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रायबरेली की कॉन्ग्रेस विधायक को पार्टी का कारण-बताओ नोटिस, 370 पर भी भाजपा का किया था समर्थन

कॉन्ग्रेस ने सोनिया गाँधी के संसदीय क्षेत्र राय बरेली की विधायक अदिति सिंह को कारण-बताओ नोटिस जारी किया है। उन पर आरोप है कि उन्होंने पार्टी के हुक्म की तामील न कर गाँधी जयंती पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा आहूत विधानसभा के विशेष सत्र में भागीदारी की थी। उन्हें दो दिन में जवाब देने को कहा गया है।

गाँधी जयंती पर कॉन्ग्रेस के बहिष्कार का बहिष्कार

अदिति सिंह ने पार्टी के उस आदेश को मानने से इंकार कर दिया था जिसमें पार्टी ने उक्त तिथि को आयोजित सत्र का बहिष्कार करने का निर्देश अपने विधायकों को दिया था। इस सत्र में संयुक्त राष्ट्र द्वारा निर्धारित पर्यावरण-संवेदनशील विकास लक्ष्यों (sustainable development goals) पर चर्चा हुई थी। इस बहिष्कार का हिस्सा न बनने के लिए कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं ने अदिति सिंह के घर के बाहर प्रदर्शन भी किया था। उनके इस्तीफ़े की भी माँग की जा रही है।

वहीं अदिति सिंह ने कहा है कि उन्होंने गाँधी के पथ का ही अनुसरण करने और देश के विकास के लिए यह कदम उठाया। इसके पहले उन्होंने कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाए जाने का भी समर्थन पार्टी लाइन के खिलाफ जाकर किया था। इसके अलावा उन्होंने प्रियंका गाँधी-वाड्रा के गाँधी जयंती पर किए गए ‘शांति मार्च’ से भी किनारा कर लिया था।

चीन माँगेगा $6.7 अरब, IMF $2.8 अरब: जून 2022 तक इतना पैसा आखिर कहाँ से जुटाएगा पाकिस्तान?

पाकिस्तान पर विदेशी कर्जे की फेहरिस्त हैरान कर देने वाली है। 3.3% की विकास दर पर कराह रहे पाकिस्तान को जून, 2022 तक अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) को $2.8 अरब और चीन को $6.7 अरब लौटाने हैं। यह राशि उन कर्जों को चुकता करने के लिए है, जो पाक ने अपने विदेशी मुद्रा कोष की बदहाली पर काबू पाने और आर्थिक हालात पर काबू पाने के लिए लिए थे। 

बेल्ट-रोड बनी फाँसी का फंदा

हिंदुस्तान से कब्जाए पीओके में पाकिस्तान ने चीन को बेल्ट एन्ड रोड इनिशिएटिव के लिए दे दिया, जब कि उस भूभाग पर उसका हक़ ही नहीं था। इसी के बदले चीन ने उसे मुँहमाँगा कर्ज देना शुरू कर दिया, और उस कर्जे से पाकिस्तान इतना बौराया कि वह उसके बाद चीन से कर्ज पर कर्ज लेता गया। कराची स्थित Optimus Capital Management के प्रमुख शोधकर्ता हफ़ीज़ फैज़ान अहमद के हवाले से टाइम्स ऑफ़ इंडिया की रिपोर्ट में दावा है कि इस चीनी कर्ज़ का सबसे बड़ा हिस्सा तब आया जब पाकिस्तान का विदेशी मुद्रा भंडार कम होता जा रहा था।

यही नहीं, Center for Global Development नामक एक थिंक टैंक ने पाकिस्तान को पिछले साल ही उन देशों की सूची में डाल दिया था जिन्हें इस बेल्ट-रोड योजना के चलते कर्ज़ में डूबना पड़ेगा। आज यह आकलन सच साबित हो रहा है। लेकिन ऐसा भी नहीं है कि पाकिस्तान पूरी तरह फ़टेहाल है- उसके सारे संसाधनों पर सेना का कब्ज़ा हो गया है, जिसे देश के आर्थिक हालत से कोई फर्क नहीं पड़ता।

