Home Blog Page 5661

‘जो ना बोले जय श्री राम, भेज दो उसको कब्रिस्तान’, Viral हुए इस नए गाने पर बढ़ा विवाद

देश भर में हो रही मॉब लिंचिंग की घटनाओं के बीच एक गाना रिलीज हुआ है। रिलीज होने के साथ ही ये गाना विवादों में घिर गया है। इस गाने के बोल हैं- ‘जो ना बोले जय श्री राम, भेज दो उसको कब्रिस्तान।’ इस गाने को लेकर सोशल मीडिया में काफी चर्चा हो रही है। जानकारी के मुताबिक, इस गाने को वरुण बहार ने गाया है। 

इस गाने को लेकर लोग सोशल मीडया पर अपनी-अपनी अलग प्रतिक्रियाएँ दे रहे हैं। कुछ लोग इसे आपत्तिजनक बता रहे हैं, तो कुछ लोगों को इस गाने में कुछ भी गलत नहीं लग रहा है। ट्विटर यूजर प्रशांत कनौजिया ने इस वीडियो को ट्वीट करते हुए सिंगर को डिजिटल टेररिस्ट बताया है। बता दें कि प्रशांत कनौजिया वही पत्रकार है, जिसे सीएम योगी आदित्यनाथ पर आपत्तिजनक सोशल मीडिया पोस्ट करने के आरोप में यूपी पुलिस ने हाल ही में गिरफ्तार किया था।

प्रशांत ने ट्वीट में लिखा है, “भारत एकमात्र देश है जहाँ आतंकवादी अपना म्यूजिक वीडियो बनाते हैं और यूट्यूब पर चलाते हैं। इस मामले में तालिबान और आईएसआईएस भी इस तकनीक तक नहीं पहुँच पाए हैं। डिजिटल इंडिया के साथ डिजिटल आतंकवाद…” इसके साथ ही कनौजिया ने हैशटैग में डिजिटल टेरेरिस्ट भी लिखा है।

प्रशांत कनौजिया के ट्वीट पर बहुत सारे ऐसे लोग हैं जो गृह मंत्रालय से लेकर यूपी पुलिस तक से वीडियो बनाने वाले शख्स के खिलाफ कार्रवाई की माँग कर रहे हैं। वहीं कुछ यूजर्स ऐसे भी हैं जो ये कह रहे हैं कि इस तरह के वीडियो मार्केट में आने से मॉब लिंचिंग जैसी घटनाएँ बढ़ सकती हैं।

वहीं, कुछ यूजर्स ऐसे भी हैं जिन्हें इस तरह के गाने में कोई बुराई नहीं दिख रही है। ऐसे लोग वीडियो ट्वीट करने वाले प्रशांत कनौजिया को ही एंटी हिंदू और एंटी नेशनलिस्ट बता रहे हैं। एक यूजर ने कमेंट करते हुए लिखा है, “सबसे बड़े आतंकी तो तुम हो। रहते हिंदुस्तान में, खाते हिंदुस्तान की लेकिन हिंदुओं को आतंकवादी बोलते हो। शांतिदूत जब खुलेआम खून खराब करते हैं, तब कहाँ मर जाते हो।”

संपादकीय नोट: ऑपइंडिया इस तरह के किसी गाने की निंदा करता है (फिर चाहे वो किसी भी धर्म विशेष को लेकर ही क्यों न हो)। इससे माहौल बिगड़ सकता है, साम्प्रदायिक तनाव बढ़ सकता है।

मोदी राज में कम हुआ साम्प्रदायिक तनाव, आईबी के आँकड़े दे रहे गवाही

‘लिबरल गैंग’ और विपक्ष के तमाम दावों के बीच आँकड़ें बताते हैं कि मोदी सरकार के कार्यकाल में देश में साम्प्रदायिक तनाव कम हुआ है। केन्द्रीय गृह राज्य मंत्री जी. किशन रेड्डी ने बुधवार को राज्यसभा में प्रश्नकाल के दौरान एक सवाल के जवाब में खुफिया ब्यूरो (आईबी) के आँकड़ों के हवाले से यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि 2013 में साम्प्रदायिक घटनाओं के 823 मामले दर्ज किए गए थे। 2018 में इनकी संख्या घटकर 708 रह गई।

