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DRDO ने बताया कैसे पूरा हुआ मिशन शक्ति, वीडियो देखने के लिए यहाँ क्लिक करें

‘मिशन शक्ति’ की सफलता के बाद DRDO (रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन ) ने ‘मिशन शक्ति’ से जुड़ा एक प्रेजेंटेशन जारी किया है। इस प्रेजेंटेशन में दिखाया गया है कि कैसे ‘मिशन शक्ति’ को सफल बनाया गया और इसमें कौन-कौन लोग शामिल थे।

कॉन्ग्रेस नेता चिदंबरम ने जताई थी मिशन पर आपत्ति, DRDO ने कहा ‘चिल्ल ब्रो’!

पीएम नरेंद्र मोदी द्वारा ‘मिशन शक्ति’ की सफलता की घोषणा करने के बाद कॉन्ग्रेस नेता पी चिदंबरम ने मोदी सरकार की आलोचना करते हुए कहा था कि देश की इस क्षमता को गोपनीय रखना चाहिए था लेकिन ‘नासमझ सरकार’ ने ऐसा नहीं किया। चिदंबरम की चिंता को DRDO ने दूर करते हुए आज शनिवार (अप्रैल 06, 2019) को DRDO प्रमुख जी सतीश रेड्डी ने कहा कि ‘मिशन शक्ति’ की प्रकृति ऐसी थी कि इसे किसी भी हाल में गोपनीय नहीं रखा जा सकता था। उन्होंने कहा कि उपग्रह को दुनिया भर के कई देशों के स्पेस स्टेशनों द्वारा ट्रैक किया जाता है। इसके साथ ही रेड्डी ने बताया कि इस मिशन के लिए सभी जरूरी परमिशन ली गई थी। इस बीच डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट ऑर्गनाइजेशन ने मिशन शक्ति पर एक प्रेजेंटेशन भी जारी किया।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अनुमति के बाद इस मिशन को सफल बनाने के लिए 200 वैज्ञानिकों की टीम ने दिन-रात मेहनत की। 27 मार्च को धरती से 300 km दूरी पर स्थित एक लाइव सैटेलाइट को गिराकर वैज्ञानिकों के इस मिशन की सफलता की नरेंद्र मोदी ने देशवासियों को जानकारी दी थी।

बता दें कि अब तक दुनिया के तीन देश अमेरिका, रूस और चीन को यह उपलब्धि हासिल थी अब भारत चौथा देश है, जिसने यह सफलता प्राप्त की है. PM मोदी ने बताया था कि कि एलईओ सैटेलाइट को मार गिराना एक पूर्व निर्धारित लक्ष्य था, इस मिशन को सिर्फ 3 मिनट में पूरा किया गया है।

ममता का मोदी पर निजी हमला, ‘मोदी ने अपनी पत्नी की देखभाल नहीं की, जनता की देखभाल कैसे करेंगे’

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) प्रमुख ममता बनर्जी ने प्रधानमंत्री मोदी पर निजी हमला करते हुए कहा कि उन्होंने अपनी पत्नी की उपेक्षा की है, वे जनता का ध्यान कैसे रखेंगे। ममता बनर्जी ने यह निजी हमला पश्चिम बंगाल के अलीपुरद्वार में किया।

प्रधानमंत्री मोदी को झूठा कहते हुए, बनर्जी ने कहा कि TMC मोदी को हराने के बाद केंद्र में नई सरकार के गठन का नेतृत्व करेगी।

विपक्षी पार्टी के नेताओं और समर्थकों के लिए पीएम मोदी पर निजी शिकंजा कसना और उनकी पत्नी को लेकर इस तरह की टिप्पणी ममता की बेहूदी राजनीति का सटीक उदाहरण है। ख़बरों के अनुसार, 2017 में, कॉन्ग्रेस ने गुजरात राज्य विधानसभा चुनाव के दौरान जशोदाबेन को चपेट में लेने की कोशिश की थी।

बाद में, आम आदमी पार्टी के प्रमुख अरविंद केजरीवाल ने भी जशोदाबेन को अपनी राजनीतिक लड़ाई में घसीट लिया था। इससे पहले AAP नेता सोमनाथ भारती का नाम भी उजागर हुआ था जब उन्होंने एक महिला पत्रकार को गाली-गलौच देने के साथ-साथ ‘वेश्यावृति का धंधा‘ करने जैसी ओछी बात तक कह डाली थी। इस घटना की सोशल मीडिया पर व्यापक निंदा हुई थी। दिल्ली महिला आयोग की प्रमुख स्वाति मालीवाल ने उनके व्यवहार की निंदा की। इसके बाद सोमनाथ भारती ने शर्मनाक हरक़त की जिसमें उन्होंने पीएम मोदी पर उनकी पत्नी जशोदाबेन को ‘कैद’ करने का आरोप लगाया।

सोमनाथ भारती द्वारा पीएम मोदी पर लगाए गए इस आरोप का समर्थन केजरीवाल ने सोशल मीडिया पर किया था।

राजनेताओं के परिवार को राजनीतिक हमलों में घसीटना दुर्भाग्यपूर्ण है, ख़ासकर तब, जब परिवार के सदस्य निजी व्यक्ति हों जिनका राजनेता से कोई लेना-देना नहीं होता।

2019 में नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री के रूप में वापसी करेंगे: ‘जन की बात’ का सर्वेक्षण

इस सर्वेक्षण में, पूरे देश के 5 लाख लोगों को शामिल किया गया है। इसमें NDA को 304-316 सीटों और भाजपा को 248-260 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरने की भविष्यवाणी मतदान एजेंसी ने की।

‘जन ​​की बात’ के संस्थापक और मुख्य संपादक, प्रदीप भंडारी ने  OpIndia.com से बात करते हुए कहा, “इस सर्वेक्षण से सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि नरेंद्र मोदी 2019 में प्रधानमंत्री के रूप में वापसी करेंगे और उन्हें यह दूसरा अवसर मिलना तय है। सर्वेक्षण में 2 महीने की अवधि में सीट-दर-सीट और राज्य-दर-राज्य विश्लेषण के आधार पर 5 लाख मतदाताओं का नमूना लिया गया है।”

सर्वेक्षण में यह भी अनुमान लगाया गया है कि कॉन्ग्रेस 2014 में हासिल की गई 44 सीटों से कुछ आगे है। दूसरी ओर, यूपीए 117-126 सीटें जीत सकती है। सीटों की संख्या में असमानता के अनुरूप, NDA के पास वोट-शेयर क़रीब  50% के होने की संभावना है, जबकि UPA का वोट-शेयर केवल 39% तक ही जा सकता है।

