में जब पूर्ण बहुमत से भारतीय जनता पार्टी की सरकार बन रही हैं तो समझते हैं कि आखिर वो कौन-कौन से कारण थे जिनके चलते भाजपा पर लोगों ने विश्वास जताया।

क्या वो सिर्फ केजरीवाल की अगुवाई वाली AAP सरकार से छुटकारा चाहते थे या वाकई उन्हें दिल्ली में विकास की दरकार है? क्या उनके लिए सिर्फ फ्री बिजली पानी महत्व रखता था या उनको स्वच्छ क्षेत्र, पक्की सड़कें, साफ पानी और बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएँ भी चाहिए?

दिल्ली में भाजपा की जीत के सबसे बड़ा कारण इस बार महिलाओं की भागीदारी को, मिडिल क्लास को मिली राहत को, पूर्वांचलियों के प्रयास, साफ पानी के वादे को माना जा सकता है…।

महिलाओं का रिकॉर्ड मतदान

इस विधानसभा चुनाव में राजधानी में पंजीकृत महिला मतदाताओं ने पुरुषों से ज्यादा मतदान किया था। महिलाएँ समाज का वो वर्ग हैं जो बुनियादी सुविधाएँ न मिलने पर सबसे ज्यादा प्रभावित होती हैं। इन्हें पता होता है कि घर के नल से आता गंदा पानी, गली की टूटी सड़क, नाले में भरा पानी कैसे उनके परिवार के लिए घातक है। दिल्ली की महिलाओं को इन्हीं सबसे छुटकारा चाहिए था। उन्हें फ्री बिजली से ज्यादा साफ पानी की जरूरत थी। उन्हें मोहल्ला क्लिनिक से ज्यादा आयुष्माम योजना की जरूरत थी। इसीलिए उन्होंने 10 साल पहले केजरीवाल सरकार में संभावना देखकर उन्हें मौका दिया था, मगर जब उनकी जरूरतें पूरी नहीं हुईं तो उन्होंने AAP को देखा-परखा और फिर बदलाव के नाम पर अपना वोट दिया।

मोदी की गारंटी

दूसरा, आम आदमी पार्टी ने इन्हीं महिलाओं को टारगेट करते हुए 2100 रुपए देने का ऐलान किया था। लेकिन, दिल्ली की महिलाएँ AAP की फ्री वाले हथकंडे को भाँप चुकी थी। उन्हें उन 2100 रुपए से ज्यादा दिल्ली के विकास को तवज्जो दी। उधर भाजपा ने भी अपने संकल्प पत्र में महिलाओं से साफ कह दिया था कि वो न केवल दिल्ली को हर स्तर पर बेहतर बनाएँगे बल्कि जो दिल्ली सरकार इस समय जनकल्याण की योजना चला रहे हैं उन्हें भी बंद नहीं करेंगे।

महिलाओं को इस बात पर डर नहीं था कि अगर वो AAP को वोट नहीं देंगी तो उनके घरेलू बजट पर कोई असर पड़ेगा। उलटा वह संतुष्ट थीं कि भाजपा से उन्हें सम्मान के तौर पर 2500 रुपए की राशि तो मिलेगी ही। साथ ही गर्भवतियों को 25000 रुपए की सहायता दी जाएगी। इसके अलावा घर के गैस सिलेंडर, बिजली की भी उन्हें चिंता नहीं करनी होगी और दिल्ली में बीजेपी के आने पर आयुष्मान योजना जैसी स्कीम भी लागू हो पाएँगी जिससे उनके परिवार को ही फायदा होगा।

मिडिल क्लास की ताकत

आम आदमी पार्टी और कॉन्ग्रेस जिस समय जातियों पर लोगों को बाँटकर भाजपा के खिलाफ भड़काने की कोशिश कर रही थीं उस समय बीजेपी लगातार मिडल क्लास वर्ग पर फोकस बनाए हुई थी। बजट वाले दिन विपक्षी दलों की बाजी तब पलटी जब ऐलान हुआ कि अब 12 लाख रुपए तक कमाने वालों को कोई टैक्स नहीं देना पड़ेगा। विपक्ष ने इस बजट को बकवास तक बताया, लेकिन उन्हें अंदाजा नहीं था कि इस एक घोषणा ने दिल्ली के मिडल क्लास को सीधे बीजेपी के पाले में खड़ा कर दिया है।

अभी तक आम आदमी पार्टी और कॉन्ग्रेस भाजपा के खिलाफ जिस मिडल क्लास को भड़का रही थीं, उसी मिडल क्लास को चुनावों से ठीक पहले केंद्र सरकार ने टैक्स में छूट देकर बड़ा तोहफा दे दिया था।