रेड्डी ने कहा, “वास्तविकता यह है कि देश में साम्प्रदायिक घटनाओं में कमी आई है। साम्प्रदायिक या किसी अन्य प्रकार की हिंसा के प्रति हमारी सरकार का इरादा ‘जीरो टॉलरेंस (कतई बर्दाश्त नहीं करने)’ की नीति का पालन करने का है।”

साम्प्रदायिक हिंसा के मामलों का रिकॉर्ड दर्ज करने और इन आंकड़ों के स्रोत से जुड़े पूरक प्रश्न के जवाब में रेड्डी ने बताया कि राष्ट्रीय अपराध रिकार्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) ने 2014 से देश में साम्प्रदायिक घटनाओं का रिकॉर्ड दर्ज करना शुरू किया। लेकिन राज्य सरकारों द्वारा रिकॉर्ड में भिन्नता पर आपत्ति दर्ज कराने के कारण एनसीआरबी ने 2017 में इसका रिकॉर्ड दर्ज करना बंद कर दिया।

साम्प्रदायिक हिंसा रोकने के लिए अलग से कानून बनाने के सवाल पर उन्होंने मौजूदा कानून को पर्याप्त बताते हुए कहा कि साम्प्रदायिक तनाव और हिंसा से निपटने के लिए नया कानून बनाने की कोई जरूरत नहीं है। केन्द्र सरकार समय-समय पर राज्य सरकारों को इस बारे में खुफिया जानकारियाँ साझा करने के साथ-साथ परामर्श भी जारी करती रहती है।

‘शेर’ एजाज खान आया जेल से लँगड़ाते हुए बाहर, लोगों ने पूछा- सब ठीक तो है?

सोशल मीडिया पर भड़काऊ और विवादस्पद सांप्रदायिक वीडियो बनाने के मामले में मुंबई पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए गालीबाज अभिनेता एजाज खान को गिरफ्तार कर लिया था। अभिनेता एजाज ख़ान ने टिक-टॉक ऐप पर भड़काऊ वीडियो बना कर पोस्ट किया था। लेकिन अब वो जेल से रिहा हो चुके हैं। इसकी जानकारी एजाज खान ने अपने ट्विटर अकाउंट से दी। साथ में अपनी एक दमदार तस्वीर पोस्ट करते हुए लिखा है- “A lion doesn’t concern himself with the opinions of a sheep”

गालीबाज एजाज खान की दमदार वापसी

एजाज खान एक लाख रुपए की जमानत पर रिहा किए गए हैं। मुंबई पुलिस द्वारा उन पर IPC की धारा 153-A, धारा 34 और धारा 67 के तहत केस दर्ज किया गया था।

‘लँगड़ाकर क्यों चल रहे हो?

एजाज खान के ट्वीट पर ट्विटर यूज़र्स ने जवाब देते हुए उनका एक वीडियो शेयर किया है, जिसमें वो लड़खड़ाते हुए चल रहे हैं। इस पर ट्विटर यूज़र्स उनसे अपने अंदाज में सवाल करते देखे जा रहे हैं।

>

कुछ दिन पहले ही एजाज ख़ान ने हिन्दुओं के विरुद्ध हिंसा की बात की थी और सोशल मीडिया पर वह भड़काऊ और विवादास्पत पोस्ट्स के लिए कुख्यात हैं। मुंबई पुलिस ने उनके ख़िलाफ़ एफआईआर दर्ज की थी। एजाज ख़ान ने उसी TikTok ‘सेलिब्रिटी’ के साथ यह विवादस्पद वीडियो बनाया था जिसके खिलाफ तबरेज़ अंसारी की मौत के बदले में हिंसा भड़काने के आह्वान को लेकर FIR दर्ज की गई थी।