घाटा, टैक्स चोरी और मुँह फाड़े सेना

पाकिस्तानी सेना देश के बजट का 17-22% लेती है। बावजूद इसके कि वह खुद 100 अरब डॉलर के आर्थिक साम्राज्य की मालिक है, जो बैंकिंग, सीमेंट, रियल एस्टेट जैसे क्षेत्रों में पसरा हुआ है। हाल ही में उसने सरकार से खनन, तेल और गैस का काम भी अपने हाथों में ले लिया है। इसके उलट पाकिस्तानी सरकारी कम्पनियाँ घाटे में गहरी डूबती जा रहीं हैं। केवल 1% के टैक्स देने वाले नागरिकों के दायरे के अलावा उसका टैक्स-जीडीपी अनुपात 11% दुनिया के न्यूनतम में से एक है।

इमरान कूटनीतिक रिश्तों में कच्चे, अब पूरे पाकिस्तान को जिहाद में झोंकना चाहते हैं: MEA प्रवक्ता रवीश कुमार

विदेश मंत्रालय ने पाकिस्तान को आड़े हाथों लेते हुए आरोप लगाया कि वह अपनी पूरी जनता को जिहाद की आग में झोंक देना चाहता है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने यह बात पत्रकारों से बात करते हुए कही। वे पाकिस्तानी पीएम इमरान खान के अपने देशवासियों से नियन्त्रण सीमा (LOC) पर मार्च करने के आह्वाहन पर मंत्रालय की साप्ताहिक ब्रीफिंग के दौरान प्रतिक्रिया दे रहे थे।

महासभा में भी बचकाना हरकतें

रवीश कुमार ने यह भी कहा कि इमरान खान की संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान बयानबाजी बचकाना थी। उल्लेखनीय है कि महासभा में अपने वक्तव्य में इमरान खान ने कश्मीर मुद्दे पर बोलते हुए हिंदुस्तान-पाकिस्तान के बीच नाभिकीय युद्ध (Nuclear War) की ‘संभावना व्यक्त’ करते हुए धमकी दी थी।

“उनके बयान महासभा के दौरान भी उकसाऊ और गैरज़िम्मेदार थे। मुझे नहीं लगता कि उन्हें अंतरराष्ट्रीय या कूटनीतिक संबंधों को चलाने की जानकारी है। उन्होंने हिंदुस्तान के खिलाफ खुले जिहाद का आह्वाहन किया है। यह कतई सामान्य नहीं है।” रवीश का इशारा इमरान खान द्वारा अपने देश के लोगों से LOC पर मार्च करने की गुज़ारिश की तरफ़ था।

इस बीच हिंदुस्तानी सेना ने पाकिस्तानी सेना से दोनों देशों के बीच की वर्तमान और अस्थायी (de-facto) सीमा रेखा की मर्यादा बनाए रखने की अपील की है। उल्लेखनीय है कि इस मार्च को पाकिस्तानी सेना के समर्थन की बात कही जा रही है।

निहत्थे सैनिकों को तोपों के आगे धकेलने की तैयारी

पाकिस्तानी सेना का असली प्लान उकसाए गए और ब्रेनवॉश हुए आम लोगों को भारतीय सेना की गोलियों और तोपों के आगे धकेल देने का है। टाइम्स नाउ की रिपोर्ट में सेना के सूत्रों के हवाले से दावा किया गया है कि पाकिस्तानी नेतृत्व आम लोगों को इसका हिस्सा बनने के लिए बरगलाने में लगा है। इस बीच सीमा रेखा इस तरफ़ सुरक्षा बलों ने हर परिस्थिति से निबटने की तैयारी कर रखी है।

मलेशिया, तुर्की को चेतावनी

मलेशिया और तुर्की को भी चेतावनी रविश कुमार ने इसी प्रेस वार्ता में दी। उन्होंने मलेशिया को भारत-मलेशिया के दोस्ताना रिश्तों को याद कर उस तरह की टिप्पणियों (“भारत ने कश्मीर पर आक्रमण और कब्ज़ा किया है”) से बाज़ आने की सलाह दी जो प्रधानमंत्री महातिर मोहमद ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में की थीं। तुर्की को रवीश कुमार ने इस मुद्दे पर और मुँह खोलने के पहले समस्या को समझने की सलाह दी।