इसके अलावा पिछले दिनों केंद्र सरकार ने जो 8वें वेतन आयोग को बनाने की घोषणा की थी उससे भी मिडल क्लास काफी प्रभावित हुआ था। इस फैसले से करीबन 50 लाख केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों को बढ़ी हुई सैलरी मिलती। वहीं 65 लाख रिटायर्ड केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों की पेंशन और भत्ते में बढौतरी होती।

पूर्वांचली भी साथ

आम आदमी पार्टी ने भारतीय जनता पार्टी के प्रवक्ता शहजाद पूनावाला के एक बयान को तोड़-मरोड़ कर पेश करते हुए ऐसे दिखाया था कि भाजपा पूर्वांचलियों से इतनी नफरत करती है कि उन्हें गाली दे रही है। हकीकत जबकि ये थी कि पूनावाला ने वहाँ गाली नहीं दी थी। लेकिन जो खेल आप खेल रही थी उससे निपटना जरूरी था। नतीजतन जमीनी स्तर पर काम करने की कमान बीजेपी ने कई पूर्वांचलियों को सौंपी। इन्हीं पूर्वांचलियों ने दिल्ली में अपनी पूर्वांचल सम्मान मार्च जैसे इवेंट करके अपनी ताकत लगाई और नतीजे सामने हैं।

करप्शन से केजरीवाल चित

इन सब वजहों के अलावा एक सबसे बड़ा कारण दिल्ली में भाजपा की जीत का यह भी था कि दिल्ली की जनता आए दिन AAP के काल में हो रहे भ्रष्टाचार की खबरों से त्रस्त हो गई थी। कभी शीश महल पर खर्च हुए 30-40 करोड़ रुपए की बात मीडिया में आ रही थी तो कभी दिल्ली शराब घोटाला के जरिए फजीहत हो रही थी। इन सारे मुद्दों ने पार्टी की छवि और नेताओं की ईमानदारी पर तमाम सवाल खड़े कर दिए थे। वहीं दिल्ली की सड़कों में हर साल भरने वाला पानी और 10 साल से यमुना के साफ करने के झूठे वादे ने भी लोगों का विश्वास AAP से उठा दिया था।

इन्हीं सब बिंदुओं का फायदा भाजपा को दिल्ली के विधानसभा चुनावों में जमकर हुआ और उनके दिए नारे ‘AAP-DA मुक्त’ का असर दिखा। जनता ने मोदी की गारंटियों पर भरोसा दिखाते हुए 5 फरवरी को कमल दबाया। जिसके परिणाम आज देखने को मिले। बीजेपी की इस जीत में 2M (महिला+मिडिल क्लास) 2P (पूर्वांचली+पानी) फैक्टर का बड़ा रोल दिख रहा है। दिल्ली में भाजपा 48 सीट जीत रही है जबकि आम आदमी पार्टी को केवल 22। पिछले चुनाव में इसी आप ने 62 सीटों पर जीत हासिल की थी।

खुद 0 से आगे नहीं बढ़ सकी कॉन्ग्रेस, पर जश्न ऐसा जैसे AAP को उसने ही हराया: एक होकर भी दिल्ली जीत नहीं पाता INDI गठबंधन, क्योंकि सत्ता विरोधी लहर में साथी भी होते हैं साफ

दिल्ली विधानसभा चुनाव में भाजपा ने शानदार जीत हासिल की है। पार्टी 27 वर्षों के सूखे के बाद दिल्ली की सत्ता में लौटी है। उसने 10 साल से दिल्ली की गद्दी पर काबिज आम आदमी पार्टी (AAP) को बुरी तरह हराया है।

भाजपा को दिल्ली में 48 सीट मिली हैं जबकि AAP इस चुनाव में 22 सीटों पर सिमट गई है। उसके मुखिया केजरीवाल तक अपनी सीट नहीं बचा पाए। इस चुनाव में कॉन्ग्रेस ने अपना पुराना प्रदर्शन दोहराया है, वह लगातार तीसरी बार एक भी सीट पाने में विफल रही है।

कुछ दिनों तक AAP को 50 से अधिक सीटें दे रहे लिबरल और वामपंथी पत्रकार इस जीत को नहीं पचा पा रहे हैं। कई कथित विशेषज्ञ इस जीत को कम करके आंकने का प्रयास कर रहे हैं। स्पष्ट जनादेश को लेकर अलग-अलग तरह के प्रपंच बताए जा रहे हैं।

