हरियाणा के पानीपत में 19 साल की प्रिया की मौत के मामले में पुलिस ने चार लोगों पर मामला दर्ज किया है। बुधवार (3 मई 2020) को प्रिया फाँसी के फंदे से लटकी मिली थी। 7 महीने पहले ही उसने खुद से करीब 20 साल बड़े अब्दुल उर्फ सलमान से भागकर निकाह किया था।
प्रिया की माँ गीता देवी के अनुसार अब्दुल ने उसे लव जिहाद का शिकार बनाया था। उन्होंने अब्दुल, उसकी पत्नी बेगम, पूजा और बेबी पर अपनी बेटी को आत्महत्या के लिए मजबूर करने का मामला दर्ज कराया है।
प्रिया की माँ ने शिकायत में बताया कि अब्दुल ने उनकी बेटी को बहला फुसलाकर प्यार में फँसाया। बाद में उसे घर वालों की मर्जी के खिलाफ भगा कर ले गया और निकाह कर ली। गीता देवी के अनुसार प्रिया को शादी के बाद पता चला कि अब्दुल पहले से ही 5 बच्चों का बाप है। यहाँ तक कि प्रिया से शादी के बाद भी उसका किसी और महिला के साथ अवैध संबंध था। इसका विरोध करने पर वह प्रिया को मारता-पीटता था। कई बार तो उसको जान से मारने की धमकी भी दी थी।
प्रिया की माँ ने बताया कि 2 जून को उनकी बेटी ने फ़ोन कर अब्दुल और उसके अफेयर के बारे में बताया था। मगर भागकर शादी करने की वजह से वो उससे नाराज थी और उस वक्त उन्होंने अपनी बेटी की बातों को अनसुना कर दिया। फिर बुधवार को उन्हें प्रिया के मौत की खबर मिली।
उन्होंने बताया कि जब वह बेटी के घर पहुँची तो पाया कि कमरे के दरवाजे को किसी चीज़ से काटा गया था। साथ ही कमरे की हालत देखकर ऐसा लग रहा था जैसे किसी ने सबूतों के साथ छेड़छाड़ करनी की कोशिश की हो।
गीता देवी का यह आरोप भी है प्रिया ने आत्महत्या नहीं की है। अब्दुल और उसकी प्रेमिका ने मिल कर उसकी हत्या की और इसे आत्महत्या का रूप दे दिया। उन्होंने पुलिस पर भी मामले की दबाने का आरोप लगाया है। साथ ही कहा है कि मामला दर्ज करने के बाद से उन्हें भी धमकी दी जा रही है।
मॉडल टाउन थाना प्रभारी सुनील कुमार के अनुसार आरोपियों के खिलाफ आइपीसी की धारा 306 /506/34 के तहत मुकदमा दर्ज किया है। आगे जाँच जारी है। फरार आरोपियों के खिलाफ कुछ अहम सुराग हाथ लगे हैं। उन्हें जल्द ही गिरफ्तार कर लिया जाएगा।
गौरतलब है कि कथित तौर पर लव जिहाद में हत्या का एक मामला हाल ही में मेरठ से भी सामने आया है। लुधियाना की एकता देशवाल को शाकिब ने अमन बनकर प्रेम जाल में फॅंसाया और उसके घर से भगाकर ले गया। जब एकता को उसके मुस्लिम होने की बात पता चली तो शाकिब ने घर वालों के साथ मिलकर उसकी हत्या कर दी। हत्या कितनी निर्ममता से की गई थी इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि एकता की लाश का सिर और हाथ गायब थे।
बिहार के दरभंगा जिले में शुक्रवार (जून 5, 2020) को हुए धमाके को लेकर स्थिति पूरी तरह अब भी स्पष्ट नहीं है। पुलिस जिसे प्रथम दृष्टया पटाखा बनाने के दौरान हुआ विस्फोट बता रही है, उसको लेकर आज के अखबारों में प्रकाशित रिपोर्ट में कई तरह के दावे किए जा रहे हैं।
दैनिक जागरण की रिपोर्ट बताती है कि घटनास्थल के आसपास से सुतली लपेटे कई बम और केन बम में इस्तेमाल की जाने वाली प्लेटें भी मिली है। इसमें बताया गया है कि इसके अंदर से बारूद की गंध वाला धुआँ निकल रहा था। नगर एसपी ने बताया कि नजीर के घर से पटाखा बनाने के कई सामान मिले हैं। वह बिना लाइसेंस के दिवाली और छठ में पटाखे बेचता था।
साभार: दैनिक जागरण
हिन्दुस्तान ने भी अपनी रिपोर्ट में बताया है कि नजीर के घर में वर्षों से अवैध रूप से पटाखे बनाने का काम चलता था। स्थानीय लोगों के हवाले से बताया है कि वर्षों से मुहल्ला बारूद की ढेर पर बैठा था। विस्फोट इतना तेज था कि लोगों को समझ में ही नहीं आया कि आखिर हुआ क्या है? कुछ ने जलजला आने की बात कही तो कुछ ने धरती फटने की।
हिन्दुस्तान में प्रकाशित रिपोर्ट
हिन्दुस्तान के अनुसार लोगों ने पुलिस के कामकाज पर भी सवाल उठाए। लोगों का कहना था कि अगर पुलिस सही तरीके से छानबीन करे तो शहर में कई अन्य जगहों पर अवैध रूप से पटाखे बनाने के कारोबार की बात सामने आ सकती है।
साथ ही बताया जा रहा है कि घटना में घायल नजीर के बच्चों का बयान घटना से मेल नहीं खा रहा है। बच्चे को जख्मी हालत में अस्पताल ले जाया गया तो उसने सिलिंडर फटने से जख्मी होने की बात पुलिस को बताई। वहीं बाद में इलाज के लिए पहुँचाई गई युवती ने पुलिस को बताया कि वह फ्रिज में विस्फोट होने की वजह से घायल हो गई।
फ्रिज फटने से जख्मी होने की बात दैनिक भास्कर में भी रिपोर्ट की गई है।
साभार: दैनिक भास्कर
प्रभात खबर ने भी अपनी रिपोर्ट स्थानीय लोगों के हवाले से बताया कि नजीर की गतिविधि पहले से ही संदिग्ध थी।
प्रभात खबर में प्रकाशित खबर
ऑपइंडिया को भी कुछ चश्मदीदों ने बताया था कि मोहम्मद नजीर काफी समय से पटाखा बनाने का कारोबार घर में ही कर रहा था। यदि पटाखे की ही बात सही है कि तो इस बात का जवाब मिलना चाहिए कि घनी आबादी वाले इलाके में यह धंधा कैसे चल रहा था? क्या प्रशासन को इसकी खबर नहीं थी और अगर थी तो फिर उन्होंने इसे बंद करवाने की दिशा में कोई कदम क्यों नहीं उठाया?
