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कोहिनूर मामले में ED ने राज ठाकरे को भेजा समन, ₹135 करोड़ का लगा है चूना

महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) के सुप्रीमो राज ठाकरे को प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने इंफ्रास्ट्रक्चर लीज़िंग एंड फाइनेंशियल सर्विसेज़ (IL&FS) के फँसे कर्ज से जुड़े एक मामले में समन भेजा है। आर्थिक अपराधों की शीर्ष जाँच एजेंसी ने ठाकरे को 22 अगस्त को पूछताछ के लिए आने को कहा है।

मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक IL&FS से जुड़े अरबों रुपए के जिन कर्ज और निवेश मामलों की जाँच ED कर रही है, उनमें से एक कोहिनूर सीटीएनएल का भी है। राज ठाकरे का नाम कोहिनूर के दादर स्थित बिल्डिंग प्रोजेक्ट की तफ्तीश के दौरान निकल कर सामने आया।

इंडिया टुडे की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि ठाकरे के अलावा शिवसेना नेता और 1995-99 में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री रह चुके मनोहर जोशी के बेटे उन्मेष जोशी को भी ED का समन मिला है। जानकारी के मुताबिक उन्मेष से पूछताछ आज ही (19 अगस्त को) जारी है।

उन्मेष जोशी कोहिनूर सीटीएनएल के संस्थापक हैं। 2005 में राज ठाकरे की मातोश्री कंस्ट्रक्शंस और उन्मेष जोशी ने तब NTPC के मालिकाना हक़ वाली कोहिनूर मिल को खरीदने में कुल ₹421 करोड़ का निवेश किया था। कोहिनूर मिल की कुल अचल सम्पत्ति (ज़मीन) 4.8 एकड़ की थी। बाद में राज ठाकरे कोहिनूर प्रोजेक्ट से बाहर निकल गए।

IL&FS के घोटाले की जाँच के समय कोहिनूर मामला भी प्रकाश में आया था। IL&FS ने कथित तौर पर कोहिनूर सीटीएनएल को ₹225 करोड़ का कर्ज दिया, लेकिन उसमें IL&FS को ₹135 करोड़ का घाटा झेलना पड़ा। रिपोर्टों के मुताबिक कोहिनूर सीटीएनएल में IL&FS के निवेश की कुल कीमत ₹860 करोड़ की है।

ED के इस समन पर राजनीति भी शुरू हो चुकी है। जहाँ ED भवन में जाने के पहले उन्मेष जोशी ने ED के साथ पूरा सहयोग करने की बात कही है, वहीं मनसे के प्रतिनिधि संदीप पाण्डे ने इंडिया टुडे से बात करते हुए मोदी सरकार पर हिटलरशाही का आरोप लगाया। उन्होंने सवाल पूछा कि पिछले 5-6 साल में किसी भाजपा नेता को मामले में जाँच का सामना क्यों नहीं करना पड़ा है।

कनाडा में भारत के स्वतंत्रता दिवस का जश्न: Article 370 का पावर खत्म करने के लिए PM मोदी व शाह को Thank You

कनाडा के ओटावा शहर में 18 अगस्त को भारतीय समुदाय के लोगों ने 73वें स्वतंत्रता दिवस के मौके पर परेड का आयोजन किया। ये परेड कनाडा के संसद भवन से सिटी हॉल ओटावा तक निकाला गया। इस परेड में 250 से अधिक भारतीय शामिल हुए। इस दौरान ध्वजारोहण कार्यक्रम का भी आयोजन किया गया, जिसमें ओटावा के मेयर जिम वॉटसन और कनाडा की मंत्री लीसा मैकलेओड भी शामिल हुए। 

स्वतंत्रता दिवस के जश्न में निकाले गए इस परेड में जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 के हटने के समर्थन में बैनर भी दिखे। बैनर में आर्टिकल 370 का हटना कश्मीर के लिए अच्छा बताया गया है। बैनर पर भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह को जम्मू-कश्मीर से आर्टिकल 370 हटाने के लिए धन्यवाद भी लिखा हुआ है।

एक लॉरी पर बैठे कुछ लोग अपने साथ बैनर लिए हुए दिखाई दिए। जिसमें से कुछ बैनर पर one nation one constituition तो कुछ पर United India और कुछ पर Secularism means iclusiveness लिखा हुआ नजर आया।