मध्य प्रदेश में, एनडीए को 22-25 सीटें जीतने की संभावना है, जबकि यूपीए को 4-7 सीट से ही गुजारा चलाना पड़ सकता है। बिहार में, बीजेपी के 28-33 सीटें जीतने की उम्मीद है, जबकि बाकी यूपीए के खाते में जा सकती हैं। उत्तर प्रदेश, भाजपा के लिए सबसे महत्वपूर्ण राज्यों में से एक है, पार्टी संभवतः उन सीटों को खो सकती है जो उसने पिछले साल जीती थी। हालाँकि, अभी भी 40 से अधिक सीटे जीतने की उम्मीद है। एसपी-बीएसपी गठबंधन 25-33 सीटों के बीच कुछ सीटें जीत सकते हैं।

बीजेपी उत्तर प्रदेश की सीटों के नुकसान की भरपाई ओडिशा और पश्चिम बंगाल में बड़ी बढ़त बनाकर करेगी। ओडिशा में, नवीन पटनायक को काफी नुकसान होने की उम्मीद है, क्योंकि भाजपा राज्य में प्रवेश कर रही है। भाजपा को 8-12 सीटें जीतने की उम्मीद है। पश्चिम बंगाल में, भाजपा को कम से कम 11 सीटें जीतने की उम्मीद है।

तमिलनाडु से एक बड़ा आश्चर्य सामने आया जहाँ यूपीए की उम्मीद थी कि राज्य की सभी सीटों पर कब्जा करेगी। हालाँकि, जन की बात के अनुसार, दो गठबंधन अब एक भयंकर युद्ध में तब्दील हो गए हैं और वर्तमान में यह एनडीए के लिए अच्छा संकेत है जिससे सीटों की बढ़त में कामयाबी मिल सकती है।

भंडारी ने आगे कहा, “कर्नाटक में, कॉन्ग्रेस-जेडी (S) गठबंधन के बावजूद, भाजपा अधिकतम सीटों के साथ उभरेगी, जिसमें 2-3 सीटें बढ़ सकती हैं। वजह यह है कि कॉन्ग्रेस और जेडी (S) एक-दूसरे के वोटों को काटने का काम कर रहे हैं। कॉन्ग्रेस और जेडी (S) के कैडर आपस में लड़ रहे हैं।”

उन्होंने यह भी कहा, “कांग्रेस केवल 3 राज्यों: पंजाब, केरल और छत्तीसगढ़ में लाभ प्राप्त कर रही है। अन्य कोई राज्य नहीं हैं, जहाँ कॉन्ग्रेस की कोई बढ़त दिख रही हो। कॉन्ग्रेस अपने दम पर 100 सीटें नहीं पा सकती, यह सच नहीं है। राजस्थान, गुजरात और मध्य प्रदेश में, भाजपा बहुमत प्राप्त करने के लिए तैयार है। महाराष्ट्र में, शिवसेना-भाजपा गठबंधन 35 से अधिक सीट जीतने के लिए तैयार है।”

‘तुमने अभी तक मेरा गुस्सा नहीं देखा है’-कॉन्ग्रेस के पूर्व नेता ने दी पत्रकार को धमकी

रिपब्लिक टीवी की पत्रकार नलिनी शर्मा को पूर्व कॉन्ग्रेस नेता और अगस्ता वेस्टलैंड मामले के बिचौलिए क्रिश्चियन मिशेल के वकील अलजो के जोसेफ ने सवाल पूछने पर धमकी दी है। नलिनी ने ट्विटर पर अलजो से हुई बातचीत का एक हिस्सा भी ट्वीट किया है।

नलिनी के मुताबिक जोसेफ का कहना है कि वह एक गुस्सैल आदमी हैं और नलिनि ने अभी तक उनका गुस्सा देखा नहीं है, इसलिए वे नलिनि को चेतावनी देते हैं, कि वो ऐसे सवाल न करें।

यहाँ बता दें कि मिशेल का वकील बनकर पेश होने पर कॉन्ग्रेस द्वारा जोसेफ को पार्टी से निष्कासित कर दिया गया था, क्योंकि पार्टी पर ऊँगलियाँ उठनी शुरू हो गईं थी।

गौरतलब है कि इन दिनों पत्रकारों के लिए मसीहा बनकर पहुँचने वाले राहुल गाँधी की कॉन्ग्रेस पार्टी का पत्रकारों को धमकाने का भी अलग इतिहास है। पिछले साल नवंबर में पार्टी के प्रवक्ता ने एक डिबेट के दौरान जी न्यूज़ के पत्रकार को धमकाया था। जून में कॉन्ग्रेस मुख्यालय में एक पत्रकार पर मोदी भक्त होने का आरोप लगाकर हमला किया गया था।

इसके अलावा कॉन्ग्रेस के दिग्गज़ नेता कपिल सिब्बल ने यहाँ तक कह दिया था कि पार्टी उन अफसरों पर नज़र रख रही है जो भाजपा को अपनी ईमानदारी दिखा रहे हैं। क्योंकि उनकी पार्टी को 2019 में वापस आना है।

नवरात्रि: स्त्री शक्ति की सृजनशीलता; सत्व, तमस, रजस गुणों पर नियंत्रण का उत्सव

नवरात्रि अर्थात स्त्री शक्ति की सृजनशीलता का पर्व, पारम्परिक रूप से देवी की पूजा करने वाली संस्कृतियाँ इस बात से पूरी तरह अवगत थीं कि अस्तित्व में बहुत कुछ ऐसा है, जिसे कभी समझा नहीं जा सकता। आप उसका आनंद उठा सकते हैं, उसकी सुंदरता का उत्सव मना सकते हैं, मगर कभी उसे समझ नहीं सकते। कहा जाता है कि जीवन एक रहस्य है, ये रहस्य इसलिए भी है कि हमें परिणाम तो दिखता है लेकिन कारण लुप्त है। शायद जीवन हमेशा रहस्य ही रहे, जब तक हम खुद इस खोज के साधक न हो। सनातन सदैव धर्म और अध्यात्म की इसी सतत खोज की परम्परा का वाहक है।

