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VIDEO: ‘तुम्हारे बाप की मौत में आया था’ आज़म ख़ान ने अब पत्रकारों से की बदसलूकी

आज़म ख़ान ने इस बार विवादित बयान देने और बदसलूकी करने का नया रिकॉर्ड बनाने की ठान ली है। अब उन्होंने पत्रकारों से भी दुर्व्यवहार किया है। अभिनेत्री जयाप्रदा को लेकर ‘खाकी अंडरवियर’ वाला महिलाविरोधी बयान देने के बाद आज़म ने डीएम से मायावती की जूती साफ़ करवाने की बात कही। इसके बाद अब उन्होंने एक पत्रकार से बदसलूकी करते हुए कहा, “आपके वालिद की मौत में आया था, आपके वालिद मर गए हैं उसमें आया था।” आज़म ख़ान ने उक्त विवादित बयान विदिशा में दिया। मध्य प्रदेश के विदिशा में दिवंगत सांसद मुनव्वर सलीम के अंतिम क्रिया-कर्म से लौटते वक़्त आज़म ने ऐसा कहा। जयाप्रदा के बारे में सवाल पूछने पर आज़म ख़ान भड़क गए।

बता दें कि विदिशा निवासी मुनव्वर सलीम समाजवादी पार्टी के राज्य सभा सांसद थे। उन्हें उत्तर प्रदेश से राज्य सभा के लिए चुना गया था। चौधरी मुनव्वर सलीम को 2012 में राज्य सभा भेजकर तत्कालीन सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव ने मध्य प्रदेश में मुस्लिम मतों को साधने की कोशिश की थी। 2009 आम चुनाव में विदिशा में सुषमा स्वराज से 3.89 लाख से भी अधिक वोटों से चुनाव हार चुके सलीम मध्य प्रदेश में सपा के लिए मुस्लिमों का चेहरा बनकर उभरे थे। उन्होंने विदिशा से ही 2004 में शिवराज सिंह चौहान के ख़िलाफ़ भी चुनाव लड़ा थे लेकिन वो तीसरे नंबर पर रहे थे। 66 वर्षीय सलीम का रविवार (अप्रैल 13, 2019) को लम्बी बीमारी के बाद निधन हो गया। 8 भाई-बहनों में सबसे बड़े सलीम आज़म ख़ान के क़रीबी थे।

आज़म ख़ान ने सलीम के अंतिम संस्कार से लौटते समय पत्रकारों का अपमान किया। उन्होंने पत्रकारों के सवालों का जवाब देने से भी साफ़ इनकार कर दिया और फिर वहाँ से चल निकले। बता दें कि उनके विवादित बयान के लिए आज़म ख़ान के ख़िलाफ़ FIR भी दर्ज कर ली गई है। महिला आयोग ने भी उन्हें नोटिस भेजा है। उनके इस बयान को घिनौना बताते हुए महिला आयोग की अध्यक्षा रेखा शर्मा ने कहा था कि वो निर्वाचन आयोग से अनुरोध करेंगी कि उन्हें चुनाव लड़ने से रोका जाए। सपा नेता अपर्णा यादव, कॉन्ग्रेस प्रवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी और केंद्रीय विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने उनके बयानों की निंदा की है। हैरत यह कि सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने आज़म ख़ान का बचाव किया है।

आज़म ख़ान पर पलटवार करते हुए जयाप्रदा ने कहा:

“मेरे लिए ये कोई नई बात नहीं है। मैं साल 2009 में उन्हीं की पार्टी से प्रत्याशी थी। उस समय भी ऐसी टिप्पणी की गई थी। आज़म खान को आदत है। अगर ऐसी टिप्पणी नहीं करते हैं तो नई बात होगी। हम लोग इसे रिपीट नहीं कर सकते है। वो मेरे लिए भाई नहीं हैं। पता नहीं मैंने क्या बोल दिया कि वो ऐसी टिप्पणी कर रहे। मैं चाहती हूँ कि आज़म ख़ान का चुनाव रद्द होना चाहिए। क्योंकि अगर ये चुनाव जीत गए तो फिर लोकतंत्र का क्‍या होगा। क्या मैं मर जाऊँ? अगर आप लोग सोच रहे होंगे कि मैं रामपुर से चली जाऊँगी तो मैं कहना चाहती हूँ कि मैं नहीं जाऊँगी और डटकर चुनाव लड़ूँगी।”

वहीं उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आज़म ख़ान द्वारा जयाप्रदा पर आपत्तिजनक टिप्पणी की निंदा करते हुए कहा कि उन्होंने आज़म ख़ान जैसे लोगों के लिए ही सरकार बनने के बाद एंटी-रोमियो स्क्वाड गठित की थी। उन्होंने इस बयान पर अखिलेश यादव और मायावती की चुप्पी को शर्मनाक बताया। बता दें कि अखिलेश यादव आज़म ख़ान के बयान का बचाव करते हुए कह चुके हैं कि उन्होंने किसी और के लिए ये चीजें कही थीं।अमेठी में केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने कहा, “एक महिला पर अपमानजनक टिप्पणी की गई और सपा नेताओं ने इस पर चुप्पी साध ली, वो चुप बैठे रहे। मैं सपा नेताओं से कहना चाहती हूँ कि राजनीति अपनी जगह है लेकिन महिलाओं के सम्मान के साथ खिलवाड़ नहीं होना चाहिए।“

मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भी कहा कि जिस देश में माँ-बेटियों का सम्मान होता है, उस देश में इस तरह की भाषा के लिए जनता उन्हें माफ़ नहीं करेगी।

7 दिन, 6 हमले, 5 हत्याएँ: संघी ही ‘फासिस्ट’, और संघी ही असुरक्षित

सोशल मीडिया में चर्चित स्तंभकार और दिल्ली विश्वविद्यालय में प्राध्यापक अभिनव प्रकाश ने आज सुबह ही लिखा:

‘Real Fascism in the last 7 days –

1.RSS leader murdered by Islamists in Kashmir

2. BJP MLA murdered by leftists in CG.

3. 75 yr old Modi supporter lynched by Cong-DMK supporter in TN.