दूसरा सवाल मीडिया रिपोर्टों से खड़ा होता है। वह यह है कि क्या पटाखे की आड़ में मोहम्मद नजीर घर में बम बना रहा था? फिलहाल पुलिस इस बात की जाँच में जुटी है। उम्मीद की जानी चाहिए कि दरभंगा पुलिस इन सवालों के जवाब जल्द ही तलाश लेगी। मामले में पुलिस ने नजीर, उसकी पत्नी हसीना बेगम और दो बेटों गुलाब नदाफ एवं फूल बाबू को गिरफ्तार किया है।
पत्रकार विनोद दुआ पर दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने मामला दर्ज किया है। बीजेपी प्रवक्ता नवीन कुमार की शिकायत पर FIR दर्ज की गई है। दुआ पर फर्जी न्यूज़ फैलाने और समाज में गड़बड़ी पैदा करने वाले बयान देने के आरोप हैं।
नवीन कुमार ने अपनी शिकायत में ‘द विनोद दुआ शो’ के माध्यम से फर्जी खबर फैलाने, अनर्गल बातों व फालतू के तर्कों को वीडियो के माध्यम से लाकर समाज में जहर फैलाने का आरोप लगाया है। यह भी कहा है कि दुआ ने प्रधानमंत्री को ‘कागजी शेर’ बताया था। उन्होंने एफआईआर को लेकर एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर शेयर किया है।
उन्होंने कहा है कि दुआ ने दिल्ली में नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) और राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) के खिलाफ विरोध-प्रदर्शन को गलत तरीके से पेश किया। प्रधानमंत्री, गृह मंत्री और भाजपा नेता कपिल मिश्रा को इसके लिए जिम्मेदार ठहराते हुए झूठा आरोप लगाया।
नवीन ने आगे कहा कि दुआ ने दिल्ली दंगों को प्रधानमंत्री और गृह मंत्री के इशारे पर दिल्ली पुलिस द्वारा किया गया कृत्य करार दिया था, जो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत सरकार और दिल्ली पुलिस की छवि को खराब करता है। साथ ही दुआ ने बीजेपी नेताओं पर दिल्ली दंगों में शामिल होने का आरोप लगाते हुए दंगे की साजिश रचने के मामले में गिरफ्तार किए गए आरोपित मुस्लिम नेता को हीरो बताया था।
अपने ऊपर दर्ज किए गए एफआईआर की जानकारी दुआ ने फेसबुक के जरिए दी है। उन्होंने कहा है कि दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने उनके खिलाफ केस दर्ज किया है।
क्राइम ब्रांच के अनुसार विनोद दुआ पर आईपीसी की धारा 290 (अन्यथा दिए गए मामलों में सार्वजनिक उपद्रव के लिए सजा) और 505 (सार्वजनिक शरारत के लिए अनुकूल बयान) और 505 (2) (विभिन्न समुदायों के बीच झूठे बयान, दुश्मनी, नफरत पैदा करने या बढ़ावा देन) के तहत मामला दर्ज किया गया है।
अमेरिका के मिनियापोलिस में अफ्रीकी-अमेरिकी व्यक्ति जॉर्ज फ्लॉयड की हत्या ने हड़कंप मचा रखा है। अमेरिका के कई शहरों में प्रदर्शनकारियों ने नस्लीय भेदभाव के विरोध में सड़कों पर उतर प्रदर्शन किया।
अश्वेत अमेरिकी नागरिक फ्लॉयड की मौत के वीडियो ने दुनिया भर में कई हिंसक विरोध प्रदर्शन को जन्म दिया। हालाँकि, आरोपित पुलिसउस अधिकारी, डेरेक चाउविन को थर्ड-डिग्री हत्या और दूसरी डिग्री की हत्या के आरोप में निकाल दिया गया है।
फ्लॉयड की दुर्भाग्यपूर्ण मौत ने न केवल अमेरिका में, बल्कि दुनिया भर में विरोध प्रदर्शनों को अंजाम दिया, जहाँ प्रदर्शनकारी या तो अमेरिका में नस्लीय भेदभाव के शिकार लोगों के साथ एकजुटता के साथ विरोध-प्रदर्शन कर रहे हैं, या फिर अपने देशों में कथित असमानताओं का विरोध कर रहे हैं।
जॉर्ज फ़्लॉयड की मृत्यु की खबर से दुनियाभर में दहशत का माहौल है तो वहीं, भारतीय मीडिया राजस्थान की एक ऐसी घटना, जिसमें एक आरोपित ने पुलिसकर्मियों से मारपीट की, और अफ्रीकी-अमेरिकी की हत्या के बीच एक खतरनाक और बेहद अव्यवहारिक समानता को धरातल देने का काम कर रहा है।
पुलिसकर्मी की बर्बरता जॉर्ज फ्लॉयड की मौत की वजह बताई जा रही है
दरअसल एक उपद्रवी और पुलिस अधिकारियों के बीच हाथापाई का वीडियो, जिसमें पुलिसकर्मी ने इस आदमी को जमीन पर ऐंठ रखा है, इंटरनेट पर तेजी से शेयर किया जा रहा है। भारत के कई मीडिया संस्थानों ने इस घटना को अमेरिका की घटना के साथ तुलना कर पेश किया, जहाँ अफ्रीकी-अमेरिकी जॉर्ज फ्लॉयड को मिनियापोलिस के अधिकारियों द्वारा उनकी गर्दन सड़क पर घुटनों से दबाकर रखी, जिससे उनकी मौत हो गई।
‘टाइम्स नाउ’ चैनल ने इस घटना को ‘भारत के जॉर्ज फ्लॉयड क्षण’ के रूप में दिखाया, जिसमें दावा किया गया कि पुलिस ने एक व्यक्ति की गर्दन पर प्रहार करते हुए हमला किया।
टाइम्स नाउ से लिया गया स्क्रीनशॉट
ABP न्यूज चैनल ने भी पुलिस और इस व्यक्ति के बीच झड़प को भारत में ‘जॉर्ज फ्लॉयड जैसी घटना’ के रूप में दिखाकर पेश किया है।
ABP न्यूज़ ने इसे भारत का ‘जॉर्ज फ्लॉयड मोमेंट’ नाम दिया है
कई अन्य संगठनों ने भी झड़प के इस वीडियो, जो कि जोधपुर में पुलिस अधिकारियों और एक गुंडे के साथ हुई, की तुलना जॉर्ज फ्लॉयड की हत्या वाले वीडियो से करने की कोशिश की है। यहाँ इस घटना का पूरा वीडियो है;
क्या है जोधपुर में पुलिस से झड़प वाले वीडियो की वास्तविकता
पुलिस के साथ झड़प की घटना का यह वीडियो राजस्थान के जोधपुर से संबंधित है। पुलिस के जवानों ने सोमाकरण नाम के व्यक्ति को सार्वजनिक स्थान पर बिना मास्क के पाया था। सार्वजनिक स्थानों पर मास्क न पहनने के कारण उसे गिरफ्तार कर लिया। मास्क पहनने के दिशा-निर्देशों का उल्लंघन करने के लिए उसका चालान करने की कोशिश की।
लेकिन, इस आदमी ने पुलिस की बात मानने से इनकार करते हुए उनसे उलझ पड़ा, जैसा कि वायरल वीडियो में देखा जा सकता है। इस उपद्रवी तत्व द्वारा हमला किए जाने के बाद, पुलिस अधिकारियों ने सोमाकरण नाम के इस शख्स को नीचे गिरा दिया और उसे नियंत्रण में लाने के लिए उसकी गर्दन पर घुटने लगा दिए।
जॉर्ज फ्लॉयड और जोधपुर, ये दोनों घटनाएँ एकदम विपरीत हैं