राजनीतिक विश्लेषण की दुकान खोलने वालों का दावा है कि AAP की यह हार इसलिए हुई है, क्योंकि इस बार उसे पीछे के दरवाजे से भाजपा को कॉन्ग्रेस का साथ मिल गया। जम्मू कश्मीर के नेता उमर अब्दुल्ला ने एक मीम तक पोस्ट किया है, जिसका इशारा है कि AAP-कॉन्ग्रेस की लड़ाई से भाजपा जीती है।

AAP की हार के पीछे भाजपा के कार्यकर्ताओं की मेहनत, उसका मजबूत संगठन और रणनीति को श्रेय ना देकर यह साबित करने की कोशिश हो रही है कि यदि कॉन्ग्रेस और AAP मिलकर लड़ते तो भाजपा सत्ता में नहीं आती।

कुल मिलाकर भाजपा की जीत का सेहरा कॉन्ग्रेस के माथे बाँधने की कोशिश हो रही है। कॉन्ग्रेस भी इसी आत्ममुग्धता में खुश है कि वह भले नहीं जीती लेकिन अरविन्द केजरीवाल को नीचे लाने में उसका योगदान रहा। उसके दफ्तर से नाचने-भंगड़ा करने के वीडियो आ रहे हैं।

भाजपा की इस जीत की सच्चाई पूरी तरह अलग है। भाजपा की इस जीत का सबसे बड़ा कारण दिल्ली में 10 वर्षों से काबिज AAP के खिलाफ एंटी इनकम्बेंसी है। इस एंटी इनकम्बेंसी का सीधा फायदा भाजपा को मिला है। उसका वोट प्रतिशत लगभग 8% बढ़ा है।

जबकि इसी दौरान AAP का वोट प्रतिशत राज्य में 10% घटा है। केजरीवाल से त्रस्त दिल्ली की जनता उन्हें वोट नहीं देना चाहती थी। ऐसे में उसके पास भाजपा का ही विकल्प था। कॉन्ग्रेस को AAP की हार और भाजपा की जीत में मदद करने वाला बताने वालों को देखना चाहिए कि कॉन्ग्रेस का खुदका वोट प्रतिशत इस बार भी कुछ ख़ास नहीं बढ़ा।

2025 में अलग-अलग पार्टियों का वोट प्रतिशत

2020 चुनावों में 4.26% वोट लाने वाली कॉन्ग्रेस खूब प्रयास करके भी 2025 में दहाई आँकड़ा तक नहीं छू पाई। उसे इस बार 6.3% वोट से संतोष करना पड़ा है। स्पष्ट है कि दिल्ली में कॉन्ग्रेस के जो मतदाता AAP की तरफ गए थे, वह अब भी कॉन्ग्रेस को एक विकल्प के तौर पर नहीं देखते।

उन्हें AAP के जवाब में भाजपा ही बेहतर लगती है। कॉन्ग्रेस इसी के चलते लगातार तीसरी बार एक भी सीट नहीं जीत पाई। कॉन्ग्रेस के वोट में जो हलकी सी बढ़ोतरी हुई भी है, वह एंटी इनकम्बेंसी वाले वोट का ही एक हिस्सा है।

जो लोग यह चर्चा कर रहे हैं कि अगर AAP और कॉन्ग्रेस मिल जाते तो दिल्ली में भाजपा नहीं आती, जमीनी हकीकत से वाकिफ नहीं हैं। दरअसल, AAP इसलिए नहीं हारी है क्योंकि कॉन्ग्रेस उसके खिलाफ थी, बल्कि इसलिए हारी है क्योंकि दिल्ली की जनता उससे नाराज थी।

अगर कॉन्ग्रेस उसके साथ मिलकर भी लड़ती तो भी नतीजा लगभग यही रहता। क्योंकि इस गठबंधन से एंटी इनकम्बेंसी का फैक्टर नहीं खत्म होने वाला था। जिन चुनावों में सरकार के खिलाफ प्रबल एंटी इनकम्बेंसी का फैक्टर होता है, वहाँ उस पार्टी की भी दुर्गति होती है, जो सत्ताधारी पार्टी के साथ गठबंधन करती है।

2017 के उत्तर प्रदेश के चुनाव इसका सबसे बड़ा उदाहरण हैं। कॉन्ग्रेस ने 2017 में उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में सपा से गठबंधन किया था। लेकिन दोनों ही पार्टियाँ बुरी तरह हारीं और भाजपा रिकॉर्ड 300+ सीटों के साथ सत्ता में आई। और इस चुनाव में भी AAP को अखिलेश यादव तथा ममता बनर्जी ने समर्थन दिया था, उनका कोई भी असर चुनाव पर नहीं दिखा।