गौरतलब है कि, पिछले दिनों भारत सरकार ने अनुच्छेद 370 को निष्क्रिय कर के जम्मू कश्मीर का विशेष दर्जा समाप्त कर दिया था। साथ ही जम्मू कश्मीर दो केंद्र शासित प्रदेशों- जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में विभाजित कर दिया है। भारत सरकार के इस फैसले का विश्व के कई देशों ने स्वागत किया है।

J&K: प्रतिबंध के बावजूद अलगाववादी नेता गिलानी को चोरी-छिपे दी इंटरनेट सुविधा, BSNL के 2 कर्मचारी निलंबित

बीएसएनएल ने अपने दो कर्मचारियों को निलंबित कर दिया है। जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 के प्रावधानों को निरस्त किए जाने के बाद राज्य में सुरक्षा-व्यवस्था कड़ी कर दी गई थी। अलगाववादियों व कई कश्मीरी नेताओं की मंशा पर पानी फेरने के लिए कई क्षेत्रों में इंटरनेट सेवा भी बंद कर दी गई थी। यह सब इसीलिए किया गया था ताकि हिंसा न भड़के। लेकिन, सरकारी दूरसंचार कंपनी बीएसएनएल के दो कर्मचारियों ने अलगाववादी नेता सैयद अली शाह गिलानी को इंटरनेट सुविधाएँ दी।

सैयद अली शाह गिलानी भारतीय सेना को भला-बुरा कहता रहा है और पाकिस्तान के गुण गाता रहा है। गिलानी के नाम वाले ट्विटर हैंडल से लगातार अफवाहें फैलाई जा रही थीं। इसके बाद भारत सरकार ने ट्विटर को ऐसे कई एकाउंट्स की सूची दी थी, जो जम्मू-कश्मीर पर पाकिस्तानी प्रोपेगंडा चला कर घाटी में हिंसा फैलाना चाह रहे थे। दो बीएसएनएल कर्मचारियों के निलंबन के बाद यह सवाल फिर से उठने लगा है कि पाकिस्तान परस्त अलगाववादियों का नेक्सस कितना बड़ा है और इसमें किस-किस स्तर के लोग शामिल हैं?

इंटरनेट सेवाएँ प्रतिबंधित किए जाने के बावजूद बीएसएनएल के उक्त दोनों कर्मचारियों की मदद से भारत-विरोधी एजेंडा चलाने वाला गिलानी 4 दिनों तक चोरी-छिपे इंटरनेट की सुविधा का लाभ उठाता रहा। ‘नेशन फर्स्ट’ में रणनीतिक मामलों के वरिष्ठ संपादक प्रमोद कुमार सिंह के अनुसार, गिलानी इंटरनेट के जरिए पाकिस्तानी आकाओं से लगातार संपर्क में था। वह भारतीय सुरक्षा बलों द्वारा जम्मू-कश्मीर में शांति कायम रखने के प्रयासों को सफल होते देख कर निराश था।

रणनीतिक मामलों के जानकार वकील दिव्य कुमार सोती ने इस ख़बर के सामने आने के बाद निलंबित किए गए बीएसएनएल कर्मचारियों के ‘इस्लामिक लिंक’ की जाँच कराने की माँग की है। वकील दिव्य सोती ने कहा है कि जाँच के निष्कर्ष को सार्वजनिक किया जाना चाहिए। बताया जाता है कि गिलानी ने पाकिस्तानी एजेंसी आईएसआई के लोगों से भी संपर्क किया था।

उन्नाव कांड: SC ने CBI को दिया 2 हफ्ते का अतिरिक्त समय, योगी सरकार से घायल वकील को ₹5 लाख देने का निर्देश

उन्नाव रेप केस पीड़िता के साथ हुए सड़क हादसे की जाँच के लिए सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई (CBI) को दो हफ्ते का अतिरिक्त समय दिया है। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई को इस प्रकरण में 14 दिन में जाँच का आदेश दिया था। सीबीआई ने इसके बाद जाँच को गति देते हुए शीर्ष अदालत में अपनी स्टेटस रिपोर्ट सौंप दी थी। 