भारतीय मीडिया द्वारा सनसनी बनाई जा रही यह घटना संयुक्त राज्य अमेरिका में जॉर्ज फ्लॉयड की हत्या के एकदम विपरीत है। फ्लॉयड ने पुलिस अधिकारियों को मारने के लिए हिंसक तरीके नहीं अपनाए। इसके बजाए, एक कानून का पालन करने वाले नागरिक की तरह ही फ्लॉयड ने पुलिस के निर्देशों का अनुपालन किया और फिर भी उनके साथ पुलिस ने दुर्व्यवहार किया, संभवतः जिस कारण उनकी मृत्यु हो गई।
अमेरिका में अश्वेतों के खिलाफ किए गए नस्लीय अपराधों का एक बड़ा इतिहास है। जॉर्ज फ्लॉयड अमेरिकी पुलिस द्वारा संस्थागत अफ्रीकी-अमेरिकी समुदाय के खिलाफ संस्थागत नस्लीय अत्याचार का शिकार था, जिसका अफ्रीकी अमेरिकी मूल के लोगों के खिलाफ बर्बरता बरतने का एक लंबा इतिहास रहा है।
इसके विपरीत, जोधपुर की घटना में पुलिस अधिकारियों द्वारा एक गलत काम करने वाले को रोकने की कोशिश करने का सन्दर्भ था, जिसने कोरोना वायरस महामारी के बीच न केवल लॉकडाउन संबंधी दिशा-निर्देशों का उल्लंघन किया, बल्कि मानदंडों की अवहेलना के लिए दोषी ठहराए जाने पर उनके साथ मारपीट भी की।
यहाँ पर अंतर स्पष्ट है कि पुलिस ने जानबूझकर इस उपद्रवी के खिलाफ हमला नहीं बोला। उनके साथ मारपीट करने के बाद ही उन्हें इस व्यक्ति के खिलाफ कठोर कदम उठाने के लिए मजबूर किया गया। इसके अलावा, अमेरिका में फ्लॉयड की मृत्यु ने एक बार फिर नस्लीय भेदभाव को सामने ला दिया, जो अमेरिकी समाज का कलंक रहा है।
जॉर्ज फ्लॉयड की मौत और जोधपुर की इस घटना के बीच समानता साबित करने का कुत्सित प्रयास सिर्फ और सिर्फ भारतीय मीडिया के प्रोपेगेंडा का हिस्सा है। राष्ट्र विरोधी लॉबी पीएम मोदी से गहरी नफरत के कारण निरंतर ऐसे मुद्दों को भड़काने के लिए तत्पर देखी गई है।
केरल के पलक्कड़ में गर्भवती हथिनी की मौत के मामले में भाजपा सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री मेनका गाँधी के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। उनके खिलाफ यह मामला गर्भवती हथिनी की मौत के मामले में कथित रूप से भड़काऊ टिप्पणी करने को लेकर दर्ज किया गया है। मेनका गाँधी के खिलाफ आईपीसी की धारा 153 के तहत FIR दर्ज की गई है। मलप्पुरम जिले के पुलिस प्रमुख अब्दुल करीम ने इसकी पुष्टि की।
बता दें कि बीजेपी सांसद के खिलाफ एक ही कारण से सात शिकायतें की गई थी, जिसके बाद उन सभी को लेकर एक FIR दर्ज की गई है। शिकायत करने वालों में इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (IUML), यूथ कॉन्ग्रेस, डेमोक्रेटिक यूथ फेडरेशन ऑफ इंडिया, सॉलिडैरिटी यूथ मूवमेंट और सुप्रीम कोर्ट के वकील केआर सुभाष चंद्रन शामिल हैं।
सुभाष चंद्रन ने गुरुवार को जिले के पुलिस अधीक्षक के पास शिकायत दर्ज कराई और मेनका गाँधी एवं अन्य के खिलाफ FIR दर्ज करने की माँग की। उन्होंने अपनी शिकायत में बीजेपी सांसद एवं अन्य के खिलाफ आईपीसी की धारा 153ए और 12बी के तहत FIR दर्ज करने का अनुरोध किया था।
शिकायत में कहा गया कि मल्लपुरम पर मेनका गाँधी की टिप्पणी अपमानजनक है और जिले के निवासियों की छवि को खराब करने के लिए दिया गया है। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि हथिनी की दुर्भाग्यपूर्ण मौत पलक्कड़ जिले के मन्नारकाड इलाके में हुई, जबकि सोशल मीडिया पर एक समूह ने इसे सांप्रदायिक रंग देने के लिए मुस्लिम बहुल मल्लपुरम जिला के लोगों के खिलाफ नफरत फैलाया। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि मेनका गाँधी ने दंगा भड़काने की मंशा से मलप्पुरम के लोगों के खिलाफ आधारहीन आरोप लगाए हैं।
Mallapuram is know for its intense criminal activity specially with regards to animals. No action has ever been taken against a single poacher or wildlife killer so they keep doing it. I can only suggest that you call/email and ask for action pic.twitter.com/ii09qmb7xW
— Maneka Sanjay Gandhi (@Manekagandhibjp) June 3, 2020
हथिनी की मौत को लेकर मेनका गाँधी ने कहा था, “ये हत्या है। मल्लपुरम ऐसी घटनाओं के लिए कुख्यात है। यह देश का सबसे हिंसक राज्य है। यहाँ लोग सड़कों पर जहर फेंक देते हैं, जिससे 300 से 400 पक्षी और कुत्ते एक साथ मर जाएँ। केरल में हर तीसरे दिन एक हाथी को मार दिया जाता है। केरल सरकार ने मल्लपुरम मामले में अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की है। ऐसा लगता है, वो डरे हुए हैं।”
— Maneka Sanjay Gandhi (@Manekagandhibjp) June 3, 2020
इसके साथ ही शुक्रवार (जून 5, 2020) को खुद को केरल साइबर वॉरियर्स कहने वाले एक समूह ने मेनका गाँधी की संस्था बेबसाइट पीपुल फॉर एनिमल्स, इंडिया की वेबसाइट को हैक कर लिया। इसके बाद कथित साइबर वॉरियर्स ने हैक किए गए पेज पर एक लंबा पोस्ट किया, जिसमें गर्भवती हथिनी की मौत पलक्कड़ में होने को लेकर Google मैप दिखाया गया।
जानकारी के मुताबिक गर्भवती हथिनी की मौत के बाद पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में सामने आया है कि उसके मुँह के अंदर गहरे घाव हो गए थे, जो संभवत: पटाखों के विस्फोट की वजह से थे और इस कारण वह लगभग दो सप्ताह तक कुछ खा नहीं सकी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार ऐसी आशंका है कि मुँह में पटाखे फटने से उसे गहरे घाव हो गए और उस जगह पर सेप्सिस हो गया।
इससे इससे दर्द बढ़ गया और हथिनी लगभग दो सप्ताह तक कुछ खा-पी नहीं सकी। गंभीर दुर्बलता के कारण वह पानी में गिर गई और डूब गई। हथिनी की मौत के एक दिन बाद 28 मई को तैयार शुरुआती रिपोर्ट में कहा गया कि डूबने के बाद शरीर में पानी भरने के चलते फेफड़ों का काम नहीं करना हथिनी की मौत का कारण था।
उल्लेखनीय है कि पिछले हफ्ते एक गर्भवती हथिनी को किसी ने पटाखों से भरा अनानास खिला दिया। पगल के अधिकारियों ने उसे बचाने की भरपूर कोशिश की। कथित तौर पर कुछ स्थानीय लोगों ने 25 मई को इस हथिनी को गाँव में आते हुए देखा था और 27 मई को पूरे दिन पानी में खड़े रहने के बाद उसकी मौत हो गई।