दूसरी तरफ भाजपा की जीत में एंटी इनकम्बेंसी के अलावा उसके दिल्ली के अपने वोटबैंक का भी बड़ा हाथ है। दिल्ली में भाजपा का लगातार 35%-40% वोट प्रतिशत हर चुनाव में बना रहा है। यह उसे निश्चित तौर पर मिलता है। इस जीत में उसका यह निश्चित वोटबैंक और साथ ही एंटी इनकम्बेंसी के चलते उसकी तरफ आए दिल्ली वालों का वोट शामिल है।

कॉन्ग्रेस ने पिछले चुनावों में कोई असर डाल पाई थी और ना इस बार कुछ कर पाई है। अगर AAP+कॉन्ग्रेस गठबंधन हो भी जाता तो भी नतीजा कोई ख़ास अलग नहीं होता, दोनों पार्टियों के गठबंधन का हश्र कुछ ही महीने पहले देश भर ने दिल्ली में देखा है।

यदि तर्क यह दिया जाए कि AAP और कॉन्ग्रेस मिलकर भाजपा से ज्यादा वोट ले आते और सरकार बन जाती तो उन्हें लोकसभा चुनाव याद करना चाहिए। लोकसभा में दोनों पार्टियों के गलबहियाँ करने के बावजूद भाजपा ने लगातार तीसरी बार 7 की 7 सीट जीत ली थीं।

और यहाँ याद रखना होगा कि लोकसभा और विधानसभा का चुनाव एकदम अलग होता है। ऐसे में गठबंधन के समय जो व्यक्ति AAP से गुस्सा होकर वोट देता तो भाजपा की तरफ जाता ना कि कॉन्ग्रेस के साथ होने के चलते रुकता।

ऐसे में बेहतर होगा कि कॉन्ग्रेस को इस जीत का श्रेय देने के बजाय विश्लेषक भाजपा की एक संगठन के रूप में प्रशंसा करें। उसके चुनावी मैनेजमेंट को समझें। साथ ही वह कॉन्ग्रेस को उसकी खामियाँ बताएँ, जिसके चलते उसे लोग सत्ता देना तो दूर, एक सीट भी देने को राजी नहीं थे।

‘जनशक्ति सर्वोपरि, सुशासन जीता’: 27 साल बाद मिली सत्ता तो PM मोदी ने दिल्ली को दी चौतरफा विकास की ‘गारंटी’, केजरीवाल ने कबूली हार, कहा- रचनात्मक विपक्ष बनेंगे

दिल्ली चुनावों के नतीजे आने के बाद आम आदमी पार्टी ने और उसके प्रमुख अरविंद केजरीवाल ने अपनी हार को स्वीकार लिया है। वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारतीय जनता पार्टी की इस जीत पर दिल्ली की जनता को धन्यवाद कहा है और अपने कार्यकर्ताओं का अभिवादन किया है।

पीएम मोदी ने दिल्ली नतीजे आने के बाद अपने एक्स पर पोस्ट में लिखा- “जनशक्ति सर्वोपरि! विकास जीता, सुशासन जीता। दिल्ली के अपने सभी भाई-बहनों को भाजपा को ऐतिहासिक जीत दिलाने के लिए मेरा वंदन और अभिनंदन! आपने जो भरपूर आशीर्वाद और स्नेह दिया है, उसके लिए आप सभी का हृदय से बहुत-बहुत आभार।”

उन्होंने वादा किया, “दिल्ली के चौतरफा विकास और यहाँ के लोगों का जीवन उत्तम बनाने के लिए हम कोई कोर-कसर नहीं छोड़ेंगे, यह हमारी गारंटी है। इसके साथ ही हम यह भी सुनिश्चित करेंगे कि विकसित भारत के निर्माण में दिल्ली की अहम भूमिका हो। मुझे भाजपा के अपने सभी कार्यकर्ताओं पर बहुत गर्व है, जिन्होंने इस प्रचंड जनादेश के लिए दिन-रात एक कर दिया। अब हम और भी अधिक मजबूती से अपने दिल्लीवासियों की सेवा में समर्पित रहेंगे।”

वहीं अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली चुनावों के नतीजे देखने के बाद पहली प्रतिक्रिया देते हुए कहा- “हमें जनता का फैसला स्वीकार है। बीजेपी को इस जीत पर बधाई। उम्मीद है जिस आशा के साथ जनता ने उन्हें बहुमत दिया है उनकी उम्मीदों पर वो खरा उतरेंगे। हम जनता के सुख-दुख में काम आते रहेंगे।”

