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जानिए थप्पड़ खाने के बाद अब कैसी सिक्योरिटी लेकर चलेंगे CM केजरीवाल

दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल कल चाँदनी चौक सीट से आम आदमी पार्टी उम्मीदवार पंकज गुप्ता के लिए चुनाव प्रचार करने गए थे। इस दौरान उनकी सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। शनिवार (मई 4, 2019) को मोतीनगर में हुए थप्पड़ कांड के मारे जाने के बाद उनकी सुरक्षा को लेकर अहम कदम उठाया गया है।

बता दें कि, आम आदमी पार्टी के समर्थकों या प्रशंसकों के लिए अब केजरीवाल के नजदीक जाना काफी मुश्किल होगा। अब वो पहले की तरह करीब जाकर न तो हाथ मिला सकते हैं और न ही माला पहना सकते हैं। केजरीवाल के आसपास सुरक्षाबलों का मजबूत घेरा होगा और अगर कोई समर्थक केजरीवाल से मिलना चाहता है या फिर माला पहनाकर स्वागत करना चाहता है तो तो उसे सुरक्षाकर्मियों के द्वारा जाँच किए जाने के बाद ही ये मौका मिल पाएगा।

अब केजरीवाल के रोड शो दे दौरान उनकी गाड़ी में पार्टी के लोग कम और सुरक्षाकर्मी ज्यादा होंगे। केजरीवाल की सहमति के बिना कोई भी गाड़ी में सवार नहीं हो सकेगा। सीएम की गाड़ी में केजरीवाल के अलावा तीन लोग ही मौजूद होंगे। एक तो वो वो कैंडिडेट, जिसके लिए केजरीवाल प्रचार कर रहे होंगे और दूसरा उस क्षेत्र का विधायक। इसके अलावा एक और व्यक्ति केजरीवाल की सहमति से गाड़ी में सवार हो सकता है। इसके साथ ही पब्लिक मीटिंग के दौरान आसपास की ऊँची बिल्डिंगों की छतों पर एके-47 के साथ जवान तैनात किए जाने की व्यवस्था की गई है।

इसके साथ ही अगर वो किसी रोड शो के दौरान खुली जीप में होंगे तो उनकी गाड़ी में दिल्ली पुलिस सिक्यॉरिटी यूनिट के 2 जवान पीछे और 2 जवान आगे गाड़ी में रहेंगे। इतना ही नहीं, 4 जवान गाड़ी के पीछे, 6 जवान गाड़ी के दोनों साइड और 4 जवान गाड़ी के आगे घेरा बनाकर चलेंगे और 1 या 2 कमांडो को भी वर्दी में तैनात किया जाएगा। अब केजरीवाल जिस भी जिले में प्रचार करने जाएँगे, वहाँ उनकी सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम सुनिश्चित कराने की जिम्मेदारी वहाँ के जॉइंट पुलिस कमिश्नर, जिला डीसीपी, सब-डिविजन के एसीपी और संबंधित थानों के सभी एसएचओ की होगी।

सीएम के गाड़ी में चढ़ने से पहले भी गाड़ी की जाँच की जाएगी कि कहीं किसी ने गाड़ी में बम वगैरह तो नहीं ना प्लांट किया है। वहीं अगर वो गाड़ी से उतरकर लोगों के बीच जाएँगे तो उस समय तकरीबन 20 जवान उनके चारों ओर घेरा बनाकर मौजूद रहेंगे, ताकि किसी तरह की कोई अप्रिय घटना न हो। हालाँकि, सीएम से पहले भी कई बार कहा गया है कि उनको खतरा है, वो अपने साथ सिक्याॅरिटी कवर रखें, मगर वो हर बार मना कर देते थे। मोतीनगर में हुए थप्पड़ कांड के बाद उन्होंने खुद इसके लिए सहमति दे दी है।

‘श्री लंका के हमलावरों का हमारे पास कोई रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं’: J&K पुलिस

जम्मू और कश्मीर पुलिस के प्रमुख दिलबाग सिंह ने रविवार को कहा कि उनके विभाग के पास इस बात का कोई रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है कि श्री लंका में ईस्टर रविवार को आतंकी हमले में शामिल संदिग्ध व्यक्तियों ने कश्मीर की यात्रा की थी। बता दें कि श्री लंका सेना प्रमुख ने दावा किया था कि हमले के संदिग्धों ने कश्मीर की यात्रा की थी।