मामले में पी विल्सन नाम के एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया गया है, जबकि अब्दुल करीम और उसके बेटे की तलाश की जा रही है।
केरल में गर्भवती हथिनी की मौत के मामले की जाँच तेज हो गई है। पुलिस ने जानकारी दी है कि मामले के दो आरोपी अभी भी फरार हैं। पलक्कड़ के पुलिस अधीक्षक जी शिवा विक्रम ने फरार होने वाले लोगों के नाम अब्दुल करीम और उसका बेटा रियासुद्दीन बताया है। दोनों ही अंबालाप्पारा के निवासी हैं।
दरअसल दोनों के उस संपत्ति के मालिक होने का संदेह है, जहाँ से आरोपित पी विल्सन को गिरफ्तार किया गया है। इस मामले में दो प्राथमिकी दर्ज की गई है। एक पुलिस ने जबकि दूसरी प्राथमिकी वन विभाग द्वारा दर्ज कराई गई है।
पलक्कड़ में मन्नारक्कड़ पुलिस ने 3 जून को अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की थी। प्राथमिकी के आधार पर धारा 9 बी (1) (बी)(विस्फोटक अधिनियम, 1884) के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। इस अधिनियम के तहत विस्फोटक रखने, उसका उपयोग करने, बिक्री या एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाने पर कारावास की सजा का प्रावधान है।
एक मामला पशु क्रूरता रोकथाम अधिनियम 1960 के सेक्शन की धारा 11(1) के तहत दर्ज किया गया है, जिसमें उपधारा (1) (ए) के तहत पशुओं को पीटना, उनको प्रताड़ित करना, वाहन में ओवरलोड करना, यातनाएँ देना आदि शामिल है।
केरल पुलिस ने इस मामले पी विल्सन नाम के एक व्यक्ति को गिरफ्तार कर लिया है। खबरों के मुताबिक केरल के वन मंत्री के राजू ने कहा कि पी विल्सन को शुक्रवार (05, 2020) को गिरफ्तार किया गया, जो कि नकदी फसलों और मसालों की खेती करने वाली एक फर्म का कर्मचारी है।
कथित तौर पर आरोपितों ने पूछताछ में बताया कि उन्होंने जंगली सूअर को डराने के लिए पटाखों से भरे फलों का एक जाल बिछाया था, क्योंकि जंगली सूअर आए दिन उनकी खेती को नष्ट कर देते हैं।
दरअसल अन्नास में रखे पटाखों को खाने से गंभीर रूप से घायल हुई 15 वर्षीय हथिनी की मौत पलक्कड़ में हो गई थी। यह घटना 27 मई को तब सामने आई थी कि जब वन विभाग के अधिकारी मोहन कृष्णन ने हथिनी की मौत के बारे में एक फेसबुक पोस्ट लिखा था।
पटाखा से भरे फल खाने के बाद हथिनी पास के वेल्लियार नदी में जा गिरी। जंगल के अधिकारियों ने भी इसे बचाने की भरपूर कोशिश की। कथित तौर पर कुछ स्थानीय लोगों ने 25 मई को इस हथिनी को गाँव में आते हुए देखा था और 27 मई को पूरे दिन पानी में खड़े रहने के बाद उसकी मौत हो गई।
मृत हथिनी की पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट से पता चला है कि अन्नास में पटाखे रखकर उसे खिलाया गया था, जिसके फटने से उसका मुँह गंभीर रूप से घायल हो गया था। मुँह में गहरे घाव के चलते वह दो दिन तक कुछ नहीं खा सकी, जिसके कारण वह कमजोर होकर पानी में ही गिर गई।
उदयपुर जिले के सराड़ा थाना क्षेत्र में 1 जून को केजड़ तालाब पर मछली पकड़ने के विवाद में एक हिंदू दलित युवक मुकेश मीणा की देर रात चाकू मारकर हत्या कर दी गई। इस घटना में मुकेश का दोस्त राजू मीणा भी बुरी तरह घायल हो गया। उसका इलाज स्थानीय अस्पातल में चल रहा है।
इस मामले के संबंध में पुलिस ने 6 युवकों को गिरफ्तार किया है। इनका पहचान जफर, सईद, मक्का, अहमदनूर, अकील, फिरोज के रूप में हुई है। इनके ख़िलाफ़ पुलिस ने हत्या, हत्या के प्रयास और SC/ST एक्ट के तहत मामला दर्ज किया है।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मुकेश की हत्या की सूचना मिलने के बाद उसके घरवालों के समर्थन में अगली सुबह 700 से 1000 दलित लोग एकत्रित हुए। शव का दाह संस्कार करने से इनकार कर दिया। बाद में प्रशासन की ओर से आश्वासन मिलने पर उन्होंने मुकेश के शव का अंतिम संस्कार किया।
मामला दो समुदायों से जुड़ा होने के कारण और इलाके में इकट्ठा भीड़ को देखते हुए पुलिस ने इलाके को हाई अलर्ट पर रखा। मामले को संवेदनशील देखते हुए पुलिस ने आसपास के 12 थानों से अतिरिक्त पुलिस बल बुलवाया। इसके साथ ही इंटरनेट सेवा भी सराड़ा में और उसके आसपास के इलाकों में 24 घंटे के लिए बाधित की गई।
पूरा मामला
1 जून को रात 9:30 बजे मुकेश और घायल राजू अपने दोस्तों के साथ केजड़ तालाब में मछली पकड़ने के लिए गए। मगर, वहाँ उन्होंने देखा कि तालाब के पास तीन अन्य युवक पहले से बैठे हुए थे। जिन्होंने बाद में मछली पकड़ने के विवाद पर अपने तीन अन्य साथियों को तालाब के पास बुलाया लिया। वे सभी वहाँ हथियार लेकर आए।
इसके बाद युवकों ने मुकेश और राजू पर वार किया। मुकेश की मौके पर मौत हो गई। वहीं राजू को एमबी हॉस्पिटल रेफर किया। इसके बाद परिजनों को सूचना दी गई। रातभर में सूचना आसपास के गाँव में फैल गई।
समुदाय की माँग
यहाँ बता दें कि इस घटना के तूल पकड़ने के बाद समुदाय के बुजुर्गों ने प्रशासन को पत्र लिखा। इस पत्र में उन्होंने 14 बिंदु के साथ कुछ अनुरोध किए। इनमें से कुछ निम्नलिखित हैं-
आरोपितों को कड़ी से कड़ी सजा दी जाए
मामले में अच्छे से फॉरेंसिक जाँच हो
आरोपितों के ख़िलाफ़ सर्च वारंट जारी हो
म़तक के परिवार को 5 लाख रुपए का मुआवजा दिया जाए
पीड़ित परिवार को सरकारी नौकरी मिले
मुस्लिम समुदाय के लोगों को चावंड, महुवाड़ा और सारदा से हटाकर किसी अन्य स्थान पर स्थानांतरित किया जाए।
जानकारी के मुताबिक, मंगलवार शाम तक पुलिस इस मामले में ग्रामीणों को शांत कराने में असफल थी। मगर, बाद में एसएसपी बिश्नोई और जिलाधिकारी आनंदी ने मामले में संज्ञान लिया, जिसके बाद उन्होंने समुदाय के लोगों को उनकी माँग को लेकर आश्वस्त किया और मुकेश का दाह संस्कार संपन्न हो पाया।