एजाज़ खान की TikTok प्रोफाइल पर शेयर किए गए इस वीडियो में वह मुंबई पुलिस का मज़ाक उड़ाते नज़र आए थे। इसमें उनके साथ Team07 का एक सदस्य भी नज़र आया था। डायलॉग में जब पुलिस अफसर का किरदार कुछ अपराधियों को पुलिस की गाड़ी में बैठने को कहता है तो अपराधियों में से एक पुलिस वाले पर धौंस जमाता है। यह पहली बार नहीं है जब एजाज खान जेल गए हों, वो पहले भी कई बार ड्रग्स रखने और एक्ट्रेस के साथ बदसलूकी के लिए जेल की हवा खा चुके हैं।

‘मैंने BJP का झंडा लगाया, कॉन्ग्रेस के राजाराम ने मुझे और मेरी पत्नी को दिन-दहाड़े पीटा’ – देखें Video

मध्य प्रदेश के टीकमगढ़ के लिधौरा थाना क्षेत्र के खरो गाँव में कॉन्ग्रेस समर्थकों द्वारा पिटाई की खबर सामने आई है। यहाँ के एक दंपती को उन लोगों ने इसलिए पीट दिया, क्योंकि उसने अपनी गाड़ी पर बीजेपी का झंडा लगाया था। पीड़ित राकेश ने बताया कि वो भाजपा समर्थक है और उसने अपनी गाड़ी के ऊपर बीजेपी का झंडा लगाया था। इस पर उसके पड़ोसी राजाराम, जो कि कॉन्ग्रेस का आदमी है, ने उससे झंडा हटाने के लिए कहा। मगर राकेश ने मना कर दिया।

जब राकेश ने झंडा उतारने से मना किया तो राजाराम ने उसके साथ बदतमीजी की। फिर उसकी और उसकी पत्नी की पिटाई कर दी। साथ ही राकेश ने बताया कि उसके पड़ोसी ने अपने विकलांग बेटे को दारू पिलाकर उसके दरवाजे पर बैठा दिया है और वो गाली-गलौज कर रहा है।

वहीं एसपी अनुराग सुजानिया का कहना है कि जब इनके विवाद का मामला दर्ज हुआ था, तो इसके पीछे का कारण अवैध शराब बेचना था। उन्होंने कहा कि अभी तक राजनीतिक झंडा उतारने को लेकर कोई सबूत सामने नहीं आया है। उन्होंने कहा कि एफआईआर दर्ज कर ली गई है इस तथ्य को लेकर भी जाँच की जा रही है।

एसपी का कहना है कि पहले भी इनके बीच विवाद के मामले सामने आ चुके हैं। राकेश ने कहा कि पहले वो अवैध शराब बेचता था, लेकिन अब नहीं बेचता है। फिर भी ये लोग उसे परेशान करते हैं, उसके साथ मारपीट करते हैं। इनके साथ हुई मारपीट का वीडियो भी सामने आया है।

गुलशनजहाँ को दूधमुँही बच्ची के साथ घर से निकाला, तीसरी बेटी पैदा होने पर शौहर ने दिया तीन तलाक

कहते हैं कि समाज बदल रहा है और अब लोगों की सोच भी बदल रही है, मगर शायद ऐसा नहीं है। इसका उदाहरण समाज में आए दिन देखने को मिलता है। ताजा मामला उत्तराखण्ड के लक्सर का है। यहाँ तीसरी बेटी पैदा होने पर शौहर द्वारा तीन तलाक देकर बीबी को छोड़ने का मामला सामने आया है।

गुलशनजहाँ को तीसरी बेटी होने पर शौहर ने तीन तलाक देकर दूधमुँही बच्ची के साथ घर से निकाल दिया। महिला ने इसकी शिकायत थाने में की, मगर पुलिस ने घटनास्थल देहरादून का बताकर उसे वापस लौटा दिया। पुलिस ने कहा कि घटना देहरादून का है, तो मामला भी वहीं दर्ज होगा। गुलशनजहाँ का निकाह तकरीबन 6 साल पहले देहरादून के पटेल नगर थाना क्षेत्र के मोहल्ला मेहूँवाला के युवक के साथ हुआ था।