यमराज को दे निर्देश, मृत दोषियों को वापस धरती पर भेजें: कलकत्ता हाईकोर्ट में दायर अजीब याचिका

बॉलीवुड फ़िल्म ‘ओह माइ गॉड’ के कांजी भाई (परेश रावल) याद है न आपको जिन्होंने भूकंप में बर्बाद अपनी दुकान का क्लेम हासिल करने के लिए भगवान पर केस कर दिया था। ऐसा ही एक अनोखा मामला कलकत्ता हाईकोर्ट में आया है। दरअसल, हाईकोर्ट में याचिका दायर कर मृत आरोपितों के परिजनों ने कोर्ट से अपील की है कि वो यमराज को आदेश दें कि वह दोषियों को सजा भुगतने के लिए यमलोक से वापस ज़िंदा इस धरती पर भेजें।

याचिकाकर्ता ने अपील की है कि अगर यमराज ऐसा नहीं करते हैं, तो उनके ख़िलाफ़ कोर्ट अवमानना की कार्यवाही की जाए। दरअसल, यह मामला 1984 का है। गरुलिया के रहने वाले समर चौधरी और उनके दो बेटों ईश्वर और प्रदीप की किसी बात को लेकर मारपीट हो गई थी। इसमें एक शख़्स की मौत हो गई। इस मामले को लेकर अलीपुर के एडिशनल सेशन जज ने तीनों को 9 फरवरी 1987 को 5-5 साल की सज़ा सुनाई। उसी साल मार्च में दोनों ने हाईकोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया। कोर्ट ने एक अंतरिम आदेश पारित कर दोनों की सज़ा पर रोक लगा दी।

इस मामले में हुआ यह कि सुनवाई शुरू होने से पहले ही तीन में दो आरोपित- समर और प्रदीप की मौत हो गई। प्रदीप की मौत 17 फरवरी 1993 को हो गई और समर की मौत 16 सितंबर 2010 को हो गई। दूसरी तरफ़, 22 जून, 2006 में आरोपित पक्ष के वकील की पद्दोन्नति हो गई और वो जज बन गए।

इन परिस्थितियों में बिना वकील के आरोपितों का परिवार कोर्ट को यह नहीं बता पाया कि इस मामले से जुड़े दो आरोपित अब इस दुनिया में नहीं रहे। बाद में, हाईकोर्ट ने आरोपितों के लिए एमिकस क्यूरी नियुक्त कर दिया और मामले में फ़ैसला सुनाते हुए 16 जून 2016 को याची की अपील ख़ारिज कर दी।

इसके बाद, याची पक्ष ने कोर्ट को आरोपितों की मौत की बात नहीं बताने के लिए माफ़ीनामा देने के साथ साल 2016 के उसके आदेश की याद दिलाई। मृतक समर के बेटे और प्रदीप की विधवा रेनू ने आवेदन में कहा है कि माननीय उच्च न्यायालय यमराज को निर्देश दे कि वह दोनों आरोपितों को पृथ्वी पर वापस भेजें ताकि वे दोनों कोर्ट द्वारा मुकर्रर सज़ा पूरी करें। उन्होंने आगे कहा कि अगर यमराज ऐसा नहीं करते तो उनके ख़िलाफ़ अवमानना की कार्यवाही शुरू की जाए।

बाबर नहीं था विध्वंसक, मीर बाकी ने बनाई मस्जिद: मुस्लिम पक्ष, अब सिर्फ चार दिन और होगी बहस

विवादित राम जन्मभूमि पर सुनवाई के दौरान 37वें दिन शुक्रवार (अक्टूबर 4, 2019) को मुस्लिम पक्ष के वकील राजीव धवन ने कहा कि वह अपनी जिरह सोमवार 14 अक्टूबर तक खत्म कर लेंगे। सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने कहा कि शनिवार (अक्टूबर 5, 2019) को सुनवाई नहीं होगी और उसके बाद से 13 तक कोर्ट बंद रहेगी। सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने अयोध्या के इस मामले से संबंधित ने सभी पक्षों से कहा कि 17 अक्टूबर तक बहस पूरी करें।