सीबीआई ने उन्नाव दुष्कर्म मामले की पीड़िता और उसके वकील के बयान दर्ज किए जाने की बात कहते हुए जाँच पूरी करने के लिए सुप्रीम कोर्ट से चार सप्ताह का समय माँगा। सीबीआई ने अदालत को बताया कि पीड़िता के वकील की हालत गंभीर बनी हुई है। जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई को दो हफ्ता का समय देने के साथ ही उत्तर प्रदेश सरकार को दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल वकील को चिकित्सा खर्च के लिए 5 लाख रुपए का अंतरिम मुआवजा देने का भी निर्देश दिया।

बता दें कि, इस हादसे को लेकर पीड़िता का एक बयान सामने आया है। जिसमें पीड़िता ने अपने रिश्तेदार को बताया कि 28 जुलाई को जब वह कार से रायबरेली जा रहे थे, तो NH-21 पर उसने सामने से एक ट्रक को आते देखा। जिसके बाद कार चला रहे पीड़िता के वकील ने उसे हर संभव कोशिश करके जाने का रास्ता दिया, लेकिन शायद ट्रक के निशाने पर वो कार थी, जिसमें पीड़िता अपनी दो रिश्तेदारों और अपने वकील के साथ बैठी थी।

पीड़िता ने बताया कि उन्होंने ट्रक को सामने से आते देखा और जब कुछ असामान्य सा लगा तो अलार्म भी बजाया और कार चला रहे वकील ने कार को रिवर्स गियर में डालकर ट्रक के रास्ते से बचने की पूरी कोशिश की, लेकिन वह सफल नहीं हो सके, क्योंकि ट्रक बिल्कुल उन्हीं की तरफ मुड़ गया और फिर यह हादसा हो गया।

शेहला रशीद: ‘दो वक़्त की रोटी और फेक पब्लिसिटी के लिए झूठी औरत भारत के विरुद्ध ज़हर उगलती है’

पाकिस्तानी प्रोपेगंडा चलाने के लिए शेहला रशीद को भारतीय सेना से फटकार मिली है। सोशल मीडिया पर लोग उसकी गिरफ़्तारी के लिए अभियान चला रहे हैं। दरअसल, एक के बाद एक कई ट्वीट्स करते हुए शेहला ने जम्मू-कश्मीर की हालत बेहद खराब होने का दावा करते हुए सशस्त्र बलों पर कश्मीरियों को प्रताड़ित करने का आरोप लगाया था। सेना ने इसे खारिज करते हुए शेहला के आरोपों को बेबुनियाद बताया है। साथ ही कहा है कि असामाजिक तत्व और संगठन लोगों को भड़काने के लिए फर्जी खबरें फैला रहे हैं।

इसके बाद से ट्विटर पर “Arrest Shehla Rashid” ट्रेंड कर रहा है। ट्विटर यूजर ने लिखा है कि अब शेहला के बकवासों की हद हो चुकी है और उसे क़ानून के डंडे का सामना करना पड़ेगा। कुछ लोगों ने शेहला को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बताया है।

एक अन्य यूजर ने शेहला के दो फोटोज शेयर किए। दावा किया गया है कि एक तस्वीर जेएनयू की तो दूसरी श्रीनगर की है। जेएनयू में वह ‘अकेली-आवारा-आज़ाद’ लिखी टी-शर्ट में है, जबकि श्रीनगर वाली फोटो में वह हिजाब पहनी दिखती है। आप भी देखें:

एक अन्य ट्विटर यूजर ने लिखा कि दो वक़्त की रोटी और फेक पब्लिसिटी के लिए ‘झूठी औरत’ भारत के विरुद्ध ज़हर उगलती है। उसने यह भी लिखा कि वामपंथी और पाकिस्तानी शेहला से काफ़ी प्यार करते हैं।

शेहला के दावों को सेना द्वारा बेबुनियाद करार देने के बाद वकील आलोक श्रीवास्तव में सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। श्रीवास्तव ने शेहला के खिलाफ सेना और सरकार के खिलाफ झूठ फैलाने और गुमराह करने का आरोप लगाते हुए आपराधिक शिकायत दर्ज कराई है। साथ ही उसकी तत्काल गिरफ्तारी की मॉंग की है।

एक ट्विटर यूजर ने शाह फैसल की ओर इशारा करते हुए पूछा कि अगर शेहला के ‘तुर्की बॉस’ को गिरफ़्तार किया जा सकता है तो फिर शेहला रशीद को क्यों नहीं?

