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‘खेती-किसानी’ में फँस गए शाहरुख खान, मामले में 7 साल की सजा का है प्रावधान

कुछ समय पहले बॉलीवुड के मशहूर कलाकार शाहरुख खान पर बेनामी संपत्ति को लेकर एक केस दर्ज किया गया था। उस समय तो सहायक प्राधिकरण ने जाँच के बाद किंग खान के ख़िलाफ़ लगे सभी आरोपों को ख़ारिज कर दिया था। लेकिन, अब इस मामले ने दोबारा से तूल पकड़ा है। यह मामला अब आयकर विभाग ने अपने हाथ में ले लिया है और प्राधिकरण के फैसले को चुनौती दी है। जिससे शाहरुख की दिक्कतें बढ़ने के काफ़ी आसार हैं।

यह पूरा मामला शाहरुख के फार्म हाउस से जुड़ा हुआ है। इसे लेकर उन पर आरोप है कि उन्होंने फार्म हाउस की जमीन को खेती करने के उद्देश्य से लिया था लेकिन बाद में उन्होंने इस जमीन पर फार्म हाउस बना लिया।

साल 2016 में बेनामी संपत्ति मामले में कुछ बदलाव हुए थे। जिनके आधार पर अगर कोई व्यक्ति बेनामी संपत्ति मामले में दोषी पाया जाता है तो उसे 7 साल की सजा हो सकती है। इसके साथ ही उसे बेनामी संपत्ति की मार्केट कीमत के मुताबिक 25 फीसदी जुर्माना भी लग सकता है। अब इन बदलावों के बाद इसमें फँसने वाली मशहूर हस्तियों में पहला नाम शाहरुख खान का है।

यह मामला सुर्खियों में तब आया जब महाराष्ट्र के डिप्टी कमिश्नर उन 87 प्रॉपर्टी के बारे में जानना चाहे, जिन पर कोस्टल रेगुलेशन कानून के उल्लंघन का आरोप है। इन 87 संपत्तियों में से एक शाहरुख का फार्म हाउस भी है।

महाराष्ट्र टेनेसी एंड एग्रीकल्चर लैंड्स एक्ट के तहत कृषि योग्य ज़मीनों को गैर-कृषि कार्य के लिए इस्तेमाल या ट्रांसफर नहीं किया जा सकता है। ऐसे में शाहरुख का खेती के लिए खरीदी ज़मीन पर फार्म हाउस बनाना, गले की हड्डी बन गया है।

बता दें कि आयकर विभाग ने इस पूरे मामले का आकलन डेजा वु फार्म्स को बेनामदार और शाहरुख खान को फायदा लेने वाला बताते हुए किया था। बेनामी संपत्ति मामले में हुए बदलाव में बेनामदार और फायदा पहुँचने वाले शख्स को सजा मिलने का प्रावधान है।

कहानी बिहार महागठबंधन की: सास ननद भउजाई, दु रोटी में कइसे खाई?

भोजपुरी में एक पुरानी कहावत है, “सास ननद भउजाई, दु रोटी में कइसे खाई ?” ना ही ये कहावत ज्यादा मुश्किल है ना ही ऐसा है कि हिन्दीवासियों को भोजपुरी समझने में मुश्किलें आती हैं। फिर भी, अगर थोड़ी सी भी शंका हो दिमाग में तो बिहार महागठबंधन की वर्तमान हालत देख लीजिए। आपको ये कहावत आसानी से समझ आ जाएगा।

बिहार में कुल 40 लोकसभा सीटें हैं। वर्तमान राजनैतिक परिपेक्ष्य में देखे तो दो गठबंधन चुनाव लड़ रहे हैं। पहली तो सत्ता पक्ष है NDA जिसमे भाजपा, जदयू और लोजपा शामिल हैं। वहीं दूसरी ओर हाल ही में बना महागठबंधन है, जिसमें राजद, कॉन्ग्रेस, हम, विकासशील इंसान पार्टी (VIP) और 4.5 साल तक सत्ता सुख भोग के अचानक से सरकार में दोष ढूँढ कर छिटकने वाले कुशवाहा जी की रालोसपा भी है। लेफ्ट के लिए महागठबंधन में लगभग हाँ या ना वाली वैसी ही हालत है, जैसी केजरीवाल की कॉन्ग्रेस ने दिल्ली में कर रखी है।