निकाह के बाद गुलशनहाँ को एक के बाद एक दो बेटियाँ हुईं, जिसके बाद घर वालों उसके साथ बुरा बर्ताव करने लगे, उसे प्रताड़ित करने लगे। बात-बात पर उसे परेशान किया करते थे और जब घर वालों को उसके तीसरी बार गर्भवती होने की बात पता चली तो उन लोगों ने लिंग परीक्षण करवाने की कोशिश की, मगर डॉक्टर ने इसके लिए मना कर दिया। इसके बाद उन लोगों ने महिला को और भी ज्यादा प्रताड़ित करना शुरू कर दिया।

इसी बीच गुलशनजहाँ को तीसरी बेटी पैदा हुई। तीसरी बार भी बेटी पैदा होने से बौखलाए ससुराल वालों ने उसके साथ मारपीट करनी शुरू कर दी। कई बार उसे गर्म प्रेस (इस्त्री) से भी जलाया गया और फिर 20 जुलाई को उसके शौहर ने तीन तलाक देकर उससे सारे संबंध खत्म करते हुए दूधमुँही बच्ची के साथ घर से निकाल दिया।

हनुमान भक्त शाहीन परवेज: घर में विराजे हैं बजरंग बली, रोज करती हैं पाठ और आरती

हनुमान चालीसा भले पश्चिम बंगाल की पुलिस को न सुहाता हो, भले इसके कारण बंगाल की भाजपा कार्यकर्ता इशरत जहॉं कट्टरपंथियों के निशाने पर हों, लेकिन मेरठ की 42 साल की शाहीन परवेज को इससे फर्क नहीं पड़ता। शाहीन के घर में तुलसी की माला पहने बजरंग बली विराजे हुए हैं और नियमित रूप से वह हनुमान चालीसा का पाठ तथा आरती करती हैं।

बकौल शाहीन, इससे वह अच्छा महसूस करती हैं। इंसानियत को सबसे बड़ा धर्म मानने वाली शाहीन ने न्यूज एजेंसी एएनआई को बताया, “मैं कॉलेज के दिनों से ही हनुमान चालीसा का पाठ करती हूॅं। मैं जिस स्कूल में पढ़ती थी, वहॉं सभी धर्मों की शिक्षा दी जाती थी।”

मुस्लिम राष्ट्रीय मंच से जुड़ीं शाहीन को कट्टरपंथियों का डर नहीं। वे कहती हैं, “हम ऐसे देश में रहते हैं जहां सभी को एक-दूसरे के धर्म का सम्मान करना चाहिए। यदि मैं दूसरे धर्म के बारे में भी सीखती हूॅं तो इसमें क्या गलत है। हर धर्म प्यार करना सिखाता है।”

‘पुण्य करने वालों को मिलता है ब्राह्मण कुल में जन्म, जातिगत आरक्षण के खिलाफ करना चाहिए आंदोलन’

केरल उच्च न्यायलय के न्यायाधीश वी चिताम्बरेश की ब्राह्मण समुदाय को लेकर विवादित टिप्पणी प्रकाश में आई है। उनके अनुसार ब्राह्मणों को जातिगत आरक्षण के खिलाफ आंदोलन करना चाहिए। हालाँकि उन्होंने साथ में साफ कर दिया कि संवैधानिक पद पर आसीन होने के चलते वह राय नहीं दे रहे, खाली श्रोताओं की रुचि जागृत कर रहे हैं। उन्होंने ब्राह्मणों को सलाह दी कि केवल आर्थिक आधार पर आरक्षण की बात करें, जाति या आस्था के आधार पर नहीं। वह तमिल ब्राह्मणों के एक समूह को 19 जुलाई को सम्बोधित कर रहे थे।

‘पूर्व जन्म के कर्मों से बनता है ब्राह्मण’