आगे केजरीवाल ने अपने पिछले 10 साल में किए कामों का ब्योरा दिया। उन्होंने कहा, “हमें पिछले 10 सालों में जनता ने मौका दिया। हमने बहुत सारे काम किए। शिक्षा के क्षेत्र में, स्वास्थ्य के क्षेत्र में, पानी के क्षेत्र में, बिजली के क्षेत्र में और भी अलग-अलग तरीके से लोगों को राहत पहुँचाने के लिए कोशिश की। दिल्ली के इंफ्रास्ट्रक्चर को हमने सुधारने की कोशिश की। अब जो जनता ने हमें निर्णय दिया है, हम न केवल एक कंस्ट्रक्टिव अपोजिशन का रोल निभाएँगे बल्कि हम समाज सेवा, जनता के सुख-दुख में काम आना, व्यक्तिगत तौर पर जिसको भी जरूरत होगी हम लोगों के सुख-दुख में हमेशा काम आएँगे, क्योंकि हम राजनीति में कोई सत्ता के लिए नहीं आए।”

बता दें कि दिल्ली में 27 साल बाद भारतीय जनता पार्टी की वापसी हुई है। चुनाव आयोग के अनुसार, भाजपा अभी तक 20 सीटों पर पूर्ण रूप से जीत हासिल कर चुकी है और बाकी की 27 सीटों पर वो लगातार आगे चल रही है। इस हिसाब से भाजपा के खाते में 47 सीटे आती दिख रही हैं और आम आदमी पार्टी के हिस्से 23 सीटें। इस चुनाव में भी कॉन्ग्रेस को एक सीट नहीं मिली है।

मुस्लिम 45%, मैदान में हिंदू विरोधी दंगों का मास्टरमाइंड भी, फिर भी अदील-ताहिर-मेहदी अली… सबको हराकर मोहन सिंह बिष्ट ने खिलाया ‘कमल’: मुस्तफाबाद से BJP की यह जीत ‘खास’

दिल्ली विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी की करारी हार हुई है। उसके मुखिया अरविन्द केजरीवाल तक हार गए हैं। AAP की 10 वर्ष की सत्ता खत्म हो गई है। इसी चुनाव में भाजपा के एक उम्मीदवार ने मुस्लिम बहुल इलाके मुस्तफाबाद में पार्टी को जीत दिलाई है। मुस्तफाबाद में भाजपा उम्मीदवार मोहन सिंह बिष्ट ने AAP, AIMIM और कॉन्ग्रेस को पटखनी दी है।

मुस्तफाबाद सीट पर मोहन सिंह बिष्ट ने AAP के अदील अहमद को हराया है। मोहन सिंह बिष्ट को 85 हजार से ज्यादा वोट मिले हैं। उन्होंने अदील अहमद को 17 हजार वोटों से हराया है। इस सीट पर AIMIM ने भी दिल्ली दंगों के मास्टरमाइंड ताहिर हुसैन को टिकट दिया था।

ताहिर हुसैन को इस सीट पर 33 हजार वोट मिले हैं। वहीं कॉन्ग्रेस को इस सीट पर 11 हजार 763 मिले हैं। मुस्तफाबाद विधानसभा चुनाव की मतगणना में मोहन सिंह बिष्ट किसी भी राउंड में पीछे नहीं हुए। मुस्तफाबाद वही विधानसभा है, जो दिल्ली में 2020 के हिन्दू विरोधी दंगों के समय काफी प्रभावित रही थी।

मोहन सिंह बिष्ट भाजपा के पुराने और बड़े नेता हैं। वह 1990 के दशक से दिल्ली की राजनीति में सक्रिय हैं। बिष्ट 1998 में पहली बार करावल नगर से भाजपा के ही टिकट पर विधायक बने थे। वह लगातार 2015 तक इस सीट से विधायक रहे। वह 2015 में AAP उम्मीदवार से हार गए थे।

2020 में वापस वह करावल नगर से विधायक चुने गए थे। उन्होंने यहाँ दुर्गेश पाठक को हराया था। मोहन सिंह बिष्ट कि 2025 विधानसभा चुनाव में भाजपा ने सीट बदल दी थी। करावल नगर सीट भाजपा ने हिन्दू छवि वाले नेता कपिल मिश्रा को उतारा था।

मोहन सिंह बिष्ट को मुस्तफाबाद सीट उतारा गया था। उन्होंने मुस्लिम बहुल सीट होने के बावजूद यहाँ जीत हासिल की है। यहाँ लगभग 45% वोट मुस्लिम है। माना जा रहा है कि मुस्लिम वोट कॉन्ग्रेस, AAP और AIMIM के बीच बंट गया है, ऐसे में मोहन सिंह बिष्ट की और मजबूत जीत हुई।