जब इतनी बड़ी संख्या में सीटें है, खटपट होना तो तय ही था। बात जब सीट शेयरिंग की आई तो राजग में ज्यादा माथापच्ची नही हुई और गठबंधन में अपने साथियों को साथ लेकर ना चलने के लिए ‘बदनाम‘ भाजपा ने बड़े भाई की भूमिका में आते हुए ख़ुशी-ख़ुशी अपनी कुछ सीटें साथी दलों के लिए छोड़ दीं और बड़ी ही आसानी से सीटों का बँटवारा हो गया। असली पेंच फँसा महागठबंधन में जिसका मुख्य मुद्दा ही मोदी को सत्ता से बाहर करना है। शुरुआत में राजद ने अपने लिए 22 सीटें माँगी और कॉन्ग्रेस ने 11 सीटों की डिमांड रखी। उस समय तक कुशवाहा जी राजग में थे तो 4-5 सीटें जीतन राम माँझी की हम को और 1-2 मुकेश साहनी की VIP को आराम से मिल जानी थी लेकिन फिर चार साल सत्ता की मलाई चाटने के बाद कुशवाहा जी अपना चावल लेकर यदुवंश के दूध में खीर पकाने और ‘हम’ तथा ‘VIP’ का पकवान ख़राब करने आ गए।

कुशवाहा जी आए और नया समीकरण कुछ यूँ बना- राजद 21, कॉन्ग्रेस 9, रालोसपा 4-5, हम 2-3, VIP और लेफ्ट 1 सीट पर लड़ेंगे। अब ये समीकरण कॉन्ग्रेस और ‘हम’ को पसंद नही आया। कॉन्ग्रेस 11 से कम पर मानने को तैयार नहीं थी और माँझी को रालोसपा से कमतर कुछ भी मंज़ूर नहीं था। हालाँकि, इस समीकरण पर बिहार की राजनीति की दूसरी धुरी और चारा घोटाले में सजा काट रहे लालू यादव ने मुहर नही लगाया था। आपको बता दें कि बिहार की राजनीति का यह खिलाड़ी जेल में बैठे-बैठे ही राजद के सारे निर्णय ले रहा है।

महागठबंधन तो टूटने की कगार पर है लेकिन अफवाहों के बीच ‘गुप्त सूत्रों’ से फिलहाल ख़बर यह है कि लालू यादव की मर्जी से अब नया समीकरण तय हो चुका है और इसमे राजद को 20, कॉन्ग्रेस को 9, रालोसपा को 5, हम को 4 और लेफ्ट तथा VIP को 1-1 सीटें मिली हैं। अब देखना है कि इसकी आधिकारिक घोषणा कब होती है। जब चुनाव से पहले ही ये हालात हैं तो पता नहीं चुनाव के बाद इनका क्या होगा। घोषणा होने तक इंतजार कीजिए और ये सोच के मज़े लीजिए कि जब सीटों की ये मारामारी है तो प्रधानमंत्री पद के लिए किस हद तक जाया जा सकता है?

होटल को ₹4.5 लाख का चूना लगाकर साउथ की ये हिरोईन हुई फरार, पुलिस ने किया गिरफ्तार

साउथ की 30 से अधिक फिल्मों में अपने अभिनय का जलवा बिखेर चुकी अभिनेत्री पूजा गाँधी पर आरोप है कि वह एक होटल का बिल चुकाए बिना ही वहाँ से नौ दो ग्यारह हो गईं।

दरअसल मीडिया खबरों के मुताबिक तमिल, तेलगू, मलयालम, कन्नड़ और बंगाली सिनेमा में 50 से ज्यादा फिल्मों में काम करने वाली पूजा कुछ दिनों पहले बेंगलूरु के एक आलीशान बंगले में ठहरी थीं। जहाँ पर उनके नाम ₹4.5 लाख का बिल बकाया था, लेकिन जैसे ही उन्हें रकम के बारे में पता चला वो होटल से चुपचाप रवाना हो गईं।

होटल के स्टाफ को जब इसका पता चला तो उन्होंने नज़दीक के पुलिस स्टेशन में पूजा के ख़िलाफ़ शिकायत की।
पुलिस कार्रवाई के बाद पूजा को गिरफ्तार करके थाने लाया गया।

यहाँ पूजा ने बताया कि वो ₹2 लाख का बिल पहले ही दे चुकी हैं और बाक़ी का पैसा देने के लिए उन्हें कुछ समय चाहिए क्योंकि अभी उनके पास इतने पैसे नहीं हैं।

ऐसा पहली बार नहीं हुआ है कि पूजा पैसों के लेन-देन को लेकर ऐसे विवादों का विषय बनी हों। साल 2011 में भी फिल्म निर्माता किरण से पैसों को लेकर उनकी कहा-सुनी हुई थी, जिसके बाद दोनों ने एक दूसरे के ख़िलाफ़ केस दर्ज कराया था।

जाँच में सहयोग नहीं कर रहे रॉबर्ट वाड्रा, सबूतों से छेड़छाड़ की आशंका में ED ने की कस्टडी में लेने की अपील

मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में सुनवाई करते हुए दिल्ली की एक अदालत ने रॉबर्ट वाड्रा की अग्रिम जमानत की अवधि 25 मार्च तक बढ़ाते हुए उन्हें जाँच में हिस्सा लेने को कहा। स्पेशल जज अरविन्द कुमार की अदालत ने इस बाबत निर्देश जारी किए। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने जमानत की अवधि बढ़ने का विरोध करते हुए वाड्रा के जाँच में सहयोग नहीं करने की बात कही। एजेंसी ने कहा कि वह वाड्रा को हिरासत में लेकर पूछताछ करना चाहती है। प्रवर्तन निदेशालय ने अदालत में कहा:

“वह विदेश में अपराध और देश में मनी लॉन्ड्रिंग में शामिल हैं। वाड्रा ने अपराध की रक़म से हासिल की गई संपत्ति से फ़ायदा उठाया है। यह जाँच ब्लैक मनी से संबंधित क़ानून के तहत है। यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि रॉबर्ट वाड्रा राजनीतिक आरोपों में शामिल हो गए हैं। जाँच के दौरान वाड्रा के व्यवहार से यह आशंका बढ़ गई है कि वह अपराध के तरीके और ब्लैक मनी का ख़ुलासा करने में एक महत्वपूर्ण कड़ी हैं। जाँच अघोषित विदेशी संपत्तियों और टैक्स से बचने से संबंधित है। जाँच महत्वपूर्ण चरण में है। विभिन्न दस्तावेजों से आरोपी व्यक्तियों की मिलीभगत का संकेत मिलता है। वाड्रा ‘बेहद प्रभावशाली व्यक्ति हैं और इस वजह से उनके सबूतों के साथ गड़बड़ी करने और जाँच में रुकावट डालने की आशंका है।”

प्रवर्तन निदेशालय ने कहा कि उसने मामले की जाँच के दौरान जब्त की गई डिवाइसेज और इलेक्ट्रॉनिक निगरानी के दौरान उनके हाथ लगे इमेल्स से इस बात के पक्के सबूत मिले हैं कि वाड्रा और उनके अन्य सहयोगियों के विदेशों में अघोषित संपत्ति होने के पर्याप्त सबूत मिले हैं। ये अपराध गंभीर हैं और इसमें 10 वर्ष तक की सजा का प्रावधान है। पूछताछ के दौरान वाड्रा के वकील की मौजूदगी पर सवाल खड़ा करते हुए प्रवर्तन निदेशालय ने इसका विरोध किया। एजेंसी ने कहा कि पूछताछ के दौरान वकीलों की मौजूदगी का क़ानून में प्रावधान तो है लेकिन यह एक सम्पूर्ण अधिकार नहीं है। एजेंसी ने इसे देशहित के साथ संतुलित रखने की सलाह दी।

अदालत में सुनवाई के दौरान हथियार दलाल संजय भंडारी की भी चर्चा हुई। बता दें कि ऑपइंडिया ने कुछ दिनों पहले ही कॉन्ग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी के भंडारी के साथ संबंधों का ख़ुलासा कर राजनीतिक भूचाल ला दिया था। इस बाबत केंद्रीय मंत्रियों स्मृति ईरानी और रविशंकर प्रसाद ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कॉन्ग्रेस से जवाब माँगा था। प्रवर्तन निदेशालय ने संजय भंडारी के बारे में कहा कि वह लुकआउट नोटिस के बावजूद देश से फरार हो गया है और उसके ब्रिटेन में होने के संदेह हैं।

वाड्रा ने इन आरोपों को राजनीति से प्रेरित बताया। उन्होंने दलील दी कि उन्हें ग़ैरज़रूरी और अनुचित तरीके से दुर्भावनावश इस मामले में घसीटा जा रहा है। रॉबर्ट वाड्रा पर विदेशों में अघोषित संपत्ति ख़रीद सहित कई अवैध ज़मीन ख़रीद के मामलों में केस चल रहा है। दिल्ली की एक अदालत ने मनी लाउंड्रिंग केस में दिल्ली में चल रही जाँच के मामले में उनकी अंतरिम ज़मानत अवधि 19 मार्च तक के लिए बढ़ा दी थी।

कसाई शब्बीर गुरफान के साथ 3 लोग गिरफ़्तार: बरखा को भेजी थी ‘गंदी’ फोटो और ‘गंदी’ बात

दिल्ली पुलिस ने 45 वर्षीय कसाई शब्बीर गुरफान पिंजरी को सूरत से गिरफ्तार किया है। उसे 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। शब्बीर पर आरोप है कि उसने पिछले महीने पत्रकार बरखा दत्त को एक अश्लील तस्वीर (लिंग की) भेजी थी। शब्बीर के अलावा अश्लील मैसेज भेजने के आरोप में तीन अन्य युवकों (23 वर्षीय राजीव शर्मा, 31 वर्षीय हेमराज कुमार और 34 वर्षीय आदित्य कुमार) को भी गिरफ्तार किया गया है।