4. BJP Mandal President shot dead in Odisha.

Media & activists in seminars: BJP is fascist.’

उन्हें शायद खुद यह अंदेशा नहीं होगा कि उनकी पोस्ट पुरानी पड़ते-पड़ते दो और मामले प्रकाश में आ जाएंगे- तमिलनाडु में भाजपा सदस्य की लाश पानी में तैरती मिली, और महाराष्ट्र में भाजपा के महज समर्थन के लिए एक आदमी की न केवल पिटाई हुई, बल्कि एनडीटीवी पत्रकार ने उसे हल्का करने की भी कोशिश की।

और विडंबना यह है कि इतने के बावजूद कि ‘अपने राज’ में ही संघी-भाजपाई मारे जा रहे हैं, मीडिया और समाज का एक वर्ग उन्हीं पर देश को असुरक्षित करने का आरोप लगा रहा है। ‘फासिस्ट’ से लेकर ‘आतंकवादी’ और ‘चड्ढी गैंग’ तक शायद ही ऐसी कोई राजनीतिक गाली है, जो संघ परिवार ने नहीं खाई है।

कश्मीर में संघ पदाधिकारी की दिनदहाड़े हत्या

संघ के पदाधिकारी चंद्रकांत शर्मा की न केवल अपने सुरक्षाकर्मी सहित हत्या होती है, बल्कि हत्या भी कश्मीर में होती है। एक अस्पताल के भीतर होती है– एक ओर ‘पुलिस स्टेट’ यानी अत्यधिक पुलिसिंग वाले राज्य के रूप में कश्मीर बदनाम है, और आरोप भाजपा पर ही है। वहीं दूसरी ओर लोकसभा चुनाव जैसे सुरक्षा के लिहाज से वैसे भी संवेदनशील समय में, पुलिस स्टेट के नाम से बदनाम राज्य में, भाजपा अपने ही लोगों को सुरक्षित नहीं रख पा रही है।

माओवादियों ने भाजपा विधायक को गोलियों से भूना

छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा में भाजपा विधायक भीमा मंडावी को 4 सुरक्षा कर्मियों समेत घेर कर मार डाला गया। माओवादियों ने उनकी गाड़ी के मार्ग में विस्फोटक लगा दिए और धमाके में उनके और गाड़ी में मौजूद लोगों के चीथड़े उड़ा दिए। माओवादी आतंकियों को भीमा मंडावी के जाने का मार्ग इतने सटीक तरीके से कैसे मालूम था, यह भी अभी साफ नहीं है।

मोदी का समर्थन करने के लिए वृद्ध की हत्या   

तमिलनाडु में एक 75 साल के कृशकाय वृद्ध व्यक्ति की केवल इसलिए हत्या कर दी गई कि उसने मोदी का ‘फैन’ होने की हिमाकत की थी। गोविंदराजन केवल मोदी ही नहीं, जयललिता और एमजी रामचंद्रन के भी फैन थे। पर अफ़सोस की बात यह हुई कि उन्हें पीटने वाला गोपीनाथ कॉन्ग्रेस-द्रमुक गठबंधन का फैन था, अतः उसके लिए तीनों ही नाम असह्य थे।

ओडिशा में भाजपा के क्षेत्रीय अध्यक्ष को गोली मारी

ओडिशा में भाजपा के क्षेत्रीय (ज़ोनल) अध्यक्ष मंगुली जेना की ओडिशा के खुर्दा में ‘अज्ञात हमलावर’ ने गोली मारकर हत्या कर दी।  रविवार (14 अप्रैल) रात को दिन भर की दोहरी राजनीतिक गहमागहमी (ओडिशा में लोकसभा के साथ ही विधानसभा चुनाव भी हो रहे हैं) के बाद जेना अपने घर के लिए ही निकल रहे थे। इस हमले में उनके बगल में खड़े खुर्दा विधानसभा क्षेत्र के उम्मीदवार कालू खंडयात्रेय बाल-बाल बचे।

भाजपा समर्थक की पिटाई, पत्रकारिता के समुदाय विशेष की चीयरलीडिंग   

महाराष्ट्र में किसी मोदी समर्थक ने मनसे अध्यक्ष राज ठाकरे की आलोचना कर दी। मनसे वालों को इतना बुरा लगा कि उसके घर में घुसकर, उसे उसके घर वालों के सामने पीटा। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ तो एनडीटीवी के पत्रकार ने मामले की सीधी भर्त्सना करने की बजाय घुमा-फिर कर यह जताने की कोशिश की पीड़ित यदि खुद ‘गुंडा’ (यानी भाजपा समर्थक) न होता तो उसके साथ यह न होता।

तालाब में मिली भाजपाई की लाश

तमिलनाडु अब केरल-बंगाल के बाद भाजपाइयों-संघियों के तीसरे कब्रगाह में तब्दील हो रहा है। पहले भाजपा का फैन भर होने की कीमत एक बूढ़े व्यक्ति को जान देकर चुकानी पड़ी, और अब भाजपा के सदस्य की लाश एक तालाब में तैरती मिली है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आना जरूर बाकी है पर सोशल मीडिया में हंसिया से कत्ल किए जाने की खबर तैर रही है।