ख़बर के अनुसार, सिंह ने कहा कि उन्हें राजनयिक चैनल के माध्यम से ऐसी कोई जानकारी नहीं मिली है। सोशल मीडिया पर जिन लोगों के नाम सामने आए हैं, दस्तावेजों में उनकी कश्मीर यात्रा के बारे में कोई जानकारी नहीं है। सिंह ने कहा, “हमने जाँच की है और उनके यहाँ आने के बारे में कोई जानकारी नहीं है।” उन्होंने कहा कि आतंकवादी हमलों के बाद आव्रजन (Immigration) रिकॉर्ड फिर से देखे गए थे और किसी भी हमलावर ने कश्मीर का दौरा नहीं किया था।

कुछ दिनों पूर्व श्री लंकाई सेना के अधिकारी लेफ्टिनेंट जनरल महेश सेनानायके की टिप्पणी आई थी, जिसमें उन्होंने दावा किया था कि ईस्टर हमले के संदिग्ध भारत में कश्मीर गए थे और उन्होंने केरल राज्य की यात्रा भी की थी। दिलबाग सिंह ने कहा कि श्री लंका के सेना प्रमुख को राजनयिक चैनलों के माध्यम से सबूत भेजने चाहिए, और वह इस पर ग़ौर करेंगे।

ज्ञात हो कि 21 अप्रैल को श्री लंका के तीन चर्चों और लग्जरी होटलों में आतंकी हमले में लगभग 300 लोग मारे गए थे और 500 से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल हुए थे। एक महिला समेत नौ आत्मघाती हमलावरों ने इस घटना को अंजाम दिया था।

TMC कार्यकर्ता ने किया BJP उम्मीदवार अर्जुन सिंह पर हमला: #VotingRound5

पश्चिम बंगाल में बैरकपुर से भाजपा उम्मीदवार अर्जुन सिंह ने आरोप लगाया कि टीएमसी के गुंडों ने उनपर हमला किया। उनका कहना है कि हमला करने के लिए टीएमसी ने बाहर से गुंडों को बुलवाया था। इस हमले में उन्हें चोट आई है।

खबरों के अनुसार टीएमसी के गुंडे मतदाताओं को डरा धमका रहे थे और उन्हें वोट डालने से रोक रहे थे, तभी एक महिला अर्जुन सिंह के पास अपनी शिकायत लेकर पहुँची कि उनका बेटा जो कि पोलिंग एजेंट था, वह मिल नहीं रहा है। महिला की शिकायत पर अर्जुन सिंह ने तुरंत पोलिंग एजेंट का पता लगवाने में मदद की और उन्हें ढूँढकर बूथ के भीतर बैठाया। इस घटना के तुरंट बाद टीएमसी के कथित गुंडों ने उनके साथ हाथापाई शुरू कर दी जिसमें अर्जुन सिंह को खासी चोटे आईं।

ऐसा पहली बार नहीं है कि टीएमसी के गुंडों ने खुलेआम अपनी गुंडागर्दी दिखाई हो, इससे पहले भी उनके हिंसा में शामिल होने की खबरें आती रही हैं। पिछले चरण के मतदान में टीएमसी के उत्पात के कारण ग्रामीणों ने मतदान बहिष्कार करने का फैसला कर लिया था। उनकी जिद थी कि यदि पोलिंग बूथ पर सीआरपीएफ को तैनात नहीं किया गया तो वह मतदान करने नहीं जाएँगे।

इसके अलावा पिछले महीने टीएमसी के गुंडों ने भाजपा कार्यकर्ता की बुरी तरह पिटाई करके उन्हें लहूलुहान कर दिया। ट्विटर पर अंकुर सिंह ने लहूलुहान भाजपा कार्यकर्ता का फोटो शेयर कर दावा किया था कि तृणमूल के गुंडों ने उन्हें बुरी तरह पीटा है। पीड़ित भाजपा कार्यकर्ता के बेटे ने भी अपने पिता का फोटो शेयर कर अपने परिवार की सुरक्षा की गुहार लगाई थी। प्रतीक ने ट्विटर के माध्यम से पूरे देश का सहयोग माँगा था और कहा था कि अगर इस पर ध्यान नहीं दिया गया तो उनके पूरे परिवार को इसका खामियाज़ा भुगतना पड़ेगा।