AAP की हार के बाद दिल्ली सचिवालय सील, कोई भी फाइल-दस्तावेज-कंप्यूटर हार्डवयेर बाहर ले जाने पर रोक: डाटा सिक्योरिटी सुनिश्चित करने के लिए उठाए कदम

दिल्ली में हुए विधानसभा चुनावों के नतीजे आने के बाद दिल्ली सरकार के सामान्य प्रशासन विभाग ने दिल्ली सचिवालय को सुरक्षा कारणों का हवाला देकर सील करवा दिया है। यह निर्णय ठीक उसी समय लिया गया जब राजधानी में भारतीय जनता पार्टी की जीत स्पष्ट हुई और AAP के बड़े-बड़े नेताओं को हार का सामना करना पड़ा।

दिल्ली सरकार के सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा जारी एक नोटिस में कहा गया है कि किसी भी फाइल, दस्तावेज़ या कंप्यूटर हार्डवेयर को सचिवालय परिसर से बाहर ले जाने की अनुमति तब तक नहीं है जब तक कि प्रशासनिक विभाग की अनुमति न हो। संयुक्त सचिव प्रदीप तायल ने इस आदेश को जारी करते हुए कहा कि यह कदम सरकारी दस्तावेजों और डेटा की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है।

इस आदेश में यह भी कहा गया है कि सभी संबंधित ब्रांच इन्चार्जों को अपने अनुभागों के अंतर्गत अभिलेखों और फाइलों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक निर्देश दिए जाएँ। नोटिस में ये भी लिखा है कि ये आदेश न केवल सचिवालय कार्यालयों पर लागू होगा बल्कि मंत्रिपरिषद के कैंप ऑफिसों पर भी लागू होगा।

बता दें कि एक ओर दिल्ली की सरकार द्वारा सचिवालय को सील करने का मुख्य कारण सुरक्षा चिंताएँ बताई गई हैं। वहीं दूसरी ओर चुनाव परिणाम आने के बाद, अधिकारियों को तुरंत सचिवालय पहुँचने का निर्देश दिया गया ताकि वे सरकारी दस्तावेज़ और डेटा की सुरक्षा सुनिश्चित कर सकें। ऐसे में सोशल मीडिया पर लोग अंदाजा लगा रहे हैं कि कहीं ये फैसला इसलिए तो नहीं लिया गया कि ताकि 10 साल में हुई गड़बड़ियों और भ्रष्टाचार की फाइलें समय रहते छिपाई जा सकें।

राहुल गाँधी के खिलाफ ओडिशा में FIR, ऑपइंडिया से बोले IG हिमांशु लाल- जाँच जारी, नोटिस देंगे: कॉन्ग्रेस नेता ने कहा था- हम इंडियन स्टेट से लड़ रहे

कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी के खिलाफ ओडिशा में एक FIR दर्ज करवाई गई है। राहुल गाँधी पर आरोप है कि उन्होंने जानबूझ कर लगातार देश विरोधी बयान दिए। राहुल गाँधी के खिलाफ यह FIR भाजपा और हिन्दू संगठनों ने दर्ज करवाई है। पुलिस इस मामले में जाँच में जुटी है।

राहुल गाँधी के खिलाफ यह FIR ओडिशा के झारसुगुडा में करवाई गई है। यह FIR राम हरि पुजारी ने करवाई है। FIR में कहा गया है कि राहुल गाँधी के बयान के चलते देश की एकता और अखंडता को खतरा है। FIR में कहा गया है कि राहुल गाँधी ने भारत राज्य के खिलाफ लड़ाई का ऐलान करके विद्रोह की भावना को बढ़ाया है।

FIR के अनुसार, राहुल गाँधी ने अपने बयान में बोलने की आजादी का दुरूपयोग किया है। इस संबंध में शिकायत भाजपा और हिन्दू संगठनों ने दी थी। उन्होंने इस शिकायत में कॉन्ग्रेस के नए मुख्यालय के उद्घाटन के दौरान राहुल गाँधी के बयान को लेकर एक्शन की माँग की थी।

शिकायत को लेकर आईजी रेंज संबलपुर हिमांशु लाल ने FIR के निर्देश दिए थे। इस मामले में ऑपइंडिया ने संबलपुर रेंज के IG हिमांशु लाल से भी बात की है। IG हिमांशु लाल ने कहा, “भारतीय जनता पार्टी और बजरंग दल, RSS समेत कुछ हिन्दू संगठन के कार्यकर्ताओं ने राहुल गाँधी के बयान को लेकर शिकायत दी थी। इस शिकायत पर पुलिस ने प्रथम दृष्टया जाँच में आरोप सही पाए। मैंने इस संबंध में FIR का आदेश दिया है।”