मीडिया में हमेशा की तरह सन्नाटा

मुख्यधारा की मीडिया ने हमेशा की तरह मौन व्रत ले रखा है। किसी-किसी मामले में बोलना पड़ भी रहा है तो एक-एक शब्द इतनी कंजूसी से निकल रहा है कि मानों शोक जताने पर भी आचार संहिता लगी हुई है। न अब कहीं असहिष्णुता फ़ैल रही है न ही ‘emerging pattern of violence in the society’ पर प्राइम-टाइम डिबेट चल रहा है।

फिर भी, असहिष्णु भी संघ है, हत्यारा भी संघ है, सब मीडिया पर कब्ज़ा भी संघियों का हो गया है…

राहुल ने केजरी को कहा ‘U-Turn’ तो केजरी ने उन्हें बताया ‘दिखावटी’, Twitter पर रगड़े-झगड़े

दिल्ली में गठबंधन का रार थमता नज़र नहीं आ रहा है। कभी ख़बर आती है कि डील फाइनल हो चुकी है तो कभी समाचार मिलता है कि बातचीत बंद हो गई है। कभी ख़बर आती है कि बंद दरवाजों में बातचीत शुरू हो गई है तो कभी सूचना मिलती है कि बात नहीं बन सकी। कभी अरविन्द केजरीवाल ट्वीट कर राहुल गाँधी को नसीहत देते हैं तो कभी शीला दीक्षित मीडिया में आकर केजरीवाल की बढ़ी हुई माँगों के कारण उन्हें घेरती हैं। अब गठबंधन का ये रार पूरी तरह ट्विटर पर उतर आया है। दोनों पार्टी के बीच ट्विटर पर ही तू-तू, मैं-मैं शुरू हो चुका है। इसमें कुछ पत्रकार और अन्य नेतागण भी मज़े ले रहे हैं। इन दोनों के रगड़े में यूजर्स के तो मज़े ही मज़े हैं।

राहुल गाँधी ने ट्वीट कर कहा कि अरविन्द केजरीवाल ने फिर से यू-टर्न लिया है। उन्होंने लिखा कि दिल्ली में आप-कॉन्ग्रेस गठबंधन का सीधा परिणाम यह होगा कि भाजपा की कड़ी हार हो जाएगी। उन्होंने अपनी पार्टी के ‘त्याग’ का जिक्र करते हुए लिखा कि कॉन्ग्रेस आप को 4 सीटें देने को राजी है लेकिन आप नहीं मान रही। केजरीवाल के यू-टर्न का जिक्र करते हुए राहुल ने कहा कि गठबंधन के लिए उनके दरवाजे खुले हैं लेकिन समय तेज़ी से आगे बढ़ रहा है।

राहुल गाँधी के इस बयान पर मोदी-शाह नामक ‘ख़तरे’ का जिक्र करते हुए दिल्ली के मुख्यमंत्री ने कहा कि राहुल गाँधी दिखावा और बयानबाज़ी कर रहे हैं। उन्होंने राहुल गाँधी पर यूपी सहित अन्य राज्यों में भी मोदी विरोधी वोट बाँटने का आरोप लगाया। इसके बाद आम आदमी पार्टी छोड़ चुके आशुतोष का भी दर्द छलक आया और उन्होंने मोदी-शाह को हराने के लिए दिल्ली पर बातचीत करने और हरियाणा तथा चडीगढ़ को बिना लिंक किए बातचीत करने की सलाह दी।

ट्विटर यूजर्स ने इस बीच जम कर मज़े लिए। एक यूजर ने लिखा कि अगर कॉन्ग्रेस ज्यादा दिमाग चला लेती तो ये लोग साढ़े-साढ़े तीन सीटों पर भी समझौता कर सकते थे।

एक अन्य यूजर ने आशुतोष की रोती हुई फोटो शेयर कर के उनके हवाले से लिखा कि गठबंधन कर लो वरना मोदीजी जीत जाएँगे। बाद में किसी ने उस पर रिप्लाई किया कि आशुतोष तो न अब पत्रकार रहे और न नेता।

फिलहाल आप-कॉन्ग्रेस गठबंधन पर राजनीतिक पंडित तरह-तरह के आकलन लगा रहे हैं लेकिन अभी तक बात बनती दिख नहीं रही। हाल ही में अरविन्द केजरीवाल ने कहा था कि वो इस गठबंधन के लिए कुछ भी करने को तैयार हैं।

बिहार में कॉन्ग्रेस को बड़ा झटका, बग़ावती शकील अहमद मधुबनी से निर्दलीय लड़ेंगे चुनाव

बिहार महागठबंधन में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है। कॉन्ग्रेस को बिहार में तगड़ा झटका लगा है। पूर्व केंद्रीय राज्यमंत्री शकील अहमद ने निर्दलीय चुनाव लड़ने का ऐलान कर पार्टी को सांसत में डाल दिया है। मधुबनी से 2 बार सांसद रहे शकील के बग़ावती तेवर से कॉन्ग्रेस को क्षेत्र में अच्छा-ख़ासा घाटा होने की उम्मीद है। शकील अहमद ने एक ट्वीट कर ऑल इंडिया कॉन्ग्रेस कमेटी के वरिष्ठ प्रवक्ता पद से इस्तीफा देने की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि वे अपना इस्तीफा पार्टी अध्यक्ष राहुल गाँधी को भेजने जा रहे हैं। शकील अहमद कल मंगलवार (अप्रैल 16, 2019) को मधुबनी से निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में पर्चा दाखिल करेंगे।