रमज़ान के कारण मतदान के समय में नहीं होगा बदलाव: निर्वाचन आयोग का फैसला

रमजान के महीने में पड़ने वाले अंतिम तीन चरणों के मतदान के समय में बदलाव करने की माँग को चुनाव आयोग ने रविवार (मई 6, 2019) को खारिज कर दिया है। चुनाव आयोग का कहना है कि लोकसभा 2019 के आम चुनाव के 5वें, 6ठे और 7वें चरण के मतदान के तय समय में फेरबदल करना संभव नहीं है।

गौरतलब है कि कुछ दिन पहले सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दर्ज हुई थी। इस याचिका में याचिकाकर्ताओं ने रमजान के दौरान मतदान के समय को सुबह 7 बजे की बजाय 5 बजे से कर देने की अपील की थी। कोर्ट में यह याचिका मोहम्मद निजामुद्दीन पाशा और असद हयात द्वारा दायर की गई थी।

याचिकाकर्ताओं की दलील थी कि मतदान के अंतिम तीन चरण में देश के कई हिस्सों में भीषण गरमी रहेगी और ‘लू’ चल सकती है, उस दौरान रमजान का महीना भी रहेगा, इसलिए मतदान का समय सुबह 7 बजे की बजाय तड़के 4:30 या 5 बजे से कर देना चाहिए। माननीय उच्चतम न्यायालय ने इस विषय पर चुनाव आयोग को विचार करने को कहा था। कोर्ट ने इस मामले पर चुनाव आयोग से कोई जवाब नहीं माँगा था। खबरों की मुताबिक कोर्ट ने आयोग से सिर्फ़ यह जानने की कोशिश की थी कि वे इस प्रकार की माँग पर गौर कर सकते हैं या नहीं?

उल्लेखनीय है कि चुनाव शुरू हो जाने के बाद सर्वोच्च न्यायालय तब तक चुनाव आयोग के काम में दखल नहीं दे सकता है, जब तक कोई बड़ी चूक या किसी नियम का उल्लंघन न हुआ हो। इसलिए, पूरा मामला चुनाव आयोग पर निर्भर करता था कि वह इस पर क्या फैसला करेगा।

‘यह राहुल गाँधी का अस्पताल है, यहाँ मोदी-योगी का आयुष्मान कार्ड नहीं चलेगा’, मरीज की मौत

अमेठी में राजीव गाँधी चैरिटेबल ट्रस्ट द्वारा संचालित अस्पताल में आयुष्मान कार्ड धारक मरीज की मृत्यु हो जाने के बाद सियासी बवाल मच गया है। केंद्रीय टेक्सटाइल्स मंत्री स्मृति ईरानी से लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तक, सबने अस्पताल और कॉन्ग्रेस पर निशाना साधते हुए उसे मरीज की मौत का ज़िम्मेदार कहा। परिवारजनों द्वारा दिए गए बयानों पर आधारित एक वीडियो ट्वीट कर अमेठी से भाजपा की लोकसभा प्रत्याशी स्मृति ईरानी ने राहुल गाँधी पर हमला बोला। आयुष्मान भारत के कार्यकारी अधिकारी ने अमेठी के डीएम से इस बाबत रिपोर्ट भी तलब की है। अस्पताल प्रशासन का दावा है कि भर्ती होते समय मरीज के पास आयुष्मान भारत कार्ड नहीं था। स्मृति ईरानी ने इस बारे में ट्वीट कर राहुल गाँधी को घेरा ।

वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी एक जनसभा के दौरान इस मुद्दे को उठाते हुए कहा कि उस ग़रीब की मौत के ज़िम्मेदार लोगों को सजा मिलनी चाहिए। पीएम ने कहा कि ये दुःख की बात है कि इलाज से इनकार करने के कारण आज वो ग़रीब इस दुनिया में नहीं है। स्मृति ईरानी ने कहा कि अस्पताल के ट्रस्टी कॉन्ग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी व कॉन्ग्रेस महासचिव प्रियंका गाँधी को जवाब देना चाहिए। ट्वीट किए गए वीडियो में मृतक के भतीजे ने बताया:

जब मैंने अपने चाचा को अस्पताल में भर्ती कराया और कार्ड दिखाया तो अस्पताल के लोगों ने कहा कि यह राहुल गाँधी का अस्पताल है और यहाँ मोदी और योगी का कार्ड नहीं चलता है। हमने कार्ड पर दिए हेल्पलाइन नंबर से भी शिकायत की लेकिन, मदद नहीं मिली और इलाज न हो पाने के कारण मेरे चाचा की मौत हो गई।