वी चिताम्बरेश के अनुसार ब्राह्मण द्विज यानी ‘दो बार जन्म लेने वाले’ (उपनयन संस्कार को ‘दूसरा जन्म’ कहा जाता है) होते हैं, दूसरी बार जन्म लेने का मौका पूर्व जन्म के पुण्यों से मिलता है। उन्होंने ब्राह्मण की विशेषताएँ ‘स्वच्छ आदतें, उत्कृष्ट सोच, शानदार चरित्र, अधिकांशतः शाकाहारी होना, शास्त्रीय संगीत का पुजारी’ होना बताया। उनके मुताबिक जब किसी व्यक्ति में यह गुण आ जाते हैं, तो वह ब्राह्मण हो जाता है।

पद से हटाने की माँग

दिसम्बर 2012 में ही पूर्णकालिक जज बने वी चिताम्बरेश को हटाने के लिए सोशल मीडिया पर आवाज़ें आना शुरू हो गईं हैं। एक व्यक्ति ने उन्हें मूर्ख कहा, तो एक ने नफरती (‘bigot’)। कुछ लोगों का यह भी कहना है कि ऐसे विचार रखने वाला व्यक्ति भला दलितों या अल्पसंख्यकों के मामले में न्याय कैसे करेगा।

मंदिर के पटाखों पर प्रतिबंध के लिए दे चुके हैं याचिका

जस्टिस चिताम्बरेश के करियर का इतिहास कई पक्षों वाला है। एक चर्च के स्वामित्व के मामले में उन्हें सुनवाई से हटना पड़ा था क्योंकि वकील रहते वह विवादित गुटों में से एक के पक्ष में मुकदमा लड़ चुके हैं। इसके अलावा 2016 में उन्होंने केरल उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश को खुद जज रहते एक चिट्ठी लिखी थी, जिसमें त्रिसूर पूरम उत्सव में ज्यादा शोर करने वाले पटाखों पर प्रतिबंध की पैरवी की थी। बाद में उनके पत्र को जनहित याचिका बनाकर हाई कोर्ट ने शाम से सुबह तक ऐसे पटाखों को प्रतिबंधित कर दिया, जिससे भड़क कर उत्सव में भाग लेने जा रहे आठ अन्य मंदिरों ने तिरुवम्बादी और परमेक्कावु मंदिरों के देवास्वोम बोर्डों की अगुआई में पूरे उत्सव को ही रद्द कर केवल जरूरी पूजापाठ करने की चेतावनी दी थी। यहाँ तक कि त्रिसूर के आर्कबिशप को भी मंदिरों और उत्सव के पक्ष में आना पड़ा था।

अंततः अदालत के आदेश के बाद भी प्रदेश के नेताओं ने उत्सव में किसी भी प्रकार की कमी करने से मना कर दिया था। माना जाता है कि इसका कारण रातों-रात 1300 साल पुराने वडक्कुनाथन मंदिर क्षेत्र, जिसे केरल की सांस्कृतिक राजधानी माना जाता है, में तख्तियाँ टंग गई थीं, जिन पर नेताओं को चेतावनी थी कि अगर आप पूरम का आयोजन नहीं कर सकते, तो वोट माँगने मत आना

गुल से हसीना बानो करती थी दॉंतों की सफाई, मोहम्मद वैश ने दिया तीन तलाक

उत्तर प्रदेश के बाराबंकी में नवविवाहिता को तीन तलाक देने का मामला सामने आया है। पीड़िता हसीना बानो का सात महीने पहले ही मोहम्मद वैश से निकाह हुआ था। बानो के मुताबिक दहेज की मॉंग पूरी नहीं करने और गुल से दातुन करने की वजह से वैश ने उसे तीन तलाक दे दिया।

वैश ने बानो को उसके पिता के सामने ही तलाक दिया, जिसके कारण उन्हें लकवा मार गया। मसौली थाने में पीड़िता ने इस संबंध में तहरीर दी है। वैश का दावा है कि उसकी बीवी को गुल की लत थी और जब वह बाजार से गुल लाना भूल गया तो उसने घर में हंगामा खड़ा कर दिया। उसने बताया, “सात महीने पहले हमारा निकाह हुआ था। लेकिन कौन इस तरह की आदतें बर्दाश्त करेगा? उसके मोबाइल फोन में भी आपत्तिजनक चीजें थीं।”