या देवी सर्वभूतेषु…. नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम: … सनातन परम्परा जिनकी रगों में बहता है, ऐसे आदि गुणों के वाहक हिन्दुओं का नववर्ष विक्रम संवत 2076 चैत्र शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा शनिवार 6 अप्रैल 2019 से वासंती नवरात्र के साथ शुरू हो चुका है। चैत्र नवरात्रि, चैत्र शुक्ल पक्ष प्रथमा से प्रारंभ और रामनवमी को इसका समापन होता है। इस वर्ष चैत्र नवरात्र, 6 अप्रैल से शुरू होकर समापन 14 अप्रैल को है। यह त्योहार हिमाचल प्रदेश, हरियाणा, पंजाब, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में बहुत लोकप्रिय है। महाराष्ट्र राज्य में यह “गुड़ी पड़वा” के साथ शुरू होती है, जबकि आंध्र प्रदेश जैसे दक्षिणी राज्यों में, यह उत्सव “उगादी” से शुरू होता है।

एक वर्ष में चैत्र, आषाढ़, आश्विन और माघ महीनों में चार बार नवरात्र आते हैं, लेकिन चैत्र और आश्विन माह की शुक्ल प्रतिपदा से नवमी तक चलने वाले नवरात्र ही ज्यादा लोकप्रिय हैं। यह समय, आदि देवी माँ भगवती की आराधना और स्त्री शक्ति की सृजनशीलता का उत्सव मनाने के लिए श्रेष्ठ माना जाता है। नवरात्र वह समय है, जब दोनों ऋतुओं का मिलन होता है। इस संधि काल मे ब्रह्मांड से असीम शक्तियाँ सतत ऊर्जा के रूप में मानवता का कल्याण करती हैं। बात करें धर्म ग्रंथों, पुराणों की तो उसमें चैत्र नवरात्र का समय सृजन और स्त्री शक्ति के उत्सव का समय है। इसका एक कारण यह भी है कि प्रकृति में इस समय हर तरफ नए जीवन और एक नई उम्मीद का बीज अंकुरित होने लगता है। ब्रह्माण्डीय ऊर्जा से जनमानस में भी एक नई उर्जा का संचार हो रहा होता है। लहलहाती फसलों से उम्मीदें जुड़ी होती हैं।

नवरात्रि क्या है? मनाने का सबसे अच्छा तरीका क्या है? क्यों है ये आदि सनातन परम्परा का वाहक? कुछ तो होगा इस उत्सव धर्मिता के पीछे का रहस्य? आइए इन सब पर बातें करते हैं। पहली बात सनातन परम्परा में जीवन का रहस्य यही है कि गंभीर न होते हुए भी पूरी तरह शामिल होना, जीवन के हर क्षण का उत्सव मनाना।

नवरात्रि का उत्सव ईश्वर के स्त्री रूप को समर्पित है। दुर्गा, लक्ष्मी और सरस्वती स्त्री-शक्ति यानी स्त्रैण के तीन आयामों की प्रतीक हैं। वे धरती, सूर्य और चंद्रमा या तमस (जड़ता), रजस (सक्रियता या जोश) और सत्व (परे जाना, ज्ञान, शुद्धता) की प्रतीक हैं।

तमस का अर्थ है जड़ता। रजस का मतलब है सक्रियता और जोश। सत्व एक तरह से सीमाओं को तोडक़र विलीन होना है, पिघलकर समा जाना है। इन तीन खगोलीय पिंडों से हमारे शरीर की रचना का बहुत गहरा संबंध है- पृथ्वी, सूर्य और चंद्रमा। इन तीन गुणों को इन तीन पिंडों से भी जोड़ कर देखा जाता है। धरती माँ को तमस माना गया है, सूर्य रजस है और चंद्रमा सत्व। नवरात्रि के पहले तीन दिन तमस से जुड़े होते हैं। इसके बाद के दिन रजस से, और नवरात्रि के अंतिम दिन सत्व से जुड़े होते हैं।

जो लोग शक्ति, अमरता, क्षमता या सृजन की इच्छा रखते हैं, वे स्त्रैण के उन रूपों की आराधना करते हैं, जिन्हें तमस कहा जाता है, जैसे काली या धरती माँ अर्थात सृजन का आदिस्रोत प्रकृति। सद्गुरु कहते हैं, जो लोग धन-दौलत, जोश, उत्साह, जीवन और भौतिक दुनिया की तमाम दूसरी सौगातों की इच्छा करते हैं, वे स्वाभाविक रूप से स्त्रैण के उस रूप की ओर आकर्षित होते हैं, जिसे लक्ष्मी या सूर्य के रूप में जाना जाता है। जो लोग ज्ञान, बोध चाहते हैं और नश्वर शरीर की सीमाओं के पार जाना चाहते हैं, वे स्त्रैण के सत्व रूप की आराधना करते हैं। सरस्वती या चंद्रमा उस शक्ति के प्रतीक हैं।

तमस धरती की प्रकृति है जो सबको जन्म देने वाली है। हम जो समय गर्भ में बिताते हैं, वह समय तामसी प्रकृति का होता है। उस समय हम लगभग निष्क्रिय स्थिति में होते हुए भी विकसित हो रहे होते हैं। इसलिए तमस धरती और मनुष्यता के जन्म की प्रकृति है। हम सब सृजन के इस आयाम का अनुभव कर सकते हैं। हमारा पूरा जीवन इस पृथ्वी की देन है। सनातन में पृथ्वी के इस आयाम से एकाकार होने को महत्वपूर्ण साधना के रूप में विकसित किया गया है। वैसे भी हम सब पृथ्वी के एक अंश हैं। प्रकृति जब चाहती है, एक शरीर के रूप में अपने गर्भ में सृजन कर हमें नया जीवन दे देती है और जब वह चाहती है, उस शरीर को वापस खाक कर अपने भीतर समा लेती है।

सद्गुरु कहते हैं, नवरात्री के अवसर पर इन तीनों आयामों में आप खुद को जिस तरह से शामिल करेंगे, वह आपके जीवन को एक नई दिशा देगा। अगर आप खुद को तमस की ओर ले जाते हैं, तो आप एक तरीके से शक्तिशाली होंगे। अगर आप रजस पर ध्यान देते हैं, तो आप दूसरी तरह से शक्तिशाली होंगे। लेकिन अगर आप सत्व की ओर जाते हैं, तो आप बिल्कुल अलग रूप में शक्तिशाली होंगे। लेकिन यदि आप इन सब के परे चले जाते हैं, तो बात शक्ति की नहीं रह जाएगी, फिर आप मोक्ष की ओर बढ़ेंगे।

कहते हैं, जो पूर्ण जड़ता है, वह एक सक्रिय रजस बन सकता है। रजस पुन: जड़ता बन जाता है। यह परे भी जा सकता है और वापस उसी तमस की ओर भी जा सकता है। दुर्गा से लक्ष्मी, लक्ष्मी से दुर्गा, सरस्वती कभी नहीं हो पाई। इसका मतलब है कि हम जीवन और मृत्यु के चक्र में फँसे हैं। उनसे परे जाना अभी बाकी है।