अस्पताल के प्रबंधक भोलानाथ तिवारी ने सफाई देते हुए कहा, “25 अप्रैल को मुसाफिरखाना क्षेत्र के सरई गाँव निवासी नन्हें लाल मिश्र को देर रात अस्पताल में लाया गया था। भर्ती करते समय उनके पास आयुष्मान कार्ड नहीं था। मरीज के परिवार ने किसी आयुष्मान कार्ड का जिक्र नहीं किया। 26 अप्रैल को इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई थी। उन्हें मृत्यु प्रमाण पत्र भी अस्पताल द्वारा जारी किया गया है। हमारा अस्पताल आयुष्मान योजना के तहत रजिस्टर्ड है। पीड़ित परिवार द्वारा अस्पताल व प्रबंधन व प्रशासन से कोई शिकायत नहीं की गई है।

वहीं अस्पताल के निदेशक ने कहा कि उनके हॉस्पिटल में आयुष्मान भारत योजना के तहत 200 मरीजों का इलाज हो चुका है, अतः ये बातें निराधार है। सीएमओ ने बताया कि मामला संज्ञान में आया है और चुनाव बाद टीम भेजकर इसकी जाँच कराई जाएगी।

यूनिस ने भागवत कथा सुनने जा रही युवतियों से की छेड़छाड़, ज़मानत पर छूटते ही की फायरिंग

उत्तर प्रदेश के आगरा से एक व्यक्ति द्वारा भागवत कथा सुनने जा रही युवतियों के साथ छेड़छाड़ करने का मामला सामने आया है। गुरुवार (मई 2, 2019) को आगरा के मलपुरा थाना क्षेत्र के अंतर्गत भागवत कथा चल रही थी। उसमे भाग लेने आईं युवतियों के साथ यूनिस नमक युवक ने छेड़छाड़ की। एक युवक ने जब यूनिस की इस हरकत का विरोध किया तो यूनिस ने उसकी पिटाई भी कर दी। सूचना पाकर मौके पर पहुँची पुलिस ने यूनिस को गिरफ़्तार कर लिया। गिरफ़्तार कर उसे थाने ले जाया गया और शुक्रवार को जेल भेज दिया गया। हालाँकि, उसी दिन उसे ज़मानत भी मिल गई।

आरोप है कि ज़मानत मिलने के बाद उक्त युवक और उग्र हो गया और उसने रिटायर्ड स्टेशन मास्टर के घर पहुँच कर उनसे मारपीट की। विरोध करने पर उसने फायरिंग भी की। सूचना पर पुलिस फिर पहुँची लेकिन आरोपित तब तक फरार हो गया था। उसके घर पर दबिश देने के बाद पुलिस ने उसके छोटे भाई को गिरफ़्तार किया। पीड़ित स्टेशन मास्टर ने थाने में शिकायत दर्ज कराई है। यूनिस के पिता का नाम रमजानी है। ज़मानत मिलने के बाद उसने अपने साथियों सहित लाठी-डंडे लेकर गाँव में हमला बोल दिया था।

‘हिंदुस्तान’ के स्थानीय संस्करण में छपी ख़बर

एसओ मलपुरा विजय कुमार ने पत्रकारों को बताया कि मामले में FIR दर्ज हुई है। आरोपी के भाई को पुलिस पूछताछ करने के लिए पकड़ कर लाई है। उससे पूछताछ की जा रही है। जाँच के बाद कार्रवाई की जाएगी। पहली बार यूनिस ने जब युवतियों से छेड़छाड़ की थी तब तो ग्रामीणों ने उसे पकड़ लिया था लेकिन दूसरी बार जब वह मारपीट करने पहुँचा तो इस बार वह हथियारों से लैस था। ग्रामीणों की भीड़ फायरिंग की आवाज़ सुन कर इकट्ठी हुई लेकिन उसे पकड़ा नहीं जा सका। ग्रामीणों ने तब पुलिस कंट्रोल रूम को सूचना दी।

Pak में भारतीय राजनयिकों से दुर्व्यवहार, उन्हें गुरुद्वारे में किया बंद, भारत ने जताई आपत्ति