वहीं, बानो का दावा है कि निकाह के बाद से ही दहेज के लिए वैश उसे प्रताड़ित कर रहा था। उसने न्यूज़ एजेंसी एएनआई से कहा, “निकाह के बाद से ही वैश और उसके परिजन दहेज के लिए मुझे प्रताड़ित कर रहे थे। मेरे गंदे वीडियो बनाकर वह सभी को दिखाने की धमकी देता था। इन सब बातों से परेशान होकर मैंने अपने घर वालों को खबर की थी।”

बानो के भाई सगीर ने भी दावा किया है कि उसकी बहन को दहेज के लिए अरसे से प्रताड़ित किया जा रहा था। उसने कहा, “बानो को उसके ससुराल वाले प्रताड़ित कर रहे थे। वैश की मोबाइल की दुकान है। वह नशा देकर बानो की आपत्तिजनक वीडियो बनाता था। हमने शादी के वक्त उसे दहेज दिया था, लेकिन अब वह तीन लाख रुपए और बुलेट की मॉंग कर रहा था।”

हालाँकि एक पुलिस अधिकारी का कहना है कि दहेज के लिए प्रताड़ित करने के साक्ष्य अब तक नहीं मिले हैं। अधिकारी ने बताया, “बानो ने अपनी तहरीर में तीन लाख रुपए और बुलेट के लिए प्रताड़ित करने की बात कही है। लेकिन अब तक की जॉंच में इसके साक्ष्य नहीं मिले हैं।” उन्होंने बताया कि मामले की जॉंच जारी है और कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।

आम्रपाली ने फर्जी अग्रीमेंट के जरिए धोनी और साक्षी की कंपनियों को होम बायर्स के रुपए भेजे

वर्ल्ड कप क्रिकेट के बाद महेंद्र सिंह धोनी एक बार फिर चर्चा में हैं। लेकिन इस बार मामला क्रिकेट मैदान पर उनकी परफॉर्मेंस को लेकर नहीं बल्कि कुछ और है। सुप्रीम कोर्ट में चल रहे आम्रपाली होम बायर्स मामले में मंगलवार (जुलाई 23, 2019) को फॉरेंसिक ऑडिटर्स पवन कुमार अग्रवाल और रविंद्र भाटिया ने सुप्रीम कोर्ट ने सनसनीखेज खुलासा करते हुए कहा कि आम्रपाली ने रिती स्पोर्ट्स मैनेजमेंट प्राइवेट लिमिटेड और आम्रपाली माही डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड के साथ एक फर्जी एग्रीमेंट किया था।

इसके अनुसार, धोनी जिन्हें माही के नाम से जाना जाता है, उनका रिती स्पोर्ट्स मैनेजमेंट प्राइवेट लिमिटेड में बड़ा स्टेक है और उनकी पत्नी साक्षी धोनी आम्रपाली माही डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड में निदेशक के पद पर हैं।

रिपोर्ट्स के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट ने कल ही अपने एक निर्णय में कहा कि आम्रपाली ने ग्राहकों से धोखाधड़ी कर उनके पैसे डायवर्ट किए। सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त ऑडिटर्स ने अपनी फोरेंसिक रिपोर्ट में देखा है कि आम्रपाली ने उन कंपनियों के साथ संदिग्ध तरीके से समझौते किए, जिनमें पूर्व भारतीय क्रिकेट कप्तान महेंद्र सिंह धोनी और उनकी पत्नी साक्षी धोनी के बड़े स्‍टेक हैं।