शकील अहमद पार्टी से इसीलिए नाराज़ चल रहे थे क्योंकि मधुबनी सीट बिहार महागठबंधन के समझौतों के बाद मुकेश साहनी की पार्टी वीआईपी को दे दी गई। इससे पहले अहमद ने पत्रकारों से कहा था कि उन्होंने अपनी पार्टी से समर्थन माँगा है और समर्थन न मिलने की स्थिति में उनका निर्दलीय लड़ना तय है। शकील अहमद ने उदाहरण देते हुए कहा कि जैसे सुपौल में कॉन्ग्रेस उम्मीदवार रंजीत रंजन के विरुद्ध राजद समर्थक उम्मीदवार मैदान में है, ठीक उसी तरह मधुबनी में भी उन्हें कॉन्ग्रेस का समर्थन मिलना चाहिए। उन्होंने पूछा कि अगर सुपौल में ऐसा हो सकता है तो मधुबनी में क्यों नहीं?

शकील अहमद ने कहा कि महागठबंधन प्रत्याशी मधुबनी में भाजपा के ख़िलाफ़ जीतने की ताक़त नहीं रखता है। बता दें कि मधुबनी से मौजूदा भाजपा सांसद हुकुमदेव नारायण यादव के बेटे अशोक यादव मैदान में हैं। सांसद के तौर पर अपनी उपलब्धियों के लिए पुरस्कृत हो चुके हुकुमदेव पद्म भूषण भी प्राप्त कर चुके हैं। पाँच बार सांसद रह चुके यादव 2 बार शकील अहमद से हार भी चुके हैं। 1999 आम चुनाव में उन्होंने शकील अहमद को हराया भी था। इलाक़े में दोनों के बीच हमेशा काँटे की टक्कर रहती है। वहीं अशोक यादव भी विधायक रह चुके हैं। शकील द्वारा नामांकन भरने से यहाँ मुक़ाबला त्रिकोणीय हो जाएगा। हुकुमदेव ने सक्रिय राजनीति से संन्यास की घोषणा कर दी है।

शकील अहमद यूपीए के पहले कार्यकाल के दौरान संचार, आईटी और गृह सहित कई अहम मंत्रालयों में केन्द्रीय राज्यमंत्री रह चुके हैं। शकील अहमद बिहार की राबड़ी देवी सरकार में कैबिनेट मंत्री भी रह चुके हैं। पार्टी संगठन में सक्रिय शकील को 2011 में पश्चिम बंगाल में कॉन्ग्रेस का प्रभारी नियुक्त किया गया था। शकील अहमद ने दावा किया है कि कॉन्ग्रेस के कार्यकर्ता और स्थानीय नेता उनके साथ हैं, जिससे उन्हें मधुबनी में भाजपा को हराने में मदद मिलेगी। दिल्ली, हरियाणा और पंजाब में भी पार्टी के प्रभारी रह चुके शकील कॉन्ग्रेस के महासचिव के तौर पर भी काम कर चुके हैं।

मुकेश साहनी की पार्टी वीआईपी ने मधुबनी से पूर्व राजद नेता बद्रीनाथ पूर्वे को टिकट दिया है। बिहार महागठबंधन ख़ासकर राजद के नेता तेज प्रताप यादव के बग़ावत के कारण पहले ही परेशान हैं। अब शकील अहमद की नाराज़गी भी खुल कर बाहर आ गई है। मधुबनी मिथिलांचल की प्रमुख सीटों में से एक है जहाँ शकील अहमद के मैदान में उतरने के बाद मुक़ाबला दिलचस्प हो जाएगा।

प्रथम स्वदेशी क्रूज मिसाइल ‘निर्भय’ का सफल परीक्षण, DRDO ने किया कीर्तिमान स्थापित

डिफेंस रिसर्च एंड डेवल्पमेंट ऑर्गेनाइजेशन (DRDO) के वैज्ञानिकों ने सोमवार की सुबह ओडिशा के समुद्री तट पर स्थित परीक्षण रेंज से सब-सोनिक क्रूज मिसाइल ‘निर्भय’ का सफल परीक्षण कर नया कीर्तिमान स्थापित किया है। मिसाइल के सफल परीक्षण से भारतीय सैन्य बल को नई ताकत मिली है। भारत का वैमानिकी विकास प्रतिष्ठान (आईएडीई) के वैज्ञानिकों ने इसके सफल परीक्षण के बाद कहा कि निर्भय सब-सोनिक क्रूज मिसाइल की मारक क्षमता 1,000 किलोमीटर है।

यह स्वदेशी तकनीक पर विकसित भारत की पहली क्रूज मिसाइल है। यह मिसाइल बिना भटके लंबी दूरी तक लक्ष्य साधने में सक्षम है। जल्द ही इसे सेना में शामिल कर लिया जाएगा। इस मिसाइल से भारत की सैन्‍य ताकत को मजबूती मिलेगी। पाकिस्‍तान, चीन समेत कई देश इस मिसाइल की पहुँच में है। यह मिसाइल कुछ सेकेंड में ही दुश्‍मन देशों के किसी भी इलाके को नेस्‍तानाबूद करने में सक्षम है। निर्भय मिसाइल 200 से 300 किलोग्राम तक के परमाणु वारहेड को अपने साथ ले जा सकती है।