लाहौर के पास स्थित गुरुद्वारे में हिंदुस्तानी राजनयिकों को बंद किए जाने और दुर्व्यवहार को लेकर पाकिस्तानी अधिकारियों के समक्ष हिंदुस्तान ने कड़ी आपत्ति दर्ज कराई है। यह आपत्ति पाकिस्तान के विदेश कार्यालय में आपत्तिपत्र के जरिए दर्ज कराई गई है। एक कूटनीतिक नोट के माध्यम से 25 अप्रैल को पाकिस्तानी अधिकारियों को अलग से भी इस घटना से अवगत कराया गया है।

17 अप्रैल की घटना, सच्चा सौदा साहिब गए थे राजनयिक

आपत्तिपत्र में राजनयिकों के साथ हुई इस घटना का जिक्र करते हुए हिंदुस्तान ने पाकिस्तान के इस्लामाबाद में स्थित अपने उच्चायोग की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। दोनों राजनयिक पाकिस्तानी पंजाब के लाहौर के पास फर्रुखाबाद स्थित गुरुद्वारे सच्चा सौदा साहिब में गए हुए थे। वह वहाँ सिख श्रद्धालुओं की यात्रा की प्रणाली आसान करने से जुड़े कार्यवश वहाँ पहुँचे थे। रिपोर्ट के मुताबिक वहाँ मौजूद पाकिस्तानी इंटेलिजेंस के 15 लोगों ने राजनयिकों के साथ दुर्व्यवहार किया। उन्हें एक कमरे में बंद कर दिया गया और उनके बैगों की तलाशी ली गई। उनसे पूछताछ भी की गई

पहले भी सिख श्रद्धालुओं की यात्रा के प्रबंध की देखरेख कर रहे राजनयिकों के साथ पाकिस्तान में दुर्व्यवहार होता रहा है। खालिस्तानियों द्वारा भी भारतीय श्रद्धालुओं से बदतमीजी का भी इतिहास रहा है। मार्च में भी हिंदुस्तान ने बालाकोट की एयर स्ट्राइक के बाद अपने राजनयिकों के साथ दुर्व्यवहार की शिकायत की थी।

छत्तीसगढ़ में नक्सलियों का उत्पात बढ़ा, पुरुषों के गाँव छोड़ने पर लगाई बंदिश

छत्तीसगढ़ में क़ानून व्यवस्था का हाल काफ़ी बुरा होता जा रहा है। यहाँ नक्सलियों ने कई गाँवों में पुरुषों के गाँव से बाहर निकलने पर पाबंदी लगा दी है। दैनिक जागरण में छपी एक रिपोर्ट के अनुसार, नक्सलियों के आधार इलाके में सुरक्षाबलों के बढ़ते दबाव और सरकार की आत्मसमर्पण नीति से बौखलाए माओवादी संगठन ने इस तरह की हरकत का सहारा लिया है। महिलाओं को तो आसपास बाज़ार या किराना दुकानों तक जाने की छूट दी गई है लेकिन पुरुषों को जिला मुख्यालय जाने से पहले नक्सलियों की अनुमति लेनी होगी। ये घटना राज्य के अबूझमाड़ इलाके की है। रिपोर्ट के अनुसार, गाँव के 31 परिवारों को नक्सलियों ने भगा दिया है और वे सभी जिला मुख्यालय में शरण लिए हुए हैं। नक्सली पूरी तरह मनमानी पर उतर आए हैं।

जिन लोगों को नक्सलियों ने भगा दिया है, उन्होंने फरमान की अनदेखी की थी। नक्सलियों ने ये क़दम इसीलिए उठाया है क्योंकि उन्हें शक है कि पुरुष मुखबिरी करते हैं और पुलिस को उनकी सूचनाएँ दे देते हैं। मेटानार पंचायत के उपसरपंच लालूराम मंडावी ने दैनिक जागरण से बात करते हुए बताया कि क्षेत्र का माहौल बहुत गर्म हो चुका है। गाँव में आपसी मतभेद के कारण ग्रामीण नक्सलियों तक अपने प्रतिद्वंदियों के बारे में ग़लत ख़बर भेज रहे हैं और लोग एक-एक कर मारे जा रहे हैं। जिनकी भी सूचना नक्सलियों तक पहुँच रही है, उन्हे सजा दी जा रही है।