शेहला रशीद फिलहाल आईएएस से नेता बने शाह फैसल के साथ जम्मू-कश्मीर की राजनीति में स्थापित होने की कोशिश कर रही हैं। शाह फैसल वही नेता हैं जिन्होंने जम्मू-कश्मीर से आर्टिकल 370 के प्रावधानों को निष्क्रिय किए जाने के बाद ‘बदला’ लेने की धमकी दी थी। उन्हें पिछले दिनों दिल्ली एयरपोर्ट पर उस समय रोक लिया गया था जब वे देश छोड़ने की कोशिश कर रहे थे। फिलहाल वे श्रीनगर में नजरबंद हैं। बताया जाता है कि वे भारत सरकार के फैसले के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय न्यायालय का दरवाजा खटखटाने के लिए देश छोड़कर जा रहे थे।

घर के बाहर बिस्किट का रैपर देख आसिफ और अली ने कर दी साजिद की हत्या

दिल्ली के गाँधी नगर इलाके में सिर्फ़ एक बिस्किट के रैपर के कारण आसिफ और अफसर नाम के दो भाईयों ने अपने पड़ोसी साजिद की चाकू घोंपकर हत्या कर दी। इस घटना में साजिद के 2 भाई (सलमान और आबिद) भी घायल हुए। पुलिस ने मुख्य आरोपित आसिफ उर्फ शब्बू को पकड़ लिया है जबकि अफसर अली की तलाश जारी है।

घटना दिल्ली के सीलमपुर में नानक बस्ती की गली नं-4 में रविवार की रात 8-8:30 बजे घटी। बताया जा रहा है कि पूरे मामले में साजिद की हत्या केवल बीच-बचाव करने के कारण हुई।

जानकारी के मुताबिक शब्बू के घर के बाहर बिस्किट का रैपर पड़ा था। जिसे देखकर शब्बू और उसकी माँ नसीमा साजिद के भतीजे पर भड़क उठे। जब साजिद की माँ ने इसका विरोध किया तो शब्बू उनके साथ गाली-गलौच पर उतर आया। इस बीच साजिद का भाई आबिद वहाँ पहुँचा और उसने कहा कि उनके परिवार ने कूड़ा नहीं डाला है। लेकिन शब्बू नहीं माना और कैंची से हमला करने लगा। हालाँकि उस समय पड़ोसियों ने बीच-बचाव कर मामला शांत करा दिया। बाद में पुलिस कंट्रोल रूम को फोन करके घटना की सूचना दी गई। लेकिन जब पुलिस ने परिवार से संपर्क करना चाहा तो वहाँ से कोई रिस्पांस नहीं आया।

नवभारत टाइम्स में प्रकाशित खबर

झगड़े के बाद डर से साजिद की माँ अपने दोनों बच्चों को लेकर सीमापुरी अपने रिश्तेदार के घर चली गई। लेकिन जब शाम को 7 बजे वह घर लौटी तो दोनों भाई आसिफ और अफसर वहीं थे। उन्होंने दोबारा गाली-गलौच शुरू की और फिर आबिद और सलमान पर हमला कर दिया। दोनों भाइयों ने जैसे-तैसे अपनी जान बचाने के लिए घर में घुसे तो वह भी उनके पीछे घर में घुस गए। इसी बीच साजिद घर लौट आया। उसने आसिफ और अफसर को घर से बाहर निकालकर दरवाजा बंद करने की कोशिश की, लेकिन तब तक शब्बू ने उसे चाकू घोंप दिया।

दोनों भाइयों ने साजिद पर चाकू और कैंची से कई वार किए। जिसकी वजह से वह जख्मी हो गया। उसे गंभीर हालत में नजदीक अस्पताल ले जाया गया , लेकिन जख्म इतने गहरे थे कि डॉक्टर साजिद को नहीं बचा पाए। वहीं, सलमान और आबिद को प्राथमिक उपचार देकर छुट्टी दे दी गई हैं। बता दें पुलिस ने आसिफ उर्फ शब्बू को गिरफ्तार कर लिया है जबकि अफसर उर्फ़ काले अभी पुलिस की पकड़ से फरार है।