सब-सोनिक क्रूज मिसाइल ‘निर्भय’ की खास बातें:-

  • यह मिसाइल 6 मीटर लंबी और 0.52 मीटर चौड़ी है
  • इसका अधिकतम वजन 1500 किलोग्राम है
  • यह मिसाइल 0.6 से लेकर 0.7 मैक की गति से उड़ सकती है
  • यह मिसाइल दो चरणों में उड़ान भरती है
  • यह मिसाइल धरती से कुछ ही मीटर की ऊँचाई पर उड़ने से यह आसानी से राडार की पकड़ में नहीं आती, यानी इसे मिसाइल रोधी तंत्र से भी रोकना काफी मुश्किल है
  • पहली बार में यह पारंपरिक रॉकेट की तरह लबंवत आकाश में जाती है फिर दूसरे चरण में क्षैतिज उड़ान भरने के लिए 90 डिग्री का मोड़ लेती है

गौरतलब है कि इससे पहले भी DRDO के वैज्ञ‍ानिक इस मिसाइल का कई बार परीक्षण कर चुके हैं। निर्भय का पहला परीक्षण 12 मार्च 2013 को किया गया था और उस समय मिसाइल में खराबी आने के कारण उसने बीच रास्ते में ही काम करना बंद कर दिया था। दूसरा परीक्षण 17 अक्तूबर 2014 को किया गया जो सफल रहा था। 16 अक्तूबर 2015 को किए गए अगले परीक्षण में मिसाइल 128 किलोमीटर की दूरी तय करने के बाद अपने रास्ते से भटक गई थी।

इसके बाद 21 दिसंबर 2016 को परीक्षण किया गया। उस समय भी यह निर्धारित रास्ते से भटक गई थी। इसके अलावा नवंबर 2017 में इस मिसाइल का परीक्षण किया गया था। वैज्ञानिकों ने इस परीक्षण को सफल बताया था। यह सभी परीक्षण ओडिशा के चांदीपुर में DRDO के परीक्षण रेंज से किए गए थे।

अखिलेश ने किया आज़म के अंडरवियर बयान का बचाव, कहा ‘उन्होंने किसी का नाम तो नहीं लिया’

उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने आज़म ख़ान के उस बयान का बचाव किया है जिसमे उन्होंने कहा था कि रामपुर के लोगों ने 17 सालों में उनको (जया प्रदा) नहीं पहचाना, जबकि उन्होंने केवल 17 दिन में उनकी वास्तविकता को पहचान लिया। आज़म ने कहा था, “उसकी असलियत समझने में आपको 17 साल लग गए। मैं तो 17 दिन में ही पहचान गया कि इनके नीचे का जो अंडरवियर है, वो भी खाकी रंग का है।“ यह टिप्पणी करते हुए आजम खान ये दिखाने की कोशिश कर रहे थे कि जया प्रदा के संबंध आरएसएस से थे और जया ने जो उनके खिलाफ आरोप लगाए थे, वो भी आरएसएस की साज़िश थी। आजम ने जब यह शर्मनाक टिप्पणी की थी, उस समय सपा प्रमुख अखिलेश यादव भी मंच पर मौजूद थे।

कई नेताओं ने कहा कि सपा सुप्रीमो अखिलेश की मौजूदगी में दिए गए इस बयान का अखिलेश द्वारा बचाव करने का अर्थ है कि सब कुछ उनकी देखरेख और सहमति से हो रहा है। अखिलेश यादव ने आज़म के महिला-विरोधी ‘अंडरवियर बयान’ पर उनका बचाव करते हुए कहा, “आज़म ख़ान के बयान को गलत परिपेक्ष्य में पेश किया गया। उन्होंने ऐसा किसी और के लिए कहा था। संघ के कपड़ों को लेकर दिया गया उनका बयान किसी और के लिए था। मीडिया इस मामले में ग़लती कर रही है, कुछ और ही दिखाया जा रहा है।” इतना ही नहीं, अखिलेश यादव ने आज़म ख़ान के साथ एक फोटो ट्वीट कर भी यह दिखाया कि कि वो उनके साथ खड़े हैं। अखिलेश का ये ट्वीट आज़म के बयान पर उठे विवाद के बाद आया है।

उधर मुलायम सिंह यादव की बहू अपर्णा यादव ने आज़म ख़ान के बयान की निंदा की है। उन्होंने निर्वाचन आयोग और सपा प्रमुख अखिलेश से इस मामले में त्वरित कार्रवाई करने की अपील की। अपर्णा ने आज़म ख़ान के बयान बताते हुए कहा कि वो पार्टी की छवि को गिरा रहे हैं। केंद्रीय विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने भी कई महिला नेत्रियों को ट्विटर पर टैग करते हुए इस बयान की निंदा करने की अपील की। सुषमा ने लिखा “मुलायम भाई- आप पितामह हैं समाजवादी पार्टी के। आपके सामने रामपुर में द्रौपदी का चीर हरण हो रहा हैं आप भीष्म की तरह मौन साधने की ग़लती मत करिए।”

आज़म खान को महिला आयोग ने भेजी नोटिस

आज़म ख़ान के ख़िलाफ़ FIR भी दर्ज कर ली गई है। महिला आयोग भी उन्हें नोटिस भेजा है। उनके इस बयान को घिनौना बताते हुए महिला आयोग की अध्यक्षा रेखा शर्मा ने कहा था कि वो निर्वाचन आयोग से अनुरोध करेंगी कि उन्हें चुनाव लड़ने से रोका जाए। कॉन्ग्रेस पार्टी प्रवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने ट्वीट कर कहा, ‘जया प्रदा पर आज़म ख़ान की टिप्पणी का स्तर भद्दा और तुच्छ है। ऐसा बयान लोकतंत्र के लिए अपमानजनक है। आशा करता हूँ कि चुनाव आयोग और अखिलेश यादव इसका संज्ञान लेंगे और कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित करेंगे।‘

सागरिका जी, बता तो देतीं कि भारत में ‘अफ़्रीकी तानाशाह’ कौन है?