बिहार का दरभंगा शुक्रवार (5 जून 2020) की दोपहर भीषण धमाके से दहल गया था। विश्वविद्यालय थाना क्षेत्र के आजमनगर दुर्गा मंदिर के पास स्थित मोहम्मद नजीर के घर धमाका हुआ था। धमाके की आवाज करीब एक किलोमीटर तक सुनी गई।
धमाके से नजीर का पूरा मकान जमींदोज हो गया। आसपास के करीब एक दर्जन अन्य घरों को भी नुकसान पहुॅंचा है। नजीर के कुछ परिजन जख्मी भी हैं जिनका डीएमसीएच में इलाज चल रहा है। इनमें तीन बच्चे हैं।
दरभंगा के डीएसपी अनोज कुमार ने ऑपइंडिया से बातचीत में तीन बच्चों के गंभीर रूप से जख्मी होने के पुष्टि की है। पुलिस ने नजीर, उसकी पत्नी और दो बेटों को गिरफ्तार किया है।
एक चश्मदीद ने बताया कि धमाका इतना जोरदार था कि उनका पूरा घर हिल गया। जब उन्होंने बाहर आकर देखा तो नजीर का घर गिरा हुआ था और आसपास काफी भीड़ लगी थी। नजीर के पड़ोस में रहने वाले इस चश्मदीद का दावा है कि वह काफी समय से पटाखे बनाने का काम कर रहा था।
एक अन्य चश्मदीद भरत ने भी बताया कि नजीर पटाखे बनाने का काम करता था। उसके घर में हुए विस्फोट से काफी नुकसान हुआ है। कई घर क्षतिग्रस्त हो गए हैं। गाय को भी चोट आई है। इसके अलावा नजीर के खुद के घर के लोगों को भी चोट पहुँची है। जिन्हें अस्पताल भेजा गया है।
इसी प्रकार, घटना वाली जगह से थोड़ी दूर पर फर्नीचर की दुकान करने वाले सोनू कुमार शर्मा ने बताया कि धमाका इतना जोरदार था कि उन्हें लगा मानो दो-तीन छत उनके ऊपर गिर गए हो। उन्होंने बताया कि धमाके के कारण बगल के घरों में वेंटिलेशन से ईंट-पत्थर के टुकड़े अंदर आ गए थे।
सोनू ने बताया कि उन्होंने कुछ समय पहले ही इस जगह दुकान खोली है। इसलिए उन्हें ये नहीं मालूम कि उस घर में क्या होता था? लेकिन जो भी था, इतना खतरनाक था कि उन लोगों को लगा जैसे कोई बम या सिलेंडर फटा हो।
पुलिस के अनुसार पहली नजर में पटाखे के कारण हुआ विस्फोट लग रहा है। मीडिया रिपोर्टों में सिटी एसपी के हवाले से बताया गया है कि इस मामले की हर एंगल से जाँच की जा रही है। बम स्क्वायड और FSL की टीम भी बुलाई गई है। जाँच के बाद खुलासा हो पाएगा कि आखिर ये किस प्रकार का ब्लास्ट था। प्रथम दृष्टया जाँच के मुताबिक लगता है कि ये सूतली बम बनाने के दौरान हुआ ब्लास्ट है।
ऑपइंडिया ने जब इस संबंध में स्थानीय विधायक संजय सारगवी से बात की तो उन्होंने बताया कि घटना की सूचना मिलते ही वह इलाके में गए थे। उन्होंने कहा, “ब्लास्ट काफी जोरदार था। कई किलोमीटर दूर तक इसकी आवाज सुनाई पड़ी थी। मौके पर FSL टीम को बुलाया गया है। वहाँ कई मकान क्षतिग्रस्त हुए हैं। हमने इस मामले में विस्तृत जाँच की माँग की है।”
जब हमने नजीर के घर में चल रहे पटाखों के कारोबार के बारे में उनसे पूछा तो उन्होंने कहा कि इस बारे में अभी कोई सूचना नहीं है। जब स्थानीय लोगों के बयानों का हवाला दिया, तो उन्होंने कहा कि पहले वहाँ ऐसा होता था। लेकिन वर्तमान में विस्फोट का क्या कारण था, इस पर कुछ भी जाँच के बाद ही बोला जा सकेगा।
उनके मुताबिक, इस मामले में घटना की सूचना पाते ही कई पुलिस अधिकारी मौके पर पहुँचे थे। अब आगे अगर जरूरत पड़ी तो उच्च स्तरीय जाँच भी करवाई जाएगी। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, घटना की गंभीरता को देखते हुए दरभंगा के जिलाधिकारी ने इसपर संज्ञान लिया है। उन्होंने अपर समाहर्ता के नेतृत्व में तीन सदस्यीय जाँच कमिटी गठित की है। जाँच कमिटी में सदर एसडीपीओ एवं सदर एसडीओ को शामिल किया गया है।
अमेठी में सपा नेता लाल मियाँ के बेटे मोहम्मद दाऊद की हत्या की गुत्थी सुलझ गई है। पुलिस ने इस मामले में 5 आरोपितों को गिरफ्तार किया है।
इनकी पहचान बृजेश पाण्डेय, शिवम, अमन सिंह, बृजेंद्र सिंह और शादाब के तौर पर की गई है। 4 जून की रात पुलिस ने इन्हें पकड़ा। इनके पास से पिस्टल और कारतूस बरामद किया गया।
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार मोहम्मद दाऊद का शव 30 मई को बरामद किया गया था। लाश का सिर गायब था। वह 27 मई को घर से निकला था और उसके बाद से लापता था।
अमेठी पुलिस ने ट्वीट कर बताया है कि बृजेश ने पूछताछ में साथियों के साथ दाऊद की हत्या की बात कबूली है। बृजेश ने बताया कि दाऊद उसकी बहन से छेड़खानी करता था। यह बात उसे शादाब ने बनाई थी। इसके बाद उसने दाऊद की हत्या की योजना बनाई।
अपने साथियों के साथ दाऊद को कार में बिठाकर बाग में ले गया और वहॉं उसे गोली मार दी। इस दौरान शादाब मौके पर नहीं था।
मीडिया रिपोर्टों में अमेठी की एसपी डॉ. ख्याति गर्ग के हवाले से बताया गया है कि पूछताछ में आरोपित ने बताया की मोहम्मद दाऊद उसकी बहन के साथ आए दिन छेड़छाड़ करता था। उसे कई बार दोस्तों के साथ समझाया भी, लेकिन वह अपनी आदत से बाज नहीं आया।
दिल्ली में कोरोना वायरस संक्रमण के मामले तेजी से बढ़ रहे। संक्रमितों के नंबर में इजाफे के साथ इससे निपटने को लेकर दिल्ली की अरविंद केजरीवाल सरकार के दावे भी बढ़ रहे हैं। लेकिन, हकीकत में केजरीवाल सरकार कितनी तत्पर है और उसने अस्पतालों से लेकर तमाम स्वास्थ्य सुविधाओं की कैसी व्यवस्थाएँ की है, इसकी पोल सोशल मीडिया में लगातार खुल रहे हैं। ये दर्द उन लोगों का है जो गुहार लगाते रहे, लेकिन उन तक मदद नहीं पहुॅंची।
हालात ये है कि दिल्ली में कई मंत्रालयों सहित दिल्ली के एम्स के स्टाफ तक कोरोना वायरस का संक्रमण पहुँच गया है। ऐसे में आम आदमी को जाँच और इलाज को लेकर किस प्रकार की असुविधाएँ हो रही है, इसका अंदाजा सबसे पहले राधिका अग्रवाल के ट्वीट से लगाया जा सकता है।
01 – ‘हम एक पहले से ही हारी लड़ाई लड़ रहे हैं, शायद अब और कुछ भी अपडेट करने की जरूरत बाकी नहीं रह गई है’