राष्ट्रपति के विरोध में लिखी 190 पन्नों की किताब, 188 पेज खाली, वजह जान हैरान रह जाएँगे

ब्राजील के राष्ट्रपति जेयर बोलसोनारो पर लिखी एक किताब सोशल मीडिया पर काफी वायरल हो रही है। इसके पीछे बड़ी ही रोचक वजह है। दरअसल, ‘बोलसोनारो विश्वास और सम्मान के लायक क्यों हैं’ नामक इस किताब के लेखक विलियम थम्स ने 190 पेज की इस किताब में 188 पन्ने खाली छोड़ दिए हैं। यानी कि उन्होंने सिर्फ दो पन्नों पर ही लिखी है। लेखक ने इस तरह से राष्ट्रपति के खिलाफ अपना विरोध प्रदर्शित किया है। थम्स के विरोध के इस अनोखे तरीके की हर तरफ चर्चा हो रही है।

नवभारत टाइम्स में छपी खबर का स्क्रीनशॉट

थम्स ने कहा कि उनकी ये पुस्तक साल की शुरुआत में प्रकाशित हुई थी, लेकिन बुधवार (अगस्त 14, 2019) को सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद लोगों का ध्यान इस तरफ गया। उन्होंने बताया कि उनको ये आइडिया अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प पर छपी ऐसी ही एक किताब से आया। 2016 में लेखक डेविड किंग ने ट्रम्प के ऊपर ऐसी ही किताब लिखी थी। जिसका नाम था- ‘ क्यों ट्रंप विश्वास, सम्मान और प्रशंसा के लायक हैं?’ इसके अलावा वर्ष 2017 में लेखक माइकल जे नोल्स ने ट्रंप पर 266 पेज की खाली पन्नों की किताब लिखी थी। जिसका टाइटल था-‘लोकतंत्र के लिए वोट का कारण: एक विस्तृत गाइड।’ थम्स का कहना है कि उन्होंने ‘बोलसोनारो विश्वास और सम्मान के लायक क्यों हैं’, इसका जवाब इसलिए नहीं दिया क्योंकि वो (जेयर बोलसोनारो) किसी चीज के लायक नहीं है। इसके साथ ही उन्होंंने 188 पेज खाली छोड़ने के पीछे की वजह बताते हुए कहा कि वो चाहते हैं कि लोग विवादित नेता के बारे में अपनी खुद की राय बताएँ।

वहीं, किताब के जिन दो पन्नों पर लिखा गया हैै, वो भी बेहद ही मजेदार चीजें लिखी गईं हैं। बता दें कि किताब के इन दो पन्नों पर लिखी गई है कि यह किताब घंटों तक की गई मेहनत का नतीजा है। दरअसल, ब्राजील की अर्थव्यवस्था काफी बुरे दौर से गुजर रही है और अमेजन के जंगलों की कटाई की वजह से बोलसोनारो की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आलोचना भी हो चुकी है। बोलसोनारो ने जनवरी में राष्ट्रपति पद की शपथ लेते हुए कहा था कि वो वहाँ के जुर्म और भ्रष्टाचार को खत्म करेंगे, मगर अभी भी ब्राजील की स्थिति जस की तस है।

हालाँकि, अभी तक इस किताब पर राष्ट्रपति का कोई बयान नहीं आया है, लेकिन सोशल मीडिया पर इसे ढेर सारे रिव्यू मिल रहे हैं। ऑनलाइन शॉपिंग ऐप अमेज़ॉन पर महज कुछ ही घंटों में गुरुवार (अगस्त 15) को लगभग 300 लोगों ने अपने रिव्यू पोस्ट किए। कुछ ने थम्स के इस तरीके का समर्थन किया तो वहीं कुछ ने इसे दुखद बताया। एक यूजर ने इस कदम का समर्थन करते हुए “देश को बदलने वाले व्यक्ति के बारे में सबसे अच्छा और सबसे व्यापक विश्लेषण”। वहीं एक अन्य यूजर ने लिखा, “दुखद है कि गंभीर लोग अपना पैसा और समय बर्बाद कर रहे हैं।”

यौन उत्पीड़न मामले में तरुण तेजपाल को राहत देने से SC का इनकार, 6 महीने में पूरी होगी सुनवाई