यह सिर्फ प्रतीकात्मक ही नहीं है, बल्कि ऊर्जा के स्तर पर भी सत्य है। इंसान के रूप में में हम धरती से निकलते हैं और सक्रिय होते हैं। कुछ समय बाद, हम फिर से जड़ता की स्थिति में चले जाते हैं। सिर्फ व्यक्ति के रूप में हमारे साथ ऐसा नहीं होता, बल्कि तारामंडलों और पूरे ब्रह्मांड के साथ ऐसा हो रहा है। ब्रह्मांड जड़ता की स्थिति से निकल कर सक्रिय होता है और फिर जड़ता की अवस्था में चला जाता है। ध्यान रहे, बस हमारे अंदर इस चक्र को तोड़ने की क्षमता है। इंसान के जीवन और खुशहाली के लिए देवी के पहले दो आयामों की जरूरत होती है। तीसरा परे जाने की इच्छा है। कहते हैं, अगर आपको सरस्वती को अपने भीतर उतारना है, तो आपको प्रयास करना होगा। वरना आप उन तक कभी नहीं पहुँच सकते।

सनातन परम्परा में ही स्त्री शक्ति को सर्वाधिक महत्त्व हासिल है। स्त्री शक्ति की पूजा धरती पर पूजा का सबसे प्राचीन रूप है। स्त्री सृजन का पर्याय है। सिर्फ भारत में ही नहीं, अपितु यूरोप, अरेबिया और अफ्रीका के बड़े हिस्सों में भी कभी स्त्री शक्ति की पूजा होती थी। वहाँ देवियाँ होती थीं। दुर्भाग्यवश, पश्चिम में मूर्तिपूजा और एक से ज्यादा देवों की पूजा के सभी नामोनिशान मिटाने के लिए देवी मंदिरों को मिट्टी में मिला दिया गया। दुनिया के बाकी हिस्सों में भी यही हुआ।

धर्म न्यायालयों और धर्मयुद्धों का मुख्य मकसद मूर्ति पूजा की संस्कृति को मिटाना था। मूर्तिपूजा का मतलब देवी पूजा ही था। जो लोग देवी पूजा करते थे, उन्हें कुछ हद तक तंत्र-मंत्र विद्या में महारत हासिल थी। कामरूप कामाख्या मंदिर आज भी अपने तंत्र साधना के लिए ही विख्यात है। चूँकि, वे तंत्र-मंत्र जानते थे, इसलिए स्वाभाविक था कि आम लोग उनके तरीके समझ नहीं पाते थे। कहते हैं, उन संस्कृतियों में हमेशा से यह समझ थी कि अस्तित्व में ऐसा बहुत कुछ है, जिसे साधारण लोग आसानी से नहीं समझ सकते और इसमें कोई बुराई नहीं है। कोई भी उसे समझे बिना भी उसके लाभ उठा सकते हैं, जो हर किसी चीज के लिए हमेशा से सच रहा है।

मगर जब एकेश्वरवादी मज़हब यहुदी, इसाई और इस्लाम अपना दायरा फैलाने लगे, तो उन्होंने इसे एक संगठित तरीके से उखाड़ना शुरू कर दिया। उन्होंने सभी देवी मंदिरों को तोड़ कर मिट्टी में मिला दिया।

दुनिया में हर कहीं पूजा का सबसे बुनियादी रूप देवी पूजा या कहें स्त्री शक्ति की पूजा ही रही है। भारत इकलौती ऐसी संस्कृति है जिसने अब भी उसे संभाल कर रखा है। सनातन परम्परा ने स्त्री शक्ति की पूजा को जारी रखा है। इसी संस्कृति ने हमें अपनी जरूरतों के मुताबिक अपनी देवियाँ खुद गढ़ने की आजादी भी दी। प्राण प्रतिष्ठा के विज्ञान ने हर गाँव को अपनी विशिष्ट स्थानीय जरूरतों के अनुसार अपना मंदिर बनाने में समर्थ बनाया। अगम शास्त्र में इसकी पूरी विधि है। धर्म को ज़्यादा संजीदगी से सहेजा है तो वह भारत का दक्षिण का हिस्सा है। दक्षिण भारत के हर गाँव में आपको आज भी अम्मन (अम्मा) या देवी के मंदिर मिल जाएँगे। इसके अलावा शिव की नगरी काशी, विंध्याचल से लेकर शायद ही भारत का ऐसा कोई क्षेत्र हो जहाँ देवी आराध्य न हो।

बेशक, आजकल पुरुष शक्ति समाज में सिर्फ इसलिए महत्वपूर्ण हो गई है क्योंकि हमने अपने जीवन में गुजर-बसर की प्रक्रिया को सबसे अधिक महत्वपूर्ण बना दिया है। आज सौंदर्य या नृत्य-संगीत, प्रेम, दिव्यता या ध्यान की बजाय अर्थशास्त्र हमारे जीवन की प्रेरक शक्ति बन गया है। जब अर्थशास्त्र हावी हो जाता है और जीवन के गूढ़ तथा सूक्ष्म पहलुओं को अनदेखा कर दिया जाता है, तो पौरुष कुदरती तौर पर प्रभावी हो जाता है। अगर स्त्री शक्ति नष्ट हो गई, तो जीवन की सभी करुणामयी, सौम्य, सहज और पोषणकारी प्रवृत्तियाँ लुप्त हो जाएँगी। (हालाँकि, स्त्रीत्व को इन चार शब्दों में समेटा नहीं जा सकता।) जीवन की अग्नि हमेशा के लिए नष्ट हो जाएगी। यह बहुत बड़ा नुकसान है, जिसकी भरपाई करना आसान नहीं होगा।

आज जब हम अपनी परम्परा और संस्कृति से दूर होते जा रहे हैं तो ऐसे समय में उसके संरक्षण और संवहन की जिम्मेदारी उन सब पर है जिनकी रगों में आज भी सनातन संस्कृति बह रही है। आज जब हम आधुनिक वामपंथी शिक्षा की वजह से नकार की जड़ता के शिकार हो चुके हैं। इसी शिक्षा का एक दुर्भाग्यपूर्ण नतीजा यह भी है कि हम अपनी तर्कशक्ति पर खरा न उतरने वाली हर चीज को नष्ट कर देना चाहते हैं। जबकि हमारी तर्क की सीमा सनातन की सीमा नहीं बल्कि हमारी खुद के अज्ञान की सीमा है।