राधिका अग्रवाल नाम की महिला ने ट्विटर पर अपनी व्यथा के बारे में बताया है कि उनकी मामी कोरोना वायरस से संक्रमित थीं। उन्होंने और उनके परिवार ने टेस्टिंग और जरूरी मदद जुटानी चाही लेकिन दिल्ली के किसी भी अस्पताल से उन्हें कोई मदद नहीं मिली। आखिर में उनकी मामी चल बसी।
ट्विटर पर राधिका अग्रवाल ने एक थ्रेड में लिखा है;
दिल्ली में रहने वाली मेरी मामी और उनके परिवार में कुछ लोगों को 2 जून के तीन दिन पहले से ही कोरोना वायरस के लक्षण दिख रहे थे। उनका पूरा परिवार अपने फैमिली डॉक्टर की सलाह पर टेस्टिंग कराने के लिए खेत्रपाल अस्पताल (Khetarpal Hospital) गया, जहाँ बहुत बहस के बाद अस्पताल बस मेरी मामी की टेस्टिंग के लिए तैयार हुआ। जबकि पूरे परिवार में सभी को लक्षण दिख रहे थे।
लेकिन किसी की भी न ही टेस्टिंग की गई न ही उन्हें एडमिट किया गया। दुर्भाग्य से मेरी मामी की उसी दिन घर पर ही रात 11 बजे मौत हो गई। 43 घंटे बाद बृहस्पतिवार की सुबह 10 बजे उनके कोरोना वायरस जाँच का नतीजा पॉजिटिव आया।
अब उनके 15 सदस्यों के परिवार में, जिसमें 2 लोग 80 से ऊपर की उम्र और दो लोग 20 साल से कम उम्र के हैं, हर हेल्पलाइन पर कॉल करे रहे हैं, पुलिस से मदद माँग रहे हैं। वो कई हॉस्पिटल भी जा चुके हैं ताकि उन्हें स्वास्थ्य सुविधा मिल पाए। लेकिन अब तक कोई मदद नहीं मिली है और सारे प्रयास व्यर्थ सिद्ध हुए। यहाँ तक कि उनके इलाके को भी अभी तक कंटेन नहीं किया गया है। मैं ट्विटर पर मदद माँग रही हूँ, क्योंकि सभी अथॉरिटीज़ ने ‘हॉस्पिटल भरे हुए हैं’ कहकर हाथ खड़े कर दिए हैं।
THREAD: My maami (aunt) and her family in Delhi were showing covid symptoms from 3 days on 2nd June. Entire family went to Khetarpal Hospital to get themselves tested after consulting their family doctor. Authorities there tested only her aunt after so many arguments. 1/n
इस ट्वीट के बाद राधिका अग्रवाल ने एक और ट्वीट में बताया कि शाहदरा के विधायक रामनिवास गोयल ने उनसे संपर्क किया है और उत्तम नगर के विधायक नरेश बलियान ने भी उनसे बात की है। राधिका ने लिखा है कि परिवार के सभी लोगों की शुक्रवार तक जाँच कराने का भरोसा दिलाया है।
राधिका अग्रवाल के इस ट्वीट को कुमार विश्वास ने भी रीट्वीट करते हुए दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पर निशाना साधते हुए लिखा है कि अब दिल्ली वालों को अपनी मदद खुद करनी होगी और अपना ख्याल खुद रहना होगा।
कुमार विश्वास ने केजरीवाल सरकार द्वारा अखबारों और टीवी पर दिए गए विज्ञापनों को निशाना बनाते हुए अपने ट्वीट में लिखा;
यह तार (Thread) धूरतेश्वर द्वारा चैनलों-अख़बारों को दिए करोड़ों रुपए वाले थोबड़ा-दिखाऊ विज्ञापनों के पीछे छिपी उसकी निकम्मी असलियत को ‘तार-तार’ करता है ! दिल्ली के नागरिकों से प्रार्थना है कि स्वयं ही अपना खूब ख़्याल रखें।
इस तार (Thread) धूरतेश्वर द्वारा चैनलों-अख़बारों को दिए करोड़ों रुपए वाले थोबड़ा-दिखाऊ विझापनों के पीछे छिपी उसकी निकम्मी असलियत तो “तार-तार” करता है ! दिल्ली के नागरिकों से प्रार्थना है कि स्वयं ही अपना खूब ख़्याल रखें ? https://t.co/ESVQEvsbBW
आज तकरीबन आधे घंटे पहले ही राधिका अग्रवाल ने इस थ्रेड में एक नई जानकारी जोड़ते हुए लिखा है –
और भी परेशान करने वाली खबर- विधायक (शाहदरा) ने उन्हें सीधे दीनदयाल अस्पताल जाने के लिए पास दिया और वहाँ 5 सदस्यों का परीक्षण किया। सभी 4 सदस्य और मेरे मामा वहाँ गए, एक घंटे तक कोरोना की जाँच के लिए इंतजार कर रहे थे और फिर उनसे कहा गया, ‘किट खतम हो गई, कल आना’।
यानी, अस्पताल में किट की कमी के चलते शाहदरा विधायक विधायक रामनिवास गोयल द्वारा दिया गया आश्वासन भी राधिका के सम्बन्धियों के किसी काम नहीं आया है।
“Sarkaar hume 50 kits hi deti h daily ki, so ab kal aana” “Kal kya guarantee h?” “Agar kits bachi hogi, toh ho jaega”. Guys, we are talking about a family where already 1 has succumbed to Covid. I guess this battle is already lost now, maybe no point to update more here..
इसके साथ ही एक दूसरे ट्वीट में राधिका ने अस्पताल प्रशासन के साथ अपनी बातचीत का जिक्र करते हुए लिखा है,
“सरकार हमें रोजाना की 50 किट्स ही देती हैं, सो अब कल आना।’ ‘कल क्या गारंटी है?’ ‘अगर किट्स बची होंगी, तो हो जाएगा’ दोस्तों, हम एक ऐसी फैमिली के बारे में बात कर रहे हैं जिसने पहले ही एक सदस्य को कोरोना वायरस के कारण खो दिया है। मुझे लगता है कि हम एक पहले से ही हारी लड़ाई लड़ रहे हैं। शायद अब और कुछ भी अपडेट करने की जरूरत बाकी नहीं रह गई है।
02 – कोरोना संक्रमित पाए जाने के बाद भी सुध नहीं ले रही सरकार – जैपलीन पसरीचा
दिल्ली सरकार और इसके मुख्यमंत्री केजरीवाल में से किसी ने भी राधिका अग्रवाल की इस दलील (या आरोप) पर कोई की प्रतिक्रिया नहीं दी है। इस तरह की मुसीबत का सामना करने वालों में राधिका अकेली नहीं हैं, बल्कि जैपलीन पसरीचा (Japleen Pasricha) ने भी ट्विटर पर इस बात पर प्रकाश डाला है कि कैसे परिवार के कुछ सदस्यों की कोरोना वायरस रिपोर्ट पॉजिटिव निकलने के बाद भी सरकार द्वारा कोई मदद नहीं की गई।
यही नहीं, पसरीचा ने कहा कि एक लैब ने उसे बताया कि उन्हें दिल्ली सरकार द्वारा सैंपल लेने से मना करने के भी निर्देश दिए गए हैं, और ऐसी अफवाहें थीं कि दिल्ली सरकार अपनी नाकामी को छुपाने के लिए संख्या नहीं बढ़ाना चाहती है जिस वजह से इस तरह के निर्देश दिए जा रहे हैं।
Some of my family members have COVID symptoms & I have been trying to book a test. Today, a lab told me that they have been instructed by the Delhi govt to stop collecting samples.
Rumour is that the govt doesn’t want to increase numbers.