तहलका मैगज़ीन के पूर्व एडिटर तरुण तेजपाल को सुप्रीम कोर्ट ने राहत देने से इनकार कर दिया है। अदालत ने यौन उत्पीड़न के आरोप ख़ारिज करने संबंधी उनकी याचिका को ख़ारिज कर दिया है। साथ ही तेजपाल के ख़िलाफ़ ट्रायल जारी रखते हुए निचली अदालत को 6 महीने के भीतर सुनवाई पूरी करने का आदेश दिया है।

तेजपाल ने अपनी याचिका में ख़ुद के ख़िलाफ़ यौन उत्पीड़न के मामले को रद्द करने की माँग की थी। तेजपाल पर आरोप है कि उन्होंने साल 2013 में गोवा के एक पाँच सितारा होटल के एलिवेटर के अंदर महिला सहकर्मी का यौन उत्पीड़न किया था। तेजपाल ने ख़ुद पर लगे आरोपों से इनकार किया है। ग़ौरतलब है कि तरुण तेजपाल को अपराध शाखा ने 30 नवंबर 2013 को गिरफ़्तार किया था। मई 2014 से वे ज़मानत पर बाहर हैं।

2017 में गोवा की अदालत से आरोप तय हो जाने के बाद तेजपाल ने बॉम्बे हाईकोर्ट का रुख़ किया था। हाई कोर्ट ने भी आरोप खारिज करने की उनकी याचिका नामंजूर कर दी थी।

9 साल की बच्ची ने बताया: अम्मी को बड़ी अम्मी, कौसर व निदा ने पकड़ा, दिलशाद, आस मोहम्मद और रईस ने जलाया

दिल्ली के हज़रतगंज निजामुद्दीन बस्ती के कोट मोहल्ला में रहने वाली 32 वर्षीय यास्मीन को ससुराल में जलाए जाने का मामला सामने आया है। इस दौरान महिला 80 फ़ीसदी तक जल गई, जिसे दिल्ली के सफ़दरजंग अस्पताल में भर्ती कराया गया। यास्मीन को जलाने का आरोप उसके जेठ-जेठानियों पर है।

ख़बर के अनुसार, जेठ-जेठानी ने प्रॉपर्टी और पैसों के विवाद को लेकर महिला पर मिट्टी का तेल डालकर उसे ज़िंदा जलाने की कोशिश की। ऐसा करते देख पीड़िता की तीनों बेटियाँ मौक़े पर पहुँची और अपनी माँ को जलता देख उन पर पानी डालने के लिए घरवालों से गिड़गिड़ाती रहीं। लेकिन, किसी का दिल नहीं पसीजा और महिला 80 फ़ीसदी तक जल गई। बाद में पुलिस को कॉल की गई।

दैनिक समाचार पत्र नवभारत टाइम्स में छपी ख़बर

साउथ-ईस्ट-दिल्ली के डीसीपी चिन्मय विश्वाल ने बताया कि हज़रत निज़ामुद्दीन थाने में FIR दर्ज कर मामले की जाँच शुरू कर दी है। यह घटना 16 अगस्त के शाम की है। फ़िलहाल अब तक किसी की गिरफ़्तारी नहीं हो सकी है। जानकारी के अनुसार, 32 वर्षीय यास्मीन का निक़ाह 10 साल पहले आमिर से हुआ था। चार साल पहले उसकी मौत हार्ट-अटैक से हो गई थी। शौहर की मौत के बाद यास्मीन पर ससुराल वालों ने ज़ुल्म ढाना शुरू कर दिया। यास्मीन की तीन बेटियाँ हैं, इनमें सबसे बड़ी बेटी 9 साल, दूसरी 8 साल और तीसरी 5 साल की है।

यास्मीन के मायकेवालों का कहना है कि जब तक आमिर जीवित था तब तक किसी तरह की कोई दिक्कत नहीं थी, लेकिन उसकी मौत के बाद पैसों को लेकर आए दिन घर में क्लेश होने लगा। ससुराल वाले उसको महीने के 10 हज़ार रुपए बतौर खर्च देते थे, इससे उसकी तीनों बेटियों का गुज़ारा नहीं हो पाता था। 