F16 को लेकर मैगज़ीन के दावे पर अमेरिका का इनकार, शेखर गुप्ता समेत मीडिया गिरोह के आनंद में खलल

अमेरिका ने फॉरेन पॉलिसी मैगजीन के पाकिस्तानी F-16 को लेकर किए दावे से इनकार किया है। अमेरिका ने कहा कि उसे पाकिस्तानी F-16 विमानों की संख्या से जुड़ी किसी भी जाँच की जानकारी नहीं है।

भारतीय मीडिया ने एक ऐसी अमेरिकी मैगजीन के दावे को कल तत्परता से प्रकाशित किया था, जिसमें भारत का F-16 विमान गिराने के दावे को गलत बताया गया था और कहा गया था कि अमेरिका द्वारा की गई जाँच से पता चला है कि पाकिस्तान का एक भी F-16 लड़ाकू विमान कम नहीं हुआ है।

भारतीय वायुसेना ने अमेरिका की पत्रिका में छपी उस रिपोर्ट को कल शाम (अप्रैल 06, 2019) खारिज कर दिया था, जिसमें कहा गया था कि पाकिस्तान का कोई भी एफ-16 विमान लापता नहीं है। वायुसेना ने कहा कि उसने पाकिस्तानी एफ-16 विमान को मार गिराया था जिसके सबूत उसके पास हैं।

IAF ने कहा कि 27 फरवरी को हुई हवाई झड़प के दौरान भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान के F-16 लड़ाकू विमान गिराया था और सबूत के तौर पर इस विमान के इलेक्ट्रॉनिक सिग्नेचर उसके पास मौजूद हैं। एयर वाइस मार्शल आरजीके कपूर ने इलेक्ट्रॉनिक सिग्नेचर की पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि 10 सेकेंड के अंदर विंग कमांडर अभिनंदन ने F-16 को लॉक किया और आर-73 मिसाइल दागी थी।

इस फ़र्ज़ी खबर के बाद शुक्रवार (अप्रैल 05, 2019) को अमेरिका ने पाकिस्तान ने F-16 लड़ाकू विमान को लेकर डिफेंस मैगजीन के दावे से इनकार किया है। अमेरिकी रक्षा विभाग ने कहा कि उसे ऐसी किसी जाँच की जानकारी नहीं है, जिसमें यह निर्धारित किया गया हो कि 27 फरवरी को भारतीय को फाइटर विमानों के साथ संघर्ष के दौरान F-16 विमान को खोया है।

अमेरिका का रुख उस डिफेंस मैगजीन के दावे के बिल्कुल विपरीत है, जिसमें कहा गया था कि स्थिति की जानकारी रखने वाले अमेरिका के दो वरिष्ठ अधिकारियों ने बताया कि अमेरिका के अधिकारियों ने हाल ही में पाकिस्तान के F-16 विमानों की गिनती की। इसमें कोई विमान गायब नहीं पाया गया।

अमेरिकी रक्षा विभाग के प्रवक्ता ने एक न्यूज़ चैनल को बताया कि विभाग को ऐसी किसी जाँच के बारे में जानकारी नहीं है। इससे पहले फॉरेन पॉलिसी मैगजीन ने 2 अज्ञात अधिकारियों के हवाले से अपनी रिपोर्ट दी थी।

वहीं, कल प्रकाशित किए गए अमेरिकी मैगजीन के दावे के बाद पाकिस्तान ने F-16 को मार गिराने के दावे पर भारत को ‘सच’ बोलने को कह रहा था। पाकिस्तानी सेना के प्रवक्ता मेजर जनरल आसिफ गफूर ने कहा था कि यह वक्त है कि भारत अब पाकिस्तान द्वारा मार गिराए गए दूसरे विमान समेत अपने झूठे दावों पर सफाई दे। गफूर ने डिफेन्स मैगजीन की इस अमेरिकी झूठी रिपोर्ट पर बयान देते हुए ‘सच की हमेशा जीत’ जैसी बड़ी बात भी कही थी।

जिस मैगजीन की फर्जी रिपोर्ट को अमेरिका ने नकारा है, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने उसी के आधार पर ट्वीट करते हुए कहा है कि भाजपा का चुनाव जीतने के लिए F-16 को गिराने का झूठ कामयाब नहीं हुआ है।

फेक रिपोर्ट्स के आधार पर प्रधानमंत्री मोदी और भाजपा पर ऐसा आरोप लगाने वाले इमरान खान अकेले व्यक्ति नहीं हैं। दि प्रिंट के फाउंडर और वरिष्ठ पत्रकार शेखर गुप्ता, जिनके नाम पर कल ट्विटर पर “शेखर गुप्ता दलाल है” जैसा शर्मनाक ट्रेंड चल रहा था, ने भी अपने घरेलू रक्षा सलाहकारों की सहायता से अमेरिकी पत्रिका के इस दावे को मान लिया था और रिपोर्ट्स प्रकाशित करते हुए कहा था कि कोई भी पाकिस्तानी F-16 गायब नहीं हुआ।

इसी मीडिया गिरोह पर टिप्पणी करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कल एक टीवी चैनल को दिए इंटरव्यू में कहा था कि सरकार पर झूठा इल्जाम लगाने के लिए अगर कोई गया-गुजरा आदमी भी कोशिश करता है तो उनका चैनल उसे पकड़कर छाप देता है, जबकि कॉन्ग्रेस परिवार के घोटालों वाली न्यूज़ वेबसाइट्स की रिपोर्ट्स को उनका चैनल कभी भी प्रकाशित नहीं करते हैं।

कॉन्ग्रेसी चाटुकार सैम पित्रोदा के लिए मोबाइल फोन चलाने वाला हर भारतीय बन्दर है

कॉन्ग्रेस के क़रीबी सैम पित्रोदा आए दिन ऐसा कुछ ऐसा बोल देते हैं जिससे एक नया विवाद जन्म ले लेता है। कभी तो वो पुलवामा हमले के लिए पूरे पाकिस्तान को दोषी न ठहराने की पैरवी कर बैठते हैं, तो कभी मध्यम वर्ग को स्वार्थी न बन कर टैक्स जमा करने की नसीहत तक दे डालते हैं।

इसी कड़ी में एक बार फिर उन्होंने आपत्तिजनक शब्द कह दिए जिस पर हर भारतीय को आपत्ति होगी। उन्होंने कहा कि मोबाइल का इस्तेमाल करते भारतीय उन्हें बंदर जैसे दिखते हैं जो मोबाइल जैसे खिलौने के साथ खेलते रहते हैं।