दिल्ली पुलिस के द्वारा गिरफ्तार किए गए इन चारों आरोपियों का कहना है कि उन्हें सोशल नेटवर्किंग साइट पर बरखा दत्त का नंबर मिला था। उन्होंने यह भी कहा कि बरखा दत्त के मोबाइल नंबर को सोशल मीडिया पर ‘एस्कॉर्ट सर्विस’ के लिए उपलब्ध करके प्रचारित किया गया था। तभी उन लोगों ने अपनी तरफ से इस तरह का मैसेज भेजा।

पिछले महीने 18 फरवरी को बरखा दत्त को अनजान नंबर से उनके व्हाट्सएप पर अश्लील तस्वीर (लिंग की) भेजी गई थी। इसी के संबंध में दिल्ली पुलिस के पास उन्होंने अपनी शिकायत दर्ज की थी। लेकिन ट्विटर पर वो गलती कर गईं थी यह कहकर कि राष्ट्रवाद के नाम पर उन्हें लिंग की तस्वीर भेजी गई है।

बरखा दत्त के साथ जिस भी इंसान ने यह घिनौनी हरकत की थी, उसका साथ कोई भी इंसान (दिमाग वाला) नहीं दे सकता। लेकिन खुद बरखा ने भी जो आरोप राष्ट्रवाद के नाम पर मढ़ दिया, उसका समर्थन भी कोई इंसान (दिमाग वाला) नहीं कर सकता।

यही कारण है कि हमारे संपादकीय टीम की तेज-तर्रार जयंती मिश्रा ने बरखा के लिए यह लिखा था, जो आज भी प्रासंगिक है – बरखा जी… जो हुआ वो गलत है लेकिन आप राष्ट्रवाद और यौन शोषण में पहले फर्क समझिए

सहारनपुर: होलिका में मुस्लिम युवक ने लगा दी आग, भीड़ से बचाने के लिए पुलिस ने…

सहारनपुर से त्यौहार के मौसम में सांप्रदायिक सौहार्द्र भंग करने का प्रयास करने की ख़बर आ रही है। यहाँ गागलहेड़ी के बेरी गाँव में स्थानीय निवासियों ने होलिका दहन कार्यक्रम के लिए होलिका रखी थी। इसमें एक मुस्लिम युवक ने बदमाशी से आग लगा दी। सांप्रदायिक सौहार्द्र भंग करने के इस प्रयास की ख़बर के फैलते ही बड़ी संख्या में ग्रामीण वहाँ पर जमा हो गए। गाँव में तनाव की सूचना पाते ही पुलिस मौके पर पहुँची। पुलिस ने गाँव वालों को समझा-बुझा कर शांत किया। ताज़ा सूचना के मुताबिक़ आरोपित मुस्लिम युवक को गिरफ़्तार कर लिया गया है।

अमर उजाला के स्थानीय संस्करण में छपी ख़बर

थानाध्यक्ष आदेश त्यागी ने त्वरित कार्रवाई करते हुए न सिर्फ़ आरोपित को गिरफ़्तार किया बल्कि ग्रामीणों को समझा-बुझा कर शांत करने में भी अहम भूमिका निभाई। आरोपित की गिरफ़्तारी के लिए तत्काल दो टीमें गठित कर तलाशी अभियान शुरू किया गया था। थोड़ी देर बाद आरोपित साकिब को पुलिस ने अपने शिकंजे में ले लिया। पुलिस बल को आरोपित मुस्लिम युवक को भीड़ से बचाने के लिए काफ़ी मशक्कत करनी पड़ी। उसे स्थानीय लोगों के कोपभाजन का शिकार बनने से बचाने के लिए जल्दी से पुलिस थाना ले जाया गया।

थाना प्रभारी ने कहा कि गाँव में हालात सामान्य है और अब किसी प्रकार का तनाव नहीं है। पुलिस सतर्क है और किसी भी प्रकार की गड़बड़ी की स्थिति में दोषियों पर कार्रवाई की जाएगी। बता दें कि सहारनपुर में होली के मद्देनजर शहर और देहात क्षेत्र में कड़ी सुरक्षा की व्यवस्था की गई है। जिलाधिकारी पीके पांडेय और एसएसपी बबलू कुमार ने पुलिस बल के साथ शहर के प्रमुख बाज़ारों एवं संवेदनशील क्षेत्रों में पैदल मार्च भी किया था। उन्होंने लोगों से शांति व्यवस्था कायम रखते हुए त्यौहार मनाए जाने की अपील की। इलाक़े में ख़ुफ़िया विभाग भी मिश्रित आबादी व चिन्हित गाँवों का डेटा तैयार करने में जुटा है। इस बार पुलिस के साथ-साथ लाल पगड़ी पहने चौकीदार भी गाँव-गाँव में होलिका की सुरक्षा व्यवस्था में जुटे नज़र आएँगे
इलाक़े में ख़ुफ़िया विभाग भी मिश्रित आबादी व चिन्हित गाँवों का डेटा तैयार करने में जुटा है। इस बार पुलिस के साथ-साथ लाल पगड़ी पहने चौकीदार भी गाँव-गाँव में होलिका की सुरक्षा व्यवस्था में जुटे नज़र आएँगे । ।