लेकिन लगता है कि यह सिर्फ एक आरोप नहीं बल्कि दिल्ली सरकार की नई गाइडलाइन का हिस्सा है, जिसमें अब COVID-19 के नमूनों की जाँच में ही कलाकारी दिखाई गई है। यानी इसके अनुसार, दिल्ली सरकार ने निर्देश जारी किए हैं कि अब सिर्फ उन्हीं लोगों का सैंपल लिया जाएगा, जिनमें कोरोना वायरस से संक्रमण के लक्षण दिखते हों।
ऐसे में एक नया सवाल यह उठता है कि जब उनकी सरकार अपनी बात कह पाने में सक्षम और प्रभावशाली लोगों तक को जवाब देना जरूरी नहीं समझती तो ऐसे में उन लोगों का क्या हाल होगा, जिनकी व्यथा को सामने आने तक का भी मौक़ा नहीं मिल पाया है।
03 – दिल्ली के अस्पताल से लेकर सरकारी हेल्पलाइन तक बेहाल
ऐसा ही एक और केस ‘हफ़िंगटन पोस्ट’ की रिपोर्ट में वर्णित है। संयोगवश, खेत्रपाल अस्पताल दिल्ली सरकार द्वारा सूचीबद्ध अस्पतालों की सूची में नहीं है। हालाँकि, अपोलो और गंगाराम अस्पताल हैं, और इस रिपोर्ट के अनुसार 01 जून को उन्होंने मंदीप सिंह नाम के एक व्यक्ति के 67 वर्षीय ससुर को बेड देने से इनकार कर दिया।
अस्पतालों ने मंदीप सिंह से कहा कि उनके पास पर्याप्त बिस्तर नहीं है। हालाँकि, दिल्ली सरकार की वेबसाइट, 4 जून की तारीख के आँकड़ों से पता चलता है कि मंदीप सिंह द्वारा उल्लिखित सभी अस्पताल शायद भरे हुए थे।
दिल्ली सरकार द्वारा जारी खाली बेड की जानकारी का एक हिस्सा
इस रिपोर्ट में इस बात का जिक्र किया गया है कि ये जानने के बाद कि अस्पतालों की मदद अब उन्हें नहीं मिल सकती, किस प्रकार से थक हार कर आखिर में मंदीप सिंह ने जब दिल्ली सरकार की हेल्पलाइन को कॉल किया और तो वह निरंतर व्यस्त बताती रही और उन्हें कोई भी जवाब नहीं मिला।
वर्तमान में, दिल्ली सरकार ने 8,512 बिस्तर सूचीबद्ध किए हैं, जिनमें से 5,183 बिस्तर खाली हैं। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय की वेबसाइट के अनुसार, दिल्ली में कोरोना वायरस के 25,000 से अधिक मामले सामने आए हैं।
04 – अस्पताल में जगह ना मिलने से अमरप्रीत के पिता ने गँवा दी जान, अब परिवार की जाँच से लैब ने किया मना
अमरप्रीत ने ट्विटर पर जून 04 की सुबह 8:05 AM पर अपने पिता को हुए तेज बुखार का जिक्र करते हुए मदद माँगते हुए लिखा;
मेरे पिताजी को तेज बुखार हो रहा है। हमें उन्हें अस्पताल में शिफ्ट करने की आवश्यकता है। मैं LNJP दिल्ली के बाहर हूँ और वे उसे अंदर नहीं ले जा रहे हैं। उन्हें कोरोना, तेज बुखार और साँस लेने में समस्या हो रही है। वह मदद के बिना जीवित नहीं रहेंगे। कृपया मदद करें।
अमरप्रीत ने इस ट्वीट में तिमारपुर के विधायक के साथ ही मनीष सिसोदिया और दिल्ली के मुख्यमंत्री को भी टैग किया था।
लेकिन दुर्भाग्यवश 9:08 AM पर अमरप्रीत ने एक और ट्वीट में बताया कि उनके पिता अब नहीं रहे। साथ ही उन्होंने लिखा कि हमारे परिवार की भी जाँच की जाए, लेकिन लैब ऐसा नहीं कर रही है। मेरी माँ, भाई, उनकी पत्नी और दो बच्चे। कृप्या मदद करें।
अमरप्रीत के ट्वीट के जवाब में उनकी मदद की जगह उनसे संवेदना व्यक्त करने वालों की संख्या बहुत ज्यादा है। लेकिन वास्तविकता यही है कि उनसे सहानुभूति जताने के अलावा और कोई उपाय भी नहीं है और हर कोई किसी ना किसी तरह से पीड़ित और लाचार ही है।
05 – पूरे परिवार में नजर आ रहे हैं संक्रमण के लक्षण, अस्पताल भेज देते हैं वापस
अमरप्रीत के इस ट्वीट में ही एक और युवक विनोद कुमार भी अपने मित्र के लिए मदद माँग रहे हैं। विनोद कुमार ने लिखा है कि मयूर विहार में उनके मित्र और उनके पूरे परिवार में कोरोना वायरस के लक्षण दिख रहे हैं। वे अपनी जाँच के लिए यहाँ-वहाँ दौड़ रहे हैं, हरसंभव प्रयास कर रहे हैं, लेकिन अस्पताल उन्हें वापस भेज देते हैं।
My friend in mayur vihar is ill with covid like symptoms with entire family. They are running pillar to post to get tested. Hospitals turn them back. @ArvindKejriwal@raghav_chadha@LtGovDelhi
06 – मरीजों से संक्रमित होने के बावजूद बिना जाँच के ही घर पर कैद रहने को मजबूर फिजियोथेरेपिस्ट
अशोक सिंह ने ट्विटर पर लिखा है कि वे एक फिजियोथेरेपिस्ट हैं। उन्होंने अपनी दुविधा को ट्विटर पर शेयर करते हुए स्पष्ट किया है कि किस तरह से उन्हें लोगों का इलाज करते हुए कोरोना वायरस से संक्रमित होने का पता चला।
एक तस्वीर में उन्होंने अपने क्रम को लिखकर दिल्ली के मुख्यमंत्री केजरीवाल को टैग करते हुए लिखा है,
एक टैक्स पेयर होने के नाते, जिसने, दिल्लीवासियों को लेकर आपकी चिंता, आपके विजन को देखते हुए आपको वोट दिया, उस पर भरोसा करते हुए मैं चाहता हूँ कि आप मेरी जिज्ञासाओं का जवाब दें, क्योंकि आप ही जवाबदेह हैं।
इस तस्वीर में अशोक सिंह ने जिक्र किया है कि वो एक फिजियोथेरेपिस्ट हैं और रोजाना की भाँति ही एक डॉक्टर होने के नाते वे फरवरी से ही अपने मरीजों को देखते आ रहे थे।
अशोक सिंह ने बताया है कि 29 फरवरी को उनका एक मरीज कोरोना वायरस से संक्रमित मिला। इसके बाद उन्होंने फ़ौरन अपने को क्वारंटाइन करते हुए आरोग्य सेतु ऐप में अपनी स्थिति दर्ज की। इसके बाद 29 मई को जब अशोक ने हेल्पलाइन पर अपने इलाज के बारे में कहा तो उनसे कहा गया कि उनका कोई जाँच या इलाज नहीं किया जा सकता, जब तक कि उनमें कोई लक्षण नजर नहीं आ जाते।
दिल्ली सरकार की हेल्पलाइन निरंतर व्यस्त ही प्राप्त हुई। अशोक सिंह ने लिखा है कि 02 जून से उन्हें खाँसी होनी शुरू हो गई जो कि लगातार बढ़ती चली गई। उनके शरीर का तापमान आश्चर्यजनक रूप से बढ़ने लगा और पिछले पाँच दिनों की अपनी हालत को देखकर वो भयभीत हो गए।
‘क्या इंसान की जिंदगी की कीमत इतनी कम है? ‘
इस बीच अशोक सिंह ने तमाम हेल्पलाइन नम्बर्स पर सम्पर्क किया, लेकिन उनमें से किसी ने भी उनको जवाब नहीं दिया। 03 जून को जब उन्होंने प्राइवेट लैब से भी जाँच के लिए सम्पर्क किया तो उन्होंने यह कहकर ठुकरा दिया कि उनके पास पहले से ही बहुत सैंपल बाकी हैं।
एक टैक्स पेयर नागरिक होने के बावजूद, मैं हेल्पलेस हूँ, अपने भविष्य को लेकर आशंकित हूँ, डरा हुआ, घबराया, चला गया हूँ। मैं नहीं जानता कि मेरा भविष्य क्या होगा? क्या मुझे इस तरह से बस निराशा में इन्तजार करना चाहिए? इस तरह से घर पर बैठकर इस जानलेवा वायरस की जाँच के बिना ही क्वारंटाइन रहना चाहिए? क्या ये मेरे परिवार के लिए भी सही है? क्या मेरी और अन्य इंसानों की जिन्दगी की कीमत बस इतनी ही है?
दिल्ली में रहने वालों के लिए निर्देश यही है कि तब तक घर पर बैठे रहें जब तक कि लक्षण दिखने शुरू नहीं हो जाते। मैं कोरोना वायरस से पीड़ितों के सम्पर्क में आने के बावजूद और संक्रमण के लक्षणों के बाद भी किसी तरह की मदद नहीं पा रहा हूँ। कोई अस्पताल या लैब मेरे सेम्पल की जाँच के लिए तैयार नहीं है। सरकार ने हमें घर पर बैठे रहने के लिए कहा है, क्या हम किसी महल में रह रहे हैं जिसमें एक व्यक्ति के लिए अलग से कमरा और वाशरूम की सुविधा हो?