दरअसल, फॉरेंसिक ऑडिटर पवन कुमार अग्रवाल और रविंदर भाटिया द्वारा सुप्रीम कोर्ट में सनसनीखेज खुलासे किए गए। इसमें पता चला है कि आम्रपाली ने रिति स्पोर्ट्स मैनेजमेंट प्राइवेट लिमिटेड और आम्रपाली माही डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड के साथ फर्जी समझौते किए। अप्रैल 2016 तक महेंद्र सिंह धोनी भी सात साल तक आम्रपाली के एक ब्रांड एंबेसडर थे। हालाँकि, वे हजारों असंतुष्ट खरीदारों के दबाव के बाद उससे हट गए थे।

जस्टिस अरुण मिश्रा और यूयू ललित की सुप्रीम कोर्ट की बेंच के सामने मंगलवार (जुलाई 24, 2019) को पुन: पेश की गई फोरेंसिक ऑडिट रिपोर्ट में कहा, “हमें ये महसूस हो रहा है कि घर खरीदने वाले लोगों का पैसा गैर कानूनी तरीके से रिति स्पोर्ट्स मैनेजमेंट प्राइवेट लिमिटेड को चला गया और अब वो पैसे वहाँ से वापस निकालना जरूरी है और जो बात हम कह रहे हैं, वो हमारा विचार है जो बाकी के कानून पर लागू नहीं होता है। उनसे यह वसूला जाना चाहिए, क्योंकि हमारी राय में उक्त समझौता कानून की कसौटी पर खरा नहीं उतरता है।”

मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने पूछा कि 42,000 से ज्यादा परेशान फ्लैट खरीदारों को राहत देने के लिए आम्रपाली समूह की रुकी हुई परियोजनाओं को कौन पूरा करेगा? शीर्ष अदालत ने नोएडा और ग्रेटर नोएडा के अधिकारियों के 10 मई को इस मामले में फैसला सुरक्षित रखने के बाद कहा था कि उनके पास आम्रपाली समूह की रुकी हुई परियोजनाओं के निर्माण के लिए संसाधन और विशेषज्ञता नहीं है।

अप्रैल 2016 में ट्विटर पर लोगों ने ग्रुप के प्रोजेक्ट पूरे न होने के कारण उनको भी निशाने पर ले लिया था, जिसके बाद एमएस धोनी ने ब्रांड एंबेसडर के तौर पर कंपनी से किनारा कर लिया था। इसके बाद धोनी के ब्रांड प्रमोशन को मैनेज करने वाली कंपनी रिति स्पोर्ट्स ने दिल्ली हाईकोर्ट में आम्रपाली के खिलाफ 150 करोड़ रुपए की रिकवरी के लिए केस किया था। रिति स्पोर्ट्स के मैनेजिंग डायरेक्टर अरुण पांडे ने बातचीत में बताया था कि कम्पनी ने ब्रैंडिंग और मार्केटिंग ऐक्टिविटीज के लिए उन्हें पैसा नहीं दिया। बल्कि, कंपनी के ऊपर उनके 200 करोड़ रुपए बकाया हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि आम्रपाली मामले में सीरियस फ्रॉड हुआ है और बड़ी राशि की हेर-फेर की गई है। इसमें फेमा का उल्लंघन कर विदेशों में धन भेजा गया है। ग्रेटर नोएडा और नोएडा ऑथोरिटी ने भी इस मामले में लापरवाही की है। शीर्ष अदालत ने ईडी को आदेश दिए हैं कि वह फेमा के तहत जांच कर 3 महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट दाखिल करे।

2011 में किया था पूरी क्रिकेट टीम को विला देने का वादा

वर्ष 2011 में विश्व कप जीतने वाली क्रिकेट टीम के प्रत्येक सदस्य को आम्रपाली ने 2016 में अपने नोएडा एक्सटेंशन स्थित ड्रीम वैली प्रोजेक्ट में विला देने का वादा किया था। इस ऐलान में धोनी को 1 करोड़ रुपए और अन्य खिलाड़ियों को 55 लाख की कीमत का 1690 वर्गफुट का एरिया वाला विला देने की बात कही गई थी। यह वादा अभी तक पूरा नहीं हो पाया है।