सागरिका घोष (किसी पहचान की आवश्यकता नहीं) ने परसों सुबह ट्वीट किया:

मोटा-मोटी भाषा में कहें तो उन्होंने हम ‘निर्बुद्धि’ भारतीयों के साथ जिसे अंग्रेजी में ‘chastising’ कहते हैं, वह करते हुए कहा कि हे जाहिल, मूर्ख हिन्दुस्तानियों, अफ्रीका जिस कबीलाई तानाशाही को पीछे छोड़ आगे बढ़ रहा है, तुम लोग उन्हीं कबीलाई तानाशाहों को व्यग्रता से गले लगाए जा रहे हो!! (‘Chilling, but true’ का क्या अनुवाद करना!!)

कौन है यह ‘रहस्यमयी’ कबीलाई तानाशाह, जिसने सागरिका जी की उड़ा रखी है नींद??

पर मैं ज़रा कन्फ्यूज्ड हूँ- सागरिका जी बात किसकी कर रहीं हैं?? अभी चुनाव के नतीजे तो आए नहीं हैं जो पता चले कि हम मूर्ख, जाहिल भारतीय किसे ‘व्यग्रता से गले लगाए’ जा रहे हैं… या शायद आप अपने मीडिया ग्रुप टाइम्स ऑफ़ इंडिया द्वारा प्रकाशित किए गए मतदान-पूर्व सर्वेक्षण की बात कर रहीं थीं, जिसमें… एक मिनट, मोदी और राजग की तो 50 के करीब सीटें कम हो रहीं हैं, मोदी का प्रधानमंत्री बनना या न बनना भाजपा के हाथों से निकल कर राजग के भी बाहर के दलों की मर्जी पर टिक रहा है। उसी की बात कर रहीं हैं आप??

आपके ही मीडिया ग्रुप के Times Now चैनल का यह सर्वेक्षण है, और इसमें संप्रग 140 से भी आगे जा रहा है जबकि 2014 से यह 60 पर पेट में घुटना दबा कर किसी तरह समय काट रहा था। पिछली बार 44 सीटें पाने वाली आपकी प्रिय कॉन्ग्रेस भी इस दफे 96 सीटें पाती दिख रही है। यानी आपके एम्प्लायर के हिसाब से तो ‘हवा’ पलट कर ‘बाबा (राहुल, साहेब नहीं)’ की चलने लगी है- भले ही इसे ढंग की बयार बनने में शायद पाँच साल और लगें!! तो क्या राहुल बाबा को ही वोटरों का थोड़ा-बहुत गले लगाना ‘कबीलाई तानाशाहों को व्यग्रता से गले लगाना’ है?

राहुल गाँधी ही वह कबीलाई तानाशाह हैं? क्योंकि आपका चैनल जनता का मूड तो उनकी तरफ ही मुड़ता दिखा रहा है!!  

या फिर आप उनके ‘कभी हाँ, कभी ना’ वाले दोस्त अखिलेश यादव की बात कर रहीं हैं, जिनके महागठबंधन को आपका चैनल Times Now यूपी में 51 सीटें दे रहा है?  

मीम भाषा में बोलूँ सागरिका जी तो ‘सेड रिएक्सस्स्स्स ओनली’!!! [रोता हुआ इमोजी खुद से कल्पित कर लीजिए!!]

मोदी को गरियाने का नया फार्मूला??

और या फिर हँसी-ठट्ठा छोड़ सीधे-सीधे पूछूँ तो क्या ये मोदी को गरियाने का नया फार्मूला है? क्योंकि ‘आएगा तो मोदी ही’ का मीम और ट्विटर ट्रेंड अब अपने सोशल मीडिया फीड पर और बर्दाश्त नहीं हो रहा?

आपके राजनीतिक आका का ‘चौकीदार चोर है’ औंधे मुँह जमींदोज़ हुआ, ‘नीच किस्म का आदमी’, ‘हमारे मुख्यालय में चाय बेचेगा ये चायवाला’ उलटे पड़े, ‘वॉट अबाउट 2002?’ मीम मैटीरियल से ज्यादा कुछ नहीं बचा है, ‘असहिष्णुता’ से लेकर ‘सेक्युलर फैब्रिक’, संविधान से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक किसी की दुहाई काम नहीं आ रही तो आप ये नया नाटक लेकर आईं?

मैं run-of-the-mill नेता होता तो आप पर यह भी आरोप लगा देता कि आप एक घांची-तेली-ओबीसी, गैर-हिंदीभाषी, गरीब घर में पैदा हुए नेता को अफ्रीका से जोड़ कर एक साथ पिछड़े वर्ग का अपमान, नस्लभेद, वर्ग विभेद, अलाना-फलाना-ढिकाना समेत दो-तीन दर्जन आरोप मढ़ देता। पर फ़िलहाल ज़मीर बेचा नहीं है तो ऐसा नहीं करूँगा, यह जानते हुए भी कि आप मौका मिलने पर मोदी के साथ यही या इससे भी बुरा करतीं।

पर यह ज़रूर कहूँगा कि नरेंद्र मोदी को लोगों की नज़रों में ‘नमो’ आप लोगों ने ही बनाया, 2014 का चुनाव भी उन्हें आपके दुष्प्रचार ने ही जिताया, और आज तमाम सचमुच की खामियाँ सरकार में होते हुए भी वह व्यक्ति अगर आज दोबारा उसी ताकत से सत्ता में वापसी के मुहाने पर खड़ा है तो भी आप ही लोगों की ‘bigotry’ की दया से। अगर पाँच साल मोदी के बहाने हिन्दुओं पर निशाना साधने की बजाय आप और आपके आका सचमुच में कुछ इस सरकार की सही की खामियों की बात कर लेते तो मोदी को हराने के लिए ही आपको अफ्रीका से निंदा भी ‘इम्पोर्टेड’ न इस्तेमाल करनी पड़ती।