07 – गंभीर अवस्था में संक्रमित भाई के लिए अस्पताल तलाशती काजल प्रजापति
कोरोना वायरस से संक्रमित भाई के लिए प्लाज्मा थेरेपी की माँग कर रही काजल प्रजापति ने ट्विटर ने लिखा है, “हमें तत्काल ऐसे अस्पताल में एक सीट की आवश्यकता है, जहाँ मेरे भाई के लिए प्लाज्मा थेरेपी की जा सकती हो, वह वर्तमान में गंभीर स्थिति में है और बत्रा अस्पताल में भर्ती है। जिन अस्पतालों में प्लाज्मा थेरेपी की जाती है, उनमें से किसी में भी सीट उपलब्ध नहीं है।”
We URGENTLY need a seat in hospital where plasma therapy is being done for my brother , he is presently in critical situation and is admitted in Batra Hospital currently . There is no availability of seats in any of the hospitals where plasma therapy is done. @ArvindKejriwal
काजल ने इस ट्वीट में दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को भी टैग किया है, लेकिन इसमें भी दिल्ली के मुख्यमंत्री की ओर से कोई जवाब नहीं आया है।
08 – बीबीसी कर्मचारी ने बताया कि दिल्ली सरकार के अस्पताल में बेड की जानकारी हकीकत से अलग
बीबीसी इंडिया में काम करने वाले विकास पाण्डेय ने एक ट्वीट में जिक्र किया है कि उनके भाई में कोरोना वायरस के गंभीर लक्षण हैं। जब उन्होंने मैक्स, अपोलो और गंगाराम अस्पताल से संपर्क किया, तो तीनों ने कहा कि कोई बिस्तर उपलब्ध नहीं है। विकास पाण्डेय ने केजरीवाल को टैग करते हुए लिखा है, “लेकिन आपकी वेबसाइट से पता चलता है कि उनके पास बिस्तर हैं। इस बारे में देखिए कि आखिर क्या चल रहा है?”
My brother has severe Covid symptoms. We contacted Max, Apollo and Gangaram – all three said no beds. But your website shows they have beds. Pleasw look into this – @ArvindKejriwal@AnkitLal@msisodia what’s going on?
विकास पाण्डेय के इस ट्वीट के जवाब में एक ट्विटर यूजर ने लिखा है कि आपके एकाउंट में ब्लू टिक है, इसलिए उम्मीद करते हैं कि आपको जवाब मिल जाएगा। लेकिन दुःख की बात यह है कि कई लोग ट्विटर पर नहीं हैं, जबकि केजरीवाल कहते हैं कि बेड उपलब्ध हैं।
aapke account ke aage ‘blue tick’ hai. Aasha hai aapko bed mil gaya hoga… Dukh ki baat yeh hain ki kayi aise log to Twitter pe nhi nahi hai.. .Aur Kejriwal ji keh rahein hain ki beds khali padein hain…
09 – GTB अस्पताल के बाहर लेटे हुए पीड़ित की सुध लेने वाला कोई नहीं
अतुल सिंघल ने एक वृद्ध का वीडियो ट्विटर पर पोस्ट करते हुए लिखा है, “कोरोना सन्दिग्ध मरीज की हालत गंभीर है। जीटीबी अस्पताल के बाहर है। बच्चे कल से धक्के खा रहे हैं। 1031 पर दो बार फोन किया। कोरोना DSO शाहदरा डॉक्टर सुशील नायक 87******08, 98******30 फोन ही नहीं उठा रहे।”
इस वीडियो में वृद्ध व्यक्ति को स्ट्रेचर पर लेते हुए देखा जा सकता है कि उन्हें साँस लेने में परेशानी हो रही है।
हालाँकि अतुल सिंघल के इस ट्वीट के जवाब में केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के COVID-इंडिया सेवा के आधिकारिक एकाउंट ने संज्ञान लेते हुए मरीज की जानकारी माँगी है और उपचार का आश्वासन दिया है।
10 – कोरोना संक्रमित पिता को एडमिट करने से अस्पताल कर रहे हैं इनकार
आज ही आयुष श्रीवास्तव नाम के एक ट्विटर यूजर ने एक ट्वीट में केजरीवाल को टैग करते हुए लिखा है, “दिल्ली के जनकपुरी में मेरे दोस्त के पिता कल ही कोरोना वायरस से संक्रमित पाए गए हैं। उनमें कोरोना वायरस के सभी लक्षणों के साथ ही बलगम के साथ खून निकलने की भी शिकायत है। वह डायबिटिक भी हैं। वे उन्हें अस्पताल में भर्ती नहीं करवा पा रहे हैं, क्योंकि अस्पताल असमर्थता जताते हुए उन्हें मना कर रहे हैं।”
My frnd’s Dad in Delhi Janakpuri tested +ve for covid last night, he’s shwing all d symptoms & coughing blood as well. He’s diabetic too They r unable to get him admitted as hospitals r refusing Pls help @ArvindKejriwal@msisodia@AamAadmiPartyhttps://t.co/kRN6HYJ46M 9650877113
कहाँ व्यस्त हैं दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल?
इन सभी ट्वीट में और व्यक्तिगत तौर पर संपर्क करने पर मिली जानकारी से यही निष्कर्ष निकला है कि दिल्ली में कोरोना वायरस की महामारी से लड़ने में अरविंद केजरीवाल और उनका पूरा तन्त्र असमर्थ तो है ही, साथ में वह स्वीकार करने को भी राजी नहीं हैं कि वास्तव में दिल्ली की जनता किस दुविधा में खुद को इतना असहाय और निराश महसूस कर रही है। ना ही उन्हें इन सभी दुर्भाग्यपूर्ण परिस्थितियों से कोई फर्क पड़ता दिख रहा है।
दिल्ली सरकार की रोजाना बदलती गाइडलाइंस और सैंपल ना लेने की नीतियाँ यही साबित करती हैं कि उनके लिए जनता की जान से जायदा मीडिया मैनेजमेंट की चिंता है। मीडिया में अपनी व्यक्तिगत छवि के अलावा केजरीवाल को खासतौर से उस वर्ग की चिंता ज्यादा नजर आती है, जिसने उसे दिल्ली की सत्ता सौंपने के लिए पूरी मेहनत से प्रोपेगेंडा रचा, उसे गोद में बिठाया, और केजरीवाल की जीत के दिन कहा था कि अब दिल्ली हँस, खेल रही है।
अस्पतालों के चक्कर काट रहे लोग, संक्रमण के बावजूद घरों में असहाय बैठे लोग, जाँच से इनकार कर घर भेज दिए गए लोगों को नजरअंदाज कर केजरीवाल यही बेहतर समझते हैं कि ट्विटर पर सागरिका घोष को हेयर कटिंग की शुभकामना दे सकें। शायद उनकी आस्था और संवेदना बस इसी एक वर्ग तक सीमित भी हैं।
दिल्ली की जनता को असहाय और लाचार छोड़कर केजरीवाल उन मीडियाकारों के सलून की चिंता में डूबे हैं, जिन्होंने उन्हें आज दिल्ली की सत्ता सौंपने में सबसे अहम भूमिका निभाई थी। आज वह लड़का खो गया, जिसने अपनी यूनिवर्सिटी की स्कॉलरशिप केजरीवाल के राजनीतिक करियर के लिए दान दे दी थी। साथ ही वह सभी आशाएँ भी धूमिल हो चुकी हैं जो समाज ने केजरीवाल में परिवर्तन की चाह में देखी थी।