नक्सली लोगों की बेरहमी से हत्या कर रहे हैं। माड़ के एक दर्जन से भी अधिक गाँवों से नक्सलियों द्वारा इस तरह की बंदिशें लगाने की सूचनाएँ आ रही हैं। ग्रामीणों का कहना है कि पुलिस गाँव में आकर लोगों से बातें या पूछताछ करती है और जब नक्सली किसी ग्रामीण को पुलिस के साथ बातचीत करते हुए देख लेते हैं तो उनके साथ बुरा बर्ताव किया जाता है। नक्सली अपने ख़िलाफ़ चलाए जा रहे ऑपरेशन से बौखलाए हुए हैं। उनकी संख्या दिन प्रतिदिन कम होती जा रही है। उनका कुनबा छोटा होता जा रहा है। इसीलिए उन्होंने यह तरीका अपनाया है। उन्होंने गाँवों से जिला मुख्यालय तक जाने वाली सड़कों को रोक कर अपनी ताक़त दिखाई है।

छत्तीसगढ़ में कॉन्ग्रेस का शासन है और भूपेश बघेल को दिसंबर 2018 में प्रदेश का मुख्यमंत्री बनाया गया था। छत्तीसगढ़ में पिछले 15 वर्षों से रमन सिंह के नेतृत्व में भाजपा की सरकार थी। पिछले वर्ष हुए चुनाव में कॉन्ग्रेस ने यहाँ बड़ी जीत दर्ज की। फिलहाल नक्सलियों द्वारा इस तरह की हरकत के बाद राज्य का सियासी पारा फिर से चढ़ने की उम्मीद है।

श्री लंका ने 200 मौलवियों को देश से किया निष्कासित, ज़्यादातर पाकिस्तान, बांग्लादेश, मालदीव के

श्री लंका में ईस्टर संडे के मौके पर 21 अप्रैल को हुए सिलसिलेवार बम धमाकों के बाद सरकार ने बुर्के पर बैन लगाने के बाद अब एक और बड़ा कदम उठाया है। श्री लंका सरकार ने कुल 600 विदेशी नागरिकों को देश से निष्कासित कर दिया है। बता दें कि, देश से बाहर निकाले गए इन लोगों में 200 मौलवी भी शामिल हैं। श्री लंका के गृहमंत्री वाजिरा अबेवारदेना ने बताया कि हालाँकि इन मौलवियों ने कानूनी रूप से देश में प्रवेश किया था, लेकिन हमलों के बाद पाया गया कि ये लोग वीजा अवधि के खत्म होने के बाद भी ठहरे हुए थे। इसके लिए इन पर जुर्माना भी लगाया गया था, लेकिन हमले के बाद सुरक्षा कारणों की वजह से इन्हें देश से निष्कासित कर दिया गया।

गृह मंत्री ने बताया कि देश में मौजूदा स्थिति को देखते हुए वीजा प्रणाली की समीक्षा की गई, जिसमें धार्मिक उपदेशकों यानी मौलवियों आदि के लिए वीजा प्रतिबंधों को और अधिक कड़ा करने का फैसला किया है। अबेवारदेना ने आगे कहा कि पिछले एक दशक से देखा जा रहा है कि देश में धार्मिक संस्थान विदेशी उपदेशकों को तवज्जो दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि उन्हें इस बात से कोई समस्या नहीं है, लेकिन हाल के दिनों में कुछ धार्मिक संस्थान इस मामले में काफी अधिक संख्या में फैल गए हैं। जिस पर ध्यान देने की अधिक आवश्यकता है। गृहमंत्री ने कहा कि सरकार इस आशंका में देश की वीजा नीति को खत्म कर रही है कि विदेशी मौलवी आत्मघाती बम विस्फोटों के लिए स्थानीय लोगों को कट्टरपंथी बना सकते हैं।

हालाँकि, गृहमंत्री ने देश से निष्कासित किए गए लोगों की राष्ट्रीयता के बारे में कोई जानकारी नहीं दी है, लेकिन श्री लंका की पुलिस का कहना है कि देश में हुए आत्मघाती हमलों के बाद पाया गया कि बांग्लादेश, भारत, मालदीव और पाकिस्तान से आए कई विदेशी वीजा की अवधि खत्म हो जाने के बाद भी यहाँ ठहरे हुए थे।