अल्पसंख्यकों में डर फैला रहे हैं केजरीवाल: भाजपा ने EC से की शिकायत

गोवा में भाजपा ने आचार संहिता के उल्लंघन के आरोप में दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के ख़िलाफ़ चुनाव आयोग में शिकायत दर्ज की है। भाजपा का कहना है कि केजरीवाल ने 13 अप्रैल को पणजी में हुई एक जनसभा के दौरान ईसाइयों और समुदाय विशेष के बीच डर फैलाने की बात की है।

चुनाव आयोग को लिखे शिकायत पत्र में भाजपा ने कहा है कि अरविंद केजरीवाल ने अपने भाषण में धार्मिक भावनाओं को भड़काने का प्रयास करके आचार संहिता का उल्लंघन किया। भाजपा की मानें तो केजरीवाल द्वारा इस रैली में कथित तौर पर ऐसे बयान दिए गए हैं, जिसमें कहा गया कि जानवरों की चोरी के आरोप में जो मॉब लिचिंग की जा रही है, वह वास्तव में संगठित तरीके से की गई हत्या है।

चुनाव आयोग को की गई इस शिकायत में बीजेपी ने अपने तर्क को उचित साबित करने के लिए न्यूज़ रिपोर्ट का भी हवाला दिया है। इसके साथ ही इस शिकायत पत्र में कहा गया है कि अरविंद केजरीवाल ने अपने बयान (ईसाइयों और मुस्लिमों को घुसपैठियों की आड़ में समुद्र में बहा दिया जाएगा) के जरिए लोगों के भीतर डर फैलाने की कोशिश की।

इसके अलावा बता दें कि भाजपा द्वारा आचार संहिता उल्लंघन मामले के मद्देनजर मुख्य चुनाव अधिकारी से एक रोमन कैथोलिक पादरी के ख़िलाफ़ भी शिकायत दर्ज करवाई गई है। इस शिकायत में दावा किया गया है कि पादरी ने कथित तौर पर साम्प्रदायिकता फैलाने के मकसद से भाषण दिया। भाजपा का आरोप है कि पादरी ने गोवा के पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर पार्रिकर के बारे में टिप्पणी करते हुए कहा था कि उन्हें कैंसर भगवान के गुस्से की वजह से हुआ है।

शिकायत पत्र में भाजपा ने चुनाव आयोग का इस वीडियो की ओर भी ध्यान आकर्षित किया, जो इन दिनों सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है। इस वीडियो के बारे में बता दें कि इसमें एक पादरी धार्मिक संस्थान के भीतर लोगों को संबोधित करते हुए विशेष पार्टी और धर्म के ख़िलाफ़ नफरत और डर का माहौल बनाता दिख रहा है। भाजपा ने शिकायत पत्र के साथ वायरल हो रहे वीडियो की सीडी भी चुनाव आयोग को दे दी है।

तालाब में मिली भाजपा सदस्य की लाश, हत्या की आशंका से तमिलनाडु में तनाव

तमिलनाडु में भाजपा सदस्य की लाश तालाब में मिलने से क्षेत्र में तनाव फैल गया है। भाजपा सदस्य सेंतिलकुमार का मृत शरीर नागापट्टीनम कसबे के कामेश्वरम स्थित कीरन तालाब में तैरती हुई मिली है। वहीं भाजपा नेताओं ने हत्या का अंदेशा जताया है। ट्विटर पर इस घटना पर कड़ा विरोध दर्ज किया गया है। एक यूज़र ने लिखा कि आख़िर और कितने बलिदानियों को मौत के घाट उतारा जाएगा।

पुलिस ने शव को भेजा पोस्टमार्टम के लिए, क्षेत्र में तनाव

सूचना पाकर मौके पर पहुँची पुलिस ने शव को अपने कब्जे में लेकर नागापट्टीनम के सरकारी अस्पताल में पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। भाजपा नेताओं ने उनकी हत्या का आरोप लगाते हुए दोषियों की तत्काल गिरफ़्तारी की माँग की है। घटना ने क्षेत्र में तनाव का माहौल बना दिया है।

सेंतिलकुमार का पार्थिव शरीर
पानी से निकाल कर रखा गया सेंतिलकुमार का पार्थिव शरीर (mynation से साभार)

इससे पहले भी हत्या का मामला सामने आ चुका है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के समर्थक होने के कारण तमिलनाडु में एक 75 वर्षीय गोविंदराजन की भी हत्या कर दी गई थी। बुजुर्ग व्यक्ति लोकसभा चुनाव के लिए नरेंद्र मोदी के लिए प्रचार कर रहा था। वो अपनी शर्ट पर मोदी और जयललिता की तस्वीरें लगाकर प्रचार करते थे।

शनिवार (13 अप्रैल) की शाम को उनका सामना गोपीनाथ नाम के एक व्यक्ति से ओरथानडू में हुआ, जो कॉन्ग्रेस-डीएमके (द्रविड़ मुन्नेत्र कड़गम) गठबंधन का समर्थक था। उनके बीच राजनीतिक मतभेद के कारण बहस होने लगी। आपसी बहस का यह विवाद इतना बढ़ गया कि गोपीनाथ ने गुस्से में 75 वर्षीय गोविंदराजन पर हमला कर दिया। DMK समर्थक द्वारा बुज़ुर्ग को बेरहमी से पीटा गया। इसके बाद उनकी हालत काफ़ी गंभीर हो गई और अंतत: उनकी मृत्यु हो गई।