पहले सुप्रीम कोर्ट ने इन सभी पक्षों को 18 अक्टूबर तक बहस पूरी करने के लिए कहा था। इस केस में 14 अक्टूबर को मुस्लिम पक्ष की ओर से राजीव धवन बहस जारी रखेंगे। बाकी सब पक्षकार 15-16 को दलीलें देंगे और 17 अक्टूबर को सुनवाई पूरी होगी। यानी अब सिर्फ चार दिन ही सुनवाई होनी बाकी रह गई है।

राजीव धवन ने कोर्ट में अपनी दलील देते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट अनुच्छेद 142 के तहत मिली अपरिहार्य शक्तियों के तहत दोनों ही पक्षों की गतिविधियों को ध्यान में रखकर इस मामले का निपटारा करे। इस मामले में मस्जिद पर जबरन कब्जा किया गया। लोगों को धर्म के नाम पर उकसाया गया। रथयात्रा निकाली गई। लंबित मामले में दबाव बनाया गया। मस्जिद ध्वस्त की गई और उस समय मुख्यमंत्री रहे कल्याण सिंह ने एक दिन की जेल अवमानना के चलते काटी। अदालत से गुजारिश है कि तमाम घटनाओं को ध्यान में रखे।

सुनवाई के दौरान जब जस्टिस चंद्रचूड़ ने पूछा कि क्या इस बात का कोई सबूत है कि बाबर ने बाबरी मस्जिद को कोई इमदाद दी हो? इस पर राजीव धवन ने कहा कि उस दौर में इसका कोई सबूत हमारे पास नहीं है।

धवन ने कहा कि 1934 में दंगों के दौरान इमारत को नुकसान पहुँचा और धारा 144 लगाई गई। साथ ही धवन ने इतिहास की बातों का जिक्र करते हुए कहा कि बाबर पर मन्दिर तोड़कर मस्जिद बनाने का इल्जाम लगाया जाता है। बाबर कोई विध्वंसक नहीं था। मस्जिद तो मीर बाकी ने बनाई थी, वो भी एक सूफी के कहने पर। इसके आगे धवन ने एक लाइन कही, ‘है राम के वजूद पर हिन्दोस्तां को नाज़ अहले नज़र समझते हैं उसको इमाम ए हिन्द!’

धवन ने कहा कि क्या न्यायिक व्यक्ति होने के लिए धार्मिक विश्वास होना काफी है? कोर्ट को तय करना है कि न्यायिक व्यक्ति क्या होगा? अगर सिर्फ विश्वास पर मामला आधारित है तो सभी मुस्लिम का विश्वास है वहाँ पर मस्जिद थी। धवन ने कहा कि हिंदुओं को पहले यह साबित करना होगा कि वहाँ मंदिर था और उसके बाद यह साबित करना होगा कि मुस्लिम ने उस पर कब्ज़ा किया। उन्होंने कहा कि वो जानना चाहते हैं कि 1885 से पहले वहाँ पर क्या हुआ था?

टेरर फंडिंग मामला: NIA कोर्ट ने दिया यासीन मलिक को झटका, 23 अक्टूबर तक बढ़ी न्यायिक हिरासत

अलगाववादी यासीन मलिक को आज 2017 के आतंकी फंडिंग मामले में दिल्ली की राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (एनआईए) की विशेष अदालत में पेश किया गया है। जिसके बाद कोर्ट ने अलगाववादी यासीन मलिक की न्यायिक हिरासत को 23 अक्टूबर तक बढ़ा दिया है।

बता दें कि अलगाववादी यासीन मलिक के ख़िलाफ़ 2017 में टेरर फंडिंग का आरोप है। इसी मामले में कोर्ट ने उसकी न्यायिक हिरासत को 23 अक्टूबर तक बढ़ा दिया है। अलगाववादी यासीन मलिक को दिल्ली के तिहाड़ जेल में रखा गया है। जानकारी के अनुसार, इससे पहले तिहाड़ जेल प्रशासन ने मलिक को अदालत में पेश करने में असमर्थता ज़ाहिर की थी।

राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) ने टेरर फंडिंग मामले में यासीन मलिक, आसिया अंदराबी, शब्बीर शाह, मसरत आलम और अन्य के खिलाफ सप्लिमेंट्री चार्जशीट दायर की थी।