गौरतलब है कि, श्रीलंका में बीते 21 अप्रैल को ईस्टर के मौके पर भीषण आतंकी हमले में 257 लोगों की मौत हो गई थी, जबकि 500 से ज्यादा लोग घायल हो गए थे। हमले की जिम्मेदारी आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट (आइएस) ने ली थी, लेकिन श्री लंका की सरकार ने इसमें स्थानीय संगठन का हाथ बताया था। श्रीलंका की पुलिस के मुताबिक, इन हमलों को एक स्थानीय मौलवी के नेतृत्व में अंजाम दिया गया था।

जानकारी के मुताबिक, श्रीलंका में हुए हमलों के बाद से आपातकाल लागू कर दिया गया है और सैनिकों और पुलिस को लंबे समय तक संदिग्धों को गिरफ्तार करने और हिरासत में रखने के लिए व्यापक अधिकार दिए गए हैं और साथ ही तलाशी भी ली जा रही है।

इससे पहले श्री लंका के राष्ट्रपति मैत्रिपाल सिरिसेन ने अपनी आपातकालीन शक्तियों का प्रयोग करते हुए बुर्का या नकाब पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया था। यह फैसला भी आत्मघाती हमलों के बाद सुरक्षात्मक कदम के तौर पर उठाया गया था। राष्ट्रपति कार्यालय की ओर से जारी बयान में कहा गया था कि राष्ट्रीय सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबंध लगाया गया है। किसी को भी चेहरा इस तरह से नहीं ढकना चाहिए कि उसकी पहचान मुश्किल हो।

मनोज तिवारी पर हमले का मज़ाक उड़ाने वाले अभिसार शर्मा केजरी को थप्पड़ पड़ने से नाराज़

धान को गेंहूँ कहने वाले पत्रकार अभिसार शर्मा ने दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल को थप्पड़ मारे जाने को लेकर अपना कड़ा विरोध दर्ज कराया है। कोई भी अच्छा नागरिक इस घटना की निंदा करेगा। जब विधायकों द्वारा अरविन्द केजरीवाल को पीटे जाने की ख़बर आई थी, तब सबने उसकी निंदा की थी। लेकिन, इस बार केजरीवाल को फिर से कैमरे के सामने एक शख़्स ने लप्पड़ मारा। संवैधानिक पद पर बैठे किसी व्यक्ति को इस तरह मारे जाने की अभिसार शर्मा ने निंदा की लेकिन इस दौरान वो कुछ भूल गए, जो हम आपको आज याद दिलाने वाले हैं। सबसे पहले नीचे वह ट्वीट देखिए कि कैसे अभिसार केजरीवाल की सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं।

अब आते हैं अभिसार शर्मा के असली चेहरे की ओर। आपको याद होगा जब आम आदमी पार्टी के विधायक अमानतुल्लाह ख़ान ने मंच पर दिल्ली भाजपा के अध्यक्ष मनोज तिवारी को धक्का दिया था। अरविन्द केजरीवाल को झापड़ पड़ने की निंदा करने वाले अभिसार शर्मा ने मनोज तिवारी को धक्का दिए जाने की भी निंदा की होगी, है या नहीं? अगर आप ऐसा सोच रहे हैं तो आप ग़लत हैं। दरअसल, अपने दोहरे रवैये के लिए जाने जाने वाले अभिसार ने उस समय मनोज तिवारी का मज़ाक उड़ाया था। इसके लिए उन्होंने मनोज तिवारी के ही गाने ‘रिंकिया के पापा’ का प्रयोग किया था। नीचे वाले ट्वीट में आप उनके दोहरे रवैये के साथ ही उनके घटियापन को भी देख सकते हैं।

ट्रेंड की बॉडी में हेडलाइट खोजने वाले अभिसार शर्मा जैसे पत्रकार उस समय तो नाराज़ होते हैं जब इनके ‘अपने’ को थप्पड़ पड़ता है लेकिन जब भाजपा के नेताओं के साथ दुर्व्यवहार होता है तो इनकी बाँछें खिल जाती हैं और ये मज़ाक के मूड में आ जाते हैं। अभिसार शर्मा ने भी अन्य गिरोह विशेष के पत्रकारों की तरह उसी रवैये का परिचय दिया।

होना तो यह चाहिए कि किसी भी तरह के हिंसा को जायज ठहराना, या इसकी आड़ में किसी का मजाक बनाना दोनों गलत है। यह आपकी ओछी मानसिकता को भी दर्शाता है।