दैनिक जागरण के स्थानीय संस्करण ने भी इस ख़बर को स्थान दिया

अन्य ज़िलों की तरह सहारनपुर में भी आज होलिका दहन के लिए बड़े स्तर पर तैयारियाँ चल रही हैं। अकेले सहारनपुर शहर में क़रीब 1400 स्थानों पर होलिका दहन का कार्यक्रम आयोजित किया जाना है। शहर भर में 28 स्थानों को चिह्नित कर संवेदनशील सूची में रखा गया है। एसपी ने बताया कि फगुआ के दिन पुलिस की मौजूदगी में नमाज़ अदा की जाएगी। नमाज़ अदा करने वाले सभी स्थानों पर पुलिस की तैनाती की जाएगी। पुलिस ने किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए रिहर्सल भी किया है। स्थानीय लोगों से मुलाक़ात कर पुलिस ने सौहार्दता बनाए रखने की अपील की।

जनता के लिए जो काम नहीं करेंगे, उन्हें सांसद बनने का हक नहीं: छत्तीसगढ़ में BJP का फैसला और संदेश

जनता और लोकतंत्र के लिए अच्छी ख़बर। भाजपा के छत्तीसगढ़ सांसदों के लिए एक बुरी ख़बर। छत्तीसगढ़ के प्रभारी अनिल जैन के अनुसार राज्य के सभी 10 वर्तमान सांसदों को लोकसभा चुनाव 2019 के लिए टिकट नहीं दिया जाएगा। पार्टी नए चेहरों को उम्मीदवार के तौर पर उतारेगी।

बीजेपी ने अपने उम्मीदवारों की सूची जारी नहीं की है लेकिन अनिल जैन की मानें तो पार्टी की केंद्रीय चुनाव समिति ने इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। वर्तमान सांसदों में कई बड़े नाम भी हैं। पूर्व मुख्यमंत्री रमन सिंह के बेटे अभिषेक सिंह भी राजनांदगांव सीट से सांसद हैं। रायपुर से रमेश बैस लगातार छह बार सांसदी जीते हैं। रायगढ़ से विष्णुदेव लगातार चार बार, जांजगीर से कमला देवी और महासमुंद से चंदूलाल दो-दो बार सांसद रहे है।

बड़ा कारण: विधानसभा चुनाव में हार

नए चेहरों को लाकर पार्टी एक तरह का संदेश देना चाहती है – जनता को भी और सांसदों को भी। 2003 से 2018 तक रमन सिंह के नेतृत्व में भाजपा ने राज्य में शासन किया था। लेकिन 2018 के आखिर में हुए विधानसभा चुनावों में पार्टी को बड़ी हार झेलनी पड़ी। ऐसे में सांसदों को लेकर भी वोटरों के मन में कहीं ऐंटी इन्कंबेंसी ना हो, इसलिए भी भाजपा ने नए चेहरों को उतारने का फैसला लिया है।

आपको बता दें कि छत्तीसगढ़ राज्य की स्थापना के बाद से ही भाजपा यहाँ की 11 लोकसभा सीटों में से 10 सीटें हर बार जीतती आ रही है। प्रत्याशी बनाने के लिए पार्टी ने कई तरह का फीडबैक मंगाया है। एक तरफ जहाँ जनता की राय ली गई है, वहीं सांसदों से भी उनके द्वारा कराए गए कार्यों का ब्योरा मांगा गया है।

अगस्ता वेस्टलैंड घोटाला: ED के हाथ लगी डायरी और पेन ड्राइव, ₹423 करोड़ की पूरी कहानी इसमें दर्ज

अगस्ता वेस्टलैंड घोटाले में क्रिस्चियन मिशेल के गिरफ़्तार और प्रत्यर्पित होकर भारत लाए जाने के बाद नित नए ख़ुलासे हो रहे हैं। मामले में सरकारी गवाह बने राजीव सक्सेना ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) को एक पेन ड्राइव और डायरी सौंपी है। इस डायरी में अगस्ता वेस्टलैंड वीवीआईपी चॉपर सौदे में दी गई 423 करोड़ रुपए की घूस सम्बन्धी विवरण है। इनमें अगस्ता वेस्टलैंड इंटरनैशनल लिमिटेड से ट्यूनीशिया, मॉरिशस, दुबई स्थित शेल कंपनियों और स्विस बैंकों के अलावा भारत में बिचौलियों के पास धन पहुँचाने की पूरी कहानी है। इस डायरी और पेन ड्राइव के विश्लेषण के बाद कुछ और नए राज़ निकल कर आने की संभावना है।