जाँच एजेंसी के अधिकारियों के अनुसार, उन्हें सोशल मीडिया, फोन कॉल, बातचीत और विभन्न दस्तावेज़ों के रूप में नए सबूत मिले हैं। नए तथ्यों से पता चलता हैं कि जिन लोगों के नाम चार्जशीट में हैं उनका संबंध आतंकवादी हाफ़िज़ सईद और सैयद सलाउद्दीन से हैं।

Aarey कॉलोनी में मेट्रो शेड को मिली हरी झंडी, बॉम्बे हाईकोर्ट ने पेड़ों की कटाई संबंधी याचिकाओं को किया ख़ारिज

बॉम्बे हाईकोर्ट ने मुंबई मेट्रो कार शेड के लिए रास्ता बनाने के लिए आरे कॉलोनी में 2,700 पेड़ों को काटने के बॉम्बे नगर निगम के फ़ैसले के ख़िलाफ़ सभी याचिकाओं को आज ख़ारिज कर दिया। बॉम्बे हाईकोर्ट ने भी आरे को पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील और बाढ़ क्षेत्र घोषित करने की याचिका को ख़ारिज कर दिया।

मामले की सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश प्रदीप नंदराजोग और न्यायमूर्ति भारती डांगरे की पीठ ने गोरेगाँव की आरे कॉलोनी के संबंध में एनजीओ और पर्यावरण कार्यकर्ताओं की ओर से दायर चार याचिकाओं को ख़ारिज कर दिया। बता दें कि गोरेगांव मुंबई महानगर का प्रमुख हरित क्षेत्र है। खंड पीठ ने आरे कॉलोनी को हरित क्षेत्र घोषित करने के संबंध में शहर के एनजीओ वनशक्ति की याचिका को भी ख़ारिज कर दिया।

कोर्ट  ने कहा, “यह मामला सुप्रीम कोर्ट और राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) के समक्ष लंबित है। इसलिए हम याचिका को एक जैसा मामला होने के कारण खारिज कर रहे हैं, न कि गुण-दोष के आधार पर।”

इसके अलावा अदालत ने कार्यकर्ता जोरु बथेना की याचिका को भी ख़ारिज कर दिया जिसमें आरे कॉलोनी को बाढ़ क्षेत्र घोषित करने का अनुरोध किया गया था और मुंबई मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन को कार शेड बनाने के लिए आरे कॉलोनी में 2,656 पेड़ काटने की बीएमसी की मंजूरी को भी चुनौती दी गई थी।

वहीं, पीठ ने शिवसेना पार्षद यशवंत जाधव पर 50,000 रुपए का जुर्माना लगाया जिन्होंने बीएमसी के वन प्राधिकरण की मंजूरी के ख़िलाफ़ याचिका दायर की थी। बता दें कि यशवंत जाधव वृक्ष प्राधिकरण के सदस्य हैं।

जानकारी के अनुसार, आरे कॉलोनी 1278 हेक्टेयर भूमि पर फैली हुई है, जिसमें से, मेट्रो कार शेड केवल 30 हेक्टेयर आरे की भूमि पर बनाया जाएगा और यहाँ तक ​​कि 5 हेक्टेयर भूमि को हरियाली के लिए बरकरार रखा गया है। इसलिए संक्षेप में, पूरी आरे कॉलोनी का केवल 2% क्षेत्र प्रस्तावित मेट्रो कार शेड के लिए उपयोग किया जाएगा।

हाल ही में, मारोल की एक महिला को मुंबई मेट्रो निर्माण परियोजना का समर्थन करने वाले फेसबुक पोस्ट लिखने के लिए एनजीओ वनशक्ति से एक आरे ‘कार्यकर्ता’ द्वारा धमकी दी गई थी।

प्रस्तावित मेट्रो शेड के कारण व्यापक विरोध-प्रदर्शन शुरू हो गए थे, इसमें विभिन्न एनजीओ और फ़िल्मी सितारे शेड का विरोध करने के लिए एकजुट हुए थे। प्रदर्शनकारियों का तर्क है कि वर्तमान सरकार शहर को तबाह कर रही है, जंगलों को नष्ट कर रही है और सरकार का यह क़दम पर्यावरण विरोधी है।