यास्मीन की बड़ी बेटी को शुगर की समस्या है, ऐसे में जब वो खर्च बढ़ाने की बात कहती तो ससुराल वाले उससे नाराज़ हो जाते और उसे प्रताड़ित करते। बात मारपीट तक पहुँच जाती। हद तो तब बढ़ गई जब ससुराल वालों को यह लगने लगा कि कहीं वो प्रॉपर्टी में हिस्सा न माँग ले तो उसके ससुराल वालों ने उसे ज़िंदा जलाकर मार देने का षणयंत्र रचा।

यास्मीन की बड़ी बेटी ने बताया कि जब वो ट्यूशन से घर लौटी तो उसने देखा कि आग में जल रही उसकी अम्मी को बड़ी अम्मी, कौसर और निदा ने पकड़ रखा था। पीड़िता की तीनों बच्चियों ने मिलकर किसी तरह आग बुझाई। यास्मीन ने अपनी बेटी को बताया कि उसे उसके शौहर के भाइयों आस मोहम्मद, मोहम्मद दिलशाद और रईस ने अपनी बीवियों के साथ मिलकर मिट्टी का तेल डालकर आग लगा दी। 


नवभारत टाइम्स में छपी ख़बर

पुलिस ने घटना-स्थल का जब मुआयना किया तो अपनी प्राथमिक जाँच में पाया कि फर्श पर मिट्टी के तेल की बोतल, पानी और तेल बिखरा हुआ था। अधजले कपड़े भी बरामद किए जिनसे मिट्टी के तेल की बदबू आ रही थी। पुलिस ने यह बात भी स्पष्ट की कि मामला प्रॉपर्टी विवाद का है, फ़िलहाल जाँच की जा रही है।

शेहला रशीद के ख़िलाफ़ क्रिमिनल कंप्लेन, तत्काल गिरफ़्तारी के लिए SC में याचिका

जम्मू-कश्मीर पर अफवाह फैलाने वाले ट्वीट करने को लेकर जेएनयू की पूर्व छात्र नेता शेहला रशीद पर शिंकजा कसता जा रहा है। उनके दावों को सेना द्वारा बेबुनियाद करार देने के बाद वकील आलोक श्रीवास्तव में सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।

श्रीवास्तव ने शेहला के खिलाफ सेना और सरकार के खिलाफ झूठ फैलाने और गुमराह करने का आरोप लगाते हुए आपराधिक शिकायत दर्ज कराई है। साथ ही उसकी तत्काल गिरफ्तारी की मॉंग की है।

ग़ौरतलब है कि शेहला रशीद ने रविवार (18 अगस्त) को जम्मू-कश्मीर के हालात को लेकर एक के बाद एक कई ट्वीट किए थे। अपने ट्वीट में शेहला ने अफ़वाह फैलाई थी कि जम्मू-कश्मीर में हालात बेहद ख़राब हैं। शेहला ने ख़राब हालात का हवाला देते हुए सशस्त्र बलों पर कश्मीरियों को प्रताड़ित करने का झूठा आरोप मढ़ा था। लेकिन, भारतीय सेना ने उनके इन फ़र्ज़ी दावों की पोल खोल कर रख दी। भारतीय सेना ने शेहला के दावों को बेबुनियादी करार देते हुए कहा है कि असामाजिक तत्व और संगठन लोगों को भड़काने के लिए फर्जी खबरें फैला रहे हैं।

शेहला रशीद के बारे में बता दें कि वो IAS से नेता बने शाह फैसल के साथ जम्मू-कश्मीर में अपनी राजनीतिक इच्छाएँ पूरी करने की ताक में हैं। शाह फैसल वही नेता हैं जिन्होंने जम्मू-कश्मीर से आर्टिकल 370 के प्रावधानों को निष्क्रिय किए जाने के बाद ‘बदला’ लेने की धमकी दी थी। उन्हें पिछले दिनों दिल्ली एयरपोर्ट पर उस समय रोक लिया गया था जब वे देश छोड़ने की कोशिश कर रहे थे। फिलहाल वे श्रीनगर में नजरबंद हैं। बताया जाता है कि वे भारत सरकार के फैसले के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय न्यायालय का दरवाजा खटखटाने के लिए देश छोड़कर जा रहे थे।

इससे पहले जम्मू के डिविजनल कमिश्नर संजीव वर्मा ने कहा था कि अफवाह फैलाने वाले लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने बताया था कि ऐसे कुछ लोगों के बारे में पुलिस जानकारी जुटा रही है।