राजीव सक्सेना वो शख़्स है, जो स्विट्ज़रलैंड में अलग-अलग बैंक एकाउंट्स को चलाता था। इन बैंक अकाउंट्स में अगस्ता वेस्टलैंड से आई किक बैक्स की रक़म डाली गई थी। 8 सितंबर 2017 (या यह 9 अगस्त 2017 भी हो सकता है) तक राजीव सक्सेना के इन बैंक अकाउंट्स में कुल ₹314 करोड़ की राशि जमा की गई थी। इस पर अभी जाँच जारी है कि आख़िर यह किक बैक्स किसके फ़ायदे के लिए की गई थी और किसके इशारे पर इन बैंक एकाउंट्स को रखा गया था।

सक्सेना की व्यक्तिगत डायरी में किन लोगों के नाम हैं, इस बारे में अभी तक कुछ पता नहीं चल पाया है। लोगों का मानना है कि सक्सेना ने इस पूरे घटनाक्रम में एक मध्यस्थ की भूमिका निभाई थी। सक्सेना ने जाँच एजेंसी को कहा था कि उसने सिर्फ़ बिचौलियों के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभाई थी। उसने इस पूरे घोटाले में बड़ा किरदार होने की बात नकार दी थी। अगस्ता वेस्टलैंड हैलीकॉप्टर घोटाले में यूपीए-2 के कुछ बड़े नेताओं और अधिकारियों के नाम आने की संभावना है।

क्रिश्चियन पर भी गिरी गाज

उधर अदालत ने दलाल क्रिश्चियन मिशेल को एकांत कारावास से निकालकर सामान्य सेल में भेजने का निर्देश तिहाड़ जेल महानिदेशक (डीजी) को दिया है। अदालत ने मिशेल की सुरक्षा चाक-चौबंद रखने और तीन दिन के भीतर इसकी रिपोर्ट पेश करने का निर्देश जेल डीजी दिया है। पटियाला हाउस अदालत के विशेष सीबीआई जज अरविंद कुमार ने तिहाड़ जेल से मँगाई गई पाँच दिन की सीसीटीवी फुटेज देखने के बाद कहा कि जिस ब्लॉक में मिशेल को रखा गया है, उसमें कुल पाँच सेल हैं। इनमें से चार सेल खाली हैं और एक में केवल मिशेल को रखा गया है। यह एकांत कारावास से भी ज्यादा है। एकांत कारावास एक सज़ा है, जो कैदी को मानसिक व शारीरिक रूप से परेशान करती है।

मिशेल को जिस भी जेल में रखा जाएगा, वहाँ की दो महीने की सीसीटीवी फुटेज संभाल कर रखी जाएगी। मिशेल के वकीलों ने अदालत में उसके एकांत कारावास में रखे जाने की बात कही थी। वकीलों ने कहा था कि उसे शहाबुद्दीन, छोटा राजन व कश्मीरी आतंकियों के साथ रखा गया है।

देश को मिला पहला लोकपाल, चुनाव से पहले विपक्ष का एक और मुद्दा ख़त्म

देश को पहला लोकपाल मिल गया है। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज जस्टिस पिनाकी चंद्र घोष (Pinaki Chandra Ghose) को देश का पहला लोकपाल नियुक्त किया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई, लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन, प्रख्यात कानूनविद मुकुल रोहतगी की चयन समिति ने शुक्रवार (मार्च 15, 2019) को उनके नाम की सिफारिश की थी।

लोकसभा में विपक्ष के नेता और कॉन्ग्रेस पार्टी के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे भी चयन समिति का हिस्सा थे, लेकिन वह चयन प्रक्रिया में शामिल नहीं हुए थे। इस कमेटी में एक चेयरमैन, एक न्यायिक सदस्य और एक गैर न्यायिक सदस्य होते हैं।

भारत के राष्ट्रपति न्यायमूर्ति ने दिलीप बी भोसले, न्यायमूर्ति पी के मोहंती, न्यायमूर्ति अभिलाषा कुमारी और न्यायमूर्ति एके त्रिपाठी को न्यायिक सदस्य नियुक्त किया गया है। इसके अलावा गैर न्यायिक सदस्यों में दिनेश कुमार जैन, अर्चना रामासुंदरम, महेन्द्र सिंह, और डॉ. आईपी गौतम को सदस्य नियुक्त किया गया। अधिसूचना के मुताबिक प्रभार लेने के साथ ही इन सदस्यों की नियुक्ति प्रभावी मानी जाएगी।