‘भाषाओं के परिवार में डायपर वाले बच्चे की तरह है हिंदी, इसे जबरदस्ती हमारे गले मत उतारो’

तमिलनाडु में चल रहे हिंदी पर विवाद के बीच मक्कल नीधि मय्यम (MNM) के चीफ और अभिनेता कमल हासन ने एक कार्यक्रम में हिंदी भाषा को लेकर विवादित बयान दिया है। कमल हासन ने हिंदी की तुलना ‘डायपर में छोटे बच्चे’ से की है। कमल हासन ने अपने भाषण में कहा कि तमिल और संस्कृत जैसी पुरानी भाषाओं की तुलना में हिंदी भाषा एक डायपर पहने छोटे बच्चे जैसी है। कमल हासन ने यह बात चेन्नई के लोयला कॉलेज में एक कार्यक्रम के दौरान की। इस कार्यक्रम में कमल हासन से भाषाओं पर चल रही राजनीति पर सवाल किया गया था।

इस दौरान कमल हासन ने कहा, “भाषाओं के इस परिवार में सबसे छोटी भाषा हिंदी है। यह डायपर में एक छोटा बच्चा है। हमें इसका ध्यान रखना होगा। हिंदी- तमिल, संस्कृत और तेलुगु की तुलना में, यह अभी भी सबसे छोटी भाषा है। मैं हिंदी का अपमान नहीं करता, लेकिन इसे जबरदस्ती हमारे गले मत उतारो।” 

बता दें कि इससे पहले भी कमल हासन ने हिंदी के खिलाफ अपनी आवाज उठा चुके हैं। उन्होंने एक वीडियो जारी कर कहा था, “भाषा को लेकर एक और आंदोलन होगा, जो तमिलनाडु में जल्लीकट्टू विरोध प्रदर्शन की तुलना में बहुत बड़ा होगा। हम सभी भाषाओं का सम्मान करते हैं, लेकिन तमिल हमेशा हमारी मातृभाषा रहेगी। 1950 में देशवासियों से वादा किया गया था कि उनकी भाषा और संस्कृति की रक्षा की जाएगी। कोई शाह, सम्राट या सुल्तान इस वादे को अचानक से खत्म नहीं कर सकता।”

गौरतलब है कि तमिलनाडु में यह पूरा मामला हिंदी दिवस के मौके पर अमित शाह के ट्वीट के बाद शुरू हुआ था। जहाँ अमित शाह ने एक देश एक भाषा की बात कही थी। जिसको लेकर तमिलनाडु में खासा विरोध देखा गया था। तमिलनाडु की भाषा पर राजनीति हमेशा से ही चलती रही है, जहाँ तमिल कार्ड खेलकर राजनेता अपनी अपनी राजनीति करते रहे हैं।

गैर इस्लामिक तरीके से दाढ़ी काटने पर बुरा अंजाम भुगतने की चेतावनी,नाई हिरासत में, ₹5000 का जुर्माना

कश्मीर में मजहब वालों के कथित मानवाधिकारों के उल्लंघन का दुष्प्रचार कर रहे पाकिस्तान की अभी कुछ दिन पहले ही संयुक्त राष्ट्र के बाहर ईश निंदा के नाम पर हो रहे अल्पसंख्यकों के उत्पीड़न पर भारी फजीहत हुई है। अब खबर आ रही है कि पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वां में चार नाईयों को सिर्फ इसलिए हिरासत में ले लिया गया, क्योंकि उन्होंने गैर इस्लामिक तरीके से लोगों की दाढ़ी बनाई थी।

घटना 30 सितंबर की बताई जा रही है, लेकिन सोशल मीडिया पर वीडियो के वायरल होने पर यह खबर आम हो गई। पाकिस्तान के अखबार ‘द डॉन’ के मुताबिक वीडियो में स्थानीय ट्रेड यूनियन नेता समीन स्थानीय पुलिस को चार नाईयों को हिरासत में लेने को कह रहा है। पुलिस के साथ वह उन नाईयों से पूछ रहा है कि उन्होंने लोगों की दाढ़ी फैशन के अनुरूप स्टाइलिश क्यों काटी, जबकि ट्रेड यूनियन ने इसे गैर इस्लामिक बताते हुए प्रतिबंधित किया है। वीडियो के मुताबिक इस बारे में फैसला लेने के बाद यूनियन ने सभी स्थानीय दुकानदारों को इसके बारे में अवगत करा दिया था।