रिपब्लिक टीवी द्वारा ट्विटर पर शेयर की गई एक वीडियो क्लिप में, राहुल गाँधी के शीर्ष सलाहकार और लंबे समय तक कॉन्गेस के वफ़ादार यह कहते हुए दिखाई देते हैं कि भारतीय, कनेक्टिविटी का प्रभावी ढंग से उपयोग नहीं कर रहे हैं।

पित्रोदा कहते हैं, “भारतीय, कनेक्टिविटी का प्रभावी ढंग से उपयोग नहीं कर रहे हैं। लेकिन आप जानते हैं कि यह आज की दुनिया है, यह एक नया खिलौना (मोबाइल) है। तो अचानक आपके पास मौजूद हर बंदर को एक नया खिलौना दे दिया जाता है और वे उस पर फ़िदा हो जाते हैं। वे नहीं जानते कि इसके साथ क्या करना है। मुझे लगता है कि यह पता लगाने में 5-10 साल लगेंगे कि आप इससे बहुत कुछ कर सकते हैं जितना आप अभी कर रहे हैं। आप जानते हैं, आज यह मनोरंजन है, गपशप झूठ है। झूठ सोशल मीडिया पर बढ़ जाता है।”

पित्रोदा की इस टिप्पणी पर सोशल मीडिया पर लोगों ने अपनी कड़ी प्रतिक्रिया दर्ज की।

पित्रोदा ने हाल ही में 26/11 के मुंबई हमले को बड़ा न मानकर कम स्तर का आँकने की कोशिश की थी। इस हमले पर उन्होंने कहा था कि सिर्फ़ 8 लोग आए और कुछ किया, आप इसके लिए पूरे देश (पाकिस्तान) को दोष नहीं दे सकते।

पित्रोदा ने हाल ही में राहुल गाँधी की प्रस्तावित NYAY योजना का बचाव करने की कोशिश की थी और यह भी कहा था कि भले ही करों को बढ़ाना होगा इसके लिए मध्यम वर्ग को स्वार्थी नहीं होना चाहिए और इसके उन्हें अपना दिल बड़ा करना होगा। उन्होंने कहा था कि गरीबों की मदद करने के लिए, मध्यम वर्ग को इस योजना को पूरा करने के लिए अधिक कर देने के लिए तैयार रहना चाहिए।

‘नवरेह’ बनाम ‘नौरोज़’ में उलझ कर रह गई प्रियंका, सोशल मीडिया पर हुई ट्रोल

चुनावों के मद्देनज़र कॉन्ग्रेस पार्टी में यूँ तो लगभग हर नेता अपने बयानों के कारण सक्रिय नज़र आ रहा है, लेकिन वास्तविक ‘मेहनत’ प्रियंका गाँधी और राहुल गाँधी द्वारा ही की जा रही है। एक तरफ़ जहाँ राहुल गाँधी बिना जीडीपी और बजट की समझ रखे सत्ता में आने के लिए शिक्षा और स्वास्थ्य पर बजट का 70% हिस्सा खर्च करने को तैयार हैं वहीं प्रियंका गाँधी भी ‘नवरेह’ के मौके पर कश्मीरियों को ‘नौरोज़’ की बधाइयाँ देने पर तुली हुईं हैं।

जी हाँ, ट्वीटर पर चुनावों के लिहाज़ से सक्रिय होने वाली कॉन्ग्रेस महासचिव प्रियंका गाँधी ने आज कश्मीरी पंडितों को उनके नए साल ‘नवरेह’ की शुरुआत पर ‘नौरोज़’ की बधाइयाँ दी हैं।

उन्होंने अपने ट्वीट में लिखा कि मेरे सभी कश्मीरी बहनों और भाइयों को नौरोज़ मुबारक!! इसके अलावा अपने ट्वीट में प्रियंका ने अपनी माँ के संदेश का भी ज़िक्र किया जिसमें कहा गया था कि थाली तैयार करना मत भूलना, लेकिन उनके पास थाली तैयार करने के लिए समय नहीं था और रोड शो के बाद जब वो घर पहुँची तो टेबल पर थाली देखी, जिसे शायद उनकी माँ ने तैयार किया था और इस पर प्रियंका ने लिखा कि मम्मी कितनी प्यारी होती हैं।

पोस्ट को देखते हुए उनके समर्थक उन्हें नौरोज़ की बधाइयाँ देने लगे। वहीं जाने-माने स्तंभकार और लेखक तारेक फतेह जैसे लोगों ने उनके इस ट्वीट पर जवाब देते हुए बताया, ‘प्रिय प्रियंका गांधी, नौरोज़ पिछले महीने मनाया जा चुका है। कश्मीर में नए साल के त्योहार को नवरेह के नाम से जाना जाता है।’

इसे अपनी संस्कृति के प्रति जागरूकता कहिए या फिर बड़ी गलती, लेकिन प्रियंका के इस पोस्ट ने उन्हें सोशल मीडिया पर ट्रोल करवा दिया है। कई लोगों ने उन्हें इन दोनों त्यौहारों को लेकर कंफ्यूज़ बताया। क्योंकि नवरोज़ पारसियों का त्यौहार (नया साल) होता है। जबकि नवरेह कश्मीरी पंडितों का नया साल होता है।

बता दें कि कश्मीर से प्रियंका के परिवार का पुराना रिश्ता रहा है। शायद इसी कारण से उनकी माँ सोनिया गाँधी ने नवरेह पर सजाई जाने वाली थाली को उनके लिए तैयार रखा। लेकिन रोड शो और बड़ी-बड़ी रैलियों में व्यस्त प्रिंयका ने इसे सोशल मीडिया पर ‘माँ का प्यार’ दिखाने का प्रयास किया। जिसके कारण सोशल मीडिया यूजर्स ने उन्हे यहाँ तक बोल डाला कि एक असली कश्मीरी पंडित को इसका फर्क पता होता है। लेकिन आपकी माँ को ‘नवरेह’ और ‘नौरोज़’ के बीच कन्फ्यूज़ लगती हैं। नौरोज़ पारसियों का नया साल है।

इस पोस्ट पर एक शख्स ने तो प्रियंका को पूरे भारत का मानचित्र ही प्रियंका को दे दिया। क्योंकि शायद उन्हें इसकी जरूरत भी थी। साथ ही यहाँ लोगों ने उन्हें झूठा हिन्दू तक कह दिया।

वहीं इब्न सिना ने प्रियंका को यहाँ तक कहा कि उन्हें उस शख्स को बदलने की जरूरत है जो उनका ट्वीटर हैंडल संभालता है।