परिचय: पीसी घोष

पिनाकी चंद्र घोष का जन्म मई 28, 1952 को हुआ था और वह जस्टिस शंभू चंद्र घोष के बेटे हैं। वह सुप्रीम कोर्ट के जज रह चुके हैं और कई राज्य के मुख्य न्यायाधीश रह चुके हैं। वर्तमान में पीसी घोष, मानवाधिकार आयोग के सदस्य हैं। उन्होंने सेंट जेवियर्स कॉलेज से बीकॉम और कोलकाता यूनिवर्सिटी से LLB की पढ़ाई की है। घोष साल 1997 में कलकत्ता हाईकोर्ट के जज बने और उसके बाद दिसंबर 2012 में उन्होंने आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश बने। मई 2017 में घोष सुप्रीम कोर्ट से रिटायर हुए थे और वह 2013 से 2017 तक सुप्रीम कोर्ट के जज रहे। पीसी घोष तमिलनाडु की पूर्व मुख्यमंत्री जयललिता की सहयोगी रहीं शशिकला को आय से अधिक मामले में दोषी ठहरा चुके हैं।

देश के पहले लोकपाल की नियुक्ति लोकपाल अधिनियम-2013 के पारित होने के 5 साल बाद की गई है। देश के पहले लोकपाल के साथ ही कॉन्ग्रेस और तमाम विपक्षी दलों को अब फिलहाल आम चुनाव तक, इस मुद्दे पर बिना किसी आरोप के ही चुनाव लड़ना पड़ेगा। लोकपाल का मुद्दा एक अहम मुद्दा था जिसे विपक्ष भ्रष्टाचार से जोड़कर सरकार को घेरती थी। आज़ादी के बाद पीसी घोष इस देश के पहले लोकपाल हैं, जिन्हें मोदी सरकार ने अपने कार्यकाल रहते नियुक्त कर लिया है।


देशहित में कॉन्ग्रेस को वोट देकर 10% सीटें जिताइए, आपको राफेल की कसम है

राहुल गाँधी यूँ तो मोदी को लेकर अनेकों प्रकार की बातें करते हैं, मसलन वो उनसे ‘दस मिनट भी बहस नहीं कर पाएँगे’, मोदी उनसे ‘आँख नहीं मिला पाते’, ‘चौकीदार चोर है’ इत्यादि। लेकिन इस दौरान जो उन्होंने एक ‘तथ्यात्मक आरोप’ लगाया है वह राफेल विमान सौदे में मोदी द्वारा दलाली खाने और घोटाला करने का है। मैं तथ्यात्मक इसलिए कह रहा हूँ क्योंकि इसके अलावा उनके बाकी सभी आरोप बतोलेबाजी ही हैं, लेकिन ‘राफेल’ तो ‘एग्जिस्ट’ करता है, हम सबको पता है, इस सौदे पर फ़्रांस सरकार के साथ वर्तमान प्रधानमंत्री मोदी ने ही हस्ताक्षर किए हैं।

इस आरोप में राहुल गाँधी लगातार राफेल की कीमत को ₹1600 से लेकर ₹526 करोड़ से लेकर ₹1600 करोड़ तक का बताते हैं। अगर हम विमानों की कीमत जैसे तकनीकी विषय में न जाएँ, तो उनका मूल और फ्लैट आरोप यह है कि इसमें ₹30 हजार करोड़ का घोटाला हुआ है। अर्थात नरेंद्र मोदी ने भारत सरकार के खजाने से ₹30 हजार करोड़ लूट लिए हैं और दिलचस्प बात यह है जो राहुल गाँधी कहते हैं कि लूट के ये ₹30 हजार करोड़ नरेंद्र मोदी ने अनिल अम्बानी की जेब में डाल दिए हैं।

कॉन्ग्रेस पार्टी अध्यक्ष और रॉबर्ट वाड्रा के साले राहुल गाँधी इस बात को इतनी बार दोहरा चुके हैं कि हम इस घटनाक्रम को भी इमेजिन करने लगते हैं कि आखिर कैसे यह सब हुआ होगा? नरेंद्र मोदी अकेले में तो अनिल अम्बानी को बुला नहीं सकते हैं, क्योंकि सबको पता चल जाएगा, इसलिए किसी सार्वजनिक कार्यक्रम में मोदी ने सबसे नजरें बचाकर, अनिल अम्बानी को किसी कोने में ले जाकर, उसके कोट की जेब में ₹30 हजार करोड़ ठूँस दिए होंगे।