समीन के मुताबिक कुछ नाई प्रतिबंध की अवहेलना कर लोगों की स्टाइलिश दाढ़ी काट रहे थे। वीडियो में दिखाया गया है कि स्थानीय पुलिस उन चार नाईयों को हिरासत में लेकर उनसे 5,000 रुपए का जुर्माना वसूलने के बाद चेतावनी के साथ रिहा कर देती है। साथ ही चेतावनी भी दी कि अगर उन्होंने गैर इस्लामिक तरीके से लोगों की स्टाइलिश दाढ़ी आगे भी काटी तो अंजाम और बुरा होगा। खबर के अनुसार स्थानीय पुलिस ने नाईयों को हिरासत में लिए जाने की पुष्टि करते हुए हुए कहा कि स्थानीय ट्रेड यूनियन की शिकायत के बाद यह कदम उठाया गया था।

पाकिस्तान में कोई गैर-मुस्लिम नहीं बन सकता PM या राष्ट्रपति, संसद ने खारिज किया संशोधन बिल

पाकिस्तान की संसद ने किसी गैर-मुस्लिम व्यक्ति के देश का प्रधानमंत्री या राष्ट्रपति बनने की अनुमति दिए जाने के मकसद से लाए गए संविधान संशोधन विधेयक पर रोक लगा दी। विपक्षी पाकिस्तान पीपल्स पार्टी (PPP) के एक इसाई सांसद नवीद आमिर जीवा ने बुधवार (अक्टूबर 2, 2019) को पाकिस्तानी संविधान के आर्टिकल 41 और 91 में संशोधन के लिए एक विधेयक संसद में पेश करना चाहते थे, ताकि पाकिस्तान में गैर-मुस्लिमों को भी प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति बनने का हक मिल सके। मगर पाकिस्तानी संसद ने बहुमत के साथ इस बिल को खारिज कर दिया। जिसके बाद ये साफ हो गया है कि अब कोई भी गैर-मुस्लिम देश का प्रधानमंत्री या राष्ट्रपति नहीं बन सकता है। 

संसदीय मामलों के राज्य मंत्री अली मोहम्मद ने विपक्षी सांसद के इस प्रस्तावित बिल का विरोध किया। मंत्री ने कहा कि पाकिस्तान एक इस्लामिक रिपब्लिक है जहाँ सिर्फ मुस्लिम ही राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री बन सकता है। पाकिस्तान की दक्षिणपंथी राजनीतिक दल जमात-ए-इस्लामी के सदस्य अब्दुल अकबर चित्राली ने संसदीय राज्य मंत्री अली मोहम्मद के इस विचार की सराहना की। उन्होंने यह भी कहा कि कोई भी कानून जो इस्लामिक मूल्यों और शिक्षाओं के खिलाफ हो, पास नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने तो यहाँ तक कह दिया कि संसद में ऐसे बिल को पेश भी नहीं किया जाना चाहिए और न ही उस पर चर्चा होनी चाहिए।

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने भारत पर हमले करते हुए कहा कि नई दिल्ली (भारत सरकार) मुस्लिमों को उनके मौलिक अधिकारों से वंचित कर रही है और यह मुस्लिम बहुल कश्मीर घाटी की जनसांख्यिकी को बदलने का प्रयास कर रही है।

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान दावा करते हैं कि उनकी सरकार अल्पसंख्यक समुदाय के साथ भेदभाव नहीं करती है, लेकिन देश की नेशनल असेंबली के हालिया फैसले ने उनके पाखंड को उजागर कर दिया है। इमरान खान ने बार-बार कहा कि उनके देश में अल्पसंख्यक पूरी तरह से स्वतंत्रता और सुरक्षा का आनंद ले रहे हैं। उनके अधिकारों की रक्षा की जा रही है, मगर संसद के इस फैसले से साफ जाहिर हो रहा है कि पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों की क्या स्थिति है।