बता दें कि नवरेह की पूर्व संध्या पर, चावल, दही, ब्रेड, अखरोट, इंकपॉट, कागज, कलम, दर्पण, फूल, चांदी का सिक्का और अगले वर्ष के पंचांग से भरी थैली को सुबह सबसे पहले देखने के लिए तैयार रखा जाता है। नवरोज़ पारसियों का नया साल है जो इस साल 21 मार्च को मनाया गया था। ऐसे में प्रियंका के इस पोस्ट ने उनकी माताजी की संस्कृति संबंधित समझ और प्रियंका के सामान्य ज्ञान पर सवाल खड़े कर दिए।

यहाँ ट्विटर पर चौकीदार सीए वी पी सिंह ने प्रियंका के इस ट्वीट का मज़ाक उड़ाते हुए कहा कि वो मालकिन ने बोल दिया तो नौरोज़ ही माना जाएगा। इस शख्स ने प्रियंका के समर्थकों पर तंज कसते हुए कहा कि ये कोई भक्त नहीं हैं जो शिकायत करें या रूठ जाएँ, ये गुलाम हैं, गुलामी में बस इतनी ही छूट है।

PM ने रैली में गाँधी परिवार के ‘फार्महाउस’ पर ऑपइंडिया की ख़बर का उल्लेख किया

कॉन्ग्रेस पार्टी पर भ्रष्टाचार के लिए हमला बोलते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक चुनावी रैली में ऑपइंडिया की ब्रेकिंग न्यूज़ का उल्लेख किया। प्रधानमंत्री ने कहा कि कॉन्ग्रेस और भ्रष्टाचार एक-दूसरे के इतने क़रीब हैं कि उन्हें अलग नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि कॉन्ग्रेस के शासन के दौरान भ्रष्टाचार ‘एक्सीलेटर’ पर रहता है और विकास ‘वेंटिलेटर’ पर रहता है। यही कॉन्ग्रेस की पहचान है।

गाँधी परिवार का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि हर घोटाले में नामदार परिवार का नाम सबसे ऊपर है। उन्होंने कहा, “आपने हाल ही में मीडिया में देखा होगा कि, बड़े फार्महाउस में भी कैसे घोटाले किए गए। साथियों इन्होंने देश की सेना को नहीं छोड़ा, हमारे सैनिकों को नहीं छोड़ा।” हाल ही में ऑपइंडिया ने गाँधी परिवार के सदस्यों द्वारा किए गए संदिग्ध भूमि सौदों का ख़ुलासा किया था।

राहुल गाँधी और प्रियंका गाँधी ने एचएल पाहवा के साथ कई भूमि सौदे किए हैं, जो भगोड़े हथियार डीलर संजय भंडारी का क़रीबी है। राहुल गाँधी ने कम क़ीमत पर भूमि पाहवा से ख़रीदी थी, जबकि प्रियंका गाँधी ने पाहवा से ज़मीन ख़रीदी और फिर बाद में उसे बढ़े मूल्य पर बेच दिया।

गाँधी परिवार के भाई-बहनों ने अपने फार्महाउस को एक कंपनी को किराए पर दे दी, जिसपर मानदंडों के उल्लंघन का आरोप लगाया गया था। इसके अलावा, राहुल गाँधी द्वारा फार्महाउस का अर्जित किराया घोषित मूल्य से 4 से 9 गुना अधिक था, जिसे राहुल गाँधी के चुनावी हलफ़नामे में 9 लाख रुपए से थोड़ा अधिक लिखा गया। राहुल गाँधी ने 2G घोटाले के अभियुक्त यूनिटेक से एक संदिग्ध सौदे में संपत्ति खरीदी थी, जहाँ वह वाणिज्यिक संपत्तियों के लिए किए गए अग्रिम भुगतान पर ब्याज कमा रहे थे।

फर्श से सत्ता के अर्श तक: अभाव में कोई AK47 उठाता है, कोई जितना है, वही बाँट लेता है

एक पुरानी कहानी है जो रीडर्स डाईजेस्ट के जुलाई 2014 अंक में प्रकाशित हुई थी। बहुत से लोगों ने पहले भी पढ़ी होगी फिर भी आज लिखने का मन हुआ। सन् 1990 की गर्मियों की बात है। असम की रहने वाली दो युवतियाँ जो भारतीय रेलवे सेवा की परिवीक्षाधीन अधिकारी थीं, ट्रेन से लखनऊ से दिल्ली जा रही थीं। प्रथम श्रेणी के उसी डिब्बे में दो सांसद भी यात्रा कर रहे थे जिनके साथ दर्जन भर लफंगे भी थे। इसमें कोई आश्चर्य नहीं कि उस जमाने में जब कोई सांसद बन जाता था तो उसके साथ ढेरों लुच्चे-लपाड़ी, चेले-चपाटे समर्थक भी साथ चलते थे। आज भले ही लोग मोबाइल कैमरे से थोड़ा डरते हों किंतु नब्बे का दशक ‘शूल’ फिल्म के ‘बच्चू यादव’ टाइप विधायक और सांसदों का कालखंड हुआ करता था।

बहरहाल, नेताजी के साथ यात्रा कर रहे उन लफंगों ने असम की उन दो युवतियों पर भद्दे कटाक्ष किये और उन्हें उनकी आरक्षित सीट छोड़कर बैग और सामान के ऊपर बैठने को बाध्य किया। चूँकि डिब्बे में सांसदों और उनके चेलों के अतिरिक्त केवल वही दोनों युवतियाँ थीं इसलिए उन लफंगों के मन में जो आया वह कहते रहे और प्रताड़ित करते रहे। सब कुछ सहती हुई वे दोनों पूरी रात टीटीई की प्रतीक्षा करती रहीं किन्तु कोई नहीं आया। किसी प्रकार यात्रा पूरी कर दोनों युवतियाँ अगले दिन दिल्ली पहुँचीं। दिल्ली पहुँच कर एक युवती वहीं रुक गयी तथा दूसरी अपनी एक अन्य सहेली के साथ भारतीय रेलवे सेवा की ट्रेनिंग के अगले चरण के लिए रात की ट्रेन से दिल्ली से अहमदाबाद की यात्रा पर निकल पड़ी।