जब अम्मी-अब्बू ही ‘वेश्या’ कहकर हत्या कर दें, तो जहाँ में ‘बेटियोंं’ के लिए कोई जगह महफ़ूज़ नहीं

आज़ादी भला किसे नहीं पसंद क्योंकि वो किसी की जागिर नहीं होती। इस पर सबका एकसमान हक़ होता है, फिर चाहे वो महिला हो या पुरुष। लेकिन पितृसत्ता कभी-कभी इतनी हावी हो जाती है कि अपनी पसंद के कपड़े पहनना भी किसी ग़ुनाह से कम नहीं होता। और इसके लिए जान देकर चुकानी पड़ जाती है भारी क़ीमत।

अपनी पसंद से कपड़े पहनना 17 साल की शैफिला के लिए जानलेवा बन गया। उसके पिता इफ्तिख़ार अहमद और अम्मी फरजाना को बेटी के चाल-चलन पर शक़ था, जिसके चलते उसके मुँह में प्लास्टिक का बैग ठूंसकर उसकी निर्मम हत्या कर दी गई। उसके माता-पिता को लगता था कि उनकी बेटी छोटे कपड़े पहनती है और वो ज़रूर कोई ग़लत काम करने लगी है। इसी शक़ ने शैफिला की जान ले ली।

सवाल यह है कि अपनी पसंद के कपड़े पहनना क्या किसी माता-पिता को इतना नागवार लग सकता है कि वो अपनी ही संतान की जान तक ले लें, अगर ऐसा है तो फिर आज़ादी के क्या मायने?

शैफिला की हत्या करने के बाद पिता ने उसकी लाश को अपनी कार के पीछे रखा और वैरिंगटन (Warrington) के घर से 70 किलोमीटर जाकर दूर फेंक दिया। पुलिस की हरक़त के बाद माता-पिता ने जवाब दिया कि उनकी लड़की घर से भाग गई है। लेकिन झूठ की बुनियाद आख़िर कब तक टिकी रह सकती थी, सच सामने आ ही गया।

दरअसल, यह मामला 2003 का है। Cheshire (चेशायर) के वैरिंगटन में इस निर्मम हत्या को अंजाम दिया गया था। हत्या की इस घटना की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी कड़ी निंदा हुई थी। मामला भले ही 2003 का हो लेकिन इसमें अब एक नया मोड़ आया है। वो यह कि शैफिला के क़रीबी दोस्तों में से एक शनिन मुनीर ने ख़ुलासा किया कि शैफिला अक्सर ख़ुद पर होने वाले अत्याचार के बारे में बताती थी। इसमें वो बताती थी कि उसके माता-पिता उसके साथ दुर्व्यवहार करते हैं। उसे धमकाया जाता है और मारने तक की धमकी दी जाती थी। उसके दोस्त ने बताया कि शैफिला के माता-पिता उसको ‘वेश्या’ तक कहते थे और कभी-कभी हालात इतने विपरीत हो जाते थे कि वो घर से भाग जाने के बारे में भी सोचा करती थी।

आमतौर पर यह कहा जाता है कि महिलाओं की सुरक्षा उनके घर की दहलीज़ के भीतर होती है, यानी अगर महिलाएँ घर के अंदर हैं तो वो सुरक्षित हैं और यदि बाहर हैं तो उनकी सुरक्षा की कोई गारंटी नहीं। ऐसे में सवाल आता है कि जब घर की चार दीवारी में ही बेरहमी से हत्या हो जाए तो उसे सुरक्षा के किस दायरे में रखा जाए?

शैफिला के माता-पिता ने समाज के सामने अपना एक ऐसा रूप रखा जिसकी एक सभ्य समाज में कल्पना भी नहीं की जा सकती। अपनी ही औलाद का दम घोटते इफ्तिख़ार अहमद के हाथ उस वक़्त कैसे नहीं काँपे, यह अत्यंत ही पीड़ादायी प्रश्न है? इसे सहजता से नहीं स्वीकारा जा सकता।

निक़ाह-हलाला और ट्रिपल तलाक़ जैसी कुप्रथाएँ क्या कम पड़ गईं थी, जो अपनी पसंद के कपड़े पहनने को भी इस प्रताड़ना के दायरे में ला दिया गया! 17 साल की बच्ची पर ये ज़ुल्म किस हद तक सही है, इस पर समय रहते विचार किया जाना चाहिए। अन्यथा अपनी कुंठित सोच के चलते न जाने कितनी शैफिला ऐसी ही निर्मम हत्या का शिकार होती रहेंगी।

एक तरफ दुनिया आगे बढ़ने की दिशा में नित नए इतिहास रचने में लगी हुई है और नई बुलंदियों पर क़दम रख रही है, वहीं दूसरी तरफ इस तरह की घटना यह सोचने पर मजबूर कर देती है कि इफ़्तिखार और फरजाना जैसे लोग इस तरक्की की राह में रोड़े हैं, जो अपनी दूषित सोच के ज़रिए समाज में ज़हर घोलने का काम करते हैं। आज भी जब महिला वर्ग पर उनके कपड़ों और बिंदास छवि को चाल-चलन के तराजू पर तौला जाता है तो ऐसी मानसिकता पर तरस आता है जो आज भी अपनी रुढ़िवादी और कुंठित सोच का खुला प्रदर्शन करते हैं।