उन्होंने आगे बताया, “मामले में अब BNS की सुसंगत धाराओं में केस दर्ज हो चुका है, हम इसकी विस्तृत जाँच कर रहे हैं। नियमानुसार इस संबंध में नेता राहुल गाँधी को नोटिस भी भेजा जाएगा और आगे की कार्रवाई की जाएगी। उनका पक्ष भी लिया जाएगा।”

ऑपइंडिया ने इस मामले में एसपी झारसुगुड़ा स्मित परमार से भी बात की जिन्होंने FIR दर्ज किए जाने की पुष्टि की है। उन्होंने बताया है कि राहुल गाँधी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 152 और धारा 197 (1) (D) के तहत मामला दर्ज किया है। ऑपइंडिया के पास इस मामले की FIR कॉपी मौजूद है।

धारा 152 के तहत किसी व्यक्ति पर अलगाव की भावना भड़काने के तहत कार्रवाई की जाती है। इसके अलावा धारा 197 के तहत किसी भी व्यक्ति को समाज तोड़ने की साजिश के मामले में आरोपित बनाया जा सकता है।

गौरतलब है कि कॉन्ग्रेस के कोटला रोड पर बने नए दफ्तर के उद्घाटन समारोह में विवादित बयान दिया था। उन्होंने कहा था कि कॉन्ग्रेस की लड़ाई भाजपा से नहीं है बल्कि वह अब ‘इंडियन स्टेट’ से लड़ रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया था कि भाजपा और RSS ने देश के हर संस्थान पर कब्जा कर लिया है।

‘इलेक्शन तो दुनिया जीतती है, आप हार कर दिखाएँ तो माने’: अवध ओझा का बजा बाजा तो मीमबाजों को याद आए ‘राजा’, कहा- पटपड़गंज था तो छोड़ दिए, पूर्वांचल होता तो काउंटिंग रुकवा देते

दिल्ली की पटपड़गंज विधानसभा सीट से किस्मत आजमाने चुनावी मैदान में उतरे अवध ओझा को भारतीय जनता पार्टी के रवींद्र नेगी के सामने मुँह की खानी पड़ी। ताजा आँकड़ों के मुताबिक अवध ओझा इस समय रवींद्र नेगी से करीबन 12 हजार वोट पीछे चल रहे हैं और रवींद्र नेगी को अब तक कुल 36 हजार वोट आ चुके हैं।

अवध ओझा की चुनावी मैदान में हुई इस फजीहत के बाद उनके नाम पर और पुराने डॉयलॉगों पर कई मीम्स शेयर हो रहे हैं। लोग उनका ये कहकर मजाक उड़ा रहे हैं कि राजनीति के चक्कर में कोचिंग नहीं छोड़नी चाहिए। अब तो वो करियर भी चौपट, ये भी।

नीचे देख सकते हैं कि अवध ओझा की तस्वीर के साथ लिखा जा रहा है- “इलेक्शन तो दुनिया जीतती है साहब, आप हार के देखें तो मानें।”

एक मीम में लिखा गया- “वो तो पटपड़गंज था इसलिए छोड़ दिया। अपना पूर्वांचल होता तो काउंटिंग रुकवा देते।”

एक मीम में देख सकते हैं नेटिजन्स ने अवध ओझा के स्टाइल का मजाक बनाते हुए लिखा है- “जीत क्या जीत? हार में भी लोग आपकी बात करें ये होती है राजा मेंटेलिटी। आप हार रहे हो लेकिन हर जगह आपकी चर्चा हो ये होता है राजा का व्यक्तित्व।”

ऐसे ही तमाम वीडियो, तस्वीर और डायलॉग के जरिए अवध ओझा को लेकर सोशल मीडिया पर बातें हो रही हैं। लोग उनके राजनीति में आने के फैसले को ही गलत बता रहे हैं। कहा जा रहा है कि इससे बढ़िया अगर ये क्लास देते तो साख बची रहती।

बता दें कि अवध ओझा सोशल मीडिया पर अपनी कोचिंग क्लास में करने वाले ढंग के कारण वायरल हुए थे। इसके बाद उनकी कई वीडियो सामने आई जिसमें वो इस्लाम को पूरी दुनिया में रोशनी लाने वाला मजहब बताते थे और भगवान कृष्ण पर विवादित टिप्पणी करते थे। सोशल मीडिया पर इन कारणों से उनकी खूब आलोचना हुई लेकिन फिर भी AAP ने उन्हें राजनीति में उतरने का मौका दिया और उनका जमकर प्रचार भी किया। हालाँकि, नतीजे देख लगता है कि किस्मत इस बार अवध ओझा के साथ नहीं थी। खबर लिखे जाने वो रवींद्र नेगी से 12 हजार वोटों से पीछे चल रहे हैं।