क्रिकेटर मौहम्मद कैफ ने भी मुकदमा दर्ज कराया था

क्रिकेटर मौहम्मद कैफ ने भी आम्रपाली के खिलाफ नोएडा में मुकदमा दर्ज कराया था। उन्होंने आरोप लगाया था कि आम्रपाली के निदेशक अनिल शर्मा, शिव प्रिया और अजय कुमार ने एश्योर्ड रिटर्न स्कीम के तहत अपनी अल्ट्रा होम कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड में उनसे दो करोड़ रुपए का निवेश करवाया।

Toilet में बन रहा मिड-डे मील: कमलनाथ की मंत्री बोलीं- ‘इसमें कोई परेशानी नहीं’

मध्य प्रदेश की महिला एवं बाल विकास मंत्री इमरती देवी ने स्कूली बच्चों के लिए बनाए जाने वाले खाने को लेकर एक विवादित बयान देते हुए कहा कि कहा कि शौचालय में खाना पकाने में कोई दिक्कत नहीं है। दरअसल, राज्य के करैरा जिले के एक आँगनबाड़ी में शौचालय का इस्तेमाल खाना बनाने के लिए किया जा रहा है। आँगनबाड़ी के बच्चों के लिए शौचालय में खाना पकाया जा रहा है। इसकी जानकारी जब प्रदेश की मंत्री इमरती देवी को दी गई तो उन्होंने कहा कि अगर टॉयलेट सीट और स्टोव के बीच विभाजन है तो शौचालय में खाना पकाने में कोई समस्या नहीं है।

इमरती देवी ने कहा कि शौचलय की जिस सीट पर बर्तनों को रखा जा रहा था, उस सीट का इस्तेमाल नहीं किया जा रहा था। उसे बजरी भरकर बंद किया हुआ था। हालाँकि, फिर भी इस मामले की जाँच के आदेश दे दिए गए हैं। उन्होंने शौचालय में खाना बनने को सही ठहराते हुए कहा, “आपको यह समझना चाहिए कि एक विभाजन वहाँ मौजूद है। हमारे घरों में भी तो टॉयलेट-बाथरूम अटैच बन रहे हैं। अगर हमारे रिश्तेदार घर में अटैच टॉयलेट-बाथरूम होने के कारण खाने से मना कर दें तो आप क्या कहेंगे?” बता दें कि शौचालय में बने इस रसोई घर में खाना बनाने के लिए एलपीजी सिलेंडर और मिट्टी के चूल्हे दोनों हैं। यहाँ बर्तन टॉयलेट सीट पर रखे जाते हैं।

वहीं, महिला और बाल विकास कार्यक्रम के जिला अधिकारी देवेंद्र सुंद्रयाल का कहना है कि एक स्वयं सहायता समूह ने शौचालय का नियंत्रण लिया था और इसे अस्थाई रसोई के रूप में इस्तेमाल कर रहा था। इस मामले में आँगनवाड़ी सुपरवाइजर और इसमें शामिल कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है।

वैसे कमलनाथ की मंत्री इमरती देवी का ये बयान आपको अजीब जरूर लगा होगा, लेकिन अगर इनकी समझ के हिसाब से देखें, तो उन्होंने कुछ भी गलत या अटपटा नहीं बोला है। ये इनका पुराना इतिहास रहा है। ये पहले भी अपनी हरकतों से अपना मजाक बनवा चुकी हैं। गणतंत्र दिवस के अवसर पर मंत्री साहिबा भाषण देने पहँचीं थीं। उन्होंने किसी से भाषण तो लिखवा लिया था, मगर एक लाइन भी सही से बोल नहीं पाईं, बीच में ही अटक गईं और ये कहते हुए माइक से हट गईं कि आगे की स्पीच कलेक्टर साहब पढ़ेंगे। ये सुनकर सभी श्रोता हँसने लगे और कलेक्टर साहब भी खुद को मुस्कुराने से रोक नहीं पाए थे। इसके पीछे का तर्क देते हुए इमरती देवी ने कहा था कि वो पिछले 2 दिन से बीमार थीं, चाहें तो उनके डॉक्टर से पूछ सकते हैं।