अब रेगुलर करेंसी के इतने नोट तो एक जेब में बन नहीं सकते, इसलिए यह भी मुमकिन है कि मोदी ने RBI के तत्कालीन गवर्नर ऊर्जित पटेल (गुजराती) को बोलकर ₹15 हजार करोड़ की कीमत वाले दो स्पेशल नोट छपवाए होंगे और उन्हीं नोटों को बंद मुट्ठी करके जूनियर अम्बानी की जेब में डाल दिया होगा। वैसे ही, जैसे शेयरिंग सवारियाँ ढोने वाला ऑटो ड्राईवर, आवश्यकतानुसार ट्रैफिक पुलिस वाले की मुट्ठी गर्म कर देता है, और प्रभु का तीसरा नेत्र भी इस दुर्लभ संयोग को देखने से वंचित रह जाता है।

अब अम्बानी की जेब गरम करने वाले मुद्दे की असलियत जानते हैं कि यह ₹30 हजार करोड़ का आँकड़ा आखिर आया कहाँ से, जबकि राफेल विमान सौदा ही कुल ₹58 हजार करोड़ का है? दरअसल यह ₹30 हजार करोड़ वह ऑफसेट ऑब्लिगेशन अमाउंट है, जिसे फ़्रांस की सरकार इस सौदे की शर्तों के तहत अगले पाँच से दस सालों में भारत की कम्पनियों के साथ भारत में निवेश करेगी। जिसके लिए भारत की 100 से अधिक कम्पनियों का चयन हुआ है, जिसमें रिलायंस भी एक है और इसके लिए ‘रिलायंस डिफेन्स’ ने दसॉं एविएशन कम्पनी (Dassault Aviation Company) के साथ एक ‘जॉइंट वेंचर’ बनाया है। इसके अंतर्गत ₹850 करोड़ का इन्वेस्टमेंट होगा, जिसमें रिलायंस के हिस्से का इन्वेस्टमेंट ‘सिर्फ ₹426 करोड़’ का है, जो आने वाले पाँच से दस साल के दौरान होगा। अब अगर अनिल अम्बानी यह पूरा इन्वेस्टमेंट भी डकार जाए, तब भी यह घोटाला सिर्फ ₹426 करोड़ का होगा, न कि ₹30 हजार करोड़ का, जैसा कि कॉन्ग्रेस चिरयुवा अध्यक्ष और विश्व वैमानिकी के जानकार माननीय राहुल गाँधी कहते आ रहे हैं।

यहाँ मैंने जो इस सौदे में अनिल अम्बानी की भूमिका का तकनीकी स्पष्टीकरण दिया है। एक बार अगर हम उसे भी दरकिनार कर देते हैं, और इसे ₹30 हजार करोड़ का ही घोटाला मान लेते हैं, और तब एक नजर कल की उस खबर पर डालते हैं, जो आज भी सुर्खियाँ बटोर रही है कि एक दूरसंचार सौदे में ₹500 करोड़ के कर्ज में डूबे अनिल अम्बानी को बचाने के लिए उनके बड़े भाई मुकेश अम्बानी ने उनका यह कर्जा चुकाया, वरना उन्हें 3 महीने के जेल हो सकती थी।

तब इसी एंगल से सोच लीजिए कि अगर अनिल अम्बानी के पास मोदी द्वारा उसकी जेब में ठूँसे गए ₹30 हजार करोड़ रखे होते तो क्या वह सिर्फ ₹500 करोड़ के लिए जेल जाने के मुहाने पर खड़ा होकर इस तरह से पूरी दुनिया में सरेआम जलील होना स्वीकार करता?

इन सभी कारणों से इस हवाबाजी का यह सार निकलता है कि नरेन्द्र मोदी ने बीते 5 साल में ‘आर्थिक अनियमिता’ और ‘घोटाले’ के नाम पर महज एक ‘राफेल’ करने की कोशिश की, लेकिन इसमें भी वे एक फूटी कौड़ी नहीं कमा सके, क्योंकि देश में एक जागरूक, मजबूत और रक्षा विशेषज्ञ के तौर पर राहुल गाँधी जैसा विपक्ष का नेता मौजूद था।

इसलिए, अगर आगे भी देश को मोदी-शाह जैसे शातिर चौकीदारों से बचाना है, तो आने वाले कई सालों तक विपक्ष में राहुल गाँधी जैसा एक जानकार, मँजा हुआ, सुलझा हुआ, ऊर्जावान, ओजस्वी और अविवाहित नेता ही चाहिए। इसलिए मेरी भारत की जनता से यही अपील रहेगी, खासकर युवा वर्ग से कि इस बार कॉन्ग्रेस को इतना वोट तो अवश्य दीजिएगा कि लोकसभा में उसकी कम से कम 10% सीटें आ जाएँ, ताकि उसे अधिकृत तौर पर नेता विपक्ष का पद मिल सके, जिसे कैबिनेट मंत्री का दर्जा हासिल होता है। चूँकि पीएम को मिलने वाली SPG सुरक्षा पहले से ही उनके पास है… और जीने को क्या चाहिए?