इस बार ट्रेन में आरक्षण नहीं मिला था और टिकट वेटिंग में था। युवतियों ने टीटीई से कोई खाली सीट दिलाने की प्रार्थना की। टीटीई महोदय ने कहा कि ट्रेन तो भरी हुई है, फिर एक कम्पार्टमेंट में ले गए जहाँ केवल दो बर्थ थी। उसपर भी दो भलेमानस विराजमान थे। टीटीई ने युवतियों से कहा, “चिंता मत कीजिये ये दोनों सज्जन पुरुष हैं और प्रायः इसी ट्रेन से यात्रा करते हैं आपको दिक्कत नहीं होगी।” इतना कहकर टीटीई चला गया। दोनों ‘सज्जन’ पुरुषों ने खादी पहनी थी यह देखकर युवतियाँ समझ गयीं कि ये दोनों भी नेता हैं। नेताओं के साथ यात्रा करने का परिणाम एक युवती चौबीस घंटे पहले ही भुगत चुकी थी इसलिए उसे डर लग रहा था लेकिन ओखली में सर देने के बाद मूसल से क्या डरना यही सोचकर दोनों ने वहीं बैठने का निश्चय किया।

आश्चर्यजनक रूप से उन दोनों पुरुषों ने युवतियों का सामान बड़े कायदे से सीट के अंदर घुसा दिया और बातचीत करने लगे। वार्तालाप प्रारंभ हुआ तो पता चला कि वे दोनों व्यक्ति गुजरात में भाजपा के कार्यकर्ता हैं। युवतियों ने उन्हें अपना नाम बताया- एक का नाम लीना सरमा था और दूसरी उत्पलपर्णा। उत्पलपर्णा ने इतिहास में एमए किया था अतः भारत के इतिहास पर बातें होने लगीं। उन दोनों पुरुषों को इतिहास में खासी रुचि और विषय का ज्ञान भी था। स्वतंत्रता के पूर्व हिन्दू महासभा और श्यामाप्रसाद मुखर्जी की बातें होने लगीं तो उन दोनों पुरुषों में से जो कम वय का लग रहा था उसने लीना से पूछा, “आप श्यामाप्रसाद मुखर्जी को कैसे जानती हैं?” लीना ने उत्तर दिया कि श्यामाप्रसाद मुखर्जी ने उनके पिताजी को कलकत्ता विश्वविद्यालय में छात्रवृत्ति दिलाने में सहायता की थी।

बातचीत समाप्त होते-होते खाना खाने का समय हो चला तो चार शाकाहारी थाली मंगाई गयी। भोजन करने के पश्चात कम आयु वाले व्यक्ति ने सभी का भोजन का पैसा चुका दिया। उसके बाद जब सोने का समय हुआ तो उन दोनों भाजपा के कार्यकर्ताओं ने ट्रेन की फर्श पर सोने का निर्णय लिया और लीना और उत्पलपर्णा को अपनी दोनों बर्थ आराम से सोने के लिए दे दी। प्रातःकाल जब ट्रेन अहमदाबाद पहुँची तो आयु में बड़े व्यक्ति ने लीना और उत्पलपर्णा से अहमदाबाद में ठहरने के ठिकाने के बारे में भी पूछा। उसने कहा कि वे चाहें तो उसके घर में रह सकती हैं। कम आयु वाले व्यक्ति ने कहा कि वह तो घुमक्कड़ है उसका कोई निश्चित ठिकाना नहीं है इसलिए वे उसके मित्र के घर में रह सकती हैं। लीना और उत्पलपर्णा को उन दोनों पुरुषों के निमन्त्रण को विनम्रतापूर्वक अस्वीकार करना पड़ा क्योंकि वे तो ट्रेनिंग के लिए आई थीं इसलिए सरकारी आवास की सुविधा तो उन्हें मिलती ही। इसके बाद दोनों सज्जन पुरुषों ने हाथ जोड़ा और अपने रस्ते चल पड़े।

लीना सरमा और उत्पलपर्णा को जो दो व्यक्ति ट्रेन में मिले थे उनमें से आयु में बड़े वाले शंकर सिंह वाघेला थे और छोटे वाले थे नरेंद्र मोदी जो आज भारत के यशस्वी प्रधानमंत्री हैं। यह कहानी 2014 में रीडर्स डाइजेस्ट से पहले सन 1995 में असम के समाचार पत्र दैनिक असम और द हिन्दू के किसी संस्करण (तारीख याद नहीं) में भी प्रकाशित हुई थी।

भारतीय रेल की फर्श नब्बे के दशक में इतनी गंदी होती थी कि आजकल स्लीपर में यात्रा करने वाले नौजवान उस समय वयस्क होते तो उस फर्श पर सोना तो दूर बैठना पसंद न करते। नेता तो आज भी ऐसे होते हैं कि विधायक और सांसद तो छोड़िये किसी पार्टी के पार्षद से दोस्ती भी हो जाये तो पूरे नगर में अपनी हेकड़ी दिखाते हैं। दो युवतियों के लिए अपनी सीट स्वेच्छा से छोड़कर ट्रेन की फर्श पर सोने वाला नेता आज देश का प्रधानमंत्री है। ट्रेन की गंदगी ही नहीं बल्कि समूचे देश के मानस में व्याप्त गंदगी उसने देखी है और उसका अनुभव किया है इसीलिए वह व्यक्ति साफ़ सफाई का आग्रह कर पाता है।

सुविख्यात अर्थशास्त्री राजीव कुमार नरेंद्र मोदी के व्यक्तिगत जीवन पर प्रकाश डालते हुए लिखते हैं कि रेलवे स्टेशन पर ट्रेन में यात्रा कर रहे सैनिकों को चाय पिलाते हुए नरेंद्र मोदी ने सैनिक स्कूल में पढ़ने का सपना पाला था लेकिन उनके पिताजी ने जाने नहीं दिया। राजीव कुमार का एक महत्वपूर्ण आकलन है कि जब देश बेरोजगारी से जूझ रहा था और चारू मजूमदार नक्सलवाद का बीज बो रहा था तब युवाओं में मार्क्सवादी कीड़ा घुस जाना आम बात हुआ करती थी। परन्तु अत्यंत गरीबी में पले बढ़े होने के बावजूद नरेंद्र मोदी को मार्क्सवादी विचारधारा छू भी नहीं पाई थी।

नरेंद्र मोदी बाल्यकाल से ही प्रतिदिन अपनी गली के गिरिपुर महादेव मन्दिर दर्शन करते थे और उसपर भगवा ध्वज लहराते थे। हिंदुत्व और स्वामी विवेकानंद की प्रेरणा से ही ट्रेन के फर्श से सत्ता के अर्श पर पहुँचा यह व्यक्ति आज सवा सौ करोड़ भारतवासियों की प्रेरणा का स्रोत है क्योंकि हिंदुत्व अभावों में जीने को बुरा मानकर बंदूक उठाने को नहीं कहता बल्कि अभाव में भी कुछ न कुछ प्रेम का भाव साझा करने का संदेश देता है।