11 मुस्लिम बहुल सीटों पर भी AAP को झटका, ओखला से लेकर सीलमपुर तक मिल रही हार: कॉन्ग्रेस-AIMIM ने बाँट लिए वोट

दिल्ली विधानसभा चुनाव के नतीजे शुक्रवार (8 फरवरी, 2025) को सामने आ रहे हैं। चुनाव के रुझानो में भाजपा 27 सालों के बाद सत्ता में वापस लौटती दिखाई पड़ रही है। AAP की हालत काफी बुरी होने वाली है, ऐसा रुझान दिखा रहे हैं। लेकिन इस बीच AAP को उन मुस्लिम इलाकों में भी वोट नहीं मिल रहे जहाँ, उसने 2013 के बाद से लगातार अपनी बादशाहत बरकरार रखी थी। AAP के कई बड़े नाम पीछे हैं।

दिल्ली की चर्चित ओखला सीट, जहाँ से अमानतुल्लाह खान विधायक बनते थे, वह 2025 चुनाव में पिछड़ते दिख रहे हैं। उन्हें भाजपा के मनीष चौधरी ने तगड़ी लड़ाई दी है और उनसे वह 9:30 बजे तक की गिनती में 1800+ वोट से आगे चल रहे हैं। इस सीट पर मुस्लिम वोट AAP और कॉन्ग्रेस के बीच बंटने की संभावना है।

वहीं दिल्ली की मुस्तफाबाद सीट पर भी AAP को बुरी हार का सामना कर पड़ सकता है। BJP के मोहन बिष्ट AAP के अदील अहमद खान से 5 हजार वोटों से आगे चल रहे हैं। आगे यह अंतर और बढ़ने की संभावना है। कॉन्ग्रेस के वोट काटने की बात भी यहाँ सामने आ रही है। मुस्लिम वोट बंटने में AIMIM उम्मीदवार ताहिर हुसैन का भी रोल माना जा रहा है।

मुस्लिम बहुल सीट जंगपुरा से भी भाजपा ही आगे है। यहाँ भाजपा के तेजिंदर सिंह मारवाह ने AAP के मनीष सिसोदिया को पीछे छोड़ा हुआ है। मनीष सिसोदिया इससे पहले पटपडगंज से चुनाव लड़ते थ। वह इस चुनाव में सीट बदल कर यहाँ आए थे। हालाँकि, उन्हें इस काम का भी कोई फायदा नहीं मिल रहा है।

कस्तूरबा नगर सीट पर भी भाजपा की बढ़त है। कस्तूरबा नगर से भाजपा के नीरज बैसोया आगे हैं। उन्होंने AAP के नरेश पहलवान 2500 वोट से आगे हैं। शकूर बस्ती सीट से भाजपा के करनैल सिंह आगे हैं, उन्होंने AAP के सत्येन्द्र जैन को 3000 वोट से पीछे छोड़ा हुआ है।

वहीं मुस्लिम वोटों वाली चाँदनी चौकी सीट से AAP को बढ़त मिल रही है। यहाँ से AAP को पुनर्दीप सिंह साहनी कॉन्ग्रेस के मुदित अग्रवाल को पीछे छोड़ा हुआ है। मटिया महल सीट पर भी AAP को बढ़त मिली है। यहाँ AAP के आले मोहम्मद इकबाल ने असीम अहमद खान को 4000 वोट से पीछे किया हैं।

बाबरपुर सीट से गोपाल राय आगे हैं। यहाँ AAP ने भाजपा को 5000 वोट से पीछे छोड़ा हुआ है। VIP सीट करावल से कपिल मिश्रा आगे हैं। यहाँ भी बड़ी संख्या में मुस्लिम वोट है। कपिल मिश्रा AAP उम्मीदवार से 6 हजार वोटों से आगे हैं।

मुस्लिम वोट वाली सीलमपुर में AAP को थोड़ी बढ़त मिली है। यहाँ से AAP के जुबैर अहमद को भाजपा के अनिल शर्मा से 700 वोटों की बढ़त मिली है। मुस्लिम बहुल सीमापुरी में AAP को थोड़ी बढ़त हासिल है। यहाँ AAP के वीर सिंह धींगन भाजपा की रिंकू से आगे हैं।